Author name: Prasanna

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 दौवारिकस्य निष्ठा

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 5 दौवारिकस्य निष्ठा Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

Bhaswati Class 12 Solutions Chapter 5 दौवारिकस्य निष्ठा

अभ्यासः

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत

(क) प्रतापदुर्गदौवारिकः कस्य ध्वनिम् इव अश्रौषीत् ?
उत्तर
पादक्षेपस्य।

(ख) काषायवासाः धृततुम्बीपात्रः भव्यमूर्तिः इति एते शब्दाः कस्य विशेषणानि सन्ति?
उत्तर
संन्यासिनः।

(ग) कः तुरीयाश्रमसेवी अस्ति?
उत्तर
संन्यासी।

(घ) महाराजस्य सन्ध्योपासनसमयः कदा भवति?
उत्तर
पूर्वाहने।

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(ङ) के उत्कोचलोभेन स्वामिनं वञ्चयन्ति?
उत्तर
नीचाः।

(च) त्यज! नाहं पुनरायास्यामि, नाहं पुनरेवं कथयिष्यामि,महाशयोऽसि, दयस्व इति कः अवदत्?
उत्तर
संन्यासी।

(छ) दौवारिकस्य निष्ठा केन परीक्षिता?
उत्तर
गौरसिंहेन।

प्रश्न  2.
एकवाक्येन उत्तरं दीयताम्

(क): रात्रौ के के प्रविशन्ति?
उत्तर
रात्रौ परिचिता वा प्राप्तपरिचयपत्रा वा आहूता वा प्रविशन्ति।

(ख) दीपस्य समीपमागत्य संन्यासिना किम् उक्तम् ?
उत्तर
दीपस्य समीपमागत्य संन्यासिना उक्तम् “दौवारिक! न मां प्रत्यभिजानासि?”

(ग) महाराजं प्रत्यभिज्ञाय दौवारिकः किम् अवदत् ?
उत्तर
महाराज प्रत्यभिज्ञाय दौवारिकः अवदत् ‘आः! कथं श्रीमान् गौरसिंह? आर्य! क्षम्यतामनुचितव्यवहार एतस्य ग्राम्यवराकस्य।’

(घ) कः कम् कठोरभाषणैः तिरस्करोति?
उत्तर
दौवारिकः संन्यासिनं कठोरभाषणैः तिरस्करोतिः।

(ङ) ‘दौवारिकस्य निष्ठा’ अयं पाठः कस्मात् गन्थात् गृहीतः?
उत्तर
‘दौवारिकस्य निष्ठा’ अयं पाठः ‘शिवराजविजय’ नाम उपन्यासार

(च) शिवगणाः कीदृशाः आसन् ?
उत्तर
शिवगणाः विश्वसनीयाः आसन्।

(छ) दौवारिकः संन्यासिन कम् अमन्यत?
उत्तर
सिनं कस्यापि देशद्रोहिणः गूढचरम् अमन्यत।

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प्रश्न 3.
प्रश्ननिर्माणं रेखाङ्कितानि पदान्याधृत्यं कुरुत

(क) महाराजशिववीरस्य आज्ञां वयं शिरसा वहामः।
उत्तर
कस्य आज्ञा वयं शिरसा दहामः?

(ख) नीचा उत्कोचलोभेन स्वामिनं कश्यत्विा आत्मानम् अन्धतमसे पातयन्ति।
उत्तर
के उत्कोचलोभेन स्वामिनं वञ्यत्विा आत्मानम् अन्धतमसे पातयन्ति?

(ग) दुर्गाध्यक्षः एव यथोचितम् व्यवहरिष्यति।
उत्तर
कः एव यथोचितम् व्यवहरिष्यति?

(घ) दौवारिकः संन्यासिनम् आकृष्य नयन्नेव प्रचलितः
उत्तर
दौवारिकः कम् आकृष्य नयन्नेव प्रचलितः?

(ङ) दौवारिकस्य पृष्ठे हस्तं विन्यस्यन् संन्यासिरूपो गौरसिंहः अवदत्।
उत्तर
कस्य पृष्ठे हस्तं विन्यस्यन् संन्यासिरूपो गौरसिंहः अवदत् ?

(च) दीपस्य समीपमागत्य संन्यासिना उक्तम् ।
उत्तर
दीपस्य समीपमागत्य केन उक्तम् ?

(छ) संन्यासी तुरीयाश्रमसेवी इति प्रणम्यते।
उत्तर
कः तुरीयाश्रमसेवी इति प्रणम्यते।

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प्रश्न 4.
समासविग्रहः क्रियताम्
उत्तर-
(क) प्रतापदुर्गदौवारिकः = प्रतापदुर्गस्य दौवारिकः ।
(ख) दीपप्रकाशे = दीपानां प्रकाशे।
(ग) क्षणानन्तरम् = क्षणस्य अनन्तरम् ।
(घ) पादध्वनिः = पादयोः ध्वनिः।
(ङ) द्वाःस्थेन = द्वारे स्थितः यः सः, तेन।
(च) कठोरभाषणैः = कठोराणि च तानि भाषणानि, तैः।
(छ) गम्भीरस्वरेण = गम्भीरेण स्वरेण ।

प्रश्न 5.
सन्धिच्छेदः क्रियताम्
उत्तर-
(क) किञ्चिदन्धकारे = किञ्चित् + अन्धकारे
(ख) शान्तो भव = शान्तः + भव।
(ग) अद्यापि = अद्य + अपि।
(घ) इत्येवम् = इति + एवम्।.
(ङ) कोऽत्र = कः + अत्र।
(च) तदधुनैव = तत् + अधुना + एव।।
(छ) क्षान्तोऽयमपराधः = क्षान्तः + अयम् + अपराधः ।
(ज) बहूक्तम् = बहु + उक्तम्।

प्रश्न 6.
उपसर्ग-प्रकृति/प्रकृति-प्रत्यय-विभागं दर्शयत
उत्तर
(क) निधाय = नि उपसर्ग, √ , ल्यप.प्रत्यय।
(ख) प्रत्यागतम् = प्रति + आ उपसर्ग √ गम्, क्त प्रत्यय।
(ग) विदधानः = वि उपसर्ग + √धा, शानच् प्रत्यय।…
(घ) निरीक्षमाणः = निर् उपसर्ग, √ ईक्ष्, शानच् प्रत्यय।
(ङ) भाषमाणेन = √ भाष्, शानच् प्रत्यय।
(च) अभिज्ञाय = अभि उपसर्ग √ ज्ञा, ल्यप् प्रत्यय।
(छ) पश्यन् = √ दृश्, शतृ प्रत्यय।
(ज) अनुत्तरयन् = अन् + उद् उपसर्ग √ तु, शतृ प्रत्यय।

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प्रश्न 7.
विशेषणं विशेष्येन सह योजयत
उत्तर
विशेषणम् – विशेष्यम्
(क) गम्भीरेण – स्वरेण
(ख) मुमुर्षः – जनः
(ग) कठोरैः – भाषणैः
(घ) परिष्कृतम् – पारदभस्म
(ङ) कपटी – संन्यासिन्
(च) उत्कोचलोभी – नीचः
(छ) देशद्रोहिणः – गूढचरः
(ज) आहूताः – अभ्यागताः

Bhaswati Class 12 Solutions Chapter 5 दौवारिकस्य निष्ठा Summary Translation in Hindi and English

1. संकेत-संवृत्ते किञ्चिदन्धकारे ………………… अभूदालापः
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हिन्दी-अनुवाद-कुछ अन्धकार होने पर बन्दूक कंधे पर रखकर, अच्छी तरह से (चारों ओर) देखता हुआ तथा आते-जाते हुए को जानतें समझते हुए प्रतापदुर्ग के द्वारपाल ने किसी के पैरों की आवाज सुनी। फिर रुककर सामने देखते हुए दीपक का प्रकाश होने पर भी किसी को न देखते हुए गंभीर स्वर में कहा-‘अरे! यहाँ कौन है? कौन है यहाँ?”

एक क्षण के बाद पुनः वही पैरों की आवाज सुनाई पड़ी। फिर क्रोधपूर्वक उसने कहा- “यह कौन बहरा है जो मुझे उत्तर न देकर मरने की इच्छा से यहाँ आ रहा है?” इसके पश्चात् “द्वारपाल! शान्त हो जाओ, क्यों व्यर्थ में मरने वाला और बहरा कहते हो?” इस प्रकार बोलने वाले को बिना देखे ही गम्भीर स्वर में स्निग्ध वाणी को (द्वारपाल ने) सुना (इसके पश्चात् (द्वारपाल ने कहा)

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‘तो क्या आप अभी तक महाराज के आदेश को नहीं जानते हैं कि द्वारपाल या पहरेदार के द्वारा तीन बार पूछने पर भी उत्तर न देने वाले को मार दिया जाना चाहिए?’ द्वारपाल के ऐसे कहने पर-क्षमा करें, मैं आ रहा हूँ, आकर सब कुछ बताऊँगा’ ऐसा कहते हुए बारह वर्षीय भिक्षु बालक से अनुकरण किए जाते हुए काषाय वस्त्रधारी, तुम्बी पात्र लिए हुए, भव्यमूर्ति वाले किसी संन्यासी को द्वारपाल ने देखा। तब उन दोनों में इस प्रकार का वार्तालाप हुआ

English-Translation-When it was little dark, the gatekeeper of Pratap fort, who was carrying a gun on his shoulder, who was looking all around carefully and watching all the people who were coming and going, heard some one’s sound of foot-step. Then he stopped and looked . forward being unable to see anyone in the light of lamp even. He asked in slow voice- ‘Oh! who is there? who is there?”

After a moment, the same sound of foot-step was again heard. Then he asked angrily—“Who is this deaf man that is coming here, willing to die, without answering me.”

After that without seeing any one he heard someone saying in soft speech-—”Oh gatekeeper! keep quiet. Why do you call me deaf and one willing to die uselessly?” After that the door keeper said—What! Do you not know by now even the king’s order that one should be killed who do not answer being questioned by the gatekeeper or the watchman even for three times?’ When gatekeeper said so, he saw a beautiful.

sannyasin who was wearing soffron-coloured-clothes holding an earthen or wooden-pot and who was followed by a twelve-years young beggar saying-‘Please excuse me, I am just coming. I will tell you everything after coming there.’ Then this conversation took place between the too .

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संकेत-संन्यासी-कथमस्मान् ………………… (तथा कृत्वा) कथ्यताम् । (पृष्ठ 35)

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हिन्दी-अनुवाद-संन्यासी-हम संन्यासियों को भी तुम कठोर भाषण से क्यों तिरस्कृत करते हो?
द्वारपाल – भगवन् ! आप संन्यासी हैं, चतुर्थ आश्रम के सेवी हैं, अतः आपको प्रणाम है परन्तु आप स्वामी के आदेश का उल्लंघन करके अपना परिचय दिए बिना चले आ रहे हैं,
इसलिए मैं क्रुद्ध हो रहा हूँ।
संन्यासी-सत्य है, तुम्हारा अपराध क्षमा किया किन्तु संन्यासियों, ब्रह्मचारियों, पण्डितों, स्त्रियों तथा बालकों से कुछ भी नहीं पूछना। अपना परिचय न देने पर भी उन्हें प्रवेश करने
देना।
द्वारपाल-संन्यासी! संन्यासी बहुत कह चुके हो, अब रुको। हम द्वारपाल लोग ब्रह्मा की आज्ञा भी नहीं मानते हैं। केवल महाराज शिववीर की आज्ञा को शिरोधार्य करते हैं। पूर्वाह्न में महाराज के सन्ध्या-पूजन के समय आप जैसे लोगों के मिलने का समय होता है, रात्रि में नहीं।
संन्यासी-तो क्या कोई भी रात्रि में प्रवेश नहीं करता?
द्वारपाल-(क्रोधपूर्वक) कोई भी क्यों नहीं प्रवेश करता? परिचित अथवा परिचय पत्र प्राप्त अथवा आमन्त्रित लोग प्रवेश करते हैं न कि आप जैसे आए हुए कोई भी लोग।
संन्यासी-द्वारपाल! यहाँ आओ, कुछ कान में कहना चाहता हूँ। द्वारपाल-(वैसा करके) कहिए।

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English-Translation Why do you insult us by such harsh words?

Gatekeeper-Oh lord! You are a Sannyasin, you are serving the fourth Ashrama, So I bow to you but as you did not obey our lord’s order and are trying to enter without giving your introduction, sol am getting angry.

Sannyasin-O.K., you have been excused. but Sannyasins, Brahmacharis, Pandits, ladies and children should not be asked anything. They should be allowed to enter without giving their introduction even.

Gatekeeper – Oh Sannyasin! OhSannyasin! you have said much, now you keep quiet. We, the gatekeepers, do not accept the order of Brahma even. We follow completely the oreder of great king Shivavira only. The enterance of the people like you is possible only in the noming when our lord worships God and it is not possible during night

Sannyasin – Then, does no. one enter during night?

Gatekeeper – (Angrily). Why no one enters? The people who are well known or who occupy the identity cards or who are invited enter but not people like you.

Sannyasin – Oh gatekeeper ! Come here, I want to tell you something in your ear.

Gatekeeper (Doing so) – Please tell.

संकेत-सन्यासी यदि त्वं ………………….. विजयन्ते। (पृष्ठ 36)

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हिन्दी -अनुवाद-संन्यासी-यदि तुम प्रवेश करने से मुझे न रोको तो तुम्हें मैं इसी समय परिष्कृत पारद भस्म दे दूँ जिससे रत्ती भर से भी तुम पचास तोले तक ताँबे का सोना बना सकते हो। द्वारपाल-अरे! कपटी संन्यासी! तुम विश्वासघात और स्वामी से वंचना सिखा रहे हो? वे कोई और ही. नीच लोग होते हैं जो रिश्वत के लोभ से स्वामी को छलकर अपने को गहन अन्धकार (घोर नरक) में गिराते हैं, हम महाराज शिवाजी के सेवक ऐसे नहीं है। (संन्यासी का हाथ पकड़कर) इधर आओ और सच-सच बताओ तुम कौन हो? कहाँ से आए हो? अथवा किसने तुम्हें भेजा है?

