Author name: Prasanna

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 कुशलप्रशासनम्

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 कुशलप्रशासनम् Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

Bhaswati Sanskrit Class 11 Solutions Chapter 1 कुशलप्रशासनम्

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

अभ्यासः

प्रश्न 1.
संस्कृतेन उत्तरं देयम् –

(क) अयम् पाठः कस्माद् ग्रन्थात् सङ्कलितः?
उत्तर-
अयम् पाठः रामायणात् सङ्कलितः।

(ख) जटिलं चीरवसनः मुवि पतितः कः आसीत्?
उत्तर-
जटिलं चीरवसनः भुवि पतितः भरतः आसीत्।।

(ग) रामः कम् पाणिना परिजग्राह?
उत्तर-
रामः भरतम् पाणिना परिजग्राह।

(घ) भरतम् कः अपृच्छत्?
उत्तर-
भरतम् रामः अपृच्छत्।

(ङ) राज्ञां विजयमूलं किं भवति?
उत्तर-
राज्ञां विजयमूलं मन्त्रः भवति।

(च) राज्ञः कृते कीदृशः अमात्यः क्षेमकरः भवेत्?
उत्तर-
राज्ञः कृते मेधावी, शूरः, दक्षः, विचक्षणः, चामात्यः क्षेमकरः भवेत्।

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(छ) सेनापतिः कीदृग् गुणयुक्तः भवेत्?
उत्तर-
सेनापतिः धृष्टः, शूरः, धृतिमान्, मतिमान्, शुचिः, कुलीनः, अनुरक्तः, दक्षः च भवेत्। भास्वता (प्रथमा भागः)

(ज) बलेभ्यः यथाकालं किं दातव्यम्?
उत्तर-
बलेभ्यः यथाकाल भक्तं वेतनं दातव्यम्।

(झ) मन्त्रः कीदृशः भवति?
उत्तर-
मन्त्रः सुसंवृतः भवति।

(ञ) मेधावी अमात्यः राजानं काम् प्रापयेत्?
उत्तर-
मेधावी अमात्यः राजानं महतीं श्रियं प्रापयेत्।

प्रश्न 2.
रिक्तस्थानपूर्तिः क्रियताम् –
उत्तर-
(क) रामः ददर्श दुर्दर्श युगान्ते भास्करं यथा।
(ख) अङ्के भरतम् आरोप्य रामः सादर पर्यपृच्छत।
(ग) कच्चित् काले अवबुध्यसे?
(घ) पण्डितः हि अर्थकृच्छेषु महत् निःश्रेयसं कुर्यात्।
(ङ) श्रेष्ठाञ्छ्रेष्ठेषु कच्चित् एवं कर्मसु नियोजयसि।

प्रश्न 3.
सप्रसङ्ग मातृभाषया व्याख्यायेताम् –

(क) मन्त्री विजयमूलं हि राज्ञा भवति राघव!
उत्तर-
प्रसंग – प्रस्तुत श्लोकांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भास्वती’ प्रथमो-भागः के ‘कुशलप्रशासनम्’ नामक अध्याय में से उद्धृत किया गया है। यह अध्याय आदिकवि महर्षि रामायण के अयोध्याकाण्ड से संकलित है। भगवान् श्रीराम वन में रह रहे थे। भरत उनसे मिलने जाते हैं। इस श्लोकांश में श्रीराम भरत को उचित मन्त्रणा का महत्त्व बताते हुए कहते हैं –

सरलार्थ – हे रघुनन्दन् अच्छी मन्त्रणा ही राजाओं की विजय का मूल कारण होती है। NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

व्याख्या – अर्थात मन्त्रणा अत्यन्त गुप्त होनी चाहिए – यह सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त अमात्य नीतिशास्त्र में निपुण होने चाहिएँ जिनके साथ बैठकर राजा मन्त्रणा करता है। यदि नीतिशास्त्रज्ञ मन्त्री राजा को उचित सलाह देते हैं और वह गुप्त भी रखी जाती है तो अवश्य ही राजा विजयी होता है इसमें सन्देह नहीं। इस प्रकार उचित एवं गुप्त मन्त्रणा राजाओं की विजय का मूल कारण होती है।

(ख) कच्चित्ते मन्त्रितो मन्त्रो राष्ट्र न परिधावति।
उत्तर-
प्रसंग – प्रस्तुत श्लोकांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भास्वती – प्रथमो भाग के ‘कुशलप्रशासनम्’ नामक अध्याय में से अवतरित है। यह अध्याय आदिकवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के अयोध्याकाण्ड से संकलित है। वन में रह रहे श्रीराम से भरत मिलने जाते हैं। भरत को ‘मन्त्रियों के साथ की गई मन्त्रणा यदि गुप्त नहीं रहती तो उससे क्या नुकसान हो सकता है’ – इसके विषय में बताते हुए श्रीराम कहते हैं –

सरलार्थ – कहीं तुम्हारे द्वारा निश्चित गुप्त मन्त्रणा शत्रु के राज्य तक तो नहीं फैल जाती?

व्याख्या – श्रीराम भरत को समझाते हुए कहते हैं कि किसी गूढ़ विषय पर विचार-विमर्श न तो अकेले किया जाता और न ही बहुत सारे लोगों के साथ किया जाता है। दो एक अत्यन्त विश्वसनीय मन्त्रियों के साथ ही गुप्त मन्त्रणा की जाती है क्योंकि अनेक लोगों के साथ किसी गूढ़ विषय पर की गई मन्त्रणा शत्रुओं के राज्य तक भी पहुँच सकती है. इसी के विषय में श्रीराम भरत को सावधान कर रहे हैं यहाँ।

‘इस प्रकार अत्यन्त महत्त्वपूर्ण राजनीति-विज्ञान प्रस्तुत किया गया है यहाँ ।

प्रश्न 4.
प्रथमनवमश्लोकयोः स्वमातृभाषया अनुवादः क्रियताम् –
उत्तर-
(i) जटिलं ……………………………. यथा।।
हिन्दी-अनुवाद – श्रीराम ने जटा धारण किए हुए, पेड़ की छाल से बने वस्त्र पहने हुए, हाथ जोड़े हुए, दुःखपूर्वक देखने योग्य भरत को प्रलयकाल में पृथ्वी पर गिरे हुए. सूर्य की तरह देखा।

(ii) कच्चित्सहसान् ……………………………. श्रेयसं महत् ।।
हिन्दी-अनुवाद – क्या तुम हजार मूल् के बदले एक विद्वान् को अपने पास रखना चाहते हो क्योंकि एक विद्वान् पुरुष भी धन संकट के समय महान् कल्याण कर सकता है।

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प्रश्न 5.
अधोलिखितपदाना उचितमर्थ कोष्ठकात् चित्वा लिखत –
उत्तर-
(क) कठिनाई से देखने योग्य।
(ख) परिष्वज्य = आलिंगन करके।
(ग) आघाय सूंघकर।
(घ) मूर्ध्नि
(ङ) निःश्रेयसम् कल्याण को।
(च) विचक्षणः निपुण।
(छ) बलस्य सेना का।

प्रश्न 6.
विपरीतार्थमेलनं क्रियताम्
उत्तर-
(क) एकः = बहु
(ख) क्षिप्रम् = शनैः
(ग) पण्डितः = मूर्ख
(घ) महत् = लघु

प्रश्न 7.
सन्धिविच्छेद क्रियताम् –
यथा –
कुलीनश्च = कुलीनः + च।
उत्तर-
(क) भृत्याश्च = भृत्याः + च।
दुर्दशम = शिर + में।

Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् Summary Translation in Hindi and English

जटिलं चीरवसनं प्राञ्जलिं पतितं भुवि ।
ददर्श रामो दुर्दर्श युगान्ते भास्करं यथा।।

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शब्दार्थ (Word-meanings)

संस्कृत – हिन्दी – English
जटिलम् = जटा धारण किए हुए – One having matted hair
चीरवसनम् = पेड़ की छाल के बने हुए – One wearing bark of the
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 1

सरलार्थ – श्री राम ने जटा धारण किए हुए, पेड़ की छाल के बने वस्त्र पहने हुए, हाथ जोड़े हुए, दुःखपूर्वक देखने योग्य भरत को, प्रलयकाल में पृथ्वी पर गिरे हुए सूर्य की तरह देखा।

Meaning in English – Shri Rama saw Bharata who was having matted hair, who was wearing bark of the tree, who was standing with folded hands, who was difficult to be seen (i.e. in bad condition) and. who looked like the sun fallen on earth at the time of Pralaya i.e. total destruction of the universe.

2. कथञ्चिदमिविज्ञारा विवर्णवदनं कृशम्।
भ्रातरं भरतं रामः परिजग्राह पाणिना।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

भास्वती (प्रथमो भागः)
सरलार्थ – श्रीराम ने जैसे-तैसे उदास मुख वाले तथा दुर्बल अपने भाई भरत को पहचानकर उन्हें अपने हाथों में धारण कर लिया (उठाया)।

Meaning in English – Shri Rama recognised Bharata with great difficulty as his face was pale and he was very weak also. Then he held him in his hands.”

3. आघाय रामस्तं मूर्ध्नि परिष्वज्य च राघवम् ।
अङ्के भरतमारोप्य पर्यपृच्छत सादरम्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 3

सरलार्थ – श्री राम ने रघुकुलभूषण भरत का मस्तक सूंघकर, आलिंगन करके तथा उन्हें गोद में बिठाकर बड़े आदर के साथ उनसे पूछा

Meaning in English – Shri Rama then kissed Bharata. After embracing him and taking him in his lap Shri Rama asked him respectfully

4. कचिदात्मसमाः शूराः श्रुतवन्तो जितेन्द्रियाः।
कुलीनाश्चेङ्गितज्ञाश्च कृतास्ते तात मन्त्रिणाः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

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NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 5

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – हे तात (पूज्य)! क्या तुमने अपने ही समान शूरवीर, शास्त्रों के ज्ञाता, जितेन्द्रिय, कुलीन तथा बाह्य भावों से ही मन की बात समझने वाले मन्त्री नियुक्त किए हुए हैं?

Meaning in English – Oh revered person! Have you appointed the ministers who are brave like you, well-versed in the shastras, very virtuous born in high-families and very talented person?

5. मन्त्री विजयमूलं हि राज्ञा भवति राघव।
सुसंवृतो मन्त्रिधुरैरमात्यैः शास्त्रकोविदैः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 6

सरलार्थ – हे रघुनन्दन! अच्छी मन्त्रणा ही राजाओं की विजय का मूलकारण है। वह भी तभी सफल होती है जब नीतिशास्त्रनिपुण मन्त्रिशिरोमणि अमात्य उसे पूर्णतया गुप्त रखें।

Meaning in English – Oh Raghava! Good advice is the cause of victory of the kings and that also becomes fruitful when it is totally kept secret by the qualified ministers who are also well-versed in the i . shastras…

भास्वती (प्रथमो भागः)

6. कच्चिन्निद्रावशं नैषि कच्चित्कालेऽवबुध्यसे।
कच्चिच्चापररात्रेषु चिन्तयस्यर्थनैपुणम्।।

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शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 7

सरलार्थ – हे भरत! क्या तुम असमय में ही निद्रा के वशीभूत तो नहीं हो जाते? तुम समय पर जाग जाते हो न? रात्रि के अंतिम पहर में अर्थसिद्धि के बारे में विचार करते हो?

Meaning in English – Oh Bharata! Do you not go to sleep before time? Do you get up at proper time? Do you think seriiously about the accomplishment of wealth during the last three hours of night (during the very early monring time).

7. कच्चिन्मन्त्रयसे नैकः कच्चिन्न बहुभिः सह।
कच्चित्ते मन्त्रितो मन्त्रो राष्ट्र न परिधावति।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 8

सरलार्थ – तुम किसी गूढ विषय पर अकेले ही तो विचार नहीं करते? अथवा बहुत लोगों के साथ बैठकर तो मन्त्रणा नहीं करते? कहीं ऐसा तो नहीं होता कि तुम्हारी निश्चित गुप्त मन्त्रणा शत्रु के राज्य तक फैल जाती हो?

Meaning in English – Do you not take decision on important issue alone? Or you take decision on seriouis issues with so many people? Is it not so that the secret decisions taken by you reach the states of your enemies even?

8. कच्चिदर्थं विनिश्चित्य लघुमूलं महोदयम्।
क्षिप्रमारभसे कर्म न दीर्घयसि राघव।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 9

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – हे राघव! छोटे साधन वाले तथा बड़े परिणाम वाले कार्य का निश्चय करके तुम उसे शीघ्र आरम्भ कर देते हो न? उसमें तुम विलम्ब तो नहीं करते?

Meaning in English – Oh Raghava! After taking decision do you begin that work quickly which looks small but which has big result? Don’t you delay in accomplishing that work?

9. कच्चित्सहसान्मूर्खाणामेकमिच्छसि पण्डितम्।
पण्डितो ह्यर्थकृच्छेषु कुर्यान्निः श्रेयसं महत्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 10

सरलार्थ – क्या तुम हजार मूर्यों के बदले एक विद्वान को अपने पास रखना चाहते हो क्योंकि एक विद्वान् पुरुष भी धन के संकट के समय महान् कल्याण कर सकता है।

Meaning in English – Do you want to keep one learned man with you instead of having thousand foolish people? Because one learned person even can bring prosperity at the time of crisis of wealth.

10. एकोऽप्यमात्यो मेधावी शूरो दक्षो विचक्षणः।
राजानं राजपुत्रं वा प्रापयेन्महतीं श्रियम्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 11

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – यदि एक मन्त्री भी मेधावी, शूरवीर, निपुण तथा नीतिज्ञ हो तो वह राजा या राजकुमार को बहुत बड़ी धन-सम्पत्ति की प्राप्ति करा सकता है।

Meaning in English – If there is even one minister intelligent, brave, , clever and good politician (in the kingdom), he can bring great wealth : for the king or the prince.

11. कच्चिन्मुख्या महत्स्वेव मध्यमेषु च मध्यमाः।
‘जघन्याश्च जघन्येषु मृत्यास्ते तात योजिताः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 12
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 13

सरलार्थ – हे तात! तुमने महान व्यक्तियों को प्रधान कार्यों में, मध्यम श्रेणी के लोगों .को मध्यम प्रकार के कार्यों में तथा नीच व्यक्तियों को निम्न प्रकार के कार्यों में नियुक्त किया हुआ है न?

