Author name: Prasanna

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 11 जो देखकर भी नहीं देखते

These NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 11 जो देखकर भी नहीं देखते Questions and Answers are prepared by our highly skilled subject experts.

जो देखकर भी नहीं देखते NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 11

Class 6 Hindi Chapter 11 जो देखकर भी नहीं देखते Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
जिन लोगों के पास आँखें हैं, वे सचमुच बहुत कम देखते हैं-हेलेन केलर को ऐसा क्यों लगता है ?
उत्तर:
हेलेन केलर ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि जो लोग किसी चीज को निरंतर देखने के आदी हो जाते हैं वे उनकी तरफ अधिक ध्यान नहीं देते। उनके मन में उस वस्तु के प्रति कोई जिज्ञासा नहीं रहती। ईश्वर की दी हुई देन का वह लाभ नहीं उठा सकते।

प्रश्न 2.
‘प्रकृति’ का जादू किसे कहा गया है ?
उत्तर:
प्रकृति में होने वाले निरंतर परिवर्तन को प्रकृति का जादू कहा गया है। प्रकृति में अपार सौंदर्य भरा पड़ा है। मुलायम-मुलायम फूलों का अहसास अपार आनंद प्रदान करता है। प्रकृति कितनी सुंदर होगी मैं यह फूलों की पंखुड़ियों को छूकर महसूस कर लेती हूँ।

प्रश्न 3.
‘कुछ खास तो नहीं’-अपनी मित्र का यह जवाब सुनकर हेलेन को आश्चर्य क्यों हुआ ?
उत्तर:
क्योंकि प्रकृति में चारों ओर देखने और समझने की बहुत सी चीजें हैं। फिर भी उनकी मित्र कह रही है कि मैंने कुछ खास नहीं देखा। लेखिका का मानना है कि वे कुछ भी देखना ही नहीं चाहती। वे उन चीजों की चाह जरूर करती हैं जो उनके आसपास नहीं हैं।

प्रश्न 4.
हेलेन केलर प्रकृति की किन चीजों को छूकर और सुनकर पहचान लेती है ?
उत्तर:
हेलेन केलर प्रकृति की अनेक चीजों जैसे भोजपत्र, पेड़ की चिकनी छाल, चीड़ की खुरदरी छाल, टहनियों में नई कलियों, फूलों की पँखुड़ियों की बनावट को छूकर और सूंघकर पहचान लेती है।

प्रश्न 5.
‘जबकि इस नियामत से ज़िंदगी को खुशियों के इन्द्रधनुषी रंगों से हरा-भरा जा सकता है।’-तुम्हारी नज़र में इसका क्या अर्थ हो सकता है ?
उत्तर:
प्रकृति की इस अनुपम देन को यदि हम सही ढंग से देखें व महसूस करें तो हमारी जिंदगी खुशियों से भर जाएगी। हमारी जिंदगी से दुःख कोसों दूर चले जाएंगे।

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निबंध से आगे

प्रश्न 1.
आज तुमने अपने घर से आते हुए बारीकी से क्या-क्या देखा-सुना ? मित्रों के साथ सामूहिक चर्चा कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
कान से न सुनने पर आसपास की दुनिया कैसी लगती होगी ? इस पर टिप्पणी लिखो और साथियों के साथ विचार करो।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 3.
कई चीज़ों को छूकर ही पता चलता है, जैसे-कपड़े की चिकनाहट या खुदरदापन, पत्तियों की नसों का उभार आदि। ऐसी और चीज़ों की सूची तैयार करो जिनको छूने से उनकी खासियत का पता चलता है।
उत्तर:
पत्थर की कठोरता, फूल की कोमलता, घी की चिकनाहट, रेत की किरकिराहट, पक्षी का गिलगिलापन।

प्रश्न 4.
हम अपनी पाँचों इंद्रियों में से आँखों का इस्तेमाल सबसे ज़्यादा करते हैं। ऐसी चीज़ों के अहसासों की तालिका बनाओ जो तुम बाकी चार इंद्रियों से महसूस करते हो-
सुनना, चखना, सूँघना, छूना
उत्तर:
सुनना : संगीत, वाहनों की आवाज, बादलों की गड़गड़ाहट, पक्षियों का कलरव, कोयल व मोर की मधुर आवाज।
चखना : भोजन, फल, कडुवाहट, मिठास, खटास।
सूंघना : फूलों की गंध, भोजन की खुशबू, फलों की सुगंध, कूड़े की दुर्गंध।
छूना : फूल की कोमलता, पत्थर की कठोरता, कपड़े की चिकनाहट, घास की कोमलता।

प्रश्न 5.
तुम्हें किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने का मौका मिले जिसे दिखाई न देता हो तो तुम उससे प्रकृति के उसके अनुभवों के बारे में क्या-क्या पूछना चाहोगे और क्यों ?
उत्तर:
हमारे स्कूल में हिन्दी के एक अध्यापक हैं जिन्हें दिखाई नहीं देता। वे बच्चों के हाथ के स्पर्श से ही उसे पहचान लेते हैं। वे सभी अध्यापकों को छूकर पहचान लेते हैं। वे कक्षा को बिना किसी सहारे के चले जाते हैं हम उनसे पूछना चाहेंगे कि यह सब कैसे होता है। वे कक्षा में अकेले कैसे चले जाते हैं।

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अनुमान और कल्पना

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 11 जो देखकर भी नहीं देखते 1
1. इस तस्वीर में तुम्हारी पहली नज़र कहाँ जाती है ?
2. गली में क्या-क्या चीजें हैं ?
3. कौन-कौन सी चीजें हैं, जो तुम्हारा ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं ?
4. इस गली में हमें कौन-कौन सी आवाजें सुनाई देंगी ?
उत्तर:
1. पहली नज़र एक दीवार व केबल पर जाती है।
2. गली में साईकिल वाला आदमी है। बिजली के तार हैं। रस्सी पर कपड़े सूख रहे हैं। कई व्यक्ति इधर से उधर आ-जा रहे हैं।
3. नंगी दीवार और बिजली के तार और रस्सी पर सूख रहे कपड़े।
4. इस गली में फेरी वालों एवं लोगों के आने-जाने की आवाजें सुनाई देंगी।

प्रश्न 2.
पाठ में स्पर्श से संबंधित कई शब्द आए हैं। नीचे ऐसे कुछ शब्द और दिए गए हैं। बताओ कि किन चीजों का स्पर्श कैसा होता है :
चिकना ………, चिपचिपा …….
मुलायम ………, खुरदरा ………,
लिजलिजा ………, ऊबड़-खाबड़ ………,
सख़्त ………, भुरभुरा ………,
उत्तर:
चिकना – तेल, घी
चिपचिपा – शहद
मुलायम – बाल, घास
खुरदरा – पेड़ की छाल
लिजलिजा – कुत्ते का पिल्ला, चूजा
ऊबड़-खाबड़ – रास्ता
सख़्त – पत्थर
भुरभुरा – रेत

प्रश्न 3.
अगर मुझे इन चीज़ों को छूने भर से इनती खुशी मिलती है, तो उनकी सुंदरता देखकर तो मेरा मन मुग्ध ही हो जाएगा।
ऊपर रेखांकित संज्ञाएँ क्रमशः किसी भाव और किसी की विशेषता के बारे में बता रही हैं। ऐसी संज्ञाएँ भाववाचक कहलाती हैं। गुण और भाव के अलावा भाववाचक संज्ञाओं की पहचान यह है कि इससे जुड़े शब्दों को हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं, देख या छू नहीं सकते। नीचे लिखी भाववाचक संज्ञाओं को पढ़े समझो। इनमें से कुछ शब्द संज्ञा और कुछ क्रिया से बने हैं उन्हें भी पहचानकर लिखो-
मिठास, भूख, शांति, भोलापन
बुढ़ापा, घबराहट, बहाव, फुर्ती
ताज़गी, क्रोध, मज़दूरी
उत्तर:
भाववाचक संज्ञा – यह शब्द जिस शब्द से बना है – शब्द का प्रकार
मिठास – मीठा – विशेषण
भूख – भूखा – विशेषण
शांति – शांत – विशेषण
भोलापन – भोला – विशेषण
बुढ़ापा – बूढ़ा – संज्ञा
घबराहट – घबराना – क्रिया
बहाव – बहना – क्रिया
फुर्ती – फुर्त – विशेषण
ताज़गी – ताजा – विशेषण
क्रोध – क्रोधी – विशेषण
मज़दूरी – मजदूर – संज्ञा

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प्रश्न 4.
– “मैं अब इस तरह के उत्तरों की आदी हो चुकी हूँ।”
– उस बगीचे में अभलतास, सेमल, कजरी आदि तरह-तरह के पेड़ थे।
ऊपर लिखे वाक्यों में रेखांकित शब्द देखने में मिलते-जुलते हैं, पर उनके अर्थ भिन्न हैं। नीचे ऐसे कुछ और समरूपी शब्द दिए गए हैं। वाक्य बनाकर उनका अर्थ स्पष्ट करो।
अवधि – अवधी
ओर – और
दिन – दीन
मेल – मैल
उत्तर:
अवधि – राम चौदह वर्ष की अवधि पूरी करके अयोध्या आए।
अवधी – तुलसीदास अवधी भाषा के कवि थे।
ओर – चारों ओर अँधेरा है।
और – राम और श्याम जा रहे हैं।
दिन – दिन के समय गर्मी अधिक थी।
दीन – दीन लोगों की सेवा करो।
मेल – हमें आपस में मेल से रहना चाहिए।
मैल – मेरे मन में तुम्हारे प्रति कोई मैल नहीं है।

सुनना और देखना

1. एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा निर्मित श्रव्य कार्यक्रम ‘हेलेन केलर’।
2. सई परांजपे द्वारा निर्देशित फीचर फ़िल्म ‘स्पर्श’।

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गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. क्या यह संभव है कि भला कोई जंगल में घंटा भर घूमे और फिर भी कोई विशेष चीज़ न देखे ? मुझे-जिसे कुछ भी दिखाई नहीं देता, को भी सैकड़ों रोचक चीजें मिल जाती हैं, जिन्हें मैं छूकर पहचान लेती हूँ। मैं भोजपत्र के पेड़ की चिकनी छाल और चीड़ की खुरदरी छाल को स्पर्श से पहचान लेती हूँ। वसंत के दौरान मैं टहनियों में नई कलियाँ खोजती हूँ। मुझे फूलों की पंखुड़ियों की मखमली सतह छूने और उनकी घुमावदार बनावट महसूस करने में अपार आनंद मिलता है। इस दौरान मुझे प्रकृति के जादू का कुछ अहसास होता है। कभी, जब मैं खुशनसीब होती हूँ तो टहनी पर हाथ रखते ही किसी चिड़िया के मधुर स्वर कानों में गूंजने लगते हैं। अपनी अंगुलियों के बीच झरने के पानी को बहते हुए महसूस कर मैं आनंदित हो उठती हूँ। मुझे चीड़ की फैली पत्तियाँ या घास का मैदान किसी भी महंगे कालीन से अधिक प्रिय हैं। बदलते हुए मौसम का समां मेरे जीवन में एक नया रंग और खुशियाँ भर जाता है।

प्रसंग- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वसंत’ में संकलित पाठ ‘जो देखकर भी नहीं देखते’ पाठ से लिया गया है। इस पाठ की लेखिका ‘हेलेन केलर’ हैं। लेखिका कहती है कि जो लोग देखते और सुनते हैं वे वास्तव में किसी चीज को ठीक से जानने की कोशिश ही नहीं करते।

व्याख्या- लेखिका का मानना है कि यदि कोई जंगल में घंटा भर घूमे और कहे कि उसने कुछ देखा ही नहीं इसका सीधा अर्थ है कि वह कुछ देखना ही नहीं चाहता। जंगल में ऐसी अनेक चीजें हैं जो हमारे देखने की हैं। लेखिका कहती है कि जंगल में ऐसी बहुत चीजें हैं जिन्हें मैं छूकर पहचान लेती हूँ। चाहे भोजपत्र की चिकनी छाल हो या चीड़ के पेड़ की खुरदरी छाल, मैं हाथ के छूने मात्र से ही पहचान लेती हूँ कि यह छाल किसकी है। वसंत ऋतु के आने पर वृक्षों की टहनियाँ कलियों और फूलों से लद जाती हैं। टहनियों को छूकर में उनकी नई कलियों को पहचान लेती हूँ। लेखिका को फूलों की पत्तियों की बनावट को हाथ से छूने और उसके आकार को परखने में बड़ा आनंद मिलता है। छूने से ऐसा लगता है जैसे प्रकृति कुछ जादू सा कर रही है। जब किसी पेड़ या पौधे की टहनी को हाथ से छूती हूँ तो किसी चिड़िया के चहचहाने की आवाज कानों में आ जाती है। झरने के पानी में हाथ डालना और अँगुलियों के बीच से बहते हुए पानी को निकलते हुए मुझे बहुत अच्छा महसूस. होता है। मेरा मन आनंद से झूम उठता है। लेखिका को चीड़ के वृक्ष की मुलायम पत्तियों और घास का मैदान मखमली कालीन से भी अधिक सुखदायक व प्रिय है। जब मौसम बदलता है तो मेरे जीवन में खुशियाँ भर जाती हैं। मैं एक नई ताजगी का अनुभव करती हूँ।

2. कभी-कभी मेरा दिल इन सब चीजों को देखने के लिए मचल उठता है। अगर मुझे इन चीजों को सिर्फ छूने भर से इतनी खुशी मिलती है, तो उनकी सुंदरता देखकर तो मेरा मन मुग्ध ही हो जायेगा। परन्तु, जिन लोगों की आँखें हैं, वह सचमुच बहुत कम देखते हैं। इस दुनिया के अलग-अलग सुंदर रंग उनकी संवेदना को नहीं छूते। मनुष्य अपनी क्षमताओं की कभी कदर नहीं करता। वह हमेशा उस चीज की आस लगाए रहता है जो उसके पास नहीं है।

प्रसंग- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वसंत’ में संकलित पाठ ‘जो देखकर भी नहीं देखते’ से लिया गया है। इस पाठ की लेखिका ‘हेलेन केलर’ हैं। लेखिका ने यहाँ बताया है कि मनुष्य के पास जो कुछ होता है वह उसे न जानकर दूसरी चीजों को प्राप्त करना चाहता है।

व्याख्या- लेखिका न तो किसी चीज को देख सकती थी और न कोई बात सुन सकती थी परन्तु कभी-कभी उसका दिल भी करता था कि जो चीज छूने में इतनी अच्छी है तो देखने में कैसी होगी। उसको देखकर तो मन उस वस्तु पर मोहित हो जाएगा। जिनके पास आँखें हैं वे बहुत कुछ नहीं देखते। इस दुनिया के सुंदर रंग उनकी भावनाओं को नहीं छूते। मनुष्य को भगवान ने इतना कुछ दिया है परन्तु वह ईश्वर की इस देन की कदर करना नहीं जानता। वह उन चीजों को चाहता है जो उसके पास नहीं हैं। परन्तु भगवान ने जो कुछ उसको दिया वह उसका भरपूर लाभ नहीं उठा पाता।

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जो देखकर भी नहीं देखते Summary

पाठ का सार

मैं कभी-कभी अपने मित्रों की परीक्षा यह परखने के लिए लेती हैं कि वे इस दुनिया में क्या-क्या देखते हैं। हाल ही में मेरी एक प्रिय सहेली जंगल की सैर करने के बाद वापिस लौटी तो मैं उससे पूछ बैठी “कि आपने क्या-क्या देखा ? तो उसका जवाब था कि कुछ खास नहीं देखा। तो मुझे बहुत आश्चर्य हुआ क्योंकि मैं इस तरह के उत्तरों की आदि हो चुकी हूँ। मेरा यह विश्वास है कि जिन लोगों की आँखें होती हैं वास्तव में वे बहुत कम देखते हैं।

क्या यह संभव है कि कोई व्यक्ति या स्त्री जंगल में घंटा भर घूमे, फिर यह कहे कि मुझे कोई विशेष चीज दिखायी नहीं दी यह कैसे हो सकता है। एक मैं जिसकी आँखें नहीं हैं और मैं कुछ देख भी नहीं सकती। लेकिन मुझे सैकड़ों रोचक चीजें मिल जाती हैं जिन्हें मैं छूकर पहचान लेती हूँ। मैं भोजपत्र के पेड़ की चिकनी छाल को और चीड़ की खुरदरी छाल को स्पर्श मात्र से ही पहचान लेती हूँ। वसन्त ऋतु के आने पर मैं टहनियों में नई कलियाँ खोजती हूँ। मुझे फूलों की पंखुड़ियों की मखमली सतह को छूने और उनकी घुमावदार बनावट महसूस करने में अपार खुशी व आनंद मिलता है। इसी समय मुझे प्रकृति के जादू का कुछ अहसास होता है। जब कभी मैं खुशनसीब होती हूँ तो टहनी पर अपने हाथ को रखते ही किसी चिड़िया के मधुर स्वर मेरे कानों में गूंजने लगते हैं। अपने हाथ एवं अँगुलियों के बीच बहते हुए झरने के पानी को महसूस कर मैं अत्यन्त आनंदित हो उठती हूँ। मुझे चीड़ की फैली पत्तियाँ या हरी घास के मैदान किसी भी महंगे कालीन से अधिक प्रिय हैं। बदलते हुए मौसम का समां मेरे जीवन में एक नया रंग, खुशियाँ एवं स्फूर्ति का संचार कर देता है। इन सब चीजों के स्पर्श मात्र से ही मुझे काफी खुशी होती है। लेकिन अगर में इन सबको अपनी आँखों से देखती तो मुझे कितनी खुशी मिलती।

