CBSE Class 11

NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 8

NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 8 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 8 Weather Instruments Maps and Charts (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) प्रत्येक दिन के लिए भारत के मौसम मानचित्र का निर्माण कौन-सा विभाग करता है?
(क) विश्व मौसम संगठन
(ख) भारतीय मौसम विभाग
(ग) भारतीय सर्वेक्षण विभाग
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (ख) भारतीय मौसम विभाग

(ii) उच्च एवं निम्न तापमापी में कौन-से दो द्रवों का प्रयोग किया जाता है?
(क) पारा एवं जल
(ख) जल एवं अल्कोहल
(ग) पारा एवं अल्कोहल
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (ग) पारा एवं अल्कोहल

(iii) समान दाब वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखाओं को क्या कहा जाता है?
(क) समदाब रेखाएँ
(ख) समवर्षा रेखाएँ।
(ग) समताप रेखाएँ
(घ) आइसोहेल रेखाएँ।
उत्तर- (क) समदाब रेखाएँ

(iv) मौसम पूर्वानुमान का प्राथमिक यंत्र है
(क) तापमापी
(ख) दाबमापी
(ग) मानचित्र
(घ) मौसम चार्ट
उत्तर- (घ) मौसम चार्ट

(v) अगर वायु में आर्द्रता अधिक है, तब आई एवं शुष्क बल्ब के बीच पाठ्यांक का अंतर होगा
(क) कम।
(ख) अधिक
(ग) समान
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (क) कम।

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
(i) मौसम के मूल तत्व क्या हैं?
उत्तर- मौसम के मूल तत्वों में तापमान, वायुदाब, पवन, आर्द्रता तथा मेघमयता आदि प्रमुख हैं।

(ii) मौसम चार्ट क्या है?
उत्तर- विभिन्न मौसम वेधशालाओं में प्राप्त आँकड़े पर्याप्त एवं विस्तृत होते हैं। अतः ये एक चार्ट पर बिना कोडिंग के नहीं दिखाए जा सकते। कोडिंग के द्वारा कम स्थान में सूचनाएँ देकर चार्ट की उपयोगिता बढ़ जाती है। इन्हें सिनाप्टिक मौसम चार्ट कहते हैं। तथा जो कोड प्रयोग में लाए जाते हैं, उन्हें मौसम विज्ञान प्रतीक कहते हैं। मौसम पूर्वानुमान के लिए। मौसम चार्ट प्राथमिक यंत्र हैं। ये विभिन्न वायुराशियों, वायुदाब यंत्रों, वाताग्रों तथा वर्षण के क्षेत्रों की अवस्थिति जानने एवं पहचानने में सहयोग करते हैं।

(iii) वर्ग 1 की वेधशालाओं में सामान्यतः कौन-सा यंत्र मौसम परिघटनाओं को मापने के लिए होता है?
उत्तर- उच्चतम वर्ग 1 है। वर्ग 1 की वेधशालाओं में जिन विशिष्ट यंत्रों की सुविधा होती है, वे निम्नलिखित हैं :
(i) अधिकतम एवं न्यूनतम तापमापी
(ii) पवनवेगमापी तथा वात दिग्दर्शी
(iii) शुष्क एवं आर्द्र बल्ब तापमापी
(iv) वर्षामापी
(v) वायुदाबमापी

(iv) समताप रेखाएँ क्या हैं?
उत्तर- मानचित्र पर खींची गई वह काल्पनिक रेखा जो समुद्रतल के अनुसार समान तापमान वाले स्थानों को मिलाती है।

(v) निम्नलिखित को मौसम मानचित्र पर चिह्नित करने के लिए किस प्रकार के मौसम प्रतीकों का प्रयोग किया जाता है?
(क) धुंध
(ख) सूर्य का प्रकाश
(ग) तड़ित
(घ) मेघों में ढका आकाश
उत्तर- (क) धुंध ∞
(ख) सूर्य का प्रकाश Θ
(ग) तड़ित झंझा
(घ) मेघों में ढका आकाश

प्र० 3. निम्न प्रश्न का उत्तर लगभग 125 शब्दों में दें|
(i) मौसम मानचित्रों एवं चार्यों को किस प्रकार तैयार किया जाता है तथा ये हमारे लिए कैसे उपयोगी हैं?
उत्तर- मौसम मानचित्रों एवं चार्टी को निम्न प्रकार से तैयार किया जाता है

मौसम मानचित्र – मौसम मानचित्र पृथ्वी या उसके किसी भाग के मौसमी परिघटनाओं का समतल धरातल पर प्रदर्शन है। ये एक निश्चित दिन में, विभिन्न मौसम तत्वों जैसे-तापमान, वर्षा, सूर्य का प्रकाश, मेघमयता, वायु की दिशा एवं वेग इत्यादि की अवस्थाओं के बारे में बताता है। सन् 1688 में एडमंड हिलेरी ने 30 उत्तर एवं दक्षिण अक्षांशों के लिए एक मानचित्र का प्रकाशन किया, जिसमें व्यापारिक पवनों तथा प्रचलित मानसून पवनों की दिशाओं में प्रदर्शित किया गया था। निश्चित घंटों पर लिए गए प्रेक्षणों को कोड के द्वारा पूर्वानुमान केंद्रों पर प्रेषित किया जाता है। केन्द्रीय कार्यालय इन सूचनाओं का अभिलेख रखता है, जिसके आधार पर मौसम मानचित्र बनाए जाते हैं। ऊपरी वायु प्रेक्षणों को पहाड़ी स्टेशनों, वायुयानों, पायलट-गुब्बारों आदि के द्वारा प्राप्त करके अलग से अंकित किया जाता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना के बाद से ही मौसम मानचित्रों एवं चार्यों को नियमित रूप में तैयार किया जाता है। मौसम वेधशालाएँ आँकड़ों को पुणे स्थित केंद्रीय वेधशाला को दिन में दो बार भेजती हैं।

मौसम मानचित्र की उपयोगिता- किसी स्थान के तापमान, वर्षा, मेघमयता, वायु की दिशा एवं वेग इत्यादि की जानकारी मौसम मानचित्र से मिलती है। समुद्री मछुआरे, समुद्री जहाजी, किसान और आम जनता भी मौसम मानचित्र से लाभान्वित होते हैं। मौसम चार्ट- विभिन्न मौसम वेधशालाओं से प्राप्त आँकड़े पर्याप्त एवं विस्तृत होते हैं। अतः ये एक चार्ट पर बिना कोडिंग के नहीं दिखाए जा सकते। कोडिंग के द्वारा कम स्थाने में सूचनाएँ देकर चार्ट की उपयोगिता बढ़ जाती है। इन्हें सिनाप्टिक मौसम चार्ट करते हैं तथा जो कोड प्रयोग में लाए जाते हैं, उन्हें मौसम विज्ञान प्रतीक कहते हैं। मौसम पूर्वानुमान के लिए मौसम चार्ट प्राथमिक यंत्र है। इसकी उपयोगिता विभिन्न वायु-राशियों, वायुदाब यंत्रों, वाताग्रों तथा वर्षण के क्षेत्रों की अवस्थिति जानने एवं पहचानने में होती है।

प्र० 4. मानचित्र 1 एवं 2 का अध्ययन एवं निम्नलिखित प्रश्नों के उतर दें
NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 8 (Hindi Medium) 4
NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 8 (Hindi Medium) 4.1
(i) इन मानचित्रों में किन ऋतुओं को दर्शाया गया है?
(ii) चित्र 1 में अधिकतम समदाब रेखा का मान क्या है। तथा यह देश के किस भाग से गुजर रही है?
(iii) चित्र 2 में सबसे अधिक एवं सबसे न्यून समदाब रेखाओं का मान क्या है तथा ये कहाँ स्थित हैं?
(iv) दोनों मानचित्रों में तापमान वितरण का प्रतिरूप क्या है?
(v) चित्र 1 में किस भाग का अधिकतम औसत तापमान तथा न्यूनतम औसत तापमान आप देखते हैं?
(vi) दोनों मानचित्रों में आप तापमान वितरण एवं वायुदाब के बीच क्या संबंध देखते हैं?
उत्तर-
(i) इन मानचित्रों में शीत ऋतु और वर्षा ऋतु (आगे बढ़ता हुआ मानसून) को दर्शाया गया है।
(ii) चित्र 1 में समदाब रेखा का अधिकतम मान 1020 मिलीबार है। यह देश के उत्तरी-पश्चिमी भाग से गुजर रही है।
(iii) चित्र 2 में समदाब रेखा का सबसे अधिक मान 1010 मिलीबार एवं सबसे न्यून मान 996 मिलीबार है। सबसे अधिक माने वाली समदाब रेखा लक्षद्वीप और केरल के तटवर्ती भाग के समीप तथा सबसे न्यून माम वाली समदाब रेखा पाकिस्तान में स्थित है।
(iv) चित्र 1 में जनवरी में दक्षिण भारत का तापमान 20° और उत्तर भारत का तापमान 10° से 15° सेंटीग्रेड के बीच है तथा चित्र 2 में जुलाई में दक्षिण भारत और उत्तर भारत का तापमान 20° से 30° सेंटीग्रेड के बीच है।
(v) चित्र 1 में दक्षिण भारत में अधिकतम औसत तापमान तथा हिमालय पर्वतीय भाग में न्यूनतम औसत तापमान देखने को मिलता है।
(vi) तापमान बढ़ता है तो वायुदाब कम होता जाता है।

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NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 16

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 16 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 16 Biodiversity and Conservation (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) जैव विविधता का संरक्षण निम्न में किसके लिए। महत्त्वपूर्ण है?
(क) जंतु
(ख) पौधे
(ग) पौधे और प्राणी
(घ) सभी जीवधारी
उत्तर- (घ) सभी जीवधारी

(ii) निम्नलिखित में से असुरक्षित प्रजातियाँ कौन-सी हैं?
(क) जो दूसरों को अअसुरक्षा दें
(ख) बाघ वे शेर
(ग) जिनकी संख्या अत्यधिक हो
(घ) जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है।
उत्तर- (घ) जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है।

(iii) नेशनल पार्क (National parks) और पशुविहार (Sanctuaries) निम्न में से किस उद्देश्य के लिए बनाए गए हैं?
(क) मनोरंजन
(ख) पालतू जीवों के लिए।
(ग) शिकार के लिए
(घ) संरक्षण के लिए
उत्तर- (घ) संरक्षण के लिए

(iv) जैव विविधता समृद्ध क्षेत्र हैं
(क) उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र
(ख) शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र
(ग) ध्रुवीय क्षेत्र ।
(घ) महासागरीय क्षेत्र
उत्तर- (क) उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र

(v) निम्न में से किस देश में पृथ्वी सम्मेलन हुआ था?
(क) यू०के०
(ख) ब्राजील
(ग) मैक्सिको
(घ) चीन
उत्तर- (ख) ब्राजील

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
(i) जैव विविधता क्या है?
उत्तर- जैव विविधता दो शब्दों बायोडाइवर्सिटी के मेल से बना है, बायो का अर्थ है-जीव तथा डाइवर्सिटी का अर्थ है-विविधता। साधारण शब्दों में किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों की संख्या
और उनकी विविधता को जैव विविधता कहते हैं। इसका संबंध पौधों के प्रकार, प्राणियों और सूक्ष्म जीवाणुओं तथा उनकी आनुवांशिकी और उनके द्वारा निर्मित पारितंत्र से है। यह पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवधारियों की परिवर्तनशीलता, एक ही प्रजाति तथा विभिन्न प्रजातियों में परिवर्तनशीलता तथा विभिन्न पारितंत्रों में विविधता से संबंधित है। जैव-विविधता सजीव संपदा है। यह विकास के लाखों वर्षों के
इतिहास का परिणाम है।

