CBSE Class 12

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 15 चार्ली चैप्लिन यानी हम सब

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चार्ली चैप्लिन यानी हम सब NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 15

चार्ली चैप्लिन यानी हम सब Questions and Answers Class 12 Hindi Aroh Chapter 15

पाठ के साथ

Charlie Chaplin Yani Hum Sab Question Answer Class 12 प्रश्न 1.
लेखक ने ऐसा क्यों कहा है कि अभी चैप्लिन पर करीब 50 वर्षों तक काफ़ी कुछ कहा जाएगा?
उत्तर :
‘अभी चैप्लिन पर करीब 50 वर्षों तक काफ़ी कुछ कहा जाएगा’-लेखक ने ऐसा इसलिए कहा है, क्योंकि आज भी चाली के प्रशंसक हैं और उनकी फ़िल्मों को देखते हैं। आम लोग चार्ली चैप्लिन की जन्म शताब्दी मना रहे हैं। समय, भूगोल और संस्कृतियों से खिलवाड़ करता हुआ चार्ली आज भी भारत के लाखों बच्चों को हँसा रहा है, जो उसे अपने बुढ़ापे तक याद रखेंगे। उनकी कला आज पूरी दुनिया के सामने है, जो 75 वर्षों में पाँच पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध कर चुकी है और आगे भी करती रहेगी। आज के बच्चे उनकी कला को अवश्य याद रखेंगे और बुढ़ापे तक उनकी कला व महानता की अवश्य चर्चा करेंगे।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 15 चार्ली चैप्लिन यानी हम सब

Charlie Chaplin Yani Hum Sab Ncert Solutions Class 12 प्रश्न 2.
चप्लिन ने न सिर्फ फ़िल्म कला को लोकतांत्रिक बनाया बल्कि दर्शकों की वर्ग तथा वर्ण-व्यवस्था को तोड़ा। इस पंक्ति में लोकतांत्रिक बनाने का और वर्ण-व्यवस्था तोड़ने का क्या अभिप्राय है? क्या आप इससे सहमत हैं?
अथवा
आपके विचार से चार्ली चैप्लिन की सर्वस्वीकार्य के क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर :
इस पंक्ति में फ़िल्म-कला को लोकतांत्रिक बनाने और वर्ण-व्यवस्था तोड़ने का अभिप्राय यह है कि चार्ली चैप्लिन की अभिनय कला संपूर्ण समाज में प्रसिद्ध हुई और उसने उच्च वर्ग से लेकर निम्न वर्ग तक के प्रत्येक व्यक्ति के मन पर गहरा असर डाला। उनकी फ़िल्मों को पागलखाने के मरीजों व व्याकुल मस्तिष्क वाले लोगों से लेकर आइन्स्टाइन जैसे महान प्रतिभासंपन्न व्यक्ति तक सूक्ष्मतम रसास्वादन के साथ देख सकते हैं।

किसी एक समान स्तर पर उनकी कला से समाज का प्रत्येक धर्म, जाति, अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा-सब आनंदविभोर होते हैं। हम इस बात से सहमत हैं कि चार्ली चैप्लिन ने अपनी फ़िल्म कला को न सिर्फ लोकतांत्रिक बनाया बल्कि दर्शकों की वर्ग तथा वर्ण-व्यवस्था को भी तोड़ा।

Class 12 Hindi Chapter 15 Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 3.
लेखक ने चाली का भारतीयकरण किसे कहा और क्यों? गांधी और नेहरू ने भी उनका सान्निध्य क्यों चाहा? (C.B.S.E. Delhi 2009,A.I.C.B.S.E. 2009, 2010 Set-I, 2011 Set-I, Outside Delhi 2017, Set-III)
उत्तर :
लेखक ने हिंदी फ़िल्म ‘आवारा’ को चार्ली का भारतीयकरण कहा। राजकपूर ने इस फ़िल्म में चार्ली के अभारतीय सौंदर्यशास्त्र की इतनी व्यापक स्वीकृति देखकर भारतीय फ़िल्मों का एक साहसिक प्रयोग किया। राजकपूर ने ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ फ़िल्मों के द्वारा ही भारतीय फ़िल्मी जगत में नायकों पर हँसने तथा स्वयं नायकों के अपने पर हँसने की परंपरा का सूत्रपात किया। चार्ली दुनिया के महान हास्य कलाकार थे। उन्होंने अपनी कला को लोकतांत्रिक बनाया तथा दर्शकों के वर्ग तथा वर्ण-व्यवस्था को तोड़ा। उन्होंने अपने आपको किसी एक विशेष संस्कृति का न मानकर पूरी दुनिया का कलाकार समझा। चाली का गांधी जी से विशेष अनुग्रह था। उनकी प्रतिभा और प्रेम को देखकर गांधी और नेहरू ने भी उनका सान्निध्य चाहा।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 15 चार्ली चैप्लिन यानी हम सब

चार्ली चैप्लिन यानी हम सब Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 4.
लेखक ने कलाकृति और रस के संदर्भ में किसे श्रेयस्कर माना है और क्यों? क्या आप कुछ ऐसे उदाहरण दे सकते हैं जहाँ कई रस साथ-साथ आए हों?
उत्तर :
लेखक ने कलाकृति में कुछ रसों का साथ-साथ पाया जाना श्रेयस्कर माना है, क्योंकि भारतीय कला और सौंदर्यशास्त्र में अनेक रस हैं। जीवन में हर्ष-विषाद आते-जाते रहते हैं। लेखक भी किसी कलाकृति में एक साथ अनेक रसों का प्रयोग करता है। जैसे-एक बार जब चार्ली बीमार थे, तब उनकी माँ ने उन्हें ईसा मसीह का जीवन बाइबल से पढ़कर सुनाया था। ईसा के सूली पर चढ़ने के प्रकरण तक आते-आते माँ और चार्ली दोनों रोने लगे थे।

चार्ली चैप्लिन यानी हम सब Question Answer Class 12 प्रश्न 5.
जीवन की जद्दोजहद ने चार्ली के व्यक्तित्व को कैसे संपन्न बनाया? (C.B.S.E. Sample Paper, 2008 Set-1) (C.B.S.E.Outside Delhi, 2013, Set-I, II, III, C.B.S.E. 2017 Set-1)
अथवा
चार्ली कौन था? उनके बचपन और पारिवारिक परिवेश पर प्रकाश डालिए। (C.B.S.E. 2012, Set-1)
अथवा
उन संघर्षों का उल्लेख कीजिए, जिनसे टकराते टकराते चार्ली चैप्लिन के व्यक्तित्व में निखार आता गया। (C.B.S.E. 2014, Set-I, II, III, Outside Delhi 2017, Set-1)
उत्तर :
चार्ली एक परित्यक्ता और दूसरे दरजे की स्टेज अभिनेत्री के बेटे थे। बाद में उनकी माँ पागल हो गई, जिससे वे निरंतर संघर्ष करते रहे। उनका जीवन भयानक गरीबी में व्यतीत हुआ लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी स्थिति को देखकर साम्राज्य, औद्योगिक क्रांति, पूँजीवाद तथा सामंतशाही से मगरूर समाज ने उन्हें निरंतर दुत्कारा। लेकिन चार्ली इन सब परिस्थितियों से संघर्ष करते रहे। इस प्रकार बचपन से ही जद्दोजहद करते हुए चार्ली ने अपना धैर्य एवं साहस नहीं छोड़ा। प्रतिकूल परिस्थितियों ने उन्हें अनेक जीवन-मूल्य प्रदान किए। ऐसे जीवन-मूल्य, जिन्हें एक करोड़पति होकर भी वे भूल न सके। इस प्रकार जीवन की जद्दोजहद ने चाली के व्यक्तित्व को संपन्न बनाया।

प्रश्न 6.
चाली चैप्लिन की फ़िल्मों में निहित त्रासदी/करुणा/हास्य का सामंजस्य भारतीय कला और सौंदर्यशास्त्र की परिधि में क्यों नहीं आता?
उत्तर :
चार्ली चैप्लिन की फ़िल्मों में त्रासदी, करुणा और हास्य का अनूठा सामंजस्य है। वे एक ऐसे महान कलाकार थे, जो अपनी प्रतिभा से त्रासदी और करुणा को भी हास्य में बदलने की शक्ति रखते थे। लेकिन त्रासदी, करुणा और हास्य का ऐसा मेल भारतीय कला और सौंदर्यशास्त्र की परिधि में नहीं आता, क्योंकि भारतीय परंपरा में ऐसे रस सिद्धांत नहीं हैं, जो करुणा को हास्य में बदल सकें। अपने ऊपर हँसने और दूसरों में वैसी ही शक्ति पैदा करने की प्रतिभा भारतीय विदूषक में कुछ कम ही नज़र आती है। हास्य कब करुणा में और करुणा कब हास्य में बदल जाएगी, इससे भारतीय जनता सैद्धांतिक रूप से अपरिचित है।

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प्रश्न 7.
चालीं सबसे ज्यादा स्वयं पर कब हँसता है? (A.I. C.B.S.E. 2011, Set-II)
उत्तर :
चार्ली सबसे ज्यादा स्वयं पर तब हँसता है, जब वह अपने आपको गर्व से उन्मत मानता है। वह आत्म-विश्वास से लबरेज हो जाता है। वह सफलता, सभ्यता, संस्कृति व समृद्धि की प्रतिमूर्ति बन स्वयं को दूसरों से ज्यादा शक्तिशाली तथा श्रेष्ठ समझने लगता है। वह स्वयं को वज्रादपि कठोराणि अथवा मृदूनि कुसुमादपि क्षण में दिखलाता है।

पाठ के आस-पास

प्रश्न 1.
आपके विचार से पृक और सवाक फ़िल्मों में से किसमें ज्यादा परिश्रम करने की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर :
हमारे विचार से मूक और सवाक् फ़िल्मों में से मूक फ़िल्मों में ज्यादा परिश्रम करने की आवश्यकता है, क्योंकि मूक फ़िल्मों में भाषा का प्रयोग नहीं होता, उनमें हाव-भाव के द्वारा दर्शकों को आपकी भावनाओं व परिस्थितियों से अवगत करवाया जाता है।

प्रश्न 2.
सामान्यत: व्यक्ति अपने ऊपर नहीं हँसते, दूसरों पर हँसते हैं। कक्षा में ऐसी घटनाओं का जिक्र कीजिए जब
(क) आप अपने ऊपर हँसे हों;
(ख) हास्य करुणा में या करुणा हास्य में बदल गई हो।
उत्तर :
(क) गर्मियों के दिन थे। मैं विज्ञान की कक्षा में था कि बिजली चली गई। कुछ ही देर में हम सब पसीने से नहा गए। अध्यापक कुछ समझा रहे थे। वे तब ब्लैक-बोर्ड का प्रयोग नहीं कर रहे थे। मैं चश्मा लगाता हूँ। गरमी के कारण बार-बार पसीना बह कर मेरे चश्मे के लैंस को गीला कर रहा था। मैंने उसे उतारा नहीं बल्कि माथे से ऊपर बालों पर सरका दिया। कुछ देर बाद अध्यापक महोदय ब्लैक बोर्ड पर लिखने लगे, जो मुझे दिखाई नहीं दे रहा था।

मैंने अपना चश्मा दाएँ-बाएँ ढूँढ़ा, पर वह नहीं मिला। मैंने सोचा कि शायद मेरे मित्र ने मजाक में उसे छिपा दिया है। मैंने उससे अपने चश्मे के बारे में पूछा, तो उसने बिना मेरी ओर देखे कह दिया कि मेरा चश्मा उसके पास नहीं है। अध्यापक महोदय ने हमारी फुसफुसाहट सुन ली और मुझसे बोलने का कारण पूछा। मैंने शिकायत भरे स्वर में कहा कि ‘सर! राकेश ने मेरा चश्मा छिपा दिया है। मुझे ब्लैक बोर्ड पर लिखा दिखाई नहीं दे रहा।’ उन्होंने मुसकराते हुए कहा-“तुम्हारा चश्मा तो तुम्हारे सिर पर है। जरा ऊपर देखो तो।” जैसे ही मैंने अपना चश्मा सिर से उतारकर आँखों पर लगाया, वैसे ही सारी कक्षा के बच्चे खिलखिलाकर हँस पड़े और मैं भी उनके साथ अपनी नादनी पर हँस पड़ा।
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(ख) हमारा कुत्ता रॉकी सारा दिन भाग-दौड़ करता है। पल भर भी टिककर नहीं बैठता। एक दिन पता नहीं उसे क्या सूझा कि वह आँगन में लगे पेड़ की नीची डालियों का सहारा लेकर ऊपर चढ़ने लगा। हम उसे दूर बैठे देखते रहे और हँसते रहे कि रॉकी भी आज भालू की तरह पेड़ पर चढ़ेगा। शायद उसे पेड़ पर चिड़िया का घोंसला दिखाई दे गया था। वह कुछ और ऊपर चढ़ गया और फिर फिसलकर धड़ाम से नीचे आ गिरा। गिरते समय टहनियों से उसे खरोंचें लगीं और एक टॉग पर गहरी चोट भी लगी। हमारी हँसी एकदम रुक गई। हमारा हास्य पलभर में करुणा में

प्रश्न 3.
चाली हमारी वास्तविकता है, जबकि सुपरमैन स्वप्न/आप इन दोनों में खुद को कहाँ पाते हैं?
उत्तर :
मानव जीवन हर्ष-विषाद का पिटारा है। मनुष्य प्राकृतिक रूप से दुख में दुखी होता है, तो सुख में बहुत आनंदित भी होता है। वह चार्ली की तरह अनेक प्रकार के प्रदर्शन कर अपनी खुशी को प्रदर्शित करता है, जबकि सुपरमैन एक स्वप्न की भाँति है। मैं स्वयं को इन दोनों के मध्य पाता हूँ।

प्रश्न 4.
भारतीय सिनेमा और विज्ञापनों ने चार्ली की छवि का किन-किन रूपों में उपयोग किया है? कुछ फ़िल्में (जैसे आवारा, श्री 420, मेरा नाम जोकर, मिस्टर इंडिया और विज्ञापनों (जैसे चैरी ब्लॉसम) को गौर से देखिए और कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर :
अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं कीजिए।

प्रश्न 5.
आजकल विवाह आदि उत्सव, समारोहों एवं रेस्तरां में आज भी चार्ली चैप्लिन का रूप धरे किसी व्यक्ति से आप अवश्य टकराए होंगे। सोचकर बताइए कि बाजार ने चार्ली चैप्लिन का कैसा उपयोग किया है?
उत्तर :
आजकल विवाह आदि उत्सवों, समारोहों और रेस्तरों में चार्ली चैप्लिन का रूप धरे किसी व्यक्ति का हँसाने वाले जोकर के रूप में उपयोग सामान्य-सा हो गया है। एक महान कलाकार का इस प्रकार सस्ता और भद्दा उपहास नहीं उड़ाना चाहिए। यह एक महान कलाकार का अपमान है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
…तो चेहरा चार्ली-चार्ली हो जाता है। वाक्य में चार्ली शब्द की पुनरुक्ति से किस प्रकार की अर्थ-छटा प्रकट होती है? इसी प्रकार के पुनरुक्त शब्दों का प्रयोग करते हुए कोई तीन वाक्य बनाइए। यह भी बताइए कि संज्ञा किन स्थितियों में विशेषण के रूप में प्रयुक्त होने लगती है?
उत्तर :
उपर्युक्त वाक्य में चार्ली शब्द की पुनरुक्ति से प्रसन्नता व आनंद के भाव की अर्थ-छटा प्रकट होती है।

  • दिल टोटे-टोटे हो गया।
  • दिल हाय-हाय कर उठा।
  • शिकार देखते ही शिकारी का मन बाग-बाग हो गया।

जब संज्ञा विशेषण के स्थान पर आकर किसी की विशेषता का बोध करवाती है, तो संज्ञा विशेषण के रूप में प्रयुक्त होने लगती है।

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प्रश्न 2.
नीचे दिए वाक्यांशों में हुए भाषा के विशिष्ट प्रयोगों को पाठ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
(क) सीमाओं से खिलवाड़ करना
(ख) समाज से दुरदुराया जाना
(ग) सुदूर रूमानी संभावना
(घ) सारी गरिमा सुई-चुभे गुब्बारे जैसी फुस्स हो उठेगी।
(ङ) जिसमें रोमांस हमेशा पंक्चर होते रहते हैं।
उत्तर :
(क) समय, भूगोल और संस्कृतियों की सीमाओं से खिलवाड़ करता हुआ चार्ली आज विश्वभर के लाखों बच्चों को हंसा

(ख) एक परित्यक्ता, दूसरे दर्जे की स्टेज अभिनेत्री का बेटा होना, बाद में भयावह गरीबी और माँ के पागलपन से संघर्ष करना, -साम्राज्य, औद्योगिक क्रांति, पूँजीवाद तथा सामंतवाद से मगरूर समाज से दुरदुराया जाना-इस सबसे चैप्लिन को वे जीवन-मूल्य मिले, जो करोड़पति होने के बावजूद अंत तक उनमें रहे।

