CBSE Class 12

CBSE Class 12 Hindi कार्यालयी पत्र

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CBSE Class 12 Hindi कार्यालयी पत्र

Patra Lekhan Class 12 CBSE 

आज के वैज्ञानिक युग में चाहे दूरभाष, वायरलैस, एस० एम० एस०, एम० एम० एस०, ई-मेल आदि के प्रयोग से दूर स्थित सगे-संबंधियों,
सरकारी-और-सरकारी संस्थानों तथा व्यापारिक प्रतिष्ठानों से पल भर में बात की जा सकती है पर फिर भी पत्र-लेखन का अभी भी हमारे र जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। पत्र-लेखन विचारों के आपसी आदान-प्रदान का सशक्त, सुगम और सस्ता साधन है। पत्र-लेखन केवल
विचारों का आदान-प्रदान ही नहीं है बल्कि इससे पत्र-लेखक के व्यक्तित्व, दृष्टिकोण, चरित्र, संस्कार, मानसिक स्थिति आदि का ज्ञान हो जाता है। पत्र लिखते समय अनेक सावधानियाँ अवश्य ध्यान में रखनी चाहिए जिनमें से कुछ प्रमुख हैं

  • सरल और स्पष्ट भाषा का प्रयोग।
  • स्नेह, शिष्टता और भद्रता का निर्वाह ।
  • पत्र प्राप्त करने वाले का पद, योग्यता, संबंध, सामर्थ्य, स्तर, आयु आदि।
  • अनावश्यक विस्तार से बचाव।
  • विषय-वस्तु की पूर्णता।
  • कड़वे, अशिष्ट और अनर्गल भावों तथा शब्दों का निषेध।

CBSE Class 12 Hindi कार्यालयी पत्र

Karyalay Patra Class 12 CBSE प्रश्न 1.
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ओर से महाराष्ट्र-सरकार को नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए पत्र लिखिए।
उत्तर
रजत शर्मा
सचिव, भारत सरकार
शिक्षा मंत्रालय
दिनांक : 12 मार्च, 20….
सेवा में
सचिव
शिक्षा विभाग
महाराष्ट्र राज्य
मुंबई
विषय-नई शिक्षा नीति लागू करना।
महोदय ।
मुझे आपको यह सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि भारत सरकार के निश्चयानुसार शिक्षा सत्र 20…. से संपूर्ण देश में नई शिक्षा नीति को लागू कर दिया जाए। महाराष्ट्र में भी इस नीति को क्रियान्वित किया जाए तथा इस योजना को लागू करने के लिए किए गए प्रयासों से मंत्रालय को भी परिचित कराया जाए।
आपका विश्वासपात्र
ह० रजत शर्मा
(रजत शर्मा)
सचिव, शिक्षा मंत्रालय।

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Class 12 Hindi Patra Lekhan CBSE  प्रश्न 2.
उपायुक्त, सिरसा की ओर से मुख्य सचिव हरियाणा सरकार को एक पत्र लिखकर बाढ़-पीड़ितों की सहायता के लिए अनुरोध करें।
उत्तर
बी० एस० यादव उपायुक्त,
सिरसा
दिनांक : 16 अगस्त, 20….
सेवा में
मुख्य सचिव
हरियाणा राज्य
चंडीगढ़ विषय-बाढ़-पीड़ितों की सहायता हेतु पत्र
महोदय
(1) मैं आपको सूचित करता हूँ कि इन दिनों हुई भयंकर वर्षा के परिणामस्वरूप सिरसा के आसपास के गाँवों में भीषण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। खड़ी फ़सलें नष्ट हो गई हैं तथा जन-धन और संपत्ति की भी बहुत हानि हुई है। मैंने अन्य जिला अधिकारियों के साथ स्थिति का निरीक्षण भी किया है।

(2) जिला-स्तर पर बाढ़ पीड़ितों की यथासंभव सहायता की जा रही है, जो अपर्याप्त है। आपसे प्रार्थना है कि बाढ़ पीड़ितों को राज्य सरकार की ओर से विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, जिससे वे अपने टूटे-फूटे मकान बना सकें तथा नष्ट हुई फ़सल के स्थान पर अगली फ़सल की तैयारी कर सकें।

(3) बाढ़ के कारण,बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ गया है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी इन बीमारियों पर नियंत्रण करने में पूर्णरूप से सक्षम नहीं हैं। अत: विशेष चिकित्सकों के दल को भी भेजने का प्रबंध करें।
भवदीय
बी० एस० यादव
उपायुक्त, सिरसा

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Class 12 Patra Lekhan CBSE प्रश्न 3.
भारत सरकार के उद्योग मंत्रालय की ओर से हिमाचल प्रदेश सरकार के उद्योग सचिव को राज्य में उद्योग-धंधों को प्रोत्साहित करने के लिए एक पत्र लिखिए।
उत्तर
भारत सरकार
उद्योग मंत्रालय
नई दिल्ली
दिनांक : 22 सितंबर, 20….
श्री पी० एस० यादव
सचिव, उद्योग विभाग, हिमाचल प्रदेश
विषय-उद्योग धंधों को प्रोत्साहित करने हेतु पत्र
प्रिय श्री यादव जी
विगत दिनों हिमाचल प्रदेश के कुछ उद्योगपतियों ने इस मंत्रालय को राज्य में उद्योग-धंधों की दयनीय स्थिति से अवगत कराया। मुझे बहुत दुख हुआ कि उद्योग-धंधों की उपेक्षा के कारण जहाँ हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को आघात पहुँचा है, वहीं देश की प्रगति भी अवरुद्ध हो रही है। इस संबंध में आप व्यक्तिगत रूप से रुचि लें तथा प्रदेश में उद्योग-धंधों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएँ चलाएँ। इस संदर्भ में विस्तृत योजनाएँ आपको अलग से भेजी जा रही हैं। इन योजनाओं को लागू करने में यदि आपको कोई कठिनाई हो तो मुझसे संपर्क कर सकते हैं।
शुभकामनाओं सहित,
आपकी सद्भावी
पूनम शर्मा
शिमला

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Patra Lekhan In Hindi Class 12 CBSE प्रश्न 4.
अपने मोहल्ले में वर्षा के कारण उत्पन्न हुए जल-भराव की समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट करने के लिए नगरपालिका अधिकारी को पत्र लिखिए।
उत्तर:
4/307, जगाधरी गेट
अंबाला
दिनांक : 18 सितंबर, 20….
स्वास्थ्य अधिकारी
नगरपालिका
अंबाला
विषय-जलभराव की समस्या हेतु शिकायती-पत्र।
महोदय
निवेदन यह है कि मैं जगाधरी गेट का निवासी हूँ। यह क्षेत्र सफ़ाई की दृष्टि से पूरी तरह उपेक्षित है। वर्षा के दिनों में तो इसकी और बुरी हालत हो जाती है। इन दिनों प्राय: सभी गलियों में वर्षा का जल भरा हुआ है। नगरपालिका इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही। इस जल-भराव के कारण आवागमन में ही कठिनाई नहीं होती बल्कि बीमारी फैलने का भी खतरा है। आपसे नम्र निवेदन है कि आप स्वयं एक बार आकर इस जल भराव को देखें। तभी आप हमारी कठिनाई को समझ पाएँगे। कृपया इस क्षेत्र से जल निकास का शीघ्र प्रबंध करें। आशा है कि आप मेरी प्रार्थना की तरफ़ ध्यान देंगे।
भवदीय,
महेश बजाज

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Class 12 Hindi Letter Writing CBSE प्रश्न 5.
चुनाव के दिनों में कार्यकर्ता घर, विद्यालयों और मार्गदर्शक आदि पर बेतहाशा पोस्टर लगा जाते हैं। इससे लोगों को होने वाली असुविधा पर अपने विचार व्यक्त करते हुए ‘दैनिक लोक वाणी’ समाचार-पत्र के ‘जनमत’ कॉलम के लिए पत्र लिखिए।
उत्तर:
480, नई बस्ती
चंबा
दिनांक : 22 जनवरी, 20….
संपादक
दैनिक लोकवाणी
चेन्नई
विषय-जगह-जगह राजनीतिक पोस्टर लगाने हेतु शिकायती पत्र।
आदरणीय महोदय
मैं आपके लोकप्रिय पत्र के ‘जनमत कॉलम’ के लिए एक पत्र लिख रहा हूँ। इसे प्रकाशित करने की कृपा करें। आप जानते हैं कि चुनाव के दिनों में कार्यकर्ता बिना सोचे-समझे, विद्यालयों, घरों तथा मार्गदर्शन चित्रों आदि पर अत्यधिक पोस्टर लगा जाते हैं। घर अथवा विद्यालय कोई राजनीतिक संस्थाएँ नहीं। उन पर लगे पोस्टरों से यह भ्रम हो जाता है कि घर तथा विद्यालय भी किसी राजनीतिक दल से संबद्ध है।
इन पोस्टरों से मार्गदर्शन चित्र इस तरह ढक जाते हैं कि अजनबी को रास्ते के बारे में कुछ पता नहीं चलता। इन पोस्टरों को लगाने वालों की भीड़ के कारण आम लोगों को तथा छात्रों को असुविधा होती है। अत: मैं सरकार तथा राजनीतिक दलों का ध्यान इस तरफ़ दिलाना चाहता हूँ। आशा है कि आप लोगों की सुविधा का ध्यान रखते हुए मेरे इस पत्र को प्रकाशित करने का आदेश देंगे।
भवदीय
मोहन मेहता

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कार्यालय पत्र Class 12 CBSE प्रश्न 6.
निकट के शहर से आपके गाँव तक की सड़क का रख-रखाव संतोषजनक नहीं है। मुख्य अभियंता, लोक-निर्माण विभाग को एक पत्र लिखकर तुरन्त कार्यवाही का अनुरोध कीजिए। समस्या के निदान के लिए एक सुझाव भी दीजिए। (A.I., C.B.S.E. 2017)
उत्तर:
515, पटेल नगर
नई दिल्ली।
20 मई, 20…….
सेवा में,
मुख्य अभियंता
लोक निर्माण विभाग
नई दिल्ली।
विषय-निकट के शहर से गाँव तक की सड़क का रख-रखाव के बारे में
मान्यवर,
मैं इस पत्र के माध्यम से निकट के शहर से अपने गाँव तक की सड़क का रख-रखाव करने हेतु आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। हमारे गाँव के निकट नोएडा शहर पड़ता है। नोएडा से गाँव तक की लगभग दस किलोमीटर की सड़क की हालत बहुत बुरी है। गत दस वर्षों से इस सड़क पर कोई विकास कार्य नहीं हुआ है और न ही विभाग ने इसके रख-रखाव की ओर कोई ध्यान दिया है। इसके बीच-बीच में बहुत गहरे गड्ढे हैं। विभाग को इस संबंध में कई बार लिखा जा चुका है। किंतु फिर भी इस सड़क का रख-रखाव संतोषजनक नहीं है। विभाग ने कई बार इसके गड्ढों को भरवाने का काम किया किंतु वे थोड़े दिनों में ही खराब हो गई। आशा है कि आप इस सड़क के रख-रखाव का संतोषजनक हल निकालकर कृतार्थ करेंगे। इसके लिए जरूरी है कि इस सड़क पर आधुनिक तरीके से पुनर्निर्माण करवाया जाए।
धन्यवाद
भवदीय
विश्वजीत

CBSE Class 12 Hindi कार्यालयी पत्र

Patra Lekhan Format Class 12 CBSE प्रश्न 7.
किसी पर्यटन स्थल के होटल के प्रबंधक को निर्धारित तिथियों पर होटल के दो सुइट् (कमरे ) आरक्षित करने का अनुरोध करते हुए पत्र लिखिए। पत्र में उन्हें कारण भी बताइए कि आपने वही होटल क्यों चुना। (A.I., C.B.S.E. 2017)
उत्तर:
श्रीराम कुंज, सीता नगर
देहरादून
29 जून, 20…. .
सेवा में
प्रबंधक महोदय
भारत होटल
मनाली, शिमला
विषय-दो कमरे आरक्षित करने का अनुरोध।
मान्यवर,
मैं अपने परिवार सहित अगले मास की 21-22 तारीख को मनाली की यात्रा करना चाहता हूँ जिसके लिए मुझे आपके सुप्रसिद्ध होटल में दो कमरे आरक्षित करने हैं। मैं आपके होटल में ही दो कमरे आरक्षित करना चाहता हूँ क्योंकि मुझे मेरे मित्र ने इस होटल की विशेषताओं के बारे में बताया था। मुझे आपके आतिथ्यपूर्ण व्यवहार एवं सद्भाव पर पूर्ण विश्वास है। अतः आप अपने होटल में दो दिन हेतु दो कमरे आरक्षित कर कृतार्थ करें।
सधन्यवाद
भवदीय
अक्षयवीर

आवेदन-पत्र

कार्यालयीन पत्र लेखन हिंदी Pdf Class 12 CBSE प्रश्न 8.
कॉलेज प्रबंधक को प्राध्यापक की नौकरी के लिए आवेदन-पत्र लिखिए।
उत्तर:
83, नौरोजी नगर दिल्ली
दिनांक : 12 दिसंबर, 20….
प्रबंधक
गायत्री कॉलेज
नई दिल्ली
विषय-प्राध्यापक की नौकरी हेतु आवेदन पत्र।
मान्यवर महोदय
दिनांक 10 दिसंबर, 20…. के दैनिक ‘हिंदुस्तान’ से ज्ञात हुआ है कि आपके यहाँ हिंदी विषय के तीन प्राध्यापकों के स्थान रिक्त हैं। प्राध्यापक के पद की नियुक्ति के लिए आपने जो शैक्षणिक योग्यताएँ माँगी हैं, मैं उसके लिए अपने आपको पूर्ण समर्थ समझता हूँ। अतः मैं आपकी सेवा में यह प्रार्थना-पत्र भेज रहा हूँ। मेरी शैक्षणिक योग्यता तथा अनुभव का विवरण इस प्रकार है

(1) मैंने 2005 ई० में पंजाब विश्वविद्यालय से हिंदी विषय में एम० ए० प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। सन 2006 में मैंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की योग्यता परीक्षा उत्तीर्ण की है।
(2) मैंने एक वर्ष तक डी० ए० वी० कॉलेज, चंडीगढ़ में अस्थायी रूप से रिक्त प्राध्यापक के पद पर भी कार्य किया है।
(3) स्कूल तथा कॉलेज जीवन में मेरी क्रिकेट तथा बैडमिंटन में विशेष रुचि रही है।
(4) मैंने भाषण तथा वाद-विवाद प्रतियोगिता में भी अनेक बार प्रथम स्थान प्राप्त किया है। आवश्यक प्रमाण-पत्र इस प्रार्थना-पत्र के साथ भेज रहा हूँ। मुझे पूर्ण आशा है कि आप मेरे प्रार्थना-पत्र पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे और मुझे अपनी ख्याति प्राप्त संस्था में काम करने का अवसर प्रदान करेंगे।
धन्यवाद सहित
भवदीय
जगमोहन सहगल क
संलग्न : प्रमाण-पत्रों की प्रतिलिपियाँ

CBSE Class 12 Hindi कार्यालयी पत्र

Class 12 Hindi Patra Format CBSE प्रश्न 9.
दिल्ली नगर-निगम के अध्यक्ष को एक आवेदन-पत्र लिखिए, जिसमें लिपिक के पद के लिए आवेदन किया गया हो।
उत्तर:
4/19, अशोक नगर नई दिल्ली
दिनांक : 15 दिसंबर, 20….
अध्यक्ष
नगर-निगम
दिल्ली
विषय-लिपिक के पद हेतु आवेदन पत्र
मान्यवर महोदय
निवेदन है कि मुझे विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि आपके कार्यालय में एक क्लर्क की आवश्यकता है। मैं इस रिक्ति के लिए अपनी सेवाएँ प्रस्तुत करता हूँ। मेरी योग्यताएँ इस प्रकार हैं
(i) बी० ए० द्वितीय श्रेणी
(ii) टाइप का पूर्ण ज्ञान-गति 50 शब्द प्रति मिनट
(iii) अनुभव-एक वर्ष
(iv) आयु-24वें वर्ष में प्रवेश
मुझे अंग्रेज़ी एवं हिंदी का अच्छा ज्ञान है। पंजाबी भाषा पर भी अधिकार है।
आशा है कि आप मेरी योग्यता को देखते हुए अपने अधीन काम करने का अवसर प्रदान करेंगे। मैं सच्चाई एवं ईमानदारी के साथ काम करने का आश्वासन दिलाता हूँ। योग्यता एवं अनुभव संबंधी प्रमाण-पत्र इस प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न कर रहा हूँ।
धन्यवाद सहित
भवदीय
सुखदेव गोयल
संलग्न : उपर्युक्त

व्यावसायिक-पत्र

पत्र-लेखन कक्षा 12 CBSE प्रश्न 10.
रिक्तियों के लिए समाचार-पत्र में विज्ञापन के प्रकाशन हत पत्र लिखिए।
उत्तर:
रेलवे रोड जालंधर।
दिनांक : 29 सितंबर, 20….
विज्ञापन व्यवस्थापक
दैनिक ट्रिब्यून
चंडीगढ़
विपत्र -विज्ञापन प्रकाशन हेतु पत्र। प्रिय महोदय इस पत्र के साथ एक विज्ञापन का प्रारूप भेज रहा हूँ जिसे कृपया 7 अक्टूबर तथा 14 अक्टूबर के अंकों में प्रकाशित कर दें। आपका बिल प्राप्त होते ही उसका भुगतान कर दिया जाएगा।

विज्ञापन का प्रारूप
आवश्यकता है एक ऐसे अनुभवी सेल्स मैनेजर की जो स्वतंत्र रूप से प्रतिष्ठान के बिक्री काउंटर को सँभाल सके। वेतन ₹1500-2000 तथा निःशुल्क आवास की व्यवस्था। बहुत योग्य तथा अनुभवी अभ्यार्थी को योग्यतानुसार उच्च वेतन भी दिया जा सकता है। निम्नलिखित पते पर
15 नवंबर, 20…. तक लिखें या मिलें —
मल्होत्रा बुक डिपो,
रेलवे रोड, जालंधर शहर।
धन्यवाद,
आपका विश्वासी
एस० के० सिक्का, प्रबंधक।
संलग्न : विज्ञापन

CBSE Class 12 Hindi कार्यालयी पत्र

Karyalay Patra Class 12 CBSE प्रश्न 11.
गलत माल मिलने की शिकायत करते हुए सामान बेचने वाले प्रतिष्ठान ‘क्रीड़ा विहार’ को एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
केंद्रीय विद्यालय
बेंगलुरु
दिनांक : 18 जुलाई, 20….
व्यवस्थापक
‘क्रीड़ा विहार’
जालंधर
विषय-गलत साल की प्राप्ति हेतु शिकायती पत्र।
महोदय
हमने दिनांक 17-1-20…. को सामान की सूची भेजी थी। उस सूची का क्रमांक नं0 713 है। हमने दो दर्जन क्रिकेट के गेंद, 6 बल्ले तथा . 12 रैकेट मँगवाए थे, लेकिन आपने सारा माल गलत भेजा है। लगता है कि यह सामान किसी दूसरी जगह पर जाना था लेकिन आपके कर्मचारी ने भूल से ऐसा कर दिया है। कृपया आप अपना माल वापस मँगवा लें और हमारे सूची के अनुसार हमारा माल शीघ्र भिजवा दें। अतिरिक्त व्यय भार आपको वहन करना होगा।
भवदीय
विकास खन्ना
(प्राचार्य)

CBSE Class 12 Hindi कार्यालयी पत्र

Class 12 Hindi Letter Writing Format CBSE प्रश्न 12.
आपको दिल्ली के किसी पुस्तक-विक्रेता से कुछ पुस्तकें मँगवानी हैं। वी० पी० पी० द्वारा मँगवाने के लिए पत्र लिखिए।
उत्तर:
5/714, तिलक नगर
कटक
दिनांक : 17 नवंबर, 20….
प्रबंधक
मल्होत्रा बुक डिपो
गुलाब भवन
6, बहादुर शाह ज़फ़र मार्ग
नई दिल्ली -110002
विषय-पुस्तकें मँगवाने हेतु पत्र।
महोदय
निम्नलिखित पुस्तकें स्थानीय पुस्तक-विक्रेता से नहीं मिल रहीं, अतः ये पुस्तकें वी० पी० पी० द्वारा शीघ्र भेजने का कष्ट करें। यदि अग्रिम भेजने की आवश्यकता हो तो सूचित करें। पुस्तकों पर उचित कमीशन काटना न भूलें। पुस्तकें नवीन पाठ्यक्रम के अनुसार होनी चाहिए।
1. हिंदी गाइड (कक्षा दस)…… एक प्रति
2. इंगलिश गाइड (कक्षा दस)…… एक प्रति
3. नागरिक शास्त्र के सिद्धांत (कक्षा दस)…… एक प्रति
4. भूगोल (कक्षा दस)….. एक प्रति
5. विज्ञान (कक्षा दस)……एक प्रति
भवदीय
निशा सिंह

CBSE Class 12 Hindi कार्यालयी पत्र

Hindi Class 12 Patra Lekhan Format CBSE प्रश्न 13.
किसी आपराधिक घटना की अपनी सनसनीखेज पड़ताल में कुछ समाचार चैनल जाँच में बाधा डालते हैं और न्यायालयों में मामला पहुँचने से पहले ही आरोपी को अपराधी ठहरा देते हैं। इस प्रवृत्ति पर अपने विचार किसी समाचार-पत्र के संगदक को लिखिए। (Delhi, C.B.S.E. 2016)
उत्तर:
1014, पटेल नगर नई दिल्ली
दिनांक : 15 मार्च, 20…….
सेवा में
संपादक महोदय
दैनिक हिंदुस्तान
नई दिल्ली।
विषय-आपराधिक घटना की पड़ताल में समाचार चैनलों द्वारा जाँच में बाधा डालना। महोदय मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से आपराधिक घटना की अपनी सनसनीखेज पड़ताल में कुछ समाचार चैनलों द्वारा जाँच में बाधा डालने के विषय में अपने विचार संबंधित अधिकारियों तथा जनसमाज तक पहुँचाना चाहता हूँ। गत मास पटेल नगर में एक युवक को कुछ बदमाशों ने गोली से मार डाला था किंतु समाचार चैनलों ने इस घटना की पूर्ण रूप से जाँच-पड़ताल किए बिना ही इसे आत्महत्या करार दे दिया था। संभवतः इस आपराधिक घटना को सनसनीखेज बनाना तथा किसी खोज के बिना किसी को दोषी बनाना। चश्मदीद गवाहों की अनदेखी करके हत्या को आत्महत्या करार नहीं देना चाहिए। ऐसे आपराधिक मामलों की पूर्णतः खोज के पश्चात ही किसी उद्देश्य पर पहुँचना चाहिए। आशा है कि आप मेरे विचारों को अपने पत्र में प्रकाशित कर अनुगृहित करेंगे।
सधन्यवाद
भवदीय
अरुण सागर 1

Patra Lekhan Class 12 Term 2 CBSE प्रश्न 14.
कुछ टी०वी० चैनल वैज्ञानिक चिंतन या तर्क के स्थान पर अंधविश्वास फैलाने वाले कार्यक्रमों का प्रसारण करते हैं। इनके दुष्प्रभावों की चर्चा करते हुए किसी समाचार-पत्र को पत्र लिखकर इस प्रवृत्ति को रोकने का अनुरोध कीजिए। (A.I., C.B.S.E. 2016)
उत्तर:
अखिलेश वर्मा
17/5-रानी झाँसी मार्ग
नई दिल्ली
दिनांक : 26 जून, 20….
सेवा में
संपादक
राष्ट्रवाणी
नई दिल्ली
प्रिय महोदय
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से संबंधित चैनलों के प्रबंधकों, संचार मंत्रालय, टी०वी० सीरियल निर्माता/निर्देशकों तथा अन्य संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकष्ट करना चाहता हूँ कि इन दिनों विभिन्न चैनलों से प्रसारित अधिकांश सीरियलों में पारिवारिक विघटन, हिंसा, अंधविश्वास, रूढ़ियों आदि को अधिक दिखाया जा रहा है। इससे दर्शक वर्ग. पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है तथा देश में हत्या, नरबलि, बलात्कार, तंत्र-मंत्र, टोना-टोटका आदि को लोग अपनाते जा रहे हैं। युगों पुरानी कहावत भी तो यही कहती है कि-‘इनसान अच्छा सीखे न सीखे लेकिन बुरा बहुत जल्दी सीख लेता है।’ मैं सबसे अनुरोध करता हूँ कि जनहित में ऐसे नकारात्मक कार्यक्रमों के स्थान पर सकारात्मक, देशभक्ति एवं भारतीय संस्कृति को मुखरित करने वाले कार्यक्रम अधिक प्रसारित किए जाएँ तथा समसामयिक विषयों पर जनता को सचेत किया जाए।
धन्यवाद
भवदीय
अखिलेश वर्मा

CBSE Class 12 Hindi कार्यालयी पत्र

Aupcharik Patra Class 12th Hindi CBSE प्रश्न 15.
आप किसी पर्यटक स्थल पर भ्रमण के लिए गए किंतु वहाँ की अस्वच्छता देखकर खिन्न हुए। इस पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उक्त स्थल के पर्यटन अधिकारी को एक पत्र लिखिए और सुधार का अनुरोध कीजिए। (A.I., C.B.S.E. 2016)
उत्तर:
101, विकास पुरी नई दिल्ली
दिनांक : 2 मई, 20…..
सेवा में
पर्यटन अधिकारी
मनाली (शिमला)
विषय–पर्यटक स्थल की अस्वच्छता के प्रति।
महोदय मैं इस पत्र के माध्यम से मनाली पर्यटक स्थल की अस्वच्छता के प्रति आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। गत सप्ताह मैं अपने दोस्तों के साथ मनाली भ्रमण करने के लिए गया था किंतु वहाँ जाकर मैंने इस सुंदर पर्यटक स्थल पर जगह-जगह गंदगी और कूड़े के ढेर देखे। दुकानों के आस-पास तो पहाड़ी क्षेत्र में कूड़ा-ही-कूड़ा दिखाई दिया। ऐसे पहाड़ी पर्यटक स्थल पर इतनी गंदगी देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ। .. मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि इस गंदगी को पर्यटकों की अपेक्षा स्थानीय दुकान वाले ज़्यादा फैलाने के जिम्मेदार हैं। अतः आपसे अपेक्षा है कि आप इस सुंदर स्थल पर फैली अस्वच्छता को यथाशीघ्र दूर करने के कदम उठाएँगे ताकि पर्यटकों को इससे कोई हानि न हो।
सधन्यवाद
भवदीय
अंकुर भारती

प्रश्न16.
दूरदर्शन केन्द्र के निदेशक को नवीन साहित्यिक रचनाओ पर कार्यक्रम प्रसारित करने का आग्रह करते हुए लगभग 150 शब्दों में पत्र लिखिए। (C.B.S.E. 2018)
उत्तर:
9281, मॉडल टाउन
नई दिल्ली
सेवा में
निदेशक, दूरदर्शन केन्द्र
दिल्ली
महोदय,
मैं आपके दूरदर्शन केन्द्र के द्वारा प्रसारित विभिन्न कार्यक्रमों को गत अनेक वर्षों से नियमित रूप से देख रहा हूँ। आपके केन्द्र के द्वारा दर्शाई गई लगभग सभी कार्यक्रम निश्चित रूप से उच्च श्रेणी के होते हैं। कभी-कभी कुछ विशेष कार्यक्रमों को पुनः भी दर्शाया जाता है। उन्हें देखना हमें अच्छा लगता है। मुझे आप के कार्यक्रमों में एक कमी महसूस होती है। आप पुरानी साहित्यिक रचनाओं को स्थान देते हैं लेकिन नवीन साहित्यिक रचनाओं को अपने कार्यक्रमों में स्थान न के बराबर देते हैं। आपसे आग्रह है कि आप नवीन साहित्यिक रचनाओं को भी अपने कार्यक्रमों में स्थान देने की कृपा करें। निश्चित रूप से नई पीढ़ी उसे अवश्य पसंद करेगी।
सधन्यवाद
भवदीय
नरेश गुप्ता

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CBSE Class 12 Hindi कविता/कहानी/नाटक की रचना प्रक्रिया

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CBSE Class 12 Hindi कविता/कहानी/नाटक की रचना प्रक्रिया

(क) कैसे बनती है कविता

प्रश्न 1.
कविता लेखन से संबंधित दो मत क्या हैं?
उत्तर:
पहला मत-पहला मत यह है कि कविता लेखन की कोई निश्चित प्रणाली नहीं होती। न ही कविता लेखन की कोई प्रणाली बताई अथवा सिखाई जा सकती है। कविता तो मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी होती है और इसे एक भावुक और संवेदनशील हृदय ही लिख सकता है। कविता केवल भावुक हृदय में ही उमड़ सकती है इसे चित्रकला, संगीतकला, नृत्यकला आदि की तरह सिखाया नहीं जा सकता चित्रकला को रंग, कूची, कैनवास आदि तथा संगीत कला को लय स्वर, ताल, वाद्य आदि उपकरणों के माध्यम से सिखाया जा सकता है।

किंतु कविता में इस प्रकार के कई उपकरण नहीं होते। कविता को किसी बाह्य उपकरण की सहायता से सिखाया नहीं जा सकता। कवि अपनी संवेदनाओं को कविता के रूप में प्रस्तुत करता है। दूसरा मत-दूसरा मत यह है कि चित्रकला, संगीतकला आदि के समान कविता लेखन को भी सिखाया जा सकता है। भारत तथा पश्चिमी देशों के कुछ विश्व-विद्यालयों में काव्य लेखन से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इस प्रकार चित्र, संगीत, नृत्य आदि कलाओं के समान कविता लेखन को भी अभ्यास के द्वारा सीखा जा सकता है। कविता के बार-बार पढ़ने तथा विषय के जानने से कवि की संवेदनाओं के निकट पहुंचा जा सकता है। इस मत के मानने वालों का विचार है कि उचित प्रशिक्षण तथा अभ्यास के द्वारा कविता लेखन सरलता से किया जा सकता है।

CBSE Class 12 Hindi कविता/कहानी/नाटक की रचना प्रक्रिया

प्रश्न 2.
कविता-लेखन में शब्दों का क्या महत्त्व है ?
उत्तर:
कविता लेखन में शब्दों का बहुत महत्त्व हैं जो इस प्रकार है:
(i) शब्द कविता के मूल आधार होते हैं।
(ii) शब्दों की सहायता से ही कविता लेखन संभव हो सकता है।
(iii) शब्द ही कविता लेखन के सर्वोत्तम और प्राथमिक उपकरण है।
(iv) शब्दों के उचित मेल से ही कविता बनती है।
(v) कवि की संवेदनाएँ अमूर्त होती हैं जिन्हें शब्दों के द्वारा ही मूर्त रूप प्रदान किया जाता है।
(iv) कविता लेखन में कवि शब्दों को छंदबद्ध करता है जैसे
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है !
हो जाए न पथ में रात कहीं,
मंजिल भी तो है दूर नहीं
यह सोच थका दिन का पंथी भी
जल्दी-जल्दी चलता है !
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

प्रश्न 3.
कविता में बिंबों की क्या भूमिका है ?
उत्तर:
बिंब का अर्थ-बिंब का शाब्दिक अर्थ है-शब्द चित्र अर्थात् जिन शब्दचित्रों के माध्यम से कवि अपनी कल्पना को साकार रूप प्रदान करता है उन्हें बिंब कहते हैं। कविता में बिंबों की भूमिका-कविता में बिंबों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है जो निम्नलिखित है :—
(i) बिंब ही कवि की कल्पना को साकार रूप प्रदान करते हैं।
(ii) बिंब के द्वारा ही आंतरिक संवेदनाएँ कविता के रूप में प्रकट होती हैं।
(iii) ये अमूर्त को मूर्त रूप प्रदान करते हैं ; जैसे : जनता का दुःख एक, हवा में उड़ती पताकाएँ अनेक।

प्रश्न 4.
छंद से क्या तात्पर्य है तथा कविता की रचना में छंद का क्या महत्त्व है ?
उत्तर:
छंद से तात्पर्य वर्ण, मात्रा, यति, गति, लय आदि के सुव्यवस्थित एवं सुसंगठित रूप को छंद कहते हैं। कविता में छंद का महत्त्व :-कविता की रचना में छंद की बहुत महत्त्व है जो इस प्रकार है:
(i) छंद कविता के अनिवार्य तत्त्व हैं।
(ii) ये कविता को संगीतात्मकता प्रदान करते हैं।
(iii) ये कविता को कविता का रूप प्रदान करते हैं।
(iv) ये कविता को प्रवाहमयता प्रदान करते हैं।
(v) ये कविता को गेयता प्रदान करते हैं।
(vi) ये कविता को माधुर्य प्रदान करते हैं।
उदाहरण के लिए:
गुरु गोबिन्दो दोऊ खड़े, काके लागूं पाँय।
बलिहारी गुरु आपने, जिन गोबिन्द दियो बताय॥

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प्रश्न 5.
कविता के महत्त्वपूर्ण घटक कौन-कौन से हैं ? अथवा कविता के प्रमुख घटकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
कविता के कुछ महत्त्वपूर्ण घटक होते हैं जिनके बिना कविता संभव नहीं होती। ये घटक निम्नलिखित हैं :
(i) भाषा
(ii) शैली
(iii) बिंब
(iv) छंद
(v) अलंकार
(i) भाषा-भाषा कविता का महत्त्वपूर्ण घटक है क्योंकि भाषा के माध्यम से ही कवि अपनी संवेदनाओं और भावनाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करता है।
(ii) शैली-शैली भी कविता का प्रमुख घटक है। इसके द्वारा कवि अपनी संवेदनाओं को कविता के रूप में अभिव्यक्त करता है।
(iii) बिंब-बिंब का शाब्दिक अर्थ है-शब्दचित्र। इन शब्द चित्रों के माध्यम से ही कवि अपनी कल्पना को साकार रूप प्रदान करता है। बिंब के बिना कविता की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह कविता का मूल आधार है।
(iv) छंद-यह कविता का अत्यंत महत्त्वपूर्ण घटक है क्योंकि छंद ही कविता को कविता का रूप प्रदान करते हैं। इनके द्वारा ही कविता पद्य की श्रेणी में आते हैं।
(v) अलंकार-अलंकार भी कविता के प्रमुख घटक हैं। ये कविता को सौंदर्य प्रदान करते हैं। इनके द्वारा ही कवि अपनी कविता को सजाता है।

पाठ से संवाद

प्रश्न 1.
आपने अनेक कविताएँ पढ़ी होंगी। उनमें से आपको कौन-सी कविता सबसे अच्छी लगी ? लिखिए। यह भी बताइए कि आपको वह कविता क्यों अच्छी लगी ?
उत्तर:
मैंने अनेक कविताएँ पढ़ी हैं। इनमें से मुझे जयशंकर प्रसाद जी की निम्नलिखित कविता सबसे अच्छी लगी है
“अरुण! यह मधुमय देश हमारा।
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।
सरस तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरू शिखा मनोहर, छिटका जीवन-हरियाली पर मंगल कुमकुम सारा।
लघु सुरधनु से पंख पसारे शीतल मलय समीर सहारे, उड़ते खग जिस ओर मुँह किए, समझ नीड़, निज प्यारा।
बरसाती आँखों के बादल-बनते जहाँ भरे करुणा जल, लहरें टकराती अनंत की-पाकर जहाँ किनारा।
हेम कुंभ ले उषा सवेरे-भरती ढलकाती सुख मेरे, मदिर ऊँघते रहते जब जग कर रजनी भर तारा।”
मुझे यह कविता इसलिए अच्छी लगती है क्योंकि इसमें राष्ट्र के प्रति सम्मान का भाव व्यक्त किया गया।
भारतवर्ष को असीम प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण देश बताया गया है जहाँ सबका सदा स्वागत होता है।
भाषा तत्सम प्रधान है।
संपूर्ण कविता में संगीत के गूंजते हुए स्वर
सुनाई देते हैं।
प्रकृति का मानवीकरण किया गया।
रूपक, उपमा, अनुप्रास अलंकारों की छटा निराली है।

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प्रश्न 2.
आपके जीवन में अनेक ऐसी घटनाएँ घटी होंगी जिन्होंने आपके मन को छुआ होगा। उस अनुभूति को कविता के रूप में लिखने का प्रयास कीजिए।
उत्तर:
जेठ की तपती दोपहरी में एक रिक्शा वाले को रिक्शा चलाते देख कर मन में उत्पन्न भावनाओं को कविता के रूप में इस प्रकार से प्रस्तुत किया जा सकता है
‘वह आता, चिल्लाता
रिक्शावाला।
जीर्णवसन, मलिन तन
धूल-विमर्दित पग नगन
बिखरे केश सिर जलन
बहते स्वेद सिक्त तन
ठठरी-सा गात
औ’ पेट पीठ से चिपकाता
वह आता।
तप्त तवे-सी तपती भू
शेष स्वांस सी चलती लू
मध्यान्ह रवि बरसाता आग
आशा में कुछ कमाने की
वह आता, चिल्लाता
रिक्शावाला। -डॉ० रत्लचंद्र शर्मा

प्रश्न 3.
शब्दों का खेल, परिवेश के अनुसार शब्द-चयन, लय, तुक, वाक्य संरचना, यति-गति, बिंब, संक्षिप्तता के साथ-साथ विभिन्न अर्थ स्तर आदि से कविता बनती है। दी गई कविता में इनकी पहचान कर अपने शब्दों में लिखें
एक जनता का
दुःख एक।
हवा में उड़ती पताकाएँ
अनेक।
दैन्य दानव। क्रूर स्थिति।
कंगाल बुद्धि, मजूर घर भर।
एक जनता का -अमरवर,
एकता का स्वर। ..
अन्यथा स्वातंत्र्य इति।
उत्तर:
कवि ने आधुनिक काव्य-शिल्प का प्रयोग करते हुए भाव जगत् में गागर में सागर भरने का सफल प्रयोग किया है। शब्द चयन के उचित प्रयोग ने जनता की पीड़ा और व्यथा को ही प्रकट नहीं किया बल्कि उसकी विवशता और विद्रोह को भी वाणी प्रदान की है। कवि ने जनता को एक विशेषण उसकी प्रमुखता और असहायता को प्रकट किया है। हवा में उड़ती पताकाएँ उसके विरोध की प्रतीक हैं। इसमें गतिशील बिंब योजना की गई है।

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अनेक शब्द का विशेष अर्थ है कि असहायों और पीड़ितों की संख्या बहुत बड़ी है। ‘दैन्य दानव’, ‘क्रूर स्थिति’, ‘कंगाल बुद्धि’ संक्षिप्त होने पर भी अपने भीतर व्यापकता के भावों को समेटे हुए हैं। अन्यथा स्वातंत्र्य इति’ में लाक्षणिकता विद्यमान है जो बोध कराती है कि भूखे-नंगे व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है। वह इंसान के लिए तभी महत्त्वपूर्ण हो सकती है जब उसका पेट भरा हुआ हो। तत्सम शब्दावली की अधिकता है। अतुकांत छंद का प्रयोग होने पर भी भावगत लयात्मकता की सृष्टि हुई है। तुक का स्वाभाविक प्रयोग एक स्थान पर किया गया है।

(ख) कैसे लिखें कहानी

प्रश्न 1.
कहानी की परिभाषा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
परिभाषा–कहानी साहित्य की एक ऐसी गद्य विधा है जिसमें जीवन के किसी एक अंग विशेष का मनोरंजन पूर्ण चित्रण किया जाता है। कहानी एक ऐसी साहित्यिक विधा है, जो अपने सीमित क्षेत्र में पूर्ण एवं स्वतंत्र है, प्रभावशाली है। कहानी में मानव जीवन की कथा होती है। अलग-अलग विद्वानों और लेखकों ने कहानी की विभिन्न परिभाषाएं दी हैं परंतु कहानी की परिभाषा को लेकर एक निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकते। प्रेमचंद ने कहानी की परिभाषा इस प्रकार दी है “कहानी एक रचना है, जिसमें जीवन के किसी अंग किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य होता है। उसका चरित्र, शैली तथा कथा विन्यास सब उसी भाव को पुष्ट करते हैं।” अर्थात् किसी घटना पात्र या समस्या का क्रमबद्ध ब्योरा जिसमें परिवेश हो, वंद्वात्मकता हो, कथा का क्रमिक विकास हो, चरम उत्कर्ष का बिंदु हो, उसे कहानी कहा जा स

प्रश्न 2.
कहानी के तत्व कौन-कौन से हैं ?
अथवा
कहानी की तात्विक समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
कहानी साहित्य की एक गद्ध विधा है। इसके प्रमुख तत्व इस प्रकार हैं
1. कथानक अथवा कथावस्तु,
2. पात्रयोजना अथवा चरित्र-चित्रण
3. संवाद योजना अथवा कथोपकथन
4. देशकाल और वातावरण
5. उद्देश्य
6. भाषा शैली।

1. कथानक अथवा कथावस्तु-यह कहानी का पहला और सर्वप्रथम तत्व है। कहानी में आरंभ से अंत तक जो कुछ कहा जाए उसे . कथानक अथवा कथावस्तु कहते हैं। कहानी में घटित होने वाली घटनाएं ही उसका कथानक होता है। यह कहानी का मूलाधार होता है। इसे आरंभ, मध्य और अंत तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है।

2. पात्र-योजना अथवा चरित्र-चित्रण-यह कहानी का दूसरा प्रमुख तत्व है। कहानी में पात्र योजना कथानक के अनुरूप होना चाहिए। कहानी में नायक और नायिका दो प्रमुख पात्र होते हैं। अन्य इनके सहायक पात्र होते हैं। पात्रों के द्वारा ही लेखक अपना उद्देश्य स्पष्ट करता है और समाज को संदेश देता है।

3. संवाद-योजना अथवा कथोपकथन-संवाद का शाब्दिक अर्थ है-परस्पर बातचीत। कहानी में पात्रों के बीच हुई परस्पर बातचीत को – संवाद अथवा कथोपकथन कहते हैं। यह कहानी का तीसरा प्रमुख तत्व होता है। संवाद पात्रों के चरित्र का उद्घाटन करते हैं तथा कहानी का विकास करते हैं। इसलिए संवाद योजना, सहज, सरल, स्वाभाविक तथा पात्रानुकूल होनी चाहिए।

4. देशकाल और वातावरण–यह कहानी का चौथा प्रमुख तत्व होता है। देशकाल और वातावरण से तात्पर्य परिस्थितियों और समय से है। इनके द्वारा कहानी में घटित घटनाओं की परिस्थितियों तथा वातावरण का बोध होता है। कहानी में देशकाल वातावरण कथानक के अनुरूप होना चाहिए तथा घटनाओं से समन्वय होना चाहिए।

5. उद्देश्य-यह कहानी का पाँचवां प्रमुख तत्व है। साहित्य में कोई भी रचना निरुद्देश्य नहीं होती। प्रत्येक रचना का अपना कोई-न कोई उद्देश्य अवश्य होता है। इस प्रकार कहानी भी एक उद्देश्यपूर्ण रचना है। कहानी में लेखक अपने पात्रों के माध्यम से अपना उद्देश्य स्पष्ट करता है।

6. भाषा शैली-यह कहानी का छटा और महत्त्वपूर्ण तत्व है। कहानी में भाषा शैली सरल, सहज, स्वाभाविक, पात्रानुकूल और विषयानुकूल होनी चाहिए। इसमें सहज और सामान्य शब्दावली का प्रयोग होना चाहिए।

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प्रश्न 3.
कहानी में पात्रों अथवा चरित्रों का क्या महत्त्व है ?
उत्तर:
कहानी में पात्रों अथवा चरित्रों का बहुत महत्त्व है जो इस प्रकार हैं
1. पात्र कहानी के मूलाधार होते हैं।
2. पात्र कहानी को गतिशीलता प्रदान करते हैं।
3. पात्र कहानी का उद्देश्य स्पष्ट करते हैं।
4. पात्र पाठकों को संदेश देते हैं।
5. पात्र कहानी को समापन की ओर ले जाते हैं।

प्रश्न 4.
कहानी में संवाद योजना कैसी होनी चाहिए ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1. कहानी में संवाद योजना सहज और सरल होनी चाहिए।
2. संवाद योजना स्वाभाविक होनी चाहिए।
3. संवाद योजना पात्रानुकूल होनी चाहिए।
4. संवाद योजना विषयानुकूल होनी चाहिए।
5. संवाद योजना रोचक होनी चाहिए।
6. संवादं योजना संक्षिप्त होनी चाहिए।

प्रश्न 5.
कहानी में पात्रों के द्वंद्व का क्या महत्त्व है ?
उत्तर:
कहानी में पात्रों के दवदव का बहुत महत्त्व है जो इस प्रकार हैं
1. पात्रों का द्वंद्व कथानक को गतिशीलता प्रदान करता है।
2. पात्रों के द्वंद्व से ही पात्रों के चरित्र का उद्घाटन होता है।
3. पात्रों के द्वंद्व से ही कहानी का उद्देश्य स्पष्ट होता है।
4. पात्रों के द्वंद्व से ही लेखक पाठकों को संदेश देता है।
5. पात्रों के द्वंद्व से ही कहानी में रोचकता उत्पन्न होती है।
6. पात्रों के द्वंद्व से ही पाठकों में जिज्ञासा उत्पन्न होती है।

