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NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 10 नीतिनवनीतम्

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Ruchira Chapter 10 नीतिनवनीतम् Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Ruchira Chapter 10 नीतिनवनीतम्

अभ्यासः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानि प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत-
(क) नृणां संभवे को क्लेशं सहेते?
उत्तरम्:
माता-पितरौ।

(ख) कीदृशं जलं पिबेत्?
उत्तरम्:
वस्त्रपूत।

(ग) नीतिनवनीतम् पाठः कस्मात् ग्रन्थात् सङ्कलित?
उत्तरम्:
मनुस्मृति

(घ) कीदृशीं वाचं वदेत्?
उत्तरम्:
प्रियं।

(ङ) उद्यानम् कैः निनादैः रम्यम्?
उत्तरम्:
संतोष।

(च) दुःखं किं भवति?
उत्तरम्:
परवशं।

(छ) आत्मवशं किं भवति?
उत्तरम्:
सुखं।

(ज) कीदृशं कर्म समाचरेत्?
उत्तरम्:
मनः पूत।

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प्रश्न 2.
अधोलिखितानि प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत-
(क) पाठेऽस्मिन् सुखदुःखयों किं लक्षणम् उक्तम्?
उत्तरम्:
पाठेऽस्मिन् परवशं दुःखं च आत्मवश सुखं।

(ख) वर्षशतैः अपि कस्य निष्कृतिः कर्तुं न शक्या?
उत्तरम्:
वर्षशतैः अपि मातापितरौ निष्कृतिः कर्तुं न शक्या।

(ग) “त्रिषु तुष्टेषु तपः समाप्यते” – वाक्येऽस्मिन् त्रयः के सन्ति?
उत्तरम्:
त्रयः दैहिक, दैविक, भौतिक सन्ति।

(घ) अस्माभिः कीदृशं कर्म कर्तव्यम्?
उत्तरम्:
अस्माभिः परितोष अन्तरात्मनः कर्म कर्त्तव्यम्।

(ङ) अभिवादनशीलस्य कानि वद्धर्ते?
उत्तरम्:
आयु, विद्या, यशोवलम्।

(च) सर्वदा केषां प्रियं कुर्यात्?
उत्तरम्:
सर्वदा तोर्नित्यं प्रियं कुर्यात।

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प्रश्न 3.
स्थूलपदान्यवलम्बय प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
(क) वृद्धोपसेविनः आयुर्विद्या यशो बलं न वर्धन्ते।
उत्तरम्:
केषां आयुर्विद्या यशों बनं न वर्धन्ते?

(ख) मनुष्यः सत्यपूतां वाचं वदेत्।
उत्तरम्:
मनुष्यः काम् वाचं वदेत्?

(ग) त्रिषु तुष्टेषु सर्व तपः समाप्यते।
उत्तरम्:
त्रिषु तुष्टेषु सर्वः कः समाप्यते?

(घ) मातापितरौ नृणां सम्भवे भाषया क्लेशं सहेते।
उत्तरम्:
कैः नृणां सम्भवे भाषया क्लेशं सहेते?

(ङ) तयोः नित्यं प्रियं कुर्यात्।
उत्तरम्:
तयोः नित्यं किम् कुर्यात्?

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प्रश्न 4.
संस्कृतभाषयां वाक्यप्रयोगं कुरुत-
(क) विद्या
(ख) तपः
(ग) समाचरेत्
(घ) परितोषः
(ङ) नित्यम
उत्तरम्:
(क) विद्या – विद्या सर्वधनं प्रधानं अस्ति।
(ख) तपः – त्रिषु तुष्टेषु तपः समाप्यते।
(ग) समाचरेत् – मनः पूतं कर्म समाचरेत्।
(घ) परितोषः – परितोषं परम् सुखम् अस्ति।
(ङ) नित्यम – अहं नित्यम् देवालयं गच्छामि।

प्रश्न 5.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् आम् अशुद्धवाक्यानां समक्षं च नैव इति लिखत-
(क) अभिवादनशीलस्य किमपि न वर्धते।
उत्तरम्:

(ख) मातापितरौ नृणां सम्भवे कष्टं सहेते।
उत्तरम्:
आम्

(ग) आत्मवशं तु सर्वमेव दुःखमस्ति।
उत्तरम्:

(घ) येन पितरौ आचार्यः च सन्तुष्टाः तस्य सर्व तपः समाप्यते।
उत्तरम्:
आम्

(ङ) मनुष्यः सदैव मनः पूतं समाचरेत्।
उत्तरम्:
आम्

(च) मनुष्यः सदैव तदेव कर्म कुर्यात् येनान्तरात्मा तुष्यते।
उत्तरम्:
आम्

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प्रश्न 6.
समुचितपदेन रिक्तस्थानानि पूरयत-
(क) मातापित्रे: तपसः निष्कृतिः __________ कर्तुमशक्या। (दशवर्षैरपि / षष्टि; वर्षेरपि / वर्षशतैरपि)।
(ख) नित्यं वृद्धोपसेविनः __________ वर्धन्ते (चत्वारि / पञ्च/षट्)।
(ग) त्रिषु तुष्टेषु __________ सर्वं समाप्यते (जप: / तप / कर्म)।
(घ) एतत् विद्यात् __________ लक्षणं सुखदुःपयो:। (शरीरेण!समासेन / विस्तारेण)
(ङ) दृष्टिपूतम् न्यसेत् __________। (हस्तम् / पादम् / मुखम्)
(च) मनुष्यः मातापित्रो: आचार्यस्यय च सर्वदा __________ कुर्यात्। (प्रियम् / अप्रियम् / अकार्यम्)
उत्तरम्:
(क) मातापित्रे: तपसः निष्कृतिः वर्षशतैरपि कर्तुमशक्या। (दशवर्षैरपि / षष्टि; वर्षेरपि / वर्षशतैरपि)।
(ख) नित्यं वृद्धोपसेविनः चत्वारि वर्धन्ते (चत्वारि / पञ्च/षट्)।
(ग) त्रिषु तुष्टेषु तपः सर्वं समाप्यते (जप: / तप / कर्म)।
(घ) एतत् विद्यात् समासेन लक्षणं सुखदुःपयो:। (शरीरेण!समासेन / विस्तारेण)
(ङ) दृष्टिपूतम् न्यसेत् पादम्। (हस्तम् / पादम् / मुखम्)
(च) मनुष्यः मातापित्रो: आचार्यस्यय च सर्वदा प्रियम् कुर्यात्। (प्रियम् / अप्रियम् / अकार्यम्)

प्रश्न 7.
मञ्जूषातः चित्वा उचिताव्ययेन वाक्यपूर्ति कुरुत-
तावत्, अपि, एव, यथा, नित्यं, यादृशम्
(क) तयोः _________ प्रियं कुर्यात्।
(ख) _________ कर्म करिष्यसि। तादृशं फलं प्राप्स्यसि।
(ग) वर्षशतैः _________ निष्कृतिः न कर्तुं शक्या।
(घ) तेषु _________ त्रिषु तुष्टेषु तपः समाप्यते।
(ङ) _________ राजा तथा प्रजा
(च) यावत् सफलः न भवति _________ परिश्रमं कुरु।
उत्तरम्:
(क) तयोः नित्यं प्रियं कुर्यात्।
(ख) यादशम् कर्म करिष्यसि। तादृशं फलं प्राप्स्यसि।
(ग) वर्षशतैः अपि निष्कृतिः न कर्तुं शक्या।
(घ) तेषु एव त्रिषु तुष्टेषु तपः समाप्यते।
(ङ) यथा राजा तथा प्रजा
(च) यावत् सफलः न भवति तावत् परिश्रमं कुरु।

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योग्यता-विस्तार
भावविस्तारः संस्कृत साहित्य में जीवन के लिए अत्यन्त उपयोगी कर्तव्य-निर्देश दिए गए हैं जो यत्र-तत्र सुभाषितों और नीतिश्लोकों के रूप में प्राप्त होते हैं। जरूरत है उन्हें ढूँढने वाले मनुष्य की। जीवनमार्ग पर चलते हुए जब किंकर्तव्यविमूढ़ता की स्थिति आती है तो संस्कृत सूक्तियाँ हमें मार्गबोध कराती हैं। नीतिशतक, विदुरनीति, चाणक्यनीतिदर्पण आदि ग्रन्थ ऐसे ही श्लोकों के अमर भण्डागार हैं।

1. कुछ समानान्तर श्लोक
कर्मणा मनसा वाचा चक्षषाऽपि चतुर्विधम्।
प्रसादयति लोकं यस लोको नु प्रसीदति।
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
प्रियं च नानृतं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः॥
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
तस्मात्तदेव वक्तव्यं वाचने का दरिद्रता।
यस्मिन् देशे न सम्मानो न प्रीतिर्न च बान्धवाः।
न च विद्यागमः कश्चित् न तत्र दिवसं वसेत्।

2. संधि की आवृत्ति
शिष्टाचारः = शिष्ट + आचारः
वृद्धोपसेविन = वृद्धः + उपसेविन:
आयुर्विद्या = आयुः + विद्या
यशो बलम् = यशः + बलम्
वर्षशतैरपि = वर्षशतैः + अपि
तयोर्नित्यं = तयोः + नित्यम्
कुर्यादाचार्यस्य = कुर्यात् + आचार्यस्य
तेष्वेव = तेषु + एव
सर्वमात्मवशम् = सर्वम् + आत्मवशम्
कुर्वतोऽस्य = कुर्वतः + अस्य
परितोषोऽन्तरात्मनः = परितोषः + अन्तरात्मनः
वदेवाचम् = वदेत् + वाचम्

3. विधिलिङ् के विविध प्रयोग – (किसी भी काम को) करना चाहिए, इस अर्थ में विधिलिङ् का प्रयोग होता है। पाठ में आए कुछ शब्दों के प्रयोग अधोलिखित हैं-
स्यात् – (अस् धातु)
पिबेत् – (पा पातु)
वर्जयेत् – (वर्ज धातु)
वदेत् – (वद् धातु)
महान्तं प्राप्य सदबुद्ध।
सत्यजेन्न ला घुजनम्।
यत्रास्ति सूिचका कार्य
कृपाणाः किं करिष्यति।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 10 नीतिनवनीतम्

सौहार्द प्रकृतेः शोभा
विचित्रे खलु संसारे नास्ति किञ्चित् निरर्थकम्।
विश्स्चेत् धावने वीरः भारस्य वहने खरः।