(ii) जैव विविधता के विभिन्न स्तर क्या हैं?
उत्तर- जैव विविधता को तीन स्तरों में विभक्त किया जा सकता है

(क) प्रजातीय जैव विविधता – प्रजातीय जैव विविधता जो आकृतिक, शरीर क्रियात्मक तथा आनुवांशिक लक्षणों द्वारा प्रतिबिंबित होती है।
(ख) आनुवांशिक जैव विविधता – आनुवांशिक जैव विविधता जो प्रजाति के भीतर आनुवांशिक या अन्य परिवर्तनों से युक्त होती है।
(ग) परितंत्रीय जैव विविधता – परितंत्रीय जैव विविधता जो विभिन्न जैव भौगोलिक क्षेत्रों, जैसे-झील, मरुस्थल, तटीय क्षेत्र, ज्वारनदमुख आदि द्वारा प्रतिबिंबित होती है।

(iii) हॉट स्पॉट से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- जिन क्षेत्रों में प्रजातीय विविधता अधिक होती है, उन्हें विविधता के हॉट स्पॉट कहते हैं। ऐसे क्षेत्र जो अधिक संकट में हैं, उनमें संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण संघ ने जैव विविधता हॉट स्पॉट क्षेत्र के रूप में निर्धारित किया है। हॉट स्पॉट उनकी वनस्पति के आधार पर परिभाषित किए गए हैं। पादप महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि ये ही किसी पारितंत्र की प्राथमिक उत्पादकता को निर्धारित करते हैं।

(iv) मानव जाति के लिए जंतुओं के महत्त्व का वर्णन संक्षेप में करें।
उत्तर- जैव विविधता ने मानव जाति के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है। जंतुओं के द्वारा ही पर्यावरण संतुलित रहता है। जंतु मानव जाति के लिए काफी उपयोगी हैं, जैसे-पेड़-पौधों से कई प्रकार की लकड़ियाँ, उद्योगों के लिए कच्चा माल तथा पर्यावरण के संतुलन में भी योगदान मिलता है। पेड़-पौधे भूमि के अपरदन को रोकते हैं।

एक जंतु दूसरे जंतु के आहार के रूप में काम आता है। सभी मनुष्यों के लिए दैनिक जीवन में जैव विविधता एक महत्त्वपूर्ण संसाधन है। जैव विविधता का एक महत्त्वपूर्ण भाग फसलों की विविधता है। जैव विविधता को संसाधनों के उन भंडारों के रूप में भी समझा जा सकता है, जिनकी उपयोगिता भोज्य पदार्थ, औषधि
और सौंदर्य प्रसाधन आदि बनाने में है। खाद्य फसलें, पश, मत्स्य, वन संसाधन और दवा संसाधन आदि कुछ ऐसे प्रमुख आर्थिक महत्त्व के उत्पाद हैं जो मानव को जैव विविधता के फलस्वरूप उपलब्ध होते हैं।

(v) विदेशज प्रजातियों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- वे प्रजातियाँ जो स्थानीय आवास की मूल जैव प्रजाति नहीं हैं, लेकिन उस तंत्र में स्थापित की गई हैं, इन्हें विदेशज प्रजातियाँ कहा जाता है। ऐसे कई उदाहरण हैं, जब विदेशज प्रजातियों के आगमन से परितंत्र में प्राकृतिक या मूल जैव समुदाय को व्यापक नुकसान हुआ। पिछले कुछ दशकों से, कुछ जंतुओं, जैसे-बाघ, चीता, हाथी, गेंडा, मगरमच्छ, मिंक और पक्षियों को उनके सींग, सैंड व खालों के लिए निर्दयतापूर्वक शिकार किया जा रहा है।

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) प्रकृति को बनाए रखने में जैव विविधता की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर- प्रकृति को बनाए रखने में जैव विविधता की भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण है। पारितंत्र में विभिन्न प्रजातियाँ कोई न कोई क्रिया करती हैं। पारितंत्र में कोई भी प्रजाति बिना कारण न तो विकसित हो सकती है और न ही बनी रह सकती है अर्थात् प्रत्येक जीव अपनी जरूरत पूरा करने के साथ-साथ दूसरे जीवों के पनपने में भी सहायक होता है। जीव व प्रजातियाँ ऊर्जा ग्रहण कर उसका संग्रहण करती हैं, कार्बनिक पदार्थ उत्पन्न एवं विघटित करती हैं और पारितंत्र में जल व पोषक तत्वों के चक्र को बनाए रखने में सहायक होती हैं।

इसके अतिरिक्त प्रजातियाँ वायुमंडलीय गैस को स्थिर करती हैं और जलवायु को नियंत्रित करने में सहायक होती हैं। ये पारितंत्रीय मानव जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। परितंत्र में जितनी अधिक विविधता होगी, प्रजातियों के प्रतिकूल स्थितियों में भी रहने की संभावना और उनकी उत्पादकता भी उतनी ही अधिक होगी। प्रजातियों की क्षति से तंत्र के बने रहने की क्षमता भी कम हो जाएँगी। अधिक आनुवांशिक विविधता वाली प्रजातियों की तरह अधिक जैव विविधता वाले परितंत्र में जितनी प्रकार की प्रजातियाँ होगीं, वह परितंत्र उतना ही अधिक स्थायी होगा।

(ii) जैव विविधता के ह्रास के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारकों का वर्णन करें। इसे रोकने के उपाय भी बताएँ।
उत्तर- जैव विविधता के ह्रास के निम्नलिखित कारण हैं
(i) कृषि भूमि को बढ़ाने के लिए वनों का तेजी से ह्रास किया जा रहा है। वन-भूमि के हास के कारण वन्य-जीवों के निवास स्थल का भी ह्रास होता जा रटा है।
(ii) कई क्षेत्रों में मनुष्य ने जंगली जानवरों का काफी मात्रा में शिकार किया है, जिससे इन क्षेत्रों में इन जंगली जानवरों की संख्या काफी कम हो गई है।
(iii) वर्तमान औद्योगिक युग में उद्योगों से निकलने वाला रसायनयुक्त प्रदूषित जल जब जलाशयों में मिल जाता है तो उन जलाशयों के जीव-जंतु या तो खत्म हो जाते हैं या उनका जीवन खतरे में रहता है। इसे रोकने के निम्नलिखित उपाय हैं
(क) विश्व की बंजर भूमि में वनों को लगाना चाहिए।
(ख) जहरीली गैसों से युक्त उद्योगों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए या जनसंख्या विहीन क्षेत्रों में उनकी स्थापना की जानी चाहिए।
(ग) जैविक विविधता के संरक्षण से संबंधित एक रूपरेखा तैयार करनी चाहिए, जिसको अमल में लाने के लिए सभी देशों को बाध्य करना चाहिए।

परियोजना कार्य
(i) जिस राज्य में आपका स्कूल है, वहाँ के नेशनल पार्क National parks पशुविहार Sanctuaries और जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र Biosphere reserves के नाम लिखें और उन्हें भारत के मानचित्र पर रेखांकित करें।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।

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NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 Measures of Dispersion (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 Measures of Dispersion (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 Measures of Dispersion (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास
(पाठ्यपुस्तक से)

प्र.1. ‘किसी बारंबारता वितरण के समझने में परिक्षेपण का माप केंद्रीय मान का एक अच्छा संपूरक है’, टिप्पणी करें।
उत्तर केंद्रीय प्रवृत्ति के माप यह नहीं दर्शाते कि एक श्रृंखला की विभिन्न मदों में औसत से कितनी दूरी है। इस तथ्य का अध्ययन करने के लिए हमें परिक्षेपण अथवा विचरणशीलता अथवा बिखराव के विषय में पूर्ण जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है। परिक्षेपण का मान यह दर्शाता है कि एक श्रृंखला का मान एक औसत मूल्य के कितना नजदीक है या उससे कितना दूर है।

औसत मूल्य एक ऐसा मूल्य होता है जो पूरी श्रृंखला का प्रतिनिधित्व करता है परंतु विभिन्न मदों में एक दूसरे से और औसत से विभिन्न होने की प्रवृत्ति पाई जाती है, परिक्षेपण इनके अंतर के विस्तार को मापता है। अन्य शब्दों में परिक्षेपण विभिन्न मदों तथा केंद्रीय बिखराव के विस्तार को मापता है। अतः औसत एवं परिक्षेपण एक दूसरे के पूरक हैं। इसे एक उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है। नीचे तीन श्रृंखलाएँ दी गई हैं

NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 1

तीनों समूहों का औसत 5 है (50/10) परंतु समूह (क) में परिक्षेपण शून्य है, समूह (ख) में, परिक्षेपण कम है परंतु समूह (ग) के आँकड़ों का बिखराव वे विचरणशीलता बहुत अधिक है। अत: औसत श्रृंखला के वर्णन लिए अकेले पर्याप्त नहीं हैं।

प्र.2. परिक्षेपण का कौन-सा माप सर्वोत्तम है और कैसे?
उत्तर मानक विचलन या विचरण गुणांक परिक्षेपण का सर्वोत्तम माप है क्योंकि :

(क) यह सर्वाधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित है तथा इस पर निर्भर किया जा सकता है।
(ख) इसका बीजगणितीय विवेचन संभव है, इससे मानक विचलन गुणांक, विचरण गुणांक, सामूहिक मानक विचलन आदि की गणना की जा सकती है जो विचरणशीलता मापने में सर्वाधिक प्रयोग किये जाते हैं।
(ग) माध्य विचलन, चतुर्थक विचलन, परास किसी भी दो श्रृंखलाओं से सामूहिक रूप से नहीं निकाला जा सकता परंतु सामूहिक मानक विचलन की गणना संभव है।
(घ) यह सभी मदों पर आधारित होता है इसीलिये यह अधिक विश्वसनीय है।
(ङ) सभी विधियों की मानक त्रुटि भी मानक विचलन से प्राप्त होती है।
(च) माध्य से प्राप्त विचलनों के वर्गों का योग न्यूनतम होता है, अतः यह सर्वोत्तम माप है।
(छ) विचरणशीलता या स्थिरता को मापने के लिए माध्य विचलन, चतुर्थक विचलन या परास की तुलना में विचरण गुणांक सर्वोत्तम प्रयोग में आता है।
(ज) यह समांतर माध्य पर आधारित है, अतः इसमें उसके सभी गुण हैं।
(झ) यदि X और मानक विचलन ज्ञात हो तो हम मदों की संख्या का जोड़ तथा उनके वर्गों को जोड़ भी ज्ञात कर सकते है।

प्र.3. परिक्षेपण के कुछ माप मानों के प्रसरण पर निर्भर करते हैं, लेकिन कुछ केंद्रीय मान से मानों के विचरण के आधार पर परिकलित किए जाते हैं। क्या आप सहमत हैं?
उत्तर परिक्षेपण के चार मुख्य माप हैं।

NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 2
इनमें से, परास और चतुर्थक विचलन मानों के प्रसरण पर निर्भर करते हैं और इसीलिये परिक्षेपण के स्थैतिक माप कहलाते हैं। दूसरी ओर, माध्य विचलन और मानक विचलन केंद्रीय मान के मानों के विचरण के आधार पर परिकलित किये जाते हैं। एक और विधि है लारेंज वक्र जो परिक्षेपण को आरेखीय रूप से मापने की विधि है।