Meaning in English-Oh dear one! Have you engaged great people in important works, general people in general works and people of low-category in performing works of low-category.

12. अमात्यानुपधातीतान्पितृपैतामहान्छुचीन्।
श्रेष्ठाञ्छ्रेष्ठेषु कच्चित्त्वं नियोजयसि कर्मसु।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 14

सरलार्थ – क्या तुम उन्हीं अमात्यों को उत्तम कार्यों में नियुक्त करते हो जो घूस न लेते. हों, पिता-दादा आदि के समय से कार्य करते आ रहे हों तथा जो पूर्ण पवित्र तथा श्रेष्ठ हों।

Meaning in English – Do you engage those ministers only in performing good works who are not addicted to taking bribes, who are doing work since the time of your ancestors (i.e. parents and grand parents) and who are of good-nature.

13. कच्चिद्धृष्टश्च शूरश्च धृतिमान्मतिमाञ्छुचिः।
कुलीनश्चानुरक्तश्च दक्षः सेनापतिः कृतः।।

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शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 15
NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 16

सरलार्थ – क्या तुमने किसी के दबाव में न आने वाले, शूरवीर, धैर्यशाली, बुद्धिमान्, पवित्र, कुलीन, अपने में ही अनुराग रखने वाले तथा युद्ध कर्म में चतुर पुरुष को ही सेनापति बनाया है।

Meaning in English – Have you appointed some one who is very bold, brave, courageous, intelligent, simple by nature, born in high family, devoted and clever in fighting as a commander of the army?

14. कच्चिदबलस्य भक्तं च वेतनं च यथोचितम् ।
सम्प्राप्तकालं दातव्यं ददासि न विलम्बसे।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 17

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

सरलार्थ – सैनिकों को देने के लिए निश्चित तथा उचित वेतन तथा भत्ता तुम समय पर तो दे देते हो न? देने में विलम्ब तो नहीं करते?

Meaning in English – Do you give away the fixed and proper amount of the allowances and salaries to your soldiers in time? Don’t you delay in making the payment?

15. कालातिक्रमणाच्चैव भक्तवेतनयोमृताः।
भर्तुरप्यतिकुप्यन्ति सोऽनर्थः सुमहान्स्मृतः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 11 Sanskrit Shemushi Chapter 1 कुशलप्रशासनम् 18

सरलार्थ – यदि समय बीत जाने पर भत्ता तथा वेतन दिए जाते हैं तो सैनिक अपने स्वामी से अत्यन्त कुपित हो जाते हैं तथा इससे बहुत भारी आपत्ति भी घट सकती है।

Meaning in English – If the allowances and salaries are paid after surpassing the proper time then the soldiers may get very angry with their king and serious misfortune may occur there.

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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी

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Bhaswati Class 12 Solutions Chapter 8 हल्दीघाटी

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं ददत

(क) आर्यभुवि शाटीतः का विराजते?
उत्तर
हल्दीघाटी।

(ख) उषसि हल्दीघाटी कीदृशीं शोभां दधाति?
उत्तर
काञ्चनकाञ्चनीयाम्।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी

(ग) सनयः तनयः कः अस्ति?
उत्तर
प्रतापः।

(घ) के नीलेन पक्षण खम् अ
उत्तर
सुशुकाः।

(ङ) वरभुवः सुषमा कथं सम्भासते?
उत्तर
अत्युदारा।

(च) तमः सहचरी का कथिता?
उत्तर
विद्युत्।

(छ) प्रतापनृपतेः अस्रधारा कतिधा अभवत् ?
उत्तर
शतधा।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत
(क) मूर्तिमती हल्दीघाटी कथम् आटीकते?
उत्तर
मूर्तिमती हल्दीघाटी शाटीव आटीकते।

(ख) कदा हल्दीघाटी मतिमाननीयां शोभां दधाति?
उत्तर
हल्दीघाटी मतिमाननीयां शोभाम् उषसि दधाति ।

(ग) पिकालिगीतिः किमिव मातुः पूजनं करोति?
उत्तर
पिकालिगीतिः पञ्चोपचारमिव मातुः पूजनं करोति।

(घ) कथं क्वणन्तः सुशुकाः विलसन्ति?
उत्तर
‘श्रीराम’ नाम मधुरं क्वणन्तः सुशुकाः विलसन्ति ।

(ङ) हल्दीघाटी केषां स्थली अस्ति?
उत्तर
हल्दीघाटी चकितचेतकचक्रमाणां, कटिलकन्तपराक्रमाणाम. अमराणां प्रियतमा नरपामराणां भयकरी स्थली चास्ति।

(च) वरभुवः अत्युदारा सुषमा कीदृशी भासते?
उत्तर
वरभुवः अत्युदारा सुषमा हर्षाङ्कितः भासते।

(छ) प्रकृतिः केषां पञ्चपदार्थानामुपचारेण पूजनं करोति?
उत्तर
प्रकृतिः पुष्पं, फलं, गन्धवहः समीरः, अमला खद्योतपंक्तिः, पिकालिगीतिः च इति पञ्चपदार्थानामुपचारेण पूजनं करोति।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी

प्रश्न 3.
अधोलिखितेषु वाक्येषु रेखाङ्कितानि पदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

(क) मूर्तिमती हल्दीघाटी जयति।
उत्तर
का हल्दीघाटी जयति?

(ख) या उषसि शोभां दधाति।
उत्तर
या कदा शोभां दधाति?

(ग) तरूणां ततिः कदम्बकृतमर्मरम् आतनोति।
उत्तर
केषां ततिः कम् आतनोति?

(घ) निर्जनवने कुररी मातेव रोदिति।
उत्तर
निर्जनवने का मातेव रोदिति?

(ङ) मातुः पञ्चोपचार पूजनं करोति।
उत्तर
कस्याः पञ्चोपचार पूजनं करोति?

(च) अस्रधारा शतधा अभवत्
उत्तर
अस्रधारा कतिधा अभवत् ?

(छ) असुतः अपि प्रियतमा स्थली।
उत्तर
कस्मात् अपि प्रियतमा स्थली?

प्रश्न 4.
अधोलिखितानां पदेषु सन्धिं सन्धिच्छेदं वा कुरुत
उत्तर
(क) स्वाधीनतार्यभुवि = स्वाधीनता + आर्यभुवि।
(ख) दधाति + उषसि = दधात्युषसि।
(ग) ततिस्तरूणाम् = ततिः + तरूणाम् ।
(घ) सुशुका विलसन्ति = सुशुकाः + विलसन्ति।
(ङ) तदनु = तत् + अनु।

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प्रश्न 5.
अधोलिखितपदेषु प्रकृति प्रत्ययं च पृथक् कुरुत
प्रकृतिः प्रत्ययः
उत्तर
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी 14

प्रश्न 6.
अधः प्रदत्तं श्लोकं मञ्जूषाप्रदत्तपदैः रिक्तस्थानानि पूरयित्वा पुनः लिखत ”
उत्तर
प्राची यदा हसति हे प्रिय! मन्दमन्दं
वायुर्यदा वहति नन्दनजं मरन्दम्।
या प्रत्यहं किल तदा मतिमाननीयां
शोभां दधत्युषसि काञ्चनकाञ्चनीयाम् ।।

प्रश्न 7.
विशेषणानि विशेष्याणि च योजयित्वा पुनः लिखत
विशेषणानि – विशेष्याणि
उत्तर
(क) सुशोचिः — शाटी
(ख) पारतन्त्र्याः — कातराः
(ग) प्रतापी — तनयः
(घ) क्वणन्तः — सुशुकाः
(ङ) शतधा — अस्रधारा
(च) नीलेन — पक्षनिवहेन
(छ) अमला — खद्योतपंक्तिः

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प्रश्न 8.
अधोलिखितानां पदानां व्याकरणनुसारं पदपरिचयः दीयताम्
उत्तर
(क) स्वाधीनता = स्वाधीन शब्द + तल प्रत्यय + टाप् प्रत्यय।
(ख) माननीया =’मान् + अनीयर् प्रत्यय + टाप् प्रत्यय।
(ग) सन्तः = अस् धातु + शतृ प्रत्यय, पु. प्रथमा वि. बहुवचन।
(घ) तमः = तमस् शब्द, नपुं., प्रथमा विः एकवचन।
(ङ) सम्भासते = सम् उप. + भास् धातु, आत्मनेपदी, लट् लकार, प्रथम पुरुष एकवचन।
(च) स्थली = स्थल शब्द + ङीष् प्रत्यय।
(छ) माता = मा धातु + तृच् प्रत्यय, प्रथमा वि. एकवचन।

प्रश्न 9.
हल्दीघाटीयद्धस्य ऐतिहासिक परिचयः हिन्दी/आंग्ल/संस्कृतभाषया देयः ।
उत्तर
संस्कृत-अनुवाद-1576 तमे वर्षे मुगलशासक-अकबरस्य राजपूतशासक प्रतापस्य च मध्ये हल्दीघाटी नाम्नि स्थाने युद्धः अभवत् । महाराणाप्रतापं विहाय अन्यैः सर्वेः अपि राजपूतशासकैः मुगलानाम् अधीनता स्वीकृता किन्तु प्रतापेण एव मुगलशासकैः सह युद्धं कृतम्। हिन्दूसंस्कृतेः रक्षणार्थं तेन दृढः प्रयासः कृतः ।

तेन मुगलशासकैः सह मैत्रीसंबन्धः वैवाहिकसम्बन्धः वा नैव स्वीकृतः । मुगलशासकः अकबरः प्रतापेन सह मैत्री सम्बन्ध स्थापयितुम् इच्छति स्म किन्तु सः सफलः नाभवत् । सः वीरः पूर्णसाहसेन युद्धमकरोत् किन्तु अन्ते सः पराजितः अभवत्।

हिन्दी-अनुवाद-हल्दीघाटी का युद्ध 1576 में मुगल सम्राट अकबर तथा राजपूत शासक महाराणा प्रताप के बीच हल्दीघाटी नामक स्थान पर हुआ। महाराणा प्रताप के अतिरिक्त सभी राजपूत शासकों ने मुगलों की अधीनता स्वीकार कर ली थी केवल महाराणा प्रताप ने मुगलों से लोहा लिया।

प्रताप ने हिन्दू संस्कृति को बचाने के लिए अथक प्रयास किए। उन्होंने बाकि राजपूत शासकों की तरह मुगलों से न तो मैत्री समबन्ध स्थापित किए और न ही वैवाहिक सम्बन्धों को बढ़ावा दिया। अकबर ने अपने दूतों के द्वारा महाराणा प्रताप से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बनाने की कोशिशें की लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। अतः अकबर ने मुगल साम्राज्य को बढ़ाने तथा महाराणा प्रताप ने हिन्दू संस्कृति को बचाने के लिए युद्ध किए। महाराणा प्रताप ने वीरता से युद्ध में संघर्ष किया किन्तु अन्त में वह हार गया।

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English-Translation-The war of Haldi Ghati was fought between Mugal emperor Akbar and great Rajput administrator Maharana Pratap in 1576 at Haldi Ghati place. Except Maharana Pratap, all the Rajput administrators accepted defeat. Only Maharana Pratap fought very bravely against the Mughal.

Pratap tried very hard to save the Indian, culture and civilisation. He neither accepted friendship with Mughal emperors nor promoted marriage relationships of any type. Akbar tried to establish arricable relationship with Maharana.

He sent his messengers several time for treaty but was proved in vain. So Akbar fought for the expansion of his empire while Maharana fought to save the Indian culture and civilisation. Although Maharana fought bravely in the battle he lost in the end.

प्रश्न 10.
महाराणाप्रतापस्य स्वातन्त्र्यसङ्घर्ष हिन्दी/आंग्ल/संस्कृतभाषया वर्णयत।
उत्तर
संस्कृत-अनुवाद-महाराणाप्रतापस्य जन्म राजपूत-शासकस्य गृहे अभवत्। बाल्यकालात् एव सः युद्धप्रेमी हिन्दूसंस्कृतेः पोषकः चासीत् । असिचालनं कृपाणचालनं अश्वारोहणं च तस्मै रोचते स्म। अन्ते मुगुलशासकाः तेन पराजिताः।

हिन्दी-अनुवाद-महाराणा प्रताप का जन्म एक राजपूत शासक के घर हुआ। बचपन से ही वे युद्ध-प्रेमी तथा हिन्दू संस्कृति के प्रबल पोषक थे। उनकी शिक्षा-दीक्षा भी ऐसे ही माहौल में हुई। वे बचपन से ही तलवार तथा भाले चलाने में निपुण थे। उनको घुड़सवारी का बड़ा शौक था। बाद में वे ऐसे राजपूत शासक के रूप में उभरे जिन्होंने मुगल शासकों से लोहा लिया।

English-Translation—Maharana Pratap was born in a Rajput family. From the childhood he was very fond of fighting and he was a true saviour of Hindu culture. He learnt to operate sword and Javelin like several other weapons. He was very fond of riding horse. Later on, he emerged as a very strong Rajput emperor who fought against Mughals.

Bhaswati Class 12 Solutions Chapter 8 हल्दीघाटी Summary Translation in Hindi and English

1.स्वाधीनताऽर्यभुवि मूर्तिमती समाना
राणा प्रताप बलवीर्यविभासमाना।
आटीकते समुपमा नहि यां सुशोचिः
शाटीव सा जयति काचन हल्दिघाटी।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी 1
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी 2

हिन्दी सरलार्थ-चमकदार साड़ी की तरह, राणा प्रताप के बल एवं पराक्रम से सुशोभित स्वाधीनता की साक्षात् मूर्ति जिसके समान कोई अन्य उपमान नहीं ऐसी आर्यावर्त में स्थित हल्दीघाटी की जय हो।।

Meaning in English-Haldighati which situated in Aryavarta may be victorious which looks beautiful like a saree, which is endowed with the strength and prowess of Rana Pratap, which does not have any comparison and which is embodied in the form of freedom.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी

2. प्राची यदा हसति हे प्रिय! मन्दमन्दं
वायुर्यदा वहति नन्दनजं मरन्दम् ।
या प्रत्यहं किल तदा मतिमाननीयां
शोभां दधत्युषसि काञ्चनकाञ्चनीयाम्।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी 3
हिन्दी सरलार्थ-हे प्रिय! जब पूर्व दिशा मन्द-मन्द हँसती है, जब वायु नन्दन में उत्पन्न पराग को वहन करती है उस समय विद्वानों के द्वारा सम्मानित प्रतिदिन उषाकाल में वह हल्दीघाटी स्वर्णिम शोभा को धारण करती है।

Meaning in English-Oh dear! Haldigahti looks very beautiful in the early morning by the beauty of her scholers when the east direction laughs slowly and the wind blows gently containing the pollen of the flowers which grow in he Nandan forest.