(ग) अपनी नानी की ओर से चैप्लिन खानाबदोशों से जुड़े हए थे तथा यह एक सुदूरक रूमानी संभावना बनी हुई है कि शायद उस खानाबदोश औरत में भारतीयता रही हो, क्योंकि यूरोप में जिप्सी भारत से ही गए थे।

(घ) चाली अपने ऊपर ज्यादा तब हँसता है जब वह स्वयं को गर्वोन्मत, आत्मविश्वास से युक्त, सफलता, सभ्यता, संस्कृत तथा समृद्धि की प्रतिमूर्ति, दूसरों से शक्तिशाली तथा श्रेष्ठ, अपने वज्र से भी कठोर अथवा फूल से भी कोमल क्षण में दिखलाता है। तब ऐसा लगता है कि यह सारी गरिमा सुई-चुभे गुब्बारे जैसी फुस्स हो उठेगी।

(ङ) अपने जीवन के अधिकांश हिस्सों में हम चाली की तरह ही होते हैं जिसमें रोमांस हमेशा पंक्चर होते रहते हैं।

गौर करें

(क) दरअसल सिद्धांत कला को जन्म नहीं देते, कला स्वयं अपने सिद्धांत या तो लेकर आती है या बाद में उन्हें गढ़ना पड़ता है।
(ख) कला में बेहतर क्या है-बुद्धि को प्रेरित करने वाली भावना या भावना को उकसाने वाली बुद्धि?
(ग) दरअसल मनुष्य स्वयं ईश्वर या नियति का विदूषक, क्लाउन, जोकर या साइड किक है।
(घ) सत्ता, शक्ति, बुद्धिमत्ता, प्रेम और पैसे के चरमोत्कर्ष में जब हम आईना देखते हैं तो चेहरा चार्ली-चार्ली हो जाता है।
(ङ) मॉडर्न टाइम्स द ग्रेट डिक्टेटर आदि फ़िल्में दिखाई जाएं और फ़िल्मों में चार्ली की भूमिका पर चर्चा की जाए।

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NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 13 काले मेघा पानी दे

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काले मेघा पानी दे NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 13

काले मेघा पानी दे Questions and Answers Class 12 Hindi Aroh Chapter 13

पाठ के साथ

Kale Megha Pani De Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 1.
लोगों ने लड़कों की टोली को मेंढक-मंडली नाम किस आधार पर दिया? यह टोली अपने आपको इंदर सेना कहकर क्यों बुलाती थी?
उत्तर :
लड़के समूह में एकत्रित होकर नंगे शरीर उछलते-कूदते तथा अत्यधिक शोर-शराबा करते हुए गलियों में कीचड़ करते हुए घूमते थे। ये गलियों में इधर-उधर दौड़ा करते थे, इसी आधार पर लोगों ने लड़कों को मेंढक-मंडली नाम दे दिया था। यह टोली अपने आपको इंदर सेना इसलिए कहकर पुकारती थी क्योंकि यह अनावृष्टि से छुटकारा पाने हेतु लोक-आस्था के कारण इंद्र महाराज को खुश करने के लिए ऐसा कार्य करती थी। इनका मानना था कि उनके इसी कार्य से प्रसन्न होकर इंद्र देवता काले मेघों द्वारा वर्षा करेंगे जिससे गाँव, शहर, खेत-खलिहान खिल उठेंगे।

Kale Megha Pani De Class 12  प्रश्न 2.
जीजी ने इंदर सेना पर पानी फेंके जाने को किस तरह सही ठहराया? (AL.C.B.S.E. 2009, 2011 Set-I, II, C.B.S.E. Delhi 2008, 2009, 2017 Set-II)
उत्तर :
जीजी ने कहा कि यदि हम इंदर सेना पर पानी नहीं फेंकेंगे तो इंद्र भगवान हमें पानी कैसे देंगे? यह पानी की बर्बादी नहीं है बल्कि यह तो पानी का अर्घ्य है जिसे हम कुछ पानी की चाह लेकर चढ़ाते हैं। मनुष्य जिस वस्तु को दान में नहीं देगा तो फिर कैसे पाएगा? संसार में ऋषि-मुनियों ने दान को सर्वोत्तम बताया है। बिना त्याग दान नहीं होता। त्याग भावना से जो दान दिया जाता है उसी से फल की प्राप्ति होती है। जिस प्रकार किसान पहले अपने खेत में पाँच-छह सेर अच्छे गेहूँ की बुवाई करता है। तब उसे तीस-चालीस मन गेहूँ की पैदावार प्राप्त होती है।

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Kale Megha Pani De Class 12 Ncert Solutions प्रश्न 3.
‘पानी दे, गुडधानी दे’ मेघों से पानी के साथ-साथ गुड़धानी की माँग क्यों की जा रही है?
उत्तर :
अनावृष्टि के कारण चारों ओर सूखा छा जाता है। शहर की अपेक्षा गाँव की हालत खराब हो जाती है। कृषि योग्य भूमि सूखकर । पत्थर हो जाती है। जमीन फटने लगती है। लू के कारण पशु प्यासे मरने लगते हैं। मेघों से वर्षा होकर ही सूखी भूमि फिर से ही कृषि योग्य बन जाएंगे। फ़सलें लहलहाने लगेंगी। अनाज की पैदावार होगी तथा पशु भी प्यासे नहीं मरेंगे। दूध अच्छी प्रकार से देंगे जिनसे धन्य-धान्य की प्राप्ति होगी। चारों तरफ खुशहाली फैल जाएगी। सबको खाने-पीने को भरपूर सामग्री मिलेगी, इसीलिए मेघों के साथ-साथ गुड़धानी की मांग की जा रही है।

काले मेघा पानी दे प्रश्न उत्तर NCERT Solutions प्रश्न 4.
‘गगरी फूटी बैल पियासा’ इंद्र सेना के इस खेलगीत में बैलों के प्यासा रहने की बात क्यों मुखरित हुई है ?
उत्तर :
गगरी फूटी बैल पियासा इंदर सेना के इस खेलगीत में बैलों के प्यासा रहने की बात इसलिए मुखरित हुई है क्योंकि अनावृष्टि के कारण चारों तरफ सूखा पड़ जाता है। कुएँ, तालाब पानी से सूख जाते हैं। कहीं भी पानी का नामो-निशान नहीं रहता। पीने का पानी बिल्कुल नहीं रहता, जिससे पशु-पक्षी प्यास के कारण व्याकुल होकर मरने लगते हैं।

Kale Megha Pani De NCERT Solutions प्रश्न 5.
इंदर सेना सबसे पहले गंगा मैया की जय क्यों बोलती है? नदियों का भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश में क्या महत्व है ?
उत्तर :
इंदर सेना सबसे पहले ‘गंगा मैया की जय’ इसलिए बोलती है क्योंकि भारतीय समाज में गंगा को जीवनदायिनी माना जाता है। उसे एक माँ के समान पवित्र माना जाता है तथा उसकी पूजा की जाती है। मेघा भी गंगा से ही पानी लेकर बरसते हैं। नदियों का भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश में अनूठा महत्व है। भारतीय संस्कृति में नदियों को माँ की तरह पूजा जाता है। समाज में उन्हें पवित्र माना जाता है। उसके जल को पवित्र मानकर लोग अपने घरों में जल लाकर रखते हैं तथा प्रभु के श्री-चरणों में उसका अर्घ्य चढ़ाते हैं।

गंगा जैसी पावन नदी में लोग स्नान करके अपने को धन्य समझते हैं और ऐसा मानते हैं कि जो कोई भी गंगा नदी में स्नान कर लेता है उसके जीवन के सब पाप मिट जाते हैं। इसी प्रकार सभी नदियों के जल को पावन माना जाता है। नदियों के पवित्र जल में स्नान करने हेतु समय-समय पर उनके किनारों पर मेलों का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु दूर-दूर से इनकी पूजा-अर्चना करके स्नान करते हैं।

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Kale Megha Pani De Class 12 Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 6.
रिश्तों में हमारी भावना-शक्ति का बँट जाना विश्वासों के जंगल में सत्य की राह खोजती हमारी बुद्धि की शक्ति को कमज़ोर करती है। पाठ में जीजी के प्रति लेखक की भावना के संदर्भ में इस कथन के औचित्य की समीक्षा कीजिए।
उत्तर :
रिश्तों में जब हमारी भावना-शक्ति बँट जाती है तो वह विश्वासों के जंगल में सत्य की राह खोजती हमारी बुद्धि की शक्ति को कमजोर करती है। प्रस्तुत पाठ में जीजी लेखक को अपने बच्चों से अधिक प्यार करती थी। लेकिन इंद्र सेना पर जीजी द्वारा कहे जाने पर लेखक पानी नहीं फेंकता तो जीजी के मन पर बहुत ठेस लगती है। जीजी के बार-बार समझाने पर भी लेखक इस कार्य को अंध-विश्वास ही कहता है और बार-बार जीजी की भावना को कुचलने का प्रयास करता है।

यहाँ तक कि जीजी द्वारा किए गए तों जैसे त्याग में ही दान का फल निहित है; दान को ऋषि-मुनियों ने सर्वोत्तम माना है। पानी का अर्घ्य चढ़ाने पर इंद्र महाराज हमें बादलों से वर्षा देते हैं; आदि बताने पर भी नहीं मानता। बार-बार जीजी की भावनाओं को आहत कर उनके तर्कों को नकारता हुआ अंधविश्वास और ढकोसला कहता रहता है। अत: यह सत्य है कि जब रिश्तों में हमारी भावना-शक्ति बँट जाती है तो बुद्धि की शक्ति क्षीण हो जाती है।

पाठ के आस-पास

Kale Megha Pani De Ncert Solutions प्रश्न 1.
क्या इंदर सेना आज के युवा वर्ग का प्रेरणास्त्रोत हो सकती है? क्या आपके स्मृतिकोश में ऐसा कोई अनुभव है जब युवाओं ने संगठित होकर समाजोपयोगी रचनात्मक कार्य किया हो, उल्लेख करें।
उत्तर :
हाँ, इंदर सेना आज के युवा वर्ग की प्रेरणास्रोत हो सकती है। मेरे गाँव में युवाओं ने संगठित होकर भ्रूण-हत्या तथा नशा विरोधी कार्य किए हैं। युवाओं ने मिलकर गाँव में अशिक्षित महिलाओं और पुरुषों को जागृत किया कि लड़का-लड़की एक समान हैं। समाज में लड़कियाँ लड़कों से बढ़कर कार्य करती हैं। उन्हें कल्पना चावला, ऐश्वर्य राय, सानिया मिर्जा आदि सर्वश्रेष्ठ महिलाओं के उदाहरण देकर उन्होंने बताया कि ये भी लड़कियाँ हैं जिन्होंने समाज में अपने परिवार का नाम रोशन किया है। इसके साथ उन युवाओं ने गाँववालों को नशे से होने वाली हानियाँ बताकर उनको सचेत किया। उन्होंने बताया कि नशे से धन का नाश होता ही है साथ ही स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। पारिवारिक क्लेश बढ़ते हैं। इस प्रकार इन युवाओं ने सम्मिलित होकर ये अद्भुत समाजोपयोगी रचनात्मक कार्य किया।

Kaale Megha Paani De Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 2.
तकनीकी विकास के दौर में भी भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है। कृषि समाज में चैत्र, वैशाख सभी माह बहुत महत्वपूर्ण हैं पर आषाढ़ का चढ़ना उनमें उल्लास क्यों भर देता है ?
उत्तर :
भारत एक कृषि-प्रधान देश है। यहाँ की अर्थव्यवस्था अधिकांशतः कृषि पर निर्भर करती है। तकनीकी क्षेत्र में भी भारत ने बहुत उन्नति की है लेकिन तकनीकी उन्नति के साथ ही भारत के विकास में आज भी कृषि का अहम योगदान है। कृषि समाज में चैत्र, वैशाख सभी महीने महत्त्वपूर्ण हैं लेकिन आषाढ़ मास का चढ़ना उनमें उल्लास इसलिए भर देता है क्योंकि आषाढ़ मास में वर्षा शुरू होती है और सूखी धरती खेती के योग्य हो जाती है। खेतों में धान, मक्के आदि खरीफ की फसल बोई जाती है, जिससे कृषि समाज में चहुँ ओर उल्लास और उमंग का वातावरण छा जाता है।

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Class 12 Hindi Chapter 13 Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 3.
पाठ के संदर्भ में इसी पस्तक में दी गई निराला की कविता ‘बादल-राग’ पर विचार कीजिए और बताइए कि आपके जीवन में बादलों की क्या भूमिका है ?
उत्तर :
‘बादल-राग’ कविता में निराला जी ने बादलों का एक क्रांति के रूप में आह्वान किया है। बादलों को क्रांति का प्रतीक मानकर उनसे जनसामान्य का उद्धार करने का आग्रह किया है। कवि कहता है कि अस्थिर सुखों पर दुःखों की छाया के समान हे बादल! तू सागर पर मँडराता रहता है। तेरे अंदर जनसामान्य की असंख्य इच्छाएँ भरी हुई हैं। पृथ्वी के गर्भ में सोए हुए अंकुर के समान जनसामान्य वर्ग के लोग तेरी ओर नव जीवन की आशा लेकर बार-बार देख रहे हैं। हे बादल! तू बार-बार गर्जना करके बरसता है।

तेरी वज्ररूपी हुंकार सुनकर पूँजीपति वर्ग भयभीत होकर घायल हो जाता है लेकिन छोटे-छोटे पौधे के प्रतीक निर्धन वर्ग के लोग तुझे देखकर खुश हो जाते हैं। बादलों की गर्जना सुनकर पूँजीपति वर्ग के लोग भवनों में तथा अपनी प्रेमिकाओं की गोद में रहकर भी काँपते रहते हैं। उन्होंने डरकर अपने मुख और आँखें बंद कर ली हैं। कवि ने बादलों को जीर्ण-शीर्ण निर्धन वर्ग को जीवन प्रदान करने वाला माना है। हमारे जीवन में बादलों की अहम भूमिका है। यह सत्य है कि जल ही जीवन है।

मानव भोजन बिना कुछ पल बिता सकता है लेकिन पानी बिना वह अधीर हो उठता है। बादलों से ही हमारी कृषि उत्पादन निर्भर है जिससे हमें धन और अनाज मिलता है। ये पेड़-पौधे, कुएँ, तालाब, नदियाँ आदि बादलों से ही सिंचित होती हैं जिनसे हमारा पल-पल का साथ है।

Class 12 Hindi Kale Megha Pani De Question Answer प्रश्न 4.
त्याग तो वह होता है…….उसी का फल मिलता है। अपने जीवन के किसी प्रसंग से इस सूक्ति की सार्थकता समझाइए।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

काले मेघा पानी दे’ पाठ के प्रश्न उत्तर NCERT Solutions प्रश्न 5.
पानी का संकट वर्तमान स्थिति में भी बहुत गहराया हुआ है। इसी तरह के पर्यावरण से संबद्ध अन्य संकटों के बारे में लिखिए।
उत्तर :
पानी का संकट वर्तमान स्थिति में सबसे बड़ा संकट है। पानी की निरंतर होती कमी के कारण पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसकी कमी से निम्नलिखित संकट हमारे समक्ष आ सकते हैं |

  • पानी की कमी से पेड़-पौधे सूख जाएँगे।
  • यदि पेड़-पौधे ही न होंगे फिर वर्षा कहाँ से आएगी?
  • कृषि योग्य भूमि बंजर बन जाएगी।
  • पृथ्वी का संतुलन बिगड़ जाएगा।
  • पशु-पक्षी, मानव प्यास के कारण अधीर हो जाएंगे।
  • वर्षा अंतत: पृथ्वी पर जीवन नष्ट हो जाएगा।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 13 काले मेघा पानी दे

Class 12 Hindi Chapter Kale Megha Pani De Ncert Solutions प्रश्न 6.
आपकी दादी-नानी किस तरह के विश्वासों की बात करती हैं? ऐसी स्थिति में उनके प्रति आपका रवैया क्या होता है? लिखिए।
उत्तर :
हमारी दादी-नानी लोक विश्वासों की बात करती हैं। जैसे छींक मारने के बाद तुरंत किसी गंतव्य पर प्रस्थान नहीं करना चाहिए। यदि कहीं जाते हुए रास्ते में बिल्ली रास्ता काट दे तो आगे नहीं बढ़ना चाहिए। दाईं या बाईं आँख फड़कती है तो अनिष्ट का ख़तरा बढ़ जाता है आदि-आदि। ऐसी स्थिति में हमारा उनके प्रति बाह्य रूप से तो सद्भावना और श्रद्धापूर्ण विश्वास होता है लेकिन आंतरिक रूप से खंडनात्मक होता है।

