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NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 9 रुबाइयाँ, गज़ल

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रुबाइयाँ, गज़ल NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 9

रुबाइयाँ, गज़ल Questions and Answers Class 12 Hindi Aroh Chapter 9

कविता के साथ

Rubaiya Class 12 Ncert Solutions प्रश्न 1.
शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है?
उत्तर
शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर यह भाव व्यंजित करना चाहता है कि रक्षाबंधन का पावन पर्व सावन मास में आता है। सावन में आकाश में घटाएं छाई रहती हैं। बिजली चमकती रहती है। इस प्रकार सावन का जो संबंध झीनी घटा से है, घटा का जो संबंध बिजली से है वही संबंध भाई का बहन से है। सावन में जैसे आकाश में छाए बादलों में बिजली चमकती रहती है, उसी प्रकार रक्षाबंधन के पर्व पर राखी के लच्छे चमकते हैं।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 9 रुबाइयाँ, गज़ल

Rubaiya Gazal Class 12 Question Answer प्रश्न 2.
खुद का परदा खोलने से क्या आशय है ?
उत्तर :
खुद का परदा खोलने से आशय है-स्वयं की कमजोरियों से परदा हटाना। अपनी बुराइयों तथा अवगुणों को उजागर करना है।

Class 12 Hindi Rubaiya Question Answer प्रश्न 3.
‘किस्मत हम को रो लेवे हैं हम किस्मत को रो ले हैं’-इस पंक्ति में शायर की किस्मत के साथ तना-तनी का रिश्ता अभिव्यक्त हुआ है। चर्चा कीजिए।
अथवा
फ़िराक की रुबाइयों में उभरे घरेलू जीवन के बिंबों का सौंदर्य स्पष्ट कीजिए। (A.I. C.B.S.E. 2009, C.B.S.E. Outside Delhi 2013, Set-III)
अथवा
सोदाहरण सिद्ध कीजिए कि ‘फ़िराक की रुबाइयों में हिंदी का एक घरेलू रूप दिखता है’। (C.B.S.E. 2012)
उत्तर :
इस पंक्ति के माध्यम से शायर कहना चाहता है कि इस दुनिया में आज अकर्मण्य लोग केवल किस्मत के सहारे रहकर जीवनयापन करते हैं। वे अपनी कर्महीनता को दोष न देकर अपनी किस्मत को दोष देते रहते हैं। ऐसे लोग कर्मनिष्ठा एवं परिश्रम से कार्य करने की अपेक्षा केवल भाग्य पर निर्भर रहते हैं। कोई कर्म नहीं करते, सब कुछ किस्मत पर सौंप देते हैं। ऐसे ही कर्महीन लोग किस्मत को रोते रहते हैं और किस्मत उनको रोती रहती है।

टिप्पणी करें

(क) गोदी के चाँद और गगन के चाँद का रिश्ता।
उत्तर :
इस पंक्ति में गोदी के चाँद से तात्पर्य है चाँद का टुकड़ा अर्थात नन्हा कोमल बच्चा जो अपनी माँ की पावन गोद में रहता है और गगन का चाँद से आशय आकाश में स्थित चंद्रमा से है। गोदी के चाँद और गगन के चाँद का अटूट रिश्ता है। जिस प्रकार गगन का चंद्रमा रात्रि के गहन अंधकार को मिटाकर संपूर्ण संसार में उजाला कर देता है उसी प्रकार गोदी का चाँद अर्थात माँ का बच्चा अपने असीम सौंदर्य एवं हँसी, किलकारियों रूपी प्रकाश से माँ के आँगन को प्रकाशित कर देता है जिससे आँगन दमक उठता है।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 9 रुबाइयाँ, गज़ल

(ख) सावन की घटाएँ व रक्षाबंधन का पर्व।
उत्तर :
रक्षाबंधन भारतीय समाज का पावन पर्व है जो बहन-भाई के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। यह पर्व सावन मास में आता है। सावन मास में जब काली घटाएँ असीम आकाश में छाई रहती हैं तभी रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। सावन का जो संबंध घटाओं से है, रक्षाबंधन का वही संबंध राखियों से है। सावन में जैसे काली घटाएँ आकाश में छा जाती हैं वैसे ही रक्षाबंधन के पर्व पर रंग-बिरंगी लच्छों से युक्त राखियाँ चारों ओर दिखने लगती हैं। घटाओं में जैसे बिजली चमकती है ठीक वैसे ही राखियों में लच्छे चमकते हैं जिन्हें बहनें भेंट स्वरूप अपने भाइयों को बाँधती हैं।

कविता के आस-पास

Rubaiya Class 12 Question Answer प्रश्न 1.
इन रुबाइयों से हिंदी, उर्दू और लोक-भाषा के मिले-जुले प्रयोग को छाँटिए।
उत्तर :
आँगन में ठुनक रहा है जिदयाया है
बालक तो हई चाँद पै ललचाया है
दर्पन उसे दे के कह रही है माँ
देख आईने में चाँद उतर आया है।

Class 12 Hindi Chapter 9 Question Answer प्रश्न 2.
फ़िराक ने सुनो हो, रक्खो हो आदि शब्द मीर की शायरी के तर्ज पर इस्तेमाल किए हैं। ऐसी ही मीर की कुछ गज़लें ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर :
अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से पुस्तकालय से ढूंढ़िए।

आपसदारी

कविता में एक भाव, एक विचार होते हुए भी उसका अंदाज़े बयाँ या भाषा के साथ उसका बर्ताव अलग-अलग रूप में अभिव्यक्ति पाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए नीचे दी गई कविताओं को पढ़िए और दी गई फ़िराक की गजल/रुबाई में से समानार्थी पंक्तियाँ ढूंढ़िए।

(क) मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहों। (सूरदास)
(ख) वियोगी होगा पहला कवि
आह से उपजा होगा गान
उमड़ कर आँखों से चुपचाप
बही होगी कविता अनजान (सुमित्रानंदन पंत)
(ग) सीस उतारे भुई धरे तब मिलिहँ करतार। (कबीर)
उत्तर :
विद्यार्थी अपने शिक्षक/शिक्षिका की सहायता से स्वयं करें।
(क) बालक तो हई चाँद पे ललचाया है।
(ख) आंबो-ताव अश्आर न पूछो तुम भी आँखें सखो हो छे जगमग बैतों की दमक है या हम मोती रोले हैं।
(ग) ये कीमत अदा करे है हम बदुरुस्ती-ए-होशो-हवास तेरा सौदा करनेवाले दीवारा भी दो ले हैं।

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NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 11 भक्तिन

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भक्तिन NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 11

भक्तिन Questions and Answers Class 12 Hindi Aroh Chapter 11

पाठ के साथ

Bhaktin Class 12 Ncert Solutions प्रश्न 1.
भक्तिन अपना वास्तविक नाम लोगों से क्यों छिपाती थी? भक्तिन को यह नाम किसने और क्यों दिया होगा? (Outside Delhi 2017, Set-III))
उत्तर :
भक्तिन का वास्तविक नाम लछमिन अर्थात लक्ष्मी था जो समृद्धि और ऐश्वर्य का प्रतीक होता है। भक्तिन एक गरीब महिला थी जबकि उसका नाम लक्ष्मी था। वह धनहीन थी लेकिन इसके साथ वह बहुत समझदार भी थी। लोग उसके इस नाम को सुनकर उसकी हँसी न उड़ाएँ इसलिए वह अपना वास्तविक नाम छिपाती थी। भक्तिन को यह नाम लेखिका ने दिया था। लेखिका ने यह नाम शायद भक्तिन की सेवा-भावना और कर्तव्यपरायणता को देखकर दिया होगा क्योंकि भक्तिन में एक सच्ची सेविका के संपूर्ण गुण विद्यमान थे जिस पर कोई भी स्वामी गर्व कर सकता है।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 11 भक्तिन

Bhaktin Class 12 प्रश्न 2.
दो कन्या-रत्न पैदा करने पर भक्तिन पुत्र-महिमा में अंधी अपनी जिठानियों द्वारा घृणा और उपेक्षा का शिकार बनी। ऐसी घटनाओं से ही अकसर यह धारणा चलती है कि स्त्री ही स्त्री की दुश्मन होती है। क्या इससे आप सहमत हैं?
उत्तर :
हाँ, हम इस बात से पूर्णतः सहमत हैं कि दो कन्या-रत्न पैदा करने पर भी भक्तिन पुत्र-महिमा में अंधी अपनी जेठानियों द्वारा घृणा और उपेक्षा का शिकार बनी। ऐसी घटनाओं से ही अकसर यह धारणा चलती है कि स्त्री ही स्त्री की दुश्मन होती है। समाज में प्रायः देखा जाता है कि पुरुष की अपेक्षा स्त्री ही स्त्री से घृणा और ईर्ष्या भाव रखती है। स्त्री ही स्त्री को पग-पग पर अपनी उपेक्षा का शिकार बनाना चाहती है।

