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NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 4

NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 4 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 4 Map Projections (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) मानचित्र प्रक्षेप, जो कि विश्व के मानचित्र के लिए न्यूनतम उपयोगी है
(क) मर्केटर
(ख) बेलनी
(ग) शंकु
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर- (ग) शंकु

(ii) एक मानचित्र प्रक्षेप, जो न समक्षेत्र हो एवं न ही शुद्ध आकार वाला हो तथा जिसकी दिशा भी शुद्ध नहीं होती है
(क) शंकु
(ख) ध्रुवीय शिराबिंदु
(ग) मर्केटर
(घ) बेलनी
उत्तर- (क) शंकु

(iii) एक मानचित्र प्रक्षेप, जिसमें दिशा एवं आकृति शुद्ध होती है, लेकिन ध्रुवों की ओर यह बहुत अधिक विकृत हो जाती है
(क) बेलनाकार समक्षेत्र
(ख) मर्केटर
(ग) शंकु
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर- (ख) मर्केटर

(iv) जब प्रकाश के स्रोत को ग्लोब के मध्य रखा जाता है, तब प्राप्त प्रक्षेप को कहते हैं
(क) लंबकोणीय
(ख) त्रिविम
(ग) नोमॉनिक
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर- (ग) नोमॉनिक

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
(i) मानचित्र प्रक्षेप के तत्वों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- मानचित्र प्रक्षेप के तत्व निम्नलिखित हैं

(क) पृथ्वी का छोटा रूप – पृथ्वी के मॉडल को छोटी मापनी की सहायता से कागज के समतल सतह पर दर्शाया जाता है।
(ख) अक्षांश के समांतर – ये ग्लोब के चारों ओर स्थित वे वृत्त हैं जो विषुवत्त वृत्त के समांतर एवं ध्रुवों से समान दूरी पर स्थित होते हैं।
(ग) देशांतर के याम्योत्तर – ये अर्धवृत्त होते हैं। जो कि उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर, एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक खींचे जाते हैं तथा दो विपरीत याम्योत्तर एक वृत्त का निर्माण करते हैं| जो ग्लोब की परिधि होती है।
(घ) ग्लोब के गुण – मानचित्र प्रक्षेप बनाने में ग्लोब की सतह के मूल गुणों को कुछ विधियों के द्वारा संरक्षित रखा जाता है।

(ii) भूमंडलीय संपत्ति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- एक मानचित्र में चार भूमंडलीय गुण- क्षेत्रफल, आकृति, दिशा और दूरी की शुद्धता को संरक्षित रखा जाता है। भूमंडलीय गुणों के आधार पर प्रक्षेपों को समक्षेत्र, यथाकृतिक तथा समदूरस्थ प्रक्षेप में वर्गीकृत किया
जाता है।

(iii) कोई भी मानचित्र ग्लोब को सही रूप में नहीं दर्शाता है, क्यों?
उत्तर- मानचित्र प्रक्षेप अक्षांश और देशांतर रेखाओं का जाल होता है। यह समतल कागज पर बनाया जाता है। ग्लोब पृथ्वी का सही प्रतिनिधित्व करता है। प्रक्षेप ग्लोब की छाया होती है जो कुछ स्थानों पर विकृत हो जाता है। इस तरह प्रक्षेप ग्लोब को सही रूप में नहीं दर्शाता।

(iv) बेलनाकार समक्षेत्र प्रक्षेप में क्षेत्र को समरूप कैसे रखा जाता है?
उत्तर- बेलनाकार समक्षेत्र प्रक्षेप को समरूप रखा जाता है। अक्षांश और देशांतर रेखाएँ सीधी रेखा के रूप में एक-दूसरे को समकोण पर काटती हैं।

प्र० 3. अन्तर स्पष्ट कीजिए|
(i) विकासनीय एवं अविकासनीय पृष्ठ
उत्तर- विकासनीय एवं अविकासनीय पृष्ठ में अन्तर-
NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 4 (Hindi Medium) 3

(ii) समक्षेत्र तथा यथाकृतिक प्रक्षेप
उत्तर- समक्षेत्र तथा यथाकृतिक प्रक्षेप में अंतर
NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 4 (Hindi Medium) 3.1

(iii) अभिलंब एवं तिर्यक प्रक्षेप
उत्तर- अभिलंब एवं तिर्यक प्रक्षेप में अंतर–
NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 4 (Hindi Medium) 3.2

(iv) अक्षांश के समांतर एवं देशांतर के याम्योत्तर
उत्तर- अक्षांश के समांतर एवं देशांतर के याम्योत्तर में अंतर-
NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 4 (Hindi Medium) 3.3

प्र० 4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 125 शब्दों में दीजिए-
(i) मानचित्र प्रक्षेप का वर्गीकरण करने के आधार की विवेचना कीजिए तथा प्रक्षेपों की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर- मानचित्र प्रक्षेप का वर्गीकरण करने के आधार|
(i) बनाने की तकनीक/विधि के आधार पर प्रक्षेपों को सामान्यतः दो वर्गों में विभाजित किया जाता है। संदर्श, असंदर्श तथा रूढ़ अथवा गणितीय प्रक्षेप।
(ii) विकासनीय पृष्ठ के गुणों के आधार पर प्रक्षेपों को बेलनी, शंकु तथा खमध्य प्रक्षेपों में वर्गीकृत किया जाता है।
(iii) भूमंडलीय गुणों के आधार पर प्रक्षेपों को समक्षेत्र प्रक्षेप, यथाकृतिक प्रक्षेप, समदूरस्थ प्रक्षेप में वर्गीकृत किया जाता है।
(iv) प्रकाश के स्रोत की स्थिति के आधार पर प्रक्षेपों को नोमॉनिक, त्रिविम एवं लंबकोणीय प्रक्षेपों में वर्गीकृत किया जाता है।
(v) ग्लोब की सतह को स्पर्श करने की स्थिति के आधार पर प्रक्षेपों को अभिलंब प्रक्षेप त्रिर्यक प्रक्षेप तथा ध्रुवीय प्रक्षेप में वर्गीकृत किया जाता है।

प्रक्षेप की मुख्य विशेषताएँ
(i) यह न तो समक्षेत्र है और न ही शुद्ध आकृति।
(ii) अक्षांश रेखाएँ समान दूरी पर खिंची संकेंद्रीय वृत्तों की चाप होती हैं एवं देशांतर रेखाएँ समान कोणात्मक अन्तरालों पर खिंची अरीय रेखीय होती है।
(iii) केंद्र या ध्रुव से प्रत्येक बिंदु अपनी यथार्थ दूरी पर तथा शुद्ध दिशा में स्थित होता है।
(iv) अक्षांशीय मापक शुद्ध नहीं होता है, यह मानक अक्षांश से परे तेज गति से बढ़ता जाता है। देशांतरीय मापक सर्वत्र शुद्ध रहता है।

(ii) कौन-सा मानचित्र प्रक्षेप नौसंचालन उद्देश्य के लि बहुत उपयोगी होता है? इस प्रक्षेप की सीमाओं एवं उपयोगों की विवेचना कीजिए।
उत्तर- मर्केटर प्रक्षेप नौसंचालन उद्देश्य के लिए बहुत उपयोगी होता है।
मर्केटर प्रक्षेप की सीमाएँ
(i) याम्योत्तर एवं अक्षांशों के सहारे मापनी का विस्तार उच्च अक्षांशों पर तीव्रता से बढ़ता है। जिसके परिणामस्वरूप, ध्रुव के निकटवर्ती देशों को आकार उनके वास्तविक आकार से अधिक हो जाता है। उदाहरण के लिए ग्रीनलैंड का आकार संयुक्त राज्य अमेरिका के बाराबर हो जाता है, जबकि यह अमेरिका के आकार का 1/10वाँ हिस्सा है।
(ii) इस प्रक्षेप में ध्रुवों को प्रदर्शित नहीं किया जा सकता। है, क्योंकि 90° अक्षांश समांतर एवं याम्योतर रेखाएँ अनंत होती है।

मर्केटर प्रक्षेप का उपयोग
(i) यह विश्व के मानचित्र के लिए बहुत ही उपयोगी है। तथा एटलस मानचित्रों को बनाने में इसका उपयोग किया जाता है।
(ii) यह समुद्र एवं वायु मार्गों पर नौसंचालन के लिए बहुत ही उपयोगी है।
(iii) अपवाह प्रतिरूपों, समुद्री धाराओं, तापमान, पवनों एवं उनकी दिशाओं, पूरे विश्व में वर्षा का वितरण इत्यादि को मानचित्र पर दर्शाने के लिए यह उपयुक्त है।