लेकिन कभी-कभी इन सब चीजों को देखने के लिए मेरा मन उत्सुक हो जाता है। अगर मुझे इन सब चीजों को छूने भर से इतनी खुशी मिलती है तो इन सबकी सुन्दरता को देखकर तो मेरा मन मुग्ध ही हो जाता। परन्तु जिन लोगों की आँखें हैं वह आँखें होने पर भी सचमुच बहुत कम देखते हैं। इस दुनिया की अलग-अलग सुन्दरता एवं रंग उनकी संवेदना को नहीं छूते। मनुष्य कभी भी अपनी क्षमताओं की कद्र नहीं करता। वह हमेशा उस चीज या वस्तु की अभिलाषा करता है जो उसके पास नहीं होती है।

यह बड़े दुख की बात है कि दृष्टि के आशीर्वाद को लोग एक साधारण-सी चीज समझते हैं, उनके लिए इसका कोई महत्त्व नहीं है। लेकिन सच यह है कि इस नियामत से जिन्दगी को खुशियों के इन्द्रधनुषी रंगों से हरा भरा बनाया जा सकता है।

शब्दार्थ : परखना – जाँच करना, आदी – अभ्यस्त, जंगल – वन, अरण्य, उजाड़ स्थान, अचरज – आश्चर्य, टहनियाँ – वृक्ष की शाखाएँ, स्पर्श – छूना, पंखुड़ियाँ – फूल की पत्तियाँ, आनंद – खुशी, समाँ – माहौल, आस – इच्छा, अभिलाषा, संवेदना – अनुभूति, मुग्ध – मोहित, लुब्ध, रोचक – रूचि को बढ़ाने वाला, कदर – सम्मान, नियामत – ईश्वर की कृपा/देन

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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 10 झाँसी की रानी

These NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 10 झाँसी की रानी Questions and Answers are prepared by our highly skilled subject experts.

झाँसी की रानी NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 10

Class 6 Hindi Chapter 10 झाँसी की रानी Textbook Questions and Answers

कविता से

प्रश्न 1.
‘किन्तु काल गति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई ?
(क) पंक्ति में किस घटना की ओर संकेत है ?
(ख) काली घटा घिरने की बात क्यों कही गयी है ?
उत्तर:
(क) इस पंक्ति में लक्ष्मीबाई के पति गंगाधर राव की मृत्यु की ओर संकेत है।
(ख) झाँसी के ऊपर एक के बाद एक विपत्ति आने लगी। अंग्रेजों की नीति थी कि वे निःसंतान राजा की मृत्यु के बाद उस राज्य पर अपना अधिकार कर लेते थे।

प्रश्न 2.
कविता की दूसरी पंक्ति में भारत को बूढ़ा कहकर और उसमें नई जवानी की बात कहकर सुभद्रा कुमारी चौहान क्या बताना चाहती हैं ?
उत्तर:
इस पंक्ति के माध्यम से कवयित्री बताना चाहती हैं कि भारतवर्ष गुलाम होने के कारण जर्जर हो चुका था परन्तु भारतवर्ष पुनः जनजागरण के कारण स्वतंत्रता के लिए छटपटाने लगा था। वह सदियों तक गुलाम रहकर आजादी के महत्त्व को समझ गया था।

प्रश्न 3.
झाँसी की रानी के जीवन की कहानी अपने शब्दों में लिखें। उनका बचपन आपके बचपन से कैसे अलग था ?
उत्तर:
लक्ष्मीबाई कानपुर के नाना साहब की मुँहबोली बहिन थी। लक्ष्मीबाई को मनु और छबीली नाम से भी जाना जाता था। वह अपने पिता की अकेली संतान थी। उसको बचपन से ही हथियार चलाने का शौक था। शिवाजी की गाथाएँ लक्ष्मीबाई को जुबानी याद थीं। नकली युद्ध करना, व्यूह की रचना करना, किले तोड़ना और शिकार खेलना लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल थे। भवानी उनके कुल की देवी थी। झाँसी के राजा गंगाधर राव के साथ लक्ष्मीबाई का विवाह हुआ था। विवाह के थोड़े ही समय बाद लक्ष्मीबाई विधवा हो गई। इसके बाद अंग्रेजी शासकों ने झाँसी पर अपना अधिकार करना चाहा। लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के साथ लड़ते-लड़ते अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया।

लक्ष्मीबाई का बचपन नकली युद्ध, दुर्ग तोड़ने एवं शिकार करने में बीता। हमारा बचपन पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ खेल-कूद में बीता तब की और अब की परिस्थितियों में जमीन आसमान का अंतर है।

प्रश्न 4.
वीर महिला की इस कहानी में कौन-कौन रो पुरुषों के नाम आए हैं ? इतिहास की कुछ अन्य वीर स्त्रियों की कहानियाँ खोजो।
उत्तर:
लक्ष्मीबाई की इस कहानी में निम्नलिखित पुरुषों के नाम आए हैं-
नाना साहब, (इनका पूरा नाम नाना धून्दूपंत था) डलहौजी, पेशवा बाजीराव, तात्या टोपे, अजीमुल्ला, अहमद शाह मौलवी, ठाकुर कुँवर सिंह, लेफ्टिनेन्ट वॉकर, सिंधिया के महाराज, जनरल स्मिथ, यूरोज़।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 10 झाँसी की रानी

प्रश्न 5.
झाँसी की रानी के जीवन से हम क्या प्रेरणा ले सकते हैं ?
उत्तर:
झाँसी की रानी के जीवन से हम देश के लिए मर मिटने, स्वाभिमान से जीने, विपत्तियों में न घबराने, साहस, दृढनिश्चय, नारी अबला नहीं सबला है आदि प्रेरणाएँ ले सकते हैं।

प्रश्न 6.
अंग्रेजों के कुचक्र के विरुद्ध रानी ने अपनी वीरता का परिचय किस प्रकार दिया ?
उत्तर:
अंग्रेजों की नीति थी यदि किसी राज्य में कोई राजा संतानहीन मर जाता था तो वे उसके राज्य को अपने राज्य में मिला लेते थे। लक्ष्मीबाई के पति गंगाधर राव की मृत्यु हो गई। डलहौजी ने झाँसी के राज्य को अपने राज्य में मिलाने की चाल चली। रानी उसकी चाल को समझ गई। उसने अपनी सेना की तैयारियां शुरू कर दी। उसने स्त्रियों को भी सैनिक शिक्षा दी। लक्ष्मीबाई ने डटकर अंग्रेजों का मुकाबला किया उसने अंग्रेजों के कई किलों पर भी अधिकार कर लिया। अंत में रानी अंग्रेजी सेना के बीच घिर जाती है। रानी युद्ध करते-करते वीरगति को प्राप्त हो जाती है।

प्रश्न 7.
रानी के विधवा होने पर डलहौजी क्यों प्रसन्न हुआ ? उसने क्या किया ?
उत्तर:
रानी के विधवा होने पर डलहौजी इसलिए प्रसन्न हुआ क्योंकि अब झाँसी को भी अंग्रेजी राज्य में मिलाया जा सकता था। गंगाधर राव जो कि लक्ष्मीबाई के पति थे वे निःसंतान ही मर गए। अंग्रेजों की नीति थी यदि कोई राजा निःसंतान मरेगा तो उसके राज्य पर अंग्रेजों का अधिकार हो जाएगा और डलहौजी ने यही किया। उसने अपनी फौजें भेजकर झाँसी के किले पर अपना झंडा फहरा दिया था।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट करो
(क) गुमी हुई आजादी की. कीमत सबने पहचानी थी।
(ख) लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया।
उत्तर:
(क) भाव : भारत कई सदियों से गुलाम था। लक्ष्मीबाई ने अपनी वीरता और स्वाभिमान से यह बता दिया था कि आजादी हमारे लिए कितनी आवश्यक है। लोग आजाद होने के लिए संघर्ष करने लगे थे।

(ख) भाव : अंग्रेज किसी भी लावारिस राज्य को अपने राज्य में मिला लेते थे। उन्होंने कानून बनाया था कि किसी भी राज्य पर दत्तक पुत्र का अधिकार नहीं होगा, जिस राज्य के असली वारिस की मृत्यु हो जाएगी उस राज्य को अंग्रेजी राज्य में मिला लिया जाएगा।

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अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
कविता में स्वाधीनता संग्राम के किस दौर की बात है ?
उत्तर:
कविता में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौर की बात कही गई है। इस संग्राम में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

प्रश्न 2.
सुभद्रा कुमारी चौहान लक्ष्मीबाई को ‘मर्दानी’ क्यों कहती हैं ? अगर इस शब्द की जगह पर ‘जननी’ होता तो कविता में क्या फर्क पड़ता ?
उत्तर:
सुभद्रा कुमारी चौहान ने लक्ष्मीबाई को ‘मर्दानी’ इसलिए कहा क्योंकि लक्ष्मीबाई पुरुष वेश में पुरुषों से भी अधिक शक्ति एवं वीरता से शत्रुओं का संहार करती थी। लक्ष्मीबाई बहुत ही बहादुर एवं निर्भीक महिला थी। उनकी वीरता के आगे बड़े-बड़े योद्धा नतमस्तक हो जाते थे।

प्रश्न 3.
‘बरछी’, ‘कृपाण’, ‘कटारी’, उस जमाने के हथियार थे। आजकल प्रयोग में लाए जाने वाले हथियारों के नाम लिखो।
उत्तर:
आजकल जो हथियार प्रयोग में लाए जाते है वे हैं बन्दूक, रायफल, मोर्टार, स्टेनगन, एल०एम०जी०, तोप, राकेट, मिसाइल, परमाणु बम आदि।

प्रश्न 4.
सन् 1857 के युद्ध के बारे में जानकारी प्राप्त करो। अगर तुम उस युद्ध के दौर में होते तो कल्पना कर बताओ कि क्या करते ?
उत्तर:
1857 का युद्ध भारत की आजादी का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। यह युद्ध अंग्रेजी सेना और भारतीयों के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध की शुरूआत गाय और सूअर की चर्बी वाले कारतूसों के विरोध फलस्वरूप हुई थी। मंगल पांडे का भी इस युद्ध में काफी योगदान रहा। तात्या टोपे, लक्ष्मीबाई, नाना साहब आदि विभूतियों ने इस युद्ध में योगदान दिया। इस युद्ध ने सोए हुए भारतीयों को जगा दिया।

यदि मैं उस समय होता तो मैं भी इस युद्ध में अंग्रेजों का मुकाबला करता एवं देश के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करने में तनिक भी संकोच न करता।

प्रश्न 5.
इस कविता में जिन जगहों के नाम आए हैं उनको भारत के नक्शे पर दिखाइए और 1857 के विद्रोह के दौरान लक्ष्मीबाई की यात्रा दिखलाइए ?
उत्तर:
इस कविता में निम्नलिखित जगहों का उल्लेख हुआ है। छात्र इन स्थानों को भारत के मानचित्र पर दर्शाएँ कानपुर, झाँसी, दिल्ली, बिठूर, नागपुर, उदीपुर (उदयपुर) तंजौर, सतारा, (कर्नाटक, सिंध, पंजाब, ब्रह्म,) बंगाल, मद्रास, लखनऊ, मेरठ, पटना, जबलपुर, कोल्हापुर, कालपी, ग्वालियर।
नोट : छात्र नक्शे में इन स्थानों को दिखाकर लक्ष्मीबाई की युद्ध के दौरान यात्रा को नक्शे पर प्रदर्शित करें।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 10 झाँसी की रानी

प्रश्न 6.
इस कविता का सामूहिक सस्वर पाठ करो और गीति नाट्य के रूप में भी इसे प्रस्तुत करो।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 7.
इस कविता की जो भी पंक्तियाँ तुम्हें अच्छी लगती हों उन्हें छाँटकर लिखो और उन पर अपने दोस्तों के साथ बातचीत करो।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

भाषा की बात

नीचे लिखे वाक्यांशों (वाक्य के हिस्सों) को पढ़ो-
झाँसी की रानी, जेसिका का भाई, प्रेमचंद की कहानी,
मिट्टी के घड़े, पाँच मील की दूरी, नहाने का साबुन,
रशीद का दफ्तर, रेशमा के बच्चे, बनारस के आम
का, के और की दो संज्ञाओं का संबंध बताते हैं। ऊपर दिए गए वाक्यांशों में अलग-अलग जगह इन तीनों का प्रयोग हुआ है। ध्यान से पढ़ो और कक्षा में बताओ कि का, के और की का प्रयोग कहाँ और क्यों हो रहा है ?

पढ़ने को

1. प्रकाशन विभाग, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित ‘भारत की महान नारियाँ’ श्रृंखला की पुस्तकें।
2. चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित कमला शर्मा द्वारा लिखित उपन्यास ‘अपराजिता’ ।

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काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

(1) सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी,
चमक उठी सन् सत्तावन में

वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी॥

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बहार’ में संकलित कविता ‘झाँसी की रानी’ से ली गई हैं। इस कविता की रचयिता सुभद्रा कुमारी चौहान हैं। इन पंक्तियों में कवयित्री ने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता व भारत की जागृति का वर्णन किया है।

व्याख्या- कवयित्री कहती हैं कि अंग्रेजों की नीतियों कि खिलाफ राजवंशों (राज परिवारों) ने मोर्चा खोल दिया था। अंग्रेजों की नीतियों से सभी राजवंश पीड़ित हो गए थे। देश के अंदर फिर से जागृति आ गई थी। अब तक तो वे हताश, निराश होकर सोए पड़े थे। अंग्रेजों की गुलामी सहते-सहते भारतीयों को इस चीज का आभास हो गया था कि आजादी कितनी कीमती चीज होती है। सभी ने एकजुट होकर अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने का संकल्प कर लिया था। सन् 1857 का स्वतंत्रता संग्राम प्रारम्भ हो गया था। लोग अंग्रेजों से युद्ध करने के लिए तैयार हो गए थे। उन्होंने अपने काफी दिनों से रखे हथियार उठा लिए थे। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों की सेना के साथ बड़ी बहादुरी के साथ लड़ी थी। वह एक औरत होते हुए मर्दो की तरह अंग्रेजों की सेना के साथ लड़ी।

(2) कानपुर के नाना के मुँह बोली बहन ‘छबीली’ थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के संग पढ़ती थी वह, नाना के संग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थीं,

वीर शिवाजी की गाथाएँ
उसको याद ज़बानी थीं।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी॥

प्रसंग- यहाँ रानी लक्ष्मीबाई के बचपन के बारे में बताया गया है।

व्याख्या- लक्ष्मीबाई कानपुर के नाना साहब की मुँह बोली बहिन थी। नाना साहब उसको प्यार से छबीली कहते थे। लक्ष्मीबाई अपने पिता की अकेली संतान थी। उसका बचपन नाना के साथ ही बीता था। वह उसी के साथ पढ़ती थी और उसी के साथ खेलती थी। लक्ष्मीबाई को हथियार रखने और उनको चलाने का बहुत शौक था। बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी उसकी सबसे अधिक प्रिय सहेलियाँ थीं। शिवाजी की वीरता की कहानियाँ लक्ष्मीबाई को पूरी तरह से याद थीं। कवयित्री कहती हैं कि हमने लक्ष्मीबाई की वीरता की कहानियाँ बुंदेलों के मुख से सुनी थीं।

(3) लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध, व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना, ये थे उसके प्रिय खिलवाड़,

महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी
भी आराध्य भवानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी॥

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘झाँसी की रानी’ शीर्षक कविता से अवतरित हैं। जिसकी रचयिता सुभद्रा कुमारी चौहान हैं। कवयित्री ने यहाँ लक्ष्मीबाई के प्रिय शौक क्या थे, इस बारे में बताया है।