वे पुराने विचारों से ओत-प्रोत होती हैं, इसलिए ऐसी बातों पर उनका विश्वास ज्यादा होता है। दूसरा उनमें शिक्षा का अभाव होता है। यह सबसे बड़ा कारण है कि वे ऐसे विश्वासों की बात करती हैं। हम उनको चाहकर भी नहीं अपनाते। उनके कहने पर हम हाँ तो कर देते हैं लेकिन रास्तों में चलते समय हम इन्हें फिजूल बातें समझकर भूल जाते हैं और यदि रास्ते में ऐसा हो भी जाए तो उस पर ध्यान भी नहीं देते।

चर्चा करें

1. बादलों से संबंधित अपने-अपने क्षेत्र में प्रचलित गीतों का संकलन करें तथा कक्षा में चर्चा करें।
2. पिछले 15-20 सालों में पर्यावरण से छेड़-छाड़ के कारण भी प्रकृति-चक्र में बदलाव आया है, जिसका परिणाम मौसम का असंतुलन है। वर्तमान बाड़मेर (राजस्थान) में आई बाढ़, मुंबई की बाढ़ तथा महाराष्ट्र का भूकंप या फिर सूनामी भी इसी का नतीजा है। इस प्रकार की घटनाओं से जुड़ी सूचनाओं, चित्रों का संकलन कीजिए और एक प्रदर्शनी का आयोजन कीजिए. जिसमें बाजार दर्शन पाठ में बनाए गए विज्ञापनों को भी शामिल कर सकते हैं। और हाँ, ऐसी स्थितियों से बचाव के उपाय पर पर्यावरण विशेषज्ञों की राय को प्रदर्शनी में मुख्य स्थान देना न भूलें।
उत्तर
विद्यार्थी अपने कक्षा अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

विज्ञापन की दुनिया

काले मेघा पानी दे प्रश्न उत्तर Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 1.
‘पानी बचाओ’ से जुड़े विज्ञापनों को एकत्र कीजिए। इस संकट के प्रति चेतावनी बरतने के लिए आप किस प्रकार का विज्ञापन बनाना चाहेंगे ?
उत्तर
विद्यार्थी स्वयं करें।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 13 काले मेघा पानी दे

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NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 12 बाज़ार दर्शन

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बाज़ार दर्शन NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 12

बाज़ार दर्शन Questions and Answers Class 12 Hindi Aroh Chapter 12

पाठ के साथ

Bazar Darshan Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 1.
बाजार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या-क्या असर पड़ता है ? (C.B.S.E. Delhi 2009, 2011, Set-I, A.I.C.B.S.E. 2012, Set-1)
उत्तर :
बाजार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर निम्नलिखित असर पड़ता है
(i) बाजार का जादू चढ़ने पर मनुष्य उसकी ओर उसी प्रकार से खिंचा चला जाता है जिस प्रकार चुंबक लोहे की ओर खिंचा को चला जाता है।
(ii) ऐसी अनेक वस्तुओं का निमंत्रण जिन्हें मनुष्य खरीदने हेतु लालायित हो उठता है उस तक अपने-आप पहुँच जाता है।
(iii) मनुष्य को सभी सामान ज़रूरी और आरामदायक प्रतीत होता है।
(iv) मनुष्य को जिस वस्तु की आवश्यकता भी न हो उसे भी वह खरीदने पर मजबूर हो जाता है।
(v) बाजार का जादू उतरने पर मनुष्य को आभास होता है कि जो आरामदायक फैंसी वस्तुएँ उसने खरीदी थीं वे सब आराम देने की अपेक्षा उसे दुख पहुँचाती हैं।
(vi) वस्तुओं की उपयोगिता का पता चलने पर मनुष्य के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है।
(vii) बहुतायत वस्तुएँ खरीदने पर मनुष्य स्वयं को अपराधी महसूस करने लगता है।

 NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 12 बाज़ार दर्शन

बाजार दर्शन पाठ के प्रश्न उत्तर NCERT Solutions Class 12 प्रश्न 2.
बाज़ार में भगत जी के व्यक्तित्व का कौन-सा सशक्त पहलू उभरकर आता है ? क्या आपकी नज़र में उनका आचरण समाज में शांति स्थापित करने में मददगार हो सकता है ?
अथवा
भूमंडलीकरण के इस दौर में भगत जी जैसे लोग क्या प्रेरणा देते हैं? (A.I. C.B.S.E. 2016, Set-II)
उत्तर
बाजार में भगत जी का स्वाभिमानी, निश्चेष्ट, आत्मसंयमी, मितव्ययी, दृढ़ निश्चयी आदि विशेषताओं से परिपूर्ण व्यक्तित्व उभरकर सामने आता है। भगत जी एक स्वाभिमानी और निश्चेष्ट प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं जिन्हें बाजार का आकर्षण, सौंदर्य, चहल-पहल, बड़ी-बड़ी दुकानें अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकती और न ही उसके स्वाभिमान को डिगा सकती हैं। वे आत्मसंयमी और मितव्ययी पुरुष हैं। धन की कमी न होने के कारण भी वे बाजार में फिजूलखर्ची पर विश्वास नहीं करते।

केवल उतनी ही वस्तुएँ खरीदते हैं जितनी उनकी आवश्यकता है और वे भी केवल अच्छे मूल्य में खरीदते हैं। बाजारू आकर्षण में फंसकर धन को नहीं लुटाते। हाँ हमारी नज़र में उनका आचरण समाज में शांति स्थापित करने में मददगार हो सकता है। जिस प्रकार शांत, निश्चेष्ट, संयमी भगत जी का आचरण है और जैसे वह बाजार के आकर्षण और सौंदर्य को देखकर उससे ज़रा-सा भी मोहित नहीं होता इसी प्रकार यदि आज के उपभोक्तावाद और बाजारवाद के समाज में यदि प्रत्येक मनुष्य स्वाभिमान, संयम, मितव्यय और दृढ़ निश्चय से अपनी आवश्यकता के अनुसार वस्तुएँ खरीदें।

बाज़ार के आकर्षण और सौंदर्य में फँसकर अनुपयोगी वस्तुओं को न लें तो वास्तव में उसका मन अशांत नहीं होगा। वह अपने मन में बेकार की इच्छाओं को वश में करके यदि फ़िजूलखर्ची पर काबू पा लेगा तो उसका जीवन भी शांत, स्वाभिमानी, मितव्ययी बन जाएगा। यदि समाज का प्रत्येक मनुष्य ऐसा करे तो निश्चय ही समाज में शांति स्थापित होगी।

Bazar Darshan Class 12 Question Answer प्रश्न 3.
‘बाजारूपन’ से क्या तात्पर्य है ? किस प्रकार के व्यक्ति बाजार को सार्थकता प्रदान करते हैं अथवा बाजार की सार्थकता : किसमें है ? (Delhi C.R.S.E. 2016, A.I.C.B.S.E. 2011, Set-III, Outside Delhi 2017, Set-III)
उत्तर :
‘बाजारूपन’ से तात्पर्य कपट बढ़ाने से है अर्थात सद्भाव की कमी। सद्भाव की कमी के कारण आदमी परस्पर भाई, मित्र और पड़ोसी आदि को भूल जाता है। मनुष्य केवल सबके साथ कोरे ग्राहक जैसा व्यवहार करता है। उसे कोई भाई, मित्र या पड़ोसी दिखाई नहीं देता है। बाजारूपन के कारण मनुष्य को केवल अपना लाभ-हानि ही दिखाई देता है। इस भावना से शोषण भी होने लगता है। जो व्यक्ति ये जानते हैं कि वे क्या चाहते हैं उन्हें किस वस्तु की आवश्यकता है ऐसे व्यक्ति ही बाजार को सार्थकता प्रदान कर सकते हैं। ये लोग कभी भी ‘पर्चेजिंग पावर’ के गर्व में नहीं डूबते। इन्हीं लोगों को अपनी चाहत का अहसास होता है जिसके आधार पर बाजार को सार्थकता प्राप्त होती है।

 NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 12 बाज़ार दर्शन

Bajar Darshan Question Answer NCERT Solutions  प्रश्न 4.
बाज़ार किसी का लिंग, जाति, धर्म या क्षेत्र नहीं देखता; वह देखता है सिर्फ उसकी क्रय-शक्ति को। इस रूप में वह एक प्रकार से सामाजिक समता की भी रचना कर रहा है। आप इससे कहाँ तक सहमत हैं ?
उत्तर
हाँ, हम इस बात से सहमत हैं कि बाजार किसी का लिंग, जाति-धर्म या क्षेत्र नहीं देखता, बल्कि वह सिर्फ ग्राहक की क्रय-शक्ति को देखता है। बाजार एक ऐसा स्थल है जहाँ पर हर जाति, लिंग, धर्म का व्यक्ति जाता है। वहाँ किसी को भी धर्म-जाति के आधार पर नहीं पहचाना जाता बल्कि प्रत्येक निम्न, उच्च, अमीर-गरीब की पहचान वहाँ एक ग्राहक के रूप में होती है। इस दृष्टि से इस स्थल पर पहुँचकर प्रत्येक धर्म, जाति, मजहब का मनुष्य केवल ग्राहक कहलाता है।

बाजार की दृष्टि में यहाँ सब उसके ग्राहक होते हैं और वह ग्राहक का कभी धर्म, जाति या मज़हब देखकर व्यवहार नहीं करता बल्कि वह तो सिर्फ ग्राहक की क्रय-शक्ति देखकर ही उसके साथ व्यवहार करता है। यानी जो मनुष्य जितनी क्रय-शक्ति रखता है बाजार उसे उतना ही महत्व देता है, उतना ही सम्मान देता है। इस प्रकार बाजार एक प्रकार से सामाजिक समता की रचना कर रहा है। जहाँ प्रत्येक धर्म, जाति, मजहब, अमीर-गरीब, निम्न-उच्च पहुँचकर केवल ग्राहक कहलाता है।

Bajar Darshan NCERT Solutions Class 12 प्रश्न 5.
आप अपने तथा समाज से कुछ ऐसे प्रसंगों का उल्लेख करें
(क) जब पैसा शक्ति के परिचायक के रूप में प्रतीत हुआ।
(ख) पैसे की शक्ति काम नहीं आई।
उत्तर :
(क) समकालीन समाज में ऐसे अनेक प्रसंग हैं जहाँ हम पैसे को शक्ति का परिचायक बनता हुआ देखते हैं। आज समाज के प्रत्येक सरकारी या निजी कार्यालयों में जहाँ भी देखिए पैसे के बल पर कोई भी काम करवा लीजिए। भ्रष्टाचार, आतंकवाद पैसे की शक्ति के सर्वोत्तम उदाहरण हैं। पैसे देकर किसी भी बड़े-छोटे अधिकारी से कोई भी काम निकलवा लीजिए। कोर्ट में सजा प्राप्त कैदी को पैसे देकर छुड़वा लिया जाता है और बेकसूर इनसान को फाँसी पर चढ़ा दिया जाता है। पैसे के बल पर आतंकवादी किसी भी देश पर हमला कर देते हैं। अमेरिका पर हमला हो, चाहे भारतीय संसद पर हमला या कश्मीर में सदियों से चले आ रहे हमले सब पैसे की शक्ति के परिचायक हैं। संभवतः वर्तमानकाल में पैसा कोई भी कार्य करवा सकता है।

(ख) प्रायः देखा जाता है कि किसी मनुष्य के पास धन-दौलत, ऐश्वर्य की कोई कमी नहीं होती। उसके पास गाड़ी, बंगला आदि सभी सुविधाएँ होती हैं लेकिन वह शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं होता। उसे अनेक बीमारियाँ आ घेरती हैं। उसका पल-पल जीना दूभर लगता है। उसे एक-एक पल एक-एक युग के समान प्रतीत होता है। ऐसी दशा में उसके चारों

पाठ के आस-पास

Bajar Darshan Class 12 Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 1.
बाजार दर्शन पाठ में बाजार जाने या न जाने के संदर्भ में मन की कई स्थितियों का ज़िक्र आया है, आप इन स्थितियों से जुड़े अपने अनुभवों का वर्णन कीजिए।
(क) मन खाली हो
(ख) मन खाली न हो
(ग) मन बंद हो
(घ) मन में नकार हो
उत्तर :
(क) बाज़ार जाते समय जब हमारा मन खाली हो अर्थात हमारे मन में कोई इच्छा न हो। जब हम बाजार जाते हैं तो यदि हमारे मन में कोई सामान खरीदने की इच्छा ही नहीं है तो हमारे बाज़ार जाने का कोई औचित्य नहीं है। यदि ऐसी स्थिति में हम बाज़ार जाते हैं तो बाज़ार के आकर्षण में फँसना स्वाभाविक है।

(ख) मन खाली न हो अर्थात बाज़ार जाते समय हमारे मन में पहले से ही सामान खरीदने हेतु इच्छाएँ होनी चाहिए क्योंकि यदि हमारे मन में पहले से ही सामान की सूची होती है तो हम केवल आवश्यकतानुसार सामान ही खरीदते हैं फ़िजूल सामान खरीदकर नहीं लाते।

(ग) यदि हमारा मन बंद होगा तो हम शून्य बन जाएँगे और जबकि शून्य केवल परमात्मा है। वह संपूर्ण है बाकि सब अपूर्ण है। इसीलिए मन बंद नहीं रह सकता।

(घ) जब हम बाजार जाते हैं तो हमें बाज़ार चारों तरफ से सुंदर, सुसज्जित एवं आकर्षक प्रतीत होता है। वह हमें अपने आकर्षण में . फँसा लेना चाहता है लेकिन यदि हमारे मन में नकार का भाव हो तो बाज़ार चाहकर भी हमें अपने आकर्षण में फँसा नहीं सकता।

 NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 12 बाज़ार दर्शन

Class 12 Hindi Bazar Darshan Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 2.
बाजार दर्शन पाठ में किस प्रकार के ग्राहकों की बात हुई है ? आप स्वयं को किस श्रेणी का ग्राहक मानते मानती हैं ?
उत्तर :
बाजार दर्शन पाठ में लेखक ने कई प्रकार के ग्राहकों का चित्रण किया है
(i) ऐसे ग्राहक जिनका मन खाली होता है।
(ii) वे ग्राहक जिनका मन भरा होता है।
(iii) वे ग्राहक जो यह जानते हैं कि उन्हें क्या चाहिए।
(iv) ऐसे ग्राहक जो नहीं जानते कि उन्हें क्या चाहिए।
(v) ऐसे ग्राहक जिनपर बाजार के आकर्षण और सौंदर्य का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
(vi) मितव्ययी और संयमी ग्राहक।
(vii) अपव्ययी और असंयमी ग्राहक।
(viii) वे ग्राहक जो एक-दो वस्तु खरीदने हेतु बाजार जाते हैं लेकिन जब लौटकर आते हैं तो अनेक बंडल साथ लेकर आते मैं स्वयं को मितव्ययी और संयमी ग्राहक मानता हूँ, जो बाजार की शान-ओ-शौकत से प्रभावित न होकर आवश्यकतानुरूप खरीददारी करता हूँ। फिजूल सामान कभी नहीं लेता जिससे बाद में पछताना पड़े।

Bazar Darshan Class 12 Ncert Solutions NCERT Solutions प्रश्न 3.
आप बाजार की भिन्न-भिन्न प्रकार की संस्कृति से अवश्य परिचित होंगे। मॉल की संस्कृति और सामान्य बाजार और हाट की संस्कृति में आप क्या अंतर पाते हैं ? पर्चेजिंग पावर आपको किस तरह के बाजार में नज़र आती है ?
उत्तर :
(i) मॉल की संस्कृति अर्थात जहाँ मनुष्य को प्रत्येक सामान एक ही स्थल पर एक ही छत के नीचे प्राप्त हो जाए। इस स्थल पर जीवन में प्रयुक्त प्रत्येक वस्तु उपलब्ध होती है।

(ii) सामान्य बाजार अर्थात जहाँ मनुष्य की सामान्य व्यवहार में प्रयोग की जानेवाली वस्तुएँ प्राप्त हो जाती हों। इस बाज़ार में अधिक आकर्षण और शान-ओ-शौकत का ध्यान रखा जाता है ताकि ग्राहकों को अपने आकर्षण में फंसाया जाए। मनुष्य न चाहते हुए भी आकर्षित हो जाए।

(iii) हाट की संस्कृति से अभिप्राय किसी दुकान विशेष से है। जहाँ पर ग्राहक की इच्छा-पूर्ति का भरपूर खयाल होता है। प्रत्येक दुकानदार ग्राहक को अपना बनाना चाहता है। इसलिए वह वस्तुओं के मूल्य में ग्राहक की इच्छा का भी खयाल रखता है। हमारे विचार से पर्चेजिंग पावर सामान्य बाजार में नजर आती है।