प्र.4. एक कस्बे में 25% लोग रुपये 45,000 से अधिक आय अर्जित करते हैं जबकि 75% लोग 18,000 से अधिक आय अर्जित करते हैं। परिक्षेपण के निरपेक्ष और सापेक्ष मानों का परिकलन कीजिए।
उत्तर

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प्र.5. एक राज्य के 10 जिलो की प्रति एकड़ गेहूँ और चावल की उपज निम्नवत् है:

NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 4
प्रत्येक फसल के लिए परिकलन करें।

(क) परास
(ख) चतुर्थक विचलन
(ग) माध्य से माध्य विचलन
(घ) मध्यिका से माध्य विचलन
(ङ) मानक विचलन
(च) किस फसल में अधिक विचरण है?
(छ) प्रत्येक फसल के लिए विभिन्न मापों के मानों तुलना कीजिए।

उत्तर

NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 5

NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 6

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NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 8

NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 9

प्र.6. पूर्ववर्ती प्र०में, विचरण के सापेक्ष मापों को परिकलित कीजिए और वह मान बताइए जो आपके विचार से सर्वाधिक विश्वसनीय है
उत्तर

NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 10

प्र.7. किसी क्रिकेट टीम के लिए एक बल्लेबाज का चयन करना है। यह चयन x और 9 के बीच पाँच पूर्ववर्ती टेस्ट के स्कोर के आधार पर करना है जो निम्नवत् हैं।
NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 11
किस बल्लेबाज को चुना जाना चाहिए।

(क) अधिक रन स्कोर करने वाले को, या
(ख) अधिक भरोसेमंद बल्लेबाज को।

उत्तर
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NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 13
बल्लेबाज x का औसत स्कोर अधिक था जबकि बल्लेबाज ५ अधिक भरोसेमंद है। इसीलिये, हमें यह जानना होगा कि हमारे लिये क्या अधिक महत्त्वपूर्ण है-यदि स्थिरता अधिक महत्त्वपूर्ण है तो हमें बल्लेबाज Y का चयन करना चाहिए और यदि अधिक रन वाले की आवश्यकता है तो बल्लेबाज x का चयन करना चाहिए।

प्र.8. दो ब्रांडों के बल्बों की गुणवत्ता को जाँचने के लिए, ज्वलन अवधि घंटों में उनके जीवन काल को, प्रत्येक ब्रांड के 100 बल्बों के आधार पर निम्नानुसार अनुमानित किया गया है।
NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 14
NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 15
(क) किस ब्रांड का जीवन काल अधिक है?
(ख) कौन सा ब्रांड अधिक भरोसेमंद है?
उत्तर
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NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 18
NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 19

(क) ब्रांड (ख) के बल्बों की औसत आयु ब्रांड (क) की तुलना में अधिक है। इसीलिए, ब्रांड (ख) के बल्बों की जीवन काल ब्रांड (क) की तुलना में अधिक है।
(ख) क्योंकि ब्रांड B के बल्बों का विचरण गुणांक ब्रांड (क) की तुलना में कम है इसीलिए, ब्रांड (ख) ज्यादा भरोसेमंद और स्थिर है।

प्र.9, एक कारखाने के 50 मजदूरों की औसत दैनिक मज़दूरी 200 रुपये तथा मानक विचलन 40 रुपये था। प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 20 रुपये की वृद्धि की गई। अब मज़दूरों की औसत दैनिक मजदूरी और मानक विचलन क्या है? क्या मज़दूरी में समानता आई है?
उत्तर नई औसत 240 होगी क्योंकि माध्य मूलों से स्वतंत्र नहीं है। बल्कि यह उसी संख्या से बढ़ती या घटती है जिससे श्रृंखला के सभी मूल्यों को बढ़ाया या घटाया गया हो। परंतु मानक विचलन मूलों से स्वतंत्र है इसीलिए, यह समान रहेगा।

परंतु विचरण गुणांक मानक विचलन को माध्य से भाग करके प्राप्त होता है जैसा कि मानक विचलन समान है जबकि माध्य बढ़ गई है, इसीलिए इसमें अधिक समानता आ जाएगी। इसे नीचे दर्शाया गया है:
NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 20

प्र.10. पूर्ववर्ती प्र०में यदि प्रत्येक मजदूर की मज़दूरी में 10% कि वृद्धि की जाये तो माध्य और मानक विचलन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर माध्य 10% बढ़ जाएगी क्योंकि माध्य मूलों से स्वतंत्र नहीं है परंतु मानक विचलन समान रहेगा क्योंकि मूलों से स्वतंत्र है।
नई माध्य = 200 + 10% of 200 = 200 + 20 = 220 मानक विचलन समान होगा।

प्र.11. निम्नलिखित वितरण के लिए, माध्य से माध्य विचलन और मानक विचलन का परिकलन कीजिए।
NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 21
उत्तर
NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 22
NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 23

प्र.12. 10 मानों का योग 100 है और उनके वर्गों का योग 1090 है। विचरण गुणांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर
NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 6 (Hindi Medium) 24

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NCERT Solutions for Class 11 History Chapter 4 The Central Islamic Lands (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 History Chapter 4 The Central Islamic Lands (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 History Chapter 4 The Central Islamic Lands (Hindi Medium)

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अभ्यास प्रश्न (पाठ्यपुस्तक से) (NCERT Textbook Questions Solved)

संक्षेप में उत्तर दीजिए

प्र० 1. सातवीं शताब्दी के आरम्भिक दशकों में बेदुइओं के जीवन की क्या विशेषताएँ थीं?
उत्तर सातवीं शताब्दी में अरब का समाज अनेक कबीलों में विभाजित था। प्रत्येक कबीले का नेतृत्व एक शेख द्वारा किया जाता
था, वह कुछ सीमा तक पारिवारिक संबंधों के आधार पर तथा व्यक्तिगत साहस, बुद्धिमत्ता और उदारता (मुरव्वा) के आधार पर चुना जाता था। प्रत्येक कबीले के अपने स्वयं के अलग-अलग देवी-देवता होते थे, जो बुतों (सनम) के रूप में मस्जिदों में पूजे जाते थे। बहुत से अरब कबीले खानाबदोश या बद्दू अर्थात् बेदूइनी होते थे। ये लोग आमतौर पर मुख्यतः भोजन के खाद्य पदार्थ के रूप में खजूर और अपने ऊँटों के लिए चारे की तलाश में रेगिस्तान में सूखे क्षेत्रों से हरे-भरे क्षेत्रों ( नखलिस्तानों) की ओर जाते रहते थे।

हम जानते हैं कि नखलिस्तानों में पानी के चश्मे (झील) तथा खजूर के पेड़ों के झुंड पाए जाते हैं। इन नखलिस्तानों के आसपास बेदूइनी छोटी-छोटी खेती करके अपनी आवश्यकतानुसार अनाज उत्पन्न कर लेते थे। अनाज का भूसा ऊँटों के चारे के काम में आता था।

अरब कबीलों में राजनीतिक विस्तार तथा सांस्कृतिक समानता लाना आसान काम नहीं था। उनमें परस्पर अपने-अपने कबीलों के वर्चस्व को कायम रखने के लिए प्रायः झगड़े होते रहते थे। अतः उनका जीवन संघर्षशील और युद्धों में उलझा हुआ था।

ऊँट उनके परिवहन का मुख्य साधन तथा सुख-दुख का साथी था। ऊँट के बिना रेगिस्तान में उनका जीवित रहना असंभव था। इसके अतिरिक्त बदूइओं का जीवन रेगिस्तान की शुष्क रेत के समान ही शुष्क बन गया था। नि:संदेह रेगिस्तान की जलवायु ने उन्हें कठोर तथा बर्बर बना दिया था। अरबों में मूर्तिपूजा का प्रचलन था। प्रत्येक कबीले के अपने देवी-देवता होते थे। इनकी बुतों (सनम) के रूप में मस्जिदों में पूजा की जाती थी। मक्का कबीलों का एक प्रसिद्ध स्थान था। साथ ही मक्का में कुरैश नामक कबीलों का अत्यधिक प्रभाव था। अरबों का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण धार्मिक केंद्र काबा भी यहीं पर स्थित था।

प्र० 2. ‘अब्बासी क्रांति’ से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर उमय्यद वंश को मुस्लिम राजनैतिक व्यवस्था के केंद्रीयकरण की सफलता के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ी। ‘दवा’ नामक
एक सुनियोजित आंदोलन द्वारा उमय्यद वंश का पतन किया गया। सन् 750 में इस वंश की जगह अब्बासियों ने ले ली जो मक्का के निवासी थे। अब्बासियों में उमय्यद शासन को दुष्ट बताया और यह पेशकश की कि वे पैगंबर मुहम्मद के मूल इस्लाम की पुनस्र्थापना करेंगे। इस क्रांति से न केवल वंश परिवर्तन हुआ बल्कि इस्लाम के राजनैतिक ढाँचे और उसकी संस्कृति में भी भारी परिवर्तन आए।।

अब्बासियों का विद्रोह खुरासान (पूर्वी ईराम) के बहुत दूर स्थित क्षेत्र से शुरू हुआ। यह स्थान इतना ज्यादा दूर था कि दमिश्क से बहुत तीव्रगामी घोड़ों से 20 दिन में वहाँ पहुँचा जा सकता था। खुरासान में अरब ईरानियों की मिली-जुली आबादी थी। यहाँ पर अधिकांश सैनिक इराक से आए थे और वे सीरियाई लोगों के वर्चस्व से असंतुष्ट थे। खुरासान के अरब नागरिक उमय्यद शासन से घृणा करते थे। इसका कारण यह था कि अपने शासन में करों में जो रियायतें और विशेषाधिकार देने के वचन दिए गए थे, वे उसे पूरे नहीं कर सके थे। जहाँ तक ईरानी मुसलमानों या मवालियों का संबंध है, उन्हें अपनी जातीय चेतना से ग्रस्त अरबों की उपेक्षा का शिकार बनना पड़ा था और वे उमय्यदों को बाहर निकालने के किसी भी अभियान में जुड़ जाना चाहते थे।

पैगंबर के चाचा अब्बास के वंशज अब्बासियों ने विभिन्न असहमत समूहों का समर्थन प्राप्त किया और यह वचन दिया कि पैगंबर के परिवार (अहल-अल-बयत) का कोई मसीहा (महदी) उन्हें उमय्यदों के शोषणकारी शासन से आजादी दिलाएगा और सत्ता प्राप्ति के अपने तरीकों को इस्लामिक दृष्टि से वैध बताया। एक ईरानी गुलाम अबू मुस्लिम ने उनकी सेना का नेतृत्व किया और उमय्यदों के अंतिम खलीफा मारवान को जब नदी पर हुई, लड़ाई में पराजित किया।

अब्बासी शासनकाल में अरबों के प्रभाव में कमी आई और ईरानी संस्कृति का वर्चस्व बढ़ गया। अब्बासियों ने अपनी राजधानी प्राचीन ईरानी महानगर टेसीफोन के खंडहरों के पास बगदाद में स्थापित की। उन्होंने सेना व नौकरशाही का पुनर्गठन गैर-कबीलाई पृष्ठभूमि का किया। अब्बासी शासकों ने खिलाफत की धार्मिक स्थिति और कार्यों को सुदृढ़ बनाया और इस्लामी संस्थाओं तथा विद्वानों को संरक्षण प्रदान किया। उन्होंने उमय्यदों के शानदार शाही वास्तुकला और राजदरबार के व्यापक समारोहों की परंपरा को बनाए रखा। यही घटनाएँ इस्लाम के इतिहास में अब्बासी क्रांति के नाम से जानी जाती हैं।