व्याख्या- लक्ष्मीबाई साक्षात दुर्गा देवी का अवतार थी। स्वयं दुर्गा ने लक्ष्मीबाई के रूप में वीरता का अवतार लिया था। मराठे लक्ष्मीबाई के युद्ध कौशल को देखकर प्रसन्न होते थे। लक्ष्मीबाई को बचपन में नकली युद्ध करना, व्यूह की रचना करना और शिकार खेलना अच्छा लगता था। वह खेल-खेल में सेना को घेरने, किलों को तोड़ने का अभ्यास करती थी। ये उसके सबसे प्रिय खेल थे। महाराष्ट्र राज परिवार की आराध्य देवी पार्वती की लक्ष्मीबाई पूजा करती थी। लक्ष्मीबाई की वीरता की कथाएँ हमने बुंदेलों के मुख से सुनी थीं।

(4) हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाईं झाँसी में,
सुभट बुंदेलों की विरुदावलि-सी वह आई झाँसी में,

चित्रा ने अर्जुन को पाया,
शिव से मिली भवानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी।

प्रसंग- इन पंक्तियों में कवयित्री ने लक्ष्मीबाई के विवाह का वर्णन किया है।

व्याख्या- लक्ष्मीबाई का रिश्ता झाँसी के महाराजा गंगाधर राव के साथ तय हो गया। गंगाधर राव वैभव अर्थात् समृद्धि के प्रतीक हैं और लक्ष्मीबाई वीरता की प्रतीक हैं। लक्ष्मीबाई झाँसी में रानी बनकर आ गईं। राजमहल में खुशियाँ उमड़ पड़ी। रण कुशल योद्धा बुंदेलों ने रानी का विस्तृत यशोगान किया। जिस प्रकार से चित्रा ने अर्जुन को प्राप्त किया था और पार्वती शिवजी से मिली थीं, ठीक उसी प्रकार लक्ष्मीबाई और गंगाधर राव ने एक दूसरे को प्राप्त किया था।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 10 झाँसी की रानी

(5) उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियाली छाई,
किन्तु कालगति चुपके चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलानेवाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं,
रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई,

निःसंतान मरे राजा जी,
रानी शोक-समानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी॥

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘झाँसी की रानी’ कविता से अवतरित ‘सुप्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान’ द्वारा रचित हैं। कवयित्री ने यहाँ रानी के विधवा होने की घटना का वर्णन किया है।

व्याख्या- रानी लक्ष्मीबाई का विवाह गंगाधर राव के साथ होने से झाँसी का सौभाग्य जाग गया। महलों में सब ओर खुशियाँ ही खुशियाँ छा गईं। झाँसी में खुशियाँ अधिक दिनों तक नहीं रह सकीं। समय ने अपना रंग दिखाया। झाँसी के ऊपर काल के बादल मंडराने लगे। राजा गंगाधर राव की मृत्यु हो गई। कवयित्री कहती हैं कि.जो हाथ तीर चलाना जानते हों भला उन हाथों को चूड़ियाँ कहाँ अच्छी लगती हैं। रानी विधवा हो गई। भाग्य को भी रानी के ऊपर दया नहीं आई। गंगाधर राव के यहाँ संतान उत्पन्न नहीं हुई थी। झाँसी का कोई वारिस नहीं था। रानी शोक में डूब गई कि अब झाँसी का क्या होगा ? रानी की यह कथा वीर बुंदेलों के मुख से सुनी है कि झाँसी की रानी मों से भी अधिक बहादुरी के साथ शत्रु सेना के साथ युद्ध करती थी।

(6) बुझा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया,

अश्रुपूर्ण रानी ने देखा
झाँसी हुई बिरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी॥

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बहार’ में संकलित कविता ‘झाँसी की रानी’ से ली गई हैं। यहाँ कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने डलहौजी द्वारा झाँसी पर अपना झंडा फहराने का उल्लेख किया है।

व्याख्या- गंगाधर राव के निःसंतान स्वर्गवासी हो जाने पर डलहौजी मन ही मन बहुत प्रसन्न हुआ। झाँसी पर अधिकार करने का यह बहुत अच्छा अवसर था। डलहौजी ने फौज भेजकर झाँसी के दुर्ग पर अपना झंडा फहराकर उसे अंग्रेजी राज्य के अधीन कर लिया। जो भी राज्य लावारिस होते थे अंग्रेज उसके वारिस स्वयं बन जाते थे। रानी ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से झाँसी को उजड़ते हुए देखा। लक्ष्मीबाई की मर्दानगी की कहानी वीर बुंदेलों के मुख से सुनी जाती है।

(7) अनुनय विनय नहीं सुनता है, विकट शासकों की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था यह जब भारत आया,
डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया,
राजाओं नब्बाबों को भी उसने पैरों ठुकराया,

रानी दासी बनी
यह दासी अब महारानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।

प्रसंग- इन पंक्तियों में कवयित्री ने डलहौजी की कृतघ्न छवि का चित्रण किया है। जो भारत में आकर दया माँगता था अब वह किसी की भी सुनने के लिए तैयार नहीं था।

व्याख्या- शासकों की अपनी अलग ही सोच होती है वे किसी की विनती पर भी ध्यान नहीं देते। जो यहाँ पर व्यापारी के रूप में आए थे और अपने व्यापार के लिए भारतीयों की दया दृष्टि चाहते थे अब इन्होंने व्यापार के बहाने पूरे भारत में अपने पैर पसार लिए थे अर्थात् पूरे भारत पर अधिकार कर लिया था। वे अब किसी राजा या नवाबों की बात सुनने के लिए तैयार नहीं थे परन्तु रानी लक्ष्मीबाई अब महारानी बन गई थी। वह अंग्रेजों से लड़ने के लिए तैयार हो गई थी। रानी की यह कहानी हमने कई बार बुंदेलों के मुँह से सुनी है।

(8) छिनी राजधानी देहली की, लिया लखनऊ बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर पर भी घात,
उदयपुर, तंजोर, सतारा, कर्नाटक की कौन बिसात,
जब कि सिन्ध, पंजाब, ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात,

बंगाले, मद्रास आदि की
भी तो वही कहानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी।

प्रसंग- कवयित्री ने अंग्रेजों की राज्य हड़प करने की नीति का वर्णन किया है। अंग्रेज एक के बाद एक राज्य को अंग्रेजी राज्य में मिलाते चले गए।

व्याख्या- अंग्रेजों ने दिल्ली पर भी अपना अधिकार कर लिया। इसके बाद लखनऊ को भी अपने कब्जे में ले लिया। पेशवा को बिठूर में कैद कर लिया गया। अंग्रेजों ने नागपुर को कब्जे में करने के लिए अपनी घात लगाई। अंग्रेजों ने उदयपुर, तंजोर, सतारा, कर्नाटक आदि पर एक-एक करके अपना अधिकार कर लिया। सिंध, पंजाब आदि राज्य लावारिस हो चुके थे अर्थात् उनके राजा निःसंतान मर चुके थे। बंगाल, मद्रास आदि सभी की यही कहानी थी। हमने रानी की वीरता की गाथाएँ वीर बुंदेलों के मुख से सुनी थीं।

(9) रानी गई रनिवासों, बेगम गम से थी बेजार ….
उनके गहने कपड़े बिकते थे, कलकत्ते के बाज़ार,
सरे आम नीलाम छापते थे, अंग्रेजों के अखबार,
‘नागपुर के जेवर ले लो’ ‘लखनऊ के ले लो नौलख हार,

यों परदे की इज्जत,
परदेशी के हाथ बिकानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।

प्रसंग- इन पंक्तियों में कवयित्री ने कहा है कि भारतीय बेगमों के वस्त्र सरे आम नीलाम होते थे। इस प्रकार अंग्रेजों के हाथों भारतीय रानियों और बेगमों की सरे आम बेइज्जती हो रही थी।

व्याख्या- रानी लक्ष्मीबाई ने रनिवास में जाकर देखा की बेगम बहुत अधिक दुखी थी। बेगम के गहने और कपड़े कलकत्ते के बाजारों में सरे आम बिक रहे थे। अंग्रेज बेगमों के कपड़ों के लिए अखबार में विज्ञापन छापते थे। विज्ञापन इस तरह के होते थे ‘नागपुर के जेवर ले लो’, ‘लखनऊ का नौलखा हार ले लो’ इस प्रकार बेगमों की इज्जत को सरे आम नीलाम किया जाता था। यह कहानी हमने बुंदेलों के मुँह से सुनी थी।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 10 झाँसी की रानी

(10) कुटियों में थी विषम वेदना महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धून्दू पंत पेशवा, जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रणचंडी का कर दिया प्रकट आह्वान,
हुआ यज्ञ-प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

प्रसंग- इन पंक्तियों में कवयित्री ने अंग्रेजों के प्रति आम जनता में पनप रहे विद्रोह की ओर इशारा किया है। युद्ध की तैयारियों पर भी यहाँ प्रकाश डाला गया है।

व्याख्या- चाहे कुटिया में रहने वाला साधारण व्यक्ति हो चाहे महलों में रहने वाले, अपमानित व्यक्ति सभी अंग्रेजों के खिलाफ हो रहे थे। वीर सैनिकों के हृदय में अपने पुरखों का अभिमान झलक रहा था, नाना साहब और पेशवा बाजीराव युद्ध की तैयारियों में जुट गए थे। रानी लक्ष्मीबाई ने तो अंग्रेज़ों के खिलाफ रणचंडी का रूप ही धारण कर लिया था। भारतीयों को उनकी स्वतंत्रता दिलाने के लिए युद्ध की तैयारियां शुरू हो गईं। इस यज्ञ के द्वारा सोए हुए भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए जगाना ही एकमात्र उद्देश्य था। रानी लक्ष्मीबाई की वीरता के ये किस्से हमने बुंदेलों के मुँह से सुने थे।

(11) महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतन्त्रता की चिनगारी अन्तरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थीं,
मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी
जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियों में कवयित्री ने भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के लिए जन-जागरण अभियान का सुंदर चित्रण किया है।

व्याख्या- स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम आंदोलन के लिए महलों में रहने वाले राजाओं ने नेतृत्व की बागडोर संभाली। स्वतंत्रता की यह । चिंगारी हृदय के अंदर से उत्पन्न हुई थी। झाँसी, दिल्ली और लखनऊ में आजादी का बिगुल बज गया। मेरठ, कानपुर और पटना के लोग भी लड़ने के लिए कमर कस कर खड़े हो गए। जबलपुर और कोल्हापुर भी इस आंदोलन की लपटों से अछूता नहीं रहा। वहाँ भी आजादी के लिए हलचल शुरू हो गई। यह कहानी हमने बुंदेलों के मुँह से सुनी थी।

(12) इस स्वतन्त्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धून्दूपंत, तातिया, चतुर अजीमुल्ला सरनाम,
अहमद शाह मौलवी, ठाकुर कुँवर सिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास गगन में, अमर रहेंगे जिनके काम,

लेकिन आज जुर्म कहलाती,
उनकी जो कुर्बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी।

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बहार’ से संकलित ‘झाँसी की रानी’ शीर्षक कविता से ली गई हैं। जिसकी रचयिता सुप्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान हैं। कवयित्री ने इन पंक्तियों में अपने राजा, महाराजा एवं सामंतों के त्याग एवं बलिदान का चित्रण किया है।

व्याख्या- भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अनेक वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान किया। नाना साहब, तात्या टोपे, अजीमुल्ला, अहमद शाह मौलवी, ठाकुर कुँवर सिंह और न जाने कितने सैनिकों ने अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। ये वीर योद्धा भारतीय इतिहास में सदा चमकते रहेंगे। परन्तु अंग्रेज उनकी कुर्बानी को जुर्म कहते थे। वे इनको देश द्रोही मानते थे। हमने यह कहानी बुंदेलों के मुँह से सुनी थी।

(13) इनकी गाथा छोड़ चलें हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लैफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में,

ज़ख्मी होकर वॉकर भागा,
उसे अजब हैरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी॥

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बहार’ से संकलित ‘झाँसी की रानी’ शीर्षक कविता से ली गई हैं। जिसकी रचयिता सुप्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान हैं। कवयित्री ने इन पंक्तियों में लक्ष्मीबाई और अंग्रेजों के बीच युद्ध का वर्णन किया है।

व्याख्या- कवयित्री कहती है कि झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई झाँसी में अंग्रेजों के साथ बड़ी वीरता से लड़ी थी। लक्ष्मीबाई परुष वेष में किसी भी वीर पुरुष से अधिक वीरता के साथ अंग्रेजों से लड़ती रही। तभी लेफ्टिनेंट वॉकर वहाँ आ पहुँचा, वह अपने जवानों के साथ आगे बढ़ा। रानी ने अपनी तलवार से वॉकर पर हमला किया। बड़ा भयंकर युद्ध हुआ। लेफ्टिनेंट वॉकर वहाँ से घायल होकर भाग गया। वॉकर हैरान हो गया था कि इतनी वीरता से क्या कोई स्त्री भी लड़ सकती है। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की कथाएँ वीर बुंदेले लोगों को आज भी गा-गा कर सुनाते हैं। उनसे ही यह कथा सुनी गई है।

(14) रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थककर गिरा भूमि पर, गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना-तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार,

अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया
ने छोड़ी राजधानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी॥

प्रसंग- यहाँ पर कवयित्री ने रानी की विजय और उनके घोड़े के घायल होकर मरने का वर्णन किया है।

व्याख्या- रानी अंग्रेजी सेना के साथ युद्ध करते हुए आगे बढ़ती रही। लगभग सौ मील का सफर तय करके वह अपनी सेना के साथ कालपी पहुँच गई। लम्बे सफर के कारण रानी का घोड़ा थक गया। वह नीचे गिर पड़ा। गिरते ही उसके प्राण-पखेरू उड़ गए। यमुना के तट पर रानी का अंग्रेजों के साथ भयंकर युद्ध हुआ। यहाँ अंग्रेजों ने फिर रानी से हार खाई। रानी विजय प्राप्त करती हुई आगे बढ़ती रही। उनको देखकर ग्वालियर का राजा सिंधिया जो अंग्रेजों का मित्र था भाग खड़ा हुआ। रानी ने आसानी से ग्वालियर पर अपना अधिकार कर लिया। झाँसी की रानी वीरतापूर्वक लड़ते हुए एक के बाद एक स्थान को जीतती रही। बुंदेले रानी की कथा को गाकर जन-जन में प्रचारित करते हैं।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 10 झाँसी की रानी

(15) विजय मिली, पर अंग्रेजों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुँह की खाई थी,
काना और मुंदरा सखियाँ रानी के संग आई थीं,
युद्ध क्षेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी,

पर, पीछे यूरोज़ आ गया,
हाय! घिरी अब रानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी॥

प्रसंग- कवयित्री ने यहाँ रानी और अंग्रेजों के बीच युद्ध का वर्णन किया है। इस युद्ध में रानी की सखियों की वीरता का भी वर्णन है।

व्याख्या- रानी ने ग्वालियर पर विजय प्राप्त कर ली थी। अंग्रेजी सेना इकट्ठी होकर रानी से मुकाबला करने के लिए आ गई। रानी से मुकाबला करने के लिए जनरल स्मिथ आगे आया। उसको भी हार का मुँह देखना पड़ा। रानी के साथ युद्ध क्षेत्र में उसकी सखियाँ काना और मुंदरा भी थीं। उन्होंने बड़ी वीरता के साथ शत्रु की सेना के सैनिकों को गाजर मूली की तरह काट दिया था। युद्ध चल ही रहा था तभी पीछे से यूरोज़ अपनी सेना लेकर आ गया। उसने रानी को घेर लिया। भयंकर युद्ध होने लगा। बुंदेलों ने इस युद्ध का वर्णन किया है।

(16) तो भी रानी मार-काटकर चलती बनी सैन्य के पार,
किंतु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा नया घोड़ा था, इतने में आ गए सवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे होने लगे वार-पर-वार,

घायल होकर गिरी सिंहनी
उसे वीर-गति पानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी।

प्रसंग- कवयित्री ने यहाँ रानी और अंग्रेजों के बीच भयंकर युद्ध एवं रानी के चारों ओर से घिरकर घायल होने का वर्णन किया है।

व्याख्या- रानी चारों ओर से घिर आई थी। फिर भी वह शत्रु सेना में मार-काट मचाती हुई शत्रु सेना के बीच से निकल गई। तभी सामने नाला आ गया। रानी का पहला घोड़ा तो स्वर्ग सिधार गया था। नया घोड़ा अनाड़ी था जब तक रानी कुछ समझ पाती तब तक अंग्रेज सैनिक आ गए। रानी अकेली थी शत्रु अनेक थे। घमासान युद्ध होने लगा। रानी घायल होकर गिर पड़ी। रानी के वीर गति पाने का समय आ गया था। रानी की वीरता की गाथाएँ बुंदेले लोगों को गा-गाकर सुनाते हैं।

(17) रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज़ से तेज़, तेज़ की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेईस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता नारी थी,

