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NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र में क्या अंतर है?
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) 1

प्र० 2. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:  पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. यहाँ एक बाजार संपन्न होता है जो क्रेताओं तथा विक्रेताओं को जोड़ता है। यह बाजार स्वतंत्र माँग और पूर्ति के बलों से कार्यान्वित होता है।
  2. वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतें माँग तथा पूर्ति की बाजार शक्तियों द्वारा निर्धारित होती है।
  3.  सरकार उत्पादकों तथा परिवारों के निर्णयों में कोई हस्तक्षेप नहीं करती है। अथवा हम कह सकते हैं कि सरकार माँग तथा पूर्ति की बाजार शक्तियों की स्वतंत्र अंतक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं करती है। यह देश
    की कानून एवं व्यवस्था तथा प्रतिरक्षा के रख-रखाव पर अपना ध्यान केंद्रित करती है।
  4. अधिकारों के कारण पूँजी के संचय की अनुमति दी गई है। पूँजी उत्पादन के एक मुख्य साधन के रूप में उभरती है।
  5. उपभोक्ता (परिवार) प्रभुत्व होता है। वे अपनी आदतों एवं प्राथमिकताओं के अनुसार क्रय करते हैं तथा अपनी संतुष्टि को अधिकतम करते हैं उत्पादक उपभोक्ताओं द्वारा माँगी जाने वाली वस्तुओं तथा सेवाओं
    के उत्पादन के द्वारा अपने लाभों को अधिकतम करते हैं।

प्र० 3. समष्टि अर्थशास्त्र की दृष्टि से अर्थव्यवस्था के चार प्रमुख क्षेत्रकों का वर्णन करें।
उत्तर:

  1. परिवार क्षेत्र-इसमें वस्तुओं तथा सेवाओं के उपभोक्ताओं को सम्मिलित किया जाता है। परिवार या गृहस्थ क्षेत्र उत्पादन के कारकों का स्वामी भी होता है।
  2. उत्पादक क्षेत्र-इनमें उन सबको सम्मिलित किया जाता है जो उत्पादन की क्रिया में लगे होते हैं। अर्थव्यवस्था की सभी उत्पादन करने वाली इकाइयाँ (या फेर्ने) क्षेत्र में सम्मिलित होती हैं। वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन हेतु फर्मे उत्पादन के कारकों (भूमि, श्रम, पूँजी तथा उद्यमशील कौशल) की सेवाओं को परिवार क्षेत्र से भाड़े पर प्राप्त करती हैं।
  3. सरकारी क्षेत्र-कल्याणकारी एजेंसी के रूप में कार्य करता है जैसे-न्याय तथा कानून व्यवस्था को बनाए | रखना, सुरक्षा तथा अन्य सार्वजनिक कल्याण संबंधी सेवाएँ। सरकार एक उत्पादक के रूप में भी कार्य करती
    है (जैसे-सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पाद।)
  4. विदेशी क्षेत्र-इसे शेष विश्व क्षेत्र भी कहा जाता है। इस क्षेत्र का कार्य वस्तुओं का निर्यात एवं आयात करना तथा घरेलू अर्थव्यवस्था एवं विश्व के अन्य देशों के बीच पूँजी का प्रवाह करना है।

प्र० 4. 1929 की महामंदी का वर्णन करें।
उत्तर: 1929 में महामंदी ने जन्म लिया जो 1933 तक बनी रही इस महामंदी ने विश्व के विकसित देशों को चूर-चूर कर दिया। इस महामंदी में उत्पादन था परन्तु खरीदने वाले नहीं थे। 1929-33 के दौरान संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और यूरोपीय देशों के कुल उत्पादन तथा रोजगार के स्तरों में भारी गिरावट आई। इसका प्रभाव दुनिया के अन्य। देशों पर भी पड़ा।

  1. कई कारखाने बंद हो गए तथा श्रमिकों को निकाल दिया गया।
  2. बेरोजगारी की दर 1929 से 1933 तक 3% से बढ़कर 25% तक हो गई।
  3. 1929-33 के दौरान संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में समग्र निर्गत में लगभग 33% की गिरावट आई।

इन परिस्थितियों में केन्ज की पुस्तक ‘रोजगार, ब्याज एवं मुद्रा का सामान्य सिद्धान्त’ 1936 में प्रकाशित हुई जिससे समष्टि अर्थशास्त्र जैसे विषय का उद्भव हुआ।

[MORE QUESTIONS SOLVED] (अन्य हल प्रश्न)

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. परिवार क्षेत्रक की मुख्य भूमिका क्या है?
(क) उपभोग
(ख) निवेश
(ग) उत्पादन
(घ) आयात

2. विदेशी क्षेत्र का अन्य नाम क्या है?
(क) बाह्य क्षेत्र
(ख) उत्पादन क्षेत्र
(ग) विश्व क्षेत्र
(घ) (क) और (ख) दोनों

3. समष्टि अर्थशास्त्र का जन्मदाता किसे कहा जाता है?
(क) एड्म स्मिथ
(ख) जे एम केन्स
(ग) मार्शल
(घ) रोबिन्स

4 पूँजीवादी अर्थव्यवस्था को ………… भी कहा जाता है।
(क) समाजवादी अर्थव्यवस्था
(ख) मिश्रित अर्थव्यवस्था
(ग) बाजार अर्थव्यवस्था
(घ) उपरोक्त सभी

5. आर्थिक महामंदी किस वर्ष में उत्पन्न हुई?
(क) 1929
(ख) 1932
(ग) 1936
(घ) 1945

6. जे. एम. केन्स की किताब ‘रोजगार एवं मुद्रा का सामान्य सिद्धान्त’ कब प्रकाशित हुई?
(क) 1929
(ख) 1932
(ग) 1936
(घ) 1945

उत्तर:
1. (क)
2. (घ)
3. (ख)
4 (ग)
5. (क)
6. (ग)

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NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 3 Money and Banking (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. वस्तु विनिमय प्रणाली क्या है? इसकी क्या कमियाँ हैं?
उत्तर: जब एक वस्तु का विनिमय प्रत्यक्ष रूप में दूसरी वस्तु से होता है तो उसे वस्तु विनिमय कहा जाता है। अन्य शब्दों में, वस्तु विनिमय प्रणाली उस प्रणाली को कहा जाता है जिसमें वस्तु का लेन-देन वस्तु से किया जाता है।
वस्तु विनिमय प्रणाली की निम्नलिखित कमियाँ हैं
1. आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव-वस्तु विनिमय के लिए आवश्यक है कि एक व्यक्ति की आवश्यकता की वस्तु दूसरे व्यक्ति के पास हो और जो वस्तु दूसरा व्यक्ति चाहता है, वह पहले के पास हो। दूसरे शब्दों में, पहले व्यक्ति की वस्तु की पूर्ति, दूसरे की माँग की वस्तु हो और दूसरे व्यक्ति की। पूर्ति की वस्तु, पहले व्यक्ति के माँग की वस्तु हो। जब तक आवश्यकताओं को इस प्रकार का दोहरा संयोग नहीं होता, वस्तु की लेन-देन नहीं हो सकती। उदाहरण के लिए यदि किसी के पास जूता है, परन्तु वह उसके बदले में गेहूँ तैयार नहीं तो विनिमय संभव नहीं है।
2. सामान्य लेखा इकाई का अभाव-वस्तु विनिमय प्रणाली में भिन्न-भिन्न वस्तुओं का मूल्य जानने के लिए और तुलना करने के लिए कोई सर्वमान्य मापक नहीं है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति गेहूँ का
लेन-देन करना चाहता है तो उसे गेहूं का मूल्य कपड़े के रूप में (1 किलो गेहूँ = 1 मीटर कपड़ा), दूध के रूप में (1 किलो गेहूँ = 2 लीटर दूध) आदि बाजार में उपलब्ध हर वस्तु के रूप में पता होना चाहिए।
यह अत्यन्त कठिन कार्य है।
3. स्थगित भुगतान के मानक का अभाव-वस्तु विनिमय व्यवस्था में वस्तुओं का भविष्य में भुगतान करने में कठिनाई होती है। इस प्रणाली में ऐसी कोई इकाई नहीं होती जिसे स्थगित/भविष्य भुगतान के मानक के रूप में प्रयोग कर सकें। वस्तुओं के रूप में भावी भुगतानों का वस्तुओं के रूप में भुगतान किया जाए तो इसमें कई कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं। जैसे भविष्य में दी जानेवाली वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर विवाद, भविष्य में भुगतान की वस्तु पर असहमति, अनुबंध की अवधि के दौरान वस्तु के अपने मूल्यमान में उतार-चढ़ाव का जोखिम जिससे एक को लाभ तथा दूसरे को हानि होने की संभावना रहती है। उदाहरण के लिए कीमत X ने 10 वर्ष के लिए अपना रथ श्रीमान Y को दिया। 10 वर्ष बाद वह वही रथ नहीं लौटा सकता, क्योंकि वे पुराने हो गए। यदि वह नया रथ लौटाता है तो गुणवत्ता पहले वाले रथ
से अधिक भी हो सकती है और कम भी।
4. मूल्य संचय का अभाव-यहाँ मूल्य को संचय वस्तुओं के रूप में हो सकता है, परन्तु मूल्य को वस्तुओं के रूप में संचित करने में निम्नलिखित कठिनाइयाँ हैं|
(i) मूल्य को वस्तुओं के रूप में संचित करने में अधिक स्थान की आवश्यकता पड़ती है।
(ii) वस्तुएँ नाशवान होती हैं।
(iii) वस्तुओं के मूल्य में अंतर आ जाता है।
(iv) वस्तुओं को रखे हुए भी मूल्यहास होता है। उदाहरण के लिए यदि एक व्यक्ति अपनी बेटी के विवाह के लिए मूल्य का संचय करना चाहता है तो वह क्या संचय करेगा? क्या वह बारातियों का भोजन
बनवाकर रख देगा? क्या वह फर्नीचर खरीदकर रख देगा?
5. अन्य कठिनाइयाँ-
(i) वस्तु विनिमय में ऐसी वस्तुओं के लेन-देन में बहुत कठिनाई आती है जिसका
विभाजन और उपविभाजन नहीं हो सकता। मान लो 1 बैल = 100 किलो गेहूँ परन्तु बैल का मालिक केवल 50 किलो गेहूं खरीदना चाहता है तो वह आधा बैल नहीं दे सकता।
(ii) वस्तु विनिमय प्रणाली के अन्तर्गत यदि कोई व्यक्ति एक स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान पर जाना चाहता है तो वह अपने धन को दूसरे स्थान पर ले जाने में असमर्थ हो सकता है। जैसे कोई अपने खेत एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं ले जा सकता।

प्र० 2. मुद्रा के प्रमुख कार्य क्या-क्या हैं? मुद्रा किस प्रकार वस्तु विनिमय प्रणाली की कमियों को दूर करता है?
उत्तर: मुद्रा के हैं कार्य चार – माध्यम, मापक, मानक, भण्डार”
मुद्रा के प्रमुख कार्यों को दो भागों में बाँटा जा सकता है।
1. प्राथमिक कार्य ।
2. गौण कार्य
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 3 Money and Banking (Hindi Medium) 2
1. विनिमय का माध्यम-यह मुद्रा का सर्वप्रथम और सर्वमहत्वपूर्ण कार्य है। मुद्रा के इस कार्य ने क्रय और विक्रय की इस क्रिया को एक दूसरे से भिन्न कर दिया है। आज का समय सभी अर्थव्यवस्थाएँ मौद्रिक अर्थव्यवस्थाएँ हैं। वस्तु विनिमय प्रणाली के सबसे बड़ी कमी दोहरे संयोग का अभाव है। इसे मुद्रा के इस कार्य से दूर कर दिया हैं अब यदि एक वस्त्रों का विक्रेता चावल खरीदना चाहता है तो उसे ऐसा चावल विक्रेता ढूंढने की आवश्यकता नहीं है जो बदले में वस्त्र चाहता है। वह वस्त्र बेचकर मुद्रा प्राप्त कर सकता है। और उस प्राप्त मुद्रा से चावल खरीद सकता है। अतः मुद्रा से दोहरे संयोग के अभाव की कमी स्वतः दूर हो जाती है। मुद्रा के इसी कार्य के कारण मुद्रा को सामान्यकृत क्रय शक्ति कहा जाता है।
2. मूल्य की इकाई-मुद्रा का ‘लेखा की इकाई’ कार्य को मूल्यमान का मापक भी कहा जाता है। मुद्रा के इस कार्य को अर्थ है कि जिस प्रकार प्रत्येक चर को मापने की एक इकाई होती है वजन को किलो में, कद को सेमी. में, दूरी को किमी. में इसी प्रकार किसी वस्तु के मूल्य को मुद्रा में मापा जाता है। अतः मुद्रा मूल्य की मापक इकाई का कार्य करती है। यदि कोई पूछे कि इस पर्स का क्या मूल्य है। तो हम यह नहीं कहेंगे कि एक पर्स बराबर 5 किलो चावल या 10 पेन बल्कि हम मौद्रिक रूप में उसका मूल्य बतायेंगे। अतः मुद्रा लेखा की इकाई कार्य करती है। वस्तु विनिमय प्रणाली में सामान्य मूल्य मापक ‘या लेखा की इकाई का अभाव या जिसे मुद्रा के इस कार्य ने दूर कर दिया।
3. स्थगित भुगतान का मान–आस्थगित भुगतान वे भुगतान होते हैं जो भविष्य में किसी समय भुगतान किये जाते हैं। क्योंकि मुद्रा का अपना मूल्य अर्थात् उसकी क्रय शक्ति सामान्यतः अपरिवर्ती रहती है। एक आधुनिक अर्थव्यवस्था में व्यावहारिक लेन-देन में साख और उधार का बहुत महत्व रहता है। आस्थागित भुगतान या भविष्य भुगतान मुद्रा में ही संभव होते हैं क्योंकि एक तो मुद्रा का मूल्य स्थिर रहता है और इससे मुद्रा का विनिमय का माध्यम कार्य उसे सामान्यकृत क्रयशक्ति प्रदान करता है। मुद्रा का प्रयोग भविष्य भुगतानों से संबंधित खतरे को भी कम कर देती है। आज के समय में मुद्रा के कारण ही इतने दीघकालीन
समझौते हो पाते हैं।
4. मूल्य का संचय-जब कोई व्यक्ति अपनी भविष्य की आवश्यकताओं के लिए मूल्य का संचय’ करना चाहता है तो वह केवल मुद्रा के रूप में ही कर सकता है। इसके कारण इस प्रकार हैं:
(i) मुद्रा की क्रय शक्ति अन्य वस्तुओं की तुलना में अपरिवर्तित रहती है।
(ii) मुद्रा को कीड़ा दीमक आदि नहीं लगता अर्थात् मुद्रा रखे हुए नष्ट नहीं होती।
(iii) मुद्रा का संचय करने में बहुत कम स्थान की आवश्यकता पड़ती है।
(iv) मुद्रा को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर या एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजा जा सकता है मान लो कोई व्यक्ति अपनी बेटी की शादी के लिए अभी से कुछ बचत करना चाहते हैं तो क्या वे अभी से भोजन बनवा सकते हैं या वे अभी से वस्त्र खरीदकर रख सकते हैं? नहीं वे मुद्रा के रूप में अपने भविष्य की आवश्यकताओं के लिए मूल्य का संचय कर सकते हैं।
5. मूल्य का हस्तांतरण-मुद्रा के कारक मूल्य का हस्तांतरण आसान हो गया है। यदि किसी व्यक्ति को भारत से कनाडा में मूल्य का हस्तांतरण करना है तो मुद्रा के माध्यम से यह बहुत सहज हो गया है। बैंक मुद्रा इसमें और अधिक सहायक है। मुद्रा के इसी कार्य के कारण आज संपूर्ण विश्व एक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तरह लेन-देन कर पा रहा है।
मुद्रा के प्रत्येक कार्य विनिमय प्रणाली की एक कमी को दूर कर रहा हैविनिमय प्रणाली की कमी मुद्रा का वह कार्य जो इस कमी को दूर कर रहा है।
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 3 Money and Banking (Hindi Medium) 2.1
इस प्रकार मुद्रा का प्रत्येक कार्य वस्तु विनिमय प्रणाली की एक कमी को दूर कर रहा है।