3. मा कातराः! स्पृशत मां प्रिय-पारतन्त्र्याः !
अद्यापि यन्न विहिता जननी स्वतन्त्रा।।
यत्रेदमेव गदतीव ततिस्तरूणां
शाखाकदम्ब-कृत-मर्मरमातनोति।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी 4
हिन्दी सरलार्थ-पराधीनता से प्रेम करने वालो हे कायरो! मुझे मत छुओ क्योंकि अब तक भी तुम मातृभूमि को स्वतन्त्र नहीं कर पाए हो जहाँ वृक्षों की पंक्तियाँ मानो इसी बात को कहती हुई अपनी वृक्षशाखाओं की मर्मर ध्वनि को फैला रही हैं।

Meaning in English-oh dependence-loving cowards! Do not touch me because you are not able to make our motherland free by now even where the rows of trees are conveying this idea and they are spreading this susurration sound of their branches.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी

4. वीराग्रणीरभय-युद्धकलाकलापः
क्वाऽस्तेऽद्य हा! स तनयः सनयः प्रतापी।
अत्रत्य निर्जनवनेऽथ यदा कदाचिद्
क्व मातेव रोदिति सखे! कुररी नु काचित् ।।
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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी 6
हिन्दी सरलार्थ-बड़े दुःख की बात है कि आज वीरों में श्रेष्ठ, युद्धकलाओं में निपुण, नीतियुक्त, प्रतापी वह पुत्र कहाँ है? हे मित्र! इस निर्जन वन में जब क्रौञ्ची रोती है तो , लगता है कि अपने वीर पुत्र प्रताप को स्मरण कर भारतमाता रो रही है।

Meaning in English–It is very sad! where is that glorious son who was a great warrior and well-versed in the art of fighting and plitics. Oh friend! whenever the Kraunchi bird cires in this lonely forest it seems to be that mother land India is weeping to remember her glorious son

5. पुष्पं फलं तदनु गन्धवहः समीरः
खद्योत-पंक्तिरमला च पिकालि-गीतिः।
अद्यापि यंत्र सरल-प्रकृति-प्रणीतं
पञ्चोपचारमिव पूजनमस्ति मातुः।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी 7

हिन्दी सरलार्थ-आज भी सरल प्रकृति से निर्मित पुष्प, फल, सुगन्धित वायु, निर्मल जुगनु की पंक्ति तथा कोयलों के गीत-ये पाँचों मिलकर मानों भारतमाता का पूजन करते हैं।

Meaning in English-Even today it appears that all these five namely flowers, fruits, forgrant wind, the sacred glow-worms and the songs of cuckoos made up of simple-nature altogether worship the mother land India.

6. नीलेन पक्ष-निवहेन खमाहसन्तः
चञ्च्वा फलानि विमलानि समञ्चयन्तः।
‘श्रीराम’ नाम मधुरं मधुरं क्वणन्तः
अद्यापि यत्र सुशुका विलसन्ति सन्तः।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी 8

हिन्दी सरलार्थ-आज भी जहाँ नीले पंख समूह से आकाश का उपहास करते हुए चोंच से निर्मल फलों को चमकाते हुए, श्रीराम के नाम का मधुर-मधुर शब्द करते हुए सुन्दर तोतों की तरह सज्जन सुशोभित होते हैं।

Meaning in English–Even today beautiful parrots look beautiful like the gentlemen who make fun of sky with their blue-coloured feathers, who make the fruits shine with their beaks and who produce the sound of the name of shri Rama.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी

7. अत्र प्रताप-नृपतेः प्रकट-प्रतापा
एकाऽपि हन्त! शतधाऽभवदस्रधारा ।
युद्धेऽधिकोशमपि शत्रुवधे क्रमेण
ज्योत्स्ना तमः-सहचरी चपलेति चित्रम् ।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी 9
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी 10
हिन्दी सरलार्थ-दुःख है कि यहाँ राजा प्रताप के तेज को प्रकट करने वाली कृपाण की ज्योत्स्ना क्रम से अन्धकार के साथ चलने वाली (म्यान) विद्युत बन गई यह विचित्र बात है।

Meaning in English-Oh! One stream of tears which manifested the prowess of king Pratap appeared to be hundred of streams of tears. It is suprising again that at the time of the killing of the enemies the light of the sword which remains in the sheath appeared to be lightning which walk with darkness simultaneously.

8. सैषा स्थली चकित-चेतकचक्रमाणां
सैषा स्थली कुटिलकुन्तपराक्रमाणाम्।
सैषा स्थली प्रियतमाऽप्यसुतोऽमराणां
सैषा स्थली भयकरी नर-पामराणाम् ।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 8 हल्दीघाटी 11
हिन्दी सरलार्थ-यह चेतक की अद्भुत भ्रमण-स्थली है, यह कुटिल भाले की पराक्रम-स्थली है, यह देवताओं की प्राणों से बढ़कर प्रियतम स्थली है और यही नीच-प्राणियों को भयभीत करने वाली स्थली है।

Meaning in English-This is the extra-ordinary place of walking for Chetak, this is the place of showing prowess of the crooked spear, this is the beautiful place for the Gods which is more affectionate than the life itself for them and this is the place which cause fear for the wicked people.

9. वीक्ष्य प्रभा हसित-चारु-पुरन्दराणां
सङ्ग स नृत्यममलं शिखिसुन्दराणाम्
सम्भासते वरभुवः सुषमात्युदारः
हषोङ्कितो हरितहीरक-कण्ठहारः।।

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हिन्दी सरलार्थ-श्रेष्ठ भूमि की शोभा से अत्यन्त उदार और हर्ष से युक्त, हरे रंग के हीरे का कण्ठाहार वाली, अपनी प्रभा से सुन्दर इन्द्र को उपहसित करने वाली तथा मनोहारी मयूरों के निर्मल नृत्य के साथ वह सुशोभित होती है।

Meaning in English-That Haldighati looks beautiful with the charming and happy land, wearing the necklace of green-diamond which makes fun of lord Indra even and where peacocks attract people with; their beautiful dance.

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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

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Bhaswati Class 12 Solutions Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

अभ्यासः

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत

(क) कः कण्टकजालम् पश्यति?
उत्तर
क्रमेलकः।

(ख) शर्बरी केन भाति?
उत्तर
चन्द्रेण।

(ग) कः गुणं वेत्ति?
उत्तर
गुणी।

(घ) अजीर्णे किं भेषजम् अस्ति?
उत्तर
वारि।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

(ङ) सर्वस्य लोचनं किम् अस्ति?
उत्तर
शास्त्रम्।

(च) कः निरन्तरं प्रलपति?
उत्तर
अल्पज्ञः।

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत

(क) केषां समाजे अपण्डितानां मौनं विभूषणम् ?
उत्तर
सर्वविदां समाजे अपण्डितानां मौनं विभूषणम् ।

(ख) के सर्वलोकस्य दासाः सन्ति?
उत्तर
आशायाः दासाः सर्वलोकस्य दासाः सन्ति।

(ग) केन कुलं विभाति?
उत्तर
सुपुत्रेण कुलं विभाति।

(घ) सिंहः केन विभाति?
उत्तर
सिंहः बलेन विभाति।

(ङ) भेजनान्ते किं विषम्?
उत्तर
भोजनान्ते वारि विषम्।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

प्रश्न 3.
रेखाङ्कित पदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

(क). विधात्रा अज्ञतायाः छादनं विनिर्मितम्
उत्तर
केन अज्ञतायाः छादनं विनिर्मितम् ?

(ख) विद्यावतां विद्या एव रूपम् अस्ति।
उत्तर
केषाम् विद्या एव रूपम् अस्ति?

(ग) लक्ष्मीः शूरं प्राप्नोति।
उत्तर
का शूरं प्राप्नोति?

(घ). बली बलं वेति।
उत्तर
बली किं वेति?

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

(ङ) शास्त्रं परोक्षार्थस्य दर्शकम् अस्ति।
उत्तर
शास्त्रं कस्य दर्शकम् अस्ति?

(च) कांस्यम् अतितरां निनादं करोति।
उत्तर
किम् अतितरां निनादं करोति?

प्रश्न 4.
उचितपदैः सह रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) ये आशायाः दासाः ते सर्वलोकस्य दासाः (भवन्ति)। येषाम् आशा दासा (भवति) – तेषां सर्वं दासायते। ल्यप्

(ख). एकेन अपि विद्यायुक्तेन साधुना सुपुत्रेण सर्व कुलम् आह्लादितं यथा चन्द्रेण शर्वरी।

(ग) लक्ष्मीः उत्साहसम्पन्नम् अदीर्घसूत्रं क्रियाविधिज्ञं व्यसनेषु असक्तम् शूरम् कृतज्ञम्
दृढ़सौहृदम् च निवासहेतोः स्वयं याति।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

प्रश्न 5.
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 16

प्रश्न 6.
पर्यायवाचिभिः सह मेलनं कुरुत यथा-स्वायत्तम् स्वाधीनम्
उत्तर
(क) विमुच्य – परित्यज्य
(ख) क्रमेलकः – उष्ट्रः
(ग) याति – गच्छति ।
(घ) कुलालस्य – कुम्भकारस्य
(ड) शर्वरी – रात्रिः
(च) वेत्ति – जानाति
(छ) करी – गजः
(ज) अजस्रम् -निरन्तरम्
(झ) प्रलपति – कथयति
(ञ) मुहूर्तमात्रम् – क्षणमात्रम्

प्रश्न 7.
विलोमपदैः सह योजयत
यथा-स्वायत्तम् पराधीनम् .
उत्तर-
(क) अज्ञतायाः – विद्वत्तायाः .
(ख) अपण्डितानाम् – पंण्डितानाम्
(ग) बुधाः – मूर्खाः
(घ) मानम् – अपमानम्
(ड) खलानाम् – सज्जनानाम्
(च) याति  – आयाति ।
(छ) कृतज्ञम् – अकृतज्ञम्
(ज) आशायाः  – निराशायाः
(झ) आसक्तम् – अनासक्तम्
(ञ) कृतम् – अकृतम्
(ट) जीर्णे – अजीर्णे

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

प्रश्न 8.
विशेषणं विशेष्येण सह योजयत
यथा-शूरम् —- पुरुषम् उत्तर
(क) एकन – सुपत्रण
(ख) अज्पज्ञः – पुरुषः
(ग) सर्वम् – कुलम्
(घ) एकम् – लोकम्
(ड) सुमहान् –

प्रश्न 9.
कः केन विभाति ।
उत्तर:
(क) गुणी – गुणेन
(ख) शर्वरी – चन्द्रेण
(ग) विद्वान् – विद्यया
(घ) सिंहः – बलेन
(ड) कुलम् – सुपुत्रेण

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

प्रश्न 10.
अधोलिखितानि पदानि उचितरूपेण संयोज्य वाक्यानि रचयत
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 17
उत्तर
1. विधात्रा छादनं विनिर्मितम् ।
2. लक्ष्मीः शूरं पश्यति।
3. मौनम् सर्वविदाम् भूषणम् अस्ति।
4. शर्वरी शोभते।

Bhaswati Class 12 Solutions Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् Summary Translation in Hindi and English

1.स्वायत्तमेकान्तगुणं विधात्रा
विनिर्मितं छादनमज्ञतायाः।
विशेषतः सर्वविदां समाजे
विभूषणं मौनमपण्डितानाम् ।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 1
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 2
हिन्दी सरलार्थ-विधाता ने मूों के अपने हाथ में रहने वाले तथा अत्यन्त हितकारी मौन को मूर्खता को छिपाने का ढक्कन बनाया है जो विद्वानों की सभा में विशेष रूप – से आभूषण हो जाता है।

Meaning in English-The Creator has created silence as a perpetually beneficial cover of ignorance in ones own power (under ones own control). Silence is the ornament for the fools especially in the assembly of the learned men.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

2. रूपं प्रसिद्धं न बुधास्तदाहु
विद्यावतां वस्तुत एव.रूपम्।
अपेक्षया रूपवतां हि विद्या
मानं लभन्तेऽतितरां जगत्याम् ।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 3
हिन्दी सरलार्थ-(सामान्य रूप में) प्रचलित रूप ही वास्तविक रूप नहीं है-ऐसा विद्वान् लोग कहते हैं तथा विद्वानों का रूप ही वास्तविक रूप है। सुन्दर लोगों की अपेक्षा विद्यावान व्यक्ति ही संसार में अत्यधिक मान प्राप्त करते हैं।

Meaning in English-The scholars say that the external beauty which is generally understood is not the real beauty and the beauty of knowledge is the real beauty of the learned people. The learned people achieve much more respect as compared to those who have outward beauty only.