दिखा गई पथ, सिखा गई
हमको जो सीख सिखानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी॥

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बहार’ में संकलित कविता ‘झाँसी की रानी’ से ली गई हैं। कवयित्री ने यहाँ रानी के बलिदान का वर्णन किया है।

व्याख्या- रानी स्वर्ग सिधार गई। रानी की अंतिम सवारी अब चिता ही थी। रानी का तेज़ चिता के तेज़ के साथ मिलकर एक हो गया। रानी इस तेज़ की सच्ची अधिकारिणी थी। रानी की उम्र उस समय तेईस वर्ष थी। तेईस वर्ष की आयु में ही रानी ने लोगों को बतला दिया कि स्वतंत्रता के लिए कैसे बलिदान दिया जाता है। रानी लक्ष्मीबाई वीरता का अवतार थी। वह साधारण स्त्री नहीं थी। रानी आने वाली पीढ़ी को स्वतंत्रता का पाठ पढ़ा गई। उसने भारतीय लोगों को स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। रानी का बलिदान लोगों को नया पाठ पढ़ा गया। रानी के बलिदान और उसकी वीरता की कहानियाँ वीर बुंदेलों के मुख से आज भी सुनी जाती हैं।

(18) जाओ रानी, याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनाशी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय मिटा दे, गोलों से चाहे झाँसी,

तेरा स्मारक तू ही होगी,
तू खुद अमिट निशानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।

प्रसंग- कवयित्री ने इन पंक्तियों में लक्ष्मीबाई के अमर बलिदान को हर हाल में याद रखने की बात कही है।

व्याख्या- कवयित्री कहती हैं कि हे रानी! तुमने भारत के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। भारतवासी तुम्हारे इस बलिदान को कभी नहीं भुला पाएंगे। तुम्हारा यह बलिदान भारतीयों के हृदय में ऐसी स्वतंत्रता की अलख जगाएगा, जो कभी नष्ट न हो सके। इतिहास चाहे तुम्हारे बारे में कुछ भी न कहे चाहे सत्य को कोई माने या न माने परन्तु तुम भारतीयों के हृदय में बसी रहोगी। तुम्हारी यह याद ही तुम्हारा स्मारक होगा तुम मिटने वाली निशानी नहीं हो। हमने तुम्हारी वीरता की यह कहानी बुंदेलों के मुख से सुनी थी।

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झाँसी की रानी Summary

कविता का सार

राजवंशों में अंग्रेजों की राज्य हड़पने की नीति से हलचल मच गई थी। बूढ़े भारत में फिर से जागृति आ गई थी। लोग आजादी की कीमत पहचानने लगे थे। सन् अट्ठारह सौ सत्तावन का संग्राम शुरू हो गया था। रानी लक्ष्मीबाई कानपुर के नाना साहब की मुँह बोली बहिन थी। वह अपने पिता की अकेली संतान थी। उसकी हथियारों के साथ अच्छी दोस्ती थी। शिवाजी की वीरता की कहानियाँ उसको जुबानी याद थीं। उसकी वीरता को देखकर मराठे पुलकित हो जाते थे। उसे नकली युद्ध करना, चक्रव्यूह बनाना और शिकार खेलना अच्छा लगता था। वह महाराष्ट्र कुल की देवी ‘भवानी’ की पूजा करती थी। झाँसी के राजा गंगाधर राव के साथ लक्ष्मीबाई का विवाह हुआ था। लक्ष्मीबाई के झाँसी में रानी बनकर आने से प्रसन्नता छा गई। परन्तु थोड़े दिन बाद ही गंगाधर राव की मृत्यु हो जाने से रानी विधवा हो गई। राजा के निःसंतान मरने का रानी को बहुत शोक हुआ। डलहौजी ने झाँसी को अपने राज्य में मिलाने की चाल चली। उसने झाँसी पर अपना झंडा फहरा दिया। डलहौजी ने दिल्ली, लखनऊ, नागपुर, उदयपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक सभी पर अधिकार कर लिया। रानी ने अपनी झाँसी प्राप्त करने के लिए युद्ध की घोषणा कर दी। रानी लक्ष्मीबाई ने वॉकर को तलवार के वार से घायल कर दिया। रानी आगे बढ़ती हुई कालपी तक पहुंच गई। रानी का घोड़ा भी मर गया। यमुना के तट पर अंग्रेजों ने रानी से हार खाई। अंग्रेजों का मित्र सिंधिया राजधानी छोड़कर चला गया। अंग्रेजों की विशाल सेना ने फिर से रानी को घेर लिया। रानी की सहेलियों ने भी वीरतापूर्वक अंग्रेजों के साथ युद्ध किया। पीछे से यूरोज ने आकर रानी को घेर लिया था। रानी मार-काट करती हुई आगे बढ़ती रही। संकट के समय रानी का नया घोड़ा धोखा दे गया। रानी चारों ओर से घिर गई। वह वीरगति को प्राप्त होकर अपना नाम अमर कर गई। हम झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के इस बलिदान को नहीं भुला सकते।

शब्दार्थ

भृकुटी – भौंह, गुमी – खोई, फ़िरंगी – विदेशी, अंग्रेज़, भारत में यह, बुंदेले हरबोलों – बुंदेलखंड की एक जाति विशेष, शब्द, अंग्रेज़ों के लिए प्रयुक्त जो राजा-महाराजाओं के यश गाती थी, छबीली – सुंदर, गाथा – कहानी, आराध्य – आराधना करने योग्य, भवानी – पार्वती, व्यूह रचना – समूह, युद्ध में सुदृढ़ रक्षा-पंक्ति बनाने, पुलकित – प्रसन्न के उद्देश्य से सैनिकों का किसी विशेष क्रम में खड़ा होना, सुभट – रणकुशल, योद्धा, विरुदावली – विस्तृत कीर्ति गाथा, बड़ाई, बधाई – प्रसन्नता के (शुभ) गीत, मुदित – मोदयुक्त, आनंदित, हरषाया – प्रसन्न हुआ, विकट – भयंकर, दुर्गम, कठिन, घात – छल, चाल, बिसात – सामर्थ्य, विरान – उजाड़, व्रज निपात – गिरना, पतन/विपत्ति टूटना, बेज़ार – परेशान, आह्वान – बुलावा, आमंत्रण, ज्वाला – आग, वेदना – पीड़ा, दिव्य – बढ़िया, भव्य, काम आना – युद्ध में मारा जाना, शहीद होना, द्वंद्व – संघर्ष, निरंतर – लगातार, अभिराम – सुंदर, मोहक, समाधि – चिता पर बनाया गया स्मारक, कुरबानी – बलिदान, त्याग, कालगति – मृत्यु, अपार – जिसका पार न हो, असीम, असंख्य, मनुज – मनुष्य

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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 9 टिकट अलबम

These NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 9 टिकट अलबम Questions and Answers are prepared by our highly skilled subject experts.

टिकट अलबम NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 9

Class 6 Hindi Chapter 9 टिकट अलबम Textbook Questions and Answers

कहानी से

प्रश्न 1.
अलबम पर किसने और क्यों लिखा? इसका असर क्लास के दूसरे लड़के-लड़कियों पर क्या हुआ ?
उत्तर:
अलबम के पहले पृष्ठ पर मोती जैसे अक्षरों में नागराजन के मामा ने लिख भेजा था
ए० एम० नागराजन,
‘इस अलबम को चुराने वाला बेशर्म है। ऊपर लिखे नाम को कभी देखा है ? यह अलबम मेरा है। जब तक घास हरी है और कमल लाल; सूरज जब तक पूर्व से उगे और पश्चिम में छिपे, उस अनंत काल तक के लिए यह अलबम मेरा है, रहेगा।’ लड़कों ने इसे अपने अलबम में उतार लिया। लड़कियों ने झट कापियों और किताबों में टीप लिया।

प्रश्न 2.
नागराजन के अलबम के हिट हो जाने के बाद राजप्पा के मन की क्या दशा हुई ?
उत्तर:
राजप्पा अब बहुत दुखी रहो लगा था। वह नागराजन के अलबम की तारीफ सुनकर कुढ़ जाता था। राजप्पा को अब स्कूल जाना अच्छा नहीं लगता था। अब वह घर में ही घुसा रहता था। वह दिन में कई बार अलबम को उलट-पलट कर देखता रहता। रात में भी वह लेटे-लेटे उठ जाता और ट्रंक खोलकर अलबम देखने लगता। वह अपने मन में सोचने लगा था कि शायद अब उसका अलबम कूड़ा हो गया है।

प्रश्न 3.
अलबम चुराते समय राजप्पा किस मानसिक स्थिति से गुजर रहा था ?
उत्तर:
अलबम चुराते समय राजप्पा का दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था। वह बहुत घबरा रहा था कहीं कोई देख न ले। घर जाकर भी उसको ऐसा लग रहा था जैसे उसका सारा शरीर जल रहा हो। उसने रात में खाना भी नहीं खाया।

प्रश्न 4.
राजप्पा ने नागराजन का टिकट अलबम अंगीठी में क्यों डाल दिया ?
उत्तर:
राजप्पा ने सोचा कि अब नागराजन के पिता पुलिस में शिकायत करेंगे और पुलिस आकर उसे पकड़ लेगी। ‘अपू’ ने राजप्पा को बहुत डरा दिया था। जब राजप्पा की माँ ने किवाड़ खटखटाया तो राजप्पा ने समझा कि पुलिस आ गई है। उसने हड़बड़ाहट में वह अलबम अंगीठी में डाल दिया जिससे पुलिस को अलबम का पता न चले।

प्रश्न 5.
लेखक ने राजप्पा के टिकट इकट्ठा करने की तुलना मधुमक्खी से क्यों की ?
उत्तर:
जिस प्रकार मधुमक्खी सारा दिन दूर-दूर घूमकर शहद की एक-एक बूंद इकट्ठा करती है उसी प्रकार राजप्पा भी सारा दिन मेहनत करके दूर-दूर से एक-एक टिकट इकट्ठा करके लाता था।

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कहानी से आगे

प्रश्न 1.
टिकटों की तरह बच्चे और बड़े भी दूसरी चीजों को जमा करते हैं, सिक्के उनमें से एक हैं ?
क्या तुम और ऐसी चीजें सोच सकते हो जिन्हें जमा किया जा सके, उनके नाम लिखो ?
उत्तर:
प्ले कॉर्ड, ग्रीटिंग कार्ड, पत्थर, पैन, पुस्तकें आदि को जमा किया जा सकता है।

प्रश्न 2.
टिकट अलबम का शौक रखने वाले राजप्पा और नागराजन के तरीके में क्या फर्क है ? आप अपने शौक को पूरा करने के लिए कौन सा मॉडल अपनाएंगे?
उत्तर:
राजप्पा का टिकट एलबम उसकी मेहनत से एक-एक टिकट इकट्ठा करके तैयार किया गया था, उसके पास बहुत-सी टिकटें थीं जबकि नागराजन का एलबम उसके मामा द्वारा भेजा गया था। अपना शौक पूरा करने के लिए हम अपने आप टिकटों को एकत्र करना चाहेंगे।

प्रश्न 3.
इकट्ठा किए हुए टिकटों का अलग-अलग तरह से वर्गीकरण किया जा सकता है। जैसे देश के आधार पर ही। और आधार सोचकर लिखो।
उत्तर:
महापुरुषों की श्रेणी का भी एक आधार हो सकता है जैसे-राजनैतिक नेता, स्वतंत्रता सेनानी इसके अतिरिक्त खिलाड़ी एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में ख्याति प्राप्त व्यक्ति।

प्रश्न 4.
कई लोग चीजें इकट्ठा कर ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज करवाते हैं। इसके पीछे उनकी क्या प्रेरणा होती होगी ? सोचो और अपने दोस्तों से इस पर बातचीत करो।
उत्तर:
चीजें इकट्ठा कर ‘गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ में अपना नाम दर्ज कराने के पीछे कुछ अलग करके दिखाने की प्रेरणा काम कर रही होती है। इससे प्रेरित होकर ही व्यक्ति ऐसे कामों को करता है। उसको ऐसा करने की धुन सवार हो जाती है।

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अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
राजप्पा अलबम को जलाए जाने की बात नागराजन को क्यों नहीं कह पाता है ? अगर वह कह देता तो कहानी के अंत पर कुछ फ़र्क पड़ता ? कैसे ?
उत्तर:
यदि राजप्पा एलबम को जलाए जाने की बात नागराजन को बता देता तो दोनों में शत्रुता हो जाती और नागराजन राजप्पा से घृणा करने लगता।

प्रश्न 2.
‘ऑस्ट्रेलिया के दो टिकटों के बदले फ़िनलैंड का एक टिकट लेता। पाकिस्तान के दो टिकटों के बदले एक रूस का।’ वह ऐसा क्यों करता था ?
उत्तर:
जो टिकट उसके पास अधिक होते थे वह उन टिकटों के बदले उन देशों के टिकटों को ले लेता था जो उसके पास उपलब्ध नहीं होते थे। वह दुर्लभ टिकट को प्राप्त करने के लिए अधिक टिकट भी दे देता था।

प्रश्न 3.
कक्षा के बाकी विद्यार्थी स्वयं अलबम क्यों नहीं बनाते थे ? वह राजप्पा और नागराजन के अलबम के दर्शक मात्र क्यों रह जाते हैं ? अपने शिक्षक को बताओ।
उत्तर:
सभी विद्यार्थियों को कुछ नया काम करने का शौक नहीं होता। वे अधिक मेहनत भी नहीं करना चाहते। वे दूसरों की वस्तुओं को देखकर ही प्रसन्न हो लेते हैं।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों को कहानी में ढूँढ़कर उनका अर्थ समझो। अब स्वयं सोचकर इनसे वाक्य बनाओ-
खोंसना, जमघट, टटोलना, कुढ़ना,
अगुआ, पुचकारना, खलना, हेकड़ी
उत्तर:
खोंसना : रामदयाल ने अपनी फटी कमीज पैंट में खोंस ली।
जमघट : सड़क पर पड़े घायल व्यक्ति के चारों और जमघट लग गया।
टटोलना : मैंने पूरी अलमारी टटोल ली पर कहीं कुछ नहीं मिला।
कुढ़ना : जो दूसरों को सुखी नहीं देखना चाहते वे अक्सर कुढ़ते रहते हैं।
अगुआ : गाँधी जी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अगुआ थे।
पुचकारना : माँ ने मोहन को पुचकारकर रोने का कारण पूछा।
खलना : मुझे परीक्षा के दिनों में मेहमानों का घर पर आना खलता है।
हेकड़ी : दो थप्पड़ पड़ते ही रामू सारी हेकड़ी भूल गया।

प्रश्न 2.
कहानी से व्यक्तियों या वस्तुओं के लिए प्रयुक्त हुए ‘नहीं’ अर्थ देने वाले शब्दों (नकारात्मक विशेषण) को छाँटकर लिखो। उनका उल्टा अर्थ देने वाले शब्द भी लिखो।
उत्तर:
राजप्पा को कोई नहीं पूछता, अलबम को कोई पूछने वाला नहीं था। किसी को हाथ नहीं लगाने देता, राजप्पा नहीं माना, अलबम की बात तक नहीं करता, अलबम देखने की इच्छा कभी नहीं प्रकट की। कृष्णन भी कम नहीं था इतना बड़ा अलबम नहीं है।

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कुछ करने को

प्रश्न 1.
मान लो कि स्कूल में तुम्हारी कोई प्रिय चीज़ खो गई है। तुम चाहते हो कि जिसे वह चीज़ मिले वह तुम्हें लौटा दे। इस संबंध में स्कूल के बोर्ड पर लगाने के लिए एक नोटिस तैयार करो जिसमें निम्नलिखित बिंदु हों-
(क) खोई हुई चीज़ का वर्णन
(ख) कहाँ खोई
(ग) मिल जाने पर कहाँ लौटाई जाए
(घ) नोटिस लगाने वाले/वाली का नाम और कक्षा
उत्तर:
कल दिनांक 5-7-06 को पी०टी० के पीरियड़ में मेरी घड़ी कहीं गुम हो गई। मेरी घड़ी सुनहरे रंग की है तथा वह एच.एम. टी. कम्पनी की है। उस घड़ी में सुनहरे रंग की चेन है। वह खेल के मैदान में कहीं गिर गई है यदि वह किसी को मिले तो कृपया उसे प्रधानाचार्य कक्ष में दे दें।
धन्यवाद।

भवदीय
सुभाष चंद्र गुप्ता
कक्षा IX ‘अ’
दिनांक : 5-7-06

प्रश्न 2.
डाक टिकटों के बारे में और जानना चाहते हो तो नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली से छपी पुस्तक ‘डाक टिकटों की कहानी’ पढ़ो।
उत्तर:
छात्र अपने पुस्तकालयाध्यक्ष को यह पुस्तक मँगाने के लिए कहें।

