Author name: Raju

NCERT Solutions for Class 10 Social Science History in Hindi Medium Chapter 6

NCERT Solutions for Class 10 Social Science History Chapter 6 Work, Life and Leisure (काम, आराम और जीवन)

NCERT Solutions for Class 10 Social Science History Chapter 6 Work, Life and Leisure (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

संक्षेप में लिखें

प्रश्न 1. अठारहवीं सदी के मध्य से लंदन की आबादी क्यों फैलने लगी? कारण बताइए।
उत्तर अठारहवीं सदी के मध्य से लंदन की आबादी तेज़ी से बढ़ने लगी। इसकी आबादी 6,75,000 तक पहुँच चुकी थी। इसके लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी थे
(क) लंदन में औद्योगिक क्रांति के कारण आबादी तेज़ी से बढ़ी। हालाँकि, लंदन में विशाल कारखाने नहीं थे, फिर भी प्रवासी आबादी चुंबक की तरह उसी तरफ़ खिंची चली आती थी। गैरेथ स्टेडमैन जोन्स के शब्दों में, “19वीं शताब्दी का लंदन क्लर्को और दुकानदारों, छोटे पेशेवरों और निपुण कारीगरों, नौकरों, दिहाड़ी मजदूरों, कुशल व शारीरिक श्रम करने वालों की बढ़ती आबादी, सिपाहियों, फेरीवालों और भिखारियों का शहर था।”
(ख) रोजगार प्राप्त करने लोग लंदन की तरफ़ आ रहे थे। लंदन की गोदी के अलावा मुख्य रूप से पाँच तरह के बड़े उद्योगों में बहुत सारे लोगों को काम मिला हुआ था । ये उद्योग थे—परिधान और जूता उद्योग, लकड़ी व फर्नीचर उद्योग, धातु एवं इंजीनियरिंग उद्योग, छपाई और स्टेशनरी उद्योग तथा शल्य चिकित्सा उपकरण के घड़ी जैसे सटीक माप वाले उत्पादों और कीमती धातुओं की चीजें बनाने वाले उद्योग।
(ग) पहले विश्व युद्ध के दौरान लंदन में मोटरकार और बिजली के उपकरणों का भी उत्पादन होने लगा और विशाल कारखानों की संख्या बढ़ते-बढ़ते इतनी हो गई कि शहर की तीन-चौथाई नौकरियाँ इन्हीं कारखानों में सिमट गईं।

प्रश्न 2. उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के बीच लंदन में औरतों के लिए उपलब्ध कामों में किस तरह के बदलाव आए? ये बदलाव किन कारणों से आए?
उत्तर 18वीं सदी के अंत में और 19वीं सदी के प्रारंभ में फैक्टरियों में बहुत सारी औरतें काम करती थीं। जैसे-जैसे तकनीक में
सुधार आया, कारखानों में औरतों की नौकरियाँ छिनने लगीं और वे घरेलू कामों में सिमट कर रह गईं। 1861 की जनगणना से पता चला कि लंदन में लगभग ढाई लाख नौकर हैं। उनमें औरतों की संख्या बहुत ज्यादा थी। उनमें से अधिकांश हाल । ही में शहर में आई थीं। बहुत सारी औरतें परिवार की आय बढ़ाने के लिए अपने मकानों का भी इस्तेमाल करती थीं। वे या तो किसी को भाड़े पर रख लेती थीं या घर पर ही रहकर सिलाई-बुनाई, कपड़े धोने या माचिस बनाने जैसे काम करती थीं। 20वीं सदी में हालात फिर बदले। जब औरतों को युद्धकालीन उद्योगों और दफ्तरों में काम मिलने लगा तो वे घरेलू काम छोड़कर फिर बाहर आने लगीं।

प्रश्न 3. विशाल शहरी आबादी के होने से निम्नलिखित पर क्या असर पड़ता है? ऐतिहासिक उदाहरणों के साथ समझाइए।

(क) ज़मींदार
(ख) कानून-व्यवस्था संभालने वाला पुलिस अधीक्षक
(ग) राजनीतिक दल का नेता