3. न दुर्जनः सजजनतामुपैति शठः सहस्रैरपि शिक्ष्यमाणः ।
चिरं निमग्नोऽपि सुधा-समुद्रे न मन्दरो मार्दवमभ्युपैति।। …
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 4
हिन्दी सरलार्थ-हजार लोगों के द्वारा शिक्षित किया जाता हुआ भी धोखेबाज दुष्ट सज्जनता को प्राप्त नहीं करता जिस प्रकार बहुत समय तक अमृत के समुद्र में डुबोया हुआ मंदराचल भी कभी कोमलता को प्राप्त नहीं करता। (अर्थात् वस्तु अथवा व्यक्ति अपने सहज स्वभाव को कभी नहीं छोड़ता।)

Meaning in English-A wicked rascal does not become gentleman even if he is taught variously by thousards of good people as the Mandarachal mountain does not become soft even it is plunged in the ocean of nectar for a long time.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

4. कर्णामृतं सूक्तिरसं विमुच्य दोषेषु यत्नः समुहान् खलानाम्।
निरीक्षते केलिवनं प्रविश्य क्रमेलकः कण्टकजालमेव ।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 5
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 6
हिन्दी सरलार्थ-दुष्ट लोग कानों के अमृत स्वरूप सुन्दर वचनों के महत्वपूर्ण भावों को छोड़कर दोषपूर्ण वचनों के प्रति अत्यन्त प्रयत्नशील रहते है जिस प्रकार ऊँट प्रमोदवन में प्रवेश करके भी केवल झाड़ियों को ही ढूंढता है अर्थात् ऊँट राजस्थान में झाड़ियों को ही प्राप्त करता है अतः उसे वही प्रिय होती हैं तथा सुन्दर पल्लवित-पुष्पित उपवनों में जाकर भी वह झाड़ियों की ही खोज में लगा रह कर समय और जीवन नष्ट करता है। सत्य है अपने स्वभाव को कभी नहीं छोड़ता, स्वभाव सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है।

Meaning in English-The wicked people give up the meaningful beautiful words which produce beautiful sense like nectar for the ears.. and make great effort to hear imperfect senseless) sayings just as a camel enters into a park which is full of green flowers but he leaves such a park and goes to the bushes only. So a living being never gives up his nature even if it brings harm to him.

5. उत्साहंसम्पन्नमदीर्घसूत्रं क्रियाविधिज्ञं व्यसनेष्वसक्तम् ।
शूरं कृतज्ञं दृढसौहृदञ्च लक्ष्मीः स्वयं याति निवासहेतोः।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 7
हिन्दी सरलार्थ-उत्साहपूर्ण समय पर कार्य करने वाला, कार्य की उचित विधि को जानने वाला, बुराइयों में न लगा हुआ, शूरवीर, कृतज्ञ तथा मित्रता को दृढ़तापूर्वक निभाने वाला-ऐसे गुणवान् मनुष्य के पास लक्ष्मी रहने के लिए स्वयं चली जाती है।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

Meaning in English–The goddess of wealth goes herself to live with a person who is enthusiastic, who performs his works at proper time, who knows proper way of performing the works, who is not engaged in evils, who is brave, grateful and always careful of his friends.

6.दीर्घप्रयासेन कृतं हि वस्तु निमेषमात्रेण भजेद् विनाशम् ।
कर्तुं कुलालस्य तु वर्षमेकं भेत्तुं हि दण्डस्य मुहूर्तमात्रम् ।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 8
हिन्दी सरलार्थ-किसी वस्तु के निर्माण में बहुत प्रयत्न लगाया जाता है किन्तु … क्षणभर में ही वह विनाश को प्राप्त कर लेती है जिस प्रकार कुम्हार किसी वस्तु का (घड़े आदि का) निर्माण करने के लिए एक वर्ष तक का समय और प्रयत्न लगाता है किन्तु उसको नष्ट करने के लिए डण्डे के प्रहार का एक क्षणमात्र काफी है। .

Meaning in English-Great effort is required for making a thing while it can be destroyed in a short moment only just as a pitcher-maker takes a long-time of full one year and much effort also is required to make a pitcher etc. but only a blow of a stick of a very small time is required to destroy that.

7. आरंभेत हि कर्माणि श्रान्तः श्रान्तः पुनः पुनः।
कर्माण्यारभमाणं हि पुरुषं श्रीनिषेवते।। शब्दार्थ
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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 10
हिन्दी सरलार्थ-थका हुआ होने पर भी मनुष्य को बार बार कार्य आरम्भ करना चाहिए (कार्य का अभ्यास करना चाहिए), क्योंकि कार्य आरम्भ करने वाले पुरुष को ही धन
और सफलता प्राप्त होती है।

Meaning in English-Aman should again and again begin his works even if he is tired because a man who performs his works-alone can achieve wealth and success.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

8. एकेनापि सुपुत्रेण विद्यायुक्तेन साधुना।।
आह्लादितं कुलं सर्वं यथा चन्द्रेण शर्वरी।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 11
हिन्दी सरलार्थ-जैसे एक चन्द्रमा से रात्रि प्रकाशयुक्त (और आनन्दित) हो जाती है ऐसे ही एक सज्जन विद्यायुक्त अच्छे पुत्र से सारा परिवार आहादित हो जाता है।

Meaning in English-Just as the whole night is delighted with one moon similarly the whole family is delighted with one gentle and well-educated worthy son only.

9. गुणी गुणं वेत्ति न वेत्ति निर्गणः
बली बलं वेत्ति न वेत्ति निर्बलः।
पिको वसन्तस्य गुणं न वायसः
करी च सिंहस्य बलं न मूषकः।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 12
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 13
हिन्दी सरलार्थ–गुणवान् व्यक्ति ही गुण को जानता है निर्गुण नहीं, बलशाली बल को समझता है निर्बल नहीं, कोयल वसन्ते के महत्व को समझती है कौआ नहीं, इसी प्रकार शेर का बल हाथी होता है चूहा नहीं। (अर्थात् निर्गुण को गुणों का ज्ञान ही नहीं होता, उसके लिए . गुणों का कोई महत्व नहीं होता, शक्तिशाली के लिए बल अत्यन्त महत्वपूर्ण है निर्बल को बल-प्रदर्शन से कोई प्रयोजन नहीं, इसी प्रकार कोयल वसन्त ऋतु में ही मधुर आवाज सुनाती है, अतः इसके लिए वसन्त महत्वपूर्ण है कौवे के लिए नहीं और शेर हाथी पर ही अपना बल दिखाता है चूहे पर नहीं, हाथी उसके लिए महत्वपूर्ण है चूहा नहीं।)

Meaning in English-A virtuous man only knows the value of virtues not a vitueless person; a powerful man only knows the value of power and not the weak one, a cuckoo sings only in spring season, so time of spring is valuable for the cuckoo and not for the crow. Similarly a lion shows his strength in fighting with an elephant only and not with the mouse. (so one shows his strength to the person of equal strength only.)

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम्

10. अजीर्णे भेषजं वारि जीर्णे वारि बलप्रदम्।।
भोजने चामृतं वारि भेजनान्ते विषापहम् ।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 14

हिन्दी सरलार्थ-अपच हो जाने पर जल दवा है, भोजन पच जाने पर ग्रहण किया हुआ जल शक्ति प्रदान करने वाला है, भोजन करते समय ग्रहण किया हुआ जल साक्षात् अमृत है किन्त भोजन के अन्त में लिया जल हुआ विष के समान त्याज्य होता है।

Meaning in English-The water, taken at the time of indigestion, is useful like medicine. It produces strength, if it is taken when the food is digested. If water is taken at the time of eating the food it is valuable like the nectar but it is harmful like the poison if it is take at the end of meals, so it should be avoided at the end of the meals.

11. अनेकसंशयोच्छेदि परोक्षार्थस्य दर्शकम् ।
सर्वस्य लोचनं शास्त्रं यस्य नास्त्यन्ध एव सः।।

हिन्दी सरलार्थ-शास्त्र अनेक सन्देहों का नाश करने वाला तथा गुप्त अर्थ को प्रकट करने वाला होता है। शास्त्र सबका नेत्र है, जिनके पास शास्त्र (शास्त्रीय ज्ञान) नहीं वह तो अंधा ही है (अर्थात् शास्त्र ज्ञान से हीन व्यक्ति अन्धा तथा पूरी तरह मूर्ख, ज्ञानहीन ही होता है।)

Meaning in English-The knowledge of shastras removes the doubts and provides secret meanings also. It is (called) the eye (eye-sight) for every one and he is blind only who does not have (knowledge of the) shastras. (The poet here wants to say that without the knowledge of shástras one is just like a blind or a fool.)

12. अल्पज्ञ एव पुरुषः प्रलपत्यजस्रं
पाण्डित्यसम्भृतमतिस्तु भितप्रभाषी।
कास्यं यथा हि कुरुतेऽतितरां निनादं
तद्वत् सुवर्णमिह नैव करोति नादम् ।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 6 सूक्ति-सौरभम् 18
हिन्दी सरलार्थ-अल्पज्ञ पुरुष निरन्तर ही बकबक करता रहता है जबकि … ज्ञानयुकत तथा निश्चित बुद्धि वाला मनुष्य कम बोलने वालो होता है। इसी प्रकार कांसा गिरने पर बहुत अधिक शोर करता है जबकि सोना बिलकुल शोर नहीं करता अर्थात् कवि कहना चाहता है विद्वान् व्यक्ति सोने के समान बिलकुल शोर नहीं करते, वे अपने गुणों का बखान या व्यर्थ की बकबक नहीं करते तथा बहुत कम बोलते हैं।

Meaning in English-A man with little knowledge chatters too much while a scholar and a firm-minded man speaks very little, Similarly (the pot made of) bronze make great sound (when it falls on the earth) while the gold does not make the sound at all (when fallen.) So, the wiseman speaks very little while the man with little knowledge chatters very much and he does not make sound like gold.

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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 नैकेनापि समं गता वसुमती

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Bhaswati Class 12 Solutions Chapter 7 नैकेनापि समं गता वसुमती

अभ्यासः

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत

(क) धाराराज्ये को राजा प्रजाः पर्यपालयत?
उत्तर
सिन्धुलः।

(ख) सिन्धुलः कस्मै राज्यम् अयच्छत् ?
उत्तर
मुजाय।

(ग) सिन्धुलः कस्य उत्सङ्गे भोज मुमोच?
उत्तर
मुञ्जस्य।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 7 नैकेनापि समं गता वसुमती

(घ) मुजः कं.मुख्यामात्यं दूरीकृतवान् ?
उत्तर
बुद्धिसागरम्।

(ङ) कः विच्छायवदनः अभूत् ?
उत्तर
मुजः।

(च) मुजः कं समाकारितवान् ?
उत्तर
वत्सराजम्।

(छ) वत्सराजः भोज रथे निवेश्य कुत्र नीतवान् ? .
उत्तर
वनम्

(ज) कृतयुगालंकारभूतः क आसीत् ? रिभूतः क आसीत्?
उत्तर
राजा मान्धाता।.

(झ) महोदधौ सेतुः केन रचितः?
उत्तर
रामेण !

(ञ) कः वहनौ प्रवेशं निश्चितवान् ?
उत्तर
मुजः।

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत

(क) भोजः कस्य पुत्रः आसीत?
उत्तर
भोजः सिन्धुलस्य पुत्रः आसीत्।

(ख) सिन्धुलः किं विचारयामास?
उत्तर
सिन्धुलः विचारयामास-यद्यहं राज्यलक्ष्मीभारधारणसमर्थं सहोदरमपहाय राज्य पुत्राय प्रयच्छामि तदा लोकापवादः। अथवा बालं मे पुत्रं मुजो राज्यलोभाद्विषादिना मारयिष्यति तदा दत्तमपि राज्यं वृथा !

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(ग) सभायां कीदृशः ब्राह्मणः आगतवान्।
उत्तर
सभायां ज्योतिः शास्त्रपारंगतः ब्राह्मणः आगतवान् ।

(घ) कः भोजस्य जन्मपत्रिकां निर्मितवान् ?
उत्तर
ज्योतिःशास्त्रपारंगतः ब्राह्मणः भोजस्य जन्मपत्रिकां निर्मितवान्।

(ङ) मुञ्जः किम् अचिन्तयत् ?
उत्तर
मुञ्जः अचिन्तयत् यदि राजलक्ष्मीः भोजकुमारं गमिष्यति तदाहं जीवन्नापि मृतः।

(च) वत्सराजः भोजं कुत्र नीतवान्?
उत्तर
वत्सराजः भोजं वनं नीतवान्।

(छ) वत्सराजः कम् अनमत् ?
उत्तर
वत्सराजः बुद्धिसागरम् अनमत् ।

(ज) मुञ्जः कापालिकं किम् उक्तवान् ?
उत्तर
मुजः कापालिकं स्वपुत्रं प्राणदानेन रक्षितुम् उक्तवान्।

प्रश्न 3.
रेखाङ्कितानि पदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

(क) सिन्धुलस्य भोजः पुत्र अभवत् ।
उत्तर
कस्य भोजः पुत्र अभवत् ?

(ख) सिन्धुलः राज्यं मुञ्जाय अयच्छत् ।
उत्तर
सिन्धलः राज्यं कस्मै अयच्छत?

(ग) एकदा एकः ब्राह्मणः सभायाम आगच्छत।
उत्तर
एकदा एकः ब्राह्मणः कुत्र आगच्छत् ?

(घ) मुजः भोजस्य जन्मपत्रिकाम् अदर्शयत् ।
उत्तर
मुञ्जः कस्य जन्मपत्रिकाम् अदर्शयत् ?

(ङ) वत्सराजः भोजं गृहाभ्यन्तरे ररक्ष।
उत्तर
वत्सराजः कम् गृहाभ्यन्तरे ररक्ष?

(च) मुजः सभामागतं कापालिक दण्डवत् प्राणमत्।
उत्तर
मुञ्जः सभामागतं कम् दण्डवत् प्राणमत् ?