मैं तो तुम्हें किसी देशद्रोही का गुप्तचर मानता हूँ। (हाथ खींचकर) तो दुर्गाध्यक्ष के समीप आओ। वे ही तुम्हें पहचानकर तुम्हारे साथ उचित व्यवहार करेंगे। तब संन्यासी ने अनेक बार कहा- ‘छोड़ दो, मैं पुनः नहीं आऊँगा, मैं ऐसा नहीं कहूँग आप महान् हैं, दया करो, दया करो।’ द्वारपाल तो उसे खींचकर ले जाने लगा।

इसके बाद दीपक के पास आकर संन्यासी ने कहा- “द्वारपाल! क्या तुम मुझे नहीं, पहचानते?” तब द्वारपाल ने उस संन्यासी को अच्छी प्रकार से देखा और पहचान लिया तथा कहा- “अरे! क्या आप श्रीमान् गौरसिंह जी हैं? आर्य! इस बेचारे गँवार के अनुचित व्यवहार को क्षमा करें।” यह सुनकर द्वारपाल के पीठ पर हाथ फेरते हुए संन्यासी वेषधारी गौरसिंह ने कहा-“हे द्वारपाल ! मैंने तुम्हारी अच्छी प्रकार से परीक्षा ले ली है, तुम यथायोग्य पद पर ही नियुक्त किए गए हो। तुम्हारे जैसे लोम ही वास्तव में पुरस्कार प्राप्त करने के अधिकारी होते हैं और दोनों लोकों को जीतते हैं।

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English-Translation—If you do not prevent me from entering then I give you just now the ash of purified-mercury. By its very small quantity you can convert huge amount of (52 tolas) brass into gold.

Sannyasin-On fraud Sannyasin! you are teaching me violation of trust and deceiving the lord. They may be some other people who fall into deep hell by deceiving their kingdue to the greed of taking bribe. We the attendants of lord Shivaji are not of such nature.

(Holding Sannyasin with his hand) Come here and tell the truth who are you? From where have you come? By whom have you been sent? I consider you to be a spy of some traitor. So, come near the controller of the fort. After recognising you, he will only behave properly with you.

Then that Sannyasin said many times—“Leave me, I will not come here again. I will not say so again. You are a great man. Please have mercy on me.’ The gatekeeper tried to pull him.

After that, the Sannyasin came near the lamp and said-“Oh gatekeeper! Do you not recognise me?” Then the gatekeeper looked seriously towards the Sannyasin and said—“Oh! Are you Shri Gaur Singh Ji? Oh Sir ! Please excuse the uncultured behaviour of this poor uneducated man.”

On hearing this that Sannyasi who was Gaur Singh actually patted the back of that gatekeeper and said. .
“Oh gatekeeper! you have been examined by me seriously and have been placed on the proper past. People like you only deserve prizes and get success in both the worlds.

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NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 11 पर्यावरणम्

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 11 पर्यावरणम् Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

Shemushi Sanskrit Class 9 Solutions Chapter 11 पर्यावरणम्

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

अभ्यासः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां प्रश्नानामुत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत-

(क) प्रकृतेः प्रमुखतत्त्वानि कानि सन्ति?
उत्तर:
पृथिवी, जलं, तेजो, वायुकाशश्चेति प्रकृत्या प्रमुखतत्त्वानि सन्ति।

(ख) स्वार्थान्धः मानवः किं करोति?
उत्तर:
स्वार्थान्धः मानवः पर्यावरणं नाशयति।

(ग) पर्यावरणे विकृते जाते किं भवति?
उत्तर:
पर्यावरणे विकृते जाते विविधाः रोगाः भीषणसमस्याश्च जायन्ते।

(घ) अस्माभिः पर्यावरणस्य रक्षा कथं करणीया? –
उत्तर:
वापीकूपतडागादिनिर्माणं कृत्वा, कुक्कुरसूकरसर्पनकुलादिस्थलचराणां, मत्स्यकच्छपमकरप्रभृतीनां जलचराणां रक्षणेन पर्यावरणस्य रक्षा करणीया।

(ङ) लोकरक्षा कथं सम्भवति?
उत्तर:
प्रकृतिरक्षयैव लोकरक्षा सम्भवति।।

(च) परिष्कृतं पर्यावरणम् अस्मभ्यं किं किं ददाति?
उत्तर:
परिष्कृतं पर्यावरणम् अस्मभ्यं सांसारिक जीवनसुखं, सद्विचारं, सत्यसङ्कल्पं, माङ्गलिकसामग्रीञ्च प्रददाति।

प्रश्न 2.
स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

(क) वनवृक्षाः निर्विवेकं छिद्यन्ते।
उत्तर:
के निर्विवेकं छिद्यन्ते?

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

(ख) वृक्षकर्तनात् शुद्धवायुः न प्राप्यते।
उत्तर:
कस्मात् शुद्धवायुः न प्राप्यते?

(ग) प्रकृतिः जीवनसुखं प्रददाति।
उत्तर:
प्रकृतिः किं प्रददाति?

(घ) अजाताशिशुः मातृगर्भे सुरक्षितः तिष्ठति।
उत्तर:
अजातशिशुः कुत्र सुरक्षितः तिष्ठति?

(ङ) पर्यावरणरक्षणं धर्मस्य अङ्गम् अस्ति।
उत्तर:
पर्यावरणरक्षणं कस्य अङ्गम् अस्ति।

प्रश्न 3.
उदाहरणमनुसृत्य पदरचनां कुरुत-
(क) यथा – जले चरन्ति इति = जलचराः।
उत्तर:
(i) स्थले चरन्ति इति = स्थलचराः
(ii) निशायां चरन्ति इति = निशाचराः
(iii) व्योम्नि चरन्ति इति = व्योमचराः
(iv) गिरौ चरन्ति इति = गिरिचराः
(v) भूमौ चरन्ति इति = भूमिचराः

(ख) यथा – न पेयम् इति = अपेयम्
उत्तर:
(i) न वृष्टिः इति = अवृष्टिः
(ii) न सुखम् इति = असुखम्
(iii) न भावः इति = अभावः
(iv) न पूर्णः इति = अपूर्णः

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 4.
उदाहरणमनुसृत्य पदनिर्माणं कुरुत- .
यथा = वि + कृ + क्तिन् = विकृतिः।।
उत्तर:
(क) प्र + गम् + क्तिन् = प्रगतिः
(ख) दृश् + क्तिन् = दृष्टिः
(ग) गम् + क्तिन् = गतिः
(घ) मन् + क्तिन्
(ङ) शम् + क्तिन् = शान्तिः
(च) भी + क्तिन् = भीतिः
(छ) जन् + क्तिन् = जातिः
(ज) भज् + क्तिन् = भक्तिः
(झ) नी + क्तिन् = नीतिः

प्रश्न 5.
निर्देशानुसारं परिवर्तयत यथा-स्वार्थान्धो मानवः अद्य पर्यावरणं नाशयति (बहुवचने)। स्वार्थान्धाः मानवः अद्य पर्यावरणं नाशयन्ति।

(क) सन्तप्तस्य मानवस्य मङ्गलं कुतः? (बहुवचने)
उत्तर:
सन्तप्तानां मानवानां मङ्गलं कुतः?

(ख) मानवाः पर्यावरणकुक्षौ सुरक्षिताः भवन्तिं (एकवचने)
उत्तर:
मानवः पर्यावरणकुक्षौ सुरक्षितः भवति।

(ग) वनवृक्षाः निर्विवेकं छिद्यन्ते (एकवचने)
उत्तर:
वनवृक्षः निर्विवेक छिद्यते।

(घ) गिरिनिर्झराः निर्मलं जलं प्रयच्छन्ति। (द्विवचने)
उत्तर:
गिरिनिर्झराः निर्मलं जलं प्रयच्छतः।

(ङ) सरित् निर्मलं जलं प्रयच्छति (बहुवचने)।
उत्तर:
सरितः निर्मलं जलं प्रयच्छति।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

प्रश्न 6.
पर्यावरणरक्षणाय भवन्तः किं करिष्यन्ति इति विषये पञ्चवाक्यानि लिखत्।
यथा –
अहं विषाक्तम् अवकरं नदीषु न पातयिष्यामि।

(क) अहं वृक्षच्छेदनं न करिष्यामि।
(ख) अहं नूतनवृक्षान् लताः च आरोपयिष्याणि।
(ग) अहं पशून पालयिष्यामि।।
(घ) अहं पशुपक्षिणाम् आखेटं न करिष्यामि।
(ङ) अहं वापीकूपतडागादीनां निर्माणं करिष्यामि।

प्रश्न 7.
(क) उदाहरणमनुसत्य उपसर्गान पृथक्कृत्वा लिखत
यथा-
संरक्षणाय = सम्।
उत्तर:
(i) प्रभवति
(ii) उपलभ्यते = उप
(iii) निवसन्ति = नि
(iv) समुपहरन्ति = सम् + उप
(v) वितरन्ति = वि
(vi) प्रयच्छन्ति = प्र
(vii) उपगता = उप
(viii) प्रतिभाति = प्रति

(क) उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितानां समस्तपदानां विग्रहं लिखत
यथा-
तेजोवायुः = तेजः वायुः च।
गिरिनिर्झराः = गिरयः निर्झराः च।
उत्तर:
पत्रपुष्पे = पत्रम् पुष्पम् च.
(ii) लतावृक्षौ = लता वृक्षः च
(iii) पशुपक्षी = पशुः पक्षी च
(iv) कीटपतङ्गौ = कीटः पतङ्गः च

परियोजनाकार्यम्

(क) विद्यालयप्राङ्गणे स्थितस्य उद्यानस्य वृक्षाः पादपाश्च कथं सुरक्षिताः। स्युः तदर्थं प्रयत्नः करणीयः इति सप्तवाक्येषु लिखत।
उत्तर:
1. सर्वप्रथमं वृक्षाणां पादपानां च स्पर्शस्य निषेधः स्यात्।
2. तेषां पुष्पाणामपि स्पर्शस्य निषेधः भवितव्यः।
3. वृक्षाणां फलानामपि कापि हानिः न भवितव्या।
4. तेषां जलसिञ्चनस्य पूर्णः प्रबन्धः स्यात्।
5. पुष्पविनाशकं प्रति दण्डस्य व्यवस्था स्यात्।।
6. वृक्षान् पादपान् वा प्रति रक्षाजालस्य व्यवस्था भवितव्या।
7. वृक्षाणां संरक्षणाय मालाकाराणामपि व्यवस्था भवितव्या।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

(ख) अभिभावकस्य शिक्षकस्य वा सहयोगेन एकस्य वृक्षस्य आरोपणं कर णीयम्। (यदि स्थानम् अस्ति)। तर्हि विद्यालये प्राङ्गणे, नास्ति चेत् स्वस्मिन् प्रतिवेशे, गृहे वा।) कृतं सर्वं दैनिन्दिन्यां लिखित्वा शिक्षकं दर्शयत।
उत्तर:
छात्र अपने-अपने अध्यापक के सहयोग से अपने-अपने विद्यालय में वृक्ष लगाएँ तथा अपनी डायरी में लिखें कि वे उसकी रक्षा के लिए प्रतिदिन क्या-क्या करते हैं-यह सब वह अपने अध्यापक को भी लिखकर दिखाएँ।

Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 11 पर्यावरणम् Summary Translation in Hindi and English

संकेत-प्रकृतिः समेषां …………………………… क्व मङ्गलम्।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 11 1
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 11 पर्यावरणम् 2
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 11 पर्यावरणम् 3

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

हिन्दी अनुवाद-प्रकृति सब प्राणियों की रक्षा के लिए प्रयत्न करती है। यह विभिन्न प्रकारों से सबको पुष्ट करती है तथा सुखसाधनों से तृप्त करती है। पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश ये इसके प्रमुख तत्त्व हैं। वे ही मिलकर या अलग-अलग हमारे पर्यावरण को बनाते हैं। संसार जिसके द्वारा सब ओर से अच्छादित किया जाता है, वह ‘पर्यावरण’ कहलाता है। जिस प्रकार अजन्माशिशु अपनी माता के गर्भ में सुरक्षित रहता है उसी प्रकार मनुष्य पर्यावरण की कोख में (सुरक्षित रहता है)। परिष्कृत तथा प्रदूषण से रहित पर्यावरण हमें सांसारिक जीवन-सुख, अच्छे विचार, अच्छे संकल्प तथा मांगलिक सामग्री देता है। प्रकृति के क्रोधों से व्याकुल मनुष्य क्या कर सकता है? बाढ़, अग्नि भय, भूकम्पों, आँधी-तूफानों तथा उल्का आदि के गिरने से संतप्त मानव का कहाँ कल्याण है? अर्थात् कहीं नहीं।

Meaning in English: Nature tries for the protection of all the living-beings. It nourishes all in various ways and satisfies all by various means of happiness. Earth, water, fire, wind and sky all these are its main elements. They only collectively or individually form our environment. It is called environment by which the world is covered from all the sides. Just as the baby, before his birth, lives safely in his mother’s womb, similarly, man is safe in the cavity of the environment. The environment which is pure and is free from all the impurities provides us with worldly pleasures of life, good thoughts, good determinations, auspicious things etc. What can a man do when perplexed by the anger of the nature? Where can there be well-being or welfare of a man. who is perplexed by floods, fear of fire, earthquakes, storms, disasters etc.? (i.e. nowhere)

संकेत-अतएव …………………………… प्राणवायुं वितरन्ति।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 11 पर्यावरणम् 4
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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

हिन्दी सरलार्थ-इसलिए हमें प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए, उससे पर्यावरण अपने-आप सुरक्षित हो जाएगा। प्राचीनकाल में जनता का कल्याण चाहने वाले ऋषि वन में ही रहते थे क्योंकि वन में ही सुरक्षित पर्यावरण प्राप्त होता था। विभिन्न प्रकार के पक्षी अपने मधुर कूजन से वहाँ कानों को अमृत प्रदान करते हैं। नदियाँ तथा पर्वतीय झरने अमृत के समान स्वादिष्ट पवित्र जल देते हैं। वृक्ष तथा लताएँ फल, फूल तथा ईन्धन की लकड़ी बहुत मात्रा में देते हैं। शीतल, मन्द तथा सुगन्धित वनवायु औषध के समान प्राणवायु बाँटते हैं।

Meaning in English-Therefore, we should protect the nature. Then the environment will be protected itself. In ancient times, the sages who desired for the welfare of the people, used to live in the forest only because the safe-environment was obtained in the forest. Various types of birds give pleasure to the ears by their sweet chirping. The rivers and mountain springs provide us pure and sweet nectar-like water. The trees and creepers give us fruits, flowers and fire-wood in big quantity. The cold, slow and fragrant wind of the forest give us medicine like oxygen which is necessary for our like.