उत्तर
(क) जमींदार वर्ग – यह वर्ग बड़ी-बड़ी जमीनों का मालिक होता था। जब शहरों का विकास हुआ तो यह वर्ग शहरों में आकर रहने लगा था । इनकी ग्रामीण जीवन शैली पूरी तरह से बदल गई। जब शहरों में आबादी बढ़ने के कारण रहने की समस्या उत्पन्न हुई, तब इस वर्ग ने इस समस्या को हल करने में अपना योगदान दिया। जब मिलमालिकों और सरकार ने शहरों में निवास के नए मकान बनाने की जिम्मेवारी नहीं ली, तब इस वर्ग ने अपनी भूमि पर छोटे-छोटे मकान या चॉल आदि बनाकर मजदूरों और कारीगरों को किराए पर दिए जिससे ये धनी हो गए और जल्द ही इस धन से शहरों में इन्होंने अपने कारखाने स्थापित कर लिए। जब शहरों में शराबखोरी और गंदगी का माहौल उत्पन्न हो गया तो इस वर्ग ने इनसे निपटने के लिए संयमता आंदोलन प्रारंभ किया।
(ख) कानून-व्यवस्था संभालने वाला पुलिस अधीक्षक – शहरों में जब जनसंख्या बढ़ने लगी तब यहाँ पर कई तरह के अपराध भी होने लगे, क्योंकि गाँवों से ज्यादातर लोग यहाँ पर काम की तलाश में आए और जब उन्हें काम नहीं मिला तो अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए अपराध करने लगे। ऐसे में जिला प्रमुख पुलिस अधिकारी या पुलिस अधीक्षक की कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका हो गई, क्योंकि परोपकारी जहाँ र गज में नैतिकता को लेकर चिंतित थे, वहीं उद्योगपति परिश्रमी और अनुशासित मजदूर वर्ग की चाह के कारण परेशान थे। अतः पुलिस द्वारा अपराधियों पर नजर रखी गई। साथ ही उनकी जिंदगी के तौर-तरीकों की जाँच की जाने लगी। जनता में अनुशासन बनाए रखने के लिए पुलिस और शासन द्वारा अपराधों के लिए कड़ी से कड़ी सज़ा दी गई। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटा गया। ये सभी कार्य पुलिस अधीक्षक के अधीन पुलिस विभाग के अन्य अधिकारियों द्वारा किए गए। इसके अतिरिक्त शासन द्वारा लायक गरीब लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध करवाए गए ताकि वे अपराध की ओर आकर्षित न हो।
(ग) राजनैतिक दल का नेता – जब शहरों का विकास हुआ तो यहाँ पर अन्य चीजों के विकास के साथ-साथ राजनैतिक गतिविधियाँ भी आरंभ हुईं। जब जनसंख्या वृद्धि के कारण यहाँ पर अनेक समस्याएँ उत्पन्न हुईं तब अवसरवादी नेताओं ने इनका लाभ उठाते हुए मजदूरों और कारीगरों के संगठन बनाए तथा हड़तालें आदि करवाने लगे। इन्होंने जनता को आश्वासन दिया कि वे उनकी समस्याओं का जल्द से जल्द हल करवाएंगे। इस प्रकार से इन्होंने अपने और अपने दल के लिए जनसमर्थन प्राप्त करने का प्रयास किया।

प्रश्न 4. निम्नलिखित की व्याख्या करें –

(क) 19वीं सदी में धनी लंदनवासियों ने गरीबों के लिए मकान बनाने की ज़रूरत का समर्थन क्यों किया?
(ख) बंबई की बहुत सारी फ़िल्में शहर में बाहर से आने वालों की जिंदगी पर आधारित क्यों होती थीं?
(ग) 19वीं सदी के मध्य में बंबई की आबादी में भारी वृद्धि क्यों हुई?