(छ) भोजः चिरं प्रजाः पालितवान् ।
उत्तर
भोजः चिरं काः पीलतवान् ।

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प्रश्न 4.
प्रकतिप्रत्ययविभागं कुरुत-.. यथा
उपसर्गः
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प्रश्न 5.
प्रकृति-प्रत्ययं नियुज्य शब्द लिखत
यथा = आ + सीद् + ल्यप् = आसाद्य
उत्तर
(क) जीव् + शत् = जीवन्।
(ख) मृ + क्त = मृतः।
(ग) चिन्त् + क्त्वा = चिन्तयित्वा।।
(घ) हन् + तव्यत् = हन्तव्यम्।
(ङ) आ + नी + तव्यत् = आनेतव्यम्।
(च) नि + शम् + ल्यप् = निशम्य।
(छ) नम् + क्त्वा = नत्वा ।
(ज) आ + कर्ण + ल्यप् = आकर्ण्य ।
(झ) नि + क्षिप् + ल्यप् = निक्षिप्य।
(ञ) मन् + क्त्वा = मत्वा।
(भ) ज्ञा + क्त्वा = ज्ञात्वा।
(ट) नी + क्तवतु = नीतवान् ।
(ठ) आ + पद् + क्त = आपन्नः।
(ढ) हन् + क्तवतु = हतवान्।
(ण) आ + दिश् + क्त = आदिष्टः ।

प्रश्न 6.
उचित-अथैः सह मेलनं कुरुत यथा-वसुमती-पृथ्वी
उत्तर
(क) निशीथे = रात्रौ।
(ख) प्रणिपत्य = प्रणम्य।
(ग) निशम्य = श्रुत्वा।
(घ) पार्वे = समीपे
(ङ) विपिने = वने।
(च) दशास्यान्तकः = रामः।
(छ) दिवम् = स्वर्गम्।
(ज) अधीत्य = पठित्वा
(झ) महोदधौ = समुद्रे।
(ज) यास्यति = गमिष्यति।

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प्रश्न 7.
मञ्जूषायां प्रदत्तैः अव्ययशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत
तु, एव, तदा, किमर्थम्, पुरा, चिरम् ।
उत्तर
पुरा सिन्धुलः नाम राजा आसीत् । सः चिरम् प्रजाः पर्यपालयत् । वृद्धावस्थायां तस्य एकः पुत्र अभवत् । तदा सः अचिन्तयत् किमर्थम् न स्वपुत्रं भ्रातुः मुञ्जस्य उत्सङ्गे समर्पयामि : सिन्धुलः पुत्रं मुञ्जस्य उत्सङ्गे समर्प्य एव परलोकम् अगच्छत् । सिन्धुले दिवंगते मुञ्जस्य मनसि लोभः समुत्पन्नः । लोभाविष्टः सः तुः मुञ्जस्य विनाशार्थम् उपायं चिन्तितवान्।

प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं लिखत-
(क) यथा-पर्यपालयत्
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प्रश्न 9.
विशेषणं विशेष्येण सह योजयत
यथा – महाबलम् – मुजम्
उत्तर
विशेषणम् – विशेष्यम्
(क) बालम् – पुत्रम्
दत्तम् – राज्यम्
दिवंगते – राजनि
ज्योतिःशास्त्रपारंगतः – ब्राह्मणः
इमाम् – भविष्यवाणीम्
बङ्गदेशाधीश्वरम् – वत्सराजम्
सन्तप्तः – मुञ्जः

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योग्यता विस्तारः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानाम् आभाणकानां समानार्थकानि वाक्यानि पाठे अन्वेष्टव्यानि-
उत्तर-
1. चेहरा फीका पड़ गया = विच्छायवदनोऽभूत्।
2. जैसी आपकी आज्ञा = देनदेशः प्रमाणम्। ।
3. लोगों में बात फैल गई = इति कथा लोकेषु प्रसृता।

प्रश्न 2.
पौराणिकपरम्परायां चत्वारः युगाः मताः। ते यथा
उत्तर
पौराणिकपरम्परा में चार युग माने गए हैं
1. कृतयुगः (सत्ययुगः)
2. त्रेतायुगः
3. द्वापरयुगः
4. कलियुगः।

प्रश्न 3.
मान्धाता सूर्यवंशस्य प्रतापी राजा अभवत् । तेन प्रजायाः पालनं सम्यक्तया कृतम् । सः स्वयुगस्य अलङ्कारभूतः नृप आसीत्।
उत्तर
मान्धाता सूर्यवंश के अत्यन्त तेजस्वी राजा हुए। उसने प्रजा का पालन बहुत अच्छी तरह से किया। वह अपने समय का अत्यन्त उत्कृष्ट राजा था।

Bhaswati Class 12 Solutions 7 नैकेनापि समं गता वसुमती Summary Translation in Hindi and English

संकेत-पुरा धाराराज्ये …………. यथेच्छं पृच्छ।
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हिन्दी-अनुवाद-प्राचीन समय में धारा राज्य में सिन्धुल नामक राजा ने बहुत समय तक प्रजाओं का पालन किया। वृद्धावस्था में उसका ‘भोज’ यह पुत्र उत्पन्न हुआ। जब वह पाँच वर्ष का हुआ तब पिता ने अपना बुढ़ापा जानकर मुख्य मन्त्रियों को बुलाकर मुज्ज नामक अपने छोटे भाई को अत्यधिक बलवान् देखकर तथा पुत्र को बालक देखकर सोचा-यदि मैं राजलक्ष्मी का भार उठाने में समर्थ अपने छोटे भाई मुञ्ज को छोड़कर राज्य अपने पुत्र को दे दूँ तो लोगों में निन्दा होगी अथवा यह भी हो सकता है कि मेरे पुत्र को जो अभी बालक है, मुञ्ज राज्य के लालच से विष आदि देकर मरवा दे।

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तब दिया हुआ राज्य भी व्यर्थ हो जाएगा। इस प्रकार पुत्र की हानि और वंश का विनाश होगा-ऐसा विचारकर राज्य को मुञ्ज को देकर उसकी गोद में भोज़ को डाल दिया। उसके बाद राजा के परलोक चले जाने पर क्रम से राज्य की सम्पदा को प्राप्त कर चुकने वाले मुञ्ज ने बुद्धिसागर नामक मुख्यमन्त्री को व्यापार के लिए पैसा देकर दूर करके उसके स्थान पर किसी और को स्थापित किया। तब एक बार ज्योतिषशास्त्र में निपुण कोई ब्राह्मण आकर राजा से बोला-हे राजन् ! लोग मुझे सर्वज्ञ कहते हैं। इसलिए आप भी इच्छानुसार कुछ पूछे।

English-Translation-In the olden time, in Dhara kingdom, king Sindhula protected his subjects for long. In the old age, his son named Bhoja was born. At the age of five years, his father Bhoja, knowing his old-age, called his eminent ministers and finding his younger brother Munja to be very powerful and his son still a child, thought.

‘If setting aside my brother Munja who is capable of bearing the burden of the kingdom, I install my son as a king then there will be public consure against me.

Moreover, Munja, out of greed for kingdom, may kill my son who is still a child through poison etc. In that case the given kingdom will be useless and there will be loss of son and extinction of the family. Therefore, giving away his kingdom to Munja he put Bhoja, in his lap.

Then gradually, after the death of the king, Munja having obtained the wealth of the kingdom, removed the chief-minister named Buddhi Sagar by giving him money for business and appointed another one in his place. Then, once a Brahman, expert in the science of Astrology, came to the king and said !-Oh king! People call me omniscient. Therefore, you may ask me something whateven you desire…

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संकेत-ततो…………………… उक्तवान् ।
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हिन्दी-अनुवाद-तब मुञ्ज ने कहा-भोज की जन्मपत्रिका बनाओ। ब्राह्मण ने जन्म पत्रिका बनाकर कहा

English-Translation-Then Munja said—Make the horoscope of Bhoja. Then after making the horoscope, the brahman said.

पञ्चाशत्पञ्चवर्षाणि सप्तमासदिनत्रयम् ।
भोजराजेन भोक्तव्यः सगौडो दक्षिणापथः ।।
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हिन्दी सरलार्थ-भोजराज पचपन वर्ष, सात महीने तथा तीन दिन गौड देश (बंगाल). सहित दक्षिण भारत पर राज्य का भोग करें।

English-Translation-Bhoja Raja will enjoy the kingdom of the south India along with the Gauda country (Bengal) for fifty-five years, seven months and three days.

संकेत-भोजविषयिणीम् …………………………………. तेन किमुक्तम् ?
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हिन्दी-अनुवाद-भोज के विषय में इस भविष्यवाणी को सुनकर राजा के मुख की कान्ति उड़ गई। तब ब्राह्मण को भेजकर रात में शय्या पर लेटकर राजा सोचने लगा-यदि राजलक्ष्मी भोजकुमार को प्राप्त होगी तो मैं जीवित ही मर जाऊँगा। तब उसने अकेले ही कुछ सोचकर बङ्गदेश के राजा वत्सराज को बुलाया। धारानगरी में आकर राजा को प्रणाम करके वत्सराज बैठ गया।

महल को एकान्त (सुनसान) करके राजा ने वत्सराज से कहा–तुम भोज को भुवनेश्वरी के जंगल में रात में मार देना तथा कटा हुआ उसका सिर मेरे पास अन्तःपुर में लाना। ऐसा सुनकर राजा को प्रणाम करके वत्सराज ने कहा-यद्यपि महाराज का आदेश प्रमाण है फिर भी मैं कुछ कहना चाहता हूँ, अपराधयुक्त होते हुए भी मेरे वचन क्षमा कर दिए जाएँ। महाराज! पुत्र का वध कदापि हितकर नहीं होता।

वत्सराज के ऐसे शब्द सुनकर, क्रुद्ध होकर राजा ने कहा-तुम मेरे सेवक हो, मैं जो कहता हूँ वैसा ही करो। तब ‘राजा की आज्ञा का पालन करना चाहिए’ ऐसा मानकर वत्सराज चुप हो गया। बाद में न चाहते हुए भी वत्सराज भोज को रथ में बिठाकर रात्रि में जंगल में ले गया। वहाँ अपने वध की योजना को जानकर भोज ने वत्सराज से कुछ कहा।

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उसके वचनों से वैराग्ययुक्त होकर वत्सराज ने पुनः उसे नहीं मारा अपितु घर आकर, भोज को घर के अन्दर भूमि पर रखकर उसकी रक्षा की। फिर कृत्रिम रूप से पुनः भोज का मस्तक बनाकर राजमहल . जाकर वत्सराज ने राजा से कहा-श्रीमान् ने जो आज्ञा दी थी वह पूरी कर दी गई है। तब . भोजराज का वध जानकर राजा ने उससे पूछा-हे वत्सराज! तलवार से प्रहार के समय उसने । क्या कहा?

English-Translation. On hearing this prediction about Bhioja king lost his beauty. Then he sent back the brahman and laid down on his bed at night and thought-If the wealth of the kingdom goes to Bhoja Kumar then I can not remain alive. Then being alone he thought of something. After that he called for king Vatsraja of Bangal. Vatsraja came to the city of Dhara, he bowed to the king and sat down there.

After making the palace lonely the king said to Vatsaraja—you should kill Bhoja at night in the forest of Bhuvaneshwari and bring his cut head near me in my palace. Having heard this Vatsraja bowed to the king and said-Even if I should completely follow the order of my majesty still I want to say something. Even if my words are guilty, still I should be excused. Oh king! the assassination of the son is never beneficial.

Oh hearing such words of Vatsaraja the king became angry and said-you are my attendant. You should follow what I say. Then, the king’s order should be followed’-considering so, Vatsaraja kept quiet. Then not willing to do so, still Vatsaraja placed Bhoja in the chariot and he took him forcibly to the forest at night.

Then knowing the planning of his own assassination Bhoja said something to Vatsaraja. Having detachment from the world by his words Vatsaraja did not kill him again but he came back to his house, placed Bhoja inside the house and he protected him. Then Vatsaraja again got an artificial skull of Bhoja, After that he went to the palace and said to the king-the orders of the majesty have been carried out.

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Then having known the assassination of Bhoja raja being accomplished the king asked him-Oh Vatsaraja! what did the son say when he was being killed by the sword?

संकेत-वत्सराजेन च राज्ञे …………. श्लोकः समर्पितः
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हिन्दी-अनुवाद-तब वत्सराज ने राजा के लिए भोज के अन्तिम सन्देश के रूप में दिया गया श्लोक प्रस्तुत किया
English Translation-Then Vatsraja presented this verse which was sent by Bhoja as the last-message for the king

मान्धाता च महीपतिः कृतयुगालङ्कारभूतो गतः
सेतुर्येन महोदधौ विरचितः क्वासौ दशास्यान्तकः।
अन्ये वापि युधिष्ठिरप्रभृतयो याता दिवं भूपते!
नैकेनापि समं गता वसुमती नूनं त्वया यास्यति।।
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हिन्दी सरलार्थ-हे राजन् ! सतयुग के आभूषण के समान राजा मान्धाता चला गया (मृत्यु को प्राप्त हो गया), महासागर पर पुल बनाने वाला तथा रावण का अन्त करने वाला वह राम अब कहाँ है? (अर्थात् नहीं है)। युधिष्ठिर आदि दूसरे राजा भी स्वर्ग सिधार गए। यह पृथ्वी किसी एक के साथ ही नहीं गई लेकिन लगता है निश्चय ही यह आपके साथ जाएगी।

Meaning in English-Oh king! King Mandhata, the ornament of the Satya age-passed away. Where is that Rama who built a bridge on the ocean and who was the destoryer of ten headed i.e. Ravana? Other kings like. Yudhishthira and others also died. This earth did not go certainly with any one of these kings but it seems that it will surely go with you.”

संकेत-श्लोकमिमम् …………….. पालितवान् । (पृष्ठ 54)
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हिन्दी-अनुवाद-इस श्लोक को पढ़कर शोक से व्याकुल मुज ने प्रायश्चित करने … के लिए अपने को अग्नि को सौंपने का निश्चय किया। राजा के अग्नि में प्रवेश के कार्यक्रम को सुनकर वत्सराज ने बुद्धिसागर को प्रणाम करके धीरे-धीरे कहा. हे तात! मेरे द्वारा भोजराज सुरक्षित है। पुनः बुद्धिसागर ने उसके कान में कुछ कहा जिसे सुनकर वत्सराज वहाँ से चला गया। पुनः राजा के अग्निप्रवेश के समय कोई तान्त्रिक सभा में आया।

सभा में आए हए उस तान्त्रिक को दण्डवत् प्रणाम करके मुञ्ज ने कहा-हे योगीन्द्र ! मेरे द्वारा मारे हुए महापापी के पुत्र की प्राणदान देकर रक्षा करें। तब तान्त्रिक ने कहा-हे राजन् ! डरो नहीं। भगवान शिव की कृपा से वह जीवित हो जाएगा। तब तान्त्रिक की योजना के अनुसार भोज को श्मशान भूमि में लाया गया। तब “योगी के द्वारा भोज जीवित कर दिया गया” लोगों में यह कथा फैल गई। तब हाथी पर बैठाकर भोज राजभवन में लाया गया।

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तब प्रसन्न मन राजा मुञ्ज भोज को राजसिंहासन पर बिठाकर अपनी पटरानियों के साथ तपोवन में चला गया तथा कठोर तपस्या करने लगा और भोज ने दीर्घकाल तक प्रजाओं का पालन किया।

English-Translation-Having recited this verse Munja became very sad and he decided to enter into the fire as a repentence. On hearing the news of the king entering into fire Vatsaraja bowed to Buddhi Sagar and said slowly-Oh respectable one! Bhojaraja is well-protected.