प्र० 3. अरबों, ईरानियों व तुर्को द्वारा स्थापित राज्यों की बहुसंस्कृतियों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर अब्बासी शासनकाल में अरबों के प्रभाव में हास होता गया है और ईरानी संस्कृति का प्रभाव काफी हद तक बढ़ गया।
अब्बासियों ने अपनी राजधानी प्राचीन ईरानी महानगर टेसीफोन के खंडहरों के पास बगदाद में स्थापित की। इराक और खुरासान की अपेक्षाकृत अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सेना और नौकरशाही का पुनर्गठन गैर-कबीलाई आधार पर किया गया। अब्बासी शासकों ने खिलाफ़त की धार्मिक स्थिति व कार्यप्रणाली को सुदृढ़ बनाया और इस्लामी संस्थाओं और विद्वानों को संरक्षण प्रदान किया। उन्होंने उमय्यदों की उत्कृष्ट शाही वास्तुकला और राजदरबार के व्यापक समारोहों की परंपरा को बनाए रखा।

इस्लाम धर्म के प्रचार-प्रसार में अरबों, ईरानियों व तुर्को ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। अरबों का वर्चस्व अरब व सीरिया, ईरानियों का इराक व ईरान तथा तुर्को का खुरासान व ऑक्सस आदि पर था। प्रत्येक राज्य में गैर-मुस्लिम लोगों से कर प्राप्त कर लेने के बाद उचित आचरण किया जाता था। उनको अपनी संपत्ति रखने और आर्थिक कार्यों की पूर्ति के लिए अधिकार प्राप्त थे।

दूर स्थित प्रांतों पर बगदाद का नियंत्रण कम होने से नौवीं शताब्दी में अब्बासी राज्य कमजोर हो गया। इस कमजोरी का एक प्रमुख कारण अरब समर्थकों व ईरान समर्थकों की आपसी विचारधारा में बदलाव आना था।

इस्लामी समाज सन् 950 से 1200 के मध्य किसी एकल राजनीतिक व्यवस्था और संस्कृति की एकल भाषा (अरबी) से एकजुट नहीं रहा, बल्कि सामान्य आर्थिक व सांस्कृतिक प्रतिरूपों द्वारा उनमें एकजुटता बनी रही। फ़ारसी का विकास इस्लामी संस्कृति की उच्च भाषा के रूप में किया गया। इस एकता के निर्माण में बौद्धिक परम्पराओं के मध्य संवाद की परिपक्वता ने भी अहम भूमिका निभाई। विद्वान व व्यापारी वर्ग इस्लामी राज्यों में स्वतंत्र रूप से भ्रमण कर सकते थे तथा-विचारों व तौर-तरीकों में खास भूमिका निभाते थे, कुछ लोग धर्मान्तरण के फलस्वरूप गाँवों के स्तर तक नीचे पहुँच गए थे।

दसवीं व ग्यारहवीं शताब्दियों में तुर्की सल्तनत के उदय के परिणामस्वरूप अरबों व ईरानियों के साथ तीसरा प्रजातीय समूह तुर्की लोगों का भी जुड़ाव हुआ। तुर्की तुर्किस्तान के मध्य एशियाई घास के क्षेत्रों के खानाबदोश कबीलाई थे और इन लोगों द्वारा शनैः-शनै इस्लाम धर्म कबूल कर लिया गया। वे कुशल घुड़सवार व योद्धा थे और वे गुलामों और सैनिकों के रूप में अब्बासी, सुमानी और बुवाही प्रशासनों में सम्मिलित हो गए।

इस प्रकार वर्तमान समाज का बहुसांस्कृतिक स्वरूप उभरकर सामने आया जो अरबों, ईरानियों व तुर्को द्वारा सिंचित हुआ था।

प्र० 4. यूरोप वे एशिया पर धर्मयुद्धों का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर पोप अर्बन द्वितीय (Urban II) और बाइजेंटाइन सम्राट एलेक्सियम प्रथम (Alexius I) ने 1095 से 1291 के मध्य पूर्वी भूमध्यसागर के तटवर्ती मैदानों में मुस्लिम शहरों के विरुद्ध धर्म के नाम पर मुसलमानों के साथ कई लड़ाइयाँ लड़ीं जिन्हें धर्मयुद्ध या जेहाद कहा गया।

इन धर्मयुद्धों का विवरण निम्नलिखित है

1. प्रथम धर्मयुद्ध (1098-1099)-फ्रांस और इटली के सैनिकों ने सीरिया में एंटीओफ और जेरूसलम पर
कब्ज़ा कर लिया। इस युद्ध के दौरान मुसलमानों और यहूदियों की निर्मम हत्याएँ की गई। मुस्लिम लेखकों ने ईसाइयों को फिरंगी अथवा इफ्रिजी कह कर संबोधित किया। इन्होंने सीरिया-फिलिस्तीन के क्षेत्र में चार राज्य स्थापित किए, जिन्हें सामूहिक रूप से ‘आउटरैमर’ अर्थात समुद्रपारीय भूमि कहा जाता है। यह याद रखने योग्य है कि बाद के धर्मयुद्ध इसी प्रदेश की रक्षा और विस्तार के लिए लड़े गए थे।

2. द्वितीय धर्मयुद्ध (1145-49)-इस युद्ध के दौरान जर्मन और फ्रांसीसी सेना ने दमिश्क पर कब्ज़ा करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें हारकर घर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। परिणामतः आउटरैमर की शक्ति कम होती चली गई और धर्मयुद्ध का जोश अब खत्म हो गया। लेकिन अंत में ईसाई तीर्थयात्रियों के लिए जेरूसलम में स्वतंत्र रूप से प्रवेश करने का अधिकार मिल गया।

3. तीसरा धर्मयुद्ध (सन् 1291 में) – ईसाइयों को फिलिस्तीन से बाहर भगा दिया गया और उनके विरुद्ध मुस्लिम राज्यों का रुख सख्त और मुस्लिम सत्ता की पुनः बहाली हो गई।
धीरे-धीरे यूरोप की इस्लाम में सैनिक दिलचस्पी समाप्त हो गई। अब उसका ध्यान अपने आंतरिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास की ओर केंद्रित हो गया।

यूरोप वे एशिया पर धर्मयुद्धों का प्रभाव – यूरोप व एशिया महाद्वीपों के जनजीवन पर धर्मयुद्धों का अत्यधिक व्यापक वे गहरा प्रभाव पड़ा।

सही प्रभाव – धर्मयुद्धों के विनाशकारी व भयंकर होने के बावजूद कुछ सही प्रभाव जनजीवन पर पड़े; जैसे-

  • युद्धों के फलस्वरूप यूरोपीय सभ्यता और संस्कृति का विकास हुआ। अरबों के साथ मिलने से ज्ञान का व्यापक विस्तार हुआ।
  • पश्चिम और पूर्व में आपसी व्यापारों में बढ़ोतरी व नए-नए पदार्थों का ज्ञान हुआ। यूरोपवासियों ने रेशम, कपास, चीनी, सीसे के बर्तनों, गरम मसालों व दवाओं आदि से परिचय प्राप्त किया।
  • यूरोपीय व एशियाई लोगों में धैर्य व उत्साह की वृद्धि हुई।
  • अनेक नवीन भौगोलिक खोजें हुई।

गलत प्रभाव – धर्मयुद्धों के कारण यूरोप व एशिया महाद्वीपों पर कुछ गलत प्रभाव भी पड़े; जैसे –

  • व्यापक स्तर पर जन व धन की हानि हुई।
  • ईसाइयों की कमजोरी सिद्ध हुई और पोप के सम्मान में भी भारी क्षति आई।

प्र० 5. रोमन साम्राज्य के वास्तुकलात्मक रूपों से इस्लामी वास्तुकलात्मक रूप कैसे भिन्न थे?
उत्तर रोमन साम्राज्य की वास्तुकला की विशेषताएँ-रोमन साम्राज्य की वास्तुकला अत्यधिक कुशलतापूर्ण थी। रोमन साम्राज्य
के भवन निर्माण या वास्तुकला के प्रारूप रोमन शासकों के महान क़लात्मक प्रेम को प्रदर्शित करती हैं। उनकी वास्तुकला की निम्न विशेषताएँ देखने को मिलती हैं-रोमन वास्तु कलाकारों द्वारा ही सर्वप्रथम कंक्रीट का प्रयोग किया गया था। उन कलाकारों ने दुनिया को ईंट व पत्थर के टुकड़ों को मजबूती से जोड़ने की कला का ज्ञान कराया गया। रोमन कलाकारों ने वास्तुकला निर्माण के क्षेत्र में दो नए प्रयोग किए-(i) डाट का प्रयोग और (ii) गुम्बदों का आविष्कार।

रोमन वास्तुकला में निपुण कलाकार डाट की सहायता से दो-तीन मंजिला इमारतें बनाते चले गए। डाटों का इस्तेमाल पुल, द्वार और विजय स्मारकों के निर्माण में अधिक किया गया था।

उदाहरण के लिए

  • रोम के फोरम जूलियस की दुकानें। पुराने रोमन फोरम के विस्तार के लिए 51 ई० के बाद स्तंभों वाले इस चौक (पिआजा) को बनाया गया।
  • चित्र नाइम्स के पास पान दु गार्ड फ्रांस, प्रथम शताब्दी ई० के रोम इंजीनियरों ने तीन महाद्वीपों के पार पानी ले जाने के लिए विशाल जलसेतुओं (Aqueducts) का निर्माण किया।

पोम्पई – एक मदिरा व्यापारी का भोजन कक्ष। कमरे की दीवारों पर मिथक पशु बनाए गए हैं। 79 ई० में बना कोलोसिथम जहाँ तलवारिये (तलवार चलाने के निपुण योद्धा) जंगली जानवरों का मुकाबला करते थे। यहाँ एक साथ 60,000 दर्शक बैठ सकते थे।

रोमन कलाकारों द्वारा बनाए गए कोलोसियम और पेथियन नामक भवन वास्तुकला के उत्कृष्ट प्रारूप हैं। कोलोसियम एक प्रकार का गोलाकार थियेटर की आकृति का था जहाँ रोमवासी पशुओं व जंगली तथा दासों के मध्य होने वाली लड़ाइयों को बैठकर देखते थे। थियन एक गोल गुम्बद है। इसकी ऊँचाई व चौड़ाई लगभग 142 फीट है और इसका निर्माण रोम सम्राट हैड्रियन द्वारा कराया गया था।

रोमन वास्तुकला के लोग इंजीनियरी कला से भी आगे निकल चुके थे। उनके द्वारा बनाए गए पुल व सड़कें आज भी विद्यमान हैं।

इस्लामी वास्तुकला की विशेषताएँ – अरब या मुस्लिम वास्तुकला निर्माताओं ने मेहराब, गुम्बद का निर्माण करना रोमन लोगों से सीखा। उन्होंने उनकी नकल पर अनेक उत्कृष्ट मस्जिदों या इबादतगाहों तथा मकबरों व मेहराबों या मदरसों का निर्माण किया। इस्लामी वास्तुकला की विशेषताएँ इस प्रकार हैं