उत्तर
(क) 19वीं सदी में धनी लंदनवासियों ने गरीबों के लिए मकान बनाने का समर्थन निम्नलिखित कारणों से किया

  1. गरीबों के एक कमरे वाले मकानों में भीड़ रहती थी, वहाँ हवा निकासी का इंतजाम नहीं था और साफ़-सफ़ाई की सुविधाएँ नहीं थीं।
  2. खस्ताहाल मकानों के कारण आग लगने का खतरा बना रहता था।
  3. इस विशाल जनसमूह के कारण सामाजिक उथल-पुथल की आशंका दिखाई देने लगी थी। 1917 की रूसी क्रांति के बाद यह डर काफ़ी बढ़ गया था। लंदन के गरीब कहीं विद्रोह न कर दें, इस आशंका से निपटने के लिए मजदूरों के लिए आवासीय योजनाएँ शुरू की गईं।

(ख) बम्बई में जो फिल्में बनीं उनमें से कई फिल्में बाहर से आने वाले लोगों की जिंदगी पर आधारित होती थीं। इसके कई कारण थे

  1. इनमें उनके जीवन में आने वाली दैनिक समस्याओं को दिखाया गया।
  2. इनमें लोकप्रिय गीतों द्वारा शहरों के अंतर्विरोधों को दर्शाया गया जैसे सी.आई.डी. का गाना ‘ऐ दिल है मुश्किल जीना यहाँ, जरा हटके जरा बचके यह है बंबई मेरी जान।
  3. इनमें उन लोगों के जीवन को भी दर्शाया गया जो बंबई को सपनों का शहर समझकर आते थे और यहाँ पर अनेक कठिनाईयों का सामना करते थे।
  4. इनमें शहरी अमीरों और बाहर से आने वाले गरीबों के बीच के अंतर्विरोधों को स्पष्ट रूप से दर्शाया जाता था।
  5. बाहर से आने वाले लोगों को बंबई के जीवन में गंदा वातावरण, आवासी मकानों का अभाव, लोगों का संकीर्ण दृष्टिकोण, मानव-मूल्यों की उपेक्षा, गरीबी और अपराध को फिल्मों में दिखाया गया।

(ग) 19वीं सदी के मध्य में बंबई की आबादी में भारी वृद्धि के कारण

  1. शहरी आकर्षण – बंबई की आबादी बढ़ने का मुख्य कारण लोगों का शहरों के प्रति बढ़ता आकर्षण था, जिससे आकर्षित होकर लोग यहाँ पर आकर रहने लगे। उन्होंने आधुनिक जीवन शैली को अपनाने के साथ-साथ रोजगार के नये अवसरों की तलाश कर अपना जीवन-स्तर ऊँचा उठाया। जैसे-रहन-सहन की आधुनिक जीवन पद्धति, रोजगार के नए अवसर, आदि।
  2. व्यापारिक कारण – बंबई देश की प्रमुख बंदरगाहों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में वस्तुओं का आयात निर्यात होता था। इस कारण यह पश्चिमी भारत का प्रशासनिक और व्यापारिक केन्द्र बन गया जिससे लोग नवीन व्यापारिक अवसरों को प्राप्त करने के लिए यहाँ आने लगे।
  3. रोजगार के नवीन अवसर – 1819 में बंबई को प्रेसीडेंसी की राजधानी घोषित कर दिया गया। परिणामस्वरूप बंबई एक प्रमुख व्यापारिक केन्द्र के रूप में प्रकट हो गया। इस कारण व्यापारी, महाजन, जमींदार आदि यहाँ पर नवीन व्यापार के लिए आने लगे। आम ग्रामीण लोग यहाँ पर रोजगार के अवसर को प्राप्त करने के लिए तथा फिल्मी जगत में अपना भाग्य आजमाने के लिए आने लगे।
  4. आवागमन का विकास – बंबई जब प्रमुख व्यापारिक और प्रशासनिक केन्द्र बन गया तब यहाँ पर आवागमन की सुविधाओं का भी विकास हुआ, जिस कारण लोगों का यहाँ आना जाना आसान हो गया।
  5. प्राकृतिक प्रकोप – 1888-89 के बीच कच्छ के सूखे क्षेत्रों में अकाल पड़ने के कारण लोग यहाँ पर काम की तुलाश में आए। 1898 में जब प्लेग एक महामारी के रूप में फैला तब भी लोग इससे बचने के लिए बंबई आ गए। अंतत: उपरोक्त कारणों से बंबई की आबादी बढ़ गई।

चर्चा करें।

प्रश्न 1. लोगों को मनोरंजन के अवसर उपलब्ध कराने के लिए इंग्लैंड में 19वीं सदी में मनोरंजन के कौन-कौन से साधन सामने आए?
उत्तर 19वीं सदी में इंग्लैंड में मनोरंजन के निम्नलिखित साधन सामने आए

