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NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 शुकशावकोदन्तः

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 शुकशावकोदन्तः Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

Bhaswati Sanskrit Class 11 Solutions Chapter 6 शुकशावकोदन्तः

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

अभ्यासः

प्रश्न 1.
निम्नलिखितप्रश्नानाम उत्तरम संस्कतेन लिखत –

(क) पम्पाभिधानं पद्मसरः कुत्रासीत्?
उत्तर:
पम्पाभिधानं पद्मसरः विन्ध्याटव्याम् आसीत्।
(ख) शुकः क्व निवसति स्म?
उत्तर:
शुकः शाल्यमलीवृक्षस्य कोटरे निवसति स्म।

(ग) शबराणां कीदृशं जीवनं वर्तते?
उत्तर:
शबराणां जीवनं मोहप्रायं वर्तते।

(घ) हारीतः कस्य सुतः आसीत्?
उत्तर:
हारीतः जाबालिमुनेः सुतः आसीत्।

(ङ) जीवनाशा किं करोति?
उत्तर:
जीवनाशा खलीकरोति।

(च) शुकस्य पिता कीदृशानि फलशकलानि तस्मै अदात्?
उत्तर:
शुकस्य पिता शुककुलावदलितानि फलशकलानि तस्मै अदात्।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

(छ) मृगयाध्वनिमाकर्ण्य शुकः कुत्र अविशत्?
उत्तर:
मृगयाध्वनिमार्ण्य शुकः पितुः पक्षपुटान्तरमविशत्।

(ज) शबरसेनापतिः कस्मिन् वयसि वर्तमानः आसीत्?
उत्तर:
शबरसेनापतिः प्रथमे वयसि वर्तमानः आसीत्।

(झ) केषां किम् दुष्करम्?
उत्तर:
अकरुणानाम् किं दुष्करम्।

(ञ) कः शुकस्य तातम् अपगतासुमकरोत्?
उत्तर:
जरच्छबरः तातम् अपगतासुमकरोत्।

प्रश्न 2.
पाठमाधृत्य बाणभट्टस्य गद्यशैल्याः विशेषताः लिखत –
उत्तर:
बाण की गद्यशैली की विशेषताएँ बाण के गद्य में सामान्यतः लम्बे समासों की भरमार रहती है। कहीं-कहीं छोटे-छोटे समास तथा समासों का अभाव भी मिलता है। वास्तव में बाण के समय में समासबहुलता गद्यकाव्यों में आवश्यक मानी जाती थी, कहा भी गया है – “ओजः समासभूयस्वमेतत गद्यस्य जीवितम्।”

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बाण प्रसंग का पूरा ध्यान रखते हैं। प्रसंगानुसार वे समासबहुल या समासहीन भाषा का प्रयोग करते हैं। बाण पाञ्चाली गद्यशैली के अनुयायी हैं। वे अर्थ के अनुरूप शब्दों की योजना करते हैं। सरस प्रसंगों में कोमल कान्त पदावली का प्रयोग करते हैं तथा विन्द्र याटवी, शबर सेनापति आदि की भीषणता का चित्रण करने में कठोर वर्गों की योजना भी उनके द्वारा की गई है।

बाण का शब्दकोष अक्षय है। एक ही बात को अनेक रूपों मे तथा नए-नए शब्दों द्वारा अभिव्यक्त करने में वे पूर्ण दक्ष हैं। अलंकारों के सुन्दर प्रयोग से बाण की गद्य शैली विशेष आकर्षक हो गई है किन्तु इनकी गद्यशैली की तीखी आलोचना भी की गई है क्योंकि इनके काव्यों में असंख्य विशेषणों से लदे हुए तथा जटिल समस्त पदावली से भरपूर लम्बे-लम्बे वाक्यों के प्रयोग से पाठक बहुधा झुंझला उठते हैं।

प्रश्न 3.
मातृभाषया शबरसेनापते: चरित्रम् लिखत –
उत्तर:
शबरसेनापति विवेकशून्य था, मदिरा मांस उसका भोजन था, शिकार करना परिश्रम, गीदड़ियों का रोना शास्त्र तथा पक्षियों की जानकारी ही इसका ज्ञान था। इसके अतिरिक्त यह जिस जंगल में रहता था उसे खोदकर पूरी तरह नष्ट-भ्रष्ट कर देता था – यही इसके स्वभाव की विशेषताएँ थीं।

प्रश्न 4.
अधोलिखितानां भावार्थ लिखत –

(क) किमिव हि दुष्करमकरुणानाम्।
उत्तर:
वृद्ध शबर अतीव निर्दयतापूर्वक वृक्ष पर चढ़कर वृक्ष के खोखले के अन्दर से शुकशावकों को फलों की तरह पकड़ने लगा तथा उन्हें मारकर पृथ्वी पर गिरा रहा था। इसी भाव को अभिव्यक्त करते हुए कवि ने कहा है कि निष्ठुर लोगों के लिए कोई भी काम कठिन नहीं है। इस पंक्ति में शबर की निर्दयता अभिव्यक्त की गई है।

(ख) नास्ति जीवितादन्यदभिमततरमिह जगति सर्वजन्तूनाम्।
उत्तर:
पिता ने जीवन के अन्तिम क्षण तक अपने पंखों में छिपाकर भी अपने सुत उस शुकशावक की रक्षा की किन्तु उसकी मृत्यु के उपरान्त बहुत शीघ्र वह जल आदि की इच्छा अनुभव करने लगा, इसी भाव को अभिव्यक्त करने के लिए महाकवि बाण यहाँ कहते हैं कि सभी प्राणियों के लिए अपने जीवन से बढ़कर कुछ भी अधिक प्रिय नहीं हैं। इस प्रकार प्राणियों के लिए उनका अपना जीवन सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण एवं प्रिय है- यही भाव है इस पंक्ति का।

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(ग) सर्वथा न कञ्चिन्न खलीकरोति जीवनाशा।
उत्तर:
वह शुकशावक पिता की मृत्यु के बाद भी जीवन की लालसा से युक्त है। वैसे भी कोई किसी की मृत्यु के कारण स्वयं अपने जीवन का विनाश नहीं करता। इसी कारण अपने को धिक्कारता है वह शुकशावक और कह उठता है कि जीवन की लालसा मनुष्य को नीच (कृतघ्न) बना देती है। वह पिता के उपकारों का किसी भी प्रकार से बदला नहीं चुका सका यही भाव है इस पंक्ति का।

(घ) प्रायेण अकारणमित्राण्यतिकरुणाणि च भवन्ति सतां चेतांसि।।
उत्तर:
सज्जनों का स्वभाव वर्णित किया गया है इस पंक्ति में। जाबलिमुनि का पुत्र हारीत अत्यन्त कोमल स्वभाव वाला था। उसने शुकशावक को पानी की बूंदें पिलाईं तथा उसे जीवनशक्ति प्रदान की। उसी का दयालु स्वभाव वर्णित है इस पक्ति में। न जानते हुए भी उस मुनिसुत ने शुकशावक के प्रति अत्यन्त दया का भाव प्रकट किया।

प्रश्न 5.
शुकशावकस्य आत्मकथां संक्षेपेण लिखत –
उत्तर:
कादम्बरी की कथा की भू शुक अपनी पूर्णकथा इस प्रकार सुनाता है –
मैं (शुकशावक) विन्ध्याटवी में पम्पा पद्मसरोवर के पश्चिमी तट पर स्थित शाल्मली वृक्ष पर अपने पिता के साथ रहता था। मेरा जन्म होते ही प्रसव वेदना से मेरी माता की मृत्यु हो गई। एक बार एक शबर सेना शिकार करने उधर आई। इस सेना में से एक वृद्ध शबर पीछे रह गया और उसने उस शाल्मली वृक्ष पर चढ़कर मेरे बूढ़े पिता की गर्दन मरोड़कर मृत्यु कर दी और उसे नीचे फेंक दिया। उसके पंखों में सिमटा हुआ मैं भी नीचे गिर गया किन्तु सूखे पत्तों के ढेर पर गिरने के कारण मेरे अंग नहीं टूटे तथा एक तमाल वृक्ष की जड़ में छिप जाने के कारण मैं उस शबर की दृष्टि से बच गया।

शबर के चले जाने पर मुझे प्यास लगी। तभी स्नान के लिए जाता हुआ हारीत नामक जाबालि ऋषि का पुत्र वहाँ से आ निकला। उसने प्यार से मुझे पानी पिलाया तथा छाया में बिठाया। स्नान करके वह मुझे अपने पिता महर्षि जाबालि के आश्रम में ले गया। यही है शुक शावक द्वारा वर्णित उसकी आत्मकथा।

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प्रश्न 6.
अधोलिखितेषु शब्देषु प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत –
उत्तर:
(क) समाहृत्य = सम् और आ उपसर्ग, हृ धातु + ल्यप् प्रत्यय।
(ख) आकर्ण्य = आ उपसर्ग, कर्ण धातु + ल्यप् प्रत्यय।
(ग) निष्क्रम्य = निस् उपसर्ग, क्रम् धातु + ल्यप् प्रत्यय।
(घ) विक्षिपन् = वि उपसर्ग, क्षिप् धातु + शतृ प्रत्यय।
(ङ) उपरतम् = उप उपसर्ग, रम् धातु + क्त प्रत्यय।
(च) गृहीत्वा = ग्रह धातु + क्त्वा प्रत्यय।
(छ) अभिलाषः = अभि उपसर्ग, लष् धातु + घञ् प्रत्यय।
(ज) संचरमाणः = सम् उपसर्ग, चर् धातु + शानच् प्रत्यय।

प्रश्न 7.
रिक्तस्थानानि पूरयत –
उत्तर:
(क) अस्ति भुवो मेखलेव विन्ध्याटवी नाम।
(ख) ममैव जायमानस्य प्रसववेदनया में जननी मृता।
(ग) अहो मोहप्रायम् एतेषां जीवितम्।
(घ) तातः स्नेहपरवशो मद्रक्षणे आकुलः अभवत्।
(ङ) सर्वथा न कञ्चित् न खलीकरोति जीवनाशा।

प्रश्न 8.
सन्धिविच्छेदं कुरुत –
उत्तर:
(1) तस्यैवैकस्मिन् = तस्य + एव + एकस्मिन्।
(2) तातस्तु = तातः + तु।
(3) प्रत्यूषसि = प्रति + उपसि।
(4) अचिराच्च। = अचिरात् + च।
(5) चिन्तयत्येव = चिन्तयति + एव।
(6) फलानीव = फलानि + इव।
(7) तावदहम् = तावत् + अहम् !
(8) तेनैव = तेन + एव।
(9) चादाय = च + आदाय।

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योग्यताविस्तार:

पम्पा – पम्पा नामक एक प्रसिद्ध सरोवर है जो आजकल ‘पेन्नसिर’ नाम से जाना जाता है। सरोवर के पास में ही ऋष्यमूक पर्वत है। पम्पा नामक नदी इसी सरोवर से निकली है।

विन्ध्याटवी – यह एक पर्वतश्रेणी है जो उत्तरभारत को दक्षिण भारत से पृथक करती है। इसकी गणना सप्तकुल पर्वतो में की जाती है। यह पर्वतमाला मध्यदेश की दक्षिणसीमा में है।

हिमवद – हिमालय और विन्ध्याचल के बीच विनशन (कुरुक्षेत्र) के पूर्व तथा प्रयाग के पश्चिम का देश ‘मध्यदेश’ कहा गया है।

इन पर्वतमालाओं में गहन जंगल हैं जो ‘विन्ध्याटवी’ नाम से कहे जाते हैं। ‘किमिव हि दुष्करमकरुणानाम्’ – इस पाठ में प्रसिद्ध सूक्ति है। इस पाठ में दी हुई ऐसी कुछ अन्य सूक्तियाँ ये हैं –
(क) सर्वथा न कञ्चिन्न खलीकरोति जीवनाशा।
(ख) प्रायेणकारणमित्राण्यति करुणााणि च भवन्ति सतां चेतांसि।

Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 शुकशावकोदन्तः Summary Translation in Hindi and English

संकेत – अस्ति मध्यदेशालङ्कारभूता ……………………………. शेषमेवाकरोदशनम्।

शब्दार्थ (Word-meanings)

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अशनम् = खाना : To eat

सरलार्थ – मध्यदेश की आभूषण स्वरूप तथा पृथ्वी की मेखला की तरह विन्ध्य नामक अटवी (जंगल) थी। उसमें पम्पा नामक पद्म सरोवर था। उसके पश्चिमी तट पर बहुत पुराना सेंमल का वृक्ष था। उसके एक खोखले में रहते हुए मेरे पिता का किसी तरह (बड़ी कठिनाई से) मै ही एक पुत्र हुआ। मेरे जन्म के समय प्रसव पीड़ा से मेरी माता की मृत्यु हो गई। पुत्रं स्नेह के कारण अपने शोक को वश में करके मेरे पिता मेरे पालन में तत्पर हो गए। औरों के घोंसलों से गिरे हुए धान की बालों से चावल के दानों को लेकर तथा तोतों के द्वारा कुतरे हुए फलों के टुकड़े इकट्ठे करके (मेरे पिता) मुझे दिया करते थे। मेरे खाने से बचे हुए को ही वे खाया करते थे।

Meaning in English – There was a forest named Vindhya which was like the ornament of Madhya country and a waiste band of the earth. There was a lake full of lotuses Pampa by name in that forest. There was a very old silk-cotton tree on the western bank of that lake. My parents lived in the hollow of that tree when I was born. At the time of my birth my mother died due to unbearable pain of delivery. My father controlled his sorrow and engaged himself in nourishing me due to his affection towards me. My father used to bring the pieces of fruits bitten by other birds and the grains of rice from the rice-plants which fell from other’s nests. He gave those grains to me and ate the remaining grains only after I had eaten.