ये श्लोक मो इर भी बात की पुष्टि करते हैं कि संसार में कोई भी छोटा या बड़ा नहीं है। संसार की क्रियाशीलता, गीतशीलता में सभी का अपना-अपना महत्त्व है सभी के अपने-अपने कार्य हैं, अपना-अपना योगदान है, अतः हमें न तो किसी कार्य को छोटा या बड़ा, तुच्छ या महान् समझना चाहिए और न ही किसी प्राणी को आपस में मिल जुल कर सौहार्दपूर्ण तरीके से जीवन यापन से ही प्रकृति का सौन्दर्य है। विभिन्न प्राणियों से संबंधित निम्नलिखित श्लोकों को भी पढ़िए और रसास्वादन कीजिए-

इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत् पण्डितो नरः।
देशकालबलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत्।।

काकचेष्ट: बकध्यानी शुनोनिद्रः तथैव च।
अल्पाहार: गृहत्यागः विद्यार्थी पञ्चलक्षणम्।।

स्पृशन्नपि गजो हन्ति जिघ्रन्नपि भुजङ्गमः।
हसन्नपि नृपो हन्ति, मानयन्नपि दुर्जनः।।

प्राप्तव्यमर्थं लभते मनुष्यो,
देवोऽपि तं लवयितुं न शक्तः।
तस्मान शोचामि न विस्मयो मे
यदस्मदीयं नहि तत्परेषाम्।।

अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।।

वस्तुतः मित्रों के बिना कोई भी जीना पसन्द नहीं करता, चाहे उसके पास बाकी सभी अच्छी चीजें क्यों न हों। अतः हमें सभी के साथ मिलजुल कर अपने आस-पास के वातावरण की सुरक्षा और सुन्दरता में सदैव सहयोग करना चाहिए।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 10 नीतिनवनीतम्

अकिञ्चनस्य, दान्तस्य, शान्तस्य समचेतसः।
मया सन्तुष्टमानसः, सर्वाः सुखमयाः दिशः।।

Class 8 Sanskrit Chapter 10 नीतिनवनीतम् Summary

पाठ परिचय
प्रस्तुत पाठ ‘मनुस्मृति’ के कतिपय श्लोकों का संकलन है जो सदाचार की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। यहाँ माता-पिता तथा गुरुजनों को आदर और सेवा से प्रसन्न करने वाले अभिवादनशील मनुष्य को मिलने वाले लाभ की चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त सुख-दुख में समान रहना, अन्तरात्मा को आनन्दित करने वाले कार्य करना तथा इसके विपरीत कार्यों को त्यागना, सम्यक् विचारोपरान्त तथा सत्यमार्ग का अनुसरण करते हुए कार्य करना आदि शिष्टाचारों का उल्लेख भी किया गया है।

शब्दार्थ-
क्लेशम् – कष्ट, निष्कृतिः – निस्तार, कुर्वतः – करते हुए का, परितोषः – सन्तोष, अन्तरात्मनः – अन्रात्मा की (हृदय की, कुर्वीत – करना चाहिए, न्यसेत् – रखना चाहिए, रखे, पूतम् – पवित्र, नृणाम् – रानुष्यों का, वर्षशतैः – सौ वर्षों में, समाप्यते – समाप्त होता है, समासेन – संक्षेप में, विद्यात् – जाना चाहिए, सत्यपूताम् – सत्य से पवित्र (सच)।

मूलपाठ:
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम् ॥1॥

सरलार्थः
जो व्यक्ति ज्ञान, अनुभव तथा आयु में बड़े लोगों को प्रणाम करते रहते हैं तथा उनकी संगति करते हैं। उनकी ये चार वस्तुएँ आयु, विद्या, कीर्ति और शक्ति बढ़ती है।

यं मातापितरौ क्लेशं सहेते सम्भवे नृणाम्।
न तस्य निष्कृतिः शक्या कर्तुं वर्षशतैरपि ॥2॥

सरलार्थः
मनुष्यों के जन्म तथा पालन पोषण में माता-पिता जिस कष्ट को सहन करते हैं। उसका बदला सौ वर्षों में भी नहीं चुकाया जा सकता है।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 10 नीतिनवनीतम्

तयोर्नित्यं प्रियं कुर्यादाचार्यस्य च सर्वदा।
तेष्वेव त्रिषु तुष्टेषु तपः सर्व समाप्यते ॥3॥

सरलार्थः
माता-पिता आचार्य इन तीनों को सदा सेवा से प्रसन्न रखना चाहिए। इन तीनों के खुश रहने से सारे तप पूर्ण हो जाते हैं।

सर्व परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्।
एतद्विद्यात्समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः ।।4।।

सरलार्थः
सभी चीजों को अपने अधिन रखना दुःख का कारण है तथा इसके विपरीत स्वतंत्र रखना सुख है। यही सुख और दु:ख के समान दो लक्षण हैं।

यत्कर्म कुर्वतोऽस्य स्यात्परितोषोऽन्तरात्मनः।
तत्प्रयत्नेन कुर्वीत विपरीतं तु वर्जयेत् ।।5।।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 10 नीतिनवनीतम्

सरलार्थः
जिस कार्य को करते हुए आत्मा प्रसन्न हो जाये, आत्मा को सन्तुष्टि मिल जाये वह कार्य प्रयास पूर्वक करनी चाहिए। इसके विपरीत त्याग देना चाहिए।

दृष्टिपूतं न्यसेत्पादं वस्त्रपूतं जलं पिबेत्।
सत्यपूतां वदेद्वाचं मनः पूतं समाचरेत् ॥6॥

सरलार्थः
मनुष्य को चाहिए कि वह सामने देखकर ही पॉव रखे, पानी को कपड़े से छानकर पिये, सत्यपूर्ण वाणी बोले और मन से सोच-समझ कर ही कार्य करें।

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NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Ruchira Chapter 9 सप्तभगिन्यः Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Ruchira Chapter 9 सप्तभगिन्यः

अभ्यासः

प्रश्न 1.
उच्चारणं कुरुत-
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः Q1
उत्तरम्:
शिक्षकसहायतया स्वयमेव कुर्युः।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः

प्रश्न 2.
प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत-
(क) अस्माकं देशे कति राज्यानि सान्ति?
उत्तरम्:
अष्टविंशतिः।

(ख) प्राचीनेतिहासे काः स्वाधीनाः आसन्?
उत्तरम्:
सप्तभागिन्यः।

(ग) केषां समवायः ‘सप्तभगिन्यः’ इति कथ्यते?
उत्तरम्:
सप्तराज्यानाम्।

(घ) अस्माकं देशे कति केन्द्रशासित प्रदेशाः सन्ति?
उत्तरम्:
सप्त।

(ङ) सप्त भगिनी-प्रदेशे कः उद्योगः सर्वप्रमुखः?
उत्तरम्:
वंशोद्योगः।

प्रश्न 3.
पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत-
(क) भगिनीसप्तके कानि राज्यानि सन्ति?
उत्तरम्:
अरुणाचल प्रदेशः, असमः, मणिपुरम्, मिजोरमः, मेघालय, नागालैण्डः, त्रिपुरा।

(ख) इमानि राज्यानि सप्तभगिन्यः इति किमर्थ कथ्यन्ते?
उत्तरम्:
इमानि राज्यानि सप्तभगिन्यः सामजिक, सांस्कृतिक परिदृश्यानां साम्याद कथ्यन्ते।

(ग) सप्तभगिनी -प्रदेशे के निवसन्ति?
उत्तरम्:
सप्तभगिनी प्रदेशे गारो-खासी-नागा-मिजो वहवः जन जातीयाः निवसन्ति।

(घ) एतत्प्रादेशिकाः कैः निष्णाताः सन्ति?
उत्तरम्:
एतत्प्रादेशिकाः बहुभाषाभिः समन्विताः पर्वपरम्पराभिः परिपूरताः स्वलीला कलाभिश्च निष्णाता: सन्ति।

(ङ) वंशवृक्षवस्तूनाम् उपयोगः कुत्र क्रियते?
उत्तरम्:
वंशवृक्षवस्तूनाम् उपयोगः आवस्त्राभूषणेभ्यः गृह निर्माण पर्यन्तं प्रायः वंश वृक्ष निर्मितानां वस्तूनाम् उपयोगः क्रियतेः।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः

प्रश्न 4.
रेखांकितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
(क) वयं स्वदेशस्य राज्यानां विषये ज्ञातुमिच्छामि?
उत्तरम्:
वयं कस्य राज्यानां विषये ज्ञातुमिच्छामि।

(ख) सप्तभगिन्यः प्राचीनेतिहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः?
उत्तरम्:
काः प्राचीनेतिहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः।

(ग) प्रदेशेऽस्मिन् हस्तशिल्पानां बाहुल्यं वर्तते?
उत्तरम्:
प्रदेशेऽस्मिन् केषाम् बाहुल्यं वर्तते?

(घ) एतानि राज्यानि तु भ्रमणार्थ स्वर्गसदृशानि?
उत्तरम्:
एतानि राज्यानि तु भ्रमणार्थ कानि।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशमुत्तरत-
(क) ‘महोदये! मे भगिनी कथयति’- अत्र ‘मे’ इति सर्वनामपदं कस्यै प्रयुक्तम्?
उत्तरम्:
स्वरा।

(ख) समाजिक-सांस्कृतिकपरिदृश्यानां साम्याद् इमानि उक्तोपाधिना प्रथितानि- अस्मिन् वाक्ये प्रथितानि इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्?
उत्तरम्:
उक्तोपाधिना।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः

(ग) एतेषां राज्यानां पुनः सङ्घघटनम् विहितम् – अत्र ‘सङ्घघटनम्’ इति कर्तृपदस्य क्रियापदं किम्?
उत्तरम्:
कर्ता-राज्याणं, क्रिया-विहितम्।

(घ) अत्र वंशवृक्षाणां प्राचुर्यम् विद्यते – अस्मात् वाक्यात् ‘अल्पता’ इति पदस्य विपरीतार्थकं पदं चित्वा लिखत?
उत्तरम्:
प्राचुर्यम्।

(ङ) ‘क्षेत्रपरिमाणैः इमानि लघूनि वर्तन्ते’ – वाक्यात् ‘सन्ति’ इति क्रियापदस्य समानार्थकपदं चित्वा लिखत?
उत्तरम्:
वर्तन्ते।

प्रश्न 6(अ).
पाठात् चित्वा तद्भवपदानां कृते संस्कृतपदानि लिखत-
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः Q6
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः Q6.1
उत्तरम्:
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः Q6.2