  1. लंदन के अमीर वर्ग के लोगों के लिए एक वार्षिक उत्सव होता था जिसे ‘लंदन सीजन’ कहा जाता था। इसमें ऑपेरा, रंगमंच और शास्त्रीय संगीत आदि कई प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन किए जाते थे।
  2. मेहनतकश अपना खाली समय पब या शराबघरों में बिताते थे। इस मौके पर वे खबरों का आदान-प्रदान भी करते थे और कभी-कभी राजनीतिक कर्रवाइयों के लिए गोलबंदी भी करते थे।
  3. 19वीं सदी में लोगों को इतिहास की जानकारी देने के लिए बहुत सारे पुस्तकालय, कला दीर्घाएँ और संग्रहालय खोले गये जिसमें काफी संख्या में दर्शक आते थे।
  4. निचले वर्ग के लोगों में मनोरंजन के साधन के रूप में संगीत सभा काफी लोकप्रिय थी।
  5. 20वीं सदी के प्रारंभ तक विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के लिए सिनेमा मनोरंजन का जबरदस्त साधन बन गया।
  6. औद्योगिक मजदूर छुट्टी के दिनों में समुद्र के किनारे जाकर धूप और स्वच्छ हवा का आनंद उठाने लगे।

प्रश्न 2. लंदन में आए उन सामाजिक परिवर्तनों की व्याख्या करें जिनके कारण भूमिगत रेलवे की जरूरत पैदा हुई। भूमिगत रेलवे के निर्माण की आलोचना क्यों हुई?
उत्तर भूमिगत रेलवे की आवश्यकता

  1. इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के बाद लोग बड़ी संख्या में शहरों की तरफ रूख करने लगे। हालाँकि लंदन में विशाल | कारखाने नहीं थे फिर भी प्रवासी आबादी लंदन की तरफ आने लगी।
  2. लंदन की गोदी के अलावा मुख्य रूप से पाँच तरह के बड़े उद्योगों में बहुत सारे लोग काम पर लगे हुए थे-परिधान और जूता उद्योग, लकड़ी के फर्नीचर उद्योग, धातु एवं इंजीनियरिंग उद्योग, छपाई और स्टेशनरी उद्योग तथा शल्य चिकित्सा उपकरण उद्योग आदि।
  3. लंदन में आबादी बढ़ने के साथ-साथ अपराध भी बढ़ने लगे। 1870 के दशक में लंदन में आवास, भोजन तथा साफ सफाई की समस्याएँ बढ़ने लगी।
  4. लोगों के लिए अच्छे आवास की व्यवस्था करना जरूरी हो गया था। विश्व युद्धों के दौरान मजदूर वर्ग के लिए आवास का इंतजाम करने की जिम्मेदारी ब्रिटिश राज्य ने अपने ऊपर ले ली और स्थानीय शासन के जरिए 10 लाख मकान बनाए गए। शहर के आसपास उपशहरी बस्तियाँ अस्तित्व में आ चुकी थीं।
  5. लोगों को उपनगरीय बस्तियों से शहर तक लाने के लिए परिवहन की कोई सुविधा नहीं थी।
  6. लोगों को उपशहरी बस्तियों में रहने के लिए तभी तैयार किया जा सकता था जबकि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बनाई जाती।
  7. इसी बात को ध्यान में रखकर लंदन में भूमिगत रेलवे का निर्माण किया गया। लंदन की भूमिगत रेलवे ने आवास की समस्या को काफी हद तक हल कर दिया था। लोग इसके जरिए शहर के भीतर-बाहर आ-जा सकते थे।

भूमिगत रेलवे की आलोचना के कारण – दुनिया की सबसे पहली भूमिगत रेल के पहले खंड का उद्घाटन 10 जनवरी 1863 को किया गया। पहले दिन 10,000 यात्रियों ने इसमें यात्रा की। 1880 तक भूमिगत रेल नेटवर्क का विस्तार हो चुका था। प्रारंभ में भूमिगत यात्रा की कल्पना से लोग डर जाते थे। इस भूमिगत रेल की निम्नलिखित आधारों पर आलोचना की जाने लगी