संकेत-परन्तु स्वार्थान्धो …………………………… प्रतिभाति।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 11 पर्यावरणम् 6
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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

हिन्दी सरलार्थ-किन्तु स्वार्थ में अन्धा हुआ मनुष्य उसी पर्यावरण को आज नष्ट कर रहा है। थोड़े से लाभ के लिए मनुष्य बहुमूल्य वस्तुओं को नष्ट कर रहे हैं। कारखानों का विषैला जल नदियों में गिराया जा रहा है जिससे मछली आदि जलचरों का क्षणभर में ही नाश हो जाता है। नदियों का पानी भी सर्वथा न पीने योग्य (अपेय) हो जाता है। वन के वृक्ष व्यापार बढ़ाने के लिए अंधाधुंध काटे जाते हैं जिससे अवृष्टि में वृद्धि होती है तथा वन के पशु असहाय होकर गाँवों में उपद्रव उत्पन्न करते हैं। वृक्षों के कट जाने से शुद्ध वायु भी दुर्लभ हो गई है। इस प्रकार स्वार्थ से अन्धे मनुष्यों के द्वारा विकारयुक्त प्रकृति ही उनकी विनाशिनी हो गई है। पर्यावरण में विकार आ जाने से विभिन्न रोग तथा भयंकर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। इसलिए अब सब कुछ चिन्तायुक्त प्रतीत हो रहा है।

Meaning in English-But the men being mad after self-interest only are destroying the environment today. People are destroying precious things just for their small interest. The poisonous water of the factories is flown into rivers by which the aquatic animals like fish etc. are destroyed in a short while. The water of the rivers also becomes unfit to drink. The forest-trees are cut relentlessly, just to increase the business by which the scarcity of rain increases. The wild animals become helpless and they create chaos in the villages. The pure wind has also become unavailable by cutting of trees. Thus, the nature has been made polluted by the selfish people and this has herself become their destroyer. The polluted environment has given birth to various diseases and to many serious problems. Therefore, everything seems to be disturbed today.

संकेत-धर्मो रक्षितः …………………………… न संशयः।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 11 पर्यावरणम् 9
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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 1 अनुशासनम्

हिन्दी सरलार्थ-‘रक्षित धर्म रक्षा करता है’- ये ऋषियों के वचन हैं। पर्यावरण की रक्षा करना भी धर्म का ही अंग है-ऐसा ऋषियों ने प्रतिपादित किया है। इसीलिए बावड़ी, कुएँ, तालाब आदि बनवाना, मन्दिर, विश्रामगृह आदि की स्थापना धर्मसिद्धि के साधन के रूप ही माने गए हैं। कुत्ते, सूअर, साँप, नेवले आदि स्थलचरों तथा मछली, कछुए, मगरमच्छ आदि जलचरों की भी रक्षा करनी चाहिए क्योंकि ये पृथ्वी तथा जल की मलिनता को दूर करने वाले हैं। प्रकृति की रक्षा से ही संसार की रक्षा हो सकती है-इसमें सन्देह. नहीं है।

Meaning in English-‘The protected religion protects. These are the famous words of the sages. The sages have also propounded that the protection of environment is also a part of religion. Therefore, digging of small tanks, wells and ponds etc. and making temples, rest-houses etc. are also considered means of establishing religion. We should protect the creatures living on land like dogs, pigs, snakes, mongoose etc. and the aquatic animals like fish, tortoise, crocodiles etc. because they are scavengers of the impurities of land and that of water. No doubt, protection of the environment can only protect the world.

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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः

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Bhaswati Class 12 Solutions Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः

अभ्यासः

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत

(क) केषाम् अन्वयः कालिदासेन विवक्षितः?
उत्तर
रघूणाम्।

(ख) रघुवंशिनः अन्ते केन तनुं त्यजन्ति?
उत्तर
योगेन।

(ग) महीक्षिताम् आधः कः आसीत् ?
उत्तर
मनः।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः

(घ) कासां पितरः केवलं जन्महेतवः?
उत्तर
प्रजानाम्

(ङ) कः प्रियः अपि त्याज्यः?
उत्तर
दुष्टः

(च) दिलीपः प्रजानां भूत्यर्थं कम् अग्रहीत?
उत्तर
बलिम्।

(छ) राजेन्दुः दिलीपः रघूणामन्वये क्षीरनिधौ कः इव प्रसूतः?
उत्तर
इन्दः।

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत

(क) महाकविकालिदासेन वैवस्वतो मनुः महीक्षिताम् कीदृशः निगदितः?
उत्तर
महाकविकालिदासेन वैवस्वतो मनुः महीक्षिताम् आद्यः निगदितः।

(ख) कालिदासः तनुवाग्भिवः सन् अपि तद्गुणैः कथं प्रचोदितः?
उत्तर
कालिदासः तनुवाग्भिवः सन् अपि तद्गुणैः चापलाय प्रचोदितः !

(ग) के तं (रघुवंश) श्रोतुमर्हन्ति?
उत्तर
सदसद्व्यक्तिहेतवः सन्तः तं श्रोतुमर्हन्ति।

(घ) दिलीपस्य कार्याणाम् आरम्भः कीदृशः आसीत्?
उत्तर
दिलीपस्य कार्याणाम् आरम्भ आगमैः सदृशः आसीत्।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः

(ङ) रविः रस किमर्थम् आदते?
उत्तर
रविः रसं सहस्रगुणमुत्स्रष्टुमादत्ते।

प्रश्न 3.
रेखाकितानि पदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

(क) सः प्रजानामेव भूत्यर्थं बलिम् अग्रहीत्।
उत्तर
कः प्रजानामेव भूत्यर्थं बलिम् अग्रहीत् ?

(ख) प्रजानां विनयाधानात् सः पिता आसीत्।
उत्तर
कासां विनयाधानात सः पिता आसीत ?

(ग) मनीषिणां माननीयः मनुः आसीत्।।
उत्तर
केषां माननीयः मनुः आसीत् ?

(घ) शुद्धिमति अन्वये दिलीपः प्रसूतः।
उत्तर
शुद्धिमति कस्मिन् दिलीपः प्रसूतः ?

(ङ) पितरः जन्महेतवः आसन् ।
उत्तर
के जन्महेतवः आसन् ?

प्रश्न 4.
अधोलिखितानां भावार्थ हिन्दी/आंग्ल/संस्कृत स्वभाषया लिखत

(क) प्रजानामेव भूत्यर्थं स ताभ्यो बलिमग्रहीत्। .
उत्तर
हिन्दी-कुछ राजा अपने स्वार्थ हेतु प्रजा से बहुत अधिक कर लेते हैं जो निन्दनीय है किन्तु राजा दिलीप अपनी प्रजा से थोड़ा-सा ही कर लेता था तथा वह संचित धन को भी प्रजा की भलाई में ही लगा लेता था अपने किसी निजी स्वार्थ में नहीं-यही भाव अभिव्यक्त किया गया है यहाँ।

English-In this line the great poet Kalidasa wants to convey that Dilipa was an ideal king. He used to collect very small amount from his subject as the tax and he used to spend that money for the welfare of his subjects and not for his personal reason.

संस्कृत-राजा दिलीपः स्वप्रजा यः तासां कल्याणार्थमेव बलिं गृह्णाति स्म । तस्य धनस्य प्रयोगः सः प्रजानां कल्याणायैव करोति स्म न तु स्वार्थाय-अयमेवास्ति भावः अस्याः पंक्तेः ।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः

(ख) आगमैः सदृशारम्भः आरम्भसदृशोदयः।
उत्तर
हिन्दी-प्रस्तुत पंक्ति में कवि यही कहना चाहते हैं कि राजा दिलीप ने अत्यधिक शास्त्रों का अध्ययन किया हुआ था जिसके कारण वे कार्यों का आरम्भ भी बहुत सुन्दर रूप से करते थे तथा कार्यों के उत्तम आरम्भ के अनुसार ही कार्यों का परिणाम (सफलता) भी उत्तम मिलता था।

English-The poet wants to tell here that king Dilipa had studied many shastras. So he used to begin his works according to knowledge of the shastras and as the works were begun properly he used to achieve good results also. So he usd to perform all his works in the proper manner as prescribed in the shastras.

संस्कृत-अत्र कविः कथयितुं वाञ्छति यत् राजा दिलीपः सर्वमपि कार्यजातं शास्त्रानुकुलविधिना आरभते स्म । अत एव यदा कार्यारम्भः सुष्ठु भवति तदा कार्याणां परिणामः अपि सम्यगेव लभ्यते स्म-नात्रसन्देहः । एवं कार्यारम्भः शास्त्रोक्तविधिना एव कर्त्तव्यः।

(ग) स पिता पितरस्तासां केवलं जन्महेतवः।
उत्तर
हिन्दी-राजा दिलीप अपनी प्रजा की सब प्रकार की शिक्षा, रक्षा तथा पालन पोष्ण का ध्यान रखता था। इसलिए सच्चे अर्थों में वह उनका पिता कहलाने का अधिकारी। था, उनक अपने पिता केवल जन्म देने के कारण मात्र थे। यहाँ कवि यही भाव प्रस्तुत करना चाहते हैं कि वास्तव में पिता अपनी सन्तान का पालन-पोषण, रक्षण, शिक्षण सब कुछ करता है तभी वह पिता कहलाने का अधिकारी होता है और ये सारे, कार्य राजा दिलीप अपनी प्रजा के लिए कर रहे थे अतः वह ही उनके सच्चे अर्थों में पिता कहलाने के अधिकारी थे, उनके अपने पिता नहीं।

English-King Dilipa used to take proper care of the education, protection, nourishment etc. of his subjects. This is the responsibility of the father. So he was the real father of his subjects and their own fathers were the cause of giving birth to them only.

संस्कृत-राजा दिलीपः स्वप्रजानां पालनं, रक्षणं, शिक्षणं च करोति स्म। पिता सः एव — कथयितुं शक्यते यः स्वप्रजानामेतानि कार्याणि सम्पादयति । अतः स एव तासां पिता आसीत्। अयमेव भावः अस्ति अस्याः पंक्तेः । प्रजानां पितरः तु केवलं जन्महेतवः आसन् ।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः

(घ) अनन्यशासनामुर्वी शशासैकपुरीमिव।
उत्तर-
हिन्दी-राजा दिलीप चारों ओर समुद्र से घिरी हुई सम्पूर्ण पृथ्वी पर अकेले बिना किसी परिश्रम के शासन करते थे तथापि उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि जैसे वे इतने विशाल राज्य के शासक हों । उन्होंने हमेशा ऐसा अनुभव किया कि जैसे वे छोटी-सी नगरी पर शासन कर रहे हों। इस प्रकार यहाँ कवि यही कहना चाहते हैं कि इतनी विशाल पृथ्वी पर भी राजा दिलीप पल शासन कर रहे थे जैसे वे एक छोटी-सी नगरी पर शासन कर रहे हों क्योंकि उन्हें शासन में किसी प्रकार का कोई कष्ट भी अनुभव नहीं हो रहा था।

English-King Dilipa alone ruled over the whole earth as a small city and he did not face any difficulty even in ruling the whole earth. So, he was such an experienced and efficient ruler that he easily and efficiently ruled over the whole earth without facing any difficulty—this is the idea of this line.