प्र० 3. संव्यवहार के लिए मुद्रा की माँग क्या है? किसी निर्धारित समयावधि में संव्यवहार मूल्य से यह किसी प्रकार संबंधित है?
उत्तर: मुद्रा की माँग संव्यवहार को पूरा करने के उद्देश्य से की जाती है तो इसे संव्यवहार के लिए मुद्रा की माँग कहा जाता है। अन्य शब्दों में यह गृहस्थों तथा फर्मों द्वारा अपने दिन-प्रतिदिन के लेन-देन के कार्यों के लिए की गई मुद्रा की माँग है। सौदों के लिए नकदी संचय की माँग इसीलिए होती है, क्योंकि मुद्रा की प्राप्ति और उसके व्यय में समय का अन्तर होता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी आये मासिक आधार पर प्राप्त करता है और मास के पहले दिन बिल का भुगतान करते हैं, तो हमें पूरे मास नकद राशि धारण करने की आवश्यकता नहीं है, परन्तु ऐसा नहीं है लोग अलग-अलग समय पर आय प्राप्त करते हैं। उनका व्यय उस पूरे समयांतराल में लगातार होता रहता है। व्यक्ति एवं फर्मे कितनी मात्रा में नकदी का संचय करना चाहेंगे यह सौदों की कुल मात्रा पर निर्भर करता है। अर्थव्यवस्था में कुल सौदों की मात्रा राष्ट्रीय आय पर निर्भर करती है। सूत्र के रूप में
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 3 Money and Banking (Hindi Medium) 3
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 3 Money and Banking (Hindi Medium) 3.1
अतः किसी अर्थव्यवस्था में संव्यवहार के लिए मुद्रा की माँग का अर्थव्यवस्था की वास्तविक आय और उसके औसत कीमत स्तर के बीच धनात्मक संबंध होता है।

प्र० 4. मान लीजिए कि एक बंधपत्र दो वर्षों बाद 500 ₹ के वादे का वहन करता है, तत्काल कोई प्रतिफल प्राप्त नहीं
होता है। यदि ब्याज दर 5% वार्षिक है, तो बंधपत्र की कीमत क्या होगी?
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 3 Money and Banking (Hindi Medium) 4

प्र० 5. मुद्रा की सट्टा माँग और ब्याज की दर में विलोम संबंध क्यों होता है?
उत्तर: जब हम मुद्रा को सट्टा माँग के उद्देश्य से अपने पास रखते हैं तो मुद्रा को नकदी रूप में अपने पास रखने की अवसर लागत ब्याज दर है। यदि हम 5000 बैंक में रखें और यह हमें 10% प्रति वर्ष ब्याज देता है तो इस 5000 को अपने पास नकदी के रूप में रखने की अवसर लागत १ 500 है, परन्तु यदि ब्याज दर कम होकर 5% हो जाए तो अवसर लागत भी कम होकर ₹ 250 हो जायेगी।
अतः ब्याज की दर अधिक तो नकदी रखने की अवसर लागत अधिक और तदनुसार मुद्रा की सट्टा माँग कम होगी और विपरीत।। इसे अन्य शब्दों में भी समझा जा सकता है। एक व्यक्ति के पास दो विकल्प हैं एक वह अपने पास उपलब्ध नकद मुद्रा को बान्ड में निवेश कर दे और दूसरा वह उसे सट्टा उद्देश्य के लिए अपने पास रखे। यदि वह नकदी को सट्टा उद्देश्य के लिए अपने पास रखता है तो उसे वह आय छोड़नी होगी, जो वह इसे बॉण्ड में निवेश करके ब्याज के रूप में प्राप्त कर सकता है। इसे हम नकदी रखने की कीमत कह सकते हैं। माँग के नियम
के अनुसार, कीमत बढ़ने पर माँगी गई मात्रा कम होती है तथा विपरीत अतः ब्याज दर बढ़ने पर सट्टा उद्देश्य के लिए माँगी गई मुद्रा की मात्रा में कमी होगी तथा विपरीत। अतः मुद्रा की सट्टा माँग और ब्याज दर में विपरीत संबंध है।

प्र० 6. तरलता पाश क्या है?
उत्तर: तरलता पाश एक ऐसी स्थिति है जिसमें ब्याज की दर अति निम्न होती है और हर निवेशक भविष्य में ब्याज दर में वृद्धि की आशा रखता है। परिणामस्वरूप निवेशकों को बॉण्ड में निवेश करना आकर्षक नहीं लगता। ऐसी हालत में लोग बॉण्डस बेचकर मुद्रा अपने पास इकट्ठी करते जाते ? हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में बॉण्डस ऐसी परिसंपत्ति ना के बराबर आय 7प्रदान करती है। इससे मुद्रा के लिए सट्टेबाजी की माँग अनंत या पूर्ण लोचदार हो जाती है। इसे नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है। ब्याज दर = 2% के बाद मुद्रा माँग वक्र X-अक्ष के समान्तर हो E4 गया है। इस स्थिति को तरलता पाश या तरलता फंदा कहा जाता
तरलता पाश है। यह स्थिति मौद्रिक अधिकारियों के लिए एक कठिन चुनौती है। क्योंकि इस स्थिति में मौद्रिक नीति द्वारा भी साख व मुद्रा की पूर्ति । को नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 3 Money and Banking (Hindi Medium) 6

प्र० 7. भारत में मुद्रा पूर्ति की वैकल्पिक परिभाषा क्या है?
उत्तर: भारत में मुद्रा की पूर्ति की भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा चार वैकल्पिक परिभाषाएँ दी गई हैं नामतः M1, M2, M3 और M4 जो इस प्रकार हैं।
M1 = C + DD + OD
M2 = M1 + डाकघर बचत बैंकों में बचत जमाएँ।
M3 = M1 + वाणिज्यिक बैंकों की निवल आवधिक जमाएँ
M4 = M3 + डाकघर बचत संस्थाओं में कुल जमाएँ (राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्रों को छोड़कर)
जहाँ, C = जनता के पास करेंसी
DD = माँग जमाएँ।
OD = रिजर्व बैंक के पास अन्य जमाएँ
इसे M1 को संकुचित मुद्रा तथा M3 को व्यापक मुद्रा कहा जाता है?

प्र० 8. वैधानिक पत्र क्या है? कागजी मुद्रा क्या है?
उत्तर: वैधानिक पत्र अथवा वैधानिक मुद्रा – इससे तात्पर्य उस मुद्रा से है जिसे कानून का समर्थन प्राप्त है और कोई भी व्यक्ति इसे अस्वीकार नहीं कर सकता। उदाहरण के लिए, भारत की घरेलू सीमा के भीतर कोई भी व्यक्ति किसी प्रकार के लेन-देन के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किये गए 100 ₹ या उससे अधिक के नोटों को लेने से इंकार नहीं कर सकता।
कागजी मुद्रा – इससे तात्पर्य भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी करेंसी नोट और सिक्कों से हैं इसका सोने और चाँदी के सिक्कों की तरह कोई आंतरिक मूल्य नहीं होता और यह सरकार के आदेश पर प्रचलित होती है। इस मुद्रा को आदेश मुद्रा भी कहा जाता है।

प्र० 9. उच्च शक्तिशाली मुद्रा क्या है?
उत्तर: उच्च शक्तिशाली मुद्रा से तात्पर्य देश के मौद्रिक प्राधिकरण द्वारा निगमित की गई मुद्रा से है, इसे मौद्रिक आधार
के नाम से भी जाना जाता है। उच्च शक्तिशाली मुद्रा में करेंसी तथा व्यावसायिक बैंक के पास माँग जमाएँ तथा भारतीय रिजर्व बैंक के पास रखी अन्य जमाएँ शामिल की जाती हैं। यह भारतीय रिजर्व बैंक की देश की मौद्रिक प्राधिकरण की संपूर्ण देयता को दिखाता है। यदि कोई आम जनता भारतीय रिजर्व बैंक को करेंसी नोट प्रस्तुत करता है, तो रिजर्व बैंक को उस मुद्रा के मूल्य पर अंकित मूल्य की राशि के बराबर का भुगतान करना होता है। इसी तरह भारतीय रिजर्व बैंक में जमा की गई राशि भी लौटाए जाने योग्य होती है, जब जमाधारी इसकी माँग करते हैं।

प्र० 10. व्यावसायिक बैंक के कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: व्यावसायिक बैंक के कार्य-बैंकों के दो सबसे अधिक महत्वपूर्ण कार्य हैं-जमा स्वीकार करना और ऋण देना।
1. जमा स्वीकार करना-बैंक लोगों की बचतों को जमा करता है। बैंकों के साथ हम तीन प्रकार के खाते खोल सकते हैं-
(i) बचत खाता
(ii) चालू खाता
(iii) सावधि खाता
(i) बचत खाता – यह खाता छोटी-छोटी बचतों को प्रोत्साहित करने के लिए होता है। यह परिवारों के लिए लाभदायक है, जिनको एक बार रुपया जमा करवाने के बाद तुरंत ज़रूरत नहीं पड़ती है। एक निश्चित सीमा तक ही रकम को इस खाते से हम निकलवा सकते हैं। इसमें ब्याज की दर सावधि जमा से कम होती है।
(ii) चालू खाता – यह ऐसी जमा होती है जिनका भुगतान बैंको को खाताधारियों की माँग पर तत्काल करना होता है इस खाते में जमा राशियाँ, माँग जमा कहलाती हैं, क्योंकि माँगने पर कभी भी निकलवा सकते हैं। यह खाता व्यापारी लोगों के लिए उपयोगी होता है, जिनको दिन में कई बार रुपया निकलवाने की जरूरत पड़ती है। चूंकि बैंक को इस खाते का पैसा सदा तैयार रखना पड़ता है, इसलिए इस खाते में बैंक ब्याज नहीं देता, बल्कि उनसे कुछ-न-कुछ लेता है। चेक द्वारा पैसा निकालने की सुविधा उपलब्ध रहती है।
(iii) सावधि खाता-सावधि जमा वह होती है जिसकी परिपक्वता की अवधि निर्धारित होती है। इसमें दीर्घ व निश्चित काल के लिए जमा स्वीकार की जाती है, इसलिए इस खाते में ब्याज की रकम अधिक होती है। यह निश्चित अवधि के लिए होता है और समय पूरा होने पर ही इसे निकलवा सकते हैं इससे पहले नहीं। इसमें चेक की सुविधा नहीं होती। यह बहुत ही धनी लोगों के लिए लाभकारी है, जिनको कभी रुपए की जरूरत नहीं होती। मियादी जमा की एक किस्म आवती जमा भी है जिसमें खाता धारक एक निश्चित अवधि तक हर महीन निश्चित राशि जमा करता है। जैसे-3 वर्षों तक 100 ₹ प्रति मास जमा करना। इसे मुद्रा की पूर्ति में शामिल नहीं किया जाता।।
2. ऋण देना-बैंक का दूसरा मुख्य कार्य ग्राहकों को ऋण देना है। बैंक दूसरे लोगों से जमा स्वीकार करता है, उसका एक निश्चित भाग सुरक्षा कोष में रखकर, शेष राशि व्यापारियों व उद्यमियों को उत्पादक कार्यों के लिए उधार दे देता है और उस पर ब्याज कमाता है। वास्तव में बैंक की आय का यही मुख्य स्त्रोत है। बैंक निम्नलिखित रूपों में ऋण तथा अग्रिम प्रदान करता है। बैंक ऋण निम्नलिखित रूपों में दिया जा सकता है. (i) नकद साख (ii) मांग उधार
(iii) अल्पावधि ऋण
(iv) ओवर ड्राफ्ट
(v) विनिमय बिलों पर कटौती
3. एजेंसी कार्य-बैंक अपने ग्राहकों का एजेंट के रूप में भी काम करता है जिसके लिए बैंक कुछ कमीशन लेता है। बैंक द्वारा प्रदत्त एजेंसी सेवाएँ निम्नलिखित हैं|
(i) नकद कोषों का हस्तांतरण-बैंक-ड्राफ्ट उधारे खाते की चिट्ठी तथा अन्य साख-पत्रों द्वारा बैंक एक स्थान से दूसरे स्थान को रकम का स्थानांतरण करता हैं ये सेवा कम लागत, शीघ्रता और सुरक्षायुक्त होती है।
(ii) बैंक अपने ग्राहकों के लिए कंपनियों के शेयर बेचता और खरीदता है। यह कंपनियों के नाम पर हिस्सेदारी में लाभ को बाँटता है।
(iii) नकद संग्रह करना-बैंक अपने ग्राहकों के लिए उनके आदेश पर चेक, धनादेश, हुंडियों आदि की रकम उनके दाताओं से वसूल करता है।
(iv) ग्राहकों को आयकर संबंधी परामर्श देता है और उनके आयकर का भुगतान करता है।
4. सामान्य उपयोगी सेवाएँ-बैंक द्वारा उपलब्ध अन्य उपयोगी सेवाएँ निम्नलिखित हैं
(i) बैंक, विदेशी मुद्रा का क्रय-विक्रय करता है।
(ii) कीमती वस्तुएँ जैसे-जेवरात, सोना, चाँदी, कागज पत्रों को सुरक्षित रखने के लिए लाकर्स उपलब्ध करता है।
(iii) पर्यटक चेक और उपहार चेक जारी करता है।

प्र० 11. मुद्रा गुणक क्या है? इसका मूल्य आप कैसे निर्धारित करेंगें? मुद्रा गुणक के मूल्य के निर्धारण में किस अनुपातों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है?
उत्तर:
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प्र० 12. भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के उपकरण कौन-कौन से हैं? बाह्य आघातों के विरुद्ध भारतीय रिजर्व बैंक किस प्रकार मुद्रा की पूर्ति को स्थिर करता है?
उत्तर: केन्द्रीय बैंक/भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के उपकरणों को दो मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है
1. मात्रात्मक उपकरण
2. गुणात्मक उपकरण
मात्रात्मक उपकरण साख की कुल मात्रा को प्रभावित करते हैं अर्थात् ये साख की कुल मात्रा को बढ़ाते अथवा घटाते हैं जबकि गुणात्मक उपकरण साख की दिशा को प्रभावित करते हैं। यदि अर्थव्यवस्था में स्फीतिकारी दबाव है तो साख को संकुचित किया जाता है और यदि अर्थव्यवस्था में आर्थिक मंदी/अपस्फीतिकारी दबाव है तो साख का विस्तार किया जाता हैं मात्रात्मक उपायों द्वारा साख, को अनुत्पादक उद्देश्यों से कम करके उत्पादक उद्देश्यों के लिए बढ़ाया जाता है।
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 3 Money and Banking (Hindi Medium) 12
इसे विस्तारपूर्वक स्पष्ट किया गया है
1. मात्रात्मक उपकरण-मात्रात्मक उपकरण मौद्रिक नीति के वे उपकरण हैं जो साख की उपलब्ध कुल मात्रा को प्रभावित करते हैं। ये इस प्रकार हैं
(i) बैंक दर – बैंक दर से अभिप्राय उस ब्याज दर से है जिस पर केन्द्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को। अल्पकालीन ऋण देता है। इसे रेपो दर (Repo Rate) भी कहते हैं। यदि अर्थव्यवस्था में स्फीतिकारी दबाव है तो बैंक दर को बढ़ा दिया जाता है, क्योंकि बैंक दर बढ़ने पर वाणिज्यिक बैंक भी ऋणों की ब्याज दर बढ़ा देते हैं और बाजार में साख की माँग कम हो जाती है। दूसरी ओर आर्थिक मंदी के समय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंक दर कम कर दी जाती है इससे ब्याज पर कम हो जाती है और साख की माँग बढ़ जाती है।
(ii) खुले बाजार की क्रियाएँ – जब भारतीय रिजर्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों को खुले बाजार में बेचता और खरीदता है तो इसे खुले बाजार की क्रियाएँ कहा जाता है। जब अर्थव्यवस्था में स्फीतिकारी दबाव होता है तो भारतीय रिजर्व बैंक प्रतिभूतियाँ बेचता है जिससे वाणिज्यिक बैंकों से वह उतनी नकद राशि खींच लेता है और उनकी ऋण देने की क्षमता कम हो जाती है। इस प्रकार केन्द्रीय बैंक साख की उपलबता को नियंत्रित करता है दूसरी ओर जब अर्थव्यवस्था में आर्थिक मंदी होती है तो वह प्रतिभूतियाँ खरीदता है, जिससे वाणिज्यिक बैंक की ऋण देने की क्षमता बढ़ जाती है, क्योंकि उसके
पास उपलब्ध नकद राशि बढ़ जाती है।
(iii) नकद आरक्षित अनुमान (CRR) – प्रत्येक वाणिज्यिक बैंक को अपनी जमाओं का एक न्यूनतम प्रतिशत कानूनी तौर पर केन्द्रीय बैंक के पास रखना पड़ता है। यह दर केंद्रीय बैंक द्वारा निर्धारित की जाती है। जब अर्थव्यवस्था में स्फीतिकारी दबाव होता है तो इस अनुपात को बढ़ा दिया जाता
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 3 Money and Banking (Hindi Medium) 12.1
अतः इसके बढ़ने से बैंक की साख निर्माण क्षमता कम हो जाती है। इसके विपरीत आर्थिक मंदी के समय CRR को कम कर दिया जाता है।
जिससे बैंक की साख निर्माण क्षमता बढ़ जाती है।
(iv) सांविधिक तरलता अनुपात (SCR)-सांविधिक तरलता अनुपात से तात्पर्य वाणिज्यिक बैंकों की तरल परिसंपत्तियों से है जो उन्हें अपनी कुल जमाओं के एक न्यूनतम प्रतिशत के रूप में दैनिक आधार पर अपने पास रखनी होती है, ताकि वे अपने जमाकर्ताओं की नकद माँग को पूरा कर सकें। CRR की भाँति SLR में भी स्फीतिकारी दबाव की स्थिति में वृद्धि की जाती है, ताकि बैंक की साख निर्माण क्षमता कम हो जाए।
2. गुणात्मक उपकरण-ये साख निर्माण के वे उपकरण हैं जो साख की मात्रा को प्रभावित नहीं करते बल्कि साख के प्रवाह को किसी विशेष क्षेत्र की ओर निर्दिष्ट करते हैं। ये मुख्यतः तीन प्रकार के हैं जिनका संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है
(i) सीमांत आवश्यकता – ऋणों की सीमान्त आवश्यकता से तात्पर्य बैंक द्वारा दिए गए ऋण तथा गिरवी रखी गई वस्तु के वर्तमान मूल्य से है। सामान्यतः कोई व्यक्ति जितने मूल्य की वस्तु जमानत के तौर पर बैंक के पास रखता है, बैंक उससे कम का ऋण देता है। इस अन्तर को रखने का उद्देश्य यह होता है कि वस्तु के मूल्य में कमी होने पर बैंक को नुकसान न हो आदि। करोड़ की प्रतिभूतियों पर बैंक 80 लाख ऋण देता है तो सीमांत आवश्यकता 20% है और यदि वह 60 लाख का ऋण देता है तो सीमांत आवश्यकता 40% है। सीमान्त आवश्यकता बढ़ने पर उधारकर्ता की ऋण लेने की क्षमता कम हो जाती है तथा इसके विपरीत रिजर्व बैंक जिस क्षेत्र में ऋण की उपलब्धता बढ़ाना चाहता है उस क्षेत्र के ऋणों के लिए सीमान्त आवश्यकता कम कर देगा जैसे 1 करोड़ की प्रतिभूतियों पर शिक्षा ऋण 90 लाख तक का भी दिया जा सकता है। इस प्रकार यह साख के प्रवाह को एक विशेष दिशा प्रदान करता है।
(ii) साख की राशनिंग-साख की राशनिंग से तात्पर्य विभिन्न वाणिज्यिक क्रियाओं के लिए साख की मात्रा का कोटा निर्धारण करना है। ऋण देते समय वाणिज्यिक बैंक किसी विशेष क्षेत्र को कोटे की
सीमा से अधिक ऋण नहीं दे सकते।
(iii) नैतिक प्रभाव-कभी-कभी केन्द्रीय बैंक सदस्य बैंकों पर नैतिक प्रभाव डालकर उन्हें साख नियंत्रण के लिए अपनी नई नीति के अनुसार काम करने के लिए सहमत कर लेते हैं। केन्द्रीय बैंक का लगभग सभी वाणिज्यिक बैंकों पर नैतिक प्रभाव है। बाहरी आघातों के विरुद्ध भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुद्रा पूर्ति का स्थिरीकरण-बाह्य आघातों के विरुद्ध भारतीय रिजर्व बैंक स्थिरीकरण के द्वारा मुद्रा की पूर्ति को स्थिर करता है। स्थिरीकरण का अर्थ है भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी विनिमय अंत:प्रवाह में वृद्धि के विरुद्ध मुद्रा की पूर्ति को स्थायी रखने के लिए किये गए हस्तक्षेप से है। स्थिरीकरण के अन्तर्गत भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी विनिमय की मात्रा के बराबर की मात्रा में सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री खुले बाजार में करता है। जिससे अर्थव्यवस्था में कुल मुद्रा अप्रभावित रहती है।