सुनना-सुनाना

1. राजप्पा और नागराजन की तरह क्या तुम भी कोई गंभीर शौक रखते हो ? उससे जुड़े किस्से सुनाओ।
2. कुछ कहानियाँ सुखांत होती हैं और कुछ कहानियाँ दुःखांत होती हैं। इस कहानी के अंत को तुम क्या मानोगे ? बताओ।
उत्तर:
इस कहानी का अंत सुखांत है।

पढ़ो और समझो

  • कुढ़ता चेहरा
  • भूखा चेहरा
  • घमंडी चेहरा
  • अपमानित चेहरा
  • ईर्ष्यालु चेहरा
  • चालबाज़ चेहरा
  • भयभीत चेहरा
  • रुआँसा चेहरा

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महत्त्वपूर्ण गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. अब राजप्पा के अलबम को कोई पूछने वाला नहीं था। वाकई उसकी शान अब घट गई थी। राजप्पा के अलबम की, लड़कों में काफी तारीफ रही थी। मधुमक्खी की तरह उसने एक-एक करके टिकट जमा किये थे। उसे तो बस एक यही धुन सवार थी। सुबह आठ बजे वह घर से निकल पड़ता। टिकट जमा करने वाले लड़कों के चक्कर लगाता। दो ऑस्ट्रेलिया के टिकटों के बदले एक फिनलैंड का टिकट लेता। दो पाकिस्तान के बदले एक रूस का। बस शाम, जैसे ही घर लौटता, बस्ता कोने में पटककर अम्मा से चबेना लेकर निकर की जेब में भर लेता और खड़े-खड़े कॉफी पीकर निकल जाता। चार मील दूर अपने दोस्त के घर से कनाडा का टिकट लेने पगडंडियों में होकर भागता। स्कूल भर में उसका अलबम सबसे बड़ा था। सरपंच के लड़के ने उसके पच्चीस रुपये लगाये थे।

प्रसंग- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वसंत’ भाग-1 में संकलित पाठ ‘टिकट अलबम’ से लिया है। इस पाठ के लेखक ‘सुंदरा रामस्वामी’ जी हैं। इस पाठ का तमिल से हिन्दी में अनुवाद ‘सुमति अय्यर’ ने किया है।

व्याख्या- नागराजन के अलबम के आने के बाद राजप्पा के अलबम का महत्त्व कम हो गया है। अब उसकी शान उतनी नहीं रही जितनी नागराजन के अलबम की है। राजप्पा के अलबम की पहले बहुत तारीफ हुआ करती थी। लड़के राजप्पा के अलबम को देखने के लिए झपट पड़ते थे। राजप्पा एक-एक टिकट के लिए इतनी मेहनत करता था जितनी मेहनत मधुमक्खी शहद जुटाने में करती है। उसको टिकट इकट्ठा करने की धुन सवार थी। वह सुबह घर से निकलकर टिकट इकट्ठा करने वाले लड़कों के चक्कर लगाता रहता था। वह उनको कोई टिकट देकर बदले में अन्य टिकट ले लेता था जैसे-दो आस्ट्रेलिया के टिकटों के बदले एक फिनलैंड का। दो पाकिस्तान के बदले एक रूस का। राजप्पा शाम को घर आता और अम्मा से खाने को चबेना वगैरह लेकर अपनी जेबों में भरकर टिकट इकट्ठे करने के लिए निकल पड़ता था। वह चार-चार मील तक भी अपने दोस्तों के पास कनाड़ा का टिकट लेने चला जाता था। स्कूल में उसका अलबम सबके अलबम से बड़ा था।

2. राजप्पा मन ही मन कुढ़ रहा था। स्कूल जाना अब खलने लगा था; और लड़कों के सामने जाने में शर्म आने लगी आम- तौर पर शनिवार और रविवार को टिकट की खोज में लगा रहता, परन्तु अब घर-घुसा हो गया था। दिन में कई बार अलबम को पलटता रहता। रात को लेट जाता। सहसा जाने क्या सोचकर उठता, ट्रंक खोलकर अलबम निकालता और एक बार पूरा देख जाता। उसे अलबम से चिढ़ होने लगी थी। उसे लगा, अलबम वाकई कूड़ा हो गया है।

प्रसंग- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वसंत’ में संकलित पाठ ‘टिकट अलबम’ से लिया है। जिसके लेखक ‘सुंदरा स्वामी’ हैं। टिकट अलबम का तमिल भाषा से हिन्दी में अनुवाद ‘सुमति अय्यर’ ने किया है।

व्याख्या- जब से नागराजन का अलबम आया और राजप्पा के अलबम का महत्त्व कम हो गया तब से राजप्पा अपने मन ही मन नागराजन से ईर्ष्या का भाव रखने लगा था। अब उसे स्कूल जाना भी अच्छा नहीं लगता था। लड़कों के सामने जाने में वह अपमानित महसूस करने लगा था। पहले राजप्पा शनिवार और रविवार के दिन टिकटों की खोज में दौड़ता रहता था परन्तु अब वह घर से बाहर ही नहीं निकलता था। वह अपने अलबम को उठाकर दिन में उसे कई-कई बार पलटता था। रात को लेटे-लेटे अचानक उठ जाता फिर ट्रंक खोलकर अलबम देखने लगता था। उसकी स्थिति अजीब-सी हो गई थी। उसे अपने अलबम से चिढ़ होने लगी थी। वह भी अब सोचने लगा था कि शायद उसका अलबम कूड़ा ही है।

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टिकट अलबम Summary

पाठ का सार

आजकल सभी लड़के नागराजन को घेरे रहते, राजप्पा को कोई नहीं पूछता था। नागराजन के मामा जी ने सिंगापुर से एक अलबम भिजवाया था। राजप्पा सभी लड़कों को कहता फिरता कि नागराजन घमण्डी हो गया है। लेकिन लड़के उसकी बातों पर ध्यान नहीं देते थे। सुबह पहली घंटी के बजने तक सभी लड़के नागराजन को घेरकर उसका अलबम देखा करते थे। आधी छुट्टी के समय भी उसके पास लड़कों की भीड़ लगी रहती। नागराजन सभी को अपना अलबम गोद में रखकर दिखाता पर किसी को हाथ नहीं लगाने देता। लड़कों के अलावा कक्षा की लड़कियाँ भी अलबम को देखने के लिए उत्सुक रहती थीं। पार्वती लड़कियों की अगुवा बनी और अलबम माँगने आयी। नागराजन ने उसे अपना अलबम दे दिया। शाम तक लड़कियों ने अलबम देखकर वापिस कर दिया।

राजप्पा की शान घट गयी थी। राजप्पा के अलबम की लड़कों में काफी तारीफ रही। स्कूल भर में उसका अलबम सबसे बड़ा था। सरपंच के लड़के ने उसके अलबम को पच्चीस रुपये में खरीदना चाहा लेकिन राजप्पा नहीं माना। उसने बड़बड़ाकर तीखा जवाब दिया, तुम्हारे घर में जो प्यारी बच्ची है उसे दो न तीस रुपये में। लेकिन अब उसके अलबम की कोई बात नहीं करता। अब सभी उसके अलबम की तुलना नागराजन के अलबम से करने लगे। सब कहने लगे राजप्पा.का अलबम फिसड्डी है। लेकिन राजप्पा ने नागराजन के अलबम को देखने की इच्छा कभी नहीं की। जब दूसरे लड़के देखते तो वह नीची आँखों से देख लेता। सचमुच नागराजन का अलबम बहुत प्यारा था। अलबम के पहले पृष्ठ पर मोती जैसे अक्षरों में उसके मामा ने लिख भेजा था- ए०एम० नागराजन इस अलबम को चुराने वाला बेशर्म है, जब तक घास हरी है और कमल लाल। सूरज जब तक पूर्व से उगे और पश्चिम में छिपे उस अनंत काल के लिए यह अलबम मेरा है और रहेगा।

लड़कों ने इसे अपने अलबम में उतार लिया और लड़कियों ने किताबों, कापियों में टीप लिया। तुम लोग नकल करते हो नकलची कहीं के। राजप्पा ने लड़कों को घुड़की दी। सब चुप रहे लेकिन कृष्णन से नहीं रहा गया। जा जलता है ईर्ष्यालु कहीं का। मैं काहे जलूँ जले तेरा खानदान। मेरा अलबम उसके अलबम से कहीं बड़ा है, राजप्पा ने शान बघारी। राजप्पा को लगा अपने अलबम के बारे में बातें करना फालतू है उसने कितनी मेहनत और लगन से टिकट बटोरे हैं। सिंगापुर से आए एक पार्सल ने नागराजन को एक ही दिन में मशहूर कर दिया। पर दोनों में कितना अंतर है, राजप्पा मन ही मन कुढ़ रहा था। स्कूल जाना अब उसे खलने लगा। दिन में कई बार अलबम को निकालकर देखता और रात को लेट जाता। उसे अलबम से चिढ़ होने लगी, उसे लगा कि अलबम कूड़ा हो गया है।

एक दिन शाम को वह नागराजन के घर गया। नागराजन के हाथ अचानक एक अलबम लगा वह क्या समझे कि एक-एक टिकट की क्या कीमत होती है। फिर सोचता होगा जितना बड़ा टिकट होगा उतना ही कीमती होगा। उसके पास जितने भी टिकट हैं उन्हें टरका कर नए टिकट ले लेगा। कितनों को तो उसने यूँही उल्लू बनाया। कितनी चालबाजी करनी पड़ती है फिर भला नागराजन किस खेत की मूली है। राजप्पा नागराजन के घर पहुँचकर ऊपर गया। वह मेज के पास पड़ी कुर्सी पर बैठ गया। थोड़ी देर बाद नागराजन की बहिन कामाक्षी ऊपर आयी बोली-भैया शहर गया है। अरे हाँ! तुमने भैया का अलबम देखा उसने पूछा, हूँ उसे हाँ कहने में शर्म आ रही थी बहुत सुन्दर अलबम है ना। सुना है स्कूल भर में किसी के पास इतना बड़ा अलबम नहीं है। तुमसे किसने कहा! भैया ने कहा! वह कुढ़ गया। कामाक्षी कुछ देर वहीं पर रही फिर वह नीचे चली गयी। राजप्पा मेज पर पड़ी किताबों को टटोलने लगा। अचानक उसका हाथ दराज के ताले से टकराया। उसने ताले को खींचा, ताला बंद था। उसने वहीं मेज पर चाबी ढूंढ़ निकाली और दराज खोल लिया। फिर सीढ़ियों के पास जाकर झाँककर देखा फिर जल्दी में दराज खोली, अलबम ऊपर ही रखा हुआ था पहला पृष्ठ खोला और पढ़ा। उसकी धड़कन तेज होने लगी। उसने अलबम कमीज में खोंस लिया और दराज बंद करके घर की ओर भागा। घर जाकर सीधा पुस्तक की अलमारी के पीछे अलबम छुपा दिया। उसका गला सूख रहा था और चेहरा तमतमाने लगा।

रात को आठ बजे अप्पू घर आया और बोला सुना तुमने नागराजन का अलबम खो गया। हम दोनों शहर गए हुए थे, लौटकर देखा तो अलबम गायब। राजप्पा चुप रहा। उसने किसी तरह से अप्पू को टालकर दरवाजा बंद कर लिया, और अलमारी के पीछे से अलबम निकालकर देखा, उसे फिर छिपा दिया। डर था कि कहीं कोई देख न ले। रात में उसने खाना नहीं खाया उसने सोने की कोशिश की पर नींद नहीं आयी। अलबम तकिये के नीचे रखकर सो गया। सुबह अप्पू दोबारा आया। नागराजन तब भी बिस्तर पर बैठा हुआ था। अप्पू नागराजन के घर होकर आया था। अप्पू ने पूछा कल तुम उसके घर गए थे ? राजप्पा की साँस ऊपर की ऊपर नीचे की नीचे रह गयी और फिर सिर हिला दिया। कामाक्षी ने कहा था कि हमारे जाने के बाद केवल तुम वहाँ पर थे। अब सब उसी पर शक करने लगे हैं। अप्पू ने कहा शायद उसके पापा पुलिस को खबर दें। उसके पापा डी०एस०पी० के दफ्तर में तो काम करते ही हैं। पलक झपक दें, पुलिस की फौज हाजिर! अप्पू जैसे आग में घी डाल रहा था, तभी बाहर की सांकल खटकी। ‘पुलिस’ राजप्पा डर गया। भीतर सांकल लगी थी। दरवाजा खटकने की आवाज तेज हो गयी। राजप्पा ने तकिये के नीचे से अलबम उठाया और ऊपर भागा, अलबम को अलमारी के पीछे छिपाने के लिए। डर था कि पुलिस ने तलाशी ली तो पकड़ा जाएगा। अलबम को कमीज के नीचे छुपाकर वह नीचे आ गया दरवाजा अब भी बज रहा था। कौन है! दरवाजा खोलता क्यों नहीं अम्मा भीतर से चिल्लाई। राजप्पा पिछवाड़े की ओर भागा और बाथरूम में घुसकर दरवाजा बंद कर लिया। अम्मा ने अँगीठी पर गरम पानी की देगची चढ़ा रखी थी। उसने अलबम को अँगीठी में डाल दिया। अलबम जलने लगा। कितने प्यारे टिकट थे, राजप्पा की आँखों में आँसू आ गए।

तभी अम्मा ने आवाज लगायी। जल्दी नहाकर आ नागराजन तुझे ढूँढ़ता हुआ आया है। राजप्पा कपड़े बदल कर ऊपर आ गया। नागराजन कुर्सी पर बैठा हुआ था बोला मेरा अलबम खो गया है यार! उसका चेहरा काफी उतरा हुआ था शायद काफी रोकर आया था कहाँ रखा था तुमने राजप्पा ने पूछा। शायद दराज में: शहर से लौटा तो गायब। नागराजन की आँखों में आँसू आ गए। राजप्पा से आँखें बचाकर उसने आँखें पोंछ लीं। रो मत यार राजप्पा ने उसे पुचकारा। राजप्पा नीचे गया हाथ में अपना अलबम लिये ऊपर आया बोला यह लो मेरा अलबम। अब तुम इसे रख लो। मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ सच कह रहा हूँ। ‘बहला रहे हो यार’ । नहीं यार सचमुच तुम्हें दे रहा हूँ। राजप्पा अपनी बात बार-बार दोहरा रहा था। उसका गला भर आया। ठीक है मैं इसे रख लेता हूँ। पर तुम्हें एक भी टिकट नहीं चाहिए, नहीं! तुम कैसे रहोगे बगैर टिकट के। रोता क्यों है यार, इस अलबम को तू ही रख ले, इतनी मेहनत की है तूने, नागराजन बोला। नहीं तुम रख लो इसे लेकर चले जाओ यहाँ से वह चीखा और फूट-फूटकर रो दिया। नागराजन अलबम लेकर नीचे उतर गया। कमीज से आँखों को पोंछता हुआ राजप्पा भी नीचे उतर आया। बहुत-बहुत धन्यवाद! मैं घर चलूँ? नागराजन सीढ़ियाँ उतरने लगा। सुनो राजू! राजप्पा ने पुकारा, नागराजन ने उसे पलटकर देखा। अलबम दे दो मैं आज रात जी भरकर इसे देख लूँ कल सुबह तुम्हें दे जाऊँगा। ठीक है, नागराजन ने उसका अलबम लौटा दिया। राजप्पा ऊपर आया उसने दरवाजा बंद कर लिया और अलबम को छाती से लगाकर फूट-फूटकर रो दिया।

शब्दार्थ:
अलबम – चित्र संग्रह, सरपंच – पंचों का मुखिया, मेहनत – परिश्रम, शक – संदेह, देगची – चौड़े मुँह एवं छोटे पेट का एक बर्तन, घमंडी – अहंकारी, जमघट – आदमियों की भीड़, जमाव, टोली – मंडली, झुंड, उत्सुक – इच्छुक, अगुबा – नेता, चबेना – चबाकर खाने वाली खाद्य सामग्री, वाकई – वास्तव में, पगडंडी – खेत या मैदान में पैदल चलने वालों, तारीफ – बड़ाई के लिए बना पतला रास्ता, फिसड्डी – काम में पीछे रह जाने वाला, तीखा – गुस्से से भरा, टीपना – हू-ब-हू उतारना, नकल करके लिखना, अंनत – जिसका कोई अंत नहीं, बघारना – पांडित्य दिखाने के लिए किसी विषय, कुढ़ना – ईर्ष्या करना की चर्चा करना, कोरस – एक साथ मिलकर गाना, टरकाकर – बहाना बनाकर, मशहूर – प्रसिद्ध, जाना-माना, खलना – अखरना, देगची – चौड़े मुँह एवं छोटे पेट का बर्तन, टरकाना – खिसका देना, टाल देना, हेकड़ी – ज़बरदस्ती, बलात कुछ करने की प्रवृत्ति, भेड़ लेना – भिड़ा देना, सटा देना, बंद करना, आग में घी डालना – क्रोध या झगड़े को बढ़ाना, साँकल – दरवाज़ा बंद करने के लिए लगाई जाने वाली लोहे की कड़ी

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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 8 ऐसे-ऐसे

These NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 8 ऐसे-ऐसे Questions and Answers are prepared by our highly skilled subject experts.