शायद समाज में नारी की मनोवृत्ति ऐसी बन गई है कि वह अपने सामने किसी भी अन्य नारी को देखना नहीं चाहती। वह नहीं चाहती कि उसके द्वारा प्राप्त पद, मान-सम्मान कोई अन्य स्त्री भी ग्रहण कर सके। विडंबना यह है कि नारी ही नारी की भावनाओं को समझने में सक्षम नहीं है।

अपनी कुंठित और संकीर्ण मानसिकता के कारण नारी ही संसार में जन्म लेनेवाली कन्या की उपेक्षा करती है। वह केवल पुत्र को जन्म देने में अपनी महिमा समझती है। अपनी सफलता मानती है। वह शायद जन्म लेनेवाली कन्या की अपेक्षा पुत्र को अधिक चाहती है। वह पुत्र-रत्न की आकांक्षा लिए एक सास और जेठानी के रूप में नारी की उपेक्षा करती है।

Bhaktin Class 12 Question Answer प्रश्न 3.
भक्तिन की बेटी पर पंचायत द्वारा जबरन पति थोपा जाना एक दुर्घटना भर नहीं, बल्कि विवाह के संदर्भ में स्त्री के मानवाधिकार (विवाह करें या न करें अथवा किससे करें) इसकी स्वतंत्रता को कुचलते रहने की सदियों से चली आ रही सामाजिक परंपरा का प्रतीक है। कैसे?
उत्तर :
भारतीय समाज एक पुरुष प्रधान समाज है। इस समाज में पुरुष समाज ही पूर्णरूप से स्वतंत्र है नारी समाज नहीं। सदियों से नारी इसी सामाजिक परंपरा की शिकार रही है। इस समाज की परंपरा है कि यहाँ केवल पुरुष को अपना मनपसंद जीवनसाथी चुनने का अधिकार है, स्त्री को नहीं। प्रायः देखा जाता है कि विवाह के संदर्भ में केवल पुरुष की आकांक्षाओं की पूर्ति की जाती है। पुरुष विवाह करने या न करने के प्रत्येक दृष्टिकोण से स्वतंत्र होता है लेकिन एक स्त्री अनेक मर्यादाओं में दबकर रह जाती है।

जब भी वह अपनी इच्छा जाहिर करना चाहती है तभी इस समाज की अनेक मर्यादाएँ उसके सामने दीवार बनकर खड़ी हो जाती हैं। प्रस्तुत पाठ में भी भक्तिन की बेटी पर पंचायत द्वारा जबरदस्ती पति थोपना भी स्त्री के मानवाधिकारों के कुचलते रहने की सामाजिक परंपरा का प्रतीक है। जहाँ युवती की इच्छाओं और अधिकारों को अनदेखा करके पुरुष प्रधान पंचायत एकपक्षीय निर्णय देकर यवती

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 11 भक्तिन

Class 12 Hindi Bhaktin Question Answer प्रश्न 4.
‘भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं।’ लेखिका ने ऐसा क्यों कहा होगा? (Delhi C.B.S.E. 2016, Set-II, A.I.C.B.S.E. 2011, Set-I,C.B.S.E. Delhi 2017, Set-1)
उत्तर :
भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं। लेखिका ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि कभी-कभी भक्तिन उसके घर में इधर-उधर पड़े पैसों को भंडारघर की मटकी में छिपा देती थी। जिस बात से लेखिका को क्रोध आ जाता था उसे वह बदलकर इधर-उधर करके बताया करती थी। वह ऐसी बात को अपनी ओर से और चुटीली बनाकर कहा करती तथा थोड़ा झूठ-सच का मिश्रण कर बात को बदल देती थी।

Bhaktin Question Answer NCERT Solutions  प्रश्न 5.
भक्तिन द्वारा शास्त्र के प्रश्न को सुविधा से सुलझा लेने का क्या उदाहरण लेखिका ने दिया है ? (C.B.S.E. Model Question Paper 2008)
उत्तर :
लेखिका ने भक्तिन द्वारा शास्त्र के प्रश्न को सुविधा से सुलझा लेने का यह उदाहरण दिया है “शास्त्र का प्रश्न भी भक्तिन अपनी सुविधा के अनुसार सुलझा लेती है। मुझे स्त्रियों का सिर घुटाना अच्छा नहीं लगता। अतः मैंने भक्तिन को रोका। उसने अंकुठित भाव से उत्तर दिया कि शास्त्र में लिखा है कुतूहलवश मैं पूछ ही बैठी-‘क्या लिखा है?’ तुरंत उत्तर मिला-‘तीरथ गए मुंडाए सिद्ध’ कौन-से शास्त्र का यह रहस्यमय सूत्र है, यह जान लेना मेरे लिए संभव ही नहीं था। अतः मैं हारकर मौन ही रही और भक्तिन का चूडाकर्म हर बृहस्पतिवार को एक दरिद्र नापित के गंगाजल से धुले उस्तुरे द्वारा यथाविधि निष्पन्न होता रहा।”

भक्तिन पाठ के प्रश्न उत्तर Pdf NCERT Solutions प्रश्न 6.
भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती कैसे हो गई ? (C.B.S.E. 2014, Set-I, II, II)
उत्तर :
भक्तिन एक देहाती अर्थात ग्रामीण महिला थी जो अनपढ़ थी। इसलिए वह बिलकुल देहाती भाषा का प्रयोग करती थी। भक्तिन एक देहाती होने के साथ-साथ समझदार भी थी। उसका स्वभाव ऐसा बन चुका था कि वह दूसरों को तो अपने मन के अनुसार बना लेती थी लेकिन अपने अंदर किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं चाहती थी। महादेवी वर्मा बार-बार प्रयास करके भी उसके स्वभाव को परिवर्तित न कर सकी। इसलिए भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती हो गई।

पाठ के आस-पास

भक्तिन पाठ के प्रश्न उत्तर NCERT Solutions प्रश्न 1.
आलो आँधारि की नायिका और लेखिका बेबी हालदार और भक्तिन के व्यक्तित्व में आप क्या समानता देखते हैं?

भक्तिन पाठ का प्रश्न उत्तर NCERT Solutions प्रश्न 2.
भक्तिन की बेटी के मामले में जिस तरह का फैसला पंचायत ने सुनाया, वह आज भी कोई हैरतअंगेज बात नहीं है अखबारों या टी० वी० समाचारों में आने वाली किसी ऐसी ही घटना को भक्तिन के उस प्रसंग के साथ रखकर उस पर चर्चा करें।

Class 12 Hindi Chapter 11 Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 3.
पाँच वर्ष की आयु में ब्याही जाने वाली लड़कियों में सिर्फ भक्तिन नहीं है, बल्कि आज भी हज़ारों अभागिनियाँ हैं। बाल-विवाह और उम्र के अनमेलपन वाले विवाह की अपने आस-पास हो रही घटनाओं पर दोस्तों के साथ गंभीर परिचर्चा करें।

Class 12 Bhaktin Question Answer NCERT Solutions  प्रश्न 4.
महादेवी जी इस पाठ में हिरनी सोना, कुत्ता बसंत, बिल्ली गोधूलि आदि के माध्यम से पशु-पक्षी को मानवीय संवेदना से उकेरने वाली लेखिका के रूप में उभरती हैं। उन्होंने अपने घर में और भी कई पशु-पक्षी पाल रखे थे तथा उन पर रेखाचित्र भी लिखे हैं। शिक्षक की सहायता से उन्हें ढूँढ़कर पढ़ें जो मेरा परिवार नाम से प्रकाशित है।
उत्तर
अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं कीजिए।

भाषा की बात

Bhaktin Class 12 Solutions NCERT Solutions प्रश्न1.
नीचे दिए गए विशिष्ट भाषा-प्रयोगों के उदाहरणों को ध्यान से पढ़िए और इनकी अर्थ-छवि स्पष्ट कीजिए
(क) पहली कन्या के दो संस्करण और कर डाले।
(ख) खोटे सिक्कों की टकसाल जैसी पत्नी।
(ग) अस्पष्ट पुनरावृत्तियाँ और स्पष्ट सहानुभूतिपूर्ण।
उत्तर
विद्यार्थी अध्यापिका की सहायता से इसे स्वयं करें।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 11 भक्तिन