(iii) एक मानक अक्षांश वाले शंकु प्रक्षेप के मुख्य गुण क्या हैं तथा उसकी सीमाओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- एक मानक अक्षांश वाले शंकु प्रक्षेप के मुख्य गुण|
(i) सभी अक्षांशों के समांतर वृत्तों के चाप होते हैं तथा उनके बीच की दूरी बराबर होती है।
(ii) सभी याम्योत्तर रेखाएँ सीधी होती हैं, जो ध्रुवों पर मिल जाती हैं। याम्योत्तर समांतर को समकोण पर काटती हैं।
(iii) सभी याम्योत्तरों की मापनी सही होती है, अर्थात् याम्योत्तरों पर सारी दूरियाँ सही होती हैं।
(iv) एक वृत्त का चाप ध्रुव को दर्शाता है।
(v) मानक समांतर पर मापनी शुद्ध होती है, लेकिन इससे दूर यह विकृत हो जाती है।
(vi) याम्योत्तर ध्रुवों के निकट जाते हुए एक-दूसरे के समीप आ जाते हैं।
(vii) यह प्रक्षेप न तो समक्षेत्र है तथा न ही यथाकृतिक।

सीमाएँ
(i) यह विश्व मानचित्र के लिए उपयुक्त नहीं है, क्योंकि जिस गोलार्द्ध में मानक अक्षांश वृत्त चुना जाता है। उसके विपरीत गोलार्द्ध में चरम विकृति होती है।
(ii) जिस गोलार्द्ध में यह बनाया जाता है, उसके लिए भी यह उपयुक्त नहीं है, क्योंकि उसमें भी ध्रुव पर तथा विषुवत वृत्त के पास विकृत होने के कारण इसका उपयोग बड़े क्षेत्र को प्रदर्शित करने के लिए अनुपयुक्त है।

क्रियाकलाप
1. 30° उ० से 70° उ० तथा 40° प० से 30° प० के बीच स्थित एक क्षेत्र का रेखाजाल एक मानक अक्षांश वाले सामान्य शंकु प्रक्षेप पर बनाइए, जिसकी मापनी 1 : 20,00,00,000 तथा मध्यांतर 10° है।
2. विश्व का रेखाजाल बेलनाकार समक्षेत्र प्रक्षेप पर बनाइए, जहाँ प्रतिनिधि भिन्न 1:15,00,00,000 तथा मध्यांतर 15° है।
3. 1 : 25,00,00,000 की मापनी पर एक मर्केटर प्रक्षेप का रेखाजाल बनाइए, जिसमें अक्षांश एवं देशांतर 20° के मध्यांतर पर खींची जाए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।

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NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 4

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 4 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 4 Distribution of Oceans and Continents (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) निम्न में से किसने सर्वप्रथम यूरोप, अफ्रीका व अमेरिका के साथ स्थित होने की संभावना व्यक्त की?
(क) अल्फ्रेड वेगनर
(ख) अब्राहम ऑरटेलियस
(ग) एनटोनियो पेलेग्रिनी
(घ) एडमंड हैस
उत्तर- (ख) अब्राहम ऑरटेलियस

(ii) पोलर फ्लीइंग बल Polar fleeing force निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?
(क) पृथ्वी की परिक्रमण
(ख) पृथ्वी का घूर्णन
(ग) गुरुत्वाकर्षण
(घ) ज्वारीय बल
उत्तर- (ख) पृथ्वी का घूर्णन

(iii) इनमें से कौन-सी लघु Minor प्लेट नहीं है?
(क) नजका
(ख) फिलिपीन
(ग) अरब
(घ) अंटार्कटिक
उत्तर- (घ) अंटार्कटिक

(iv) सागरीय अधस्तल विस्तार सिद्धांत की व्याख्या करते हुए हेस ने निम्न में से किस अवधारणा पर विचार नहीं किया?
(क) मध्य-महासागरीय कटकों के साथ ज्वालामुखी क्रियाएँ।
(ख) महासागरीय नितल की चट्टानों में सामान्य व उत्क्रमण चुंबकत्व क्षेत्र की पट्टियों का होना।
(ग) विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण।
(घ) महासागरीय तल की चट्टानों की आयु।
उत्तर- (ग) विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण

(v) हिमालय पर्वतों के साथ भारतीय प्लेट की सीमा किस तरह की प्लेट सीमा है?
(क) महासागरीय-महाद्वीपीय अभिसरण
(ख) अपसारी सीमा
(ग) रूपांतर सीमा
(घ) महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण
उत्तर- (घ) महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) महाद्वीपों के प्रवाह के लिए वेगनर ने निम्नलिखित में से किन बलों का उल्लेख किया?
उत्तर- महाद्वीपीय प्रवाह के लिए वेगनर ने दो बलों का उपयोग किया –
(i) पोलर या ध्रुवीय फ्लीइंग बल
(ii) ज्वारीय बल। ध्रुवीय फ्लीइंग बल पृथ्वी के घूर्णन से संबंधित है। पृथ्वी की आकृति एक संपूर्ण गोले जैसी नहीं है वरन यह भूमध्य रेखा पर उभरी हुई है। यह उभार पृथ्वी के घूर्णन के कारण है। दूसरा बल जो वेगनर महोदय ने सुझाया-वह ज्वारीय बल है। जो सूर्य व चंद्रमा के आकर्षण से संबद्ध है, जिससे महासागरों में ज्वार पैदा होते हैं। वेगनर का मानना था कि करोड़ों वर्षों के दौरान ये बल प्रभावशाली होकर विस्थापन के लिए सक्षम हो गए।

(ii) मैंटल में संवहन धाराओं के आरंभ होने और बने रहने के क्या कारण हैं?
उत्तर- संवहन धाराएँ रेडियोएक्टिव तत्वों से उत्पन्न ताप भिन्नता के कारण मैंटल भाग में उत्पन्न होती हैं। होम्स ने तर्क दिया कि पूरे मैंटल भाग में इस प्रकार की धाराओं की तंत्र विद्यमान है। यह उन प्रवाह बलों की व्याख्या प्रस्तुत करने का प्रयास था, जिसके आधार पर समकालीन वैज्ञानिकों ने महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत को नकार दिया।

(iii) प्लेट की रूपांतर सीमा, अभिसरण सीमा और अपसारी सीमा में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर- प्लेट की रूपांतर सीमा, अभिसरण सीमा और अपसारी सीमा में निम्न अंतर है
प्लेट की रूपांतर सीमा – जहाँ न तो नई पर्पटी का निर्माण होता है और न ही पर्पटी का विनाश होता है, उन्हें रूपांतर सीमा कहते हैं।
अभिसरण सीमा – जब एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धंसती है और भूपर्पटी नष्ट होती है, वह अभिसरण सीमा है।
अपसारी सीमा – वह स्थान जहाँ से प्लेट एक-दूसरे से हटती है, अपसारी सीमा कहलाती है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण मध्य अटलांटिक कटक है।

(iv) दक्कन ट्रेप के निर्माण के दौरान भारतीय स्थलखंड की स्थिति क्या थी?
उत्तर- आज से 14 करोड़ वर्ष पहले भारतीय प्लेट सुदूर दक्षिण में 50° दक्षिणी अक्षांश पर स्थित था। भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट को टेथिस सागर अलग करता था और तिब्बतीय खंड, एशियाई स्थलखंड के करीब था। भारतीय प्लेट के एशियाई प्लेट की तरफ प्रवाह के दौरान एक प्रमुख घटना घटी। वह थी लावा प्रवाह से दक्कन ट्रेप का निर्माण होना। ऐसा लगभग 6 करोड़ वर्ष पहले आरंभ हुआ जो एक लंबे समय तक जारी रहा।

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के पक्ष में दिए गए प्रमाणों का वर्णन करें।
उत्तर- महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के तहत वेगनर ने कहा है कि 20 करोड़ वर्ष पहले सभी महाद्वीप आज की तरह अलग-अलग नहीं थे, बल्कि पैंजिया के ही भाग थे। इसको प्रमाणित करने के लिए वेगनर ने कई साक्ष्य दिए हैं
(क) भूवैज्ञानिक क्रियाओं के फलस्वरूप 47 करोड़ से 35 करोड़ वर्ष पुरानी पर्वत पट्टी का निर्माण एक अविच्छिन्न कटिबंध के रूप में हुआ था। ये पर्वत अब अटलांटिक महासागर द्वारा पृथक कर दिए गए हैं।
(ख) कुछ जीवाश्म भी यह बताते हैं कि समस्त महाद्वीप कभी परस्पर जुड़े हुए थे। उदाहरण के लिए, ग्लोसोप्टेरिस नामक पौधे तथा मेसोसौरस एवं लिस्ट्रोसौरस नामक जंतुओं के जीवाश्म गोंडवानालैंड के सभी महाद्वीपों में मिलते हैं जबकि आज ये महाद्वीप एक-दूसरे से काफी दूर हैं।
(ग) अफ्रीका के घाना तट पर सोने का निक्षेप पाया जाता है जबकि 5000 कि०मी० चौड़े महासागर के पार दक्षिणी अमेरिका में ब्राजील के तटवर्ती भाग में भी सोने का निक्षेप पाया जाता है।
(घ) पर्मोकार्बनी काल में मोटे हिमानी निक्षेप उरुग्वे, ब्राजील, अफ्रीका, दक्षिणी भारत, दक्षिणी आस्ट्रेलिया तथा तस्मानिया के धरातल पर दिखाई देते थे। इन अवसादों की प्रकृति में एकरूपता यह सिद्ध करती है कि भूवैज्ञानिक अतीत काल में समस्त महाद्वीप एक-दूसरे से जुड़े हुए थे तथा यहाँ एक जैसी जलवायविक दशाएँ थीं।
(ङ) महाद्वीपों का विस्थापन अभी भी जारी है। अटलांटिक महासागर की चौड़ाई प्रतिवर्ष कई सेंटीमीटर के हिसाब से बढ़ रही है जबकि प्रशांत महासागर छोटा हो रहा है। लाल सागर भूपर्पटी में एक दरार का हिस्सा है जो भविष्य में करोड़ों वर्ष पश्चात एक नए महासागर की रचना करेगा। दक्षिणी अटलांटिक महासागर के चौड़ा होने से अफ्रीका तथा दक्षिणी अमेरिकी एक-दूसरे से अलग हो गए हैं।