संस्कृत,-अस्याः पंक्तेः अयमेव भावः यत् राजा दिलीपः अतियोग्यः शासकः आसीत्। सम्पूर्णां पृथ्वीं सः एकाकी एव पालयति स्म, तत्रापि सः किमपि कष्टं नानुभवति स्म । सम्पूर्णामेव पृथ्वीं सः लघुपुरीमिव पालयति स्म-इदमेव कथयितुं वाञ्छति कविः अत्र ।

प्रश्न 5.
अधोलिखितेषु विपरीतार्थमेलनं कुरुत
उत्तर-
1. यौवने = वार्धक्ये
2. मौनम् = चपलताम्
3. त्याज्यः = ग्राह्यः
4. शशासं = शासनम् न अकरोत्
5. क्षता = अक्षता।

प्रश्न 6.
अधोलिखितेषु प्रकृति-प्रत्यय-विभागः क्रियताम्-.
उत्तर-
1. आगत्य = आ + गम् धातु, ल्यप् प्रत्यय।
2. उत्स्रष्टुम् = उत् + सृज् धातु, तुमुन् प्रत्यय।
3. समंत = सम् + मन् धातु, क्त प्रत्यय।
4. त्याज्यः = त्यज् धातु, यत् प्रत्यय।
5. शिष्टः = शास् धातु, क्त प्रत्यय।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः

प्रश्न 7.
सन्धिम् सन्धि-विच्छेदं वा कुरुत
उत्तर-
1. तनुवाग्विभवोऽपि =तनुवाग्विभवः + अपि।
2. योगेनान्ते = योगेन + अन्ते।
3. ताभ्यः + बलिम् = ताभ्यो बलिम्।

प्रश्न 8.
अधोलिखितस्य श्लोकद्वयस्य अन्वयं कुरुत
(i) प्रजानां विनयाधानाद्रक्षणाद्भरणादपि।
स पिता पितरस्तासां केवलं जन्महेतवः।।
उत्तर
प्रजानाम् विनयाधानात् रक्षणात् भरणात् अपि सः पिता, तासाम् पितरः केवलम् जन्महेतवः।

(ii) स वेलावप्रवलयां परिखीकृतसागराम् ।
अनन्यशासनममुर्वी शशासकैकपुरीमिव ।।
उत्तर- सः वेलावप्रवलयाम् परिखीकृतसागराम् अनन्यशासनाम् उर्वीम् एकपुरीम् इव शशास।

प्रश्न 9.
अधोलिखितेषु विशेषण-विशेष्ययोः मेलनं कुरुत
उत्तर
विशेषण – विशेष्य
1. माननीयः – मनुः
2. राजेन्दुः – दिलीपः
3. जन्महेतवः – पितरः
4. उरगक्षता – अङ्गली
5. तस्य – आर्तस्य

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः

Bhaswati Class 12 Solutions Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः Summary Translation in Hindi and English

1. त्यागाय संभृतार्थानां सत्याय मितभाषिणाम्।
यशसे विजिगीषूणां प्रजायै गृहमेधिनाम् ।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 1
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 2
हिन्दी-अनुवाद-जो दान करने के लिए धन इकट्ठा करते थे, सत्यपालन के लिए कम बोलते थे, यश फैलाने के लिए विजय प्राप्त करते थे तथा सन्तान प्राप्ति के लिए विवाह करते थे।
English-Translation – Those who collected wealth to donote only, who used to speak very little to protect truth, used to win to spread fame and used to marry to get off spring.

2. शैशवेऽभ्यस्तविद्यानाम् यौवने विषयैषिणाम् ।
वार्द्धके मुनिवृत्तीनां योगेनान्ते तनुत्यजाम् ।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 3
हिन्दी-अनुवाद-जो बाल्यावस्था में विद्याभ्यास करते थे, युवावस्था में विषयों का उपभोग करते थे, वृद्धावस्था में मुनियों के समान तपस्या करते थे, अन्त में परमात्मा का ध्यान करते हुए शरीर का त्याग करते थे।
English-Translation-Who used to achieve education in childhood, who used to enjoy worldly- pleasures in their youth, who used to perform penance like the sages in their old age and who used to give up their lives by meditation at last.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः

3. रघूणामन्वयं वक्ष्ये तनुवाग्विभवोऽपि सन्।
तदगुणैः कर्णमागत्य चापलाय प्रचोदितः।।..
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 4
हिन्दी-अनुवाद-यद्यपि मेरी वाणी में सामर्थ्य कम है फिर भी उपरोक्त गुणों से युक्त रघुवंशियों के कुल का ही मैं वर्णन करूंगा, क्योंकि उनके गुणों ने मेरे कान के समीप आकर मुझे प्रेरित किया है।
English-Translation—Though I have very little power of speech still I will describe the family of the Raghu’s race because their merits have inspired me to do so.

4. ‘वैवस्वतो मनुर्नाम माननीयो मनीषिणाम्।
आसीन्महीक्षितामायः प्रणवश्छन्दसामिव ।।
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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 6
हिन्दी -अनुवाद-जिस प्रकार वेदों में सर्वप्रथम ओंकार (महत्वपूर्ण) है उसी प्रकार राजाओं में सर्वप्रथम तथा विद्वानों में अत्यन्त पूज्य विवस्वान् के पुत्र मनु नामक हुए। English-Translation-There was king Manu, son of Vivasvan (God Sun) who was the first king and very respectable among the scholars as Om is very respectable (and pronounced in the beginning) of the Vedas.

5. तदन्वयेशुद्धिमति प्रसूतः शुद्धिमत्तरः।
दिलीप इति राजेन्दुिरिन्दुः क्षीरनिधाविव ।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 7
हिन्दी-अनुवाद-मनु के उस अत्यन्त पवित्र वंश में उस वंश से भी अधिक पवित्र श्रेष्ठ राजा दिलीप उसी प्रकार हुए जैसे समुद्र से अत्यधिक पवित्र चन्द्रमा उत्पन्न हुआ है।
English-Translation-Just as very scared moon comes out of the sacred ocean, similarly the great king Dilipa took birth in the sacred race of Manu.

6. आकारसदृशप्रज्ञः प्रज्ञया सदृशागमः।
आगमैः सदृशारम्भः आरम्भसदृशोदयः।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 8
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 9
हिन्दी-अनुवाद-राजा दिलीप की बुद्धि उनके शरीर की आकृति जैसी तीक्ष्ण थी, तीक्ष्ण बुद्धि के अनुसार शास्त्रों का अभ्यास बहुत अच्छा करते थे, शास्त्रों के अभ्यास के अनुसार कार्यों का आरम्भ बहुत अच्छा करते थे तथा कार्यारम्भ उत्तम होने से उन्हें सफलता भी उत्तम मिलती थी।
English Translation-King Dilipa had very sharp intellect like his beautiful body. He used to study shastras seriously according to his . sharp intellect. He used to begin his works beautifully according to his sharp intellect and he used to obtain good result according to beginning the works beautifully.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः

7. प्रजानामेव भूत्यर्थं स ताभ्यो बलिमगृहीत्।
सहस्रगुणमुत्स्रष्टुमादत्ते हि.रसं रविः।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 10
हिन्दी-अनुवाद-जिस प्रकार सूर्य अपनी किरणों से जल सोखकर (वर्षा के रूप में) हजार गुणा देता है उसी प्रकार राजा दिलीप भी अपनी प्रजा से कर लेकर (उनके कल्याण के लिए) हजार गुणा करके दे देता था।
English-Translation Just as sun absorbs water from the occean and returns it in thounsand times in the form of rain, similarly king Dilipa also collected tax from his subjects but used to spend that thousand times for their welfare only.

8. ज्ञाने मौनं क्षमा शक्तौ त्यागे श्लाघाविपर्ययः।
गुणा गुणानुबन्धित्वात्तस्य सप्रसवा इव ।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 11
हिन्दी-अनुवाद-जानते हुए भी चुप रहना, शक्ति होते हुए भी क्षमा करना, दान देकर भी आत्मप्रशंसा न करना आदि विरोधी गुण राजा दिलीप में सगे भाई की तरह रहते थे।
English Translation-King Dilipa used to remain silent even if he knew the things, he used to forgive even if he was powerful and he used to donate but never expected self-praise-so such contradictory qualities existed in him peacefully just like real brothers.

9. प्रजानां विनयाधानाद्रक्षणाद्भरणादपि।
स पिता पितरस्तासां केवलं जन्महेतवः।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 12
हिन्दी-अनुवाद-अपनी प्रजा को विनम्रता की शिक्षा देने से, उनकी रक्षा करने से तथा उनका पालन-पोषण करने से राजा दिलीप ही वास्तव में उनके पिता थे, उनके अपने पिता
तो केवल जन्म देने का कारण मात्र थे।
English-Translation–King Dilipa was the real father of his subjects by teaching them good-conduct (or politeness), by protecting them and by nourishing them up and their parents were parents by giving them birth only.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः

10.द्वेष्योऽपि संमतः शिष्टस्तस्यार्तस्य यथौषधम् ।
त्याज्यो दुष्टः प्रियोऽप्यासीदगुलीवोरगक्षता।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 13
हिन्दी-अनुवाद-सज्जन शत्रु होते हुए भी राजा दिलीप को वैसे ही प्रिय था जैसे रोगी की औषधि प्रिय होती है तथा दुष्ट प्रिय होते हुए भी वैसे ही त्याज्य था जैसे साँप से इसी हुई अंगुली।
English-Translation—He loved gentleman very much being enemy even just as the medicine is liked by the patient even if it is not sweet and the wicked being his relative even was to be abandoned for him like the finger bitten by the snake.

11. स वेलावप्रवलयां परिखीकृतसागराम् ।
अनन्यशासनममुर्वी शशासैकपुरीमिव ।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 14
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 4 प्रजानुरज्जको नृपः 15
हिन्दी-अनुवाद-उस राजा दिलीप ने समुद्र के तटरूपी परकोटे वाली तथा सागर रूपी चारदीवारी वाली, दूसरे राजा के शासन से रहित सम्पूर्ण पृथ्वी का शासन बिना किसी परिश्रम दे ऐसे किया जैसे कोई एक नगरी का शासन करता है।
English Translation-That King Dilipa alone ruled the whole-earth easily like a small city the earth which was having the bank of the ocean as its ramparts and the boundary wall as the ocean.

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NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम्

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Shemushi Sanskrit Class 9 Solutions Chapter 10 जटायोः शौर्यम्

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम्

अभ्यासः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां प्रश्नानामुत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत

(क) “जटायो! पश्य” इति का वदति?
उत्तर:
“जटायो! पश्य” इति सीता वदति।

(ख) जटायुः रावणं किं कथयति?
उत्तर:
जटायु रावणम् अकथयत्-“परदाराभिमर्शनात् नीचां मतिं निवर्तय। चीरः तत् न समाचरेत् यत् परः अस्य विगर्हयेत्।।”

(ग) क्रोधवशात् रावणः किं कर्तुम् उद्यतः अभवत्?
उत्तर:
क्रोधवशात् रावणः वामेनाङ्केन वैदेही संपरिष्वज्य तलेन आशु जटायुम् अभिजघान पात?

(घ) पतगेश्वरः रावणस्य कीदृशं चापं सशरं बभज?
उत्तर:
पतगेश्वरः रावणस्य मुक्तामणिविभूषितं सशरं चापं बभञ्ज।

(ङ) हताश्वो हतसारथिः रावणः कुत्र अपतत्?
उत्तर:
हताश्वो हतसारथिः रावणः भुवि अपतत्।

प्रश्न 2.
उदाहरणमनुसृत्य णिनि-प्रत्ययप्रयोगं कृत्वा पदानि रचयत यथा-
गुण + णिनि = गुणिन् (गुणी)
दान + णिनि = दानिन् (दानी)
उत्तर:
(क) कवच + णिनि = कवचिन् (कवची)
(ख) शर + णिनि = शरिन् (शरी)
(ग) कुशल + णिनि = कुशालिन् (कुशली)
(घ) धन + णिनि = धनिन् (धनी)
(ङ) दण्ड + णिनि = दण्डिन (दण्डी)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम्

प्रश्न 3.
रावणस्य जटायोश्च विशेषणानि सम्मिलितरूपेण लिखितानि तानि पृथक्-पृथक् कृत्वा लिखत-
युवा, सशरः, वृद्धः, हताश्वः, महाबलः, पतगसत्तमः, भग्नधन्वा, महागृध्रः, खगाधिपः, क्रोधमूर्छितः, पतगेश्वरः, सरथः, कवची, शरी।
रावणः – जटायः
युवा – वृद्धः
उत्तर:
(क) सशरः – (क) महाबलः
(ख) हताश्वः – (ख) पतगसत्तमः
(ग) भग्नधन्वा – (ग) महागृध्रः
(घ) क्रोधमूर्छितः – (घ) खगाधिपः
(ङ) सरथः – (ङ) पतगेश्वरः
(च) कवची – (छ) शरी

प्रश्न 4.
सन्धि/सन्धिविच्छेदं वा कुरुत यथा
च + आदाय = चादाय
उत्तर:
(क) हत + अश्वः = हताश्वः
(ख) तुण्डेन + अस्य = तुण्डेनास्य
(ग) बभञ्ज + अस्य = बभञ्जास्य
(घ) अङ्केन + आदाय = अङ्केनादाय
(ङ) खग + अधिपः = खगाधिपः

प्रश्न 5.
‘क’ स्तम्भे लिखितानां पदानां पर्यायाः ‘ख’ स्तम्भे लिखिताः। तान् यथा समयोजयत
‘क’ स्तम्भः – ‘ख’ स्तम्भः
(क) कवची – (1) अपतत्
(ख) आशु – (2) पक्षिश्रेष्ठः
(ग) बिरथः – (3) पृथिव्याम्
(घ) पपात – (4) कवचधारी
(ङ) भुवि – (5) शीघ्रम्
(च) पतगसत्तमः – (5) रथविहीनः
उत्तर:
(क) कवची – (1) कवचधारी
(ख) आशु – (2) शीघ्रम्
(ग) बिरथः – (3) रथविहीनः
(घ) पपात – (4) अपतत्
(ङ) भुवि – (5) पृथिव्याम्
(च) पतगसत्तमः – (5) पक्षिश्रेष्ठः

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम्

प्रश्न 6.
अधोलिखितानां पदानां/विलोमपदानि मञ्जूषायां दत्तेषु पदेषु चित्वा यथासमक्षं लिखत
मन्दम्, पुण्यकर्मणा, हसन्ती, अनार्य, अनतिक्रम्य, प्रदाय, देवेन्द्रेण, प्रशंसेत् दक्षिणेन, युवा।
उत्तर:
पदानि – विलोमशब्दाः
(क) विलपन्ती – हसन्ती
(ख) आर्य – अनार्य
(ग) राक्षसेन्द्रेण – देवेन्द्रेण
(घ) पापकर्मणा – पुण्यकर्मणा
(ङ) क्षिप्रम् – मन्दम्
(च) विगर्हयेत – प्रशंसेतु
(छ) वृद्धः – युवा
(ज) आदाय – प्रदाय
(झ) वामेन – दक्षिणेन
(ञ) अतिक्रम्य – अनतिक्रम्य

प्रश्न 7.
(क) अधोलिखितानि विशेषणपदानि प्रयुज्य संस्कृतवाक्यानि रचयत
उत्तर:
(i) शुभाम् = जटायुं रावणं शुभां गिरम् व्याजहार।
(ii) हतसारथिः = हतसारथिः रावणः भुवि अपतत्।
(iii) कवची = रावणः कवची आसीत्।
(iv) खगाधिपः = खगाधिपः जटायुः रावणस्य गात्रे व्रणान् अकरोत्।
(v) वामेन = रावणः वामेन अङ्केन वैदेहीम् अधारयत्।।

(ख) उदाहरणमनुसृत्य समस्तपदं रचयत-
उत्तर:
यथा-त्रयाणां लोकानां समाहारः = त्रिलोकी।
(i) पञ्चानां वटानां समाहारः = पञ्चवटी।
(ii) सप्तानां पदानां समाहारः = सप्तपदी।
(iii) अष्टानां भुजानां समाहारः = अष्टभुजी।
(iv) चतुर्णां मुखानां समाहारः = चतुर्मुखी।

Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् Summary Translation in Hindi and English

1. सा तदा करुणा वाचो विलपन्ती सुदुःखिता।
वनस्पतिगतं गृधं ददर्शायतलोचना।।

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम्

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 1

हिन्दी सरलार्थ-तब करुण वाणी में विलाप करती हुई, अत्यन्त दुःखी तथा विशाल नेत्रों वाली सीता ने विशाल वृक्ष पर स्थित जटायु को देखा।
Meaning in English-Then Sita, who was lamenting in pitiful words who was very sad and was having long and beautiful eyes, saw Jatayu sitting on a big tree.

