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NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 4 Poverty (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

प्र.1. कैलोरी आधारित तरीका निर्धनता की पहचान के लिए क्यों उपयुक्त नहीं है?
उत्तर : कैलोरी आधारित तरीका निर्धनता की पहचान के लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि 2100/2400 कैलोरी एक मनुष्य जैसा जीवन जीने के लिए पर्याप्त नहीं है। यह एक संतुलन आहार की आवश्यकता को महत्त्व नहीं देता। एक गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने के लिए एक व्यक्ति को वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, उचित स्वच्छ स्थितियाँ, ईंधन, बिजली आदि की भी आवश्यकता होती है। जब एक व्यक्ति की इन चीजों तक पहुँच होती है तब वह एक गुणवत्तापूर्ण जीवन जी सकता है।

प्र.2. ‘काम के बदले अनाज’ कार्यक्रम का क्या अर्थ है?
उत्तर : राष्ट्रीय कार्य के बदले अनाज कार्यक्रम को प्रचलित रूप से काम के बदले अनाज’ कहा जाता है जिसे 2004 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य देश के आठ राज्यों नामित-गुजरात, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और उत्तराखंड के सूखा प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी रोजगार द्वारा खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है। खाद्य अनाज केंद्रीय सरकार द्वारा इन आठ राज्यों को उपलब्ध कराए जाते हैं। मजदूरी राज्य सरकार द्वारा आशिक रूप से नकद और खाद्य अनाजों के रूप में दी जा सकती है।

प्र.3. भारत में निर्धनता से मुक्ति पाने के लिए रोजगार सृजन करने वाले कार्यक्रम क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर : निर्धनता और बेरोजगारी में एक कारण प्रभाव संबंध है। यदि हम बेरोज़गारी उन्मूलन कर दे गरीबी स्वतः दूर हो जायेगी। इसीलिए भारत सरकार ने गरीबी कम करने के लिए रोजगार सृजन कार्यक्रम शुरू किए हैं। अवश्य ही एक व्यक्ति आय के साधन या रोजगार के साधन की अनुपस्थिति में ही निर्धन होता है। यदि सरकार उसके लिए रोजगार का प्रबंध कर दे चाहे मजदूरी रोजगार चाहे स्वरोजगार के रूप में, तो वह निर्धनता के दुष्चक्र से बाहर आ सकता है।

प्र.4. आय अर्जित करने वाली परिसंपत्तियों के सृजन से निर्धनता की समस्या का समाधान किस प्रकार हो सकता है?
उत्तर : आय अर्जित करने वाली परिसंपत्तियाँ व्यक्ति को स्वरोजगार प्रदान करता है। जैसे ही एक व्यक्ति को स्वरोज़गार उपलब्ध हो जाता है उसके पास अपने निर्वाह के लिए आधारभूत आय आ जाती है। अत: व्यक्ति निर्धनता से बाहर आ जायेगा। इसे एक उदाहरण की सहायता से ज्यादा अच्छी तरह समझा जा सकता है। मान लो एक व्यक्ति निर्धनता रेखा से नीचे जी रहा है। सरकार उसे एक गाड़ी खरीदने के लिए कम ब्याज दर पर ऋण दे देती है। वह उससे बच्चों को स्कूल से घर और घर से स्कूल तक ले जा सकता है। अतः उसे स्वरोजगार मिल जायेगा और निर्धनता से बाहर आ जायेगा।

प्र.5. भारत सरकार द्वारा निर्धनता पर त्रि-आयामी प्रहार निर्धनता दूर करने में सफल नहीं रहा है। चर्चा करें।
उत्तर : यह कहना बिल्कुल सही है कि भारत सरकार द्वारा निर्धनता पर त्रि-आयामी प्रहार निर्धनता दूर करने में सफल नहीं रहा है। त्रि-आयामी प्रहार में निम्नलिखित शामिल हैं
(क) संवृद्धि आधारित रणनीति
(ख) विशिष्ट निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम
(ग) न्यूनतम आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना

परंतु इतने सारे कार्यक्रमों के बावजूद निर्धनों की संख्या जो 1973-74 में 321 मिलियन थी, वह 1999-00 में घटकर केवल 260 मिलियन रह गयी। 1990 के दशक में निर्धनता ग्रामीण क्षेत्रों में कम हुई तथा शहरी क्षेत्रों में बढ़ी जिसका सीधा अर्थ है कि निर्धनता उन्मूलन नहीं हुआ बल्कि निर्धनता ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित हुई है। ऐसा निम्नलिखित कारणों से हुआ है।

(क)
देश की राजनैतिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार
(ख) कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में पर्यवेक्षण का अभाव
(ग) लाभार्थी समूह में उनके लाभ के लिए कार्य कर लाभ कार्यक्रमों के प्रति जागरूकता का अभाव।
(घ) शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए कोई कार्यक्रम न शुरू किया जाना। |

प्र.6. सरकार ने बुजुर्गों, निर्धनों और असहाय महिलाओं की सहायतार्थ कौन-से कार्यक्रम अपनाए हैं?
उत्तर : सरकार ने बुजुर्गों, निर्धनों और असहाय महिलाओं की सहायतार्थ निम्नलिखित कार्यक्रम अपनाए हैं
(क) राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एन.एस.ए.पी.)-इस कार्य के अंतर्गत गरीब घरों में बुजुर्ग, रोटी कमाने वाले की मृत्यु तथा प्रसूती देखभाल से प्रभावित लोगों को सामाजिक सहायता प्रदान की जाती है। यह कार्यक्रम 15 अगस्त 1995 को लागू किया गया। इस कार्यक्रम के तीन घटक हैं

  1. राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (एन.ए.ओ.एस
  2. राष्ट्रीय परिवार हितकारी योजना (एन.ए.बी.एस.)
  3. राष्ट्रीय मातृत्व हितकारी योजना (एन.एम.बी.एस.)
    2. अन्नपूर्णा- यह योजना अप्रैल, 2000 को शुरू की गई थी। यह 100% केंद्रीय प्रयोजित योजना है। यह उन वरिष्ठ नागरिकों को कैलोरी आवश्यकता को खाद्य सुरक्षा प्रदान करके पूरा करती है जो राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत पेंशन पाने के योग्य हैं परंतु उन्हें पेंशन मिल नहीं रही है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत खाद्य अनाज 2 रुपये प्रति किलो गेहूँ और 3 रुपये प्रति किलो चावल की रियायती दर पर उपलब्ध कराई जाती है। वर्तमान में यह योजना पूरे भारत में कार्य कर रही है और 6.08 लाख परिवार इससे लाभ उठा रहे हैं। |

प्र.7, क्या निर्धनता और बेरोज़गारी के बीच कोई संबंध है? समझाइए।
उत्तर : निर्धनता और बेरोजगारी के बीच वृत्तीय संबंध है। यदि एक व्यक्ति बेरोजगार है तो उसके पास आजीविका का कोई साधन नहीं होगा। वह अपने जीवन की आधारभूत आवश्यकताएँ खरीदने में भी सक्षम नहीं होगा। अत: वह निर्धन ही बना रहेगा।
NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 4 (Hindi Medium)प्र.8. मान लीजिए कि आप एक निर्धन परिवार से हैं और छोटी-सी दुकान खोलने के लिए सरकारी सहायता पाना चाहते हैं। आप किस योजना के अंतर्गत आवेदन देंगे और क्यों?
उत्तर : हम किस योजना के अंतर्गत आवेदन देंगे वह इस पर निर्भर करता है कि हम ग्रामीण क्षेत्र के निवासी हैं या शहरी क्षेत्र के। यदि हम शहरी क्षेत्र के निवासी हैं तो हमें।

  • स्वर्ण जयंती शहरी रोज़गार योजना के अंतर्गत मदद मिल सकती है। यदि हम ग्रामीण क्षेत्र के निवासी हैं तो हमें
  • स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना
  • ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम ।
  • प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत सहायता मिल सकती है।

प्र.9. ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी में अंतर स्पष्ट करें। क्या यह करना सही होगा कि निर्धनता गाँवों से शहरों में आ गई है? अपने उत्तर के पक्ष में निर्धनता अनुपात प्रवृत्ति का प्रयोग करें।
उत्तर : स्वतंत्रता के समय से ग्रामीण बेरोजगारी शहरी बेरोज़गारी से अधिक रही है। यह कहना सही होगा कि निर्धनता गाँवों से शहरों में आ गई है। ग्रामीण क्षेत्र में छोटे तथा सीमांत किसान और कृषि श्रमिकों में मौसमी तथा प्रच्छन्न बेरोज़गारी है। वे कर्ज के जंजाल में भी फँस जाते हैं। ऐसे हालात में वे एक बेहतर आय की आशा में शहरों की ओर भागते हैं। इन क्षेत्रों में वे रेड़ी विक्रेता, रिक्शा चालकों तथा अनियत दिहाड़ी मजदूरों के रूप में काम करते हैं और शहरी बेरोज़गारी को बढ़ाते हैं।

समय के साथ जनसंख्या में वृद्धि से, निर्धनता रेखा से नीचे रहने वालों की संख्या उतनी कम नहीं हुई जितना उनका प्रतिशत कम हुआ है।

प्र.10. मान लीजिए कि आप किसी गाँव के निवासी हैं। अपने गाँव से निर्धनता निवारण के कुछ सुझाव दीजिए।
उत्तर : मैं गाँवों से निर्धनता निवारण के लिए निम्नलिखित सुझाव दे सकता/सकती हूँ
(क) मानव पूँजी निर्माण, विशेष रूप से शिक्षा और स्वास्थ्य पर सही रीति व्यय करना।
(ख) विभिन्न सरकारी योजनाओं के विषय में जागरूकता उत्पन्न करना।
(ग) स्वरोजगार शुरू करने के लिए आसान ऋण उपलब्ध कराना।
(घ) जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण करना।

 

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NCERT Solutions for Class 11 History Chapter 11 Paths to Modernisation (Hindi Medium)

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अभ्यास प्रश्न (पाठ्यपुस्तक से) (NCERT Textbook Questions Solved)

संक्षेप में उत्तर दीजिए

प्र० 1. मेजी पुनस्र्थापना से पहले की वे अहम् घटनाएँ क्या थीं, जिन्होंने जापान के तीव्र आधुनिकीकरण को संभवकिया?
उत्तर 1867-68 में जापान में एक युगांतकारी घटना मेजी पुनस्र्थापना के रूप में घटी। सदियों पूर्व जापान में दो अहम प्रशासनिक शक्तियाँ थीं-सम्राट तथा प्रधान सेनापति अथवा शोगुन। हालाँकि प्रशासन की समस्त शक्तियाँ शोगुन में केंद्रित थीं। सम्राट मात्र राजनैतिक मुखौटा होता था। किंतु 1668 ई० में एक आंदोलन द्वारा शोगुन का पद समाप्त कर दिया गया। उसके सारे अधिकार सम्राट के हाथों में दे दिए गए। नए सम्राट चौदह वर्षीय मुत्सुहितों ने मेजी की उपाधि धारण की। मेजी पुनस्र्थापना से पूर्व जापान में कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाएँ घटित हुईं। फलतः आधुनिकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