प्रश्न 6(आ).
भिन्नप्रकृतिकं पदं चिनतु-
(क) गच्छति, पठति, धावति, अहसत्, क्रीडति।
(ख) छात्रः सेवकः, शिक्षकः, लेखिका, क्रीडकः।
(ग) पत्रम्, मित्रम्, पुरपम्, आम्र, नक्षत्रम्।
(घ) व्याघ्रः, भल्लूकः, गजः, कपोतः, वृषभः, सिंहः।
(ङ) पृथिवी, वसुन्धरा, धारित्री, यानम्, वसुधा।
उत्तरम्:
(क) अहसत्
(ख) लेखिका
(ग) आम्रः
(घ) कपोतः
(ङ) यानम्

प्रश्न 7.
विशेष्य-विशेषणानम् उचितं मेलनम् कुरुत-
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः Q7
उत्तरम्:
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः Q7.1

योग्यता-विस्तार
अद्वयं मत्रयं चैव न-त्रि-युक्तं तथा द्वयम्।
सप्तराज्यसमूहोऽयं भगिनीसप्तकं मतम्।।

यह राज्यों के नामों को याद रखने का सरल तरीका है। इसका अर्थ असे आरम्भ होने वाले दो में से आरम्भ होने वाले तीन, न से नगालैण्ड और त्रि से त्रिपुरा का बोध होता है। इसी प्रकार उठारह पुराणों के नाम याद रखने के लिए यह श्लोक प्रसिद्ध है।

मद्वयं भद्वयं यैव ब्रत्रयं वचतुष्टयम्।
अ-ना-प-लिंग कूस्कानि पुराणानि प्रचक्षते॥

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः

‘सप्तभागिनी’ इस उपनाम का सर्वप्रथम प्रयोग 1972 में श्री ज्योति प्रसाद से किया ने आकाशवाणी के साथ भेंटवार्ता के क्रम में किया था।
इनके अन्तर्गत आने वाले राज्यों का उल्लेख प्राचीन ग्रन्थों में भी प्राप्त होता है।
यथा – महाभारत, रामायण, पुराण आदि।

इन राज्यों की राजधानी क्रमशः इस प्रकार है-
अरुणाचल प्रदेश – इटानगर
असम – दिसपुर
मणिपुर – इम्फाल
मिजोरम – ऐजोल
मेघालय – शिलाङ्ग्
नगालैण्ड – कोहिमा
त्रिपुरा – अगरतला

बिहू, मणिपुरी, नानक्रम आदि इस प्रदेश के प्रमुख नृत्य हैं। नगा, मिजो, खासी, असमी, बांग्ला, पदम, बोडो, गारो, जयन्यिा आदि यहाँ प्रमुख भाषाएँ हैं। सप्तसंख्या पर कुछ अन्य प्रचलित नाम हैं-

सप्तसिन्धु – ‘सप्त भागिनी’ के समान सप्तसिन्धु हैं-सिन्धु, शुतुद्री (सतलुज), इरावती (इरावदी), विस्सता (झेलम), विपाशा (व्यास), असिक्नी (चिनाब) और सरस्वती।।

सप्तपर्वत – महेन्द्र, मलय, हिमवान्, अर्बुद, विन्ध्य सह्याद्रि, श्रीशैल।

सप्तर्षि – मरीचि, पुलस्त्य, अंगिरा, क्रतु, अत्रि, पुलह, वसिष्ठ।
कृष्णनाथ की पुस्तक अरुणाचल यात्रा (वाग्देवी प्रकाश बीकानेर 2002) पठनीय है।

परियोजना-कार्यम्
पाठ में स्थित अद्वयं……….वाली पहेली से सातों राज्यों राज्यों के नाम को समझो।

Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः Summary

पाठ परिचय
भारतवर्ष अपनी भौगोलिक विशेषताओं का एक अनोखा संगम है। ‘सप्तभगिनी’ यह एक उपमाना हैं उत्तरपूर्व के सात राज्य विशेष को उक्त उपाधि दी गयी है। इन राज्यों का प्राकृतिक सौन्दर्य अत्यन्त विलक्षण है। इन्हीं के सांस्कृतिक और सामाजिक वैशिष्ट्य को ध्यान में रखकर प्रस्तुत पाठ का सृजन किया गया है।

शब्दार्थ:
बाढ़म् – हाँ, अच्छा; ज्ञानुम् – जानने हेतु; कति – कितने; भगिनी – बहन; अतिरिच्य – अलावा; भवतु – अच्छा; समवायः – समूह पथितः – प्रसिद्ध; प्रतीकात्मकः – सांकेतिक; कदाचित् – सम्भवतः; साम्याद् – समानता के कारण उक्तोपाधिना – कई गई उपाधि से; नाम्नि – नाम में; संशयः – संदेह; अपरतः – दूसरी और क्षेत्रपरिमाणैः – क्षेत्रफल से; बृहत्तराणि – बड़े स्वाधीनाः – स्वतन्त्र; महत्त्वाधायिनी – महत्त्व को रखने वाली; प्रभृतिभिः – आदि से; विहितम् – विधिपूर्वक किया गया; पुष्पस्तवकसदृशानि – फूलों के गुच्छे के समान; हृद्या – हृदय को प्रिय लगने वाली; सावहितमनसा – सावधान मन से; ऊर्जस्विनः – ऊर्जा युक्त; पूरिपूरिताः – पूर्ण; आम् – हाँ; अवाप्त – प्राप्त; सार्द्धम् – साथ; चलतु – चलो।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः

मूलपाठः
अध्यापिका-सुप्रभातम्………….सर्वे-कथम्? कथम्?

सरलार्थः
अध्यापिका – सुप्रभात।

छात्रगण – सुप्रभात। सुप्रभात।

अध्यापिका – ठीक है। आज क्या पढ़ा है?

छात्रगण – हम सब अपने देश के राज्यों (प्रदेशों) के विषय में जानना चाहते हैं।

अध्यापिका – ठीक हैं बोलो। हमारे देश में कितने राज्य हैं?

सायरा – चौबीस, महोदया।

सिल्वी – नहीं, नहीं महोदया ! पच्चीस राज्य हैं।

अध्यापिका – दूसरा कोई भी?

स्वरा – (बीच में ही) महोदय! मेरी बहन कहती है-कि हमारे देश में अट्ठाईस राज्य हैं। इसके अलावा सात केन्द्रशासित प्रदेश भी है।

अध्यापिका – सही जानती है तुम्हारी बहन ! उचित है, क्या तुम सब जानते हो कि इस सब राज्यों में सात राज्यों का एक समूह है जो (साब बहनें) इस नाम से प्रसिद्ध है।

सभी – आश्चर्य सहित परस्पर देखते हुए) सात बहनें? सात बहनें?

निकोलस – ये सात राज्य (सात बहनें) क्यों कहे जाते हैं?

अध्यापिका – यह प्रयोग सांकेतिक है। सम्भवतः सामाजिक व सांस्कृतिक परिदृश्यों की समानता से यह उपाधि प्रसिद्ध हैं।

समीक्षा – मेरा कतहल शान्त नहीं हो रहा है। सनाए तो वे कौन-से राज्य हैं?

अध्यापिका – मेरा कुतूहल शान्त नहीं हो रहा है। सुनाए तो वे कौन-से राज्य हैं?

अध्यापिका – सुनिए।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः

दो ‘अ’ (‘अं’ से आरम्भ होने वाले), तीन ‘म’ (‘म) से आरम्भ होने वाले, एक ‘न’ (‘न’ से आरम्भ होने वाला) तथा एक ‘त्रि’ (‘त्रि’ से आरम्भ होने वाला) से युक्त ये दो। यह सात राज्यों का समूह भगिनीसप्तम माना गया है। इस प्रकार भगिनी सप्तक मेंये राज्य हैं-

  1. अरुणाचल प्रदेश
  2. असम
  3. मणिपुर
  4. मिजोरम
  5. मेघालय
  6. नागालैण्ड
  7. त्रिपुरा।

जबकि क्षेत्रफल में ये छोटे हैं फिर भी गुण और गौरव की दृष्टि से बहुत बड़े हैं।
सभी-कैसे? कैसे?

अध्यापिका-इमाः सप्तभागिन्यः………………….स्वर्ग सदृशानिं इति।

सरलार्थः
ये सात बहनें अपने प्राचीन इतिहास में प्राय: स्वतन्त्र ही दिखाती हैं। किसी भी शासक ने इन्हें अपने अधीन नहीं किया था। अनेक संस्कृति की विशेषता वाली भारत भूमि में इन बहनों की संस्कृति विशेष महत्व वाली है।

तन्वी – यह शब्द सबसे पहले कब प्रयुक्त हुआ?

अध्यापिका – सुनने में मधुर लगने वाला यह शब्द सबसे पहले पिछली शताब्दी के बहत्तरवे वर्ष (1972) में त्रिपुरा राज्य के उद्घाटन के क्रम में किसी ने फैलाया। इस समय फिर से इन राज्यों का संगठन किया गया।

स्वरा – दूसरी भी कोई विशेषता है इनकी?

अध्यापिका – अवश्य ही है। पर्वत, वृक्ष, पुष्प आदि प्राकृतिक सम्पदाओं से समृद्ध हैं ये राज्य। ये भारत रूपी वृक्ष में फूलों के गुलदस्ते के समान सुशोभित हैं।

राजीव – आप। जैसे घर में बहन सबसे अधिक प्रिय और मनोहर होती है। वैसे ही भारत रूपीघर में ये सात बहनें सबसे मनोहर है।

अध्यापिका – तुम्हारे मनमें आई हुई यह भावना बहुत कल्याण वाली है, परन्तु सभी ऐसा नहीं समझते है। ठीक है, इनके विषय में कुछ विशेष कथनीय है। सावधान मन से सुनिए-यह प्रदेश जनजातियों से बहुत है। गारे,खासी, नगा, मिजो आदि अनेक जनजातियाँ यहाँ रहती हैं। शरीर में इस प्रदेश के लोग अनेक भाषाओं से युक्त, पर्यों की परम्पराओं वाले, अपने करतबों और कलाओं मे कुशल हैं।

मालती – महोदया! वहाँ तो बाँस के पेड़ भी पाए जाते हैं।

अध्यापिका – हाँ। इस प्रदेश में हस्तकला की प्रमुखता है। यहाँ वस्त्रों व आभूषणों से लेकर गृहनिर्माण तक अवसर बाँस के पेड़ से बनी वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है। क्योंकि यहाँ बाँस के पेड़ों की अधिकता है। अब यहाँ का बाँस उद्योग अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि पा चुका है।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः

अभिनव – क्या बहनों वाला प्रदेश बहुत आकर्ष है।

सलीम – क्या यह प्रदेश भ्रमण के लिए उचित है।

सभी छात्र – (जोर से) महोदया! आगमी अवकाश में हम वहीं जाना चाहते है।

स्वरा – आप भी हमारे साथ चलिए।

अध्यापिका – यह विचार मुझे प्रिय है। ये राज्य भ्रमण के लिए स्वर्ग के समान है।

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NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Ruchira Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Ruchira Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः

अभ्यासः

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत-
(क) कस्य राज्यस्य भागेषु गजधरः शब्दः प्रयुज्यते?
उत्तरम्:
राजस्थानस्य

(ख) गजपरिणामं कः धारयति?
उत्तरम्:
गजधरः

(ग) कार्यसमाप्ती वेतनानि अतिरिच्य गजधरेभ्यः किं प्रदीयते स्म?
उत्तरम्:
सम्मानम्

(घ) के शिल्पिरूपेण न समादृताः भवन्ति?
उत्तरम्:
गजधराः।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः

प्रश्न 2.
अधोलिखितानां प्रश्नानामत्तराणि लिखत-
(क) तडागाः कुत्र निर्मीयन्ते स्म?
उत्तरम्:
तडागाः सम्पूर्ण देशे निर्मीयन्ते स्म।

(ख) गजधराः कस्मिन् रूपे परिचिताः?
उत्तरम्:
गजधरा: वास्तुकारणां रूपे परिचिता।

(ग) गजधराः किं कुर्वन्ति स्म?
उत्तरम्:
गजधरा: नगरनियोजनात् लघुनिर्माणपर्यन्तं कार्याणी कुर्वन्ति स्म।

(घ) के सम्माननीयाः?
उत्तरम्:
गजधरा:सम्माननीयाः।

प्रश्न 3.
रेखाङ्गितानि पदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
(क) सुरक्षाप्रबन्धनस्य दायित्वं गजधराः निभालयन्तिस्म।
उत्तरम्:
कस्य दायित्व गजधरा: निभालयन्तिस्म?

(ख) तेषां स्वामिनः असमर्थः सन्ति।
उत्तरम्:
केषां स्वामिनः असमर्थः सन्ति?

(ग) कार्यसमाप्ती वेतनानि अतिरिच्य सम्मानमपि प्राप्नुवन्ति।
उत्तरम्:
कार्यसमाप्तौ कानि अतिरिथ्यं सम्मानमपि प्राप्नुवन्ति?

(घ) गजधरः सुन्दरः शब्दः अस्ति।
उत्तरम्:
कः सुन्दरः शब्दः अस्ति?

(ङ) तडागाः संसारसागराः कथ्यन्ते।
उत्तरम्:
के संसारसागरा: कथ्यन्ते?

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः

प्रश्न 4.
अधोलिखितेषु यथापेक्षितं सन्धि/विच्छेदं कुरुत।
(क) अद्य + अपि = _________
(ख) _________ + __________ = स्मरणार्थम्
(ग) इति + अस्मिन् = _________
(घ) _________ + __________ = एतेष्वेव
(ङ) सहसा + एव = _________
उत्तरम्:
(क) अद्य + अपि = अद्यापि
(ख) स्मरण + अर्थम् = स्मरणार्थम्
(ग) इति + अस्मिन् = इत्यस्मिन्
(घ) एतेषु + एव = एतेष्वेव
(ङ) सहसा + एव = सहसैव

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः

प्रश्न 5.
मञ्जूषातः समुचितानि पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(रचयन्ति, गृहीत्वा, सहसा, जिज्ञासा, सह)
(क) छात्राः पुस्तकानि ________ विद्यालयं गच्छन्ति।
(ख) मालाकाराः पुष्पैः माला: ________।
(ग) मम मनसि एका ________ वर्तते।
(घ) रमेशः मित्रैः ________ विद्यालयं गच्छति।
(ङ) ________ बालिका तत्र अहसत।
उत्तरम्:
(क) छात्राः पुस्तकानि गृहीत्वा विद्यालयं गच्छन्ति।
(ख) मालाकाराः पुष्पैः माला: रचयन्ति।
(ग) मम मनसि एका जिज्ञासा वर्तते।
(घ) रमेशः मित्रैः सह विद्यालयं गच्छति।
(ङ) सहसा बालिका तत्र अहसत।

प्रश्न 6.
पद निर्माणं कुरुत-
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः Q6
उत्तरम्:
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः Q6.1
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः Q6.2

प्रश्न 7.
कोष्ठकेषु दत्तेषु शब्देषु समुचिता विभक्तिं योजयित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
यथा- विद्यालय परितः वृक्षाः सन्ति। (विद्यालय)
(क) __________ उभयतः ग्रामाः सन्ति। (ग्राम)
(ख) __________ सर्वतः अट्टालिकाः सन्ति। (नगर)
(ग) धिक् __________। (कापुरुष)
यथा- मृगाः मृगैः सह धावन्ति। (मृग)
(क) बालकाः __________ सह पठन्ति। (बालिका)
(ख) पुत्र __________ सह आपणं गच्छति। (पितृ)
(ग) शिशुः __________ सह क्रीडति। (मातृ)
उत्तरम्:
यथा- विद्यालय परितः वृक्षाः सन्ति। (विद्यालय)
(क) ग्रामम् उभयतः ग्रामाः सन्ति। (ग्राम)
(ख) नगरं सर्वतः अट्टालिकाः सन्ति। (नगर)
(ग) धिक् कापुरूषम्। (कापुरुष)
यथा- मृगाः मृगैः सह धावन्ति। (मृग)
(क) बालकाः बालिकाभिः सह पठन्ति। (बालिका)
(ख) पुत्र पित्रा सह आपणं गच्छति। (पितृ)
(ग) शिशुः मात्रा सह क्रीडति। (मातृ)

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः

योग्यता-विस्तार:
अनुपम मिश्र – जल संरक्षण के पारपरिक ज्ञान को समाज के सामने लाने का श्रेय जिनलोगों को है श्री अनुपम मिश्र (जन्म, 1998) उनमें अग्रगण्य है। आज भी खरे है तालाब’ और राजस्थान की रजत बूंदे पानी पर उनकी बहुप्रशंसित पुस्तकें हैं।

भाषा-विस्तारः
कारक – सामान्य रूप से दो प्रकारकी विभक्तियाँ होती है-
1. कारक विभक्ति
2. उपपद विभिक्ति
कारक चिन्हों के आधार पर जहाँ पदों का प्रयोग होता है उसे कारक विभक्ति कहते हैं। किन्तु किन्हीं विशेष शब्दों के कारण जहाँ कारक चिन्हों की अपेक्षा कर किसी विशेष विभक्ति का प्रयोग होता है उसे उपपद विभक्ति कहते हैं जैसे-
‘सर्वतः अभित, परितः, धिक्’ आदि पदों के योग में द्वितीया विभक्ति होती है।
उदा.
(क) विद्यालयं परितः पुष्पाणि सन्ति।
(ख) धिक् देशद्रोहिणम्।
‘सह, साकम्, सार्द्धम्, समं’ के योग में तृतीया विभक्ति होती है।
उदा.
(क) देशभक्ताय नमः।
(ख) नमः एतादृशेभ्यः शिल्पिभ्यः।
(ग) जनेभ्यः स्वस्ति।

‘अलम्’ शब्द के दो अर्थ है-पर्याप्त एवं मत (वारण के अर्थ में)। पर्याप्त के अर्थ में चतुर्थी विभक्ति होती है जैसे-देशद्रोहिण अलं देशरक्षकाः।

मना करने के अर्थ में तृतीया विभक्ति होती है, जैसे-अलं विवादेन बिना के योग्य में द्वितीया, तृतीया एवं प मी विभक्तियाँ होती है।

जैसे-परिश्रम/परिश्रमेण/परिश्रमात् विना न गतिः।
निम्नलिखिपत क्रियाओं के एकवचन बनाने का प्रयास करें।
आकलयन्ति, संगृह्णन्ति, प्रस्तुन्वन्ति।
जिज्ञासा जाने की इच्छा। इसी प्रकार के अन्य शब्द है-पिपासा, जिग्मिषा, विवक्षा बुभुक्षा।

भाव-विस्तारः
अरग हम ध्यान से देखें तो हमारे चारों तरफ ज्ञान एवं कौशल के विविध रूप दिखाई देते हैं। इसमें कुछ ज्ञानऔर कौशल फलते-फूलते हैं और कई निरंतर क्षीण होते हैं। इसके कई उदाहरण हमारे सामने है। पानी का व्यवस्थापन और खेती बाड़ी का पारंपरिक तौर-तरीका शिल्प तथा कारीगरी का ज्ञान दुर्लभ और विलुप्त होने के करार पर है। वहीं अभियान्त्रिकी एवं संचार से संबंधित ज्ञान नए उभार पर है। दरअसल किस तरह का ज्ञान और कौशल आगे विकसित और प्रगुणित होगा और किस तरह का ज्ञान एवं कौशल पिछड़ेगा, विलुप्त होने के लिए विवश होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि देश और समाज किस तरह के ज्ञान एवं कौशल के विकास में अपना भविष्य सुरक्षित एवं सुखमय मनाता है।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः

परियोजना-कार्यम्
आने वाली छुट्टियों में अपने आस-पास के क्षेत्र के उन पारंपरिक ज्ञान एवं कौशलों का पता लगाएँ जिनका स्थान समाज में अब निरंतर घर रहा है। उन्हें कोई उचित प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है या वे विलुप्त होने के कगार पर है। उनकी एक सूची भी तैयार करें और उनके लिए प्रयुक्त होने वाले संस्कृत शब्द लिखें। अपने और अपने मित्रों द्वारा तैयार की गई अलग-अलग सूचियों के सामने रखते हुए इन पारंपरिक कौशलों के विलुप्त होने के कारणों का पता लगाएँ।

Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः Summary

पाठ परिचय
जल संरक्षण का कार्य करने वालों में श्री अनुपम मिश्रा (जन्म 1998) का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। आपकी रचनाओं में तालाबीं पर एक प्रमुख कृति है – “आज भी खरे है तालाब।” प्रस्तुत पाठ इसी रचना में “संसार सागर के नायक” नामक अध्याय से लिया गया है। इसमें विलुप्त होते जा रहे पारम्परिक ज्ञान, कौशल एवं शिल्प के धनी गजधर के सम्बन्ध की चर्चाकी गयी है। पानी के लिए मानव निर्मित तालाब, बावड़ी जैसे निर्माणों को लेखकने यहाँ संसार सागर के रूप में चित्रित किया है। लेखक का कार्य अत्यधिक सराहनीय है।