2. जटायो पश्य मामार्य हियमाणामनाथवत्।
अनेन राक्षसेन्द्रेण करुणं पापकर्मणा।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 2 NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 3

हिन्दी सरलार्थ हे आर्य जटायु! दुष्कर्म करने वाले इस राक्षसराज रावण के द्वारा अनाथ की तरह ले जाई जाती हुई मुझे देखो।

Meaning in English-Oh gentleman Jatayu! See me being carried away forcibly like an orphan by Ravana-a king of demons who is engaged in doing evil deeds.

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम्

3. तं शब्दमवसुप्तस्तु जटायुरथ शुश्रुवे।
निरीक्ष्य रावणं क्षिप्रं वैदेहीं च ददर्श सः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 4

हिन्दी सरलार्थ-तब सोए हुए उस जटायु ने वह शब्द सुना तथा रावण को देखकर शीघ्र ही उसने सीता को देखा।

Meaning in English–Then that Jatayu, who was asleep, heard those words and having seen Ravana he quickly saw Sita.

4. ततः पर्वतशृङ्गाभस्तीक्ष्णतुण्डः खगोत्तमः।
वनस्पतिगतः श्रीमान्च्याजहार शुभां गिरम्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 5

हिन्दी सरलार्थ-तब पर्वत-शिखर के समान कान्ति वाले, तीक्ष्ण चोंच वाले, वृक्ष पर स्थित शोभायुक्त तथा श्रेष्ठ पक्षी उस जटायु ने सुन्दर वाणी में इस प्रकार कहा।
Meaning in English: Then attractive like the peak of a mountain and having sharp beak, that beautiful bird Jatayu who .. was sitting on the big tree spoke thus, in very fine words.

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम्

5. निवर्तय मतिं नीचां परदाराभिमर्शनात्
न तत्समाचरेद्धीरो यत्परोऽस्य विगर्हयेत्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 6

हिन्दी सरलार्थ-पराई स्त्री स्पर्श दोष से अपनी नीच बुद्धि (विचारधारा) को तुम हटा लो। बुद्धिमान् मनुष्य को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए जिससे अन्य लोग उसकी निन्दा करें।

Meaning in English-You should divert your mean thinking as that of touching another’s wife. A wise man should not behave in such a manner for which, he may be blamed by others.

6. वृद्धोऽहं त्वं युवा धन्वी संस्थः कवची शरी।
न चाप्यादाय कुशली वैदेहीं मे गमिष्यसि।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 7

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम्

हिन्दी सरलार्थ-मैं तो वृद्ध हूँ लेकिन तुम युवक हो, रथ सहित हो, कवचधारी तथा बाण धारण किए हो, फिर भी तुम सीता को लेकर कुशलतापूर्वक (सुरक्षित) यहाँ से नहीं जा सकोगे।

Meaning in English-I am old but you are young, archer, sitting on the chariot, having armour and arrows also, even then.. you will not be able to go from here safe taking Sita with you.

7. तस्य तीक्ष्णनखाभ्यां तु चरणाभ्यां महाबलः।
चकार बहुधा गात्रे व्रणान्पतगसत्तमः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 8 NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 9

हिन्दी सरलार्थ-तब उस उत्तम एवं अत्यन्त शक्तिशाली पक्षी ने अपने तीक्ष्ण नाखूनों तथा दोनों पैरों से रावण के शरीर पर अनेक प्रकार के प्रहारों से घाव कर दिए।

Meaning in English-Then that powerful and beautiful bird Jatayu attacked valiantly with his sharp nails and feet and made wounds on his body.

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम्

8. ततोऽस्य सशरं चापं मुक्तामणिविभूषितम्।
चरणाभ्यां महातेजा बभजास्य महद्धनुः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 10

हिन्दी सरलार्थ-तब अत्यन्त तेजस्वी उस जटायु ने मुक्तामणि से विभूषित तथा बाण सहित उसके चाप और विशाल धनुष को अपने दोनों पैरों से तोड़ दिया।

Meaning in English-Then that very glorious Jatayu, with his feet broke into pieces his very big bow alongwith the arrows, the bow which was decorated with precious pearls.

9. स भग्नधन्वा विरथो हताश्वो हतसारथिः।
अङ्केनादाय वैदेहीं पपात भुवि रावणः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 11

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम्

हिन्दी सरलार्थ-तब रथहीन वह रावण जिसका धनुष टूट गया था तथा घोड़े एवं सारथी मारे जा चुके थे, सीता जी को गोद में लेकर पृथ्वी पर गिर पड़ा।

Meaning in English-Then that Ravana, whose bow was broken, devoid of chariot and whose charioteer and horses were killed, took Sita in his lap and fell down on the earth.

10. सपरिष्वज्य वैदेही वामेनाङ्केन रावणः।
तलेनाभिजघानाशु जटायुं क्रोधमूर्छितः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 12

हिन्दी सरलार्थ-तब अंत्यन्त ऋद्ध उस रावण ने सीता को बाईं गोंद में धारण करके तलवार की मूठ से शीघ्र ही जटायु पर खतरनाक आघात किया।
Meaning in English-Ravana kept Sita at his left side and in a fit of anger, blew hard on Jatayu with the edge of his sword.

11. जटायुस्तमतिक्रम्य तुण्डेनास्य खगाधिपः।
वामबाहून्दश तदा व्यपाहरदरिन्दमः।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम् 13

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 10 जटायोः शौर्यम्

हिन्दी सरलार्थ-तब उस पक्षीराज जटायु ने शत्रुनाशी अपनी चोंच से झपट कर आघात किया और रावण की बाँयी दशों भुआजों को नष्ट कर लिया।

Meaning in English-Then the king of birds, Jatayu swooped down and pierced the ten left arms of Ravana with his enemy killer beak.

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NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

Bhaswati Class 12 Solutions Chapter 3 मातुराञा गरीयसी

अभ्यासः

एकपदेन उत्तरत
प्रश्न 1.
(क) एकशरीरसंक्षिप्ता का रक्षितव्या?
उत्तर
पृथिवी।

(ख) शरीरे कः प्रहरति?
उत्तर
अरिः

(ग) स्वजनः कुत्र प्रहरति?
उत्तर
हृदये।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी

(घ) कैकेय्याः भर्ता केन समः आसीत् ?
उत्तर
शक्रेण।

(ङ) कः मातुः परिवादं श्रोतुं न इच्छति?
उत्तर
रामः

(च) केन लोकं युवतिरहितं कर्तुं निश्चयः कृतः?
उत्तर
लक्ष्मणेन।

(छ) प्रतिमा नाटकस्य रचयिता कः?
उत्तर
महाकविर्भासः।

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत

(क) रामस्य अभिषेकः कथं निवृत्तः?
उत्तर
कैकेय्याः वचनात् रामस्य अभिषेकः निवृत्तः।

(ख) दशरथस्य मोहं श्रुत्वा लक्ष्मणेन रोषेण किम् उक्तम् ?
उत्तर
दशरथस्य मोहं श्रुत्वा लक्ष्मणेन उक्तम्-धुनः स्पृश मा दयाम्

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी

(ग) लक्ष्मणेन किंकर्तुं निश्चयः कृतः?
उत्तर
लक्ष्मणेन लोकं युवतिरहितं कर्तुं निश्चयः कृतः।

(घ) रामेण त्रीणि पातकानि कानि उक्तानि?
उत्तर
ताते धनुः मुञ्चनम्, मातरि च शरम्, अनुजं भरतं हननम् च इति रामेण त्रीणि पातकानि उक्तानि।

(ङ) रामः लक्ष्मणस्य रोषं कथं प्रतिपादयति?
उत्तर
रामः लक्ष्मणस्य रोष प्रतिपादयितुं तातस्य, मातुः भरतस्य. वापि हन्तुं कथयति।

प्रश्न 3.
रेखाङ्कितानि पदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) मया एकाकिना गन्तव्यम्।
उत्तर
केन एकाकिना गन्तव्यम् ?

(ख) दोषेषु बाह्मम् अनुजं भरतं हनानि।
उत्तर
केषु बाह्मम् अनुजं भरतं हनानि?

(ग) राज्ञा हस्तेन एव विसर्जितः।
उत्तर
केन हस्तेन एव विसर्जितः?

(घ) पार्थिवस्य वनगमननिवृत्तिः भविष्यति।
उत्तर
कस्य वनगमननिवृत्तिः भविष्यति?

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी

(ङ) शरीरे अरिः प्रहरति।
उत्तर
कुत्र अरिः प्रहरति?

प्रश्न 4.
अधोलिखितेषु संवादेषु कः कं प्रति कथयति इति लिखत
उत्तर
संवादः – कः कथयति? – के प्रति कथयति.
(क) एकशरीर संक्षिप्ता पृथिवी रक्षितव्या। रामः। – काञ्चुकीयं – प्रति।
(ख) अलमुपहतासु स्त्रीबुद्धिषु स्वमार्जवमुप निक्षेप्तुम् । – काञ्चुकीयः – रामं प्रति।
(ग) नवनृपतिविमर्शे नास्ति शङ्का प्रजानाम्। – रामः । – काञ्चुकीयं प्रति
(घ) रोदितव्ये काले सौमित्रिणा धनुर्गृहीतम्। – सीता। – राम प्रति।
(ड) न शक्नोमि रोषं धारयितुम्। – लक्ष्मणः।। – रामं प्रति।
(च) एनामुद्दिश्य देवतानां प्रणामः क्रियते। – सीता। – रामं प्रति।
(छ) यत्कृते महति क्लेशे राज्ये मे न मनोरथः। – लक्ष्मणः। – रामं प्रति।

प्रश्न 5.
पाठमाश्रित्य ‘रामस्य’ ‘लक्ष्मणस्य’ च चारित्रिक-वैशिष्ट्यं हिन्दी/अंग्रेजी-संस्कृत भाषया लिखत।
उत्तर
रामस्य चारित्रिक वैशिष्ट्यम्
रामः भातृभक्तः पितृभक्तः चास्ति। सः स्वानुजेषु स्निह्यति। कैकेयी स्वपुत्राय भरताय राज्यं वाञ्छति, रामाय च वनवासम्-इति ज्ञात्वा अपि रामः तस्याः निन्दां श्रोतुं न तत्परः। एवं तां प्रति तस्य अनन्या भक्तिभावना दृश्यते । वनगमनस्य पितरादेशं सः सहर्ष स्वीकरोति। अनेन तस्य पितृभक्तिः स्पष्टरूपेण दरिदृश्यते। भरते लक्ष्मणे च तस्य स्नेहभावना पदे पदे दृश्यते। आभिरेव विशेषताभिः सः नाटकस्य नायकपदम् अलंकरोति।

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राम के चरित्र की विशेषताएँ

पाठ के आधार पर श्री राम के चरित्र में मातृ-पितृ भक्ति, बड़ों का सम्मान, अपनी प्रजा तथा छोटे भाइयों के प्रति स्नेह की भावना आदि गुण स्पष्ट दिखाई देते हैं। जब काञ्चुकीय उनकी राज्यच्युति तथा चौदह वर्षों के वनवास का कारण माता कैकेयी को बताता है तो वह इसमें माता की दुर्भावना न मानकर किसी अच्छे परिणाम के बारे में ही कहते हैं। वह माता के बारे में कुछ भी अपशब्द सुनने को तैयार नहीं होते।

इस प्रकार माता के प्रति उनकी अनन्य भक्ति भावना लक्षित होते है। पिता के द्वारा दी गई वनगमन की आज्ञा को वे सिर झुकाकर स्वीकार करते हैं, इससे पिता के प्रति उनकी अद्भुत आदरभावना भी प्रकट होती है। कैकेयी के द्वारा भरत । के लिए राज्य माँगने पर वे उससे तनिक भी ईर्ष्या नहीं करते। लक्ष्मण के प्रति उनका अथाह स्नेह भी झलकता है। यहाँ वे लक्ष्मण से सीता को वनगमन से रोकने का आग्रह करते हैं-उनकी यही चारित्रिक विशेषताएँ उन्हें नाटक का नायक सिद्ध करती हैं।

Characteristics of Rama:

According to this lesson Rama is depicted as the devotee of his parents. He respects his elders and loves his youngers and his subjects also. When Kaikeyi is declared to be the cause of the loss of his kingdom, he is not at all prepared to listen against his mother Kaikeyi. This shows his feeling of devotion towards his step mother even. When his father Dashratha asks him to go the forest he happily accepts his order.