  • 16 वीं शताब्दी तक जापान में किसान भी हथियार रखते थे। फलतः यदा-कदा अराजकता का वातावरण उत्पन्न | हो जाता था। हालाँकि इस शताब्दी के अंतिम वर्षों में किसानों से हथियार ले लिए गए। अब मात्र सामुदाई वर्ग के लोग ही हथियार रख सकते थे। इससे किसान अपना संपूर्ण समय और ध्यान कृषि कार्य में लगाने लगे।
  • इससे पूर्व दम्यों को अधिकांश समय शोगुन के निर्देशानुसार राजधानी एदो में व्यतीत करना पड़ता था। फलतः अपने क्षेत्रों के प्रशासनिक कार्यों का संचालन सुचारु रूप से करने में असमर्थ हो जाते थे। 16वीं शताब्दी | के अंतिम वर्षों में उन्हें अपनी राजधानियों में रहने के आदेश दिए गए।
  • भूमि का सर्वेक्षण तथा उत्पादकता के आधार पर भूमि का वर्गीकरण किया गया। इस कार्य का मुख्य उद्देश्य मालिकों तथा करदाताओं का निर्धारण करना था। इस परिवर्तन ने राजस्व के स्थायी निर्धारण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
  • मेजी पुनस्र्थापना से पूर्व जापान में अनेक महत्त्वपूर्ण एवं विशाल शहरों का विकास हुआ। शहरों के विकास ने वाणिज्यिक अर्थव्यवस्था के विकास को प्रोत्साहित किया। फलतः वित्त और ऋण की प्रणालियाँ स्थापित हुईं। गुणों को पद से अधिक महत्त्वपूर्ण माना जाने लगा। व्यापार का विकास हुआ और शहरों की जीवित संस्कृति विकसित होने लगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा मिला।
    इन सभी घटनाओं के सामूहिक प्रयास से जापान में तीव्रगति से आधुनिकीकरण का सपना साकार हुआ।

प्र० 2. जापान के विकास के साथ-साथ वहाँ की रोजमर्रा की जिंदगी में किस तरह बदलाव आए? चर्चा कीजिए।
उत्तर जापान का एक आधुनिक समाज में बदलाव रोजाना की जिंदगी में आए परिवर्तनों में भी देखा जा सकता है। परिवार व्यवस्था में कई पीढ़ियाँ परिवार के मुखिया के नियंत्रण में रहती थीं लेकिन जैसे-जैसे लोग समृद्ध एवं संपन्न हुए, परिवारों के संदर्भ में नये विचार फैलने लगे। नया घर (जिसे जापानी अंग्रेजी शब्द का इस्तेमाल करते हुए होम कहते हैं) का संबंध मूल परिवार से था, जहाँ पति-पत्नी साथ रहकर कमाते हैं और घर बसाते हैं। पारिवारिक जीवन की इस नयी समझ ने नए तरह के घरेलू उत्पादों, नए किस्म के पारिवारिक मनोरंजन और नए प्रकार की माँग पैदा की। 1920 के दशक में निर्माण कम्पनियों द्वारा शुरू में 200 येन देने के बाद लगातार 10 साल के लिए 12 येन प्रति माह की किस्तों पर लोगों को सस्ते मकान उपलब्ध कराए गए। यह एक ऐसे समय में जब एक बैंक कर्मचारी (उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति) की मासिक आय 40 येन प्रति मास थी।

जापान के विकास के साथ-साथ नवीन घरेलू उत्पादों; जैसे कुकर टोस्टर आदि का प्रयोग होने लगा। आधुनिकता के प्रसार ने नवीन मध्यमवर्गीय परिवारों को प्रभावित किया। ट्रामों के आने से आवागमन की गतिविधियाँ आसान हो गईं। मनोरंजन के नए-नए साधनों का आविष्कार हुआ। 1899 ई० में फिल्मों का निर्माण होने लगा। सन् 1925 ई० में पहला रेडियो स्टेशन खोला गया।

प्र० 3. पश्चिमी ताकतों द्वारा पेश की गई चुनौतियों का सामना छींग राजवंश ने कैसे किया?
उत्तर पाश्चात्य ताकतों द्वारा पेश की गई चुनौतियों से दो-चार होने के लिए छींग राजवंश ने निम्नलिखित उपायों का सहारा लिया

  • चीन को उपनिवेशीकरण से बचाने के लिए चीन की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना नितांत आवश्यक था। अतः उसने आधुनिक प्रशासन, नयी सेना और शिक्षा के लिए नयी नीतियों का निर्माण किया।
  • संवैधानिक सरकार की स्थापना हेतु स्थानीय विधायिकाओं के गठन की तरफ ध्यान आकृष्ट किया गया। प्रशासकों का विचार था कि एक संवैधानिक रूप से चुनी हुई सरकार की पश्चिमी ताकतों द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियों से भली-प्रकार से निपट सकती है।
  • जनसामान्य द्वारा राष्ट्रीय जागरूकता उत्पन्न करने के प्रयास किए गए। लियांग किचाऊ जैसे सुप्रसिद्ध चीनी विचारकों का विचार था कि चीनियों में राष्ट्रीयता की भावना उत्पन्न करके ही चीन पश्चिम का सफलतापूर्वक विरोध कर सकता था। उनके मतानुसार अंग्रेज़ व्यापारियों के हाथों भारतीयों की हार का मुख्य कारण भारतीयों में एकता और राष्ट्रीयता की भावना का अभाव था। अतः चीनी विचारकों ने जनसामान्य को उपनिवेश बनाए गए देशों के नकारात्मक उदाहरणों से परिचित कराने का अहम कार्य किया। 18वीं शताब्दी में पोलैंड का विभाजन एक दृष्टांत बन गया। सर्वविदित है कि 1890 के दशक में चीन में ‘पोलैंड’ शब्द का प्रयोग एक क्रिया स्वरूप-टू पोलैंड रूस’ (बोलान वू) अर्थात् ‘हमें विभाजित करने’–किया जाने लगा।
  • जनसाधारण की परंपरागत सोच को बदलने की कोशिश की गई क्योंकि बुद्धिजीवी वर्ग का मानना था कि | परंपरागत सोच को बदलकर ही चीन का विकास संभव है। उल्लेखनीय है कि उस समय चीन की प्रमुख विचारधारा कन्फ्यूशियसवाद से ओतप्रोत थी।
  • 1890 के दशक में जिन विद्यार्थियों को जापान में अध्ययन हेतु भेजा गया था उन्होंने जापान के नए विचारों से रभावित होकर चीन में गणतंत्र स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।।
  • सरकारी पदों की नियुक्ति में योग्यता को आधार बनाया गया। 1905 ई० में रूसजापान युद्ध के बाद दीर्घकाल से प्रचलित चीनी परीक्षा प्रणाली को समाप्त कर दिया गया। परंपरागत परीक्षा प्रणाली में साहित्य पर बल दिया जाता था। फलतः यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए बाधक थी।
  • सैन्य-शक्ति को मजबूत बनाने के लिए अनेक महत्त्वपूर्ण सुधार किए गए। सेना को अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित किया गया।

प्र० 4. सन यात-सेन के तीन सिद्धांत क्या थे?
उत्तर सन यात-सेन के नेतृत्व में 1911 में मांचू साम्राज्य को समाप्त कर दिया गया और चीनी गणतंत्र की स्थापना की गई। वे आधुनिक चीन के संस्थापक माने जाते हैं। वे एक गरीब परिवार से थे और उन्होंने मिशन स्कूलों से शिक्षा प्राप्त की जहाँ उनका परिचय लोकतंत्र व ईसाई धर्म से हुआ। उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई की, परंतु वे चीन के भविष्य को लेकर चिंतित थे। उनका कार्यक्रम तीन सिद्धांत (सन मिन चुई) के नाम से प्रसिद्ध है। ये तीन सिद्धान्त हैं

  • राष्ट्रवाद-इसका अर्थ था मांचू वंश-जिसे विदेशी राजवंश के रूप में माना जाता था-को सत्ता से हटाना, | साथ-साथ अन्य साम्राज्यवादियों को हटाना।
  • गणतांत्रिक सरकार की स्थापना-अन्य साम्राज्यवादियों को हटाना तथा गणतंत्र की स्थापना करना।
  • समाजवाद-जो पूँजी का नियमन करे और भूस्वामित्व में समानता लाए। सन यात-सेन के विचार कुओमीनतांग के राजनीतिक दर्शन का आधार बने। उन्होंने कपड़ा, खाना, घर और
    परिवहन, इन चार बड़ी आवश्यकताओं’ को रेखांकित किया। संक्षेप में निबंध लिखिए

प्र० 5. क्या पड़ोसियों के साथ जापान के युद्ध और उसके पर्यावरण का विनाश तीव्र औद्योगीकरण की जापानी नीति के चलते हुआ?
उत्तर इतिहासविदों का मानना है कि औद्योगीकरण की जापानी नीति ने ही जापान को पड़ोसियों के साथ युद्धों में उलझा दिया और उसके पर्यावरण को समाप्तप्राय कर दिया। मेजी पुनस्र्थापना के तकरीबन चालीस वर्षों के अंतराल में जापान ने आर्थिक-राजनैतिक-सामाजिक सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की। वहाँ के तत्कालीन सम्राटों ने विदेशियों को जंगली समझकर उनकी विशेषताओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया, अपितु उनसे स्वयं सीखने का प्रयत्न किया।

‘फुकोकु क्योहे’ अर्थात् ‘समृद्ध देश, मजबूत सेना’ के नारे के साथ सरकार ने अपनी नवीन नीति की घोषणा की। इस नयी नीति का उद्देश्य था-अपनी अर्थव्यवस्था एवं सेना को मजबूत बनाना। मेजी सुधारों के अंतर्गत अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण पर अत्यधिक बल दिया गया। सरकार ने उद्योगों के विकास हेतु विदेशों से भी सहायता ली। सूती वस्त्र उद्योग को प्रोत्साहित करने हेतु कपास की नयी-नयी किस्मों को विकसित करने का प्रयास किया गया। संचार और यातायात के अत्याधुनिक संसाधनों ने आर्थिक क्रांति में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। बीसवीं शताब्दी के प्रथम दशक तक जापान की गिनती विश्व के सर्वोत्तम औद्योगिक देशों में होने लगी।