Bhaktin Ncert Solutions  प्रश्न 2.
‘बहनोई’ शब्द ‘बहन’ (स्त्री) + ओई से बना है। इस शब्द में हिंदी भाषा की एक अनन्य विशेषता प्रकट हुई है। पुल्लिंग शब्दों में कुछ स्त्री-प्रत्यय जोड़ने से स्त्रीलिंग शब्द बनने की एकसमान प्रक्रिया कई भाषाओं में दिखती है, पर स्त्रीलिंग शब्द में कुछ पुल्लिंग प्रत्यय जोड़कर पुल्लिंग शब्द बनाने की घटना प्रायः अन्य भाषाओं में दिखलाई नहीं पड़ती। यहाँ पुल्लिंग प्रत्यय ‘ओई’ हिंदी की अपनी विशेषता है। ऐसे कुछ और शब्द और उनमें लगे पुल्लिंग प्रत्ययों की हिंदी तथा और भाषाओं में खोज करें।
उत्तर :
विद्यार्थी अध्यापिका की सहायता से इसे स्वयं करें।

Class 12 Hindi Chapter Bhaktin Question Answer प्रश्न 3.
पाठ में आए लोकभाषा के इन संवादों को समझकर इन्हें खड़ी बोली हिंदी में ढाल कर प्रस्तुत कीजिए।
(क) ई कउन बड़ी बात आय। रोटी बनाय जानित है, दाल राँध लेइत है साग-भाजी ,उक सकित है, अउधर बाकी का रहा।
(ख) हमारे मालकिन तौ रात-दिन कितबियन माँ गड़ी रहती हैं। अब हमहूँ पढ़े लागतब तो घर-गिरिस्ती कउन देखी-सुनी।
(ग) ऊ बिचरिअउ तौ रात-दिन काम माँ झुकी रहती हैं, अउर तुम पचै घूमती-फिरती हौ, चलौ तनिक हाथ बटाय लेउ।
(घ) तब ऊ कुच्छौ करिहैं-धरि, ना-बस गली-गली गाउत-बजाउत फिरिहैं।
(ङ) तुम पजै का का बताईयहै पचास बरिस से संग रहित है।
(च) हम कुकुरी बिलारी न होयँ, हमार मन पुसाई तौ हम दूसरा के जाब नाहिं त तुम्हार पचै की छाती पै होरहा पूँजब और राज करब, समुझै रहौ।
उत्तर
(क) यह क्या बड़ी बात है। रोटी बनाना जानती हूँ, दाल बना लेती हूँ। साग-भाजी छौंक सकती हूँ और बाकी क्या रहा।

(ख) हमारी मालकिन तो रात-दिन किताबों में गड़ी रहती है। अब हम भी पढ़ने लगे तो घर-गृहस्थी कौन-देखेगा।

(ग) वह बेचारी तो रात-दिन काम में झुकी रहती है और तुम वैसे ही घूमती-फिरती हो, चलो थोड़ा हाथ बटाओ।

(घ) तब वह कुछ कर्ता-धर्ता नहीं, बस गली-गली में गाते-बजाते फिरता है।

(ङ) तुम्हें हम क्या-क्या बताएँ, पचास वर्ष से साथ रहता है।

(च) हम मुरगी या बिल्ली नहीं, हमारा मन चाहेगा तो हम दूसरे के यहाँ जाएँगे नहीं तो तुम्हारी छाती पर मूंग दलेंगे और राज करेंगे, समझे।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 11 भक्तिन

Class 12 Hindi Aroh Chapter 11 Question Answer प्रश्न 4.
‘भक्तिन’ पाठ में पहली कन्या के दो संस्करण जैसे प्रयोग लेखिका के खास भाषाई संस्कार की पहचान कराता है, साथ ही ये प्रयोग कथ्य को संप्रेषणीय बनाने में भी मददगार हैं। वर्तमान हिंदी में भी कुछ अन्य प्रकार की शब्दावली समाहित हुई है। नीचे कुछ वाक्य दिए जा रहे हैं जिससे वक्ता की खास पसंद का पता चलता है। आप वाक्य पढ़कर बताएँ कि इनमें किन तीन विशे ष्रकार की शब्दावली का प्रयोग हुआ है। इन शब्दावलियों या इनके अतिरिक्त अन्य किन्हीं विशेष शब्दावलियों का प्रयोग करते हुए आप भी कुछ वाक्य बनाएँ और कक्षा में चर्चा करें कि ऐसे प्रयोग भाषा की समृद्धि में कहाँ तक सहायक हैं?

-अरे! उससे सावधान रहना! वह नीचे से ऊपर तक वायरस से भरा हुआ है। जिस सिस्टम में जाता है उसे हैंग कर देता है।

– घबरा मत! मेरी इनस्वींगर के सामने उसके सारे वायरस घुटने टेकेंगे। अगर ज्यादा फाउल मारा तो रेड कार्ड दिखाके हमेशा के लिए पवेलियन भेज दूंगा।

– जानी टेंसन नई लेने का वो जिस स्कूल में पढ़ता है अपुन उसका हेडमास्टर है।
उत्तर

  • नीचे से ऊपर तक वायरस से भरा।
  • सारे वायरस घुटने टेकेंगे। ज्यादा फाउल मारा, रेड कार्ड दिखा के, पवेलियन भेज दूंगा।
  • जान, टेंसन नई लेने का, अपुन उसका हेडमास्टर है।

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NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 7 बादल राग

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बादल राग NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 7

बादल राग Questions and Answers Class 12 Hindi Aroh Chapter 7

कविता के साथ

प्रश्न 1.
‘अस्थिर सुख पर दुख की छाया’ पंक्ति में दुख की छाया किसे कहा गया है और क्यों?
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्ति में ‘दुख की छाया’ मानव जीवन में आने वाले दुखों, कष्टों, मुसीबतों एवं प्रतिकूल परिस्थितियों को कहा गया है। यह इसलिए कहा गया है क्योंकि सुख-दुःख मानव-जीवन के दो पक्ष हैं जो जीवनभर आते-जाते रहते हैं और दोनों ही अस्थिर हैं।

प्रश्न 2.
‘अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर’ पंक्ति में किसकी ओर संकेत किया गया है?
उत्तर :
‘अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर’ पंक्ति में पूँजीपति या शोषक व धनी-वर्ग के लोगों की ओर संकेत किया गया है। ये धनी वर्ग के लोग क्रांति के दूत बादल की विद्रोहपूर्ण बिजली गिरने से उन्नति के शिखर से पृथ्वी तल पर गिर जाते हैं।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 7 बादल राग

प्रश्न 3.
‘विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते’ पंक्ति में विप्लव-रव से क्या तात्पर्य है? ‘छोटे ही हैं शोभा पाते’ ऐसा क्यों कहा गया है? (A.I. C.B.S.E. 2011, Set-1)
उत्तर
प्रस्तुत पंक्ति में ‘विप्लव रव’ से तात्पर्य क्रांति के विद्रोहपूर्ण शब्दों या गर्जना से है। वह ऐसे लोगों की गर्जना या स्वर है जो सदियों से पूँजीपति वर्ग के शोषण का शिकार होकर दयनीय जीवन जी रहे हैं। ‘छोटे ही हैं शोभा पाते’ ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि क्रांति का विनाशकारी प्रभाव सदा उच्च या शोषक वर्ग के लोगों पर ही होता है। इस विद्रोह का निम्न या छोटे वर्ग के जनसामान्य पर कोई विनाशकारी प्रभाव नहीं होता। उच्च वर्ग तो क्रांति के शब्दों से भयभीत होता है लेकिन छोटे वर्ग अर्थात जनसामान्य वर्ग के लोग प्रसन्न हो उठते हैं तथा जीवन में शोषण की मार से निकलकर समृद्धि प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 4.
पादलों के आगमन से प्रकृति में होनेवाले किन-किन परिवर्तनों को कविता रेखांकित करती है? (C.B.S.E. 2018)
उत्तर
‘बादल राग’ निराला द्वारा रचित एक प्रतीकात्मक कविता है जिसमें कवि ने बादलों का क्रांति के रूप में आह्वान किया है। इस कविता में बादलों के आगमन से पृथ्वी के गर्भ में सोए हुए अंकुर अंकुरित हो उठते हैं। वे अपने मन में नवजीवन का संचार कर अनेक आशाओं के साथ बादलों की ओर देख रहे हैं।