Thus he has full faith in his father. He has attachment towards his younger brothers. He is not at all jealous when  Kaikeyi demands for kingdom for his son Bharata. He loves Lakshmana very much. He asks Lakshmana, to prevent Sita from going to the forest-all of these characteristics make him the hero of the play.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी

लक्ष्मणस्य चारित्रिक वैशिष्ट्यम्

राम इव लक्ष्मणः अपि पितृभक्तःअस्ति किन्तु तस्मिन् विनम्रतायाः अभावः दृश्यते । सः . अतीव क्रोधी उद्धतः चास्ति । भरताय राज्यप्राप्तिं विज्ञाय सः कैकेयी प्रति अपशब्दान् उच्चारयति ।

सः अखिलं लोकं युवतीहीनं कर्तुं वाञ्छति । सः राममपि धनुः धारयितुं कथयति । एवं सः अतीव उद्धतः अस्ति किन्तु सः रामस्य उपासकः भक्तः चास्ति। लक्ष्मण के चरित्र की विशेषताएँ राम की तरह लक्ष्मण भी पितृभक्त तथा बड़े भाई का सम्मान करने वाला है किन्तु वह शीघ्र क्रोधयुक्त हो जाता है। कैकेयी के द्वारा भरत, के लिए राज्य माँग लेने पर. वह सारे विश्व को युवतीहीन कर देना चाहता है। राम का वनवास सुनकर जब दशरथ मूर्च्छित हो जाते हैं तो वह शीघ्र राम से धनुष उठाने को कहता है। इस प्रकार वह अत्यन्त उद्धत स्वभाव का है लेकिन राम का वह सच्चा उपासक तथा भक्त है।

Characteristics of Lakshmana

Like Rama, Lakshmana also is a true devotee of his elders and his parents. But he becomes angry very soon. When Kaikeyi demands kingdom for his son Bharata and asks Rama to go to the forest for fourteen years, he becomes extremely angry. He wants to destroy all the ladies of the world. He asks Rama to uphold the bow. So, he is extremely arrogant but he is the real devotee of Rama.

प्रश्न 6.
पाठात् चित्वा अव्ययपदानि लिखत-उदाहरणानि ननु, तत्र……….।
उत्तर
अथ, अत्र, च, खलु, श्रोतुम्, पुरतः, कर्तुम्, इदानीम् आदि ।

प्रश्न 7.
अधोलिखितेषु पदेषु प्रकृति-प्रत्ययौ पृथक् कृत्वा लिखत
उत्तर
(क) परित्रातव्य = त्रा धातु + तव्यत् प्रत्यय।
(ख) वक्तव्यम् = वच् धातु + तव्यत् प्रत्यय।
(ग) रक्षितव्या = रक्षु धातु + तव्यत् प्रत्यय।।
(घ) भवितव्यम् = भू धातु + तव्यत् प्रत्यय।
(ड) पुत्रवती = पुत्र शब्द + वतुप् प्रत्यय।
(च) श्रोतुम् = श्रु धातु + तुमुन् प्रत्यय ।
(छ) विसर्जितः = सृज् धातु + क्त प्रत्यय।.
(ज) गतः = गम् धातु + क्त प्रत्यय ।
(झ) क्षोभितः = क्षुभ् धातु + क्त प्रत्यय।
(ञ) धारयितुम् = धृ धातु + तुमुन् प्रत्यय ।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी

प्रश्न 8.
अधोलिखितानां पदानां संस्कृतवाक्येषु प्रयोगः करणीयः
उत्तर
(क) शरीरे = आत्मा शरीरे वसति ।
(ख) प्रहरति = अरिः शरीरे प्रहरति ।
(ग) भर्ता = ईश्वरः संसारस्य भर्ता अस्ति।
(घ) अभिषेकः = देवालये ईश्वरस्य अभिषेकः क्रियते।।
(ड) पार्थिवस्य = इयं पार्थिवस्य प्रतिमा अस्ति।
(च) प्रजानाम् = राजा प्रजानां पालकः भवति।
(छ) हस्तेन = सः हस्तेन तर्जयति।
(ज) धैर्यसागरः = लक्ष्मणः धैर्यसागरः कथितः।
(झ) पश्यामि = अहमेकं सिंहं पश्यामि ।
(ञ) करेणुः = करेणुः पङ्के क्रीडति।
(ट) गन्तव्यम् = अधुना त्वंया न गन्तव्यम् ।

प्रश्न 9.
अधोलिखितानां स्वभाषया भावार्थं लिखत

(क) शरीरेऽरिः प्रहरति हृदये स्वजनस्तथा ।
उत्तर
शत्रु के कटु शब्दों का कष्ट बाह्य अंगों पर पड़ता है किन्तु अपने सगे सम्बन्धियों की बातों का कष्ट हृदय पर पड़ता है जो अत्यन्त दुःखदायक होता है। अंगों के घाव तो धीरे-धीरे भर जाते हैं किन्तु हृदय के घाव आसानी से नहीं भरते। वे मनुष्य को जीवन-भर कचोटते, कष्ट पहुँचाते रहते हैं-यही भाव अभिव्यक्त किया गया है. यहाँ।

(ख) नवनृपतिविमर्श नास्ति शङ्का प्रजानाम्।
उत्तर
जब काञ्चुकीय श्रीराम से कहता है कि कैकेयी के कहने से आपका अभिषेक रुक गया है तब श्री राम इसमें अनेक अच्छाइयाँ. या गुण बताते हुए कहते हैं कि राज्याभिषेक न होने का एक लाभ यह होगा कि प्रजा के मन में ऐसी कोई चिन्ता नहीं रहेगी कि नया राजा कैसा होगा क्योंकि पुराने राजा के स्वभाव आदि से सारी प्रजा परिचित होगी। अतः इन पंक्तियों का भाव यही है कि पुराना राजा बने रहने से प्रजा की चिन्ता अब बिलकुल समाप्त हो गई।

(ग) यदि न सहसे राज्ञो मोहं धनुः स्पृश मा दयाम्।
उत्तर
प्रस्तुत पंक्तियों में लक्ष्मण का कैकेयी के प्रति रोष प्रकट किया गया है। कैकेयी के दुर्वचनों से ही राजा दशरथ मूर्छित हुए हैं जो किसी को भी अच्छा नहीं लग रहा । अतः लक्ष्मण कहते है कि यदि आप राजा दशरथ की मूर्छा की बात को सहन नहीं कर पा रहे तो इसका प्रतिकार प्रकट करने के लिए धनुष धारण क्यों नहीं करते, क्यों आप शान्तिपूर्वक बैठे हो। कैकेयी के प्रति दया भावना को त्यागकर आपको शीघ्र धनुष धारण करना चाहिए- यही भाव अभिव्यक्त करना चाहता है कवि यहाँ अर्थात् कैकेयी के प्रति केवल शब्दों से नहीं अपितु धनुष उठाकर, प्रहार करके आपको अपना रोष तथा राजा की मूर्छा को न सहन कर पाने की भावना प्रकट करनी चाहिए।

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी

(घ) यत्कृते महति क्लेशे राज्ये मे न मनोरथः।
उत्तर
प्रस्तुत पंक्तियों में जब राम लक्ष्मण को यह समझाते हैं कि तुम क्यों इतना क्रोध कर रहे हो, चाहे भरत राजा बनें या मैं-इसमें कोई अन्तर नहीं, तब लक्ष्मण श्री राम से कहते हैं कि जिस राज्य के कारण इतना भयंकर दुःख उत्पन्न हुआ है उस राज्य के विषय में मुझे कोई अभिलाषा नहीं है किन्तु मुझे इस बात से दुःख है कि आपको चौदह वर्ष का वनवास का कष्ट भी तो सहन करना होगा। अर्थात् लक्ष्मण को श्रीराम के वनवास का कष्ट अधिक पीड़ा पहुँचा रहा है, राजा कोई भी बन जाए उन्हें अभिलाषा नहीं है।

प्रश्न 10.
अधोलिखितेषु सन्धिच्छेदः कार्यः
उत्तर-
1. रक्षितव्येति = रक्षितव्या + इति।
2. गुणेनात्र = गुणेन + अत्र।
3. शरीरेऽरिः = शरीरे + अरिः।
4. स्वजनस्तया = स्वजनः + तथा।।
5. येनाकार्यम् = येन + अकार्यम् ।
6. खल्वस्मत् = खलु + अस्मत्।
7. किमप्यामितम् = किम् + अपि + अभिमतम् ।
8. हस्तेनैव = हस्तेन + एव।
9. दग्धुकामेव = दग्धुकामा + इव.

Bhaswati Class 12 Solutions Chapter 3 मातुराञा गरीयसी Summary Translation in Hindi and English

संकेत-काञ्चुकीयः-परित्रायतां………….. नास्ति प्रतीकारः ।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी 1
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी 2

हिन्दी सरलार्थ-(प्रवेश करके)
काञ्चुकीय-कुमार, बचाइए, बचाइए।
राम-आर्य: किसे बचाना है?
काञ्चुकीय-महाराज को।
राम-महाराज को? आर्य, तो यह कहो कि एक शरीर में स्थित समस्त पृथ्वी की रक्षा . करो। अच्छा तो यह विपत्ति कहाँ से आई?
काञ्चुकीय-अपने ही व्यक्ति से।
राम-क्या अपने ही व्यक्ति से । हाय। तब तो इसका निवारण (दूर करने का उपाय) । भी नहीं हो सकता।

Meaning in English-(Having entered)
Kanchukiya-Oh! Prince! Please protect.
Ram-Oh Gentleman! Who is to be protected?
Kanchukaye-Our great king.
Ram-Is the great king (to be protected)? Then say, protect the whole earth, existing in one body (that is the king). Then tell, from whom did this problem take place?

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी

Kenchukiye-From our own person. Oh! Then it cannot be overcome.

1. शरीरेऽरिः प्रहरति हृदये स्वजनस्तथा।
कस्य स्वजनशब्दो मे लज्जामुत्पादयिष्यति।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी 3
हिन्दी सरलार्थ-शत्रु शरीर पर प्रहार करता है किन्तु स्वजन (अपने लोग) हृदय – पर चोट करते हैं। किसके लिए प्रयुक्त स्वजन शब्द मुझे लज्जित कराएगा?
Meaning in English-The enemy attacks on the external parts of, the body while the near relatives attack on the heart. The word ‘one’s own relatives or people’ is used for whom and will cause shame for …… me(I do not know)?

संकेत-काञ्चुकीयः-तत्रभवत्याः…………………….. श्रूयताम्
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी 4

हिन्दी-अनुवाद – काञ्चुकीय-आदरणीय कैकेयी से यह आपत्ति आई।
राम-क्या माताजी से? तब तो इसका परिणाम अवश्य ही अच्छा होगा।
काञ्चुकीय – कैसे?
राज – सुनो
English-Translation
Kanchukiya—This problem has come from Kaikeyi’s side.
Ram-What, from mother’s side? Then it will definitely have a good result.
Kanchukiya-How?
Ram-Listen.

2.यस्याः शक्रसमो भर्ता मया पुत्रवती च या।
फले कस्मिन् स्पृहा तस्या येनाकार्यं करिष्यति।।
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी 5
हिन्दी सरलार्थ-जिसका पति इन्द्र क समान है और मैं जिसका पुत्र हूँ उसे किस . फल की अभिलाषा हो सकती है, जिसके लिए वह ऐसा बुरा काम करेंगी?
Meaning in English-Whose husband is like Indra and who has the son like me, to fufifil which desire she will do such an evil deed?

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी

संकेत-काञ्चुकीयः-कुमार! अलमुपहतासु ……………………… श्रूयताम्,
NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी 6

हिन्दी-अनुवाद – काञ्चुकीय-कुमार! स्वभाव से बुराई की ओर जाने वाली स्त्री बुद्धियों पर अपने सरल स्वभाव का आरोपण मत करो। उसी के कहने से आपका अभिषेक होते होते रुक गया है।
राम-आर्य! इसमें निश्चित ही बहुत-सी भलाइयाँ हैं।
काञ्चुकीय – कैसे?
राम – सुनो

English-Translation
Kanchukiya-Oh prince! Don’t think of simplicity about the mentality of ladies who have bad-intention. Your corontion has been stopped by her words only.
Ram-Oh gentleman! There are definitely good things in it
Kanchukiya-How?
Ram-Listen

3. वनगमननिवृत्तिः पार्थिवस्यैव ताव
न्मम पितृपरवत्ता बालभावः स एव ।
नवनृपतिविमर्श नास्ति शङ्का प्रजाना
मथ च न परिभोगैर्वञ्चिता भ्रातरो मे।।
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हिन्दी सरलार्थ-(प्रथम) तो राजा का वन जाना रुक गया, दूसरे-मैं पिता के अधीन. ही रह गया, तीसरा-मुझे बचपन का आनन्द लेने का अवसर मिल गया, चौथा नया राजा कैसा होगा-प्रजा को ऐसी चिन्ता भी नहीं होगी और अन्तिम लाभ यह है कि मेरे भाई राजा के भोगों से भी वचिंत नहीं हुए।
Meaning in English-The first benefit of it is that the king will not go to the forest now, secondly I am still under the protection of respected father, thirdly I can still enjoy the childhood, fourthly the people will not be worried about the nature of the new king and lastly my dear brothers can still enjoy the pleasures of the kingdom.