औद्योगिक विकास की तीव्र गति ने जापान को पड़ोसियों के साथ युद्ध करने के लिए विवश कर दिया। जापान भी बाजार की खोज में 19वीं शताब्दी में औपनिवेशिक दौड़ में सम्मिलित हो गया। जापान के साम्राज्यवाद का एक अन्य प्रमुख कारण एशिया और प्रशांत क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता को साबित करना था। फलतः उसे 1894 ई०-95 ई० में चीन के साथ और 1904-05 में रूस के साथ युद्ध करना पड़ा।

1872 ई० में जापान की जनसंख्या 3.5 करोड़ थी। औद्योगिकीकरण की वजह से 1920 आते-आते जापान की जनसंख्या 5.5 करोड़ हो गयी।

प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् जापान की अर्थव्यवस्था निरंतर विकास की ओर बढ़ने लगी। वह सूती वस्त्र, रेयन और कच्चे रेशम का सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया। युद्धों के परवर्ती काल में इंजीनियरिंग एवं लोहा-इस्पात उद्योग के क्षेत्र में जापान ने अद्वितीय विकास किया। तीव्र गति से औद्योगिक विकास का एक नकारात्मक पक्ष था-पर्यावरण का दिन-पर-दिन दूषित होना। औद्योगिक विकास ने लकड़ी की माँग में वृद्धि की जिससे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हुई। फलतः पर्यावरण पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। प्रथम संसद (1897 ई० में) के निम्न सदन के सदस्य तनाको शोज़ों ने औद्योगिक प्रदूषण के विरोध में पहला आंदोलन किया। उनका मानना था कि मानवीय हितों को नजरअंदाज करके औद्योगिक विकास करना मानव जाति के प्रति क्रियावादी कदम है।

द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् जापान में होने वाले तीव्र औद्योगिक विकास का जनसामान्य के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ा। अरगजी को जहर एक भयंकर कष्टदायी बीमारी का कारण था। यह एक आरंभिक सूचक भी था। फलतः 1960 के दशक के उत्तरार्द्ध में हवा इतनी दूषित हो गई कि अनेक समस्याएँ उठ खड़ी हुईं।

अतः यह कहना उचित ही होगा कि तीव्र औद्योगिकीकरण की जापानी नीति ने जापान को सीमावर्ती देशों के साथ युद्धों
में उलझा दिया। साथ-साथ वहाँ के पर्यावरण को भी दूषित कर दिया।

प्र० 6. क्या आप मानते हैं कि माओ त्सेतुंग और चीन के साम्यवादी दल ने चीन को मुक्ति दिलाने और इसकी मौजूदा कामयाबी की बुनियाद डालने में सफलता प्राप्त की?
उत्तर अधिकतर इतिहासकार इस विचार से सहमत हैं कि माओ त्सेतुंग और चीन के साम्यवादी दल ने चीन को मुक्ति दिलाने और इसकी मौजूदा कामयाबी की बुनियाद डालने में सफल रहे।

प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् से ही चीन में साम्यवादियों के प्रभाव में बढ़ोतरी होने लगी थी। 1921 ई० में साम्यवादी दल की स्थापना की गई जो अपने प्रारंभिक चरण में ही एक शक्तिशाली दल के रूप में उभरने लगा। हालाँकि एक समय चीन में दो सरकारों का अस्तित्त्व था। इनमें से एक कुओमीनतांग (राष्ट्रवादी दल) की सरकार थी। इसके अध्यक्ष सन यात-सेन थे। दूसरी सरकार का अध्यक्ष एक सैनिक जनरल च्यांग कोईशेक था। इसका मुख्यालय बीजिंग में था। डॉ० सन यात-सेन की मृत्यु के पश्चात् कुओमीनतांग का नेतृत्व च्यांग कोईशेक की सरकार के विरोध में था, क्योंकि वह अमरीका तथा ब्रिटेन के हाथों का कठपुतली मात्र था। मुद्रास्फीति की वजह से जनसामान्य की मुसीबतें बढ़ गई थी। जनता दोहरी मार झेल रही थी। पहली मार कर के रूप में थी जो जनता की कमर तोड़ रही तो दूसरी मार खाद्य-वस्तुओं की वजह से महँगाई थी।

चीनी साम्यवादी पार्टी के मुख्य नेता माओ त्सेतुंग की कोशिशों के फलस्वरूप यह पार्टी एक मजबूत राजनैतिक शक्ति बन गई थी। माओ त्सेतुंग घोर परिवर्तनवादी थे। उन्होंने एक ताकतवर किसान सोबित का गठन किया और भूमि अधिग्रहण करके पुनः नए नियमों के अनुसार वितरण किया। साथ-साथ उन्होंने स्वतंत्र सरकार एवं सैन्य-संगठन पर बल दिया। माओ त्सेतुंग स्त्रियों की समस्याओं से पूरी तरह से परिचित थे। अतः उन्होंने ग्रामीण महिला संघों को प्रोत्साहन दिया। विवाह संबंधी नए कानूनों का निर्माण किया। इन्होंने विवाह संबंधी समझौतों या क्रय-विक्रय पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया। तलाक की प्रक्रिया को आसान बनाया। वास्तविकता तो यह भी है कि माओ त्सेतुंग एक शोषणमुक्त राष्ट्र का निर्माण करना चाहते थे।

द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान की हार के पश्चात चीन को जापानी प्रभाव से पूरी तरह से मुक्ति मिल गई। तत्पश्चात् माओ त्सेतुंग के अधीन साम्यवादियों और च्योग कोई-शेक के नेतृत्व में राष्ट्रवादियों में सत्ता के गृहयुद्ध शुरू हो गया। इस संघर्ष में साभ्यवादियों की जीत हुई। अक्टूबर सन् 1943 को चीन में ‘पीपुल्स रिपब्लिक’ ऑफ चाइना’ के नाम से गणतंत्रीय सरकार की स्थापना कर दी गई।

नए गणतंत्र के प्रथम राष्ट्रपति माओ त्सेतुंग और प्रथम प्रधानमंत्री चाऊ-एन-लाई बने। इस सरकार ने अपने आरंभिक वर्षों में कुछ अहम् भूमि सुधार संबंधी कानून लागू किए। औद्योगिक क्रांति के लिए एक सुनियोजित कार्यक्रम भी तैयार किया गया। अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्रों पर सरकारी नियंत्रण स्थापित कर दिया गया। निजीकरण को धीरे-धीरे समाप्त कर दिया गया। 1953 तक इस कार्यक्रम के अनुसार आचरण होता रहा। इसके उपरांत समाजवादी परिवर्तन का कार्यक्रम बनाने की घोषणा की गई।

मौजूदा कार्यक्रम के तहत आंतरिक क्षेत्र में चीन जिस नए कार्यक्रम के तहत आंतरिक क्षेत्र में चीन जिस नए कार्यक्रम का पालन किया वह “लंबी छलाँग” के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस कार्यक्रम का प्रमुख लक्ष्य आर्थिक सुधार करना था। माओ ने 1954 ई० में तथा 1956 ई० में क्रमशः कृषि का सहकारिताकरण तथा सामूहिकीकरण आरंभ करने की दिशा में अहम कदम उठाया चीनवासियों को अपने-अपने घरों के पिछवाड़े इस्पात की भट्ठियाँ लगाने के लिए प्रेरित किया गया। गाँवों में ‘पीपुल्स कम्यून्स’ स्थापित किए गए। ये सामूहिक उत्पादन तथा सामूहिक अधिकार के तहत कार्य करते थे। ऐसे समुदायों में चीन के 98% कृषक आते थे।

माओ त्सेतुंग ऐसे ‘समाजवादी’ व्यक्तियों का निर्माण करना चाहते थे, जिन्हें पितृभूमि, जनता, काम, विज्ञान तथा जनसंपत्ति पाँचों से बेहद प्यार हो। उन्होंने महिलाओं के लिए ‘ऑल चाइना डेमोक्रेटिस वीमेन्स फेडरेशन’ तथा विद्यार्थियों के लिए ऑल चाइना स्टूडेंट्स फेडरेशन’ का निर्माण किया। वे योग्यता से अधिक महत्त्व विचारधारा को देते थे। अतः माओवादियों तथा उनके आलोचकों के मध्य संघर्ष प्रायः होता रहता था। माओ त्सेतुंग ने अपने आलाचकों को मुँहतोड़ जवाब देने

के लिए 1965 ई० में महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रांति का प्रारंभ किया। इसके अंतर्गत पुरानी आदतों, पुरानी संस्कृति तथा पुराने रिवाजों के प्रतिक्रियास्वरूप अभियान छेड़े गए। इन अभियानों में मुख्य रूप से सेना एवं छात्रों का प्रयोग किया गया। साम्यवादी विचारधारा पेशेवर योग्यता पर भारी पड़ी। दोषारोपण ने नारेबाजी और तर्कसंगत वाद-विवाद आच्छादित कर दिया।

जनमुक्ति सेना के युवा अंग लाल रक्षकों द्वारा क्रांति को करने या जारी रखने के नाम पर भयंकर अत्याचार किए गए। माओ त्सेतुंग की विचारधारा को न मानने वालों को नाना प्रकार की मुसीबतों और यातनाओं का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था एवं शिक्षा व्यवस्था में रुकावट आने लगी। साथ-साथ पार्टी भी बेहद कमजोर हुई। हालाँकि 1970 ई० में चीन की परिस्थितियों तेजी से बदलने लगीं। वहाँ की अर्थव्यवस्था विकास के पथ पर अग्रसर होने लगी। तथा चीन परमाणु शक्ति से भी संपन्न हो गया। राष्ट्रपति निक्सन के काल में संयुक्त राज्य अमरीका ने भी साम्यवादी चीन को मान्यता प्रदान कर दी। कालांतर में वह संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता तथा सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य भी बन गया।

इस प्रकार यह कहना उचित ही होगा कि चीन को मुक्ति दिलाने तथा इसकी तत्कालीन कामयाबी की आधारशिला रखने में साम्यवादी दल के प्रमुख माओ त्सेतुंग ने अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी।

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NCERT Solutions for Class 11 Sociology Introducing Sociology Chapter 3 Understanding Social Institutions (Hindi Medium)

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पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न [NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED]