(ii) महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत व प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत में मूलभूत अंतर बताइए।
उत्तर- महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत की आधारभूत संरचना यह थी कि सभी महाद्वीप पहले एक ही भूखंड के भागे थे, जिसे पैंजिया नाम दिया गया था। ये भूखंड एक बड़े महासागर से घिरा हुआ था। वेगनर के अनुसार, लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले पैंजिया का विभाजन आरंभ हुआ। पैंजिया पहले दो बड़े भूखंड लारेशिया और गोंडवानालैंड के रूप में विभक्त हुआ। इसके बाद लारेशिया व गोंडवानालैंड धीरे-धीरे अनेक छोटे-छोटे हिस्सों में बँट गए जो आज के वर्तमान महाद्वीप के रूप में हैं। प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के अनुसार, पृथ्वी के स्थलमंडल को सात मुख्य प्लेटों व कुछ छोटी प्लेटों में विभक्त किया जाता है। नवीन वलित पर्वतश्रेणियाँ, खाइयाँ और भ्रंश इन मुख्य प्लेटों को सीमांकित करते हैं। महाद्वीप एक प्लेट का हिस्सा है और प्लेट गतिमान है। वेगनर की संकल्पना कि केवल महाद्वीप ही गतिमान है, सही नहीं है।

(iii) महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत के उपरांत की प्रमुख खोज क्या है, जिससे वैज्ञानिकों ने महासागर व महाद्वीप वितरण के अध्ययन में पुनः रुचि ली?
उत्तर- महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत के द्वारा वेगनर ने ज जानकारी प्रस्तुत की थी, वह पुराने तर्क पर आधारित थी। वर्तमान में जानकारी के जो स्रोत हैं, वे वेगनर के समय में उपलब्ध नहीं थे। चट्टानों के चुंबकीय अध्ययन और महासागरीय तल के मानचित्रण ने विशेष रूप से निम्न तथ्यों को उजागर किया
(क) यह देखा गया कि मध्य-महासागरीय कटकों के साथ-साथ ज्वालामुखी उद्गार सामान्य क्रिया है और ये उद्गार इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में लावा निकालते हैं।
(ख) महासागरीय कटक के मध्य भाग के दोनों तरफ समान दूरी पर पाई जाने वाली चट्टानों के निर्माण का समय, संरचना, संघटन और चुंबकीय गुणों में समानता पाई जाती है। महासागरीय कटकों के समीप की चट्टानों में सामान्य चुंबकत्व ध्रुवण पाई जाती है तथा ये चट्टानें नवीनतम हैं। कटकों के शीर्ष से दूर चट्टानों की आयु भी अधिक है।
(ग) महासागरीय पर्पटी की चट्टानें महाद्वीपीय पर्पटी की चट्टानों की अपेक्षा अधिक नई हैं। महासागरीय पर्पटी की चट्टानें कहीं भी 20 करोड़ वर्ष से अधिक पुरानी नहीं हैं। महाद्वीपीय पर्पटी के भूकंप उद्गम केंद्र अधिक गहराई पर हैं जबकि मध्य-महासागरीय कटकों के क्षेत्र के भूकंप उद्गम केंद्र कम गहराई पर विद्यमान हैं।
(घ) गहरी खाइयों में भूकंप उद्गम केंद्र अधिक गहराई पर हैं जबकि मध्य-महासागरीय कटकों के क्षेत्र के भूकंप उद्गम केंद्र कम गहराई पर विद्यमान हैं।

परियोजना कार्य-
प्र०. भूकंप के कारण हुई क्षति से संबंधित एक कोलाज बनाए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।

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NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 2 Indian Economy 1950-1990 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 2 Indian Economy 1950-1990 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 2 Indian Economy 1950-1990 (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास
(पाठ्यपुस्तक से)

प्र.1. योजना की परिभाषा दीजिए।
उत्तर : योजना इसकी व्याख्या करती है कि देश के संसाधनों का प्रयोग किस प्रकार किया जाना चाहिये।

प्र.2. भारत ने योजना को क्यों चुना?
उत्तर : अंग्रेजों ने भारत को विभाजन की समस्याओं के साथ एक स्थिर और खोखली अर्थव्यवस्था के रूप में छोड़ दिया। इसने एक सर्वांगीण विकास योजना का आह्वान किया। यदि सरकार ने अर्थव्यवस्था को निजी हाथों में छोड़ दिया होता तो उन्होंने बड़े पैमाने पर उपस्थित गरीबी, बेरोजगारी की ओर न्यूनतम ध्यान दिया होता, जिससे देश के एक प्रमुख खंड को कष्टों का सामना करना पड़ता। हमें एक बड़े स्तर की योजना के साथ एक एकीकृत प्रयास की जरूरत थी जो सरकार केवल आर्थिक योजना प्रणाली द्वारा ही कर सकती थी। इसीलिए भारत ने योजना को चुना। |

प्र.3. योजनाओं के लक्ष्य क्या होने चाहिए?
उत्तर : कोई भी योजना बिना विशिष्ट और सामान्य लक्ष्यों के बनाना पूर्णतः अर्थहीन है। हर योजना में विशिष्टता के साथ कुछ लक्ष्य होना आवश्यक है। एक छात्र तक जब परीक्षा की तैयारी तक की योजना बनाता है तो उसके भी कुछ विशिष्ट लक्ष्य होते हैं। जैसे कब तक एक विशेष विषय को समाप्त करना है, तो हम बिना विशिष्ट लक्ष्यों के राष्ट्रीय योजनाओं के बारे में कैसे सोच सकते हैं। निश्चित रूप से योजनाओं के लक्ष्य होना जरूरी हैं जिन्हें सामान्य और विशिष्ट लक्ष्यों में वर्गीकृत किया जा सके।

प्र.4. उच्च पैदावार वाली किस्म (HYV) बीज क्या होते हैं?
उत्तर :
वे बीज जो पानी, उर्वरक, कीटनाशकों और अन्य सीमाती प्रदान किए जाने के आश्वासन उपरांत अधिक उत्पादन दें, उन्हें उच्च पैदावार वाली किस्म (HYV) के बीच कहा जाता है।

प्र.5. विक्रय अधिशेष क्या है?
उत्तर : किसानों द्वारा उत्पादन का बाज़ार में बेचा गया अंश विक्रय अधिशेष कहलाता है।

प्र.6. कृषि क्षेत्रक में लागू किए गए भूमि सुधार की आवश्यकता और उनके प्रकारों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर : (क) भारत में बिचौलियों की एक बड़ी सेना थी जैसे जमींदार, महालावार, रैयत आदि जो वास्तविक किसान से किराया वसूल करते थे और उसका एक हिस्सा भू-राजस्व के रूप में सरकार के पास जमा कराते थे। वे किसानों के साथ दासों जैसा व्यवहार करते थे।

आवश्यकता
(क) बिचौलियों के उन्मूलन का उपाय वास्तविक जोतक और किसान के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए किया गया।
(ख) बंजर भूमि, जंगल आदि राज्य सरकार को हस्तांतरित करने के लिए।
(ग) भूमि वितरण में समानता लाने के लिए।
(घ) किसानों को भूमि का मालिक बनाने के लिए।

प्रकार
(क) जमींदारी प्रथा का उन्मूलन- सरकार और किसान के बीच में सीधा संपर्क स्थापित करने के लिए जमींदारी प्रथा का उन्मूलन कर दिया गया ताकि किसानों के शोषण को दूर किया जा सके। इन बिचौलियों ने किसानों पर भारी शुल्क लगाए। परंतु सिंचाई सुविधाओं, भंडारण सुविधाओं, ऋण सुविधाओं, विपणन सुविधाओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