ऐसे-ऐसे NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 8

Class 6 Hindi Chapter 8 ऐसे-ऐसे Textbook Questions and Answers

एकांकी से

प्रश्न 1.
‘सड़क के किनारे एक सुंदर फ्लैट में बैठक का दृश्य। उसका एक दरवाज़ा सड़क वाले बरामदे में खुलता है …… उस पर एक फ़ोन रखा है। इस बैठक की पूरी तस्वीर बनाओ।
उत्तर:
छात्र स्वयं करेंगे।

प्रश्न 2.
माँ मोहन के ऐसे-ऐसे कहने पर क्यों घबरा रही थी ?
उत्तर:
माँ का घबराना स्वाभाविक था क्योंकि मोहन कुछ बताता ही नहीं था बस ऐसे-ऐसे किए जा रहा था। माँ ने सोचा पता नहीं यह कौन-सी बीमारी है और कितनी भयंकर है। इसलिए मोहन की माँ घबरा गई थी।

प्रश्न 3.
ऐसे कौन-कौन से बहाने होते हैं जिन्हें मास्टर जी एक ही बार में सुनकर समझ जाते हैं ? ऐसे कुछ बहानों के बारे में लिखो।
उत्तर:
ऐसे अनेक बहाने होते हैं जैसे आज स्कूल में कुछ नहीं होगा बस सफाई कराई जाएगी। कुछ छात्र कहते हैं कि मैं रात में पढ़ाई कर रहा था मेरी किताब और कापी वहीं छूट गई। कभी-कभी छात्र किसी दूर के रिश्तेदार की बीमारी का बहाना बना लेते हैं।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 8 ऐसे-ऐसे

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
जब तुम्हारी तबीयत खराब होती है तो तुम्हारे घरवालों का व्यवहार तुम्हारे प्रति कैसा रहता है ? इसे शिक्षक को बताओ।
उत्तर:
जब हमारी तबीयत खराब होती है तो हमारे घरवाले बेहद परेशान हो जाते हैं पहले तो वे घर में रखी कोई चीज देते हैं जिससे तबीयत ठीक हो जाए। वे तुरंत डॉक्टर को बुलाते हैं। वे कभी कुछ पूछते हैं कभी कुछ। जब तक आराम नहीं आ जाता वे खाना-पीना तक भूल जाते हैं।

प्रश्न 2.
मान लो कि तुम मोहन की तबीयत पूछने जाते हो। तुम अपने और मोहन के बीच की बातचीत को संवाद के रूप में लिखो।
उत्तर:
अरे मोहन! तुम्हारी कैसी तबीयत है ?
मोहन : मेरे पेट में बहुत दर्द है।
तुमने कल क्या खाया था ?
मोहन : कल तो मैंने कुछ भी नहीं खाया।
जब कुछ भी नहीं खाया तो दर्द कैसे हो गया।
मोहन : पता नहीं कैसे हो गया यार।
किसी डॉक्टर को दिखाया या नहीं ?
मोहन : हाँ डॉक्टर को दिखाया है वे दवाई दे गए हैं चलो अच्छा है जल्दी ही ठीक हो जाओगे।

प्रश्न 3.
‘नाटक’ शब्द का आम जिंदगी में कब-कब इस्तेमाल किया जाता है ? सोचकर लिखो।
उत्तर:
नाटक शब्द का आम जिंदगी में तब इस्तेमाल किया जाता है जब हमें कोई बहाना बनाना होता है।

प्रश्न 4.
संकट के समय के लिए कौन-कौन से नंबर याद रखे जाने चाहिए। पुलिस, फायर ब्रिगेड और डॉक्टर से तुम कैसे बात करोगे?
उत्तर:
संकट के समय पुलिस, फायर बिग्रेड़ और हॉस्पिटल एवं चिकित्सक के नंबर याद रखे जाने चाहिए। यदि कोई वारदात होती है तो पुलिस को जानकारी देंगे। यदि कहीं आग लगती है तो फायर बिग्रेड को खबर देंगे। यदि कोई बीमार है तो डॉक्टर को फोन करेंगे।

हम पुलिस को कहेंगे कि अमुक स्थान पर कोई दुर्घटना हो गई है जल्दी पहुँचिए, फायर बिग्रेड को फोन करके घटना की जानकारी देंगे कि अमुक स्थान पर आग लगी है। रास्ता इधर-उधर से है जल्दी आ जाइए। डॉक्टर को कहेंगे कि मेरे अमुक रिश्तेदार की तबियत खराब है। आप जल्दी से जल्दी आकर उनकी हालत का जायजा लीजिए।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 8 ऐसे-ऐसे

भाषा की बात

(क) मोहन ने केला और संतरा खाया।
(ख) मोहन ने केला और संतरा नहीं खाया।
(ग) मोहन ने क्या खाया ?
(घ) मोहन केला और संतरा खाओ।
उपर्युक्त वाक्यों में से पहला वाक्य एकांकी से लिया गया है। बाकी तीन वाक्य देखने में पहले वाक्य से मिलते-जुलते हैं, पर उनके अर्थ अलग-अलग हैं। पहला वाक्य किसी कार्य या बात के होने के बारे में बताता है। इसे विधिवाचक वाक्य कहते हैं। दूसरे वाक्य का संबंध उस कार्य के न होने से है, इसलिए उसे निषेधवाचक वाक्य कहते हैं। (निषेध का अर्थ नहीं या मनाही होता है।) तीसरे वाक्य में इसी बात को प्रश्न के रूप में पूछा जा रहा है, ऐसे वाक्य प्रश्नवाचक कहलाते हैं। चौथे वाक्य में मोहन से उसी कार्य को करने के लिए कहा जा रहा है। इसलिए उसे आदेशवाचक वाक्य कहते हैं। अगले पृष्ठ पर एक वाक्य दिया गया है। इसके बाकी तीन रूप तुम सोचकर लिखो-
बताना : रुथ ने कपड़े अलमारी में रखे।
नहीं/मना करना : रुथ ने कपड़े अलमारी में नहीं रखे।
पूछना : क्या रुथ ने कपड़े अलमारी में रखे।
आदेश देना : रुथ कपड़े अलमारी में रखो।

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ऐसे-ऐसे Summary

एकांकी नाटक का सार

प्रस्तुत एकांकी नाटक में मोहन एक विद्यार्थी है जिसकी उम्र लगभग नौ साल है। वह एक दिन अपने पेट को पकड़कर कहता है कि मेरे पेट में ऐसे-ऐसे हो रहा है। उसके पेट में ऐसे-ऐसे क्या हो रहा है यह किसी की भी समझ में नहीं आता। उसकी माँ उसे सेंक लेने को कहती है तथा डॉक्टर को बुलाती है। मोहन अपने पिता के साथ दफ्तर गया था। मोहन की माँ ने अपने पति से पूछा कि कहीं इसने कुछ अंट-शंट तो नहीं खा लिया। मोहन के पिता बताते हैं कि इसने ऐसा कुछ भी नहीं खाया। यह तो वहाँ कूदता फिर रहा था। मोहन के पिता टेलीफोन करके डॉक्टर को बुलाते हैं। वे डॉक्टर के पूछने पर बताते हैं कि यह और कुछ नहीं बताता बस यही कहता है कि मेरे पेट में कुछ ऐसे-ऐसे हो रहा है। यह ऐसे-ऐसे क्या होता है मोहन तकलीफ से कराहने का नाटक करता है। उसकी माँ उसे सांत्वना देती है तभी वैद्य जी आते हैं वैद्य जी आकर कहते हैं कि बेटा मोहन क्या तुम्हारा खेलने से जी भर गया। वैद्य जी मोहन के पास कुरसी पर बैठ जाते हैं। वे उसकी नाड़ी देखकर कहते हैं कि वात का प्रकोप है। वे मोहन की जीभ भी देखते हैं और बताते हैं कि इसके पेट में कब्ज है। इस कारण वायु बढ़ गई है। वैद्य जी अपने हाथ की अँगुलियाँ फैलाकर . मोहन से पूछता है क्या तुम्हारे पेट में ऐसे-ऐसे होता है। मोहन हाँ कहता है। वैद्य जी कहते हैं कि मैं रोग समझ गया हूँ, अभी पुड़िया भेजता हूँ जल्दी ही ठीक हो जाएगा। मोहन के पिता वैद्य जी को पाँच का नोट देते हैं। वैद्य जी के जाते ही डॉक्टर साहब आ जाते हैं। डॉक्टर साहब मोहन के पास बैठते हैं। डॉक्टर साहब मोहन का कभी पेट दबाकर देखते हैं, कभी जीभ बाहर निकलवाकर देखते हैं। डॉक्टर साहब कहते हैं कि इसके चेहरे से लगता है कि इसके पेट में काफी दर्द है। डॉक्टर साहब भी मोहन के पेट में कब्ज ही बताते हैं। वे कहते हैं कि मैं अभी दवाई भिजवाता हूँ एक खुराक पीने के बाद तबियत सुधर जाएगी। वे कहते हैं कि कभी-कभी पेट में हवा रुक जाती है वह फँदा डाल लेती है इसलिए दर्द होता है। मोहन के पिता डॉक्टर साहब को दस रुपये देते हैं। तभी एक पड़ोसन मोहन को देखने के लिए आती है तो मोहन की माँ कहती है कि यह तो दर्द के मारे तड़फता फिर रहा है। पड़ोसन कहती है कि लगता है यह कोई नई बीमारी है। माँ कहती है कि इसने तो कुछ भी नहीं खाया।

मोहन के मास्टर जी मोहन को आवाज लगाते हुए घर में प्रवेश करते हैं। वे कहते हैं कि सुना है मोहन के पेट में बहुत दर्द हो रहा है। वह मोहन के पास जाकर कहते हैं दादा कल स्कूल भी जाना है। तुम्हारे बिना क्लास में रौनक कहाँ रहती है ? माता जी आपने मोहन को ऐसा क्या खिला दिया। मोहन की माँ कहती है कि इसने तो कुछ भी नहीं खाया तो मास्टर जी कहते हैं कि फिर शायद यह न खाने का दर्द है। उसी से ऐसे-ऐसे होता है। मास्टर जी कहते हैं कि मोहन की बीमारी का इलाज डॉक्टर के पास नहीं है। मैं इसकी बीमारी को जानता हूँ। अक्सर मोहन जैसे लड़कों को यह बीमारी हो जाती है। मास्टर जी मोहन के पास जाकर कहते हैं दर्द तो दूर हो ही जाएगा बेशक तुम कल स्कूल मत आना। पर तुम यह तो बताओ कि तुमने स्कूल का काम पूरा कर लिया या नहीं। मोहन ठिठकते हुए बोलता है कि सब नहीं हुआ। मास्टर जी ने कहा कि शायद सवाल रह गए हों। वह कहता है जी, हाँ,! मास्टर जी कहने लगे माता जी इसने महीना भर मौज की है। स्कूल का सारा काम रह गया आज ख्याल आया बस डर के मारे ऐसे-ऐसे होने लगा। इसकी दवाई मेरे पास है। स्कूल से इसकी दो दिन की छुट्टी। दो दिन में सारा काम पूरा करना है। माँ मोहन से कहती है कि तू तो बहुत उस्ताद है तूने तो हमें डरा ही दिया था। तभी दीनानाथ दवाई लेकर प्रवेश करते हैं। दवा की शीशी नीचे गिरकर टूट जाती है। सब ठगे से मोहन को देखते रहते हैं। इसके बाद सब हँस पड़ते हैं।

शब्दार्थ: गलीचा – सूत या ऊन के धागे से बुना हुआ कालीन, पुचकार कर – प्यार करके, अंट-शंट – फालतू चीजें, गड़-गड़ – गरजने की आवाज़, यकायक – एकदम, कल – चैन, बला – कष्ट, भला-चंगा – स्वस्थ, तंदरुस्त, अच्छा-खासा, घर सिर पर – शोर मचाना, गुलज़ार – चहल-पहल वाला, उठाना – शरारतें करना, धमा-चौकड़ी – उछल-कूद, कूद-फाँद, ऊधम, वात – शरीर में रहने वाली वायु के बढ़ने से होनेवाला रोग, प्रकोप – बीमारी का बढ़ना, बहुत अधिक या, तबीयत – शरीर या मन की स्थिति बढ़ा हुआ कोप, बदहज़मी – अपच, अजीर्ण, रौनक – चहल-पहल

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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 7 साथी हाथ बढ़ाना

These NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 7 साथी हाथ बढ़ाना Questions and Answers are prepared by our highly skilled subject experts.

साथी हाथ बढ़ाना NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 7

Class 6 Hindi Chapter 7 साथी हाथ बढ़ाना Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
यह गीत किसको संबोधित है?
उत्तर:
यह गीत परिश्रम करने वाले मनुष्य को संबोधित है।

प्रश्न 2.
इस गीत की किन पंक्तियों को आप अपने आस-पास की जिंदगी में घटते हुए देख सकते हैं?
उत्तर:
अपना दुख भी एक है साथी अपना सुख भी एक
अपनी मंजिल सच की मंजिल अपना रस्ता नेक
एक से एक मिले तो कतरा बन जाता है-दरिया
एक से एक मिले तो ज़र्रा बन जाता है सहरा

प्रश्न 3.
‘सागर ने रस्ता छोड़ा परबत ने सीस झुकाया’-साहिर ने ऐसा क्यों कहा है?
उत्तर:
साहिर ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि एक साथ कार्य करने से बड़ी से बड़ी बाधाओं में भी रास्ता निकल आता है अर्थात् कार्य आसान हो जाता है। साहसी व्यक्ति सभी बाधाओं पर आसानी से विजय पा लेता है।

प्रश्न 4.
गीत में सीने और बाँह को फौलादी क्यों कहा गया है ?
उत्तर:
फौलाद एक मजबूत धातु होती है। परिश्रमी व्यक्ति के सीने एवं बाजुओं में शक्ति भरी होती है। इसलिए कवि ने सीने और बाँह को फौलादी कहा है।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 7 साथी हाथ बढ़ाना

गीत से आगे

प्रश्न 1.
अपने आस-पास किसे साथी मानते हैं और क्यों? इससे मिलते-जुलते दस शब्द अपने शब्द कोश में बढ़ाइए।
उत्तर:
हम अपने साथ पढ़ने वाले छात्रों को साथी मानते हैं। साथी शब्द से मिलते-जुलते अन्य शब्द हैं। मित्र, सहचर, सहपाठी, दोस्त, सखा, सखी, सहेली, हिमायती, सहायक।

प्रश्न 2.
‘अपना दुख भी एक है साथी, अपना सुख भी एक’
कक्षा, मोहल्ले और गाँव के किस-किस तरह के साथियों के बीच तुम इस वाक्य की सच्चाई को महसूस कर पाते हो और कैसे ?
उत्तर:
जब किसी परिवार पर विपत्तियों का पहाड़ टूटता है तो गाँव के सभी लोग उसकी सहायता करते हैं। जब गाँव में आग लगती है या कोई अन्य आपदा आती है तो सभी मिलकर उसका मुकाबला करते हैं।

प्रश्न 3.
इस गीत को आप किस माहोल में गुनगुना सकते हैं?
उत्तर:
इस गीत को हम जब सामूहिक कार्य कर रहे हों तब गुनगुनाया जा सकता है। यह गीत सामूहिक रूप से कार्य करने की प्रेरणा देता है अतः इस गाने को ऐसे ही मौके पर गुनगुनाया जा सकता है।

प्रश्न 4.
एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना’-
(क) तुम अपने घर में इस बात का ध्यान कैसे रख सकते हो ?
(ख) पापा के काम और माँ के काम क्या-क्या हैं ?
(ग) क्या वे एक-दूसरे का हाथ बँटाते हैं ?
उत्तर:
(क) जब माता जी या पिता जी का घर का अन्य सदस्य कोई कार्य करता है तो हम उसकी सहायता करते हैं।
(ख) हम पापा के जूतों पर पालिश करते हैं व कभी-कभी उनके कपड़े इस्त्री कर देते हैं। माता के साथ मिलकर सब्जी काटने, घर की सफाई करने, बाजार से कोई सामान लाने में मदद करते हैं।
(ग) हाँ वे भी एक दूसरे का हाथ बँटाते हैं।