बादलों की घनघोर गर्जना से संपूर्ण संसार भयभीत हो उठता है। उन्नति के शिखर पर पहुँचे सैकड़ों वीर पृथ्वी पर सो जाते हैं। विशालकाय उच्च वर्ग के लोग घायल होकर मर जाते हैं। लेकिन शोषित वर्ग के प्रतीक छोटे भारवाले छोटे-छोटे पौधे हँसते-मुसकराते रहते हैं। वे अपार हरियाली से भरकर, हिल-हिलकर तथा खिलखिलाते हुए हाथ हिलाते रहते हैं। कवि ने इसके माध्यम से बादलों का गर्जना-चमकना, मूसलाधार वर्षा, छोटे-छोटे पौधों का हवा में हाथ मिलाना, कमल के फूल पर जल की बूंद टपकना और कीचड़ का साफ होना दर्शाया है।

व्याख्या कीजिए

1. तिरती है समीर-सागर पर
अस्थिर सुख पर दुःख की छाया
जग के दग्ध हृदय पर
निर्दय विप्लव की प्लावित माया

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 7 बादल राग

2. अट्टालिका नहीं है रे
आतंक-भवन
सदा पंक पर ही होता
जल-विप्लव-प्लावन
उत्तर :
उत्तर के लिए व्याख्या भाग देखिए।

कला की बात

प्रश्न 1.
पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। आपको प्रकृति का कौन-सा मानवीय रूप पसंद आया और क्यों?
उत्तर :
हमें प्रकृति का हँसते हुए निर्धन वर्ग का मानवीय रूप पसंद आया क्योंकि समाज में सदा से उच्च वर्ग या पूँजीपति वर्ग के शोषण के कारण निर्धन वर्ग दबता रहा है वह जीवन में आतंकित होकर रहता है। शोषण की पीड़ा के कारण वह तो हँसना ही भूल गया है। लेकिन आज क्रांति के कारण उसे अपने शोषण का अंत दिखाई दे रहा है।

प्रश्न 2.
कविता में रूपक अलंकार का प्रयोग कहाँ-कहाँ हुआ है? संबंधित वाक्यांश को छाँटकर लिखिए।
उत्तर
कविता में रूपक अलंकार का प्रयोग निम्नलिखित वाक्यांशों में हुआ है

  • यह तेरी रण-तरी
  • घोर वज्र-हुँकार
  • वज्र-वर्णन।

प्रश्न 3.
इस कविता में बादल के लिए ऐ विप्लव के वीर! ऐ जीवन के पारावार! जैसे संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। बादल राग’ कविता के शेष पाँच खंडों में भी कई संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। जैसे-अरे वर्ष के हर्ष! मेरे पागल बादल!, ऐ निबंध!, ए स्वच्छंद!, ऐ उद्दाम!, ऐ सम्राट!, ऐ विप्लव के प्लावन!, ऐ अनंत के चंचल शिशु सुकुमार! उपर्युक्त संबोधनों की व्याख्या करें तथा बताएं कि बादल के लिए इन संबोधनों का क्या औचित्य है?
उत्तर
ऐ विप्लव के वीर – इसका अर्थ है-हे क्रांति.के वीर! यहाँ कवि ने बादल को क्रांति का दूत माना है। बादलों में अपार शक्ति : है। वे कोई भी क्रांति लाने में समर्थ हैं। वे अपनी शक्ति से ब्रह्मांड तक को हिला सकते हैं, इसलिए कवि ने उनको वीर कहा है।

ऐ जीवन के पारावार – इसका अर्थ है-हे जीवन के सागर, यह सत्य है कि जल ही जीवन है। और बादल ही जल का सागर है। अत: जिस प्रकार बादलों के बरसने से फसलें और पौधे हरे-भरे हो जाते हैं उसी प्रकार क्रांति के स्वरों से निम्न वर्ग के लोगों में नए जीवन का संचार हो जाता है। वे प्रसन्न हो उठते हैं।

अरे वर्ष के हर्ष – इसका अर्थ है कि हे पूरा साल प्रसन्नता देने वाले, बादलों के बरसने से चारों ओर हरियाली रहती है। फसलें हरी-भरी होती हैं जिससे जन-मन प्रसन्नचित्त रहता है।

मेरे पागल बादल – इसका अर्थ है कि हे मस्ती में मस्त बादल, बादल अपनी मस्ती में रहते हैं। वे मस्ती में मस्त होकर वर्षा करते हैं। इसलिए कवि ने उन्हें पागल कहा है।

ऐ निबंध – कवि का तात्पर्य है कि हे बंधन मुक्त बादल, बादल बंधन, रुकावटों से दूर होते हैं। उन्हें कोई अपने वश में नहीं कर सकता है। वे स्वतंत्र होकर अपने कार्य में लीन रहते हैं।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 7 बादल राग

ऐ स्वच्छंद – इसका अभिप्राय है कि हे स्वतंत्र बादल, अर्थात बादल कभी भी परवश नहीं होते। वे अपनी इच्छा से यहाँ-वहाँ विचरण करते हैं, वर्षा लाते हैं।

ऐ उद्दाम – इसका अर्थ है कि हे निरंकुश बादल, बादल एक निरंकुश शासक की तरह कार्य करते हैं। वे अपनेपन की इच्छा को पूर्ण करते हैं।

ऐ सम्राट – इसका तात्पर्य यह है कि हे सम्राट के समान बादल, अर्थात बादलों का साम्राज्य पूरी दुनिया पर छाया रहता है। सारी दुनिया बादल रूपी सम्राट की छत्र-छाया में निवास करती है। अतः उसका शासन सारी दुनिया पर चलता है। ऐ अनंत के चंचल शिशु सुकुमार! कवि का कथन है कि हे प्रभु के चंचल, कोमल बच्चे! अर्थात बादल उस असीम सभा के कोमल और चंचल बच्चे के समान है। और जैसे आँगन में चंचल, कोमल बच्चा अनेक क्रीड़ाएँ करता है उसी प्रकार ये बादल भी उस असीम प्रभु के आँचल में अनेक प्रकार की क्रीड़ाएँ करते हैं।

प्रश्न 4.
कवि बादलों को किस रूप में देखता है? कालिदास ने मेघों को दूत के रूप में देखा। आप अपना कोई बिंब दीजिए। कवि बादलों को क्रांति के दूत के रूप में देखता है।
उत्तर
वह बादलों के द्वारा क्रांति लाकर समाज में शोषण को खत्म करना चाहता है
ताकि निर्धन वर्ग भी जीवन जी सके।
बादल आए, बादल आए
नन्हे-मुन्ने बादल आए।
कुछ खुशियाँ, कुछ गम
पिटारा-सा भर लाए।
मिट्टी को प्यार जताने
चहुँ ओर खुशियाँ दिखाने
काले-काले बादल आए।
बादल आए, बादल आए।
नन्हे-मुन्ने बादल आए॥
कालिदास ने मेघदूत काव्य में मेघों को दूत के रूप में देखा था। बादलों को देवदूत के रूप में देखा जा सकता है जो किसान की फ़सल को जीवन देने आते हैं।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 7 बादल राग

प्रश्न 5.
कविता को प्रभावी बनाने के लिए कवि विशेषणों का सायास प्रयोग करता है, जैसे-अस्थिर सुख। ‘सुख’ के साथ ‘अस्थिर’ विशेषण के प्रयोग ने सुख के अर्थ में विशेष प्रभाव पैदा कर दिया है। ऐसे अन्य विशेषणों को कविता से छाँटकर लिखें तथा बताएँ कि ऐसे शब्द-पदों के प्रयोग से कविता के अर्थ में क्या विशेष प्रभाव पैदा हुआ है?
उत्तर :
निर्दय-विप्लव,-सजग सुप्त-अंकुर, विप्लव के बादल, आतंक-भवन ऐसे पदों के प्रयोग से कविता के अर्थ में विशेष प्रभाव पैदा हो गया है। भावों में अत्यंत रोचकता, गंभीरता और सरसता उत्पन्न हो गई है।

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NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 6 उषा

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उषा NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 6

उषा Questions and Answers Class 12 Hindi Aroh Chapter 6

कविता के साथ

Usha Class 12 Ncert Solutions प्रश्न 1.
कविता के किन उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि ‘उषा’ कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्द-चित्र है? (C.B.S.E. Delhi 2009, 2010, Set-I, A.I.C.B.S.E. 2011, Set-I, C.B.S.E. Oustside Delhi 2013, Set-I)
अथवा
‘शमशेर की कविता गाँव की सुबह का जीवंत चित्रण है।’ पुष्टि कीजिए। (A.I.C.B.S.E. 2016)
उत्तर :
प्रयोगवादी कवि शमशेर बहादुर सिंह ने गतिशील बिंब-योजना का प्रयोग करते हुए गाँव की सुबह का सुंदर शब्द-चित्र प्रस्तुत किया है। बहुत सुबह पूर्व दिशा में सूर्य दिखाई देने से पहले वह नीले शंख के समान प्रतीत हो रहा था। उसका रंग ऐसा लग रहा था जैसे किसी गाँव की महिला ने चूल्हा जलाने से पहले राख से चौका पोत दिया था। उसका रंग गहरा था।