  1. रेल के डिब्बे मुसाफिरों से भरे रहते थे। डिब्बे का माहौल सल्फर, कोयले की धूल और ऊपर लगे गैस के लैंप से निकलती गंध से भरा हुआ था।
  2. लोग अपने गंतव्य स्थल पर पहुँचने तक श्वासावरोधन और गर्मी के कारण बेहाल हो जाते थे। लोगों का कहना था कि इन रेलगाड़ियों को फौरन बंद कर देना चाहिए क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए खतरा है।
  3. बहुत सारे लोगों का मानना था कि इन “लौह दैत्यों’ ने शहर में अफरा-तफरी और अस्वास्थ्यकर माहौल बढ़ा दिया है।
  4. भूमिगत रेलवे के निर्माण की प्रक्रिया में होने वाले बेहिसाब विनाश के कारण भी लोगों ने इसका विरोध किया। एक नागरिक का कहना था कि मकान गिरा दिए गए, सड़कों को तोड़कर बंद कर दिया गया, जमीन में गहरे गड्ढे और खाइयाँ खोद दी गईं और चारों तरफ बेहिसाब मिट्टी और धूल के अंबार लगा दिए गए।

इस प्रकार लंदन में बनी भूमिगत रेलवे के कारण लंदन के गरीबों को काफी बड़ी संख्या में उजाड़ा गया। इन सारी आलोचनाओं के बावजूद इस भूमिगत रेलवे को जबरदस्त कामयाबी हासिल हुई।

प्रश्न 3. पेरिस के हॉसमानीकरण से क्या अभिप्राय है? इस तरह के विकास को आप किस हद तक सही या गलत मानते हैं? इस बात का समर्थन या विरोध करते हुए अखबार के संपादक को पत्र लिखिए और उसमें अपने दृष्टिकोण के पक्ष में कारण दीजिए?
उत्तर पेरिस का हाँसमानीकरण –

  • 1852 में लुई नेपोलियन तृतीय को फ्रांस का सम्राट घोषित किया गया।
  • सम्राट बनते ही उसने पेरिस के पुनर्निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। इसके लिए उसने बैरान हॉसमान नामक वास्तुकार
    को चुना जिसने 17 वर्षों (1852-59) में यह कार्य पूर्ण किया। इसके लिए उसने पेरिस के मध्य से गरीबों की बस्तियों को साफ किया ताकि कोई विद्रोह ना हो। शहर में सीधी और चौड़ी सड़कें बनाई गईं, खुले मैदान बनाए गए और बड़ेबड़े पेड़ लगवाए गए तथा सुरक्षा के लिए पुलिस का प्रबंध किया गया, पानी का प्रबंध किया गया और बस अड्डे बनाए गए। इस कायाकल्प को पेरिस का हॉसमानीकरण कहा जाता है। इस कार्य में लाखों लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ।

पक्ष में तर्क

  1. इससे पेरिस का पुनर्निर्माण हुआ।
  2. सड़कों को चौड़ा किया गया और उसके दोनों किनारों पर छायादार वृक्ष लगवाए गए।
  3. खुले मैदान बनाए गए।
  4. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया और रात में गश्त प्रारंभ की गई।
  5. हजारों लोगों को रोजगार मिला।
  6. शहर में पानी की व्यवस्था की गई।
  7. बस अड्डे बनाए गए यानि आवागमन की व्यवस्था को भी सुधारा गया।

विपक्ष में तर्क

  1. इसके लिए लगभग 3,50,000 लोगों के घरों को उजाड़ा गया।
  2. गरीबों की बस्तियों को उजाड़ा गया।
  3. प्राचीन जीवन पद्धति जिसमें मेल-मिलाप और अपनापन था वह खत्म हो गया। उसकी जगह उच्चवर्गीय संस्कृति की स्थापना हुई।
  4. इससे वृद्ध और परंपरागत विचारधारा वाले लोगों को बहुत दुख हुआ। उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची।

अखबार के संपादक को पत्र

संपादक जी,
हिन्दुस्तान टाइम्स,
दिल्ली-110001
विषय – हॉसमानीकरण के पक्ष में विचार!