संकेत – एकदा तु ……………………………….. शबरसेनापतिमपश्यम्।

शब्दार्थ (Word-meanings)

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सरलार्थ – एक बार सूर्योदय से पहले अचानक उस वन में शिकार का शोर होने लगा। उसे सुनकर भय से व्याकुल तथा शुक शावक (तोते का बच्चा) होने से काँपता हुआ मै पिता के पंखों के बीच में घुस गया। शीघ्र ही जंगल को व्याकुल करने वाले मृगया के शोर के शान्त हो जाने पर पिता की गोद से थोड़ा-सा निकलकर खोखले में ही स्थित रहते हुए, गर्दन को फैलाकर ‘यह क्या है? ऐसा देखने की इच्छा से मैंने सामने आती हुई शबरसेना को देखा और उसके मध्य में विद्यमान तरुण अवस्था वाले शबरसेनापति को देखा।

Meaning in English – Once, before sunrise suddenly the noise of hunting was heard in that forest. On hearing that, being a baby of the parrot I got frightened and shivering with fear I entered into the wings of my father. Very soon that frightening noise disappeared. Then I came out very little from the lap of my father and remaining in the hollow itself I spread my neck. I wanted to know what is that. Then I saw an army of the savage tribe coming before us. I also saw there a young commander of that army.

संकेत – आसीच्च मे मनसि …………………………………… दिशमयासीत्।

शब्दार्थ (Word-meanings)

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सरलार्थ – मेरे मन में विचारा आया – ‘अरे! इनका जीवन कितना विवेकशून्य है। मदिरा, मांस आदि इनका भोजन है, शिकार करना परिश्रम है, गीदड़ियों का रोना शास्त्र है, पक्षियों की जानकारी ज्ञान है। ये जिस जंगल में रहते हैं उसे खोदकर पूरी तरह उजाड़ कर देते हैं – जब मैं ऐसा सोच ही रहा था शबर सेनापति आकर उसी वृक्ष की छाया में सेवकों के द्वारा लाए हुए पत्तों के आसन पर बैठ गया। थोड़ा जल पीकर तथा कमलनालों को खाकर थकान दूर होने पर सारी सेना के साथ (वह सेनापति) अभीष्ट दिशा की ओर चला गया।

Meaning in English: I thought then – ‘Oh! Their life is full of ignorance. Wine, meat, etc. are their food, hunting is exercise, the crying of the female jackals is their shastras and their knowledge is to know the birds. They completely destroy the forest where they live – the commander of that army of the savage tribe reached there as I was thinking so. He sat on the seat made of leaves which were brought by his attendants under the shade of that tree. After drinking little water and eating the stalks of the lotuses his fatigue was removed and then he went towards his desired direction.

संकेत – एकतमस्तु …………………………………… क्षितावपातयत्।

शब्दार्थ (Word-meanings)

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सरलार्थ – तभी उस सेना में से एक वृद्ध किरात थोड़ी देर के लिए उसी वृक्ष के नीचे रुंक गया। सेनापति के ओझल हो जाने पर वह वृद्ध किरात उस पर चढ़ने की इच्छा से बहुत देर तक वृक्ष को जड़ से लेकर (ऊपर तक) देखता रहा। उसके देखने से भयभीत शुककुलों के प्राण मानो उसी समय निकल गए। निष्ठुर लोगों के लिए कौन-सा काम कठिन है क्योंकि वह (बूढ़ा शबर) बिना प्रयल के ही उस वृक्ष पर चढ़कर उस वृक्ष के खोखलों के भीतर से शुकशावकों को फलों की तरह पकड़ने लगा और उन्हें मारकर पृथ्वी पर गिराने लगा।

Meaning in English – At that very time, an old Kirata from that army stopped for some time under that tree. When the commander of that army went a little further, that old kirata looked for a long time towards the tree from the root to it’s end with a desire to climb it. Being frightened by his looks, the parrots were about to die. Which work is difficult for the cruel people because that old kirata climbed up that tree easily. He then caught the babies of the parrots like fruits who were inside the hollows of that tree. He then killed them and threw them on the earth.

संकेत – तातस्तु तदवलोक्य …………….. मूलदेशमविशम्।

शब्दार्थ (Word-meanings)

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सरलार्थ – उसे देखकर दुःख के कारण दीन तथा अश्रुपूर्ण दृष्टि से इधर-उधर देखते हुए मेरे पिता अपने पंखों से मुझे ढककर स्नेह विवश होकर मेरी रक्षा के लिए व्याकुल हो उठे। दूसरी शाखाओं पर घूमते हुए अपनी भुजाएँ फैलाकर हमारे खोखले के पास आकर उस पापी ने बार-बार अपनी चोंच से प्रहार करने वाले चीखते हुए मेरे तिा को खींचकर मार डाला। छोटा शरीर होने से उसने मुझे नहीं देखा। उसने मेरे मृत पिता को पृथ्वी पर छोड़ दिया। मैंने भी उनके पैरों के बीच में गरदन रखे हुउ चुपचाप उनकी छाती से चिपककर उन्हीं के साथ हवा के कारण इकट्ठे हुए सूखे पत्तों के ढेर पर अपने को गिरा हुआ देखा! जब तक वह वृद्ध शबर उस पेड़ के शिखर से नहीं उतरा तब तक निष्ठुर प्राणी की तरह पिता को छोड़कर स्नेह से अनजान रहकर केवल भय से आक्रान्त होता हुआ इधर-उधर लुढ़कता हुआ मैं समीपवर्ती तमाल वृक्ष की जड़ में घुस गया।

Meaning in English – On seeing him being afflicted with sorrow and having tears in eyes my father covered me with his wings due to affection. He got worried for my protection. Walking on other branches that cruel Kirata spread his arms and came near our hollow. He pulled my father and killed him who was attacking with his beak again and again and who was crying also. He did not see me because my body was very small. He left my dead father on the earth. I saw myself lying on the heap of the dry leaves which were collected by the wind. At that time my neck was hidden between the feet of my father and I was sticking quietly to his chest. Then I left my dead father like a cruel person being ignorant of affection. Being frightened I saw here and there and hy the time that old Kirata got down from the top of that tree, being rolling I entered into the roots of the nearby Tamala tree.

संकेत – अजातपक्षतया …………………………… मरणमद्यैवोपपादयेत्।

शब्दार्थ (Word-meanings)

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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – पंख न निकल पाने के कारण, बार-बार मुँह के बल गिरने से, लम्बी-लम्बी सांस लेने से तथा धूल में भरकर रेंगते हुए मेरे मन में यह विचार आया – इस संसार में सब जीवों को जीवन से अधिक प्यारा अन्य कुछ नहीं है। पिता के इस प्रकार मर जाने पर भी मैं जीना चाहता हूँ। मुझ निर्दय, अति निष्ठुर तथा कृतघ्न को धिक्कार है। सचमुच मेरा हृदय नीच है। पिता के द्वारा जो किया गया वह सब मैंने एकदम भुला दिया। ऐसा कोई प्राणी नहीं है जिसे जीवन की लालसा हर प्रकर से नीच नहीं बना देती, जो एसी अवस्था में भी मुझे जल की प्यास से परेशान कर रही है और दिन की यह दशा अत्यन्त कष्टदायक हो रही है। भूमि-धूप से तपी हुई धूल वाली हो गई है। प्यास से शिथिल पड़े हुए मेरे अंग तनिक भी चलने में समर्थ नहीं हैं। मेरा अपने पर ही अधिकार नहीं रह गया। मेरा हृदय डूब रहा है। मेरी आँखों में अँधेरा छा रहा है। शायद क्रूर विधाता मेरे न चाहते हुए भी मुझे आज ही मृत्यु दे दे।

Meaning in English – Due to without grown-up wings, falling, again and again, straight, breathing deeply and crawling with a body full of dust I thought – There is nothing else in this world more agreeable than life for all living beings. I wish to remain alive even after the death of my father. Really I am very mean. I have forgotten everything immediately whatever was done by my father. There is no one in this world who is not made so mean by the desire to live. Thurst to have water is making me restless even in such condition and this condition of the day is creating great trouble. The earth is full of hot dust due to very bright sun. My body-parts have become very weak due to thirst and I am unable to walk at all. I have no authority on my own body. My heart is sinking. There is darkness in my eyes. I hope cruel God may give me death today even if it is not desired.

संकेत – इत्येवं चिन्तयत्येव …………………………… तपोवनमगच्छत्।

शब्दार्थ (Word-meanings)

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सरलार्थ – मैं ऐसा सोच ही रहा था कि हारीत नामक जाबालि मुनि का पुत्र समान आयु वाले अन्य मुनिकुमारों के साथ उसी मार्ग से स्नान करने की इच्छा से उसी कमलसरोवर की ओर आया। प्रायः सज्जनों के चित्त अकारण स्नेह करने वाले तथा अत्यन्त करुणा के कारण कोमल हुआ करते हैं। ऐसी अवस्था में देखकर वह ऋषिकुमार मुझे सरोवर के तट पर ले आया तथा कुछ जल की बूंदें लेकर मुझे पिलायीं। प्राणशक्ति उत्पन्न मुझे छाया में रखकर ऋषिकुमार ने स्नान किया। स्नान के अंत में सब मुनिकुमारों के दल के द्वारा पीछा किया जाता हुआ वह ऋषिकुमार मुझे लेकर तपोवन की ओर चल दिया।

Meaning in English – While I was thinking thus, Hareeta, son of sage Jabali came to that lotus-pond to take bath with many other sons of the sages of the same age group. The gentlemen are very kind-hearted as they have affection and kindness for all. Seeing me in such condition that son of the sage took me to the bank of the pond. He made me drink a few drops of water. Thus he kept me who had fresh life now in the shade and then he took bath. After taking bath, being followed by the sons of the sages that son of the sage took me towards the hermitage.

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NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 वीरःसर्वदमन:

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Bhaswati Sanskrit Class 11 Solutions Chapter 5 वीरःसर्वदमन:

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अभ्यास:

प्रश्न 1.
संस्कृतभाषया उत्तरं देयम –
(क) कस्य कवेः कस्मात् पुस्तकात् गृहीतोऽयं पाठः?
उत्तर:
महाकवेः कालिदासस्य अभिः शाकुन्तलात् गृहीतोऽयं पाठः।

(ख) बालः कीदृशं सिंहशिशुं कर्षति स्म?
उत्तर:
बालः मातुः अर्धपीतस्तन आमर्दक्लिष्टकेसर सिंहशिशु कर्षति स्म।

(ग) तापसी बालाय क्रीडार्थ किं दत्तवती?
उत्तर:
तापसी बालाय क्रीडार्थं क्रीडनकं दत्तवती।

(घ) क्रीडापरस्य बालस्य मातुः किं नामधेयम्?
उत्तर:
क्रीडापरस्य बालस्य मातुः नामधेयं शकुन्तला इत्यासीत्।

(ङ) बालाय किं रोचते?
उत्तर:
बालाय क्रीडनकं रोचते।

प्रश्न 2.
रिक्तस्थानानां पूर्तिः करणीया –
उत्तर:
(क) अपत्यनिर्विशेषाणि सत्त्वानि विप्रकरोषि।
(ख) पुत्रे स्निह्यति मे मनः।
(ग) यद्यस्याः पुत्रकं न मुञ्चसि।
(घ) अपरं क्रीडनकं ते दास्यामि।
(ङ) आकारसदृशं चेष्टितमेवास्य कथयति।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 3.
निम्नाङ्कितेषु सन्धिच्छेदो विधेयः –
उत्तर:
(क) गत एवात्मनः = गतः + एव + आत्मनः।।
(ख) औरस इव = औरसः + इव।
(ग) दन्तांस्ते = दन्तान् + ते।
(घ) यद्यस्याः = यदि + अस्याः।
(ङ) शकुन्तलेत्यस्य = शकुन्तला + इति + अस्य।
(च) खल्वयम् = खलु + अयम्।
(छ) बालेऽस्मिन् = बाले + अस्मिन्
(ज) भीतोऽस्मि = भीतः + अस्मि।
(झ) कस्यापि = कस्य + अपि।
(ञ) एकान्वयः = एक + अन्वयः।
(ट) एवास्य.. = एव + अस्य
(ठ) तमस्योपहर = तम् + अस्य + उपहर।
(ड) मैवम् = मा + एवम्।।
(ढ) इत्यधरम् = इति + अधरम्।
(ण) ममाम्बा = मम + अम्बा।
(त) अनेनैव = अनेन + एव।