Class 12 Hindi Chapter 12 Question Answer NCERT Solutions  प्रश्न 4.
लेखक ने पाठ में संकेत किया है कि कभी-कभी बाज़ार में आवश्यकता ही शोषण का रूप धारण कर लेती है। क्या आप इस विचार से सहमत हैं ? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर :
हाँ, हम इस विचार से सहमत हैं कि कभी-कभी बाजार में आवश्यकता ही शोषण का रूप धारण कर लेती है। सामान्यतः देखा जाता है कि जब मनुष्य को किसी वस्तु की अधिक आवश्यकता होती है तो वह बाजार में जाकर उस वस्तु को पाना चाहता है। बाजार में दुकानदार विक्रेता ग्राहक की मानसिकता को पढ़ लेता है, यदि उसे किसी मनुष्य की अत्यधिक आवश्यकता का आभास हो जाए तो वह उस वस्तु के दाम बढ़ा-चढ़ाकर बोलता है। ग्राहक को भी उस वस्तु की अत्यधिक आवश्यकता होती है। इसलिए वह भी उसी विक्रेता के मनचाहे मूल्य में उस वस्तु को खरीद लेता है। इस प्रकार कभी-कभी बाजार में मनुष्य की आवश्यकता भी शोषण का रूप धारण कर लेती है।

बाजार दर्शन पाठ कक्षा 12 Pdf NCERT Solutions प्रश्न 5.
‘स्त्री माया न जोड़े’ यहाँ ‘माया’ शब्द किस ओर संकेत कर रहा है ? क्या स्त्रियों द्वारा माया जोड़ना प्रकृति प्रदत्त है
अथवा
परिस्थिति वश ? वे कौन-सी परिस्थितियाँ होंगी जो स्त्री को माया जोड़ने के लिए विवश कर देती हैं ?
उत्तर :
यहाँ ‘माया’ शब्द धन, पैसा, दौलत की ओर संकेत कर रहा है। स्त्रियों द्वारा माया अर्थात संपत्ति जोड़ना प्रकृति प्रदत्त है। नारी प्रकृतिवश अपनी संपत्ति को जोड़कर रखना चाहती है। जब स्त्री का पति मृत्यु को प्राप्त हो जाए, उसे अपनी संतान के भविष्य की चिंता होने लगे, उनकी शिक्षा और शादी आदि की बातें उसे सताने लगें, स्त्री को अपने पति का कर्ज चुकाना हो, कर्जदार कर्ज वसूली हेतु स्त्री को बार-बार कहता हो, वह अपने जीवन में तरक्की कर नाम कमाना चाहती हो या किसी से प्रतिस्पर्धा रखती हो। उसे अपनी गरिमा व अस्मिता का खयाल आकर सताने लगे आदि परिस्थितियाँ किसी भी स्त्री को माया जोड़ने के लिए विवश कर देंगी।

आपसदारी

Bazar Darshan Question Answer NCERT Solutions Class 12 प्रश्न 1.
ज़रूरत-भर जीरा वहाँ से ले लिया कि फिर सारा चौक उनके लिए आसानी से नहीं के बराबर हो जाता है–भगत जी की इस संतुष्ट निस्पृहता की कबीर की इस सूक्ति से तुलना कीजिए
चाह गई चिंता गई मनुआँ बेपरवाह
जाको कछु न चाहिए सोइ सहंसाह। -कबीर

2. विजयदान देथा की कहानी ‘दुविधा’ (जिसपर ‘पहेली’ फ़िल्म बनी है) के अंश को पढ़कर आप देखेंगे कि भगत जी की संतुष्ट जीवन-दृष्टि की तरह ही गड़ेरिए की जीवन-दृष्टि है। इससे आपके भीतर क्या भाव जगते हैं ? “गड़रिया बगैर कहे ही उसके दिल की बात समझ गया, पर अंगूठी कबूल नहीं की। काली दाढ़ी के बीच पीले दाँतों की हँसी हँसते हुए बोला, ‘मैं कोई राजा नहीं हूँ जो न्याय की कीमत वसूल करूँ। मैंने तो अटका काम निकाल दिया और यह अंगूठी मेरे किस काम की! न ये अँगुलियों में आती है, न तड़े में। मेरी भेड़ें भी मेरी तरह गँवार हैं। घास तो खाती हैं, पर सोना सूंघती तक नहीं। बेकार की वस्तुएँ तुम अमीरों को ही शोभा देती हैं।’ -विजयदान देथा

 NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 12 बाज़ार दर्शन

3. बाज़ार पर आधारित लेख नकली सामान पर नकेल ज़रूरी का अंश पढ़िए और नीचे दिए गए बिंदुओं पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
(क) नकली सामान के खिलाफ जागरूकता के लिए आप क्या कर सकते हैं?
(ख) उपभोक्ताओं के हित को मद्देनजर रखते हुए सामान बनानेवाली कंपनियों का क्या नैतिक दायित्व है?
(ग) ब्रांडेड वस्तु को खरीदने के पीछे छिपी मानसिकता को उजागर कीजिए।

नकली सामान पर नकेल ज़रूरी

अपना क्रेता वर्ग बढ़ाने की होड़ में एफएमसीजी यानी तेजी से बिकनेवाले उपभोक्ता उत्पाद बनानेवाली कंपनियाँ गाँव के बाजारों में नकली सामान भी उतार रही हैं। कई उत्पाद ऐसे होते हैं जिनपर न तो निर्माण तिथि होती है और न ही उस तारीख का जिक्र होता है जिससे पता चले कि अमुक सामान के इस्तेमाल की अवधि समाप्त हो चुकी है। आउटडेटेड या पुराना पड़ चुका सामान भी गाँव-देहात के बाजारों में खप रहा है। ऐसा उपभोक्ता मामलों के जानकारों का मानना है। नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन के सदस्य की मानें तो जागरूकता अभियान में तेजी लाए बगैर इस गोरखधंधे पर लगाम कसना नामुमकिन है।

उपभोक्ता मामलों की जानकार पुष्पा गिरि माँ जी का कहना है, ‘इसमें दो राय नहीं कि गाँव-देहात के बाजारों में नकली सामान बिक रहा है। महानगरीय उपभोक्ताओं को अपने शिकंजे में कसकर बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, खासकर ज्यादा उत्पाद बेचनेवाली कंपनियाँ, गाँव का रुख कर चुकी हैं। वे गाँववालों के अज्ञान और उनके बीच जागरूकता के अभाव का पूरा फ़ायदा उठा रही हैं। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कानून ज़रूर हैं लेकिन कितने लोग इनका सहारा लेते हैं यह बताने की जरूरत नहीं।

गुणवत्ता के मामले में जब शहरी उपभोक्ता ही उतने सचेत नहीं हो पाए हैं तो गाँववालों से कितनी उम्मीद की जा सकती है।’ इस बारे में नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन के सदस्य जस्टिस एस०एन० कपूर का कहना है, ‘टी०वी० ने दूर-दराज के गाँवों तक में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को पहुंचा दिया है। बड़ी-बड़ी कंपनियाँ विज्ञापन पर तो बेतहाशा पैसा खर्च करती हैं लेकिन उपभोक्ताओं में जागरूकता को लेकर वे चवन्नी खर्च करने को तैयार नहीं हैं। नकली सामान के खिलाफ जागरूकता पैदा करने में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी मिलकर ठोस काम कर सकते हैं।

ऐसा कि कोई प्रशासक भी न कर पाए। बेशक, इस कड़वे सच को स्वीकार कर लेना चाहिए कि गुणवत्ता के प्रति जागरूकता के लिहाज से शहरी समाज भी कोई ज्यादा सचेत नहीं है। यह खुली हुई बात है कि किसी बड़े ब्रांड का लोकल संस्करण शहर या महानगर का मध्य या निम्न मध्यवर्गीय उपभोक्ता भी खुशी-खुशी खरीदता है। यहाँ जागरूकता का कोई प्रश्न ही नहीं उठता क्योंकि वह ऐसा सोच – समझकर और अपनी जेब की हैसियत को जानकर ही कर रहा है। फिर गाँववाला उपभोक्ता ऐसा क्यों न करे।

पर फिर भी यह नहीं कहा जा सकता कि यदि समाज में कोई गलत काम हो रहा है तो उसे रोकने के जतन न किए जाएँ। यानी नकली सामान के इस गोरखधंधे पर विराम लगाने के लिए जो कदम या अभियान शुरू करने की जरूरत है वह तत्काल हो। (हिंदुस्तान 6 अगस्त, 2006, साभार) -विद्यार्थी स्वयं अपने अध्यापक/अध्यापिका से अन्य विषयों पर चर्चा करें।’

Bazaar Darshan Class 12 Ncert Solutions प्रश्न 4.
प्रेमचंद की कहानी-‘ईदगाह’ के हामिद और उसके दोस्तों का बाजार से क्या संबंध बनता है ? विचार करें।
उत्तर :
हामिद और उसके मित्र ईदगाह के निकट लगे मेले में गए थे जहाँ वे तरह-तरह की सुंदर वस्तुओं, उपयोगी वस्तुओं और खाने-पीने की वस्तुओं को देखते रहे। उनके पास पैसे थे-किसी के पास अधिक तो किसी के पास कम। उन्होंने पैसों के आधार पर वस्तुओं की उपयोगिता को परखा था। हामिद ने उपयोगी सामान चिमटा खरीदा तो उसके मित्रों ने अपनी खुशी को पूरा किया।

विज्ञापन की दुनिया

प्रश्न 1.
आपने समाचार-पत्रों, टी०वी० आदि पर अनेक प्रकार के विज्ञापन देखे होंगे जिनमें ग्राहकों को हर तरीके से लुभाने का प्रयास किया जाता है।
नीचे लिखे बिंदुओं के संदर्भ में किसी एक विज्ञापन की समीक्षा कीजिए और यह भी लिखिए कि आपको विज्ञापन की किस बात ने सामान खरीदने के लिए प्रेरित किया।
1. विज्ञापन में सम्मिलित चित्र और विषय-वस्तु
2. विज्ञापन में आए पात्र और उसका औचित्य
3. विज्ञापन की भाषा
उत्तर :
टूथपेस्ट का विज्ञापन
(1) विज्ञापन में सम्मिलित चित्र और विषय-वस्तु-ग्राहकों को उलझाने के लिए सुंदर चुने गए लड़कों और लड़कियों के चमकीले दाँतों की अपेक्षा उनके सुंदर दमकते चेहरों के चित्र दिखाए गए। इनके अर्धनग्न शरीर का दाँतों की सफ़ाई से संबंध और औचित्य समझ नहीं आया। विज्ञापन का विषय-वस्तु दाँतों की चमक से दूसरों को लुभाना था।

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(2) विज्ञापन में आए पात्र और उनका औचित्य-विज्ञापन में सामान्य स्तर के वे लोग नहीं हैं जो देश की जनता का मुख्य रूप से प्रतिनिधित्व करते हैं। उसमें उच्च स्तरीय ऐसे मॉडलों को दिखाया गया जो अपनी कृत्रिम मुसकान से ग्राहकों को मूर्ख बनाने की कला में निपुण हैं। उनकी उपस्थिति का औचित्य केवल एक ही है-सामान्य देशवासियों को लुभाकर उन्हें अपने उत्पाद की ओर आकृष्ट करना। उपभोक्तावाद में केवल ग्राहक की जेब देखी जाती है और उसे अपने उत्पाद की ओर आकृष्ट करना ही उद्देश्य होता है।

(3) विज्ञापन की भाषा-विज्ञापन की भाषा आकर्षक है। सरल और सरस है। मन को लुभाती है। हर ग्राहक उस विशेष टूथपेस्ट को खरीद कर वैसा ही दिखना और वैसा ही करना चाहता है जो विज्ञापन में दिखाया गया।

प्रश्न 2.
अपने सामान की बिक्री को बढ़ाने के लिए आज किन-किन तरीकों का प्रयोग किया जा रहा है ? उदाहरण सहित उनका संक्षिप्त परिचय दीजिए। आप स्वयं किस तकनीक या तौर-तरीके का प्रयोग करना चाहेंगे जिससे बिक्री भी अच्छी हो और उपभोक्ता गुमराह भी न हो।
उत्तर :
बिक्री बढ़ाने के लिए विभिन्न तरीके

  • रंग-बिरंगे विज्ञापन तैयार करना।
  • छूट का लालच देना।
  • बच्चों और महिलाओं को उत्पाद की ओर विशेष रूप से आकृष्ट करना।
  • बैनर्स, होर्डिंगज, पत्र-पत्रिकाएँ, अखबार, टी० वी०, सिनेमा, इंटरनेट आदि के द्वारा लोगों के मन में घर कर जाने का प्रयत्न करना।
  • अभिनेताओं/अभिनेत्रियों/खिलाड़ियों/सुंदर मॉडलों के माध्यम से जनता को आकृष्ट करना।

उपभोक्ता को गुमराह होने से बचाने तथा बिक्री को बढ़ाने की तकनीक

  • विज्ञापनों के पात्रों को आम जनता में से चुनना।
  • दाम पर नियंत्रण रखना।
  • अन्य उत्पादों से तुलना करना।
  • उत्पाद की उपयोगिता तथा गुणवत्ता को ध्यान में रखना।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
विभिन परिस्थितियों में भाषा का प्रयोग भी अपना रूप बदलता रहता है कभी औपचारिक रूप में आती है तो कभी। अनौपचारिक रूप में। पाठ में से दोनों प्रकार के तीन-तीन उदाहरण छाँटकर लिखिए।
उत्तर :
औपचारिक भाषा-प्रयोग

  • पैसा पावर है।
  • पर्चेजिंग पावर के प्रयोग में ही पावर का रस है
  • बाजार आमंत्रित करता है।
  • बाजार में एक जादू है।

अनौपचारिक भाषा-प्रयोग

  • बाजार जाओ तो खाली मन न हो।
  • मन खाली हो, तब बाजार न जाओ।
  • मन खाली नहीं रहना चाहिए।

प्रश्न 2.
पाठ में अनेक वाक्य ऐसे हैं, जहाँ लेखक अपनी बात कहता है। कुछ वाक्य ऐसे हैं जहाँ वह पाठक-वर्ग को संबोधित करता है। सीधे तौर पर पाठक को संबोधित करनेवाले पाँच वाक्यों को छाँटिए और सोचिए कि ऐसे संबोधन पाठक से रचना पड़वा लेने में मददगार होते हैं।
उत्तर :
(i) बाजार आमंत्रित करता है कि आओ मुझे लूटो और लूटो।
(ii) जेब भरी हो और मन खाली हो, ऐसी हालत में जादू का असर खूब होता है।
(iii) लू में जाना हो तो पानी पीकर जाना चाहिए।
(iv) पानी भीतर हो, लू का लूपन व्यर्थ हो जाता है।
(v) मन लक्ष्य से भरा हो तो बाजार भी फैला-का-फैला ही रह जाएगा

 NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 12 बाज़ार दर्शन

प्रश्न 3.
नीचे दिए गए वाक्यों को पढ़िए
(क) पैसा पावर है।
(ख) पैसे की उस पर्चेजिंग पावर के प्रयोग में ही पावर का रस है।
(ग) मित्र ने सामने मनीबैग फैला दिया।
(घ) पेशगी ऑर्डर कोई नहीं लेते। ऊपर दिए गए इन वाक्यों की संरचना तो हिंदी भाषा की है लेकिन वाक्यों में एकाध शब्द अंग्रेजी भाषा के हैं। इस तरह के प्रयोग को कोड मिक्सिंग कहते हैं। एक भाषा के शब्दों के साथ दूसरी भाषा के शब्दों का मेलजोल! अब तक आपने जो पाठ पढ़े उनमें से ऐसे कोई पाँच उदाहरण चुनकर लिखिए। यह भी बताइए कि आगत शब्दों की जगह उनके हिंदी पर्यावों का ही प्रयोग किया जाए तो संप्रेषणीयता पर क्या प्रभाव पड़ता है।
उत्तर :
विद्यार्थी इस प्रश्न को अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

प्रश्न 4.
नीचे दिए गए वाक्यों के रेखांकित अंश पर ध्यान देते हुए उन्हें पढ़िए
(क) निर्बल ही धन की ओर झुकता है।
(ख) लोग संयमी भी होते हैं।
(ग) सभी कुछ तो लेने को जी होता था।

ऊपर दिए गए वाक्यों के रेखांकित अंश ‘ही’, ‘भी’, ‘तो’ निपात हैं जो अर्थ पर बल देने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। वाक्य में इनके होने-न-होने और स्थान-क्रम बदल देने से वाक्य के अर्थ पर प्रभाव पड़ता है, जैसेमुझे

मुझे किताब भी चाहिए। (मुझे महत्वपूर्ण है।)
मुझे किताब भी चाहिए। (किताब महत्वपूर्ण है।)

आप निपात (ही, भी, तो) का प्रयोग करते हुए तीन-तीन वाक्य बनाइए। साथ ही ऐसे दो वाक्यों का भी निर्माण कीजिए जिसमें ये तीनों निपात एक साथ आते हों।
उत्तर :
ही – (i) मैं वहाँ ही रहँगा।
मुझे यह पुस्तक ही खरीदनी है।
मैं कल ही पूजा के घर गई थी।

भी – (ii) मोहन को भी पढ़ना चाहिए।
उसे भी तुम्हारे साथ जाना चाहिए।
पिछले वर्ष मैं भी मुंबई गई थी।

तो – (i) अभी तो बहुत काम बाकी है।
आप तो उससे कभी नहीं मिले, फिर उसे कैसे पहचानेंगे।
(iv) उसके आने से पहले ही मुझे भी तो चले जाना चाहिए।
(v) राम खेला ही नहीं तो उसे भी इनाम क्यों दे रहे हैं ?