प्रश्न 6.
कहानी की भाषा शैली कैसी होनी चाहिए ?
अथवा कहानी की भाषा शैली की क्या विशेषताएँ हैं ?
उत्तर:
कहानी की भाषा शैली की विशेषताएँ निम्नलिखित होनी चाहिए
1. भाषा शैली सरल और सहज होनी चाहिए।
2. भाषा शैली स्वाभाविक होनी चाहिए।
3. भाषा शैली पात्रानुकूल होनी चाहिए।
4. भाषा शैली विषयानुकूल होनी चाहिए।
5. भाषा शैली प्रसंगानुकूल होनी चाहिए।
6. भाषा शैली सरल होनी चाहिए।

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प्रश्न 7.
कहानी का हमारे जीवन से क्या संबंध है ?
उत्तर:
कहानी का मानवीय जीवन से घनिष्ठ संबंध है। आदिम युग से ही कहानी मानव जीवन का प्रमुख अंग रही है। यह मानवीय जीवन का एक ऐसा अभिन्न अंग है कि प्रत्येक मनुष्य किसी-न-किसी रूप में कहानी सुनता और सुनाता है। विचारों का आदान-प्रदान इस संसार का एक अनूठा नियम है। इसलिए इस संसार में प्रत्येक मनुष्य में अपने अनुभव बांटने और दूसरों के अनुभव जानने की प्राकृतिक इच्छा होती है। यहाँ प्रत्येक मनुष्य अपने विचारों, अनुभवों और वस्तुओं का आदान-प्रदान करता है। हम अपनी बातें किसी को सुनाना और दूसरों की सुनना चाहते हैं। इसलिए यह सत्य है कि इस संसार में प्रत्येक मनुष्य में कहानी लिखने की मूल भावना होती है।

यह दूसरा सत्य है कि कुछ लोगों में इस भावना का विकास हो जाता है और कुछ इसे विकसित करने में समर्थ नहीं होते। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कहानी का मानवीय जीवन से अटूट संबंध है।

प्रश्न 8.
कहानी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि स्पष्ट कीजिए।
अथवा
कहानी के इतिहास पर नोट लिखिए।
उत्तर:
कहानी का इतिहास उतना ही पुराना है जितना मानवीय इतिहास है क्योंकि कहानी मानवीय स्वभाव और प्रकृति का अटूट हिस्सा है। कहानी सुनने और सुनाने की प्रवृत्ति मनुष्य में आदिम युग से है। जैसे-जैसे मानवीय सभ्यता का विकास होता गया वैसे-वैसे कहानी की आदिम कला का विकास होता रहा। कथावाचक कहानियाँ सुनाते गए और श्रोता उनकी कहानियाँ सुनते गए।

प्राकृतिक रूप से मनुष्य एक कल्पनाशील प्राणी है। कल्पना करना मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। धीरे-धीरे सत्य घटनाओं पर आधारित … (कथा) कथा-कहानी सुनते-सुनाते मनुष्य में कल्पना का सम्मिश्रण होने लगा क्योंकि प्रायः मनुष्य वह सुनना चाहता है जो उसे प्रिय है। .. प्राचीन काल में किसी घटना, युद्ध, प्रेम आदि के किस्से सुनाए जाते थे और श्रोता इन किस्से कहानियों को आनंदपूर्वक सुनते थे। धीरे धीरे ये किस्से ही कहानियों का रूप (धारण) ग्रहण कर लेते हैं। इस प्रकार कहानी कला का धीरे-धीरे विकास हुआ।

प्रश्न 9.
प्राचीन काल में मौखिक कहानी की लोकप्रियता के क्या कारण थे ?
उत्तर:
प्राचीन काल में मौखिक कहानी की लोकप्रियता के कई कारण थे जो इस प्रकार हैं
1. प्राचीन काल में संचार के साधनों की कमी थी इसलिए मौखिक कहानी ही संचार का सबसे बड़ा पम थी।
2. प्राचीन काल में मौखिक कहानी धर्म प्रचारकों और संतों के सिद्धांतों और विचारों को लोगों तक पहुँचाने का माध्यम थी।
3. मौखिक कहानी ही समाज में शिक्षा के प्रचार-प्रसार का साधन थी।
4. प्राचीन काल में मौखिक कहानी ही मनोरंजन का प्रमुख साधन थी।

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प्रश्न 10.
कहानी का केंद्र बिंदु कथानक होता है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
कहानी में प्रारंभ से अंत तक घटित सभी घटनाओं को कथानक कहते हैं। कथानक कहानी का प्रथम और महत्त्वपूर्ण तत्व होता है। यह कहानी का मूलाधार होता है। इसे कहानी का प्रारंभिक नक्शा भी कहते हैं। जिस प्रकार कोई मकान बनाने से पहले उसका नक्शा बनाया जाता है। उसी प्रकार कहानी लिखने से पहले उसका कथानक लिखा जाता है। कथानक ही कहानी का केंद्र बिंदु होता है। सामान्यत: कथानक किसी घटना, अनुभव अथवा कल्पना पर आधारित होता है।

कभी कहानीकार । की बुद्धि में पूरा कथानक आता है और कभी कहानी का एक सूत्र आता है। केवल एक छोटा-सा प्रसंग अथवा पात्र कहानीकार को आकर्षित करता है। इसलिए कोई एक प्रसंग भी कहानी का कथानक हो सकता है और कोई एक छोटी-सी घटना भी कथानक की प्रमुख घटना हो सकती है। उसके बाद कहानीकार उस घटना अथवा प्रसंग का कल्पना के आधार पर विस्तार करता है। यह सत्य है कि कहानीकार की कल्पना कोरी कल्पना नहीं होती। यह कोई असंभव कल्पना नहीं होती बल्कि ऐसी कल्पना होती है जो संभव हो सके। कल्पना के विस्तार के लिए लेखक के पास जो सूत्र होता है उसके माध्यम से ही कल्पना आगे बढ़ती है।

यह सूत्र लेखक को एक परिवेश, पात्र और समस्या प्रदान करता है। उनके आधार पर लेखक संभावनाओं पर विचार करता है और एक ऐसा काल्पनिक ढांचा तैयार करता है जो संभव हो सके और लेखक के उद्देश्यों सरे भी मेल खा सके। सामान्यत: कथानक में प्रारंभ, मध्य और अंत के रूप में कथानक का पूर्ण स्वरूप होता है। संपूर्ण कहानी कथानक के इर्द-गिर्द घुमती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कथानक कहानी का केंद्र बिंदु होता है।

प्रश्न 11.
देशकाल और वातावरण का कहानी लेखन में किस प्रकार आवश्यक है ?
उत्तर:
देशकाल और वातावरण कहानी का महत्त्वपूर्ण तत्व होता है। इसका कथानक से सीधा संबंध होता है। जब कहानीकार कहानी के कथानक का स्वरूप बना लेता है। तब वह कथानक को देशकाल और वातावरण के साथ जोड़ता है। देशकाल और वातावरण कहानी को प्रामाणित और रोचक बनाने में बहुत आवश्यक है। कहानी लेखन में (पात्र) प्रत्येक घटना और पात्र का समस्या का अपना देशकाल. और वातावरण होता है। यदि कथानक की घटनाएँ देशकाल और वातावरण से मेल नहीं खातीं तो वह कहानी असफल सिद्ध होती है। इसलिए कहानीकार जिस परिवेश से कहानी के कथानक को जोड़ना चाहता उसे उस परिवेश की पूरी जानकारी होनी चाहिए। इसलिए हम कह सकते हैं कि देशकाल और वातावरण का कहानी लेखन में महत्त्वपूर्ण योगदान है।

पाठ से संवाद

प्रश्न 1.
चरित्र-चित्रण के कई तरीके होते हैं। ईदगाह’ कहानी में किन-किन तरीकों का इस्तेमाल किया गया है ? इस कहानी में आपको सबसे प्रभावी चरित्र किस का लगा और कहानीकार ने उसके चरित्र-चित्रण में किन तरीकों का उपयोग किया है ?
उत्तर:
कहानी में किसी भी पात्र का चरित्र-चित्रण उसके क्रिया-कलापों, संवादों तथा अन्य व्यक्तियों द्वारा उससे संबंधित बोले गए संवादों से होता है। लेखक स्वयं भी किसी पात्र की चारित्रिक विशेषताओं को उजागर करने के लिए कुछ संकेत दे देता है। ‘ईदगाह’ कहानी में लेखक ने पात्रों के चरित्र-चित्रण के लिए इन सभी तरीकों का प्रयोग किया है। ‘ईदगाह’ कहानी का पात्र ‘हामिद’ हमें सबसे अधिक प्रभावित करता है। लेखक ने हामिद का परिचय देते हुए लिखा है-वह चार पाँच साल का गरीब सूरत दुबला पतला लड़का।

जिसका बाप गत वर्ष हैजे की भेंट हो गया और माँ न जाने क्यों पीली होती-होती एक दिन मर गई। लेखक ने संवादों के माध्यम से भी हामिद के चरित्र को स्वर प्रदान किया है। हामिद का मेले से चिमटा खरीदना उसके मन में अपनी दादी के प्रति संवेदनाओं को व्यक्त करता है। उसे रोटी पकाते समय दादी के हाथ के जलने की चिंता रहती थी, इसलिए उसने चिमटा खरीदा। हामिद का मिठाई और मिट्टी के खिलौनों पर पैसे बर्बाद न करना उसकी समझदारी को व्यक्त करता है। इस प्रकार ‘ईदगाह’ कहानी में लेखक ने स्वयं, संवादों के माध्यम से तथा अन्य बच्चों के वार्तालापों से हामिद का चरित्र-चित्रण किया है।

CBSE Class 12 Hindi कविता/कहानी/नाटक की रचना प्रक्रिया

प्रश्न 2.
संवाद कहानी में कई महत्त्वपूर्ण भूमिकाएं निभाता है। महत्त्व के हिसाब से क्रमवार संवाद की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
कहानी में संवादों का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। संवाद कहानी को गति प्रदान करते हैं। कहानी में चित्रित पात्रों का चरित्र-चित्रण संवादों के माध्यम से होता है। जो घटना अथवा प्रतिक्रिया कहानीकार होती हुई नहीं दिखा सकता उसे संवादों के द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है। संवादों से पात्रों के बौद्धिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक स्तरों का ज्ञान भी हो जाता है। उदाहरण के लिए ‘ईदगाह’ कहानी मुस्लिम परिवेश को व्यक्त करती है इसलिए इसके संवादों में उर्दू के शब्दों की अधिकता है। अधिकतर संवाद बच्चों के हैं इसलिए बच्चों की कल्पनाओं को भी पूरी तरह से उभारा गया है। जैसे-जिन्नात को मिलने वाले रुपयों के बारे में मोहसिन और हामिद का यह वार्तालाप- ‘मोहसिन ने कहा-जिन्नात को रुपयों की क्या कमी ? जिस ख़जाने में चाहें, चले जायें।’ हामिद ने फिर पूछा-जिन्नात बहुत बड़े-बड़े होते हैं। मोहसिन-एक-एक का सिर आसमान के बराबर होता है। इस वार्तालाप से बच्चों के भोलेपन, कौतुहल आदि चारित्रिक गुणों का भी पता चलता है। संवाद पात्रों के स्तर के अनुरूप, सरल, सहज, स्वाभाविक, संक्षिप्त तथा अवसरानुकूल होने चाहिए। अनावश्यक रूप से लंबे संवाद कथानक में गतिरोध उत्पन्न कर देते हैं।

प्रश्न 3.
नीचे दिए गए चित्रों के आधार पर चार छोटी-छोटी कहानियाँ लिखें।
CBSE Class 12 Hindi कविता कहानी नाटक की रचना प्रक्रिया 1
एक दिन राम घर में घूम रहा था और उसकी माँ अपना काम कर रही थीं। अचानक उसकी माँ की नज़र उसके शहीद पति मेजर करण सिंह पर पड़ी। उसने राम को बुलाते हुए कहा कि क्या तुम्हें याद है कि तुम्हारे पिता का देहांत कब हुआ था ? उनको मरे हुए एक वर्ष हो गया था। राम ने बिल्कुल ठीक-ठाक जवाब दे दिया। उसकी माँ ने उसे उन्हें प्रणाम करने को कहा। दोनों ने उनको प्रणाम किया और भगवान् से प्रार्थना की कि अगले जन्म में वे ही हमारे परिवार के सदस्य बनें। उनके परिवार में शहीद की पत्नी और उनका आठ साल का लड़का राम रहते थे। राम ने बड़े ही आदर से अपनी माँ से पूछा कि उनका देहांत कैसे हुआ था। उसकी माँ ने बताया कि दुश्मनों को मारते-मारते वह खुद भी चल बसे। उन्होंने वहाँ दीपक जलाया और वापस अपने-अपने कामों में लग गए।
CBSE Class 12 Hindi कविता कहानी नाटक की रचना प्रक्रिया 2

चोर बना शरीफ
CBSE Class 12 Hindi कविता कहानी नाटक की रचना प्रक्रिया 3

एक रात एक चोर किसी के घर चोरी करके आया था। जाते-जाते उसने देखा कि एक सरकारी नौकर पेड़ काट रहा था। रात बहुत हो चुकी थी। सारा शहर सो गया था। कोई वाहन सड़क पर नहीं था। केवल वह चोर और वह पेड़ काटने वाला ही सड़क पर थे। चोर ने सारा तमाशा एक कोने में खड़े होकर देखा। पहले तो वह बहुत खुश हो रहा था। लेकिन बाद में जब उसने सारा पेड़ काट दिया तो उसके पत्थर दिल में थोड़ी हमदर्दी उस पेड़ के लिए आई। धीरे-धीरे उस चोर का दिल मोम की तरह पिघल गया। उसने सोचा कि यह पेड़ हमें छाया देते हैं। यह उसे काटे जा रहा है। उसने चोरी किया हुआ समान वापस उस घर में रखा जहाँ से उसने चोरी की थी। वापस आकर देखा तो सारा पेड़ कट चुका था और वह आदमी वहीं उसे काट कर सो गया था। चोर ने अपनी बंदूक साथ के तालाब में फेंक . दी और प्रण लिया कि वह सारे बुरे काम छोड़ देगा और एक आम आदमी बन कर रहेगा। उसने अपने आपको पुलिस के हवाले कर दिया। उसे दस साल की जेल हुई। बाहर आने पर उसने कुछ कमाने के लिए टी-स्टाल खोल लिया और खुशी-खुशी जीने लगा।

CBSE Class 12 Hindi कविता/कहानी/नाटक की रचना प्रक्रिया

घर में आग
CBSE Class 12 Hindi कविता कहानी नाटक की रचना प्रक्रिया 4

राजू और उसकी माँ हर रोज़ की तरह अपना-अपना काम कर रहे थे। उसकी माँ फोन पर बात कर रही थी और वह बाहर खेल रहा था। वह घर पर आया और सीधा रसोई की तरफ चल पड़ा। वह बहुत प्यासा था। गैस खुली हुई थी। उसने जैसे ही लाइट का स्विच ऑन किया वैसे ही धमाका हुआ और रसोई में आग लग गई। उसने चिल्लाना शुरू कर दिया- ‘बचाओ-बचाओ।’ उसकी माँ ने आवाज़ सुनी और वह घबरा गई। वह मदद के लिए आस-पास के घरों में भागी। लेकिन कोई मदद करने को तैयार नहीं था। उसने फोन उठाया और 102 पर डॉयल किया। फॉयर-ब्रिगेड को आने में पंद्रह मिनट लगने थे। उसने आग बुझाने की पूरी कोशिश की लेकिन आग धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी। राजू बेहोश हो गया था। उसकी माँ को डर था कि वह मर न गया हो। अचानक फॉयरब्रिगेड आई और उसने आग .. बझा दी। राज को फौरन अस्पताल पहँचा दिया गया। थोडे दिनों में ही वह ठीक हो गया और फिर से खेलने लगा। उसकी माँ ने सीखा कि कभी भी गैस खुली नहीं छोड़नी।

रोहित एक आठ साल का लड़का है। उसे पढ़ना बहुत पसंद था लेकिन जब से उसके घर में नया टी० वी० आया तब से वह सारे काम छोड़कर टी० वी० देखता रहता है। उसने पढ़ना तक छोड़ दिया। उसे अब पढ़ने में कोई रुचि नहीं थी। वह सारा दिन एकटक आँखें लगाए टी० वी० देखता रहता था। वह चौबीस घंटों में से कम-से-कम दस घंटे टी० वी० देखता रहता था। उसका दिमाग़ अब वैसे ही सोचने लगता जैसे वह टी० वी० में देखता था। वह स्कूल से बहुत छुट्टी लेता था।

वह अपने दोस्तों से भी लड़ता रहता था। वह दिन भर टी०वी० देखते-देखते पतला होता जा रहा था। वह जल्द ही बीमार हो जाता था। उसके माता-पिता जी ने सोच लिया कि वह टी० उन्होंने केबल काट भी दी। वह बहत रोने लगा। वह पूरा एक दिन रोता रहा। उसकी माँ ने उसे समझाया कि ज़्यादा टी० वी० देखने से आँखें ख़राब हो जाती हैं, पढ़ाई में ध्यान नहीं लगता, स्कूल जाने का मन नहीं करता। जो उसकी माँ ने उसे समझाया वह सब समझ गया और उसने अपनी माँ से वादा किया कि वह अब एक घंटे से ज्यादा टी० वी० नहीं देखेगा। उसका पढ़ाई में ध्यान लगना शुरू हो गया और वह फिर कक्षा में अच्छे अंक लेने लगा। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें ज़्यादा टी० वी० नहीं देखना चाहिए, अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।

प्रश्न 4.
एक कहानी में कई कहानियाँ छिपी होती हैं। किसी कहानी को किसी खास मोड़ पर रोकर नयी स्थिति में कहानी को नया मोड़ दिया जा सकता है। नीचे दी गई परिस्थिति पर कहानी लिखने का प्रयास करें “सिद्धेश्वरी ने देखा कि उसका बड़ा बेटा रामचंद्र धीरे-धीरे घर की तरफ आ रहा है। रामचंद्र माँ को बताता है कि उसे अच्छी नौकरी मिल गई।” आगे की कहानी आप लिखिए।
उत्तर:
सिद्धेश्वरी ने देखा कि उसका बड़ा बेटा रामचंद्र धीर-धीरे घर की तरफ आ रहा है। रामचंद्र माँ को बताता है कि उसे अच्छी नौकरी मिल गई। सुनते ही माँ खुशी से झूम उठी और आंगन की ओर दौड़ पड़ी। वहाँ चारपाई पर लेटे हुए अपने पति को जगाकर कहती है-सुनते हो!
“अपने राम को अच्छी नौकरी मिल गई है।”
राम के पिता ऊँघते हुए उठ बैठते हैं और राम को अपने पास बैठा कर उससे पूछते हैं-कहाँ नौकरी मिली है ?
राम-मल्होत्रा बुक डिपो में। पिता-क्या वेतन मिलेगा ?
राम-पाँच हजार रुपए।
यह सुनते ही राम के पिता और माता उस पर न्योछावर हो उठते हैं। उन्हें लगता है कि अब तो उनके दिन फिर जाएंगे और घर में …
खुशहाली आ जाएगी। राम के पिता मिठाई लेने बाहर निकल जाते हैं और माँ राम को प्यार से खाना खिलाने लग जाती है।

(ग) नाटक लिखने का व्याकरण

प्रश्न 1. नाटक किसे कहते हैं ?
उत्तर:
साहित्य की वह विधा जिसके पढ़ने के साथ-साथ अभिनय भी किया जा सकता है उसे नाटक कहते हैं। भारतीय काव्य शास्त्र में नाटक को दृश्य काव्य माना जाता है। नाटक रंगमंच की एक प्रमुख विधा है। इसलिए इसे पढ़ा, सुना और देखा भी जा सकता है।

प्रश्न 2.
नाटक में चित्रित पात्र कैसे होने चाहिए ?
उत्तर:
नाटक में पात्रों का बहुत महत्त्व है नाटक में चित्रित पात्र निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:
(i) पात्र चरित्रवान होने चाहिए।
(ii) पात्र आदर्शवादी होने चाहिए।
(iii) पात्र अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के होने चाहिए।
(iv) पात्र जीवंत तथा जीवन से जुड़े होने चाहिए।
(v) पात्र सामाजिक परिवेश से जुड़े होने चाहिए।
(vi) पात्र कथानक से संबंधित होने चाहिए।

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प्रश्न 3.
नाटक की भाषा-शैली कैसी होनी चाहिए ?
उत्तर:
नाटक की भाषा-शैली निम्नलिखित प्रकार की होनी चाहिए :
(i) नाटक की भाषा-शैली सरल और सहज होनी चाहिए।
(ii) इसकी भाषा-शैली स्वाभाविक तथा प्रसंगानुकूल होनी चाहिए।
(iii) इसकी भाषा-शैली पात्रानुकूल होनी चाहिए।
(iv) इसकी भाषा-शैली विषयानुकूल होनी चाहिए।
(v) इसकी भाषा-शैली संवादों के अनुकूल होनी चाहिए।
(vi) इसकी भाषा-शैली सरस होनी चाहिए।

प्रश्न 4.
नाटक और साहित्य की अन्य विधाओं में क्या अंतर है ? संक्षेप में बताइये।
उत्तर:
साहित्य में कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध आदि विधाएँ आती हैं। नाटक भी साहित्य की एक प्रमुख विधा है किंतु नाटक तथा अन्य विधाओं में बहुत अंतर है जो इस प्रकार है :
(i) नाटक को दृश्य काव्य कहा जाता है किसी अन्य विधा को नहीं।
(ii) नाटक रंगमंच की एक विधा है किसी अन्य विधाओं के अंतर्गत कोई रंगमंच नहीं आता।
(iii) नाटक का अभिनय होता है जबकि अन्य विधाओं का अभिनय नहीं हो सकता।
(iv) नाटक को पढ़ा, सुना तथा देखा जा सकता है जबकि अन्य विधाओं को केवल पढ़ा तथा सुना जा सकता है।
(v) नाटक में अभिनय का गुण विद्यमान होता है जबकि अन्य विधाओं में यह गुण नहीं होता।
(vi) नाटक का संबंध दर्शकों से है जबकि अन्य विधाओं का संबंध पाठकों से है।
(vii) नाटक एक ‘दर्शनीय’ विधा है जबकि अन्य पाठनीय विधाएँ हैं।

प्रश्न 5.
नाटक के विभिन्न तत्वों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
नाटक की रचना में विभिन्न तत्वों का महत्त्वपूर्ण योगदान है जो निम्नलिखित है :
(i) कथानक / कथावस्तु-नाटक में जो कुछ कहा जाए उसे कथानक अथवा कथावस्तु कहते हैं। यह नाटक का सबसे महत्त्वपूर्ण . तत्व है इसी के आधार पर नाटक की मध्य और समापन मुख्यतः तीन भागों में बांटा जा सकता है।
(ii) पात्र योजना / चरित्र चित्रण-यह नाटक का महत्त्वपूर्ण तत्व है। पात्रों के माध्यम से ही नाटककार कथानक को गतिशीलता प्रदान करता है। इनके माध्यम से ही यह नाटक का उद्देश्य स्पष्ट करता है। नाटक में एक प्रमुख पात्र तथा अन्य उसके सहायक पात्र होते हैं। प्रमुख पात्र को नायक अथवा नायिका कहते हैं।
(iii) संवाद. योजना अथवा कथोपकथन-संवाद का शाब्दिक अर्थ है-परस्पर बातचीत अथवा नाटक में पात्रों की परस्पर बातचीत को संवाद अथवा कथोपकथन कहते हैं। संवाद योजना नाटक का प्रमुख तत्व है इसके बिना नाटक की कल्पना भी नहीं की जा सकती। संवाद ही कथानक को गतिशील बनाते हैं तथा पात्रों के चरित्र का उद्घाटन करते हैं। नाटक में संवाद योजना सहज, सरल, स्वाभाविक तथा पात्रानुकूल होना चाहिए।
(iv) अभिनेयता-यह नाटक का महत्त्वपूर्ण तत्व है। इसके द्वारा ही नाटक का मंच पर अभिनय किया जाता है। अभिनेयता के कारण ही नाटक अभिनय के योग्य बनता है।
(v) उद्देश्य-साहित्य की अन्य विधाओं के समान नाटक भी एक उद्देश्य पूर्ण रचना है। नाटककार अपने पात्रों के द्वारा इस उद्देश्य को स्पष्ट करता है।
(vi) भाषा-शैली-यह नाटक का महत्त्वपूर्ण तत्व है क्योंकि इसके माध्यम से ही नाटककार अपनी संवेदनाओं को अभिव्यक्त करता है। नाटक की भाषा-शैली सरल, सहज, स्वाभाविक, पात्रानुकूल तथा प्रसंगानुकूल होनी चाहिए।

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प्रश्न 6.
कथानक को कितने भागों में बाँटा गया है ?
उत्तर:
कथानक को तीन भागों में बाँटा गया है
(i) आरंभ
(i) मध्य
(iii) समापन।

प्रश्न 7.
नाटक में स्वीकार एवं अस्वीकार की अवधारणा से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
नाटक में स्वीकार के स्थान पर अस्वीकार का अधिक महत्त्व होता है। नाटक में स्वीकार तत्व के आ जाने से नाटक सशक्त हो जाता है। कोई भी दो चरित्र जब आपस में मिलते हैं तो विचारों के आदान-प्रदान में टकराहट पैदा होना स्वाभाविक है। रंगमंच में कभी भी यथास्थिति को स्वीकार नहीं किया जाता। वर्तमान स्थिति के प्रति असंतुष्टि, छटपटाहट, प्रतिरोध और अस्वीकार जैसे नकारात्मक तत्वों के समावेश से ही नाटक सशक्त बनता है। यही कारण है कि हमारे नाटककारों को राम की अपेक्षा रावण और प्रहलाद की अपेक्षा हिरण्यकश्यप का चरित्र अधिक आकर्षित करता है। इसके विपरीत जब-जब किसी विचार, व्यवस्था या तात्कालिक समस्या को किसी नाटक में सहज स्वीकार किया गया है, वह नाटक अधिक सशक्त और लोगों के आकर्षण का केंद्र नहीं बन पाया है।

पाठ से संवाद

प्रश्न 1.
‘नाटक की कहानी बेशक भूतकाल या भविष्यकाल से संबद्ध हो, तब भी उसे वर्तमान काल में ही घटित होना पड़ता है-इस धारणा के पीछे क्या कारण हो सकते हैं ?’
उत्तर:
नाटक को दृश्य काव्य माना जाता है। इसे दर्शकों के सम्मुख प्रस्तुत किया जाता है। प्रत्येक नाटक का एक निश्चित समय-सीमा में . समाप्त होना भी आवश्यक है। साहित्य की अन्य विधाओं जैसे-कहानी, उपन्यास, कविता, निबंध को पढ़ने के लिए हम अपनी सुविधा के अनुसार समय निकाल सकते हैं। एक ही कहानी को कई दिनों में थोड़ा-थोड़ा पढ़कर समाप्त कर सकते हैं परंतु नाटक को तो दर्शकों ने एक निश्चित समय-सीमा में एक ही स्थान पर देखना होता है।

नाटककार अपने नाटक का कथ्य भूतकाल से ले अथवा भविष्यकाल से उसे उस नाटक को वर्तमान काल में ही संयोजित करना होता है। कैसा भी नाटक हो उसे एक विशेष समय में, एक विशेष स्थान पर और वर्तमान काल में ही घटित होना होता है। कोई भी पौराणिक अथवा ऐतिहासिक कथानक भी न आँखों के सामने वर्तमान में ही घटित होता है। इसलिए नाटक के मंच-निर्देश वर्तमान काल में ही लिखे जाते हैं। इन्हीं कारणों से नाटक की कहानी बेशक भूतकाल या भविष्यकाल से संबद्ध हो उसे वर्तमान काल में ही घटित होना पड़ता है।

प्रश्न 2.
‘संवाद चाहे कितने भी तत्सम और क्लिष्ट भाषा में क्यों न लिखे गए हों। स्थिति और परिवेश की माँग के अनुसार यदि वे स्वाभाविक जान पड़ते हैं तो उनके दर्शक तक संप्रेक्षित होने में कोई मुश्किल नहीं है’ क्या आप इससे सहमत हैं ? पक्ष या विपक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर:
हम इस कथन से सहमत हैं कि संवाद चाहे कितने भी तत्सम और क्लिष्ट भाषा में क्यों न लिखे गए हों। स्थिति और परिवेश की माँग के अनुसार यदि वे स्वाभाविक जान पड़ते हैं तो उनके दर्शक तक संप्रेषित होने में कोई मुश्किल नहीं होती। इसका प्रमुख कारण यह है कि दर्शक नाटक देख रहा है। वह मानसिक रूप से उस युग के परिवेश में पहुंच जाता है जिससे संबंधित वह नाटक है। पौराणिक कथानकों पर आधारित नाटकों में तत्सम प्रधान शब्दावली को भी वह अभिनेताओं के अभिनय, हाव-भाव, संवाद बोलने के ढंग से समझ जाता है। ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ के नाटकों में पिताश्री, भ्राताश्री, माताश्री शब्दों का प्रयोग बच्चे-बच्चे को स्मरण हो गया था। इसी प्रकार से जयशंकर प्रसाद, मोहन राकेश, धर्मवीर भारती, सुरेंद्र वर्मा आदि के नाटकों में प्रयुक्त शब्दावली भी परिवेश के कारण सहज रूप से हृदयंगम हो जाती है।

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प्रश्न 3.
समाचार-पत्र के किसी कहानीनुमा समाचार से नाटक की रचना करें।
उत्तर:
राँची दिनांक 24 मार्च-पैसों की तंगी के कारण रमेश ने अपनी पुत्री अलका का विवाह रोक दिया था कि उसके मित्र सुरेश ने उसकी बेटी के विवाह का सारा भार अपने ऊपर लेकर उसका विवाह निश्चित तिथि पर कराया। आज के युग में मित्रता की ऐसी मिसाल कम ही दिखाई देती है। सुरेश की इस पहल पर मुहल्ले वालों ने भी रमेश की सहायता की। इस समाचार का नाट्य रूपांतरण निम्नलिखित होगा (स्थान घर का बरामदा। रमेश सिर पकड़ कर बैठा है। उसकी पत्नी पूनम और पुत्री अलका भी उदास बैठे हैं)

पूनम – (रमेश को समझाते हुए) कोई बात नहीं, धंधे में नफा-नुकसान होता रहता है। अभी कुछ दिन की मोहलत माँग लेते हैं। लड़के वाले मान ही
जाएँगे। – (रूंधे स्वर में) अब कुछ नहीं हो सकता। अब तो यह विवाह रोकना ही होगा। (तभी दौड़ता हुआ सुरेश वहाँ आता)
सुरेश – अरे ! रमेश! मैं यह क्या सुन रहा हूँ ? अलका का विवाह नहीं होगा।
रमेश – (मंद स्वर में) क्या करूँ-व्यापार में घाटा पड़ गया है। सब कुछ समाप्त हो गया।
सुरेश – (आवेश में) क्या मैं मर गया हूँ ? अलका मेरी भी तो बेटी है। मैं करूँगा उसका विवाह ।
पूनम – इसे कहते हैं मित्र। दिल में कसक उठी तो आया भागा-भागा। (उसी समय वहाँ मुहल्ले के कुछ लोग आ जाते हैं।)
एक बुजुर्ग – रमेश घबराओ मत अलका हम सबकी बेटी है। हम सब मिलकर इसका विवाह करेंगे। क्यों भाइयो ? (सब समवेत स्वर में हाँ करेंगे कहते हैं और पर्दा गिरता है।)

प्रश्न 4.
(क ) अध्यापक और शिष्य के बीच गृह-कार्य को लेकर पाँच-पाँच संवाद लिखिए।
(ख) एक घरेलू महिला एवं रिक्शा चालक को ध्यान में रखते हुए पाँच-पाँच संवाद लिखिए।
उत्तर.
(क)
अध्यापक – रमेश, तुमने गृह-कार्य किया है ?
शिष्य – नहीं, मास्टर जी।
अध्यापक – क्यों नहीं किया।
शिष्य – मैं किसी कारण से नहीं कर पाया।
अध्यापक किस कारण से नहीं कर पाए ?
शिष्य – कल हमारे घर कुछ अतिथि आ गए थे।
अध्यापक – तुम झूठ तो नहीं बोल रहे हो ?
शिष्य – नहीं, मास्टर जी।
अध्यापक – कल गृह-कार्य ज़रूर करके लाना।
शिष्य – जी, मास्टर जी। ज़रूर करके आऊँगा।

(ख)
घरेलू महिला – रिक्शा ! ओ रिक्शा वाले !
रिक्शा चालक – हाँ! मेम साहब।
घरेलू महिला – अशोका कलोनी चलोगे ?
रिक्शा चालक – हाँ, चलूँगा।
घरेलू महिला – कितने पैसे लोगे ?
रिक्शा चालक – जी, दस रुपये।
घरेलू महिला – दस रुपये तो ज्यादा हैं ?
रिक्शा चालक – क्या करें मेम साहब, महँगाई बहुत है।
घरेलू महिला – ठीक है, ठीक है। आठ रुपये ले लेना।
रिक्शा चालक – चलो, मेम साहब, आठ ही दे देना।

(घ) कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतरण

प्रश्न 1.
कहानी और नाटक में अंतर स्पष्ट कीजिए। . (HR. 2013 Set-C, 2014 Set-B)
अथवा कहानी और नाटक में क्या-क्या असमानताएँ हैं ?
उत्तर:
कहानी और नाटक दोनों गद्य विधाएं हैं। इनमें जहां कुछ समानताएँ हैं वहाँ कुछ असमानताएँ या अंतर भी हैं जो इस प्रकार है
कहानी
1. कहानी एक ऐसी गद्य विधा है जिसमें जीवन के किसी अंक विशेष का मनोरंजन पूर्ण चित्रण किया जाता है।
2. कहानी का संबंध लेखक और पाठकों से होता है।
3. कहानी कहीं अथवा पढ़ी जाती है।
4. कहानी को आरंभ, मध्य और अंत के आधार पर बांटा जाता है।
5. कहानी में मंच सज्जा, संगीत तथा प्रकाश का महत्त्व नहीं है।

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नाटक:
1. नाटक एक ऐसी गद्य विधा है जिसका मंच पर अभिनय किया जाता है।
2. नाटक का संबंध लेखक, निर्देशक, दर्शक तथा श्रोताओं से है।
3. नाटक का मंच पर अभिनय किया जाता है।
4. नाटक को दृश्यों में विभाजित किया जाता है।
5. नाटक में मंच सज्जा, संगीत और प्रकाश व्यवस्था का विशेष महत्त्व होता है।

प्रश्न 2.
कहानी को नाटक में किस प्रकार रूपांतरित किया जा सकता है ? (HR. 2012 Set-A, 2013 Set-B)
उत्तर:
कहानी को नाटक में रूपांतरित करने के लिए अनेक महत्त्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है जो इस प्रकार है
अभिव्यक्ति और माध्यम –
1. कहानी की कथावस्तु को समय और स्थान के आधार पर विभाजित किया जाता है।
2. कहानी में घटित विभिन्न घटनाओं के आधार पर दृश्यों का निर्माण किया जाता है।
3. कथावस्तु से संबंधित वातावरण की व्यवस्था की जाती है। ..
4. ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था का ध्यान रखा जाता है।
5. कथावस्तु के अनुरूप मंच सजा और संगीत का निर्माण किया जाता है।
6. पात्रों के द्वव को अभिनय के अनुरूप परिवर्तित किया जाता है।
7. संवादों को अभिनय के अनुरूप स्वरूप प्रदान किया जाता है।
8. कथानक को अभिनय के अनुरूप स्वरूप प्रदान किया जाता है।

प्रश्न 3.
नाट्य रूपांतरण में किस प्रकार की मुख्य समस्या का सामना करना पड़ता है ? (HR. 2012 Set-C, 2014 Set-A, 2015 Set-C)
अथवा
नाट्य रूपांतरण करते समय कौन-कौन सी समस्याएँ आती हैं ?
उत्तर:
नाटय रूपांतरण करते समय अनेक समस्याओं का सामना करना पडता है. जो इस प्रकार है
1. सबसे प्रमुख समस्या कहानी के पात्रों के मनोभावों को कहानीकार द्वारा प्रस्तुत प्रसंगों अथवा मानसिक वंवों के नाटकीय प्रस्तुति में आती है।
2. पात्रों के द्वंद्व को अभिनय के अनुरूप बनाने में समस्या आती है।
3. संवादों को नाटकीय रूप प्रदान करने में समस्या आती है।
4. संगीत ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था करने में समस्या होती है।
5. कथानक को अभिनय के अनुरूप बनाने में समस्या होती है।

प्रश्न 4.
कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर:
कहानी अथवा कथानक का नाट्य रूपांतरण करते समय निम्नलिखित आवश्यक बातों का ध्यान रखना चाहिए
1. कथानक के अनुसार ही दृश्य दिखाए जाने चाहिए।
2. नाटक के दृश्य बनाने से पहले उसका खाका तैयार करना चाहिए।
3. नाटकीय संवादों का कहानी के मूल संवादों के साथ मेल होना चाहिए।
4. कहानी के संवादों को नाट्य रूपांतरण में एक निश्चित स्थान मिलना चाहिए।
5. संवाद सहज, सरल, संक्षिप्त, सटीक, प्रभावशैली और बोलचाल की भाषा में होने चाहिए।
6. संवाद अधिक लंबे और ऊबाऊ नहीं होने चाहिए। . (HR. 2011 Set-A)

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प्रश्न 5.
कहानी के पात्र नाट्य रूपांतरण में किस प्रकार परिवर्तित किये जा सकते हैं ?
उत्तर:
कहानी के पात्र नाट्य रूपांतरण में निम्न प्रकार से परिवर्तित किये जा सकते हैं
1. नाट्य रूपांतरण करते समय कहानी के पात्रों की दृश्यात्मकता का नाटक के पात्रों से मेल होना चाहिए।
2. पात्रों की भावभंगिमाओं तथा उनके व्यवहार का भी उचित ध्यान रखना चाहिए।
3. पात्र घटनाओं के अनुरूप मनोभावों को प्रस्तुत करने वाले होने चाहिए।
4. पात्र अभिनय के अनुरूप होने चाहिए।
5. पात्रों का मंच के साथ मेल होना चाहिए।

प्रश्न 6.
कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय दृश्य विभाजन कैसे करते हैं ?
उत्तर:
कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय दृश्य विभाजन निम्न प्रकार से करते हैं
1. कहानी की कथावस्तु को समय और स्थान के आधार पर विभाजित करके दृश्य बनाए जाते हैं।
2. प्रत्येक दृश्य कथानक के अनुसार बनाया जाता है।
3. एक स्थान और समय पर घट रही घटना को एक दृश्य में लिया जाता है।
4. दूसरे स्थान और समय पर घट रही घटना को अलग दृश्यों में बांटा जाता है।
5. दृश्य विभाजन करते समय कथाक्रम और विकास का भी ध्यान रखा जाता है।

पाठ से संवाद

प्रश्न 1.
कहानी और नाटक में क्या समानता होती है ?
उत्तर:
.CBSE Class 12 Hindi कविता कहानी नाटक की रचना प्रक्रिया 5

प्रश्न 2.
स्थान और समय का ध्यान में रखते हुए ‘दोपहर का भोजन’ कहानी को विभिन्न दृश्यों में विभाजित करें। किसी एक दृश्य का
संवाद भी लिखें।
उत्तर:
‘दोपहर का भोजन’ कहानी में पहला दृश्य सिद्धेश्वरी के घर की दयनीय दशा और टूटी खाट पर लेटा उस का सब से छोटा बेटा। दूसरे
दृश्य में सिद्धेश्वरी का बार-बार दरवाजे से गली में आते-जाते को देखना। तीसरे दृश्य में थकेहारे रामचंद्र का आकर हताश-सा बैठना
और खाना खाना। मोहन के संबंध में बातचीत करना। अगले दृश्य में रामचंद्र का भोजन करके चले जाना और मोहन का खाना-खाने के लिए आना। माँ-बेटे की बातचीत। मोहन भोजन करके जाता है।

अगले दृश्य में चंद्रिका प्रसाद का परेशान मुद्रा में आना। भोजन करना पति-पत्नी का वार्तालाप। अगले दृश्य में सिद्धेश्वरी का खाना खाने बैठना। सोए हुए पुत्र को देखना आधी रोटी उसके लिए रखना। अंतिम दृश्य में आँसू बहाते हुए सिद्धेश्वरी का भोजन करना, घर में मक्खियों का भिनभिनाना और चंद्रिका प्रसाद का निश्चिततापूर्वक सोना। दृश्य तीन (रामचंद्र थकाहारा-सा घर में आता है। सिद्धेश्वरी उसके हाथ-पैर धुलवाती है। वह पटरा लेकर बैठ जाता है। सिद्धेश्वरी उसके सामने थाली में खाना लगा रख देती है।)

सिद्धेश्वरी-खाना खाओ बेटा!
(रामचंद्र चुपचाप खाना खाने लगता है। सिद्धेश्वरी उसे पंखा झलने लगती है।)

सिद्धेश्वरी-दफ्तर में कोई बात हो गई है क्या ?
रामचंद्र-नहीं तो, रोज़ जैसा ही था।
सिद्धेश्वरी-इतने चुप क्यों हों ?
रामचंद्र- लाला काम इतना लेता है पर पैसे देते हुए मरता है।
सिद्धेश्वरी-कोई बात नहीं, जब तक कहीं और काम नहीं मिलता सहन करना ही पड़ेगा।
रामचंद्र-वह तो है ही।
(सिद्धेश्वरी उसे और रोटी लेने के लिए कहती है पर वह सिर हिलाकर इनकार कर देता है। रामचंद्र हाथ धोकर बाहर निकल जाता है।)

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प्रश्न 3.
कहानी के नाट्य रूपांतरण में संवादों का विशेष महत्त्व होता है। नीचे ईदगाह कहानी से संबंधित कुछ चित्र दिए जा रहे हैं। इन्हें देखकर संवाद लिखें।
उत्तर:
नाट्य रूपांतरण
महमूद (पैसे गिनते हुए)-अरे, सुन। मेरे पास पूरे बारह पैसे हैं।
मोहसिन-और मेरे पास तो पंद्रह हैं। तेरे पास कितने हैं, हामिद ?
हामिद-अभी तो मेरे पास कुछ भी नहीं है। अभी जाता हूँ घर, और लेकर आता हूँ दादी जान से।
महमूद-हाँ, हाँ। भाग कर जा। ईदगाह जाना है। बहुत दूर है वह यहाँ से।
हामिद-(कोठरी के दरवाजे से)-दादी जान। सब मेला देखने जा रहे हैं। मुझे भी पैसे दो। मैं भी मेला देखने जाऊँगा।
अमीना (आँखें पोंछते हुए)-बेटा इतनी दूर वहाँ कैसे जाएगा ?
हामिद (उत्साहपूर्वक)-सब के साथ। सभी तो जा रहे हैं।
अमीना (बटुआ खोलते हुए) ले बेटा, तीन पैसे हैं।
संभल कर जाना। सब एक साथ रहना।
हामिद (उत्साह में भर कर)-नहीं दादी हम इकट्ठे ही रहेंगे।
मोहसिन-अरे तेज़-तेज़ चलो। हमें वहाँ जल्दी पहुँचना है। अरे देख तो ……..।
महमूद-कितने मोटे-मोटे आम लगे हैं इन पेड़ों पर।
हामिद-लीचियाँ भी लगी हैं।
मोहसिन-तोड़ें, इन्हें।
हामिद-अरे, नहीं। माली पीटेगा।

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CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

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CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

ऐसे काव्यांश जो आपकी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कविताओं में से नहीं हैं, उन्हें प्रश्न-पत्र में अपठित काव्यांश बोध के अंतर्गत पूछा
जाएगा। इनमें प्राय: भाव-बोध से संबंधित प्रश्नों को पूछा जाता है। इसलिए यह अति आवश्यक है कि दिए गए काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके भावों को समझा जाए। काव्यांश के केंद्रीय भाव को समझकर संभावित उत्तरों को लिखना आसान होता है। आपके द्वारा दिए जाने वाले उत्तरों की भाषा सरल, स्पष्ट और सटीक होनी चाहिए।

अपठित काव्यांश को हल करने की विधि —

  • काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए।
  • यदि काव्यांश समझने में कठिन हो तो उसे बार-बार तब तक पढ़ना चाहिए। जब तक आपको उसका मूलभाव समझ न आ जाए।
  • कविता के नीचे दिए गए प्रश्नों को पढ़िए और फिर से काव्यांश पर ध्यान देकर उन पंक्तियों और स्थलों को चुनिए, जिनमें प्रश्नों के
    उत्तर छिपे हुए हों।
  • जिस-जिस प्रश्न का उत्तर आपको मिलता जाए उसे रेखांकित करते जाइए।
  • अस्पष्ट और सांकेतिक प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए काव्यांश के मूल-भावों को आधार बनाइए।
  • प्रत्येक उत्तर अपने शब्दों में लिखिए।
  • प्रतीकात्मक और लाक्षणिक शब्दों के उत्तर एक से अधिक शब्दों में दीजिए। ऐसा करने से आप स्पष्ट उत्तर लिख पाएँगे।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

(अपठित काव्यांश के कुछ उदाहरण )
दिए गए काव्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1. तेरे घर के द्वार बहुत हैं,
किसमें होकर आऊँ मैं ?
सब द्वारों पर भीड़ मची है,
कैसे भीतर जाऊँ मैं ?
द्वारपाल भय दिखलाते हैं,
कुछ ही जन जाने पाते हैं,
शेष सभी धक्के खाते हैं,
क्यों कर घुसने पाऊँ मैं ?
तेरे घर के द्वार बहुत हैं,
किसमें होकर आऊँ मैं ?
मुझमें सभी दैन्य दूषण हैं,
नहीं वस्त्र तक, क्या भूषण हैं,
किंतु यहाँ लज्जित पूषण हैं,
अपना क्या दिखलाऊँ मैं ?
तेरे घर के द्वार बहुत हैं,
किसमें होकर आऊँ मैं ?
मुझमें तेरा आकर्षण है,
किंतु यहाँ घन संघर्षण है,
इसीलिए दुर्धर घर्षण है,
क्यों कर तुझे बुलाऊँ मैं ?
तेरे घर के द्वार बहुत हैं,
किसमें होकर आऊँ मैं ?
तेरी विभव कल्पना करके,
उसके वर्णन के मन भर के,
भूल रहे हैं जन बाहर के
कैसे तुझे भुलाऊँ मैं,
तेरे घर के द्वार बहुत हैं,
किसमें होकर आऊँ मैं ?
बीत चुकी है बेला सारी,
किंतु न आई मेरी बारी,
करूँ कुटी की अब तैयारी,
वहीं बैठ गुन गाऊँ मैं,
तेरे घर के द्वार बहुत हैं,
किसमें होकर आऊँ मैं ?
कुटी खोल भीतर जाता हूँ,
तो वैसा ही रह जाता हूँ,
तुझको यह कहते पाता हूँ–
“अतिथि, कहो क्या लाऊँ मैं ?”
तेरे घर के द्वार बहुत हैं,
किसमें होकर आऊँ मैं ?