(ख) किरायेदारी सुधार- ये निम्नलिखित से संबंधित थे

  1. किराया विनियमन
  2. कार्यकाल सुरक्षा
  3. किरायेदारों के लिए स्वामित्व अधिकार

(ग) अधिकतम भूमि सीमा अधिनियम- इस अधिनियम के अंतर्गत किसी व्यक्ति की कृषि भूमि की अधिकतम सीमा निर्धारित कर दी गई।
कृषि के पुनगठन का संबंध

  1. भूमि के पुनर्वितरण
  2. भूमि चकबंदी
  3. सहकारी खेती से है।

प्र.7. हरित क्रांति क्या है? इसे क्यों लागू किया गया और इससे किसानों को क्या लाभ पहुँचा? संक्षिप्त में व्याख्या कीजिए।
उत्तर : यह एक रणनीति थी; जो अक्टूबर 1965 में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी। इसे अलग-अलग नाम दिए गए; जैसे-नई कृषि नीति, बीज-उर्वरक पानी, प्रौद्योगिकी।

नई कृषि निति अपनाने से पूर्व भारतीय कृषि की परिस्थितियाँ इस प्रकार थी
(क) कृषि कम और अनियमित वृद्धि दर्शा रही थी।
(ख) कृषि में चरम क्षेत्रीय असमानता तथा बढ़ती हुई अंतर्वर्गीय असमानता थी।
(ग) लगातार दो वर्ष गंभीर सूखे की स्थिति थी।
(घ) पाकिस्तान के साथ भारत का युद्ध चल रहा था।
(ङ) अमेरिका ने भारत को पी.एल. 480 आयात करने से इंकार कर दिया।

इस स्थिति को सुधारने के लिए हरित क्रांति को अपनाया गया था। भारत ने खाद्यान्न अपूर्ति जैसी महत्त्वपूर्ण मद के लिए विदेशी मदद पर निर्भर न रहने का निर्णय किया। यही हरित क्रांति की उत्पत्ति बना जो एक जैव रासायनिक प्रौद्योगिकी थी, जिसके द्वारा उत्पादन की वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करके प्रति एकड़ उत्पादन को बढ़ाया जाना था। हरित क्रांति के लाभ
(क) आय में बढ़ोतरी- क्योंकि हरित क्रांति काफी वर्षों तक गेहूँ और चावल तक सीमित था इसलिए इसका लाभ पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे गेहूँ और चावल उत्पादक क्षेत्रों को हुआ। इन राज्यों में किसानों की आय तेजी से बढी। हरित क्रांति इन राज्यों से गरीबी दूर करने में सफल रही।
(ख) सामाजिक क्रांति पर प्रभाव- आर्थिक क्रांति के साथ एक सामाजिक क्रांति भी थी। इसने पुराने सामाजिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों को नष्ट कर दिया और लोग प्रौद्योगिकी, बीज और उर्वरकों के परिवर्तन को स्वीकार करने के लिए तैयार हो गए। खेती की पारंपरिक विधियाँ खेती की आधुनिक विधियों में परिवर्तित हो गई।
(ग) रोज़गार में वृद्धि- हरित क्रांति की वजह से ज़मीन के एक टुकड़े पर एक से अधिक फसल उगाने की संभावना के साथ काफी हद तक मौसमी बेरोजगारी की समस्या हल हो गई क्योंकि इसमें कार्यशील हाथों की आवश्यकता पूरे वर्ष थी। इसके अतिरिक्त पैकेज आदानों के लिए बेहतर सिंचाई सुविधाओं की आवश्यकता थी। इससे भी रोजगार के अवसर बढ़े।

प्र.8. योजना उद्देश्य के रूप में “समानता के साथ संवृद्धि” की व्याख्या कीजिए।
उत्तर : संवृद्धि और समानता दो संघर्षशील उद्देश्य हैं, अर्थात् एक को पाने के लिए दूसरे का त्याग करना होगा। कुछ अर्थशास्त्रियों के अनुसार, ‘आय की समानता संवृद्धि में बाधक है क्योंकि इससे काम करने की प्रेरणा में कमी आती है। इसके अतिरिक्त आय की समानता से देश का उपभोग स्तर बढ़ जाता था तथा बचत स्तर कम हो जाता है। उपभोग अधिक होगा तो बचत कम होगी। बचत कम होने से निवेश के लिए धन की कमी होगी जिससे अर्थव्यवस्था की संवृद्धि दर में कमी आयेगी।

प्र.9. “क्या रोजगार सृजन की दृष्टि से योजना उद्देश्य के रूप में आधुनिकीकरण विरोधाभास पैदा करता है’? व्याख्या कीजिए।
उत्तर : उद्देश्यों में विरोधाभास का अर्थ है कि दो उद्देश्यों को एक साथ उपलब्ध नहीं कर सकते। एक उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए हमें दूसरे का बलिदान करना होगा।

आधुनिकीकरण और रोज़गार- 
आधुनिकीकरण का अर्थ है उत्पादन की नवीनतम तकनीकों का प्रयोग करना। नई तकनीकें अधिकतर पूँजी गहन होती है, अतः कम रोजगार उत्पन्न करती है। इसलिए यदि आधुनिकीकरण पर एक योजना लक्ष्य के रूप में बल दिया जाता है तो रोज़गार सृजन कम हो पायेगा। परंतु यह केवल अल्पकाल में होगा। जैसे-जैसे आधुनिकीकरण होगा पूँजीगत वस्तु उद्योगों का विकास होगा और वहाँ भिन्न-भिन्न प्रकार के रोज़गार अवसर सृजित होंगे। परंतु जिस तरह की नौकरियों का सृजन होगा उनके अनुसार श्रम में कौशल होना आवश्यक है।

प्र.10. भारत जैसे विकासशील देश के रूप में आत्मनिर्भरता का पालन करना क्यों आवश्यक था?
उत्तर : स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारत गरीब, गतिहीन और पिछड़ा हुआ था। खाद्यान्नों का भारी आयात किया जा रहा था। इसलिए आत्मनिर्भर होना अति आवश्यक था। आत्मनिर्भरता की विशेषताएँ इस प्रकार हैं
(क) खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर होना।
(ख) विदेशी मदद और आयातों पर निर्भरता में कमी जो तभी संभव है जब घरेलू उत्पादन में वृद्धि हो।
(ग) निर्यातों में वृद्धि।
(घ) सकल घरेलू उत्पाद में उद्योगों के योगदान में वृद्धि।

प्र.11. किसी अर्थव्यवस्था का क्षेत्रक गठन क्या होता है? क्या यह आवश्यक है कि अर्थव्यवस्था के जी.डी.पी. में सेवा क्षेत्रक को सबसे अधिक योगदान करना चाहिए? टिप्पणी करें।
उत्तर : एक अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पाद में तीनों क्षेत्रों के योगदान को अर्थव्यवस्था का क्षेत्रक गठन कहा जाता है। यदि किसी अर्थव्यवस्था के जी.डी.पी. में सेवा क्षेत्रक सबसे अधिक योगदान कर रहा है तो इसका अर्थ है कि हमारी अर्थव्यवस्था आर्थिक रूप से विकसित है।

प्र.12. योजना अवधि के दौरान औद्योगिक विकास में सार्वजनिक क्षेत्र को ही अग्रणी भूमिका क्यों सौंपी गई थी?
उत्तर : सार्वजनिक क्षेत्र निम्नलिखित प्रकार से उद्योगों के विकास में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है
(क) एक मजबूत औद्योगिक आधार बनाने के लिए।
(ख) बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए।
(ग) पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए।
(घ) बचत जुटाने और विदेशी मुद्रा अर्जित करने के लिए।
(ङ) आर्थिक शक्ति की एकाग्रता को रोकने के लिए।
(च) आय और धन वितरण की समानता को बढ़ावा देने के लिए।
(छ) रोजगार प्रदान करने के लिए।
(ज) आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा देने के लिए।

प्र.13. इस कथन की व्याख्या करें: ‘हरित क्रांति ने सरकार को खाद्यान्नों के प्रापण द्वारा विशाल सुरक्षित भंडार बनाने के योग्य बनाया, ताकि वह कमी के समय उसका उपयोग कर सके।’
उत्तर : हरित क्रांति नई कृषि तकनीक के उपयोग से कृषि उत्पादन और उत्पादकता में होने वाली भारी वृद्धि को संदर्भित करता है। इसने एक दुर्लभतापूर्ण अर्थव्यवस्था को बहुतायत पूर्ण अर्थव्यवस्था में बदल दिया।

हरित क्रांति से उत्पादन तथा उत्पादकता में भारी परिवर्तन आया। हरित क्रांति ने लगातार उपस्थित खाद्यान्नों की कमी को दूर करने में मदद की। अधिक पैदावार वाली किस्मों का कार्यक्रम (HYP) केवल पाँच फसलों अर्थात्  गेहूं, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का तक ही प्रतिबंधित रहा। वाणिज्यिक फसलों को नई कृषि तकनीक के दायरे से बाहर रखा गया। गेहूँ उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि देखने में आई।