प्रश्न 5.
यदि तुमने ‘नया दौर’ फिल्म देखी है तो बताओ कि यह गीत फ़िल्म में कहानी के किस मोड़ पर आता है ? फिल्म देखो और बताओ।
उत्तर:
यह गीत नया दौर में तब आता है जब गाँव में बस चलाई जाती है। बस के चलने से अनेक लोगों की रोजी-रोटी पर फर्क पड़ सकता था। बस के साथ घोड़े-तांगे की दौड़ होनी होती है। लोग मिलजुल कर एक सड़क का निर्माण करते हैं आखिर में घोड़े-तांगे की विजय होती है।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 7 साथी हाथ बढ़ाना

भाषा की बात

प्रश्न 1.
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता
एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं
(क) ऊपर लिखी कहावतों का अर्थ कविता की किन पंक्तियों से मिलता-जुलता है?
(ख) इन दोनों मुहावरों का अर्थ शब्दकोश में देखकर समझो और उनका वाक्य के संदर्भ में प्रयोग करो।
उत्तर:
(क) इन कहावतों का अर्थ निम्नलिखित पंक्तियों में मिलता है-
एक अकेला थक जाएगा मिलकर बोझ उठाना
एक से एक मिले तो कतरा बन जाता है- दरिया
एक से एक मिले तो ज़र्रा बन जाता है सहरा
एक से एक मिले तो राई बन सकती है परबत
एक से एक मिले तो इंसाँ बस में कर ले किस्मत

(ख) मिलजुल कर ही हम मैच जीत सकते हैं क्योंकि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।
संगठित होकर कार्य करने से शक्ति कई गुना बढ़ जाती है क्योंकि एक और एक आपस में मिलकर ग्यारह हो जाते हैं।

प्रश्न 2.
नीचे हाथ से संबंधित कुछ मुहावरे दिए हैं। इनके अर्थ समझो और प्रत्येक मुहावरे से वाक्य बनाओ।
हाथ को हाथ न सूझना
हाथ साफ करना
हाथ-पैर फूलना
हाथों-हाथ लेना
हाथ बोलते हैं
उत्तर:

  • अँधेरा इतना है कि हाथ को हाथ नहीं सूझता।
  • चोर ने तिजोरी पर अपना हाथ साफ़ कर लिया।
  • आग लग जाने पर हाथ-पैर फूल ही जाते हैं।
  • भारत अतिथियों को हाथों-हाथ लेता है।

कुछ करने को

प्रश्न 1.
बात करते समय हाथ हमारी बात को प्रभावशाली ढंग से दूसरे तक पहुँचाते हैं-
‘क्यों पूछते हाथ दुआ माँगते हाथ मना करते हाथ
समझाते हाथ, बुलाते हाथ, आरोप लगाते हाथ, चेतावनी देते हाथ, नारा लगाते हाथ, सलाम करते हाथ
इनका प्रयोग हम कब-कब करते हैं ? लिखिए।
उत्तर:
पूछते हाथ – जब हम किसी से कुछ प्रश्न पूछ रहे हों।
समझाते हाथ – जब हम किसी को कोई बात या काम समझा रहे हों या शिक्षक कक्षा में पढ़ा रहे हों।
चेतावनी देते हाथ – जब किसी कार्य को करने से मना करते हैं।
दुआ माँगते हाथ – जब हम मंदिर या मस्जिद में हाथ फैलाकर दुआ माँगते हैं।
बुलाते हाथ – जब हम किसी को इशारे से बुलाते हैं।
नारा लगाते हाथ – जब हम किसी को कोई कार्य करने से मना करते हैं जैसे इसे मत छुओ।
आरोप लगाते हाथ – हाथ उठाकर जब किसी पर कोई आरोप लगाते हैं जैसे इसने मेरी पुस्तक चुराई।
सलाम करते हाथ – जब हम हाथ जोड़कर किसी का अभिवादन करते हैं।

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नुक्ते की बारीकी

प्रश्न 1.
इस गीत के जिन शब्दों में नुक्ता लगा है उन्हें छाँट कर लिखो। जो शब्द तुम्हारे लिए कुछ नए हैं, उनका वाक्यों में प्रयोग करो।
उत्तर:
नुक्ते वाले शब्द इस प्रकार हैं-कतरा, ज़र्रा

प्रश्न 2.
नीचे दिए शब्दों में ‘हाथ’ शब्द छिपा है। इन शब्दों को पढ़कर समझो और बताओ कि हाथों का इनमें क्या काम है?
हथकड़ी, हथगोला, हत्था, हाथापाई,
निहत्था, हथकंडा, हथियार, हथकरघा
उत्तर:
हथकड़ी – सिपाही अपने हाथों से मुज़रिम के हाथों में हथकड़ी डालता है।
निहत्था – जिसके हाथ में कोई हथियार नहीं होता।
हथगोला – ऐसा अस्त्र जिसे हाथ से फेंका जाता है।
हथकंडा – हाथों की चालाकी या तरीका।
हत्था – चक्की का हत्था जिसको पकड़कर चक्की चलाई जाती है।
हथियार – हाथों से पकड़कर चलाया जाने वाला अस्त्र जैसे बंदूक।
हाथापाई – हाथों से एक दूसरे पर वार करना।
हथकरघा – हाथ से वस्त्र बुनने का देशी तरीका।

प्रश्न 3.
इस गीत के जिन शब्दों में नुक्ता लगा है उन्हें छाँट कर लिखो। जो शब्द तुम्हारे लिए कुछ नए हैं, उनका वाक्यों में प्रयोग करो।
उत्तर:
नुक्ते वाले शब्द हैं-ज़र्रा, क़तरा
ज़र्रा : ज़र्रे-ज़र्रे में खुदा का वास होता है।
क़तरा : हमारे सैनिक शरीर में खून का अंतिम कतरा रहने तक देश की रक्षा करने की कसम खाते हैं।

प्रश्न 4.
‘कल गैरों की खातिर की, आज अपनी खातिर करना।’
इस वाक्य को हम देखें तो साहिर लुधियानवी इसमें यह कहना चाह रहे हैं-
(तुमने) कल गैरों की खातिर (मेहनत) की, आज अपनी खातिर करना।
इस वाक्य में ‘तुम’ कर्ता है जो गीत की पंक्ति में छंद बनाए रखने के लिए हटा दिया गया है। उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘अपनी’ का प्रयोग कर्ता ‘तुम’ के लिए हो रहा है, इसलिए यह सर्वनाम है। ऐसे सर्वनाम जो अपने आप के बारे में बताएँ निजवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। (निज का अर्थ ‘अपना’ होता है।) निजवाचक सर्वनाम के तीन प्रकार होते हैं जो नीचे दिए वाक्यों में रेखांकित हैं-

  • मैं अपने आप (या आप) घर चली जाऊँगी।
  • बब्बन अपना काम खुद करता है।
  • सुधा ने अपने लिए कुछ नहीं खरीदा।

अब तुम भी निजवाचक सर्वनाम के निम्नलिखित रूपों का वाक्यों में प्रयोग करो-
अपने को, अपने से, अपना
अपने पर, अपने लिए, आपस में
उत्तर:
अपने को – मैं अपने को छोटा आदमी समझता हूँ।
अपने पर – मुझे अपने पर पूरा भरोसा है।
अपने से – मैं उसे अपने से अच्छा नहीं समझता।
अपने लिए – सब अपने लिए कार्य करते हैं।
अपना – सबको अपना काम खुद करना चाहिए।
आपस में – हमें आपस में मिल-जुलकर रहना चाहिए।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 7 साथी हाथ बढ़ाना

शब्दार्थ

लेख – भाग्य, बोझ – भार, नेक – सुच्चा/सीधा, फौलादी – बहुत कड़ा और मज़बूत, कतरा – बूंद, राह – रास्ता, दरिया – नदी, गैर – पराया दूसरा, जर्रा – कण, खातिर – के लिए, सहरा – मरुस्थल, राई – सरसों का दाना, इंसाँ – इंसान, आदमी

प्रसंग- प्रस्तुत गीत साहिर लुधियानवी द्वारा रचित है। कवि ने इस गीत में परिश्रम और मिलजुल कर कार्य करने की महत्ता का
प्रतिपादन किया है।

व्याख्या- एक परिश्रमी व्यक्ति अपने अन्य साथियों से मिलकर काम करने की बात कहता है। वह कहता है कि अकेले तुम थक जाओगे इसलिए मिलजुल कर काम करो। हम परिश्रम करने वालों ने जब भी मिलजुल कर कार्य किया है तो हमारे सामने बड़ी से बड़ी बाधाएँ भी नहीं टिक पाईं। हमारे सीने भी मजबूत हैं अर्थात् हम मजबूत हृदय वाले हैं तथा हमारी भुजाओं में भी शक्ति है। हम विपरीत परिस्थितियों में भी रास्ता निकाल कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। मेहनत करना हमारे भाग्य में है इसलिए मेहनत से क्या डरना। हमारा सबका सुख-दुख समान ही है। हमारी मंजिल अच्छे कार्यों की मंजिल है, हमारा रास्ता ईमानदारी का है। कवि एकता के महत्त्व को बताते हुए कहता है कि एक-एक बूँद के मिलने से सागर बन जाता है। एक-एक कण के मिलने से मरुस्थल बन जाता है। एक-एक सरसों के दाने के मिलने से पर्वत बन सकता है। आपस में मिलजुल कर कार्य करने से इंसान अपनी किस्मत वश में कर सकता है इसलिए मिल जुलकर ही कार्य करना चाहिए।

साथी हाथ बढ़ाना Summary

कविता का सार

एक अकेला थक जायेगा मिल कर बोझ उठाना
साथी हाथ बढ़ाना
हम मेहनत वालों ने जब भी मिल कर कदम बढ़ाया
सागर ने रस्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया
फौलादी हैं सीने अपने फौलादी हैं बाहें
हम चाहें तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें
साथी हाथ बढ़ाना
मेहनत अपनी लेख की रेखा मेहनत से क्या डरना
अपना दुख भी एक है साथी अपना सुख भी एक
अपनी मंजिल सच की मंजिल अपना रस्ता नेक
साथी हाथ बढ़ाना
एक से एक मिले तो कतरा बन जाता है-दरिया
एक से एक मिले तो जर्रा बन जाता है सहरा
एक से एक मिले तो राई बन सकता है परबत
एक से एक मिले तो इंसाँ बस में करले किस्मत
साथी हाथ बढ़ाना

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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 6 पार नज़र के

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पार नज़र के NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 6

Class 6 Hindi Chapter 6 पार नज़र के Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
छोटू का परिवार कहाँ रहता था ?
उत्तर:
छोटू का परिवार ज़मीन के नीचे बसी हुई कालोनी में रहता था।

प्रश्न 2.
छोटू को सुरंग में जाने की इजाज़त क्यों नहीं थी ? पाठ के आधार पर लिखो।
उत्तर:
इस सुरंग में सुरक्षा कारणों से आम आदमी को जाने की मनाही थी। यहाँ केवल वह व्यक्ति जा सकता था जिसके पास सिक्योरिटी-पास हो। छोटू के पास सिक्योरिटी पास नहीं था। इस मार्ग से केवल कुछ चुनिंदा लोग ही जा सकते थे।

प्रश्न 3.
कंट्रोल रूम में जाकर छोटू ने क्या देखा और वहाँ उसने क्या हरकत की ?
उत्तर:
कंट्रोल रूम में जाकर उसने अंतरिक्ष यान क्रमांक एक देखा। उस यान से एक यांत्रिक हाथ बाहर निकल रहा था। हर पल उसकी लम्बाई बढ़ती जा रही थी। छोटू का पूरा ध्यान कॉन्सोल-पैनेल पर था। कॉन्सोल का एक बटन दबाने की उसकी इच्छां बार-बार हो रही थी। वह अपने को रोक नहीं पाया। उसने उसका लाल बटन दबा ही दिया। बटन के दबते ही खतरे की घंटी बज उठी। अपनी इस गलती पर उसने अपने पिता से एक थप्पड़ भी खाया क्योंकि उसके बटन दबाने से अंतरिक्ष यान की हरकत रुक गई थी।

प्रश्न 4.
इस कहानी के अनुसार मंगल ग्रह पर कभी जन-जीवन था वह सब नष्ट कैसे हो गया ? इसे लिखो।
उत्तर:
एक समय था जब लोग मंगल ग्रह पर जमीन के ऊपर रहते थे। धीरे-धीरे वातावरण में परिवर्तन आने लगा। कई तरह के जीव धरती पर रहते थे। सूरज में बहुत भारी परिवर्तन आया। सूरज से मिलने वाली रोशनी व ऊष्णता के कारण ही हम जिंदा रहते हैं। इनसे ही सभी जीवों का पोषण होता है। सूरज में परिवर्तन होते ही वहाँ का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया। प्रकृति के बदले हुए रूप का सामना करने में यहाँ के पशु-पक्षी, पेड़-पौधे व अन्य जीव अक्षम (असमथ) साबित हुए। इस लिए मंगल ग्रह का जीवन नष्ट हो गया।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 6 पार नज़र के

प्रश्न 5.
कहानी में अंतरिक्ष यान को किसने भेजा था और क्यों ?
उत्तर:
इस कहानी में अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक नासा जिसका पूरा नाम नेशनल एअरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने भेजा था । इस यान का नाम वाइकिंग था। पृथ्वी के वैज्ञानिक मंगल ग्रह की मिट्टी का अध्ययन करने के लिए बड़े उत्सुक थे। यह यान वहाँ से मिट्टी लेने गया था जिससे की वैज्ञानिक वहाँ की मिट्टी का अध्ययन करके यह पता लगा सकें कि पृथ्वी की तरह मंगल ग्रह पर भी जीव सृष्टि का अस्तित्व है या नहीं।

प्रश्न 6.
नंबर एक, नंबर दो और नंबर तीन अजनबी से निबटने के कौन से तरीके सुझाते हैं और क्यों ?
उत्तर:
नंबर एक का कहना था कि इस अजनबी यान में केवल यंत्र है हम इसको स्पेस में खत्म करने की क्षमता रखते हैं मगर इससे फिर कोई जानकारी हासिल नहीं होगी। जमीन पर उतरने को मज़बूर करने के यंत्र हमारे पास नहीं हैं। यदि यह खुद ब खुद जमीन पर उतर जाए तो हम इसे बेकार करने की क्षमता रखते हैं।

नंबर दो एक वैज्ञानिक थे वे बोले, “हालांकि यंत्रों को बेकार कर देने में भी खतरा है। इनके बेकार होते ही दूसरे ग्रह के लोग हमारे बारे में जान जाएंगे। इसलिए मेरी राय में हमें सिर्फ अवलोकन करते रहना चाहिए।”

नंबर तीन में कुछ इस तरह के तरीके बताए-
“जहाँ तक हो सके हमें अपने अस्तित्व को छुपाए ही रखना चाहिए क्योंकि हो सकता है जिन लोगों ने अंतरिक्ष यान भेजे हैं, वे कल की इनसे भी बड़े सक्षम अंतरिक्ष यान भेजें। हमें यहाँ का प्रबंध कुछ इस तरह रखना चाहिए जिससे इन यंत्रों को यह गलतफहमी हो कि इस जमीन पर कोई भी चीज इतनी महत्त्वपूर्ण नहीं है कि जिससे वे लाभ उठा सकें। अध्यक्ष महोदय से मैं यह दरख्वास्त करता हूँ कि इस तरह का प्रबंध हमारे यहाँ किया जाए।”

कहानी से आगे

प्रश्न 1.
(क) दिलीप एम. साल्वी
(ख) जयंत विष्णु नार्लीकर
(ग) आइज़क ऐसीमोव
(घ) आर्थर क्लार्क
ऊपर दिए गए लेखकों की अंतरिक्ष संबंधी कहानियाँ इकट्ठी करके पढ़ो और एक-दूसरे को सुनाओ। इन कहानियों में कल्पना क्या है और सच क्या है, इसे समझने की कोशिश करो। कुछ ऐसी कहानियाँ छाँटकर निकालो, जो आगे चलकर सच साबित हुई हैं।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
इस पाठ में अंतरिक्ष यान अजनबी बनकर आता है। ‘अजनबी’ शब्द पर सोचो। इंसान भी कई बार अजनबी माने जाते हैं और कोई जगह या शहर भी। क्या तुम्हारी मुलाकात ऐसे किसी अजनबी से हुई है ? नए स्कूल का पहला अनुभव कैसा था ? क्या उसे भी अजनबी कहोगे ? अगर हाँ तो ‘अजनबीपन’ दूर कैसे हुआ ? इस पर सोचकर कुछ लिखो।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

NCERT Solutions for Class 6 Hindi Vasant Chapter 6 पार नज़र के

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
यह कहानी जमीन के अंदर की जिंदगी का पता देती है। ज़मीन के ऊपर मंगल ग्रह पर सब कुछ कैसा होगा, इसकी कल्पना करो और लिखो।
उत्तर:
मंगल ग्रह पर न तो कोई पेड़-पौधा होगा न कोई नदी नाला । मंगल ग्रह पर जिधर भी देखें उधर ही पठारी भूमि, रेगिस्तान और मिट्टी के पहाड़ होंगे वहाँ किसी भी प्रकार का जीवन नहीं होगा।