प्रश्न 4.
अधोलिखितेषु विग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत –
उत्तर:
(क) पूर्वावधीरितम् = पूर्वम् अवधीरितम्; कर्मधारय समास।
(ख) अभूमिः = न भूमिः नञ् तत्पुरुष समास।
(ग) अविनयस्य = न विनयस्य; नञ् तत्पुरुष समास।
(घ) शब्दानुसारेण = शब्दस्य अनुसारेण; षष्ठी तत्पुरुष समास।
(ङ) सविस्मयम् = विस्मयेन सहितम्; अव्ययीभाव समास।
(च) अबालसत्त्वः = न बालसत्त्वः; नञ् तत्पुरुष समास।
(छ) सिंहशिशुम् = सिंहस्य शिशुम्; षष्ठी तत्पुरुष समास।
(ज) अनपत्यता = नास्ति अपत्यं यस्य सः अनपत्यः; बहुव्रीहि समास, तस्य भावे ‘ता’ प्रत्यय।
(झ) सस्मितम् = स्मितेन सहितम्; अव्ययीभाव समास।
(ञ) मृत्तिकामयूरः = मृत्तिकायाः मयूरः; षष्ठी तत्पुरुष समास।
(ट) बालमृगेन्द्रम् = बालश्चासौ मृगेन्द्रः तम्; कर्मधारय समास।
(ठ) एकान्वयः = एक एव अन्वयः यस्य सः; बहुव्रीहि समास।
(ड) आकारसदृशम् = आकारेण सदृशम् ; तृतीया तत्पुरुष समास।
(ढ) बालस्पर्शम् = बालस्य स्पर्शम् ; षष्ठी तत्पुरुष समास।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 5.
अधोलिखितानां पदानां संस्कृतवाक्येषु प्रयोगः करणीयः –
उत्तर:
(क) सविस्मयम् = तत् चलचित्रं दृष्ट्वा सविस्मयं मया उक्तम्।
(ख) कर्षति = बालः क्रीडितुं सिंहशिशुं कर्षति।
(ग) स्निह्यति = माता पुत्रे स्निह्यति।
(घ) केसरिणी = केसरिणी स्वशिशुं स्तनपानं करोति।
(ङ) उटजे = उटजे तापसः तपस्याम् आचरति।
(च) व्यपदेशः = आवयोः व्यपदेशः एकः एव।
(छ) प्रेक्षस्व = पुत्र! शकुन्तलावण्यं प्रेक्षस्व।
(ज) ममाम्बा = ममाम्बा प्रधानाचार्या अस्ति।

प्रश्न 6.
प्रकृतिप्रत्ययपरिचयो देयः –
उत्तर:
(क) सूचयित्वा = सूच् + क्त्वा प्रत्यय।
(ख) प्रक्रीडितुम् = प्रक्रिीड् + तुमुन् प्रत्यय।
(ग) अवलोक्य = अव Vलुक् + ल्यप् प्रत्यय।
(घ) अनुबध्यमानः = अनु + बध् + कर्मणि यक् + शानच् प्रत्यय।
(ङ) निष्क्रान्ता = निस् क्रिम् + क्त और टाप् प्रत्यय।
(च) उपलभ्य = उप लिभ् + ल्यप् प्रत्यय।
(छ) उपलालयन् = उप लिल् + शतृ प्रत्यय।

प्रश्न 7.
स्वमातृभाषया सप्रसङ्गं व्याख्यायताम् –

(क) मनोरथाय नाशंसे ……………………………….. दुःखाय परिवर्तते।।
उत्तर:
प्रसंग – प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भास्वती प्रथमो-भागः’ के अध्याय ‘वीरः सर्वदमनः’ में से अवतरित किया गया है। तथा यह अध्याय संस्कृत कविशिरोमणि कालिदास के विश्वविश्रुत नाटक अभिज्ञानशाकुन्तलम् के सप्तम अंक में से संकलित है।

जब राजा दुष्यन्त मारीच ऋषि के आश्रम में प्रवेश करते हैं तो उनकी दाहिनी भुजा फड़कती है। पुरुषों का दाहिना अंग फड़कना किसी शुभ सूचना का परिचायक होता है। तभी वे यह श्लोक बोलते हैं-

मैं अपने किसी मनोरथ के लिए आशा नहीं कर रहा। इसलिए हे भुजा! तू व्यर्थ क्यों फड़क रही है क्योंकि पहले ठुकराया गया मंगल कठिनाई से लौटता है।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रस्तुत श्लोक में राजा दुष्यन्त का शकुन्तला के लिए विरहभाव वर्णित है। वह यही सोच रहा है कि जिसे उसने स्वयं ठुकरा दिया उसका पुनः प्राप्त होना अत्यन्त कठिन है। अतः उसे भुजा के फड़कने से कोई शुभ सम्पन्न होने की आशा नहीं है। इस प्रकार इस श्लोक में राजा का शकुन्तला के लिए विरह दुःख भी वर्णित है।

(ख) अर्धपीतस्तनं ………………………. बलात्कारेण कर्षति।।
उत्तर:
प्रसंग – प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भास्वती प्रथमो-भागः’ के अध्याय ‘वीरः सर्वदमनः’ मे से उद्धृत किया गया है और यह अध्याय संस्कृत साहित्य के कवि सम्राट कालिदास के विश्वविख्यात नाटक अभिज्ञानशाकुन्तलम के सप्तम अंक में से संकलित है। जब राजा दुष्यन्त महर्षि मारीच के आश्रम में जाता है तो वहाँ बालक सर्वदमन को देखकर वह उसके विषय में ऐसा सोचता है –

(यह कौन बालक है जो) माता के केवल आधे दूध को पिए हुए खींचने के कारण इधर-उधर बिखरे हुए बालों वाले सिंह के बच्चे को खेलने के लिए जबरदस्ती खींच रहा है।

प्रस्तुत श्लोक में बालक सर्वदमन के अद्भुत शौर्य का चित्रण किया गया है। वह शेर के बच्चे को खेलने के लिए जबरदस्ती खींच रहा है जो सिंहशावक अपनी माता का दूध पी रहा था वह उसके बाल पकड़कर खींच रहा है तथा तनिक भी भयभीत नहीं है। ऐसे अद्भुत पराक्रमी बालक को देखकर राजा दुष्यन्त उसकी ओर आकर्षित होता है और उसके बारे में जानने को उत्सुक भी है।

(ग) किं न खलु बालेऽस्मिन् ………………………. मां वत्सलयति।
उत्तर:
प्रसंग – प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भास्वती प्रथमो-भागः’ के अध्याय ‘वीरः सर्वदमनः में से उद्धृत किया गया है और यह अध्याय संस्कृत साहित्य के कविशिरोमणि कालिदास के अत्यन्त प्रसिद्ध नाटक अभिज्ञानशाकुन्तलम् के सप्तम अंक में . से संकलित है। महर्षि मारीच के आश्रम में पहुँचकर बालक सर्वदमन को देखकर राजा दुष्यन्त उसकी ओर बहुत आकर्षित होता है। बालक के प्रति प्रेमभाव को प्रकट करता हुआ राजा दुष्यन्त कहता है –

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

न जाने क्यों मेरा मन इस बालक के प्रति अपने निजी पुत्र के समान स्नेह कर रहा है? अवश्य ही संतानहीनता मुझसे इस प्रकार स्ने करा रही है।

इस प्रकार राजा दुष्यन्त का बालक के प्रति वात्सल्य भाव वर्णित है इस श्लोक में। वह उस बालक से बहुत प्रेम करने लगा है। इसका कारण वह यह सोचता है कि वह

सन्तानहीन है शायद इसीलिए इस बालक को देखकर वह उससे अपने सगे पुत्र की तरह प्रेम कर रहा है।

प्रश्न 8.
स्वमातृभाषया आशयं स्पष्टी अनेन कस्यापि कुलाकुरेण ………………………………….. यस्यायमङ्कात् कृतिनः प्ररूढः।।
उत्तर:
बालक सर्वदमन को देखकर दुष्यन्त के मन में यह भाव उत्पन्न होता है – इस बालक के स्पर्श मात्र से जब मुझे इतना आनन्द मिल रहा है तो यह बालक जिसकी सन्तान होगा उसे कितना अवर्णनीय आनन्द प्राप्त होगा। इस प्रकार राजा का बालक के प्रति अद्भुत वात्सल्य भाव इस श्लोक में वर्णित है। इस श्लोक का आशय यह है कि वह इस बालक के लिए अत्यन्त लालायित है और वह यही सोच रहा है कि उसका पुत्र भी शायद इतना ही बड़ा होता यदि वह अपनी गर्भवती पत्नी को ठुकराता न।

योग्यताविस्तारः

यहाँ नाटक में आए हुए परिभाषिक शब्दों का विवेचन किया गया है –
1. अङ्कः – जो भावों और रसों के द्वारा अर्थों को प्रस्फुरित करता है, जहाँ पर अनेक प्रकार के विधान होते हैं, जहाँ पर एक अर्थ की समाप्ति होती है और बीज का उपसंहार होता है तथा अंशतः बिन्दु का संबंध बना रहता है उसे अङ्क कहते हैं।
2. नेपथ्यम् – जहाँ अभिनेतागण नाटक के उपयुक्त वेशभूषा धारण करते हैं उसे नेपथ्य कहते हैं।
3. आत्मगतम् – जो बात सुनाने योग्य नहीं होती उसे स्वगत (मन में) कहते हैं। इसे ही ‘आत्मगत’ भी कहते हैं। इसका उद्देश्य यह होता है कि साथ के अभिनेता उस बात को न सुन सकें, केवल श्रोता ही उसे सुन पावें।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 वीरःसर्वदमन: Summary Translation in Hindi and English

दुष्यन्तः – (निमित्तं सूचयित्वा)
मनोरथाय नाशंसे किं बाहो स्पन्दसे वृथा।
पूर्वावधीरितं श्रेयो दुःखाय परिवर्तते।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 वीरःसर्वदमन 1

सरलार्थ – (शकुन को सूचित करके)
मैं अपने मनोरथ के लिए आशा नहीं कर रहा इसलिए हे भुजा! तू व्यर्थ क्यों फड़क रही है क्योंकि पहले ठुकराया गया मंगल कठिनता से लौटता है (अथवा पहले ठुकराया गया . मंगल दुःख में ही परिवर्तित होता है।)

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

Meaning in English – (Informing about the omen)
I do not hope for the fulfillment of the desire. Therefore, Oh my arm! Why are throbbing? The happiness which is once refused comes back with great difficulty (or the happiness once refused turns into sorrow).

नेपथ्ये (पर्दे के पीछे) (Behind the curtain)

संकेत – मा खल चापलं …………………………… अबालसत्त्वो बालः।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 वीरःसर्वदमन 3

सरलार्थ – चंचलता मत कर। कैसे यह अपने ही स्वभाव को प्राप्त कर रहा है?

दुष्यन्त – (ध्यान देकर) यह आश्रम अविनीतता का स्थान नहीं है। फिर भला किसे मना किया जा रहा है?. (आवाज के अनुसरण से देखकर आश्चर्य के साथ) अरे! दो तपस्विनियों के द्वारा मनाया जाता हुआ असाधारण शक्ति वाला यह कोई बालक है!

Meaning in English – Don’t be so restless. Oh he is acting according to his nature.

Dushyanta – (Being attentive) This hermitage is not the place of immodesty. Who is then being prohibited? (Watching in accordance with the sound, with surprise) Oh! Here is some boy with extra-ordinary strength who is being persuaded by two female-devotees.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

अर्धपीतस्तनं मातुरामदक्लिष्टकेसरम्।
प्रकीडितुं सिंहशिशु बलात्कारेण कर्षति।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 वीरःसर्वदमन 4

सरलार्थ – माता के केवल आधे दूध को पिए हुए, खींचने के कारण इधर-उधर बिखरे हुए बालों वाले सिंह के बच्चे को यह बालक खेलने के लिए जबरदस्ती खींच रहा है।

Meaning in English – This boy is pulling forcibly the cub of their lion to play who has taken half dose of milk of his mother’s breast and whose hair are lying here and there due to pulling.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

संकेत – बालः जृम्भस्व सिंह! ………………………….. तमस्योपहर।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 वीरःसर्वदमन 5
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 वीरःसर्वदमन 6
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 वीरःसर्वदमन 7
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 वीरःसर्वदमन 8

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ : बालक – अरे सिंह! जम्हाई ले। मैं तेरे दाँत गिनूँगा।

पहली (तपस्विनी) – अरे अविनम्र! हमारी संतान के समान जन्तुओं को तू क्यों तंग कर रहा है? अरे! तेरा हठ बढ़ता जा रहा है। ऋषियों ने तेरा नाम सर्वदमन ठीक ही रखा है। दुष्यन्त – न जाने क्यों मेरा मन इस बालक के प्रति अपने निजी पुत्र के समान स्नेह कर रहा है? अवश्य ही सन्तानहीनता मुझसे इस प्रकार स्नेह करा रही है।

दूसरी (तपस्विनी) – यह शेरनी अवश्य तुझ पर आक्रमण कर देगी यदि तू इसके बच्चे को नहीं छोड़ेगा।

बालक (मुस्कराकर)- ओह! मैं तो बहुत डर गया हूँ। (अपना निचलों होंठ दिखाता है)। पहली – पुत्र! इस शेर के बच्चे को छोड़ दे। मैं तुझे दूसरा खिलौना दूंगी। बालक – कहाँ है (खिलौना)? वह दो। (अपना हाथ फैलाता है।)

दूसरी – हे सुव्रता! यह केवल कहने मात्र से नहीं मान सकता। तू जा। मेरी कुटिया में मिट्टी का मोर रखा है, वह लाकर इसे दे दो।

Meaning in English: Boy-Oh lion! Yawn, I will count your teeth.

First (lady-devotee)-Oh cruel! Why do you tease these beasts who are just like our own off-springs? Oh! Your violence is increasing. You have been correctly named as ‘Sarvadamana’ by the sages.

Dushyanta – I do not understand why do I love this boy like my own son? The childlessness causes me to feel affectionate definitely.