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संकेतं-काञ्चुकीयः-अथ च …………………..कुतः
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हिन्दी-अनुवाद – काञ्चुकीय-उसने जो बिना बुलाए आकर राजा से यह कहा कि भरत का राजपद पर अभिषेक करो, क्या यह लोभ के बिना है? … राम-आर्य, आप हम पर अधिक स्नेह रखने के कारण वास्तविकता को नहीं देख पा रहे हैं। क्योंकि-
English Translation
Kanchukiya-She came here without being called and said that Bharata may be coronated as the king-does her this saying not contain greed?
Ram-Oh gentleman! You do not see reality by having too much of affection in me. Because

4. शल्के विपणितं राज्यं पत्रार्थे यदि याच्यते।
तस्या लोभोऽत्र नास्माक भ्रातृराज्यापहारिणाम्।।
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हिन्दी सरलार्थ-विवाह-शुल्क में पुत्र के लिए प्रतिज्ञा किए हुए राज्य को वह माँग रही है-इसमें उसका लोभ है, किन्तु क्या भाई के राज्य को छीनने वाले हम लोगों की बुरी भावना . लोभ नहीं है?
Meaning in English-She is demanding for his son the kingdom which was promised at the time of marriage–this shows her greed but we want to snatch the kingdom of our brother–does this ill-feeling not show greed?

संकेत-काञ्चुकीयः-अथ …………….. ततस्तदानीम,
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हिन्दी-अनुवाद
काञ्चुकीय-तब फिर…..!
राम-इससे अधिक मैं माताजी की निन्दा सुनना नहीं चाहता। महाराज का कुशल समाचार बताइए।
काञ्चुकीय-तब, उस समय,
English-Translation Kanchukiya Then…..
Ram-I do not want to hear mother’s criticism anymore. Tell me the well-being of the great-king.
Kanchukiya— Then, at that time.

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5. शोकादवचनाद् राज्ञा हस्तेनैव विसर्जितः।
किमप्यभिमतं मन्ये मोहं च नृपतिर्गतः।।
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हिन्दी सरलार्थ-शोक के कारण महाराज कुछ बोल न सके, तब उन्होंने हाथ के इशारे से मुझे जाने को कहा। इससे मैं समझता हूँ कि (आपके वियोग को सहन न कर पाने से) राजा किसी अभीष्ट मूर्छा को प्राप्त हो गए।
Meaning in English-Being grieved, the king could not speak and; by waving his hand he asked me to go. By us I think that the king willingly fainted due to the sorrow of your separation.

संकेत-रामः- कथं मोहमुपगतः।………….विलोक्य

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हिन्दी-अनुवाद राम-क्या, मूर्छित हो गए।
क्या! क्या! मूर्छित हो गए?
यदि राजा का मूर्छित होना नहीं सह सकते, तो धनुष उठाओ दया छोड़ो।
राम-(सुनकर, सामने देखकर)
English-Translation
Ram-What, he became senseless?
(Behind the curtain)
What, What, he lost the senses?
If you cannot hear the news that he became senseless, then hold the bow,give up mercy.
Ram-(On hearing, looking in front.)

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6. अक्षोभ्यः क्षोभितः केन लक्ष्मणो धैर्यसागरः।
येन रुष्टेन पश्यामि शताकीर्णमिवाग्रतः।। (तः प्रविशति लक्ष्मणः)
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हिन्दी सरलार्थ-क्षुब्ध न होने वाले धैर्य के सागर लक्ष्मण को किसने उत्तेजित कर दिया? क्रुद्ध हुआ वह ऐसा लगता है कि जैसे मेरे आगे सैंकड़ों वीर हों। (तब हाथ में धनुष-बाण लिए हुए लक्ष्मण का प्रवेश)
Meaning in English-Who has irritated Lakshmana who is the ocean of patience and who never gets irritated? Being angry he alone appears to be hundred of warriors standing in front of me… (Then enters Lakshmana taking bow and arrow in his hand.)

7. लक्ष्मणः-(सक्रोधम्) कथं कथं मोहमुपगत इति।
यदि न सहसे राज्ञो मोहं धनुः स्पृश मा दयां
स्वजननिभृतः सर्वोप्येवं मूदुः परिभूयते।
अथ न रुचितं मुञ्च त्वं मामहं कृतनिश्चयो
युवतिरहितं लोकं कर्तुं यतश्छलिता क्यम् ।।
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हिन्दी सरलार्थ लक्ष्मण-(क्रोध से) क्यों, क्यों मूर्छित हो गए? ” यदि महाराज का मूर्छित होना नहीं सह सकते तो धनुष उठाओ, दया मत करो। स्वजनों के कार्यों पर चुपचाप विनम्र बने रहने वाले कोमल स्वभाव वाले पुरुषों का इसी प्रकार तिरस्कार होता है किन्तु यदि आपको धनुष उठाने की बात पसंद न हो तो मुझे आज्ञा दीजिए, मैंने इस संसार को युवति-रहित करने का निश्चय किया है, क्योंकि एक युवति ने हमें छल लिया है।

Meaning in English-
Lakshmana (Angrily)-Why, why is he senseless?
” If you cannot bear the state of being senselessness of the great king, : then hold the bow and don’t show mercy: The soft hearted people who tolerate the deeds of their relatives are insulted in this very way but if .you do not like the idea of upholding the bow, then please allow me to do so. I have firmly decided to make this world free from ladies because one lady has deceived us.

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संकेत-सीता-आर्यपुत्र! ……………….नाम
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हिन्दी-अनुवाद सीता-आर्यपुत्र! रोने के समय लक्ष्मण ने धनुष उठाया है। निश्चय ही इसका प्रयास आश्चर्यजनक है।
राम-लक्ष्मण! यह क्या है?
लक्ष्मण-क्या है? कैसे?
English-Translation
Sita-Dear husband! Lakshmana. took the bow at the time of :- weeping: His effort is really surprising.
Rama-Oh Lakshmana! What is this?
Lakshmana-What is this why?

8. क्रमप्राप्ते हृते राज्ये भुवि शोच्यासने नपे।
इदानीमपि सन्देहः किं क्षमा निर्मनस्विता।।
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हिन्दी सरलार्थ-क्रम-परम्परा से मिलने वाले राज्य के छीन लिए जाने पर तथा महाराज के शोचनीय स्थिति में पृथ्वी पर लेटने पर, अब भी आपको संदेह क्यों है? क्या यह क्षमा है या आत्माभिमानशून्यता?
Meaning in English-When, the kingdom which is achieved according to seniority is snatched away and the great king is lying on the earth in a critical state why are you still doubtful? Is it forbearance or absence of self-respect?

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9. रामः-सुमित्रामातः। अस्मद्राज्यभ्रंशो भवत उद्योगं जनयति। आः अण्डितः खलु भवान्।।
भरतो वा भवेद् राजा वयं वा ननु तत् समम् ।
यदि तेऽस्ति धनुश्श्लाघा सा राजा परिपाल्यतम् ।।
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हिन्दी सरलार्थ-राम-लक्ष्मण! हमारा राज्य से हीन होना तुम्हें इतना भड़का रहा है। ओह तुम निश्चय ही विवेक शून्य हो गए हो। चाहे भरत राजा हो अथवा मैं, तुम्हारे लिए . दोनों समान है। यदि तुम्हें अपनी धनुर्विधा पर गर्व है तो उस नए राजा भरत की रक्षा करो।
Meaning in English-Oh Lakshmana! You are so aggressive by the news of our loss of kingdom! Oh! You have really lost your wisdom. Whether Bharata becomes the king or I may be the king both are same for you. If you are proud of your archery then protect the new king Bharata.

संकेत-लक्ष्मणः-न शक्नोमि रोषं धारयितुम् । भवतु भवतु गच्छामस्तावत्। (प्रस्थितः)

10. रामः-त्रैलोक्यं दग्धुकामेव ललाटपुटसंस्थिता।
भृकुटिर्लक्ष्मणस्यैषा नियतीव व्यवस्थिता ।।
सुमित्रामातः। इतस्तावत्।
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हिन्दी सरलार्थ
लक्ष्मण-मैं क्रोध को नहीं रोक सकता। अच्छा मैं चलता हूँ। (प्रस्थान)
राम-संसार को भस्म करना चाहती हुई सी लक्ष्मण के मस्तक पर स्थित ये टेढ़ी भौंहे भाग्य के समान निश्चय किए हुए हैं। लक्ष्मण! इधर तो आओ।
Meaning in English
Lakshmana-I cannot control my anger: I am going now: (Goes)
Rama—These crooked eyebrows on the forehead of Lakshmana which seem to destroy the world are firm like destiny.
Oh Lakshmana! Come here.

संकेत-लक्ष्मणः-आर्य! अयमस्मि। .
रामः-भवतः स्थैर्यमुत्पादयता मयैवमभिहितम् । उच्यतामिदानीम् ।

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11. ताते.धनुर्नमयि सत्यमवेक्षमाणे
मुञ्चानि मातरि शरं स्वधनं हरन्त्याम् ।
दोषेषु बाह्यमनुजं भरतं हनानि
किं रोषणाय रुचिरं त्रिषु पातकेषु।।
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हिन्दी सरलार्थ लक्ष्मण-आर्य, मैं उपस्थित हूँ।
राम-तुम्हारा क्रोध शान्त करने के लिए मैंने ऐसा कह दिया। अब तुम्हीं बताओं। क्या मैं सत्य का पालन करने वाले पिता के विरुद्ध धनुष उठाऊँ? या राज्य को लेने वाली माता पर बाण चलाऊँ? या निर्दोष प्रिय भाई भरत का वंध करूँ? इन तीनों पापों में से कौन सा पाप ‘तुम्हारे क्रोध को शान्त करने के लिए उचित है? (किससे तुम्हारा क्रोध शान्त हो सकता है?)
Meaning in English
Lakshmana-Sir, I have come here.
Rama-I have said so just to pacify your anger. Now you tell May I hold the bow against father who always follows truth? Or I may throw arrow towards mother Kaikeyi who wants kingdom or I may kill my younger brother Bharata who has not committed any sin? Of these three sins, which sin can pacify your anger?

संकेत-लक्ष्मणः-(सवाष्पम्) हा धिक् ! अस्मानविज्ञायोपालभसे।

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12. यत्कृते महति क्लेशे राज्ये मे न मनोरथः।
वर्षाणि किल वस्तव्यं चर्तुदश वने त्वया।। 

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हिन्दी सरलार्थ
लक्ष्मण-(आँसू भरकर) हाय! बड़े कष्ट की बात है? आप मेरे अभिप्राय को न समझकर मुझे उलाहना दे रहे हैं। जिस राज्य के कारण भयंकर दुःख उत्पन्न हुआ ऐसे राज्य की प्राप्ति में मेरी कोई अभिलाषा नहीं है। (यह मैं इसलिए कह रहा हूँ। कि आपको चौदह वर्षों तक वन में ही रहना होमा)…

Meaning in English-
Lakshmana-(With tears) Oh! It is very sad that you are taunting me without understanding my intention.
I am not at all interested in obtaining that kingdom which created lot of sorrow. I am saying so because you will have to stay in the forest for fairteen years now.

वन-रामः-अत्र मोहमुपगतस्तत्रभवान् । हन्त! निवेदितमप्रभुत्वम् । मैथिलि!

13. मलार्थेऽनया दत्तान् वल्कलास्तावदानय।
करम्यन्यैर्नृपर्धर्म नैवाप्तं नोपपादितम् ।।

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हिन्दी सरलार्थ
राम-क्या इसी कारण पिताजी मूर्छित हो गए? बड़े दुःख की बात है कि उन्होंने अपनी अधीरता प्रकट कर दी। हे सीता!
इसके द्वारा दिए गए वल्कल वस्त्रों को मंगल कार्य के सम्पादन के लिए ले आओ। मैं अब इस अवस्था में उस धर्म का पालन करूँगा जिसका पालन अन्य राजाओं के द्वारा नहीं किया गया।

Meaning in English
Rama-Did father become senseless due to this very reason only? Oh! It is very sad that he showed his intolerance. Oh Sita! Please bring the clothes of bark of trees which were given by her to fulfill this sacred deed. I will follow that righteous path in this small age now, which was not followed by other kings even.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी

संकेत-सीता-गृहात्वार्यपुत्रः।………… वारयितुमत्रभवतीम्।
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हिन्दी सरलार्थ सीता-आर्यपुत्र, लीजिए। राम-सीता! क्या निश्चय किया? सीता-मैं तो आपकी सहधर्मचारिणी हूँ राम–मुझे तो अकेले ही वन में जाना है सीता-इसीलिए तो मैं आपके साथ चल रही हूँ। राम-वहाँ तो वन में रहना होगा। सीता-वह तो मेरे लिए महल होगा। … राम-सास-ससुर की सेवा भी तुम्हें करनी चाहिए। सीता-इसके लिए मैं देवताओं का प्रणाम करती हूँ। राम-लक्ष्मण ! इसे रोको। लक्ष्मण-आर्य! ऐसे शुभ अवसर पर आदरणीया को रोकने का साहस मुझमें नहीं है।

Meaning in English
Sita-Please take my dear husband.
Rama-Oh Sita! What have you decided?
Sita-lamyour ideal-wife.
Rama-I have to go alone to the forest.
Sita-That is why, I am going with you.
Rama-We will have to stay in the forest there.
Sita-That will be a palace for me.
Rama-It is your duty to serve your mother in law and father in law.
Sita-I bow to the Gods in.this respect (to excuse me)
Rama-Oh Lakshmana! Prevent her from going with us.
Lakshmana-Respected brother! I cannot prevent her from going ‘ at this good moment.

NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit Bhaswati Chapter 3 मातुराञा गरीयसी

हो। कैकेयी के प्रति दया भावना को त्यागकर आपको शीघ्र धनुष धारण करना चाहिए- यही भाव अभिव्यक्त करना चाहता है कवि यहाँ अर्थात् कैकेयी के प्रति केवल शब्दों से नहीं अपितु धनुष उठाकर, प्रहार करके आपको अपना रोष तथा राजा की मूर्छा को न सहन कर पाने की भावना प्रकट करनी चाहिए।

 

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NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

Shemushi Sanskrit Class 9 Solutions Chapter 9 सिकतासेतुः

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः

अभ्यासः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां प्रश्नानामुत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत
(क) अनधीतः तपोदत्तः कैः गर्हितोऽभवत्?
उत्तर:
अनधीतः तपोदत्तः सर्वैः कुटुम्बिभिः मित्रैः ज्ञातिजनैश्च गर्हितः अभवत्।

(ख) तपोदत्तः केन प्रकारेण विद्यामवाप्तुं प्रवृत्तोऽभवत्?
उत्तर:
तपोदत्तः तपश्चर्यया विद्यां प्राप्तुं प्रवृत्तोऽभवत्।

(ग) तपोदत्तः पुरुषस्य कां चेष्टां दृष्ट्वा अहसत्?
उत्तर:
पुरुषमेकं सिकताभि सेतुनिर्माणप्रयासं कुर्वाणं दृष्ट्वा अहसत्।

(घ) तपोमात्रेण विद्यां प्राप्तुं तस्य प्रयासः कीदृशः कथितः?
उत्तर:
तपोमात्रेण विद्यां प्राप्तुं तस्य प्रयासः सिकताभिरेव सेतुनिर्माणप्रयास मिव कथितः।

(ङ) अन्ते तपोदत्तः विद्याग्रहणाय कुत्र गतः?
उत्तर:
अन्ते तपोदत्तः विद्याग्रहणाय गुरुकुलं गतः।।

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः

प्रश्न 2.
भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत-
यथा-अधिरोढुम्, गन्तुम्, सेतुम्, निर्मातुम्।
उत्तर:
सेतुम्।

(क) निःश्वस्य, चिन्तय, विमृश्य, उपेत्य।
उत्तर:
चिन्तय।

(ख) विश्वपसिमि, पश्यामि, करिष्यामि, अभिलषामि।
उत्तर:
करिष्यामि।

(ग) तपोभिः, दुर्बुद्धिः, सिकताभिः, कुटुम्बिभिः।।
उत्तर:
दुर्बुद्धिः।

प्रश्न 3.
(क) रेखाङ्कितानि सर्वनामपदानि कस्मै प्रयुक्तानि?

(i) अलमलं तव श्रमेण।
उत्तर:
पुरुषाय।

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः

(ii) न अहं सोपानमागैरट्टमधिरोढुं विश्वसिमि।
उत्तर:
पुरुषाय।

(iii) चिन्तितं भवता न वा।
उत्तर:
पुरुषाय।

(iv) गुरुगृहं गत्वैव विद्याभ्यासो मया करणीयः?
उत्तर:
तपोदत्ताय।

(v) भवद्भिः उन्मीलितं मे नयनयुगलम्।
उत्तर:
तपोदत्ताय।

(ख) अधोलिखितानि कथनानि कः के प्रति कथयति?
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः 9

प्रश्न 4.
स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

(क) तपोदत्तः तपश्चर्यया विद्यामवाप्तुं प्रवृत्तोऽस्ति।
उत्तर:
तपोदत्तः केन प्रकारेण विद्याभवाप्तं प्रवत्तोऽस्ति

(ख) तपोदत्तः कुटुम्बिभिः स्त्रैिः गर्हितः अभवत्।
उत्तर:
कः कटुम्बिभिः मित्रैः गर्हितः अभवत्?

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः

(ग) पुरुषः नद्यां सिकताभिः सेतुं निर्मातुं प्रयतते।
उत्तर:
पुरुषः कुत्र सिकताभिः सेतुं निर्मातुं प्रयतते?

(घ) तपोदत्तः अक्षरज्ञानं विनैव वैदुष्यमवाप्तुम् अभिलषति।
उत्तर:
तपोदत्तः कम् विनैव वैदुष्यमवाप्तुम् अभिलषति?

(ङ) तपोदत्तः विद्याध्ययनाय गुरुकुलम् अगच्छत्।
उत्तर:
तपोदत्तः किमर्थं मुरुकुलम् अगच्छत्?

(च) गुरुगृहं गत्वैव विद्याभ्यासः करणीयः।
उत्तर:
कुत्र गत्वैव विद्याभ्यासः करणीयः?

प्रश्न 5.
उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितविग्रहपदानां समस्तपदानि लिखत
विग्रहपदानि – समस्तपदानि
यथा-संकल्पस्य सातत्येन = संकल्पसातत्येन
(क) अक्षराणां ज्ञानम् = अक्षरज्ञानम्
(ख) सिकतायाः सेतुः = सिकतासेतुः
(ग) पितुः चरणैः = पितृचरणैः
(घ) गुरोः गृहम् = गुरुगृहम्
(ङ) विद्यायाः अभ्यासः = विद्याभ्यासः

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः

प्रश्न 6.
उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितानां समस्तपदानां विग्रहं कुरुत-
समस्तपदानि – विग्रहः
यथा-नयनयुगलम् = नयनयोः युगलम्
उत्तर:
(क) जलप्रवाहे = जलस्य प्रवाहे
(ख) तपश्चर्यया = तपसः चर्यया
(ग) जलोच्छलनध्वनिः = जलस्य उच्छलनस्य ध्वनिः।
(घ) सेतुनिर्माणप्रयासः = सेतोः निर्माणस्य प्रयासः।

प्रश्न 7.
उदाहरणमनुसृत्य कोष्ठकात् पदम् आदाय नूतनं वाक्यद्वयं रचयत
(क) यथा-अलं – चिन्तया – (‘अलम्’ योगे तृतीया)
(i) अलं – भयेन – (भय)
(ii) अलं – कोलाहलेन – (कोलाहल)

(ख) यथा-माम् अनु स गच्छति। – (‘अनु’ योगे द्वितीया)
(i) गृहम् अनु मम विद्यालय अस्ति। – (गृह)
(ii) पर्वतम् अनु नदी वहति। – (पर्वत)

(ग) यथा-अक्षरज्ञानं विनैव वैदुष्यं प्राप्तुमभिलषसि। – (‘बिना’ योगे द्वितीया)
(i) परिश्रमं विनैव त्वं प्रथमस्थनं प्राप्तुमभिलषसि। – (परिश्रम)
(ii) अभ्यासं विनैव त्वं विद्यां प्राप्तुमभिलषसि। – (अभ्यास)

Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः Summary Translation in Hindi and English

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः

संकेत- (ततः प्रविशति ………………………. श्रमेण। पश्य)

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः 1
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः 2
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः 3
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः 4

हिन्दी सरलार्थ-(तब तपस्या करता हुआ तपोदत्त प्रवेश करता है)
तपोदत्त-मैं तपोदत्त हूँ। बचपन में पूज्य पिताजी को व्याकुल किए जाने पर भी मैंने विद्या नहीं पढ़ी। इसलिए परिवार के सब सदस्यों, मित्रों और सम्बन्धियों के द्वारा मेरा अपमान किया गया। (ऊपर की ओर सांस छोडकर)
हे प्रभो! यह मैंने क्या किया? मेरी कैसी दुष्ट बुद्धि हो गई थी उस समय! मैंने यह भी नहीं सोचा कि वस्त्रों तथा आभूषणों से सुसज्जित किन्तु विद्याहीन मनुष्य घर पर या सभा में मणिरहित साँप की तरह कभी भी सुशोभित नहीं होता। (कुछ सोचकर) अच्छा, इससे क्या? दिन में पथभ्रष्ट हुआ मनुष्य यदि शाम तक घर आ जाए तो भी ठीक है। वह भ्रमयुक्त नहीं माना जाता। अब मैं तपस्या के द्वारा विद्या प्राप्ति में लग जाता हूँ। (पानी के उछलने की आवाज सुनी जाती है)
अरे! यह लहरों के उछलने की आवाज कहाँ से आ रही है? शायद बड़ी मछली या मगरमच्छ हो। चलो मैं देखता हूँ। (एक पुरुष को रेत से पुल बनाने का प्रयास करते हुए देखकर हँसते हुए)
हाय! संसार में मूों की कमी नहीं है। तेज प्रवाह वाली नदी में यह मूर्ख रेत से पुल बनाने का प्रयत्न कर रहा है। (जोर-जोर से हँसकर पास जाकर) हे महाशय! यह क्या कर रहे हैं आप? बस-बस श्रम न करें, देखो-

Meaning in English-(Then Tapodatta enters whi practising penance)
Tapodatta-Iam Tapodatta. I did not achieve education even it perplexed by my respected father. Therefore, I was insulted by the members of my family, my friends and my relatives. (Having breathed upward)
Oh God! What did I do? What evil-minded. I became then! I did not think that An uneducated man even though decorated with beautiful clothes and the ornaments does not look beautiful either at home or in the assembly just like a snake without the gem. (Thinking of something) NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः
O.K. what by it? It is good if a man misdirected and returns home by evening and he is not called perplexed. Now I also engage myself in achieving the education by practising penance. (The sound of splash of water is heard)
Oh! From where is this sound of waves heard? This sound may either of great fish or of a crocodile. O.K. let me see then myself. (On seeing a man trying to make the bridge with the sand, laughing)
Ah! the foolish persons are not in less number in this world. This fool is trying to make the bridge with the sand on the fast flowing river. (laughing loudly after going near him)
Oh gentleman! What are you doing this? Stop this hard-work, see-

रामो बबन्ध यं सेतुं शिलाभिर्मकरालये।
विदधद् बालुकाभिस्तं यासि त्वमतिरामताम्।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः 5

हिन्दी सरलार्थ-श्रीराम ने समुद्र पर जिस पुल को शिलाओं से बनाया था उस पुल को (इस प्रकार) रेत से बनाते हुए तुम उनके पुरुषार्थ का अतिक्रमण कर रहे हो।
Meaning in English-Shri Rama made a bridge on the ocean with big stones and you are making the (similar) bridge with the sand-thus, you are surpassing the effort of Shri Rama even.

संकेत- चिन्तय तावत् ……………………………. कोऽत्र सन्देहः? किञ्च।

शब्दार्थ (Word-meanings)

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः 6

हिन्दी सरलार्थ-जरा सोचो! कहीं रेत से पुल बनाया जा सकता है?
पुरुष-हे तपस्विन्! तुम मुझे क्यों रोकते हो? प्रयत्न करने से क्या सिद्ध नहीं होता? शिलाओं की क्या आवश्यकता? मैं रेत से ही पुल बनाने के लिए संकल्पबद्ध हूँ। NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 9 सिकतासेतुः
तपोदत्त-आश्चर्य है! रेत से ही पुल बनाओगे? क्या तुमने यह सोचा है कि रेत जलप्रवाह पर कैसे ठहर पाएगी?
पुरुष (उसकी बात का खण्डन करते हुए) सोचा है, सोचा है, अच्छी प्रकार सोचा है। मैं सीढ़ियों के मार्ग से (परंपरागत तरीके से) अटारी पर चढ़ने में विश्वास नहीं करता। मुझमें छलांग मारकर जाने की क्षमता है।
तपोदत्त-(व्यंग्यपूर्वक) शाबाश! शाबाश! तुम तो अञ्जनिपुत्र हनुमान का भी अतिक्रमण कर रहे हो। पुरुष-(सोच-विचार कर)
और क्या? इसमें क्या सन्देह है?

Meaning in English: Think for a while. Is it possible to make a bridge with the sand?

Purush-Oh Tapasvin! Why do you prevent me him doing so? What cannot be accomplished by making effort? What is the use of the stones? I will make a bridge with the sand only by the firmness of my determination.

Tapodatta-It is surprising! You will make a bridge with sand only? Will the sand stay on the stream of water? Have you thought of this or not?

Purush-(Making fun) It is thought, it is thought, it is properly thought. I do not believe in climbing the loft through staircases. I have the capability of going by high jumps.

Tapodatta-(With taunting sense)

There is no doubt in it. Moreover-

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विना लिप्यक्षरज्ञानं तपोभिरेव केवलम्।
यदि विद्या वशे स्युस्ते, सेतुरेष तथा मम।।

शब्दार्थ (Word-meanings)

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हिन्दी सरलार्थ-लिपि तथा अक्षरज्ञान के बिना जिस प्रकार केवल तपस्या से विद्या तुम्हारे वश में हो जाएगी, उसी प्रकार मेरा यह पुल भी (केवल रेत से ही बन जाएगा)।

Meaning in English-Just as you have.overcome learning by practising penance without achieving the knowledge of script and letters, similarly, this bridge of mine is being made with sand only.

संकेत- तपोदत्तः-(सवैलक्ष्यम् …………………………… सप्रणामं गच्छति)।

शब्दार्थ (Word-meanings)

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हिन्दी सरलार्थ: तपोदत्त-(लज्जापूर्वक अपने मन में)
अरे! यह सज्जन मुझे ही लक्ष्य करके आक्षेप लगा रहा है। निश्चय ही यहाँ मैं सच्चाई देख रहा हूँ। मैं बिना अक्षरज्ञान के ही विद्वत्ता प्राप्त करना चाहता हूँ। यह तो देवी सरस्वती का अपमान है। मुझे गुरुकुल जाकर ही विद्या का अध्ययन करना चाहिए। पुरुषार्थ से ही लक्ष्य की प्राप्ति सम्भव है। (प्रकट रूप से)
हे श्रेष्ठ पुरुष! मैं नहीं जानता कि आप कौन हैं? किन्तु आपने मेरे नेत्र खोल दिए। तपस्या मात्र से ही विद्या को प्राप्त करने का प्रयत्न करता हुआ मैं भी रेत से ही पुल बनाने का प्रयास कर रहा था, तो अब मैं विद्या प्राप्त करने के लिए गुरुकुल जाता हूँ। (प्रणाम करता हुआ चला जाता है।)

Meaning in English:
Tapodatta-(Being ashamed to himself)
Oh! this gentleman is using sarcasm at me. I feel truth in his words. I want to become scholar without knowing the letters even. This is mere contempt to Goddess Saraswati. I should go to Gurukul to acquire knowledge. The goal can be achieved only when positive efforts are made.

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(Openly) Oh gentleman! I do not know who are you? But you have opened my eyes. (You have enlightened me with proper knowledge) I was also trying to make bridge with sand only. I was trying to achieve knowledge through penance only. So, I am going now to the Gurukula to acquire knowledge.

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