Then Buddhi Sagar said something in his ear, on hearing which Vatsaraja went away from there. Then at the time of king’s enterance into the fire some Tantrika came to the assembly.

Munja saluted with his head-bent to that Tantrika who was present in the assembly and said Oh great Yogil please protect my son by offering him life. Then the tantrika said, Oh king! Do not be afraid. He will be alive by the grace of Lord Shiva. Then Bhoja was brought to the penance ground according to the plan of the tantrika. Then “Bhoja has been brought back to life by the Yogi”, this story became popular among the people.

Then, climbing on the back of the elephant, Bhoja was brought to the royal palace. And the happy king Vunja placed Bhoja on the royal throne and being accompained by his chief queens he went to the penance-grove. He then practised severe penance there. Bhoja then, also protected his subjects for a long-time.

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NCERT Solutions for Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुह्रद्

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुह्रद् Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

Shemushi Sanskrit Class 10 Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुह्रद्

प्रश्न 1.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उनराणि संस्कृतभाषया लिखत-

(क) चन्दनदासः कस्य गृहजनं स्वगृहे रक्षति स्म?
उत्तर:
चन्दनदासः अमात्यराक्षस्य गृहजनं स्वगृहे रक्षति

(ख) तृणानां केन सह विरोधः अस्ति?
उत्तर:
तृणानां अग्निना सह विरोधः अस्ति।

(ग) कः चन्दनदासं द्रष्टुमिच्छति?
उत्तर:
चाणक्यः चन्दनदासं द्रष्टुमिच्छति।

(घ) पाठेऽस्मिन् चन्दनदासस्य तुलना केन सह कृता?
उत्तर:
पाठेऽस्मिन् चन्दनदासस्य तुलना शिविना सह कृता?

(ङ) प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः प्रतिप्रियं के इच्छन्ति?
उत्तर:
प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः प्रतिप्रियं राजान इच्छन्ति?

(च) कस्य प्रसादेन चन्दनदासस्य वणिज्या अखण्डिता?
उत्तर:
चन्द्रगुप्तस्य प्रसादेन चन्द्रनदासस्य वाणिज्या अखण्डिता?

NCERT Solutions for Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुह्रद्

प्रश्न 2.
स्थूलाक्षरपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-

(क) शिविना विना इदं दुष्कर कार्य कः कुर्यात्।
उत्तर:
केन् विना इदं दुष्कर कार्य कः कुर्यात्?

(ख) प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृत्।
उत्तर:
प्राणेभ्योऽपि प्रियः कः?

(ग) आर्यस्य प्रसादेन मे वणिज्या अखण्डिता।
उत्तर:
कस्य प्रसादेन मे वाणिज्या अखण्डिता?

(घ) प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः राजानः प्रतिप्रियमिच्छन्ति।
उत्तर:
प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः के प्रतिप्रियमिच्छन्ति?

(ङ) तृणानाम् अग्निना सह विरोधो भवति।
उत्तर:
केषाम् अग्निना सह विरोधो भवति?

प्रश्न 3.
यथानिर्देशमुनरत-

(क) ‘अखण्डिता में वणिज्या’-अस्मिन् वाक्ये व्यिापदं किम्?
उत्तर:
अखण्डिता

(ख) पूर्वम् ‘अनृतम्’ इदानीम् आसीत् इति परस्परविरुद्ध वचने-अस्मात् वाक्यात् ‘अधुना’ इति पदस्य समानार्थकपदं चित्वा लिखत।
उत्तर:
इदानीम्

(ग) ‘आर्य! किं मे भयं दर्शयसि’ अत्र ‘आर्य’ इति सम्बोधनपदं कस्मै प्रयुक्तम्?
उत्तर:
चाणक्यः

(घ) ‘प्रीताभ्यः प्रछतिभ्यः प्रतिप्रियमिच्छन्ति राजानः’ अस्मिन् वाक्ये कर्तृपदं किम्?
उत्तर:
राजानः

(ङ) तस्मिन् समये आसीदस्मद्गृहे’ अस्मिन् वाक्ये विशेष्यपदं किम्?
उत्तर:
गृहे

NCERT Solutions for Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुह्रद्

प्रश्न 4.
निर्देशानुसारं सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत-

(क) यथा – कः + अपि – कोऽपि
प्राणेभ्यः + अपि – _________
_________ + अस्मि – सज्जोऽस्मि।
आत्मनः + _________ – आत्मनोणधिकारसदृशम्
उत्तर:
यथा – कः + अपि – कोऽपि
प्राणेभ्यः + अपि – प्राणेभ्यऽपि
सज्जः + अस्मि – सज्जोऽस्मि।
आत्मनः + अधिकारसदृशम् – आत्मनोधिकारसदृशम्

(ख) यथा- सत् + चित् – सच्चित्
शरत् + चन्द्रः – __________
कदाचित् + च – __________
उत्तर:
यथा – सत् + चित् – सच्चित्
शरत् + चन्द्रः – शरच्चन्द्र
कदाचित् + च – कदाचित

प्रश्न 5.
अधोलिखितवाक्येषु निर्देशानुसार परिवर्तनं कुरुत-
यथा – प्रतिप्रियमिच्छन्ति राजानः। (एकवचने) प्रतिप्रियमिच्छति राजा।

(क) सः प्रकृतेः शोभा पश्यति (बहुवचने)
उत्तर:
ते प्रकृतेः शोभा पश्यन्ति।

(ख) अहं न जानामि। (मध्यमपुरुषैकवचने)
उत्तर:
त्वम् न जानासि।

(ग) त्वं कस्य गृहजन स्वगृहे रक्षसि? (उत्तमपुरुषैकवचने)
उत्तर:
अहं कस्य गृहजनं स्वगृहे रक्षामि?

(घ) कः इदं दुष्करं कुर्यात्? (प्रथमपुरुषबहुवचने)
उत्तर:
के इदं दुष्करं कुर्यु:?

(ङ) चन्दनदासं द्रष्टुमिच्छामि। (प्रथमपुरुषैकवचने)
उत्तर:
चन्दन दासः द्रष्टुम इच्छति।

(च) राजपुरुषाः देशान्तरं व्रजन्ति। (प्रथमपुरुषैकवचने)
उत्तर:
राजपुरुषः देशान्तरं व्रजति।

प्रश्न 6.
(अ) कोष्ठकेषु दनयोः पदयोः शुद्धं विकल्पं विचित्य रिक्तस्थानानि पूरयत-

(क) __________ विना इदं दुष्करं कः कुर्यात्। (चन्दनदासस्य / चन्दनदासेन)
उत्तर:
चन्दनदासेन्

(ख) _____________ इदं वृनान्तं निवेदयामि। (गुरवे / गुरोः)
उत्तर:
गुरवे

(ग) आर्यस्य ____________ अखण्डिता में वणिज्या। (प्रसादात् / प्रसादेन)
उत्तर:
प्रसादेन

(घ) अलम् ___________। (कलहेन / कलहात्)
उत्तर:
कलहेन्

(ङ) वीरः ______________ बालं रक्षति। (सिंहेन /ष्ट्वसिंहात्)
उत्तर:
सिहात्

(च) ______________ भीतः मम भ्राता सोपानात् अपतत्। (कुक्कुरेण / कुक्कुरात्)
उत्तर:
कुक्कुरात्

(छ) छात्रः ______________ प्रश्नं पृच्छति। (आचार्यम् / आचार्येण)
उत्तर:
आचार्यम्।

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(आ) अधोदत्तमञ्जूषातः समुचितपदानि गृहीत्वा विलोमपदानि लिखत-

असत्यम् पश्चात् गुणः आदरः तदानीम् तत्र

(क) अनादरः ___________
उत्तर:
आदरः

(ख) दोषः ___________
उत्तर:
गुणः

(ग) पूर्वम् _____________
उत्तर:
पश्चात्

(घ) सत्यम् ___________
उत्तर:
असत्यम्

(ङ) इदानीम् __________
उत्तर:
तदानीय

(च) अत्र ___________
उत्तर:
तत्र

प्रश्न 7.
उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितानि पदानि प्रयुज्य पञ्चवाक्यानि रचयत-

यथा निष्क्रम्य-शिक्षिका पुस्तकालयात् निष्क्रम्य कक्षा प्रविशति।

(क) उपसृत्य
उत्तर:
आदित्यः मातरम् उपसृत्य प्रणमति।

(ख) प्रविश्य
उत्तर:
आचार्यः कक्षा प्रविश्य पाठयति।

(ग) द्रष्टुम्
उत्तर:
लता चलचित्रं द्रष्टम् इच्छति।

(घ) इदानीम्
उत्तर:
सः इदानी खेलति।

(ङ) अत्र
उत्तर:
अत्र मनोहरम् तडागः अस्ति।

अन्यपरीक्षोपयोगी प्रश्नाः

प्रश्न 1.
पाठात् समुचित-विलोमपदान चित्वा लिखत-

(पाठ से उचित विलोत शब्दों को चुनकर लिखिए)

(क) प्रविश्य
उत्तर:
निष्क्रम्य्

(ख) अप्रियम्
उत्तर:
प्रियम

NCERT Solutions for Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुह्रद्

(ग) सत्यम्
उत्तर:
असव्यम

(घ) आयान्ति, आगच्छन्ति
उत्तर:
गच्छन्ति

(च) सन्तम्
उत्तर:
असन्तम्

प्रश्न 2.
पाठात् समुचित पार्यय पदानि लिखा।

(क) मन्त्री
उत्तर:
अमात्यः

(ख) आच्छाद्य
उत्तर:
पिधाय

(ग) दु:खाभावः
उत्तर:
अपरिक्लेशः

(घ) स्वगतम्
उत्तर:
आत्मगतम्

(च) उपगम्य
उत्तर:
उपसृत्य।

प्रश्न 3.
प्रस्तुत पाठ पठित्वा अधोलिखित प्रश्नानां उत्तरणि लिखत-

(प्रस्तुत पाठ को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-)

1. एकपदेन उत्तरत-

(क) चन्दनदासः कः आसीत्स?
उत्तर:
मणिकारश्रेष्ठी

(ख) राजप्रसादेन तस्य वणिज्या की दुशी?
उत्तर:
अखण्डिता

(ग) राजनि कीदृशः भव?
उत्तर:
अवरुद्धवृतिः

(घ) अमात्यः कीदृशः आसीत्?
उत्तर:
राजापथ्यकिारी

(च) अस्मद् गृहे कस्य अहजनः पूर्वम् आसीत?
उत्तर:
अमात्यसक्षसस्य।

योग्यताविस्तारः

कविपरिचयः
‘मुद्राराक्षसम्’ इति नाटकस्य प्रणेता विशाखदत्तः आसीत्। सः राजवंशे उत्पन्नः आसीत्। तस्य पिता भास्करदत्तः महाराजस्य पदवीं प्राप्नोत्। विशाखदत्तः राजनीते: न्यायस्य ज्योतिषविषयस्य च विद्वान् आसीत्। वैदिकधर्मावलम्बी भूत्वाऽपि सः बौद्धध र्मस्य अपि आदरमकरोत्।

ग्रन्थपरिचयः
‘मुद्राराक्षसम्’ एकम् ऐतिहासिक नाटकम् अस्ति। दशाङ्केषु विरचिते अस्मिन्नाटके चाणक्यस्य राजनीतिककौशलस्य बुद्धिवैभवस्य राष्ट्रसञ्चालनार्थम् कूटनीतीनाम् निदर्शनमस्ति। __अस्मिन्नाटके चाणक्यस्यामात्यराक्षसस्य च कूटनीत्योः संघर्षः।

भावविस्तारः
चाणक्य-चाणक्यः एकः विद्वान् ब्राह्मणः आसीत्। तस्य पितृप्रदत्तं नाम विष्णुगुप्तः आसीत्। अयमेव ‘कौटिल्य’ इति नाम्ना प्रसिद्धः। केषाञ्चित् विदुषाम् इदमपि मतमस्ति यत् राजनीतिशास्त्रे कुटिलनीतेः प्रतिष्ठापनाय तस्याः स्व-जीवने उपयोगाय च अयं ‘कौटिल्यः’ इत्यपि कथ्यते। चणकनामकस्य कस्यचित् आचार्यस्य पुत्रत्वात् ‘चाणक्यः’ इति नाम्ना स प्रसिद्धः जातः। नन्दानां राज्यकालः शतवर्षाणि पर्यन्तम् आसीत्। तेषु अन्तिमेषु द्वादशवर्षेषु एतेन सुमाल्यादीनाम् अष्टनन्दानां संहार: कारितः तथा च चन्द्रगुप्तमौर्यः नृपत्वेन राजसिंहासने स्थापितः। अयमेक: महान् राजनीतिज्ञः आसीत्। एतेन भारतीयशासनव्यवस्थायाः प्रामाणिकतत्त्वानां वर्णनेन युक्तं “अर्थशास्त्रम्” इति अतिमहत्त्वपूर्णः ग्रन्थः रचितः।

NCERT Solutions for Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुह्रद्

चन्द्रगुप्तमौर्य:- चन्द्रगुप्तः महापद्मनन्दस्य मुरायाः च पुत्रः आसीत्। चाणक्यस्य मार्गदर्शने अनेन चतुर्विशतिवर्षपर्यन्तं राज्यं कृतम्।
राक्षसः-नन्दराज्ञः स्वामिभक्तः चतुरः प्रधानामात्यः आसीत्।
चन्दनदासः-कुसुमपुर नाम्नि नगरे महामात्यस्य राक्षसस्य प्रियतम पात्रं मित्रञ्च आसीत्। स मणिकारः श्रेष्ठी च आसीत्। अस्यैव गृहात् राक्षसः सपरिवारः नगरात् बहिरगच्छत्।