दसवीं शताब्दी की अवधि तक इस्लामी जगत् का ऐसा स्वरूप उभरा जिसे पहचानना आसान था। इस्लामी साम्राज्यों में अनेक धार्मिक इमारतें, इस्लामी जगत की पहचान बनीं। मध्य एशिया से लेकर स्पेन तक जितनी भी मस्जिदें, मदरसे व मकबरे बने उन सभी का मूल प्रारूप एक जैसा था। उन्होंने वास्तुकला के निर्माण में नवीनता मीनारों और खुले सहन आदि के क्षेत्र में दिखलायी। ये सभी इमारतें मुस्लिम समुदाय की आध्यात्मिकता और व्यावहारिक आवश्यकताओं की जरूरतें थीं।

इस्लाम की पहली सदी में मस्जिद ने एक विशेष वास्तुशिल्पीय रूप (खंभों के सहारे वाली छत) प्राप्त कर लिया था। इसे हम प्रादेशिक भिन्नताओं से अलग कर सकते हैं। प्रत्येक मस्जिद में एक खुला प्रांगण (आँगन) होता था जहाँ एक फव्वारा अथवा जलाशय का निर्माण किया जाता था। यह प्रांगण एक बड़े कक्ष की ओर खुलता था जिसमें इबादत करने वालों की लम्बी पंक्तियों और नमाज के नेतृत्व करने वाले इमाम के लिए विस्तृत स्थान होता था। बड़े कक्षों की दो विशेषताएँ थीं

  • दीवार में एक मेहराब होती थी जो मक्का (किबला) की ओर निर्देशित करती थी।
  • एक मंच या मिम्बर जिसका प्रयोग शुक्रवार को दोपहर की नमाज के समय प्रवचन देने के लिए किया जाता था।

इमारत मुख्य रूप से मीनार से जुड़ी होती है। इस मीनार का प्रयोग नियत समयों पर प्रार्थना हेतु बुलाने के लिए किया जाता है। मीनार नए धर्म के अस्तित्व का प्रतीक था। शहरी और ग्रामीण स्थलों में समय का अनुमान पाँच दैनिक प्रार्थनाओं व साप्ताहिक प्रवचनों की मदद से लगाते थे।

NCERT Solutions for Class 11 History Chapter 4 (Hindi Medium) 1

यह है दूसरी अब्बासी राजधानी समारा की अल-मुतव्वकिल की महान मस्जिद। इसका निर्माण सन् 850 ई० में हुआ था। इसकी ऊँचाई 50 मीटर है। इसका निर्माण ईंटों द्वारा हुआ है तथा मेसोपोटामिया की वास्तुकला की परंपराओं के प्रति प्रेरित यह महान मस्जिद कई शताब्दियों तक संसार की सबसे बड़ी मस्जिद थी।

NCERT Solutions for Class 11 History Chapter 4 (Hindi Medium) 2

यह है 1233 में स्थापित मुस्तनसिरिया मदरसे (महाविद्यालय) का आँगन। मदरसे मस्जिदों से जुड़े होते थे, लेकिन बड़े मदरसों की अपनी मस्जिदें होती थीं।

पथरीले टीले के ऊपर अल-मलिक चट्टान का गुंबद, इस्लामी वास्तुकला का पहला बड़ा नमूना है। जेरूसलम नगर की मुस्लिम के प्रतीक रूप में इस स्मारक का निर्माण किया गया।

केंद्रीय प्रांगणों के चारों ओर निर्मित इमारतों के निर्माण का प्रारूप न केवल मस्जिदों व मकबरों में बल्कि काफिलों की सरायों, अस्पतालों और महलों में भी पाया जाता था। उमय्यदों ने नखलिस्तानों में ‘मरुस्थली महलों का निर्माण कराया; जैसे–फिलिस्तीन में खिरबत अल-मफजर व जोर्डन में कुसाईर अमरा। ये सभी शानदार व विलासपूर्ण निवास स्थानों और शिकार तथा मनोरंजन के लिए विश्राम-स्थलों के रूप में काम में आते थे।

इस फर्श को चित्रों, प्रतिमाओं एवं पच्चीकारी की सुंदर कला से सुसज्जित किया गया था। इनका निर्माण नि:संदेह रोमन व ससानी वास्तुशिल्प के प्रभावस्वरूप हुआ था।

प्र० 6. रास्ते में पड़ने वाले नगरों का उल्लेख करते हुए समरकंद से दमिश्क तक की यात्रा का वर्णन कीजिए।
उत्तर समरकंद से दमिश्क तक यात्रा करने में हमें अनेक देशों; जैसे-उजबेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ईरान, इराक और सीरिया आदि से होकर जाना पड़ेगा।

सड़क मार्ग द्वारा यात्रा के दौरान पड़ने वाले शहर – समरकन्द से सड़क मार्ग द्वारा यात्रा करने पर हम कर्मी (उजबेकिस्तान), करकी (तुर्कमेनिस्तान), तेहरान (ईरान), बगदाद (इराक) से होते हुए दमिश्क पहुँचते हैं।

रेलमार्ग द्वारा यात्रा के दौरान पड़ने वाले शहर – समरकन्द से रेलमार्ग द्वारा यात्रा के दौरान पड़ने वाले शहरों में बुखारा (उजबेकिस्तान), करकी (तुर्कमेनिस्तान), मशाद (ईरान), तेहरान (ईरान), बोआन (ईरान), बगदाद (इराक), अनाम (इराक) जैसे शहर प्रमुख हैं।

नि:संदेह समरकंद, तेहरान, बग़दाद तथा दमिश्क आदि इस यात्रा के महत्त्वपूर्ण नगर हैं जिनका वर्णन निम्नवत् किया जा सकता है

समरकंद मध्य एशिया का सबसे प्राचीन नगर है और अपने पुराने भवनों, मस्जिदों, मकबरों आदि के कारण प्रसिद्ध है। तैमूर का मकबरा यहीं पर है। आज यह एक औद्योगिक नगर बन गया है और यह नगर चाय, शराब, वस्त्र उद्योग और मोटरसाइकिल उद्योग के लिए जाना जाता है।

तेहरान ईरान की राजधानी है जबकि बगदाद इराक की राजधानी है और दमिश्क सीरिया की राजधानी है। ये सभी राजधानियाँ हैं। ये सभी राजधानियाँ अनेक राजनीतिक, औद्योगिक, शैक्षणिक, सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों के केंद्र तथा प्राचीनता और आधुनिकता के लक्षणों से युक्त हैं।

इसके अतिरिक्त ईरान एक प्राचीन और महान देश है और यह अपनी सभ्यता एवं वीरता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस्लाम इस देश का धर्म है। यहाँ फ़ारसी, कुर्दिश और, अरबी भाषाओं का प्रचलन है। इसके साथ ही, ईरान एक इस्लामिक गणराज्य भी है। विशेषतः यह देश अपने गलीचों के लिए संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है।

इराक, ईरान का पड़ोसी देश है। मुख्य थल और जलमार्ग पर स्थित होने के कारण इसकी राजधानी बगदाद, खिलाफत का एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं आर्थिक केंद्र बन गया था। खलीफा हारून-अल-रशीद के शासनकाल में बगदाद समृद्धि की चरम पर पहुँच गया था। इस देश की भाषा अरबी और धर्म इस्लाम है। पेट्रोलियम इस देश की अर्थव्यवस्था में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मद है। इसके अतिरिक्त यह देश विश्व में खजूर निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश है।

कहा जाता है कि दमिश्क मस्जिदों का शहर है। यहाँ मस्जिदों की संख्या करीब दो हजार से भी अधिक है। उमैय्यद मस्जिद यहाँ की सबसे प्रसिद्ध है। इसके अलावा यह मस्जिद विश्व की सर्वाधिक विशाल मस्जिदों में से एक है। वर्तमान समय में दमिश्क सीरिया की राजधानी है। इस्लाम यहाँ का धर्म है और यहाँ अरबी, कुर्दिश तथा आमेनियन भाषाओं का व्यापक प्रयोग किया जाता है। कृषि और पशुपालन यहाँ के लोगों के मुख्य जीविका के साधन हैं।

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NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 2

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 2 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 2 The Origin and Evolution of the Earth (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या पृथ्वी की आयु को प्रदर्शित करती है?
(क) 46 लाख वर्ष
(ख) 460 करोड़ वर्ष
(ग) 13.7 अरब वर्ष
(घ) 13.7 खरब वर्ष
उत्तर- (ख) 460 करोड़ वर्ष

(ii) निम्न में कौन-सी अवधि सबसे लम्बी है
(क) इयान Eons
(ख) महाकल्प Era
(ग) कल्प Period
(घ) युग Epoch
उत्तर- (क) इयान

(ii) निम्न में कौन-सा तत्व वर्तमान वायुमंडल के निर्माण व संशोधन में सहायक नहीं है?
(क) सौर पवन
(ख) गैस उत्सर्जन
(ग) विभेदन
(घ) प्रकाश संश्लेषण
उत्तर- (ग) विभेदन

(iv) निम्नलिखित में से भीतरी ग्रह कौन-से हैं
(क) पृथ्वी व सूर्य के बीच पाए जाने वाले ग्रह
(ख) सूर्य व छुद्र ग्रहों की पट्टी के बीच पाए जाने वाले ग्रह
(ग) वे ग्रह जो गैसीय हैं।
(घ) बिना उपग्रह वाले ग्रह
उत्तर- (ख) सूर्य व छुद्र ग्रहों की पट्टी के बीच पाए जाने वाले ग्रह।

(v) पृथ्वी पर जीवन निम्नलिखित में से लगभग कितने वर्षों पहले आरंभ हुआ?
(क) 1 अरब 37 करोड़ वर्ष पहले
(ख) 460 करोड़ वर्ष पहले
(ग) 38 लाख वर्ष पहले
(घ) 3 अरब, 80 करोड़ वर्ष पहले
उत्तर- (घ) 3 अरब, 80 करोड़ वर्ष पहले।

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
(i) पार्थिव ग्रह चट्टानी क्यों हैं?
उत्तर- पार्थिव ग्रह पृथ्वी की भाँति ही शैलों और धातुओं से बने हैं और अपेक्षाकृत अधिक घनत्व वाले हैं। जनक तारे के बहुत नजदीक होने के कारण और अत्यधिक तापमान के कारण इन ग्रहों की गैसें संघनित नहीं हो पाईं और घनीभूत भी न हो सकी। छोटे होने के कारण इनकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी कम रही, जिसके। फलस्वरूप इनसे निकली हुई गैसें इन पर रुक नहीं सकीं। पहले चार ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल पार्थिव ग्रह कहे जाते हैं।