आपका अखबार फ्रांस के ज्यादातर लोगों द्वारा पढ़ा जाता है। अतः मैं आपके अखबार के माध्यम से पेरिस हॉसमानीकरण के पक्ष में अपने विचार व्यक्त करना चाहता हूँ। यद्यपि इसके विरोध में कई जगहों पर प्रदर्शन आदि हो रहे हैं पर हमें इसके अच्छे पक्ष को भी देखना चाहिए जो इस नवीन रचना का उद्देश्य है।

इससे पेरिस का पुनर्निर्माण हुआ है, शहर की गंदगी साफ हुई है, सुरक्षा, यातायात, पानी आदि की व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है। पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सड़कों के दोनों तरफ छायादार वृक्ष लगाए गए हैं। तथा बाग बनाए गए हैं। सड़कों को सीधा और चौड़ा किया जा रहा है। इससे पेरिस एक नवीन रूप लेकर सामने आ रहा है जो आने वाले समय में सबके आकर्षण का केन्द्र बनेगा । अतः मैं हॉसमानीकरण का समर्थन करता हूँ और चाहता हूँ। कि आप मेरे पत्र को अपने अखबार में छापकर अन्य लोगों को भी इस परिवर्तन के पक्ष में सोच-विचार करने का मौका दें।
भवदीय
क ख ग

प्रश्न 4. सरकारी नियमन और नये कानूनों ने प्रदूषण की समस्या को किस हद तक हल किया? निम्नलिखित के स्तर में | परिवर्तन के लिए बने कानूनों की सफलता और विफलता का एक-एक उदाहरण दीजिए

(क) सार्वजनिक जीवन
(ख) निजी जीवन

उत्तर औद्योगीकरण के कारण लंदन की बढ़ती आबादी ने सफाई और स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएँ पैदा कर दीं। गरीबों के एक कमरे वाले मकानों में जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरा उत्पन्न हो रहा था। इन मकानों में भीड़ रहती थी, हवा निकासी का इंतजाम नहीं था। लंदन को साफ-सुथरा बनाने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए गए। भीड़ भरी बस्तियों की भीड़ कम करने, खुले स्थानों को हरा-भरा बनाने, आबादी कम करने और शहर को योजनानुसार बसाने के लिए कोशिशें शुरू कर दी गई।
(क) सार्वजनिक जीवन में सुधार लाने के लिए उठाए गए कदम

  1. मकानों की भारी किल्लत के असर को काबू करने के लिए प्रथम विश्व युद्ध के दौरान किराया नियंत्रण कानून लागू किया गया।
  2. वास्तुकार और योजनाकार एवेनेजर हावर्ड ने गार्डन सिटी की अवधारणा दी। उन्होंने एक ऐसे शहर का खाका खींचा जहाँ पेड़-पौधों की भरमार हो और जहाँ लोग रहते भी हों, काम भी करते हों।
  3. हावर्ड के विचारों के आधार पर रेमंड अनविन और बैरी पार्कर ने न्यू अर्जविक नाम से एक गार्डन सिटी का डिजाइन तैयार किया। इसमें साझा बाग-बगीचे, खूबसूरत नजारों का इंतजाम किया गया था। हर चीज को बड़ी बारीकी से सजाया गया था।
  4. लंदन के इर्द-गिर्द हरित पट्टी विकसित की गई।

(ख) निजी जीवन में सुधार के कदम –

  1. बर्लिन और न्यूयार्क जैसे शहरों की तर्ज पर अपार्टमेंट्स के विशाल ब्लॉक बनाए गए।
  2. विश्व युद्धों के दौरान मजदूर वर्ग के लिए आवास का इंतजाम करने की जिम्मेदारी ब्रिटिश राज्य ने अपने ऊपर ले ली और स्थानीय शासन के जरिये 10 लाख मकान बनाए गए।

इस प्रकार प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए किंतु उनका फायदा केवल समाज के अमीर वर्ग को ही मिला। गार्डन सिटी में बने मकानों को केवल खाते-पीते कामगार ही खरीद सकते थे। लंदन व पेरिस के अमीर देहात में अवकाश गृह बनवाने का खर्चा उठा सकते थे किंतु यह विकल्प सबके पास नहीं था।