कुछ देर बाद हलकी-सी लाली दिखाई दी जिस देखकर ऐसा लगा जैसे काली सिल पर जरा-सा लाल केसर डाला हो और फिर उसे धो दिया हो या किसी ने स्लेट पर लाल खड़िया चाक मल दी हो। आकाश के नीलेपन में सूर्य ऐसे प्रकट हुआ जैसे नीले जल में किसी का गोरा सुंदर शरीर झिलमिलाता हुआ प्रकट हो रहा हो। लेकिन सूर्य के दिखाई देते ही यह सारा प्राकृतिक सौंदर्य मिट गया। कवि के द्वारा प्रस्तुत बिंब-योजना गतिशील है और उससे पल-पल बदलते गाँव के प्राकृतिक दृश्यों की सुंदरता प्रकट हो पाई है।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 6 उषा

Usha Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 2.
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)
नई कविता में कोष्ठक, विरामचिह्नों और पंक्तियों के बीच का स्थान भी कविता को अर्थ देता है। उपर्युक्त पंक्तियों में कोष्ठक से कविता में क्या विशेष अर्थ पैदा हुआ है? समझाड़ा।
उत्तर
भावों को सबल रूप में प्रकट करने के लिए विरामचिह्नों का जितना महत्त्व बोलचाल की भाषा में होता है उतना ही लिखित भाषा में भी होता हैं। प्रयोगवादी कवियों ने परंपरागत कविता में अपनाई जानेवाली शैली से कुछ हटकर इन चिह्नों का प्रयोग अपनी कविता में करना आरंभ किया है।

कवि ने अपनी पंक्तियों में कोष्ठक का प्रयोग कर अपने कथन को स्पष्टता प्रदान की है। सुबह-सवेरे का आकाश गहरा स्लेटी-सा प्रतीत होता है। उस रंग में स्लेटीपन की थोड़ी अधिकता होती है, उसे स्पष्ट करने के लिए कवि ने कोष्ठक का प्रयोग करते हुए स्पष्ट किया है। गीला चौका अधिक गहरे रंग का होता है पर सूख जाने पर उसका स्लेटी रंग हलका हो जाता है।

अपनी रचना

Class 12 Hindi Usha Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 1.
अपने परिवेश के उपमानों का प्रयोग करते हुए सूर्योदय और सूर्यास्त का शब्द-चित्र खींचिए।
उत्तर:
जब सुबह होती है तो सूर्योदय से पहले पूर्व दिशा लाली से भर उठती है। ऐसे लगता है जैसे गुलाल की लाली सब ओर फैल गई है। ठंडी-ठंडी हवा बहने लगती है जो तन-मन को प्रफुल्लित तरोताजा कर देती है। पेड़ झूमने लगते हैं। रंग-बिरंगे पक्षी चहचहाते हुए डालियों पर इधर-उधर कूदने-फुदकने लगते हैं।

किसान अपने-अपने खेतों की ओर चल देते हैं और औरतें पानी भरने के लिए पनघट की ओर खिलखिलाती-चहचहाती चल देती हैं। वह बिना किसी विशेष बात के ही हँसती है। कौवे और भैंसें सुबह-सुबह चरागाहों की ओर चल देती हैं। उनके पीछे-पीछे चरवाहे अपनी लाठियाँ लिए भाग-दौड़ करने लगते हैं। सूर्यास्त के समय पश्चिम दिशा सूर्य की लाली से भर उठती है। बादलों की उपस्थिति उनमें न जाने कितने रंगों की शोभा भर देती है। सुबह के समय चरागाहों की ओर गए पशु वापिस अपने घरों की ओर लौटने लगते हैं।

वे रँभाते-दौड़ते-भागते अपने घरों की ओर लौटते हैं। झोंपड़ों से धुएँ की लंबी-लंबी लकीरें आकाश की ओर उठने लगती हैं। दिनभर के थके-हारे किसान वापिस अपने घरों की ओर लौटने लगते हैं। धीरे-धीरे लाली का रंग बदलने लगता है। वह रात्रि के कालेपन की ओर बढ़ने लगती है।

Usha Chapter Class 12 Question Answer NCERT Solutions

आपसदारी

सूर्योदय का वर्णन लगभग सभी बड़े कवियों ने किया है। प्रसाद की कविता ‘बीती विभावरी जाग री’ और अज्ञेय की ‘बावरा अहेरी’ की. पंक्तियाँ आगे बॉक्स में दी जा रही हैं। ‘उषा’ कविता के समानांतर इन कविताओं को पढ़ते हुए नीचे दिए गए बिंदुओं पर तीनों कविताओं का विश्लेषण कीजिए और यह भी बताइए कि कौन-सी कविता आपको ज्यादा अच्छी लगी और क्यों?

  • उपमान
  • शब्द-चयन
  • परिवेश

बीती विभावरी जाग री!

अंबर पनघट में डुबो रही
तारा-घट ऊषा नागरी।

खग-कुल कुल-कुल-सा बोल रहा,
किसलय का अंचल डोल रहा,

लो यह लतिका भी भर लाई
मधु मुकुल नवल रस गागरी।

अधरों में राग अमंद पिए,
अलकों में मलयज बंद किए

तू अब तक सोई है आली
आँखों में भरे विहाग री। – जयशंकर प्रसाद

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 6 उषा

भोर का बावरा अहेरी
पहले बिछाता है आलोक की
लाल-लाल कनियाँ
पर जब खींचता है जाल को
बाँध लेता है सभी को साथ :
छोटी-छोटी चिड़ियाँ, मँझोले परेवे, बड़े-बड़े पंखी
डैनों-वाले डील-वाले डौल के बेडौल
उड़ने जहाज,
कलस-तिसूल वाले मंदिर-शिखर से ले
तारघर की नाटी मोटी चिपटी गोल धुस्सों वाली उपयोग-सुंदरी
बेपनाह काया को:
गोधूली की धूल को, मोटरों के धुएँ को भी
पार्क के किनारे पुष्पिताग्र कर्णिकार की आलोक-खची तन्वि रूप-रेखा को
और दूर कचरा जलानेवाली कल की उदंड चिमनियों को, जो
धुआँ यों उगलती हैं मानो उसी मात्र से अहेरी को हरा देंगी। – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
उत्तर
शमशेर बहादुर सिंह की ‘उषा’, जयशंकर प्रसाद की ‘बीती विभावरी जाग री’ तथा अज्ञेय की ‘बावरा अहेरी’ कविताओं का आधार एकसमान है। तीनों महाकवियों ने प्रात:कालीन शोभा का चित्रण सुंदर ढंग से किया है पर तीनों के शिल्प और भाषा में बहुत बड़ा अंतर है। जयशंकर प्रसाद छायावादी कवि हैं तो अन्य दोनों कवि प्रयोगवादी कवि हैं। इसलिए उनके शिल्प में अंतर दिखाई देना सहज-स्वाभाविक है। उनमें उपमान, शब्द-चयन और परिवेश के आधार पर स्पष्ट अंतर है

उपमान – श्री शमशेर बहादुर सिंह को प्रातः का आसमान नीले शंख-सा प्रतीत होता है तो प्रसाद जी को आसमान पनघट के समान लगता है पर अज्ञेय ने तो भोर को पक्षी पकड़नेवाले बहेलिए के रूप में चित्रित किया है। सुबह के समय का आकाश तरह-तरह के मोहक रंगों से सजा-सँवरा प्रतीत होता है।

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वह राख से लीपे चौके के समान है, काली सिल पर लाल केसर के निशान की तरह है, स्लेट पर लाल खड़िया चॉक की तरह है या नीले आकाश रूपी सरोवर में झिलमिलाती सूर्य की देह हिलती हुई अति सुंदर लगती है। प्रसाद जी के अनुसार पक्षी चहचहाने लगते हैं। नन्हे-नन्हे पत्ते हवा के झोंकों से काँपने लगते हैं और बेलें सुंदर रसभरे फूलों से लद जाते हैं। अज्ञेय को आधुनिक वैज्ञानिक युग के उपभागों ने अधिक आकृष्ट किया है।