भाषिकविस्तारः

1. पृथक् और विना शब्दों के योग में द्वितीया तृतीया और पंचमी तीनों विभक्तियों का प्रयोग-
यथा – जलं विना जीवनं न सम्भवति। – द्वितीया
जलेन विना जीवनं न सम्भवति। – तृतीया
जलात् विना जीवनं न सम्भवति। – पंचमी
परिश्रमं पृथक् नास्ति सुखम्। – द्वितीया
परिश्रमेण पृथक् नास्ति सुखम्। – तृतीया
परिश्रमात् पृथक् नास्ति सुखम्। – पंचमी

2. अनीयर् प्रत्ययप्रयोगः
अत्यादरः शङ्कनीयः
जन्तुशाला दर्शनीया
याचकेभ्यः दानं दानीयम्
वेदमन्त्राः स्मरणीयाः

पुस्तकमेलापके पुस्तकानि क्रयणीयानि।
(क) अनीयर् प्रत्ययस्य प्रयोगः योग्यार्थे भवति।
(ख) अनीयर् प्रत्यये ‘अनीय’ इति अवशिष्यते।
(ग) अस्य रूपाणि त्रिषु लिगेषु चलन्ति।

यथा-
पुंल्लिने – स्त्रीलिङ्गे – नपुंसकलिङ्गे
पठनीयः – पठनीया – पठनीयम्
इनके रूप क्रमशः देववत्, लतावत् तथा फलवत् चलेगें।

3. उभ सर्वनामपदम्
पुंल्लिङ्गे – स्त्रीलिङ्गे – नपुंसकलिड़े
उभे – उभे – उभे
उभौ – उभे – उभे
उभाभ्याम् – उभाभ्याम् – उभाभ्याम्
उभाभ्याम् – उभाभ्याम् – उभाभ्याम्
उभाभ्याम् – उभाभ्याम् – उभाभ्याम्
उभयोः – उभयोः – उभयोः
उभयोः – उभयोः – उभयोः

Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुह्रद् Summary Translation in Hindi and English

पाठपरिचय-
प्रस्तुत नाट्यांश महाकवि विशाखदत्त द्वारा रचित ‘मुद्राराक्षसम्’ नामक नाटक के प्रथम अङ्क से उद्ध त किया गया है। नन्दवंश का विनाश करने के बाद उसके हितैषियों को खोज-खोजकर पकड़वाने के क्रम में चाणक्य, अमात्य राक्षस एवं उसके कुटुम्बियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए चन्दनदास से वार्तालाप करता है किन्तु चाणक्य को अमात्य राक्षस के विषय में कोई सुराग न देता हुआ चन्दनदास अपनी मित्रता पर दृढ़ रहता है। उसके मैत्री भाव से प्रसन्न होता हुआ भी चाणक्य जब उसे राजदण्ड का भय दिखाता है, तब चन्दनदास राजदण्ड भोगने के लिये भी सहर्ष प्रस्तुत हो जाता है। इस प्रकार अपने सुहृद् के लिए प्राणों का भी उत्सर्ग करने के लिये तत्पर चन्दनदास अपनी सुहृद्-निष्ठा का एक ज्वलन्त उदाहरण प्रस्तुत करता है।

(1)

चाणक्यः – वत्स! मणिकार श्रेष्ठिनं चन्दनदासनिदानों द्रष्टुमिच्छामि।
शिष्यः – तथेति (निष्क्रम्य चन्दनदासेन सह प्रविश्य) इत: इतः श्रेष्ठिन्! (उभौ परिक्रामत:)
शिष्यः – (उपसृत्य) उपाध्याय! अयं श्रेष्ठी चन्दनदासः।
चन्दनदासः – जयत्वार्यः
चाणक्यः – श्रेष्ठिन्! स्वागत ते। अपि प्रचीयन्ते संव्यवहाराणां वृद्धिलाभाः?
चन्दनदासः – (आत्मगतम्) अत्यादरः शटनीयः। (प्रकाशम्) अथ किम्। आर्यस्य प्रसादेन अखण्डिता में वणिज्या।
चाणक्य: – भो श्रेष्ठिन्! प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः प्रतिप्रियमिच्छन्ति राजानः।
चन्दनदास: – आज्ञापयतु आर्य:, किं कियत् च अस्मज्जनादिष्यते इति।
चाणक्यः – भो श्रेष्ठिन्! चन्द्रगुप्तराज्यमिदं न नन्दराज्यम्। नन्दस्यैव अर्थसम्बन्धः प्रीतिमुत्पादयति। चन्द्रगुप्तस्य तु भवतामपरिक्लेश एव।
चन्दनदासः – (सहर्षम्) आर्य! अनुगृहीतोऽस्मि।
चाणक्यः – भो श्रेष्ठिन्! स चापरिक्लेशः कथमाविर्भवति इति ननु भवता प्रष्टव्याः स्मः।
चन्दनदास: – आज्ञापयतु आर्यः। चाणक्यः-राजनि अविरुद्धवृत्तिर्भव।
चन्दनदास: – आर्य! कः पुनरधन्यो राज्ञो विरुद्ध इति आर्यणावगम्यते?
चाणक्यः – भवानेव तावत् प्रथमम्।
चन्दनदासः – (कर्णी पिधाय) शान्तं पापम्, शान्तं पापम्। कीदृशस्तृणानामग्निना सह विरोधः?
चाणक्य: – अयमीदृशो विरोधः यत् त्वमद्यापि राजापथ्यकारिणोऽमात्यराक्षसस्य गृहजनं स्वगृहे रक्षसि।

NCERT Solutions for Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुह्रद्

शब्दार्थ:
मणिकारश्रेष्ठिनम् – रत्नकारं वणिज (मणियों का व्यापारी)
निष्क्रम्य – बहिर्गत्वा (निकलकर)
उपसृत्य – समीपं गत्वा (पास जाकर)
परिक्रामतः – परिभ्रमणं कुरुतः (दोनों) परिभ्रमण करते हैं
प्रचीयन्ते – वृद्धिं प्राप्नुवन्ति (बढ़ते हैं)
संव्यवहाराणाम् – व्यापाराणाम् (व्यापारों का)
आत्मगतम् – स्वगतम् (मन ही मन)
शटनीयः – सन्देहास्पदम् (शंका करने योग्य)
अखण्डिता – निर्बाधा (बाधारहित)
वणिज्या – वाणिज्यम् (व्यापार)
प्रीताभ्यः – प्रसन्नाभ्यः (प्रसन्न जनों के प्रति)
प्रतिप्रियम् – प्रत्युपकारम् (उपकार के बदले किया गया उपकार)
अपरिक्लेशः – दु:खाभावः (दुख का अभाव)
आज्ञापयतु – आदिशतु (आदेश दें)
अर्थसम्बन्धः – धनस्य सम्बन्धः (धन का सम्बन्ध)
परिक्लेशः – दुःखम् (दु:ख)
प्रष्टव्याः – प्रष्टुं योग्याः (पूछने योग्य)
अवगम्यते – ज्ञायते (जाना जाता है)
अविरुद्धवृत्तिः – अविरुद्धस्वभावः (विरोधरहित स्वभाव वाला)
पिधाय – आच्छाद्य (बन्द कर)
राजापथ्यकारिणः – नृपापकारकारिणः (राजाओं का अहित करने वाले)

सरलार्थ
चाणक्य – हे वत्स रत्नाकर (सुनार) चन्दनदास को अभी देखना चाहता हूँ।
शिष्य – ठीक है (निकलकर चन्दनदास के साथ प्रवेश करक) इधर से सेठ जी इधर से (दोनों घूमते हैं)
शिष्य – (पास जाकर) हे आचार्य! यह है सेठ चन्दनदास।
चन्दनदास – आर्य की जय हो। चाणक्य-हे सेठ! स्वागत है तुम्हारा। क्या व्यापार की बढ़ोतरी हो रही है?
चन्दनदास – (मन-ही-मन) अधिक आदर शंका के योग्य होता है। (स्पष्ट शब्दों में और क्या। आर्य की कृपा से निर्बाध है मेरा व्यापार।
चाणक्य – हे सेठ! प्रसन्न जनों से उपकार का बदला चाहा करते हैं राजा लोग।
चन्दनदास – आज्ञा दीजिए आर्य! क्या और कितना हमें आदेश किया जा रहा है? ऐसा।
चाणक्य – हे सेठ यह चन्द्रगुप्त का राज्य है नंद का नहीं। नन्द के ही धन का सम्बन्ध प्रसन्नता उत्पन्न करताहै। चन्द्रगुप्त के(धन का सम्बन्ध तो) आपके लिए दु:ख का अभाव ही है।
चन्दनदास – (हर्ष के साथ) आर्य! मैं अनुगृहीत हूँ।
चाणक्य – हे सेठ! और क्लेश दू:ख का अभाव कैस उत्पन्न होता है? हमें आपसे वही पूछना है।
चन्दनदास – आज्ञा दीजिये आर्य। चाणक्य-राजा के प्रति अनुकूल हो जाओं।
चन्दनदास – है आर्य! कौन अभागा राजा के विरुद्ध है? यह आर्य को ज्ञात है?
चाणक्य – पहले तो आप ही हैं।
चन्दनदास – (दोनों कान बन्द करके) पाप शांत हो, पाप शांत हो। घास-फूस का अग्नि के साथ विरोध कैसा है?
चाणक्य – यह ऐसा विरोध है कि तुम आज भी राजा का अहित करने वाले अमात्य राक्षस के घर वालों को अपने घर में रखते हो।

(2)

चन्दनदास: – आर्य! अलीकमेतत्। केनाप्यनार्येण आर्याय निवेदितम्।
चाणक्यः – भो श्रेष्ठिन्! अलमाशटया। भीताः पूर्वराजपुरुषाः पौराणामिच्छतामपि गृहेषु गृहजनं निक्षिप्य देशान्तरं व्रजन्ति। ततस्तत्प्रच्छादनं दोषमुत्पादयति।
चन्दनदासः – एवं नु इदम्। तस्मिन् समये आसीदस्मद्गृहे अमात्यराक्षसस्य गृहजन इति।
चाणक्यः – पूर्वम् ‘अनृतम्’, इदानीम् “आसीत्” इति परस्परविरुद्ध वचने।
चन्दनदासः – आर्य! तस्मिन् समये आसीदस्मद्गृहे अमात्यराक्षसस्य गृहजन इति।
चाणक्यः – अथेदानी क्व गतः?
चन्दनदास: – न जानामि।
चाणक्यः – कथं न ज्ञायते नाम? भो श्रेष्ठिन्! शिरसि भयम्, अतिदूरं तत्प्रतिकारः।
चन्दनदासः – आर्य! किं मे भयं दर्शयसि? सन्तमपि गेहे अमात्यराक्षसस्य गृहजनं न समर्पयामि, किं पुनरसन्तम्?
चाणक्य: – चन्दनदास! एष एव ते निश्चयः?
चन्दनदासः – बाढम्, एष एव मे निश्चयः।
चाणक्यः – (स्वगतम्) साधु! चन्दनदास साधु।

सुलभेष्वर्थलाभेषु परसंवेदने जने।
क इदं दुष्करं कुर्यादिदानीं शिविना विना॥

शब्दार्थ:
अलीकम् – असत्यम् (झूठ)
अनार्येण – दुष्टेन (दुष्ट के द्वारा)
पौराणाम् – नगरवासिनाम् (नगर के लोगों के)
निक्षिप्य – स्थापयित्वा (रखकर)
व्रजन्ति – गच्छन्ति (जाते हैं)
प्रच्छादनम् – आच्छादनम् (छिपाना)
अमात्यः – मन्त्री (मन्त्री)
असन्तम् – न निवसन्तम् (न रहने वाले)
बाढम् – आम् (हाँ)
संवेदने – समर्पणे कृते सति (समर्पण पर)
जने – लोके (संसार में)

सरलार्थ-
चन्दनदास – आर्य! यह झूठ है। यह किसी दुष्ट ने आपको बताया है।
चाणक्य – हे सेठ! आशंका मत करो। डरे हुए पूर्वराजकर्मचारी नगरवासियों के चाहने पर भी घरों में घरवालों को रखकर दूसरे देश चले जाते हैं फिर उन्हें छिपाना ही
दोष को उत्पन्न करता है।
चन्दनदास – अच्छा ऐसा है। उस समय हमारे घर में अमात्य राक्षस के घर के लोग थे। ऐसा।
चाणक्य – पहले ‘झूठ’, अब ‘थे’ ये परस्पर विरोधी बातें
चन्वनदास – आर्य! क्यामुझे भय दिखा रहे हैं? अमात्य राक्षस के परिजनों के मेरे घर में होने पर भी नहीं देता तो (उनके) न होने पर क्या (दे सकता हूँ)?
चाणक्य – चन्दनदास! क्या यही तुम्हारा निश्चय है?
चन्दनदास – हाँ, यही मेरा निश्चय है।
चाणक्य – (मन-ही-मन)अच्छा है। चन्दनदास, अच्छा है।

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अंतिम श्लोक का अन्वय तथा भावार्थ

अन्वयः – परस्य संवेदने अर्थलाभेषु सुलभेषु इदं दुष्कर कर्म जने (लोके) शिविना विना कः कुर्यात्।।

भावः – परस्य परकीयस्य अर्थस्य संवेदने समर्पणे छते सति अर्थलाभेषु सुलभेषु सत्सु स्वार्थ तृणीकृत्य परसंरक्षणरूपमेवं दुष्करं कर्म जने (लोके) एकेन शिविना विना त्वदन्यः कः कुर्यात्। शिविरपि कृते युगे छतवान् त्वं तु इदानीं कलौ युगे करोषि इति ततोऽप्यतिशयित-सुचरितत्वमिति भावः।

अर्थ – दूसरों की वस्तु को समर्पित करने पर बहुत धन प्राप्त होने की स्थिति में भी दूसरों की वस्तु की सुरक्षा रूपी कठिन कार्य को एक शिवि को छोड़कर तुम्हारे अलावा दूसरा कौन कर सकता है?