(ii) पृथ्वी की उत्पत्ति से संबंधित दिए गए तर्कों में निम्न वैज्ञानिकों के मूलभूत अंतर बताइए :
(क) कान्ट व लाप्लेस
(ख) चैम्बरलेन व मोल्टन
उत्तर- पृथ्वी की उत्पत्ति से संबंधित दिए गए तर्कों में कान्ट व लाप्लेस और चैम्बरलेन व मोल्टन के विचारों या सिद्धान्तों में निम्न अंतर हैं
(क) कान्ट व लाप्लेस के सिद्धांत-इन विद्वानों की परिकल्पना के अनुसार ग्रहों का निर्माण धीमी गति से घूमते हुए पदार्थों के बादल से हुआ है। जोकि सूर्य की युवा अवस्था से संबंधित थे। 1796 ई. में प्रतिपादित लाप्लेस की नीहारिका परिकल्पना के अनुसार पृथ्वी को आन्तरिक भाग गैसीय अवस्था में होना चाहिए क्योंकि पृथ्वी की उत्पत्ति गैस से बनी नीहारिका से मानी जाती है।
(ख) चैम्बरलेन व मोल्टन-इनके अनुसार ब्रह्मांड में एक अन्य भ्रमणशील तारा सूर्य के पास से गुजरा। इसके परिणामस्वरूप तारे के गुरुत्वाकर्षण से सूर्य की सतह से सिगार के आकार का कुछ पदार्थ निकलकर अलग हो गया। यह पदार्थ सूर्य के चारों ओर घूमने लगा और यहीं पर धीरे-धीरे संघनित होकर ग्रहों के रूप में परिवर्तित हो गया।

(iii) विभेदन प्रक्रिया से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- पृथ्वी की उत्पत्ति के दौरान और उत्पत्ति के तुरंत बाद अत्यधिक ताप के कारण पृथ्वी के कुछ भाग पिघल गए और तापमान की अधिकता के कारण ही हल्के और भारी घनत्व के मिश्रण वाले पदार्थ घनत्व में अंतर के कारण अलग होने शुरू हो गए। इसी अलगाव से भारी पदार्थ जैसे लोहा, पृथ्वी के केंद्र में चले गए और हल्के पदार्थ पृथ्वी की सतह या ऊपरी भाग की तरफ आ गए। समय के साथ ये और ठंडे हुए और ठोस रूप में परिवर्तित होकर छोटे आकार के हो गए। हल्के व भारी घनत्व वाले पदार्थों के पृथक होने की इस प्रक्रिया को विभेदन कहा जाता है।

(iv) प्रारंभिक काल में पृथ्वी के धरातल का स्वरूप क्या था?
उत्तर- प्रारंभ में पृथ्वी चट्टानी, गर्म और विरान थी। पृथ्वी पर प्रारम्भिक दौर में तापमान इतना अधिक था कि अपने निर्माण के 80 करोड़ वर्ष बाद ही यह पिघल चुकी थी। उस समय यह ठोस अवस्था में न होकर तरल अवस्था में थी और इस पर वायुमंडल का घनत्व काफी विरल था। वायुमंडल में केवल हाइड्रोजन और हीलियम गैस विद्यमान थी। इस तरह से आज की पृथ्वी और प्रारंभिक दौर की पृथ्वी में काफी भिन्नता थी। लेकिन प्रारंभिक दौर की पृथ्वी पर कुछ ऐसी घटनाएँ एवं क्रियाएँ अवश्य हुई होंगी, जिनके कारण चट्टानी, वीरान और गर्म पृथ्वी एक ऐसे सुंदर ग्रह में परिवर्तित, हुई जहाँ बहुत-सा पानी तथा जीवन के
लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हुआ।

(v) पृथ्वी के वायुमंडल को निर्मित करने वाली प्रारम्भिक गैसें कौन-सी थीं?
उत्तर- पृथ्वी के वायुमंडल को निर्मित करने वाली प्रारंभिक गैसें हाइड्रोजन और हीलियम थीं, जो काफी गर्म थीं। इन गैसों की उपलब्धता के कारण ही पृथ्वी तरल अवस्था में थी। वर्तमान समय में सूर्य भी हाइड्रोजन और हीलियम गैस का गोला है जोकि काफी गर्म है। उसी तरह से पृथ्वी भी प्रारंभिक दौर में काफी गर्म थी। प्रारंभिक वायुमंडल, जिसमें हाइड्रोजन व हीलियम की अधिकता थी, सौर पवन के कारण पृथ्वी से दूर हो गया। ऐसा केवल पृथ्वी पर ही नहीं वरन सभी पार्थिव ग्रहों पर हुआ। अर्थात् सौर पवनों के प्रभाव के कारण सभी पार्थिव ग्रहों से आदिकालिक वायुमंडल या तो दूर धकेल दिया गया था या समाप्त हो गया। यह वायुमंडल के विकास की पहली अवस्था थी।

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) बिग बैंग सिद्धान्त का विस्तार से वर्णन करें।
उत्तर- आधुनिक समय में ब्रह्मांड की उत्पत्ति संबंधी सर्वमान्य सिद्धान्त बिग बैंग सिद्धान्त है। इसे विस्तारित ब्रह्मांड परिकल्पना भी कहा जाता है। 1920 ई. में एडविन हब्बल ने प्रमाण दिए कि ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है। बिग बैंग सिद्धान्त के अनुसार ब्रह्मांड का विस्तार निम्न अवस्थाओं में हुआ है :
(i) आरंभ में वे सभी पदार्थ, जिनसे ब्रह्मांड बना है, अति छोटे गोलक (एकाकी परमाणु) के रूप में एक ही स्थान पर स्थित थे, जिसका आयतन अत्यधिक सूक्ष्म एवं तापमान तथा घनत्व अनन्त था।
(ii) बिग बैंग की प्रक्रिया में इस अति छोटे गोलक में भीषण विस्फोट हुआ। इस प्रकार की विस्फोट प्रक्रिया से वृहत विस्तार हुआ। वैज्ञानिकों का विश्वास है कि बिग बैंग की घटना आज से 13.7 अरब वर्ष पहले हुई थी। ब्रह्मांड का विस्तार आज भी जारी है। विस्तार के कारण कुछ ऊर्जा पदार्थ में परिवर्तित हो गई।
(iii) बिग बैंग से 3 लाख वर्षों के दौरान, तापमान 4500° केल्विन तक गिर गया और परमाणवीय पदार्थ का निर्माण हुआ। ब्रह्मांड पारदर्शी हो गया। ब्रह्मांड के विस्तार का अर्थ है-आकाशगंगाओं के बीच की दूरी में विस्तार का होना। हॉयल ने इसका विकल्प ‘स्थिर अवस्था संकल्पना’ के नाम से प्रस्तुत किया।

(ii) पृथ्वी के विकास संबंधी अवस्थाओं को बताते हुए हर अवस्था/चरण को संक्षेप में वर्णित करें।
उत्तर- पृथ्वी का विकास विभिन्न अवस्थाओं में हुआ है। पृथ्वी का निर्माण 460 करोड़ वर्ष पहले हुआ। उस वक्त पृथ्वी तरल अवस्था में थी क्योंकि पृथ्वी पर हाइड्रोजन और हीलियम गैस की अधिकता थी जोकि काफी गर्म होती है। बाद में अत्यधिक ताप के कारण पृथ्वी आंशिक रूप से द्रव अवस्था में रह गई और ताप की अधिकता के कारण ही हल्के और भारी घनत्व के मिश्रण वाले पदार्थ घनत्व में अंतर के कारण अलग होने शुरू हो गए। इसी अलगाव से भारी पदार्थ जैसे लोहा पृथ्वी के केंद्र में चले गए और हल्के पदार्थ पृथ्वी की सतह या ऊपरी भाग की तरफ आ गए। समय के साथ ये और ठंडे हुए और ठोस रूप में परिवर्तित होकर छोटे आकार के हो गए। अंततोगत्वा ये पृथ्वी की भूपर्पटी के रूप में विकसित हो गए।
वर्तमान वायुमंडल के विकास की तीन अवस्थाएँ हैं। प्रारंभिक वायुमंडल, जिसमें हाइड्रोजन व हीलियम की अधिकता थी, सौर पवन के कारण पृथ्वी से दूर हो गया। पृथ्वी के ठंडा होने और विभेदन के दौरान, इसके अंदरूनी भाग से बहुत-सी गैसें वे जलवाष्प बाहर निकले। इसी से आज के वायुमंडल का उद्भव हुआ। आरंभ में वायुमंडल में जलवाष्प, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन व अमोनिया अधिक मात्रा में और स्वतंत्र ऑक्सीजन बहुत कम थी। ऐसा माना जाता है कि जीवन का विकास लगभग 380 करोड़ वर्ष पहले आरंभ हुआ। एककोशीय जीवाणु से आज के मनुष्य तक जीवन के विकास का सार भूवैज्ञानिक काल मापक्रम से ज्ञात किया जा सकता है।

परियोजना कार्य-
प्र०. ‘स्टार डस्ट’ परियोजना के बारे में निम्नलिखित पक्षों पर वेबसाइट से सूचना एकत्रित कीजिए : www.sci edu public.html and www.nasm.edu
(अ) इस परियोजना को किस एजेंसी ने शुरू किया था?
(ब) स्टार डस्ट को एकत्रित करने में वैज्ञानिक इतनी रुचि क्यों दिखा रहे हैं?
(स) स्टार डस्ट कहाँ से एकत्र की गई है?
उत्तर- छात्र स्वयं करें।

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NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 9 Environment and Sustainable Development (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 9 Environment and Sustainable Development (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 9 Environment and Sustainable Development (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास
(पाठ्यपुस्तक से)

प्र.1. पर्यावरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर : पर्यावरण को समस्त भूमंडलीय विरासत और संसाधनों की समग्रता के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमें वे सभी जैविक और अजैविक तत्व आते हैं, जो एक दूसरे को प्रभावित करते हैं।

प्र.2. जब संसाधन निस्सरण की दर उनके पुनर्जनन की दर से बढ़ जाती है, तो क्या होता है?
उत्तर :
NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 9 (Hindi Medium) 1

प्र.3. निम्न को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें
(क) वृक्ष
(ख) मछली
(ग) पेट्रोलियम
(घ) कोयला
(ङ) लौह अयस्क
(च) जल
उत्तर : नवीकरणीय ससांधन-वृक्ष, मछली गैर-नवीकरणीय ससांधन-पेट्रोलियम, कोयला, लौह-अयरेक जल

प्र.4. आजकल विश्व के सामने “……………………..” और “……………………..” की दो मुख्य पर्यावरणीय समस्याएँ हैं।
उत्तर : वैश्विक ऊष्णता और ओजोन अपक्षय।

प्र.5. निम्न कारक भारत में कैसे पर्यावरण संकट में योगदान करते हैं? सरकार के समक्ष वे कौन-सी समस्याएँ पैदा करते हैं• बढ़ती जनसंख्या

  • वायु-प्रदूषण
  • जल-प्रदूषण
  • संपन्न उपभोग मानक
  • निरक्षरता
  • औद्योगीकरण
  • शहरीकरण
  • वन-क्षेत्र में कमी
  • अवैध वन कटाई
  • वैश्विक ऊष्णता

उत्तर :
(क) बढ़ती जनसंख्या- बढ़ती जनसंख्या से प्राकृतिक संसाधनों की माँग बढ़ जाती है। जबकि प्राकृतिक संसाधनों की पूर्ति स्थिर है। इससे अतिरेक माँग उत्पन्न होती है जो प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डालती है। इन संसाधनों का अत्यधिक उपभोग किया जाता है और उपभोग धारण क्षमता की सीमा से बाहर चला जाता है जिससे पर्यावरणीय हानि होती है। इससे सरकार के समक्ष सर्व की आवश्यकताएँ पूरी करने में असमर्थता की समस्या आती है।

(ख) वायु-प्रदूषण- 
इससे कई प्रकार की बीमारियाँ जैसे दमा, फेफड़ों का कैंसर, क्षय रोग होती हैं। इससे सरकार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक व्यय की समस्या उत्पन्न होती है।