प्र० 1. ज्ञात करें कि आपके समाज में विवाह के कौन-से नियमों का पालन किया जाता है। कक्षा में अन्य विद्यार्थियों द्वारा किए गए प्रेक्षणों से अपने प्रेक्षण की तुलना करें तथा चर्चा करें।
उत्तर- भारतीय समाज में विवाह निश्चित नियमों द्वारा सुव्यवस्थित किया गया है। पुरुषों और स्त्रियों के पारिवारिक जीवन में प्रवेश के लिए यह एक संस्था है। हमारे समाज में विवाह केवल अनुबंध ही नहीं है, वरन् यह एक समग्र संबंध है। इसमें भावनात्मक उलझन, निष्ठा, एक-दूसरे के प्रति वचनबद्धता, आर्थिक लगाव और उत्तरदायित्व सम्मिलित है। यह स्थायी संबंध है, जिसमें पुरुष और स्त्री बच्चों की प्राप्ति के लिए सामाजिक तौर पर वचनबद्ध हैं। उन्हें यौन-संबंधों के अधिकार का प्रयोग कर बच्चे प्राप्त करने का अधिकार है। भारतीय समाज में विवाह विपरीत लिंग के दो विशिष्ट व्यक्तियों के मध्य स्वीकृत है। जाति और धर्म के संदर्भ में पारंपरिक रूढ़िवादी परिवारों में जीवन-साथी के चुनाव पर निश्चित प्रतिबंध हैं। भारतीय समाज में व्यवस्थित विवाह का प्रचलन है। हालाँकि शहरीकरण, औद्योगीकरण, स्त्री-शिक्षा, समाज सुधार, भूमण्डलीकरण और विभिन्न कानूनी संशोधनों; जैसे–नारी सशक्तिकरण और सम्पत्ति अधिकार के कारण हमारे समाज में अनेक क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं। युवा पीढी वैसे व्यक्ति के साथ विवाह करने में संकोच अनुभव करती है, जिसको उसने पहले कभी देखा नहीं है या जिससे पहले मिला नहीं है, जिसके व्यवहार, मूल्य, अभिकल्पना, विश्वास के संबंध में उसे जानकारी नहीं है। ऐसी स्थिति में युवा वर्ग दवाब का अनुभव करता है। आजकल एकल परिवार ने संयुक्त परिवार का स्थान ग्रहण कर लिया है और माता-पिता को सामाजिक सहायता भी उपलब्ध नहीं है। अतः जहाँ तक विवाह जैसी संस्था की बात है, भारतीय समाज में यह संक्रमण काल है।

प्र० 2. ज्ञात करें कि व्यापक संदर्भ में आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिवर्तन होने से परिवार में सदस्यता, आवासीय प्रतिमान और यहाँ तक कि पारस्परिक संपर्क का तरीका कैसे परिवर्तित होता है; उदाहरण के लिए प्रवास।।
उत्तर- सामाजिक संबंध समूह संरचना के आधार हैं। भारतीय समाज का तेजी से परिवर्तन हो रहा है और यही बात संरचना एवं बनावट की भी है। परिवर्तन सार्वभौमिक तथा निरंतर प्रक्रिया है। औद्योगीकरण, शहरीकरण, भूमण्डलीकरण, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, बिजली और इलैक्ट्रॉनिक मशीन तथा यातायात के साधन की सुगम उपलब्धता ने हमारी संचार व्यवस्था और सामाजिक प्रक्रिया को गहराई से प्रभावित किया है। वर्तमान में आधुनिक समाज विशेष रूप से संबंध आधारित नहीं रह गया है वरन् यह एक समय केंद्रित समाज बन गया है। अतः आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों के बृहद् परिदृश्य में देश के अंदर और देश के बाहर प्रवसन (Migration) सामान्यतया एक दृश्य प्रपंच (Phenomenon) है और कम कीमत पर कॉल्स (Calls), स्काइप (Skype), वॉट्सएप (Whatsapp) एवं अन्य स्रोतों के कारण
सामाजिक अंत:क्रिया का रिवाज बदल गया है।

प्र० 3. ‘कार्य’ पर एक निबंध लिखिए। कार्यों की विद्यमान श्रेणी और ये किस तरह बदलती हैं, दोनों पर ध्यान केंद्रित करें।
उत्तर- कार्य केवल जीविका के लिए ही नहीं, बल्कि संतुष्टि के लिए भी है। इसमें कठिन कार्य भी सम्मिलित हैं, जिसमें मानवीय और मानसिक क्रिया-कलापों की आवश्यकता पड़ती है। कार्य का संदर्भ अदा की गई नौकरी से है। इसे व्यक्ति के शारीरिक या मानसिक प्रयासों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इसे अदा भी किया जा सकता है या नहीं भी किया जा सकता है। मानव की आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए सेवाओं के रूप में कार्य को सम्पन्न किया जाता है। वस्तुओं और सेवाओं के प्रत्यक्ष विनिमय में कार्य को सम्पन्न किया जाता है। अन्य सामाजिक और राजनीतिक क्रिया-कलापों से हटकर आर्थिक क्रिया-कलाप मानवीय सामाजिक जीवन का एक महत्वपूर्ण स्वरूप है। आर्थिक क्रिया-कलाप अद्यतन समाज के महत्वपूर्ण आयाम हैं, जिसमें उत्पादन और खपत सम्मिलित हैं। समाज में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण और खपत के संदर्भ में आर्थिक संस्थाएँ व्यक्तियों के क्रिया-कलापों के साथ मिलकर कार्य करती हैं।
कार्य के अनेक सोपान निर्दिष्ट हैं; जैसे

  • अनुबंध (Contract) – किसी निश्चित अवधि के अंतर्गत विशिष्ट लक्ष्य की प्राप्ति हेतु दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच समान नियमों और स्थितियों की वचनबद्धता।।
  • श्रम-विभाजन (Division of Labour) – इसका सरोकार कौशल और योग्यता पर आधारित लोगों के मध्य कार्य के वितरण की पद्धति से है। श्रम-विभाजन का जनसंख्या के घनत्व से प्रत्यक्ष संबंध है। यह समाज के लोगों को अन्योन्याश्रित बनाता है। आधुनिक समाज और इसकी अर्थव्यवस्था तकनीक पर आधारित है, जिसके लिए विशिष्टिकरण आवश्यक है।
  • वेतन (Wages) – वर्तमान औद्योगिक अर्थव्यवस्था में वेतन के निश्चित नियम हैं; जैसे कि-
    • वेतन अनुबंध को स्थिर और आवश्यक भाग है।
    • यह अव्यक्तिगत है और औपचारिक संबंधों पर आधारित है।
    • वेतन कामगार (worker) और नियोक्ता दोनों पर बंधनकारी है।
    • कुछ आर्थिक व्यवस्था के अंतर्गत व्यापार संघ या श्रम संघ (Labour Union) कामगारों के वेतन हित की रक्षा करता है।

अनेक अर्थव्यवस्थाएँ हैं, जिनके द्वारा कार्य का प्रदर्शन होता है।

  1. साधारण अर्थव्यवस्था (Primitive Economic System) – कार्य और वेतन की कोई विशिष्ट विनिमय नीति नहीं होती है। यह आवश्यक रूप से निजी, लेकिन समुदाय आधारित होती है, जिसमें आर्थिक, धार्मिक एवं जादुई क्रिया-कलाप सम्मिलित होते हैं।
  2. कृषि संबंधित अर्थव्यवस्था (Agrarian Economy) – यह अर्थव्यवस्था की द्वितीय अवस्था थी, जिसने कामगारों के लिए भोजन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की, पेशा जाति आधारित बन गया और वस्तु विनिमय पद्धति एवं जजमानी पद्धति प्रचलन में आई।
  3. औद्योगिक अर्थव्यवस्था (Industrial Economy) – यह वर्तमान अर्थव्यवस्था है, जिसका उदय 18वीं शताब्दी में इंग्लैंड में औद्योगीकरण के साथ हुआ। पूँजीवाद और समाजवाद का औद्योगिक समाज की
    दो मुख्य व्यवस्थाओं के रूप में उदय हुआ। यह समाज उत्पादन के लिए औजारों और मशीनों पर आधारित है। इस प्रकार की अर्थव्यवस्था कार्य को
    स्थिर मुद्रा की सहायता से नियंत्रित करती है।

श्रम विभाजन, कारखाना पद्धति, उत्पादन के लिए अन्योन्याश्रिता (Interdependence) तथा कठिन कार्य का विशिष्टिकरण वर्तमान अर्थव्यवस्था के मुख्य अभिलक्षण हैं।
कार्य को निम्नवत् वर्गीकृत किया जा सकता है:

  1. औपचारिक क्षेत्र (Formal Sector) – यहाँ प्रदत्त नौकरी (Paid Employment) के विचार कार्य करते हैं।
  2. अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) – इसक संदर्भ ऐसी अर्थव्यवस्था से है, जिसमें वस्तुओं या सेवाओं का प्रत्यक्ष विनिमय सम्मिलित है। अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का संदर्भ नियमित रोजगार के क्षेत्र से बाहरी लेन-देन से है।
  3. सेवा क्षेत्र (Service Sector) – सेवा क्षेत्र में लोगों के लिए अधिकतम कार्य की व्यवस्था संचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, होटल, विमान-उद्योग, आई०टी० (I.T.), यातायात, कम्प्यूटर इत्यादि के क्षेत्रों में की जाती है।
  4. राजकीय क्षेत्र (Public Sector) – सरकार द्वारा सृजित नौकरी को राजकीय कार्य क्षेत्र कहा जाता है। उदाहरण के लिए, रेलवे, भारी उद्योग। ये सरकारी क्षेत्र के भाग हैं। भारत एक कल्याणकारी राज्य होने के कारण अनेक क्षेत्र जैसे यातायात इत्यादि केवल सरकार के द्वारा व्यवस्थित की गई है।
  5. निजी क्षेत्र (Private Sector) – वे कार्य जो निजी स्वामित्व के अधीन आते हैं। ये वस्तुतः लाभ अर्जित करने वाले व्यवसायिक क्षेत्र हैं। उदाहरण के लिए, टीसीएस (TCS), इनफोसिस (Infosys) इत्यादि।
  6. पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) – यह एक नई अवधारणा है, जिसमें राजकीय क्षेत्र और निजी क्षेत्र एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। इस सहयो का परिणाम अर्थव्यवस्था का विकास है।

प्र० 4. अपने समाज में विद्यमान विभिन्न प्रकार के अधिकारों पर चर्चा करें। वे आपके जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं?
उत्तर- अधिकार के प्रकार :