शब्द – चयन-शमशेर बहादुर सिंह और अज्ञेय की कविताओं में तत्सम, तद्भव और विदेशी शब्दों का अधिक प्रयोग किया गया है जबकि प्रसाद जी की भाषा तत्सम शब्दावली से युक्त है। उनका शब्द-चयन गेयता की दृष्टि से अनुकूल और प्रभावपूर्ण है। उसमें लयात्मकता की योजना के लिए शब्दों की कोमलता की ओर विशेष ध्यान रखा गया है।

परिवेश – प्रसाद जी की कविता में मानवीकरण का सुंदर प्रयोग है और प्रकृति की शोभा के अनुसार परिवेश चित्रण की योजना की गई है। शमशेर बहादुर सिंह की कविता में प्रकृति से जुड़े और चाक्षुक बिंबों की ऐसी योजना की गई है कि वे मन को गहरा प्रभावित करते हैं लेकिन अज्ञेय की कविता में नगरीय वातावरण की झलक है। धुएँ से भरा वातावरण, चिमनियों की उपस्थिति से प्रकृति की कोमलता से दूर करता है।

मुझे इन तीनों कविताओं में से प्रसाद जी की ‘बीती विभावरी जाग री’ अच्छी लगी है क्योंकि इसमें अपेक्षाकृत कोमलता है, सहजता है, गतिशीलता है, लयात्मकता है, छंदबद्धता है और भावात्मकता की अधिकता है। इसकी शब्द-योजना इतनी स्वाभाविक है कि शेष दोनों कविताएँ इसकी तुलना में पीछे दिखाई देती हैं।

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NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 8 कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूच्छ और राम का विलाप

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कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूच्छ और राम का विलाप NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 8

कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूच्छ और राम का विलाप Questions and Answers Class 12 Hindi Aroh Chapter 8

पाठ के साथ

Kavitavali Class 12 Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 1.
कवितावली के उदधृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने-अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है। (A.I. C.B.S.E. 2016, C.B.S.E. 2010, Set-1)
उत्तर :
तुलसी के समकालीन समाज में आर्थिक विषमता और गरीबी का बोलबाला था। इन्होंने अपने काव्य में समकालीन युग का यथार्थ चित्रण किया है। कवि ने ग़रीबी और आर्थिक विषमता को बखूबी झेला था। इसलिए उन्होंने इसके सजीव चित्र उकेरे हैं कि उस युग में किसान के पास खेती नहीं थी, भिखारी को भीख नहीं मिलती थी, न व्यापारी के पास व्यापार था और न ही नौकर के पास काम-धंधा। समाज के सामने आर्थिक विषमता और ग़रीबी ही मुख्य समस्या थी। यहाँ तक कि समाज में लोग अपने पेट की आग मिटाने के लिए अपने बेटा-बेटी को भी बेच देते थे। इस प्रकार कवि ने युगीन समाज की आर्थिक विषमता का सजीव चित्रण किया है।

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Kavitavali Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 2.
पेट की आग का शमन ईश्वर (राम) भक्ति का मेघ ही कर सकता है-तुलसी का यह काव्य-सत्य क्या इस समय का भी युग-सत्य है? तर्कसंगत उत्तर दीजिए।युग-सत्यह
उत्तर :
पेट की आग का शमन ईश्वर (राम) भक्ति का मेघ ही कर सकता है-तुलसी का यह काव्य-सत्य समकालीन युग में भी सत्य था । और आज भी सत्य है। भक्त यदि भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण भाव से भक्ति और कर्म करे तो पेट की माग ही नहीं वरन भक्त का उद्धार भी हो सकता है।

इस सृष्टि में ईश्वर ही सत्य, वही जन्मदाता और पालनहार है फिर जिस प्रभु ने जन्म दिया हो क्या वह अपने बच्चों का पेट नहीं भरेगा। भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर जब ईश्वर भक्ति का मेघ बरसता है तो भक्त को संपूर्ण संसार की खुशियाँ मिल जाती हैं। इस प्रकार यदि भक्त भगवान के प्रति एकनिष्ठ भक्ति करता है और अपना कर्म भी निष्ठापूर्वक निभाता है तो ईश्वर उसकी पेट की आग को ही शांत नहीं करता बल्कि उसके जीवन का भी उद्धार कर देता है।

Kavitavali Question Answer NCERT Solutions  प्रश्न 3.
तुलसी ने यह कहने की जरूरत क्यों समझी? धूत कहौ, अवधूत कही, रजपूत कहौ, जोलहा कहौ कोऊ/काहू की बेटी से बेटी न ब्याहब, काहू की जाति बिगार न सोऊ। इस सवैया में काहू के बेटा सों बेटी न ब्याहब कहते तो सामाजिक अर्थ में क्या परिवर्तन आता?
उत्तर :
भारतीय समाज एक पुरुष प्रधान समाज है। सदियों से यहाँ विवाह की परंपरा रही है कि बेटी के माँ-बाप को बेटे के माँ-बाप के यहाँ हाथ जोड़कर विनम्रतापूर्वक रस्म अदा करते हैं। अतः बेटे के घरवालों को बेटी के घरवाले अधिक सम्मान और इज्जत देते हैं। इस प्रकार यदि इस सवैये में कवि का बेटा सों बेटी न व्हायब कहते तो सामाजिक अर्थ बिलकुल विपरीत हो जाता अर्थात बेटे की जगह बेटी अथ.. पुरुष की जगह स्त्री का वर्चस्व प्रकट होता जिससे भारतीय समाज की परंपरा भी टूट जाती।

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Lakshman Murcha Class 12 Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 4.
धूत कही….वाले छंद में ऊपर से सरल व निरीह दिखलाई पड़नेवाले तुलसी की भीतरी असलियत एक स्वाभिमानी भक्त हृदय की है। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं? (C.B.S.E. Delhi 2013, Set-l. II, III)
अथवा
‘धूत कहौ, अवधूत कही…’ सवैये में तुलसीदास का स्वाभिमान प्रतिबिंबित होता है। इस कथन की पुष्टि कीजिए। (Outside Delhi 2017, Set-1)
उत्तर :
तुलसीदास जी आदर्शवादी चेतना के कवि हैं। बचपन से उनमें स्वाभिमान की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। जन्म देते ही माँ-बाप ने उनको त्याग दिया। उनका जीवन अत्यंत कठिनाइयों में व्यतीत हुआ। बाद में रलावली से शादी करने पर भी उन्हें फटकार मिली।

तुलसी जी ने अपनी पत्नी की एकमात्र फटकार से दुनिया से वैराग्य ले लिया था और वे एकनिष्ठ-भाव से प्रभु राम की भक्ति में लीन हो गए थे। इस प्रकार उनका संपूर्ण जीवन दर-दर भटककर व्यतीत हुआ लेकिन वे कभी किसी के सामने गिड़गिड़ाए नहीं। उन्होंने समाज में प्रचलित जाति-पाति और धर्म का खुलकर विरोध किया। वास्तव में वे बाहर से सीधे-सादे-सरल थे लेकिन अंदर से एक स्वाभिमानी भक्त हृदय छिपाए थे। हम इससे पूर्णतः सहमत हैं।

Class 12 Hindi Kavitavali Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 5.
व्याख्या करें
(क) मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।
जौँ जनतेऊँ बन बंधु बिछोहू। पितु बचन मनतेऊँ नहिं ओहू॥

(ख) जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिन फनि करिबर कर हीना।
अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही॥

(ग) माँगि के बैबो, मसीत को सोइबो, लैबो को एक न दैबो को दोऊ॥
(घ) ऊँचे नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट को ही पचत, बेचत बेटा-बेटकी॥
उत्तर :
उत्तर के लिए सप्रसंग व्याख्या का अंश देखिए।

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Kavitavali Class 12 Ncert Solutions  प्रश्न 6.
भ्रातृशोक में हुई गम की दशा को कवि ने प्रभु की नर-लीला की अपेक्षा सच्ची मानवीय अनुभूति के रूप में रचा है। क्या आप इससे सहमत हैं? तर्क पूर्ण उत्तर दीजिए। (C.B.S.E. Outside Delhi 2013. Set-11)
उत्तर :
हाँ, भ्रातृशोक में हुई राम की दशा को कवि ने प्रभु की नर-लीला की अपेक्षा सच्ची मानवीय अनुभूति के रूप में रचा है। लक्ष्मण-मूर्छा के पश्चात राम अत्यंत व्याकुल हो उठते हैं। वे कभी तो लखन को अपने हृदय से उठाकर लगाते हैं, तो कभी उनसे बात करने के लिए कहते हैं। लक्ष्मण के बिना राम फूट-फूट कर रो रहे हैं। वे लक्ष्मण से कहते हैं कि यदि मैं जानता कि वन में भाई को खोना पड़ेगा तो मैं अपने पिता दशरथ के वचन को कभी नहीं मानता।