प्र० 13. क्या आप ऐसा मानते हैं कि अर्थव्यवस्था में व्यावसायिक बैंक ही ‘मुद्रा का निर्माण करते हैं?
उत्तर: हाँ, वाणिज्यिक बैंक अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। वे अपने द्वारा दिए गए ऋणों से संबंधित माँग जमाओं के रूप में साख का सृजन करते हैं। वाणिज्यिक बैंकों की माँग जमाएँ उनके नकद कोषों से कई गुणा अधिक होती है। यदि यह मान लें कि उनके नकद कोषों की राशि के 1000 है तथा माँग जमाएँ ₹ 10,000 है, तो अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति वाणिज्यिक बैंकों के नकद कोषों से दस गुणा अधिक हो जाएगी। इसी प्रकार नकद कोषों के ₹ 1,000 के आधार पर वाणिज्यिक बैंकों ने मुद्रा की पूर्ति में ₹ 10,000 का योगदान दिया।

प्र० 14. भारतीय रिज़र्व बैंक की किस भूमिका को अंतिम ऋणदाता कहा जाता है?
उत्तर: अंतिम ऋणदाता के रूप में केंद्रीय बैंक वित्तीय संकट के दौरान वाणिज्यिक बैंकों के लिए गारंटीकर्ता के रूप में तैयार होता है। वाणिज्यिक बैंक अपनी जमाओं को सामूहिक रूप से तुरंत निकलवाने के लिए तत्पर रहने वाले जमाकर्ताओं का विश्वास खो सकते हैं, चूंकि वाणिज्यिक बैंकों के नकद कोष उनकी माँग जमाओं का एक छोटा-सा भाग होते हैं, कोष बाहर जा सकते हैं, जिसके कारण बैंक में वित्तीय संकट आ जाता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ही होता * है जो वाणिज्यिक बैंक के लिए गारंटीकर्ता की भांति तैयार रहता है तथा उसे दिवालियापन से बचाता है।

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NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 4 Income Determination (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 4 Income Determination (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 4 Income Determination (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. सीमांत उपभोग प्रवृत्ति किसे कहते हैं? यह किस प्रकार सीमांत बचत प्रवृत्ति से संबंधित है?
उत्तर: सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) – आय के परिवर्तन के कारण उपभोग में परिवर्तन के अनुपात को सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) कहते हैं। यह बढ़ी हुई आय का वह भाग है जो उपभोग पर खर्च किया जाता है उपभोग में परिवर्तन (∆C) को आय में परिवर्तन (∆y) से भाग करके MPC को ज्ञात किया जाता है। सूत्र के रूप में
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 4 Income Determination (Hindi Medium) 1
यहाँ ∆C = उपभोग में परिवर्तन, ∆y = आय में परिवर्तन।।
सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) – आय में परिवर्तन के कारण बचत में परिवर्तन के अनुपात को सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) कहते हैं। यह उस बढ़ी हुई आय का वह भाग या अनुपात है जो बढ़ी हुई आय से बचाई गई है। बचत में परिवर्तन (∆S) को आय में परिवर्तन (∆y) से भाग करके MPS को ज्ञात किया जा सकता है।
सूत्र के रूप में-
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 4 Income Determination (Hindi Medium) 1.1
यहाँ, ∆S = बचत में परिवर्तन, ∆y = आय में परिवर्तन।
सीमांत उपभोग प्रवृत्ति और सीमांत बचत प्रवृत्ति का योग (1) इकाई के बराबर होता है। इस प्रकार,
सीमांत उपभोग प्रवृत्ति + सीमांत बचत प्रवृत्ति = 1 अर्थात्
MPC + MPS = 1

प्र० 2. प्रत्याशित निवेश और यथार्थ निवेश में क्या अंतर है?
उत्तर: प्रत्याशित अथवा इच्छित निवेश वह निवेश है जो निवेशकर्ता किसी विशेष उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आय तथा रोजगार के विभिन्न स्तरों पर करने की इच्छा रखते हैं। यथार्थ अथवा वास्तविक निवेश वह निवेश है, जो निवेशकर्ता किसी विशेष उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आय तथा रोजगार के विभिन्न स्तरों पर वास्तव में करते हैं। उदाहरण-मान लीजिए कि एक उत्पादक वर्ष के अंत तक अपने भंडार में 200 ₹ के मूल्य की वस्तु जोड़ने की योजना बनाता है। अतः उस वर्ष उसका प्रत्याशित निवेश 200 ₹ है। किंतु बाजार में उसकी वस्तुओं की माँग में अप्रत्याशित वृद्धि होने के कारण उसकी विक्रय में उस परिमाण से अधिक वृद्धि होती है, जितना कि उसने बेचने की योजना बनाई थी। इस अतिरिक्त माँग की पूर्ति के लिए उसे अपने भंडार से 60 ₹ के मूल्य की वस्तु बेचनी पड़ती है। अतः वर्ष के अंत में उसकी माल-सूची में केवल 200 ₹ – 60 ₹ = 140 ₹ की वृद्धि होती है।
इस प्रकार, उसको प्रत्याशित निवेश 200 ₹ है, जबकि उसका यथार्थ निवेश केवल 140 ₹ है।

प्र० 3. ‘ किसी देश में पैरामेट्रिक शिफ्ट ‘ से आप क्या समझते हैं? रेखा में किस प्रकार शिफ्ट होता है जब इसकी
(i) ढाल घटती है और
(ii) इसके अन्त:खण्ड में वृद्धि होती है?
उत्तर: एक सरल रेखा का समीकरण b = ma + e के रूप में दर्शाया जिसमें a और b दो परिवर्त/चर हैं। m > 0 को सरल रेखा की प्रवणता कहा जाता है और e > 0 उर्ध्वाधर अक्ष पर अन्त:खण्ड है। जब u में 1 इकाई से वृद्धि होती तो b के मूल्य में m इकाइयों से वृद्धि हो जाती है। इसे आलेख पर परिवर्तों का संचलन कहते हैं। परन्तु जब m या e में परिवर्तन होता है तो इसे आलेख का पैरामिट्रिक शिफ्ट कहते हैं, क्योंकि m और e को आलेख का पैरामीटर कहा जाता है। अन्य शब्दों में आलेख की प्रवणता अथवा अन्त:खण्ड में परिवर्तन के कारण जो परिवर्तन होते हैं उसे आलेख का पैरामिट्रिक शिफ्ट कहते हैं। इसे उपभोग फलन द्वारा समझा जा सकता है।
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 4 Income Determination (Hindi Medium) 3
यदि y में परिवर्तन से C में परिवर्तन हों तो इसे आलेख पर परिवर्तनों का संकलन कहेंगे। परन्तु यदि C या है में परिवर्तन हों तो इसे आलेख का पेरामिट्रिक शिफ्ट कहा जायेगा। इसे दो भागों में बाँटा जा सकता है
(क) प्रवणता में परिवर्तन-प्रवणता में परिवर्तन होने पर वक्र इस प्रकार खिसकता है कि प्रवणता बढ़ने पर वक़ अधिक ढाल वाला हो जाता है और प्रवणता के घटने पर वक्र कम ढाल वाला हो जाता है।
(ख) अन्तखण्ड में परिवर्तन-अन्तखण्ड बढ़ने पर वक्र उतनी ही मात्रा से समान्तर रूप से (क्योंकि प्रवणता समान है) ऊपर की ओर खिसक जाता है और इसके विपरीत अन्त:खण्ड घटने पर उतनी ही मात्रा से समान्तर रूप से नीचे की ओर खिसक जाता है।
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 4 Income Determination (Hindi Medium) 3.1
(i) जब रेखा की ढाल घटती है तो रेखा पहले से कम ढाल वाली हो जाती है। उदाहरण के लिए यदि C = C + by में C = 100 + 0.84 था b घटकर 0.6 हो गया तो नया C = 100 + 0.6y हो जायेगा। यह वक्र पिछले C वक्र से कम ढाल वाला होगा। क्योंकि पहले आय 100 बढ़ने पर उपभोग 80 बढ़ रहा था, परन्तु अब आय 100 बढ़ने पर उपभोग 60 बढ़ेगा।
(ii) जब रेखा के अन्त:खण्ड आय में वृद्धि होती है तो रेखा समान्तर रूप से ऊपर की ओर खिसक जाती है, क्योंकि दो समान्तर रेखाओं की प्रवणता समान होती है।

प्र० 4. ‘ प्रभावी माँग ‘ क्या है? जब अंतिम वस्तुओं की कीमत और ब्याज की दर दी हुई हो, तब आप स्वायत्त व्यय गुणक कैसे प्राप्त करेंगे?
उत्तर: प्रभावी माँग से अभिप्राय समस्त माँग के उस बिंदु से जहाँ यह सामूहिक पूर्ति के बराबर है। प्रभावी माँग अर्थव्यवस्था की माँग का यह स्तर है जो समस्त पूर्ति से पूर्णतया संतुष्ट होता है और इसलिए उत्पाद को द्वारा उत्पादन बढ़ाने या उपभोग घटाने की कोई प्रवृत्ति नहीं पाई जाती। अन्य शब्दों में, समग्र माँग का वह स्तर जो पूर्ण संतुलन उपलब्ध करता है, प्रभावी हैं माँग कहलाता है। वैकल्पिक रूप में संतुलन के बिंदु पर समग्र माँग को प्रभावी माँग कहते हैं, क्योंकि राष्ट्रीय आय के निर्धारण में यह प्रभावी होती है। कैसे? केन्स के अनुसार आय का साम्य स्तर उस बिंदु पर निर्धारित होता है जहाँ समग्र माँग, समग्र पूर्ति के बराबर होती है। जब अंतिम उत्पादन व आय: वस्तुओं की कीमत और ब्याज की दर दी गई हो, तो स्वायत्त व्यय गुणक की गणना निम्नलिखित प्रकार से की जाएगी।
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 4 Income Determination (Hindi Medium) 4

प्र० 5. जब स्वायत्त निवेश और उपभोग व्यय (A) 50 करोड़ र हो और सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) 0.2 तथा आय (y) का स्तर 4,00,000 करोड़ ₹ हो तो प्रत्याशित समस्त माँग ज्ञात करें। यह भी बताएँ कि अर्थव्यवस्था संतुलन में है या नहीं (कारण भी बताएँ)।
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 4 Income Determination (Hindi Medium) 5
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 4 Income Determination (Hindi Medium) 5.1
प्रत्याशित समस्त माँग = ₹ 3,250 करोड़
चूँकि वर्तमान आय का स्तर ₹ 4,000 करोड़ है जो प्रत्याशित समस्त माँग में ₹ 750 करोड़ अधिक है तो वह स्थिति अधिपूर्ति की होगी। इसलिए अर्थव्यवस्था संतुलन में नहीं है।

प्र० 6. मितव्ययिता के विरोधाभास की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: मितव्ययिता के विरोधाभास का अर्थ-मितव्ययिता के विरोधाभास से अभिप्राय यह है कि यदि अर्थव्यवस्था के सभी लोग अपनी आय से बचत के अनुपात को बढ़ा दें तो अर्थव्यवस्था में बचत के कुल मूल्य में वृद्धि नहीं होगी। इसका कारण यह है कि सीमांत बचत प्रवृत्ति के बढ़ने से सीमांत उपभोग प्रवृत्ति कम हो जाती है। और निवेश गुणक भी कम हो जाता है। फलस्वरूप आय में वृद्धि की दर भी कम हो जाती है। इस प्रकार बचत बढ़ाने से कुल बचत का बढ़ना आवश्यक नहीं है। नीचे दिए चित्र में स्पष्ट है कि सीमांत उपभोग प्रवृत्ति के कम SS से S1S1 पर खिसक गया। फलस्वरूप राष्ट्रीय आय भी घटकर Oy1 से Oy2 हो जाती है। जिससे बचत फिर कम हो जाएगी। इस प्रकार बचत में वृद्धि नहीं हो सकेगी। मितव्ययिता से हम आय बढ़ाना चाहते थे, परंतु यह विरोधाभास है कि इससे आय बढ़ने की बजाय कम हो गई।
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NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर: अर्थव्यस्था की केन्द्रीय समस्याएँ इस प्रकार हैं-
(i) किन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए और कितनी मात्रा में प्रत्येक समाज को यह निर्णय करना होता है कि यह किन वस्तुओं का उत्पादन करे और कितनी मात्रा में। यदि एक प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन अधिक किया जाए तो अर्थव्यवस्था में दूसरी प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन कम हो सकता है तथा विपरीत।। एक अर्थव्यवस्था को यह निर्धारित करना पड़ता है कि वह खाद्य पदार्थों का उत्पादन करे या मशीनों का, शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर खर्च करे या सैन्य सेवाओं के गठन पर, उपभोक्ता वस्तुएँ बनाए या पूँजीगत वस्तुएँ। निर्णायक सिद्धान्त यह है कि ऐसे संयोजन का उत्पादन करें, जिससे कुल समाप्त उपयोगिता अधिकतम हो।
(ii) वस्तुओं का उत्पादन कैसे करें-सभी वस्तुओं का उत्पादन कई तकनीकों द्वारा हो सकता है किसी वस्तु के उत्पादन में श्रम प्रधान तकनीक का प्रयोग करें या पूंजी प्रधान तकनीक का, यह निर्णय लेना होता है। इसके लिए निर्णायक सिद्धान्त यह है कि ऐसी तकनीक का प्रयोग करें, जिसका औसत उत्पादन लागत उत्पादन न्यूनतम हो।
(iii) उत्पादन किसके लिए करें–अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं की कितनी मात्रा किसे प्राप्त होगी अर्थव्यवस्था के उत्पादन को व्यक्ति विशेष में किस प्रकार विभाजित किया जाए। यह आय के वितरण पर निर्भर करता है। यदि आय समान रूप से विभाजित होगी, तो वस्तुएँ और सेवायें भी समान रूप से विभाजित होंगी। निर्णायक सिद्धान्त यह है कि वस्तुओं और सेवाओं को इस प्रकार वितरित करो कि बिना किसी को बतर बनाये किसी अन्य को बेहतर न बनाया जा सके।