आशय – इस श्लोक के द्वारा महाकवि विशाखदत्त ने बड़े ही संक्षिप्त शब्दों में चन्दनदास के गुणों का वर्णन किया है। इसमें कवि ने कहा है कि दूसरों की वस्तु की रक्षा करनी कठिन होती है। यहा! चन्दनदास के द्वारा अमात्य राक्षस के परिवार की रक्षा का कठिन काम किया गया है। न्यासरक्षण को महाकवि भास ने भी दुष्कर कार्य मानते हुए स्वप्नवासवदनम् में कहा है-दुष्करं न्यासरक्षणम्।

चन्दनदास अगर अमात्य राक्षस के परिवार को राजा को समर्पित कर देता, तो राजा उससे प्रसन्न भी होता और बहुत-सा धन पारितोषिक के रूप में देता, पर उसने भौतिक लाभ व लोभ को दरकिनार करते हुए अपने प्राणप्रिय मित्र के परिवार की रक्षा को अपना कर्नव्य माना और इसे निभाया भी। कवि ने चन्दनदास के इस कार्य की तुलना राजा शिवि के कार्यों से की है, जिन्होंने अपने शरणागत कपोत की रक्षा के लिए अपने शरीर के अंगों को काटकर दे दिया था। राजा शिवि ने तो सतयुग में ऐसा किया था, पर चन्दनदास ने ऐसा कार्य इस कलियुग में किया है, इसलिए वे और अधिक प्रशंसा के पात्र हैं।

भावार्थ-
सुलभेष्वर्थलाभेषु परसंवेदने जन।
क इदं दुष्कर कुयादिदानी शिविना विना॥

अन्वयः – परस्य संवेदने अर्थलाभेषु सुलभेषु इंद दुष्कर कर्म जने (लोक) शिविना विना कः कुर्यात्।

शब्दार्थ: – सुल भेषु – सरलता से मिलने पर। परसंवेदने – परसमर्पणे (दूसरों को देने पर)। दुष्करम् – कठिनम् (कठि)। जने – संसारे, लोके (संसार में)।

व्याख्या – दूसरों की वस्तु को समर्पित करने पर बहुत धन प्राप्त होने की स्थिति में भी दूसरों की वस्तु की सुरक्षा रूपी कठिन कार्य को एक शिवि को छोड़कर तुम्हारे अलावा दूसरा कौन कर सकता है? भावार्थ इस श्लोक के द्वारा महाकवि विशाखदत्त ने बड़े ही संक्षिप्त शब्दों में चन्दनदास के गुणों का वर्णन किया है इसमें कवि ने कहा है कि दूसरों कीवस्भ्तु की रक्षा करनी कठिन होती है। यहां चन्दनदास के द्वारा अमात्य राक्षस के परिवार की रक्षा का कठिन काम किया गया है। न्यासरक्षण को महाकवि भास ने भी दुष्कर कार्य मानतेहुए स्वपवासवदत्तम् में कहा है-दुष्कर न्यासरक्षणम्।

NCERT Solutions for Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुह्रद्

चन्दनदास अगर अमात्य राक्षस के परिवार को राजा को समर्पित कर देता, तो राजा उससे प्रसन्न भी होता और बहुत-सा धन पारितोषिक के करूकप में देता, पर उसने भौतिक लाभ व लोभ को दरकिनार करते हुए अपने प्राणप्रिय मित्र के परिवार की रक्षा को अपना कर्त्तव्य माना और इसे निभाया भी कवि ने चन्दनदास के इस कार्य की तुलना राजा शिवि के कार्यों से की है। जिन्होंने अपने शरणागत कपोत की रक्षा के लिए अपने शरीर के अंगों को काटकर दे दिया था। राजा शिवि ने तो सत्ययुग में ऐसा किया था, पर चन्दनदास ने ऐसा कार्य इस कलियुग में किया है, इसलिए वे और अधिक प्रशंसा के पात्र हैं।

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NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम्

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम् Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

Shemushi Sanskrit Class 9 Solutions Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम्

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

अभ्यासः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां प्रश्नानामुत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत

(क) श्वेतकेतुः सर्वप्रथमम् आरुणिं कस्य स्वरूपस्य विषये पृच्छति?
उत्तर:
श्वेतकेतुः सर्वप्रथमम् आरुणिं मनसः स्वरूपस्य विषये पृच्छति।

(ख) आरुणिः प्राणस्वरूपं कथं निरूपयति।
उत्तर:
आरुणिः प्राणस्वरूपविषये कथयति ‘पीतानाम् अपां योऽणिष्ठः स प्राणः इति।

(ग) मानवानां चेतांसि कीदृशानि भवन्ति?
उत्तर:
यादृशमन्नादिकं गृह्णाति मानवस्तादृशमेव तस्य चित्तादिकं भवतीति।

(घ) सर्पिः किं भवति?
उत्तर:
मथ्यमानस्य दध्नः योऽणिमा स ऊर्ध्वः समुदीषति, तत्सर्पिः भवति।

(ङ) आरुणेः मतानुसारं मनः कीदृशं भवति?
उत्तर:
आरुणेः मतानुसारं मनः अन्नमयं भवति।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 2.
(क) ‘अ’ स्तम्भस्य पदानि ‘ब’ स्तम्भेन दत्तैः पदैः सह यथयोग्यं योजयत-

‘अ’ स्तम्भः – ‘ब’ स्तम्भः
(क) मनः – (1) अन्नमयम्
(ख) प्राणः – (2) तेजोमयी
(ग) वाक् – (3) आपोमयः
उत्तर:
‘अ’ स्तम्भः – ‘ब’ स्तम्भः
(क) मनः – (1) अन्नमयम्
(ख) प्राणः – (3) आपोमयः
(ग) वाक् – (2) तेजोमयी

(ख) अधोलिखितानां पदानां विलोमपदं पाठात् चित्वा लिखत
उत्तर:
(i) गरिष्ठः = अणिष्ठः
(ii) अधः = उर्ध्वम्
(iii) एकवारम् = भूयः
(iv) अनवधीतम् = अवधीतम्
(v) किञ्चित् = सर्वम्

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 3.
उदाहरणमनुसृत्यस निम्नलिखितेषु क्रियापदेषु ‘तुमुन्’ प्रत्ययं योजयित्वा पटनिर्माणं कुरुत
यथा-
प्रच्छ् + तुमुन् = प्रष्टुम्
उत्तर:
(क) श्रु + तुमुन् = श्रोतुम्।
(ख) वन्द् + तुमुन् = वन्दितुम्।
(ग) पठ् + तुमुन् = पठितुम्।
(घ) कृ + तुमुन् = कर्तुम्।।
(ङ) वि + ज्ञा + तुमुन् = विज्ञातुम्।
(च) वि + आ + ख्या + तुमुन् = व्याख्यातुम्।

प्रश्न 4.
निर्देशानुसारं रिक्तस्थानानि पूरयत
उत्तर:
(क) अहं किञ्चित् प्रष्टुम् इच्छामि। (इच्छ्-लट् लकारे)
(ख) मनः अन्नमयं भवति। (भू-लट् लकारे)
(ग) सावधानं श्रृणु। (श्रृ-लोट् लकारे)
(घ) तेजास्विनावधीतम् अस्तु। (अस्-लोट् लकारे)
(ङ) श्वेतकेतुः आरुणेः शिष्यः आसीत्। (अस्-लङ् लकारे)

प्रश्न 5.
उदाहरणमनुसृत्य वाक्यानि रचयत। यथा-अहं स्वदेशं सेवितुम् इच्छामि।
उत्तर:
(क) अहं शिष्यम् उपदिशामि।
(ख) अहं गुरुं प्रणमामि।
(ग) अहं शिष्यं पुस्तकम् आनेतुम आज्ञापयामि।
(घ) अहं गुरुं प्रश्नं पृच्छामि।
(ङ) अहं भवतः सङ्केतम् अवगच्छामि।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 6.
(क) सन्धिं कुरुत
उत्तर:
(i) अशितस्य + अन्नस्य = अशितस्यान्नस्य।
(ii) इति + अपि + अवधार्यम् = इत्यप्यवधार्यम्।
(iii) का + इयम् = केयम्।
(iv) नौ + अधीतम् = नावधीतम्।
(v) भवति + इति = भवतीति।

(ख) स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(i) मध्यमानस्य दध्नः अणिमा ऊर्ध्वं समुदीति।
उत्तर:
कस्य दधनः अणिमा ऊर्ध्वं समुदीषति?

(ii) भवता घृतोत्पत्तिरहस्यं व्याख्यातम्।
उत्तर:
केन घृतोत्पत्तिरहस्यं व्याख्यातम्?

(iii) आरुणिम् उपगम्य श्वेतकेतुः अभिवादयति।
उत्तर:
आरुणिम् उपगम्य कः अभिवादयति?

(iv) श्वेतकेतुः वाग्विषये पृच्छति।
उत्तर:
श्वेतकेतुः कस्यविषये पृच्छति?

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 7.
पाठस्य सारांशं पञ्चवाक्यैः लिखत।
उत्तर:
पाठस्य सारांशः
अन्नमयं मनः भवति। आपोमयः प्राणः भवति एवं जलमेव जीवनं भवति। तेजोमयी वाक् भवति। अश्यमानस्य तेजसः यः अणिमा, स ऊर्ध्वः समुदीषति, सा खलु वाग्भवति। यादृशमन्नादिकं मानवः गृणाति तादृशमेव तस्य चित्तादिकं भवति।

Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम् Summary Translation in Hindi and English

1. संकेत-श्वेतकेतुः-भगवन्।
श्वेतकेतुरहं …………………………… मां विज्ञापयतु।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम् 1
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम् 2

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

हिन्दी सरलार्थ:
श्वेतकेतु-हे भगवन्! मैं श्वेतकेतु प्रणाम करता हूँ। आरुणि-हे पुत्र! दीर्घायु हो। श्वेतकेतु-हे भगवन्! मैं कुछ पूछना चाहता हूँ। आरुणि-हे पुत्र! आज तुम क्या पूछना चाहते हो? श्वेतकेतु-हे भगवन्! मैं पूछना चाहता हूँ कि यह मन क्या है? आरुणि-हे पुत्र! पूर्णतः पचाए गए अन्न का सबसे छोटा भाग मन होता है। श्वेतकेतु-और प्राण क्या है? आरुणि-पिए गए तरल द्रव्यों का सबसे छोटा भाग प्राण होता है। श्वेतकेतु-हे भगवन्! वाणी क्या है?

आरुणि-हे पुत्र! ग्रहण की गई ऊर्जा का जो सबसे छोटा भाग है, वह वाणी है। हे सौम्य! मन अन्नमय, प्राण जलमय तथा वाणी तेजोमयीं होती है-यह भी समझ लेना चाहिए।

श्वेतकेतु-हे भगवन्! आप मुझे पुनः समझाइए।

Meaning in English Shwetaketu-Oh Lord! I Shwetaketu salutes you.
Aruni-Oh son! May you live long.
Shwetaketu-Oh Lord! I want to ask something:
Aruni-Oh son! What do you want to ask today?
Shwetaketu-Oh Lord! I went to ask what is mind?
Aruni-Oh son! Mind is the minutest part of the digested food. Shwetaketu-And what is Prana?
Aruni-Prana is the minutest part of the water drunk.
Shwetaketu-Oh Lord! What is speech?
Aruni-Oh son! Speech is the minutest part of the energy (splendour) obtained from the food. Oh gentleman! You should understand that mind, vital air (prana) and speech are the essences or final product of the food, water and the energy.
Shwetaketu-Oh Lord! Please tell me once more.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

2. आरुणि-सौम्य! एष उपादेशामि …………………………… नावधीतमस्तु।

शब्दार्थ (Word-meanings)

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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

हिन्दी सरलार्थ:
आरुणि हे सौम्य! मैं उपदेश करता हूँ। ध्यान से सुनो। मथे जाते हुए दही की अणिमा (मलाई) ऊपर तैरने लगती है। उसका घी बन जाता है।
श्वेतकेतु-हे भगवन्! आपने तो घी की उत्पत्ति का रहस्य समझा दिया, मैं और भी सुनना चाहता हूँ।
आरुणि-सौम्य! इसी तरह खाए जाते हुए अन्न की अणिमा मन बन जाती है।
समझ गए या नहीं?
श्वेतकेतु-अच्छी तरह समझ गया भगवन्!
आरुणि-हे पुत्र! पिए जाते हुए जल की अणिमा प्राण बन जाती है। श्वेतकेतु-हे भगवन्! वाणी के बारे में भी समझाइए।

आरुणि-हे सौम्य! शरीर द्वारा ग्रहण किए गए तेज (ऊर्जा) की अणिमा वाणी बन जाती है। हे पुत्र! उपदेश के अंत में मैं तुम्हें पुनः यही समझाना चाहता हूँ कि अन्न का सार तत्त्व मन, जल का प्राण तथा तेज का वाणी है। इसके अतिरिक्त किंबहुना (और क्या) मेरे उपदेश का सार यही है कि मनुष्य जैसा अन्न ग्रहण करता है उसका मन, बुद्धि और अहंकार (चित्त) वैसा ही बन जाता है। हे पुत्र! इस सबको हृदय में धारण कर लो (अच्छी प्रकार से समझ लो)।

श्वेतकेतु-जैसी आपकी आज्ञा भगवन्! मैं आपको प्रणाम करता हूँ आरुणि-हे पुत्र! दीर्घायु हो, तुम्हारा अध्ययन तेजस्विता से युक्त हो।

Meaning in English:
Aruni-Oh Saumya (modest)! I just instruct you. Listen carefully. The very small unit of the curd which is being churned comes up. That becomes butter (or ghee.).
Shwetaketu-Oh Lord! You have explained the secret of obtaining ghee (or butter). I still want to hear more.
Aruni-O’modest! similarly, the very small part of the food which is being eaten comes up. That only becomes mind. Have you understood or not?
Shwetaketu-I have understood properly, Sir!
Aruni-Oh son! The very small part of the water which is being drunk comes up. That only is prana (vital air).
Shwetketu-Oh Lord! Please tell me about the speech also. NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्
Aruni-Qh dear! the very small part of the energy (splendour) which is formed after digestion of food, comes up. That only is speech. Oh son! I want to tell you again at the end of my advice that the finished product of the food becomes mind, that of water becomes prana (vital air) and that of splendour (i.e. energy) becomes speech. What’s more to state, the essence of my instruction is that the mind, wisdom and ego (temperament) of the man becomes the same as the food is ingested by him. Oh, son! You should keep all this in your mind properly.
Shwetaketu-As you order Sir! I bow to you.
Aruni-Oh son! May you live long. Your studies may be full of nobility.

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