शब्दार्थ-
सहसा – अचानक; तडागाः – तालाब; निर्मापयितृणाम् – बनाने वालों की एकदम् – इकाई: सहस्रकम् – हजार; जिज्ञासा – जानने की इच्छा; उद्भूता – उत्पन्न हुई; पूर्वम् – पहले; मापयितुम् – मापने, नापने के लिए; प्रयतितम् – प्रयत्न किया; बहुप्रथिता – बहुत प्रसिद्ध; अशेषे – सम्पूर्ण निर्मातारः – बनाने वाले गजधर – गज को धारण करने वाला; लौहयष्टिम् – लोहे की छड़ को; समादृता – आदर को प्राप्त; गाम्भीर्यम् – गहराई; वास्तुकारा – राज मिस्त्री लोग; कायम् – चाहे; निभालयन्ति स्म – निभाते थे;आकयन्ति स्म – अनुमान करते थे; उपमकरणसम्भारान् – साधन सामग्री को प्रतिदाने – बदले में; अतिरिच्य – अतिरिक्त, अलावाः प्रदीयते स्म – दिया जाता था।

मूलपाठः
के आसन् ते……………………………प्रयतितम्।

सरलार्थः
कौन थे वे बिना नाम वाले?
सैकड़ों, सहस्रों (हजारों) तालाब अचानक (स्वयं) प्रकार नहीं हुए। ये तालाब ही यहाँ संसार-सागर कहे गए है। इनके आयोजन में नेपथ्य में निर्माण कराने वालों की ईकाई (एक-एक) तथा निर्माण करने वालों की दहाई (दस-दस) थी। इस ईकाई और दहाई को जोड़कर सैकड़ा या हजार रचते थे। परन्तु पिछले दो शतकों में नई रीति के समाज में जो कुछ पढ़ा। उस पढ़ाई से समाज से (उस) इकाई, दहाईऔर हजार को शून्य में बदलदिया। इस नूतन समाज के मन में यह जिज्ञासा भी उत्पन्न नहीं हुई कि इससे पूर्व इतने तालाबों को कौन रचते थे? ऐसे कार्यों को करने के लिए ज्ञान की जो नई विधि विकसित हुई उस विशेष पद्धति के द्वारा भी पहले किए गए इनकार्यों को मापने के लिए किसी भी ने भी प्रयास नहीं किया।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः

अद्य ये आज्ञातनामान:.. ……………………परिचितः।

सरलार्थः
आज तो अज्ञातनामे वाले है, पहले वे बहुत प्रसिद्ध थे। पूरे देश में तालाब बनाए जाते थे। बनाने वाले भी पूरे देश में रहते थे।

‘गजधर’ यह सुन्दर शब्द तालाब बनाने वाले के सादर स्मरण के लिए है। राजस्थान के कुछ भागों में यह शब्द आज भी प्रचलित है। गजधर कौन? जो ‘गज’ की माप को धारण करता है वह ‘गजधपर’ है। गज की मापदी मापने (नापने) के काम में प्रयुक्त होती है। समाज के तीन हाथ (तीन फुट) की नाम वाली लोहे की छड़ी को हाथ में लेकर चलने वाले गजधर अब शिल्पी के रूप में सम्मनित नहीं है। गजधर, जो समाज की गहराई मापे इस रूप में परिचित है।

गजधराः……………………………शिल्पिभ्यः

सरलार्थः
गजधर ही वास्तुकार थे। चाहे ग्रामीण समाज हो या नवनिर्माण और सुरक्षा की व्यवस्था का दायित्व गजधर हीनिभाते थे। नगरीय व्यवस्था मसे लघु निर्माण तक सारे कार्य इन्हीं पर आधारित थे। वे योजना प्रस्तुत करते थे। होने वाले व्यय का आकलन (अनुमान) करते थे साधन-सामग्री का संग्रह (भी) करते थे। बदले में वे वह नहीं माँगते थे जो उनके स्वामीदेने में असमर्थ होते थे। काम की समाप्ति पर वेतन के अलावा गजधरों को सम्मान भी दिया जाता था। नमस्कार है ऐसे शिल्पियों को।

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NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम्

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Ruchira Chapter 7 भारतजनताऽहम् Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Ruchira Chapter 7 भारतजनताऽहम्

अभ्यासः

प्रश्न 1.
पाठे दत्तानां पद्यानां सस्वरवाचनं कुरुत-

प्रश्न 2.
प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत-
(क) अहं वसुंधराम् किम मन्ये?
उत्तरम्:
कुटुम्बं।

(ख) मम सहजा प्रकृति का अस्ति?
उत्तरम्:
मैंत्री।

(ग) अहं कस्मात् कठिना भारतजनताऽस्मि?
उत्तरम्:
कुसुमादपि, सुकुमारा।

(घ) अहं मित्रस्य चक्षुषा किं पश्यन्ती भारतजनताऽस्मि?
उत्तरम्:
संसार।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम्

प्रश्न 3.
प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत-
(क) भारतजनताऽहम् कैः परिपूता अस्ति?
उत्तरम्:
भारतजनताऽहम् अध्यात्म सुधा तटिनी परिपूता अस्ति।

(ख) समं जगत् कथं मुग्धमस्ति?
उत्तरम्:
समं जगत् काण्यैर्मुग्धस्ति।

(ग) अहं किं किं चिनोमि?
उत्तरम्:
अहं प्रेयः श्रेयः चिनोमि।

(घ) अहं कुत्र सदा दृश्ये
उत्तरम्:
अहं विश्वस्मिन् जगति गताहमस्मि।

(ङ) समं जगत् कै: कैः मुग्धम् अस्ति?
उत्तरम्:
समं जगत् गीतैर्मुग्धं, नृत्यैर्मुग्धं अस्ति।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम्

प्रश्न 4.
सन्धिविच्छेदं पूरयत-
(क) विनयोपेता = विनय + उपेता
(ख) कुसुमादपि = _________ + _________
(ग) चिनोम्युभयम् = चिनोमि + _________
(घ) नृत्यैर्मुग्धम् = _________ + मुग्धम्
(ङ) प्रकृतिरस्ति = प्रकृतिः + _________
(च) लोकक्रीडासक्ता = लोकक्रीडा + _________
उत्तरम्:
(क) विनयोपेता = विनय + उपेता
(ख) कुसुमादपि = कुसुमात् + अपि
(ग) चिनोम्युभयम् = चिनोमि + उभयम्
(घ) नृत्यैर्मुग्धम् = नृत्यै + मुग्धम्
(ङ) प्रकृतिरस्ति = प्रकृतिः + अस्ति
(च) लोकक्रीडासक्ता = लोकक्रीडा + असक्ता

प्रश्न 5.
विशेषण-विशेष्य पदानि मेलयत-
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम् Q5
उत्तरम्:
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम् Q5.1
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम् Q5.2

प्रश्न 6.
समानार्थकानि पदानि मेलयत-
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम् Q6
उत्तरम्:
जगति – संसारे
कुलिशात् – व्रजात्
प्रकृति – स्वभावः
चक्षुषा – नेत्रेण
तटिनी – नदी
वसुंधराम् – पृथ्वीम्

प्रश्न 7.
उचितकथाना समक्षम् (आम्) अनुचितकथनानां समक्षं च (न) इति लिखत-
(क) अहं परिवारस्य चक्षुषा संसारं पश्यामि।
उत्तरम्:
आम्

(ख) समं जगत् मम काव्यैः मुग्धमस्ति।
उत्तरम्:
आम्

(ग) अहम् अविवेका भारतजनता अस्मि।
उत्तरम्:

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम्

(घ) अहं वसुंधराम् कुटुम्बं न मन्ये।
उत्तरम्:

(ङ) अहं विज्ञानधना ज्ञानधना चास्मि।
उत्तरम्:
आम्

योग्यता-विस्तार
भावविस्तारः
यह कविता आधुनिक कवि डॉ. रमाकान्त शुक्ल के काव्यसंग्रह से ली गई है। डॉ. शुक्ल आधुनिक संस्कृत जगत् में राष्ट्रपति सम्मान तथा पद्मश्री सम्मान से विभूषित मूर्धन्य कवि हैं जिनका काव्य पाठ न केवल भारतीय आकाशवाणी – दूरदर्शन अथवा अन्य विविध कविसम्मेलनों में अपितु मौरिशस-अमेरिका-इटली-यू.के आदि देशों में भी प्रशंसित है। भाति मे भारतम्, जयभारतभूमे, भाति मौरीशसम्, भारतजनताऽहम्, सर्वशुक्ला, सर्वशुक्लोत्तरा, आशाद्विशती, मम जननी तथा राजधानी-रचनाः इनकी महान् काव्य रचनाएँ हैं। इनके अतिरिक्त पण्डितराजीयम् अभिशापम्, पुरश्चरणकमलम्, नाट्यसप्तकम् इत्यादि पुरस्कृत एवं मञ्चित नाट्यरचनाएँ तथा अन्य अनेक सम्पादित ग्रन्थ भी इनकी लेखनी से लब्धप्राण हुए हैं, कवि की कुछ अन्य रचनाएँ भी पढ़िए-

परिमितशब्दैरमितगुणान्, गायामि कथं ते वद पुण्ये।
चुलुके जलधिं तुगतरङ्गं करवाणि कथं वद धन्ये।

जय सुजले सुफले वरदे, विमले कमला-वाणी वन्द्ये।
जय जय जय हे भारत भूमे जय-जय-जय भारत भूमे।

यत्र सत्यं शिवं सुन्दरं राजते,
रामराज्यं च यत्राभवत्पावनम्

यस्य ताटस्थ्यनीतिः प्रसिद्धिं गता
भूतले भाति तन्मामकं भारतम्।।

मोदे प्रगतिं दर्श दर्श
वैज्ञानिकी च भोतिकी, परम्।

दूयेऽद्यत्वे लोकं लोकं
शठचरितं भारत जनताऽहम्।।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम्

जयन्त्येतेऽस्मदीया गौरवाङ्काः कारगिलवीराः
समा आसतेऽस्माकं प्रणम्याः कारगिलवीराः।

मई-षड़विंशदिवसादेषयो मासद्वयं यावत्,
अधोषित-पाक-रण-जयिनोऽभिनन्द्याः कारगिलवीराः।।

इत्यादिप्रकारेण विविध-विषयों पर कवि की विविध रचनाएँ हमें प्राप्त होती हैं जिनका रसास्वादन करते हुए पाठक आनन्दित होता है।

Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम् Summary

पाठ परिचय
प्रस्तुत् कविता आधुनिक कविकुलशिरोमणि डॉ. रमाकान्त शुक्ल द्वारा रचित काव्य ‘भारतजनताऽहम्’ से साभार उद्धृत है। इस कविता में कवि भारतीय जनता के सरोकारों, विविध कौशलों, विविध रुचियों आदि का उल्लेख करते हुए बताते हैं कि भारतीय जनता की क्या-क्या विशेषताएँ हैं।

शब्दार्थ-
अभिमानधना – घमण्ड, विनयोपैता (विनय उपेता) – विनम्रता, कुलिशादपि (कुलिशात्+अपि) – वज्र से भी, कठिना, कठोरा – कठोर, कुसुमादपि ( कुसुमात्+अपि) – फूल से भी, सुकुमारा – अत्यंत कोमल, वसुंधराम् – पृथ्वी को, प्रेयः (प्रियकर) – अच्छा लगने वाला, रुचिकर, श्रेयः – कल्याणकर, कल्याणप्रद, चिनोम्युभयम् (चिनोमि+उभयम् )- दोनों को ही चुनती हूँ, अध्यात्मसुधातटिनी-स्नानैः – अध्यात्मरूपी अमृतमयी नदी में स्नान से, परिपूता – पवित्र, रसभरिता – आनंद से परिपूर्ण, आसक्ता – अनुराग रखने वाली, प्रकृतिः – स्वभाव, कर्मण्या – कर्मशील।

मूलपाठः
श्लोक – अभिमानधना विनयोपेता, शालीना भारतजनताऽहम्।
कुलिशादपि कठिना कुसुमादपि, सुकुमारा भारतजनताऽहम्।1।

सरलार्थः
मैं भारत की जनता स्वाभिमानी, विनम्र, शालीन हूँ। जो व्रज से भी कठोर, फूल से भी कोमल हूं

श्लोक – निवसामि समस्ते संसारे, मन्ये च कुटुम्बं वसुन्धराम्।
प्रेयः श्रेयः च चिनोम्युभयं, सुविवेका भारतजनताऽहम्।2।

सरलार्थः
सम्पूर्ण संसार में निवास करते हुए मानो भारत की विवेकी जनता प्रिय और कल्याणकारी हूँ।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम्

श्लोक – विज्ञानधनाऽहं ज्ञानधना, साहित्यकला-सङ्गीतपरा।
अध्यात्मसुधातटिनी-स्नानैः, परिपूता भारतजनताऽहम्।3।

सरलार्थः
मैं भारत की जनता विज्ञान, ज्ञान, अविधान में समृद्ध साहित्य, संगीतकला और अध्यात्म रूपी नदी में स्नान से पवित्र हूँ।

श्लोक – मम गीतैर्मुग्धं समं जगत, मम नृत्यैर्मुग्ध समं जगत्।
मम काव्यैर्मुग्धं समं जगत्, रसभरिता भारतजनताऽहम्।4।

सरलार्थः
मैं भारत की जनता पूरे संसार को गीत से मुग्ध और नृत्य से मुग्ध कर चूकी हूँ। हमारी काव्य, सम्पूर्ण संसार को मुग्ध करने वाली रसभरी है।

श्लोक – उत्सवप्रियाऽहं श्रमप्रिया, पदयात्रा-देशाटन-प्रिया।
लोकक्रीडासक्ता वर्धेऽतिथिदेवा, भारतजनताऽहम्।5।

सरलार्थः
मैं उत्सव प्रिय हूँ, मैं परिश्रमी हूँ, पदयात्रा और घूमने का शौकिन हूँ। मैं भरत की जनता हूँ। मुझे अनेक लोक क्रीडा भी प्रिय है। मैं अतिथि को देव के सदृश्य सम्मान देती हूँ। मैं भारत की जनता हूँ।

श्लोक – मैत्री मे सहजा प्रकृतिरस्ति, नो दुर्बलतायाः पर्यायः।
मित्रस्य चक्षुषा संसारं, पश्यन्ती भारतजनताऽहम्।6।

सरलार्थः
मेरे स्वभाव में ही मित्रता है, यह मेरी कमजोरी नहीं है। समस्त संसार को मित्र के समान देखती हूँ, मैं भारत की जनता हूँ।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम्

श्लोक – विश्वस्मिन् जगति गताहमस्मि, विश्वस्मिन् जगति सदा दृश्य।
‘विश्वस्मिन् जगति करोमि कर्म, कर्मण्या भारतजनताऽहम्।7।

‘सरलार्थः
मैं सम्पूर्ण जगत को जानने वाली हूँ, मुझे सम्पूर्ण जगत में देखते ही, कर्मणी रूप में, सम्पूर्ण जगत में कर्म करने वाली, मैं भारत की जनता हूँ।

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NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना

Detailed, Step-by-Step NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Ruchira Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना Questions and Answers were solved by Expert Teachers as per NCERT (CBSE) Book guidelines covering each topic in chapter to ensure complete preparation.

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Ruchira Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना

अभ्यासः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्ताराणि संस्कृत भाषया लिखत-
(क) दिष्ट्या का समागता?
उत्तरम्:
शालिनी।

(ख) राकेशस्य कार्यालये का निश्चिता?
उत्तरम्:
महत्त्वपूर्ण गोष्ठी।

(ग) राकेशः शालिनी कुत्र गन्तुं कथयति?
उत्तरम्:
चिकित्सिका प्रति।

(घ) सायंकाले भ्राता कार्यालयात् आगत्य किम् करोति?
उत्तरम्:
भवानी स्तुति।

(ङ) राकेशः कस्याः तिरस्कारं करोति?
उत्तरम्:
कन्या।

(च) शालिनी भ्रातरम् का प्रतिज्ञा कर्तुं कथयति?
उत्तरम्:
कन्यायाः रक्षणे तस्याः पाठने।

(छ) यत्र नार्यः न पूज्यन्ते तत्र किम् भवति?
उत्तरम्:
सर्वास्तत्राफलाः क्रिया।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना

प्रश्न 2.
अधोलिखितपदानां संस्कृतरूपं (तत्सम रूप) लिखत-
(क) कोख
(ख) साथ
(ग) गोद
(घ) भाई
(ङ) कुआँ
(च) दूध
उत्तरम्:
(क) कोख – कुक्ष
(ख) साथ – सह
(ग) गोद – क्रोड
(घ) भाई – भ्रातृ
(ङ) कुआँ – कूपः
(च) दूध – दुग्धं

प्रश्न 3.
उदाहरणमनुसृत्य कोष्ठकप्रदत्तेषु पदेषु तृतीयाविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत-
(क) मात्रा सह पुत्री गच्छति (मातृ)
(ख) ________ विना विद्या न लभ्यते (परिश्रम)
(ग) छात्रः ________ लिखति (लेखनी)
(घ) सूरदासः _________ अन्धः आसीत् (नेत्र)
(ङ) सः _________ साकम् समयं यापयति। (मित्र)
उत्तरम्:
(क) मात्रा सह पुत्री गच्छति (मातृ)
(ख) परिश्रमण विना विद्या न लभ्यते (परिश्रम)
(ग) छात्रः लेखन्या लिखति (लेखनी)
(घ) सूरदासः नत्रेण अन्धः आसीत् (नेत्र)
(ङ) सः मित्रं साकम् समयं यापयति। (मित्र)

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना

प्रश्न 4.
‘क’ स्तम्भे विशेषणपदं दत्तम् ‘ख’ स्तम्भे च विशेष्यपदम्। तयोर्मेलनम् कुरुत-
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना Q4
उत्तरम्:
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना Q4.1

प्रश्न 5.
अधोलिखितानां पदानां विलोमपदं पाठात चित्वा लिखत-
(क) श्वः
(ख) प्रसन्ना
(ग) वरिष्ठा
(घ) प्रशंसितम्
(ङ) प्रकाशः
(च) सफलाः
(छ) निरर्थकः
उत्तरम्:
(क) श्वः – परः
(ख) प्रसन्ना – अप्रसन्ना
(ग) वरिष्ठा – कनिष्ठा
(घ) प्रशंसितम् – निन्दितम्
(ङ) प्रकाशः – तमः
(च) सफलाः – असफल:
(छ) निरर्थकः – सार्थकः

प्रश्न 6.
रेखांकितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
(क) प्रसन्नतायाः विषयोऽयम्।
उतरम्:
कस्याः विषयोऽयम्।

(ख) सर्वकारस्य घोषणा अस्ति।
उतरम्:
कस्य घोषणा अस्ति।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना

(ग) अहम् स्वापराधं स्वीकरोमि।
उतरम्:
अहम् काम स्वीकरोमि।

(घ) समयात् पूर्वम् आया सं करोषि।
उतरम्:
कस्मात् पूर्वम् आया सं करोषि।

(ङ) अम्बिका क्रोडे उपविशति।
उतरम्:
अम्बिका कत्र उपविशति।

प्रश्न 7.
अधोलिखिते सन्धिविच्छेदे रिक्त स्थानानि पुरयत-
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना Q7
उतरम्:
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना Q7.1

Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना Summary

पाठ परिचय
यह पाठ कन्याओं की हत्या पर रोक और उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने की प्रेरणा हेतु निर्मित है। समाज में लड़के और लड़कियों के बीच भेद-भाव की भावना आज भी समाज में यत्र-तत्र देखी जाती है। जिसे दूर किए जाने की आवश्यकता है। संवादात्मक शैली में इस बात को सरल संस्कृत में प्रस्तुत किया गया है।

शब्दार्थ-
साकम् – साथ, दिष्ट्या – भाग्य से, ह्यः – कल, वाञ्छामि – चाहता हूँ/चाहती हूँ, सार्द्धम् – साथ, उभे – दोनों, कुक्षौ – कोख में, उद्विग्ना – चिन्तित, वधार्हा – वध के योग्य, क्रोडे – गोदी में, आयासः – प्रयास, निघृणम् – घृणा योग्य, दुहिता – पुत्री, निधाय – रख कर, गर्हितम् – निन्दित, कनिष्ठा – छोटी, अपगतः – दूर हो गया, सन्नद्धः – तैयार, श्रुतजात – शास्त्रों का समूह, श्रुतचिन्तने – तत्त्वों (ज्ञान) के चिन्तन-मनन में, शत्रुविदारणे – शत्रुओं को पराजित करने में, सकलासु – सभी, दिक्षु – दिशाओं में, सबला – बल से युक्त, उत्साह्यताम् – प्रोत्साहित कर।

मूलपाठ:
शालिनी ग्रीष्मावकाशे …………..कुशलं खल?

सरलार्थः
शालिनी गर्मी के छुट्टी में पिता के घर आ गई। सभी प्रसन्नतापूर्वक उसका स्वागत कर रहे थे। लेकिन उसकी भाभी उदास सी दिख रही थी। शालिनी बोली – भाभी सभी कुशल है न।।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना

माला – आम् शालिनी ……………….. चायं वा?