चर्चा करें

प्रश्न 1.
पर्चेजिंग पावर से क्या अभिप्राय है ?
बाजार की चकाचौंध से दूर पर्चेजिंग पावर का सकारात्मक उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है ? आपकी मदद के लिए संकेत दिया जा रहा है
(क) सामाजिक विकास के कार्यों में।
(ख) ग्रामीण आर्थिक व्यवस्था को सदढ़ करने में …….. ।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं हल करें।

 NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 12 बाज़ार दर्शन

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NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 14 पहलवान की ढोलक

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पहलवान की ढोलक NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 14

पहलवान की ढोलक Questions and Answers Class 12 Hindi Aroh Chapter 14

पाठ के साथ

Pahalwan Ki Dholak Question Answer Class 12 प्रश्न 1.
कुश्ती के समय ढोल की आवाज़ और लुट्टन के दाँव-पेंच में क्या तालमेल था ? पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्द और ढोल की आवाज आपके मन में कैसी ध्वनि पैदा करते हैं, उन्हें शब्द दीजिए?
उत्तर :
कुश्ती के समय ढोल की आवाज़ और लुट्टन के दाँव-पेंच में अनूठा तालमेल था। लुट्टन का कोई गुरु नहीं था, इसलिए उसने ढोल को ही अपना गुरु माना था। कुश्ती के समय वह ढोल की तान को अपने गुरु का स्वर मानकर दाँव-पेंच लगाया करता था। ढोल की आवाज ही लुट्टन की शक्ति बढ़ाती थी; उसे धैर्य प्रदान करती थी तथा निरंतर साहस भी देती थी। लुट्टन ‘चट्-गिड़-धा, चट्-गिड़, चट्-गिड़-धा’ ध्वनि सुनकर अपने हृदय में धैर्य पाता था तथा उसका डर भाग जाता था।

वह ‘धाक-धिना, तिरकट-तिना, धाक-धिना, तिरकट-तिना’….ध्वनि को सुनकर तैयार हो जाता था तथा अपने प्रतिद्वंद्वी का दाँव काट बाहर निकल आता था। अंत में ‘चटाक्-चट्-धा, चटाक्-चट्-धा’ ध्वनि से प्रेरित होकर ही लुट्टन ने चाँद सिंह पहलवान को पटककर जमीन पर दे मारा था। जब उसने ‘धिना-धिना, धिक्-धिना’ सुना तो अपना पूरा जोर लगाकर चाँद को चारों खाने चित कर दिया।

इस प्रकार ढोलक की आवाज़ लुट्टन के दाँव-पेंच को निरन्तर सहारा प्रदान करती थी तथा एक गुरु के समान उसका पथ-प्रदर्शन किया करती थी, जिसके बलबूते पर लुट्टन ने एक प्रसिद्ध पहलवान को पटककर चित कर दिया था। पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्द तथा ढोल की आवाज हमें निरंतर प्रेरित करती है; जैसे-चट् धा, गिड़, चट्-धा, ‘गिड़-धा’ व ‘चगिड़-धा, चगिड़-धा, चट-गिड़-धा’ स्वर ‘मत डरना, मत डरना’ को दोहराता है।

‘धाक् धिना, तिरकट-तिना, धाक्-धिना, तिरकट तिना’ स्वर से ‘दाँव काटो बाहर जा’ ध्वनि पैदा होती है। इसी प्रकार ‘धिना-धिना, धिक्-धिना’ ध्वनि से चित करने की प्रेरणा मिलती है।

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Pahalwan Ki Dholak Class 12 प्रश्न 2.
कहानी के किस-किस मोड़ पर लुट्टन के जीवन में क्या-क्या परिवर्तन आए? (Outside Delhi 2017, Set-III)
उत्तर :
कहानी के प्रारंभ, मध्य और अंत के मोड़ पर लुट्टन के जीवन में अग्रलिखित परिवर्तन आए

(i) प्रारंभ-कहानी के प्रारंभ में लुट्टन सिंह अपने गाँव में रात्रि की विभीषिका में ढोल बजाकर संजीवनी प्रदान किया करता था। नौ वर्ष की अवस्था में ही उसके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी उसकी शादी बचपन में हो गई थी, इसलिए उसका पालन-पोषण उसकी विधवा सास ने ही किया। बचपन में वह गाय चराया करता था। गायों का दूध पीकर वह कसरत करने लगा। इसलिए उसका शरीर
सुडौल और हट्टा-कट्टा बन गया। अब वह गाँव में अच्छा पहलवान समझा जाने लगा था।

(ii) मध्य-कहानी के मध्य में लुट्टन सिंह को अपने जीवन में भरपूर तरक्की मिली। उसने श्यामनगर में लगने वाले मेले में चाँद सिंह नामक पहलवान को हराया, जिससे उसकी कीर्ति दूर-दूर तक फैल गई। श्यामनगर के राजा श्यामानंद ने उसकी वीरता से प्रभावित होकर उसे अपना राज पहलवान बना दिया। अब उसका सारा खर्च राजमहल की तरफ़ से होने लगा। बाद में उसने नियमित कसरत
और व्यायाम के बलबूते ‘काला खाँ’ जैसे-अनेक प्रसिद्ध पहलवानों को हराया। वह एक अजेय पहलवान बन गया। उसने अपने दोनों बेटों को भी पहलवान बना दिया था।

(iii) अंत-कहानी के अंत में लुट्टन सिंह के जीवन पर वज्रपात हुआ और वह उन्नति व प्रसिद्धि के शिखर से नीचे गिर गया। श्यामनगर के राजा श्यामानंद का स्वर्गवास हो गया था। उनके स्थान पर विलायत से नया राजा आ गया, जिसने सारी व्यवस्था को बदल दिया। दंगल का स्थान घोड़ों की रेस ने ले लिया था। राजा के दुर्व्यवहार का शिकार होकर लुट्टन सिंह श्यामनगर को छोड़ अपनी ढोलक कंधे पर लटकाकर गाँव वापस आ गया। गाँव में अचानक महामारी फैल गई। सूखा पड़ा, अनाज कम पड़ गया। गाँव में चारों ओर लोग हैजे और मलेरिया से मरने लगे। उसके दोनों बेटे भी इसी विभीषिका में मारे गए और अंततः रात्रि में एक दिन लुट्टन सिंह भी मृत्यु को प्राप्त हो गया।

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पहलवान की ढोलक के प्रश्न उत्तर Class 12 प्रश्न 3.
लुट्टन पहलवान ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है? (C.B.S.E. Sample Paper)
उत्तर :
‘उसका गुरु कोई पहलवान नहीं यही ढोल है’ लुट्टन पहलवान ने ऐसा इसलिए कहा होगा, क्योंकि उसने किसी पहलवान से कुश्ती के दांव-पेंच नहीं सीखे थे और न ही उसका लक्ष्य एक पहलवान बनना था। वह तो बचपन में गाय चराता हुआ गायों की धार का गरम दूध पीया करता था। इसी से उसका शरीर हट्टा-कट्या हो गया था। वह लोगों से बदला लेने के लिए कसरतें करता था। जब श्यामनगर में वह मेला देखने गया, तो वहाँ के दंगल में ढोल बज रहा था; पहलवान कुश्ती कर रहे थे। अचानक ही वह पहलवान से लड़ने हेतु अखाड़े में कूद पड़ा और अंत में उसने ढोल से प्रेरणा लेते हुए प्रसिद्ध चाँद सिंह पहलवान को हरा दिया।

Pehlwan Ki Dholak Ncert Solutions Class 12 प्रश्न 4.
गाँव में महामारी फैलने और बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान होल क्यों बजाता रहा? (C.B.S.E. 2010, Set-I, A.I.C.B.S.E. 2011 Set-II)
उत्तर :
जब महामारी फैली, तो सारा गाँव हैजे और मलेरिये से ग्रस्त हो गया। चारों ओर हाहाकार मचा हुआ था। घर के घर खाली हो गए थे। रात्रि की विभीषिका में चारों ओर सन्नाटा छा जाता था। रात्रि की उसी विभीषिका को तोड़ने तथा लोगों में जीने की उमंग पैदा करने के लिए लुट्टन पहलवान ढोल बजाता था।

जब उसके दोनों बेटे महामारी की चपेट में आ गए, तो वे असह्य वेदना से बिलखते हुए उससे कहने लगे कि ‘बाबा! उठा-पटक दो वाला ताल अर्थात चटाक्-चट्-धा, चटाक्-चट् धा ताल बजाओ। लुट्टन सारी रात वह ताल बजाता रहा। सुबह होते ही उसके दोनों बेटों की मृत्यु हो गई। अतः अपने बेटों की अंतिम इच्छा को पूर्ण करने के लिए उनके देहांत के बावजूद भी लुट्टन पहलवान ढोल बजाता रहा।

Pehalwan Ki Dholak Ncert Solutions Class 12 प्रश्न 5.
ढोलक की आवाज़ का पूरे गाँव पर क्या असर होता था? (C.B.S.E. Delhi 2008, A.I.C.B.S.E. 2011, Set-III, 2012, Set-I, 2013, Set-I,C.B.S.E. 2018)
अथवा
पहलवान की ढोलक एक ओर ग्रामीणों के स्वाभिमान की प्रतीक है तो दूसरी ओर दम तोड़ते ग्रामीणों को मृत्यु का सामना करने का हौसला देती है। टिप्पणी कीजिए। (Delhi C.B.S.E. 2016, Set-III, A.I. 2016, Set-III)
उत्तर :
ढोलक की आवाज गाँववालों में धैर्य, साहस और स्फूर्ति प्रदान करती थी; रात्रि की विभीषिका तथा सन्नाटे को ललकार कर चुनौती पैदा करती थी। जब पूरा गाँव महामारी के कारण मलेरिये और हैज़े से त्रस्त होकर अधमरा, निर्बल और निस्तेज हो गया था, तब इस भयंकर वातावरण में ढोलक की आवाज़ लोगों को संजीवनी प्रदान किया करती थी। उपचार व पथ्य विहीन लोगों में संजीवनी शक्ति भरती थी।

वह आवाज़ बच्चों, जवानों और बूढ़ों की आँखों के आगे दंगल का दृश्य पैदा कर देती थी। ढोल की आवाज़ सुनकर शक्तिहीन शिराओं में बिजली-सी दौड़ पड़ती थी। मरते हुए प्राणियों को भी आँख मूंदते समय कोई तकलीफ नहीं होती थी तथा लोग मृत्यु से भी नहीं डरते थे। इसे सुनकर लोगों के मन में जीने की नई उमंग पैदा हो जाती थी।

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Pehelwan Ki Dholak Question Answer Class 12 प्रश्न 6.
महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था ? (C.B.S.E. 2017, Set-1)
उत्तर
सूर्योदय दृश्य-महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय होते ही लोग रोते-चिल्लाते और दुखी होते हुए अपने-अपने घरों से बाहर निकलते थे। वे महामारी की भेंट चढ़ रहे पड़ोसियों और परिचित लोगों के घर जाकर उन्हें ढाढ़स देते थे। जिस माँ का बच्चा मलेरिये व हैजे का शिकार हो जाता था अथवा किसी का पति मर जाता था, तो गाँववाले उसके परिवार को धैर्य देने का प्रयास करते थे। घर में पड़े मुर्दो को बिना कफ़न के ही नदी की भेंट चढ़ा दिया करते थे।

सूर्यास्त दृश्य-सूर्यास्त होते ही रात्रि की विभीषिका गाँव में अपना साम्राज्य स्थापित कर लेती थी। सब तरफ़ सन्नाटा छा जाता था। गाँव के लोग भयभीत होकर अपनी-अपनी झोंपड़ियों में घुस जाते थे। रात्रि के गहन अंधकार में झोंपड़ियों से बोलने तक की आवाज़ नहीं आती थी। यहाँ तक कि रात की विभीषिका के कारण उनके बोलने की शक्ति भी क्षीण हो जाती थी।

यदि समीप किसी माँ का बेटा मर जाता था, तो उसे अंतिम बार बेटा कहने की भी किसी में हिम्मत भी नहीं होती थी। रात्रि की इस विभीषिका को केवल पहलवान की ढोलक चुनौती देती थी। वह सारी रात उसे बजाता था। ढोलक की आवाज़ इन अधमरे पथ्यविहीन गाँववालों में संजीवनी देने का कार्य करती थी। इसी आवाज से उनकी शक्तिहीन शिराओं में बिजली-सी दौड़ जाती थी।

Class 12 Hindi Chapter 14 Question Answer प्रश्न 7.
कुश्ती या दंगल पहले लोगों और राजाओं का प्रिय शौक हुआ करता था। पहलवानों को राजा एवं लोगों के द्वारा विशेष सम्मान दिया जाता था
(क) ऐसी स्थिति अब क्यों नहीं है?
(ख) इसकी जगह अब किन खेलों ने ले ली है?
(ग) कुश्ती को फिर से प्रिय खेल बनाने के लिए क्या-क्या कार्य किए जा सकते हैं?
उत्तर
(क) पहले कुश्ती या दंगल लोगों और राजाओं का प्रिय शौक हुआ करता था। पहलवानों को विशेष सम्मान दिया जाता था,
लेकिन अब उन्हें वह सम्मान नहीं दिया जाता, क्योंकि आज न तो कुश्ती या दंगल समाज का प्रिय खेल है और न ही भागदौड़ की इस जिंदगी में लोगों के पास इसे देखने या प्रोत्साहित करने का समय है। फिर प्राचीन लोक-संस्कृति भी धीरे-धीरे लुप्त हो रही है। अब न तो पहले जैसे संस्कार और मानवीय संवेदनाएँ बची हैं और न ही कुश्ती को प्रोत्साहित करने वाले राजा-महाराजा। दम तोड़ती मानवीय संवेदनाओं व अव्यवस्था के कारण प्राचीन लोक-संस्कृति भी दम तोड़ रही है।

(ख) कुश्ती या दंगल की जगह अब आधुनिक खेलों ने ले ली है। इनमें क्रिकेट, घुड़दौड़, मोटर-रेस, बॉस्केटबॉल, फुटबॉल आदि खेल प्रसिद्ध हैं। आज के युग में क्रिकेट भारत का सबसे लोकप्रिय खेल है।

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(ग) कुश्ती को फिर से प्रिय खेल बनाने के लिए निम्नलिखित कार्य किए जा सकते हैं

  • लोगों के मन में लोक-संस्कृति को जागृत किया जाए।
  • सरकार कुश्ती को राष्ट्रीय खेलों में सम्मिलित करे।
  • मीडिया इस खेल का विश्व-स्तर पर प्रसारण करे।
  • सरकार की ओर से पहलवानों के लिए उपयुक्त आर्थिक योजनाएं बनाई जाएँ।

Pahalvan Ki DholakClass 12 प्रश्न 8.
आशय स्पष्ट करें
आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी।
अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिलाकर हँस पड़ते थे।
उत्तर :
प्रस्तुत गदयांश का आशय है कि मलेरिया और हैजे के फैलने से संपूर्ण वातावरण त्रस्त था। चारों ओर भयानक अँधेरा और सन्नाटा छाया हुआ था। ऐसे भयानक वातावरण में आकाश से टूटकर यदि कोई तारा भावुक होकर पृथ्वी पर जाना भी चाहता था, तो इस विभीषिकापूर्ण वातावरण से त्रस्त होकर उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही क्षीण हो जाती थी। अमावस्या के गहन अंधकार में आकाश से टूटने वाले तारों का प्रकाश भी पृथ्वी पर दिखाई नहीं देता था। ऐसी स्थिति में आकाश के अन्य तारे उस तारे की भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिला कर हँस पड़ते थे।

Pahalwan Ki Dholak Ncert Solutions Class 12 प्रश्न 9.
पाठ में अनेक स्थलों पर प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। पाठ में से ऐसे अंश चुनिए और उनका आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
(1) अँधेरी रात-चुपचाप आँसू बहा रही थी। आशय-गाँव में फैले मलेरिया और हैजे के कारण सारा गाँव दहल गया था। ऐसा लगता था मानो अँधेरी रात भी इस पीड़ा को देखकर चुपचाप आँसू बहा रही थी। आकाश से टूट कर कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी।