Second (lady-devotee) – This lioness will definitely attack on you – if you do not leave her cub.

Boy – (With a smile) Oh! I am very much afraid. (Shows his lower. lip).

First (female-devotee) – Oh son! Leave this cub. I will give you another toy.

Boy – Where is the toy? Give me that. (Spreads his hand).

Second (female-devotee) – Oh Suvrata! He cannot be stopped by mere words. You go. There is a peacock made of clay in my cottage.

Bring that and give that to him.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

संकेत – बालः – अनेनैव तावत् …………………………….. कथयति। (आत्मगतम्)

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 वीरःसर्वदमन 9

सरलार्थ : बालक – तब तक मैं इसी से खेलूँगा। (ऐसा कहकर तपस्विनी को देखकर हँसता है।)

तपस्विनी – अच्छा, यह मेरी बात नहीं मानता। (राजा को देखकर) हे सज्जन! तंग किए जाते हुए इस सिंह के बच्चे को इस बालक से छुड़वाइए।

दुष्यन्त – आकार के समान इसकी चेष्टा ही कह रही है। (अपने आप से)

Meaning in English : Boy – By that time, I will play with it only.

(Having seen the female ascetic, he laughs):
Female Ascetic-Oh! He does not consider me. (Looking towards the king) Oh gentleman! Please ask the child to leave the cub which is being teased by him.

Dushyanta – It is known by his action which is according to his strong body. (To himself)

अनेन कस्यापि कुलाङ्कुरेण
स्पृष्टस्य गात्रेषु सुखं ममैवम्।
कां निवृत्तिं चेतसि तस्य कुर्यात्
यस्यायमक़ात कृतिनः प्ररूढः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 वीरःसर्वदमन 10

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – किसी के वंश के अंकुर स्वरूप इस बालक से स्पर्श होने पर जब मेरे अंगों में इस प्रकार आनन्द हो रहा है, तब जिस सौभाग्यशाली की गोद से यह उत्पन्न हुआ है उसके चित्त में किस अचिन्तनीय आनन्द को यह उत्पन्न करता होगा?

Meaning in English – Whep I feel such a great pleasure by the touch of this boy who is a seed of some-race, then what wonderful pleasure he brings for him from whose lap he is born?

संकेत – (बालमुपलालयन्) प्रकाशम् ……………………………… क्रीडनकमादत्ते)।

शदार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 वीरःसर्वदमन 11

सरलार्थ – (बालक को लाड़ करते हुए) प्रकट रूप से
दुष्यन्त – तो इसका वंश क्या है।
तपस्विनी – पुरुवंश।
दुष्यन्त – (मन में) क्या! मेरा और इसका वंश एक ही है? (प्रवेश करके)
तपस्विनी – पुत्र सर्वदमन! पक्षी के सौन्दर्य को देखो। (अथवा शकुन्तला के रूप को देखो)
बालक – कहाँ है मेरी माता?
दुष्यन्त – (मन में) क्या शकुन्तला इसकी माता का नाम है?
बालक – मुझे यह मोर अच्छा लगता है। (यह कहकर खिलौना ले लेता है।)

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

Meaning in English : Giving great love to the boy) Loudly
Dushyanta – Then, what is his family’s name?
Fem. Ascetic- Puru-race.
Dushyanta -(To himself) What? His and my race is the same?
Fem. Ascetic – Oh Sarvadamana! Look at the beauty of this bird.
Boy – Where is my mother?
Dushyanta – (To himself) Is Shakuntala his mother’s name?
Boy – I like this peacock. (Having said so takes the toy.).

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NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

Bhaswati Sanskrit Class 11 Solutions Chapter 4 ऋतुचर्या

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

अभ्यासः

प्रश्न 1.
संस्कृतेन उत्तराणि देयानि –

(क) अयं पाठः कस्माद् ग्रन्थात् सङ्कलितः कश्च तस्य प्रणेता?
उत्तर-
अयं पाठः ‘चरकसंहिता’ इति ग्रन्थात् सङ्कलितः महर्षिः चरकः च अस्य प्रणेता।

(ख) कति ऋतवः भवन्ति? कानि च तेषां नामानि?
उत्तर-
ऋतवः षड् भवन्ति – हेमन्तः, शिशिरः, वसन्तः, ग्रीष्मः, वर्षा, शरद् च।।

(ग) शिशिरे किं किं वर्जनीयम्?
उत्तर-
शिशिरे कटुतिक्तकषायानि वातलानि लघुनि शीतलानि च अन्नपानानि वर्जयेत। .

(घ) वसन्ते कायाग्निं कः बाधते?
उत्तर-
वसन्ते दिनकृद्भाभिरीरितः निचितः श्लेष्मा कायाग्निं बाधते।

(ङ) ग्रीष्मे कीदृशम् अन्नपानं हितं भवति?
उत्तर-
ग्रीष्मे स्वादु शीत द्रवं स्निग्धमन्नपान हितं भवति।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

(च) कस्मिन् ऋतौ पवनादयः कुप्यन्ति?
उत्तर-
वर्षौ पवनादयः कुप्यन्ति।

(छ) शरदृतौ पित्तप्रशमनाय किं किं सेव्यम् अस्ति?
उत्तर-
शरदृतौ पित्तप्रशमनाय मधुरं लघु शीतं सतिक्तकम् अन्नपानं मात्रया सुप्रकाङ्क्षितैः च सेव्यम्।

(ज) हिमागमे कीदृशानि अन्नपानानि वर्जयेत्?
उत्तर-
हिमागमे वातलानि लघूनि, उदमन्थं चान्नपानं वर्जयेत्।

(झ) शिशिरे कीदृशं गृहमाश्रयेत्?
उत्तर-
शिशिरे निवातम् उष्णं च गृहमाश्रयेत्।

(ञ) वसन्ते कानि कर्माणि कारयेत्?
उत्तर-
वसन्ते वमनादीनि कर्माणि कारयेत्।

(ठ) इन्दुरश्मयः कदा प्रशस्यन्ते?
उत्तर-
इन्दुरश्मयः शरत्काले प्रशस्यन्ते।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 2.
रिक्तस्थानपूर्तिः क्रियताम् –
उत्तर-
(क) हिमागमे वातलानि लघूनि च अन्नपानानि वर्जयेत्।
(ख) शिशिरे निवातम् उष्णं च गृहम् आश्रयेत्।
(ग) वसन्ते दिवास्वप्नं वर्जयेत्।
(घ) ग्रीष्मे घृतं पयः सशाल्यन्नं भजन् नरः न सीदति।
(ङ) शरत्काले विमलानि वासांसि प्रशस्यन्ते।

प्रश्न 3.
मातृभाषया व्याख्यायन्ताम् –

(क) हेमन्तशिशिरौ तुल्यौ शिशिरेऽल्पं विशेषणम्।
उत्तर-
प्रसंग – प्रस्तुत श्लोकांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भास्वती प्रथमो-भागः के याय ऋतुचर्या’ में से उद्धृत किया गया है। यह अध्याय महर्षि चरक द्वारा प्रणीत ग्रन्थ ‘चरक संहिता’ में से संकलित है। इस अध्याय में छ’ ऋतुओं में मनुष्य को अपनी भोजनचर्या किस प्रकार रखनी चाहिए – इसका विवेचन किया गया है। शिशिर ऋतु का वर्णन करते हुए महर्षि चरक कहते हैं –

हेमन्त तथा शिशिर दोनों ऋतुएँ लगभग समान ही हैं, शिशिर में हेमन्त से थोड़ी-सी ही भिन्नता है, वह यह कि – खाने पीने से तथा शीतल वायु से इस समय रूखापन अधिक हो जाता है। अतः ऐसे घर के अन्दर रहना चाहिए जिससे तेज वायु कष्टदायक न हो और भोजन तथा पेय पदार्थ भी चिकनाईयुक्त अधिक लेने चाहिएँ जिससे रूखापन न होने पाए।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

(ख) मयूरवैर्जगतः स्नेहं पेपीयते रविः।
उत्तर-
प्रसंग – प्रस्तुत श्लोकांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भास्वती – प्रथमो भागः के अध्याय ‘ऋतुचर्या’ में से उद्धृत किया गया है। यह अध्याय महर्षि चरक द्वारा प्रणीत ग्रन्थ ‘चरक संहिता’ में से संकलित है। चरक संहिता आयुर्वेद शास्त्र का प्रसिद्ध ग्रन्थ है। इस अE याय में महर्षि चरक ने विभिन्न ऋतुओं में अपनी भोजनचर्या किस प्रकार रखनी चाहिए – इस विषय का बहुत सुन्दर विवेचन किया है। ग्रीष्म ऋतु में सूर्य किस प्रकार अपनी किरणों से संसार का स्नेह पीता रहता है – इसका विवेचन किया गया है यहाँ।

सूर्य अपनी तीव्र किरणों से ग्रीष्म ऋतु में जगत के स्नेह को पीता रहता है। सूर्य की गर्म किरणें संसार के रस को पीती रहती हैं अतः इस समय पेय पदार्थों का अधिक सेवन करना चाहिए जिससे शरीर में रस की कमी न होने पाए।

(ग) शरत्काले प्रशस्यन्ते प्रदोषे चेन्दुरश्मयः।
प्रसंग – प्रस्तुत श्लोकांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भास्वती प्रथमो-भागः’ के अध्याय ‘ऋतुचर्या’ में से अवतरित है। यह अध्याय महर्षि चरक.द्वारा रचित ग्रन्थ ‘चरकसंहिता’ में से संकलित है। प्रस्तुत अध्याय में महर्षि चरक ने विभिन्न ऋतुओं में अपनी भोजनचर्या को किस प्रकार रखना चाहिए – इस विषय का सुन्दर विवेचन किया है। शरत्काल में क्या-क्या सेवनीय है – इस विषय का वर्णन करते हुए महर्षि कहते हैं –

शरत्काल में रात्रि चन्द्रमा की किरणों का सेवन करना अत्यन्त हितकर होता है। अतः शरदृतु में रात्रि में कुछ समय के लिए चन्द्रमा की किरणों का सेवन अवश्य करना चाहिए।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 4.
ऋतुचर्यापाठम् अधिकृत्य प्रत्येकम् ऋतौ किं किं करणीयम् किं किं च न करणीयम् इति मातृभाषया सुस्पष्टयत –
उत्तर-
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 19
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 20

प्रश्न 5.
अधोलिखितानि विग्रहपदानि आधृत्य समस्तपदानि रचयत –
यथ –
नवम् ओदनम् = नवौदनम् कर्मधारय समास
उत्तर-
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 21

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 6.
अधोलिखितपदानामर्थमेलनं क्रियताम –
उत्तर-
पदानि – अर्थाः
(क) श्लेष्मा = कफ
(ख) रौक्ष्यम् = रूखापन
(ग) निवातम् = हवारहित
(घ) निचितः = बढ़ा हुआ (जमा हुआ)
(ङ) पवनः = वात
(च) गुरु: = भारी
(छ) लघु = हल्का
(ज) वासांसि = वस्त्र

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानाम् विपरीतार्थकपदैः सह मेलनं क्रियताम् –
उत्तर-
पदानि विपरीतार्थकपदानि
(क) उष्णम् = शीतम्
(ख) सीदति = प्रसीदति
(ग) तप्तानाम् = शीतानाम्
(घ) गुरु = लघु
(ङ) अल्पम् = अधिकम्

प्रश्न 8.
प्रकृति प्रत्ययं च योजयित्वा पदनिर्माणं कुरुत –
उत्तर-
(क) हेमन्त + ठक् = हैमन्तिकः।
(ख) स्निम् + क्त = स्निग्धम्।
(ग) भुज् + तव्यत् = भोक्तव्यम्।
(घ) सेव् + यत् = सव्यम्. सेव्यम्.।
(ङ) शरद् + अण् = शारदम्।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

योग्यताविस्तारः

(क) चरकसंहिता
संकेत – चरकसंहिता आयुर्वेदशास्त्रस्य ………………………………. सिद्धिस्थानं चेति।
उत्तर-
हिन्दी-अनुवाद – चरकसंहिता आयुर्वेदशास्त्र का प्रसिद्ध ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में आठ स्थान (अध्याय) हैं – सूत्रस्थान, निदानस्थान, विमानस्थान, शरीरस्थान, इन्द्रियस्थान, चिकित्सास्थान, कल्पस्थान तथा सिद्धिस्थान।

Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या Summary Translation in Hindi and English

1. गोरसानिक्षुविकृतीर्वसा तैलं नवौदनम्।
हेमन्तेऽभ्यस्यतस्तोयमुष्णं चायुर्न हीयते।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 1
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 2

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – हेमन्त ऋतु में दूध के बने पदार्थ (दही, मलाई रबड़ी आदि) गन्ने के रस से निर्मित पदार्थ (गुड़, राब, चीनी, मिश्री आदि), चरबी, तेल तथा नए चावल का बना भात खाना चाहिए। (इसके अतिरिक्त) हेमन्त ऋतु में गर्म जल से स्नान तथा गर्म जल के पान. का अभ्यास करने वाले मनुष्य की आयु क्षीण नहीं होती।

Meaning in English – One should eat milk-products, things made by sugarcane juice, fats, oils and boiled new rice in cold season. Moreover, the age of that person is not declined who takes bath with hot water and who drinks also hot water in cold season.