प्र० 2. अर्थव्यवस्था की उत्पादन संभावनाओं से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर: किसी अर्थव्यवस्था के संसाधनों का प्रयोग करके दो वस्तुओं के जिन भी संयोजनों का उत्पादन करना संभव है। वे उत्पादन संभावनाएँ कहलाती हैं।

प्र० 3. सीमान्त उत्पादन संभावना क्या है?
उत्तर: सीमान्त उत्पादन संभावना दो वस्तुओं के उन संयोगों को दर्शाती है, जिनका उत्पादन अर्थव्यवस्था के संसाधनों का पूर्ण रूप से उपयोग करने पर किया जाता है। यह एक वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई प्राप्त करने की अवसर लागत है।

प्र० 4. अर्थव्यवस्था की विषय वस्तु की विवेचना कीजिए।
उत्तर: अर्थव्यवस्था की विषय वस्तु बहुत व्यापक है। प्रो. रोबिन्स के अनुसार, “अर्थशास्त्र एक ऐसा विज्ञान है जो दुर्लभ संसाधनों जिनके वैकल्पिक उपयोग हैं के विवेकशील प्रयोग पर केन्द्रित हैं।”
अर्थशास्त्र एक विषय वस्तु है जो दुर्लभ संसाधनों के विवेकशील प्रयोग पर इस प्रकार केन्द्रित है, जिससे कि हमारा आर्थिक कल्याण अधिकतम हो। अर्थशास्त्र के विषय वस्तु को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है।
(क) व्यष्टि अर्थशास्त्र-यह आर्थिक समस्याओं तथा आर्थिक मुद्दों का अध्ययन व्यक्तिगत उपभोक्ता या व्यक्तिगत उत्पादक या उनके छोटे से समूह को ध्यान में रखकर करता है।
(ख) समष्टि अर्थशास्त्र-समष्टि अर्थशास्त्र संपूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर आर्थिक समस्याओं और आर्थिक मुद्दों को अध्ययन करता है।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) 4

प्र० 5. केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था तथा बाजार अर्थव्यवस्था के भेद को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) 5

प्र० 6. सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर: सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण के अन्तर्गत हम यह अध्ययन करते हैं कि विभिन्न कार्यविधियाँ किस प्रकार कार्य करती हैं।
उदाहरणत: जब हम कहते हैं कि कीमत के बढ़ने से माँग की मात्रा कम हो जाती है और कीमत कम होने से माँग की मात्रा बढ़ जाती है तो यह सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण है।

प्र० 7. आदर्शक आर्थिक विश्लेषण से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर: आदर्शक आर्थिक विश्लेषण में हम यह समझाने का प्रयास करते हैं कि ये विधियाँ हमारे अनुकूल हैं भी या नहीं। उदाहरण के लिए जब हम कहते हैं कि सिगरेट और शराब की माँग कम करने के लिए उनके ऊपर कर की दरें बढ़ानी चाहिए तो यह आदर्शक विश्लेषण है।

प्र० 8. व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) 8

[MORE QUESTIONS SOLVED] (अन्य हल प्रश्न)

I. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(क) हमारी आवश्यकताएँ सदा संसाधनों से अधिक होती हैं।
(ख) हमारे संसाधन सदा आवश्यकताओं से अधिक होते हैं।
(ग) संसाधनों के वैकल्पिक प्रयोग नहीं होते।
(घ) इच्छाओं के वैकल्पिक प्रयोग होते हैं।

2. उस भौतिक समस्या का नाम बताइये जिसके कारण अर्थशास्त्र अध्ययन की एक विषय सामग्री के रूप में उभरा है।
(क) निर्धनता
(ख) बेरोजगारी
(ग) ‘दुर्लभता
(घ) उपरोक्त सभी

3. निम्नलिखित में से किसे व्यष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत अध्ययन किया जायेगा?
(क) कपड़ा उद्योग
(ख) बेरोजगारी
(ग) प्राथमिक क्षेत्र
(घ) उपरोक्त सभी

4. निम्नलिखित में से किसे समष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत अध्ययन किया जायेगा?
(क) उपभोक्ता व्यवहार
(ख) राष्ट्रीय आय
(ग) कीमत सिद्धान्त
(घ) कल्याण अर्थशास्त्र

5. बाजार अर्थव्यवस्था में उत्पादन …………… के लिए किया जाता है।
(क) लाभ
(ख) समाज कल्याण
(ग) सेवा
(घ) सरकारी जिम्मेदारी

6. ” क्या उत्पादन किया जाए ” का निर्णय लेने के लिए सिद्धान्त क्या है?
(क) जहाँ समग्र उपयोगिता अधिकतम हो।
(ख) जहाँ बिना किसी को बतर किये किसी को बेहतर न किया जा सके
(ग) जहाँ लागत न्यूनतम हो
(घ) उपरोक्त सभी

7. ” कैसे उत्पादन किया जाए ” का निर्णय लेने के लिए सिद्धान्त क्या है?
(क) जहाँ समग्र उपयोगिता अधिकतम हो
(ख) जहाँ बिना किसी को बतर किये किसी को बेहतर न किया जा सके
(ग) जहाँ लागत न्यूनतम हो
(घ) उपरोक्त सभी

8. ” किसके लिए उत्पादन किया जाए ” का निर्णय लेने के लिए सिद्धान्त क्या है?
(क) जहाँ समग्र उपयोगिता अधिकतम हो।
(ख) जहाँ बिना किसी को बतर किये किसी को बेहतर न किया जा सके
(ग) जहाँ लागत न्यूनतम हो
(घ) उपरोक्त सभी

9. केन्द्रीय योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में केन्द्रीय समस्या का समाधान ………… द्वारा किया जाता है।
(क) कीमत तंत्र
(ख) सामाजिक तंत्र
(ग) सरकार द्वारा नियुक्त केन्द्रीय अधिकारी
(घ) इनमें से कोई भी

10. बाजार अर्थव्यवस्था में केन्द्रीय समस्या का समाधान …………. द्वारा किया जाता है।
(क) कीमत तंत्र
(ख) सामाजिक तंत्र
(ग) सरकार द्वारा नियुक्त केन्द्रीय अधिकारी
(घ) इनमें से कोई भी

11. PP वक्र बाईं ओर कब खिसकेगा?
(क) जब संसाधनों में वृद्धि हो
(ख) जब तकनीक में सुधार हो
(ग) जब संसाधनों का विनाश हो
(घ) जब संसाधनों का अल्प/अकुशल उपयोग हो रही हो।

12. एक अर्थव्यवस्था में शिक्षा का महत्व जानकर लोगों ने अपने बच्चों की शिक्षा पर बहुत ध्यान देना शुरू कर दिया। इससे उत्पादन संभावना वक्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(क) PP वक्र दाँई ओर खिसकेगा
(ख) PP वक्र बाँई ओर खिसकेगी
(ग) PP वक्र से नीचे उत्पादन होगा
(घ) PP वक्र से ऊपर उत्पादन होगा

13. PP वक्र नतोदर क्यों होता है?
(क) अवसर लागत के कारण :
(ख) सीमान्त अवसर लागत के कारण
(ग) बढ़ती हुई सीमान्त अवसर लागत के कारण
(घ) उपरोक्त कोई भी

14. संसाधनों के कारण पूर्ण रोजगार के बावजूद एक अर्थव्यवस्था PP वक्र से नीचे कार्यशील हो सकती है यदि
(क) संसाधन प्राकृतिक हो
(ख) संसाधन मानवकृत हो
(ग) संसाधनों का कुशल प्रयोग न हो रहा हो
(घ) तकनीक पुरानी हो

प्र० 15-17 के उत्तर निम्नलिखित चित्र के आधार पर दें।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) mcq 15
15. बिन्दु ‘A’ क्या दर्शाता है?
(क) संसाधनों का अल्प एवं अकुशल प्रयोग
(ख) संसाधनों का पूर्ण एवं कुशलतम प्रयोग
(ग) तकनीक में सुधार
(घ) अप्राप्य संयोग

16. बिन्दु ‘B’ क्या दर्शाता है?
(क) संसाधनों का अल्प एवं अकुशल प्रयोग
(ख) संसाधनों का पूर्ण एवं कुशलतम प्रयोग
(ग) तकनीक में सुधार
(घ) अप्राप्य संयोग

17. बिन्दु ‘U’ क्या दर्शाता है?
(क) संसाधनों का अल्प एवं अकुशल प्रयोग
(ख) संसाधनों का पूर्ण एवं कुशलतम प्रयोग
(ग) तकनीक में सुधार
(घ) अप्राप्य संयोग

उत्तर
1. (क)
2. (ग)
3. (क)
4 (ख)
5. (क)
6. (क)
7. (ग)
8. (ख)
9. (ग)
10. (क)
11. (ग)
12. (क)
13. (ग)
14, (ग)
15. (ख)
16. (घ)
17. (क)

II. (Short Answer Questions) (लघु उत्तरीय प्रश्न)

प्र० 1. बाजार अर्थव्यवस्था और केन्द्रीय योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बाजार अर्थव्यवस्था और केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में अन्तर नीचे सारणी में दिया गया है-
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) saq 1

प्र० 2. आर्थिक समस्या क्या है? यह क्यों उत्पन्न होती है?
अथवा
अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएँ क्यों उत्पन्न होती हैं?
उत्तर: अर्थव्यवस्था की आर्थिक समस्या संसाधनों की आबंटन की समस्या है। यह दुर्लभ संसाधनों के उपयोगों में चुनाव की समस्या है। प्रा. एरिक रोल के शब्दों में, “आर्थिक समस्या निश्चित रूप से चयन की आवश्यकता से उत्पन्न होने वाली समस्या है, जिसमें वैकल्पिक उपयोग वाले सीमीत संसाधनों का प्रयोग किया जाता है। यह संसाधनों के दोहन की समस्या है।”
आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के कारण
(क) मानव की इच्छाएँ असीमीत हैं-मानव की इच्छाएँ गुणात्मक तथा मात्रात्मक दोनों रूप से असीमीत हैं। जैसे ही एक इच्छा पूर्ण होती है, एक अन्य इच्छा जन्म ले लेती हैं यदि इच्छाएँ सीमित होती तो एक समय ऐसा आता जब मनुष्य की सभी इच्छाएँ पूर्ण हो जाती, परन्तु ऐसा नहीं होता है क्योंकि इच्छाओं का कोई अन्त नहीं है, परन्तु सभी इच्छाएँ एक समान तीव्र नहीं होती हैं। कुछ इच्छाएँ अधिक तीव्र (जरूरी) होती हैं कुछ कम।
(ख) इच्छाओं की पूर्ति के साधन सीमीत हैं-इच्छाओं की तुलना में उनकी पूर्ति के साधन सीमीत होते हैं। यह बात एक व्यक्ति के लिए भी सत्य है तो एक संपूर्ण अर्थव्यवस्था के लिए भी। एक व्यक्ति की आय कितनी भी बढ़ जाये वह इतनी नहीं होती कि उसकी सभी इच्छाएँ पूर्ण हो सकें। इसी प्रकार अमीर से अमीर अर्थव्यवस्था में उत्पादन कारक-श्रम, पूंजी, भूमि एवं उद्यम इतने नहीं होते कि सभी वांछित वस्तुओं का उत्पादन किया जा सके।
(ग) साधनों के वैकल्पिक उपयोग हैं-साधन न केवल सीमीत हैं अपितु उनके वैकल्पिक उपयोग भी हैं। उदाहरण के लिए यदि एक श्रमिक है तो उसे कृषि में भी उपयोग किया जा सकता है तथा उद्योग में भी। इसी प्रकार यदि एक भूमि का टुकड़ा है तो उस पर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, कृषि, उद्योग, घर आदि बन सकते हैं। एक प्रयोग करने पर हमें दूसरे प्रयोग का त्याग करना होगा। अतः साधनों के वैकल्पिक उपयोग होने के कारण हमें उनके सर्वोत्तम प्रयोग का चयन करना पड़ता है। अतः संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि इच्छाओं की तुलना में वैकल्पिक उपयोग वाले संसाधनों की दुर्लभता आर्थिक समस्या को जन्म देती है।

प्र० 3. अर्थव्यवस्था की तीन केन्द्रीय समस्याओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
अथवा
‘उत्पादन कैसे करें’ की केन्द्रीय समस्या का उदाहरण सहित व्याख्या करें।
अथवा
‘क्या उत्पादन किया जाए’ की समस्या स्पष्ट कीजिए।
अथवा
‘संसाधनों के आबंटन से संबंधित केन्द्रीय समस्याओं का संक्षेप में विवरण कीजिए।
अथवा
‘उत्पादन किसके लिए करें’ की केन्द्रीय समस्या स्पष्ट करें। (Delhi 2013, 14)
उत्तर:
1. क्या उत्पादन किया जाए – प्रत्येक अर्थव्यवस्था में असीमित मानव इच्छाओं तथा सीमित संसाधनों के कार यह निर्णय लेना पड़ता है कि क्या उत्पादन करें तथा कितनी मात्रा में उत्पादन करें। यदि एक अर्थव्यवस्था उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन अधिक करे तो वह पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन कम कर पायेगी। इसी प्रकार यदि आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन अधिक किया जाए, तो विलासिता की वस्तुओं का उत्पादन कम हो पायेगा। मार्गदर्शक सिद्धान्त–इसके लिए मार्गदर्शक सिद्धान्त यह है कि संसाधनों का आबंटन विभिन्न वस्तुओं के प्रयोग में इस प्रकार किया जाए, जिससे समस्त उपयोगिता अधिकतम हो।
2. उत्पादन कैसे किया जाए–प्रत्येक वस्तुओं का उत्पादन अनेक तकनीकों से किया जा सकता है। मुख्यतः दो प्रकार की तकनीकें हैं-श्रम प्रधान तकनीक तथा पूँजी प्रधान तकनीक। श्रम प्रधान तकनीक में श्रम अधिक तथा पूँजी कम प्रयोग होती है तथा पूँजी प्रधान तकनीक में पूँजी अधिक तथा श्रम कम प्रयोग होता है। यदि हमारी अर्थव्यवस्था में पूँजी अधिक है तो पूँजीप्रधान तकनीक का उपयोग करना चाहिए। यदि हमारी अर्थव्यवस्था में श्रम अधिक है, तो श्रम प्रधान तकनीक का प्रयोग करना चाहिए। मार्गदर्शक सिद्धान्त-मार्गदर्शक सिद्धान्त यह है कि ऐसी तकनीक का प्रयोग किया जाए जिससे प्रति इकाई उत्पादन लागत न्यूनतम हो।
3. किसके लिए उत्पादन करें-इस समस्या का संबंध उत्पादित पदार्थ व सेवाओं के वितरण की समस्या से है। जब ‘क्या उत्पादन करें’ तथा ‘कैसे उत्पादन करें’ की समस्या का समाधान हो जाता है तो प्रश्न उठता है कि इसका उपभोग कौन करेगा अर्थात् किसके लिए उत्पादन किया है। कार्ल मार्क्स (Karl Marx) के अनुसार, “प्रत्येक से क्षमता अनुसार, प्रत्येक को आवश्यकता अनुसार के आधार पर वितरण होना चाहिए।” अन्य विचारधारा के अनुसार उत्पादन का वितरण इस प्रकार हो, जिससे सभी को उपभोग की न्यूनतम मात्रा उपलब्ध हो सके। मार्गदर्शक सिद्धान्त-मार्गदर्शक सिद्धान्त यह है कि उत्पादन का वितरण इस प्रकार किया जाये कि किसी को बतर किये बिना किसी को बेहतर नहीं बनाया जा सकता।

प्र० 4. दुर्लभता और चयन का अटूट संबंध है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: यह कथन बिल्कुल सत्य है कि दुर्लभता और चयन का अटूट संबंध है। यदि संसाधन दुर्लभ न होते तो चयन की समस्या
जन्म ही न लेती। संसाधनों की दुर्लभता ही चयन की समस्या को मूल कारण है। संसाधन न केवल दुर्लभ हैं, बल्कि वैकल्पिक प्रयोग वाले हैं। इसीलिए अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करने के लिए व्यक्ति व समाज को संसाधनों के प्रयोग में चयन करना पड़ता है। इसीलिए यह कहा जाता है कि दुर्लभता ही सभी केन्द्रीय समस्याओं की जननी है।

प्र० 5. व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र में भेद नीचे दी गई तालिका में दिया गया है।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) saq 5