प्रश्न
(क) कवि ने किसके घर के द्वारों की बात कही है और क्यों ?
(ख) कवि द्वार तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा ?
(ग) कवि कहाँ बैठकर गुणों का गायन करना चाहता है ?
(घ) द्वारों के बाहर की स्थिति क्या है ?
(ङ) कुटिया के भीतर कौन और क्यों कहता है-“अतिथि, कहो क्या लाऊँ मैं ?”
उत्तर
(क) कवि ने ईश्वर के घर के जिन द्वारों की बात की है वे भिन्न-भिन्न प्रकार के धर्म हैं। भिन्न-भिन्न धर्मों को मानने वाले अलग-अलग प्रकार से पूजा-उपासना करते हुए ईश्वर को पाना चाहते हैं और वे किसी भी वार से प्रवेश करके ईश्वर की प्राप्ति कर सकते हैं।
(ख) कवि के पास किसी भी प्रकार की साधन-सामग्री और दीनता नहीं है जिस कारण वह द्वार तक पहुँच नहीं पा रहा।
(ग) कवि ईश्वर के द्वार के बाहर कुटिया बनाकर उसी में रहना और गुणों का गायन करना चाहता है।
(घ) द्वारों के बाहर साधकों और भक्तों की भीड़ लगी रहती है, जो ईश्वर के दर्शन करना चाहती है।
(ङ) कुटिया के भीतर स्वयं ईश्वर भक्त से पहले पहुँचकर साधक का आतिथ्य करते हुए यह वाक्य कहता है क्योंकि ईश्वर तो सर्वव्यापक है।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

2. गुरुजन-परिजन सब धन्य ध्येय हैं मेरे,
औषधियों के गुण-विगुण ज्ञेय हैं मेरे।
वन-देव-देवियाँ आतिथ्य हैं मेरे,
प्रिय-संग यहाँ सब प्रेय श्रेय हैं मेरे।
मेरे पीछे ध्रुव-धर्म स्वयं ही धाया,
मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया।
नाचो मयूर, नाचो कपोत के जोड़े,
नाचो कुरग, तुम लो उड़ान के तोड़े।
गाओ दिवि, चातक, चटक भंग भय छोड़े,
वैदेही के वनवास-वर्ष हैं थोड़े।
तितली, तूने यह कहाँ चित्रपट पाया ?
मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया।
आओ कलापि, निज चंद्रकला दिखलाओ,
कुछ मुझसे सीखो और मुझे सिखलाओ।
गाओ पिक, मैं अनुकरण करूँ, तुम गाओ,
स्वर खींच तनिक यों उसे घुमाते जाओ।
शुक, पढ़ो,-मधुर फल प्रथम तुम्हीं ने खाया,
मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया।
अयि राजहंसि, तू तरस तरस क्यों रोती,
तू शुक्ति-वंचिता कहीं मैथिली होती।
तो श्यामल तनु के श्रमज-बिंदुमय मोती,
निज व्यंजन-पक्ष से तूं अंकोर सुध खोती….
निज पर मानस ने पद्-रूप मुँह बाया,
मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया।
ओ निर्झर, झरझर नाद सुनाकर झड़ तू,
पथ के रोड़ों से उलझ-सुलझ, बढ़ अड़ तू।
ओ उत्तरीय, उड़, मोद-पयोद, घुमड़ तू,
हम पर गिरि-गद्गद् भाव, सदैव उमड़ तू।
जीवन को तूने गीत बनाया, गाया,
मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया।
ओ भोली कोल-किरात-भिल्ल-बालाओ,
मैं आप तुम्हारे यहाँ आ गई, आओ।
मुझको कुछ करने योग्य काम बतलाओ,
दो अहो ! नव्यता और भव्यता पाओ।
लो, मेरा नागर भाव भेंट जो लाया,
मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया।
सब ओर लाभ ही लाभ बोध-विनिमय में,
उत्साह मुझे है विविध वृत्त-संचय में।
तुम अर्धनग्न क्यों रहो अशेष समय में,
आओ, हम कातें-बुनें गान की लय में।
निकले फूलों का रंग, ढंग से ताया,
मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया।

प्रश्न
(क) कवि ने सीता के माध्यम से नारी के किस रूप को उद्घाटित किया है ?
(ख) सीता माँ ने पर्ण-कुटी में किस प्रकार के सुख को प्राप्त किया है ?
(ग) सीता ने किन-किन पक्षियों से कुछ समझना और उनको समझाना चाहा है ?
(घ) झरनों से किस प्रकार आगे बढ़ने के लिए आग्रह किया गया है ?
(ङ) स्वावलंबी बनने की प्रेरणा किसे और किस प्रकार दी गई है ?
उत्तर
(क) कवि ने सीता के माध्यम से नारी की संघर्षशीलता और रचनात्मकता को उद्घाटित किया है।
(ख) सीता माँ ने पर्ण-कुटी में ही राज-भवन सा सुख प्राप्त किया है।
(ग) सीता ने मोर, कबूतर, कुरंग, दिवि, चातक, चिड़िया, कोयल, तोते, राजहंस आदि से कुछ सीखना और उन्हें कुछ समझाना चाहा है।
(घ) झरनों से निरंतर ‘झरझर’ की ध्वनि करते हुए राह के पत्थरों से टकराते हुए आगे बढ़ने का आग्रह किया गया है।
(ङ) सीता ने कोल, किरात और भील बालाओं को स्वावलंबन का पाठ पढ़ाया है। वह उन्हें कातने-बुनने की शिक्षा देती है।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

3. निज रक्षा का अधिकार रहे जन-जन को,
सबकी सुविधा का भार किंतु शासन को।
मैं आर्यों का आदर्श बताने आया,
जन-सम्मुख धन को तुच्छ जताने आया।
सुख-शांति-हेतु मैं क्रांति मचाने आया,
विश्वासी का विश्वास बचाने आया,
मैं आया उनके हेतु कि जो तापित हैं,
जो विवश, विकल, बल-हीन, दीन शापित हैं।
हो जाएँ अभय वे जिन्हें कि भय भासित हैं,
जो कौणप-कुल से मूक-सदृश शासित हैं।
मैं आया, जिसमें बनी रहे मर्यादा,
बच जाय प्रबल से, मिटै न जीवन सादा।
सुख देने आया, दुःख झेलने आया।

मैं मनुष्यत्व का नाट्य खेलने आया,
मैं यहाँ एक अवलंब छोड़ने आया,
गढ़ने आया हूँ, नहीं तोड़ने आया।
मैं यहाँ जोड़ने नहीं, बाँटने आया,
जगदुपवन के झंखाड़ छाँटने आया।
मैं राज्य भोगने नहीं, भुगाने आया।
हंसों को मुक्ता-मुक्ति चुगाने आया।
भव में नव वैभव व्याप्त कराने आया।
नर को ईश्वरता प्राप्त कराने आया।
संदेश यहाँ मैं नहीं स्वर्ग का लाया,
इस भूतल को ही स्वर्ग बनाने आया।
अथवा आकर्षण पुण्यभूमि का ऐसा,
अवतरित हुआ मैं, आप उच्च फल जैसा।

प्रश्न
(क) कवि ने शासक का कार्य क्या बताया है ?
(ख) सुख-शांति की स्थापना के लिए राम क्या करना चाहते हैं ?
(ग) पृथ्वी स्वर्ग-तुल्य कब बन सकती है ?
(घ) राम धरती पर किस प्रयोजन से आए थे ?
(छ) राम ने मनुष्यत्व का नाटक किस प्रकार खेला था ?
उत्तर
(क) कवि के अनुसार शासक का कार्य अपनी प्रजा के लिए सभी प्रकार के सुख-साधन का प्रबंध करना है। उसे उनकी रक्षा करनी चाहिए।
(ख) सुख-शांति की स्थापना के लिए राम क्रांति लाना चाहते हैं, जिससे विश्वासी का विश्वास बचा रहे। वे विवश, विकल, बलहीन और दीन-दुःखियों के दु:ख मिटाना चाहते हैं।
(ग) यदि शासक वास्तव में ही प्रजापालक हों तो यह पृथ्वी स्वर्ग तुल्य बन सकती है।
(घ) राम नर को ईश्वरता प्राप्त कराने और इस धरती को स्वर्ग बनाने के लिए आए थे।
(ङ) राम ने मनुष्यत्व का नाटक स्वयं दुःख झेलकर तथा अन्य सभी को सुख देकर खेला था।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

4. अहा ! खेलता कौन यहाँ शिशु सिंह से
आर्यवृंद के सुंदर सुखमय भाग्य-सा
कहता है उसको लेकर निज गोद में’
खोल, खोल, मुख सिंह-बाल, मैं देखकर
गिन लूँगा तेरे दाँतों को हैं भले,
देखू तो कैसे यह कैसे कुटिल कठोर हैं’
देख वीर बालक के इस औद्धत्य को
लगी गरजने भरी सिंहिनी क्रोध से छड़ी तानकर
बोला बालक रोष सेबाधा देगी क्रीड़ा में यदि तू कभी
मार खाएगी, और तुझे दूंगा नहीं
इस बच्चे को; चली जा अरी भाग जा
अहा, कौन यह वीर बालक निर्भीक है

कहो भला भारतवासी ! हो जानते
यही ‘भरत’ वह बालक है, जिस नाम से
‘भारत’ संज्ञा पड़ी इसी वीर भूमि की
कश्यप के गुरुकुल में शिक्षित हो रहा
आश्रम में पलकर कानन में घूमकर
निज माता की गोद मोद भरता रहा
जो पति से भी बिछुड़ रही दुर्देव-वश
जंगल के शिशुसिंह सभी सहचर रहे
रहा घूमता हो निर्भीक प्रवीर यह
जिसने अपने बलशाली भुजदंड से
भारत का साम्राज्य प्रथम स्थापित किया
वही वीर यह बालक है दुष्यंत का,
भारत का शिर-रत्न ‘भरत’ शुभ नाम है।

प्रश्न
(क) कौन किसके दाँत गिनना चाहता है ?
(ख) शेरनी की गर्जन सुन बालक ने क्या कहा था ?
(ग) किसके नाम पर हमारे देश को भारत कहा जाता है ?
(घ) बालक किस ऋषि के आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहा था ?
(ङ) बालक की माँ किस कारण अभागी थी ?
उत्तर
(क) दुष्यंत-पुत्र भरत खेल-खेल में शेर के बच्चे के मुँह को बलपूर्वक खोलकर उसके कुटिल-कठोर दाँतों को गिनना चाहता है।
(ख) शेरनी की क्रोध भरी गर्जन को सुनकर बालक ने छड़ी तानकर उसे धमकाते हुए कहा था कि यदि वह वहाँ से नहीं भागी तो वह उसे छड़ी से पीटेगा और उसके शावक को उसे वापस नहीं करेगा।
(ग) हमारे देश को बालक भरत के नाम पर ही भारत कहा जाता है।
(घ) बालक महर्षि कश्यप के आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहा था।
(ङ) बालक की माँ इस कारण अभागी थी क्योंकि उसे अपने पति का साहचर्य प्राप्त नहीं हुआ था।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

5. यह दीप, अकेला, स्नेह-भरा,
है गर्व-भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।
यह जन है : गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा ?
पनडुब्बा : ये मोती सच्चे फिर कौन कृती लाएगा ?
यह समिधा : ऐसी आग हठीला बिरला सुलगाएगा।
यह अद्वितीय : यह मेरा : यह मैं,
स्वयं विसर्जित : यह दीप, अकेला, स्नेह-भरा,
है गर्व-भरा मदमाता, पर
इसको भी पंक्ति को दे दो।
यह मधु है : स्वयं काल की मौना का युग-संचय,
यह गोरस : जीवन-कामधेनु का अमृत-पूत पय,
यह अंकुर : फोड़ धरा को रवि को तकता निर्भय,
यह प्रकृत, स्वयम्भू, ब्रह्म, अयुत :

इसको भी शक्ति को दे दो।
यह दीप, अकेला, स्नेह-भरा है गर्व-भरा मदमाता, पर
इसको भी पंक्ति को दे दो।
यह वह विश्वास, नहीं जो अपनी लघुता में भी काँपा,
वह पीड़ा, जिसकी गहराई को स्वयं उसी ने नापा;
कुत्सा, अपमान, अवज्ञा के धुंधवाते कडुवे तम में,
यह सदा-द्रवित, चिर जागरूक, अनुरक्त-नेत्र, उल्लंब-बाहु,
यह चिर-अखंड अपनापा। जिज्ञासु,
प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भक्ति को दे दो।
यह दीप, अकेला, स्नेह-भरा,
है गर्व-भरा मदमाता, पर,
इसको भी पंक्ति को दे दो।

प्रश्न्र
(क) व्यक्ति के प्रतीक रूप में ‘दीप’ कौन है और वह क्या चाहता है ?
(ख) कवि ने स्वयं को पनडुब्बा क्यों माना है ?
(ग) कवि ने किन-किन को असाधारण और अद्वितीय माना है ?
(घ) कवि किस सर्जक को श्रेष्ठ और अर्थवान मानता है ?
(ङ) दीपक किस-किस को झेलकर सदा प्रकाश देता आया है ?
अन्ना
(क) व्यक्ति के प्रतीक रूप में ‘दीप’ स्वयं कवि है जो समाज रूपी पंक्ति में अपना स्थान पाना चाहता है।
(ख) कवि मन की गहराइयों से विचार रूपी मोती बाहर ला कर समाज को कविता के रूप में प्रदान करता है इसलिए उसने स्वयं को पनडुब्बा माना है।
(ग) कवि ने महान गीतकार, कुशल गोताखोर और बलिदानी क्रांतिकारी को असाधारण और अद्वितीय माना है।
(घ) कवि उस सर्जक को श्रेष्ठ और अर्थवान मानता है, जो समाज से सदा जुड़ा रहता है।
(ङ) दीपक पीड़ा और जलन को झेलकर सदा धुएँ से भरे अंधकार में जलता रहा है। वह स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता रहा है।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

6. हरी बिछली घास।
दोलती कलगी छरहरी बाजरे की।
अगर मैं तुझको,
ललाती साँझ के नभ की अकेली तारिका
अब नहीं कहता,
या शरद के भोर की नीहार-न्हायी कुँईं,
टटकी कली चंपे की,
वगैरह, तो
नहीं कारण कि मेरा हृदय उथला
या कि सूना है
या कि मेरा प्यार मैला है।
बल्कि केवल यही :
ये उपमान मैले हो गए हैं।
देवता इन प्रतीकों के कर गए हैं कूच।
कभी बासन अधिक घिसने से मुलम्मा छूट जाता है।
मगर क्या तुम
नहीं पहचान पाओगी :
तुम्हारे रूप केतुम हो,
निकट हो, इसी जादू के
निजी किस सहज, गहरे बोध से,
किस प्यार से मैं कह रहा हूँ

अगर मैं यह कहूँ
बिछली घास हो तुम
लहलहाती हवा में कलगी छरहरी बाजरे की ?
आज हम शहरातियों को
पालतू मालंच पर सँवरी जूही के फूल से
सृष्टि के विस्तार का-ऐश्वर्य का
औदार्य का
कहीं सच्चा, कहीं प्यारा
एक प्रतीक
बिछली घास है,
या शरद की साँझ के सूने गगन की पीठिका पर
दोलती कलगी अकेली बाजरे की।
और सचमुच, इन्हें जब-जब देखता हूँ
यह खुला वीरान संसृति का घना हो सिमट आता है
और मैं एकांत होता हूँ समर्पित।
शब्द जादू हैं
मगर क्या यह समर्पण कुछ नहीं है ?

प्रश्न
(क) कवि अपनी प्रेयसी को अब क्या कहकर नहीं पुकारना चाहता ?
(ख) कवि अपनी प्रेयसी को किसकी उपमा देना चाहता है ?
(ग) पुराने उपमानों का प्रयोग कवि को क्यों महत्त्वहीन प्रतीत होता है ?
(घ) शहरी पृष्ठभूमि में कौन-सा प्राकृतिक उपमान सौंदर्य का श्रेष्ठ प्रतीक है ?
(ङ) संसार की निस्सारता से ऊपर किस प्रकार उठा जा सकता है ?
उत्तर
(क) कवि अब अपनी प्रेयसी को संध्या के लालिमा युक्त आकाश में चमकने वाली अकेली तारिका और शरद् ऋतु की भोर की ओस में नहाई हुई कुमुदिनी कहकर नहीं पुकारना चाहता। वह उसे अभी-अभी खिली चंपे की कली भी नहीं कहना चाहता।
(ख) कवि अपनी प्रेयसी को चारों ओर बिछी हरे-भरे घास की चादर और हवा में इधर-उधर लहराती बाजरे की सुंदर कलगी कहकर पुकारना चाहता है।
(ग) कवि अपनी प्रेमिका को पुराने और घिसे-पिटे उपमानों से संबोधित नहीं करना चाहता क्योंकि जैसे बार-बार घिसने से कलई की परत उतर जाती है उसी प्रकार युगों से प्रयुक्त किए जाने वाले उपमानों में भी गहरी भावनाएँ और कल्पनाएँ भी छिपी हुई नहीं रह गई हैं।
(घ) शहरी पृष्ठभूमि में कोमल हरी-भरी घास प्रकृति के श्रेष्ठ सौंदर्य की प्रतीक है। उसमें सृष्टि का विस्तार और औदार्य छिपा हुआ है।
(ङ) संसार की निस्सारता से तब ऊपर उठा जा सकता है जब सुंदरता की उपमा सांसारिक भौतिकता से ऊपर उठकर प्राकृतिक पदार्थों से दी जाए।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

7. आज हम अपने युगों के स्वप्न को,
नई आलोक-मंजूषा समर्पित कर रहे हैं।
आज हम अक्लांत, ध्रुव, अविराम गति से,
बढ़े चलने का कठिन व्रत धर रहे हैं।
आज हम समवाय के हित, स्वेच्छया,
आत्म अनुशासन नया यह वर रहे हैं।
निराशा की दीर्घ तमसा में सजग रह,
तुम्हारे ही रक्त से।
तुम्ही दाता हो, तुम्हीं होता, तुम्ही यजमान हो।
यह तुम्हारा पर्व है।
भूमि-सुत ! इस पुण्य-भू की प्रजा,
स्रष्टा तुम्हीं हो इस नए रूपाकार के,
तुम्हीं से उद्भूत होकर बल तुम्हारा,
साधना का तेज-तप की दीप्ति,
तुमको नया गौरव दे रही है !
यह तुम्हारे कर्म का ही प्रस्फुटन है।
नागरिक, जय ! प्रजा-जन, जय !
राष्ट्र के सच्चे विधायक, जय !
हम आलोक-मंजूषा समर्पित कर रहे हैं,
और मंजूषा तुम्हारी है।
और यह आलोक,
तुम्हारे ही अडिग विश्वास का आलोक है।
किंतु रूपाकार यह केवल प्रतिज्ञा है,
उत्तरोत्तर लोक का कल्याण ही है साध्य,
अनुशासन उसी के हेतु है।
यह प्रतिज्ञा ही हमारा दाय है लंबे युगों की,
हम हुताशन पालते थे साधना का
आज हम अपने युगों के स्वप्न को,
आलोक-मंजूषा समर्पित कर रहे हैं।
सुनो हे नागरिक !
अभिनव सभ्य भारत के नए जनराज्य के,
सुनो ! यह मंजूषा तुम्हारी है।
पला है आलोक चिर-दिन यह तुम्हारे स्नेह से,

साधना का, जिसे हमने धर्म जाना।
स्वयं अपनी अस्थियाँ देकर हमी ने असत पर।
सत की विजय का मर्म जाना।
संपुटित कर हाथ, जिसने गोलियाँ निज वक्ष पर,
झेली, शमन कर ज्वार हिंसा का
उसी के नत-शीश धीरज को हमारे स्तिमित चिर-संस्कार,
ने सच्चा कृती का कर्म जाना।
साधना रुकती नहीं,
आलोक जैसे नहीं बँधता।
यह सुघर मंजूष भी,
झर गिरा सुंदर फूल है पथ-कूल का।
माँग पथ की इसी से चुकती नहीं।
फिर भी बीन लो यह फूल, .
स्मरण कर लो इसी पथ पर गिरे सेनानी जयी को,
बढ़ चलो फिर शोध में अपने उसी
धुंधले युगों के स्वप्न की,
जिसे हम आलोक-मंजूषा समर्पित कर रहे हैं।
आज हम अपने युगों के स्वप्न को,
यह नई आलोक-मंजूषा समर्पित कर रहे हैं।

प्रश्न
(क) कवि ने किस प्रकार की गति से आगे बढ़ने का व्रत धारण किया है ?
(ख) कवि ने देश के नागरिकों को कौन-सी आलोक मंजूषा समर्पित की है ?
(ग) कवि ने मंजूषा को किन प्रयत्नों से प्राप्त स्वीकार किया है ?
(घ) असत पर सत की विजय प्राप्ति किस प्रकार की गई ?
(ङ) देशवासियों को इस प्राप्ति के लिए क्या करना पड़ा था ?
(च) किस पथ से क्या बीनने की प्रेरणा दी गई है ?
उत्तर
(क) कवि ने बिना थके हुए, ध्रुव के समक्ष अटल निश्चय पर टिककर और बिना पथ में रुके निरंतर आगे बढ़ने का व्रत धारण किया है।
(ख) कवि ने देश के नागरिकों को गणतंत्रता रूपी आलोक मंजूषा समर्पित की है। देशवासियों ने इसकी प्राप्ति अपना रक्त देकर की है।
(ग) कवि ने माना है कि अमूल्य मंजूषा रूपी गणतंत्र की प्राप्ति देशवासियों के दिन-रात के कठोर परिश्रम और बलिदान का परिणाम है।
वे ही इसके दाता हैं और वही इसके यजमान हैं।
(घ) असत पर सत की विजय-प्राप्ति अपनी अस्थियों को स्वयं समर्पित करके की गई।
(ङ) देशवासियों को इस प्राप्ति के लिए अपनी छाती पर गोलियाँ झेलनी पड़ी थीं और भयंकर हिंसा का सामना करना पड़ा था।
(च) गणतंत्रता-प्राप्ति के संघर्ष भरे पथ से उच्च आदर्शों और जीवन-मूल्यों रूपी उन फूलों को बीनने की प्रेरणा दी गई है। जिस पर चलते हुए न जाने कितने सेनानियों ने अपना जीवन दान किया था।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

8. आज जीत की रात,
पहरुए, सावधान रहना।
खुले देश के द्वार,
अचल दीपक समान रहना।
प्रथम चरण है नए स्वर्ग का,
है मंजिल का छोर।
इस जनमथन से उठ आई,
पहरुए, सावधान रहना।
विषम शृंखलाएँ टूटी हैं,
खुली समस्त दिशाएँ,
आज प्रभंजन बनकर चलती,
युग बंदिनी हवाएँ,
प्रश्न-चिह्न बन खड़ी हो गई,
ये सिमटी सीमाएँ,
आज पुराने सिंहासन की,
टूट रहीं प्रतिमाएँ।
उठता है तूफ़ान, इंदु तुम,
दीप्तिमान रहना।
पहरुए, सावधान रहना !

पहली रत्न हिलोर,
अभी शेष है पूरी होना,
जीवन मुक्ता डोर।
क्योंकि नहीं मिट पाई दुःख की,
विगत साँवली कोर।
ले युग की पतवार,
बने अंबुधि महान रहना।
ऊँची हुई मशाल हमारी,
आगे कठिन डगर है।
शत्रु हट गया, लेकिन उसकी,
छायाओं का डर है।
शोषण से मृत है समाज,
कमज़ोर हमारा घर है।
किंतु, आ रही नई जिंदगी,
यह विश्वास अमर है।
जनगंगा में ज्वार,
लहर तुम प्रवहमान रहना।
पहरुए, सावधान रहना।

प्रश्न
(क) कवि ने किसे और कब सावधान रहने के लिए कहा है ?
(ख) देश की स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात बदला हुआ वातावरण कैसा है ?
(ग) ‘शत्रु की छाया’ से क्या तात्पर्य है ?
(घ) हमारे देश के भीतर सबसे बड़ा संकट क्या है ?
(ङ) अब भारतवासियों का विश्वास कैसा है ?
उत्तर
(क) कवि ने भारत देश की स्वतंत्रता-प्राप्ति के अवसर पर सभी देशवासियों को सजग और सचेत रहने के लिए कहा है, जिससे हम बहुत कठिनाई से प्राप्त स्वतंत्रता की रक्षा कर सकें।
(ख) देश की स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात अभी हमारे दुःख-क्लेश कम नहीं हुए हैं। अभी पिछले कष्टों की याद शेष है और अनेक प्रकार की नई समस्याएँ अपना सिर उठाने लगी हैं। देश की सिमटी हुई सीमाएँ और उससे संबंधित समस्याएँ प्रश्न-चिहन बनकर खड़ी हो गई हैं।
(ग) ‘शत्रु की छाया’ से तात्पर्य है-हमारे देश का अहित चाहने वाले भीतरी और बाहरी दुश्मन। वे किसी भी अवस्था में हमारे देश में सुख-शांति की स्थापना को सहन नहीं कर पाते।
(घ) हमारे देश के भीतर सबसे बड़ा संकट शोषण का है। इसी के कारण समाज में गरीब और अमीर के बीच अंतर बढ़ता है और भिन्न प्रकार के भेदभाव व्याप्त होते हैं।
(ङ) अब भारतवासियों को अपने पर गहरा विश्वास है। वे सब जनगंगा के ज्वार की भाँति अपनी राह में आने वाले सभी संकटों को मिटा देने के लिए कृतसंकल्प हैं।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

9. सागर के उर पर नाच-नाच करती हैं लहरें मधुरगान,
जगती के मन को खींच-खींच,
निज छवि के रस के सींच-सींच,
जल कन्याएँ भोली अजान,
सागर के उर पर नाच-नाच करती हैं लहरें मधुरगान।
प्रात: अभीर से हो अधीर,
छूकर पल-पल उल्लसित तीर,
कुसुमावलि-सी पुलकित महान,
सागर के उर पर नाच-नाच,
करती हैं लहरें मधुरगान।
संध्या-से पाकर रुचिर-रंग,
करती-सी शत सुर-चाप भंग हिलती नव तरु-दल के समान,
सागर के उर पर नाच-नाच,
करती हैं लहरें मधुरगान।

करतल-गत कर नभ की विभूति,
पाकर शशि से सुषमानुभूति
तारावलि-सी मृदु दीप्तिमान,
सागर के उर पर नाच-नाच, करती हैं लहरें मधुरगान।
तन पर शोभित नीला दुकूल,
हैं छिपे हृदय में भाव फूल,
आकर्षित करती हुई ध्यान,
सागर के उर पर नाच-नाच, करती हैं लहरें मधुरगान ।
हैं कभी मुदित, हैं कभी खिन्न,
हैं कभी मिली, हैं कभी भिन्न,
हैं एक सूत्र में बँधे प्राण
सागर के उर पर नाच-नाच, करती हैं लहरें मधुरगान।

प्रश्न
(क) इस कविता में लहरों को किस-किस रूप में चित्रित किया गया है ? किन्हीं दो रूपों का उल्लेख कीजिए।
(ख) ‘करती-सी शत सुरचाप भंग’-पंक्ति का आशय स्पष्ट करो।
(ग) सागर-लहरें किस प्रकार लोगों के मन को अपनी ओर खींचती हैं ?
(घ) प्रातःकाल में लहरों का सौंदर्य कैसा होता है ?
(ङ) कवि ने किन पंक्तियों में लहरों को युवती के रूप में चित्रित किया है उन्हें छाँटकर लिखिए।
(च) ‘हैं एक सूत्र में बँधे प्राण’-इस पंक्ति से कवि ने क्या संदेश दिया है ?
उत्तर
(क) इस कविता में कवि के द्वारा लहरों को मस्ती में भरकर नृत्य करती बालाओं/जल कन्याओं/कुसुमावलि/तारावलि और एक युवती के रूप में चित्रित किया गया है।
(ख) सागर की लहरों पर सूर्य-किरणों की लालिमा पड़ने से सौ-सौ इंद्रधनुषों की शोभा भी उसके सम्मुख फीकी पड़ जाती है। इंद्रधनुषों के सात रंग भी इनके सामने व्यर्थ प्रतीत होते हैं। (ग) सागर की लहरें अपनी नृत्य कला, उल्लास, मधुर ध्वनि, चंचलता और अद्भुत सौंदर्य के कारण सभी को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
(घ) प्रात:काल के समय उल्लसित होकर लहरें किनारों का स्पर्श करती हैं। वे पुष्पों के समान शोभा देती हैं और अपनी शोभा से खिल उठती हैं।
(ङ) जिन पंक्तियों में लहरों को युवती के रूप में चित्रित किया है, वे पंक्तियाँ हैं तन पर शोभित नीला दुकूल हैं छिपे हृदय में भाव फूल
(च) कवि ने इस पंक्ति से संदेश दिया है कि अनेक लहरें समुद्र से भिन्न होते हुए भी उससे अभिन्न हैं। इसी प्रकार इस संसार के सभी प्राणी भिन्न होते हुए भी उसी विराट का ही एक अंश हैं। वे उससे किसी भी प्रकार अलग हो ही नहीं सकते।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

10. आज सवेरे
जब बसंत आया उपवन में चुपके-चुपके
कानों ही कानों मैंने उससे पूछा,
“मित्र ! पा गए तुम तो अपने यौवन का उल्लास दुबारा
गमक उठे फिर प्राण तुम्हारे,
फूलों-सा मन फिर मुसकाया पर साथी क्या दोगे मुझको ?
मेरा यौवन मुझे दुबारा मिल न सकेगा ?”
सरसों की उँगलियाँ हिलाकर संकेतों में वह यों बोला,
मेरे भाई ! व्यर्थ प्रकृति के नियमों की यों दो न दुहाई,
होड़ न बाँधों तुम यों मुझसे।
जब मेरे जीवन का पहला पहर झुलसता था लपटों में,
तुम बैठे थे बंद उशीर पटों से घिरकर।
मैं जब वर्षा की बाढ़ों में डूब-डूब कर उतराया था
तुम हँसते थे वाटर-प्रूफ़ कवच को ओढ़े।
और शीत के पाले में जब गलकर मेरी देह जम गई।

तुम बिजली के हीटर से
तुम सेंक रहे थे अपना तन-मन
जिसने झेला नहीं, खेल क्या उसने खेला ?
जो कष्टों से भागा, दूर हो गया सहज जीवन के क्रम से,
उसको दे क्या दान प्रकृति की यह गतिमयता यह नवबेला।
पीड़ा के माथे पर ही आनंद तिलक चढ़ता आया है
मुझे देखकर आज तुम्हारा मन यदि सचमुच ललचाया है
तो कृत्रिम दीवारें तोड़ो
बाहर जाओ, खुलो, भीगो, गल जाओ
आँधी तूफ़ानों को सिर लेना सीखो
जीवन का हर दर्द सहे जो
स्वीकारो हर चोट समय की जितनी भी हलचल मचनी हो,
मच जाने दो रस-विष दोनों को गहरे में पच जाने दो.
तभी तुम्हें भी धरती का आशीष मिलेगा
तभी तुम्हारे प्राणों में भी यह
पलाश का फूल खिलेगा।

प्रश्न
(क) उपवन से कवि ने क्या माँगा ?
(ख) धरती का आशीष मानव को कब सुलभ हो सकता है ?
(ग) प्रकृति की गतिमयता और नवीनता पाने का अधिकारी कौन है ?
(घ) मानव ने अपने को किन कृत्रिम दीवारों में कैद कर रखा है ?
(ङ) “पीड़ा के माथे पर ही आनंद तिलक चढ़ता आया है”-पंक्ति में ‘आनंद तिलक’ से कवि का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर
(क) उपवन से कवि ने अपने यौवन का उल्लास, मुस्कान और उत्साह माँगा।
(ख) धरती का आशीष मानव को तब सुलभ हो सकता है, जब सुख और दुःख दोनों को ही वह समान दृष्टि से देखता और अनुभव करता है। वह दोनों का सामना करता है और जीवन से हार नहीं मानता।
(ग) प्रकृति की गतिमयता और नवीनता पाने का अधिकारी वही है, जो जीवन को सहजता से जीता है, उसका सामना करता है।
(घ) कवि के अनुसार समस्त सुख-सुविधा प्रदान करने के साधन, बिजली के हीटर, ठंडी वायु प्रदान करने वाले आधुनिक उपकरण आदि कृत्रिम दीवारें हैं। मनुष्य ने स्वयं को इनमें कैद कर रखा है।
(ङ) ‘आनंद तिलक’ से तात्पर्य है-विजय-अभिनंदन का आनंद। जीवन में संघर्ष करने वाला व्यक्ति ही विजयी होता है और वही सदा आनंद प्राप्त करता है।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

11. नीलांबर परिधान हरित पट पर सुंदर हैं,
सूर्य चंद्र युग-मुकुट, मेखला रत्नाकर हैं।
नदियाँ प्रेम-प्रवाह, फूल तारे मंडन हैं,
बंदीजन खग-वृंद, शेषफन सिंहासन है।
करते अभिषेक पयोद हैं,
बलिहारी इस वेश की, हे मातृभूमि !
तू सत्य ही, सगुण मूर्ति सर्वेश की;
जिसकी रज में लोट-लोटकर बड़े हुए हैं,
घुटनों के बल सरक-सरक कर खड़े हुए हैं।
परमहंस सम बाल्यकाल में सब, सुख पाए,
जिसके कारण ‘धूल भरे हीरे कहलाए’
हम खेले-कूदे हर्षयुत, जिसकी प्यारी गोद में।
हे मातृभूमि ! तुझको निरख, मग्न क्यों न हो मोद में।

निर्मल तेरा नीर अमृत के सम उत्तम है,
शीतल मंद सुगंध पवन हर लेता श्रम है।
षट्ऋतुओं का विविध दृश्य युत अद्भुत क्रम है,
हरियाली का फर्श नहीं मखमल से कम है।
शुचि-सुधा सींचता रात में,
तुझ पर चंद्रप्रकाश है, हे मातृभूमि !
दिन में तरणि, करता तम का नाश है।
जिस पृथ्वी में मिले हमारे पूर्वज प्यारे,
उससे हे भगवान ! कभी हम रहें न न्यारे।
लोट-लोट कर वहीं हृदय को शांत करेंगे,
उसमें मिलते समय मृत्यु से नहीं डरेंगे।
उस मातृभूमि की धूल में, जब पूरे सन जाएँगे
होकर भव-बंधन-मुक्त हम, आत्मरूप बन जाएंगे।

प्रश्न
(क) कवि अपने देश पर क्यों बलिहारी जाता है ?
(ख) कवि अपनी मातृभूमि के जल और वायु की क्या-क्या विशेषता बताता है ?
(ग) कविता की जिन पंक्तियों में कवि का अतीत के प्रति प्रेम प्रकट हुआ है उन्हें छाँटकर लिखिए।
(घ) मातृभूमि को ईश्वर का साकार रूप किस आधार पर बताया गया है ?
(ङ) प्रस्तुत कविता का मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
(क) कवि भारत भूमि के अनुपम अतुलनीय सौंदर्य, हरे-भरे वातावरण और नदियों के द्वारा प्रदान की जाने वाली अमूल्य संपदा के कारण अपने देश पर बलिहारी जाता है।
(ख) कवि बताता है कि हमारी मातृभूमि का जल अत्यंत शीतल एवं स्वच्छ है तथा इसकी वायु मंद, सुगंधित तथा शीतलता प्रदान करने वाली है। ये जीवन प्रदान करने वाले हैं।
(ग) अतीत के प्रति प्रेम प्रकट करने वाली पंक्ति है-‘जिस पृथ्वी में मिले हमारे पूर्वज प्यारे’।
(घ) हमारी मातृभूमि ईश्वर का साकार रूप है। सूर्य और चाँद इसके मुकुट के समान और शेषनाग का फन इसके सिंहासन की तरह है। बादल इसका अभिषेक करते हैं। पक्षियों का समूह निरंतर इसका गुणगान करता रहता है। अनेक नदियाँ इसका सिंचन करती हैं। यह ईश्वर का ही रूप है।
(ङ) प्रस्तुत कविता का मूल भाव यह है कि हमारी मातृभूमि के अनुपम और अतुलनीय सौंदर्य पर हम बार-बार बलिहारी जाते हैं। यह हमें जीवन प्रदान करती है। यह हमारे लिए परम पूज्यनीय है।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

12. तुम गा दो, मेरा गान अमर हो जाए !
मेरे वर्ण-वर्ण विशृंखल,
चरण-चरण भरमाए।
गूंज-गूंजकर मिटने वाले,
मैंने गीत बनाए।
रंक हुआ मैं निज निधि खोकर,
जगती ने क्या पाया !
भेंट न जिसमें मैं कुछ खोऊँ,
पर तुम सब कुछ पाओ।
तुम ले लो,
मेरा दान अमर हो जाए !
तुम गा दो,
मेरा गान अमर हो जाए !
सुंदर और असुंदर जग में मैंने क्या न सराहा,
इतनी ममतामय दुनिया में मैं केवल अनचाहा;
देखें अब किसकी रुकती है
कूक हो गई हूक गगन की,
कोकिल के कंठों पर,
तुम गा दो, मेरा गान अमर हो जाए।
जब-जब जग ने कर फैलाए,
मैंने कोष लुटाया।
आ मुझ पर अभिलाषा,
तुम रख लो, मेरा मान अमर हो जाए !
तुम गा दो, मेरा गान अमर हो जाए !
दुःख से जीवन बीता फिर भी शेष अभी कुछ रहता,
जीवन की अंतिम घड़ियों में भी तुमसे यह कहता,
सुख की एक साँस पर होता
है अमरत्व निछावर,
तुम छू दो, मेरा प्राण अमर हो जाए !
तुम गा दो, मेरा गान अमर हो जाए !

प्रश्न
(क) कवि की दृष्टि में उसके गीत कैसे हैं ?
(ख) दूसरों के द्वारा हाथ फैलाने पर कवि ने क्या किया ?
(ग) कवि ने किन स्थितियों में स्वयं को दूसरों के द्वारा अनचाहा माना है ?
(घ) अमृत्व को किस पर न्योछावर किया जा सकता है ?
(ङ) कवि कब मानता है कि उसका गान अमृत हो जाएगा?
उत्तर
(क) कवि की दृष्टि में उसके गीतों के वर्ण विशृंखलित हैं। उनके चरण स्थिरता से रहित हैं। वे गूंज-गूंज कर मिट जाने वाले हैं। उनका प्रभाव व्यापक नहीं है।
(ख) दूसरों ने जब-जब हाथ फैलाए तब-तब कवि ने अपना कोष उनकी सहायता के लिए लटा दिया। वह अपना धन लुटाकर स्वयं भिखारी-सा हो गया।
(ग) कवि ने इस संसार के सभी सुंदर और असुंदर की सराहना की, उनकी प्रशंसा की और उनके प्रति अपनी ममता बाँटी लेकिन उसने स्वयं किसी से प्रेम की प्राप्ति नहीं की। वह हर स्थिति में दूसरों के लिए अनचाहा ही बना रहा।
(घ) कवि की दृष्टि में अमृत्व को जीवन में प्राप्त की जाने वाली एक भी साँस पर न्योछावर किया जा सकता है।
(ङ) जब कवि का प्रियतम एक बार उसके लिए गान को गा देगा तब उसका गान अमर हो जाएगा।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

13. रात यों कहने लगा मुझ से गगन का चाँद,
आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है !
उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता,
और फिर बेचैन हो जगता न सोता है।
जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ ?
मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरते;
और लाखों बार तुझ-से पागलों को भी
चाँदनी में बैठ स्वप्नों पर सही करते।
आदमी का स्वप्न? है वह बुलबुला जल का,
आज बनता और कल फिर फूट जाता है;
किंतु, तो भी धन्य; ठहरा आदमी ही तो !
बुलबुलों से खेलता, कविता बनाता है !
मैं न बोला, किंतु, मेरी रागिनी बोली,
चाँद ! फिर से देख, मुझको जानता है तू ?