2. वर्जयेदन्नपानानि वातलानि लघूनि च।
प्रवातं प्रमिताहारमुदमन्थं हिमागमे।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 3

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – हेमन्त ऋतु में वातवर्धक तथा हल्का खाना-पीना, तेज वायु का प्रवाह, अल्पाहार तथा सत्तू आदि खाना छोड़ देना चाहिए।

Meaning in English – One should avoid eating and drinking of the things that cause rheumatism, light food, direct wind, small quantity of food and food made of parched grains also in cold season.

3. हेमन्तशिशिरौ तुल्यौ शिशिरेऽल्प विशेषणम्।
रौक्ष्यमादानजं शीतं मेघमारुतवर्षजम।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 4

सरलार्थ – सामान्यतः हेमन्त और शिशिर – दोनों ऋतुएँ प्रायः समान होती हैं, किन्तु शिशिर में इतनी विशेषता होती है कि खाने-पीने से उत्पन्न होने वाली रूक्षता, मेघवात (मानसून की वायु) तथा वर्षा के कारण बढ़ा हुआ शीत अधिक होता है।

Meaning in English-Generally both Hemanta and Shishira (cold and winter) seasons are similar in nature but in winter there is much cold due to ruggedness which is caused by eating and drinking and monsoon-winds, rains.

4. तस्माद्धैमन्तिकः सर्वः शिशिरे विधिरिष्यते।।
निवातमुष्णं त्वधिकं शिशिरे गृहमाश्रयेत्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 5

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – इसलिए शिशिर ऋतु में भी हेमन्त की ही विधियों का पालन करना चाहिए तथा ऐसे गर्म घर में रहना चाहिए जिसमें विशेष रूप से वायु का सीधा प्रवेश न होता हो।

Meaning in English – So, one should follow similar precautions in winter season which are followed in cold-season and one should reside in a warm house in which air does not enter directly.

5. कटुतिक्तकषायाणि वातलानि लघूनि च।
वर्जयेदन्नपानानि शिशिरे शीतलानि च।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 6

सरलार्थ – शिशिर ऋतु में कटु, तिक्त तथा कसैले रस वाले पदार्थ, वातवर्धक, हल्के तथा ठंडे अन्न और पेय पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

Meaning in English – One should avoid taking bitter, spicy and pungent things and should also avoid eating and drinking of cold, light and suxh things which may cause rheumatism in winter season.

6. वसन्ते निचितः श्लेष्मा दिनकृद्भाभिरीरितः।
कायाग्निं बाधते रोगांस्तत प्रकुरुते बहून्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 7

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – हेमन्त काल में सञ्चित (इकट्ठा) हुआ कफ वसन्त काल के आने पर सूर्य की किरणों से पिघलकर (शरीर में फैलकर) जठराग्नि को मन्द कर देता है तथा अनेक प्रकार के रोगों को उत्पन्न कर देता है।

Meaning in English – The phlegm which was increased in winter season gets urged by the sun-rays as spring-season comes and reduces the fire of the stomach. Thus various diseases are caused by it.

7. तस्माद्वसन्ते कर्माणि वमनादीनि कारयेत्।
गुर्वम्लस्निग्धमधुरं दिवास्वप्नं च वर्जयेत्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 8

सरलार्थ – इसलिए वसन्त ऋतु में (कफ की शुद्धि के लिए) वमन क्रियाएँ आदि (पञ्चकर्म) करनी चाहिएँ तथा वसन्त ऋतु में भारी पदार्थ, अम्ल पदार्थ, स्निग्ध तथा मधुर पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए और दिन में सोना भी नहीं चाहिए।

Meaning in English – Therefore one should follow (five types of) activities like vomitting etc. to clear the phlegm. One should also avoid heavy food, acids, oily-food and sweets during spring season. One should also avoid day-dreaming.

8. मयूरवैर्जगतः स्नेहं ग्रीष्मे पेपीयते रविः।
स्वादु शीतं द्रवं स्निग्धमन्नपानं तदा हितम्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 9
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 10

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – ग्रीष्मकाल में सूर्य अपनी तीव्र किरणों से जगत के स्नेह को पीता रहता है। इसलिए इस समय मधुर, शीतल, द्रव तथा स्निग्ध खान-पान हितकर होता है।

Meaning in English – In summer-season the sun takes again and again the oily substance of the world by its strong rays. Therefore, during this season eating and drinking of sweet, cold, liquid and oily things is good for health.

9. घृतं पयः सशाल्यन्नं भजन् ग्रीष्मे न सीदति।
लवणाम्लकटूष्णानि व्यायामं च विवर्जयेत्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 11

सरलार्थ – ग्रीष्म ऋतु में घी, दूध तथा धान सहित अन्न का सेवन करता हुआ व्यक्ति कष्ट नहीं पाता किन्तु नमकीन, अम्ल कटु तथा चरपरे पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए तथा व्यायाम भी नहीं करना चाहिए।

Meaning in English – A man does not suffer who takes ghee, milk and paddy corns in summer season but one should avoid salty, sour, acids and spicy things. One should also avoid exercise.

10. भूवाष्पान्मेघनिस्यन्दात् पाकादम्लाज्जलस्य च।
वर्षास्वग्निबले क्षीणे कुप्यन्ति पवनादयः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 12

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – वर्षा ऋतु में भूमि से निकलने वाले वाष्पों से पानी बरसने से तथा जल का अम्लविपाक होने से जब अग्नि का बल क्षीण हो जाता है तथा वातादि दोष प्रकुपित हो जाते हैं।

Meaning in English – In the rainy season the strength of heat is declined by the vapour which come out of the earth and by falling of rain water. Then the diseases which are caused by wind etc. are intensified.

11. व्यक्ताम्ललवणस्नेहं वातवर्षाकुलेऽहनि।
विशेषशीते भोक्तव्यं वर्षास्वनिलशान्तये।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 13
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 14

सरलार्थ – वर्षा ऋतु में जिन दिनों तेज वायु तथा वर्षा होने से विशेष ठंड हो उन दिनों वातजन्य रोगों की शान्ति के लिए विशेष रूप से अम्ल और लवण युक्त तथा स्निग्ध (घी-तेल में पकाया हुआ) भोजन करना चाहिए।

Meaning in English – In rainy season one should have meals containing sourness and salt specially and should also have oily foods to pacify the diseases caused by wind when it is very cold due to strong winds and rains.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

12. वर्षाशीतोचिताङ्गानां सहसैवार्करश्मिभिः।।
तप्तानामाचितं पित्तं प्रायः शरदि कुप्यति।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 15

सरलार्थ – वर्षा ऋतु में शरीर वर्षाकालीन शीत का अभ्यस्त रहता है और ऐसे शरीर के अंगों पर जब सहसा शरद् ऋतु के सूर्य की किरणें पड़ती हैं तो शरीर के अवयव संतप्त हो जाते हैं तथा वर्षा ऋतु में सञ्चित हुआ पित्त शरद् ऋतु में प्रकुपित हो जाता है।

Meaning in English – In rainy season the body becomes used to the cold of this season. Then the bright rays of the sun become untolerable for the body-parts. Thus the bile-juice wich is accumulated in rainy season gets intensified in the Autumn.

13. तथान्नपानं मधुरं लघु शीतं सतिक्तकम्।
पित्तप्रशमनं सेव्यं मात्रया सुप्रकाङ्क्षितैः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 16

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – शरद् ऋतु में अच्छी तरह भूख लगने पर रस में मधुर, लघु गुण वाला, शीत गुण वाला, तिक्त रस वाला तथा पित्त को शान्त करने वाला अन्न तथा पान का मात्रानुसार सेवन करना चाहिए।

Meaning in English – In Autumn one should have those foods and drinks only which are sweet in taste, light, spicy and which can pacify acidity but in required quantity and when one is really hungry only.

14. शारदानि च माल्यानि वासांसि विमलानि च।
शरत्काले प्रशस्यते प्रदोषे चेन्दुरश्मयः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 17
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 ऋतुचर्या 18

सरलार्थ – शरद ऋतु में उत्पन्न फलों की मालाओं, पवित्र वस्त्र तथा रात्रि में चन्द्रमा की किरणों का सेवन श्रेयस्कर माना जाता है।

Meaning in English – In Autumn putting on garlands (of flowers) that grow in that season, clean clothes and consuming rays of moon during night are considered good.

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NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

Bhaswati Class 11 Solutions Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः

अभ्यासः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां प्रश्नानामुत्तराणि संस्कृतभाषया देयानि-

(क) अयं पाठः कस्माद् ग्रन्थात् संकलितः?
उत्तर:
अयं पाठः सत्याग्रहगीता नाम ग्रन्थात् संकलितः।

(ख) महात्मा (गांधी) सत्याग्रहाश्रमं कस्याः (नद्याः) तीरे स्थापयामास?
उत्तर:
महात्मा (गांधी) सत्याग्रहाश्रमं सबर्मत्याः (नद्याः) तीरे स्थापयामास।

(ग) आश्रमवासिनां कृते महात्मा कीदृशः आसीत्?
उत्तर:
आश्रमवासिनां कृते महात्मा पितेव आसीत्।

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः

(घ) अस्मिन् पाठे महात्मनः तुलना केन सह कृता?
उत्तर:
आश्रमवासिनां कृते महात्मा पितेव आसीत्।

(ङ) समृद्धिः केषां जायते?
उत्तर:
ये राज्यशासकाः धर्मेण चरन्ति तेषां समृद्धिः जायते।

(च) सत्याग्रहाश्रमः इति नाम केन कथं च दत्तम्?
उत्तर:
सत्यानुयायियुक्ताया विनीतवसतेश्च स्वयं महात्मना गान्धिना एव सत्याग्रहाश्रम इति नाम दत्तम्।

(छ) अस्य पाठस्य रचयित्री का?
उत्तर:
अस्य पाठस्य रचयित्री श्रीमती क्षमाराव अस्ति।

(ज) महात्मनः व्रतानि कानि आसन्?
उत्तर:
अहिंसा, सत्यम्, अस्तेयम्, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रहः, स्वदेशवस्तुनिष्ठा, निर्भीतः, रुचिसंयम, अन्त्यजानां समुद्धारः च महात्मनः एतानि नव व्रतानि आसन्।

(झ) महात्मा केषां दोषैः उपवासमकरोत्?
उत्तर:
अन्येषां दोषैः महात्मा गान्धी उपवासमकरोत्।

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः

(ञ) किम् पश्यतः गान्धिनः गुणैः जनाः तस्य पदानुगाः जाताः?
उत्तर:
आत्मवत् सर्वभूतानि पश्यतः गान्धिनः गुणैः जनाः तस्य पदानुगाः जाताः।

प्रश्न 2.
अधोलिखित श्लोकाना सान्वय मातृभाषया अर्थम् लिखत-

(क) अहिंसा सत्यमस्तेय ………………. निर्भीतरुचिसंयमः।।
उत्तर:
अन्वयः – अहिंसा, सत्यम्, अस्तेयम्, ब्रह्मचर्य-अपरिग्रही, स्वदेशवस्तुनिष्ठा, निर्भीत, रुचिसंयमः च।
अर्थ – अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, ब्रह्मचर्य का पालन, धन का सञ्चय न करना, स्वदेशी वस्तुओं पर निष्ठा, निर्भयता तथा रुचि स्वाद पर नियन्त्रण।

(ख) साक्षात् सत्यप्रदीपोऽयं ……………… हृदयान्मोहजं तमः।।
उत्तर:
अन्वयः – अयम् साक्षात् सत्यप्रदीपः स्वबन्धूनाम् हृदयात् मोहजम् तमः अपाकुर्वन् अखिलभारते दीप्यते।
अर्थ – अपने बन्धुओं के हृदय से मोह से उत्पन्न अन्धकार को दूर करता हुआ सत्य का यह दीपक साक्षात् रूप से सम्पूर्ण भारत में प्रदीप्त हो रहा है।

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः

(ग) अधर्ममपि दृष्ट्वा ……………….. तत् प्रतिपद्यते।
उत्तर:
अन्वयः – यः अधर्मम् अपि दृष्ट्वा प्रतिबद्धं न वाञ्छति, यः सत्ये सति अपि भीत्या च तत् न प्रतिपद्यते।
अर्थ – जो व्यक्ति अधर्म को देखकर भी उसे रोकने का प्रयत्न नहीं करता तथा सत्य को जानता हुआ भी भय के कारण उसे स्वीकार नहीं करता।

प्रश्न 3.
अधोलिखितपदानां परिचयं दत्त-
उत्तर:

  1. समुद्धारः = सम् + उद् उपसर्ग, हृ धातु + घञ् प्रत्यय।
  2. प्रतिबद्धुम् = प्रति उपसर्ग, बध् धातु + तुमुन् प्रत्यय।
  3. समृद्धिः = सम् उपसर्ग, ऋध् धातु + क्तिन् प्रत्यय।
  4. ध्यायन् = ध्यै धातु, शतृ प्रत्यय।
  5. दृष्ट्वा = दृश् धातु, क्त्वा प्रत्यय।
  6. समाश्रित्य = सम् + आ उपसर्ग, श्रि धातु ल्यप् प्रत्यय।
  7. दत्तम् = दा धातु + क्त प्रत्यय।
  8. मत्वा = मन् धातु + क्त्वा प्रत्यय।

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः

प्रश्न 4.
सविग्रहम् समासनाम लिखत-
उत्तर:

  1. सत्याग्रहाश्रमम् = सत्यस्य आग्रहः यस्मिन् तत् सत्याग्रहाश्रमम् बहुव्रीहि समास।
  2. महात्मा = महान् आत्मा यस्य सः; बहुव्रीहि समास।
  3. ब्रह्मचर्यापरिग्रही = ब्रह्मचर्यः च अपरिग्रहश्च इति: द्वन्द्व समास।
  4. सुकलत्रः = शोभनं कलत्रं यस्य सः बहुव्रीहि समास।
  5. निष्फलम् = नास्ति फलं यस्य तत्; बहुव्रीहि समास।

प्रश्न 5.
सत्याग्रहमहत्त्वमधिकृत्य मातृभाषया दश वाक्यानि लिखत-
उत्तर:

  1. सत्याग्रह को जीवन में धारण करने से मनुष्य निर्भीक बनता है।
  2. सत्याग्रह से जीवन में आत्मविश्वास उत्पन्न होता है।
  3. सत्याग्रह के आचरण से ही जीवन सार्थक होता है।
  4. सत्याग्रह से जीवन में अद्भुत् बल आता है।
  5. सत्याग्रह से लोग वश में आ जाते हैं।
  6. सत्याग्रह से उत्साह तथा धैर्य उत्पन्न होता है।
  7. सत्याग्रह से कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है।
  8. सत्याग्रह से मन, वचन, काया तथा कर्मों को भी शक्ति प्राप्त होती है।
  9. सत्याग्रह का आचरण करने वाला व्यक्ति सदा विजयी एवं यशस्वी होता है।
  10. सत्याग्रह से बढ़कर संसार में अन्य कोई गुण नहीं है।

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प्रश्न 6.
अधोलिखित शब्दानां सन्धिच्छेदं कुरुत-
उत्तर:

  1. नवैतानि = नव + एतानि।
  2. मिताशी = मित + आशी।
  3. मुनिर्बुद्धः = मुनिः + बुद्धः।
  4. दीप्यतेऽखिलभारते = दीप्यते + अखिलभारते।
  5. सत्यपि = सति + अपि।
  6. पितेव = पिता + इव।
  7. व्यवर्धन्त = वि + अवर्धन्त।
  8. सर्वदाप्याचरिष्यामः = सर्वदा + अपि + आचरिष्यामः।

प्रश्न 7.
रिक्तस्थानानि पूरयत-
उत्तर:

  1. ततस्तीरे सबर्मत्या नाम्ना सत्याग्रहाश्रमः।
  2. अहिंसा सत्यमस्तेयं ब्रह्मचर्यापरिग्रही।
  3. अधर्ममपि दृष्ट्वा यः प्रतिबद्धं न बाञ्छति।
  4. सत्ये सत्यपि यो भीत्या न च तत् प्रतिपद्यते।
  5. आश्रमाद् बहिरन्यत्र लोकानां कलहेऽपि सः।
    स्वमेव कारणं मत्वा तत् कलङ्कन दूयते।।

Bhaswati Class 11 Solutions Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः Summary Translation in Hindi and English

1. ततस्तीरे सबर्मत्या नाम्ना सत्याग्रहाश्रमः।
महात्मा स्थापयामास सदनं सानुयात्रिकः।।

शब्दार्थ् (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 1

सरलार्थ – अपने अनुयायियों के साथ महात्मा गांधी ने साबरमती नदी के तट पर सत्याग्रहाश्रम नामक रहने का स्थान बनाया।

Meaning in English:
Mahatma Gandhi made Satyagrahashrama, a place of living with his followers, on the bank of the river Sabarmati.

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः

2. सत्यमेव प्रमाणं यन्मनोवाक्कायकर्ममिः।
तस्मिन् पुण्यनिवासे तद् यथार्थो हि स आश्रमः।।

शब्दार्थ (Word-meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 2
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 2.1

सरलार्थ – उस पवित्र आश्रम में मन, वचन, शरीर तथा कर्मों से सत्य का आचरण होता था, अतः वह आश्रम अपने नाम को यथार्थ सिद्ध करने वाला था।

Meaning in English:
In that sacred Ashrama, the truth was followed by thoughts, speech, body, and actions, so that Ashrama proved its name to be true.

3. अहिंसा सत्यमस्तेयं ब्रह्मचर्यापरिग्रहौ।
स्वदेशवस्तुनिष्ठा च निर्मीतरुचिसंयमः।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 3

सरलार्थ- अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, ब्रह्मचर्य का पालन, अधिक धन का संचय न करना, स्वदेशी वस्तुओं पर निष्ठा, निर्भयता तथा रुचि-स्वाद पर नियंत्रण।

Meaning in English:
Non-violence, truth, not to steal, control over the senses, not to collect much wealth, to have faith in the things made in one’s own country, fearlessness, control over taste.

4. अन्त्यजानां समुद्धारो नवैतानि व्रतानि हि।
भारतोत्कर्षसिद्ध्यर्थमाश्रमस्य महात्मनः।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 4
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 4.1

सरलार्थ- तथा हरिजनों का उद्धार – भारत को श्रेष्ठ बनाने के लिए महात्मा गांधी के आश्रम का लक्ष्य इन नौ व्रतों को सिद्ध करना था।

Meaning in English:
and uplifting the Harijans – Mahatma Gandhi established these nine vratas to make India a great country.

5. निर्ममो नित्यसत्यवस्थो मिताशी सुस्मिताननः।
सुकलत्रः शिशुप्रेमी पितेवाश्रमवासिनाम्।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 5

सरलार्थ – महात्मा गांधी निस्स्वार्थ, सर्वदा सत्त्वगुणसम्पन्न, कम भोजन करने वाला, प्रसन्न मुख वाला, सुन्दर पत्नी-युक्त, बच्चों से प्रेम करने वाला तथा आश्रम में रहने वालों के लिए पिता के समान थे।

Meaning in English:
Mahatma Gandhi was liberal and endowed with good qualities. He used to cat a small quantity of food and was agreeable looking. He had a good wife. He used to love children. So he was respected as a father by the people who lived in that Ashrama.

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः

6. ध्यायन् क्लेशान् स्वबन्धूनां तद्धितैकपरायणः।
विराजते मुनिर्बुद्धो बोधिदुमतले यथा।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 6

सरलार्थ – अपने बन्धु-बान्धवों के दुःखों का ध्यान रखने वाले तथा केवल उनके हित की चिंता करने वाले महात्मा गांधी ऐसे विराजमान होते थे जैसे बोधिवृक्ष के नीचे महात्मा बुद्ध विराजमान होते थे।

Meaning in English:
Mahatma Gandhi always took care of the troubles of his friends and relatives and also of their welfare only. He looked beautiful as Lord Buddha looked beautiful sitting under the Bodhi tree.

7. साक्षात्सत्यप्रदीपोऽयं दीप्यतेऽखिलभारते।
स्वबन्धूनामपाकुर्वन् हृदयान्मोहजं तमः।।

शब्दार्थ (Word-meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 7

सरलार्थ – अपने बन्धुओं के हृदयों से मोह से उत्पन्न अन्धकार को दूर करता हुआ सत्य का यह दीपक साक्षात् रुप से सम्पूर्ण भारत में प्रदीप्त हो रहा है।

Meaning in English:
Removing darkness caused by ignorance from the hearts of his friends and relatives, he is shining like a real lamp of truth throughout the entire India.

8. बलं सर्वबलेभ्योऽपि सत्यमेवातिरिच्यते।
सत्यवानबलः श्रेयान् सबलात् सत्यवर्जितात्।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 8

सरलार्थ – सभी बलों में सत्य का बल सर्वश्रेष्ठ है अतः सत्यहीन बलशालियों में। बलहीन सत्यवान् भी श्रेयस्कर है।

Meaning in English:
The power of truth is greater than all other powers. so a weak person who follows the path of truth in life is greater than a powerful person who does not follow the path of truth.

9. तद् ये चरन्ति धर्मेण प्रजा वा राज्यशासकाः।
समृद्धिर्जायते तेषामन्येषां तु क्षयो धुवः।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 9

सरलार्थ – इसलिए जो राजा या प्रजा धर्मपूर्वक आचरण करते हैं उनकी सदा उन्नति होती है तथा अन्य लोगों की निश्चित रूप से अवनति होती है।

Meaning in English:
So the people or the administrators who follow the path of righteousness always make progress but others certainly face downfall.

10. इति तत्रभवान् गान्धीराख्याति सहवासिनः।
अनुयायिजनांश्चान्यान् वचसा लेखतोऽपि वा।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 10

सरलार्थ – ऐसा महात्मा गांधी अपने भाषणों तथा लेखों से अपने साथियों, अनुयायियों तथा अन्य लोगों को समझाते हैं।

Meaning in English:
Mahatma Gandhi thus explains to his friends, followers and other people through his speeches and written articles.

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः

11. महात्मा प्राह-
अधर्मपि दृष्ट्वा यः प्रतिबद्धं न वाञ्छति।
सत्ये सत्यपि यो भीत्या न च तत् प्रतिपद्यते।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 11

सरलार्थ : महात्मा गांधी बोले-
जो व्यक्ति अधर्म को देखकर भी उसे रोकने का प्रयत्न नहीं करता तथा सत्य को जानता हुआ भी भय के कारण उसे स्वीकार नहीं करता………….

Meaning in English:
Mahatma then said-
He who looks injustice and still does not try to check it and he who knows truthfulness but still being frightened do not accept it ……………

12. क्लीबयोरुभयोश्चापि निष्फल जीवन तयोः।
स्वार्थनाशभयाद् यत् तौ रक्षतोऽनृतजीवनम् ।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 12

सरलार्थ – ऐसे दोनों नपुंसको का जीवन निष्फल है। अपने स्वार्थ के नष्ट होने के भय से ये दोनों अपने झूठे जीवन की रक्षा करते हैं।

Meaning in English:
The life of both of those cowards is useless. Due to fear of losing their self-interest both of them protect their worthless-life.

13. हिंसामपि समाश्रित्य वरं मृत्युमुखे गतम्।
न पुनः स्वात्मरक्षार्थ कृतं निन्द्यं पलायनम्।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 13

सरलार्थ – हिंसा का आश्रय लेकर मृत्यु के मुख में गिरना श्रेयस्कर है किन्तु अपनी रक्षा के लिए वहाँ से भागना निन्दनीय नहीं है।

Meaning in English:
It is always desirable to follow death than to follow violence but it is not blamable to run away from there for the sake of self-protection.

14. करोति मनसा हिंसा स हि भीरुः पलायिता।
आत्मनो मृत्युकातर्यादात्महिंसा करोति च।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 14

सरलार्थ – जो मन से भी हिंसा करता है वह कायर तथा सच्चाई से भागने वाला होता है और वह अपनी मृत्यु के भय से आत्महिंसा ही करता है।

Meaning in English:
He is really a coward and runs away from truthfulness who troubles others by thoughts even and he hurts himself due to fear of his death.

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः

15. अत एव मया दत्तं नाम सत्याग्रहाश्रमः।
सत्यानुयायियुक्ताया विनीतवसतेर्मम।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 15

सरलार्थ – सत्य के अनुयायियों से युक्त होने के कारण तथा सज्जनों की बस्ती होने के कारण ही मैंने इस आश्रम को सत्याग्रहाश्रम का नाम दिया है।

Meaning in English:
I have given the name Satyagrahashrama to this hermitage as it is endowed with the followers of truth and as it is an inhabited place of the good people.

16. इति सत्यादिधर्माणाममोघं बलमद्भुतम्।
वर्णयन् ग्राहमामास व्रतानि सुबहून् गुरुः।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 16

सरलार्थ – इस प्रकार सत्यादि धर्मों के आचरण में सार्थक तथा अद्भुत बल होता है – ऐसा वर्णन करते हुए आचार्य गान्धी जी ने अनेक लोगों को व्रत ग्रहण करवाए।

Meaning in English:
Thus there is fruitful and wonderful power in following truth and such other dharmas (qualities)-explaining thus Gandhiji asked people to follow various religious vows.

17. अपराधे कृतेऽप्यन्यैः सत्यसारे तदाश्रमे।
स्वीकृत्य दोषसर्वस्वमुपवासैस्तपस्यति।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 17

सरलार्थ – सत्य के सार रूप उस आश्रम में अन्य लोगों के द्वारा अपराध किए जाने पर उन दोषों को स्वीकार करके महात्मा गाँधी उपवास करके तपस्या करते थे।

Meaning in English:
When the people committed offenses in that hermitage in which truthfulness was followed, Mahatma Gandhi used to accept their offenses and he used to follow austerity by fasting (by not eating food).

18. आश्रमाद् बहिरन्यत्र लोकानां कलहेऽपि सः।
स्वमेव कारणं मत्वा तत् कलङ्कन दूयते।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 18
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 18.1

सरलार्थ – अन्यत्र आश्रम से बाहर भी लोगों में झगड़ा हो जाने पर वह महात्मा अपने को ही कारण मानकर उस दोष से दुःखी होता था।

Meaning in English:
When some quarrel took place among the people even somewhere else or outside the hermitage, Mahatma Gandhi used to consider himself guilty for that offense and felt sorry for that.

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः

19. आत्मवत्सर्वभूतानि पश्यतोऽस्य पदानुगाः।
गुणैः परवशीभूता व्यवर्धन्त सहसशः।।

शब्दार्थ (Word-meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 19

सरलार्थ – सभी लोगों को अपने समान देखने वाले उस महात्मा के अनुयायी उसके गुणों के वशीभूत होकर हजारों की संख्या में बढ़ने लगे।

Meaning in English:
He considered all the people as his own self. So his followers, being fascinated by his merits, increased in thousands.