आशय-दुःख में डूबे गाँववासियों का कोई सहायक नहीं था। आकाश से टूटा तारा भी मानो सहायता के लिए नहीं था, क्योंकि वह आकाश से तो चला पर नीचे पहुँच नहीं पाया। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिला कर हँस पड़ते थे। आशय-दुख में डूबे गाँववासियों की सहायता के लिए आगे बढ़ा टूटा तारा भी जब भूमि पर नहीं पहुंच पाया, तो अन्य तारे उसकी भावुकता या असफलता पर खिलखिला कर हँस पड़ते थे। जो स्वयं दूसरों के दुख से दुखी नहीं होते, वे सहायता करने वालों का मजाक बनाते हैं।

पाठ के आस-पास

1. पाठ में मलेरिया और हैजे से पीड़ित गाँव की दयनीय स्थिति को चित्रित किया गया है। आप ऐसे किसी अन्य आपद स्थिति की कल्पना करें और लिखें कि आप ऐसी स्थिति का सामना कैसे करेंगे/करेंगी ?
2. ढोलक की थाप मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी-कला से जीवन के संबंध को ध्यान में रखते हुए चर्चा कीजिए।

चर्चा करें

कलाओं का अस्तित्व व्यवस्था का मोहताज नहीं है।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने कक्षा अध्यापक/ अध्यापिका की सहायता से स्वयं हल करें।

भाषा की बात

Pahalwan Ki Dholak Class 12 प्रश्न 1 .
हर विषय, क्षेत्र, परिवेश आदि के कुछ विशिष्ट शब्द होते हैं। पाठ में कुश्ती से जुड़ी शब्दावली का बहुतायत प्रयोग हुआ है। उन शब्दों की सूची बनाइए। साथ ही नीचे दिए गए क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले कोई पाँच-पाँच शब्द बताइए
उत्तर :

  • चिकित्सा-अस्पताल, डॉक्टर, नर्स, टीका, सुई, दवाई, कैप्सूल।
  • क्रिकेट-कोच, बॉल, बल्ला, छक्का, चौका, आउट, एल०बी०डब्ल्यू०।
  • न्यायालय-मजिस्ट्रेट, वकील, न्यायाधिकारी, अपराध, जमानत, दंड।
  • अपनी पसंद का कोई क्षेत्र – विद्यार्थी, अध्यापक, शिक्षा-कक्ष, पीरियड, छुट्टी।

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Pahalwan Ki Dholak Ncert Solution Class 12 प्रश्न 2.
पाठ में अनेक अंश ऐसे हैं जो भाषा के विशिष्ट प्रयोगों की बानगी प्रस्तुत करते हैं। भाषा का विशिष्ट प्रयोग न केवल
भाषाई सर्जनात्मकता बढ़ावा देता है बल्कि कथ्य को भी प्रभावी बनाता है। यदि उन शब्दों, वाक्यांशों के स्थान पर किन्हीं अन्य का प्रयोग किया जाए तो संभवतः वह अर्थगत चमत्कार और भाषिक सौंदर्य उद्घाटित न हो सके। कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं

  • फिर बाज की तरह उस पर टूट पड़ा।
  • राजा साहब की स्नेह-दृष्टि ने उसकी प्रसिदधि में चार चांद लगा दिए।
  • पहलवान की स्त्री भी दो पहलवानों को पैदा करके स्वर्ग सिधार गई थी।

इन विशिष्ट भाषा-प्रयोगों का प्रयोग करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर
अनुच्छेद-लुट्टन पहलवान बहुत बलशाली था। अखाड़े में अपने प्रतिद्वंद्वी पहलवान को देखते ही वह उस पर बाज़ की तरह टूट पड़ा। काफी देर तक लड़ने के पश्चात लुट्टन ने अपने प्रतिद्वंद्वी को हरा दिया। सब ओर उसकी वाहवाही होने लगी। उसकी बहादुरी को देखकर राजा साहब ने उसे अपने दरबार में रख दिया। राजा की इस स्नेह-दृष्टि ने उसकी प्रसिद्धि में चार चाँद लगा दिए। सारे राज्य में लुटन का नाम गूंजने लगा। लेकिन उसकी पत्नी दो पहलवान बच्चों को पैदा करके स्वर्ग सिधार गई थी।

Pahalwan Ki Dholak Class 12 Ncert Solutions प्रश्न 3.
जैसे क्रिकेट की कमेंट्री की जाती है वैसे ही इसमें कुश्ती की कमेंट्री की गई है। आपको दोनों में क्या समानता और अंतर दिखाई. पड़ता है?
उत्तर
समानता

  • क्रिकेट और कुश्ती दोनों की कमेंट्री में कमेंटेटर की आवश्यकता होती है।
  • दोनों में हार-जीत को महत्व दिया जाता है।
  • दोनों में खेल के प्रत्येक पल की सूचना दी जाती है।

अंतर

  • क्रिकेट की कमेंट्री में बल्लेबाज व गेंदबाज का वर्णन होता है, जबकि कुश्ती की कमेंट्री में पहलवान व दांव-पेंच का।
  • क्रिकेट में स्कोर या रन खेल आधार होता है, जबकि कुश्ती में चित या पहलवान का।

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NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 17 शिरीष के फूल

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शिरीष के फूल NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 17

शिरीष के फूल Questions and Answers Class 12 Hindi Aroh Chapter 17

पाठ के साथ

Shirish Ke Phool Question Answer Class 12  प्रश्न 1.
लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत (संन्यासी) की तरह क्यों माना है? (Delhi C.B.S.E. 2016, Set-1)
अथवा
‘कालजयी अवधूत’ किसे कहा गया है और क्यों? (C.B.S.E. Sample Paper,C.B.S.E. Delhi 2008,2010 Set-1) (Outside Delhi 2013, Set-1, 2, 3, Delhi 2017, Set-III) (Outside Delhi 2017, Set-II)
उत्तर :
लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत की तरह इसलिए माना है क्योंकि अवधूत जिस प्रकार मस्त, फक्कड़, अनासक्त, सरस और मादक होते हैं उसी प्रकार शिरीष के फूल भी फक्कड़ होकर ही उपजते हैं। संत कबीर, कालिदास, गांधी जैसे अवधूत जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी संसार को जीने की चेष्टा दी, उसी प्रकार शिरीष भी भयंकर गर्मी की लू में भी फूल उठता है तथा चारों ओर अपनी सुंदरता फैलाता रहता है। यह लोगों के मन में तरंगें उत्पन्न कर देता है। भीषण गर्मी से अनासक्त होकर महकता रहता है। उसके ऊपर प्रचंड गर्मी, लू, अंधड़ आदि का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 17 शिरीष के फूल

शिरीष के फूल प्रश्न उत्तर NCERT Solutions प्रश्न 2.
हृदय की कोमलता को बचाने के लिए व्यवहार की कठोरता भी कभी-कभी ज़रूरी हो जाती है-प्रस्तुत पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
उत्तर :
मनुष्य एक सौंदर्य-प्रिय प्राणी है, अतः वह आंतरिक रूप से अत्यंत कोमल है। इसी कोमलता के कारण वह सदा दसरों से प्रेमपर्ण व सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार रखता है। सभी के साथ सद्भावना बनाए रखता है। लेकिन अपने हृदय की कोमलता को बचाने के लिए मनुष्य को कभी-कभी कठोरता को भी अपनाना चाहिए ताकि वह विपरीत परिस्थिति का डटकर सामना कर सके। जीवन के मार्ग में आने वाले संकटों और संघर्षों से जूझ सके।

जैसे शिरीष अपनी कोमलता को बचाने के लिए भीषण गर्मी की लू को सहन करने के लिए बाहर से कठोर स्वभाव अपनाता है तब कहीं जाकर वह भयंकर गर्मी, धूप, आँधी को सहन कर पाता है। इसी प्रकार यहाँ लेखक ने संत कबीरदास, कालिदास का भी प्रसंग दिया है जिन्हें अपने मन की कोमलता को कायम रखने के लिए समाज की विपरीत और क्रूर परिस्थितियों का सामना करने के लिए अपने व्यवहार को कठोर बनाना पड़ा था।

शिरीष के फूल प्रश्न उत्तर Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 3.
द्विवेदी जी ने शिरीष के माध्यम से कोलाहल और संघर्ष से भरी जीवन-स्थितियों में अविचल रहकर जिजीविषु बने रहने की सीख दी है। स्पष्ट करें।
अथवा
शिरीष आज के संदर्भ में हमें क्या संदेश देता है? (A.I. 2016, Set-II)
उत्तर :
द्विवेदी जी ने शिरीष के माध्यम से कोलाहल और संघर्ष से भरी प्रतिकूल परिस्थितियों में व्यक्ति को जीने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा है कि मनुष्य को अपने जीवन में विपरीत परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए। उसे कोलाहल और संघर्ष को देखकर जीवन से पलायन नहीं करना चाहिए बल्कि उनका साहस के साथ डटकर सामना करना चाहिए। विपरीत परिस्थितियों को मोड़कर अपने अनुकूल बना लेने का प्रयास करना चाहिए। दुःख और संकट से भरी स्थितियों से अविचल और अनासक्त रहकर जीवनयापन करें। जिस प्रकार शिरीष भयंकर गर्मी की लू से अनासक्त फूलों से लदा सदा फलता-फूलता रहता है।

Class 12 Hindi Chapter 17 Question Answer प्रश्न 4.
“हाय वह अवधूत आज कहाँ है!” ऐसा कहकर लेखक ने आत्मवल पर देह-बल के वर्चस्व की वर्तमान सभ्यता के संकट की ओर संकेत किया है। कैसे?
अथवा
शिरीष और महात्मा गांधी की तुलना किस आधार पर की गई है? (C.B.S.E. 2018)
उत्तर :
वर्तमान समाज में चारों ओर मारकाट, अग्निदाह, लूटमार, खून-खराबा का बोलबाला है। मानव सभ्यता घोर संकट से परिव्याप्त है। सत्य, अहिंसा आदि आदर्श कहीं भी दिखाई नहीं देते। जन-जन आतंक की छाया में जी रहा है। वर्तमान सभ्यता में मनुष्य विपरीत परिस्थितियों में अविलंब हिंसा, मारकाट, लूटपाट पर उतावला हो उठता है। वह सत्य-अहिंसा की अपेक्षा असत्य, हिंसा, मारकाट का पालन करता है।

निजी स्वार्थों की पूर्ति करने में उसे किसी का भी अहित दिखाई नहीं देता। लेखक ने ऐसे संकट के समय सत्य, अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी को याद किया है। वे दोनों बाहर से कठोर और दृढ़ थे लेकिन दोनों ही भीतर से कोमल थे। प्रतिकूल परिस्थितियों में वे अविचल थे। उन दोनों को हानि-लाभ से कोई मतलब ही नहीं था।

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Class 12 Hindi Shirish Ke Phool Question Answer प्रश्न 5.
कवि ( साहित्यकार ) के लिए अनासक्त योगी की स्थिर प्रजता और विदग्ध प्रेमी का हृदय-एक साथ आवश्यक है। ऐसा विचार प्रस्तुत कर लेखक ने साहित्य कर्म के लिए बहुत ऊँचा मानदंड निर्धारित किया है। विस्तारपूर्वक समझाएँ।
उत्तर :
कवि एक अनासक्त योगी और विदग्ध प्रेमी की भाँति होता है। वह युगीन समाज में जीवनयापन करते हुए समाज के आकर्षण और ऐश्वर्य से आसक्त नहीं होता। उसे सुख, आनंद, भोग-विलास अच्छा नहीं लगता। वह तो इन सबके आकर्षण से दूर रहकर जीवन जीता है। वह समाज के कोलाहल, संघर्ष, उठापटक और प्रतिकूल परिस्थितियों से निरंतर जूझता रहता है। एक विदग्ध प्रेमी के समान समाज से दिल में जख्म लेकर सदा समाज के उपकार हेतु कार्य करता है।

सुख हो या दुःख किसी भी स्थिति में वह हार नहीं मानता। वह फक्कड़, मस्त होकर जीवन जीता है। जैसे संत कबीरदास जी समाज से अनासक्त होकर विदग्ध प्रेमी की भाँति हृदय पर चोट खाकर सदैव समाज उद्धार के लिए जीते रहे। उन्होंने अपने फक्कड़ स्वभाव के बल पर समाज की प्रतिकूल परिस्थितियों को भी मोड़कर अनुकूल और स्वस्थ बना दिया था। वैसे ही साहित्यकारों को भी होना चाहिए।

Shirish Ke Phool Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 6.
सर्वग्रासी काल की मार से बचते हुए वही दीर्घजीवी हो सकता है, जिसने अपने व्यवहार में जड़ता छोड़कर नित बदल रही स्थितियों में निरंतर अपनी गतिशीलता बनाए रखी है। पाठ के आधार पर स्पष्ट करें। (A.I. 2016, Set-III)
उत्तर :
गतिशीलता में ही जीवन है। जड़ होना ही मृत्यु को प्राप्त होना है। इस संसार में मानव-जीवन में सुख-दुःख, राग-विराग, आशा-निराशा आदि भाव पैदा होते रहते हैं। जो मनुष्य इन परिस्थितियों में आसक्त होकर डूब जाता है वह जड़ हो जाता है व उसका जीवन स्थिर हो जाता है, लेकिन जो मनुष्य सुख-दुःख, आशा-निराशा से अनासक्त होकर जीवन-यापन करता है

तथा विपरीत परिस्थितियों का मुख मोड़कर अपने अनुकूल बना लेता है वही मनुष्य दीर्घजीवी होता है। ऐसा अनासक्त, धैर्यवान, मस्त, फक्कड़ मनुष्य ही कालजयी कहलाता है। वह कठिन से कठिन परिस्थितियों से निरंतर संघर्ष करता रहता है और स्थितियों के अनुरूप अपनी स्थिति में भी बदलाव करता रहता है। जैसे प्रस्तुत पाठ में शिरीष का वृक्ष भयंकर गर्मी की लू, आँधी आदि से अनासक्त होकर ही अपने सौंदर्य से दूसरों को जीने की प्रेरणा देता है।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 17 शिरीष के फूल

Shirish Ke Phool Class 12 Question Answer प्रश्न 7.
आशय स्पष्ट कीजिए

(क) दुरंत प्राणधारा और सर्वव्यापक कालाग्नि का संघर्ष निरंतर चल रहा है। मूर्ख समझते हैं कि जहाँ बने हैं, वहीं देर – तक बने रहें तो कालदेवता की आँख बचा पाएंगे। भोले हैं वे। हिलते-डुलते रहो, स्थान बदलते रहो, आगे की। ओर मुंह किए रहो तो कोड़े की मार से बच भी सकते हो। जमे कि मरे।

(ख) जो कवि अनासक्त नहीं रह सका, जो फक्कड़ नहीं बन सका, जो किए-कराए का लेखा-जोखा मिलाने में उलझ गया, वह भी क्या कवि है ?…….मैं कहता हूँ कि कवि बनना है मेरे दोस्तो, तो फक्कड़ बनो।

(ग) फल हो या पेड़, वह अपने आप में समाप्त नहीं है। वह किसी अन्य वस्तु को दिखाने के लिए उठी हुई अँगुली है। वह इशारा है।

उत्तर :
(क) प्रस्तुत गद्यांश का आशय यह है कि इस जहाँ में प्राणधारा और सर्वव्यापक कालाग्नि का निरंतर संघर्ष चल रहा है अर्थात अनादि काल से यमराज और प्राणधारा में संघर्ष होता आ रहा है। बुद्धिमान मनुष्य निरंतर जीवन संघर्ष करते हुए जीवनयापन करते हैं लेकिन मूर्ख लोग यह समझते हैं कि जहाँ जैसा जीवन जी रहे हैं, वहीं जीवन जीते रहेंगे तो यमराज की आँखों से बच जाएँगे।

ऐसे मनुष्य बहुत भोले हैं जो इतना भी नहीं समझते कि मृत्यु शाश्वत है और उससे कोई नहीं बच सकता। लेखक प्रेरणा देकर मनुष्य को कहता है कि मनुष्य को सदैव गतिशील रहना चाहिए। एक स्थान पर कभी स्थिर नहीं रहना चाहिए क्योंकि स्थिर होना ही मृत्यु है। यदि तुम मृत्यु से बचना चाहते हो तो ऊर्ध्वमुखी बने रहो अर्थात निरंतर कार्यरत रहो। निरंतर कर्मशील रहकर ही हम यमराज के कोड़े की मार से बच सकते हैं।

(ख) इन पंक्तियों से तात्पर्य है कि समाज में जो कवि अनासक्त नहीं रह सका और जो किए-किराए, कार्यों का लेखा-जोखा मिलाने में उलझ गया अर्थात जो सदा समाज के बाह्य आकर्षण, धन-ऐश्वर्य, सुख-दुःख में ही फंसा रहा, वह सच्चा कवि नहीं हो सकता। सच्चा कवि तो वही है जो समाज से अनासक्त रहकर समाज को जीने की राह दिखाता है। लेखक आह्वान करते हुए कहता है कि हे दोस्तो! यदि तुम सच्चा कवि बनना चाहते हो तो अपने स्वभाव को फक्कड़ बनाओ तथा उसमें अनासक्ति का भाव पैदा करो।