(ग) जल-प्रदूषण- 
इससे हैजा, मलेरिया, अतिसार, दस्त जैसी कई बीमारियाँ होती हैं। इससे भी सरकार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक व्यय की समस्या उत्पन्न होती है।

(घ) संपन्न उपभोग मानक- 
इससे प्राकृतिक संसाधनों की माँगें बढ़ जाती हैं। जबकि प्राकृतिक संसाधनों की पूर्ति स्थिर है। इससे अतिरेक माँग उत्पन्न होती है। जो प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डालती है। इन संसाधनों का अत्यधिक उपभोग किया जाता है और उपभोग धारण क्षमता की सीमा से बाहर चला जाता है। जिससे पर्यावरणीय हानि होती है। इससे समस्या ये उत्पन्न होती है कि अमीर वर्ग तो कुत्तों के खाने, सौंदर्य प्रसाधन और विलासिताओं पर व्यय करते हैं और गरीब वर्ग को अपने बच्चों और परिवार की आधारभूत आवश्यकताओं के लिए भी धन नहीं मिलता।

(ङ) निरक्षरता- 
ज्ञान के अभाव के कारण लोग ऐसे संसाधनों का प्रयोग करते रहते हैं जैसे-उपले, लकड़ी आदि। इससे संसाधनों का दुरुपयोग होता है। यह दुरुपयोग पर्यावरण को हानि पहुँचाता है। सरकार को लोगों के स्वास्थ्य पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।

(च) औद्योगीकरण- 
इसे वायु-प्रदूषण, जल-प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण होता है। इससे काफी बीमारियाँ जैसे: दमा, कैंसर, हैजा, अतिसार, मलेरिया, बहरापन आदि हो सकती हैं। अत: सरकार का स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय बढ़ रहा है जिससे सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ता जा रहा है।

(छ) शहरीकरण- 
इससे प्राकृतिक संसाधनों की माँग बढ़ जाती है जबकि प्राकृतिक संसाधनों की आपूर्ति स्थिर है। इन संसाधनों का अति उपयोग होता है और यह उपयोग धारण क्षमता की सीमा को पार कर देता है जिससे पर्यावरण का अपक्षय होता है। इससे भी आय की असमानताओं के कारण अमीर वर्ग कुत्तों के खाने, सौंदर्य प्रसाधन पर खर्च करता है और गरीब वर्ग परिवार की आधारभूत आवश्यकताओं के लिए भी धन नहीं जुटा पाता।

(ज) वन-क्षेत्र में कमी- 
इससे पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। कार्बन डाइऑक्साइड में वृद्धि से वैश्विक उष्णता हो रही है। अतः सरकार को स्वास्थ्य के साथ-साथ ऐसे तकनीकी अनुसंधान पर भी व्यय करना पड़ रहा है जिससे एक पर्यावरण अनुकूल वैकल्पिक तकनीक की खोज की जा सके।

(झ) अवैध वन कटाई- 
इससे जैविक विविधता प्रभावित हो रही है, मृदा क्षरण, वायु प्रदूषण में वृद्धि हो रही है जिससे खाद्य श्रृंखला पर भी प्रभाव पड़ रहा है।

(ट) वैश्विक ऊष्णता- 
वैश्विक उष्णता के कारण पूरे विश्व में तापमान बढ़ रहा है। यदि समुद्र के जल का तापमान मात्र 2°C से भी बढ़ गया तो संपूर्ण पृथ्वी जलमयी हो जाएगी।

प्र.6. पर्यावरण के क्या कार्य होते हैं?
उत्तर : पर्यावरण के महत्त्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं
(क) यह जीवन के लिए संसाधन प्रदान करता है। नवीकरणीय तथा गैर-नवीकरणीय दोनों पर्यावरण द्वारा ही प्रदान किये जाते हैं।।
(ख) यह अवशेष को समाहित करता है।
(ग) यह जनहित और जैविक विविधता प्रदान करके जीवन का पोषण करता है।
(घ) यह सौंदर्य विलयक सेवाएँ भी प्रदान करता है।

प्र.7. भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी छह कारकों की पहचान करें।
उत्तर : भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी छह कारक इस प्रकार हैं
(क) वन विनाश के फलस्वरूप वनस्पति की हानि;
(ख) अधारणीय जलाऊ लकड़ी और चारे का निष्कर्षण;
(ग) वन भूमि का अतिक्रमण;
(घ) भू-संरक्षण हेतु समुचित उपायों को न अपनाया जाना;
(ङ) कृषि-रसायन का अनुचित प्रयोग जैसे, रासायनिक खाद और कीटनाशक;
(च) सिंचाई व्यवस्था का नियोजन तथा अविवेकपूर्ण प्रबंधन;

प्र.8. समझायें कि नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों की अवसर लागत उच्च क्यों होती है?
उत्तर : नकारात्मक पर्यावरण प्रभाव का सबसे नकारात्मक अवसर लागत पर्यावरण अपक्षय की गुणवत्ता की स्वास्थ्य लागत है। वायु तथा जल गुणवत्ता (भारत में 70% जल स्रोत प्रदूषित हैं) में गिरावट के कारण वायु संक्रामक तथा जल संक्रामक बीमारियाँ बढ़ती जा रही हैं। फलस्वरूप, स्वास्थ्य पर सरकारी व्यय बढ़ता जा रहा है। वैश्विक पर्यावरण मुद्दों जैसे वैश्विक ऊष्णता और ओजोन क्षय ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है, जिसके कारण सरकार को और अधिक धन व्यय करना पड़ा।

प्र.9. भारत में धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए उपयुक्त उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत करें।
उत्तर :
 धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं

(क) ऊर्जा के गैर-पारंपरिक स्रोतों का उपयोग- 
भारत अपनी विद्युत आवश्यकताओं के लिए थर्मल और हाइड्रो पॉवर संयंत्रों पर बहुत अधिक निर्भर है। इन दोनों का पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वायु शक्ति और सौर ऊर्जा गैर-पारंपरिक स्रोतों के अच्छे उदाहरण हैं। तकनीक के अभाव में इनका विस्तृत रूप से अभी तक विकास नहीं हो पाया है।

(ख) अधिक स्वच्छ ईंधनों का उपयोग- 
शहरी क्षेत्रों में ईंधन के रूप में उच्च दाब प्राकृतिक गैस (CNG) के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दिल्ली में जन-परिवहन में उच्च दाब प्राकृतिक गैस के उपयोग से प्रदूषण कम हुआ है और वायु स्वच्छ हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में बायोगैस और गोबर गैस को प्रोत्साहित किया जा रहा है जिससे वायु प्रदूषण कम हुआ है।

(ग) लघु जलीय प्लांटों की स्थापना- 
पहाड़ी इलाकों में लगभग सभी जगह झरने मिलते हैं। इन झरनों पर लघु जलीय प्लांटों की स्थापना हो सकती है। ये पर्यावरण के अनुकूल होते हैं।

(घ) पारंपरिक ज्ञान व व्यवहार- 
पारंपरिक रूप से भारत की कृषि व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधा व्यवस्था, आवास, परिवहन सभी क्रियाकलाप पर्यावरण के लिए हितकर रहे हैं। परंतु आजकल हम अपनी पारंपरिक प्रणालियों से दूर हो गए हैं, जिससे हमारे पर्यावरण और हमारी ग्रामीण विरासत को भारी मात्रा में हानि पहुँची है।

(ङ) जैविक कंपोस्ट खाद- 
कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग ने न केवल भू-क्षय किया है बल्कि जल व्यवस्था विशेषकर भूतल जल प्रणाली भी प्रदूषित हुई है।

(च) अधारणीय उपभोग तथा उत्पादन प्रवृत्तियों में परिवर्तन-
धारणीय विकास प्राप्त करने के लिए हमें उपभोग प्रवृत्ति (संसाधनों के अति उपयोग और दुरुपयोग की अवहेलना) तथा उत्पादन प्रवृति (पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का प्रयोग) में परिवर्तन करने की आवश्यकता है।

प्र.10. भारत में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है-इस कथन के समर्थन में तर्क दें।
उत्तर : क्षेत्र के मामले में भारत विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है जिसका कुल क्षेत्रफल 32,87 263 वर्ग किलोमीटर (32.87 करोड़ वर्ग हेक्टेयर) है। यह विश्व के कुल क्षेत्र का 2.42% हिस्सा है। निरपेक्ष संदर्भ में यह भारत वास्तव में एक बड़ा देश है। हालाँकि भूमि-आदमी अनुपात विशाल जनसंख्या के कारण अनुकूल नहीं है।

दक्षिण के पठार की काली मिट्टी विशिष्ट रूप से कपास की खेती के लिए उपयुक्त है। अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक गंगा मैदान है जो कि विश्व के अत्यधिक उर्वरक क्षेत्रों में से एक है और विश्व में सबसे गहने खेती और जनसंख्या वाला क्षेत्र है।

भारत 4 ईंधन खनिजों, 11 धात्विक, 52 गैर-धात्विक, 22 लघु खनिजों और कुल 89 खनिजों का उत्पादन करता है। भारत में उच्च गुणवत्ता लौह अयस्क बहुतायत मात्रा में है। देश के कुल लौह-अयस्क भंडार में 14,630 मिलियन टन हेमेटाइट और 10,619 मिलियन टन मैगनेटाइट है। हेमेटाइट लौह अयस्क मुख्यतः छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, गोआ और कर्नाटक में पाया जाता है। कोयला सबसे अधिक मात्रा में उपलब्ध खजिन संसाधन है। कोयला उत्पादन के क्षेत्र में भारत का चीन और अमेरिका के बाद विश्व में तीसरा स्थान है।

प्र.11. क्या पर्यावरण संकट एक नवीन परिघटना है? यदि हाँ, तो क्यों?
उत्तर : हाँ, पर्यावरण संकट एक नवीन घटना है। यह पूर्ति-माँग के उत्क्रमण से उत्पन्न हुई है। हाल के वर्षों में जनसंख्या में बहुत वृद्धि हुई है इससे संसाधन की माँग बढ़ गई है जबकि संसाधनों की आपूर्ति स्थिर है। इससे अतिरेक माँग उत्पन्न हुई है। यह प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डाल रही है। इन संसाधनों का उपयोग बढ़ रहा है और यह धारण क्षमता की सीमा से बाहर होता जा रहा है। इसने पर्यावरण संकट को जन्म दिया है।

प्र.12. इनके दो उदाहरण दें
(क)
पर्यावरणीय संसाधनों का अति प्रयोग।
(ख) पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग
उत्तर :
(क) पर्यावरणीय संसाधनों का अति प्रयोग-जब लोग कुत्ते के भोजन, सौंदर्य प्रसाधन, अत्यधिक बिजली उपकरण, परिवार के सदस्यों की संख्या से अधिक संख्या में कारें खरीद रहे हैं तो ये पर्यावरणीय संसाधनों के अति प्रयोग के सूचक हैं।

(ख)
पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग-गोबर और लकड़ी ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, प्राकृतिक खाद के स्थान पर रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया जाना, जैविक कीटनाशकों के स्थान पर रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग, ये पर्यावरणीय संसाधनों के दुरुपयोग के उदाहरण हैं।

प्र.13. पर्यावरण की चार मुख्य क्रियाओं का वर्णन कीजिए। महत्त्वपूर्ण मुद्दों की व्याख्या कीजिए। पर्यावरणीय हानि की भरपाई की अवसर लागतें भी होती हैं। व्याख्या कीजिए।
उत्तर : भारत में पर्यावरण संबंधी महत्त्वपूर्ण मुद्दे निम्नलिखित हैं