स्वप्न मेरे बुलबुले हैं ? है यही पानी ?
आग को भी क्या नहीं पहचानता है तू ?
मैं न वह, जो स्वप्न पर केवल सही करते,
आग में उसको गला लोहा बनाती हूँ;
और उस पर नींव रखती हूँ नये घर की,
इस तरह, दीवार फौलादी उठाती हूँ।
मनु नहीं, मनु-पुत्र है यह सामने,
जिसकी कल्पना की जीभ में भी धार होती है;
बाण ही होते-विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न के भी हाथ में तलवार होती है।
स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दे,
“रोज ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं ये;
रोकिए, जैसे बने, इन स्वप्नवालों को,
स्वर्ग की ही ओर बढ़ते आ रहे हैं ये।”

प्रश्न
(क) चाँद ने कवि से इनसान को अनोखा क्यों कहा ?
(ख) चाँद ने पागल किसे और क्यों कहा?
(ग) चाँद की दृष्टि में आदमी का स्वप्न कैसा है ?
(घ) कवि अपनी कल्पना की सार्थकता किस प्रकार सिद्ध करता है ?
(ङ) मानव की क्या विशिष्टता है ?
उत्तर
(क) चाँद ने कवि से इनसान को अनोखा जीव कहा है क्योंकि वह अपने लिए स्वयं उलझनें बनाता है और फिर स्वयं ही उन उलझनों में – फँस जाता है। वह न रात को सोता है और न दिन में।
(ख) चाँद ने कवि को पागल कहा है क्योंकि कवि तरह-तरह की कल्पनाएँ करते हैं। चाँदनी में बैठकर स्वप्नों के संसार को सही मानते हैं।
(ग) चाँद की दृष्टि में आदमी का स्वप्न जल के बुलबुले के समान क्षणभंगुर और अस्थिर है। वह पल भर में फूट जाता है पर फिर भी आदमी उसी से खेलना चाहता है।
(घ) कवि अपनी कल्पना की सार्थकता सिद्ध करते हुए कहता है कि उसकी कल्पना केवल सपना नहीं है। उसकी कल्पना यथार्थ पर टिकी हुई है। वह कल्पनाओं को आग पर गला कर लोहा बनाता है और उस पर नए घर की नींव रखी जाती है।
(ङ) मानव की विशिष्टता यह है कि वह कोरी कल्पना नहीं करता। उसकी कल्पना की जीभ में भी धार होती है। उसके पास विचारों के बाण होते हैं और उसके सपनों के हाथ में तलवार होती है।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

14. सृजन की थकन भूल जा देवता !
अभी तो पड़ी है धरा अधबनी।
अभी तो पलक में नहीं खिल सकी,
नवल कल्पना की मधुर चाँदनी।
अभी अधखिली ज्योत्स्ना की कली
नहीं जिंदगी की सुरभि में सनी
अभी तो पड़ी है धरा अधबनी,
अधूरी धरा पर नहीं है कहीं।
अभी स्वर्ग की नींव का भी पता !
सृजन की थकन भूल जा देवता !
रुका तू गया रुक जगत का सृजन,
तिमिरमय नयन में डगर भूलकर
कहीं खो गई रोशनी की किरन,
घने बादलों में कहीं सो गया।

नई सृष्टि का सप्तरंगी सपन,
रुका तू, गया रुक जगत का सृजन
अधूरे सृजन से निराशा भली,
किसलिए; जब अधूरी स्वयं पूर्णता।
सृजन की थकन भूल जा देवता !
प्रलय से निराशा तुझे हो गई।
सिसकती हुई साँस की जालियों में,
सबल प्राण की अर्चना खो गई।
थके बाहुओं में अधूरी प्रलय,
औ’ अधूरी सृजन योजना खो गई।
प्रलय से निराशा तुझे हो गई,
इसी ध्वंस में मूर्च्छिता हो कहीं।
पड़ी हो, नई जिंदगी; क्या पता ?
सृजन की थकन भूल जा देवता।

प्रश्न
(क) कवि किसे क्या भूलने को कहता है ?
(ख) देवता के रुकते ही क्या रुक गया ?
(ग) सृजन की अधूरी योजना कहाँ खो गई है ?
(घ) संभवत: नई जिंदगी कहाँ पड़ी है ?
(ङ) जिंदगी अभी अधूरी बनी क्यों प्रतीत होती है ?
उत्तर
(क) कवि देवता को सृजन की थकान भूल जाने के लिए कहता है क्योंकि अभी धरती पूरी तरह से बनी नहीं है। उसका निर्माण पूरा होने में समय शेष है।
(ख) देवता के रुकते ही जगत का सृजन भी रुक गया। रोशनी की किरण खो गई और नई सृष्टि के लिए आवश्यक सप्तरंगी सपने कहीं घने बादलों में खो गए।
(ग) सृजन की अधूरी योजना निराशा और पीड़ा में खो गई है।
(घ) संभवत: नई और सुखद जिंदगी निराशा और पीड़ा के ध्वंस में कहीं पड़ी है।
(ङ) अभी जिंदगी का विकास पूरी तरह नहीं हुआ। अभी जिंदगी नई कल्पनाओं की मधुर चाँद की पलकों पर प्रकट नहीं हुई है। अभी आशा रूपी ज्योत्स्ना की कली अधखिली है और उसमें जिंदगी की सुगंध महसूस नहीं होती।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

15. अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूंगा।
देखो, मैंने कंधे चौड़े कर लिए हैं।
मुट्ठियाँ मज़बूत कर ली हैं।
और ढलान पर एड़ियाँ जमाकर।
खड़ा होना मैंने सीख लिया है।
घबराओ मतमैं क्षितिज पर जा रहा हूँ।
सूरज ठीक जब पहाड़ी से लुढ़कने लगेगा।
मैं कंधे अड़ा दूंगा। देखना वह वहीं ठहरा होगा।
अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूंगा।
मैंने सुना है, उसके रथ में तुम हो।
तुम्हें मैं उतार लाना चाहता
हूँतुम जो स्वाधीनता की प्रतिमा हो,
तुम जो साहस की मूर्ति हो।
तुम जो धरती का सुख हो।
तुम जो कालातीत प्यार हो।
तुम जो मेरी धमनियों का प्रवाह हो।
तुम जो मेरी चेतना का विस्तार हो,
तुम्हें मैं उस रथ से उतार लाना चाहता हूँ।

रथ के घोड़े, आग उगलते रहें,
अब पहिए टस से मस नहीं होंगे।
मैंने अपने कंधे चौड़े कर लिए हैं।
कौन रोकेगा तुम्हें ? मैंने धरती बड़ी कर ली है।
अन्न की सुनहरी बालियों से मैं तुम्हें सजाऊँगा,
मैंने सीना खोल लिया है,
प्यार के गीतों में मैं तुम्हें गाऊँगा।
मैंने दृष्टि बड़ी कर ली है,
हर आँखों में तुम्हें सपनों-सा फहराऊँगा।
सूरज जाएगा भी तो कहाँ ?
उसे यहीं रहना होगा। यहीं-हमारी साँसों में,
हमारी रगों में, हमारे संकल्पों में,
हमारे रतजगों में। तुम उदास मत होओ,
अब मैं किसी भी सूरज को
नहीं डूबने दूंगा।

प्रश्न
(क) कवि ने सूरज को डूबने से रोकने के लिए क्या कर लिया है ?
(ख) कवि सूरज को डूबने से रोकने के लिए कहाँ जा रहा था ?
(ग) कवि सूरज को डूबने से रोकने का प्रयत्न कब करेगा ?
(घ) कवि रथ से किसे उतार लाना चाहता है ?
(ङ) कवि की दृष्टि में सूरज कहाँ रहेगा ?
उत्तर
(क) कवि ने सूरज को डूबने से रोकने के लिए अपने कंधे चौड़े कर लिए हैं, मुट्ठियाँ मज़बूत कर ली हैं और ढलान पर अपनी एड़ियाँ जमाकर खड़ा होना सीख लिया है।
(ख) कवि सूरज को डूबने से रोकने के लिए क्षितिज पर जा रहा था
(ग) जब सूरज पहाड़ी से लुढ़कने लगेगा तब कवि अपने कंधे अड़ाकर उसे रोकने का प्रयत्न करेगा।
(घ) कवि रथ से स्वाधीनता की प्रतिमा को उतार लाना चाहता है, जो साहस की मूर्ति है, धरती का सुख है, कालातीत प्यार है, धमनियों का प्रवाह है और कवि की चेतना का विस्तार है।
(ङ) कवि की दृष्टि में सूरज उसकी साँसों, रंगों, संकल्पों और रतजगों में रहेगा।

16. आज पानी गिर रहा है,
बहुत पानी गिर रहा है,
रात भर गिरता रहा है,
प्राण मन घिरता रहा है,
अब सवेरा हो गया है,
कब सवेरा हो गया है,
ठीक से मैंने न जाना,
बहुत सोकर सिर्फ मानाक्योंकि बादल की अँधेरी,
है अभी तक भी घनेरी,
अभी तक चुपचाप है सब,
रातवाली छाप है सब,
गिर रहा पानी झरा-झर,
हिल रहे पत्ते हरा-हर,
बह रही है हवा सरसर,
काँपते हैं प्राण थर-थर,
बहुत पानी गिर रहा है,
घर नज़र में तिर रहा है,
घर कि मुझसे दूर है जो,
घर खुशी का पूर है जो,
घर कि घर में चार भाई,
मायके में बहिन आई,
बहिन आई बाप के घर,
हाय रे परिताप के घर !
आज का दिन-दिन नहीं है,
क्योंकि इसका छिन नहीं है,
एक छिन सौ बरस है रे,
हाय कैसा तरस है रे,
घर कि घर में सब जुड़े हैं,
सब कि इतने कब जुड़े हैं,
चार भाई चार बहिनें,
भुजा भाई प्यार बहिनें,
और माँ बिन-पढ़ी मेरी,
दुःख में वह गढ़ी मेरी माँ कि जिसकी गोद में सिर,
रख लिया तो दुःख नहीं फिर,
माँ कि जिसकी स्नेह धारा,
का यहाँ तक भी पसारा,
उसे लिखना नहीं आता,
जोकि उसका पत्र पाता।
और पानी गिर रहा है,
घर चतुर्दिक घिर रहा है,
पिता जी भोले बहादुर,
वज्र-भुज नवनीत-सा उर,
पिता जी जिनको बुढ़ापा,
एक क्षण भी नहीं व्यापा,
जो अभी भी दौड़ जाएँ,
जो अभी भी खिलखिलाएँ।

प्रश्न
(क) कवि रात-दिन की वर्षा में कैसा अनुभव कर रहा था ?
(ख) कवि को क्यों पता नहीं लगा कि सुबह हो गई थी ?
(ग) कवि को सुबह-सवेरे क्या याद आ रहा था ?
(घ) कवि के लिए बहन-भाई कैसे थे ?
(ङ) माता-पिता का स्वभाव कैसा था ?
उत्तर
(क) कवि रात-दिन की निरंतर वर्षा के कारण परेशान था क्योंकि उसे अपने घर की याद आ रही थी।
(ख) रात-भर वर्षा होती रही थी। सारा आकाश घने बादलों से घिरा हुआ था। सवेरा होने पर भी बाहर रात-सा अँधेरा था इसलिए कवि को पता नहीं लगा कि सुबह हो गई थी।
(ग) कवि को सुबह-सवेरे अपने घर की याद आ रही थी, जहाँ उसके माता-पिता, चार भाई और मायके से आई बहन उसकी अनुपस्थिति में परेशान थे।
(घ) कवि के लिए बहनें प्यार की प्रतीक थीं और चारों भाई भुजाओं के समान सहारा थे।
(ङ) माता-पिता का स्वभाव अत्यंत विनम्र था। वे भोले-भाले एवं सीधे-सादे थे। वे अपने बच्चों से बहुत स्नेह करते थे।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

17. पेड़ों के झुनझुने,
बजने लगे; लुढ़कती आ रही है,
सूरज की लाल गेंद। उठ मेरी बेटी,
सुबह हो गई। तूने जो छोड़े थे,
गैस-गुब्बारे : तारे अब दिखाई नहीं देते।
(जाने कितने ऊपर चले गए।) तूने जो नचाई थी
फिरकी : चाँद, देख अब गिरा, अब गिरा।
उठ मेरी बेटी, सुबह हो गई।
तूने थपकियाँ देकर
जिन गुड्डे-गुड़ियों को सुला दिया था टीले,
मुँहरंगे आँख मलते हुए बैठे हैं,
गुड्डे की जरतारी टोपी
उलटी नीचे पड़ी है : छोटी तलैया;
वह देखो उड़ी जा रही है चूनर
तेरी गुड़िया की झिलमिल नदी।
उठ मेरी बेटी सुबह हो गई।
तेरे साथ चलकर
सोई थी जो तेरी सहेली हवा,
जाने किस झरने में नहाकर आ गई है,
गीले हाथों से छू रही है तेरी तसवीरों की किताब
देख तो, कितना रंग फैल गया।
उठ, घंटियों की आवाज़ धीमी होती जा रही है;
दूसरी गली में मुड़ने लग गया है बूढ़ा आसमान,
अभी भी दिखाई दे रहे हैं
उसकी लाठी में बाँधे रंग-बिरंगे गुब्बारे,
कागज़-पन्नी की हवा चर्खियाँ,
लाल हरी ऐनकें, दफनी के रंगीन भोंपू,
उठ मेरी बेटी, आवाज़ दे, सुबह हो गई
उठ देख
बंदर बिस्कुट का तेरा डिब्बा लिए
छत की मुंडेर पर बैठा है :
धूप आ गई।

प्रश्न
(क) बेटी को कवयित्री ने क्या कहकर प्रातःकाल में जगाया था?
(ख) चाँद कैसा दिखाई दे रहा था?
(ग) छोटी तलैया कवयित्री को कैसी प्रतीत होती है ?
(घ) बेटी की सहेली कौन है और वह कहाँ से आई है ?
(ङ) बूढ़ा कौन है और उसके पास क्या है ?
उत्तर
(क) पेड़ों के झुनझुने बजने लगे हैं और सूरज रूपी लाल गेंद लुढ़कती हुई उसकी ओर आने लगी है। यह कहकर बेटी को कवयित्री ने प्रातःकाल में जगाया था।
(ख) चाँद बेटी की गोल-गोल घूमती फिरकी की तरह दिखाई दे रहा था। वह सुबह हो जाने के बाद आकाश के उजाले में लुप्त होने ही लगा था।
(ग) छोटी तलैया बेटी के गुड्डे की जरतारी टोपी जैसी प्रतीत होती है।
(घ) बेटी की सहेली हवा है, जो झरने से अभी-अभी नहा कर आई है।
(ङ) बूढ़ा आसमान है। उसके पास तरह-तरह के रंग हैं। वे रंग-बिरंगे गुब्बारों, कागज़ की चर्खियों, लाल-हरी ऐनकों और दफनी के भोंपुओं की तरह प्रतीत होते हैं।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

18. मैं उनके धूप अँधियारों में,
सूरज की किरणें भर दूंगा।
जिनकी बुझी हुई आँखों में शबन हैं,
शृंगार नहीं है।
आज सत्य के गोरे मुख पर,
राजनीति की चेचक फूटी।
लक्ष्मी का दर्शन करते ही,
पंडित से रामायण छूटी।
मैं तो अपने मन-मंदिर में उनकी चरण-धूल पूलूंगा,
मानवता की सेवा जिनका मजहब है,व्यापार नहीं है।
आज जिंदगी डूब रही है,
स्वार्थों की गहरी दलदल में।
मानवता की लाश रखी है,
आदर्शों के ताजमहल में।
मैं उनकी जिंदगी के लिए स्वयं मृत्यु से जूझ पड़ेंगा,
जिनको साँस मिली है, लेकिन जीने का अधिकार नहीं है।
श्रम की दुल्हन भटक रही है

नंगे तन पर चिथड़े पहने।
पर बदचलन तिजोरी ने हैं
सजा रखे कंचन के गहने।
मैं उनके गुमनाम लहू से यश का रामायण लिख दूँगा,
जिन्हें भूख से मरना प्रिय है, भीख मगर स्वीकार नहीं है।
अगर कहीं कवि जन्म न लेता,
धरती पर स्याही रह जाती।
हर आँसू अनाथ कहलाता,
पीड़ा अन-ब्याही रह जाती।
मैं उनकी स्मृति में कविता का अनुपम ताजमहल रच दूंगा,
जिनकी लाश उठा चलने को कोई भी तैयार नहीं है।
आज स्वार्थ की स्वर्ण तुला पर,
तुलती है हर प्रेम-कहानी।
काँटों के बदले बिकती है,
कलियों की मजबूर जवानी।
मैं उन विधवा आशाओं को अमर-प्रेम के वर दे दूंगा,
जिनके चरणों में सपनों की पायल है, झंकार नहीं है।

प्रश्न
(क) कवि किनके जीवन में सूर्य की किरणें भरना चाहता है ?
(ख) धर्म और जाति के प्रति समर्पित लोग भी किससे प्रभावित होकर अपने कर्म से दूर हो गए हैं ?
(ग) मानव-जीवन की दशा आज कैसी हो गई है ?
(घ) परिश्रमी लोगों की अब क्या हालत है ?
(ङ) हर प्रेम कहानी का परिणाम क्या हो रहा है?
उत्तर
(क) कवि उन दीन-हीन और असहाय लोगों के जीवन में सूर्य की किरणों रूपी आशा और खुशियों को भरना चाहता है जो समाज के द्वारा दी जाने वाली पीड़ाओं से त्रस्त हैं।
(ख) धर्म और जाति के प्रति समर्पित धार्मिक, शिक्षित और विद्वान लोग भी धन के लालच से अपने धर्म से दूर हो गए हैं।
(ग) मानव-जीवन हताशा और निराशा से भरा हुआ है। वह स्वार्थी तत्वों ने प्रभावित है। उसके आदर्श मिट गए हैं। वह धन और पद के लालच में अपने आपको भी भुला चुका है।
(घ) परिश्रमी लोग भूखे मर रहे हैं। बेईमानी और बदचलनी ने जीवन-मूल्य बदल दिए हैं और वे उन विघटनकारी मूल्यों की पीड़ा से परेशान हैं।
(ङ) आज हर प्रेम कहानी स्वार्थ और धन की तुला पर तुल रही है। कलियाँ काँटों के बदले बिक रही हैं। हर प्रेम कहानी असहाय-सी है।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

19. कह दे माँ क्या अब देखू!
देखू खिलती कलियाँ या,
प्यासे सूखे अधरों को।
तेरी चिर यौवन-सुषमा,
या जर्जर जीवन देखू!
देखू हिम-हीरक हँसते,
हिलते नीले कमलों पर।
या मुरझाई पलकों से,
झरते आँसू-कण देखू!
सौरभ पी-पीकर बहता,
देखू यह मंद समीरण।
दुख की घुटे पीती या,
ठंडी साँसों को देखू!
खेलूँ परागमय मधुमय,
तेरी वसंत-छाया में।
या झुलसे संतापों से,
प्राणों का पतझर देखू।
मकरंद-पगी केसर पर,
जीती मधु-परियाँ ढूँढ़।
या उर-पंजर में कण को,
तरसे जीवन-शुक देखू !
कलियों की घन जाली में,
छिपती देखू लतिकाएँ

या दुर्दिन के हाथों में,
लज्जा की करुणा देखू।
बहलाऊँ नव किसलय के,
झूले में अलि-शिशु तेरे।
पाषाणों में मसले या,
फूलों से शैशव देखू !
तेरे असीम आँगन की,
देखू जगमग दीवाली।
या इस निर्जन कोने के,
बुझते दीपक को देखू !
देखू विहगों का कलरव,
घुलता जल की कलकल में।
निस्पंद पड़ी वीणा से,
या बिखरे मानस देखू।
मृदु रजत-रश्मियाँ देखू,
उलझी निद्रा-पंखों में।
या निर्निमेष पलकों में,
चिंता का अभिनय देखू !
तुझमें अम्लान हँसी है,
इसमें अजस्र आँसू-जल।
तेरा वैभव देखू या,
जीवन का क्रंदन देखू !

प्रश्न
(क) कवयित्री की प्रमुख दुविधा क्या है ?
(ख) कवयित्री नील-कमल के फूलों पर ओस की मोती-सी बूंदों को देखने की बजाय क्या देखना पसंद करती है ?
(ग) केसर की मोहक क्यारियों की अपेक्षा कवयित्री किसे महत्त्व देना चाहती है ?
(घ) ‘बुझते दीपक’ के माध्यम से कवयित्री किस ओर संकेत करना चाहती है ?
(ङ) ‘निस्पंद पड़ी वीणा’ किसकी असहायावस्था प्रकट करती है ? तर
उत्तर
(क) कवयित्री की प्रमुख दुविधा यह है कि वह इस बात का निर्णय नहीं कर पाती कि इस दुःख भरे संसार में प्रकृति के सुंदर-मोहक रूप को चुने या दीन-दुखियों और असहायों के प्रति अपने हृदय की सहानुभूति को व्यक्त करे।
(ख) कवयित्री नील-कमल के सुंदर फूलों पर ठहरी मोती जैसी जल की बूंदों को देखने की अपेक्षा किसी दीन-दुःखी और परेशान व्यक्ति की मुरझाई हुई पलकों से गिरती आँसू की बूंदों को देखना चाहती है।
(ग) केसर की मोहक क्यारियों की अपेक्षा कवयित्री भूख-प्यास से परेशान और सूखे अस्थि-पिंजर वाले मानवों को महत्त्व देना चाहती है।
(घ) ‘बुझते दीपक’ के माध्यम से कवयित्री दीन-हीन, निर्धन, लाचार और व्यथित बचपन की ओर संकेत करना चाहती है। वह उनकी पीड़ा से व्यथित होकर अपने जीवन को उनकी सेवा में अर्पित करना चाहती है।
(ङ) ‘निस्पंद पड़ी वीणा’ दुःखी और असहाय व्यक्तियों के जीवन को प्रकट करती है। इस प्रतीकात्मकता के द्वारा वह व्यक्त करती है कि उनके मन में छिपे भाव किसी भी तरह ठीक से व्यक्त नहीं हो पाते। वे अपनी पीड़ा कहना चाहते हैं पर किसी से कह नहीं पाते।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

20. जब कभी मछेरे को फेंका हुआ,
फैला जाल,
समेटते हुए, देखता हूँ।
तो अपना सिमटता हुआ,
‘स्व’ याद हो आता है
जो कभी समाज, गाँव और
परिवार के बृहत्तर रकबे में,
समाहित था।
‘सर्व’ की परिभाषा बनकर,
और अब केंद्रित हो,
गया हूँ, मात्र बिंदु में।
जब कभी अनेक फूलों पर,
बैठी, पराग को समेटती,

मधुमक्खियों को देखता हूँ।
तो मुझे अपने पूर्वजों की,
याद हो आती है।
जो कभी फूलों को रंग, जाति, वर्ग,
अथवा कबीलों में नहीं बाँटते थे।
और समझते रहे थे कि,
देश एक बाग है,
और मधु-मनुष्यता,
जिससे जीने की अपेक्षा होती है।
किंतु अब,
बाग और मनुष्यता,
शिलालेखों में जकड़ गई है,
मात्र संग्रहालय की जड़ वस्तुएँ। (AI. C.B.S.E 2008)

प्रश्न
(क) कविता में प्रयुक्त ‘स्व’ शब्द से कवि का क्या अभिप्राय है ? उसकी जाल से तुलना क्यों की गई है ?
(ख) कवि का ‘स्व’ पहले कैसा था और अब कैसा हो गया है और क्यों ?
(ग) कवि को अपने पूर्वजों की याद कब और क्यों आती है ?
(घ) कवि के पूर्वजों की विचारधारा पर टिप्पणी लिखिए।
(ङ) निम्नलिखित काव्य-पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। ‘और मनुष्यता शिलालेखों में जकड़ गई है।’
उत्तर
(क) कविता में प्रयुक्त ‘स्व’ शब्द से कवि का अभिप्राय मनुष्य के अपनेपन से है। उसकी जाल से तुलना इसलिए की गई है क्योंकि मनुष्य का अपनापन केवल अपने तक सीमित हो गया है उसमें व्यापकता नहीं है। जैसे जाल सिमटा हुआ होता है वैसे ही आज के मनुष्य का ‘स्व’ भी सिमट गया है।
(ख) कवि का ‘स्व’ पहले बहुत व्यापक था, जिसमें समाज, गाँव, परिवार आदि के हित समाहित थे परंतु अब आधुनिकता की चकाचौंध, भौतिकतावाद, स्वार्थलिप्सा आदि के कारण यह बहुत संकुचित हो गया है तथा केवल अपने तक ही सीमित हो गया है।
(ग) कवि जब विभिन्न फूलों पर बैठ कर पराग समेटती हुई मधुमक्खियों को देखता है तो उसे पूर्वजों की याद आ जाती है क्योंकि उसके । पूर्वज भी मधुमक्खियों के समान बिना किसी भेदभाव के मानवता के कल्याण में विश्वास रखते थे।
(घ) कवि के पूर्वज मानवतावादी थे। वे किसी प्रकार के भेदभाव में विश्वास नहीं रखते थे। वे सब के साथ समान व्यवहार करते थे। वे सब का सदा कल्याण चाहते थे।
(ङ) इन पंक्तियों के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि आज के युग में मनुष्यता जड़ होकर रह गई है। मनुष्य संवेदन शून्य हो गया है। उसे किसी के सुख-दुःख से कोई लेना-देना नहीं है। वह केवल अपने हित साधन में ही लगा रहता है।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

21. तू हिमालय नहीं,
तू न गंगा-यमुना,
तू त्रिवेणी नहीं,
तू न रामेश्वरम।
तू महाशील की है अमर कल्पना, देश !
मेरे लिए तू परम वंदना।
मेघ करते नमन, सिंधु धोता चरण,
लहलहाते सहस्त्रों यहाँ खेत-वन।
नर्मदा-ताप्ती, सिंधु, गोदावरी,
है कराती युगों से तुझे आचमन ।
तू पुरातन बहुत, तू नए से नया,
तू महाशील की है अमर कल्पना।
देश ! मेरे लिए तू महा अर्चना,
शक्ति-बल का समर्थक रहा सर्वदा।
तू परम तत्व का नित विचारक रहा,
शांति-संदेश देता रहा विश्व को।
प्रेम-सद्भाव का नित प्रचारक रहा। .
सत्य औ’ प्रेम की है परम प्रेरणा,
देश ! मेरे लिए तू महा अर्चना।
प्रश्न
(क) कवि ने देश को ‘महाशील की अमर कल्पना’ कहा है। इससे कवि का क्या तात्पर्य है ?
(ख) भारत देश पुरातन होते हुए भी नित नूतन कैसे है ?
(ग) “तू परम तत्व का नित विचारक रहा’ पंक्ति का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
(घ) देश का सत्कार प्रकृति कैसे करती है ? काव्यांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
(ङ) ‘शांति-संदेश ……..रहा’ काव्य-पंक्तियों का अर्थ बताते हुए इस कथन की पुष्टि में इतिहास से कोई एक प्रमाण दीजिए।
उत्तर
(क) कवि ने देश को ‘महाशील की अमर कल्पना’ इसलिए कहा है क्योंकि हमारे देश में सदा दया, क्षमा, उच्च चरित्र, करुणा आदि को सर्वोपरि माना जाता रहा है।
(ख) भारतवर्ष में प्राचीन संस्कृति एवं सभ्यता के साथ-साथ आधुनिक प्रगतिवादी विचारधारा को भी अपनाया गया है। इसलिए हमारा देश पुरातनता एवं नवीनता का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है।
(ग) इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि भारतवर्ष के लोग सदा शक्ति-बल के समर्थक होते हुए भी निरंतर उस परम तत्वं सर्वशक्तिमान ब्रह्म को प्राप्त करने का प्रयास करते रहे हैं। उसी के विचारों में लीन रहते हैं।
(घ) देश का सत्कार प्रकृति देश में भरपूर वर्षा कर के लहलहाते खेतों में अन्न उत्पन्न करके, शुद्ध वायु-जल देकर करती है।
(ङ) इस पंक्ति का अर्थ यह है कि भारतवर्ष के विद्वानों ने ही संसार को शांति का संदेश देकर परस्पर प्रेमपूर्वक रहना सिखाया है। गौतम बुद्ध ने अपने अहिंसा के संदेश द्वारा विश्व में शांति का प्रसार किया था।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

22. जब-जब बाहें झुकी मेघ की, धरती का तन-मन ललका है।
जब-जब मैं गुजरा पनघट से, पनिहारिन का घट छलका है।
सुन बाँसुरिया सदा-सदा से हर बेसुध राधा बहकी है,
मेघदूत को देख यक्ष की सुधियों में केसर महकी है।
क्या अपराध किसी का है फिर, क्या कमजोरी कहूँ किसी की,

जब-जब रंग जमा महफिल में, जोश रुका कब पायल का है
जब-जब मन में भाव उमड़ते, प्रणय श्लोक अवतीर्ण हुए हैं,
जब-जब प्यास जगी पत्थर में, निर्झर स्रोत विकीर्ण हुए हैं।
जब-जब गूंजी लोकगीत की धुन अथवा आल्हा की कड़ियाँ,
खेतों पर यौवन लहराया, रूप गुजरिया का दमका है।

प्रश्न
(क) मेघों के झुकने से धरती पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
(ख) राधा को बेसुध क्यों कहा गया है ?
(ग) मन के भावों तथा प्रेम-गीतों का क्या संबंध है ?
(घ) काव्यांश में झरने के अनायास फूटने का क्या कारण बताया गया है ?
(ङ) ‘खेतों पर यौवन लहराया, रूप गुजरिया का दमका है’ कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर
(क) मेघों के झुकने से धरती प्रसन्न हो जाती है। वर्षा होने से सर्वत्र हरियाली छा जाती है। पेड़-पौधों में नवजीवन का संचार हो जाता है।
(ख) राधा श्रीकृष्ण की प्रेमिका थी। वह श्रीकृष्ण की बाँसुरी का स्वर सुन कर मोहित हो जाती थी, इसलिए उसे बेसुध कहा गया है।
वह श्रीकृष्ण की बाँसुरी का स्वर सुन कर अपनी सुध-बुध खो बैठती थी।
(ग) मन के भावों और प्रेम-गीतों का परस्पर गहरा संबंध है क्योंकि जब मन में भाव उत्पन्न होते हैं तो प्रेम-गीतों की रचना होती है। इस – प्रकार प्रेम-गीत मन के भावों पर आश्रित हैं।
(घ) इस काव्यांश में झरने के अनायास फूट पड़ने का यह कारण बताया गया है कि जब-जब पत्थरों को प्यास लगती है तो झरने

23. क्या रोकेंगे प्रलय मेघ ये, क्या विद्युत-घन के नर्तन,
मुझे न साथी रोक सकेंगे, सागर के गर्जन-तर्जन।
मैं अविराम पथिक अलबेला रुके न मेरे कभी चरण,
शूलों के बदले फूलों का किया न मैंने मित्र चयन।
“मैं विपदाओं में मुसकाता नव आशा के दीप लिए
फिर मुझको क्या रोक सकेंगे जीवन के उत्थान-पतन।

मैं अटका कब, कब विचलित मैं, सतत डगर मेरी संबल,
रोक सकी पगले कब मुझको यह युग की प्राचीर निबल।
आँधी हो, ओले-वर्षा हों, राह सुपरिचित है मेरी,
फिर मुझको क्या डरा सकेंगे ये जग के खंडन-मंडन।

CBSE Class 12 Hindi Unseen Poems अपठित काव्यांश

प्रश्न
(क) उपर्युक्त पंक्तियों के आधार पर कवि के स्वभाव की किन्हीं दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
(ख) कविता में आए मेघ, विद्युत, सागर की गर्जना और ज्वालामुखी किनके प्रतीक हैं ? कवि ने उनका संयोजन यहाँ क्यों किया है?
(ग) ‘शूलों के बदले फूलों का किया न मैंने कभी चयन’-पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
(घ) ‘युग की प्राचीर’ से क्या तात्पर्य है ? उसे कमजोर क्यों बताया गया है ?
(ङ) किन पंक्तियों का आशय है-तन-मन में दृढ़ निश्चय का नशा हो तो जीवन मार्ग में बढ़ते रहने से कोई नहीं रोक सकता?
उत्तर
(क) कवि किसी प्रकार की कठिनाइयों से घबराता नहीं है। वह मुसीबतों में भी मुस्कुराता हुआ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता जाता है। वह – निडर, दृढनिश्चयी तथा उत्साही व्यक्ति है।
(ख) कविता में आए मेघ, विद्युत, सागर का गर्जन और ज्वालामुखी शब्द जीवन में आने वाली बाधाओं एवं विपत्तियों के प्रतीक हैं। कवि ने इन शब्दों का यहाँ संयोजन विपदाओं के विभिन्न रूपों को दर्शाने के लिए किया है।
(ग) इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह कह रहा है कि वह सदा कठिनाइयों का प्रसन्नतापूर्वक सामना करता रहा है। दुःखों से घबराकर उसने कभी भी सुखों की कामना नहीं की है।
(घ) ‘युग की प्राचीर’ से कवि का तात्पर्य संसार के संबंधों से है। वह इन बंधनों से मुक्त है, इसलिए उसने इसे कमज़ोर बताया है।
(ङ) मैं बढ़ता अविराम निरंतर तन-मन में उन्माद लिए, फिर मुझको क्या डरा सकेंगे, ये बादल-विद्युत गर्जन।

24. स्नायु तुम्हारे हों इस्पाती।
देह तुम्हारी लोहे की हो, स्नायु तुम्हारे हों इस्पाती,
युवको, सुनो जवानी तुममें आए आँधी-सी अर्राती।
जब तुम चलो चलो ऐसे,
जैसे गति में तूफान समेटे।
हो संकल्प तुम्हारे मन में,
युग-युग के अरमान समेटे।
अंतर हिंद महासागर-सा,
हिमगिरि जैसी चौड़ी छाती।
जग जीवन के आसमान में,
तुम मध्याह्न सूर्य-से चमको

तुम अपने पावन चरित्र से,
उज्ज्वल दर्पण जैसे दमको।
साँस-साँस हो झंझा जैसी
रहे कर्म ज्वाला भड़काती।
जनमंगल की नई दिशा में,
तुम जीवन की धार मोड़ दो।
यदि व्यवधान चुनौती दे तो,
तुम उसकी गरदन मरोड़ दो।
ऐसे सबक सिखाओ जिसको
याद करे युग-युग संघाती।
स्नायु तुम्हारे हों इस्पाती।

प्रश्न
(क) युवकों के लिए फ़ौलादी शरीर की कामना क्यों की गई है?
(ख) किसकी गरदन मरोड़ने को कहा गया है और क्यों?
(ग) बलिष्ठ युवकों की चाल-ढाल के बारे में क्या कहा गया है?
(घ) युवकों की तेजस्विता के बारे में क्या कल्पना की गई है?
(ङ) उस पंक्ति को उद्धृत कीजिए जिसमें कहा गया है कि युवक अपने जीवन को लोक-कल्याण में लगा दें।
उत्तर
(क) जिससे वे देश पर आक्रमण करनेवालों को सबक सिखा सकें।
(ख) कवि ने व्यवधान की गरदन मरोड़ने के लिए कहा है, जिससे जीवन में आने वाली बाधाएँ समाप्त हो जाएँ।
(ग) बलिष्ठ युवकों की चाल-ढाल ऐसी हो कि जब वे चलें तो उनकी गति तूफ़ान को भी समेटने वाली हो तथा मन में दृढ़ संकल्प हो।
(घ) युवक मध्याह्न के सूर्य के समान तेजस्वी हों तथा अपने पवित्र चरित्र से उज्ज्वल दर्पण के समान चमकते रहें।
(ङ) जनमंगल की नई दिशा में, तुम जीवन की धार मोड़ दो।

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25. नए युग में विचारों की नई गंगा बहाओ तुम,
कि सब कुछ जो बदल दे, ऐसे तूफ़ाँ में नहाओ तुम।।
अगर तुम ठान लो तो आँधियों को मोड़ सकते हो,
अगर तुम ठान लो तारे गगन के तोड़ सकते हो,
अगर तुम ठान लो तो विश्व के इतिहास में अपने
सुयश का एक नव अध्याय भी तुम जोड़ सकते हो,
तुम्हारे बाहुबल पर विश्व को भारी भरोसा है

उसी विश्वास को फिर आज जन-जन में जगाओ तुम।
पसीना तुम अगर इस भूमि में अपना मिला दोगे,
करोड़ों दीन-हीनों को नया जीवन दिला दोगे।
तुम्हारी देह के श्रम-सीकरों में शक्ति है इतनी
कहीं भी धूल में तुम फूल सोने के खिला दोगे।
नया जीवन तुम्हारे हाथ का हलका इशारा है
इशारा कर वही इस देश को फिर लहलहाओ तुम।

प्रश्न
(क) यदि भारतीय नवयुवक दृढ़ निश्चय कर लें तो क्या-क्या कर सकते हैं?
(ख) नवयुवकों से क्या-क्या करने का आग्रह किया जा रहा है?
(ग) युवक यदि परिश्रम करें तो क्या लाभ होगा?
(घ) आशय स्पष्ट कीजिए : कहीं भी धूल में तुम फूल सोने के खिला दोगे।
(ङ) काव्यांश में से कोई एक मुहावरा चुनकर उसका वाक्य-प्रयोग कीजिए।
उत्तर
(क) भारतीय नवयुवक दृढ़ निश्चय कर लें तो वे आँधियों की दिशा मोड़ सकते हैं, आकाश से तारे तोड़ सकते हैं तथा विश्व इतिहास में अपने सुयश का एक नया अध्याय जोड़ सकते हैं।
(ख) नवयुवकों से कठिन परिश्रम तथा करोड़ों दीन-हीनों को नया जीवन दिलाने के लिए कहा जा रहा है।
(ग) यदि युवक परिश्रम करें तो मिट्टी को भी सोना बना सकते हैं।
(घ) इस कथन के द्वारा कवि यह कहना चाहता है कि परिश्रम करने से धूल में भी सोने के फूल खिलाए जा सकते हैं अर्थात परिश्रम से कुछ भी कहीं से भी प्राप्त किया जा सकता है।
(ङ) पसीना बहाना-किसान दिन-रात अपना पसीना बहाकर फ़सल तैयार करते हैं।

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26. सहता प्रहार कोई विवश, कदर्य जीव
जिसकी नसों में नहीं पौरुष की धार है।
करुणा, क्षमा है वीर जाति के कलंक घोर
क्षमता क्षमा की शूरवीरों का श्रृंगार है।
प्रतिशोध से हैं होती शौर्य की शिखाएँ दीप्त
प्रतिशोध-हीनता नरों में महापाप है,
छोड़ प्रीति-वैर पीते मूक अपमान वे ही

जिनमें न शेष शूरता का वहि-ताप है
जेता के विभूषण सहिष्णुता-क्षमा हैं किन्तु
हारी हुई जाति की सहिष्णुता अभिशाप है।
सेना साजहीन है परस्व हरने की वृत्ति
लोभ की लड़ाई क्षात्र धर्म के विरुद्ध है
चोट खा परंतु जब सिंह उठता है
जाग उठता कराल प्रतिशोध हो
प्रबुद्ध है पुण्य खिलतास है
चंद्रहास की विभा में तब
पौरुष की जागृति कहाती धर्मयुद्ध है। (C.B.S.E 2018)

प्रश्न
(क) क्षमा कब कलंक और कब श्रृंगार हो जाती है?
(ख) प्रतिशोध किसे कहते हैं ? वह कब आवश्यक होता है?
(ग) सहिष्णुता को विभूषण और अभिशाप दोनों क्यों माना गया?
(घ) कैसा युद्ध धर्म के विरुद्ध माना गया है?
(ङ) भाव स्पष्ट कीजिए – ‘पौरुष की जागृति कहाती धर्मयुद्ध है।’
उत्तर
(क) असहाय होकर भी जब कोई क्षमा कर देने की बात करता है तो वह कलंक मानी जाती है। जब कोई क्षमावान अपने अपार बल-शक्ति का प्रयोग न कर क्षमा कर देता है और बिना मारे छोड़ देता है तो वह श्रृंगार कहलाता है।
(ख) प्रतिशोध का अर्थ बदला लेना होता है। प्रतिशोध की आवश्यकता तब होती है जब आत्म सम्मान की रक्षा करनी आवश्यक हो जाती है।
(ग) सहिष्णुता को विभूषण तब कहते हैं जब विजेता होकर भी विरोधी को क्षमा कर देता है। पराजित हो जाने पर जब कोई क्रोध न दिखाकर सहिष्णु दिखलाता है तो वह अभिशाप होता है।
(घ) वह युद्ध धर्म के विरूद्ध माना जाता है जो लोग और किसी भी प्रकार के स्वार्थ के कारण किया जाता है।
(ङ) जब कोई शूर वीर सजग-सचेत होकर युद्ध करता है तब उसका पराक्रम और नीति युक्त लड़ाई ही धर्म युद्ध होता है।

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CBSE Class 12 Hindi आलेख लेखन

(ग) आलेख और पुस्तक-समीक्षा

आलेख का लेख से गहरा नाता है। इन दोनों में कोई बहुत बड़ा अंतर नहीं है। आलेख को निबंध का ही रूप स्वीकार किया जाना चाहिए। लेख’ के आगे लगा ‘आ’ उपसर्ग लेख के सम्यक और सर्वांगपूर्ण होने का द्योतक है। आलेख मन की जिज्ञासा को तृप्त करने की क्षमता रखता है। यह ताज़गी से युक्त भावों से समाहित होता है जिसमें निम्नलिखित गुण विद्यमान होने चाहिए

1. आलेख की भाषा. सरल, सरस और भावपूर्ण होनी चाहिए।
2. इसमें पुरानी जिज्ञासाओं को तृप्त करने व नई जिज्ञासाएँ जागृत करने की क्षमता होनी चाहिए।
3. इसमें विचारों की प्रधानता होनी चाहिए।
4. इसमें विश्लेषणात्मकता होनी चाहिए।
5. यह महत्वपूर्ण विषयों, अवसरों, चरित्रों और व्यक्तियों से संबंधित होना चाहिए।
6. इसमें किसी बात को बार-बार दोहराना नहीं चाहिए।
7. यह नवीनता और ताजगी से युक्त होना चाहिए।
8. इसका आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए।

आलेख के कुछ उदाहरण

प्रश्न 1.
क्या है तन-मन की थकान?
उत्तर:
आज के समय में हर उम्र और वर्ग के लोग यदि थके-हारे और दुखी हैं तो केवल अपनी इच्छाओं के कारण। इसी कारण वे ऊर्जा के नैसर्गिक स्रोत से दूर होते जा रहे हैं। खान-पान की बिगड़ी आदतें, आहार-विहार का असंयम, अव्यवस्थित कार्य-पद्धति और भावनात्मक जटिलताएँ उनकी जीवनी शक्ति को निचोड़कर उन्हें थकान की अंधेरी खोह में धकेल रही हैं। हमारे शरीर में स्वाभाविक रूप से शक्ति सीमित मात्रा में ही होती है। इसी से हमारा जीवन चलता रहता है। हम तभी तक कार्य कर सकते हैं जब तक यह शक्ति विद्यमान रहती है। शक्ति की कमी के साथ हमारी कार्य कुशलता में गिरावट आने लगती है।

इसी से हर कार्य में अरुचि होने लगती है। स्वभाव में चिड़चिड़ापन, खीझ उत्पन्न होते हैं और कभी-कभी सिरदर्द भी होने लगता है। ये सब थकान के लक्षण हैं। शारीरिक ऊर्जा का प्रमुख स्रोत आहार है और इसी से शरीर को प्रचुर मात्रा में ऊर्जा मिलती है। थकान का शरीर से अधिक मन से गहरा संबंध होता है। कोई भी व्यक्ति काम की अधिकता से नहीं, बल्कि काम की नीरसता और उसे भार समझकर करने से ज्यादा थकता है। साथ ही भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक समस्याओं से उत्पन्न तनाव शरीर को थका देता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि तनाव, भय या उदासीनताजनक स्थिति में मस्तिष्क में ऐसे रसायनों का स्राव होता है, जो शरीर को दुर्बल बनाते हैं।

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कोई भी व्यक्ति इस थकान को निम्नलिखित तरीके से दूर कर सकता है
1. उसे अपनी जीवन-शैली को देखना चाहिए और तनाव के कारक तत्वों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। थकान का सबसे महत्वपूर्ण उपचार आराम है।
2. कार्य को यदि हम अच्छे ढंग से करें तो तनाव एवं थकान से बच सकते हैं। रुचिकर काम करने से थकान कम महसूस होती
3. कार्य करते समय बीच-बीच में थोड़ी-थोड़ी देर के लिए आराम कर लेना चाहिए।
4. काम करते समय बीच-बीच में मनोरंजन की व्यवस्था भी थकान को कम कर देती है।
5. कार्य की एकरसता को मिटाकर उसमें परिवर्तन करने से थकान दूर हो जाती है। शारीरिक कार्य के बाद मानसिक कार्य और मानसिक कार्य के बाद शारीरिक कार्य बदलते रहने से थकान दूर होती रहती है।
6. छोटी-छोटी सफलताएँ मन को उत्साहित बनाए रखती हैं। कभी-कभी पिछली सफलताओं को याद करना भी थके-हारे मन को उत्साह से भरने का प्रभावशाली उपाय है। थकान को मामूली समझ इसे नज़रअंदाज़ न करें। आराम और नींद के बाद भी यदि तन-मन का हल्कापन एवं ताज़गी आप महसूस नहीं कर रहे तो निश्चित है कि आप स्थाई थकान की गंभीर समस्या के शिकार हैं। सतर्क हो जाइए, क्योंकि यह थकान एनीमिया, थायरॉइड, मधुमेह, टी०बी० या अन्य किसी जीर्ण रोग का कारण बन सकता है। इनसे जीवनी-शक्ति का तेजी से ह्रास होता है। देर न करें और किसी डॉक्टर से उपचार कराएँ।

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प्रश्न 2.
प्राकृतिक सुंदरता से संपन्न पन्ना
उत्तर:
मध्य प्रदेश का पन्ना नगर सारे भारतवर्ष में हीरे की खानों तथा मंदिरों के लिए जाना जाता है। विंध्याचल पर्वतों के प्राकृतिक सौंदर्य से संपन्न पन्ना, सतना रेलवे स्टेशन से लगभग साठ किलोमीटर और छतरपुर से भी लगभग पचास किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है।

मान्यता है कि पन्ना राज्य की नींव भगवान राम के पुत्र कुश के वंशजों ने रखी थी। महाराजा छत्रसाल ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। यह भारत में ‘प्रणामी संप्रदाय’ का एकमात्र तीर्थस्थल है। यहाँ के मंदिर बुंदेला शासकों की कलाप्रियता और सौंदर्य-प्रेम को प्रकट करते हैं। पद्मावती देवी का मंदिर, बलदाऊजी मंदिर, जुगल किशोर मंदिर, राम-जानकी मंदिर, गोविंद देव मंदिर, गणेश मंदिर, जगदीश मंदिर एवं प्राणनाथ मंदिर इस नगर की शोभा एवं आस्था के आधार हैं।

ये सभी मंदिर कला की दृष्टि से अति आकर्षक हैं। बलदाऊजी का मंदिर वृंदावन के रंगनाथ मंदिर और इंग्लैंड के कैथोलिक सेंट पॉल गिरजाघर का मिला-जुला रूप प्रकट करता है। कलापूर्ण मेहराबों तथा । शीर्ष पर कमल एवं कलश से युक्त जगदीश स्वामी का मंदिर, रोमन तथा मुग़लकालीन स्थापत्य कला का संगम प्रतीत होता है। . पन्ना का तीर्थस्थल ‘प्रणामी मंदिर’ यहाँ के प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। इसकी प्रदक्षिणा में चारों ओर राधाकृष्ण की रास लीलाएँ रंगों की आकर्षक छटा बिखेरती चित्रित हैं।

यह मंदिर मुग़लकाल और राजपूताना लोककला संस्कृति को प्रदर्शित करता प्रतीत होता है। गोल गुंबद तथा पंचायतन शैली में बने मंदिर के ऊपर गुंबदों में बने गवाक्ष आदि आकर्षक लगते हैं। प्रत्येक वर्ष शरद पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ पूरे भारत से ‘प्रणामी संप्रदाय’ के अनुयायी इकट्ठे होते हैं। गीत, संगीत, नृत्य के रंग से सराबोर इस मंदिर की सुंदरता पूर्णमासी की रात में और भी मोहक लगती है।

मंदिरों के अतिरिक्त इस नगर का आकर्षण यहाँ की विश्व प्रसिद्ध हीरा-खदानें हैं। सत्रहवीं शताब्दी में यहाँ हीरा खनन का कार्य . शुरू हुआ था। सागौन, शीशम, तेंदू, महुआ, चिरौंजी, बाँस जैसी प्राकृतिक वन-संपदा के धनी पन्ना की शोभा यहाँ के अनगिनत तालाबों से और बढ़ जाती है। पन्ना की ऐतिहासिक इमारत महेंद्र भवन, कलात्मक शिल्प का अद्भुत नमूना है। पन्ना का राजमहल, बृहस्पति कुंड, सुतीक्ष्ण आश्रम, केन अभयारण्य, पांडव फाल आदि यहाँ के उल्लेखनीय दर्शनीय स्थल हैं। विश्वप्रसिद्ध खजुराहो यहाँ से मात्र 50 किमी० की दूरी पर है। वास्तुकला, शिल्प कला, ऐतिहासिकता, पुरातत्व, प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिकता को अपने भीतर समेटे हुए पन्ना वास्तव में बेजोड़ है।