गेहूं का उत्पादन जो तीसरी पंचवर्षीय योजना में 12.1 मिलियन टन था, वह 2006 में बढ़कर 79.8 मिलियन टन हो गया। इसी तरह चावल का उत्पादन 1968-69 में 38.1 मिलियन टन से बढ़कर 2005-06 में 93.4 मिलियन टन हो गया। मोटे अनाजों का उत्पादन में 1968-69 में 26.1 मिलियन टन से मात्र 33.9 मिलियन टन तक बढ़ा।

प्र.14. सहायिकी किसानों को नई प्रौद्योगिकी का प्रयोग करने को प्रोत्साहित तो करती है पर उसका सरकारी वित्त पर भारी बोझ पड़ता है। इस तथ्य को ध्यान में रखकर सहायिकी की उपयोगिता की चर्चा करें।
उत्तर : अलग-अलग अर्थशास्त्रियों के सहायिकी के विषय में अलग-अलग विचार है। कुछ सहायिकी का पक्ष लेते हैं तो कुछ इसके उन्मूलन पक्षधर हैं। अपने पक्ष के लिए वे जो तर्क देते हैं वे नीचे दिए गए हैं
सहायिकी के पक्ष में तर्क
(क) नई तकनीक अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए सहायिकी आवश्यक है।
(ख) अधिकांशतः किसान गरीब हैं। अतः वे सरकारी मदद के बिना नई तकनीक को वहन करने में सक्षम नहीं होंगे।
(ग) कृषि जोखिम भरा व्यवसाय है। अतः जो गरीब किसान इसका जोखिम उठाने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें सरकारी सहायता की आवश्यकता है।
(घ) यह सहायिकी न दी जाए तो नई तकनीक का लाभ केवल अमीर किसानों को होगा और इससे आय की असमानताएँ बढ़ेगी।
(ङ) सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सहायिकी का लाभ केवल गरीब किसानों को मिले।

सहायिकी के विप्क्ष तर्क
(क) सहायिकी का उद्देश्य पूरा हो चुका है, अतः इस चरणबद्ध रीति से हटा दिया जाना चाहिए।
(ख) सहायिकी का लाभ अमीर किसानों तथा उर्वरक कंपनियों को भी मिल रहा है जिसकी आवश्यकता नहीं है।
(ग) सहायिकी सरकारी वित्त पर भारी बोझ है जो अन्तत: आम आदमी को ही उठाना पड़ता है।

प्र.15. हरित क्रांति के बाद भी 1990 तक हमारी 65% जनसंख्या कृषि क्षेत्रक में ही क्यों लगी रही?
उत्तर : हरित क्रांति के बाद भी 1990 तक हमारी 65% जनसंख्या कृषि क्षेत्रक में ही लगी रही। इसके कारण निम्नलिखित हैं
(क) हरित क्रांति पूरे देश में नहीं हुई। यह मुख्यत: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सफल रही। अन्य राज्यों में कृषि पर निर्भर आबादी में गिरावट नहीं थी।
(ख) हरित क्रांति केवल कुछ फसलों तक ही सीमित थी। जिसमें मुख्य गेहूँ और चावल हैं। कुछ अर्थशास्त्री इसे गेहूँ क्रांति भी कहते हैं।
(ग) अन्य क्षेत्रों में वैकल्पिक नौकरियों का सृजन नहीं हुआ। इसने कृषि में प्रच्छन्न बेरोजगारी को जन्म दिया।

प्र.16. यद्यपि उद्योगों के लिए सार्वजनिक क्षेत्रक बहुत आवश्यक रहा है, पर सार्वजनिक क्षेत्र के अनेक उपक्रम ऐसे हैं जो भारी हानि उठा रहे हैं और इस क्षेत्रक के अर्थव्यवस्था के संसाधनों की बर्बादी के साधन बने हुए हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक क्षेत्रक के उपक्रमों की उपयोगिता पर चर्चा करें।
उत्तर : यह. भलीभाँति ज्ञात है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम लाभार्जन नहीं बल्कि समाज कल्याण के उद्देश्य से संचालित किए जाते हैं। एक संस्था जो लाभ के लिए नहीं बल्कि समाज कल्याण के लिए कार्यरत हैं, उस उपयोगिता को लाभ के आधार पर आँकना गलत है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम लाभार्जन न कर रहे हो परंतु ये उपयोगी हैं क्योंकि
(क) ये एक मज़बूत औद्योगिक आधार का निर्माण करते हैं।
(ख) यह सामाजिक और आर्थिक ढाँचे के विकास में मदद करता है।
(ग) यह पिछड़े क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित है और क्षेत्रीय समानता को बढ़ावा देता है।
(घ) यह सत्ता को कुछ हाथों में एकाग्र होने से रोकता है।
(ङ) यह आय की असमानताओं को कम करता है।
(च) यह औपचारिक क्षेत्र में रोजगार सृजन करता है।

प्र.17. आयात प्रतिस्थापन किस प्रकार घरेलू उद्योगों को संरक्षण प्रदान करता है?
उत्तर : आयात प्रतिस्थापन घरेलू उद्योग की रक्षा कर सकता है। ये विदेशी उत्पादकों को घरेलू बाजार में प्रवेश नहीं करने देते। इसीलिए भारतीय उत्पादकों को इन उत्पादकों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करनी पड़ती, और वे उतने कुशल न होते हुए भी बाजार में जीवित रह सकते हैं। यह शैशव अवस्था तर्क पर आधारित थी कि भारतीय उद्योग अभी शैशव अवस्था में हैं इसलिए इन्हें विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। इसने विदेशी मुद्रा बचाने में भी मदद की जो विकास के लिए आवश्यक निर्यात के लिए उपयोग की जा सकती थी। इसने घेरलू स्तर पर उत्पादित वस्तुओं की माँग में भी वृद्धि की।

प्र.18. औद्योगिक नीति प्रस्ताव, 1956 में निजी क्षेत्रक का नियमन क्यों और कैसे किया गया था?
उत्तर : औद्योगिक नीति प्रस्ताव ने उद्योगों को तीन वर्गों में बाँटा
(क) प्रथम श्रेणी में उन उद्योगों को शामिल किया गया जो पूर्णत: सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित थे तथा जिसमें निजी क्षेत्र को प्रवेश की अनुमति नहीं थी। इसमें 17 उद्योग शामिल थे।
(ख) दूसरी श्रेणी में वे उद्योग शामिल किए गए जिसमें निजी क्षेत्र सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका में पूरक की भूमिका निभा सकता है।
(ग) तीसरी श्रेणी में शेष सभी उद्योग शामिल थे जिसमें निजी क्षेत्र सहज प्रवेश कर सकता है।

प्र.19. निम्नलिखित युग्मों को सुमेलित कीजिए।
NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 2 (Hindi Medium) 1
उत्तर :
NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 2 (Hindi Medium) 2

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NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 5

NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 5 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 5 Natural Vegetation (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र०1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) चंदन वन किस तरह के वन के उदाहरण हैं?
(क) सदाबहार वन
(ख) डेल्टाई वन
(ग) पर्णपाती वन
(घ) काँटेदार वन
उत्तर- (ग) पर्णपाती वन

(ii) प्रोजेक्ट टाईगर निम्नलिखित में से किस उद्देश्य से शुरू किया गया है?
(क) बाघ मारने के लिए।
(ख) बाघ को शिकार से बचाने के लिए।
(ग) बाघ को चिड़ियाघर में डालने के लिए
(घ) बाघ पर फिल्म बनाने के लिए
उत्तर- (ख) बाघ को शिकार से बचाने के लिए।

(iii) नंदा देवी जीव मंडल निचय निम्नलिखित में से किस प्रांत में स्थित है?
(क) बिहार
(ख) उत्तराखंड
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) उड़ीसा
उत्तर- (ख) उत्तराखंड

(iv) निम्नलिखित में से कितने भारत के जीव मंडल निचय यूनेस्का द्वारा मान्यता प्राप्त हैं?
(क) एक
(ख) तीन
(ग) दो।
(घ) चार
उत्तर- (घ) चार

(v) वन नीति के अनुसार वर्तमान में निम्नलिखित में से कितना प्रतिशत क्षेत्र, वनों के अधीन होना चाहिए?
(क) 33
(ख) 55
(ग) 44
(घ) 22
उत्तर- (क) 33

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए :
(i) प्राकृतिक वनस्पति क्या है? जलवायु की किन परिस्थितियों में उष्ण कटिबंधीय सदाबाहर वन उगते हैं?
उत्तर- प्राकृतिक वनस्पति से अभिप्राय उसी पौधा समुदाय से है, जो लंबे समय तक बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के उगता है और उसकी विभिन्न प्रजातियाँ वहाँ पाई जाने वाली मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों में यथासंभव स्वयं को ढाल लेती हैं। उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन उष्ण और आर्द्र प्रदेशों में पाए जाते हैं, जहाँ वार्षिक वर्षा 200 सेंटीमीटर से अधिक होती है और औसत वार्षिक तापमान 22° सेल्सियस से अधिक रहता है।