प्रश्न 2.
मान लो कि तुम छोटू हो और यह कहानी किसी को सुना रहे हो तो कैसे सुनाओगे। सोचो और ‘मैं’ शैली में यह कहानी सुनाओ।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
सिक्योरिटी-पास उठाते ही दरवाज़ा बंद हो गया।
यह बात हम इस तरीके से भी कह सकते हैं-
जैसे ही कार्ड उठाया, दरवाज़ा बंद हो गया।
ध्यान दो, दोनों वाक्यों में क्या अंतर है। ऐसे वाक्यों के तीन जोड़े तुम स्वयं सोचकर लिखो।
उत्तर:

  1. जैसे ही मैं स्टेशन पर पहुँचा, गाड़ी छूट गई।
  2. जैसे ही रामू बाहर निकला, वर्षा शुरू हो गई।
  3. जैसे ही अध्यापक कक्षा से बाहर निकले, बच्चे शोर मचाने लगे।

प्रश्न 2.
छोटू ने चारों तरफ़ नज़र दौड़ाई।
छोटू ने चारों तरफ़ देखा।
उपर्युक्त वाक्यों में समानता होते हुए भी अंतर है।
वाक्यों में मुहावरे विशिष्ट अर्थ देते हैं। नीचे दिए गए वाक्यांशों में ‘नज़र’ के साथ अलग-अलग क्रियाओं का प्रयोग हुआ है। इनका वाक्यों या उचित संदर्भो में प्रयोग करो-
नज़र पड़ना, नज़र रखना, नज़र आना, नज़रें नीची होना
उत्तर:
(i) यदि यह व्यक्ति कहीं नज़र पड़े तो सौ नंबर पर सूचित करें।
(ii) हमें अपने आस-पास संदिग्ध व्यक्ति व वस्तुओं पर नज़र रखनी चाहिए।
(iii) रामू पता नहीं कहाँ रहता है कभी-कभी नज़र आता है।
(iv) शर्म के कारण हरीश की नज़रें नीची हो गईं।

प्रश्न 3.
नीचे दो-दो शब्दों की कड़ी दी गई है। प्रत्येक कड़ी का एक शब्द संज्ञा है और दूसरा शब्द विशेषण है। वाक्य बनाकर समझो और बताओ कि इनमें से कौन-से शब्द संज्ञा हैं और कौन-से विशेषण।
आकर्षक आकर्षण, प्रभाव प्रभावशाली, प्रेरणा प्रेरक।
उत्तर:
आकर्षक – ताजमहल बहुत आकर्षक है। (यहाँ आकर्षक विशेषण है)
आकर्षण – ताजमहल का आकर्षण मंत्र मुग्ध कर देता है। (यहाँ आकर्षण भाववाचक संज्ञा है)
प्रभाव – शिक्षक का प्रभाव छात्रों पर अवश्य पड़ता है। (प्रभाव संज्ञा है)
प्रभावशाली – महेश का व्यक्तित्त्व बहुत प्रभावशाली है। (‘प्रभावशाली’ विशेषण है)
प्रेरणा – हमें सुभाष चंद्र बोस के जीवन से देशभक्ति की प्रेरणा लेनी चाहिए। (प्रेरणा संज्ञा है)
प्रेरक – सुभाष का व्यक्तित्त्व प्रेरक है। (यहाँ प्रेरक विशेषण है)

प्रश्न 4.
पाठ से फ और ज़ वाले (नुक्ते वाले) चार-चार शब्द छाँटकर लिखो। इस सूची में तीन-तीन शब्द अपनी ओर से भी जोड़ो।
उत्तर:
‘फ’ नुक्ते वाले शब्द-तरफ़, फ़रमा, सफ़र, शिफ्ट।
‘ज’ नुक्ते वाले शब्द-नज़र, रोज़, ज़मीन, दरवाज़े।

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महत्त्वपूर्ण गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. वैसे तो …………………… गया था।

प्रसंग- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वसंत’ में संकलित पाठ ‘पार नज़र के’ से लिया गया है। जिसके लेखक ‘जयंत नार्लीकर’ है। लेखक ने मंगल ग्रह पर जीवन होने की कल्पना की है और वह अपनी इस कल्पना को ही यहाँ साकार करने का प्रयास कर रहे हैं।

व्याख्या- छोटू एवं उसका परिवार जिस कालोनी में रहता है वह पूरी की पूरी कालोनी ज़मीन के नीचे ही बसी हुई है। सुरंगनुमा रास्ते में अंदर दीये जल रहे थे। बाहर का वातावरण ऐसा नहीं था जिस पर जीवन कायम रह सके। इस सुरंगनुमा रास्ते से बाहर जाया जा सकता था। सबसे पहले एक बंद दरवाजा पड़ता था। उसमें एक खाँचा बना हुआ था। उस खाँचे में कार्ड डालने से दरवाजा स्वतः ही खुल जाता था। छोटू ने इस दरवाजे से ही सुरंग में प्रवेश किया। सिक्योरिटी पास स्वतः ही अंदर वाले खाँचे में आ गया। छोटू ने अंदर आकर कार्ड को उठा लिया। कार्ड के उठाते ही दरवाजा स्वतः ही बंद हो गया। छोटू ने चारों ओर देखा यह रास्ता अंदर की ओर जाता था। छोटू ने अपने मन में सोचा कि आज तो ज़मीन के ऊपर का सफर करने का मौका मिल गया है।

2. एक समय …………………… सामना किया।

प्रसंग- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वसंत’ में संकलित पाठ ‘पार नज़र के’ से लिया गया है। यह पाठ ‘जयंत नार्लीकर’ द्वारा लिखा गया है। इस पाठ में लेखक बताता है कि मंगल ग्रह पर भी पहले लोग ज़मीन के ऊपर ही रहते हैं परन्तु सूरज में हुए परिवर्तन के कारण ज़मीन का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया।

व्याख्या- लेखक इस कथा के माध्यम से पृथ्वी वासियों को प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करने पर चेताना चाहता है। लेखक कहता है कि एक समय मंगल ग्रह पर सभी लोग ज़मीन के ऊपर ही रहा करते थे। तब मंगल ग्रह का वातावरण जीवन के अनुकूल था। ज़मीन के ऊपर आदमी बिना किसी यंत्र की सहायता के रह सकते थे। उनको कोई खास किस्म की पोशाक भी नहीं पहननी पड़ती थी। जिस प्रकार से अब बिना स्पेस-सूट के बाहर नहीं जा सकते तब ऐसा नहीं था। हमारे पूर्वज ज़मीन के ऊपर ही रहते थे। धीरे-धीरे ज़मीन का वातावरण बदलने लगा। पहले धरती पर अनेक प्रकार के जीव रहा करते थे। प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने के कारण एक-एक करके सभी जीव मरने लगे। इस परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण था सूरज में हुआ परिवर्तन। सूरज ही हमको गर्मी और सर्दी देता है। इन तत्त्वों के कारण ही जीव जन्तुओं का विकास एवं पोषण होता है। प्रकृति का संतुलन बिगड़ने से यहाँ के जीव-जंतु सहन नहीं कर पाए उनकी क्षमता समाप्त होने लगी। केवल मानव ही इसका सामना कर सका इस कारण जीव-जन्तु व पेड़ पौधे सभी धरती से समाप्त हो गए।

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पार नज़र के Summary

कविता का सार

एक सुरंगनुमा रास्ता था सभी लोगों को वहाँ से जाने की इजाजत नहीं थी केवल कुछ लोग ही वहाँ से गुज़र सकते थे। छोटू के पापा इसी सुरंग से होकर काम पर जाया करते थे क्योंकि उनके पास सिक्योरिटी पास था। एक दिन छोटू ने पापा का पास ले लिया और सुरंग की तरफ जाने लगा। फिर क्या छोटू की मम्मी ने छोटू को डाँट लगायी बोली तुम्हें कितनी बार कहा वहाँ मत जाया करो, छोटू बोला पापा क्यों जाते हैं रोज-रोज उस तरफ! रोज छोटू की अपनी माँ से यही बात होती थी। मम्मी बोली पापा को वहाँ से काम पर जाना होता है। कुछ चुनिंदा लोग ही इस सुरंग से गुज़र कर जा सकते थे, छोटू के पापा भी उन्हीं में से थे। एक बार छुट्टी के दिन छोटू के पापा घर पर आराम कर रहे थे कि छोटू ने पापा का सिक्योरिटी पास लिया और सुरंग की तरफ चल दिया। सुरंग में प्रवेश करने से पहले एक दरवाज़े का सामना करना पड़ता था। दरवाज़े में एक खांचा था उसमें कार्ड डालने पर दरवाज़ा खुल जाता था छोटू ने कार्ड डाला दरवाज़ा खुल गया और उसने अंदर प्रवेश करके कार्ड उठा लिया। कार्ड को उठाते ही दरवाजा बंद हो गया। छोटू ने चारों तरफ देखा उसे एक रास्ता ऊपर की ओर जाता हुआ दिखायी दिया। वह बहुत खुश था कि उसे सफर करने का एक मौका मिला मौका हाथ लगते ही फिसल गया। सुरंग में लगे यंत्रों की जानकारी छोटू को नहीं थी, उन यंत्रों ने छोटू की तस्वीर खींच ली तभी जाने कहाँ से कुछ सिपाही दौड़े आए और छोटू को पकड़कर वापिस घर पर छोड़ दिया।

छोटू की माँ उसका घर पर इंतजार कर रही थी। छोटू को अपनी पिटाई का डर लग रहा था। छोटू के पापा घर पर ही थे जिससे छोटू मम्मी की पिटाई से बच गया। उसके मम्मी पापा ने उसे समझाया फिर ऐसी गलती कभी मत करना। छोटू का सवाल था कि पापा आप भी तो जाते हैं वहाँ पर फिर मुझे क्यों रोकते हो। छोटू के पापा बोले मैं एक किस्म का स्पेस सूट पहनकर वहाँ जाता हूँ जिससे मुझे ऑक्सीजन मिलती रहे, मैं साँस लेता रहूँ। मैं उस स्पेस सूट की वजह से ही अपने शरीर को बाहर की ठण्ड से बचा पाता हूँ। खास किस्म के जूतों के सहारे मेरा वहाँ जमीन पर चलना सम्भव होता है। वहाँ की जमीन पर चलने के लिए हमें एक प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाता है।

यह सब बातें छोटू सुन रहा था। पापा आगे बताने लगे कि एक समय था जब अपने मंगल ग्रह पर लोग जमीन के ऊपर रहते थे बिना किसी यंत्रों के सहारे हमारे पूर्वज जमीन के ऊपर रहा करते थे। धीरे-धीरे वातावरण में परिवर्तन आने लगा और एक के बाद एक सब मरने लगे इसका कारण था सूर्य में हुआ परिवर्तन।

अपने तकनीकी ज्ञान के कारण ही हमने अपना घर जमीन के नीचे बना लिया। जमीन के ऊपर लगे यंत्रों के सहारे हम सूर्य की रोशनी और गर्मी का उपयोग करते आ रहे हैं। यंत्रों के सहारे हम जमीन के नीचे जी रहे हैं। इन यंत्रों को चलाने में बड़ी सतर्कता बरतनी पड़ती है। मुझ जैसे कुछ लोग ही इन यंत्रों का ध्यान रखते हैं। छोटू बोला मैं भी बड़ा होकर यही काम करूँगा। इसके लिए तुम्हें बहुत मेहनत करनी होगी। अगले दिन छोटू के पापा काम पर चले गए और स्टाफ के प्रमुख ने स्क्रीन की तरफ इशारा किया। स्क्रीन पर एक बिन्दु झलक रहा था। छोटू के पापा ने अपना संदेह प्रकट किया कि यह अंतरिक्ष यान तो नहीं। वे सोच में डूब गए। वैसे तो हमारे पूर्वजों ने अंतरिक्ष यानों व उपग्रहों का उपयोग किया है। लेकिन हमारे लिए असम्भव है छोटू के पापा ने अंतरिक्ष यान का. अवलोकन जारी रखा। कालोनी की प्रबंध समिति की सभा बुलायी गयी थी। अध्यक्ष भाषण दे रहे थे। दो अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह की तरफ बढ़ते चले आ रहे थे। कम्प्यूटर के अनुसार ये यान किसी नज़दीक ग्रह से छोड़े गए हैं इसके लिए हमें एक योजना बनानी चाहिए। नंबर एक पर कालोनी की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वे बोले कि इन अंतरिक्ष यानों को हम जलाकर राख कर देंगे। इससे हमें कोई जानकारी हासिल नहीं होगी। मेरी जानकारी के अनुसार अंतरिक्ष यानों में कोई जीव नहीं है। इसमें केवल यंत्र है। नंबर एक की बात तो सही जान पड़ती है।

नंबर दो एक वैज्ञानिक थे। उनका कहना था कि हमें अपने अस्तित्व को छुपाए रखना चाहिए और सिर्फ अवलोकन करना चाहिए। नंबर तीन सामाजिक व्यवस्था का काम देखते थे। अध्यक्ष कुछ बोलने ही वाले थे कि उन्होंने पहले कहा अंतरिक्ष यान नंबर एक हमारी जमीन पर उतर चुका है। वह दिन छोटू के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण था। पापा छोटू को कंट्रोल रूम ले गए। जहाँ से अंतरिक्ष यान बिल्कुल स्पष्ट नज़र आ रहा था। छोटू यान के बारे में पूछने लगा कि इससे क्या होगा। तभी छोटू के पापा ने कहा कि अभी कुछ बताया नहीं जा सकता। तब उन्होंने छोटू को एक कॉन्सोल दिखाया उस पर कई बटन थे। छोटू का सारा ध्यान इधर-उधर से हटकर कॉन्सोल पैनल पर चला गया वह अपनी बटन दबाने की इच्छा को रोक नहीं पाया, उसने बटन दबा दिया। उसके बटन दबाते ही खतरे की घंटी बजी। खतरे की घंटी बजते ही छोटू के पापा ने छोटू को अपनी तरफ खींचते हुए उसे एक चाँटा लगा दिया और बटन को पूर्व स्थिति में लाने की कोशिश में लग गए और कुछ समय बाद बटन अपनी पूर्व स्थिति में आ गया।

मंगल की धरती पर उतरा अंतरिक्ष यान वाइकिंग पर अपना कार्य कर ही रहा था कि किसी कारणवश अंतरिक्ष यान का यांत्रिक हाथ बेकार हो गया। उसको ठीक करने के प्रयास किये जा रहे थे। नासा के तकनीशियन भी इस बारे में जाँच कर रहे थे। इसके कुछ दिन बाद पृथ्वी के सभी अखबारों ने यह छापा कि नासा के तकनीशियनों को वाइकिंग को रिमोट के सहारे ठीक करने में सफलता मिली। यांत्रिक हाथों ने मंगल की मिट्टी के नमूने इकट्ठे करने शुरू कर दिए। मंगल की मिट्टी का अध्ययन करने के लिए पृथ्वी के वैज्ञानिक उत्सुक थे। उन्हें पूरी आशा थी कि अध्ययन के द्वारा यह पता लगाया जा सकता है कि मंगल ग्रह पर पृथ्वी की तरह जीव का अस्तित्व है या नहीं यह आज भी एक रहस्य है।

शब्दार्थ: सुरंगनुमा – जमीन के अंदर बना रास्ता, सूचना – जानकारी, प्रतिवेदन, नियंत्रण – प्रतिबंधन, वश में रखना, ठंड – शीत, वातावरण – पृथ्वी के चारों ओर की वायु, प्राकृतिक – प्रकृति संबंधी, लौकिक, पूर्वज – पूर्व अधिकारी, पुरखे लोप, कम्प्यूटर – संगण, सिक्योरिटी – सुरक्षा, चंद – कुछ, चुनिंदा – चुना हुआ, मौका – अवसर, संदेहास्पद – संदेहपूर्ण, खैरियत – कुशल, हरकत – हिलना-डुलना, कद – आकार, देह की ऊँचाई-लंबाई, माहौल – वातावरण, परिस्थिति, मुमकिन – संभव, किस्म – प्रकार, सतर्कता – सावधानी, शिफ्ट – पारी, मंशा – इच्छा, अडिग – स्थिर, यान – वाहन, अवलोकन – निरीक्षण, प्रबंध – व्यवस्था, गिर्द – आसपास, खाक – धूल, मिट्टी, राख, गलतफहमी – गलत समझना, दरख्वास्त – निवेदन, अर्जी, उकेरना – खोद कर उठाना, सहसा – अचानक, दुरुस्त – ठीक

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