(ग) इस अवतरण से आशय है कि फल हो या पेड़ दोनों का अपना-अपना अस्तित्व है। उनकी सत्ता केवल अपने आप में समाप्त नहीं है बल्कि उनका जीवन तो अन्य वस्तुओं को जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करने वाली उँगली है। वे तो दूसरी वस्तुओं को अपने इशारों के माध्यम से जीने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।

पाठके आस-पास

शिरीष के फूल पाठ के प्रश्न उत्तर Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 1.
शिरीष के पुष्प को शीतपुष्य भी कहा जाता है। ज्येष्ठ माह की प्रचंड गर्मी में फूलने वाले फूल को शीतपुष्प संज्ञा किस आधार पर दी गई होगी?
उत्तर :
ज्येष्ठ माह की प्रचंड गर्मी सहन करके भी शिरीष के पुष्प खिले रहते हैं। जो देखने वालों के हृदय को ठंडक और शांति पहुँचाते हैं। यह गर्मी में भी शीतलता प्रदान करता है। शायद इसी आधार पर इस पुष्प को शीतपुष्प की संज्ञा दी गई होगी।

शिरीष के फूल प्रश्न उत्तर Ncert Class 12  प्रश्न 2.
कोमल और कठोर दोनों भाव किस प्रकार गांधी जी के व्यक्त्वि की विशेषता बन गए?
उत्तर :
गांधी जी के व्यक्तित्व में कोमल एवं कठोर दोनों गुणों का समन्वय था। वे जहाँ अपने देशवासियों के प्रति कोमल थे वहीं अग्रेजों और सामाजिक कुरीतियों के प्रति कठोर हृदय थे।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 17 शिरीष के फूल

शिरीष के फूल प्रश्न उत्तर Pdf Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 3.
आजकल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय फूलों की बहुत माँग है। बहुत-से किसान साग-सब्जी और अन्न उत्पादन छोड़कर फूलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसी मुद्दे को विषय बनाते हुए वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन करें।
उत्तर :
विद्यार्थी कक्षा अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

Class 12 Hindi Aroh Chapter 17 Question Answer प्रश्न 4.
हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इस पाठ की तरह ही वनस्पतियों के संदर्भ में कई व्यक्तित्व-व्यंजक ललित निबंध और भी लिखे हैं-कुटज, आम फिर बौरा गए, अशोक के फूल, देवदारु आदि। शिक्षक की सहायता से इन्हें ढूँढ़िए और पढ़िए।
उत्तर :
अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं कीजिए। अपने स्कूल के पुस्तकालय का सदुपयोग कीजिए।

Shirish Ke Phool Ncert Solutions Class 12 प्रश्न 5.
द्विवेदी जी की वनस्पतियों में ऐसी रुचि का क्या कारण हो सकता है? आज साहित्यिक रचना-फलक पर प्रकृति की उपस्थिति न्यून से न्यून होती जा रही है। तब ऐसी रचनाओं का महत्व बढ़ गया है। प्रकृति के प्रति आपका दृष्टिकोण रुचिपूर्ण है या उपेक्षामय? इसका मूल्यांकन करें।
उत्तर :
द्विवेदी जी एक कोमल हृदय एवं अति संवेदनशील व्यक्ति थे। उन्हें प्रकृति से असीम प्रेम एवं लगाव था। यही कारण है कि उनकी वनस्पतियों में ऐसी रुचि थी। प्रकृति के प्रति मेरा दृष्टिकोण रुचिपूर्ण है। प्रकृति ही मनुष्य को निकट से ईश्वरीय सौंदर्य के दर्शन कराती है। प्रकृति के विभिन्न रंग मनुष्य को वास्तव में मनुष्य बनने में सहायता करते हैं। प्रकृति उपदेश भी देती है।

भाषा की बात

‘दस दिन फूले और फिर खखड़-खंखड़’ इस लोकोक्ति से मिलते-जुलते कई वाक्यांश पाठ में हैं। उन्हें छाँटकर लिखें।
उत्तर :
(i) दिन दस फूला फूलिके खंखड भया पलाश।
(ii) ऐसे दुमदारों से तो लैंडूरे भले।

दृष्टिकोण – प्रकृति के प्रति मेरा दृष्टिकोण अत्यंत रुचिपूर्ण है। मेरा ही नहीं बल्कि प्रत्येक मनुष्य का प्रकृति के साथ अनन्य संबंध रहता है। मनुष्य जन्म से मृत्युपर्यंत प्रकृति के आँचल में रहता है। वह चाहकर भी उसे अनदेखा नहीं कर सकता, इसलिए मैं भी प्रकृति के साथ जुड़ा हुआ हूँ। मुझे प्रकृति का कण-कण प्रेम का प्रतीक नज़र आता है। प्रकृति के सुंदर नजारों को देखते ही मेरा हृदय असीम आनंद से भर जाता है। हर पल प्रकृति के प्रश्नों को देखने का मन करता है।

इन्हें भी जानें

अशोक वृक्ष-भारतीय साहित्य में बहुचर्चित एक सदाबहार वृक्ष। इसके पत्ते आम के पत्तों से मिलते हैं। वसंत-ऋतु में इसके फूल लाल-लाल गुच्छों के रूप में आते हैं। इसे कामदेव के पाँच पुष्पवाणों में से एक माना गया है। इसके फल सेम की तरह होते हैं। इसके सांस्कृतिक महत्व का अच्छा चित्रण हजारी प्रसाद द्विवेदी ने निबंध अशोक के फूल में किया है। भ्रमवश आज के दूसरे वृक्ष को

अशोक कहा जाता रहा है और मूल पेड़ (वानस्पतिक नाम सराका इंडिका) को लोग भूल गए हैं। इसकी एक जाति श्वेत फूलों वाली भी होती है। अरिष्ठ वृक्ष-रीठा नामक वृक्ष। इसके पत्ते चमकीले हरे होते हैं। फल को सुखाकर उसके छिलके का चूर्ण बनाया जाता है जो बाल धोने एवं कपड़े धोने के काम आता है। पेड की डालियों और तने पर जगह-जगह काँटे उभरे होते हैं।

आरग्वध वृक्ष-लोक में उसे अमतास कहा जाता है। भीषण गर्मी की दशा में जब इसका पेड़ पत्रहीन ढूँठ-सा हो जाता है, पर इस पर पीले-पीले पुष्प गुच्छे लटके हुए मनोहर दृश्य उपस्थित करते हैं। इसके फल लगभग एक-डेढ़ फुट के बेलनाकार होते हैं जिसमें कठोर बीज होते हैं। शिरीष वक्ष-लोक में सिरिस नाम से मशहर पर एक मैदानी इलाके का वृक्ष है। आकार में विशाल होता है पर पत्ते बहुत छोटे-छोटे होते हैं। इसके फूलों में पंखुड़ियों की जगह रेशे रेशे होते हैं।

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NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 16 नमक

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नमक NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 16

नमक Questions and Answers Class 12 Hindi Aroh Chapter 16

पाठ के साथ

Namak Class 12 Ncert Solutions प्रश्न 1.
सफ़िया के भाई ने नमक की पुड़िया ले जाने से क्यों मना कर दिया? (A.I. C.B.S.E. 2012, Set-I)
उत्तर :
सफ़िया के भाई ने नमक की पुड़िया ले जाने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि नमक पाकिस्तान से सरहद पार हिंदुस्तान ले जाना गैर-कानूनी था। फिर उसे वह नमक लेकर जहाँ से जाना था वहाँ कस्टम अधिकारी उसे पकड़ लेते, जिससे सफ़िया के साथ-साथ उसकी तथा उसके परिवार की भी बेईज्जती हो जाती।

Namak Question Answer Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 2.
नमक की पुड़िया ले जाने के संबंध में सफ़िया के मन में क्या द्वंद्व था? (A.L. C.B.S.E. 2012, Set-1, 2013 Set-I, II, III, Delhi C.B.S.E. 2008, 09, Delhi C.B.S.E. 2016, Set-III)
उत्तर :
सफ़िया को सुबह ही पाकिस्तान से रवाना होना था, इसलिए उसे रात को सामान की पैकिंग करनी थी। सारी चीजें समेटकर सूटकेस और बिस्तरबंद में बाँध दी गई। केवल कीनू की एक टोकरी तथा नमक की पुड़िया रह गई थी। वह सोच रही थी कि नमक की इस पुड़िया को वह कैसे ले जाएगी। सोच रही थी कि अगर इसे हाथ में ले ले और कस्टम वालों के सामने सबसे पहले इसी को रख दे? लेकिन अगर कस्टम वालों ने नहीं जाने दिया तो मज़बूरी में हम छोड़ देंगे। लेकिन फिर उस वायदे का क्या होगा, जो हमने अपनी माँ से किया है।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 16 नमक

जान देकर भी वायदा पूरा करना होगा। वह सोचने लगी, यदि इस पुड़िया को कीनुओं की टोकरी में रख लिया जाए तो इतने कीनुओं के ढेर में भला इसे कौन देख पाएगा? और अगर देख लिया? वह चिंतित होने लगी। दूसरे ही क्षण वह सोचने लगी नहीं, फलों की टोकरियाँ तो आते समय भी किसी की नहीं देखी जा रही थीं। हिंदुस्तान से केले तथा पाकिस्तान से कीनू सब ऐसे ही ले जा रहे थे। बस, यही वंद्व उसके मन में चल रहा था।

Namak Chapter Class 12 Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 3.
जब सफ़िया अमृतसर पुल पर चढ़ रही थी तो कस्टम ऑफिसर निचली सीढ़ी के पास सिर झुकाए चुपचाप क्यों खड़े थे?
उत्तर :
जब सफ़िया अमृतसर पुल पर चढ़ रही थी तो कस्टम ऑफिसर निचली सीढ़ी के पास सिर झुकाए खड़े थे। देशों का चाहे राजनीतिक बँटवारा हो चुका है पर लोगों के मन में अभी भी अपनेपन का भाव है। कस्टम अधिकारी ढाका (तब पूर्वी पाकिस्तान अब बांग्लादेश) का था। वह भी भारत से अलग देश का था, भले ही वह यहाँ नौकरी कर रहा था।

Class 12 Hindi Namak Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 4.
लाहौर अभी तक उनका वतन है और दिल्ली मेरा या मेरा वतन ढाका है। जैसे उद्गार किस सामाजिक यथार्थ का संकेत करते हैं? (A.I.C.B.S.E. 2011, Set-1)
उत्तर :
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसका जिस मिट्टी, स्थान या देश में जन्म होता है, जहाँ वह खेल-कूदकर बड़ा होता है, जिस वातावरण में उसके बचपन की किलकारियाँ गूंजती हैं उसके साथ वह आजीवन बँधा रहता है। कहा भी गया है कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि यादें आजीवन उसके हृदय में विराजमान रहती हैं। यह एक प्राकृतिक यथार्थ है। मनुष्य स्वाभाविक रूप से अपनी जन्मभूमि के साथ अनेक स्वप्न सँजोए रखता है। उसी भूमि से वह मृत्युपर्यंत संयुक्त रहता है।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 16 नमक

Namak Ncert Solutions Class 12  प्रश्न 5.
नमक ले जाने के बारे में सफ़िया के मन में उठे वंवों के आधार पर उसकी चारित्रिक विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
नमक ले जाने के बारे में सफ़िया के मन में उठे वंवों के आधार पर उसकी चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

(i) प्रखर वक्ता-सफ़िया एक साहित्यकार थी, इसलिए वह बातचीत करने में तनिक भी संकोच नहीं करती थी। वह बहस करने में पूर्ण समर्थ थी। नमक ले जाने के बारे में उसका भाई बार-बार उसे समझाकर हार जाता है और उसे कहना पड़ता है कि अब आप से बहस कौन कर सकता है। इस प्रकार सफ़िया एक प्रखर वक्ता थी।

(ii) निडर-वह अत्यंत निडर थी। अपने भाई के बार-बार डराने पर भी वह कस्टमवालों से नहीं डरी। वह अमृतसर के कस्टम अधिकारियों के समक्ष अपने आप ही निडरता से कहती है-“देखिए मेरे पास नमक है, थोड़ा-सा।”

(iii) साहित्यकार-सफ़िया एक श्रेष्ठ साहित्यकार थी। उसका साहित्यकार होना हमें उसके भाई के संवादों से पता चलता है। उसके संवादों से हमें पता लगता है कि उसमें श्रेष्ठ प्रतिभा है। उसका भाई उससे कहता है “अब आपसे कौन बहस करे। आप अदीब ठहरों और सभी अदीबों का दिमाग थोड़ा-सा तो ज़रूर ही घूमा हुआ होता है।”

(iv) ईमानदार-सफ़िया एक ईमानदार नारी है। जब सफ़िया का भाई उसे कहता है कि उसे नमक लेकर सरहद से गुजरना होगा जहाँ कस्टम वाले उसे पकड़ लेंगे तो वहाँ उसकी ईमानदारी का परिचय मिलता है। वह कहती है, “निकल आने का क्या मतलब, मैं क्या चोरी से ले जाऊँगी? छिपा के ले जाऊँगी? मैं तो दिखा के ले जाऊँगी?”

(v) इंसानियत से भरपूर-सफ़िया एक ऐसी इंसान है जिसमें इंसानियत का गुण कूट-कूट कर भरा है। वह सरहदों को देखकर अत्यंत चिंता में पड़ जाती है कि जब दोनों ओर के व्यक्ति, पहनावा, बोलने के अंदाज एक हैं, जब ज़मीन एक है तो फिर ये दो कैसे बने ? इस उदाहरण से उसकी इंसानियत स्वतः ही स्पष्ट हो जाती है-“अरे, फिर वही कानून-कानून कहे जाते हो । क्या सब कानून हुकूमत में ही होते हैं ? कुछ मुहब्बत, मुरौवत, आदमियत, इंसानियत के नहीं होते ? आखिर कस्टम वाले भी इंसान होते हैं, कोई मशीन तो नहीं होते।”

(vi) दृढ निश्चयी-सफ़िया दृढ़ निश्चयी नारी है। उसने नमक लेकर आने का दृढ़ निश्चय किया था जिसे उसने पूर्णतः निभाया और वह अनेक मुसीबतों का सामना करते हुए सरहद के पास गैर-कानूनी होते हुए भी नमक की पुड़िया ले आई थी।

Namak Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 6.
मानचित्र पर एक लकीर खींच देने भर से जमीन और जनता बँट नहीं जाती है-उचित तर्को व उदाहरणों के जरिए इसकी पुष्टि करें। (Delhi C.B.S.E. 2016, A.I.C.B.S.E. 2011, Set-II)
अथवा
‘सीमाएँ बँट जाने से दिल नहीं बँटा करते’- ‘नमक’ कहानी में इस बात को किस तरह सिद्ध किया गया है? (A.I. CBSE 2014, Set-I, II, III)
उत्तर :
सत्य है कि जमीन को चाहकर भी नहीं बाँटा जा सकता और न ही कोई जनता के हृदय की भावनाओं को दबा सकता है। मानचित्र पर खींची गई लकीर जनता के अंतर्मन तक नहीं पहुँच पाती क्योंकि जनता को कोई भले ही शारीरिक रूप से विभक्त कर दे, लेकिन मानसिक व आत्मिक रूप से उसे नहीं बाँट सकता। जैसे सफ़िया को पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी का यह कथन कि मेरा वतन दिल्ली है, आप भी तो हमारी ही तरफ की मालूम होती हैं और अपने अजीजों से मिलने आई होंगी।

जब सफ़िया पाकिस्तान से नमक लेकर चली तो कस्टम अधिकारी बोले कि जामा मस्जिद की सीढ़ियों को मेरा सलाम कहिएगा और उन खातून को यह नमक देते वक्त मेरी तरफ से कहिएगा कि लाहौर अभी तक उनका वतन है और देहली मेरा, तो बाकी सब रफ़्ता-रफ़्ता ठीक हो जाएगा।” भारत-पाक विभाजन के इतने वर्षों बाद भी ये पाकिस्तानी और हिंदुस्तानी व्यक्ति अपनी जन्मभूमि से हृदय से प्यार करते हैं। आज भी वे अपनी जमीन और अपने लोगों के दिलों से दूर नहीं हो पाए। इसी प्रकार सफ़िया को अमृतसर में भारतीय कस्टम अधिकारी कहता है-हाँ मेरा वतन ढाका है। जब डिवीजन हुआ तभी आए, मगर हमारा वतन ढाका है। मैं तो कोई बारह-तेरह साल का था।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 16 नमक

पर नजरूल और टैगोर को तो हम लोग बचपन से पढ़ते थे। जिस दिन हम रात को यहाँ आ रहे थे उसके ठीक एक वर्ष पहले मेरे सबसे पुराने सबसे प्यारे, बचपन के दोस्त ने मुझे यह किताब दी थी। उस दिन मेरी सालगिरह थी-फिर हम कलकत्ता रहे, पढ़े, नौकरी भी मिल गई, पर हम वतन आते-जाते थे।

Namak Class 12 Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 7.
नमक कहानी में भारत व पाक की जनता के आरोपित भेदभावों के बीच मुहब्बत का नमकीन स्वाद घुला हुआ है, कैसे? (A.L. 2016, Set-III, A.I.C.B.S.E. 2009-10, Set-I, 2011, Set-III, 2017 Set-III)
उत्तर :
नमक कहानी में लेखिका ने भारत और पाक के विभाजन से उपजे विस्थापन की समस्या का चित्रण किया है। विस्थापन की समस्या के पश्चात यहाँ की जनता के ऊपर अनेक भेदभाव पैदा हो गए लेकिन इस आरोपित भेदभावों के बीच मुहब्बत का नमकीन स्वाद घुला हुआ दिखाई देता है।

भारत-पाक जनता परस्पर जुड़ी हुई है। उन्हें अब भी अपनी जन्मभूमि की स्वर्णिम यादें सताती हैं। उन्हें अब भी कोई बात याद आने पर एक-दूसरे के प्रति संवेदनाएँ जागृत हो जाती हैं। सफ़िया के द्वारा गैर-कानूनी नमक लाने पर कस्टम अधिकारी उसे रोकते हैं तथा नमक को पकड़ भी लेते हैं लेकिन आपसी मुहब्बत के कारण वे सफ़िया को स्वयं नमक ले जाने की अनुमति दे देते हैं।

क्यों कहा गया?