  1. नागरिक अधिकार (Civil Rights) – सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, अभिव्यक्ति का अधिकार, धर्म का अनुसरण करने का अधिकार और खाद्य अधिकार अनेक नागरिक अधिकार हैं, जो भारत जैसे प्रजातांत्रिक देश में सभी लोगों को प्रदान किए गए हैं।
  2. सामाजिक अधिकार (Social Rights) – सभी भारतीय नागरिकों को कल्याण और सुरक्षा जैसे कि स्वास्थ्य लाभ के न्यूनतम मानक अधिकार के रूप में प्रदान किए गए हैं। मजदूरी की न्यूनतम । दर, वृद्धावस्था से संबंधित लाभ या बीपीएल (BPL-Below the Poverty Line)। विशेषतः गरीबी-रेखा के नीचे बसर कर रहे लोगों के लिए रोजगार भत्ता।
  3. राजनीतिक अधिकार (Political Rights) – वोट डालने का अधिकार और अभिव्यक्ति का अधिकार हमारे नागरिक अधिकार हैं।
  4. कल्याणकारी अधिकार (Welfare Rights) – विकसित पश्चिमी देशों में सामाजिक सुरक्षा। भारत विश्व में सबसे बड़ा प्रजातंत्र और कल्याणकारी राज्य होने के कारण अपने नागरिकों को उपरोक्त अधिकार प्रदान करता है। इन अधिकारों ने भारतीय समाज की संरचना, बनावट और कार्यविधि को रूपांतरित कर दिया है। आजादी, समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विश्वास और धर्म ने सामाजिक जाल की बनावट को रूपांतरित कर दिया है। तथा लोगों को स्वयं में विश्वास है और वे राजनीतिक दृष्टिकोण से सजग और परिपक्व/प्रौढ़ हैं। सामाजिक अधिकार से गरीब लोगों को शिक्षा का अवसर, अच्छा स्वास्थ्य और न्यूनतम मजदूरी प्राप्त । होती है, जिससे लोगों को शोषण से सुरक्षित रखा जाता है। वोट देने का अधिकार लोगों को वस्तुतः राज-निर्माता बना देता है, क्योंकि इसी अधिकार के कारण भारत
    में सरकार को चुना जाता है।

प्र० 5. समाजशास्त्र धर्म का अध्ययन कैसे करता है?
उत्तर- इमाइल दुर्खाइम (Emile Durkheim) के अनुसार, “धर्म पवित्र वस्तुओं से संबंधित अनेक विश्वासों और व्यवहारों की एक ऐसी संगठित व्यवस्था है, जो उन व्यक्तियों को एक नैतिक समुदाय की भावना में बाँधती है, जो उसी प्रकार के विश्वासों और व्यवहारों को अभिव्यक्त करते हैं।”

  • समाजशास्त्री धार्मिक प्राणियों में विश्वास के रूप में धर्म का अध्ययन करते हैं।
  • धर्म, कार्य तथा विश्वास की पद्धति एक सामाजिक प्रपंच और व्यक्तिगत अनुभूति का एक तरीका है।
  • धर्म अलौकिक शक्ति में विश्वास पर आधारित है। जिसमें जीववाद की अवधारणा सम्मिलित है।
  • समाजशास्त्रीय परिदृश्य में धर्म समाज के लिए अनेक कार्यों का निर्वाह करता है। यह सामाजिक नियंत्रण का एक स्वरूप है।
  • धर्म सभी ज्ञात समाजों में विद्यमान है। हालाँकि धार्मिक विश्वास और व्यवहार का स्वरूप विभिन्न संस्कृतियों में अलग-अलग है।
  • धर्म वस्तुतः एक व्यक्तिगत प्रपंच है, लेकिन इसका सार्वजनिक पहलू भी है, जिसका सामाजिक संस्था पर व्यापक प्रभाव है।
  • धर्म प्रथाओं और अनुष्ठानों का संग्रह है। धर्म की उपस्थिति के कारण लोग प्रथाओं और प्रतिमानों का आदर करते हैं, जो सामाजिक तंत्र का पोषण करते हैं।
  • धर्म लोगों को जटिल, संतुलित, एकीकृत, स्वस्थ्य और खुशहाल व्यक्तित्व के निर्माण तथा सामाजिक कल्याणकारी कार्यों में सहभागिता के लिए प्रेरित करता है।
    समाजशास्त्री धर्म के लोक स्वरूप का अध्ययन करता है, क्योंकि सामाजिक परिदृश्य में इसका सर्वाधिक महत्व है, जो समाज और सामाजिक संस्था का ध्यान रखता है।

प्र० 6. सामाजिक संस्था के रूप में विद्यालय पर एक निबंध लिखिए। अपनी पढ़ाई और वैयक्तिक प्रेक्षणों, दोनों का इसमें प्रयोग कीजिए।
उत्तर-

  • विद्यालय एक सामाजिक संस्था है, जो व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य के साथ औपचारिक शिक्षा की व्यवस्था करती है।
  • वर्ग शिक्षण और पाठ्यक्रम एवं सह-पाठ्यक्रम से संबंधित क्रिया-कलापों के माध्यम से विद्यालय छात्रों को बड़ा होने में, पूर्ण रूप से कार्य करने में, सृजनात्मक आत्म-विमोचन की क्रिया और अच्छा प्राणी बनने में सहायता करता है।
  • विद्यालय बच्चों के लिए शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, धार्मिक और सामाजिक विकास की व्यवस्था प्रस्तुत करता है।
  • विद्यालय ऐसे वातावरण की व्यवस्था करता है, जिसके द्वारा बच्चों तक सामाजिक प्रतिमानों को संचार होता है।
    निर्देश – उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर विद्यार्थी स्वयं निबंध लिखें।

प्र० 7. चर्चा कीजिए कि सामाजिक संस्थाएँ परस्पर कैसे संपर्क करती हैं। आप विद्यालय के वरिष्ठ छात्र के रूप में स्वयं के बारे में चर्चा आरंभ कर सकते हैं। साथ ही विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा आपके व्यक्तित्व को किस प्रकार एक आकार दिया गया, इसके बारे में भी चर्चा करें। क्या आप इन सामाजिक संस्थाओं से पूरी तरह नियंत्रित हैं या आप इनका विरोध या इन्हें पुनःपरिभाषित कर सकते हैं?
उत्तर- विद्यार्थी स्वयं करें।

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NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 15

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 15 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 15 Life on the Earth (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) निम्नलिखित में से कौन जैव मंडल में सम्मिलित हैं
(क) केवल पौधे
(ख) केवल प्राणी
(ग) सभी जैव व अजैव जीव
(घ) सभी जीवित जीव
उत्तर- (ग) सभी जैव व अजैव जीव

(ii) उष्णकटिबंधीय घास का मैदान निम्न में से किसे नाम से जाने जाते हैं?
(क) प्रेयरी
(ख) स्टैपी
(ग) सवाना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (ग) सवाना

(iii) चट्टानों में पाए जाने वाले लोहांश के साथ ऑक्सीजन मिलकर निम्नलिखित में से क्या बनाती है?
(क) आयरन कार्बोनेट
(ख) आयरन ऑक्साइड
(ग) आयरन नाइट्राइट
(घ) आयरन सल्फेट
उत्तर- (ख) आयरन ऑक्साइड

(iv) प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया के दौरान, प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड जल के साथ मिलकर क्या बनाती है?
(क) प्रोटीन
(ख) कार्बोहाइड्रेटस
(ग) एमिनोएसिड
(घ) विटामिन
उत्तर- (ख) कार्बोहाइड्रेटस

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तरे लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) पारिस्थितिकी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- जीवधारियों का आपस में व उनका भौतिक पर्यावरण से अंतर्संबंधों का वैज्ञानिक अध्ययन ही पारिस्थितिकी है। पारिस्थितिकी ही प्रमुख रूप से जीवधारियों के जन्म, विकास, वितरण, प्रवृत्ति व उनके प्रतिकूल
अवस्थाओं में भी जीवित रहने से संबंधित है।

(ii) पारितंत्र क्या है? संसार के प्रमुख पारितंत्र प्रकारों को बताएँ।
उत्तर- किसी विशेष क्षेत्र में किसी विशेष समूह के जीवधारियों का भूमि, जल अथवा वायु (अजैविक तत्वों) से ऐसा अंतर्संबंध, जिसमें ऊर्जा प्रवाह व पोषण श्रृंखला स्पष्ट रूप से समायोजित हो, पारितंत्र कहा जाता है। पारितंत्र मुख्यतः दो प्रकार के हैं- (i) स्थलीय पारितंत्र (ii) जलीय पारितंत्र। स्थलीय पारितंत्र को वन, घास क्षेत्र, मरुस्थल तथा टुण्ड्रो पारितंत्र तथा जलीय पारितंत्र को समुद्री पारितंत्र तथा ताजे पानी के परितंत्र में बाँटा जाता है। समुद्री परितंत्र को महासागरीय, ज्वारनदमुख, प्रवाल भित्ति पारितंत्र तथा ताजे पानी के पारितंत्र को झीलें, तालाब, सरिताएँ, कच्छ व दलदल पारितंत्र में बाँटा जाता है।

(iii) खाद्य श्रृंखला क्या है? चराई खाद्य श्रृंखला का एक उदाहरण देते हुए इसके अनेक स्तर बताएँ।
उत्तर- प्राथमिक उपभोक्ता, द्वितीयक उपभोक्ताओं के भोजन बनते हैं। द्वितीयक उपभोक्ता फिर तृतीयक उपभोक्ताओं के द्वारा खाए जाते हैं। यह खाद्य क्रम और इस क्रम से एक स्तर से दूसरे स्तर पर ऊर्जा प्रवाह ही खाद्य श्रृंखला कहलाती है। चराई खाद्यश्रृंखला पौधों से शुरू होकर मांसाहारी तक जाती है, जिसमें शाकाहारी जीव घास खाता है और शाकाहारी जीव को मांसाहारी जीव खाता है, हर स्तर पर ऊर्जा का ह्रास होता है, जिसमें श्वसन, उत्सर्जन व विघटन प्रक्रियाएँ सम्मिलित हैं। खाद्य श्रृंखलाओं में तीन से पाँच स्तर होते हैं और हर स्तर पर ऊर्जा कम होती है। उदाहरणस्वरूप
घास-बकरी-शेर घास-कीट-मेढक-साँप-बाजे

(iv) खाद्य जाल से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित बताएँ।
उत्तर- खाद्य श्रृंखलाएँ पृथक अनुक्रम न होकर एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। जैसे-एक चूहा, जो अन्न पर निर्भर है, वह अनेक द्वितीयक उपभोक्ताओं का भोजन है और तृतीयक माँसाहारी अनेक द्वितीयक जीवों से अपने भोजन की पूर्ति करते हैं। इस प्रकार प्रत्येक माँसाहारी जीव एक से अधिक प्रकार के शिकार पर निर्भर हैं। परिणामस्वरूप खाद्य श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। प्रजातियों के इस प्रकार जुड़े होने (अर्थात जीवों की खाद्य श्रृंखलाओं के विकल्प उपलब्ध होने पर) को खाद्य जाल कहा जाता है।