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प्रश्न 3.
भुला दो कड़वी यादों को
उत्तर:
पिछले वर्ष पता नहीं किस बात पर नीरज और राजेश के बीच झगडा हो गया था। साल-भर तक बंद थी। अभी कुछ दिनों पूर्व नीरज को हार्टअटैक आया और वे दर्द से तड़पने लगे। घर पर सिर्फ उनकी पत्नी थी। पति को बुरी तरह छटपटाते देख उसने पड़ोसी राजेश की घंटी बजाई और दरवाजा खोलते ही उनसे सहायता की पुकार की। एक पल तो राजेश को पुरानी कड़वी यादें ताजा हो आईं, जब दोनों में गाली-गलौच हुआ था। इस कारण तो किसी भी तरह की मदद करने का कोई प्रश्न भी नहीं था। उनका एक मन कह रहा था, ‘मरने दो उस घमंडी को।’ लेकिन तभी उनके भीतर छिपी इंसानियत जागी और उसने उन्हें धिक्कारा।

वे शीघ्र पुरानी कड़वी यादें भुलाकर नीरज को अस्पताल ले गए। समय पर चिकित्सा मिल जाने से उनकी जान बच गई। – बहनों, मित्रों, सगे-संबंधियों आदि के बीच मतभेद होने स्वाभाविक हैं। इसी प्रकार पड़ोसियों के विचारों में भी भिन्नता हो सकती है। रिश्तेदारों, नातेदारों से भी विचारों का विरोधाभास हो सकता है। इस वजह से कभी-कभी कोई अप्रिय स्थिति बन सकती है। अब इन अप्रिय प्रसंगों की गाँठ बाँध लेना और सारी जिंदगी उन्हें न खोलने में कौन-सी बुद्धिमानी है? पुरानी कड़वी बातों को भूलने में ही .. भलाई है। उन अच्छे प्रसंगों को याद क्यों नहीं करते, जो आपने सामने वाले के साथ कभी बिताए थे? अच्छा सोचेंगे तो अच्छा ही होगा ।

और गलत सोचेंगे, तो झगड़ा बढ़ता ही जाएगा। समय सबसे बड़ी औषधि है, मरहम है, जो बड़े-से-बड़े घाव को भी भर देता है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति उन यादों का क्लेश पालकर बैठ जाए, तो वह चाहे कितने ही जन्म क्यों न ले ले, उसे भुला नहीं पाएगा, इसलिए कड़वी यादों को जितनी जल्दी हो सके, भुला देना ही अच्छा है। कड़वी यादें व्यक्ति को सामान्य जीवन नहीं जीने देतीं। वे उसे तनावग्रस्त बना देती हैं और यही तनाव सभी रोगों की जड़ बनता है।

कड़वी यादों से चिपके रहने में कोई तुक नहीं है। अतीत की कड़वी यादों को संजोकर रखने वाले अपना वर्तमान और भविष्य दोनों ही नष्ट कर लेते हैं। गड़े मुर्दो को उखाड़ने से कोई लाभ नहीं। संबंधों को तोड़ना जितना आसान है, उन्हें जोड़ना उतना ही मुश्किल। यदि कुछ याद ही रखना है, तो मधुर यादों को संजोकर रखें जो आपको सुखद अनुभूति देंगी। उन अच्छे पलों को याद कीजिए, जो आपने और सामने वाले ने मिलकर जिए हैं। आप पाएंगे कि जीवन वास्तव में बहुत सुंदर है जिसे हमने अपनी कुंठाओं से स्वयं ही बदसूरत बना रखा था। भुला दो पुरानी बातें और ले चलो स्वयं को सुंदर कल की ओर।

CBSE Class 12 Hindi आलेख लेखन

प्रश्न 4.
आत्मविश्वास बढ़ाइए
उत्तर:
हममें से अधिकांश लोग कुछ नया करने की इच्छा रखते हैं पर उसे कर नहीं पाते। तब मन में यही बात आती है कि कितना अच्छा होता कि दुनिया के सफल लोगों की तरह हम भी आत्मविश्वास से भरे हुए होते।

अधिकतर लोगों को आत्मविश्वास उनके पारिवारिक और सामाजिक संबंधों से ही प्राप्त होता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि हम अपने संबंधों को सकारात्मक बनाएँ।
हमारे जीवन में संबंधों की शुरुआत माता-पिता से होती है और हमारे संबंधों की असफलता और अपूर्णता की जड़ें भी वहीं से शुरू होती हैं। बड़े होकर हम सभी का यह दायित्व बनता है कि हम अपने व्यवहार का आकलन करें। यही नहीं, अपने आसपास के उन लोगों के जीवन और व्यवहार को भी परिपक्व दृष्टिकोण से देखें, जिनसे हमें बचपन में या बाद में भी समस्याएँ मिली हों। इससे न हमें सिर्फ दूसरों को समझने का मौका मिलेगा, बल्कि अपने आपको भी हम बचकानी भावुकता से उबार सकते हैं।

पारिवारिक समस्याओं से गजरना तो एक ऐसा कट अनभव है, जिसे कोई भी पसंद नहीं करता। पर इन समस्या के बाद हर व्यक्ति स्वयं को अधिक मजबूत और आत्मविश्वास से पूर्ण महसूस करता है। यह ज़रूरी है कि हम समस्याओं की अनदेखी न करें। अपना प्रतिरोध या गुस्सा जरूर व्यक्त करें।

अधिकांश लोग अपने सामाजिक संबंधों को महत्व नहीं देते। लेकिन हमारे सामाजिक संबंध न सिर्फ हमें सामाजिक सुरक्षा देकर … हमारा आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, बल्कि हमें हमारी पहचान भी देते हैं और यह सामाजिक पहचान हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाती है। अपने भीतर आत्मविश्वास पैदा करने के लिए अपनी सामाजिक भूमिका को पहचानिए। हम जब अपनी परेशानियों में अकेले होते हैं, तो बुरी तरह टूट जाते हैं क्योंकि तब हमें दुनिया में सिर्फ अपनी ही परेशानी दिखलाई देती है।

लगता है, बाकी सारी दुनिया मज़े कर रही है। जब हम अपने ध्यान को बाहरी दुनिया पर जमा नहीं पाते, तो घूम-फ़िरकर हमारा ध्यान हमारी समस्या को कुरेदने लगता है। घर तक ही सीमित रहने वाली पढ़ी-लिखी शहरी महिलाओं की यह प्रमुख समस्या है। इससे उबरने के लिए ज़रूरी है कि वे अच्छे मित्र बनाएँ, जिनसे कि उन्हें अपनी समस्याओं से बाहर निकलकर बाहरी दुनिया की व्यापक समस्याओं को देखने का भी मौका मिले। जब हम दुनिया की अपने से बड़ी समस्याओं को देखेंगे तो हमारे मन में व्यापकता के भाव उत्पन्न होंगे। इससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ेगा, जो हमें हर कठिन काम को भी करने के लिए प्रेरित करेगा।

प्रश्न 5.
जिम कार्बेट नेशनल पार्क
उत्तर:
हिमालय श्रृंखला के पहाड़ और उससे जुड़े तराई के क्षेत्र जैव-विविधता के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं। कोलाहल से दूर घने जंगलों में स्वतंत्र विचरण करते जंगली जानवरों को देखना सभी को अच्छा लगता है, लेकिन जानवरों को जंगली वातावरण में देखना मुश्किल और जोखिम-भरा कार्य है। जानवरों की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण तथा उनकी संख्या को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही हिमालय की तराई से लगे उत्तराखंड के पौड़ी-गढ़वाल और नैनीताल जिले में भारतीय उपमहाद्वीप के पहले राष्ट्रीय अभयारण्य की स्थापना की गई।

देश के लंबे-चौड़े क्षेत्र में फैले 18 राष्ट्रीय पार्कों में सबसे चर्चित और विस्तृत इतिहास इस अभयारण्य का रहा है। यद्यपि इसका क्षेत्रफल अन्य कई राष्ट्रीय पार्कों से कम है, परंतु जैव-विविधता तथा उसके संरक्षण में जिम कार्बेट नेशनल पार्क बेहतर ही सिद्ध होता है। यहाँ की विविधतापूर्ण सुंदरता हर आने वाले पर्यटक का मन मोह लेती है। साल वृक्ष से घिरे लंबे-लंबे वनपथ और विस्तृत मैदान इसके प्राकृतिक सौंदर्य में चार चाँद लगा देते हैं।

समुद्र तल से 400 से 1100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस पार्क का क्षेत्रफल 521 वर्ग किमी० में फैला है। इस पार्क का दो तिहाई क्षेत्र पौड़ी-गढ़वाल जिले में तथा एक तिहाई क्षेत्र नैनीताल जिले में है। यह पार्क उत्तर में कांडा, मैदावन, चिमटाखाल तक, दक्षिण में ढेला, लालढांग, धारा झरना तक, पूर्व में मोहान, गर्जिया, टिकाला, रामनगर तक तथा पश्चिम में कालगढ़, तुमड़िया और चिपलघाट तक का पुराना क्षेत्रफल वाला भू-भाग सम्मिलित कर सीमा को आगे तक बढ़ाया गया है। इस पार्क का प्रमुख स्थान ढिकाला मैदानी क्षेत्र है, जबकि सबसे ऊँचाई वाला स्थान कांडा है। गर्मियों में जब पार्क क्षेत्र के मैदानी हिस्सों में गर्मी का प्रकोप रहता है, तब कांडा में ठंड की सिरहन दौड़ती है।

है कि अंग्रेजों ने इन जंगलों की खोज 1820 में की थी। इस खोज के साथ ही उन्होंने अपने देश में पाए जाने वाले साल के वृक्ष यहाँ लगाने शुरू किए। भारी मात्रा में यहाँ लगे विविध पेड़ों को काटकर साल के पेड़ लगाए गए। इन पेड़ों के लगने से यहाँ के प्राकृतिक वन्य-जीवन और जानवर बहुत ज्यादा प्रभावित हुए। पहले इसका नाम ‘द हैली नेशनल पार्क’ था. पर आजादी के पश्चात इसका नाम यहाँ बहने वाली नदी के नाम पर ‘द : नेशनल पार्क’ कर दिया गया।

इस पार्क की स्थापना में प्रसिद्ध अंग्रेज़ शिकारी जिम कार्बेट की विशेष भूमिका रही और पार्क की स्थापना में उन्होंने एक सलाहकार के रूप में योगदान दिया था। वह अचूक निशानेबाज और प्रकृति-प्रेमी थे, जिनकी शिकार-संबंधी कहानियाँ आज भी समूचे उत्तराखंड में दंतकथाओं की तरह प्रचलित हैं। सन 1657 में जिम कार्बेट की मृत्यु के बाद इस पार्क का नाम उन्हीं की याद में ‘जिम कार्बेट नेशनल पार्क’ पड़ा और तब से यह इसी नाम से जाना जाता है।

वर्षा प्रारंभ होते ही यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता अपने वास्तविक रूप में लौटने लगती है। यहाँ जंगली जीवन पर्याप्त मात्रा में है जिसे – इस क्षेत्र की गोद में रहकर देखना अपने आप में ही रोमांचकारी है। प्रतिवर्ष लोग बड़ी संख्या में यहाँ आते हैं और कभी न भूलने वाले

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प्रश्न 6.
स्वास्थ्य जीवन
उत्तर:
यदि किसी से पूछा जाए कि क्या वह जीवित है तो वह प्रश्न पूछने वाले को पागल समझेगा। आम धारणा है कि जब तक हाथ-पाँव चलते हैं, साँसें चलती हैं तब तक जीवन है। निश्चय ही जीवन तो है पर इस जीवन में वह आनंद कहाँ, जिसके लिए आप जी रहे हैं। एक-दो प्रतिशत लोग ही मान पाएँगे कि वे जीवन का आनंद और सच्चा सुख भोग रहे हैं।

मनुष्य विधाता की सर्वोत्तम रचना है, सभी जड़-चेतन का नियंत्रक है। जो सुख मानव जीवन में संभव है, वह किसी आम जीवन में कठिन है, इसीलिए ऋषि-मुनियों ने मानव जीव को मोक्ष प्राप्ति का साधन माना है। – सामान्य मनुष्यों का जीवन में कम से कम कष्टों के साथ अधिकाधिक सुख प्राप्ति का लक्ष्य होता है।

सुख की मृग मरीचिका ऐसा मायाजाल है, जिसमें मनुष्य निकल नहीं पाता। जैसे मकड़ी शिकार पकड़ने के लिए जाल बुनती है और वह जाल फैलते-फैलते मकड़ी का जीवन ले लेता है। वे करोड़ों लोग, जिन्हें जीवन उबाऊ और थकाने वाला लगता है, कस्तव में वे जीने योग्य नहीं हैं। वे तो मात्र डॉक्टरों/चिकित्सकों के भरोसे जी रहे हैं। गोलियों, टीकों और इंजेक्शनों के बीच स्वास्थ्य की प्रतिष्ठा भर देख रहे हैं। मनुष्य जब स्वस्थ होता है, तो उसे प्रातः जगने पर, खुली हवा में घूमने, चिड़ियों का कलरव सुनने और प्रकृति की विभिन्न रंगीनियों को देखने में एक रस मिलता है। एक सुखानुभूति होती है। ऐसे व्यक्ति ही वस्तुतः जीवन और जीवित रहने का मूल आनंद ले पाते हैं और अपने अस्तित्व के लिए ईश्वर के आभारी होते हैं।

जिसका मन और इंद्रियाँ अर्थात जिसके सभी शारीरिक मानसिक अंग सुचारु रूप से काम कर रहे हों, वही स्वस्थ है। जीवन का सुख, आनंद वही भोगता है। इनमें से किसी एक अंग में विकार आने पर चिंता उत्पन्न होती है, व्याकुलता बढ़ती है। व्याकुल व्यक्ति व्यश्चित हो सकता है, सुखी नहीं। आज बीसवीं सदी में औसत व्यक्ति डॉक्टरों के चक्कर लगाते हुए जी रहे हैं। शारीरिक रोग तो सामने से दिखाई देते हैं, मानसिक रोग अदृश्य रूप में जीवन का सत्यानाश करते हैं, किसी ने ठीक ही कहा है ‘चिंता और चिता में बिंदु मात्र का अंतर है, चिता मरने के बाद जलाती है और चिंता जीवित रहते ही जलाती है।’

निश्चित जीवन जीने वाले अधिक सुखी रहते हैं और उनके जीवन में प्रसन्नता होती है। ऐसे लोग अन्यों की अपेक्षा अधिक कार्यक्षम होते हैं। ऐसे लोगों पर बुढ़ापे के लक्षण धीरे-धीरे आते हैं। हम अपने चारों ओर दृष्टि डालें तो पाएंगे कि औसत मध्यमवर्गीय व्यक्ति जवानी में ही बूढ़ा दिखने लगता है। इसका कारण यह है कि जीवन की भाग-दौड़ में दिनचर्या इतनी असंतुलित हो जाती है कि शरीर की सभी क्रियाएँ बिगड़ जाती हैं और व्यक्ति क्रमशः रोगों से घिरता जाता है।

जैसे-जैसे स्वास्थ्य लाभ के लिए हम अधिकाधिक औषधियों की तरफ भागते हैं वैसे-वैसे ही रोगों के संजाल में फँसते जाते हैं। ठीक वैसे ही जैसे रेशम का कीड़ा अपनी सुरक्षा के लिए कोकून बुनता जाता है और उसी में बंद हो जाता है। प्राकृतिक जीवन-शैली रोगों को मिटाती नहीं है, बल्कि शरीर और मन को ऐसा विकसित करने में सहयोग देती है कि रोग स्वतः समाप्त हो जाते हैं और नए रोग उत्पन्न नहीं होते। प्रकृति की सहायता प्राप्त करने का एकमात्र उपाय प्राकृतिक जीवन-शैली है और प्राकृतिक चिकित्सा इस तरफ हमको मोड़ती है।

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प्रश्न 7.
हरे-भरे वृक्ष
उत्तर:
वृक्ष का एक नाम तरु भी है। आपदा एवं दुखों से छुटकारा दिलाने वाला होने के कारण वृक्ष को ‘तरु’ यानी तारने वाला कहा जाता है। वृक्ष से मनुष्य सिर्फ फल और छाया ही प्राप्त नहीं करता बल्कि जीवनदायिनी हवा भी प्राप्त करता है। फलों से पोषक तत्व प्राप्त करता है और अपने शरीर में सतोगुण की वृद्धि कर शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखता है या रख सकता है। आधुनिक सभ्यता में शहरीकरण के कारण बढ़ती हुई बहुमंजिली इमारतों और कल-कारखानों के निर्माण के कारण हरियाली कम होती जा रही है। वृक्षों की अंधा-धुंध कटाई से हरे-भरे जंगल कम होते जा रहे हैं और सीमेंट की इमारतों तथा कल-कारखानों के जंगल बढ़ रहे हैं।

इनसे जो प्रदूषण फैल रहा है और पर्यावरण की शुद्धता नष्ट हो रही है, इसे कैसे रोका जाए ? अब भारत में लगभग 19% भू-भाग में ही वृक्षों के वन शेष बचे हैं जिसके परिणामस्वरूप देश के पंद्रह हज़ार किस्म के पेड़-पौधों के विलुप्त होने की आशंका है। वातावरण में कार्बन डाइ-ऑक्साइड की वृद्धि हुई है क्योंकि इस विषाक्त गैस को नियंत्रित तथा संतुलित रखने वाले वृक्षों की कमी होती जा रही है।

पर्यावरण को शुद्ध रखने, प्राण वायु देने और कार्बन डाइ-ऑक्साइड में कमी करने का काम वृक्ष भली-भाँति करते हैं । पृथ्वी की सतह से लगभग – 40 किलोमीटर ऊपर वायुमंडल में ओजोन गैस की मोटी परत रहती है जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से जीव-जंतु और वनस्पति के लिए रक्षा-कवच का काम करती है। प्रसिदध वैज्ञानिक रिचर्ड हटन के अनसार वनों के विनाश के कारण वायमंडल में अतिरिक्त मात्रा में कार्बन डाइ-ऑक्साइड पहुँच कर ओजोन की परत को क्षति पहुँचा रही है। इस पद्धति को कम करने और रोकने के लिए यह ज़रूरी तावरण में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और क्लोरोफ्लोरो कार्बन गैस की मात्रा कम की जाए।

यदि ऐसा नहीं किया जाता तो सन 2050 तक ओज़ोन का एक बड़ा भाग नष्ट हो जाएगा जिससे पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होगी और कई प्रकार की बीमारियां बढ़ने का खतरा पैदा हो जाएगा जिनका समाधान करना इनसान के बस की बात शायद न हो। वृक्ष की एक उपयोगिता और भी है। आजकल ध्वनि-प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है। बढ़ते हुए वाहनों, लाउडस्पीकर, कल-कारखानोंआदि कई कारणों से ध्वनि प्रदूषण दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है जिनसे व्यक्ति अनिद्रा, स्रायविक दौर्बल्य, अस्थमा, हृदय रोग, उच्च रक्त चाप, अधीरता, चिड़चिड़ापन आदि व्याधियों का शिकार हो रहा है।

वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि वृक्ष इस शोर का अवशोषण कर इसकी तीव्रता को उसी प्रकार कम करते हैं जैसे साइलेंसर आवाज़ को कम कर देता है। बढ़ते शोर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए वृक्षों की संख्या लगातार बढ़ाई जानी चाहिए। भवनों के निर्माण और कल-कारखानों की स्थापना में लकड़ी की ज़रूरत होती है और यह लकड़ी वृक्षों को काट कर ही प्राप्त की जाती है इसलिए भी वृक्षों की कटाई धड़ल्ले से की जा रही है।

यही कारण है कि आज लकड़ी लोहे से महँगी हो गई है। यह बात ठीक है कि इमारती लकड़ी प्राप्त कैसे होगी, लेकिन यह भी आवश्यक है कि वृक्षों की संख्या कम न होने दी जाए। इसके लिए हम क्या कर रहे हैं ? यह कदापि नहीं भूलना चाहिए कि हरे-भरे वृक्ष हमारे स्वास्थ्य और जीवन के रक्षक हैं। हम सबको चाहिए कि वृक्षों की रक्षा में तो हम हमेशा सतर्क और सक्रिय रहे हैं, साथ ही वृक्षारोपण करने में भी भरपूर सहयोग प्रदान करें ताकि वृक्षों की कमी न हो।

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प्रश्न 8.
एड्स का फैलता मकड़जाल
उत्तर:
एड्स का प्रेत हमारे देश को ग्रसने को तैयार बैठा है। भारत एड्स-पीड़ितों के लिहाज से पहले नंबर का देश बनने वाला है। फिलहाल यह पीड़ादायक अपमान दक्षिणी अफ्रीका के पास है जहाँ एड्स के 53 लाख रोगी हैं। भारत के 51 लाख रोगियों का हाल इस तरह बेहाल है कि वे दक्षिणी अफ्रीका को जल्द ही पछाड़ देंगे। भारत के 27 लाख पैदा होने वाले बच्चों में 27 हज़ार एड्स-पीड़ित माताओं के होते हैं और वे जन्म से ही एड्स पाते हैं।

एड्स का इलाज अभी तक ढूँढ़ा नहीं जा सका है। यह पक्का है कि ये सारे रोगी ठीक नहीं होंगे और शायद यौन संबंधों, ब्लड ट्रंसफ्यूजन आदि के कारण औरों को भी बीमार कर जाएँगे। हमारे देश में जहाँ गरीबी की मार और अंधविश्वासों की बीमारी एड्स से भी ज्यादा गंभीर है, वहाँ रोगियों की देखभाल करना तो दूर उन्हें रोग न फैलाने के लिए सावधान करना भी सरल नहीं है। . यह महामारी केवल गरीबों में ही हो, कोई ज़रूरी नहीं।

यह समाज के हर वर्ग में हो सकती है क्योंकि कितनी ही बार बाज़ार में पहले इस्तेमाल की हुई सिरिंजें पहुँच जाती हैं। अगर उनमें एड्स के विषाणु जीवित हों तो निर्दोष लोग भी काल के ग्रास बन सकते हैं। एड्स के बारे में जनजागरण अभियान चलाने वाले ज्यादातर पैसा अंग्रेज़ी के माध्यमों में प्रचार करने में फँक रहे हैं जिसका असर लगभग नहीं होता है।
समाज में एड्स को छूत का रोग मानकर रोगियों का बहिष्कार किया जाता है।

एड्स के रोगियों को अब तिलतिल कर मरना पड़ता है क्योंकि कोई उनसे व्यवहार नहीं रखना चाहता। अस्पतालों ने भी दरवाजे बंद करने शुरू कर दिए हैं क्योंकि अस्पताल में एड्स के रोगी होने की बात सुनकर दूसरे सब भाग जाते हैं। हमारे देश में शिक्षित मध्यवर्गीय समाज अभी इस एड्स रूपी मकड़जाल से बचा हुआ है। निम्न वर्ग में जहाँ यह सामान्य होता जा रहा है, वहीं तरह-तरह की समस्याएँ भी पैदा कर रहा है।

एड्स के विषाणु वर्षों शरीर में सुप्त पड़े रहते हैं। विवाह के समय मांग करना कि दोनों टेस्ट कराएँ अव्यावहारिक और मानसिक वेदना देने वाला होगा, फिर क्या किया जाए? एड्स के इलाज पर काफ़ी खोज चल रही है पर इसका कोई सुराग नहीं मिल रहा। पति-पत्नी संबंधों को तो इसने सुदृढ़ कर दिया पर जो लोग जोखिम लेने के आदी हैं उनकी वजह से उनका पूरा परिवार झंझावात में आ सकता है। इस बीमारी के बारे में सतर्क रहना अब सबके लिए जरूरी हो गया है। यह अनैतिक संबंधों से ही नहीं, खून लेने पर भी हो सकती है क्योंकि पेशेवर खून दान करने वाले प्रायः एड्स के शिकार होते हैं।\

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प्रश्न 9.
भ्रूण हत्या की समस्या (A.I. C.B.S.E., 2017)
उत्तर:
आज का युग वैज्ञानिक उन्नति एवं आधुनिकता कला का युग है। इस आधुनिक युग में समस्याएं भी अनेक हैं। उनमें से एक समस्या है भ्रूण हत्या की समस्या। आधुनिकता के इस दौर में भ्रूण हत्या समाज पर कलंक के समान है। एक तरफ तो हमारा समाज शिक्षित और आधुनिक बना है तो दूसरी तरफ उसमें विकार भी उत्पन्न हुआ है। आज अनपढ़ ही नहीं बल्कि शिक्षित लोग गर्भ में ही कन्या को मरवा रहे हैं। ऐसे तथाकथित लोग कुछ तथाकथित डाक्टरों के साथ मिलकर जन्म से पूर्व ही लिंग जाँच कराते हैं और यदि लिंग जाँच में पता चला कि वह कन्या है तो वे कन्या भ्रूण हत्या करवाने में तनिक भी देर नहीं लगाते।

जिसका दुष्परिणाम यह है कि समाज में लड़का-लड़की। महिला-पुरुष का अनुपात गड़बड़ा रहा है। लड़कों की अपेक्षा लड़कियाँ कम जन्म लेती हैं। इसके पीछे आधुनिक युग के आधुनिक लोगों की तुच्छ सोच है। यदि यह समस्या ऐसे ही चलती रही तो वह दिन दूर नहीं जब समाज में असंतुलन पैदा हो जाएगा। जिससे मानवीय जीवन और मानवता खतरे में पड़ जाएगी।

प्रश्न 10.
‘बेमेल विवाह’ (A.I. C.B.S.E., 2017)
उत्तर:
आज के युग में दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या, बेकारी आदि अनेक समस्याएँ दृष्टिगोचर होती हैं। इन्हीं में से एक समस्या है-बेमेल विवाह। जहाँ एक तरफ तो हम आधुनिक होने का दावा करते हैं। हम शिक्षित होने का दावा करते हैं। हम वैश्वीकरण एवं नारी सशक्तीकरण की बात करते हैं। वहीं हमारे देश में बेमेल विवाह भी एक समस्या बनी है। हमारे देश में यह एक प्राचीन प्रथा एवं समस्या के रूप में वर्तमान युग में भी प्रचलित है।

आज भी समाज में असंख्य विवाह ऐसे होते हैं जिनका परस्पर कोई मेल नहीं बनता। कहीं लड़का पढ़ा-लिखा तो लड़की अनपढ़, कहीं लड़की पढ़ी-लिखी तो लड़का अनपढ़। कहीं लड़का सुन्दर तो लड़की कुरूप, कहीं लड़की सुन्दर तो लड़का कुरूपा लड़का लम्बा तो लड़की नाटी, लड़की लम्बी तो लड़का नाटा। इस प्रकार असंख्य ऐसे बेमेल हैं जिनसे लाखों लोग आजीवन संघर्ष करते हैं। यह एक गंभीर समस्या है जिसके कारण बहुत जीवन बर्बाद हो रहे हैं या बर्बाद होने के कगार पर हैं।

बेमेल विवाह के पश्चात् नर-नारी आजीवन एक-दूसरे से लड़ते-झगड़ते … रहते हैं क्योंकि इसके कारण उनके विचार परस्पर नहीं मिल पाते। अतः इस समस्या को खत्म करने के लिए माता-पिता को अपनी सोच बदलनी चाहिए। उन्हें लड़का-लड़की का उचित मेल देखकर ही विवाह के बंधन में बांधना चाहिए।

प्रश्न 11.
‘कटते जंगल
उत्तर:
एक समय था जब धरती का बहुत बड़ा भाग घने जंगलों से भरा हुआ था। तब उनपर पक्षी चहचहाते होंगे और पेड़ स्वयं हवा में झूमते होंगे। आदिमानव उनकी शरण में रहता होगा। वह उन जंगलों से ही अपना भोजन और आश्रय प्राप्त को सभ्य समझने लगा है, उसने उन जंगलों को इतनी तेजी से काट डाला है कि धरती का हरा-भरा भाग नंगा हो गया है। वह रेगिस्तान में बदल गया है। दुनिया का सबसे बड़ा सहारा रेगिस्तान भी कभी घने जंगलों से भरा हुआ था।

इस संसार में सबसे बड़ा स्वार्थी प्राणी इनसान है। वह किसी को भी उजाड़कर स्वयं सुख पाना चाहता है। उसने अपने जीवन को सुखी बनाने की इच्छा से जंगलों की अंधाधुंध कटाई की जिसका परिणाम यह हुआ कि विश्व में जंगल समाप्त होने के कगार पर पहुँच गए। वह भूल गया कि जंगल वातावरण को सुरक्षा प्रदान करते हैं। वही हमारे जीवन के लिए उपयोगी ऑक्सीजन हवा में छोड़ते हैं। वे हवा की भीतरी नमी को बनाकर रखते हैं जिससे हवा में ठंडी रहती है।

वृक्षों की जड़ें वर्षा के पानी को बह जाने से रोकती हैं। वे बाढ़ पर नियंत्रण करते हैं। वही वर्षा दर पर संतुलन बनाए रखते हैं। न जाने कितनी जड़ी-बूटियाँ और उपयोगी सामग्रियाँ जंगलों से ही प्राप्त होती हैं। रबड़, लाख, गोंद, मोम, शहद आदि जंगलों से प्राप्त होते हैं। ये मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखते हैं पर जब से इनसान ने से वातावरण में प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के वातावरण कार्यक्रम 1987 के आँकड़ों से स्पष्ट हो जाता है कि दुनिया के 29 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र का तब तक सफाया हो चुका था। सबसे अधिक जंगल हमारे देश में काटे गए हैं।

बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिक विकास, कृषि विस्तार, अल्पकालीन नीतियों और अज्ञान के कारण पेड़ बहुत तेजी से काटे गए हैं। हजारों-लाखों वर्षों से संचित जंगल रूपी संपत्ति का हमने नाश कर दिया है। जंगलों की कटाई का ही परिणाम है कि भूस्खलन, मिट्टी क्षरण और जल-स्तर नीचे जाने लगे हैं। डैमों की आयु कम हो गई है और बाढ़ का खतरा बढ़ने लगा है। कटते जंगल सारे प्राणी जगत के लिए हानिकारक हैं। जैसे-जैसे जंगलों को काटकर उद्योग-धंधे लगाए जा रहे हैं, वैसे-वैसे वायु में कार्बन-डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि हानिकारक गैसें हवा में बढ़ने लगी हैं। ऑक्सीजन की कमी होने लगी है। जंगल ही ऑक्सीजन का एकमात्र स्रोत हैं।

ये जीवों द्वारा पैदा की गई कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण कर बदले में ऑक्सीजन देते हैं। हमारी पृथ्वी के चारों ओर फैली ओज़ोन की रक्षा परत भी ऑक्सीजन से ही बनी है। जंगल प्रदूषण पर नियंत्रण करते हैं। प्रदूषण उस समय बढ़ता है . जब वातावरण में जहरीली गैसें बढ़ती हैं। जंगलों के पेड़ जहरीली गैसों को सोखने की क्षमता रखते हैं। जैसे-जैसे जंगल कटते जाएँगे वैसे-वैसे वायु विषैली होती जाएगी। जंगलों के दृश्य-लाभ की अपेक्षा अदृश्य-लाभ कई गुना अधिक हैं। ये विभिन्न प्रकार की ऊर्जा पैदा करने में सहायक होते हैं। वृक्षों की लकड़ी ताप-ऊर्जा की पारंपरिक स्रोत हैं। पेट्रोल, रसोई गैस, कोयला आदि का आधार भी जंगल हैं।

अरबों वर्ष पहले धरती की गहरी तहों में दबे विशाल जंगल हमारे विकास आधारित ऊर्जा स्रोत हैं। स्वयं को अकलमंद समझनेवाले हम इनसान जंगल काटने के कार्य .. में तो मंद अकल का परिचय दे रहे हैं। हम तो सोने का अंडा देनेवाली मुरगी का पेट फाड़ कर सोने के अंडे प्राप्त करने की कोशिश करनेवाले मूर्ख हैं। हमारे द्वारा जंगलों को काटने के दुष्परिणाम हम भोग रहे हैं और आनेवाले समय इन कष्टों की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जानेवाली है।

जंगलों के कट जाने से धरती बंजर हो जाएगी। हवा का तापमान बहुत बढ़ जाएगा। ग्लेशियर तेजी से पिघलने लगेंगे। जिस कारण नदियों में भयंकर: बाढ़ें आएँगी। समुद्रों का जल-स्तर बढ़ जाएगा जिससे समुद्री तटों पर बसी बस्तियाँ और नगर डूब जाएँगे। जंगल काटकर हम मनुष्य अपने विनाश को स्वयं बुला रहे हैं। अभी भी समय है कि हम सचेत हो जाएँ जो जंगल कट चुके हैं वहाँ नए पेड़ लगाएँ। हम सदा याद रखें कि हमारा जीवन पेड़ लगाने से सुरक्षित रहेगा, न कि काटने से।

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CBSE Class 12 Hindi विभिन्न माध्यमों के लिए पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम

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CBSE Class 12 Hindi विभिन्न माध्यमों के लिए पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम

पाठ से जनसंचार माध्यम

प्रश्न 1.
विभिन्न जनसंचार माध्यमों के वर्तमान प्रचलित रूप कौन-से हैं? इनके लिए लेखन के कौन-कौन से तरीके हैं?
उत्तर:
विभिन्न जनसंचार माध्यमों के वर्तमान प्रचलित रूप निम्नलिखित हैं-
1. प्रिंट माध्यम-समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ।
2. इलेक्ट्रॉनिक माध्यम-रेडियो, टेलीविज़न, सिनेमा, इंटरनेट ।

इनके लिए लेखन अलग-अलग तरीकों द्वारा किया जाता है। समाचार-पत्र और पत्र-पत्रिकाओं में लिखने की शैली अलग होती है जबकि रेडियो और टेलीविज़न के लिए अलग शैली होती है। माध्यम अलग-अलग होने के कारण उनकी आवश्यकताएँ भी अलग-अलग होती हैं। विभिन्न जनसंचार माध्यमों के लेखन के अलग-अलग तरीकों को जानना एवं समझना अत्यंत आवश्यक है।

इन माध्यमों के लेखन के समय बोलने, लिखने के साथ-साथ पाठकों, श्रोताओं और दर्शकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाता है। हम रोज़ाना समाचार-पत्र पढ़कर टी० वी० देखकर और रेडियो सुनकर तथा साथ ही कभी-कभी इंटरनेट पर समाचार पढ़कर अथवा देखकर ही इस बात पर विचार कर सकते हैं कि जनसंचार के इन सभी प्रमुख माध्यमों में समाचार लेखन और प्रस्तुति में क्या अंतर है। अवश्य ही, इन सभी माध्यमों में समाचारों की लेखन-शैली, भाषा और प्रस्तुति में कई अंतर हैं। इंटरनेट पर पढ़ने, सुनने और देखने तीनों की सुविधा होती है। समाचार-पत्र केवल छपे हुए शब्दों का माध्यम है, रेडियो बोले हुए शब्दों का माध्यम है। टी० वी० पर आप देख भी सकते हैं।

CBSE Class 12 Hindi विभिन्न माध्यमों के लिए पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम

प्रश्न 2.
जनसंचार माध्यमों में प्रिंट माध्यम का क्या महत्व है?”
उत्तर:
प्रिंट अर्थात मुद्रित माध्यम जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे प्राचीन है। वास्तव में आधुनिक युग का आरंभ ही मुद्रण अर्थात छपाई के आविष्कार से हुआ। वैसे तो मुद्रण का आरंभ चीन से हुआ लेकिन इसके आविष्कार का श्रेय जर्मनी के गुटेनबर्ग को जाता है। छापाखाना अर्थात प्रेस के आविष्कार से जनता को काफ़ी लाभ हुआ। यूरोप में पुनर्जागरण के ‘रेनेसां’ के आरंभ में छापेखाने की महत्वपूर्ण भूमिका थी। भारत में प्रथम छापाखाना सन 1556 में गोवा में स्थापित हुआ।

इसकी स्थापना मिशनरियों ने धर्मप्रचार की पुस्तकें छापने के लिए की थी। इसके पश्चात मुद्रण तकनीक में ज्यादा बदलाव आया है और मुद्रित माध्यमों का विस्तार व्यापक रूप से हुआ है। मुद्रित माध्यमों के अंतर्गत समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें आदि आते हैं, जिनका हमारे दैनिक जीवन में बहुत महत्व है। मुद्रित माध्यमों की सबसे बड़ी विशेषता उसमें छपे हुए शब्दों के स्थायित्व में है, जिसे आराम से धीरे-धीरे पढ़ सकते हैं।

समझ में न आने पर उसे दोबारा तब तक पढ़ सकते हैं, जब तक वह हमारी समझ में न आए। समाचार-पत्र अथवा पत्रिका पढ़ते समय यह आवश्यक नहीं कि उसे पहले पृष्ठ और पहली खबर से ही पढ़ना शुरू किया जाए। मुद्रित माध्यमों के स्थायित्व का एक लाभ यह है कि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। मुद्रित माध्यमों की दूसरी बड़ी विशेषता लिखित भाषा का विस्तार है। लिखित समाचार में भाषा, व्याकरण, वर्तनी और शब्दों का उपयुक्त प्रयोग किया जाता है। लिखे हुए को प्रकाशित करने तथा ज्यादा लोगों तक पहुँचाने के लिए प्रचलित लिखित भाषा का होना आवश्यक है, जिससे उसे अधिक लोग समझ सकें।

मुद्रित माध्यम की तीसरी विशेषता इसका चिंतन-विचार और विश्लेषण है, जिसके द्वारा गूढ़ एवं गंभीर बातें लिखी जा सकती हैं। साक्षरों के लिए मुद्रित माध्यम बहुत महत्वपूर्ण होते हैं किंतु निरक्षरों के लिए मुद्रित माध्यम व्यर्थ हैं। मुद्रित माध्यमों के लेखकों को – अपने पाठकों के भाषा-ज्ञान के साथ-साथ शैक्षिक ज्ञान एवं योग्यता का ध्यान रखना पड़ता है। मुद्रित माध्यम रेडियो, टेलीविजन एवं इंटरनेट की तरह तुरंत घटी घटनाओं को संचालित नहीं कर सकते। ये एक निश्चित समय पर प्रकाशित होती हैं। जिस घंटे में एक बार या साप्ताहिक पत्रिका सप्ताह में एक बार प्रकाशित होती है। कुछ अपवादों को छोड़कर समय-सीमा समाप्त होने के पश्चात कोई भी सामग्री प्रकाशन के लिए स्वीकार नहीं की जाती।

अत: मुद्रित माध्यमों के लेखकों एवं पत्रकारों को प्रकाशन की सीमा का ध्यान रखना पड़ता है। मुद्रित माध्यम के अंतर्गत छपनेवाले आलेख में सभी गलतियों और अशुद्धियों को दूर करके प्रकाशित किया जाता है। समाचार-पत्र अथवा पत्रिका में यह प्रयास किया जाता है कि कोई गलती या अशुद्धि प्रकाशित न हो जाए। इसके लिए समाचार-पत्र और पत्रिकाओं में संपादक के साथ एक पूरी संपादकीय टीम होती है, जिसका मुख्य उत्तर:दायित्व प्रकाशन के लिए जा रही सामग्री को गलतियों और अशुद्धियों से रहित प्रकाशित करने योग्य बनाना है।

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प्रश्न 3.
मुद्रित माध्यम की अपेक्षा रेडियो पर समाचार सुनने में क्या अंतर है?
उत्तर:
रेडियो श्रव्य माध्यम है। ध्वनि, स्वर और शब्दों के मेल के कारण रेडियो को श्रोताओं द्वारा संचालित माध्यम माना जाता है। इस कारण
रेडियो पत्रकारों को अपने श्रोताओं का पूरा ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि समाचार-पत्रों के पाठकों को अपनी पसंद से अपनी इच्छा से .. कभी भी और कहीं भी समाचार पढ़ने को मिल सकते हैं। लेकिन रेडियो के श्रोता को यह सुविधा प्राप्त नहीं होती। वह समाचार-पत्रों की तरह रेडियो समाचार बुलेटिन को कभी भी और कहीं से भी नहीं सुन सकता।

उसे बुलेटिन के प्रसारण समय का इंतज़ार करने के पश्चात शुरू से लेकर अंत तक सभी समाचारों को सुनना पड़ेगा। इस दौरान न तो वह इधर-उधर आ-जा सकता है और न ही वह शब्दकोश में अर्थ ढूँढ़ सकता है क्योंकि ऐसा करने पर बुलेटिन आगे निकल जाएगा। सकता है कि रेडियो में समाचार-पत्रों की तरह पिछले समाचार दोबारा सनने की सविधा नहीं होती। रेडियो एक रेखीय (लीनियर) माध्यम है। रेडियो की तरह दूरदर्शन भी एक रेखीय माध्यम है, जिसमें शब्दों और ध्वनियों की तुलना में दृश्यों एवं तस्वीरों का अधिक महत्व है।

प्रश्न 4.
रेडियो समाचार की संरचना किस पर आधारित होती है?
उत्तर::
रेडियो के लिए समाचार लेखन समाचार-पत्रों से भिन्न होते हैं। दोनों की प्रकृति अलग-अलग होती है। रेडियो समाचार की संरचना समाचार-पत्रों या टेलीविज़न की तरह उलटा पिरामिड (इंवर्टेड पिरामिड) शैली पर आधारित होती है। समाचार लेखन की सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण शैली उलटा पिरामिड-शैली है। 90 प्रतिशत समाचार या कहानियाँ इस शैली में लिखी जाती हैं। उलटा पिरामिडं-शैली में खबर के अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य को सबसे पहले लिखा जाता है। तत्पश्चात कम महत्वपूर्ण तथ्यों या खबरों को लिखा जाता है। इस शैली में कहानी की तरह क्लाइमेक्स अंत की जगह खबर के आरंभ में आ जाता है। इस शैली में कोई निष्कर्ष नहीं होता है।

उलटा पिरामिड-शैली के अंतर्गत समाचार को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है-इंट्रो, बॉडी और समापन। समाचार में इंट्रो या लीड को हिंदी में मुखड़ा कहा जाता है। इसमें समाचार के मूल तत्व को आरंभ की दो-तीन पंक्तियों में लिखा जाता है। यह समाचार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। तत्पश्चात बॉडी में समाचार के विस्तृत तत्वों को घटते हुए क्रम में लिखते हैं। उलटा पिरामिड-शैली में कोई अंतर नहीं होता। आवश्यकता पड़ने पर समय और जगह की कमी को देखते हुए अंतिम पंक्तियों या अनुच्छेद को काटकर छोटा किया जा सकता है और समाचार को समाप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 5.
रेडियो के लिए समाचार-लेखन की बुनियादी बातों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
रेडियो के लिए समाचार लिखते समय कुछ बातें सदा मन में रखी जानी चाहिए। यह एक ऐसा माध्यम है जो केवल श्रव्यता पर आधारित है और समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए है। इसका प्रयोग शिक्षित-अशिक्षित सभी करते हैं।

(क) साफ़-सुथरी और टंकित कॉपी-रेडियो समाचार पढ़ने वाले वाचक या वाचिका को जो समाचार कॉपी दी जाती है, वह बिलकुल साफ़-साफ़ टंकित (Typed) होनी चाहिए ताकि वाचक/वाचिका को उसे पढ़ने में कोई दिक्कत न हो। यदि समाचार कॉपी टंकित और साफ़-सुथरी नहीं है तो उसे पढ़ने के दौरान वाचक/वाचिका के अटकने या ग़लत पढ़ने का खतरा रहता है। इससे श्रोता का ध्यान बँटता है और वह भ्रमित होता है। प्रसारण के लिए तैयार की गई कॉपी कंप्यूटर पर ट्रिपल स्पेस में टाइप किया जाना चाहिए। कॉपी के दोनों ओर पर्याप्त हाशिया छोड़ा जाना चाहिए। एक पंक्ति में अधिकतम 12-13 शब्द होने चाहिए।

पंक्ति के आखिर में कोई शब्द विभाजित नहीं होना चाहिए और पृष्ठ के आखिर में कोई लाइन अधूरी नहीं होनी चाहिए। समाचार कॉपी में कठिन और लंबे शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। उच्चारण में कठिन, संक्षिप्ताक्षर, अंक आदि नहीं लिखे जाने चाहिए। एक से दस तक के अंकों को शब्दों में तथा 11 से 999 तक अंकों में लिखा जाना चाहिए लेकिन लिखने की बजाए उन्चास लाख बारह हजार तीन सौ चालीस लिखा जाना चाहिए। ऐसा करने से वाचक/वाचिका को पढ़ने में कठिनाई नहीं आती।

समाचार लिखने वाले को न र और .जैसे संकेतों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उसे इनके लिए प्रतिशत, रुपया और डॉलर शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। उसे दशमलव को उसके नज़दीकी पूर्णांक में लिखना चाहिए। वित्तीय संख्याओं को उनके नजदीकी पूर्णांक के साथ लिखना चाहिए। वैसे रेडियो समाचारों में आँकड़ों और संख्याओं का प्रयोग कम-से-कम करना चाहिए। रेडियो समाचार कभी भी संख्या से शुरू नहीं होना चाहिए। तिथियों को उसी प्रकार लिखना चाहिए जैसे हम बोलचाल में इस्तेमाल करते हैं।