प्र० 6. अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएँ क्या हैं? इन समस्याओं को केन्द्रीय समस्या क्यों कहा जाता है?
उत्तर: अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएँ वे समस्याएँ हैं, जो प्रत्येक अर्थव्यवस्था में पाई जाती हैं चाहे वह विकसित हो, विकासशील हो या पिछड़ी हुई, चाहे बाजार अर्थव्यवस्था हो या केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था, चाहे अमीर अर्थव्यवस्था हो चाहे गरीब। ये समस्याएँ संसाधनों के आबंटन, संसाधनों के पूर्ण एवं कुशलतम प्रयोग तथा संसाधनों के विकास से संबंधित हैं। इन समस्याओं को केन्द्रीय समस्या कहा जाता है क्योंकि
(i) ये प्रत्येक अर्थव्यवस्था में देखने में आती हैं।
(ii) इसी के आधार पर अर्थव्यवस्था में अन्य समस्याएँ उत्पन्न होती हैं तथा हल किया जा सकता है।

प्र० 7. उत्पादन संभावना वक्र क्या है? एक उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: उत्पादन संभावना वक्र ऐसा वक्र है जो दो वस्तुओं के उन सभी संभव संयोजनों को प्रकट करता है, जिनका उत्पादन एक अर्थव्यवस्था उपलब्ध तकनीक और दिये हुए संसाधनों के पूर्ण व कुशलतम उपयोग द्वारा किया जा सकता है।
सीमित साधनों और दी गई तकनीक द्वारा दो वस्तुओं के उत्पादन की विभिन्न विधियां एक काल्पनिक अनुसूचि द्वारा दर्शायी गई हैं।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) saq 7
चूंकि संसाधन सीमित हैं, इसीलिए अर्थव्यवस्था संसाधनों के पूर्ण उपयोगों का चुनाव करने में एक वस्तु का उत्पादन बढ़ाने के लिए दूसरी वस्तु का उत्पादन कम करना होगा। यदि मशीनों का उत्पादन 0 हो तो गेहूं का उत्पादन 500 टन होगा। जैसे-2 मशीनों का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, गेहूँ का उत्पादन कम होता है। यदि सभी संसाधन मशीनों के उत्पादन में लगा दें तो मशीनों का उत्पादन 4000 होगा, परन्तु गेहूं का उत्पादन शून्य होगा।

प्र० 8. उत्पादन संभावना वक्र की मान्यताओं का वर्णन करो।
उत्तर: उत्पादन संभावना वक्र की मान्यताएँ इस प्रकार हैं
(क) अर्थव्यवस्था में उपलब्ध संसाधनों की मात्रा निश्चित है।
(ख) सभी संसाधनों का पूर्ण एवं कुशलतापूर्वक प्रयोग किया जा रहा है।
(ग) उत्पादन तकनीक दी हुई है।
(घ) केवल दो वस्तुओं का उत्पादन हो रहा है।
(ड) संसाधनों की कुशलता सभी वस्तुओं के उत्पादन में एक समान नहीं है।

प्र० 9. उत्पादने संभावना वक्र नीचे की ओर ढालू क्यों होता है? (Foreign 2014)
उत्तर: उत्पादन संभावना वक्र नीचे की ओर ढालू होता है, क्योंकि अर्थव्यवस्था में दिये हुए संसाधनों के पूर्ण रोजगार होने पर तथा उनका कुशलतम प्रयोग की स्थिति में एक वस्तु का अधिक मात्रा में उत्पादन करना है, तो दूसरी वस्तु के उत्पादन की मात्रा में कमी करनी होगी। अन्य शब्दों में, एक वस्तु का उत्पादन बढ़ाने के लिए दूसरी अन्य वस्तु का उत्पादन कम करना होगा। जब अर्थव्यवस्था के सभी संसाधन पूर्णत: एवं कुशलतम रूप से उपयोग हो रहे हों, तो दोनों वस्तुओं के उत्पादन में एक साथ वृद्धि करना संभव नहीं, एक वस्तु का उत्पादन कम किये बिना भी दूसरे का उत्पादन बढ़ाना संभव नहीं है, अतः PP वक्र का आकार बाएं से दाएं नीचे की ओर ढालू होता है। इसे चित्र में दिखाया गया है।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) saq 9

प्र० 10. उत्पादन संभावना वक्र नतोदर क्यों होता है? (All India 2014)
उत्तर: सामान्यतः उत्पादन संभावना वक्र मूलबिंदु की ओर नतोदर होती है। कोई भी वक्र नतोदर तब होता है, जब उसका ढलान बढ़ रही हो। इसकी ढलान (slope) बढ़ती हुई सीमान्त अवसर लागत (Increasing marginal opportunity cost) है। दूसरे शब्दों में, जैसे जैसे—संसाधनों को एक वस्तु के उत्पादन से दूसरी वस्तु के उत्पादन में स्थानान्तरित किया जाता है तो वस्तु Y के उत्पादन की हानि के रूप में वस्तु X की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के उत्पादन की अवसर लागत में वृद्धि की प्रवृत्ति होती है ऐसा इसीलिए होता है, क्योंकि संसाधन प्रयोग विशिष्ट होते हैं। उदाहरणतः बिहार की भूमि आम की खेती के लिए अधिक उपयुक्त है तो उत्तर प्रदेश की भूमि गन्ने की खेती के लिए। एक व्यक्ति जो मशीनों के उत्पादन में सक्षम है, आवश्यक नहीं कि वह गेहूं के उत्पादन में भी उतना ही सक्षम हो। इसे चित्र द्वारा दर्शाया । गया है। प्रत्येक स्तर पर सीमान्त अवसर लागत या बढ़ती रूपान्तरण की सीमांत दर \(\frac { \Delta Y }{ \Delta X }\) लगातार बढ़ रही है। इस बढ़ती सीमान्त अवसर लागत के कारण PP वक्र नतोदर हो जाता है।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) saq 10

प्र० 11. संसाधनों के अल्प उपयोग तथा संसाधनों के विनाश में अन्तर स्पष्ट करो।
उत्तर: जब संसाधनों को अल्प उपयोग होता है तो यह बेरोजगारी को जन्म देता है। परिणामस्वरूप वास्तविक उत्पादन संभावित उत्पादन से कम होता है। इसे । दिए चित्र में बिन्दु ‘V’ से दिखाया गया है। संसाधनों के विनाश में PP वक्र पूर्णतः बाईं ओर खिसक जाता है इससे हैं अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता दोनों वस्तुओं के लिए कम हो जाती है। इसे नीचे दिये चित्र द्वारा दर्शाया गया है।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) saq 11
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) saq 11.1

प्र० 12. नीचे दिये परिस्थितियों में PP वक्र पर पड़ने वाले प्रभावों को चित्र के माध्यम से दिखाइए।
(क) वस्तु x की उत्पादन तकनीक में सुधार
(ख) वस्तु y की उत्पादन तकनीक में सुधार
(ग) संसाधनों का विकास
(घ) अप्राप्य संयोग
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) saq 12
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) saq 12.1

प्र० 13. अवसर लागत क्या है? एक संख्यात्मक उदाहरण की सहायता से समझाइए। (Delhi 2012, All India 2012)
उत्तर: अवसर लागत दूसरे अवसर की हानि के रूप में पहले अवसर को लाभ उठाने की लागत है। दूसरे शब्दों में, । “अवसर लागत को किसी साधन के उसके दूसरे सर्वश्रेष्ठ वैकल्पिक प्रयोग के मूल्य के रूप में परिभाषित कर सकते हैं।” उदाहरण के लिए जब हम वाणिज्य विषयों (Commerce subjects) को चुनते हैं तो हमें विज्ञान विषयों (Science subjects) का त्याग करना पड़ता है तो विज्ञान विषय हमारे वाणिज्य विषय चुनने की अवसर लागत हैं। इसी प्रकार यदि एक व्यक्ति ने M.A. (Economics) किया है तो वह शिक्षक बनकर 40000, किताबें लिखकर 50000 तथा अर्थशास्त्री बनकर 70000 कमा सकता है तो अर्थशास्त्री बनने के लिए उसे किताबें लिखने तथा शिक्षक बनने के अवसर को छोड़ना होगा, परन्तु उसकी अवसर लागत (Opportunity cost) 50000 है। क्योंकि यह दूसरा सर्वश्रेष्ठ वैकल्पिक प्रयोग है।

प्र० 14. सीमान्त अवसर लागत से आप क्या समझते हैं? एक काल्पनिक अनुसूचि द्वारा समझाओ। (CBSE 2012)
उत्तर: सीमान्त अवसर लागत जिसे रूपान्तरण की सीमान्त दर भी कहा जाता है, परन्तु x की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के लिए वस्तु y के उत्पादन का त्याग है।
बीजगणितीय रूप से, सीमान्त अवसर लागत = – \(\frac { \Delta Y }{ \Delta X }\)
Δy = वस्तु के उत्पादन में वृद्धि
Δx = वस्तु x के उत्पादन में वृद्धि।
इसे दी गई अनुसूची द्वारा दर्शाया गया है।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) saq 14
A से B पर जाने के लिए वस्तु ख की 5 इकाइयों का त्याग करके वस्तु क की 1 इकाई उत्पादित हो रही है। इसी प्रकार B से C पर जाने के लिए वस्तु ख की 10 इकाइयों का त्याग करके वस्तु क की 1 इकाई उत्पादित हो रही है। इसी प्रकार संयोग F तक यह 25 : 0 हो गया है। इसीलिए PP वक्र को रूपान्तरण वक्र भी कहा जाता है।

III. (Long Answer Questions) (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

प्र० 1. केन्द्रीय समस्याएं क्यों उत्पन्न होती हैं? संसाधनों के आबंटन की समस्या की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: केन्द्रीय समस्याएँ उत्पन्न होने के पीछे तीन मूलभूत कारण हैं
(क) मानव आवश्यकताएँ असीमीत हैं-मानव की आवश्यकताएँ असंख्य तथा असीमित हैं जैसे ही एक इच्छा पूर्ण होती है। एक अन्य इच्छा जन्म ले लेती है। यदि इच्छाएँ सीमित होती तो एक समय ऐसा आता है। जब मनुष्य की सभी इच्छाएँ पूर्ण हो जाती, परंतु ऐसा नहीं होता क्योंकि इच्छाओं का कोई अन्त नहीं है। परंतु सभी इच्छाएँ एक समान तीव्र नहीं होती। कुछ इच्छाएँ जरूरी होती हैं। कुछ कम जरूरी होती हैं। अतः इच्छाओं का प्राथमिकीकरण करना सहज हो जाता है।
(ख) सीमित साधन–इच्छाओं की तुलना में उनकी पूर्ति के साधन सीमित होते हैं। यह बात एक व्यक्ति के लिए भी सत्य है। तो एक संपूर्ण अर्थव्यवस्था के लिए भी एक व्यक्ति की आये कितनी भी बढ़ जाये वह इतनी नहीं होती कि उसकी सभी इच्छाएँ पूर्ण हो सके। इसी प्रकार अमीर से अमीर अर्थव्यवस्था में उत्पादन कारक-श्रम, पूँजी, भूमि एवं उद्यम इतने नहीं होते कि सभी आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन किया जा सके।
(ग) साधनों के वैकल्पिक उपयोग-साधन न केवल सीमित हैं अपितु उनके वैकल्पिक उपयोग भी हैं। उदाहरण के लिए यदि एक श्रमिक है तो उसे कृषि में भी उपयोग किया जा सकता है तथा उद्योग में भी। इसी प्रकार यदि एक भूमि का टुकड़ा है तो उस पर स्कूल, कॉलेज, व अस्पताल, कृषि, उद्योग, घर आदि बन सकते हैं। एक प्रयोग करने पर हमें दूसरे प्रयोग का त्याग करना होगा। अतः साधनों के वैकल्पिक उपयोग होने के कारण हमें उनके सर्वोत्तम प्रयोग का चयन करना पड़ता है। अतः संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि इच्छाओं की तुलना में वैकल्पिक उपयोग वाले संसाधनों की दुर्लभता आर्थिक समस्या को जन्म देती है।
संसाधनों के आबंटन की समस्या की व्याख्या इस प्रकार है-
(1) क्या उत्पादन करें?
(2) कैसे उत्पादन करें?
(3) किसके लिए उत्पादन करें?
(1) क्या उत्पादन करें – प्रत्येक अर्थव्यवस्था में असीमित भाव व इच्छाओं तथा सीमित व संसाधनों के कारण यह निर्णय लेना पड़ता है कि क्यों उत्पादन करें तथा कितनी मात्रा में उत्पादन करें। यदि एक अर्थव्यवस्था उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन अधिक करें तो वह पूँजीकृत वस्तुओं का उत्पादन कम कर पायेगी। इसी प्रकार यदि आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन किया जाए तो विलासिता की वस्तुओं का उत्पादन कम हो जायेगा।
(2) कैसे उत्पादन करें-प्रत्येक वस्तुओं का उत्पादन अनेकों तकनीकों से किया जा सकता है। मुख्यतः दो प्रकार की तकनीकें हैं (1) श्रम प्रधान तकनीक तथा (2) पूंजी प्रधान तकनीक। श्रम प्रधान तकनीक में श्रम अधिक तथा पूंजी कम प्रयोग होती है। तथा पूँजी प्रधान तकनीक में पूँजी अधिक तथा श्रम कम प्रयोग होता है। यदि हमारी अर्थव्यवस्था में पूँजी अधिक है तो पूँजी प्रधान तकनीक का उपयोग करना चाहिये। यदि हमारी अर्थव्यवस्था में श्रम अधिक है, तो श्रम प्रधान तकनीक का प्रयोग करना चाहिए।
(3) किसके लिए उत्पादन करें-इस समस्या का संबंध उत्पादित पदार्थ व सेवाओं के वितरण की समस्या से हैं, जब क्या उत्पादन करें तथा कैसे उत्पादन करें की समस्या का समाधान हो जाता है, तो प्रश्न उठता है कि इसका उपभोग कौन करेगा अर्थात किसके लिए उत्पादन किया है। कार्ल मार्क्स (Karl Marx) के अनुसार, “प्रत्येक से क्षमता अनुसार, प्रत्येक की आवश्यकता के अनुसार के आधार पर वितरण होना चाहिए।” अन्य विचारधारा के अनुसार उत्पादन का वितरण इस प्रकार हो, जो सभी को उपयोग की न्यूनतम मात्रा उपलब्ध हो सके।

प्र० 2. उत्पादन संभावना वक्र क्या है? इस वक्र का प्रयोग करके ‘क्या उत्पादन करें कि केंद्रीय समस्या को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: उत्पादन संभावना वक्र ऐसा वक्र है जो दो वस्तुओं के उन सभी संभव संयोजनों को प्रकट करता है, जिनका उत्पादन,
एक अर्थव्यवस्था उपलब्ध तकनीक और दिये हुए संसाधनों के पूर्ण व कुशलतम उपयोग द्वारा किया जा सकता है। सीमित साधनों और दी गई तकनीक द्वारा दो वस्तुओं के उत्पादन की विभिन्न विधियाँ एक काल्पनिक अनुसूची द्वारा दर्शायी गई है।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) laq 2
चूंकि संसाधन सीमित हैं इसीलिए अर्थव्यवस्था संसाधनों के पूर्ण उपयोगों का चुनाव करने में एक वस्तु का उत्पादन बढ़ाने के लिए दूसरी वस्तु का उत्पादन कम करना होगा। यदि मशीनों का उत्पादन 0 हो तो गेहूं का उत्पादन 500 टन होगा। जैसे 2 मशीनों का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है गेहूँ का उत्पादन कम होता छ है। यदि संसाधन मशीनों के उत्पादन में लगा दें, तो मशीनों का उत्पादन 4000 होगा। परंतु गेहूं का उत्पादन शून्य होगा।

प्र० 3. एक उत्पादन संभावना वक्र खींचिए और चित्र में निम्नलिखित स्थितियों को समझाइएः
(i) संसाधनों का पूर्ण तथा कुशल प्रयोग
(ii) संसाधनों को अल्प प्रयोग
(iii) संसाधनों की संवृद्धि।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) laq 3
उत्तर:
(i) नीचे दिये गये चित्र में बिन्दु A संसाधनों के पूर्ण तथा कुशल उपयोग को दर्शा रहा है। इस बिन्दु तक पहुंचने के बाद वस्तु क का उत्पादन बढ़ाने के लिए वस्तु ख छ का उत्पादन कम करना होगा तथा वस्तु ख का उत्पादन बढ़ाने के लिए वस्तु क हिं का उत्पादन कम करना होगा।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) laq 3.1
(i) संसाधनों का अल्प उपयोग-इसे नीचे दिये गये चित्र में बिन्दु 0 के द्वारा दर्शाया गया है। यदि एक अर्थव्यवस्था बिन्दु V पर है अर्थात् PP वक्र के भीतर किसी बिन्दु पर है तो वह अल्प उपयोग हो रहे साधनों का प्रयोग करके वस्तु क या वस्तु ख या दोनों उत्पादन बढ़ा सकती है।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) laq 3.2
(ii) संसाधनों की संवृद्धि-इसे नीचे दिये चित्र में PP वक्र के दाईं ओर P1P1 पर खिसकने के द्वारा दर्शाया गया है। यदि अर्थव्यवस्था में संसाधनों की संवृद्धि हो जाए तो उसे अर्थव्यवस्था में सभी वस्तुओं का उत्पादन पहले से अधिक हो सकता है। इससे PP वक्र P1P1 वक्र की तरह हो जायेगा।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) laq 3.3