(v) बायोम क्या है?
उत्तर- बायोम पौधों एवं प्राणियों का एक समुदाय है जो एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में पाया जाता है। पृथ्वी पर विभिन्न बायोम की सीमा का निर्धारण जलवायु व अपक्षय संबंधी तत्व करते हैं। अत: विशेष परिस्थितियों में पादप एवं जंतुओं के अंतर्संबंधों के कुल योग को बायोम कहते हैं। इसमें वर्षा, तापमान, आर्द्रता व मिट्टी संबंधी अवयव भी शामिल हैं। संसार के कुछ प्रमुख बायोम वन, मरुस्थलीय, घास भूमि और उच्च प्रदेशीय हैं।

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:
(i) संसार के विभिन्न वन बायोम की महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर- वन बायोम को चार भागों में बाँटा जाता है
(i) भूमध्यरेखीय उष्ण कटिबंधीय
(ii) पर्णपाती उष्ण कटिबंधीय
(iii) शीतोष्ण कटिबंधीय
(iv) बोरियल।

(i) भूमध्यरेखीय उष्ण कटिबंधीय बायोम – यह भूमध्यरेखा से 10° उत्तर और दक्षिण अक्षांश के बीच स्थित है। यहाँ तापमान सालों भर 20° से 25° सेंटीग्रेड रहता है। यहाँ की मृदा अम्लीय है, जिसमें पोषक तत्वों की कमी है। यहाँ वृक्ष काफी लंबे और घने होते हैं।

(ii) पर्णपाती उष्ण कटिबंधीय बायोम – यह बायोम 10° से 25° उत्तर व दक्षिण अक्षांश के बीच स्थित है। यहाँ तापमान 25 से 30° सेंटीग्रेड के बीच होता है। यहाँ वर्षा का वार्षिक औसत 1,000 मि०मी० एक ऋतु में है। यहाँ मिट्टी पोषक तत्वों के मामले में धनी है। यहाँ अनेक प्रजातियों के कम घने तथा मध्यम ऊँचाई के वृक्ष एक साथ पाए जाते हैं।

(iii) शीतोष्ण कटिबंधीय बायोम – यह बायोम पूर्वी उत्तरी अमेरिका, उत्तर-पूर्वी एशिया, पश्चिमी एवं मध्य यूरोप में पाया जाता है। यहाँ का तापमान 20° से 30° सेंटीग्रेड के बीच रहता है। यहाँ वर्षा समान रुप से 750 से 1500 मि०मी० होती है। यहाँ असाधारण शीत पड़ती है तथा ऋतुएँ भी स्पष्ट हैं। यहाँ की मिट्टी उपजाऊ है, जो अवधटक जीवों व कूड़ा-कर्कट आदि पदार्थों-हयूमस से भरपूर है। यहाँ मध्यम घने चौड़े पत्ते वाले वृक्ष पाए जाते हैं। यहाँ पौधों की प्रजातियों में कम विविधता पाई जाती है। ओक, बीच, मेप्पल आदि कुछ सामान्य प्रजातियों के वृक्ष यहाँ बहुतायत में पाए जाते हैं। गिलहरी, खरगोश, पक्षी, काले भालू, पहाड़ी शेर व स्कंक यहाँ पाए जाने वाले कुछ प्रमुख प्राणी हैं।

(iv) बोरियल बायोम – यह बायोम यूरेशिया व उत्तरी अमेरिका के उच्च अक्षांशीय भाग, साइबेरिया के कुछ भाग, अलास्का, कनाडा व स्केंडेनेवियन देश में पाया जाता है। यहाँ छोटा आर्द्र ऋतु व मध्यम रूप से गर्म ग्रीष्म ऋतु तथा लंबी (वर्षा रहित) शीत ऋतु होती है। यहाँ वर्षा मुख्यतः हिमपात के रूप में 400 से 1000 मि०मी० होती है। यहाँ की मिट्टी अम्लीय है, जिसमें पोषक तत्वों की कमी है। यहाँ मिट्टी की परत अपेक्षाकृत पतली है। यहाँ सामान्यतः पाइप, फर, स्पूस आदि के सदाबहार कोणधारी वन पाए जाते हैं। कठफोड़ा, चील, भालू, हिरण, खरगोश, भेड़िया, चमगादड़ आदि यहाँ पाई जाने वाली प्रमुख प्रजातियाँ है।

(ii) जैव भू-रासायनिक चक्र क्या है? वायुमंडल में नाइट्रोजन का यौगिकीकरण कैसे होता है? वर्णन करों
उत्तर- सूर्य ऊर्जा का मूल स्रोत है, जिस पर संपूर्ण जीवन निर्भर है। यही ऊर्जा जैवमंडल में प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा जीवन प्रक्रिया आरंभ करती है, जो हरे पौधों के लिए भोजन व ऊर्जा का मुख्य आधार है। प्रकाश संश्लेषण के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन व कार्बनिक यौगिक में परिवर्तित हो जाती है। धरती पर पहुँचने वाले सूर्यातप का बहुत छोटा भाग (केवल 0.1 प्रतिशत) प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया में काम
आता है। इसका आधे से अधिक भाग पौधे की श्वसन-विसर्जन क्रिया में और शेष भाग अस्थायी रूप से पौधे के अन्य भागों में संचित हो जाता है। विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि पिछले 100 करोड़ वर्षों में वायुमंडल एवं जलमंडल की संरचना में रासायनिक घटकों का संतुलन लगभग एक जैसा अर्थात् बदलाव रहित रहा है।

रासायनिक तत्वों का यह संतुलन पौधे व प्राणी ऊतकों से होने वाले चक्रीय प्रवाह के द्वारा बना रहता है। यह चक्र जीवों द्वारा रासायनिक तत्वों के अवशोषण से आरंभ होता है और उनके वायु, जल व मिट्टी में विघटन से पुनः आरंभ होता है। ये चक्रे मुख्यतः सौर ताप से संचालित होते हैं। जैवमंडल में जीवधारी व पर्यावरण के बीच ये रासायनिक तत्वों के चक्रीय प्रवाह जैव भू-रासायनिक चक्र कहे जाते हैं। जैव भू-रासायनिक चक्र दो प्रकार के हैं–एक गैसीय और दूसरा तलछटी चक्र। गैसीय चक्र में पदार्थ के मुख्य भंडार वायुमंडल व महासागर हैं। तलछटी चक्र के प्रमुख भंडार पृथ्वी की भूपर्पटी पर पाई जाने वाली मिट्टी, तलछट व अन्य चट्टाने हैं।

(iii) पारिस्थितिकी संतुलन क्या है? इसके असंतुलन को रोकने के महत्त्वपूर्ण उपायों की चर्चा करें।
उत्तर- किसी पारितंत्र या आवास में जीवों के समुदाय में परस्पर गतिक साम्यता की अवस्था ही पारिस्थितिकी संतुलन है। यह तभी संभव है जब जीवधारियों की विविधता अपेक्षाकृत स्थायी रहे। क्रमशः परिवर्तन भी होता है, लेकिन ऐसा प्राकृतिक अनुक्रमण के द्वारा ही होता है। इसे पारितंत्र में हर प्रजाति की संख्या के एक स्थायी संतुलन के रूप में भी वर्णित किया जा सकता है। यह संतुलन निश्चित प्रजातियों में प्रतिस्पर्धा
आपसी सहयोग से होता है। कुछ प्रजातियों के जिंदा रहने के संघर्ष से भी पर्यावरण संतुलन प्राप्त किया जाता है। संतुलन इस बात पर निर्भर करता है कि कुछ प्रजातियाँ अपने भोजन व जीवित रहने के लिए दूसरी प्रजातियों पर निर्भर रहती हैं। इसके उदाहरण विशाल घास के मैदानों में मिलते हैं, जहाँ शाकाहारी जंतु अधिक संख्या में होते हैं और उन्हें मांसाहारी जीव खाते हैं। इस तरह से पारिस्थितिकी में संतुलन बना रहता है।

पारिस्थितिकी असंतुलन को रोकने के उपाय – विशेष आवास स्थानों में पौधों व प्राणी समुदायों में घनिष्ट अंतर्संबंध पाए जाते हैं। निश्चित स्थानों पर जीवों में विविधता वहाँ के पर्यावरणीय कारकों का संकेतक है। इन कारकों का समुचित ज्ञान व समझ ही पारितंत्र के संरक्षण व बचाव के प्रमुख आधार हैं।

परियोजना कार्य-
(i) प्रत्येक बायोम की प्रमुख विशेषताओं को बताते हुए विश्व के मानचित्र पर विभिन्न बायोम के वितरण को दशाईए।
(ii) अपने स्कूल प्रांगण में पाए जाने वाले पेड़, झाड़ी व सदाबहार पौधों पर एक संक्षिप्त लेख लिखें और लगभग आधे दिन यह पर्यवेक्षण करें कि किस प्रकार के पक्षी इस वाटिका में आते हैं। क्या आप इन पक्षियों की विविधता का भी उल्लेख कर सकते हैं?
उत्तर- छात्र स्वयं करें।

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NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 10 Comparative Development Experiences of India and its Neighbours (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास
(पाठ्यपुस्तक से)

प्र.1. क्षेत्रीय और आर्थिक समूहों के बनने के कारण दीजिए।
उत्तर : पिछले लगभग दो दशकों से वैश्वीकरण ने विश्व के प्रायः सभी देशों में तीन आर्थिक परिवर्तन किए हैं। इन परिवर्तनों के कुछ अल्पकालिक, तो कुछ दीर्घकालिक प्रभाव भी हैं। भारत भी कोई अपवाद नहीं है। अत: विश्व के सभी राष्ट्र अपनी अर्थव्यवस्थाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने के लिए अनेक उपाय अपनाते रहे हैं। इस उद्देश्य की प्राप्ति में उन्हें क्षेत्रीय एवं आर्थिक समूह बनाना सहायक प्रतीत होता है।

प्र.2. वे विभिन्न साधन कौन-से हैं जिनकी सहायता से देश अपनी घरेलू व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं?
उत्तर : निम्नलिखित साधनों के द्वारा देश अपनी घरेलू व्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं
(क) राष्ट्र विभिन्न प्रकार का क्षेत्रीय एवं आर्थिक समूहों जैसे आसियान, सार्क, जी-8, जी-20 ब्रिक्स आदि बना रहे हैं।
(ख) राष्ट्र आर्थिक सुधार लागू कर रहे हैं और इस तरह अन्य देशों के लिए अपने देश की अर्थव्यवस्था को खोल रहे हैं।
(ग) विभिन्न राष्ट्र इस बात के लिए काफी उत्सुकता दिखा रहे हैं कि वे अपने पड़ोसी राष्ट्रों द्वारा अपनाई गई विकासात्मक प्रक्रियाओं को समझने की कोशिश करें। इससे उन्हें अपने पड़ोसी देशों की शक्तियों एवं कमजोरियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।