सरलार्थः
हाँ शालिनी। मैं कुशल हूँ। तुम्हारे लिए ठण्डा या गर्म पेय पदार्थ लाऊँ।

शालिनी – अधुना तु ………………… किमपि नोबतवती।

सरलार्थः
शालिनी – अभी कुछ नहीं चाहिए। रात में सभी साथ में ही भोजन करेंगे। भोजन के समय में माला की मनोदशा स्वास्थ्य की ठीक नहीं प्रतित हो रही थी लेकिन मुँह पर उदासी नहीं थी।

राकेशः भगिनी शालिनि! ………… तर सम्पाद्यः।

सरलार्थः
बहन शालिनी – दिष्टया भी आ गई। आज पेरे कार्यालय में एक महत्वपूर्ण गोष्ठी निश्चित हुई हैं आज माला और चिकित्सक के साथ मिलन का समय निर्धारित हुआ है। तुम माला के साथ चिकित्सक के पास जाओ। उनके सलाहानुसार जो बतायेगें वही करना।

शालिनी – किमभवत् …………. प्रतीयतेस्य।

सरलार्थः
शालिनी – क्या हुआ? भाभी का स्वास्थ्य सही नहीं है। मैं कल तुम्हें जो देखी, उस समय भी स्वस्थ नहीं प्रतित हो रही थी।

राकेशः – चिन्तायाः ………….कुरुतः।

सरलार्थः
राकेश – चिन्ता का विषय नहीं है। तुम माला के साथ जाओ। रास्ते में सब बात जान जाओगे। माला, शालिनी और चिकित्सक जाकर बातचीत प्रारंभ करें।

शालिनी – किमभवत्? भ्रातृजाये?…….. समस्याऽस्ति?

सरलार्थः
शालिनी – क्या हुआ भाभी? क्या समस्या है?

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना

माला – शालिनी! ……….. वार्तामेव न शृणोति।

सरलार्थः
माला – हे शालिनी – मैं तीन माह का कोख में गर्भधारण की हूँ। तुम्हारा भाई का आग्रह है कि लिंग परिक्षण कराऊँगी। यदि लड़की होगी तो गर्भ गिरा देगें। मैं बहुत ही व्याकुल हूँ, फिर भी तुम्हारा भाई कोई बात सुनने के लिए तैयार नहीं है।

शालिनी – भ्राता ………… एकत्रिताः।

सरलार्थः
शालिनी भाई ऐसी चिन्ता क्यों करते हैं? लड़की वध के लिए नहीं होती है। यह तो बुरा कार्य है। तम विरोध नहीं करते हो। वह तुम्हारे शरीर में बैटी है। शिशु की हत्या करोगी और तुम चुपचाप बैठी हौ। अब तुम घर चलो। अब लिंग परिक्षण की आवश्यकता नहीं है जब भाई घर आयेगें तो मैं बात करूंगी। शाम के समय भाई घर आने पर कपड़ा उतारकर पैरों को धोकर माता की स्तुति दीप जलाकर प्रारंभ किया। उसके बाद सभी चाय पीने के लिए एकत्र हुए।

राकेशः – माले! ………………. उत्तरं ददाति।

सरलार्थः
राकेश – माला तुम चिकित्सक के पास गई थी उसने क्या कहीं। माला मौन साधना में थी। तभी तीन वर्ष की खेलती हुई पुत्री अम्बिका के गोद में बैठकर चाकलेट मांगने लगी। राकेश अम्बिका का पालता है उसे चाकलेट देकर गोद से उतार देता है फिर भी माला के प्रति प्रश्नवाचक दृष्टि दिखाई पड़ती है शलिनी सभी देखकर उत्तर देती है।

शालिनी- भ्रातः! …………..उयम् आयासः?

सरलार्थः
शालिनी – भाई तुम क्या जानने की इच्छा रखते हो? भाभी के गोद में लड़का की या लड़की। छ: माह के बाद सभी स्पष्ट को जाता है क्या है?

राकेशः – भगिनि त्वं …….. आवश्यकताऽस्ति तर्हि……..

सरलार्थः
राकेश बहन तुम नहीं जानते कि अम्बिका पुत्री रूप में हमारे घर में है अब एक पुत्र चाहिए।

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शालिनी- तर्हि कुक्षि पुत्री अस्ति चेत् हन्तव्या? (तीव्रस्वरेण) हत्यायाः पापं कर्तुं प्रवृत्तोऽसि त्वम्।

सरलार्थः
शालिनी – तुम्हारे गोद में पुत्री है क्या उसकी हत्या कर दोगें। हत्या करने की प्रवृति है।

राकेशः – न, हत्या तु न …….

सरलार्थः
राकेश नहीं हत्या।

शालिनी – तहिं किमस्ति ………… शिक्षा वृथा …..

सरलार्थः
शालिनी – कैसा तुम धृणित काम करता है क्या तुम भूल गए हमारे पिता ने कभी भी लडका एवं लड़की में कोई भेद नहीं रखा। वे सदा मनुस्मृति की पक्षियों का उदाहरण देते रहे – पुत्र और पुत्री दोनों बराबर हैं। तुम सुबह-शाम देवताओं की स्तुति करते हो। फिर भी ईश्वर प्रदत को तिरस्कार करते हो। तुम्हारे मन में ऐसी गलत विचार कैसे आया, यही सोचकर मैं व्याकुल हूँ। तुम्हारी शिक्षा बेकार है।

राकेशः – भगिनि! ………. त्वम् मम गुरुरसि।

सरलार्थः
राकेया बहन ठहरो-ठहरो! मैं अपराध में स्वयं लज्जा स्वीकार करता हूँ। ऐसा गलत कार्य कभी भी स्वप्न में भी नहीं सोचना चाहिए। अम्बिका तो सप्पूर्ण प्रेम की अधिकारी है। आने वाला लड़का या लड़की सभी प्रेम का अधिकारी होगा। मैं काफी सोचने के बाद काफी पश्चाताप कर रहा हूँ। मैं कैसे भूल सकता हूँ – ‘जहाँ स्त्री की पूजा होती है वहाँ ईश्वर का वास होता है और जहाँ पूजा नहीं होती वहाँ सभी क्रिया असफल हो जाती है। तुम्हारे द्वारा दी गई सलाह उचित है तुम छोटी होते हुए हमारा गुरू है।

शालिनी – अलम् पश्चात्तापेन। ……….यथार्थरूपं करिष्याम:

सरलार्थः
शालिनी – पश्चाताप मत करो। भाई तुम्हारे अन्दर अज्ञानता रूपी अन्धकार था जो प्रकाशित हो गया हैं सभी चिन्ता को छोड़कर शिशु के आगमन की स्वागत करें। अब हम लोग प्रतिज्ञा करें कि – ‘पुत्री की रक्षा करो और पुत्री को पढ़ाओं तभी सरकार द्वारा की गई घोषणा सार्थक होगी। अब हम लोग सभी मिलकर यथार्थ रूप से इस पर चिन्ता करें।

या गार्गी श्रुतचिन्तने नृपनये पाञ्चालिका विक्रमे।
लक्ष्मीः शत्रुविदारणे गगनं विज्ञानाङ्गणे कल्पना।

सरलार्थः
वेद शास्त्रों के अध्ययन में जो गार्गी के समान परम विदुषी है जो राजकार्य एवं शत्रुओं के विनाश करने में रानी लक्ष्मी-बाई के समान है विज्ञान के क्षेत्र में जो कल्पना चावला के समान है।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना

इन्द्रोद्योगपथे च खेलजगति ख्याताभितः साइना
सेयं स्वी सकलास दिक्ष सबला सर्वैः सदोत्साह्यताम्

सरलार्थः
उद्योग के क्षेत्र में इन्द्रानूई के समान है खेल के क्षेत्र में प्रसिद्धा साइना नेहवाल के समान है सब क्षेत्रों में सबला यह नारी है इसको सभी लोगों के द्वारा प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

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NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम्

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NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Ruchira Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम्

अभ्यासः

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तर लिखत-

(क) व्याधस्य नाम किम् आसीत्?
उत्तरम्:
चञ्चलो।

(ख) चञ्चल: व्याघ्नं कुत्र दृष्टवान्?
उत्तरम्:
जाले बद्धः।

(ग) कस्मै किमपि अकार्य न भवति।
उत्तरम्:
क्षुधार्ताय।

(घ) बदरी-गुल्मानां पृष्ठे का निलीना आसीत्?
उत्तरम्:
लोभशिका

(ङ) सर्वः किं समीहते?
उत्तरम्:
सर्वः स्वार्थ समीहते।

(च) नि:सहायो व्याधः किमयाचत?
उत्तरम्:
निःसहायों व्याघ्रः प्राण भिक्षामिव अयाचत।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम्

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत-

(क) चञ्चलेन वने किं कृतम्?
उत्तरम्:
चञ्चलेन बने पक्षिमृगादीनां ग्रहणेन सः स्वीयां जीविका निर्वाहयति स्म।

(ख) व्याघ्रस्य पिपासा कथं शान्ता अभवत्?
उत्तरम्:
नद्याः जलमानीन व्याघ्रस्य पिपासा शान्ता अभवत्।

(ग) जलं पीत्वा व्याघ्रः किम् अवदत्?
उत्तरम्:
जलं पीत्वा व्याघ्रः साम्प्रतं बुभुक्षितोऽस्मि अपदत्।

(घ) चञ्चलः ‘मातृस्वसः!’ इति को सम्बोधितवान्?
उत्तरम्:
चञ्चल: ‘मातृस्वसः’। इति लोमशिका सम्बोधितवान।

(ङ) जाले पुनः बद्धं व्याघ्रं दृष्ट्वा व्याधः किम् अकरोत्?
उत्तरम्:
जाले पुनः बद्धं व्याघ्रं दृष्ट्वा व्याधः जलात् वहिः निरसादयत् अकरोत्।

प्रश्न 3.
अधोलिखितानि वाक्यानि कः/का/कं/कां प्रति कथयति-
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम् Q3
उत्तरम्:
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम् Q3.1

प्रश्न 4.
रेखांकित पदमाधृत्य प्रश्ननिर्माण-

(क) व्याधः व्याघ्रं जालात् बहिः निरसारयत्।
उतरम्:
व्याधः व्याघ्र कस्मात् बहिः निरसारयत्।