परियोजना कार्य प्रश्न

प्रश्न 3. इस अध्याय में जिन बंबइया फ़िल्मों का उल्लेख किया गया है उनमें से कोई एक फ़िल्म देखिए। अब इस अध्याय में उल्लिखित एक फ़िल्म और बंबई पर आधारित किसी हालिया फ़िल्म में शहर को किस तरह दिखया गया है, इसकी तुलना कीजिए।
उत्तर इस अध्याय में बंबई शहर की वास्तविकता पर आधारित दो फिल्मों सी.आई.डी. और गेस्ट हाउस का उल्लेख किया गया है। यदि हम 1956 में बनीं सी.आई.डी. की तुलना 2007 में बनी ट्रैफिक सिग्नल से करें तो इनमें ये अंतर स्पष्ट नज़र आयेंगे

NCERT Solutions for Class 10 Social Science History Chapter 6 (Hindi Medium) 1

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NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 4 Presentation of Data (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 4 Presentation of Data (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास
(पाठ्यपुस्तक से)

निम्नलिखित 1 से 10 तक के प्रश्नों के सही उत्तर चुनें।

प्र.1. दंड-आरेख

(क) एक विमी आरेख है
(ख) द्विविम आरेख है।
(ग) विम रहित आरेख है
(घ) इनमें से कोई नहीं है।

उत्तर (क) एक विमी आरेख है।

प्र.2, आयत चित्र के माध्यम से प्रस्तुत किये गये आँकड़ों से आलेखी रूप से निम्नलिखित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं:

(क) माध्य
(ख) बहुलक
(ग) मध्यिका
(घ) उपर्युक्त सभी

उत्तर (ख) बहुलक

प्र.3. तोरणों के द्वारा आरेखी रूप में निम्नलिखित में से किसकी स्थिति जानी जा सकती है।

(क) बहुलक
(ख) माध्य
(ग) मध्यिका
(घ) उपर्युक्त कोई भी नहीं

उत्तर (ग) मध्यिका

प्र.4, अंकगणितीय रेखा चित्र के द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों से निम्न को समझने में मदद मिलती है:

(क) दीर्घकालिक प्रवृत्ति
(ख) आँकड़ों में चक्रीयता
(ग) आँकड़ों में कालिकता
(घ) उपर्युक्त सभी

उत्तर (ग) आँकड़ों में कालिकता

प्र.5, दंड आरेख के दंडों की चौड़ाई का एक समान होना जरूरी नहीं है। (सही/गलत)
उत्तर गलत

प्र.6. आयत चित्रों में आयतों की चौड़ाई अवश्य एक समान होनी चाहिए। (सही/गलत)
उत्तर गलत

प्र.7, आयत चित्र की रचना केवल आँकड़ों के सतत वर्गीकरण के लिए की जा सकती है। (सही/गलत)
उत्तर सही

प्र.8. आयत चित्र एवं स्तंभ आरेख आँकड़ों को प्रस्तुत करने की एक जैसी विधियाँ हैं। (सही/गलत)
उत्तर गलत

प्र.9, आयत चित्र की मदद से बारंबारता वितरण के बहुलक को आरेखीय रूप से जाना जा सकता है। (सही/गलत)
उत्तर सही

प्र.10. तोरणों से बारंबारता वितरण की मध्यिका को नहीं जाना जा सकता है। (सही/गलत)
उत्तर गलत

प्र.11. निम्नलिखित को प्रस्तुत करने के लिए किस प्रकार का आरेख अधिक प्रभावी होता है।

(क) वर्ष-विशेष की मासिक वर्षा
(ख) धर्म के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या का संघटन
(ग) एक कारखाने में लागत-घटक

उत्तर

(क) सरल दंड आरेख
(ख) बहुदंड चित्र
(ग) वृत्त आरेख

प्र.12. मान लीजिए आप भारत में शहरी और कामगारों की संख्या में वृद्धि तथा भारत के शहरीकरण पर बल देना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आँकड़ों का सारणीयन कैसे करेंगे?