राम कहते हैं कि संसार में सुत, धन, संपत्ति, भवन, परिवार तो बार-बार मिल जाते हैं लेकिन लक्ष्मण जैसा भाई बार-बार नहीं मिल सकता। वे सोच रहे हैं कि अब मैं अयोध्या में क्या मुँह लेकर जाऊँगा? सब यही कहेंगे कि राम ने अपनी पत्नी के लिए अपने भाई को न्योछावर कर दिया। इस संसार में उनको कलंक लेकर जीना पड़ेगा।

यहाँ तक कि राम एक पत्नी अर्थात सीता की हानि को विशेष नहीं मान रहे थे जबकि अपने भाई लक्ष्मण के लिए सामान्य जन की भाँति फूट-फूट कर रो रहे थे। वे लखन के बिना अपने को अधूरा समझ रहे थे कि जैसे पंख के बिना पक्षी, मणि के बिना साँप तथा सूंड के बिना हाथी का जीवन व्यर्थ है उसी तरह लक्ष्मण के बिना राम का जीवन भी व्यर्थ रह जाएगा। वस्तुतः भ्रातृशोक में राम की दशा एक सामान्य मनुष्य की भाँति हो गई थी।

Class 12 Hindi Chapter 8 Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 7.
शोक-ग्रस्त माहौल में हनुमान के अवतरण को करुण रस के बीच वीर रस का आविर्भाव क्यों कहा गया है?
अथवा
शोक के वातावरण में हनुमान के अवतरण का क्या प्रभाव पड़ा था?
उत्तर :
लक्ष्मण-मूर्छा के पश्चात समस्त माहौल शोकग्रस्त हो गया था। राम लक्ष्मण को अपने हृदय से लगाकर फूट-फूट कर रो रहे थे। इनके साथ-साथ समस्त भालू-वानर सेना राम को देख अत्यंत दुखी थे। यहाँ तक कि राम-सेना का प्रत्येक प्राणी, वीर शोक-मग्न था। श्रीराम तो सामान्य मनुष्य की भाँति करुणावस्था में पहुंच चुके थे। वे बार-बार लक्ष्मण को देखकर अनेक बातें याद करते हुए रो रहे थे लेकिन जैसे ही हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर शोक-सभा में पहुंचे तो वे पूरा का पूरा पर्वत ही अपने हाथ पर उठा लाए थे।

हनुमान को देख राम तथा समस्त जन थोड़े खुश हुए तथा शीघ्र ही वैद्य जी ने लक्ष्मण को संजीवनी बूटी पिलाई तो लक्ष्मण हर्षित होकर उठ खड़े हुए। राम सहित समस्त वानर-सेना खुश हो गई। इस प्रकार शोक-ग्रस्त माहौल में हनुमान के अवतरण को वीर रस का आविर्भाव कहा गया है।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 8 कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूच्छ और राम का विलाप

Kavitavali Ncert Solutions प्रश्न 8.
“जैहऊँ अवध कवन मुहुँ लाई। नारि हेतु प्रिय भाई गँवाई॥
बरु अपजस सहतेंउँ जग माहीं। नारि हानि विसेष छति नाहिं।।”
भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप वचन में स्त्री के प्रति कैसा सामाजिक दृष्टिकोण संभावित है?
उत्तर :
भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप-वचन में स्त्री के प्रति उपेक्षित भाव प्रकट हुआ है। समाज में स्त्री को उपेक्षित समझा जाता है। उसे पुरुष के समान इज्जत नहीं दी जाती। समाज नारी की अस्मिता को संदेहपूर्ण दृष्टि से देखता है और उसे असहाय और निर्बल समझकर पग-पग पर उसके मान-सम्मान को ठेस पहुंचाता है।

पाठ के आस-पास

Tulsidas Class 12 Ncert Solutions प्रश्न 1.
कालिदास के रघुवंश महाकाव्य में पत्नी (इंदुमती) के मृत्यु-शोक पर अज तथा निराला की सरोज-स्मृति में पुत्री (सरोज) के मृत्यु-शोक पर पिता के करुण उद्गार निकले हैं। उनसे भ्रातृशोक में डूबे राम के इस विलाप की तुलना करें।
उत्तर :
अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

Class 12 Hindi Kavitavali Ncert Solutions प्रश्न 2.
‘पेट को हि पचत बेटा-बेटकी’ तुलसी के युग का ही नहीं आज के युग का भी सत्य है। भुखमरी में किसानों की आत्म-हत्या और संतानों (खासकर बेटियों) को भी बेच डालने की हृदय-विदारक घटनाएँ हमारे देश में घटती रही हैं। वर्तमान परिस्थितियों और तुलसी के युग की तुलना करें।
उत्तर :
तुलसी युग में भी समाज में भुखमरी, गरीबी का बोलबाला था और आज भी है। उस समय भुखमरी के कारण किसान अपनी भूख मिटाने के कारण अपने बेटे-बेटियों को ही बेच दिया करते थे। आज के युग में लोग गरीबी और भुखमरी से परेशान होकर अपने बेटे-बेटियों को बेच रहे हैं। लेकिन आज के युग में मनुष्य के पास साधनों की कमी नहीं है जो तुलसी युग में होती थी। दूसरे उस युग में गरीबी और भुखमरी के कारण लोग अपने बच्चों को मजबूर होकर बेचते थे लेकिन आज तो कुछ लोग अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए भी अपनी संतानों को बेच रहे हैं।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 8 कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूच्छ और राम का विलाप

लक्ष्मण मूर्छा और राम का विलाप प्रश्न उत्तर NCERT Solutions प्रश्न 3.
‘तुलसी के युग की बेकारी के क्या कारण हो सकते हैं? आज की बेकारी की समस्या के कारणों के साथ उसे मिलाकर कक्षा में परिचर्चा करें।
उत्तर:
तुलसी के युग की बेकारी के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं

  • लोगों के पास कृषि-योग्य भूमि का न होना
  • अच्छे संसाधन का न होना
  • परिश्रम न करना
  • शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार
  • कुशासन से परेशान तंत्र
  • मौसम पर आधारित कृषि व्यवस्था।

विद्यार्थी कक्षा में अपने साथियों तथा अध्यापक/अध्यापिका के साथ परिचर्चा करें।

Lakshman Murcha Aur Ram Ka Vilap Question Answer NCERT Solutions  प्रश्न 4.
राम कौशल्या के पुत्र थे और लक्ष्मण सुमित्रा के। इस प्रकार वे परस्पर सहोदर (एक ही माँ के पेट से जन्मे) नहीं थे। फिर, राम ने लक्ष्य कर ऐसा क्यों कहा-“मिलइ न जगत सहोदर भ्राता”? इस पर विचार करें।
उत्तर :
राम ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि राम कौशल्या के साथ-साथ सुमित्रा को भी अपनी माँ मानते थे। वे लक्ष्मण को अपने सगे भाई की तरह प्यार करते थे।

Class 12 Hindi Aroh Chapter 8 Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 5.
यहाँ कवि तुलसी के दोहा, चौपाई, सोरठा, कवित्त, सवैया-ये पाँच छंद प्रयुक्त हैं। इसी प्रकार तुलसी साहित्य में और छंद तथा काव्य-रूप आए हैं। ऐसे छंदों व काव्य-रूपों की सूची बनाएँ। दोहा- भरत बाहु
उत्तर :
दोहा – भरत बाहु बल शील गुन प्रभु पद प्रीति अपार।
मन महुँ जात सराहत पुनि-पुनि पवन कुमार ॥

सोरठा – हरषि राम भेंटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।
तुरत बैद तब कीन्ही उपाई। उठि बैठे लछिमन हरषाई॥

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 8 कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूच्छ और राम का विलाप

कवित्त- खेती न किसान को भिखारी को न भीख, बलि,
बनिक को बनिज, न चाकर को चाकरीन
जीविका विहीन लोग सीद्यमान सोच बस,
कहें एक एकन सों ‘कहाँ जाई, का करी?’
वेदहूँ पुरान कही, लोकहुँ बिलोकिअत,
साँकरे सबै पै, राम! रावर कृपा करी।
दारिद दसानन दबाई दुनी, दुनी दीनबंधु
दुरित-दहन देखि तुलसी हहा करी॥

सवैया – धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूत कहौ जोलहा कहौ कोऊ।
काहूकी बेटी सों बेटा न ष्याल्ब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ॥

तुलसी सरनाम गुलामु है राम को, जाको रुचै सो कहै कछु ओऊ।
माँगी कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ॥