IV. (Solved Numerical Questions) (संख्यात्मक हल प्रश्न)

प्र० 1. नीचे दी गई तालिका से सीमान्त अवसर लागत ज्ञात करें तथा उत्पादन संभावना वक्र के आकार पर टिप्पणी दें।
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) anq 1
उत्पादन संभावना वक्र एक सीधी रेखा होगा, क्योंकि सीमान्त अवसर लागत बराबर है।

प्र० 2. एक व्यक्ति एक स्कूल में अध्यापक के रूप में पढ़ा रहा है। उसे Ph.D. करने के लिए 2 साल की छुट्टी लेनी | पड़ी। उसकी मासिक आय ₹ 18,500 थी। Ph.D. की फीस 30,000 थी। बताइए P.hd करने की अवसर लागत क्या थी?
उत्तर:
अवसर लागत = (18500 x 12 x 2) + 30000 = (18500 x 24) + 30000
= 444000 + 30000 = 4,74000

V. (HOTS Questions) (उच्च स्तरीय चिंतन कौशल प्रश्न)

प्र० 1. संसाधनों तथा इच्छाओं की दो-दो विशेषताएं बताइए।
उत्तर: संसाधनों की दो विशेषताएँ इस प्रकार हैं|
(i) संसाधन इच्छाओं की तुलना में सीमित हैं।
(ii) संसाधनों के वैकल्पिक उपयोग हैं।
इच्छाओं की दो विशेषताएं इस प्रकार हैं
(i) इच्छाएं असीमित/असंख्य हैं।
(ii) इच्छाओं की तीव्रता में अन्तर है, कुछ इच्छाएं अधिक तीव्र होती हैं तो कुछ कम।

प्र० 2. निम्नलिखित का अध्ययन समष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत होगा या व्यष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत?
(i) राष्ट्रीय आय
(ii) श्रमिकों का वेतन निर्धारण
(iii) शिक्षा क्षेत्र
(iv) प्राथमिक क्षेत्र
(v) बैंक उद्योग
(vi) कल्याण अर्थशास्त्र
उत्तर:
(i) राष्ट्रीय आय → समष्टि अर्थशास्त्र
(ii) श्रमिकों का वेतन निर्धारण → व्यष्टि अर्थशास्त्र
(iii) शिक्षा क्षेत्र → समष्टि अर्थशास्त्र
(iv) प्राथमिक क्षेत्र → समष्टि अर्थशास्त्र
(v) बैंक उद्योग → व्यष्टि अर्थशास्त्र
(vi) कल्याण अर्थशास्त्र → व्यष्टि अर्थशास्त्र

प्र० 3. क्या यह आवश्यक है उत्पादन वक्र सदा नतोदर हो? व्याख्या करो।
उत्तर: नही, यह आवश्यक नहीं है कि उत्पादन संभावना वक्र सदा नतोदर हो।
(i) स्थिति एक-जब सीमान्त अवसर लागत बढ़ रही हो तो PP वक्र नतोदर होगा। इसे दी गई अनुसूची तथा चित्र द्वारा दिखाया गया है।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) hots 3
(ii) स्थिति दो-जब सीमान्त अवसर लागत समान रहे तो PP वक्र एक सीधी रेखा होगा। इसे नीचे दी गई अनुसूची तथा चित्र द्वारा दिखाया गया है।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) hots 3.1
(iii) स्थिति तीनः जब सीमान्त अवसर लागत बढ़ रही हो तो PP वक्र नतोदर होगा। यह नीचे दी गई तालिका तथा चित्र द्वारा दिखाया गया है।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) hots 3.2

प्र० 4. निम्नलिखित परिस्थितियों में अवसर लागत क्या होगी?
(i) एक नौकरी करने वाले के लिए उच्चतर अध्ययन की
(ii) भूमि के एक टुकड़े पर आम का बगीचा लगाने की
(iii) एक विद्यार्थी के CA करने के लिए B.Com (H) तथा B.Com (P) को छोड़ना
(iv) एक अध्यापिका जो स्कूल छोड़कर अपना कोचिंग सेंटर शुरू कर रही है।
उत्तर:
(i) वह वेतन की राशि जो वह नौकरी प्राप्त करके अर्जित कर सकता था।
(ii) उस फसल की कीमत जो वह उस भूमि के टुकड़े पर उगा सकता है।
(iii) B.com (H) छोड़ना जो दूसरा सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।
(iv) स्कूल से जो वेतन वह पा रही थी।

प्र० 5. एक अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी के कारण इसका उत्पादन क्षमता से कम है। सरकार रोजगार देने वाली योजनाएँ शुरू करती है। उत्पादन संभावना वक्र की । सहायता से इसके प्रभाव की व्याख्या कीजिए। (Delhi 2013)
उत्तर: ये योजनाएं शुरू करने से पूर्व अर्थव्यवस्था PP वक्र से नीचे थी। इन योजनाओं के उपरान्त यदि रोजगार दिये गये मजदूरों को वस्तु X के उत्पादन है। में लगाया गया तो PP वक्र U से A की ओर जायेगा। यदि रोजगार दिये गये मजदूरों को वस्तु Y के उत्पादन में लगाया गया तो PP वक्र U से B की ओर जायेगा। यदि रोजगार दिये गये मजदूरों को दोनों वस्तुओं के उत्पादन वस्तु में लगाया गया तो PP वक्र U से A और B के मध्य में कहीं जायेगा जैसे बिन्दु C
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) hots 5

VI. (Value Based Questions) (मूल्य-आधारित प्रश्न)

प्र० 1. बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए हमें उत्पादन संभावना वक्र को दाँई ओर खिसकाने की आवश्यकता है। इसके लिए हम क्या कर सकते हैं?
उत्तर:
(i) तकनीक में सुधार द्वारा
(ii) शिक्षा तथा प्रशिक्षण के विस्तार से श्रम की उत्पादकता बढ़ाकर
(iii) संसाधनों का विकास करके
(iv) नए संसाधनों के अन्वेषण द्वारा

प्र० 2. भारत एक श्रम प्रधान देश है। इसे पूँजी प्रधान और श्रम प्रधान उत्पादन की तकनीक में से कौन-सी तकनीक अपनानी चाहिए?
उत्तर: यदि भारत में श्रम प्रधानता है तो श्रम की लागत पूँजी की लागत से कम होगी, परन्तु पूँजी की उत्पादकता श्रम की उत्पादकता से कहीं अधिक है। अतः कुल मिलाकर पूँजी प्रधान तकनीक से प्रति इकाई लागत न्यूनतम हो सकती है। परन्तु साथ ही श्रमिकों को रोजगार देना भी आवश्यूक है। अतः एक ऐसा मार्ग ढूंढा जाना चाहिए, जिसमें श्रमिकों को रोजगार भी मिल जाए तथा प्रति इकाई लागत भी न्यूनतम हो।

प्र० 3. असीमित मानव इच्छाओं की तुलना में वैकल्पिक प्रयोग वाले सीमित संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग के लिए ती उपाय बताइए।
उत्तर:
(i) संसाधनों का किफायतीकरण किया जाये ताकि संसाधनों का यथासंभव सर्वोत्तम प्रयोग किया जा सके।
(ii) संसाधनों को कम उत्पादक प्रयोगों से हटाकर अधिक उत्पादक प्रयोगों में लगाया जाये।
(iii) उत्पादन की श्रेष्ठ तथा बेहतर तकनीक अपनायी जाए।

प्र० 4. संसाधनों के कुशलतम प्रयोग के बावजूद भी बाजार अर्थव्यवस्थाएँ आय वितरण में असमानता को प्रेरित करती हैं। इस अवलोकन का वर्णन करें।
उत्तर: यह बिल्कुल सत्य है कि बाजार अर्थव्यवस्था में संसाधनों के कुशलतम प्रयोग के बावजूद भी अर्थव्यवस्थाओं में आय वितरण में असमानता अधिक होती है क्योंकि
1. संसाधनों का आबंटन उन वस्तुओं के उत्पादन के लिए किया जाता है, जो उत्पादकों को अधिक लाभ दे। अतः लाभदायक वस्तुओं का उत्पादन मुख्यतः उन उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए किया जाता है, जो | अधिक लाभ दे सकें और वे धनी वर्ग में ही होते हैं।
2. तकनीक में भी पूंजी प्रधान तकनीक का उपयोग होता है और पूंजी का निवेश पूंजीपतियों द्वारा होता है। इससे सकल घरेलू उत्पाद में ब्याज घटक कम होता जाता है, जबकि लाभ घटक बढ़ता जाता है।

प्र० 5. एक अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी के कारण इसका उत्पादन क्षमता से कम है। सरकार रोजगार देने वाली योजनाएँ शुरू करती है। उत्पादन संभावना वक्र की सहायता से इसके प्रभाव की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: यदि एक अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी के कारण उत्पादन अपनी पूर्ण क्षमता से कम है तो अर्थव्यवस्था उत्पादन संभावना सीमा से नीचे कार्यशील होगी। ऐसे में यदि सरकार रोजगार देने वाली योजनाएँ शुरू करती है, तो अर्थव्यवस्था में उत्पादन बढ़ेगा और वह अपने कुशलतम स्तर पर कार्यशील होगी। इसे नीचे दिए गए हैं चित्र द्वारा दिखाया गया है। जब अर्थव्यवस्था अपनी उत्पादन क्षमता से कम पर : E थी तो वह बिन्दु E पर थी। जब रोजगार देने वाली योजनाएँ शुरू की जायेंगी । तो वह बिन्दु E से बिंदु A (यदि उन्हें वस्तु X के उत्पादन में लगाया जाए) या (यदि उन्हें वस्तु X के उत्पादन में लगाया जाए) या बिन्दु B (यदि उन्हें वस्तु Y के उत्पादन में लगाया जाए) या बिंदु (यदि उन्हें दोनों के उत्पादन में लगाया जाए) पर खिसक जायेगी।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 Introduction (Hindi Medium) vbq 5

प्र० 6. सरकार द्वारा किए गए उपायों से बेरोजगारी कम हो जाती है। उत्पादन संभावना सीमा के संदर्भ में इसका आर्थिक मूल्य बताइए।
उत्तर: उत्पादन संभावना सीमा दाईं ओर खिसक जायेगी।

प्र० 7. सरकार ने विदेशी पूँजी को प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया है। उत्पादन संभावना सीमा के संदर्भ में इसका आर्थिक मूल्य क्या है?
उत्तर: इससे उत्पादन संभावना सीमा ऊपर की ओर खिसक जायेगा।

Hope given NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 1 are helpful to complete your homework

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NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium)

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics. Here we have given NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets.

[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. माँग वक्र का आकार क्या होगा ताकि कुल संप्राप्ति वक्र
(a) a मूल बिन्दु से होकर गुजरती हुई धनात्मक प्रवणता वाली सरल रेखा हो।
(b) a समस्तरीय रेखा हो।
उत्तर: (a) जब TR वक्र से गुजरती हुई एक धनात्मक प्रवणता वाली सरल रेखा हो, तो माँग वक्र अर्थात् AR वक्र एक क्षैतिज रेखा होगा।
(b) यह संभव नहीं है जब तक AR = 0 न हो और AR = कीमत = शून्य नहीं हो सकती।

प्र० 2. नीचे दी गई सारणी से कुल संप्राप्ति माँग वक्र और माँग की कीमत लोच की गणना कीजिए।
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium) 2
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium) 2.1
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium) 2.2

प्र० 3. जब माँग वक्र लोचदार हो तो सीमान्त संप्राप्ति का मूल्य क्या होगा?
उत्तर: यदि माँग वक्र लोचदार हो तो सीमान्त संप्राप्ति धनात्मक होगी।
जब तक EDp > 1 तो सीमान्त संप्राप्ति धनात्मक होती है।
जबे EDp = 0 तो सीमान्त संप्राप्ति शून्य होती है।
जब EDp < 1 तो सीमान्त संप्राप्ति ऋणात्मक होती है।

प्र० 4. एक एकाधिकारी फर्म की कुल स्थिर लागत 100 ₹ और निम्नलिखित माँग सारणी है|
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium) 4
अल्पकाल में संतुलन मात्रा, कीमत और कुल लाभ प्राप्त कीजिए। दीर्घकाल में संतुलन क्या होगा? जब कुल लागत 1000 ₹ हो तो अल्पकाल और दीर्घकाल में संतुलन का वर्णन करो।
उत्तर:
(a)
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium) 4.1
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium) 4.2
(b) दीर्घकाल में भी संतुलन यही होगा, क्योंकि एकाधिकारी बाजार में नई फर्मों के प्रवेश पर प्रतिबंध होता है।
(c) यदि कुल लागत 1000 हो तो प्रत्येक स्तर पर लाभ इस प्रकार होगा
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium) 4.3
अतः अल्पकाल में यह 6 इकाई पर संतुलन में होगा, जहाँ MR = MC है और TR – TC अधिकतम है (जहाँ लाभ अधिकतम नहीं हो सकता तो कम से कम हानि का न्यूनीकरण किया जाना चाहिए।)
दीर्घकाल में फर्म उत्पादन बंद कर देगी, क्योंकि इससे हानि हो रही है।

प्र० 5. यदि अभ्यास 3 का एकाधिकारी फर्म सार्वजनिक क्षेत्र को फर्म हो, तो सरकार इसके प्रबंधक के लिए दी हुई सरकारी स्थिर कीमत (अर्थात् वह कीमत स्वीकारकर्ता है और इसीलिए पूर्ण प्रतिस्पर्धात्मक बाजार के फर्म जैसा व्यवहार करता है) स्वीकार करने के लिए नियम बनाएगी और सरकार यह निर्धारित करेगी कि ऐसी कीमत निर्धारित हो, जिससे बाजार में माँग और पूर्ति समान हो। उस स्थिति में संतुलन कीमत, मात्रा और लाभ क्या होंगे?
उत्तर: यदि सरकार सरकारी स्थिर कीमत स्वीकार करने के नियम बनाती है और ऐसी कीमत बनाती है, जिससे बाजार माँग और बाजार पूर्ति बराबर हो तो संतुलन कीमत = ₹10
संतुलन मात्रा = 10 इकाई, लाभ = शून्य क्योंकि 10 इकाई पर लाभ = शून्य है।

प्र० 6. उस स्थिति में सीमान्त संप्राप्ति वक्र के आकार पर टिप्पणी कीजिए, जिसमें कुल संप्राप्ति वक्र
(i) धनात्मक प्रवणता वाली सरल रेखा हो
(ii) समस्तरीय सरल रेखा हो।
उत्तर:
(i) जब कुल संप्राप्ति वक्र अक्ष केंद्र से गुजरती हुई एक धनात्मक ढलान वाली सरल रेखा है, तो सीमान्त संप्राप्ति वक्र X-अक्ष के समान्तर क्षैतिज सरल रेखा होगा।
(ii) जब कुल संप्राप्ति वक्र एक समस्तरीय सरल रेखा हो, तो सीमान्त संप्राप्ति वक्र X-अक्ष को स्पर्श करेगा अर्थात् MR = 0 होगा। क्योंकि
TR = CMR, TR = 0
MR = 0

प्र० 7. नीचे सारणी में वस्तु की बाजार माँग वक्र और वस्तु उत्पादक एकाधिकारी फर्म के लिए कुल लागत दी हुई है। इनका उपयोग करके निम्नलिखित की गणना करें-
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium) 7
(a) सीमान्त संप्राप्ति और सीमांत लागत सारणी
(b) वह मात्रा जिस पर सीमांत संप्राप्ति और सीमांत लागत बराबर है।
(c) निर्गत की संतुलन मात्रा और वस्तु की संतुलन कीमत
(d) संतुलन में कुल संप्राप्ति, कुल लागत और कुल लाभ
उत्तर:
(a)
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium) 7.1
(b) MR = MC (दूसरी इकाई पर) = 30
MR = MC (छठीं इकाई पर) = 4
(c) उत्पादक संतुलन में है जहाँ MR = MC अगली इकाई पर MC बढ़ रहा हो,
अत: उत्पादक छठी इकाई पर संतुलन में है जहाँ MR = MC = 4
संतुलन मात्रा = 6 इकाई
(d) संतुलन में कुल संप्राप्ति = 114, कुल लागत 109 लाभ = 114 – 109 = ₹ 5