20. सर्वदाप्याचरिष्यामः सत्यादिनवकं व्रतम्।
इति जातसमुत्साहै: सधैर्य निश्चितं जनैः।।

शब्दार्थ (Word meanings):
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 20
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 भव्यः सत्याग्रहाश्रमः 20.1

सरलार्थ – अत्यन्त उत्साहपूर्वक तथा धैर्यपूर्वक तब लोगों ने यह निश्चय किया कि “हम सब सदा सत्यादि नौ व्रतों का आचरण करेंगे।

Meaning in English:
Then with great enthusiasm and with firmness people decided that we will always follow these truth and other nine religious vows.

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NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 सूक्तिसुधा

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Bhaswati Sanskrit Class 11 Solutions Chapter 3 सूक्तिसुधा

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

अभ्यासः

प्रश्न 1.
संस्कृतेन उत्तरं देयम् –

(क) अयं पाठ: काभ्यां ग्रन्थाभ्यां संकलितः?
उत्तर-
अयं पाठः चाणक्यनीतेः हितोपदेशात् च संकलितः।

(ख) कुत्र वासः न कर्तव्यः?
उत्तर-
यस्मिन् देशे सम्मानः, वृत्तिः, बान्धवाः, विद्यागमः च न तत्र वास न कारयेत् ।

(ग) बान्धवः कुत्र कुत्र तिष्ठति?
उत्तर-
बान्धवः आतुरे, व्यसने, दुर्भिक्षे, शत्रुसंकटे, राजद्वारे, श्मशाने च तिष्ठति।

(घ) काचः कस्य संसर्गात् मारकती द्युतिं धत्ते?
उत्तर-
काचः काञ्चनस्य ससात् मारकती द्युति धत्ते।

(ङ) प्राज्ञः परार्थे किम् किम् उत्सृजेत्?
उत्तर- प्राज्ञः परार्थे धनानि जीवितं च उत्सजेत।

(च) मूर्खः कथं प्रवीणतां याति? .
उत्तर-
मूर्खः सत्सन्निधानेन प्रवीणतां याति।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

(छ) पुरुषेण के षड् दोषाः हातव्याः?
उत्तर-
निद्रा, तन्द्रा, भयं, क्रोधः, आलस्य, दीर्घसूत्रता चेति षड् दोषाः पुरुषेण हातव्याः।

(ज) जीवलोकस्य षट् सुखानि कानि सन्ति?
उत्तर-
अर्थागमः, नित्यमरोगिता, प्रिया प्रियवादिनी च भार्या, वश्यः पुत्रः, अर्थकरी विद्या । चेति जीवलोकस्य षट् सुखानि सन्ति।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानपूर्तिः क्रियताम् –
उत्तर-
(क) यः आतुरे व्यसने दुर्मिक्षे शत्रुसंकटे राजद्वारे श्मशाने च तिष्ठति सः बान्धवः।
(ख) जीवलोकस्य अर्थागमः, नित्यमरोगिता प्रिया प्रियवादिनी च भार्या, वश्यः पुत्रः, अर्थकरी विद्या च षट् सुखानि भवन्ति।
(ग) मनस्विनः कुसुमस्तबकस्येव इव द्वयी वृत्तिः भवति।
(घ) षड्दोषाः पुरुषेण इह हातव्याः।
(ङ) सन्निमित्तं वरं त्यागो विनाशे नियते सति।

प्रश्न 3.
अधोलिखितयोः पद्यांशयोः मातृभाषया भावार्थ लिखत –

(क) कोऽप्रियः प्रियवादिनाम्।।
उत्तर-
इस श्लोकांश में कवि कहना चाहता है कि प्रिय बोलने वालों के लिए कोई भी अप्रिय (पराया या शत्रु) होता ही नहीं क्योंकि वे सबको अपना समझते हैं, वे सबसे स्नेह करते हैं।

(ख) सन्निमित्तं वरं त्यागो विनाशे नियते सति!
उत्तर-
इस श्लोकांश का भावार्थ यह है कि इस संसार में धन, जीवन आदि सब कुछ नश्वर है, नष्ट होने वाला है। अतः अच्छे प्रयोजन के लिए इनका त्याग कर देना ही अच्छा. है। हमें अपना धन और जीवन दूसरों की भलाई के लिए लगा देना चाहिए।

(ग) सर्वेषां मूनि वा तिष्ठेद् विशीर्येत वनेऽथवा।
उत्तर-
इस श्लोकांश का भाव यह है कि मनस्वी मनुष्य पुष्प माला की तरह या तो सबके सिर पर (गले में) सम्मान प्राप्त करते हैं या फिर लोग उनके स्वभाव से अपरिचित रह जाते हैं तथा जंगल में खिले हुए पुष्पों की तरह वे शाखा पर (लोगों से परिचित बिना हुए) ही मुरझा जाते हैं, नष्ट हो जाते हैं अर्थात् या तो लोग मनस्वी लोगों को जान ही नहीं पाते और यदि जान लेते हैं तो वे सबके सम्मान के पात्र बन जाते हैं।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 4.
क-भागस्थपदैः सह ख-भागस्यार्थानां मेलनं क्रियताम् –
उत्तर-
क – ख
(क) विद्यागमः – विद्याप्राप्तिः
(ख) व्यसने – विपत्ती
(ग) सविद्यानाम् – विदुषाम्
(घ) द्युतिम् – कल्याणम्
(ङ) कुसुमस्तबकस्य – पुष्पगुच्छस्य
(च) मूर्धिन – शिरसि
(छ) भूतिम् – शोभाम्

प्रश्न 5.
उदाहरणानुसारं विग्रहपदानि आधृत्य समस्तपदानि रचयत विग्रहपदानि समस्तपदानि
यथा –
विद्यायाः आगमः = विद्यागमः
उत्तर-
(क) राज्ञः द्वारे = राजद्वारे
(ख) सता सन्निधानेन = सत्संन्निधानेन
(ग) काञ्चनस्य संसर्गात् = काञ्चनसंसर्गात्
(घ) अर्थस्य आगमः = अर्थागमः
(ङ) जीविताय इदम् = जीवितम्
(च) न रोगिता = अरोगिता
(छ) अर्थम् करोति या सा = अर्थकरी

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 6.
अधोलिखितेषु शब्देषु प्रकृतिप्रत्ययं विच्छेदं कुरुत –
उत्तर-
(क) प्राप्ते = प्र आप् + क्त प्रत्यय।
(ख) प्रवीणताम् = प्रवीण शब्द + ता प्रत्यय।
(ग) वृत्तिः = वृत् + क्तिन् प्रत्यय।
(घ) नियते = नि ।यम् + क्त प्रत्यय।
(ङ) हातव्याः = हा + तव्यत् प्रत्यय।

Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 सूक्तिसुधा Summary Translation in Hindi and English

1. यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवाः।
न च विद्यागमः कश्चित् वासं तत्र न कारयेत्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 सूक्तिसुधा 1

सरलार्थ – जिस देश में आदर, आजीविका, सम्बन्धी तथा ज्ञान की प्राप्ति न हो वहाँ किसी को नहीं रहना चाहिए।

Meaning in English – One should not live in that country where there is no respect, no means of livelihood, no relatives and no source of knowledge.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

2. आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षे शत्रुसंकटे।
राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बान्धवः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 सूक्तिसुधा 2

सरलार्थ – जो बीमारी में, आपत्ति के समय, अकाल में, शत्रु से संकट के समय में, राजा के दरबार में तथा श्मशान में साथ रहता है वही (सच्चा) मित्र या सम्बन्धी है।

Meaning in English – A person who stands by in disease, in misfortune, in famine, in problem from an enemy, in the court of the king and in grave is really a true relative or a true friend.

3. कोऽतिभार. समर्थानां किं दूरं व्यवसायिनाम्।
को विदेशः सविद्यानां कोऽप्रियः प्रियवादिनाम्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 सूक्तिसुधा 3

सरलार्थ – बलशाली पुरुषों के लिए बड़ा बोझ क्या है? व्यापारी मनुष्यों के लिए कौन-सा स्थान दूर है? शिक्षितों के लिए कौन-सा स्थान विदेश है? तथा प्रिय बोलने वालों के लिए कौन पराया या शत्रु है?

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

Meaning in English – What is great burden for the strong men? What is far for the hard-working men? Which place is foreign-country for the educated persons and who is not his own (or enemy) for the sweet spoken men (i.e. no one)?

4. काचः काञ्चनसंसर्गात् धत्ते मारकती द्युतिम्।
तथा सत्सन्निधानेन मूर्यो याति प्रवीणताम्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 सूक्तिसुधा 4

सरलार्थ- शीशा सोने का साथ प्राप्त करके पन्ने की शोभा को प्राप्त कर लेता है उसी प्रकार सज्जन की संगति प्राप्त करके मूर्ख कुशल (निपुण) बन जाता है।

Meaning in English – Just as mirror when joined with gold attains beauty of emerald, similarly by the company of the good man foolish also becomes clever.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

5. कुसुमस्तबकस्येव द्वयी वृत्तिर्मनस्विनः।
सर्वेषां मूर्ध्नि वा तिष्ठेद् विशीर्येत वनेऽथवा।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 सूक्तिसुधा 5
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 सूक्तिसुधा 6

सरलार्थ – पुष्प के गुच्छे की तरह मनस्वी मनुष्य की दो प्रकार की स्थिति होती है वह या तो सब लोगों के सिर पर रहता है या फिर वन में ही मुरझा जाता है।

Meaning in English – There are two states of the strong minded man like that of a bunch of flowers : they either attain the highest position (i.e. on the head of the people) or they are desytroyed in the forest only.

6. धनानि जीवितं चैव परार्थे प्राज्ञ उत्सृजेत्।
सन्निमित्तं वरं त्यागो विनाशे नियते सति।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 सूक्तिसुधा 7

सरलार्थ – बुद्धिमान् मनुष्य को दूसरों की भलाई के लिए धन तथा जीवन त्याग देना चाहिए क्योंकि विनाश के निश्चित होने पर अच्छे कारण के लिए त्याग करना श्रेयस्कर है।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

Meaning in English – A clever man should sacrifice his wealth and life for the welfare of others because it is always good to give away something for a good cause when the destruction is certain.

7. षड्दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता।
निद्रा तन्द्रा भयं क्रोधं आलस्यं दीर्घसूत्रता।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 सूक्तिसुधा 8

सरलार्थः – इस संसार में कल्याण चाहने वाले मनुष्य को छ: दोष छोड़ देने चाहिएँ – नींद, सुस्ती, भय, क्रोध, आलस्य तथा देर से कार्य करने की आदत।

Meaning in English – In this world; a man who wants to prosper, should give up these six blemishes namely sleep, nap, fear, anger, laziness and dialatoriness.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

8. अर्थागमो नित्यमरोगिता च प्रिया च भार्या प्रियवादिनी च।
वश्यश्च पुत्रोऽर्थकरी च विद्या षड् जीवलोकस्य सुखानि राजन्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 सूक्तिसुधा 9
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 सूक्तिसुधा 10

सरलार्थ – हे राजन! जीवलोक के ये छः सुख हैं- धन की प्राप्ति, सदा नीरोगता, स्वयं प्रिय तथा प्रिय बोलने वाली पत्नी, आज्ञाकारी पुत्र तथा धन देने वाली विद्या।

Meaning in English – Oh king! These are the six comforts of this world namely continuously attaining wealth, absence of disease, wife sweet herself and who speaks sweet words, an obedient son and wealth giving learning.

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NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः

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Bhaswati Class 11 Solutions Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः

अभ्यासः

प्रश्न 1.
संस्कृतेन उत्तरं दीयताम्-

(क) सुब्बणस्य सहजाभिलाषः कस्मिन् आसीत्?
उत्तर:
सुब्बणस्य सहजाभिलाष सङ्गीते आसीत्।

(ख) पुराणिकशास्त्री केन सह राजभवनम् अगच्छत्?
उत्तर:
पुराणिकशास्त्री पुत्रेण सह राजभवनम् अगच्छत्।

(ग) पुराणिकशास्त्री स्वपुत्रेण किं गापयामास?
उत्तर:
पुराणिकशास्त्री स्वपुत्रेण ‘शुक्लाम्बरधरम् ………’ इत्यादिश्लोक गापयामास।

(घ) पुराणप्रवचनं पृण्वन् सुब्बण्णः महाराजं कथं पश्यति स्म?
उत्तर:
पुराणप्रवचनं श्रृण्वन् सुब्बण्णः महाराजं। सविस्मयं पश्यति स्म।

(ङ) महाराजस्य विस्मयकारणं किम् आसीत्?
उत्तर:
महाराजस्य विस्मयकारणं तस्य सुन्दरं मुखम्, मुखे ब्रहत्तिलकालङ्कारः तत्रापि विशालस्य गण्डस्थलस्य शोभावहं श्मश्रुकूर्चम् इत्यादि आसीत्।

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः

(च) राजा बाल कति वारम् अपश्यत्?
उत्तर:
राजा बाल द्वित्रिवारम् अपश्यत्।

(छ) राजा बालं किम् अपृच्छत्?
उत्तर:
राजा बालमपृच्छत् – किं भवानपि पितृवत् पुराणप्रवचनं करिष्यति।

(ज) स बालः राजानं किं व्याहरत्?
उत्तर:
स बालः राजानं व्याहरत् – ‘अहं पुराणप्रवचनं न करोमि। सङ्गीतं गायामि।

(झ) परितुष्टः राजा बालाय किम् अयच्छत्?
उत्तर:
परितुष्टः राजा बालाय सताम्बूलमुत्तरीयवस्त्रम् अयच्छत्।

(ज) राज्ञः कथनान्तरं शास्त्री तत्पुत्रः च कुत्र अगच्छताम्?
उत्तर:
राज्ञः कथनान्तरं शास्त्री तत्पुत्रः च स्वगृहम् अगच्छताम्।

प्रश्न 2.
रेखाकितानि पदानि आश्रित्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-

(क) सुब्बण्णस्य सङ्गीतेऽमिलाषः राजभवने संवृत्तया सङ्गत्या दृढीबभूव।
उत्तर:
सुब्बण्णस्य सङ्गीतेऽभिलाषः राजभवने संवृत्तया कया दृढीबभूव?