Class 12 Hindi Chapter 16 Question Answer प्रश्न 1.
क्या सब कानून हुकूमत के ही होते हैं, कुछ मुहब्बत, मुरौवत, आदमियत, इंसानियत के नहीं होते ?
उत्तर :
ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि कानून की दृष्टि में मुहब्बत, मुरौवत, आदमियत, इंसानियत आदि का कोई मूल्य नहीं होता है। आधुनिक युग में कानून केवल सरकारी गुलाम बनकर रह गया है।

नमक’ कहानी के प्रश्न उत्तर Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 2.
भावना के स्थान पर बुद्धि धीरे-धीरे उस पर हावी हो रही थी।
उत्तर
सफ़िया पाकिस्तान से नमक की थैली लाने के लिए अनेक प्रयास करती है लेकिन बार-बार सोचकर चिंता में डूब जाती है कि कहीं किसी ने देख लिया तो पकड़ी जाएगी। अंत में फलों की टोकरी में नमक की थैली लाने का निर्णय करती है, इसलिए कहा गया है कि भावना के स्थान पर बुद्धि धीरे-धीरे उस पर हावी हो रही थी।

Class 12 Namak Question Answer NCERT Solutions प्रश्न 3.
मुहब्बत तो कस्टम से इस तरह गुज़र आती है कि कानून हैरान रह जाता है।
उत्तर :
यह इसलिए कहा गया है कि भारत-पाक बँटवारे के पश्चात दोनों ओर विस्थापन हुआ। कुछ भारतीय पाकिस्तान में तो कुछ पाकिस्तानी भारत में चले गए। लेकिन आज तक भी उनके दिलों में अपने-अपने देश के प्रति प्यार है। वे अपने देशवासियों से आज भी प्रेम करते हैं। इसी प्रेम के कारण वे कई बार ज्यादा छानबीन नहीं करते। यदि करते भी हैं तो प्रेम के आगे वह छोटी पड़ जाती है।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 16 नमक

Namak Class 12 Hindi Ncert Solutions  प्रश्न 4.
हमारी जमीन हमारे पानी का मजा ही कुछ और है।
उत्तर :
‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ अर्थात माँ और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। यह सत्य है कि मनुष्य आजीवन अपनी
माँ और जन्मभूमि को नहीं भूल पाता। उनसे दूर रहकर भी उनके प्रति तनिक प्रेम कम नहीं होता। वहाँ की प्रत्येक वस्तु अमूल्य दिखाई देती है, इसलिए यह कहा गया है कि हमारी जमीन हमारे पानी का मजा ही कुछ और है।

समझाइए तो ज़रा

Namak Question Answer Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 1.
फिर पलकों से कुछ सितारे टूटकर दूधिया आँचल में समा जाते हैं।
उत्तर :
सिख बीबी लाहौर की बात सुनकर सफ़िया के पास आकर बैठ जाती है। फिर वह बीते जमाने में खो जाती है। अपने लाहौर को याद करते हुए ही उसकी आँखों से आंसू निकलकर उसके सफ़ेद आँचल में समा जाते हैं।

नामक पाठ के प्रश्न उत्तर Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 2.
किसका वतन कहाँ है-वह जो कस्टम के इस तरफ़ है या उस तरफ़?
उत्तर :
लेखिका यहाँ व्यंग्य करती हुई कहती है कि किसका वतन कहाँ है-वह जो कस्टम के इस ओर है अर्थात पाकिस्तान है या जो कस्टम के उस ओर अर्थात भारत है? उसका कहना है कि ये सरहदें स्वार्थ के ऊपर बनी हैं अन्यथा भारत-पाकिस्तान में रहने वालों का एक ही वतन है।

पाठ के आस-पास

Class 12 Hindi Chapter Namak Ncert Solutions प्रश्न 1.
‘नमक’ कहानी में हिंदुस्तान-पाकिस्तान में रहने वाले लोगों को भावनाओं, संवेदनाओं से उभारा गया है। वर्तमान संदर्भ में इन संवेदनाओं की स्थिति को तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।
अथवा
नमक कहानी की मूल संवेदना पर अपने विचार व्यक्त कीजिए। (Delhi C.B.S.E.2016, Set-II, C.B.S.E. 2012, Set-1)
अथवा
नमक कहानी में क्या संदेश छिपा हुआ है? स्पष्ट कीजिए। (A.L.C.B.S.E. 2012, Set-I, II, III)
अथवा
भारत-पाक के वर्तमान संबंधों को देखते हुए ‘नमक’ कहानी के संदेश की समीक्षा कीजिए। (Outside Delhi 2017, Set-1)
उत्तर :
नमक कहानी में लेखिका ने हिंदुस्तान-पाकिस्तान में रहने वाले लोगों की भावनाओं और संवेदनाओं को उभारा है। वर्तमान काल में हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों देशों के निवासी शांति और आपसी मेल-जोल चाहते हैं। वे चाहते हैं कि परस्पर दोनों देशों में कोई संघर्ष न हो और सब मिलकर रहें। हिंदुस्तानी बिना रुकावट के पाकिस्तान सीमा पर गर्व से जा सके तथा पाकिस्तानी अपनों को मिलने हेतु बेखौफ़ आ सके। इस प्रकार दोनों देशों के लोगों की एक-दूसरे के प्रति गहन संवेदनाएँ हैं। वे परस्पर प्रेमभावना के द्वारा शांति चाहते हैं जिससे उनमें भाईचारा बना रहे।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 16 नमक

नमक पाठ के प्रश्न उत्तर Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 2.
सफ़िया की मन:स्थिति को कहानी में विशिष्ट संदर्भ में अलग तरह से स्पष्ट किया गया है। अगर आप सफ़िया की जगह होते तो क्या आपकी मनःस्थिति भी वैसी ही होती है ?
उत्तर :
स्पष्ट कीजिए। जी हाँ, अगर हम सफ़िया की जगह होते तो हमारी मनःस्थिति भी वैसी ही होती। हम भी सफ़िया की भाँति अपनी माँ का सम्मान करने हेतु कोई भी गैर-कानूनी वस्तु को लाने की भरपूर कोशिश करते भले ही चाहे हम कस्टम अधिकारी द्वारा पकड़ लिए जाते। ऐसी वस्तु को लाने हेतु तरह-तरह की बातें सोचते जिससे उसे कस्टम अधिकारियों की नजरों से बचाया जा सके। हमें भी सफ़िया की तरह मन में अनेक बातें ध्यान में आतीं कि अगर पकड़े गए तो सामान कैसे ले जाएँगे, माँ को क्या जवाब देंगे आदि।

Class 12 Hindi Namak Ncert Solutions प्रश्न 3.
भारत-पाकिस्तान के आपसी संबंधों को सुधारने के लिए दोनों सरकारें प्रयासरत हैं। व्यक्तिगत तौर पर आप इसमें क्या योगदान दे सकते/सकती हैं ?
उत्तर :
भारत-पाकिस्तान के आपसी संबंधों को सुधारने के लिए दोनों देशों की सरकारें बहुत समय से प्रयासरत हैं। व्यक्तिगत तौर पर मैं इसमें निम्नलिखित योगदान दे सकता हूँ

(i) मैं अखबार के माध्यम से दोनों देशों की सरकार से यह अपील करूँगा कि आपसी संबंध सुधारने से जनसामान्य को बहुत लाभ होगा, अतः वे उन्हें सुधारने का प्रयास करें।

(ii) विदेश मंत्रियों को एक बुद्धिजीवी प्राणी के नाते सचेत करने का प्रयास करूंगा कि ऐसा करना जनहित के लिए लाभदायक होगा।

(iii) दोनों देशों के सर्वोच्च पदाधिकारी राष्ट्रपति महोदय जी को पत्र के माध्यम से अपील करूंगा।

(iv) मैं पाकिस्तान की यात्रा करके वहाँ की लोगों की भावनाओं को जानने का प्रयास करूंगा और आपकी भावनाओं और अपेक्षाओं से उन्हें अवगत कराने का प्रयास करूंगा।

Namak Chapter Question Answer Class 12 प्रश्न 4.
लेखिका ने विभाजन से उपजी विस्थापन की समस्या का चित्रण करते हुए सफ़िया के माध्यम से यह भी परोक्ष रूप में संकेत किया है कि इसमें भी विवाह की रीति के कारण स्त्री सबसे अधिक विस्थापित है। क्या आप इससे सहमत हैं?
उत्तर :
हाँ, हम इस बात से सहमत हैं कि विवाह की रीति के कारण स्त्री सबसे अधिक विस्थापित है। प्रस्तुत कहानी नमक के माध्यम से लेखिका ने इसी का परोक्ष रूप में चित्रण किया है। विस्थापन के कारण साफ़िया का मायका पाकिस्तान में रह गया जबकि ससुराल हिंदुस्तान में। सिख बीबी भी इसी रीति के कारण पाकिस्तान से विस्थापित होकर हिंदुस्तान आई थीं। वे आजीवन इसी समस्या का शिकार बनती रहीं।

Namak Hindi Class 12 NCERT Solutions  प्रश्न 5.
विभाजन के अनेक स्वरूपों में बँटी जनता को मिलाने की अनेक भूमियाँ हो सकती हैं-रक्त संबंध, विज्ञान, साहि ।। कला। इनमें से कौन सबसे ताकतवर है और क्यों ?
उत्तर:
विभाजन के अनेक स्वरूपों में बंटी जनता को मिलाने के लिए साहित्य सबसे ताकतवर है, क्योंकि साहित्य ही एक ऐसा माध्यम ! है जो जनता की सोई हुई संवेदनाओं को जागृत कर सकता है। यह मानव-मानव के मध्य विराजमान सभी संकीर्णताओं को मिटा । सकता है। इसके द्वारा मनुष्य अपनी सारी सीमा-रेखाओं को भुलाकर मनुष्य को मनुष्य समझने लगता है।

आपकी राय

Namak Solutions Class 12 NCERT Solutions प्रश्न 1.
मान लीजिए आप अपने मित्र के पास विदेश जा रहे हैं। आप सौगात के तौर पर भारत की कौन-सी चीज़ ले जाना पसंद करेंगे और क्यों?
उत्तर :
मैं भारत से आम, गर्म मसाले, पापड़ और दालें ले जाना पसंद करूंगा। क्योंकि मुझे लगता है कि भारत में इनकी उपज अधिक होती है और पाकिस्तान में कम।

भाषा की बात

Ncert Solutions Of Namak Class 12  प्रश्न 1.
नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यान से पढ़िए
(क) हमारा वतन तो जो लाहौर ही है।
(ख) क्या सब कानून हुकूमत के ही होते हैं? सामान्यतः ‘ही’ निपात का प्रयोग किसी बात पर बल देने के लिए किया जाता है। ऊपर दिए गए दोनों वाक्यों में ‘ही’ के प्रयोग से अर्थ में क्या परिवर्तन आया है? स्पष्ट कीजिए। ‘ही’ का प्रयोग करते हुए दोनों तरह के अर्थ वाले पाँच-पाँच वाक्य बनाइए।
उत्तर
(क) यहाँ ही के प्रयोग से अर्थ में यह परिवर्तन आया है कि हमारा वतन केवल लाहौर है, अन्य कोई नहीं।
(ख) यहाँ क्या सब कानून हुकूमत के चलते हैं किसी और के नहीं?

वाक्य –

  • हमारा देश तो भारत ही है।
  • हमारा शहर तो जबलपुर ही है।
  • सर्वोत्तम शहर तो बेंगलुरु ही है।
  • हमारा राज्य तो हरियाणा ही है।
  • हमारी राजधानी तो दिल्ली ही है।

वाक्य –

  • क्या सब नियम सरकार के ही होते हैं?
  • क्या सारी छूट पूँजीपतियों के लिए ही है?
  • क्या सारी सुविधाएँ नेताओं के लिए ही हैं?
  • क्या जीने का हक अमीरों का ही है?
  • क्या मौलिक अधिकार बड़ों के लिए ही है?

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 16 नमक

Class 12 Hindi Chapter Namak Question Answer प्रश्न 2.
नीचे दिए गए शब्दों के हिंदी रूप लिखिए
मरौवत, आदमियत, अदीब, साडा, मायने, सरहद, अक्स, लबोलहजा, नफ़ीस
उत्तर :
मुरैवत – संकोच, छूट
आदमियत – इंसानियत, मानवता
अदीब – साहित्यकार, साहित्य
साडा – अपना, हमारा
मायने – अर्थ
सरहद – सीमा
अक्स – चित्र, परछाई
लबोलहजा – उच्चारण, भाषा और बोली
नफ़ीस – सुंदर, निर्मल, कोमल

प्रश्न 3.
पंद्रह दिन यों गुजरे कि पता ही नहीं चला-वाक्य को ध्यान से पढ़िए और इसी प्रकार के (यों, कि, ही के पाँच वाक्य बनाइए)
(i) जीवन यों गुजरा कि पता ही नहीं चला।
(ii) स्कूल में, दो साल यों गुजर गए कि महसूस ही नहीं हुआ।
(iii) इस यात्रा के सात दिन यों बीत गए कि पता ही नहीं चला।
(iv) इस वर्ष की सर्दियों यों गुजर गई कि पता नहीं लगा।
(v) आज का दिन बातों-बातों में यों व्यतीत हो गया कि शाम ही हो गई।

सृजन के क्षण

प्रश्न 1.
‘नमक’ कहानी को लेखक ने अपने नजरिए से अन्य पुरुष शैली में लिखा है। आप सफ़िया की नज़र से/उत्तम पुरुष शैली में इस कहानी को अपने शब्दों में कहें।
उत्तर
अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं कीजिए।

इन्हें भी जानें

1. मुहर्रम – इस्लाम धर्म के अनुसार साल का पहला महीना, जिसकी दसवीं तारीख को इमाम हुसैन शहीद हुए।
2. सैयद – मुसलमानों के चौथे खलीफ़ा अली के वंशजों को सैयद कहा जाता है।
3. इकबाल – ‘सारे जहाँ से अच्छा’ के गीतकार।
4. नजरुल इस्लाम – बाँग्ला के क्रांतिकारी कवि।
5. शमसुल इस्लाम – बांग्लादेश के प्रसिद्ध कवि।
6. इस कहानी को पढ़ते हुए कई फ़िल्में, कई रचनाएँ, कई गाने आपके जेहन में आए होंगे। उनकी सूची बनाइए। किन्हीं दो (फ़िल्म और रचना) की विशेषता को लिखिए। आपकी सुविधा के लिए कुछ नाम दिए जा रहे हैं।

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 16 नमक

फ़िल्में – रचनाएँ
1947 अर्थ : तमस (उपन्यास-भीष्म साहनी)
मम्मो : खोल दो (कहानी – मंटो)
ट्रेन टु पाकिस्तान : जिंदगीनामा (उपन्यास – कृष्णा सोबती)
गदर : पिंजर (उपन्यास – अमृता प्रीतम)
खामोशपानी : झूठा सच (उपन्यास – यशपाल)
हिना : मलबे का मालिक (कहानी – मोहन राकेश)
वीर जारा : पेशावर एक्सप्रेस (कविता – कुमार विकल)

7. सरहद और मजहब के संदर्भ में इसे देखें
तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा।
मालिक ने हर इंसान को इंसान बनाया,
हमने उसे हिंदू या मुसलमान बनाया।
कुदरत ने तो बख्शी थी हमें एक ही धरती,
हमने कहीं भारत कहीं, ईरान बनाया।।
जो तोड़ दे हर बंद वो तूफ़ान बनेगा।
इंसान की औलाद है इंसान बनेगा। —- फ़िल्म : धूल का फूल; गीतकार : साहिर लुधियानठी

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