प्र० 8. निर्गत के उत्तम अल्पकाल में यदि घाटा हो, तो क्या अल्पकाल में एकाधिकारी फर्म उत्पादन को जारी रखेगी?
उत्तर: जब तक कुल हानि/घाटा कुल स्थिर लागत से कम है फर्म उत्पादन जारी रखेगी, परन्तु यदि कुल स्थिर लागत से अधिक है तो वह उत्पादन बंद कर देगी।

प्र० 9. एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में किसी फर्म की माँग वक्र की प्रवणता ऋणात्मक क्यों होती है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर: एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में किसी फर्म की माँग वक्र की प्रवणता ऋणात्मक होती है क्योंकि
(i) माँग के नियम के अनुसार उत्पादक अपने उत्पाद की कीमत कम करके ही उसकी अधिक मात्रा बेच सकता है।
(ii) बाजार में वस्तु के निकट प्रतिस्थापन वस्तुएँ उपलब्ध होती हैं।

प्र० 10. एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में दीर्घकाले के लिए किसी फर्म का संतुलन शून्य लाभ पर होने का क्या कारण है?
उत्तर: एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा बाजार में नये फर्मों का निर्बाध रूप से प्रवेश होता है। यदि उद्योग में फर्म अल्पकाल में धनात्मक लाभ प्राप्त कर रहा हो तो इससे नई फर्ने उद्योग में प्रवेश के लिए आकर्षित होंगी और यह तब तक होगा जब तक लाभ शून्य न हो जायें। इसके विपरीत, यदि अल्पकाल में फर्मों को घाटा हो रहा हो, तो कुछ फर्मे उत्पादन कर देंगी और फर्मों का बाजार से बहिर्गमन होगा। पूर्ति में कमी के कारण संतुलन कीमत बढ़ेगी और यह तब तक होगा जब तक लाभ शून्य न हो जाये।

प्र० 11. तीन विभिन्न विधियों की सूची बनाइए, जिसमें अल्पाधिकारी फर्म व्यवहार कर सकता है।
उत्तर: एक अल्पाधिकारी फर्म तीन विधियों से व्यवहार कर सकती है
(i) अल्पाधिकारी फर्मे आपस में साँठगाँठ करके यह निर्णय ले सकती हैं कि वे एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा नहीं करेंगी। इस प्रकार वे फर्मे बाजार का उचित बँटवारा कर लेंगी और प्रत्येक फर्म अपने-अपने बाजार में
एकाधिकारी फर्म की तरह व्यवहार करेगी।
(ii) अल्पाधिकारी फर्मे यह निर्णय ले सकती हैं कि लाभ को अधिक करने के लिए वे उस वस्तु की कितनी मात्रा का उत्पादन करें। इससे उनकी वस्तु की मात्रा की पूर्ति अन्य फर्मों को प्रभावित नहीं करेगी।
(iii) अल्पाधिकारी फर्मे वस्तु अनम्य कीमत (Price rigidity) की नीति भी अपना सकती हैं। इसके अन्तर्गत माँग में परिवर्तन के फलस्वरूप कीमत में परिवर्तन नहीं होगा।

प्र० 12. यदि द्वि-अधिकारी का व्यवहार कुर्नाट के द्वारा वर्णित व्यवहार जैसा हो, तो बाजार माँग वक्र को समीकरण q = 200 – 4 p द्वारा दर्शाया जाता है तथा दोनों फर्मों की लागत शून्य होती है। प्रत्येक फर्म के द्वारा संतुलन और संतुलन बाजार कीमत में उत्पादन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर: शून्य कीमत पर उपभोक्ता की माँग की अधिकतम मात्रा 200 है {(200 – 410) – 200 – 0 = 200} कल्पना कीजिये कि फर्म B वस्तु की शून्य इकाई की पूर्ति करती है और फर्म A मानती है कि अधिकतम माँग = 200 इकाई है, तो वह इसकी आधी अर्थात् 100 इकाइयों की पूर्ति का निर्णय लेंगी। दिया हुआ है फर्म A 100 इकाइयों की पूर्ति कर रही है तो फर्म 8 के लिए 100 इकाई (200 – 100) की माँग अब भी विद्यमान है तो वह इसकी आधी 50 इकाई की पूर्ति करेगी। फर्म A के लिए अब 150(200 – 50) की माँग विद्यमान है वह इसकी आधी 75 इकाई की पूर्ति करेगी। इस तरह दोनों फर्मों में एक दूसरे के प्रति संचलन जारी रहेगी। अतः दोनों फर्मे अन्ततः निम्नलिखित के बराबर निर्गत की पूर्ति करेंगे,
NCERT Solutions for Class 12 Microeconomics Chapter 6 Non Competitive Markets (Hindi Medium) 12

प्र० 13. आय अनम्य कीमत का क्या अभिप्राय है? अल्पाधिकार के व्यवहार से इस प्रकार का निष्कर्ष कैसे निकल सकता है?
उत्तर: अनम्य कीमत का अभिप्राय है कि अल्पाधिकार बाजार में फर्ने वस्तु की कीमत में परिवर्तन नहीं करेंगी। अनम्य कीमत नीति के अन्तर्गत अल्पाधिकारी फर्मों को माँग में परिवर्तन के फलस्वरूप बाजार कीमत में निर्बाध संचालन नहीं होता। इसका कारण यह है कि किसी भी फर्म द्वारा प्रारंभ की गई कीमत में परिवर्तन के प्रति अल्पाधिकारी । फर्म प्रतिक्रिया व्यक्त करती है। यदि यह क्रिया प्रारंभ हो गई तो इससे कीमत युद्ध प्रारंभ हो सकता है जिससे सभी को हानि होगी।

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NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 2 National Income Accounting (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 2 National Income Accounting (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. उत्पादन के चार कारक कौन-कौन से हैं और इनमें से प्रत्येक के पारिश्रमिक को क्या कहते हैं?
उत्तर: उत्पादन के चार कारण निम्नलिखित हैं
1. श्रम-किसी भी प्रकार का शारीरिक या मानसिक कार्य जो धन उपार्जन के लिए किया जाता है श्रम कहलाता है।
2. भूमि–अर्थशास्त्र में उत्पादन में प्रयोग होने वाले सभी प्राकृतिक साधनों को भूमि में शामिल किया जाता है।
3. पूँजी-उत्पादन में प्रयोग होने वाले मनुष्य उत्पादित साधनों को पूँजी में शामिल किया जाता है।
4. उद्यमी-उद्यमी ऐसे लोग हैं जो बड़े निर्णयों के नियंत्रण का कार्य करते हैं और उद्यम के साथ जुड़े बड़े जोखिम का वहन करते हैं।
श्रम के पारिश्रमिक को वेतन कहते हैं।
भूमि के पारिश्रमिक को किराया लगान कहते हैं।
पूँजी के पारिश्रमिक को ब्याज कहते हैं।
उद्यमी के पारिश्रमिक को लाभ कहते हैं।

प्र० 2. किसी अर्थव्यवस्था में समस्त अंतिम व्यय समस्त कारक अदायगी के बराबर क्यों होता है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर: एक अर्थव्यवस्था में समस्त अंतिम व्यय समस्त कारक अदायगी के बराबर होता है क्योंकि अंतिम व्यय और कारक अदायगी दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। प्रत्येक अर्थव्यवस्था में मुख्य रूप से दो बाजार होते हैं।
1. उत्पादन बाजार
2. कारक बाजार
परिवार फर्मों के कारक साधन जैसे-भूमि, श्रम, पूँजी, उद्यमी आदि की आपूर्ति करते हैं जिनके बदले में फर्ने । इन्हें लगान, किराया, मजदूरी, ब्याज और लाभ केग रूप में कारक भुगतान करती है। परिवारों को जो आय प्राप्त होती है उससे वे अपनी आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए फर्मों से अंतिम वस्तुएँ और सेवाएँ खरीदते हैं। इस प्रकार उत्पादकों का व्यय लोगों की आय और लोगों का व्यय उत्पादकों की आय बनता है। एक अर्थव्यवस्था में दो बाजारों में चक्रीय प्रवाह को हम निम्नलिखित चित्र द्वारा दिखा सकते हैं।
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 2 National Income Accounting (Hindi Medium) 2

प्र० 3. स्टॉक और प्रवाह में भेद स्पष्ट कीजिए। निवल निवेश और पूँजी में कौन स्टॉक है और कौन प्रवाह? हौज में पानी के प्रवाह से निवल निवेश और पूँजी की तुलना कीजिए।
उत्तर: स्टॉक और प्रवाह दोनों चर मात्रा के अन्तर का आधार समय है। एक को समय बिंदु के संदर्भ में मापा जाता है। तो दूसरे को समयावधि के संदर्भ में मापा जाता है। प्रवाह चर-प्रवाह एक ऐसी मात्रा है जिसे समय अवधि के संदर्भ में मापा जाता है, जैसे घंटे, दिन, सप्ताह, मास, वर्ष आदि के आधार पर मापा जाता है। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय आय एक प्रवाह है जो किसी देश में, एक वर्ष में उत्पादित अंतिम पदार्थ व सेवाओं के शुद्ध प्रवाह के मौद्रिक मूल्य को मापता है। अन्य शब्दों में, राष्ट्रीय आय, अर्थव्यवस्था की एक वर्ष की समयावधि में होने वाली प्राप्तियों को दर्शाता है। प्रवाह चरों के साथ जब तक समयावधि न लगी हो इनका कोई अर्थ नहीं निकलता। मान लो श्रीमान X की आय १ 2000 है तो आप उनके वित्तिय स्तर के विषय में क्या कहेंगे? कुछ भी नहीं कह सकते। यदि उनकी आय १ 2000 प्रति वर्ष है। तो वे बहुत निर्धन हैं यदि यह है 2000 प्रति माह है तो वे गरीबी रेखा से थोड़ा ऊपर हैं, यदि यह है 2000 प्रति सप्ताह है तो वे मध्यम वर्ग में हैं, यदि यह 2000 प्रति दिन है तो वे अमीर हैं और यदि यह है 2000 प्रति घंटा है तो बहुत अमीर हैं। अतः प्रवाह चरों का अर्थ समयावधि के बिना नहीं निकाला जा सकता। स्टॉक-स्टॉक एक ऐसी मात्रा है जो किसी निश्चित समय बिन्दु पर मापी जाती है। इसकी व्याख्या समय के किसी बिन्दु जैसे-4 बजे, सोमवार, 1 जनवरी 2014 आदि के आधार पर की जाती है। उदाहरण के लिए राष्ट्रीय पूँजी एक स्टॉक है जो देश के अधिकार में किसी निश्चित तिथि को मशीनों, इमारतों, औजारों, कच्चामाल आदि के स्टॉक के रूप में करती है। स्टॉक का संबंध एक निश्चित तिथि से होता है। मान लो श्रीमान X का बैंक शेष । १ 2000 है तो इसके साथ यह बताना जरूरी है कि कब/किस समय बिन्दु पर। उचित अर्थ के लिए कहना चाहिए कि 1 जुलाई, 2014 को श्रीमान X का बैंक शेष १ 2000 है। निवल निवेश एक प्रवाह है और पूँजी स्टॉक है क्योंकि निवल निवेश का संबंध एक समय काल से है, जबकि पूँजी एक निश्चित समय पर एक व्यक्ति की संपत्ति का भण्डार बनाती है। पूँजी एक हौज के समान है जबकि निवल निवेश उस हौज में पानी के प्रवाह के समान है। हौज में पानी का स्तर एक निश्चित समय बिन्दु पर मापा जाता है, अत: यह एक स्टॉक है, जबकि बहते हुए पानी का संबंध समय-काल से है।

प्र० 4. नियोजित और अनियोजित माल-सूची संचय में क्या अन्तर है? किसी फर्म की माल सूची और मूल्यवर्धित के बीच संबंध बताइए।
उत्तर: नियोजित माल सूची संचय तथा अनियोजित माल सूची संचय में अन्तर इस प्रकार है-
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 2 National Income Accounting (Hindi Medium) 4
मूल्यवर्धित = उत्पादन का मूल्य – मध्यवर्ती उपभोग
उत्पादन का मूल्य = बिक्री + माल-सूची संचय
अतः मूल्यवर्धित = बिक्री + माल-सूची संचय – मध्यवर्ती उपभोग,

प्र० 5. तीनों विधियों से किसी देश के सकल घरेलू उत्पाद की गणना करने की किन्हीं तीन निष्पत्तियाँ लिखिए। संक्षेप में यह भी बताइए कि प्रत्येक विधि से सकल घरेलू उत्पाद का एक-सा मूल्य क्या आना चाहिए?
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 2 National Income Accounting (Hindi Medium) 5
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 2 National Income Accounting (Hindi Medium) 5.1
प्रत्येक विधि से सकल घरेलू उत्पाद का मूल्य एक सा आना चाहिए, क्योंकि अर्थव्यवस्था में जितना उत्पादन होगा, उतनी ही कारक आय सृजित होगी और जितनी साधन आय सृजित होगी उतनी ही अंतिम व्यय होगा। इसे दिए गए चित्र द्वारा दिखाया गया है।

प्र० 6. बजटीय घाटा और व्यापार घाटा को परिभाषित कीजिए। किसी विशेष वर्ष में किसी देश की कुल बचत के ऊपर निजी । निवेश का आधिक्य 2000 करोड़ १ था। बजटीय घाटे की राशि 1500 करोड़ १ थी। उस देश के व्यापार घाटे का परिमाण क्या था?
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 2 National Income Accounting (Hindi Medium) 6
सकल घरेलू उत्पाद = C + S + T
सकल घरेलू व्यय = C + I + G + X – M
अतः C + I + G + X – M = C + S + T
1. इसमें G – T से उस मात्रा की माप होती है, जिस मात्रा में सरकारी व्यय में सरकार द्वारा अर्जित कर राजस्व से अधिक वृद्धि होती है। इसे ‘बजटीय घाटा’ के रूप में सूचित किया जाता है। M – X के अन्तर
को व्यापार घाटा’ के रूप में सचित किया जाता है।
2. बजट घाटा देश के लिए एक सीमा के भीतर वांछनीय हो सकता है परन्तु व्यापार घाटा सदा अवांछनीय है।
3. (I – S) + (G – T) = M – X हम जानते हैं (I – S) + (G – T)
(2000) + 1500 = 35000
अतः व्यापार घाटा = + 3000

प्र० 7. मान लीजिए कि किसी विशेष वर्ष में किसी देश का सकल घरेलू उत्पाद बाजार कीमत पर 1100 करोड़ र था। विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय 100 करोड़ था। अप्रत्यक्ष कर मूल्य-उपदान का मूल्य 150 करोड़ है और | राष्ट्रीय आय 850 र है, तो मूल्यह्रास के समस्त मूल्य की गणना कीजिए।
उत्तर: पाठ्यक्रम से हटाया गया है।

प्र० 8. किसी देश विशेष में एक वर्ष में कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद 1900 करोड़ १ है। फर्मों/सरकार द्वारा
परिवार को अथवा परिवार के द्वारा सरकार/फर्मों को किसी भी प्रकार का ब्याज अदायगी नहीं की जाती है, परिवारों की वैयक्तिक प्रयोज्य आय 1200 करोड़ र है। उनके द्वारा अदा किया गया वैयक्तिक आयकर 600 करोड़ र है। और फर्मों तथा सरकार द्वारा अर्जित आय का मूल्य 200 करोड़ १ है। सरकार और फर्म द्वारा परिवार को दी गई अंतरण अदायगी का मूल्य क्या है?
उत्तर:
NNPFC = 1900
वैयक्तिक प्रयोज्य आय = 1200
वैयक्तिक आयकर = 600 करोड़
वैयक्तिक आय = 1200 + 600 = 1800
वैयक्तिक आय = NNPFC – अवितरित लाभ + सरकार और फर्मों द्वारा परिवार को दी गई अंतरण अदायगी
1800 = 1900 – 200 + अंतरण अदायगी
अंतरण अदायगी = 1800 – 1700 = 100 करोड़

प्र० 9. निम्नलिखित आँकड़ों से वैयक्तिक आय और वैयक्तिक प्रयोज्य आय की गणना कीजिए। (करोड़ ₹ में)
(a) कारक लागत पर निवल घरेलू उत्पाद = 8000
(b) विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय = 200
(c) अवितरित लाभ = 1000
(d) निगम कर = 500
(e) परिवारों द्वारा प्राप्त ब्याज = 1500
(f) परिवारों द्वारा भुगतान किया गया ब्याज = 1200
(g) अंतरण आय = 300
(h) वैयक्तिक कर = 500
उत्तर: वैयक्तिक आय = (a) + (b) – (c) – (d) + (e) – (f) + (g)
= 8000 + 200 – 1000 – 500 + 1500 – 1200 + 300 = 10000 – 2700 = ₹ 6300
करोड़ वैयक्तिक प्रयोज्य आय = वैयक्तिक आय – वैयक्तिक कर = 6300 – 500 = ₹ 5800 करोड़