(ख) चञ्चल: वृक्षम् उपगम्य अपृच्छत्।
उतरम्:
चञ्चल: कुत्र उपगम्य अपृच्छत्।

(ग) व्याघ्रः लोमशिकायै निखिला कथां न्यवेदयत्।
उतरम्:
व्याघ्रः कस्मयै निखिला कथां न्यवेदयत।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम्

(घ) मानवाः वृक्षाणां छायायां विरमन्ति।
उतरम्:
मानवाः केषाम् छायायां विरमन्ति।

(ङ) व्याघ्रः नद्याः जलेन व्याधस्य पिपासामशमयत्।
उतरम्:
व्याघ्रः के जलेन व्याधस्य पिपासामशमयत्।

प्रश्न 5.
मञ्जूषातः पदानि चित्वा कथां पूरयत-
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम् Q5
एकस्मिन् वने एक: ________ व्याघ्रः आसीत्। सः एकदा व्याधेन विस्तारिते जाले बद्धः अभवत्। सः बहुप्रयासं _________ किन्तु जालात् मुक्तः नाभवत्। ____________ तत्र एकः मूषकः समागच्छत्। बद्धं व्याघ्रं __________ सः तम् अवदत्-अहो! भवान् जाले बद्धः। अहं त्वां _________ इच्छामि। तच्छुत्वा व्याघ्रः _________ अवदत्-अरे! त्व _________ जीवः मम साहाय्यं करिष्यसि। यदि त्वं मां मोचयिष्यसि __________ अहं त्वां न हनिष्यामि। मूषकः ___________ लघुदन्तैः तज्जालस्य __________ कृत्वा तं व्याघ्र बहिः कृतवान्।
उतरम्:
एकस्मिन् वने एक: वृद्धः व्याघ्रः आसीत्। सः एकदा व्याधेन विस्तारिते जाले बद्धः अभवत्। सः बहुप्रयासं कृतवान् किन्तु जालात् मुक्तः नाभवत्। अकस्मात् तत्र एकः मूषकः समागच्छत्। बद्धं व्याघ्रं दृष्ट्वा सः तम् अवदत्-अहो! भवान् जाले बद्धः। अहं त्वां मोचयितुम् इच्छामि। तच्छुत्वा व्याघ्रः साट्टहासम अवदत्-अरे! त्व क्षतः जीवः मम साहाय्यं करिष्यसि। यदि त्वं मां मोचयिष्यसि तर्हि अहं त्वां न हनिष्यामि। मूषकः स्वकीयैः लघुदन्तैः तज्जालस्य कर्तनम् कृत्वा तं व्याघ्र बहिः कृतवान्।

प्रश्न 6.
यथानिर्देशमुत्तरत-
(क) सः लोमशिकायै सर्वा कथां न्यवेदयत् – अस्मिन् वाक्ये विशेषणपदं किम्।
उतरम्:
सर्वा।

(ख) अहं त्वत्कृते धर्मम् आचरितवान् – अत्र अहम् इति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्।
उतरम्:
चञ्चलः।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम्

(ग) ‘सर्वः स्वार्थ समीहते’, अस्मिन् वात्यो कर्तृपदं किम्।
उतरम्:
सर्वः।

(घ) सा सहसा चञ्चलमुपसृत्य कथयति – वाक्यात् एकम् अव्ययपदं चित्वा लिखत।
उतरम्:
उप।

(ङ) ‘का वार्ता? माम् अपि विज्ञापय’ – अस्मिन् वाक्ये क्रियापदं किम्? क्रियापदस्य पदपरिचयमपि लिखतः।
उतरम्:
विज्ञापय।

प्रश्न 7(अ).
उदाहरणानुसारं रिक्तस्थानानि परयत-
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम् Q7
उतरम्:
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम् Q7.1

प्रश्न 7(आ).
धातुं प्रत्ययं च लिखत-
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम् Q7.2
उतरम्:
NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम् Q7.3

योग्यता-विस्तार
परधान और उनकी कलापरम्परा-परधान मुख्यता: गौड राजाओं की वंशावली और कथा के गायक गौड राज्य क समाप्त होने पर ये गायक अपनी गायी जाने वाली कथाओं पर चित्र बनाने लगे इस समुदाय की कथाओं और चित्रकला के बारे में और अधिक जानने के लिए पुस्तक जनगढ़ कलम (वन्या प्रकाशन भोपाल) देखी जा सकती है। प्रस्तुत कथा के संकलन-कर्ता हिन्दी के सुप्रसिद्ध लेखक श्री उदयन वाजपेयी है।

लोककथाओं में जीवन की रंग-बिरंगी तस्वीर मिलती है। दिलचस्प बात यह है कि लोककथाएँ किसी एक भाषा या इसके तक सीमित नहीं रहती। उन्हें कहने वाले जगह-जगह घूमते हैं। इसलिए रूप और वर्णन में हेरफेर के साथ दूसरी जगहों में भी मिल जाती है। क्षेत्र विशेष की संस्कृति की झलक उनको अनूठा बनाती है। स्थान और काल के अनुसार लोककथाओं की नई-नई व्याख्याएँ होती रहती है। इस क्रम में उनमें परिवर्तन भी होता है।

Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम् Summary

पाठ परिचय:
मध्यप्रदेश के डिण्डोरी जिले में परधानों के बीच प्रचलित एक लोककथा है। यह पञ्चतन्त्र की शैली में रचित है। इस कथा में यह स्पष्ट किया गया है कि संकट में चतुराई एवं प्रत्युत्पन्नमतित्व से बाहर निकला जा सकता है।

शब्दार्थ-
व्याधः – शिकारी, बहेलिया, स्वीयाम् – स्वयं की, दौर्भाग्यात् – दुर्भाग्य से, बद्धः – बँधा हुआ, पलायनम् – पलायन करना, भाग जाना, न्यवेदयत् (नि+अवेदयत्) – निवेदन किया, मोचयिष्यसि – मुक्त करोगे/छुड़ाओगे, निरसारयत् (नि: असारयत्) – निकाला, क्लान्तः – थका हुआ, पिपासुः – प्यासा, शमय – शान्त करो/मिटाओ, बुभुक्षितः- भूखा, भणितम् – कहा, प्रक्षालयन्ति – धोते हैं, विसृज्य – छोड़कर, निवर्तन्ते – चले जाते हैं।लौटते हैं, उपगम्य – पास जाकर, विरमन्ति – विश्राम करते हैं, कुठारैः – कुल्हाड़ियों से, प्रहत्य – प्रहार करके.. छेदनम् – काटना, लोमशिका – लोमड़ी, निलीना – छुपी हुई, उपसृत्य – समीप जाकर, मातृस्वसः! – हे मौसी, समागतवती – पधारी/आई, निखिलाम् – सम्पूर्ण, पूरी, बाढम् – ठीक है, अच्छा, प्रत्यक्षम् – अपने (समक्ष) सामने, वृत्तान्तम् – पूरी कहानी, प्रदर्शयितुम् .- प्रदर्शन करने के लिए, प्राविशत् (प्र+अविशत्) – प्रवेश किया, कूर्दनम् – उछल-कूद, अनारतम् – लगातार, श्रान्तः – थका हुआ, प्रत्यावर्तत (प्रति+आ+अवर्तत) – लौट आया।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम्

मूलपाठः
आसीत् कश्चित…………खादितुम् इच्छासि।

सरलार्थः
कोई ‘चञ्चल’ नाम का बहेलिया था। पक्षी, मग आदि को पकड़कर वह अपनी जीविका निर्वाह करता था। एक बार वह जंगल में जाल फैलाकर घर आ गया। अगले दिन वहाँ जाकर उस फैले हुए जाल में दुर्भाग्यपूर्ण एक बुढ़ा बाघ को फंसा देखा। इसलिए सोचा-बाघ मुझे खा जाएगा इसलिए यहाँ से चलना चाहिए। बाघ ने निवेदन किया – हे मानव! तुम्हारा कल्याण हो अगर तुम मुझे मुक्त करोगे तब तुम्हारा नुकसान नहीं करूँगा। तब वह बहेलिया बाघ को बाहर निकाला। बाघ थका हुआ था। वह बोला – हे मानव! मैं प्यासा हूँ। नदी से जल लाकर मेरी प्यास शान्त करो। बाघ जल पीकर पुनः बहेलिया से बोला- ‘प्यास तो शान्त हो गया अब भुख लगी है अब मैं तुम्हें खाऊँगा।’ चञ्चल ने कहा – मैं तुम्हारे प्रति धर्म को आचरण किया। तुम बेकार कह रहे हो। क्या तुम मुझे खाने के ईच्छा रखते हो?

व्याघ्रः अवदत् अरे मूर्ख!………..सर्वः स्थार्थ समीहते।

सरलार्थः
बाघ बोला, अरे मूर्ख! भूख के लिए कोई भी अकार्य नहीं होता। सभी स्वार्थ में ही निहीत हैं चञ्चल ने नदी जल से पूछा। नदी जल न कहा – ऐसा ही होता है, लोग मेरे जल में स्नान करते हैं, कपड़ा धोते हैं तथा मल-मूत्र का त्याग करते है। सभी में तो सर्वाथ ही निहीत है। चञ्चल वृक्ष के पास जाकर पूछा! वृक्ष बोला -मनुष्य हमारी छाया मे विश्राम करते हैं। हमारे फल खाते हैं, फिर कुल्हाड़ी से प्रहार कर हमें सदा कष्ट देते हैं। यहाँ काटना भी सभी स्वार्थ में ही निहीत हैं।

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम्

समीपे एका………………सर्वः स्वार्थ समीहते।

सरलार्थः
नजदीक में एक लोमड़ी पीठ पर गट्ठर लिए सभी बातें सुनी। वह अचानक चञ्चल से पूछी क्या बात है? मुझे भी बताओ। वह बोला – हे मौसी! तुम तो समय पर आ गई हो। मुझे इस बाघ से प्राण रक्षा करो यह मुझे खाना चाहता है। इसके बाद वह लोमडी सम्पूर्क कथा की जानकारी हेतु निवेदन किया। लोमड़ी ने चञ्चल से कहा – ठीक है जाल फैलाओ और पुनः बाघ से कहा – तुम इस जाल में किस प्रकार बंधे से इसका प्रत्यक्ष दिखाओ। बाघ सारी वृतान्त को दिखाने हेतु उस जाल में प्रवेश कर गया। लोमड़ी ने फिर कहा – अब बार-बार उछलकर दिखाओ। उछलते उछलते वह शांत हो गया। कुछ समय के बाद जाल में बन्धने से अपने को बेसहारा समझ गिरते हुए प्राण की रक्षा हेतु गुहार लगाया। लोमड़ी ने बाघ से कहा – सही कहा गया है – सभी स्वार्थ में ही निहीत है।

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