प्र.3. वे समान विकासात्मक नीतियाँ कौन-सी हैं जिनका भारत और पाकिस्तान ने अपने-अपने विकासात्मक पथ के लिए पालन किया है?
उत्तर : भारत और पाकिस्तान की विकासात्मक पथ की समानताओं को सारांश रूप में नीचे दिया गया है

(क)
दोनों ने अपनी विकास की ओर यात्रा 1947 में एक साथ मिलती-जुलती समस्याओं जैसे विभाजन की समस्याएँ और शरणार्थियों को पुनर्वासित करने की समस्या आदि के साथ शुरू किया। भारत ने अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना 1951 में उद्घोषित की जबकि पाकिस्तान ने 1956 में अपनी मध्यकालिक योजना की उद्घोषणा की।

(ख)
दोनों ने विकास के लिए मिश्रित अर्थव्यवस्था प्रणाली को अपनाया। दोनों अर्थव्यवस्थाओं में सार्वजनिक और निजि का सह-अस्तित्व रहा।

(ग)
दोनों ही देशों ने सार्वजनिक क्षेत्रक को अधिक महत्त्व दिया। दोनों ही देशों ने एक बड़ा सार्वजनिक क्षेत्रक बनाया और सामाजिक विकास के लिए सार्वजनिक व्यय को बढ़ाया।

(घ)
दोनों ही देशों ने लगभग समान समय पर आर्थिक सुधार लागू किए। पाकिस्तान ने आर्थिक सुधार 1988 में और भारत ने 1991 में लागू किए।

(ङ)
दोनों ही देशों ने आर्थिक सुधार इच्छा से नहीं, दबाव के कारण शुरू किए। |

प्र.4. 1958 में प्रारंभ की गई चीन के ग्रेट लीप फॉरवर्ड अभियान की व्याख्या कीजिए।
उत्तर : 1958 में चीन द्वारा ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ नामक अभियान शुरू किया गया था जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर देश का । औद्योगिकीकरण करना था।
(क) ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ का उद्देश्य कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को तीव्र औद्योगिकरण के द्वारा एक आधुनिक अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना था।
(ख) इस कार्यक्रम के अंतर्गत लोगों को अपने घर के पास उद्योग शुरू करने की प्रेरणा दी गई।
(ग) इस कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में कम्यून पद्धति शुरू की गई। कम्यून पद्धति के अनुसार, लोग सामूहिक रूप से खेती करते थे। 1958 में 26000 कम्यून थे जिसमें समस्त कृषक शामिल थे।
(घ) जी.एल.एफ. अभियान में काफी समस्याएँ आई जब भयंकर सूखे ने चीन में तबाही मचा दी जिसमें लगभग 30 मिलियन लोग मारे गए।

प्र.5. चीन की तीव्र औद्योगिक संवृद्धि 1978 में उसके सुधारों के आधार पर हुई थी, क्या आप इस कथन से सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : हाँ, हम इस कथन से सहमत हैं कि चीन की तीव्र औद्योगिक संवृद्धि 1978 में उसके सुधारों के आधार पर हुई थी।

(क)
चीन में सुधार चरणों में लागू किए गए। सबसे पहले कृषि, विदेशी व्यापार और निवेश क्षेत्रकों में सुधार किए गए। कृषि क्षेत्रक में कम्यून भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में बाँट दिया गया जिन्हें अलग-अलग परिवारों में आबंटित किया गया।

(ख)
फिर इन सुधारों को औद्योगिक क्षेत्रक तक फैलाया गया। निजी फर्मों को विनिर्माण इकाइयाँ लगाने की अनुमति दे दी गई। स्थानीय लोगों और सहकारिताओं को भी उत्पादन की अनुमति दे दी गई। इस अवस्था में सार्वजनिक क्षेत्रक अथवा राज्य के उद्यमों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।

(ग)
इससे दोहरी कीमत निर्धारण पद्धति लागू करनी पड़ी। इसका अर्थ यह है कि कीमत का निर्धारण दो प्रकार से किया जाता था। किसानों और औद्योगिक इकाइयों से यह अपेक्षा की जाती थी कि वे सरकार द्वारा निर्धारित की गई कीमतों के आधार पर आगतें एवं निगतों की निर्धारित मात्राएँ खरीदेंगे और बेचेंगे और शेष वस्तुएँ बाजार कीमतों पर खरीदी और बेची जाती थीं।

(घ)
विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) स्थापित किए गए।

प्र.6. पाकिस्तान द्वारा अपने आर्थिक विकास के लिए किए गए विकासात्मक पहलों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : पाकिस्तान द्वारा अपने आर्थिक विकास के लिए किए गए विकासात्मक पहलों को नीचे सारांश रूप में दिया गया है|

(क)
पाकिस्तान में सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रकों के सह-अस्तित्व वाली मिश्रित अर्थव्यवस्था मॉडल का अनुसरण किया गया।

(ख)
1950 और 1960 के दशकों के अंत में पाकिस्तान के अनेक प्रकार की नियंत्रित नीतियों का प्रारूप लागू किया गया। उक्त नीति में उपभोक्ता वस्तुओं के विनिर्माण के लिए प्रशुल्क संरक्षण करना तथा प्रतिस्पर्धी आयातों पर प्रत्यक्ष आयात नियंत्रण शामिल था।

(ग)
हरित क्रांति के आने से यंत्रीकरण का युग शुरू हुआ और चुनिंदा क्षेत्रों की आधारिक संरचना में सरकारी निवेश में वृद्धि हुई, जिसके फलस्वरूप खाद्यान्नों के उत्पादन में भी अंत तक वृद्धि हुई।

(घ)
1970 के दशक में पूँजीगत वस्तुओं के उद्योगों का राष्ट्रीयकरण हुआ। 1970 और 1980 के दशकों के अंत में अराष्ट्रीयकरण पर जोर दिया गया है तथा निजी क्षेत्रक को प्रोत्साहित किया जा रहा था। इस अवधि के दौरान पाकिस्तान को पश्चिमी राष्ट्रों से भी वित्तीय सहायता प्राप्त हुई और मध्य पूर्व देशों को जाने वाले प्रवासियों से निरंतर पैसा मिला।

(घ)
1988 में देश में सुधार शुरू किए गए।

प्र.7. चीन में एक संतान’ नीति का महत्त्वपूर्ण निहितार्थ क्या है?
उत्तर : चीन में एक संतान’ नीति का महत्त्वपूर्ण निहितार्थ नीचे दिया गया है

  • चीन में एक संतान’ नीति ने सफलतापूर्वक जनसंख्या वृद्धि दर को कम किया है।
  • कुछ दशकों के बाद चीन में युवा लोगों की तुलना में बुजुर्ग लोगों का अनुपात बढ़ जाएगा।
  • इससे चीन कम कार्यकर्ताओं के साथ अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा लाभ देने पर मजबूर होगा।

प्र.8. चीन, पाकिस्तान और भारत के मुख्य जनांकिकीय संकेतकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : चीन द्वारा एक संतान नीति 1979 से अपनाए जाने के फलस्वरूप जनसंख्या वृद्धि दर 1979 के 1.33% से 2005 में 0.64% तक कम हो गया है।
(i) जनसंख्या संवृद्धि दर देश
NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 10 (Hindi Medium) 1
उत्तर :
NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 10 (Hindi Medium) 2
प्र.9. मानव विकास के विभिन्न संकेतकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : मानव विकास के विभिन्न संकेतक इस प्रकार हैं

(क)
मानव विकास सूचकांक-इसका मूल्य जितना कम हो प्रदर्शन उतना बेहतर माना जाता है तथा इसके विपरीत।
(ख) जन्म के समय जीवन प्रत्याशा-इसका उच्च मान बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है तथा इसके विपरीत।
(ग) प्रौढ़ साक्षरता दर-इसका उच्च मान बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है तथा इसके विपरीत।
(घ) सकल राष्ट्रीय आय प्रति व्यक्ति-इसका उच्च मान बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है तथा इसके विपरित।
(ङ) निर्धनता रेखा के नीचे खरीबी-एक निम्न स्तर बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है तथा इसके विपरीत।
(च) शिशु मृत्यु दर-एक निम्न स्तर बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है तथा इसके विपरीत।
(छ) मातृ मृत्यु दर-एक निम्न स्तर बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है तथा इसके विपरीत।
(ज) उत्तम जल तक धारणीय पहुँच वाली जनसंख्या (%)-एक उच्च स्तर बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है तथा इसके विपरीत।
(झ) उत्तम स्वच्छता तक धारणीय पहुँच वाली जनसंख्या (%)-एक उच्च स्तर बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है तथा इसके विपरीत।
(अ) नगरों में रहने वाली जनसंख्या-इसका उच्च स्तर बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है।
(ट) निर्भरता अनुपात-इसका निम्न स्तर बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है तथा इसके विपरीत।

प्र.10. स्वतंत्रता संकेतक की परिभाषा दीजिए। स्वतंत्रता संकेतकों के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
 यह सामाजिक और आर्थिक निर्णय लेने में जनसंख्यिकीय भागीदारी का एक सूचक है। इसके उदाहरण इस प्रकार हैं
(क) सामाजिक व राजनैतिक निर्णय प्रक्रिया में लोकतांत्रिक भागेदारी।
(ख) नागरिकों के अधिकारों की संवैधानिक संरक्षण की सीमा।
(ग) न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए संवैधानिक संरक्षण की सीमा या न्यायपालिका की स्वतंत्रता को संरक्षण देने के लिए संवैधानिक सीमा।

प्र.11. उन विभिन्न कारकों का मूल्यांकन कीजिए जिनके आधार पर चीन में आर्थिक विकास में तीव्र वृद्धि (तीव्र आर्थिक विकास हुआ) हुई।
उत्तर :
(क) जी.एल.एफ. अभियान-1958 में एक ग्रेट लीप फॉरवर्ड अभियान शुरू किया गया जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर देश का औद्योगिकीकरण करना था। इसके अंतर्गत लोगों को अपने घर के पास उद्योग लगाने के लिए प्रेरित किया गया। 1958 में 26,000 ‘कम्यून’ थे जिनमें प्रायः समस्त कृषक शामिल थे।
(ख) महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रांति-1965 में माओं ने महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रांति का आरंभ किया (1966-1976) छात्रों और विशेषज्ञों को ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने और अध्ययन करने के लिए भेजा गया।
(ग) 1978 के आर्थिक सुधार-संप्रति चीन में जो तेज औद्योगिक संवृद्धि हो रही है, उसकी जड़े 1978 में लागू किए गए सुधारों में खोजी जा सकती है। प्रारंभिक चरण में कृषि, विदेशी व्यापार और निवेश क्षेत्रकों में सुधार किए गए। बाद के चरण में औद्योगिक क्षेत्र में सुधार आरंभ किए गए।
(घ) दोहरी कीमत प्रणाली-सुधार प्रक्रिया में दोहरी कीमत निर्धारण प्रणाली लागू की गई। इसके अतिरिक्त विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित किए गए।