(ख) तच्छुत्वा तत्रत्याः सर्वे पर्यनन्दन्।
उत्तर:
तच्छुत्वा के सर्वे पर्यनन्दन?

(ग) सभागतो राजा पुराणम् आकर्णयति स्म।
उत्तर:
समागतो कः पुराणम् आकर्णयति स्म?

(घ) सुब्बणस्य पितुः पार्श्वे महाराजं सविस्मयं पश्यति स्म।
उत्तर:
सुब्बणस्य पितुः पार्वे महाराज कथ पश्यति स्म?

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः

(ङ) महाराजस्य मुखे तिलकालङ्कारः आसीत्।
उत्तर:
कस्य मुखे तिलकालङ्कारः आसीत्?

(च) राजा बालाय सताम्बूलम् उत्तरीयवस्त्रम् अयच्छत्।
उत्तर:
राजा कस्मै सताम्बूलम् उत्तरीयवस्त्रम् अयच्छत्?

प्रश्न 3.
विशेष्यैः सह विशेषणानि संयोज्य मेलयत-
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः Q3

प्रश्न 4.
आशयं स्पष्टीकुरुत-
(क) अहं पुराणप्रवचनं न करोमि। सङ्गीतं गायामि।
उत्तर:
राजा सोच रहा था कि सुब्बण्ण अपने पिता की तरह पुराणकथा ही करता होगा, अतः उसने स्पष्ट रूप से पूछ ही लिया कि क्या तुम अपने पिता की तरह पुराण कथा ही करते हो। उसके प्रश्न का उत्तर देता हुआ निर्भीक बालक सुब्बण्ण कहता है-
मैं पुराणकथा नहीं करता अपितु मैं तो संगीत गाता हूँ।
इस प्रकार सुब्बण संगीत सुनाता है अन्य कुछ नहीं।

(ख) त्वं मेधावी असि सुष्ठु सङ्गीतं शिक्षित्वा सम्यक् गातुं भवान् अभ्यस्तु।
उत्तर:
संगीत में उसकी रुचि जानकर राजा सुब्बण्ण की संगीत क्षेत्र में योग्यतो को समझ लेते हैं। अतः उसे समझाते हुए कहते हैं-
तुम अत्यन्त निपुण हो। संगीत को तुम भली-भाँति समझ लो, फिर गाने का भी अच्छी तरह अभ्यास करो।
इस प्रकार इस पंक्ति में सुब्बण को गाने का भली भाँति अभ्यास करने के लिए ही प्रेरित किया गया है।

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः

प्रश्न 5.
कोष्ठकशब्दैः सह विभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत-
उत्तर:

  1. एकस्मिन् दिने पुराणिकशास्त्री राजवभवनम् अगच्छत्। (एक)
  2. पितुः पार्श्वे उपविष्टः सुब्बण्णः महाराज सविस्मयं पश्यति स्म। (पित)
  3. राजा बालं सम्बोध्य पर्यपृच्छत्। (बाल)
  4. त्वं मेधावी असि। (मेधाविन्)
  5. पारितोषिकं भवते वयं दास्यामः। (भवत्)

प्रश्न 6.
अर्थ लिखित्वा संस्कृतवाक्येषु प्रयोग कुरुत-
उत्तर:

  1. साकम् (साथ में) – पुत्रः पित्रा साकं राजभवनम् आगच्छत्।
  2. पार्वे (पास में) – सुब्बण्णः पितुः पार्श्वे उपविष्टः आसीत्।
  3. पत्र (पत्ता) – राजा बालाय ताम्बूलपत्रम् अयच्छत्।
  4. सुष्ठु (उचित) – त्वं सुष्टु कथयसि।
  5. सम्यक (भली भाँति) – अस्य शिक्षण सम्यक क्रियताम्।
  6. पुनः (दुबारा) – अस्मिन् विषये पुनः विचार करोतु भवान्।

प्रश्न 7.
पाठात् विलोमपदानि चित्वा लिखत-
उत्तर:

  1. आगत्य = एत्य।
  2. अत्रतयाः = तत्रत्याः।
  3. परागतः = समागतः।
  4. दूरे = पार्वे।
  5. उदतरत् = पर्यपृच्छत्।
  6. प्रारब्धे = अवसिते।
  7. कदा = तदा।
  8. मूर्खः = मेधावी।
  9. असन्तोषः = सन्तोषः।
  10. अल्पम् = अधिकम्।

योग्यताविस्तारः
1. कस्तूरी तिलक ……………. गोपालचूडामणिः ।।
इस पाठ में उल्लिखित इस श्लोक को सस्वर गाने का सब छात्र अभ्यास करें।

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः

2 इस पाठ से राजा की संगीत के प्रति सम्मान की भावना स्पष्ट प्रकट होती है। बालक सुब्बण्ण के संगीत अभ्यास से राजा अत्यन्त सन्तुष्ट होता है तथा उसे और अधिक अच्छी प्रकार से संगीत की शिक्षा को ग्रहण करने के लिए समझाता भी है। वह उसके पिता पुराणिकशास्त्री को भी उसे संगीत शास्त्र में निपुण बनाने के लिए कहता है।

इस प्रकार राजा के द्वारा किए गए बालक के सत्कार से राजा का संगीत के प्रति सम्मान स्पष्ट झलकता है। वह उस संगीतज्ञान को और अधिक उत्कृष्ट करने की सलाह भी देता है।

Bhaswati Class 11 Solutions Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः Summary Translation in Hindi and English

संकेत – सुब्बणस्य सङ्गीते ………… इत्यगदत्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)-
Bhaswati Class 11 Solutions Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः Summary Translation in Hindi and English 1Bhaswati Class 11 Solutions Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः Summary Translation in Hindi and English 2

हिन्दी-अनुवाद:
सङ्गीत में सुब्बण की जो स्वाभाविक इच्छा थी वह एक बार राजभवन में होने वाली सङ्गति से अत्यधिक दृढ़ हो गई। एक दिन अपने पुत्र के साथ पुराणिक शास्त्री ने राजभवन में आकर अंत पुर की स्त्रियों के सम्मुख पुराण की कथा के आरंभ में अपने पुत्र से ‘शुक्लाम्बरधरम् …… इत्यादि श्लोक को गवाया। उस श्लोक को सुनकर वहाँ उपस्थित सब लोग बहुत प्रसन्न हुए। तब कुछ समय पश्चात् राजा वहाँ आया और पुराण की कथा को सुनने लगा। पिता के पास में बैठा हुआ सुष्यण पुराणकथा को कौतुहलपूर्वक सुनता हुआ बीच में आश्चर्य के साथ महाराज की ओर देखने लगा। महाराज का सुंदर मुख, मुख पर विशाल तिलक, विशाल कपोलों को शोभा प्रदान करने वाली दाढ़ी और मूछे – ये सब उसके विस्मय का कारण थीं।

राजा ने भी बालक को दो तीन बार देखकर – यह बालक चतुर है- ऐसा समझ लिया। इस प्रकार पुराण कथा समाप्त हो जाने पर शास्त्री को लक्ष्य करके – ‘यह बालक आपका पुत्र है?” राजा ने उससे यह पूछा। शास्त्री ने उत्तर दिया- जी महाराज! पुनः मुस्कराते हुए राजा ने बालक को सम्बोधिक करके पूछा कया आप भी अपने पिता की तरह पुराण-कथा करेंगे? तब उस बालक ने कहा – नहीं, मैं पुराण-कथा नहीं करता, मैं तो संगीत गाता हूँ। तब राजा बोला – अहा, यह अच्छा है। तो एक गाना सुनते हैं। शीघ्र ही सुब्बण ने – श्री राघव दशरथात्मजम् …………… आदि श्लोक संगीत के साथ सुनाया और उसके अन्त में एक और श्लोक ‘कस्तूरीतिलकम् …. ………….. ‘आदि भी मुझे याद है’ उसने ऐसा कहा।

English Translation:
Subban’s natural desire towards music increased by his association with the king’s palace. Once a Puranik Shastri came with his son to the king’s palace and he started telling the story of Puranas to the queens. But before starting the story he asked his son to sing the shloka- ‘Suklambaradharam …………’ etc. People were very happy to hear that shloka. After some time, the king also came there and sat to hear the story of the Puranas. Subbam was sitting near his father and he was listening to that story anxiously. Meanwhile, he looked towards the king with great surprise. Beautiful face of the king, a big Tilak on his forehead, mustaches, and beard which were adding beauty to his big cheeks – all these things were making him surprised.

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः

The king also looked twice, thrice towards the boy, and understood that this is a clever boy. When the story came to an end, the king asked Shastri – ‘Is this boy your son?’ Shastri replied – ‘Yes, My Lord.’ Again, with a smile, the king asked that boy – will you also tell the story of Purana like your father? That boy replied then-No, sir. I don’t tell the Purana-Katha, I sing-song of music. Then the king said – Aha it’s good. Then we would like to hear a song. Immediately Subbam sang the verse with musical notes- ‘Shri Raghavam Dhasrathatmajam ………….’ etc. At the end of the verse he said I remember another shloka also i.e. “Kasturitilakam …………..’ etc.

संकेत – महाराजस्य ………………. संन्यवर्तेताम्।

शब्दार्थ (Word-meanings)-
Bhaswati Class 11 Solutions Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः Summary Translation in Hindi and English 3

कया आप भी अपने पिता की तरह पुराण-कथा करेंगे? तब उस बालक ने कहा – नहीं, मैं पुराण-कथा नहीं करता, मैं तो संगीत गाता हूँ। तब राजा बोला – अहा, यह अच्छा है। तो एक गाना सुनते हैं। शीघ्र ही सुब्बण ने – ‘श्री राघव दशरथात्मजम् …………. आदि श्लोक संगीत के साथ सुनाया और उसके अन्त में एक और श्लोक कस्तूरीतिलकम् …. …………. ‘आदि भी मुझे याद है उसने ऐसा कहा।

English-Translation:
Subban’s natural desire towards music increased by his association with the king’s palace. Once a Puranik Shastri came with his son to the king’s palace and he started telling the story of Puranas to the queens. But before starting the story he asked his son to sing the shloka – “Suklambaradharam …………” etc. People were very happy to hear that shloka. After some time, the king also came there and sat to hear the story of the Puranas. Subbam was sitting near his father and he was listening to that story anxiously. Meanwhile, he looked towards the king with great surprise. Beautiful face of the king, a big Tilak on his forehead, mustaches, and beard which were adding beauty to his big cheeks – all these things were making him surprised.

The king also looked twice, thrice towards the boy, and understood that this is a clever boy. When the story came to an end, the king asked Shastri – ‘Is this boy your son?’ Shastri replied – ‘Yes, My Lord. Again, with a smile, the king asked that boy – will you also tell the story of Purana like your father? That boy replied then-No, sir. I don’t tell the Purana-Katha, I sing-song of music. Then the king said – Aha it’s good. Then we would like to hear a song. Immediately Subbam sang the verse with musical notes- ‘Shri Raghavam Dhasrathatmajam ………….’ etc. At the end of the verse he said I remember another shloka also i.e. ‘Kasturitilakam …………..’ etc.

संकेत – महाराजस्य …………………. संन्यवर्तेताम्।

शब्दार्थ (Word-meanings)-
Bhaswati Class 11 Solutions Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः Summary Translation in Hindi and English 4 Bhaswati Class 11 Solutions Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः Summary Translation in Hindi and English 5

हिन्दी-अनुवाद:
महाराज को बहुत सन्तोष हुआ। इस प्रकार सन्तुष्ट राजा ने पारितोषिक के रूप में बालक को पान सहित उत्तरीय वस्त्र (कुर्ता या कमीज आदि) देकर कहा – हे पुत्र, तुम अत्यन्त कुशल हो, अच्छी प्रकार संगीत को सीख कर गाने का अभ्यास करो, हम तुम्हें इससे भी अधिक पारितोषिक देंगे। ऐसा कहकर पुनः शास्त्री को लक्ष्य करके कहा – अरे! शास्त्री का पुत्र अत्यन्त निपुण है। इसकी शिक्षा भली भाँति करो। यह अत्यन्त निपुण बनेगा। तत्पश्चात् शास्त्री और उसका पुत्र घर के लिए लौट गए।

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 सड़्गीतानुरागी सुब्बण्णः

English-Translation:
The king was very happy. Thus satisfied by his song. the king gave him a shirt and betel-leaf and said-Oh son! You are very clever. You learn the art of music properly and then practice singing. We will give you many more prizes. Ther’ he said to Shastri – ‘Oh! This son of Shastri is really very clever. His education should be properly organized. He will be an excellent singer.’ Then both Shastri and his son returned to their home.

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