(ii) जलवायु की कौन-सी परिस्थितियाँ सदाबहार वन उगने के लिए अनुकूल हैं?
उत्तर- उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन उन प्रदेशों में पाए जाते हैं, जहाँ उष्ण और आर्द्र जलवायु पाई जाती है। जहाँ वार्षिक वर्षा 200 सेंटीमीटर से अधिक होती है और औसत वार्षिक तापमान 22° सेल्सियस से अधिक रहता है।

(iii) सामाजिक वानिकी से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर- सामजिक वानिकी का अर्थ है-पर्यावरणीय, सामाजिक व ग्रामीण विकास में मदद के उद्देश्य से वनों का प्रबंध और सुरक्षा तथा ऊसर भूमि पर वनरोपण। राष्ट्रीय कृषि आयोग (1976-79) ने सामाजिक वानिकी को तीन वर्गों में बाँटा है
(i) शहरी वानिकी
(ii) ग्रामीण वानिकी
(iii) फार्म वानिकी

(iv) जीव मंडल निचय को परिभाषित करें। वन क्षेत्र और वन आवरण में क्या अंतर है?
उत्तर- जीव मंडल निचय में पशुओं के संरक्षण के साथ-साथ पौधों का भी संरक्षण किया जाता है। जीव मंडल निचय विशेष प्रकार के भौतिक तथा तटीय पारिस्थितिक तंत्र हैं, जिन्हें यूनेस्को के मानव और जीवमंडल प्रोग्राम के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है। जीवमंडल निचय के तीन मुख्य उद्देश्य हैं-
(i) जीव विविधता और पारिस्थितिक तंत्रों को संरक्षण
(ii) पर्यावरण और विकास का मेल-जोल
(iii) अनुसंधान और देख-रेख के लिए अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क।
वन क्षेत्र, राजस्व विभाग के अनुसार अधिसूचित क्षेत्र है, चाहे वहाँ वृक्ष हों या न हों, जबकि वन आवरण प्राकृतिक वनस्पति का झुरमुट है और वास्तविक रूप में वनों से ढका है। वन क्षेत्र राज्यों के राजस्व विभाग से प्राप्त होता है जबकि वन आवरण की पहचान वायु चित्रों और उपग्रहों से प्राप्त चित्रों से की जाती है।

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए।
(i) वन संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
उत्तर- भारतीय वन्य जीव बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर 1972 में भारत सरकार ने वन्य प्राणी अधिनियम पारित किया था। जंगली बाघों की संख्या में तेजी से कमी आने से चिंतित होकर देश में 1973 में बाघ विकास कार्यक्रम परियोजना शुरू की गई थी। संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन के सहयोग से 1975 में मगरमच्छ प्रजनन और प्रबंधन परियोजना प्रारंभ की गई। भारत सरकार ने वन्य प्राणियों को सुरक्षित रखने के लिए भारत में कई राष्ट्रीय उद्यान, वन जीव आरक्षित क्षेत्र और वन्य जीव अभयारण्य की स्थापना की है। आज भारत में 105 नेशनल पार्क और 514 वन्य प्राणी अभयारण्य है जो 15.67 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर फैले हैं। इनके अतिरिक्त 18 जीव आरक्षित क्षेत्र या जीव मंडल निचय क्षेत्र हैं। इनका कुछ क्षेत्र सुरक्षित क्षेत्र में भी शामिल हो गया है।

(ii) वन और वन्य जीव संरक्षण में लोगों की भागीदारी कैसे महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर- वन और वन्य जीव संरक्षण में लोगों की भागीदारी काफी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि वन्य जीवों का सबसे अधिक नुकसान आम लोगों द्वारा ही किया जाता है। आम लोग ही वन्य जीवों का शिकार करते हैं। लेकिन सरकार ने वन्य जीवों के संरक्षण के लिए 1972 ई. में वन्य प्राणी अधिनियम बनाया, जिसमें वन्य जीवों को मारने वाले को कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। तब से लोगों ने वन्य जीवों का शिकार काफी कम कर दिया है। देश में कई सामाजिक संगठनों और समुदायों ने वन्य जीवों के संरक्षण के लिए काफी महत्त्वपूर्ण कार्य किए हैं। राजस्थान के विश्नोई जनजाति के लोग खेजड़ी वृक्ष और काले हिरण की रक्षा करते हैं। राजस्थान के अलवर जिले में 5 गाँवों के लोगों ने 1200 हेक्टेयर वन भूमि को ‘भैरोदेव डाकव सेंचुरी’ घोषित कर दिया है, जिसके अपने ही नियम कानून है जो शिकार वर्जित करते हैं तथा बाहरी लोगों की घुसपैठ से यहाँ के वन्य जीवन को बचाते हैं। हिमालय में वनों की रक्षा के लिए चिपको आंदोलन चलाया गया था।

कुछ समाज कुछ विशेष पेड़ों की पूजा करते हैं और आदिकाल से उनका संरक्षण करते आ रहे हैं। छोटानागपुर क्षेत्र में मुंडा और संथाल जनजातियाँ महुआ और कदंब के पेड़ों की पूजा करते हैं। ओडिशा और बिहार की जनजातियाँ शादी के दौरान इमली और आम के पेड़ की पूजा करती हैं। भारत में संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम क्षरित वनों के प्रबंध और पुनर्निर्माण में स्थानीय समुदायों की भूमिका के महत्त्व को उजागर करते हैं। औपचारिक रूप में इन कार्यक्रमों की शुरुआत 1988 में हुई जब ओडिशा राज्य ने संयुक्त वन प्रबंधन का पहला प्रस्ताव पास किया। इसके तहत गाँव वाले और वन विभाग मिलकर वनों की रक्षा करते हैं।

परियोजना/क्रियाकलाप
भारत के रेखामानचित्र पर निम्नलिखित को पहचान कर चिह्नित करें|
(i) मैंग्रोव वन वाले क्षेत्र।
(ii) नंदा देवी, सुंदर वन, मन्नार की खाड़ी और नीलगिरी जीव मंडल निचय।
(iii) भारतीय वन सर्वेक्षण मुख्यालय की स्थिति का पता लगाएँ और रेखांकित करें।
उत्तर-
NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 5 (Hindi Medium) 1

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NCERT Solutions for Class 11 History Chapter 9 The Industrial Revolution (Hindi Medium)

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अभ्यास प्रश्न (पाठ्यपुस्तक से) (NCERT Textbook Questions Solved)

संक्षेप में उत्तर दीजिए

प्र० 1. ब्रिटेन 1793 से 1815 तक कई युद्धों में लिप्त रहा। इसका ब्रिटेन के उद्योगों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर ब्रिटेन 1793 से 1815 ई० तक युद्धों में संलिप्त रहा। इस समयावधि में ब्रिटेन लगातार फ्रांस के महान सेनापति सम्राट नेपोलियन से जीवन और मरण के संघर्ष में फैसा रहा। इस समय लड़े गए भयंकर युद्धों का व्यापक प्रभाव ब्रिटेन के उद्योगों पर भी पड़ा, जो निम्नलिखित थे

  • युद्धों के परिणामस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई।
  • यूरोप के साथ युद्धों के कारण उसका व्यापार वहाँ से अलग हो गया।
  • व्यापारों के बन्द हो जाने का प्रभाव वहाँ की फैक्टिरियों पर भी पड़ा जिससे वे उद्योगधंधे व कारखाने शीघ्र ही बंद हो गए।
  • उद्योगधंधों व कारखानों के बंद हो जाने की वजह से मजदूर विवश हो गए और बेरोजगारी के कारण वे भुखमरी के शिकार होने लगे।
  • नेपोलियन बोनापार्ट की महाद्वीपीय व्यवस्था या आर्थिक बहिष्कार की नीति ने इंग्लैंड को आर्थिक संकट में फँसा दिया। वस्तुतः नेपोलियन इंग्लैंड के विदेशी व्यापार को समाप्त कर देना चाहता था।
  • इंग्लैंड में रोटी तथा मांस की कीमतें आसमान छूने लगीं। साथ-साथ इंग्लैंड की मुद्रा का भी अवमूल्यन हुआ।

प्र० 2. नहर और रेलवे परिवहन के सापेक्षिक लाभ क्या-क्या हैं?
उत्तर नहर तथा रेलवे परिवहन के सापेक्षिक लाभ निम्नलिखित हैं

नहरों के सापेक्षिक लाभ

  • नहरों द्वारा खानों से कोयले और लोहे जैसे भारी पदार्थों को कारखानों तक ले जाना काफी सरल हो गया है।
  • नहरों द्वारा माल का आयात व निर्यात सबसे सस्ता पड़ता था।
  • बड़े-बड़े नगरों को जब इन नहरों से मिला दिया गया तो शहरवासियों को सस्ते परिवहन भी उपलब्ध हुए।
  • अन्य साधनों की अपेक्षाकृत नहरों द्वारा की जाने वाली यात्रा में कम समय लगता था।