(क) जल संक्रमण-
भारत में औद्योगिक अवशिष्ट के कारण पेय जल संक्रामक होता जा रहा है। इससे जल संक्रामक बीमारियाँ फैल रही हैं।

(ख) वायु-प्रदूषण- 
शहरीकरण के कारण, भारतीय सड़कों पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मोटर वाहनों की संख्या 1951 के 3 लाख से बढ़कर 2003 में 67 करोड़ हो गई। भारत विश्व में दसवाँ सर्वाधिक औद्योगिक देश है परंतु यह पर्यावरण पर अनचाहे एवं अप्रत्याशित प्रभावों की अवसर लागत पर हुआ है।

(ग) वनों की कटाई- 
भारत का वन आवरण बढ़ती जनसंख्या के कारण लगातार कम हो रहा है। इससे वायु प्रदूषण तथा उससे जुड़ी समस्याएँ भी बढ़ रही हैं। भारत में प्रतिव्यक्ति वन भूमि 0.08 हेक्टेयर है जबकि आवश्यकता 0.47 हेक्टेयर की है।

(घ) भू-क्षय- 
भू-क्षय वन विनाश के फलस्वरूप वनस्पति की हानि, वन भूमि का अतिक्रमण, वनों में आग और अत्यधिक चराई, भू–संरक्षण हेतु समुचित उपायों को न अपनाया जाना, अनुचित फसल चक्र, कृषि-रसायन का अनुचित प्रयोग, सिंचाई व्यवस्था का नियोजन तथा अविवेकपूर्ण प्रबंधन, संसाधनों की निर्बाध उपलब्धता तथा कृषि पर निर्भर लागतों की दरिद्रता के कारण हो रहा है।

निश्चित रूप से, पर्यावरण हानि की भरपाई की अवसर लागत बिगड़ता स्वास्थ्य, स्वास्थ्य सुविधाओं पर अतिरिक्त व्यय, खराब पर्यावरण में जीवन की खराब गुणवत्ता के रूप में है जिसे ठीक करने के लिए सरकार को अत्यधिक व्यय करना पड़ता है।

प्र.14. पर्यावरणीय संसाधनों की पूर्ति-माँग के उत्क्रमण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
 अर्थ- पर्यावरण अपने कार्य बिना किसी रुकावट या बाधा के तब तक कर सकता है जब तक संसाधनों की माँग उनकी पूर्ति से कम हो। जब माँग, पूर्ति से अधिक हो जाती है तो पर्यावरण अपने कार्य सुरीति करने में असक्षम हो जाता है इससे पर्यावरण संकट जन्म लेता है। इसे पूर्ति-माँग के उत्क्रमण की संज्ञा दी जाती है। दूसरे शब्दों में, जब संसाधनों की उत्पादन तथा उपभोग माँग संसाधनों के पुनर्जनन दर से अधिक हो जाती है तो इससे पर्यावरण की अवशोषी क्षमता पर दुष्प्रभाव पड़ता है, इसे पूर्ति संसाधनों की पूर्ति माँग का उत्क्रमण कहा जाता है। इसके निम्नलिखित कारण हैं
(क) विकासशील देशों की बढ़ती जनसंख्या
(ख) विकसित देशों के संपन्न उपभोग तथा उत्पादन स्तर
(ग) नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की गहन और व्यापक निकासी।

प्र.15. वर्तमान पर्यावरण संकट का वर्णन करें।
उत्तर : भारत के पर्यावरण को दो तरफ से खतरा है। एक तो निर्धनता के कारण पर्यावरण का अपक्षय और दूसरा खतरा साधन संपन्नता और तेजी से बढ़ते हुए औद्योगिक क्षेत्रक के प्रदूषण से है।

भारत की अत्यधिक गंभीर पर्यावरण समस्याओं में वायु प्रदूषण, दूषित जल, मृदा क्षरण, वन्य कटाव और वन्य जीवन की विलुप्ति है।
(क) जल-प्रदूषण- भारत में ताजे जल के सर्वाधिक स्रोत अत्यधिक प्रदूषित होते जा रहे हैं। इनकी सफाई में सरकार को भारी व्यय करना पड़ रहा है। 120 करोड़ की जनसंख्या के लिए स्वच्छ जल का प्रबंधन सरकार के लिए एक बड़ी समस्या है। जल जीवों की विविधता भी विलुप्त होती दिखाई दे रही है।
(ख) भूमि अपक्षय-भारत में भूमि का अपक्षय विभिन्न मात्रा और रूपों में हुआ है, जो कि मुख्य रूप से अस्थिर प्रयोग और अनुपयुक्त (प्रबंधन) कार्य प्रणाली का परिणाम है।

(ग) ठोस अवशिष्ठ प्रबंधन- 
विश्व की 17% जनसंख्या और विश्व पशुधन की 20% जनसंख्या भारत की मात्र 2.5% क्षेत्रफल में रहती है। जनसंख्या और पशुधन का अधिक घनत्व और वानिकी, कृषि, चराई, मानव बस्तियाँ और उद्योगों के प्रतिस्पर्धी उपयोगों से देश के निश्चित भूमि संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है।

(घ) जैविक विविधता की हानि-
प्रदूषण के कारण बहुत से पशु-पक्षियों और पौधों को प्रजातियाँ विलुप्त होती जा रही है। इसका हमारे पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पेड़े रहा है।

(ङ) शहरी क्षेत्रों में वाहन प्रदूषण से उत्पन्न वायु प्रदूषण- 
भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु-प्रदूषण बहुत है, जिसमें वाहनों का सर्वाधिक योगदान है। कुछ अन्य क्षेत्रों में उद्योगों के भारी जमाव और तापीय शक्ति संयंत्रों के कारण वायु-प्रदूषण होता है। वाहन उत्सर्जन चिंता का प्रमुख कारण है क्योंकि यह धरातल पर वायु-प्रदूषण का स्रोत है और आम जनता पर अधिक प्रभाव डालता है।

(च) मृदा क्षरण-
भारत ने एक वर्ष में भूमि का क्षरण 53 बिलियन टन प्रतिशत की दर से हो रहा है। भारत सरकार के अनुसार, प्रत्येक वर्ष मृदा क्षरण से 5.8 मिलियन से 8.4 मिलियन टन पोषक तत्वों की क्षति होती है।

प्र.16. भारत में विकास के दो गंभीर नकारात्मक पर्यावरण प्रभावों को उजागर करें। भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है-एक तो यह निर्धनताजनित है और दूसरे जीवन-स्तर में संपन्नता का कारण भी है। क्या यह सत्य है?
उत्तर : भारत विश्व का दसवाँ सर्वाधिक औद्योगिक देश है परंतु यह पर्यावरण की कीमत पर हुआ है। भारत में विकास के दो गंभीर पर्यावरण प्रभाव वायु प्रदूषण तथा जल संक्रमण है।

यह कहना सही है कि भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है। एक ओर यह निर्धनताजनित है क्योंकि निर्धन क्षेत्र भोजन पकाने के लिए, एल.पी.जी. खरीदने में सक्षम नहीं है। अतः वे गाय के गोबर के उपले और जलाऊ लकड़ी को ईंधन के रूप में प्रयोग करते हैं, यह संसाधनों का दुरुपयोग है। जबकि दूसरी ओर अमीर वर्ग निकटतम स्थान पर जाने के लिए कारों का प्रयोग करते हैं, हर कमरे में वातानुकूलिर का प्रयोग करते हैं, हीटर, माइक्रोवेव और अनेक बिजली उपकरणों का प्रयोग करते हैं जिससे संसाधनों का अति उपयोग हो रहा है तथा परिणामस्वरूप पर्यावरण दूषित हो रहा है।

प्र.17. धारणीय विकास क्या है?
उत्तर : धारणीय विकास की कई परिभाषाएँ दी गई हैं परंतु सर्वाधिक उद्धृत परिभाषा आवर कॉमन फ्यूचर (Our common future) जिसे ब्रुटलैंड रिपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है, ने दी है।
” ऐसी विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता का समझौता किए बिना पूरा करे।
“इसके अंतर्गत दो महत्त्वपूर्ण अवधारणाए हैं ‘आवश्यकता’ और ‘भावी पीढियाँ’।

  • इस परिभाषा में आवश्यकता की अवधारणा का संबंध संसाधनों के वितरण से है। मुख्य रूप से संसाधन विश्व के गरीब वर्ग को भी समान रूप से मिलने चाहिए।
  • भावी पीढ़ियों से तात्पर्य है वर्तमान पीढ़ी को आगामी पीढ़ी द्वारा एवं बेहतर पर्यावरण उत्तराधिकार के रूप में सौंपा जाना चाहिए।

प्र.18. अपने आस-पास के क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए धारणीय विकास की चार रणनीतियाँ सुझाइए।
उत्तर : अपने आस-पास के क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए धारणीय विकास की निम्नलिखित रणनितियाँ हैं

ग्रामीण क्षेत्र के निवासी होने पर

  • ग्रामीण क्षेत्रों में जलाऊ लकड़ी, उपलों या अन्य जैव पदार्थ के स्थान पर रसोई गैस और गोबर गैस का उपयोग
  • जहाँ पर खुला स्थान है उन गाँवों में वायु मिलों की स्थापना की जा सकती है।
  • हमें कृषि, स्वास्थ्य, आवास और परिवहन में ऐसा पारंपरिक ज्ञान और व्यवहार का प्रयोग करना चाहिए जो पर्यावरण के अनुकूल हो।
  • रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर जैविक कीटनाशकों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर हमें जैविक कंपोस्ट खाद का प्रयोग करना चाहिए।शहरी क्षेत्र के निवासी होने पर
  • फोटोवोल्टिक सेल द्वारा सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • वाहनों में पेट्रोल या डीजल की जगह उच्च दाब प्राकृतिक गैस (CNG) का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • हमें अपनी आवश्यकताओं को कम करना चाहिए।

प्र.19. धारणीय विकास की परिभाषा में वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच समता के विचार की व्याख्या करें।
उत्तर : यह बहुत सुंदर कहा गया है कि यह पर्यावरण हमें पूर्वजों से विरासत में नहीं मिला बल्कि इसे हमने भावी पीढ़ियों से उधार
लिया है। जो चीज उधार ली जाती है उसे समान या बेहतर स्थिति में वापिस करना होता है। यहाँ पर वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच समता का विचार महत्त्वपूर्ण हो जाता है। हमें पिछली पीढ़ी को उपलब्ध संसाधनों और भावी पीढ़ी को उपलब्ध संसाधनों के बीच समता बनाने की आवश्यकता है। हम अपनी भावी पीढ़ी के भविष्य को दाव पर लगाकर अपने वर्तमान का आनंद नहीं ले सकते। अतः विकास धारणीय तभी हो सकता है जब हम विकास की ऐसी विधियाँ अपनाएँ जिससे वर्तमान समय में वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन भविष्य आवश्यकताओं की परवाह किए बिना नहीं करती। हमें भावी पीढ़ियों को उतने ही संसाधन विरासत के रूप में सौंपने की जरूरत है जितने हमने अपने पूर्वजों से प्राप्त किए हैं। संसाधनों का रूप अवश्य अलग हो सकता है जैसे हमने पेट्रोलियम पाया और हम उच्च दाब प्राकृतिक गैस दे रहे हैं, अतः शब्द समान नहीं है, समता है।

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