(ख) डेडलाइन, संदर्भ और संक्षिप्ताक्षर का प्रयोग-रेडियो समाचार में अखबारों की तरह डेडलाइन अलग से नहीं होनी चाहिए बल्कि वह समाचार में ही गुंथी होनी चाहिए। उसमें आज, आज सुबह, आज दोपहर, आज शाम, बैठक कल होगी, कल हुई बैठक, इसी सप्ताह, अगले सप्ताह, पिछले सप्ताह, इस महीने, अगले महीने, इस साल, अगले साल, अगले सोमवार, पिछले रविवार आदि का इस्तेमाल करना चाहिए। संक्षिप्तकारों से सदा बचना चाहिए। बहुत प्रचलित संक्षिप्त अक्षरों का प्रयोग थोड़ा-बहुत किया जा सकता है जैसे–यू० एन० ओ०, सार्क, यूनिसेफ़, डब्ल्यू० टी० ओ०, एच० डी० एफ० सी०,आई० सी० आई० सी० आई बैंक आदि।

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प्रश्न 6.
टेलीविज़न का जनसंचार माध्यम में क्या महत्व है?
उत्तर:
टेलीविज़न जनसंचार माध्यमों में देखने और सुनने का माध्यम है। टेलीविज़न के लिए खबर या स्क्रिप्ट लिखते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि शब्द परदे पर दिखाई देने वाले दृश्य के अनुकूल हों। दूरदर्शन स्क्रिप्ट लेखन प्रिंट और रेडियो माध्यम से भिन्न है। इसके द्वारा कम-से-कम शब्दों में अधिक-से-अधिक समाचार बताया जाता है। दूरदर्शन के लिए समाचार दृश्यों के आधार पर लिखे जाते हैं। कैमरे से लिए गए शॉट्स को आधार बनाकर समाचार तैयार किए जाते हैं।

दूरदर्शन पर समाचार दो तरह से.पेश किए जाते हैं। इसका प्रारंभिक हिस्सा, जिसमें मुख्य समाचार होते हैं, रीडर या एंकर दृश्यों के बिना समाचार पढ़ता है। दूसरे हिस्से में पर्दे पर एंकर के स्थान पर समाचार से संबंधित दृश्य प्रस्तुत किए जाते हैं। अतः दूरदर्शन पर समाचार दो हिस्सों में विभाजित होते हैं। समाचार के साथ-साथ दृश्य प्रस्तुत होने के कारण दूरदर्शन (टेलीविज़न) का जनसंचार माध्यमों में महत्वपूर्ण स्थान है।

प्रश्न 7.
दूरदर्शन (टी०वी०) पर प्रसारित होनेवाली खबरों के विभिन्न चरण कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
किसी भी दूरदर्शन चैनल पर समाचार देने का मूल आधार लगभग वैसा ही होता है जैसा प्रिंट या रेडियो पत्रकारिता के क्षेत्र में होता है। वह आधार होता है सबसे पहले सूचना देना। दूरदर्शन में ये सूचनाएँ कई चरणों से होती हुई दर्शकों तक पहुँचती हैं, ये चरण निम्न हैं-

फ्लैश या ब्रेकिंग न्यूज – सर्वप्रथम कोई बड़ी खबर महत्वपूर्ण फ्लैश या ब्रेकिंग न्यूज़ के रूप में उसी क्षण दर्शकों तक पहुँचाई जाती है। इसमें कम-से-कम शब्दों में महत्वपूर्ण समाचार दिया जाता है।

ड्राई एंकर – इसमें एंकर खबर के बारे में दर्शकों को कहाँ, क्या, कब और कैसे घटित दृश्यों को सीधे-सीधे बताता है। खबर के दृश्य मज़र न आने तक एंकर दर्शकों को रिपोर्टर से मिलाआनकारी पर आधारित सूचनाएँ पहुँचाता है।

फोन – इन-तत्पश्चात समाचार विस्तृत होते हैं और एकर रिपोर्टर से फोन के माध्यम से सूचनाएँ एकत्र करके दर्शकों तक पहुँचाई जाती है। रिपोर्टर घटना वाली जगह पर उपस्थित होता है और वहाँ से ज्यादा-से-ज्यादा जानकारियाँ लेकर दर्शकों को बताता है। एंकर विजुअल-घटना के दृश्य या विजुअल मिल जाने पर खबर लिखी जाती है। इस खबर की शुरुआत भी प्रारंभिक सूचना से होती है और बाद में इन विषयों पर प्राप्त दृश्य प्रस्तुत किए जाते हैं।

एंकर-बाइट-बाइट अर्थात कथन । दूरदर्शन पत्रकारिता में इसका बहुत महत्व है। दूरदर्शन में किसी भी समाचार को पुष्ट करने के लिए उससे संबंधित बाइट दिखाए जाते हैं। किसी घटना की सूचना और दृश्य से संबंधित व्यक्तियों का कथन दिखा और सुनाकर समाचार को प्रामाणिकता प्राप्त होती है।

लाइव-लाइव अर्थात किसी समाचार का घटना स्थल से सीधा प्रसारण। सभी चैनल इसी कोशिश में रहते हैं कि किसी भी घटित बड़ी घटना के दृश्य उसी समय दर्शकों तक सीधे प्रसारित किए जाएँ। इसके बारे में उस स्थान पर उपस्थित रिपोर्टर और कैमरामैन ओ० बी० वैन के माध्यम से घटना के बारे में सीधे दर्शकों को दिखाते और बताते हैं।

एंकर पैकेज-पैकेज किसी भी समाचार को संपूर्णता के साथ पेश करने का एक माध्यम है। इसमें संबंधित घटना के दृश्य, इससे जुड़े लोगों की बाइट, ग्राफ़िक्स के जरिए जरूरी सूचनाएँ आदि आते हैं। टेलीविज़न समाचार लेखन इन सभी चरणों को ध्यान में रखकर किया जाता है। आवश्यकता के अनुसार वाक्यों का प्रयोग किया जाता है। शब्द दृश्यों को जोड़ने का काम करते हैं और निहित अर्थों को सामने लाते हैं, जिससे खबर के सारे आशय प्रकट हो सकें।

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प्रश्न 8.
रेडियो और टेलीविज़न समाचार की भाषा और शैली के लिए अनिवार्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
रेडियो और टेलीविज़न का संबंध देश के हर स्तर के व्यक्ति से है। इनके श्रोता और दर्शक पढ़े-लिखे लोगों से निरक्षर तक और मध्यम वर्ग से लेकर किसान-मजदूर तक सभी हैं। रेडियो और टी० वी० को इन सभी की आवश्यकताओं को पूरा करना होता है इसलिए इनकी भाषा-शैली ऐसी होनी चाहिए जो सभी वर्गों और सभी स्तरों को सरलता से समझ आ सकती हो। साथ ही साथ र भाषा के स्तर और गरिमा के साथ भी कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

रेडियो और टेलीविज़न के समाचारों में भाषा और शैली संबंधी अग्रलिखित विशेषताएँ अनिवार्य रूप से होनी चाहिए बताता है आदि साइटें भी अच्छी हैं। ‘रीडिफ़ डॉटकॉम’, ‘इंडिया इंफोला इन’, ‘सिफ़ी’ जैसी कुछ साइटें भी हैं। ‘रीडिफ़ कुछ गंभीरता से काम कर रही है इसलिए इसे अच्छा कहा जा सकता है। वेबसाइट पर विशुद्ध पत्रकारिता आरंभ करने का श्रेय तहलका डॉटकॉम को जाता है।

(i) भाषा अति सरल होनी चाहिए।
(ii) वाक्य छोटे, सीधे और स्पष्ट लिखे जाने चाहिए।
(iii) भाषा में प्रवाहमयता होनी चाहिए।
(iv) भ्रामक शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
(v) तथा, एवं, अथवा, व, किंतु, परंतु, यथा आदि शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए। इनकी जगह और, या, लेकिन आदि शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।
(vi) गैर ज़रूरी विशेषणों, समासिक और तत्सम शब्दों, उपमाओं आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
(vii) मुहावरों का अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए।
(viii) एक वाक्य में एक ही बात कहनी चाहिए।
(ix) वाक्यों में कुछ टूटता या छूटता हुआ प्रभाव नहीं होना चाहिए।
(x) प्रचलित और सहज शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 9.
विभिन्न जनसंचार माध्यमों में इंटरनेट की क्या भूमिका है?
उत्तर:
इंटरनेट पत्रकारिता को ऑनलाइन पत्रकारिता, साइबर पत्रकारिता, वेब पत्रकारिता आदि नामों से भी जाना जाता है। जिन लोगों को चौबीसों घंटे इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है या जो लोग इंटरनेट के अभ्यासी हैं उन्हें अब कागज़ पर छपे हुए अखबार ताजे नहीं लगते। भारत में कंप्यूटर साक्षरता की दर दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। प्रत्येक वर्ष 50-55 फीसदी की रफ्तार से इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या बढ़ती जा रही है। इंटरनेट पर एक ही क्षण में हम एक साथ कई खबरें पढ़ सकते हैं। .. इंटरनेट एक प्रकार का औजार है। इसे हम सूचना, मनोरंजन, ज्ञान, व्यक्तिगत और सार्वजनिक संवादों के आदान-प्रदान के लिए प्रयोग कर सकते हैं।

इंटरनेट जहाँ सूचनाओं के आदान-प्रदान का साधन है वहीं वह अश्लीलता, दुष्प्रचार और गंदगी फैलाने का भी माध्यम है। इंटरनेट पर पत्रकारिता का रूप प्रचलित हो चुका है। यह रूप औजार के तौर पर इस्तेमाल होता है अर्थात खबरों के संप्रेषण के लिए इंटरनेट का उपयोग होता है। रिपोर्टर अपनी खबर को एक जगह से दूसरी जगह ई-मेल के जरिए भेजता है। वह इसका प्रयोग समाचारों के संकलन, खबरों के सत्यापन और पुष्टिकरण के लिए भी करता है। इंटरनेट के माध्यम से चंद मिनटों में विश्वव्यापी जाल के भीतर से कोई भी पिछली पृष्ठभूमि खोजी जा सकती है। समय के साथ-साथ इसके शब्दकोश में वृद्धि होती जा रही है।

पहले एक मिनट में 80 शब्द एक जगह से दूसरी जगह भेजे जा सकते थे परंतु आज एक सेकिंड में 56 किलोबाइट अर्थात लगभग 70 हज़ार शब्द भेजे जा सकते हैं।

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प्रश्न 10.
इंटरनेट पत्रकारिता क्या है? इसके स्वरूप और इतिहास पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
इंटरनेट पर समाचार-पत्रों को प्रकाशित करना एवं समाचारों का आदान-प्रदान करना ही इंटरनेट पत्रकारिता है। इंटरनेट पर किसी भी रूप में समाचारों, लेखों, चर्चाओं, परिचर्चाओं, वाद-विवादों, फ़ीचर, झलकियों, डायरियों के माध्यम से अपने समय की धड़कनों को महसूस करना और दर्ज करना ही इंटरनेट पत्रकारिता है। प्रकाशन समूह और निजी कंपनियाँ इंटरनेट पत्रकारिता से जुड़ी हुई हैं। इं सूचनाओं को तत्काल उपलब्ध कराता है।

विश्व-स्तर पर इंटरनेट पत्रकारिता इस समय तीसरे दौर में है। पहला दौर 1982 से 1992 तक तथा दूसरा दौर 1993 से 2001 तक चला। तीसरा दौर 2002 से अब तक है। प्रारंभ में इंटरनेट का प्रयोग धरातल पर था। बड़े प्रकाशन । समूह समाचार-पत्रों की उपस्थिति सुपर इन्फार्मेशन हाइवे पर चाहते थे। .. .। इस दौरान कुछ चर्चित कंपनियाँ जैसे ए० ओ० एल० यानी अमेरिका ऑन लाइन सामने आई। यह दौर प्रयोगों का दौर था।

वास्तव में इंटरनेट पत्रकारिता की शुरुआत 1983 से 2002 के बीच हुई। इस समय में तकनीकी स्तर पर इंटरनेट का बहुत विकास हुआ। इसी बीच नई वेब भाषा एच० टी० एम० एल० (हाइपर टेक्स्ट मार्डअप लैंग्वेज) आई, इंटरनेट ई-मेल आया, इंटरनेट एक्सप्लोरर और नेटस्केप नाम से ब्राउजर ने इंटरनेट को सुविधा संपन्न और तेज रफ्तार बना दिया। न्यू मीडिया के नाम पर डॉटकॉम कंपनियाँ संपर्क में आईं।

इंटरनेट और डॉटकॉम चर्चा का विषय बन गए। इससे जनता रातों-रात अमीर बनने के सपने देखने लगी। जितनी तेजी के साथ ये कंपनियाँ उभरीं उतनी ही तेजी के साथ ये कंपनियाँ गिरी भी। सन 1996 से 2002 के बीच अमेरिका के पाँच लाख लोगों को डॉटकॉम की नौकरियों से धक्का लगा। विषय-सामग्री और पर्याप्त आर्थिक आधार की कमी के कारण लगभग डॉटकॉम कंपनियाँ बंद हो गईं। बड़े प्रकाशन समूहों ने इस दौरान स्वयं को नहीं गिरने दिया। जनसंचार के क्षेत्र में चाहे परिस्थितियाँ जैसी भी हों, सूचनाओं के आदान-प्रदान करने में इंटरनेट किसी से कम नहीं इसका महत्व हमेशा बना ही रहेगा। वास्तव में इंटरनेट पत्रकारिता का 2002 से शुरू हुआ तीसरा दौर ही वास्तविक अर्थों में टिकाऊ हो सकता है।

प्रश्न 11.
भारत में इंटरनेट पत्रकारिता विषय पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भारत में इंटरनेट का आरंभ 1993 माना जा सकता है जब यहाँ इस क्षेत्र में अनेक प्रयोग किए गए। सन 2003 में इसका दूसरा दौर शुरू हुआ। डॉटकॉम का तूफ़ान आया पर जल्दी ही निकल गया। आज पत्रकारिता की दृष्टि से ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘हिंदुस्तान टाइम्स’, ‘इंडियन एक्सप्रेस’, ‘हिंदू’, ‘ट्रिब्यून’, ‘स्टेट्समैन’, ‘पॉयनियर’, ‘इंडिया टुडे’, ‘आई० बी० एन०’, ‘जी न्यूज़,’ ‘आज तक’, ‘आउटलुक’ आदि साइटें भी अच्छी हैं। ‘रीडिफ़ डॉटकॉम’, ‘इंडिया इंफोला इन’, ‘सिफ़ी’ जैसी कुछ साइटें भी हैं। ‘रीडिफ़ कुछ गंभीरता से काम कर रही है इसलिए इसे अच्छा कहा जा सकता है। वेबसाइट पर विशुद्ध पत्रकारिता आरंभ करने का श्रेय तहलका डॉटकॉम को जाता है।

प्रश्न 12.
हिंदी नेट संसार पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
हिंदी में नेट पत्रकारिता का आरंभ ‘वेब दुनिया’ के साथ हुआ था। इंदौर के नई दुनिया समूह से प्रारंभ पोर्टल हिंदी का संपूर्ण पोर्टल है। हिंदी के समाचार-पत्र-‘हिंदुस्तान’, ‘जागरण’, ‘अमर उजाला’ ‘नई दुनिया’, ‘भास्कर’, ‘राजस्थान पत्रिका’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘प्रभात खबर’, ‘राष्ट्रीय सहारा’ आदि ने वेब संस्करण आरंभ किए हैं, पर इस क्षेत्र में ‘बी० बी० सी०’ हिंदी की सर्वश्रेष्ठ साइट है।

हिंदी वेब पत्रिकाएँ चल रही हैं, अनुभति, अभिव्यक्ति, हिंदी नेस्ट, सराय आदि प्रशंसनीय काम कर रही हैं। सभी मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और बैंकों ने हिंदी अनुभाग आरंभ किए हैं। इससे हिंदी की ऑन लाइन पत्रकारिता का मार्ग तैयार हो रहा है। वास्तव में हिंदी की वेब पत्रकारिता अभी अपने शैशव काल में ही है। इसमें सबसे बड़ी समस्या हिंदी के फ़ॉन्ट की है। हमारे पास कोई ‘की-बोर्ड’ नहीं है। डायनमिक फ़ॉन्ट की अनुपलब्धता के कारण हिंदी की अधिकतर साइट्स खुलती ही नहीं हैं। इस समस्या से निपटने के लिए की-बोर्ड का मानकीकरण और बेलगाम फ़ॉन्ट पर नियंत्रण आवश्यक है।

पाठ से संवाद

प्रश्न  1.
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर: के लिए चार-चार विकल्प दिए गए हैं। सटीक विकल्प पर / का निशान लगाइए __
CBSE Class 12 Hindi विभिन्न माध्यमों के लिए पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम 1

CBSE Class 12 Hindi विभिन्न माध्यमों के लिए पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम

प्रश्न  2.
विभिन्न जनसंचार माध्यमों-प्रिंट, रेडियो, टेलीविज़न, इंटरनेट से जुड़ी पाँच-पाँच खूबियों और खामियों को लिखते हुए एक तालिका तैयार करें।
उत्तर:
CBSE Class 12 Hindi विभिन्न माध्यमों के लिए पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम 2
CBSE Class 12 Hindi विभिन्न माध्यमों के लिए पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम 3
CBSE Class 12 Hindi विभिन्न माध्यमों के लिए पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम 4

प्रश्न 3.
इंटरनेट पत्रकारिता सूचनाओं को तत्काल उपलब्ध कराता है, परंतु इसके साथ ही उसके कुछ दुष्परिणाम भी हैं। उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इंटरनेट आज की पत्रकारिता का मुख्य आधार बन चुका है पर वह समाज के सारे वर्गों को अनेक आधारों पर विकृत भी कर रहा है। इसमें दुनिया भर के सभी अच्छे-बुरे कार्य साफ़-स्पष्ट और विस्तारपूर्वक देखे-सुने जा सकते हैं। इसके कारण कच्ची बुद्धि का युवा वर्ग तेज़ी से अश्लीलता और नग्नता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उसके संस्कार विकृत होने लगे हैं। इससे अपराध जगत को नई दिशा प्राप्त हो रही है। अपराधी और आतंकवादी सरलता से सलाह-मशवरा कर दुनिया के किसी भी कोने में आतंक फैलाने का कार्य कर रहे हैं। काले धन का लेन-देन सरल हो गया है, पुस्तकीय ज्ञान की चोरी होने लगी है।

प्रश्न 4.
श्रोताओं या पाठकों को बाँधकर रखने की दृष्टि से प्रिंट माध्यम, रेडियो और टी० वी० में से सबसे सशक्त माध्यम कौन है? पक्ष-विपक्ष में तर्क दें।
उत्तर:
प्रिंट माध्यम, रेडियो और टी० वी० में से सबसे सशक्त माध्यम टी० वी० है। इसके लिए साक्षर होने की भी आवश्यकता नहीं है। यह दृश्य-श्रव्य आधार पर टिका हुआ है। मानव मन पर जितना प्रभाव देखने से पड़ता है, उतना प्रभाव सुनने या पढ़ने से नहीं पड़ता। यह पल-पल की घटना को दिखा देता है। यह मानव को वैसा ही करने को उकसाता है जैसा यह स्क्रीन पर दिखाता है। इसके लिए किसी शब्दकोश या विचार-विमर्श की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। इसका संप्रेषण अधिक प्रभावी होता है।

प्रश्न 5.
पाठ में दिए गए चित्रों को ध्यान से देखें और इसके आधार पर टी० वी० के लिए तीन अर्थपूर्ण संक्षिप्त स्क्रिप्ट लिखें।
उत्तर:
(i) पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटकों की भीड़ तो लगी ही रहती है। वे वहाँ की झीलों को निहारते हैं। झीलों में नौका विहार करते हैं। जिस वातावरण में रहकर आनंद प्राप्त करते हैं, उसकी स्वच्छता का ज़रा भी ध्यान नहीं रखते। वे नौका में झील की सैर करते हुए पानी में ही गंदगी फेंकते रहते हैं। वे कागज़ के टुकड़े, पॉलीथीन, खाने के टुकड़े आदि इधर-उधर बिखराते रहते हैं। वे यह भी नहीं सोचते कि यदि वे स्वयं साफ़-स्वच्छ झील के जल में नौका विहार करना चाहते हैं तो औरों के लिए गंदगी क्यों फैलाते हैं।

(ii) जल हमारा जीवन है। इसके बिना हम जीवित नहीं रह सकते। पर हम हैं कि जब तक यह हमें आसानी से मिलता रहता है हम । परवाह नहीं करते। घर, गली, मुहल्ले, स्कूल, कॉलेज, आदि में व्यर्थ बहता पानी अकसर दिखाई दे जाता है। लोग जल प्राप्त करने के लिए नल खोलते हैं पर जल ले लेने के बाद उसे बंद करना भूल जाते हैं। वे सोच लेते हैं कि उनका इसमें क्या रखना चाहिए कि जल राष्टीय संपत्ति से भी बढ़कर है। यह हमें जीवन प्रदान करता है। इसके बिना हम जी नहीं सकते। इसे व्यर्थ बहने से रोकना चाहिए। ऐसा करना अति आवश्यक है।

(iii) कितना बोझ है पुस्तकों का इन छोटे-छोटे बच्चों के कंधों पर। किसी भी स्कूल के पास पल-भर खड़े होकर देखो। जितना भार बच्चे का अपना नहीं होता, शायद उससे अधिक बोझ उनकी पीठ पर लदा होता है-पुस्तकों के रूप में। बच्चों की पढ़ाई का आरंभ तो खेल-कूद से होना चाहिए, न कि भारी-भरकम पुस्तकों के बोझ से। अनेक विकसित देश तो उनकी पढ़ाई खिलौनों, नाचने, गाने, और खेलने-कूदने से आरंभ करते हैं पर हमारे देश में स्कूल की शिक्षा के नाम पर उन्हें पुस्तकें ही परोसी जाती हैं। – इससे उनके मन में भय उत्पन्न होता है। उनके शारीरिक विकास की राह में रुकावट पैदा होती है। सरकार को ऐसी शिक्षा नीति बनानी चाहिए कि छोटे बच्चों के कंधे पर टँगा बस्ता कुछ हल्का हो।

पाठ से पत्रकारीय लेखन

प्रश्न 1.
पत्रकारीय लेखन क्या है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समाचार माध्यमों में काम करने वाले पत्रकार अपने पाठकों, दर्शकों और श्रोताओं तक सूचनाएँ पहुँचाने के लिए लेखन के विभिन्न तरीके अपनाते हैं, जिसे पत्रकारीय लेखन कहते हैं। पत्रकारों के द्वारा यह कार्य प्राय: तीन तरीके से किया जाता है-पूर्णकालिक, अंशकालिक और फ्रीलांसर। पूर्णकालिक पत्रकार किसी समाचार संगठन से जुड़कर नियंत्रित वेतन प्राप्त करता है। अंशकालिक पत्रकार (स्ट्रिंगर) किसी समाचार संगठन के लिए निश्चित मानदेय पर काम करता है।

फ्रीलांसर पत्रकार किसी विशेष समाचार संगठन से नहीं होता। वह भुगतान के आधार पर अलग-अलग अख़बारों के लिए लिखता है। पत्रकारीय लेखन का संबंध विभिन्न घटनाओं, समस्याओं और मुद्दों से होता है। यह कार्य कविता, कहानी, उपन्यास आदि के द्वारा पूरी तरह से संभव नहीं हो सकता क्योंकि इसमें तात्कालिकता और पाठकों की रुचियों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। पत्रकारीय लेखन में इस बात को सदा ध्यान में रखना चाहिए कि वह विशाल समुदाय के लिए लिख रहा है। उसे सदा सीधी-सादी और आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उसे कभी भी लंबे-लंबे वाक्य नहीं . लिखने चाहिए। उसे किसी भी अवस्था में अनावश्यक विशेषणों और उपमाओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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प्रश्न 2.
समाचार कैसे लिखा जाता है?
उत्तर:
प्रायः संवाददाता या रिपोर्टर अख़बारों के लिए समाचार लिखते हैं। उनके द्वारा समाचार एक विशेष शैली में लिखे जाते हैं। अख़बारों में
अधिकतर सबसे महत्वपूर्ण तथ्य और जानकारियाँ सबसे पहले पैराग्राफ में लिखी जाती हैं। इसके बाद कम महत्वपूर्ण बातें तब तक दी जाती हैं जब तक समाचार खत्म नहीं हो जाता। इसे उलटा पिरामिड शैली कहते हैं।
CBSE Class 12 Hindi विभिन्न माध्यमों के लिए पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम 5
उलटा पिरामिड में समाचार का ढाँचा यह तरीका सबसे अधिक लोकप्रिय और उपयोगी माना जाता है। यह शैली कहानी-लेखन से उलटी है। इस शैली का आरंभ 19वीं शताब्दी में हुआ था पर इसका विकास अमेरिका के गृहयुद्ध में हुआ था।

प्रश्न 3.
अच्छे लेखन के लिए ध्यान में रखी जाने वाली महत्वपूर्ण बातों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अच्छे लेखन के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखनी चाहिए
(i) छोटे वाक्य लिखने चाहिए। मिश्र और संयुक्त वाक्य की तुलना में सरल वाक्य-संरचना को महत्व देना चाहिए।
(ii) सामान्य बोलचाल की भाषा और शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। अनावश्यक शब्दों के इस्तेमाल से बचना चाहिए।
(iii) शब्दों का सार्थक प्रयोग करना चाहिए।
(iv) अच्छा लिखने के लिए जाने-माने लेखकों की रचनाएँ ध्यान से पढ़नी चाहिए।
(v) लेखन में विविधता लाने के लिए छोटे वाक्यों के साथ-साथ कुछ मध्यम आकार के और कुछ बड़े वाक्यों का प्रयोग करना चाहिए। इसके साथ-साथ मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग भी करना चाहिए।
(vi) अपने लिखे को दोबारा ज़रूर पढ़ना चाहिए और गलतियों के साथ-साथ अनावश्यक चीज़ों को हटा देना चाहिए।
(vii) लेखन में कसावट बहुत ज़रूरी है।
(viii) लिखते हुए यह ध्यान रखिए कि आपका उद्देश्य अपनी भावनाओं, विचारों और तथ्यों को प्रकट करना है न कि दूसरे को प्रभावित करना।
(ix) आपको पूरी दुनिया से लेकर अपने आसपास घटने वाली घटनाओं, समाज और पर्यावरण पर गहरी निगाह रखनी चाहिए। उन्हें इस तरह से देखना चाहिए कि अपने लेखन के लिए आप उससे विचारबिंदु निकाल सकें।
(x) आपमें तथ्यों को जुटाने और किसी विषय पर बारीकी से विचार करने का धैर्य होना चाहिए।

प्रश्न 4.
पत्रकारीय लेखन की परिभाषा लिखिए। यह कितने प्रकार के होते हैं? पत्रकार कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर:
समाचार-पत्र अथवा जनसंचार माध्यमों में काम करने वाले पत्रकार अपने पाठकों, दर्शकों और श्रोताओं तक सूचनाएँ पहुँचाते हैं। पाठकों को जागरूक और शिक्षित बनाने और उनका मनोरंजन करने के लिए लेखन के जिन विभिन्न रूपों का प्रयोग किया जाता है उन्हें पत्रकारीय लेखन कहते हैं। पत्रकार मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं
(i) पूर्णकालिक पत्रकार-पूर्णकालिक पत्रकार से तात्पर्य किसी समाचार संगठन में काम करने वाले नियमित वेतन-भोगी कर्मचारी से है।
(ii) अंशकालिक पत्रकार-अंशकालिक पत्रकार वह होता है जो किसी समाचार संगठन के लिए निश्चित मानदेय पर काम करता है।
(iii) फ्रीलांसर अर्थात स्वतंत्र पत्रकार-फ्रीलांसर पत्रकार किसी महत्वपूर्ण समाचार-पत्र से संबंधित नहीं होता। बल्कि वह समाचार-पत्रों में भुगतान के आधार पर लेख लिखता है।

प्रश्न 5.
समाचार-लेखन से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
समाचार-लेखन पत्रकारीय लेखन का जाना-पहचाना रूप है। साधारणतया समाचार-पत्रों में समाचार पूर्णकालिक और अंशकालिक पत्रकारों द्वारा लिखे जाते हैं, जिन्हें संवाददाता अथवा रिपोर्टर भी कहते हैंकासमाचार-पत्रों में प्रकाशित अधिकतर समाचारों के लिए एक विधि अपनाई जाती है। इन समाचारों में किसी भी समस्या, विचार तथा घटनाओं के महत्वपूर्ण तथ्य सूचना और उससे संबंधितासारी जानकारी को आरंभ में वाक्य खंडों में लिखा जाता है। उसके पश्चात वाक्य खंडों में से महत्वपूर्ण तथ्य और सूचना को प्रकाशित किया जाता है। इस प्रकार लिखे समाचार पाठकों तक पहुँचते हैं।

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प्रश्न  6.
उलटा पिरामिड-शैली से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
उलटा पिरामिड-शैली समाचार लेखन की शैलियों में से एक है। यह शैली समाचार लेखन की विशेष शैली है जो सबसे लोक प्रसिद्ध उपयोगी और बुनियादी है। यह शैली कहानी अथवा कथा लेखन की शैली के बिलकुल विपरीत है। इसमें क्लाइमेक्स अंत में आता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य अथवा सूचना पिरामिड के नीचे के भाग में नहीं होते, अपितु इस शैली में पिरामिड को उलट दिया जाता है इसलिए इसे उलटा पिरामिड-शैली कहा जाता है।

उलटा पिरामिड-शैली को 19वीं शताब्दी के मध्य में प्रयोग में लाया गया था। परंतु इसका पूर्णतया विकास अमेरिका में गृहयुद्ध के अंतर्गत हुआ। इस दौरान संवाददाता अपनी खबरें टेलीग्राफ़, संदेशों के माध्यम से भेजते थे, जिसकी सेवाएँ महँगी होने के साथ-साथ अनियमित तथा दुर्लभ थीं। कई बार तकनीकी कारणों के कारण संवाददाताओं को किसी घटना का समाचार कहानी की तरह विस्तार से न देकर संक्षेप में देना पड़ता था। इस प्रकार उलटा पिरामिड-शैली विकसित हुई। धीरे-धीरे यह शैली लेखन की स्टैंडर्ड शैली बन गई। इस प्रकार इस शैली से लेखन एवं संपादन कार्य सुविधापूर्वक होने लगा।

प्रश्न 7.
समाचार लेखन के छह ककारों के बारे में संक्षेप में बताओ।
उत्तर:
किसी भी समाचार को लिखने के लिए छह प्रश्नों का उत्तर: आवश्यक माना जाता है। क्या हुआ, किसके साथ हुआ, कहाँ हुआ, कब हुआ, कैसे और क्यों हुआ? इन्हीं छह प्रश्नों का दूसरा नाम ककार है। इन्हीं छह ककारों को ध्यान में रखकर ही किसी घटना, समस्या और विचार आदि से संबंधित खबर लिखी जाती है। समाचार के आरंभ में जब पैराग्राफ़ लिखना शुरू किया जाता है तब शुरू की दो-तीन पंक्तियों में ‘क्या’, ‘कौन’, ‘कब’ और ‘कहाँ’? इन तीन या चार ककारों को आधार बनाकर समाचार लिखा जाता है।

उसके पश्चात समाचार के मध्य में और समापन से पूर्व ‘कैसे’ और ‘क्यों’ जैसे ककारों का उत्तर: दिया जाता है। इस तरह इन छह ककारों को ध्यान में रखकर समाचार लिखा जाता है। पहले चार ककारों का प्रयोग सूचना और तथ्यों के लिए किया जाता है। परंतु ‘कैसे’ और ‘क्यों’ ककारों द्वारा विवरणात्मक, व्याख्यात्मक और विश्लेषणात्मक पहलुओं पर बल दिया जाता है। इस प्रकार समाचार लेखन की पूरी प्रक्रिया में इन छह ककारों का विशेष महत्व है।

प्रश्न 8.
फ़ीचर से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
समाचार-पत्रों में समाचारों के अतिरिक्त प्रकाशित होने वाले पत्रकारीय लेखन के फ़ीचर सबसे महत्वपूर्ण हैं। समाचार और फ़ीचर में पर्याप्त अंतर होता है। फ़ीचर का मुख्य लक्ष्य पाठकों को सूचना देने, उन्हें शिक्षित करने के साथ-साथ उनका मनोरंजन करना होता है। फ़ीचर पाठकों को उसी समय घटित घटनाओं से परिचित नहीं कराता, जबकि समाचार पाठकों को तात्कालिक घटनाओं से परिचित कराता है। फ़ीचर लेखन की शैली समाचार-लेखन की शैली से भी भिन्न होती है।

समाचार लिखते समय रिपोर्टर वस्तुनिष्ठता और तथ्यों की शुद्धता पर बल देता है। उसमें अपने विचारों को प्रकट करने का अवसर नहीं होता। लेकिन फ़ीचर में लेखक अपने विचार, भावनाएँ तथा दृष्टिकोण को व्यक्त कर सकता है। … फ़ीचर लेखन में उलटा पिरामिड शैली के स्थान पर कथात्मक शैली का प्रयोग होता है। फ़ीचर लेखन की भाषा समाचारों की अपेक्षा सरल, आकर्षक, रूपात्मक तथा मन को मोह लेने वाली होती है। फ़ीचर में समाचारों की अपेक्षा कम शब्दों का प्रयोग होता है। फ़ीचर समाचार रिपोर्ट से प्रायः दीर्घ होते हैं। समाचार-पत्रों एवं पत्रिकाओं में 250 शब्दों से लेकर 2000 शब्दों तक के फ़ीचर प्रकाशित होते हैं।

एक आकर्षक, रोचक एवं अच्छे फ़ीचर के साथ पोस्टर, रेखांकन, ग्राफ़िक्स का होना आवश्यक है। फ़ीचर का विषय हलका एवं गंभीर कुछ भी हो सकता है। फ़ीचर एक पाठशाला के परिचय से लेकर किसी शैक्षणिक यात्रा पर भी केंद्रित हो सकता है। फ़ीचर एक ऐसा नुस्खा है जो ज्यादातर विषय एवं मुद्दे को ध्यान में रखकर उसे प्रस्तुत करते हुए दिया जाता है। फ़ीचर की इन्हीं विशेषताओं के कारण कुछ समाचारों को भी फ़ीचर शैली में प्रस्तुत किया जाता है।

प्रश्न 9.
विचारपरक लेखन की श्रेणी में किन-किन सामग्रियों का अध्ययन किया जाता है?
उत्तर:
समाचार-पत्रों में समाचार और फ़ीचर के अतिरिक्त विचारपरक सामग्री भी प्रकाशित होती है। कई समाचार-पत्रों की पहचान उनके वैचारिक तत्वों से होती है। समाचार-पत्रों में प्रकाशित होने वाले विचारात्मक लेखों से ही उस समाचार की पहचान होती है। समाचार-पत्रों में संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित होने वाले लेख, टिप्पणियाँ, संपादकीय लेखन और स्तंभ लेखन इसी श्रेणी में आते हैं।

लेख-सभी समाचार-पत्रों में संपादकीय पृष्ठ पर सार्वजनिक मुद्दों पर वरिष्ठ पत्रकारों और उनके विषयों के विशेषज्ञों से संबंधित लेख प्रकाशित किए जाते हैं। प्रकाशित लेखों में किसी विषय या मुद्दे पर विस्तारपूर्वक चर्चा होती है। लेख में लेखकों के विचारों को महत्व दिया जाता है।

लेकिन ये विचार तथ्यों और सूचनाओं पर आधारित होने चाहिए। लेखक तथ्यों और सूचनाओं के विश्लेषण और तों के माध्यम से अपनी सलाह प्रस्तुत करता है। लेख लिखने के लिए काफ़ी तैयारी की आवश्यकता होती है। लेखक को किसी विषय पर लेख लिखने से पहले दूसरे लेखकों और पत्रकारों के विचार को ध्यान में रखकर लिखना चाहिए। हर लेखक की शैली निजी होती है। समाचार-पत्र और पत्रिकाओं में लेख लिखते समय शुरुआत ऐसे विषयों के साथ करनी चाहिए जिसके बारे में हमें अच्छी जानकारी हो। लेख का एक प्रारंभ, मध्य और अंत होता है। लेख का प्रारंभ आकर्षक बनाने के लिए किसी विषय के सबसे ताजा प्रसंग या घटनाक्रम का सबसे पहले विवरण करना चाहिए।

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उसके पश्चात उससे जुड़े अन्य पहलुओं को प्रस्तुत करना चाहिए। इस तरह लेख के अंतर्गत तथ्यों की सहायता से विश्लेषण करते हुए हम अपना मत प्रकट कर सकते हैं। टिप्पणियाँ-विचारपरक लेखन के अंतर्गत भिन्न-भिन्न टिप्पणियाँ भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका द्वारा समाचार-पत्रों की छवि को बढ़ाती रहती हैं। संपादकीय लेखन-संपादकीय लेखन को समाचार-पत्र की अपनी आवाज़ माना जाता है। संपादकीय के माध्यम से समाचार-पत्र किसी घटना, समस्या या मुद्दे के प्रति अपने विचार प्रकट करते हैं।

संपादकीय किसी विशेष व्यक्ति के विचार से संबंधित नहीं होता इसलिए इसे बिना किसी नाम के छापा जाता है। संपादकीय लिखने का उत्तर:दायित्व उस समाचार-पत्रों में काम करने वाले संपादक और उनके सहयोगियों का होता है।

विशेषकर समाचार-पत्रों में सहायक संपादक, संपादकीय लिखते हैं। किसी भी बाहरी लेखक या पत्रकार को संपादकीय लिखने की अनुमति नहीं होती। हिंदी के समाचार पत्रों में किन्हीं में तीन, किन्हीं में दो और किन्हीं में केवल एक संपादकीय प्रकाशित होता है। स्तंभ-लेखन-स्तंभ-लेखन विचारपरक लेखन का प्रमुख रूप है। जिन लेखकों की लेखन-शैली विकसित हो जाती है, उन लेखकों की लोकप्रियता को देखकर समाचार-पत्र उन्हें नियमित स्तंभ लिखने का उत्तर:दायित्व दे देते हैं।

स्तंभ का विषय और उनमें विचार लेखक अपनी इच्छानुसार चुन अथवा व्यक्त कर सकता है। स्तंभ में लेखक के विचार अभिव्यक्त होते हैं। स्तंभ की पहचान लेखकों के नाम पर स्तंभ इतने प्रसिद्ध हो जाते हैं कि समाचार-पत्र उनके कारण ही पहचाने जाते हैं। नए लेखकों की अपेक्षा पुराने लेखकों को स्तंभ लिखने का मौका ज्यादा मिलता है। स्तंभ जनमत के लिए दर्पण का कार्य करता है।

प्रश्न 10.
संपादक के नाम पत्र किस प्रकार लिखा जाता है?
उत्तर:
समाचार-पत्रों के संपादकीय पृष्ठ पर और पत्रिकाओं की शुरुआत में संपादक के नाम पाठकों के पत्र प्रकाशित किए जाते हैं। सभी समाचार-पत्रों का एक स्थायी स्तंभ होता है। यह पाठकों का निजी स्तंभ होता है। इस स्तंभ के माध्यम से समाचार-पत्र के पाठक विभिन्न मुद्दों पर अपने मत व्यक्त करने के साथ-साथ जन-समस्याओं को भी उठाते हैं। यह स्तंभ जनमत के लिए दर्पण का कार्य करता है। परंतु कई बार समाचार-पत्र पाठकों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों से सहमत नहीं होते। यह स्तंभ नए लेखकों के लिए लेखन की
शुरुआत करने का अच्छा अवसर प्रदान करता है।

प्रश्न 11.
समाचार-लेखन में साक्षात्कार/इंटरव्यू की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समाचार माध्यमों में साक्षात्कार का बहुत महत्व है। पत्रकार साक्षात्कार के माध्यम से ही समाचार, फ़ीचर, विशेष रिपोर्ट तथा दूसरे कई तरह के पत्रकारीय लेखन के लिए कच्ची सामग्री एकत्रित करते हैं। पत्रकारीय साक्षात्कार और सामान्य बोलचाल में यह अंतर होता है कि साक्षात्कार में एक पत्रकार किसी अन्य व्यक्ति से तथ्य, उसकी राय तथा भावनाएँ जानने के लिए प्रश्न पूछता है। एक सफल साक्षात्कार के लिए केवल ज्ञान का होना ज़रूरी नहीं, ज्ञान के साथ-साथ संवेदनशीलता, कूटनीति, धैर्य और साहस जैसे गुण भी होने चाहिए। एक अच्छे और कुशल साक्षात्कार के लिए आवश्यक है कि जिस विषय और जिस व्यक्ति के साथ साक्षात्कार करना हो उसके बारे में पर्याप्त जानकारी हो।

साक्षात्कार से क्या निकालना है इसके बारे में स्पष्ट रहना आवश्यक है। प्रश्न केवल वही पूछे जाने चाहिए जो समाचार-पत्र के एक आम पाठक के मन में हो सकते हैं। साक्षात्कार की अगर रिकार्डिंग करना संभव हो तो अच्छा है नहीं तो साक्षात्कार के समय नोट्स लेते रह सकते हैं। साक्षात्कार को लिखते समय दो तरीकों में से कोई भी एक तरीका सुविधानुसार अपनाया जा सकता है। साक्षात्कार को प्रश्न और फिर उत्तर: के रूप में लिखा जा सकता है या फिर उसे एक आलेख की तरह भी लिखा . जा सकता है।

प्रश्न 12.
विशेष रिपोर्ट किस प्रकार लिखी जाती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पत्र-पत्रिकाओं और अखबारों में प्राय: विशेष रिपोर्ट दिखाई देती हैं जो गहरी छानबीन, विश्लेषण और व्याख्या का परिणाम होती हैं।
इन्हें किसी विशेष समस्या, मुद्दे या घटना की छानबीन के बाद लिखा जाता है। यह लेखन-कार्य तथ्यों पर पूरी तरह से आधारित होता है। खोजी रिपोर्ट, इन-डेप्थ रिपोर्ट, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट और विवरणात्मक रिपोर्ट में विशेष तथ्यों को सामने लाया जाता है, जो पहले उपलब्ध नहीं थे।

खोजी रिपोर्ट में प्राय:-भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और गड़बड़ियों को उजागर किया जाता है। इन-डेप्थ रिपोर्ट में किसी घटना, समस्या या मुद्दे को सामने लाया जाता है। विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में किसी घटना या समस्या से जुड़ी तथ्यात्मक व्याख्या की जाती है और विवरणात्मक रिपोर्ट में किसी घटना का बारीक और विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाता है। किसी भी विशेष रिपोर्ट के लेखन में निम्नलिखित बातों की ओर ध्यान दिया जाना आवश्यक है

(क) विशेष रिपोर्ट का लेखन-कार्य उलटा पिरामिड-शैली में किया जाता है।
(ख) कभी-कभी रिपोर्ट को फ़ीचर-शैली में भी लिखा जाता है।
(ग) बहुत विस्तृत रिपोर्ट में उलटा पिरामिड और फ़ीचर शैली को कभी-कभी आपस में मिला लिया जाता है।
(घ) कई बार लंबी रिपोर्ट को शृंखलाबद्ध करके कई दिन छापा जाता है।
(ङ) रिपोर्ट की भाषा सरल, सहज और आम बोलचाल की होती है।

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पाठ से संवाद

प्रश्न 1.
किसे क्या कहते हैं?
(क) सबसे महत्वपूर्ण तथ्य या सूचना को सबसे ऊपर रखना और उसके बाद घटते हुए महत्वक्रम में सूचनाएँ देना…
(ख) समाचार के अंतर्गत किसी घटना का नवीनतम और महत्वपूर्ण पहलू…..
(ग) किसी समाचार के अंतर्गत उसका विस्तार, पृष्ठभूमि, विवरण आदि देना…
(घ) ऐसा सुव्यवस्थित, सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ लेखन; जिसके माध्यम से सूचनाओं के साथ-साथ मनोरंजन पर भी ध्यान ……. दिया जाता है… .
(ङ) किसी घटना, समस्या या मुद्दे की गहन छानबीन और विश्लेषण…
(च) वह लेख, जिसमें किसी मुद्दे के प्रति समाचार-पत्र की अपनी राय प्रकट होती है….
उत्तर:
(क) उलटा पिरामिड में समाचार का ढाँचा
(ख) क्लाईमेक्स
(ग) छह ककार
(घ) फ़ीचर
(ङ) विशेष रिपोर्ट
(च) संपादकीय

प्रश्न 2.
नीचे दिए गए समाचार के अंश को ध्यानपूर्वक पढ़िए
शांति का संदेश लेकर आए फ़जलुर्रहमान
पाकिस्तान में विपक्ष के नेता मौलाना फ़जलुर्रहमान ने अपनी भारत-यात्रा के दौरान कहा कि वह शांति व भाईचारे का संदेश लेकर आए – हैं। यहाँ दारुलउलूम पहुँचने पर पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों में निरंतर सुधार हो रहा है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से गत सप्ताह नई दिल्ली में हुई वार्ता के संदर्भ में एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सरकार ने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए 9 प्रस्ताव दिए हैं।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन पर विचार करने का आश्वासन दिया है। कश्मीर समस्या के संबंध में मौलाना साहब ने आशावादी रवैया अपनाते हुए कहा कि 50 वर्षों की इतनी बड़ी जटिल समस्या का एक-दो वार्ता में हल होना संभव नहीं है। लेकिन इस समस्या का समाधान अवश्य निकलेगा। प्रधानमंत्री के प्रस्तावित पाकिस्तान दौरे की बाबत उनका कहना था कि निकट भविष्य में यह संभव है और हम लोग उनका ऐतिहासिक स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते बहुत मज़बूत हुए हैं और प्रथम बार सीमाएँ खुली हैं, व्यापार बढ़ा है तथा बसों का आवागमन आरंभ हुआ है। (हिंदुस्तान से साभार)