इन्हें भी जानें

चौपाई _चौपाई सम-मात्रिक छंद है यह चार पंक्तियों का होता है जिसके दोनों चरणों में 16-16 मात्राएँ होती हैं। चालीस चौपाइयोंवाली रचना को चालीसा कहा जाता है-यह तथ्य लोकप्रसिद्ध है।

दोहा—दोहा अर्ध-सम-मात्रिक छंद है। इसके सम-चरणों (दूसरे और चौथे चरण) में 11-11 मात्राएँ होती हैं तथा विषम चरणों (पहले और तीसरे) में 13-13 मात्राएँ होती हैं। इनके साथ अंत लघु (।) वर्ण होता है।

सोरठा- दोहे को उलट देने से सोरठा बन जाता है। इसके सम-चरणों (दूसरे और चौथे चरण) में 13-13 मात्राएँ होती हैं तथा विषम चरणों (पहले और तीसरे) में 11-11 मात्राएँ होती हैं। परंतु दोहे के विपरीत इसके सम-चरणों (दूसरे और चौथे चरण) में अंत्यानुप्रास या तुक नहीं रहती, विषम चरणों (पहले और तीसरे) में तुक होती है।

कवित्त- यह वार्णिक छंद है। इसे मनहरण भी कहते हैं। कवित्त के प्रत्येक चरण में 31-31 वर्ण होते हैं। प्रत्येक चरण के 16वें और फिर 15वें वर्ण पर यति रहती है। प्रत्येक चरण का अंतिम वर्ण गुरु होता है। सवैया-चूँकि सवैया वार्णिक छंद है, इसलिए सवैया छंद के कई भेद हैं। ये भेद गणों के संयोजन के आधार पर बनते हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध मत्तगयंद सवैया है इसे मालती सवैया भी कहते हैं। सवैया के प्रत्येक चरण में 23-23 वर्ण होते हैं जो 7 भगण + 2 गुरु (33) के क्रम के होते हैं। यहाँ प्रस्तुत तुलसी का सवैया कई भेदों को मिलाकर बनता है।
NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 8 कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूच्छ और राम का विलाप

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NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 10 छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख

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छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 10

छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख Questions and Answers Class 12 Hindi Aroh Chapter 10

कविता के साथ

Chota Mera Khet Class 12 Ncert Solutions प्रश्न 1.
छोटे चौकोना खेत को कागज़ का पन्ना कहने में क्या अर्थ निहित है? (C.B.S.E. Sample Paper)
अथवा
‘छोटा मेरा खेत’ कविता के आधार पर खेत और कागज के पन्ने में समानता के तीन बिंदुओं पर प्रकाश डालिए। (C.B.S.E. 2012)
करगज के पन्ने की तुलना छोटे चौकोर खेत से करने का आधार स्पष्ट कीजिए। (C.B.S.E. 2014 Set-l, II, III)

छोटे चौकोने खेत को कागज़ का पन्ना कहने में यह अर्थ निहित है कि जिस प्रकार कागज का पन्ना चौकोर होता है उसी प्रकार छोटा खेत भी चौकोर होता है। खेत में बीज बोया जाता है फिर उसमें रसायन तत्व, पानी आदि डालते हैं। तत्पश्चात उसमें से बीज अंकुरित होते हैं। वे अंकुर पत्तों और फूलों के रूप में पल्लवित होकर एक दिन पूर्ण तथा फ़सल बन जाते हैं। फिर एक दिन उस फसल की कटाई कर देते हैं।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 10 छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख

ठीक इसी प्रकार कागज के पन्ने पर कोई कल्पना के सहारे कवि द्वारा अभिव्यक्ति रूपी बीज बोया जाता है। फिर वह बीज मूल कल्पना से विकसित होकर इस प्रक्रिया में स्वयं विगलित हो जाता है, उससे शब्दों के अंकुर निकलते हैं और अंततः वह एक पूर्ण कृति का स्वरूप ग्रहण करता। उसमें से एक ऐसी अमृत रस-धारा निकलती है जो अनंत काल तक समाप्त नहीं होती है।

Chota Mera Khet Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 2.
रचना के संदर्भ में अंधड़ और बीज क्या हैं ?
उत्तर :
रचना के संदर्भ में अंधड़ भावनात्मक आँधी का तथा बीज रचना-विचार और अभिव्यक्ति का प्रतीक है।

Chota Mera Khet Question Answer Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 3.
रस का अक्षय पात्र से कवि ने रचना कर्म की किन विशेषताओं की ओर इंगित किया है? (C.B.S.E. Delhi 2017, Set-III)
उत्तर :
रस का अक्षम पात्र से कवि ने रचनाकर्म की निम्नलिखित विशेषताओं की ओर इंगित (संकेत) किया है

  • रचना कर्म के रस के अक्षय पात्र से अलौकिक अमृत धाराएँ फूटती हैं।
  • यह बार-बार लूटने पर भी से जरा भी कम नहीं होता।
  • यह रस बार-बार लूटने से कम होने की अपेक्षा बढ़ता जाता है।

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Class 12 Hindi Chapter 10 Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 4.
व्याख्या करें–
शब्द के अंकुर फूटे
पल्लव-पुष्यों से नमित हुआ विशेष ।
उत्तर :
प्रस्तुत काव्यांश ‘आरोह भाग-2’ में संकलित कवि ‘उमाशंकर जोशी’ द्वारा रचित ‘छोटा मेरा खेत’ कविता से अवतरित है। कवि का कथन है कि छोटे खेत रूपी कागज़ के पन्ने पर कवि जब रचना विचार और अभिव्यक्ति का बीज बोता है तो वह कल्पना के सहारे विगलित होकर उसमें से शब्द रूपी अंकुर फूटते हैं। तत्पश्चात ये शब्द रूपी अंकुर पल्लवित-पुष्पित होकर धीरे-धीरे एक पूर्ण कृति के स्वरूप को ग्रहण करता है। फिर वे निरंतर पल्लवित और पुष्पित होते हुए कृति के रूप को ग्रहण करते हैं।

Chhota Mera Khet Question Answer Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 5.
रोपाई क्षण की
कटाई अनंतता की
लुटते रहने से ज़रा भी नहीं कम होती।
उत्तर
प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘आरोह भाग-2’ में संकलित कवि ‘उमाशंकर जोशी’ द्वारा रचित ‘छोटा मेरा खेत’ कविता से ली गई हैं। इनमें कवि का भाव यह है कि कवि खेत रूपी कागज़ के पन्ने पर क्षण-भर में जो अभिव्यक्ति और रचना विचार का बीज बोता है उसकी रोपाई तो कवि क्षण भर में कर देता है जबकि उस कृति से प्राप्त रस की अमृत-धारा अनंत काल तक चलने वाली कटाई के समान होती है। एक श्रेष्ठ कृति या साहित्य से जो रस-धारा फूटती है वह अनंत काल तक कम नहीं होती। वह रस-धारा बार-बार लूटने से ज़रा-सी भी कम नहीं होती।

कविता के आस-पास

छोटा मेरा खेत कविता Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 1.
शब्दों के माध्यम से जब कवि दृश्यों, चित्रों, ध्वनि-योजना अथवा रूप-रस-गंध को हमारी ऐंद्रिक अनुभवों में साकार कर देता है तो बिंब का निर्माण होता है। इस आधार पर प्रस्तुत कविता से बिंब की खोज करें।
उत्तर :
आस्वाद बिंब – कल्पना के रसायनों को पी
बीज गया निःशेष;
शब्द के अंकुर फूटे,
पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।

ध्वनि बिंब – छोटा मेरा खेत चौकोना
कागज़ का एक पन्ना,
कोई अंधड़ कहीं से आया
क्षण का बीज वहाँ बोया गया।

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Chhota Mera Khet Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 2.
जहाँ उपमेय में उपमान का आरोप हो रूपक कहलाता है। कविता में से रूपक का चुनाव करें।
उत्तर :

  • पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष
  • कजरारे बादलों की छाई नम छाया
  • तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया।

कला की बात

छोटा मेरा खेत व्याख्या Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 1.
बगुलों के पंख कविता को पढ़ने पर आपके मन में कैसे चित्र उभरते हैं ? उनकी किसी भी अन्य कला के माध्यम में अभिव्यक्त करें।
उत्तर :
बगुलों के पंख कविता पढ़ने पर हमारे मन में अनेक सफेद और सुंदर पंखों वाले पक्षी विचरण करने लगते हैं। ये सभी सुंदर पक्षी पंक्तिबद्ध हैं। इनकी सुंदरता हमारे मन को अपनी ओर खींच लेती है। साथ ही आसमान में छाए बादल और उनके पल-पल बदलते रूप दृश्यमान हो जाते हैं।

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