रेलवे परिवहन के सापेक्षिक लाभ

  • इंग्लैंड के औद्योगीकरण में रेलवे का काफी सराहनीय योगदान रहा है।
  • रेल परिवहन से पूर्व यात्रियों को नहरों में यातायात के साधनों से यात्रा करते समय अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उन्हें उन परेशानियों से छुटकारा मिल गया। रेल की गति नहर के यातायात की साधनों की अपेक्षा तीव्र थी और उस पर बाढ़, सूखे यो तूफान का प्रभाव नहीं पड़ता था।
  • रेल संचार का सबसे सस्ता व सरल साधन है जिससे लोगों को यात्रा करने में आराम हो गया।

प्र० 3. इस अवधि में किए गए आविष्कारों की दिलचस्प विशेषताएँ क्या थीं?
उत्तर 1750 से 1850 में मध्य ब्रिटेन में अनेक आविष्कार हुए। दिलचस्प विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • इन आविष्कारों के फलस्वरूप वाणिज्यवाद और उपनिवेशवाद का प्रभाव बढ़ गया।
  • इन आविष्कारों के कारण अनेक उद्योग जैसे लोहा तथा इस्पात उद्योग, कपड़ा उद्योग, जहाज निर्माण उद्योगों को काफी प्रोत्साहन मिला।
  • इन आविष्कारों के लिए वैज्ञानिकों ने नहीं बल्कि साधारण लोगों ने प्रयास किए और वे अपने प्रयासों में सफल | भी रहे।
  • इन आविष्कारों एवं उपनिवेशवाद के कारण भौगोलिक खोजों और अंतर्राष्ट्रीय बाजारीकरण को बल मिला।
  • कच्चे माल की प्राप्ति तथा तैयार माल की खपत के लिए इंग्लैंड को एक विस्तृत बाजार की आवश्यकता पड़ी। यह स्थिति नि:संदेह अधिकाधिक उपनिवेशों की स्थापना के लिए इंग्लैंड को प्रोत्साहित किया।

प्र० 4. बताइए कि ब्रिटेन के औद्योगीकरण के स्वरूप-कच्चे माल की आपूर्ति को क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर विश्व के किसी भी औद्योगीकरण देश को अपने कारखाने को चलाने के लिए कच्चे माल की आवश्यकता होती है। यदि उस देश में कच्चे माल की कमी है तो उसकी आपूर्ति दूसरे देशों से मँगाकर की जाती है।

ब्रिटेन में लोहे व कोयले की खानें पर्याप्त मात्रा में थीं जिसके कारण उसके लिए लोहा और इस्पात से बनने वाली मशीनों के निर्माण में काफी मदद मिली। फलतः लौह उद्योग के क्षेत्र में वह अग्रणी देश बन गया।

वस्त्र उद्योग ब्रिटेन का दूसरा प्रमुख उद्योग था। उद्योग के लिए कच्चे माल के रूप में कपास की जरूरत थी। वैसे तो इंग्लैंड में उपनिवेशों के स्थापित होने से पूर्व भी कपड़ा बुनने का काम होता था, किंतु बहुत सीमित रूप से। उपनिवेशों के स्थापित होने के बाद इंग्लैंड को पर्याप्त मात्रा में कपास आसानी से उपलब्ध होने लगी। विशेष रूप से भारत से प्रतिवर्ष रुई की हज़ारों गाँठे इंग्लैंड पहुँचती थीं। हम यह भी कह सकते हैं कि इंग्लैंड के सूती वस्त्र उद्योग का अस्तित्त्व भारत से पहुँचने वाली रुई की गाँठों पर निर्भर था।

रेलवे निर्माण एवं जहाज निर्माण भी इंग्लैंड का एक महत्त्वपूर्ण उद्योग था। हालाँकि इन उद्योगों के लिए उत्तम कोटि की लकड़ी की आवश्यकता थी। उसे उत्तम कोटि की लकड़ी भारत तथा अमरीकी बस्तियों से मिलती थी। यदि इन दोनों स्थानों से उत्तम लकड़ी नहीं मिलती तो संभवतः जहाज निर्माण एवं रेलवे निर्माण उद्योग का उल्लेखनीय विकास न हो पाता।

अत: यह स्पष्ट हो जाता है कि ब्रिटेन के औद्योगिकीकरण के स्वरूप पर कच्चे माल की आपूर्ति का पर्याप्त प्रभाव हुआ।

संक्षेप में निबंध लिखिए

प्र० 5. ब्रिटेन में स्त्रियों के भिन्न-भिन्न वर्गों के जीवन पर औद्योगिक क्रांति का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर ब्रिटेन में औद्योगिक क्रान्ति से पूर्व महिलाएँ खेतों के काम में सक्रिय रूप से सहयोग करती थीं। पशुओं का पालन-पोषण उन्हीं के द्वारा होता था। बच्चों की देखरेख व खाना पकाने का काम उन्हीं के हाथों संपन्न होता था। सूत कातना भी
उन्हें आता। घर के खर्च के लिए स्त्रियों को मजदूरी भी करनी पड़ती थी। लेकिन औद्योगीकरण के कारण ब्रिटेन में पुरुष श्रमिकों के साथ स्त्रियों एवं बच्चों की भी हालत और ज्यादा खराब हो गई। उद्योगपति, स्त्रियों को पुरुषों की अपेक्षा शीघ्र काम पर रख लेते थे क्योंकि वे इतनी सशक्त नहीं होती थीं कि संगठन बनाकर उनके अत्याचारों व शोषणवादी प्रवृत्ति की खिलाफत कर सकें। वे इतनी सक्षम भी नहीं थीं कि वे हिसांत्मक रूप से आंदोलन भी कर सकें।

ब्रिटेन में औद्योगीकरण के कारण स्त्रियों को कारखानों में ज्यादा देर तक काम करने के फलस्वरूप उसका बुरा प्रभाव उनके स्वास्थ्य पर पड़ा और स्त्रियों का गृहस्थ जीवन बर्बादी की कगार पर आ गया। वहीं दूसरी तरफ औद्योगीकरण के कारण संपन्न व उच्चवर्ग की स्त्रियों का जीवन और भी अधिक आनंदमय हो गया। उन्हें आसानी से आराम एवं ऐश्वर्य की वस्तुएँ प्राप्त होने लगीं। उनके भौतिक जीवन में काफी अनुकूल परिवर्तन आए। यातायात के साधनों के फलस्वरूप उन्हें और भी ज्यादा आजादी प्राप्त हो गई जो औद्योगीकरण से पूर्व सीमित थी।

नि:संदेह औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप उच्च वर्ग की महिलाओं का जीवन और अधिक सुविधापूर्ण तथा आनंदमय बन गया। उन्हें नवीन उपभोक्ता वस्तुएँ व भोजन सामग्री प्राप्त होने लगी। उनकी जीवन शैली में हर दिन बदलाव आने लगा था।

प्र० 6. विश्व के भिन्न-भिन्न देशों में रेलवे आ जाने से वहाँ के जनजीवन पर क्या प्रभाव पड़ा? तुलनात्मक विवेचना कीजिए।
उत्तर