(क) दिए गए समाचार में से ककार ढूँढ़कर लिखिए, जो ककार नहीं हैं उन्हें बताइए।
(ख) उपर्युक्त उदाहरण के आधार पर निम्नलिखित बिंदुओं को स्पष्ट कीजिए
• इंट्रो
• बॉडी
• सनातन
अभिव्यक्ति और माध्यम
(ग) उपर्युक्त उदाहरण का गौर से अवलोकन कीजिए और बताइए कि ये कौन-सी पिरामीड-शैली में है, और क्यों?
उत्तर:
(क) दिए गए समाचार में सभी छह ककार-क्या, कौन, कहाँ, कब, क्यों, कैसे-विद्यमान हैं।
क्या-शांति और भाईचारे का संदेश। ..
कौन-पाकिस्तान के विपक्ष के नेता मौलाना फ़जलुर्रहमान।
कहाँ-दारुलउलूम के पत्रकार सम्मेलन में।
कब-भारत यात्रा के दौरान।
क्यों-दोनों देशों के संबंधों में सुधार के लिए।
कैसे-शांति प्रस्तावों से।

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(ख)

  • इंट्रो-पाकिस्तान के विपक्ष के नेता मौलाना फ़जलुर्रहमान की भारत यात्रा पर शांति और भाईचारे का संदेश लेकर आना।
  • बॉडी-दोनों देशों के बीच संबंधों में निरंतर सुधार, पाकिस्तान सरकार का प्रस्ताव और आशावादी रवैया तथा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का उन पर विचार का आश्वासन।
  • समापन-दोनों देशों के मज़बूत रिश्तों के प्रति आशावान। …

(ग) यह उदाहरण उलटा पिरामिड-शैली में है। इसका आरंभ पाकिस्तान के विपक्ष के नेता के भारत आगमन से हुआ। जो मुखड़े के रूप में है। पाकिस्तान सरकार के कश्मीर समस्या के समाधान के लिए 9 प्रस्तावों पर विचार करने का आश्वासन और मौलाना साहब का आशावादी रवैया समाचार की बॉडी है। व्यापार बढ़ने और बसों के आवागमन के साधन को समापन कहेंगे।

प्रश्न 3.
एक दिन के किन्हीं तीन समाचार-पत्रों को पढ़िए और दिए गए बिंदुओं के संदर्भ में उनका तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
(क) सूचनाओं का केंद्र/मुख्य आकर्षण
(ख) समाचार का पृष्ठ एवं स्थान
(ग) समाचार की प्रस्तुति
(घ) समाचार की भाषा-शैली
उत्तर:
रविवार के दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी और दैनिक जागरण को पढ़ा। उनका प्रश्नानुसार तुलनात्मक अध्ययन किया और निम्नलिखित निष्कर्ष पर पहुंचा।

(क) सूचनाओं का केंद्र/मुख्य आकर्षण
(i) दैनिक भास्कर-इसमें राजनीति, खेलकूद, धर्म-संस्कृति, मनोरंजन आदि विषयों को प्रस्तुत किया गया है। नगर से जुड़े तथा फ़िल्मी जगत से संबंधित विशेष आकर्षणों को इसमें स्थान दिया गया है।
(ii) पंजाब केसरी-इसमें राजनीति, समाज, खेलकूद, मनोरंजन, विश्व अवलोकन आदि को केंद्र में रखा गया है। नगर से जुड़े समाचार तथा फ़िल्मी जगत को स्थान दिया गया है। बच्चों के मनोरंजन की ओर ध्यान दिया गया है।
(iii) दैनिक जागरण-राजनीति, समाज, खेलकूद, मनोरंजन, यात्रा के साथ-साथ राज्य संबंधी समाचारों को केंद्र में रखा गया है। नगर से संबंधित समाचार हैं। संपादकीय पृष्ठ पर सजगता और ज्ञान-बोध को प्रमुखता दी गई है।

(ख) सूचनाओं का पृष्ठ एवं स्थान
(i) दैनिक भास्कर-सूचनाओं का केंद्र पृष्ठ 1, 4, 5, 10 और 14 हैं। पृष्ठ 12 और 13 खेल-समाचारों की सूचना के केंद्र हैं। इसके मुख्य आकर्षण वूल्मर हत्याकांड पर रचित रिपोर्ट, रामनवमी पर प्रस्तुत पृष्ठ, नॉलेज और स्टाइल पृष्ठ हैं। इसके अतिरिक्त रस रंग है। नगर से संबंधित सूचनाएँ और खबरें देने के लिए चार पृष्ठ का पत्र है।

(ii) पंजाब केसरी-सूचनाओं का केंद्र पृष्ठ 1, 3, 5, 7 और 14 हैं। पृष्ठ 12 और 13 खेल-समाचारों से भरे हुए हैं। राज्य समाचार, विश्व आलोकन, कारोबार और दर्पण से संबंधित पृष्ठ आकर्षक हैं। इसके अतिरिक्त रविवारीय अंक तथा जिंदगी है। नगर से संबंधित चार पृष्ठ का समाचार-पत्र है।

(iii) दैनिक जागरण-सूचनाओं का केंद्र पृष्ठ 1, 2, 5, 7, 9 और 10 हैं। पृष्ठ 12, 13, 14 पर खेल-समाचार हैं। पृष्ठ 3 पर राज्य से संबंधित समाचार है। पृष्ठ 7 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों से संबंधित है, पृष्ठ 10 अर्थजगत से संबंधित है और इसमें पृष्ठ 11 पर भरोसा है। इसके अतिरिक्त ‘जागरण सिटी’ और ‘यात्रा’ से संबंधित 8 पृष्ठ अतिरिक्त हैं।

(ग) समाचार की प्रस्तुति-तीनों समाचार-पत्रों में समाचार प्रस्तुति सहज-स्वाभाविक रूप से की गई है। उनमें कोई विशेष अंतर नहीं है। सभी की तथ्यात्मकता के लिए रंग-बिरंगे चित्रों का प्रयोग किया गया है। सभी ने विभिन्न एजेंसियों से समाचार प्राप्त किए हैं और अपने-अपने संवाददाताओं से प्राप्त समाचारों को प्रकाशित किया है।

(घ) तीनों समाचार-पत्रों में खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है। तद्भव शब्दों के साथ तत्सम शब्दावली का प्रयोग है पर वे शब्द कठिन नहीं हैं। वाक्य बहुत लंबे-लंबे नहीं हैं। उनमें गतिशीलता है। भाषा-शैली भारी-भरकम नहीं है।

प्रश्न 4.
अपने विद्यालय और मुहल्ले के आसपास की समस्याओं पर नजर डालें; जैसे पानी की कमी, बिजली की कटौती, खराब सड़कें, सफ़ाई की दुर्व्यवस्था। इनमें से किन्हीं दो विषयों पर रिपोर्ट तैयार करें और अपने शहर के अख़बार में भेजें।
उत्तर:
(क) पानी की कमी-जून का महीना है। सूर्य देवता दिन-भर आसमान से धूप बरसाते हैं और नगर में जनता पानी के लिए तरस रही है। पूरा सप्ताह बीत गया है कि नगर के किसी भी क्षेत्र में चौबीस घंटे में दो घंटे से अधिक पानी नलों से नहीं टपका। . जब एक-दो घंटों के लिए पानी आता भी है वह इतना कम होता है कि सारे दिन की आवश्यकता के लिए उसे इकट्ठा ही नहीं किया जा सकता। संपन्न और मध्यवर्गीय लोगों ने बिजली की मोटरें लगवा रखी हैं। सारा पानी तो वे ही खींच लेती हैं। पीने के लिए भी पानी प्राप्त नहीं हो पाता। कुछ बस्तियों ने निगम में टैंकरों से पानी भिजवाना आरंभ अवश्य किया है पर वहाँ भी एक अनार सौ बीमार वाली बात हो रही है। हाँ, इतना अवश्य है कि पीने के लिए एक-दो बाल्टी पानी मिल जाता है। इतनी गर्मी में नहाना भी कठिन हो गया है। घरों में लगे पौधे तो सूख ही गए हैं।

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(ख) बिजली की कटौती-आजकल इतनी गर्मी है कि दोपहर के समय घर से बाहर पैर निकालना भी कठिन लगता है और ऊपर से बिजली की भारी कटौती ने नाक में दम कर दिया है। रात भर बिजली नहीं आती। टपटप गिरता पसीना और मच्छरों की धूं-धूं से सारा नगर परेशान है। दिन भर परिश्रम करने वाले लोग कुछ घंटे सोकर थकान दूर करना चाहते हैं। पर बिजली की .. कटौती के कारण वे ऐसा कर नहीं पाते। जिन लोगों ने इंवर्टर लगाए हुए हैं वे भी कुछ घंटे बाद दाएँ-बाएँ देखने के लिए मजबूर.. हो जाते हैं। क्योंकि बिजली के लंबे कट के कारण बेकार हो जाते हैं। ए० सी० और कूलर तो दिखावे के लिए ही रह गए हैं। फ्रिज न चल पाने के कारण रसोई का बहुत-सा सामान रोज ही खराब हो जाता है। रात के समय सड़कें और गलियाँ अंधकार में डूबी रहती हैं। इससे दुर्घटनाएँ तो होती ही हैं साथ ही चोरियों की संख्या बढ़ गई है।

(ग) खराब सड़कें-कहने को तो हमारे नगर को राज्य के सबसे सुंदर नगरों में गिना जाता है पर वह तब तक ही सुंदर है जब तक जाए। हमारे नगर की 80% सड़कें टूटी-फूटी हैं। रेलवे रोड पर तो इतने गहरे गड्ढे हैं कि उनमें ट्रक-बस तक उछल जाते हैं। उन्हें भी धीमी गति से चलना पड़ता है। स्कूटर-मोटरसाइकिल वाले तो वहाँ प्राय: गिरते ही रहते हैं। पता नहीं, कितने बेचारे अब तक इस कारण जख्मी होकर अपना इलाज करवा रहे हैं। बारिश आ जाने के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाता है तब तो समस्या और भी बढ़ जाती है। पता ही नहीं लगता कि कहाँ सड़क टूटी हुई और कहाँ नहीं। हमारे नगर की सड़कें तो बिलकुल चंद्रमा की सतह जैसी गड्ढों से भरी हुई हैं। कॉर्पोरेशन इसे हर वर्ष दिखावे के लिए ठीक कराती है, इसके गड्ढों को भरवाती है जो एक-डेढ़ महीने बाद पहले जैसे ही हो जाते हैं। पता नहीं राज्य सरकार कब जागेगी और हमारी सड़कों को फिर से बनवाएगी।

(घ) सफ़ाई की दुर्व्यवस्था-मैं जिस सरकारी विद्यालय में पढ़ती हूँ वहाँ शायद सफ़ाई हुए महीनों बीत चुके हैं। कहते हैं कि हमारे स्कूल में दो सफाई कर्मचारी हैं पर मैंने तो उन्हें कभी नहीं देखा। पता नहीं वे कब आते हैं, कब सफ़ाई करते हैं? विद्यालय में एक छोटा-सा शौचालय है जिससे उठने वाली दुर्गंध विद्यालय के मैदान में दूर तक सदा फैली रहती है। शौचालय में नाक को बंद करके पाँव रखना भी साहस का काम लगता है। वहाँ जाने की ज़रा भी इच्छा नहीं होती पर मजबूरी में कभी-कभी जाना ही पड़ता है। वहाँ जाने पर तो मितली-सी होती है। विद्यालय के सारे कमरे गंदे हैं। छतें और दीवारें मकड़ी के जालों से भरे हैं।

सभी जगह धूल की मोटी परत जमी हुई है। जब हम अपनी अध्यापिका से सफ़ाई के बारे में कहती हैं तो झट से कहती हैं-‘यह मेरा काम नहीं है। तुम पढ़ो। उस तरफ मत ध्यान दो।’ पर हम क्या करें? गंदगी में हमारा मन बैठने को नहीं करता। सफ़ाई में भगवान बसते हैं। हमारे विद्यालय से तो भगवान कोसों दूर रहते होंगे। पता नहीं हमारे प्रधानाध्यापक का ध्यान इस ओर कब जाएगा?

प्रश्न 5.
किसी क्षेत्र विशेष से जुड़े व्यक्ति से साक्षात्कार करने के लिए प्रश्न-सूची तैयार कीजिए, जैसे
• संगीत/नृत्य
• चित्रकला
• शिक्षा
• अभिनय
• साहित्य
• खेल
उत्तर:
एक साहित्यकार से साक्षात्कार करने के लिए प्रश्नों की सूची-..
(i) आप साहित्य किसे मानते हैं ?
(ii) आप साहित्य की किस विधा से जुड़कर अपने भाव व्यक्त करते हैं ?
(iii) कविता क्या है?
(iv) आपने कविता को ही अन्य विधाओं की अपेक्षा अधिक महत्व क्यों दिया?
(v) आपकी कविता के सामान्य रूप से विषय कौन-कौन से होते हैं ?
(vi) क्या आप फरमाइशी कविता भी लिखते हैं ?
(vii) फ़रमाइशी कविता लिखने में क्या कठिनाइयाँ आती हैं ?
(viii) आप छंदरहित कविता ही क्यों लिखते हैं ?
(ix) पुरानी कविता से आपकी कविता किस आधार पर भिन्न है ? ….
(x) क्या प्रकृति ने आपकी कविता को प्रभावित किया है ?
(xi) प्रकृति का कौन-सा रूप आपको सबसे अधिक प्रभावित करता है?
(xi) आप अपनी कविता से समाज को क्या देना चाहते हैं ?
(xiii) क्या आपको कोई सरकारी/गैर-सरकारीपुरस्कार प्राप्त हुआ है ?
(xiv) आपकी कितनी पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं ?
(xv) आप अपने पाठकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

प्रश्न 6.
आप अख़बार के मुख पृष्ठ पर कौन-से छह समाचार शीर्षक सुर्खियाँ (हेडलाइन) देखना चाहेंगे? उन्हें लिखिए।
उत्तर: :
(i) राजनीति-देश के नेता भ्रष्टाचार से बहुत दूर।
(ii) समाज-कल्याण-पूँजीपतियों ने जिम्मा उठाया अनाथ बच्चों के पालन-पोषण का।
(iii) मानवीयता-आतंकवादी ने मौत के मुंह से बचाया एक बच्चे को।
(iv) खेलकूद-भारत विश्व क्रिकेट कप के फाइनल में।
(v) समाज की समस्याएँ-देश से बेरोजगारी की समस्या समाप्त।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर: एक-दो पंक्तियों में दीजिए

प्रश्न 1.
मुद्रण माध्यम के अंतर्गत कौन-कौन से माध्यम आते हैं ?
उत्तर:
मुद्रण माध्यम के अंतर्गत समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें आदि आते हैं।

प्रश्न 2.
फ्लैश या ब्रेकिंग न्यूज़ का क्या आशय है?
उत्तर::
जब कोई विशेष समाचार सबसे पहले दर्शकों तक पहुँचाया जाता है तो उसे फ्लैश अथवा ब्रेकिंग न्यूज़ कहते हैं।

प्रश्न: 3.
ड्राई एंकर क्या है?
उत्तर:
ड्राई एंकर वह होता है जो समाचार के दृश्य नज़र नहीं आने तक दर्शकों को रिपोर्टर से मिली जानकारी के आधार पर समाचार

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प्रश्न 4.
फोन-इन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
एंकर का घटनास्थल पर उपस्थित रिपोर्टर से फ़ोन के माध्यम से घटित घटनाओं की जानकारी दर्शकों तक पहुँचाना फ़ोन-इन कहलाता है।

प्रश्न 5.
लाइव से क्या आशय है?
उत्तर:
किसी समाचार का घटनास्थल से दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण लाइव कहलाता है।

प्रश्न 6.
जनसंचार के प्रमुख माध्यम कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
जनसंचार के प्रमुख माध्यम समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ

प्रश्न 7.
इंटरनेट पर समाचार से संबंधित क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं ?
उत्तर:
इंटरनेट पर समाचार पढ़ने, सुनने और देखने की तीनों सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 8.
मुद्रित माध्यमों की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
मुद्रित माध्यमों को सुरक्षित रख सकते हैं। इन्हें जब चाहे और जैसे चाहे पढ़ा जा सकता है। इनसे लिखित भाषा का विस्तार होता है। इसमें गूढ़ और गंभीर विषयों पर लिखा जा सकता है।

प्रश्न 9.
रेडियो कैसा जनसंचार माध्यम है ? इसमें किसका मेल होता है?
उत्तर:
रेडियो श्रव्य माध्यम है। इसमें ध्वनि, स्वर और शब्दों का मेल होता है।

प्रश्न 10.
रेडियो समाचार-लेखन के लिए आवश्यक बिंदु क्या हैं?
उत्तर::
रेडियो समाचार की समाचार कॉपी साफ़-सुथरी और टंकित होनी चाहिए।

प्रश्न 11.
दूरदर्शन जनसंचार का कैसा माध्यम है ?
उत्तर:
दूरदर्शन जनसंचार माध्यमों में देखने और सुनने का माध्यम है।

प्रश्न 12.
रेडियो और दूरदर्शन समाचार की भाषा-शैली कैसी होनी चाहिए?
उत्तर:
तर भाषा अत्यंत सरल होनी चाहिए। वाक्य छोटे, सीधे और स्पष्ट हों। भाषा प्रवाहमयी तथा भ्रामक शब्दों से रहित हो। एक वाक्य में एक
बात कही जाए। मुहावरों, सामाजिक भाषा, अप्रचलित शब्दों, आलंकारिक शब्दावली आदि प्रयोगों से बचना चा

प्रश्न 13.
इंटरनेट पत्रकारिता को अन्य किन नामों से जाना जाता है?
उत्तर:
इंटरनेट पत्रकारिता को ऑन लाइन पत्रकारिता, साइबर पत्रकारिता तथा वेब पत्रकारिता के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 14.
इंटरनेट पत्रकारिता क्या है?
उत्तर:
इंटरनेट पर समाचार-पत्रों को प्रकाशित करना तथा समाचारों का आदान-प्रदान करना इंटरनेट पत्रकारिता कहलाता है।

प्रश्न 15.
इंटरनेट पत्रकारिता के कितने दौर हुए हैं?
उत्तर:
इंटरनेट पत्रकारिता के तीन दौर हुए हैं। पहला दौर 1982 से 1992 तक, दूसरा दौर 1993 से 2001 तक और तीसरा और 2002 से शुरू हुआ है।

प्रश्न 16.
भारत में इंटरनेट का आरंभ कब हुआ था?
उत्तर:
भारत में इंटरनेट का आरंभ सन 1993 में हुआ था।

प्रश्न 17.
वेबसाइट पर विशुद्ध इंटरनेट पत्रकारिता आरंभ करने का श्रेय भारत में किसे दिया जाता है?
उत्तर:
भारत में इंटरनेट पर विशुद्ध पत्रकारिता आरंभ करने का श्रेय ‘तहलका डॉट काम’ को दिया जाता है।

प्रर 18.
इंटरनेट पत्रकारिता आजकल बहुत लोकप्रिय क्यों है?
उत्तर:
इंटरनेट पत्रकारिता से न केवल समाचारों का संप्रेषण, पुष्टि, सत्यापन होता है बल्कि समाचारों के बैकग्राउंडर तैयार करने में तत्काल सहायता मिलती है। इसलिए यह आजकल बहुत लोकप्रिय है।

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प्रश्न 19.
पत्रकारीय लेखन में किस बात का सबसे अधिक ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:
पत्रकारीय लेखन आम लोगों को ध्यान में रखकर सीधी-सादी आम बोलचाल की भाषा में होना चाहिए।

प्रश्न 20.
उलटा पिरामिड-शैली क्या है?
उत्तर:
इसमें सबसे पहले महत्वपूर्ण तथ्य तथा जानकारियाँ दी जाती हैं तथा बाद में कम महत्वपूर्ण बातें देकर समाप्त कर दिया जाता है। इसकी सूरत उलटे पिरामिड जैसी होने के कारण इसे उलटा पिरामिड-शैली कहते हैं।

प्रश्न 21.
पूर्णकालिक पत्रकार किसे कहते हैं?
उत्तर:
पूर्णकालिक पत्रकार किसी समाचार-संगठन में काम करने वाला नियमित वेतन भोगी कर्मचारी होता है।

प्रश्न 22.
अंशकालिक पत्रकार किसे कहते हैं? (C.B.S.E., 2018)
उत्तर:
अंशकालिक पत्रकार वह होता है जो किसी समाचार-संगठन के लिए एक निश्चित मानदेय के आधार पर काम करता है।

प्रश्न 23.
फ्रीलांसर पत्रकार से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
फ्रीलांसर पत्रकार किसी समाचार-पत्र से संब

प्रश्न 24.
समाचार-लेखन के कितने ककार हैं? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
समाचार-लेखन के छह ककार हैं। ये हैं-क्या, कौन, कब, कहाँ, कैसे और क्यों।

प्रश्न 25.
विचारपरक लेखन में क्या-क्या आता है?
उत्तर:
विचारपरक लेखन में लेख, टिप्पणियों, संपादकीय तथा स्तंभ लेखन आता है।

प्रश्न 26.
उलटा पिरामिड में समाचार का ढाँचा कैसा होता है?
उत्तर:
इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य अथवा सूचना को सबसे पहले लिखा जाता है और इसके बाद घटते हुए महत्वक्रम में लिखा जाता है।

प्रश्न 27.
‘क्लाईमेक्स’ का क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
समाचार के अंतर्गत किसी घटना का नवीनतम और महत्वपूर्ण पक्ष क्लाईमेक्स कहलाता है।

प्रश्न 28.
फ़ीचर किसे कहते हैं ?
उत्तर:
किसीसुव्यवस्थित, सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ लेखन को फ़ीचर कहते हैं, जिसके माध्यम से सूचनाओं के साथ-साथ मनोरंजन पर भी ध्यान दिया जाता है।

प्रश्न 29.
विशेष रिपोर्ट क्या होती है?
उत्तर:
किसी घटना, समस्या या मुद्दे की गहन छानबीन और विश्लेषण को विशेष रिपोर्ट कहते हैं।

प्रश्न 30.
संपादकीय क्या है?
उत्तर:
वह लेख जिसमें किसी मुद्दे के प्रति समाचार-पत्र की अपनी राय प्रकट होती है, संपादकीय कहलाता है।

प्रश्न 31.
विशेष लेखन क्या है?
उत्तर:
किसी विशेष विषय पर सामान्य लेखन से डटकर लिखा गया लेख विशेष लेखन कहलाता है।

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प्रश्न 32.
बीट रिपोर्टिंग क्या होती है ?
उत्तर:
जो संवाददाता केवल अपने क्षेत्र विशेष से संबंधित रिपोर्टों को भेजता है, वह बीट रिपोर्टिंग कहलाती है।

प्रश्न 33.
व्यापार-कारोबार की रिपोर्टिंग की भाषा कैसी होनी चाहिए?
उत्तर:
व्यापार-कारोबार से संबंधित रिपोर्टिंग में व्यापार जगत में प्रचलित शब्दावली का प्रयोग होना चाहिए।

प्रश्न 34.
समाचार-पत्रों में विशेष लेखन के क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
समाचार-पत्रों में विशेष लेखन के क्षेत्र व्यापार जगत, खेल, विज्ञान, कृषि, मनोरंजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, अपराध, कानून आदि हैं।

प्रश्न 35.
समाचार-पत्रों के लिए सूचनाएँ प्राप्त करने के स्त्रोत कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
समाचार-पत्रों के लिए सूचनाएँ विभिन्न मंत्रालयों, प्रेस कॉफ्रेंसों, विज्ञप्तियों, साक्षात्कारों, सर्वे, जाँच-समितियों, संबंधित विभागों, इंटरनेट, विशिष्ट व्यक्तियों, संस्थाओं आदि से प्राप्त की जाती हैं।

प्रश्न 36.
भारत में विज्ञान के क्षेत्र में कौन-सी संस्थाएँ कार्य कर रही हैं ?
उत्तर:
भारत में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, नेशनल रिसर्च डेवल्पमेंट कार्पोरेशन, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भाभा परमाणु संस्थान, राष्टीय भौतिकी शोध संस्थान आदि संस्थाएं विज्ञान के क्षेत्र में काम कर रही हैं।

प्रश्न 37.
पर्यावरण से संबंधित पत्रिकाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण एबस्ट्रेक्ट, डाउन टू अर्थ, नेशनल ज्योग्रॉफ़ी।

प्रश्न 38.
खोजी पत्रकारिता से क्या आशय है ?
उत्तर:
खोजी पत्रकारिता में पत्रकार मौलिक शोध और छानबीन के द्वारा ऐसी सूचनाएँ तथा तथ्य उजागर करता है जो सार्वजनिक रूप
से पहले उपलब्ध नहीं थे।

प्रश्न 39.
भारत में पहली छापाखाना कहाँ और कब खुला था?
उत्तर:
भारत में पहला छापाखाना गोआ में सन 1556 ई० में खुला था।

प्रश्न 40.
पत्रकारीय लेखन में पत्रकार को किन दो बातों से बचना चाहिए?
उत्तर:
पत्रकारीय लेखन में पत्रकार को कभी भी लंबे-लंबे वाक्य नहीं लिखने चाहिए। उसे किसी भी अवस्था में अनावश्यक विशेषणों और उपमाओं का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए।

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प्रश्न 41.
मुद्रण का प्रारंभ कहाँ से माना जाता है?
उत्तर:
मुद्रण का प्रारंभ चीन से माना जाता है।

प्रश्न 42.
वर्तमान छापेखाने के आविष्कार का श्रेय किसे है?
उत्तर:
वर्तमान छापेखाने का श्रेय जर्मनी के गुटेनबर्ग को है।

प्रश्न 43.
जनसंचार का मुद्रित माध्यम किनके लिए किसी काम का नहीं है?
उत्तर:
निरक्षरों के लिए जनसंचार का मुद्रित माध्यम किसी काम का नहीं है।

प्रश्न 44.
साप्ताहिक पत्रिका सप्ताह में कितनी बार प्रकाशित होती है?
उत्तर:
साप्ताहिक पत्रिका सप्ताह में एक बार प्रकाशित होती है।

प्रश्न 45.
रेडियो में क्या सुविधा नहीं है?
उत्तर:
रेडियो में अखबार की तरह पीछे लौटकर सुनने की सुविधा नहीं है।

प्रश्न 46.
आजकल टेलीप्रिंटर पर एक सेकेंड में कितने शब्द भेजे जा सकते हैं?
उत्तर:
आजकल टेलीप्रिंटर पर एक सेकेंड में 56 किलोबाइट अर्थात लगभग 70 हज़ार शब्द भेजे जा सकते हैं।

प्रश्न 47.
नई वेब भाषा को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
नई वेब भाषा को ‘एच०टी०एम०एल०’ अर्थात हाइपर टेक्स्ट मार्डअप लैंग्वेज कहते हैं।

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प्रश्न 48.
भारत की प्रमुख वेबसाइटें कौन-सी हैं?
उत्तर:
भारत की प्रमुख वेबसाइटें रीडिफ डॉटकॉम, इंडिया इंफोलाइन, सीफी, हिंदू तहलका डॉटकॉम आदि हैं।

प्रश्न 49.
हिंदी की सर्वश्रेष्ठ इंटरनेट पत्रकारिता की साइट कौन-सी है?
उत्तर:
पत्रकारिता के लिहाज से हिंदी की सर्वश्रेष्ठ इंटरनेट साइट बी०बी०सी० है।

प्रश्न 50.
इंटरनेट पर उपलब्ध हिंदी का वह कौन-सा समाचार-पत्र है जो प्रिंट रूप में नहीं है ?
उत्तर:
प्रभासाक्षी’ नामक समाचार-पत्र केवल इंटरनेट पर उपलब्ध है।

प्रश्न 51.
उलटा पिरामिड में समाचार का ढाँचा कैसा होता है?
उत्तर:
उलटे पिरामिड ढाँचे में सबसे पहले इंट्रो या मुखड़ा, फिर बाडी और अंत में समापन होता है।

प्रश्न 52.
उलटा पिरामिड-शैली का प्रयोग कब से शुरू हुआ था?
उत्तर:
उलटा पिरामिड-शैली का प्रयोग उन्नीसवीं सदी के मध्य से शुरू हुआ था।

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प्रश्न 53.
समाचार-पत्रों में छपने वाले फ़ीचरों की शब्द-संख्या कितनी होती है?
उत्तर:
समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में छपने वाले फ़ीचरों की शब्द-संख्या 250 शब्दों से लेकर 2000 होती है।

प्रश्न 54.
एक अच्छे और रोचक फ़ीचर के साथ क्या होना आवश्यक है?
उत्तर:
एक अच्छे और रोचक फ़ीचर के साथ फोटो, रेखांकन, ग्राफिक्स आदि का होना आवश्यक है।

प्रश्न 55.
समाचार-पत्र कैसा माध्यम है?
उत्तर:
समाचार-पत्र केवल छपे हुए शब्दों का माध्यम है।

प्रश्न 56.
जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम कौन-सा है ?
उत्तर:
मुद्रित माध्यम जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम है।

प्रश्न 57.
यूरोप में छापेखाने की महत्वपूर्ण भूमिका कब रही?
उत्तर:
यूरोप में पुनर्जागरण के ‘रेनसां’ के आरंभ में छापेखाने की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी।

प्रश्न 58.
मुद्रित माध्यमों की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
उत्तर:
मुद्रित माध्यमों की सबसे बड़ी विशेषता उसमें छपे हुए शब्दों के स्थायीपन की है। इन्हें जब जैसे चाहे पढ़ सकते हैं।

प्रश्न 59.
मुद्रित माध्यम के अंतर्गत समाचार-पत्र में क्या कमियाँ हैं?
उत्तर:
इसे निरक्षर नहीं पढ़ सकते। इसमें तुरंत घटी हुई घटनाएँ प्रस्तुत नहीं की जा सकती।

प्रश्न 60.
रेडियो प्रसारण की क्या कमियाँ हैं?
उत्तर:
रेडियों पर प्रसारण के समय की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। कार्यक्रम आरंभ से सुनना पड़ता है। कार्यक्रम के दौरान कहीं जा नहीं सकते। उसी कार्यक्रम को फिर से नहीं सुन सकते।

प्रश्न 61.
समाचार-पत्रों की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
समाचार-पत्र जनता को समाचार देकर उन्हें जागरूक, शिक्षित और सचेत करते हैं। इनसे पाठकों का मनोरंजन भी होता है। ये लोकतंत्र के पहरेदार माने जाते हैं। ये जनमत जगाने का कार्य भी करते हैं।
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प्रश्न 62.
पत्रकारीय लेखन का संबंध किनसे होता है?
उत्तर:
पत्रकारीय लेखन का संबंध देश-विदेश में घटित विभिन्न घटनाओं, समस्याओं और मुद्दों से होता है।

प्रश्न 63.
संपादक के नाम पत्र कौन लिखता है?
उत्तर:
संपादक के नाम पत्र समाचार-पत्र को पढ़ने वाले पाठक लिखते हैं। वे इन पत्रों में विभिन्न मुद्दों और समस्याओं पर अपने विचार व्यक्त करते हैं।

प्रश्न 64.
समाचार-पत्र में साक्षात्कार का क्या महत्व है?
उत्तर:
समाचार-पत्र में साक्षात्कार का बहुत महत्व है। साक्षात्कार के माध्यम से ही पत्रकार अपने समाचार-पत्र के लिए समाचार, फीचर, लेख, विशेष रिपोर्ट आदि तैयार कर सकता है।

प्रश्न 65.
स्तंभ-लेखन क्या है?
उत्तर:
स्तंभ लेखन विचारपरक लेखन होता है। स्तंभकार समसामयिक विषयों पर नियमित रूप से अपने समाचार-पत्र के लिए लिखते हैं।

प्रश्न 66.
बीट किसे कहते हैं?
उत्तर:
समाचार-पत्र में राजनीति, आर्थिक, खेल, अपराध, फ़िल्म, कृषि आदि से संबंधित समाचार होते हैं। जो पत्रकार जिस क्षेत्र से संबंधित समाचार लिखता है, वह उसकी बीट होती है।

प्रश्न 67.
‘डेस्क’ किसे कहते हैं ?
उत्तर:
समाचार-पत्रों में किसी विशेष लेखन के लिए कार्य करने वाले पत्रकारों के समूह के निश्चित समय को डेस्क कहते हैं, जैसे खेल डेस्क।

प्रश्न 68.
व्यापार से जुड़ी खबरों की शब्दावली कैसी होती हैं?
उत्तर:
व्यापार से जुड़ी खबरों में व्यापार जगत से संबंधित तेजड़िए, घाटा, गिरावट, आवक आदि शब्द होते हैं।

प्रश्न 69.
कारोबारी जगत की खबरें किस शैली में लिखी जाती हैं ?
उत्तर:
कारोबारी जगत की खबरें उलटा पिरामिड-शैली में लिखी जाती हैं।

प्रश्न 70.
भारत के लोकप्रिय हिंदी दैनिक समाचार-पत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर:
दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी, नई दुनिया, नवभारत टाइम्स आदि।

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प्रश्न 71.
बीट से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
समाचार-पत्र या अन्य समाचार माध्यमों द्वारा अपने संवाददाता को किसी क्षेत्र या विषय यानी बीट की दैनिक रिपोर्टिंग की ज़िम्मेदारी दी जाती है। यह एक तरह के रिपोर्टर का कार्यक्षेत्र निश्चित करना है।

प्रश्न 72.
सीधा प्रसारण (लाइव) कैसा होता है ?
उत्तर:
रेडियो और टेलीविज़न में जब किसी घटना या कार्यक्रम को सीधा होते हुए दिखाया या सुनाया जाता है तो उस प्रसारण को सीधा प्रसारण (लाइव) कहते हैं। रेडियो में इसे आँखों देखा हाल भी कहते हैं जबकि टेलीविज़न के परदे पर सीधे प्रसारण के समय लाइव लिख दिया जाता है। इसका अर्थ यह है कि उस समय आप जो भी देख रहे हैं, वह बिना किसी संपादकीय काट-छाँट के सीधे आप तक पहुँच रहा है।

प्रश्न 73.
स्टिंग आपरेशन किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब किसी टेलीविजन चैनल का पत्रकार छुपे टेलीविज़न कैमरे के ज़रिए किसी गैर-कानूनी, अवैध और असामाजिक गतिविधियों को फ़िल्माता है और फिर उसे अपने चैनल पर दिखाता है तो इसे स्टिंग ऑपरेशन कहते हैं। कई बार चैनल ऐसे आपरेशनों को गोपनीय कोड दे देते हैं। जैसे आपरेशन दुर्योधन या चक्रव्यूह। हाल के वर्षों में समाचार चैनलों पर सरकारी कार्यालयों आदि में भ्रष्टाचार के खुलासे के … लिए स्टिंग आपरेशनों के प्रयोग की प्रवृत्ति बढ़ी है। .

प्रश्न 74.
सूचनाओं के विभिन्न स्रोत कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
(i) मंत्रालय के सूत्र
(ii) प्रेस कॉफ्रेंस और विज्ञप्तियाँ
(iii) साक्षात्कार
(iv) सर्वे
(v) जाँच समितियों की रिपोर्ट्स
(vi) क्षेत्र विशेष में सक्रिय संस्थाएँ और व्यक्ति
(vii) संबंधित विभागों और संगठनों से जुड़े व्यक्ति
(viii) इंटरनेट और दूसरे संचार के माध्यम
(ix) स्थायी अध्ययन प्रक्रिया

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प्रश्न 75.
विज्ञान के क्षेत्र में काम कर रही भारत की पाँच संस्थाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
(ii) मिनरल्स एंड मेटल्स कार्पोरेशन (MMTC)
(iii) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
(iv) नेशनल रिसर्च डेवलपमेंट कार्पोरेशन (NRDC)
(v) केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL)

प्रश्न 76.
पर्यावरण पर छपने वाली पत्रिकाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) पर्यावरण एबस्ट्रेक्ट
(ii) एन्वायरो न्यूज
(iii) डाउन टू अर्थ
(iv) जू प्रिंट
(v) सैंकुचरी
(iv) नेशनल ज्योग्रॉफ़ी

प्रश्न 77.
व्यावसायिक शिक्षा के दस विभिन्न संस्थानों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान
(ii) भारतीय प्रबंधन संस्थान
(iii) भारतीय विज्ञान संस्थान
(iv) भारतीय सूचना प्रौद्योगिक एवं प्रबंधन संस्थान
(v) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान
(vi) राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान
(vi) मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलोजी
(viii) राष्ट्रीय फ़ैशन टेक्नॉलोजी संस्थान
(ix) राष्ट्रीय डिफैंस अकादमी
(x) अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान

प्रश्न 78.
अपडेटिंग से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
विभिन्न वेबसाइटों पर उपलब्ध सामग्री को समय-समय पर संशोधित और परिवर्धित किया जाता है। इसे ही अपडेटिंग कहते हैं।

प्रश्न 79.
ऑडियंस किसे कहते हैं?
उत्तर:
जनसंचार माध्यमों के साथ जुड़ा एक विशेष शब्द, जिसका प्रयोग जनसंचार माध्यमों के दर्शकों, श्रोताओं और पाठकों के लिए सामूहिक रूप से होता है।

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प्रश्न 80.
समाचार-पत्रों में ऑप-एड क्या होता है?
उत्तर:
यह समाचार-पत्रों में संपादकीय पृष्ठ के सामने प्रकाशित होने वाला वह पन्ना है जिसमें विश्लेषण, फ़ीचर, स्तंभ, साक्षात्कार, विचारपूर्ण टिप्पणियाँ आदि प्रकाशित की जाती हैं। हिंदी के बहुत कम समाचार-पत्रों में ऑप-एड पृष्ठ प्रकाशित होता है, लेकिन अंग्रेजी के हिंदू और इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबारों में ऑप-एड पृष्ठ देखा जा सकता है।

प्रश्न 81.
डेडलाइन किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी समाचार को प्रकाशित या प्रसारित करने के लिए उसके समाचार माध्यमों तक पहुँचने की आखिरी समय-सीमा को डेडलाइन कहते हैं। अगर कोई समाचार डेडलाइन निकलने के बाद मिलता है, तो आमतौर पर उसके प्रकाशित या प्रसारित होने की संभावना कम हो जाती है।

प्रश्न 82.
न्यूज़पेग क्या होता है?
उत्तर:
न्यूज़पेग का अर्थ है ‘किसी मुद्दे पर लिखे जा रहे लेख या फ़ीचर में उस ताज़ा घटना का उल्लेख, जिसके कारण वह मुद्दा चर्चा में आ गया है। जैसे अगर आप माध्यमिक बोर्ड की परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों के बेहतर हो रहे प्रदर्शन पर एक रिपोर्ट लिख रहे हैं तो उसका न्यूज़पेग सीबीएसई का ताज़ा परीक्षा परिणाम होगा। इसी तरह शहर में महिलाओं के खिलाफ़ बढ़ रहे अपराध पर फ़ीचर का न्यूज़पेग सबसे ताजी वह घटना होगी जिसमें किसी महिला के खिलाफ़ अपराध हुआ हो।

प्रश्न 83.
‘पीत पत्रकारिता’ किसे कहते हैं ? उत्तर: इस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल उन्नीसवीं सदी के
उत्तर:
में अमेरिका में कुछ प्रमुख समाचार-पत्रों के बीच पाठकों को आकर्षित करने के लिए छिड़े संघर्ष के लिए किया गया था। उस समय के प्रमुख समाचारों ने पाठकों को लुभाने के लिए झूठी अफ़वाहों, व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोपों, प्रेम-संबंधों, भंडाफोड़ और फ़िल्मी गपशप को समाचार की तरह प्रकाशित किया। उसमें सनसनी फैलाने का तत्व अहम था।

प्रश्न 84.
‘पेज थ्री पत्रकारिता’ कैसी पत्रकारिता है? (C.B.S.E., 2018)
उत्तर:
पेज थ्री पत्रकारिता का तात्पर्य ऐसी पत्रकारिता से है जिसमें फ़ैशन, अमीरों की पार्टियों, महफ़िलों और जाने-माने लोगों के निजी जीवन के.. बारे में बताया जाता है। ऐसे समाचार आमतौर पर समाचार-पत्रों के पृष्ठ तीन पर प्रकाशित होते रहे हैं, इसलिए इसे ‘पेज थ्री पत्रकारिता’ कहते हैं। हालाँकि अब यह जरूरी नहीं है कि यह पृष्ठ तीन पर ही प्रकाशित होती हो लेकिन इस पत्रकारिता के तहत अब भी जोर उन्हीं विषयों पर होता है।

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प्रश्न 85.
‘फ्रीक्वेंसी मॉड्यूलेशन’ तकनीक क्या है?
उत्तर:
यह रेडियो प्रसारण की एक विशेष तकनीक है जिसमें फ्रीक्वेंसी को मॉड्यूलेट किया जाता है। रेडियो का प्रसारण दो तकनीकों के जरिए होता है जिसमें एक तकनीक एमप्लीच्यूड मॉड्यूलेशन (ए०एम०) है और दूसरा फ्रीक्वेंसी मॉड्यूलेशन (एफ०एम०)। एफ०एम० तकनीक अपेक्षाकृत नई है और इसकी प्रसारण की गुणवत्ता बहुत अच्छी मानी जाती है। लेकिन ए०एम० रेडियो की तुलना में एफ०एम० के प्रसारण का दायरा सीमित होता है।

बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए लघूत्तरात्मक प्रश्नोत्तर प्रश्न

प्रश्न 86.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर: संक्षेप में दीजिए– (B.S.E. A.T. 2008)
(क) ‘प्रिंट माध्यम से आप क्या समझते हैं?
(ख) ‘स्तंभ-लेखन’ का क्या तात्पर्य है?
(ग) संपादकीय में लेखक का नाम क्यों नहीं दिया जाता?
(घ) हिंदी में प्रकाशित होने वाले किन्हीं चार राष्ट्रीय समाचार-पत्रों के नाम लिखिए।
(ङ) ‘अंशकालिक संवाददाता’ किसे कहा जाता है?
उत्तर:
(क) प्रिंट माध्यम से तात्पर्य छपे हुए जनसंचार के माध्यम हैं। इसके अंतर्गत समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें आदि आती हैं।
(ख) स्तंभ-लेखन विचारपरक लेखन होता है। इसके अंतर्गत समसामयिक विषयों पर लिखा जाता है।
(ग) संपादकीय के लेखक का नाम इसलिए नहीं दिया जाता क्योंकि वह समाचार-विशेष का विचार होता है तथा उसे समाचार-पत्र का संपादक लिखता है।
(घ) दैनिक हिंदुस्ताने, नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर।
(ङ) ‘अंशकालिक संवाददाता’ वह होता है जो किसी समाचार-संगठन के लिए एक निश्चित मानदेय के आधार पर काम करता है।

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प्रश्न 87.
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर: दीजिए (Delhi 2008, Set-I)
(क) छापेखाने के आविष्कार का श्रेय किसको है?
(ख) मुद्रित माध्यमों की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
(ग) पत्रकारीय लेखन और साहित्यिक-सृजनात्मक लेखन का अंतर बताइए।
(घ) विशेष रिपोर्ट के दो प्रकारों का उल्लेख कीजिए। (C.B.S.E. Delhi 2013, Set-III)
(ङ) संपादकीय लेखन क्या होता है?
उत्तर:
(क) छापेखाने के आविष्कार का श्रेय जर्मनी के गुटेनबर्ग को दिया जाता है।
(ख) मुद्रित माध्यमों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। ये चिंतन, विचार तथा विश्लेषण का माध्यम होते हैं।
(ग) पत्रकारीय लेखन समाचार-पत्र, पत्रिकाओं के लिए लिखे गए समाचारों, रिपोर्टों आदि से संबंधित होता है तथा यथार्थ पर आधारित होता है। साहित्यिक-सृजनात्मक लेखन कल्पना पर आधारित अथवा वास्तविक जीवन से प्रेरित होकर लिखा गया साहित्य होता है।
(घ) विशेष रिपोर्ट के अंतर्गत आर्थिक, राजनीतिक, खेल, फ़िल्म, कृषि, कानून आदि पर आधारित रिपोर्ट आती हैं।
(ङ) वह लेख जिसमें किसी मुद्दे के प्रति समाचार-पत्र अपनी राय व्यक्त करता है, संपादकीय लेखन कहलाता है।