प्र.12. भारत, चीन और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं से संबंधित विशेषताओं को तीन शीर्षकों के अंतर्गत समूहित कीजिये
NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 10 (Hindi Medium) 3

प्र.13. पाकिस्तान में धीमी संवृद्धि तथा पुनः निर्धनता के कारण बताइए।
उत्तर : पाकिस्तान में धीमी संवृद्धि तथा निर्धनता के पुनः निर्धनता के निम्नलिखित कारण बताइए
(क) कृषि संवृद्धि और खाद्य पूर्ति, तकनीकी परिवर्तन संस्थागत प्रक्रिया पर आधारित न होकर अच्छी फसल पर आधारित था। जब फसल अच्छी नहीं होती थी तो आर्थिक संकेतक नकारात्मक प्रवृत्तियाँ दर्शाते थे।
(ख) पाकिस्तान में अधिकांश विदेशी मुद्रा मध्य पूर्व में काम करने वाले पाकिस्तानी श्रमिकों की आय प्रेषण तथा अति अस्थिर कृषि उत्पादों के निर्यातों से प्राप्त होती है।
(ग) विदेशी ऋणों पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति बढ़ रही थी, तो दूसरी ओर पुराने ऋणों को चुकाने में कठिनाई बढ़ती जा रही थी।

प्र.14. कुछ विशेष मानव विकास संकेतकों के संदर्भ में भारत, चीन और पाकिस्तान के विकास की तुलना कीजिए और उसका वैषम्य बताइए।
उत्तर : नीचे एक तालिका दी गई है जो भारत, पाकिस्तान और चीन के मानव विकास संकेतकों का एक तुलनात्मक अध्ययन कर रही है।
NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 10 (Hindi Medium) 4
उपरोक्त तालिका से स्पष्ट है कि चीन, भारत और पाकिस्तान से अनेक संकेतकों में अग्रणी है। पाकिस्तान भारत की तुलना में शहरीकरण, पेय स्वच्छ जल की धारणीय पहुँच तथा निर्धनता रेखा में अग्रणी है।

प्र.15. पिछले दो दशकों में चीन और भारत में देखी गई संवृद्धि दरों की प्रवृत्तियों पर टिप्पणी दीजिए।
उत्तर : पिछले दो दशकों में चीन और भारत की संवृद्धि दरें नीचे दी गई हैं। 1980-2003 में सकल घरेलू उत्पाद की संवृद्धि दर
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(क) चीन का सकल घरेलू उत्पाद US $ क 7.2 ट्रीलियन के साथ विश्व में दूसरे स्थान पर है। भारत का सकल घरेलू उत्पाद $ 3.3 ट्रीलियन था।
(ख) चीन की संवृद्धि दर 10.3% की दर पर दोहरे अंकों में थी जबकि भारत के लिए यह आँकड़े 5.7% थी।

प्र.16. निम्नलिखित रिक्त स्थानों को भरिए।
(क) 1956 में ………………………….. में प्रथम पंचवर्षीय योजना शुरू हुई थी। (पाकिस्तान/चीन)
(ख) मातृ मृत्यु दर ………………………….. में अधिक है। (चीन/पाकिस्तान)
(ग) निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का अनुपात ………………………….. में अधिक है। (भारत/पाकिस्तान)
(घ) ………………………….. में आर्थिक सुधार 1978 में शुरू किए गए थे। (चीन/पाकिस्तान)

उत्तर :

(क) पाकिस्तान
(ख) पाकिस्तान
(ग) भारत
(घ) चीन

Hope given Indian Economic Developments Class 11 Solutions Chapter 10 are helpful to complete your homework.

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NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 7

NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 7 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 7 Introduction to Remote Sensing (Hindi Medium)

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 11 Geography. Here we have given NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 7 Introduction to Remote Sensing.

[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) धरातलीय लक्ष्यों को सुदूर संवेदन विभिन्न साधनों के
माध्यम से किया जाता है, जैसे –
(क) सुदूर संवेदक
(ख) मानवीय नेत्र
(ग) फोटोग्राफ़िक
(घ) इनमें से कोई नहीं।
निम्न में कौन-सा विकल्प उनके विकास का सही क्रम है:
(क) ABC
(ख) BCA
(ग) CAB
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (ख) BCA

(ii) निम्नलिखित में से कौन-से विद्युत चुम्बकीय विकिरण क्षेत्र का प्रयोग उपग्रह सुदूर संवेदन में नहीं होता है?
(क) सूक्ष्म तरंग क्षेत्र
(ख) अवरक्त क्षेत्र
(ग) एक्स रे क्षेत्र
(घ) दृश्य क्षेत्र
उत्तर- (ग) एक्स रे क्षेत्र

(iii) चाक्षुष व्याख्या तकनीक में निम्न में किस विधि का प्रयोग नहीं किया जाता है?
(क) धरातलीय लक्ष्यों की स्थानीय व्यवस्था
(ख) प्रतिबिंब के रंग-परिवर्तन की आवृत्ति
(ग) लक्ष्यों को अन्य लक्ष्यों के संदर्भ में
(घ) आंकिक बिंब प्रक्रमण
उत्तर- (क) धरातलीय लक्ष्यों की स्थानीय व्यवस्था

प्र० 2. निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
(i) सुदूर संवेदन अन्य पारंपरिक विधियों से बेहतर तकनीक क्यों है?
उत्तर- सुदूर संवेदन अन्य पारंपरिक विधियों से निम्न कारणों से बेहतर तकनीक है
(i) यह किसी बड़े क्षेत्र का विहंगम दृश्य प्रस्तुत करता है।
(ii) यह समय आधार रेखा पर विश्वसनीय तथा वास्तविक अथवा लगभग वास्तविक सूचनाएँ प्रदान करता है।
(iii) यह भूमि सर्वेक्षण की अपेक्षा कम खर्चीला है और इससे सूचनाएँ शीघ्र ही एकत्रित हो जाती हैं।
(iv) यह दृष्टिगोचर तथा डिजिटल व्याख्या के लिए क्रमशः सादृश तथा डिजिटल आँकड़े प्रदान करता है।
(v) इस पर खराब मौसम तथा दुर्गम भूमि का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

(ii) आई०आर०एस० व इंसेट क्रम के उपग्रहों में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर- आई०आर०एस० वे इंसेट क्रम के उपग्रहों में अंतर-
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(iii) पुशबूम क्रमवीक्षक की कार्य-प्रणाली का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर- पुशबूम क्रमवीक्षक बहुत सारे संसूचकों पर आधारित होता है, जिनकी संख्या विभेदन के कार्य-क्षेत्र को क्षेत्रीय विभेदन से विभाजित करने से प्राप्त संख्या के समान होती है। उदाहरण के लिए फ्रांस के सुदूर संवेदन उपग्रह स्पॉट में लगे उच्च विभेदन दृश्य विकिरणमापी संवेदक का कार्य-क्षेत्र 60 किलोमीटर है तथा उसका क्षेत्रीय विभेदन 20 मीटर है। अगर हम 60 किलोमीटर अथवा 60,000 मीटर को 20 मीटर से विभाजित करें तो हमें 3,000 का आँकड़ा प्राप्त होगा अर्थात् SPOT में लगे HRV-1 संवेदक में 3,000 संसूचक लगाए गए हैं। पुशबूम स्कैनर में सभी डिटेक्टर पंक्ति में क्रमबद्ध होते हैं और प्रत्येक डिटेक्टर पृथ्वी के ऊपर अधोबिन्दु दृश्य पर 20 मीटर के आयाम वाली परावर्तित ऊर्जा का संग्रहण करते हैं।

प्र०3. निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दें६
(i) विस्कब्रूम क्रमवीक्षक की कार्यविधि का चित्र की सहायता से वर्णन करें तथा यह भी बताएँ कि यह पुशबूम क्रमवीक्षक से कैसे भिन्न है?
उत्तर- विस्कब्रूम क्रमवीक्षक में एक घूमने वाला दर्पण व एकमात्र संसूचक लगा होता है। दर्पण इस प्रकार से विन्यासित होता है कि जब यह एक चक्कर पूरा करता है, तो संसूचक स्पेक्ट्रम के दृश्य एवं अवरक्त क्षेत्रों में बहुत सारे सँकरे स्पेक्ट्रमी बैन्डों में प्रतिबिम्ब प्राप्त करते हुए दृश्य क्षेत्र में 90° से 120° के मध्य प्रस होता है। संवेदक का वह पूरा क्षेत्र, जहाँ तक यह पहुँच सकता है, उसे स्कैनर का कुल दृष्टि-क्षेत्र कहा जाता है। पूरे क्षेत्र के क्रमवीक्षण के लिए संवेदक का प्रकाशीय सिरा एक निश्चित आयाम का होता है, जिसे तात्क्षणिक दृष्टि-क्षेत्र कहा जाता है।
NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 7 (Hindi Medium) 3
NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 7 (Hindi Medium) 3.1
इसका मुख्य अंतर यह है कि विस्कब्रूम एकमात्र संसूचक पर आधारित है, जबकि पुशबूम में बहुत से संसूचक हैं।

(ii) नीचे के चित्रों में हिमालय क्षेत्र की वनस्पति आवरण में बदलाव को पहचानें व सूचीबद्ध करें।
NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 7 (Hindi Medium) 3.2
चित्र : आई०आर०एस० उपग्रह द्वारा प्राप्त मई (बाएँ) एवं नवंबर (दाएँ) में हिमालय तथा उत्तरी मैदान ( भारत ) के प्रतिबिंब वनस्पति | के प्रकार में अंतर दर्शाते हैं। मई के प्रतिबिंब में लाल धब्बे शंकुधारी वन दर्शाते हैं। नवंबर के प्रतिबिंब के अतिरिक्त लाल धब्बे पर्णपाती वन दर्शाते हैं तथा हल्का लाल रंग फ़सल को दर्शाता है।
उत्तर- हिमालय के तराई क्षेत्रों में पर्णपाती वन और हिमालय के लगभग 3,000 मीटर से कम ऊँचाई वाले क्षेत्रों में शंकुधारी वन मिलते हैं। शंकुधारी वन की पत्तियाँ नुकीली होती हैं। इस वन में पाए जाने वाले प्रमुख वृक्ष चीड़, फर, पाइन, स्पूस आदि हैं।

Hope given Practical Work in Geography Class 11 Solutions Chapter 7 are helpful to complete your homework.

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