  • रेलवे के आ जाने से जहाँ साम्राज्यवादी राष्ट्रों के कारखानों के लिए कच्चे माल तथा खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति होने लगी वहीं गुलाम देशों का इन साम्राज्यवादी ताकतों द्वारा और भी अधिक शोषण किया जाने लगा। फलतः उनकी अर्थव्यवस्था एकदम चरमरा गई।
  • रेलवे के विकास के कारण जहाँ साम्राज्यवादी देशों के लोग धनवान होते गए वहीं पर उसके कारण उपनिवेशी देशों की जनता बेकार और गरीब होती चली गई।
  • रेलवे के विकास के फलस्वरूप साम्राज्यवादी शक्तियों को विशेष रूप से लाभ मिला क्योंकि उनका तैयार माल तेजी से अपने औपनिवेशिक क्षेत्रों में पहुँचने लगा और उन्हें अधिकाधिक लाभ मिलने लगा। किन्तु इसके फलस्वरूप औपनिवेशिक राष्ट्रों के ऊपर बहुत दुष्प्रभाव पड़ा। वहाँ पर निर्धनता, शोषण व भुखमरी चारों तरफ फैल गई।
  • रेलवे का विकास खासकर साम्राज्यवादी शक्तियों के लिए लाभप्रद रहा क्योंकि इससे उन्हें कच्चे माल को ले जाने और तैयार माल को अपने अधीन राष्ट्रों में खपत करने का पूरा-पूरा अवसर मिलने लगा। औपनिवेशिक राष्ट्रों में रेलवे का निर्माण साम्राज्यवादी शक्तियों ने अपने हितों की पूर्ति के लिए किया था।
  • साम्राज्यवादी शक्तियों द्वारा स्वतंत्र किए जाने पर अब रेलवे के विकास का लाभ उन राष्ट्रों को भी मिलने लगा है जो सदियों से इसके लाभों से वंचित रह गए थे। अब उन राष्ट्रों की सरकारों को रेलवे से अत्यधिक आय हो रही है।
  • रेलों के निर्माण से साम्राज्यवादी देशों ने बाहरी आक्रमणों तथा आंतरिक विद्रोहों का सुगमता से मुकाबला किया। इसका कारण यह था कि फौजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जाया जा सकता था जबकि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत आंदोलनकारियों के लिए यह विकास प्रतिक्रियावादी था।
  • भारत जैसे औपनिवेशिक राष्ट्र के लिए रेलवे का बड़ा ही महत्त्व है। इसकी सहायता से देश में राजनीतिक चेतना जागी। अब उपनिवेशों के विभिन्न भागों में रहने वाले लोगों के मध्य विचारों का संचार आसानी से होने लगा था जबकि यह संचार उपनिवेशवाद के लिए घातक था।
  • रेलवे के निर्माण से औपनिवेशिक राष्ट्रों को आर्थिक रूप से लाभ पहुँचा। इससे इन राष्ट्रों के व्यापार में वृद्धि हुई। हम कह सकते हैं कि उनका आंतरिक व्यापार चमक उठा जबकि उपनिवेशों का देशी व्यापार छिन्न-भिन्न हो गया।
  • रेलों ने उपनिवेशों में आधुनिक उद्योगों को प्रोत्साहित किया। भारत जैसे उपनिवेश में रेलवे द्वारा सभी आंतरिक । प्रमुख बंदरगाहों को जुड़ने का अवसर मिला। फलतः देश के विभिन्न भागों में आधुनिक उद्योगों की स्थापना होने लगी।
  • उपनिवेशों में रेलों के आगमन से अकालों की भीषणता को कम करने में सहायता मिली। इसकी सहायता से अभावग्रस्त एवं अकालग्रस्त क्षेत्रों में खाद्यान्न एवं अन्य आवश्यक वस्तुएँ शीघ्रतापूर्वक पहुँचाई जा सकती थीं तथा समय रहते उचित कार्यवाही भी की जा सकती थी।

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NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 1

NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 1 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 1 India Location (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) निम्नलिखित में से कौन-सा अक्षांशीय विस्तार भारत की संपूर्ण भूमि के विस्तार के संदर्भ में प्रासंगिक है?
(क) 8° 41′ उत्तर से 35° 7′ उत्तर
(ख) 8° 4′ उत्तर से 35° 6′ उत्तर
(ग) 8° 4′ उत्तर से 37° 6′ उत्तर
(घ) 6° 45′ उत्तर से 37°6′ उत्तर
उत्तर- (ग) 8° 4′ उत्तर से 37°6′ उत्तर

(ii) निम्नलिखित में से किस देश की भारत के साथ सबसे लंबी स्थलीय सीमा है?
(क) बांग्लादेश
(ख) पाकिस्तान
(ग) चीन
(घ) म्यांमार
उत्तर- (क) बांग्लादेश

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा देश क्षेत्रफल में भारत से
बड़ा है?
(ख) फ्रांस
(क) चीन
(ग) मिस्र
(घ) ईरान
उत्तर- (क) चीन

(iv) निम्नलिखित याम्योत्तर में से कौन-सा भारत का मानक याम्योत्तर है?
(क) 69° 30′ पूर्व
(ख) 75° 30′ पूर्व
(ग) 82° 30′ पूर्व
(घ) 90° 30′ पूर्व
उत्तर- (ग) 82° 30′ पूर्व

(v) अगर आप एक सीधी रेखा में राजस्थान से नागालैंड की यात्रा करें तो निम्नलिखित नदियों में से किस एक को आप पार नहीं करेंगे?
(क) यमुना
(ख) सिंधु
(ग) ब्रह्मपुत्र
(घ) गंगा
उत्तर- (ख) सिंधु

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
(i) क्या भारत को एक से अधिक मानक समय की आवश्यकता है? यदि हाँ तो आप ऐसा क्यों सोचते हैं?
उत्तर- हाँ भारत को एक से अधिक मानक समय की आवश्यकता है क्योंकि देशांतर रेखाओं के मानों से स्पष्ट होता है कि इनमें लगभग 30 डिग्री का अंतर है जो हमारे देश के सबसे पूर्वी व पश्चिमी भागों के समय में लगभग 2 घंटों का अंतर होता है। कुछ ऐसे देश हैं, जिनमें अधिक पूर्व पश्चिम विस्तार के कारण एक से अधिक मानक देशांतर रेखाएँ हैं। उदाहरणस्वरूप संयुक्त राज्य अमेरिका में सात मानक समय तथा सोवियत संघ में 11 मानक समय निर्धारित किए गए हैं।

(ii) भारत की लंबी तटरेखा के क्या प्रभाव हैं?
उत्तर- भारत की तटरेखा 7517 कि.मी. लंबी है। भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है, जिसके कारण यहाँ मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, विशाखापट्नम, कोच्चि, तुतिकोरिन, मर्मगांव, मंगलुरु, कांडला, पारादीप, हल्दिया जैसे बड़े-बड़े बंदरगाह का विकास हुआ है, जिनके द्वारा दूसरे देशों से समुद्री मार्गों से व्यापार होता है। भारत में लंबी तटरेखा होने के कारण भारत विश्व में मछली उत्पादन में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके अतिरिक्त समुद्री संसाधनों में खनिज तेल, नमक, मोती, मूंगा आदि की भी प्राप्ति होती है।

(iii) भारत का देशांतरीय फैलाव इसके लिए किस प्रकार लाभप्रद है?
उत्तर- भारत 68° पूर्वी देशांतर से 97° पूर्वी देशांतर के बीच फैला हुआ है। अर्थात् भारत का देशांतरीय विस्तार 30° है जो हमारे देश के सबसे पूर्वी और सबसे पश्चिमी भागों के बीच लगभग 2 घंटे का अंतर पैदा करता है। इसलिए गुजरात की अपेक्षा अरुणाचल प्रदेश में दो घंटे पहले सूर्योदय होता है और गुजरात में अरुणाचल प्रदेश की तुलना में दो घंटे बाद सूर्यास्त होता है। इन दोनों क्षेत्रों के सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के बावजूद घड़ी के समय में अंतर नहीं होता।

(iv) जबकि पूर्व में, उदाहरणतः नागालैंड में, सूर्य पहले उदय होता है और पहले ही अस्त होता है, फिर कोहिमा और नई दिल्ली में घड़ियाँ एक ही समय क्यों दिखाती हैं?
उत्तर- नागालैंड में सूर्य पहले उदय होता है और पहले ही अस्त होता है लेकिन नई दिल्ली में सूर्योदय और सूर्यास्त बाद में होता है। लेकिन समय दोनों स्थान पर एक ही होता है। इसका मुख्य कारण है कि भारत के विभिन्न स्थानों के समय में अंतर न हो इसके लिए एक मानक समय 82° 30′ पर खींची गई है जो इलाहाबाद के पास से गुजरती है। इसलिए भारत के विभिन्न स्थानों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के बावजूद घड़ी के समय में अंतर नहीं होता। उत्तर- छात्र स्वयं करें।

प्र० 3. परिशिष्ट-I पर आधारित क्रियाकलाप (इस अभ्यास को समझाने व विद्यार्थियों से करवाने में अध्यापक सहायता कर सकते हैं)
(i) एक ग्राफ़ पेपर पर मध्य प्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, गोवा, केरल तथा हरियाणा के जिलों की संख्या को आलेखित कीजिए। क्यों जिलों की संख्या का राज्यों के क्षेत्रफल से कोई संबंध है?
(ii) उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा, राजस्थान तथा जम्मू और कश्मीर में से कौन-सा राज्य सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला और कौन-सा एक न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला है?
(iii) राज्य के क्षेत्रफल व जिलों की संख्या के बीच संबंध को हुँढिए।
(iv) तटीय सीमाओं से संलग्न राज्यों की पहचान कीजिए।
(v) पश्चिम से पूर्व की ओर स्थलीय सीमा वाले राज्यों का क्रम तैयार कीजिए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।

प्र० 4. परिशिष्ट-II पर आधारित क्रियाकलाप (इस अभ्यास को समझाने व विद्यार्थियों से करवाने में अध्यापक सहायता कर सकते हैं)
(i) उन केंद्र शासित क्षेत्रों की सूची बनाइए जिनकी स्थिति तटवर्ती है।
(ii) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के क्षेत्रफल और जनसंख्या में अंतर की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
(iii) एक ग्राफ़ पेपर पर दंड आरेख द्वारा केंद्र शासित क्षेत्रों के क्षेत्रफल व जनसंख्या को आलेख्तिा कीजिए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।

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