प्रश्न 88.
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त दीजिए (Delhi 2008, Set-II)
उत्तर:
(क) जनसंचार के मुद्रित माध्यमों की सबसे बड़ी विशेषता क्या है ?
(ख) ‘विशेष रिपोर्ट’ के लेखन में किन बातों पर अधिक बल दिया जाता है ?
(ग) ‘उल्टा पिरामिड-शैली’ क्या होती है ?
(घ) ‘अंशकालिक पत्रकार’ से आप क्या समझते हैं ?
(ङ) समाचार और फ़ीचर के बीच के अंतर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
(क) जनसंचार के मुद्रित माध्यमों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है तथा जब चाहे, जैसे चाहे, पढ़ा जा सकता है।
(ख) विशेष रिपोर्ट पूरी तरह से तथ्यों पर आधारित होती है और गहरी छानबीन, विश्लेषण तथा व्याख्या का परिणाम होती है।
(ग) इसमें पहले महत्वपूर्ण तथ्य तथा बाद में कम महत्वपूर्ण बातें दी जाती हैं।
(घ) जो पत्रकार किसी समाचार-पत्र के लिए एक निश्चित मानदेय पर काम करता है, वह अंशकालिक पत्रकार होता है।
(ङ) समाचार पाठक को केवल तत्कालीन घटनाओं से परिचित कराता है किंतु फ़ीचर तत्कालीन घटनाओं से परिचित कराने के साथ-साथ पाठकों को शिक्षित तथा मनोरंजन भी करता है। इसमें फ़ीचर लेखक का दृष्टिकोण भी स्पष्ट होता है।

प्रश्न 89.
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर: दीजिए (Delhi 2008, Set-III)
(क) मुद्रित माध्यमों की किन्हीं दो विशेषताओं को बताइए।
(ख) पत्रकार की लेखन-शैली की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
(ग) ‘विशेष रिपोर्ट’ क्या होती है?
(घ) पत्रकारिता की भाषा में ‘बीट’ किसे कहते हैं ?
(ङ) ‘विशेष लेखन’ के किन्हीं तीन क्षेत्रों का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(क) मुद्रित माध्यम बहुत लंबे समय तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं। पाठक इन्हें अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ सकता है।
(ख) पत्रकार सदा सीधी-सादी और आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग करता है। वह लंबे वाक्य नहीं लिखता। वह अनावश्यक विशेषणों आदि का भी प्रयोग नहीं करता है।
(ग) विशेष रिपोर्ट किसी विशेष समस्या, घटना अथवा मुद्दे पर लिखी जाती है। यह अत्यंत गहरी छानबीन, विश्लेषण और व्याख्या का परिणाम होती है। यह तथ्यों पर आधारित होती है।
(घ) पत्रकारिता की भाषा में ‘बीट’ उसे कहते हैं जिस विषय से संबंधित समाचार संकलन के लिए पत्रकार को नियुक्त किया जाता है। ये राजनीतिक, आर्थिक, अपराध, खेल, फ़िल्म, कृषि, विज्ञान आदि विषयों से संबंधित अलग-अलग होती हैं। किसी क्षेत्र से अपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग को अपराध बीट माना जाता है।
(ङ) विशेष लेखन के अनेक क्षेत्र हैं। इनमें प्रमुख हैं आर्थिक विश्लेषण, व्यापार, शिक्षा, विदेश नीति, रक्षा, पर्यावरण, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, मनोरंजन आदि।

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प्रश्न 90.
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर: दीजिए
(क) मुद्रण माध्यम (प्रिंट मीडिया) के अंतर्गत आने वाले दो माध्यमों का उल्लेख कीजिए।
(ख) फ्लैश या ब्रेकिंग न्यूज़ का क्या आशय है?
(ग) व्यापार-कारोबार की भाषा की एक विशेषता लिखिए।
(घ) ‘अंशकालिक पत्रकार’ से आप क्या समझते हैं?
(ङ) ‘विशेषीकृत रिपोर्टिंग’ की एक प्रमुख विशेषता लिखिए।
उत्तर:
(क) मुद्रण माध्यम के अंतर्गत समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ आती हैं।
(ख) कोई विशेष समाचार जब सबसे पहले दर्शकों तक पहुँचाया जाता है, तो उसे फ्लैश या ब्रेकिंग न्यूज़ कहते हैं।
(ग) व्यापार-कारोबार की भाषा में व्यापार जगत से संबंधित शब्दावली का अधिक प्रयोग होता है जो सटीक और आकर्षक होती है।
(घ) अंशकालिक पत्रकार वह होता है जो किसी समाचार संगठन के लिए निश्चित मानदेय पर काम करता है।
(ङ) विशेषीकृत रिपोर्टिंग पूरी तरह से तथ्यों पर आधारित होती है।

प्रश्न 91.
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर: दीजिए
(क) प्रसारण के लिए तैयार की जा रही समाचार कॉपी की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
(ख) ‘उल्टा पिरामिड’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
(ग) ‘खोजी पत्रकारिता’ का क्या आशय है?
(घ) ‘फ्रीलांसर’ पत्रकार किसे कहते हैं?
(ङ) वेबसाइट पर विशुद्ध पत्रकारिता शुरू करने का श्रेय किस भारतीय वेबसाइट को जाता है?
उत्तर:
(क) प्रसारण के लिए तैयार की जा रही समाचार कॉपी की भाषा अति सरल होनी चाहिए। एक वाक्य में एक ही बात कही जानी चाहिए।
(ख) उल्टा पिरामिड समाचार-लेखन की एक शैली है। इसमें पहले इंट्रो, मध्य में बाडी तथा अंत में क्लाइमेक्स होता है।
(ग) ‘खोजी पत्रकारिता’ में पत्रकार मौलिक शोध तथा छानबीन के द्वारा ऐसी सूचनाएँ तथा तथ्य उजागर करता है जो सार्वजनिक रूप से पहले उपलब्ध नहीं होतीं।
(घ) ‘फ्रीलांसर पत्रकार’ वह होता है जो किसी भी समाचार-पत्र से अनुबंधित नहीं होता, बल्कि वह विभिन्न समाचार-पत्रों में लिखित लेख के भुगतान के आधार पर लिखता है।
(ङ) वेबसाइट पर विशुद्ध पत्रकारिता शुरू करने का श्रेय भारत में ‘तहलका डॉट कॉम’ को जाता है।

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प्रश्न 92.
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर: दीजिए (C.B.S.E. Sample Paper, 2018)
(क) पेज थ्री पत्रकारिता’ से क्या तात्पर्य है?
(ख) स्तंभ-लेखन से क्या तात्पर्य है? (C.B.S.E. 2013, Set-III)
(ग) ‘डेड लाइन’ क्या है?
(घ) पत्रकारीय लेखन और साहित्यिक सृजनात्मक लेखन में क्या अंतर है?
(ङ) ‘फ़ीचर लेखन’ की भाषा-शैली कैसी होनी चाहिए?
उत्तर:
(क) ‘पेज थ्री’ पत्रकारिता में फ़ैशन, अमीरों की पार्टियों, महफ़िलों और जाने-माने लोगों के निजी जीवन के संबंध में बताया जाता है। ऐसे समाचार पेज थ्री पर प्रकाशित होने के कारण इसे पेज थ्री पत्रकारिता कहते हैं, पर अब सभी समाचार-पत्रों में ऐसा नहीं होता।
(ख) स्तंभ लेखन विचारपरक आलेख होता है जो जनमत के लिए कार्य करता है। इसके विषय का चयन लेखक स्वयं स्थितियों के अनुसार करता है।
(ग) किसी समाचार का प्रकाशित या प्रसारित होने के लिए पहुँचने की अंतिम समय-सीमा ‘डेड लाइन’ कहलाती है। इसके बाद मिले समाचार प्रकाशित अथवा प्रसारित नहीं किए जाते। (घ) पत्रकारीय लेखन का संबंध विभिन्न घटनाओं, समस्याओं और मुद्दों से होता है तथा इसमें तात्कालिकता का ध्यान रखा जाता है। इसकी भाषा आम बोल-चाल की होती है। साहित्यिक सृजनात्मक लेखन कल्पना पर आधारित होता है तथा इसकी भाषा-शैली आलंकारिक होती है।
(ङ) फ़ीचर लेखन की भाषा-शैली सहज, सरल और आम बोलचाल की होती है। (C.B.S.E. Delhi 2009)

प्रश्न 93.
संक्षेप में उत्तर: दीजिए
(क) जनसंचार के प्रचलित माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम क्या है ?
(ख) मुद्रित माध्यम को स्थाई माध्यम क्यों कहा गया है ?
(ग) संपादकीय’ से क्या तात्पर्य है ?
(घ) रिपोर्ट-लेखन की भाषा की दो विशेषताएँ लिखिए।
(ङ) ‘खोजी पत्रकारिता’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
(च) किन्हीं दो मुद्रित माध्यमों के नाम लिखिए।
(छ) भारत में पहला छापाखाना कहाँ और कब खुला ?
(ज) स्तंभ-लेखन’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
(क) जनसंचार के प्रचलित माध्यमों में मुद्रित माध्यम सबसे पुराना है।
(ख) मुद्रित माध्यम को स्थाई माध्यम इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें छपे हुए शब्दों में स्थायीपन होता है, जिन्हें जब चाहे तब आराम से पढ़ सकते हैं। ….
(ग) वह लेख जिसमें किसी मुद्दे पर समाचार-पत्र की अपनी राय व्यक्त होती है, संपादकीय कहलाता है।
(घ) रिपोर्ट-लेखन की भाषा सरल, सहज और आम बोलचाल की होती है।
(ङ) खोजी पत्रकारिता में पत्रकार मौलिक शोध और छानबीन के द्वारा ऐसी सूचनाओं तथा तथ्यों को उजागर करता है जो सार्वजनिक रूप  से उपलब्ध नहीं होते।
(च) समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ।
(छ) भारत में पहला छापाखाना गोवा में सन 1556 ई० में खुला था।
(ज) स्तंभ-लेखन विचारपरक लेख होता है जो जनमत के लिए दर्पण का कार्य करता है। इसके अंतर्गत किसी भी विषय पर विचार व्यक्त किए जा सकते हैं।

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CBSE Class 12 Hindi फीचर लेखन

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CBSE Class 12 Hindi फीचर लेखन

(ख) फ़ीचर लेखन

(जीवन-संदर्भो से जुड़ी घटनाओं और स्थितियों पर) फ़ीचर’ का संबंध खबरों से नहीं होता जबकि इन्हें छपने का स्थान अखबारों में ही प्राप्त होता है। ये निबंध से भिन्न होते हैं। किसी पुस्तक को पढ़कर, आँकड़े इकट्ठे करके लेख लिखे जा सकते हैं, पर ‘फ़ीचर’ लिखने के लिए अपने आँख, कान, भावों, अनुभूतियों, मनोवेगों और अन्वेषण का सहारा लेना पड़ता है। फ़ीचर बहुत लंबा नहीं होना चाहिए। लंबा, अरुचिकर और भारी फ़ीचर तो फ़ीचर की मौत है। फ़ीचर को मजेदार, दिलचस्प और दिल पकड़ होना चाहिए। लेख लिखना आसान है पर फ़ीचर लिखना उससे कठिन काम है। – ‘फ़ीचर’ एक प्रकार का गद्यगीत है जो नीरस और गंभीर नहीं हो सकता।

‘फ़ीचर’ ऐसा होना चाहिए जिसे पढ़कर पाठक का हृदय प्रसन्न हो या पढकर दिल में दःख का दरिया बहे। फ़ीचर का महत्त्व इस बात में है कि में रोचकता और असर से कहे। लेख हमें शिक्षा देता है, फ़ीचर हमारा मनोरंजन करता है। फ़ीचर में हमें अपनी मनोवृत्ति और अपनी समझ के अनुसार किसी विषय का या व्यक्ति का चित्रण करना पड़ता है। इसमें हास्य और कल्पना का विशेष हाथ रहता है। ‘फ़ीचर’ ऐतिहासिक और पौराणिक भी हो सकते हैं।

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हर वर्ष होली, दीवाली, दशहरा, मेलों, राखी आदि के अवसर पर पुरानी बातों को दुहराकर फ़ीचर लिखे जाते हैं। इनमें विचारों की एक बंधी हुई परंपरा का निर्वाह किया जाता है। फ़ीचर तो धोबी, माली, खानसामा, घरेलू नौकर, चौकीदार, रिक्शावाला, रेहड़ी वाला, चपड़ासी आदि पर भी लिखे जा सकते हैं। ‘फ़ीचर’ चाहे कैसे हों, उन्हें लिखने के लिए दिल और दिमाग दोनों का प्रयोग होना चाहिए। अच्छा आरंभ और खूबसूरत अंत करने पर फ़ीचर की सफलता निर्भर करती है।

फ़ीचर के कुछ उदाहरण

प्रश्न 1.
गुम होती चहचहाहट
उत्तर:
एक समय था जब सुबह-सवेरे नींद चिड़ियों की चहचहाहट से खुलती थी। घर के बाहर लगे शिरीष के घने पेड़ पर तथा दीवार के छेदों में चिड़िया के अनेक घोंसले थे। तरह-तरह के पक्षी रहते थे वहाँ। सुबह-सुबह उन की चहचहाहट से वातावरण संगीतमयी हो जाता था। बीच-बीच में कौवों की काँव-काँव भी सुनाई दे जाती थी पर अब तो बाहर आँगन में या छत पर भी जा कर कहीं नहीं दिखाई देते वे पक्षी जिनके मधुर कलरव को सुनते-सुनते हम बड़े हुए। मानव-सभ्यता जिन पक्षियों के साथ बढ़ रही थी उसे आज पश्चिमी सभ्यता ने हमसे दूर कर दिया। चौड़ी होती सड़कें दोनों ओर किनारे लगे पेड़ों को निगल गईं। वह प्यारी-सी भूरी सफ़ेद काली चिड़िया, जिसे ।

हम गौरैया कहा करते थे, जब अपने झुंड में एक साथ ची-ची किया करती थी तो हम उसे रोटी के टुकड़े फेंक-फेंककर अपने नाश्ते … में सहभागी बनाया करते थे और वे भी बेखटके उछल-उछल कर हमारे पास तक आ जाती थी। पता नहीं अब कहाँ खो गई-दिन भर फुर-फुर्र इधर से उधर मुँडेरों पर उड़ने वाली चिड़िया। वैज्ञानिकों का मनाना है कि जब से मोबाइल का चहुँदिश बोलबाला हुआ है तब से हमारी प्यारी गौरैया की चहचहाहट घुटकर रह गई है। मोबाइल फोन सिगनल की तरंगें वायुमंडल में यहाँ-वहाँ फैली रहती हैं जिस कारण ये नन्हें-नन्हें पक्षी स्वयं को उस वातावरण ढाल नहीं पाते। इनकी प्रजनन क्षमता कम हो जाती है जिसके परिणामस्वरूप ये धीरे-धीरे सदा के लिए हमारी आँखों से ओझल होती जा रही हैं।

मुझे आज भी याद है अपने बचपन के वे दिन जब हम अपने आँगन के एक कोने में मिट्टी के कटोरे में पानी भरकर रख दिया करते थे। ढेरों चहचहाती चिड़ियाँ चोंच में पानी भर-भर कर पीया करती थीं। कोई-कोई तो पानी में घुस कर पंखों को फड़फड़ा कर डुबकियाँ भी खाती थीं। हमें तो यह देख तब अलौकिक आनंद आ जाया करता था। कभी-कभी वे मिट्टी में उलटी-सीधी होकर, पंखों . से मिट्टी उड़ा-उड़ा कर धूल स्नान किया करती थीं। बारिश के दिनों में वे आँगन में कपड़े सुखाने के लिए बाँधी प्लास्टिक की रस्सी
यों की तरह सज कर बैठ जाया करती थीं। कभी-कभी उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी आया करते थे जिन्हें ये उड़ना

सिखाया करती थीं। रात को हमारी माँ हमें सोने से पहले रोज़ वही कहानी सुनाया करती थी-‘एक थी चिड़िया और एक था चिरैया, जिन में गहराआपसी प्यार था जो आपस में कभी नहीं लड़ते थे।’ अब तो वह मनोरंजक दृश्य आँखों से ओझल हो गया है। उनकी यादें ही रह गई हैं। नई पीढ़ी तो कभी-कभार चिड़िया-घर में । उन्हें देख अपने साथ आए बड़ों से पूछा करेगी-‘वह क्या है ?’ यह आज का बनावटी जीवन पता नहीं हमें अभी प्रकृति से कितना दूर ले जाएगा? शायद आने वाली पीढ़ी इस चहचहाहट को केवल मोबाइल की रिंग-टोन पर ही सुन पाएगी या फ़िल्मों में ही चिड़िया को ची-चीं करते देख पाएगी।

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प्रश्न 2.
क्यों न परहेज़ करें हम पॉलीथीन से
उत्तर:
बहुत कुछ दिया है विज्ञान ने हमें-सुख भी, दुख भी। सुविधा से भरा जीवन हमारे लिए अनिवार्यता-सी बन गई है। बाजार से सामान खरीदने के लिए हम घर से बाहर निकलते हैं। अपना पर्स तो जेब में डाल लेते हैं पर सामान घर लाने के लिए कोई थैला या टोकरी साथ लेने की सोचते भी नहीं। क्या करना है उसका? फालतू का बोझ। लौटती बार तो सामान उठाकर लाना ही है तो जाती बार बेकार का बोझा क्यों ढोएँ।

जो दुकानदार सामान देगा वह उसे किसी पॉलीथीन के थैले या लिफाफे में भी डाल देगा। हमें उसे लाने में आसानी-न तो रास्ते में फटेगा और न ही बारिश में गीला होने से गलेगा। घर आते ही हम सामान निकाल लेंगे और पॉलीथीन डस्टबिन में या घर से बाहर नाली में डाल देंगे। किसी भी छोटे कस्बे या नगर के हर मुहल्ले से प्रतिदिन सौ-दो सौ पॉलीथीन के थैले या लिफ़ाफ़े तो घर से बाहर कूड़े के रूप में जाते ही हैं। वे नालियों में बहते हुए नालों में चले जाते हैं और फिर वे बिना बाढ़ के मुहल्लों में बाढ़ का दृश्य दिखा देते हैं।

पानी में उन्हें गलना तो है नहीं। वे बहते पानी को रोक देते हैं। उनके पीछे कूड़ा इकट्ठा होता जाता है और फिर वह नालियों-नालों के किनारों से बाहर आना आरंभ हो जाता है। गंदा पानी वातावरण को प्रदूषित करता है। वह मलेरिया फैलने का कारण बनता है। हम यह सब देखते हैं, लोगों को दोष देते हैं, जिस मुहल्ले में पानी भरता है उस में रहने वालों को गँवार की उपाधि से विभूषित करते हैं और अपने घर लौट आते हैं और फिर से पॉलीथीन की थैलियाँ नाली में बिना किसी संकोच बहा देते हैं। क्यों न बहाएँ-हमारे मुहल्ले में पानी थोड़े ही भरा है।

पॉलीथीन ऐसे रसायनों से बनता है जो ज़मीन में 100 वर्ष के लिए गाड़ देने से भी नष्ट नहीं होते। पूरी शताब्दी बीत जाने पर भी पॉलीथीन को मिट्टी से ज्यों-का-त्यों निकाला जा सकता है। जरा सोचिए, धरती माता दुनिया की हर चीज़ हज़म कर लेती है पर पॉलीथीन तो उसे भी हज़म नहीं होता। पॉलीथीन धरती के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। यह पानी की राह को अवरुद्ध करता है, खनिजों का रास्ता रोक लेता है। यह ऐसी बाधा है जो जीवन के सहज प्रवाह को रोक सकता है। यदि कोई छोटा बच्चा या मंद बुद्धि व्यक्ति अनजाने में पॉलीथीन की थैली को सिर से गर्दन तक डाल ले फिर उसे बाहर न निकाल पाए तो उसकी मृत्यु निश्चित है।

हम धर्म के नाम पर पुण्य कमाने के लिए गायों तथा अन्य पशुओं को पॉलीथीन में लिपटी रोटी-सब्जी के छिलके, फल आदि ही डाल देते हैं। वे निरीह पशु उन्हें ज्यों-का-त्यों निगल जाते हैं जिससे उनकी आँतों में अवरोध उत्पन्न हो जाता है और वे तड़प-तड़प कर मर जाते हैं। ऐसा करने से हमने पण्य कमाया या पाप? जरा सोचिए नदियों और नहरों में हम प्रायः पॉलीथीन अन्य सामग्रियों के साथ बहा देते हैं जो उचित नहीं है। सन 2005 में इसी पॉलीथीन और अवरुद्ध नालों के कारण वर्षा ऋतु में आधी मुंबई पानी में डूब गई थी।

हमें पॉलीथीन से परहेज करना चाहिए। इसके स्थान पर कागज़ और कपड़े का इस्तेमाल करना अच्छा है। रंग-बिरंगे पॉलीथीन तो वैसे भी कैंसरजनक रसायनों से बनते हैं। काले रंग के पॉलीथीन में तो सबसे अधिक हानिकारक रसायन होते हैं जो बार-बार पुराने पॉलीथीन के चक्रण से बनते हैं। अभी भी समय है कि हम पॉलीथीन के भयावह रूप से परिचित हो जाएँ और इसका उपयोग नियंत्रित रूप में ही करें।

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प्रश्न 3.
रिक्शा…..ओ रिक्शावाले
उत्तर:
बड़ी जानी-पहचानी आवाज़ है यह-‘रिक्शा….. ओ रिक्शावाले’। हर सड़क पर, हर गली-मुहल्ले में और छोटे-बड़े शहर में यह आवाज़ हमें प्रायः सुनाई दे जाती है। कुछ कम दूरी तय करने तथा छोटा-मोटा सामान ढोने के लिए सबसे उपयोगी साधन है रिक्शा-यदि हमारे अपने पास साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार आदि न हो तो रिक्शा ऐसा साधन है जो, सस्ती की सस्ती और आराम का आराम। इसमें बस एक ही कष्टकारी पक्ष है कि आदमी को आदमी ढोने पड़ते हैं। रिक्शा चलाने वाले का शारीरिक कष्ट सवारियों के सुख का कारण बनता है।

भूख मनुष्य से क्या-क्या नहीं करवाती? रिक्शा चलाने वालों से बोझा खिंचवाती है। दुबले-पतले, बेकारी की मार को झेलने वाले, अपने और अपने परिवार का पेट भरने के लिए रिक्शा चलाने वाले हर राज्य के हैं पर कुछ विशेष राज्यों के मेहनती लोग अपेक्षाकृत दूसरे संपन्न राज्यों में जाकर यह कार्य बड़ी संख्या में करते हैं। वे वहाँ रहते हैं; दिन-रात मेहनत करते हैं, धन कमाते हैं, कुछ स्वयं खाते हैं और अधिक अपने घरों में रहने वाले को भेज देते हैं ताकि वहाँ उनकी रोटी चल सके। बहुत कम रिक्शावाले अपने परिवारों को अपने साथ दूसरे राज्यों में लाते हैं और सपरिवार रहते हैं। वे कमर कसकर मेहनत करते हैं पर बहुत सीधा-सादा खाना खाते हैं। फटा-पुराना पहनते हैं और पैसा बचाते हैं ताकि अपनों के कष्ट दूर कर सकें। अधिकतर रिक्शा चालकों के पास अपन रिक्शा नहीं होता। वे किराये पर रिक्शा लेकर सवारियाँ ढोते हैं और उनसे पैसे लेते हैं।

हमारी एक मानसिकता बड़ी विचित्र है। घर में जब कोई भिखारी भीख माँगने आता है तो हम अपने परलोक को सुधारने के लिए बिना मोलभाव किए उन्हें कुछ पैसे देते हैं, रोटी-सब्जी देते हैं और कभी-कभी तो पुराने कपड़े भी दे देते हैं। उन्होंने कोई परिश्रम नहीं कम्मेपन के प्रतीक हैं। कई हटे-कटटे भिखारी साध बाबा का वेश धारण कर लोगों को डराते भी हैं और पैसे भी ऐंठते हैं पर किसी भी रिक्शा में बैठने से पहले हम रिक्शा वाले से चार-पाँच कम कराने के लिए अवश्य बहस करते हैं।

उस समय हम यह नहीं सोचते कि ये उन मुफ्तखोर भिखारियों से तो लाख गुना अच्छे हैं। ये परिश्रम करके खाते हैं। यदि उन परिश्रम न करनेवालों को हमें दे सकते हैं तो इन परिश्रम करने वालों को क्यों नहीं दे सकते। सुबह-सवेरे कुछ रिक्शा चालक छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते दिखाई देते हैं। वे बच्चों के साथ कभी बच्चे बने होते हैं . और कभी उनके अध्यापक। बच्चे ऊँचे स्वर में गाते जाते हैं, साथ में रिक्शा चलाने वाले भी गाते हैं। वे रोते बच्चों को चुप कराते हैं और शरारती बच्चों को डाँटते-डपटते हुए स्कूल तक ले जाते हैं।

रिक्शा चलाने वालों का जीवन बड़ा कठोर है। कमज़ोर शरीर और शारीरिक श्रम का सख्त काम। बरसात के दिनों में ये स्वयं तो रिमझिम बारिश अपने ऊपर झेलते हैं पर सवारियों को सूखा रखने का पूरा प्रबंध करते हैं। कुछ रिक्शा चालकों का सौंदर्य बोध उनकी रिक्शा से ही दिखाई दे जाता है। तरह-तरह की देवी-देवताओं और फ़िल्मी हस्तियों की तस्वीरें, रंग-बिरंगे प्लास्टिक के रिबन, सुंदर रंग-रोगन आदि से वे अपनी रिक्शा को सजाते-सँवारते हैं और बार-बार उसे कपड़े से साफ़ करते रहते हैं। … कभी-कभार कुछ रिक्शावाले सवारियों से झगड़ा भी कर लेते हैं। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। इससे मानसिक शांति भंग होती है और कार्य में बाधा उत्पन्न होती है।
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प्रश्न 4.
मेरे स्कूल का माली
उत्तर:
मेरे स्कूल का माली है श्रीपाल। लगभग 40-50 वर्ष का दुबला-पतला छोटे कद का श्रीपाल अपनी उम्र से कुछ बड़ा लगता है। अभावों में पला वह खानदानी माली है। कहते हैं कि उसके पिता भी हमारे स्कूल में माली थे और उनके पिता देश की स्वतंत्रता से पहले किसी राजा । के राजमहल में यही कार्य करते थे। श्रीपाल पढ़ा-लिखा तो नहीं है पर. उसे अपने काम की बहुत अच्छी समझ है। उसकी समझ का परिणाम ही तो मेरे स्कूल में चारों तरफ़ फैली हरियाली और फूलों की इंद्रधनुषी छटा है। – कोई भी ऐसा नहीं जो मेरे स्कूल में आया हो और उसने यहाँ उगे पेड़-पौधों और फूलों की प्रशंसा न की हो। श्रीपाल का सौंदर्य बोध तो बड़ी उच्च कोटि का है।

उसे रंग-योजना की अच्छी समझ है। वह फूलों की क्यारियाँ इस प्रकार तैयार करता है कि हरे-भरे घास के मैदानों में तरह-तरह के रंगों की अनूठी शोभा बरबस यह सोचने को विवश कर देती है कि कितना बड़ा खिलाड़ी है रंगों का हमारा माली जो ईश्वर के रंगों को इतनी सोच-समझ कर व्यवस्था प्रदान करता है। उसकी पेड़-पौधों की कलाकारिता स्कूल के प्रवेश द्वार से ही अपने रंग दिखाना शुरू कर देती है। चार भिन्न-भिन्न रंगों की सदाबहार झाड़ियों से उसने स्कूल का पूरा नाम ऊँचाई से नीचे की ओर ढलान पर इतने सुंदर ढंग से तैयार किया ही है कि सड़क से गुजरने वाले हर व्यक्ति की नज़र उस पर अवश्य जाती है और वह मन ही मन प्रायः लोग मानते हैं कि कैक्टस तो काँटों का झुरमुट होते हैं पर श्रीपाल ने स्कूल में कंकर-पत्थरों से रॉकरी बनाकर उस पर कैक्टस इतने सुंदर ढंग से लगाए हैं कि बस उनका कैंटीला सौंदर्य देखते ही बनता है। सौ-डेढ़ सौ से अधिक प्रकार के कैक्टस हैं उस रॉकरी में। कई तो फुटबॉल जितने गोल-मटोल और भारी-भरकम हैं। कई मोटे-मोटे तने वाले कैक्टस बड़े ही आकर्षक हैं।

हमारे स्कूल का परिसर बहुत बड़ा है और उस सारे में श्रीपाल की कला फूलों और पौधों के रूप में व्यवस्थित रूप से बिखरी हुई है। श्रीपाल की सहायता के लिए तीन माली और भी हैं पर वे सब वही करते हैं जो श्रीपाल उनसे करने के लिए कहता है। श्रीपाल बहुत मेहनती है। वह सर्दी-गर्मी, धूप-वर्षा, धुंध-आँधी आदि सब स्थितियों में खुरपा हाथ में लिए काम करता दिखाई देता है। वह परिश्रमी होने के साथ-साथ स्वभाव का बहुत अच्छा है।

उसने स्कूल के सारे विद्यार्थियों को इतने अच्छे ढंग से समझाया है कि वे स्कूल में लगे . फूलों की सराहना तो करते हैं पर उन्हें तोड़ते नहीं हैं। वैसे स्कूल प्रशासन ने भी जगह-जगह ‘फूल न तोड़ने’, ‘पौधों की रक्षा करने’ आदि की पट्टिकाएँ जगह-जगह पर लगाई हुई हैं। श्रीपाल सदा स्कूल की ड्रेस पहनता है तथा सभी से नम्रतापूर्वक बोलता है। उसे ऊँची आवाज़ में बोलते, लड़ते-झगड़ते कभी नहीं देखा। वास्तव में ही उसके कारण हमारा स्कूल फूलों की सुगंध से महकता रहता है।

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प्रश्न 5.
चाँद-तारों को छूने की तमन्ना थी कल्पना चावला की
उत्तर:
कौन नहीं चाहता चाँद-तारों को छूना? माँ की गोद में मचलता नन्हा-सां बच्चा भी चाँद को पाने की इच्छा करता है। बड़े-बूढों को भगवान चाँद-तारों के उस पार प्रतीत होते हैं। पर चाँद-तारों को पाना आसान नहीं है, बस हम तो इनकी कल्पना ही कर सकते हैं पर करनाल की कल्पना ने इस कल्पना को साकार करने का प्रयत्न किया था। भले ही वह चाँद-तारे नहीं पा सकी पर उन्हें पाने की राह पर तो आगे अवश्य बढ़ी थी। प्रायः जिस उम्र में लड़कियों की आँखों में गुड़ियों के सपने सितारों की तरह झिलमिलाते हैं, कल्पना ने आँखों में चाँद-सितारों के सपने सजाना शुरू कर दिया था। अमेरिकी एजेंसी नासा में अपने सहयोगियों के बीच केसी के नाम से प्रसिद्ध कल्पना चावला हरियाणा के

करनाल नगर के ऐसे परिवार में जन्मी जिसका कठिन परिश्रम में अटूट विश्वास था। आँखों में चाँद-सितारों पर जाने के सपने और विरासत में मिली श्रम पर आस्था के दुर्लभ संगम ने उन्हें अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की प्रथम महिला का खिताब दिला दिया। हरियाणा के नगर करनाल से कोलम्बिया का यह सफर न तो आसान था और न ही इसके लिए कोई छोटा रास्ता था। करनाल के टैगोर बाल-निकेतन स्कूल से स्कूली शिक्षा, दयाल सिंह कॉलेज से उच्च शिक्षा, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा, टेक्सास यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की मास्टर्स डिग्री और कोलराडो यूनिवर्सिटी से फिलॉसफी इन एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डॉक्टरेट की उपाधि के बीच कल्पना के कड़े संघर्ष की कल्पना की जा सकती है।

कल्पना का काम जितना चुनौती भरा था उसमें उनके पास काम के अतिरिक्त कुछ भी सोच पाने का अवसर बहुत कम था। शायद इसी कारण वह अपने हमपेशा ज्याँ पियरे हैरिसन की तरफ आकर्षित हुईं। विवाह के बाद जब कल्पना ने नासा में नौकरी की तो कैलिफोर्निया में फ्लाइंग प्रशिक्षक के तौर पर काम कर रहे हैरिसन भी अपनी नौकरी छोड़कर उनके सपनों की खातिर उनके साथ चले आए। कल्पना के मित्र बताते हैं कि शादी के बीस वर्ष बाद भी यह युगल निहायत प्रेम भरा जीवन जी रहा था और दोनों को उड़ानों से वापसी के समय रनवे पर एक-दूसरे का बेसब्री से इंतजार करते देखा जा सकता था।

कल्पना को भारतीय और रॉक संगीत का बहुत शौक था। चाय पीना, पंछियों की ओर निहारना और पूर्णमासी की रातों में खुले आकाश के नीचे घूमना जैसे शौक उनकी उपलब्धियों के साथ मिलकर उन्हें असाधारण व्यक्तियों के दर्जे में ला खड़ा करते हैं। अंतरिक्ष को अपना घर कहने वाली कल्पना अंतरिक्ष में 376 घंटे व्यतीत कर चुकी थीं। उन्होंने पृथ्वी की कुल 252 परिक्रमाएँ की थीं। जिंदगी और मौत के मात्र 16 मिनट के फासले से विधाता ने अपनी यह अमूल्य धरोहर हमसे वापस ले ली जो उसने मात्र 41 सालों के लिए हमें दी थी। टैक्सास की जमीन से दो लाख फीट की ऊँचाई पर जब अंतरिक्षयान की प्लेटें टूटकर गिरी थीं तो हमारा यह सितारा टूटा और सदा के लिए हमसे बिछुड़ गया।

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प्रश्न 6.
गायब होती रौनकें
उत्तर:
पिछले कुछ दशकों में हमारे देश में आर्थिक परिवर्तन बड़ी तेजी से हुए हैं। इसका प्रभाव जन-सामान्य पर पड़ा है। घरों के अंदर एक क्रांति आई है, जो सुख-सुविधाएँ पहले राजाओं को नसीब नहीं थीं, अब आम आदमी के बूते में हैं। औरतों के लिए तो नई तकनीक चमत्कार है क्योंकि जहाँ पुरुषों का बाहर का काम लगभग वैसा ही रहा है, औरतों का घर में काम बहुत सरल हो गया है। पर सुखों के बावजूद अब चेहरों पर से रौनक गायब हो गई है।

शहर हो या गाँव उनका प्रबंध बिगड़ रहा है। बढ़ते मकानों, बढ़ती आबादी, बढ़ते वाहनों और घरों तक सेवाएँ पहुँचाने के चक्कर में शहरों का कबाड़ा होना शुरू हो गया है। कल तक आपको अपने शहर की जो सड़क अच्छी लगती थी, जो नदी कलकल करती मोहक लगती थी, जो बाग महकता रहता था अब या तो रहा ही नहीं या खराब हो गया है। सड़कें चौड़ी होनी थीं इसलिए पटरियों और उन पर लगे पेड़ काट दिए गए। जहाँ पेड़ों की छाया और चिड़ियाँ होती थीं वहाँ बिजली, टेलीफ़ोन और तरह-तरह की तारों के गुच्छे नज़र आते हैं। बागों में घास की जगह पक्के फर्श बन गए। शहरों में मिट्टी तो ईंटों-पत्थरों के नीचे छिपती ही चली जा रही है। कंकरीट के जंगल खड़े होते जा रहे हैं। प्रकृति के नाम पर कैक्टस के गमले रह गए हैं।

अगर कोई संदर भवन थे तो वे विज्ञापन बोर्डों से ढक गए। गलियों तक में चलना दूभर हो गया क्योंकि वे स्कूटरों, साइकिलों से भरी रहती हैं। जिन शहरों में कूड़ा उठाने का सही प्रबंध नहीं वहाँ तो जीवन नर्क में रहने जैसा हो गया है। घर अच्छा तो क्या, बाहर तो गंद ही गंद। अमेरिकी आर्किटेक्ट क्रिस्टोफर चार्ल्स बेर्नीयर की तो शिकायत है कि अब मकानों को इस तरह दीवारों में बंद किया जा रहा है मानो हर कोई दूसरे से भयभीत हो। हम सब चूहे के बिलों की तरह अपने चारों ओर दीवारें खड़ी करते जा रहे हैं।

यह भय अब शहर की सड़क से घुसकर कमरों में पहुँचने लगा है। अच्छा घर भी बंद कमरों वाला होने लगा है। एअरकंडीशनर की दया से हर व्यक्ति अपने दरवाजे बंद रखता है। सड़क पर गाड़ी, बंद दफ़्तर पर शीशे के दरवाजे, दुकान में घुसने से पहले परिचय-पत्र दिखाओ यानी हर व्यक्ति अपनी ही कैद में है।

इस कैद ने ही रौनक छीनी है। मानसिक तनाव, अकेलापन लगातार बढ़ रहा है। हर शहर में लाखों लोग बिलकुल अकेले हैं। शहर का आर्किटेक्चर, उसका प्रबंध, उसकी भागदौड़ ऐसी है कि हर कोई दूसरे से अकेले मिलने से भी कतरा रहा है। यह दुनिया को कहाँ ले जाएगा-उसकी कल्पना आज नहीं की जा सकती है पर समझा जा सकता है।

इसका हल यही है कि हम बराबर चाले का हाल पूछे, उसके दुःखदर्द में सम्मिलित हों। शहर के साथ होने वाले छल का विरोध करें, घर से आजादी पाएँ। शहर आपके लिए हो, आप शहर के लिए। चलिए बराबर वाले दरवाज़े को थपथपाइए शायद मुसकराता चेहरा मिल जाए। जब तक हम स्वयं पहल नहीं करेंगे तब तक पराए हमारे अपने नहीं. हो सकते। किसी पराए को अपना बनाने के लिए हमें उन्हें अपना बनाना होगा। संवादहीनता अभिशाप है। सब से मिलो तभी गायब होती रौनकें फिर से लौटेंगी।

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प्रश्न 7.
मोर्चे पर सैनिकों के साथ एक दिन (Delhi C.B.S.E, 2016):
उत्तर:
सैनिक देश की रक्षा एवं सुरक्षा करते हैं। वे मोर्चे पर अपनी जान हथेली पर रखकर दिन-रात पहरेदारी करते हैं। सैनिकों के शौर्य . एवं वीरता को सुनकर मेरे मन में इच्छा हुई कि मैं भी इस पवित्र स्थल को जाकर देखू। मैंने मोर्चे पर सैनिकों के साथ एक दिन गुजारा।

मैं सैनिकों के शौर्य, वीरता एवं साहस को देखकर हैरान रह गया। मुझे यह देखकर अत्यंत आश्चर्य हुआ कि सैनिक किस प्रकार हँसते हँसते देश पर कुर्बान हो जाते हैं। सैनिक रात-दिन खतरों का सामना करते हैं किंतु फिर भी देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर वे दुश्मनों के छक्के छुड़ा देते हैं। मोर्चे पर सैनिकों के साथ एक दिन मेरे जीवन का स्वर्णिम दिन था। उस दिन मैंने निश्चय किया कि मैं भी एक सैनिक बनकर देश की रक्षा करूँगा।

प्रश्न 8.
भूकंप क्षेत्र से (Delhi C.B.S.E, 2016)
उत्तर:
गत वर्ष नेपाल में भीषण भूकंप आया था। अचानक धरती में इतनी ज्यादा कंपन हुई जिसके कारण चारों तरफ़ तबाही-ही-तबाही दिखाई दे रही थी। नेपाल ही नहीं भारत में भी कई स्थलों पर भारी नुकसान हुआ। इस भूकंप से लाखों लोग बेघर हो गए तथा हज़ारों लोग मारे गए। इससे जानमाल की भारी क्षति हुई। चारों तरफ केवल रोने-चिल्लाने की आवाजें सुनाई पड़ रही थी। अनेक लाशें मलबे के नीचे दबी-कुचली दिखाई दे रही थीं। बड़ा ही वीभत्स दृश्य वहाँ सब तरफ़ दिखाई दे रहा था। सैनिकों एवं वीर जवानों ने इस त्रासदी में लोगों की खूब सेवा की। उन्होंने घायलों को हस्पताल पहुंचाया। अनेक लोगों को मलबे के नीचे से निकाला तथा उनकी जान बचाई। उन्होंने पीड़ित लोगों तक खान-पान की वस्तुएँ पहुँचाईं।

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प्रश्न 9.
‘चुनाव प्रचार का एक दिन’ (A.I. C.B.S.E, 2016)
उत्तर:
चुनाव का बिगुल बजते ही प्रचार-प्रसार का दौर प्रारंभ हो जाता है। नेता अपने समर्थकों के साथ गली-मोहल्लों में चुनाव प्रचार हेतु निकल पड़ते हैं। नेता सफ़ेद कपड़े धारण कर गली के प्रत्येक घर में जाता है और लोगों से हाथ जोड़कर वोट देने की अपील करता है। वह किसी के साथ हाथ मिलाता है तो किसी के चरण छूकर आशीर्वाद लेता है। वह एक दिन में समर्थकों के साथ हज़ारों लोगों के घर-घर जाकर प्रचार करता है। लोगों से झठे वादे करता है।

समर्थक बडे-बडे बैनर हाथों में लेकर नेता की जय-जयकार करते हैं। नारे लगाते हैं तथा लोगों से उसकी विजय का पताका फहराने की अपील करते हैं। नेता मंच पर खड़ा होकर जब किसी सभा को संबोधित करता है तो आकर्षक मुद्रा एवं शैली में लोगों से हज़ारों वादे करता है। उनके क्षेत्र में सभी तरह की सुविधाएँ देने का वादा करता है। …. इतना ही नहीं चलते-चलते भी लोगों से हाथ जोडकर वोट देने की अपील करता है। यदि कोई उन्हें कछ बरा-भला भी कह ज शांत बने रहने का नाटक करते हैं। वे प्रायः आपे से बाहर नहीं होते। वे मीठी और सभ्य भाषा में ही बोलने की चेष्टा करते हैं।

प्रश्न 10.
भीड़भरी बस के अनुभव (A.I. C.B.S.E., 2016)
उत्तर:
मैंने गत मास दिल्ली से चंडीगढ़ बस में सफर किया। उस दिन बस में बहुत भीड़ थी। बस यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी। बस में इतनी भीड़ थी कि पैर रखने की भी जगह नहीं थी। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़ रहे थे। जब भी बस में ब्रेक लगते लोग … आपस में टकरा जाते थे। बीच-बीच में कई बार तो कुछ लोगों में कहासुनी भी हुई किंतु कुछ लोगों ने उन्हें समझा-बुझाकर शांत कर दिया। बस लोगों से ऐसे सटी थी कि हवा भी पार नहीं हो सकती थी। गर्मी से लोगों का बुरा हाल था। सब लोग गर्मी के कारण कराह रहे थे। मुझे गर्मी से बहुत घबराहट हो रही थी। बड़ी मुश्किल से राम-राम जपते हुए संध्या के समय हम चंडीगढ़ पहुँचे। वास्तव में भीड़ भरी बस का यह अनुभव बहुत ही कड़वा सिद्ध हुआ।

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प्रश्न 11.
स्वच्छ भारत : स्वस्थ भारत (Outside Delhi 2017)
उत्तर:
स्वच्छता स्वास्थ्य का प्रतीक है। जहाँ स्वच्छता होती है वहाँ स्वास्थ्य भी अच्छा होता है। स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत की परिकल्पना आधुनिक युग की सोच है। यदि भारत स्वच्छ रहेगा तभी भारत स्वस्थ बन पाएगा। इसके विपरीत यदि देश में चारों तरफ गंदगी, कूड़े के ढेर होंगे तो हम स्वस्थ होने की कल्पना भी नहीं कर सकते। यह अभियान देश के कोने-कोने में चलाया जा रहा है कि हमने भारत को स्वच्छ बनाना है। बुजुर्ग ही नहीं युवा वर्ग भी इस अभियान में बढ़चढ़कर भाग ले रहे. हैं।

जहाँ भी गली-मोहल्ले, गाँव, शहर, पार्क में कूड़ा-कर्कट, गंदगी मिले वहाँ स्वच्छता अभियान चलाया जाना चाहिए। जब देश का प्रत्येक आदमी आत्मिक रूप से इस अभियान से जुड़ गया तब वास्तव में यह अभियान सफल हो जाएगा। यदि हमें अपने स्वास्थ्य को ठीक रखना है तो अपने चारों तरफ के वातावरण को स्वच्छ रखना हमारा परम कर्तव्य होना चाहिए। जब …. प्रत्येक देशवासी अपने चारों ओर का वातावरण स्वच्छ बनाने में अपनी कर्मनिष्ठा से और ईमानदारी से कर्म करेगा तब भारत अवश्य ही स्वस्थ होगा। अतः यह सत्य है कि स्वच्छ भारत तो स्वस्थ भारत।

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प्रश्न 12.
‘वन रहेंगे : हम रहेंगे (Outside Delhi 2017)
उत्तर:
वन जीवन का प्रतीक है। वन है तो जीवन है। वन नहीं तो जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। वनों से हमें अनेक बहुमूल्य एवं जीवनोपयोगी वस्तुएँ प्राप्त होती हैं। वनों से हमें ऑक्सीजन प्राप्त होती है। यही वातावरण को शुद्ध बनाते हैं। यदि वन नहीं रहेंगे तो हमारा जीवन भी नष्ट हो जाएगा। वनों के न रहने से जीवन भी डगमगा जाएगा। वनस्पतियाँ नष्ट हो जाएंगी। वर्षा का संतुलन बिगड़ जाएगा। ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने से भयंकर परिस्थितियाँ बन जाएंगी।

नदियाँ अपने स्थान पर नहीं । रहेंगी। वातावरण का संतुलन बिगड़ जाएगा। वातावरण संतुलन बिगड़ने से जीवन का भी संतुलन बिगड़ जाएगा। यदि वातावरण ही जीवनोनुकूल न होगा तो जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि वनों पर हमारा जीवन निर्भर है। यदि वन रहेंगे तो हम रहेंगे। वन नहीं रहेंगे तो हम भी नहीं रहेंगे।

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