प्र० 10. हजाम राजू एक दिन में बाल काटने के लिए 500 ₹ का संग्रह करता है। इस दिन उसके उपकरण में 50 ₹ का मूल्यह्रास होता है। इस 450 में से राजू 30 ₹ बिक्री कर अदा करता है। वह 200 ₹ घर ले जाता है और 220 ₹ उन्नति और नए उपकरणों का क्रय करने के लिए रखता है। वह अपनी आय में से 20 ₹ आय कर के रूप में अदा करता है। इन पूरी सूचनाओं के आधार पर निम्नलिखित में राजू का योगदान ज्ञात कीजिए-
(a) सकल घरेलू उत्पाद
(b) बाजार कीमत पर निबल राष्ट्रीय उत्पाद
(c) कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय आय
(d) वैयक्तिक आय
(e) वैयक्तिक प्रयोज्य आये
उत्तर:
(a) सकल घरेलू उत्पाद बाजार कीमत पर = कुल प्राप्ति = 500
सकल घरेलू उत्पाद कारक आय पर = सकल उत्पाद बाजार कीमत पर – अप्रत्यक्ष कर
= 500 – 30 = ₹ 470
(b) बाजार कीमत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद = सकल घरेलू उत्पाद बाजार कीमत पर – मूल्यह्रास ब
= 500 – 50 = ₹ 450
(c) कारक लागत पर निम्न राष्ट्रीय उत्पाद = बाजार कीमत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद – अप्रत्यक्ष कर
= 450 – 30 = ₹ 420
(d) वैयक्तिक आय = कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद – अवितरित लाभ
= 420 – 220 = ₹ 200
(e) वैयक्तिक प्रयोज्य आय = वैयक्तिक आय – वैयक्तिक कर
= 200 – 20 = ₹ 180

प्र० 11. किसी वर्ष एक अर्थव्यवस्था में मौद्रिक सकल राष्ट्रीय उत्पाद का मूल्य 2500 करोड़ १ था। उसी वर्ष, उस देश
के सकल राष्ट्रीय उत्पाद का मूल्य किसी आधार वर्ष की कीमत पर 3000 करोड़ १ था। प्रतिशत के रूप में वर्ष के सकल घरेलू उत्पाद अवस्फीतिक के मूल्य की गणना कीजिए। क्या आधार वर्ष और उल्लेखनीय वर्ष के बीच कीमत स्तर में वृद्धि हुई?
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 12 Macroeconomics Chapter 2 National Income Accounting (Hindi Medium) 11
सकल घरेलू उत्पाद अवस्फीति (GDP Deflatec) का मान 100% से कम है अतः कीमत स्तर में आधार वर्ष की तुलना में गिरावट आई है।

प्र० 12. किसी देश के कल्याण के निर्देशांक के रूप में सकल घरेलू उत्पाद की कुछ सीमाओं को लिखो।
उत्तर: किसी देश के कल्याण के निर्देशांक के रूप में सकल घरेलू उत्पाद की कुछ सीमाएँ निम्नलिखित हैं-
1. सकल घरेलू उत्पाद का वितरण-यह संभव है कि किसी देश का सकल घरेलू उत्पाद भी बढ़ रहा हो और उसके साथ-साथ आय की असमानताएँ भी बढ़ रही हो। ऐसी स्थिति में अमीर और अधिक अमीर हो । जायेंगे, परन्तु निर्धन और अधिक निर्धन हो जायेंगे, अतः निर्धनों का कल्याण नहीं होगा। उदाहरण के लिए एक देश की आय सन् 2000 में 14000 करोड़ से बढ़कर 320000 करोड़ हो गई। 14000 करोड़ में से 400 करोड़ 50% निर्धनतम को मिल रहे थे जबकि 20000 करोड़ में से ₹ 2000 करोड़ निर्धनतम वर्ग को मिल रहे थे और 180000 करोड़ अमीरतम वर्ग को तो निर्धनतम को आर्थिक कल्याण स्तर कम हुआ है। 2. गैर मौद्रिक विनिमय–अर्थव्यवस्था के अनेक कार्यकलापों का मूल्यांकन मौद्रिक रूप में नहीं होता। उदाहरण के लिए जो महिलायें अपने घरों में घरेलू सेवाओं का निष्पादन करती हैं, उसके लिए उन्हें कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता। बहुत सी सेवाओं को एक दूसरे के बदले में प्रत्यक्ष रूप से विनिमय होता है, क्योंकि मुद्रा का यहाँ प्रयोग नहीं होता है, इसीलिए वस्तु विनिमय को आर्थिक कार्यकलाप का हिस्सा नहीं माना जाता। इससे सकल घरेलू उत्पाद का अल्पमूल्यांकन होता है, अतः सकल घरेलू उत्पाद का मूल्यांकन मानक तरीके से करने पर यह देश के कल्याण की सही तस्वीर प्रस्तुत नहीं करता।
3. बाह्य कारण–बाह्य कारणों से तात्पर्य किसी देश या व्यक्ति के लाभ या हानि से है, जिससे दूसरा पक्ष प्रभावित होता है जिसे भुगतान नहीं किया जाता है। उदाहरण के लिए जब एक फैक्टरी प्रदूषण करती है। तो इससे समाज को हानि होती है, परन्तु समाज को इस हानि के प्रतिफल में क्षतिपूर्ति नहीं दी जाती। जल प्रदूषण मछुआरों को हानि पहुँचाता है परन्तु इस हानि की क्षतिपूर्ति नहीं होती। इससे सकल घरेलू उत्पाद, अर्थव्यवस्था के कल्याण का सही मूल्यांकन करने में असमर्थ हो जाता है। इसी प्रकार एक व्यक्ति आम का बाग लगाता है तो इससे शुद्ध वायु का लाभ उस स्थान के पूरे समाज को मिलता है, परन्तु । इस लाभ के लिए कोई आम के बाग के मालिक को भुगतान नहीं करता। अतः ऋणात्मक बाह्यताएँ तथा धनात्मक बाह्यताएँ सकल घरेलू उत्पाद को अर्थव्यवस्था के कल्याण का सूचक नहीं रहने देती।

[MORE QUESTIONS SOLVED] (अन्य हल प्रश्न)

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. वास्तविक प्रवाह से अर्थ है।
(क) परिवारों से फर्मों को कारक साधनों का प्रवाह
(ख) फर्मों से परिवारों को वस्तुओं और सेवाओं का प्रवाह
(ग) के और ख दोनों
(घ) उपयुक्त कोई नहीं

2. मौद्रिक प्रवाह और वास्तविक प्रवाह
(क) बराबर होते हैं।
(ख) बराबर भी हो सकते हैं और असमान भी
(ग) असमान होते हैं।
(घ) बराबर हो तो आय का चक्रीय प्रवाह संतुलन में होता है।

3. निम्नलिखित में से कौन सा आय के चक्रीय प्रवाह का क्षरण (leakage) है?
(क) निवेश
(ख) निर्यात
(ग) सरकारी व्यय
(घ) आयात

4. निम्नलिखित में से कौन सा आय के चक्रीय प्रवाह का भरण है?
(क) बचत
(ख) कर
(ग) सरकारी व्यय
(घ) आयात

5. राष्ट्रीय आय का प्रवाह संतुलन में होता है जब
(क) भरण = क्षरण होते हैं।
(ख) भरण > क्षरण होते हैं।
(ग) भरण < क्षरण होते हैं। (घ) भरण ≠ क्षरण होते हैं।

6. यदि अर्थव्यवस्था में हस्तांतरण आय है तो?
(क) वास्तविक प्रवाह मौद्रिक प्रवाह से अधिक होगा।
(ख) वास्तविक प्रवाह और मौद्रिक प्रवाह बराबर होंगे
(ग) वास्तविक प्रवाह मौद्रिक प्रवाह से कम होगा
(घ) इनमें से कोई नहीं

7. निम्नलिखित में से कौन सा प्रवाह चर है?
(क) आय
(ख) बचत
(ग) जन्म दर
(घ) उपरोक्त सभी

8. एक देश की कुल जनसंख्या क्या है?
(क) प्रवाह
(ख) स्टॉक
(ग) क और ख दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं

9. निम्नलिखित में से कौन सी मद सकल घरेलू उत्पाद में शामिल की जाती है?
(क) हस्तांतरण भुगतान
(ख) कारक भुगतान
(ग) विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय
(घ) उपरोक्त सभी

10. समीकरण पूरा करें-सकल घरेलू उत्पाद – ………… = निवल घरेलू उत्पाद
(क) अप्रत्यक्ष कर
(ख) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर
(ग) मूल्यह्रास
(घ) विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय

11. बाजार कीमत पर राष्ट्रीय आय कारक आय पर राष्ट्रीय आय से अधिक होगी यदि
(क) अप्रत्यक्ष कर > आर्थिक सहायता
(ख) अप्रत्यक्ष कर < आर्थिक सहायता
(ग) अप्रत्यक्ष कर = आर्थिक सहायता
(घ) मूल्यह्रास = शुद्ध अप्रत्यक्ष कर

12. सकल घरेलू उत्पाद में ……………… को जोड़कर सकल राष्ट्रीय उत्पाद प्राप्त होता है।
(क) विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आर्य
(ख) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर
(ग) मूल्यह्रास
(घ) शुद्ध निर्यात

13. बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद – शुद्ध अप्रत्यक्ष कर मूल्यह्रास किसके बराबर होगा?
(क) GDPMP
(ख) NNPFC
(ग) GNPFC
(घ) NDPFC

14. निम्नलिखित में से कौन सी वस्तु मध्यवर्ती वस्तु है?
(क) चीनी उत्पादन में मशीनों का प्रयोग
(ख) कार चलाने में पेट्रोल का प्रयोग
(ग) बिस्कुट बनाने में आटे का प्रयोग
(घ) उपरोक्त सभी

15. कारक लागत पर सकल राष्ट्रीय आय तथा बाजार कीमत पर सकल घरेलू आय बराबर होंगे यदि
(क) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर = विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आये हो
(ख) आर्थिक सहायता = विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय, हो
(ग) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर > विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय हो
(घ) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर < विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय हो

प्रश्न 16 से 18 का उत्तर नीचे दी गई जानकारी के आधार पर दें
सकल घरेलू उत्पाद बाजार कीमत पर = ₹ 4200 करोड़
मूल्यह्रास = ₹ 200 करोड़
अप्रत्यक्ष कर = ₹ 50 करोड़
आर्थिक सहायता = ₹ 30 करोड़
विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय = ₹ (-) 10 करोड़

16. कारक आय पर निवल घरेलू उत्पाद बराबर
(क) 4020
(ख) 3980
(ग) 4180
(घ) 4170

17. बाजार कीमत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद बराबर
(क) 4010
(ख) 4020
(ग) 3990
(घ) 4180

18. कारक आय पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद बराबर
(क) 3990
(ख) 4020
(ग) 4180
(घ) 4170

19. निम्नलिखित में से कौन सी हस्तांतरण आय नहीं है?
(क) बच्चे को दिया गया जेब खर्च
(ख) वृद्धावस्था पेंशन
(ग) सेवानिवृत्ति पेंशन
(घ) बेरोजगारी भत्ता

20. निम्नलिखित में से कौन सा भारत का सामान्य निवासी माना जाएगा?
(क) विश्व बैंक
(ख) इलाज के लिए भारत आया विदेशी
(ग) अमेरिका के दूतावास में कार्यरत भारतीय
(घ) पढ़ाई के लिए कोरिया से आया विद्यार्थी

21. निम्नलिखित में से किसे भारत की घरेलू सीमा में शामिल किया जाएगा?
(क) विदेशों में स्थित भारत के दूतावास
(ख) भारत में स्थित विदेशी दूतावास
(ग) अन्तराष्ट्रीय संस्थाएँ जो भारत में कार्यरत हैं
(घ) उपरोक्त सभी

22. निम्नलिखित में से किसे घरेलू आय में शामिल किया जाएगा?
(क) विदेश में एक भारतीय बैंक द्वारा अर्जित लाभ ।
(ख) अमेरिका में भारतीय दूतावास में कार्यरत अमेरिकी कर्मचारियों को वेतन
(ग) भारतीय सरकार द्वारा दी गई छात्रवृत्तियाँ
(घ) उपरोक्त सभी

23. निम्नलिखित में से कौन सी आय भारत की घरेलू आय का हिस्सा है?
(क) सरकार द्वारा दी जाने वाली वृद्धावस्था पेंशन
(ख) विदेशों से प्राप्त साधन आय
(ग) विदेशों को दी गई साधन आय
(घ) भारतीय स्टेट बैंक की सिंगापुर शाखा द्वारा अर्जित लाभ

24. समीकरण को पूरा करो।
वैयक्तिय आय = निजी आय – ……….
(क) निगम कर और अवितरित लाभ
(ख) वैयक्तिक कर
(ग) निगम कर और बचत कर
(घ) उपरोक्त सभी

25. निजी आय = निजी क्षेत्र की आय + …………
(क) विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय
(ख) विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय + समस्त अंतरण भुगतान
(ग) विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय – समस्त अंतरण भुगतान
(घ) निगम कर + अवितरित आय

26. दो हरी गणना से बचने के लिए कौन सी विधि अपनाई जाती है?
(क) आय विधि
(ख) व्यय विधि
(ग) मूल्यवृद्धि विधि
(घ) इनमें से कोई नहीं

27. निम्नलिखित में से किसे राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता?
(क) वित्तीय लेन देन ।
(ख) गैर कानूनी विधियाँ
(ग) पुराने सामान का क्रय विक्रय
(घ) उपर्युक्त सभी

28. विदेशों में काम कर रहे भारतीयों की आय ……………. में शामिल होगी।
(क) भारत की घरेलू आय
(ख) हस्तांतरण आय
(ग) विदेशों से प्राप्त साधन आय
(घ) शुरु निर्यात

29. कर्मचारियों के पारिश्रमिक में किसे शामिल नहीं किया जाता?
(क) किस्म में मजदूरी/वेतन
(ख) बोनस और कमीशन
(ग) नियोजकों द्वारा सामाजिक सुरक्षा योजना में योगदान
(घ) कर्मचारी द्वारा सामाजिक सुरक्षा योजना में योगदान

30. आर्थिक विकास का सही सूचक कौन सा है?
(क) चालू कीमतों पर राष्ट्रीय आय
(ख) स्थिर कीमतों पर राष्ट्रीय आय
(ग) स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय
(घ) वैयक्तिक आय

31. आर्थिक कल्याण का सही सूचक कौन सा है?
(क) स्थिर कीमतों पर राष्ट्रीय आय
(ख) स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति आये
(ग) हरित GNP
(घ) मानव विकास सूचकांक

32. वैयक्तिक प्रयोज्य आय बराबर है।
(क) वैयक्तिक आय + सरकारी प्रशासनिक विभागों द्वारा विभिन्न प्राप्तियाँ
(ख) वैयक्तिक आय + प्रत्यक्ष व्यक्तिक कर – सरकारी प्रशासनिक विभागों द्वारा विभिन्न प्राप्तियाँ
(ग) वैयक्तिक आय – प्रत्यक्ष व्यक्तिक कर – सरकारी प्रशासनिक विभागों द्वारा विभिन्न प्राप्तियाँ
(घ) निजी आय + प्रत्यक्ष कर

33. निम्नलिखित में से किसे अंतिम उपभोग व्यय में शामिल नहीं किया जाता?
(क) भोजन पर परिवारों का व्यय
(ख) सरकार द्वारा शिक्षा पर व्यय
(ग) सरकार द्वारा सड़कों का निर्माण
(घ) पुराना मकान खरीदने पर व्यय

34. निजी आय तथा निजी क्षेत्र की आय के बीच किसका अन्तर है?
(क) कारक आय
(ख) अंतरण आय
(ग) अवितरित लाभ
(घ) निगम कर

35. राष्ट्रीय आय को जनसंख्या से भाग करने पर क्या प्राप्त होता है?
(क) प्रति व्यक्ति आय
(ख) निजी आय
(ग) वैयक्तिक आय
(घ) वैयक्तिक प्रयोज्य आय

36. सकल राष्ट्रीय प्रयोज्य आय = सकल राष्ट्रीय उत्पाद बाजार कीमत पर + …………..
(क) विदेशों से प्राप्त साधन आय
(ख) विदेशों से प्राप्त चालू अंतरण
(ग) समस्त अंतरण आय ।
(घ) राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज

उत्तर
1. (ग)
2. (क)
3. (घ)
4 (ग)
5. (क)
6. (ग)
7. (घ)
8. (ख)
9. (ख)
10. (ग)
11. (ग)
12. (क)
13. (ख)
14. (ग)
15. (क)
16. (ग)
17. (ग)
18. (घ)
19. (ग)
20. (ग)
21. (क)
22. (ख)
23. (ग)
24. (क)
25. (ख)
26. (ग)
27. (घ)
28. (ग)
29. (घ)
30. (ग)
31. (घ)
32. (ग)
33. (घ)
34. (ख)
35. (क)
36. (ख)

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