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उत्तर

NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 4 (Hindi Medium) 3

प्र.13. यदि किसी बारंबारता सारणी में समान वर्ग अंतरालों की तुलना में वर्ग अंतराल असमान हों, तो आयत चित्र बनाने की प्रक्रिया किस प्रकार भिन्न होगी?
उत्तर जब बारंबारता सारणी में वर्ग अंतराल समान होते हैं तो वर्ग अंतराल की बारंबारता को साधारण रूप से अंकित किया जाता है परंतु जब बारंबारता सारणी में वर्ग अंतराल असमान हो तो पहले हमें समायोजित बारंबारता की गणना करनी होती है। यह नीचे दिए गये उदाहरण से स्पष्ट हो जायेगा।

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प्र.14. भारतीय चीनी कारखाना संघ की रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर 2001 के पहले पखवाड़े के दौरान 3,87,000 टन चीनी का उत्पादन हुआ, जबकि ठीक इसी अवधि में पिछले वर्ष 2000 में 3,78,700 टन चीनी का उत्पादन हुआ था। दिसंबर 2001 में घरेलू खपत के लिए चीनी मिलों से 2,83,000 टन चीनी उठाई गई और 41,000 टन चीनी निर्यात के लिए थी, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में घरेलू खपत की मात्रा 1,540,000 टन थी और निर्यात शून्य था।

(क) उपर्युक्त आँकड़ों को सारणीबद्ध रूप में प्रस्तुत करें।
(ख) मान लीजिए, आप इस आँकड़े को आरेख के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं तो आप कौन-सा आरेख चुनेंगे और क्यों?
(ग) इन आँकड़ों को आरेखी रूप में प्रस्तुत करें।

उत्तर
(क)

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(ख) हम इसे आरेख द्वारा प्रस्तुत नहीं कर सकते परंतु चित्र द्वारा कर सकते हैं।

प्र.15. निम्नलिखित सारणी में कारक लागत पर सकल घरेलू उत्पाद में क्षेत्रकवार अनुमानित वास्तविक संवृद्धि दर को (पिछले वर्ष से प्रतिशत परिवर्तन प्रस्तुत) किया गया है।

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उपर्युक्त आँकड़ों को बहु काल-श्रेणी आरेख द्वारा प्रस्तुत करें।
उत्तर

NCERT Solutions for Class 11 Economics Statistics for Economics Chapter 4 (Hindi Medium) 7

Hope given Statistics for Economics Class 11 Solutions Chapter 4 are helpful to complete your homework.

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NCERT Solutions for Class 6 Social Science Geography Chapter 8 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Geography Chapter 8 India: Climate Vegetation and Wildlife (Hindi Medium)

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पाठ्यपुस्तक के आंतरिक प्रश्न

1. अगर किसी वर्ष मानसूनी वर्षा कम हो या नहीं हो तो क्या होगा? सही उत्तर पर चिह्न (✓) लगाओ।

(a) फसल-प्रभावित होगी/नहीं होगी।
(b) कुएँ के पानी का स्तर-ऊपर जाएगा/नीचे चला जाएगा।
(c) गर्मी का मौसम- लंबा होगा/ छोटा होगा (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-59)

उत्तर

(a) फसल-प्रभावित होगी।
(b) कुएँ के पानी का स्तर-नीचे चला जाएगा।
(c) गर्मी का मौसम-लंबा होगा।

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Geography Chapter 8 (Hindi Medium) 1

(a) शिकारी बाघों को क्यों मारते हैं?
(b) हमारे वनों से अगर बाघ खत्म हो जाएँ तो क्या होगा?
(c) क्या आपने कभी बाघ आरक्षित क्षेत्र या ऐसे चिड़ियाघर देखे हैं, जहाँ बाघों को रखा जाता है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-65 )
उत्तर
(d) लोग बाघों को उनसे प्राप्त होने वाले बहुमूल्य खालों, हड्डियों आदि के लिए मारते हैं जिससे भारी मुनाफा कमाया जाता है।
(b) हमारे जंगलों से अगर बाघ खत्म हो जाएँ तो एक खूबसूरत ताकतवर प्रजाति विलुप्त हो जाएगी।
(c) विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न-अभ्यास
(पाठ्यपुस्तक से)

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए।

(i) कौन-सी पवन भारत में वर्षा लाती है? यह इतनी महत्त्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर मानसूनी पवनें भारत में वर्षा लाती हैं। भारत में कृषि वर्षा पर निर्भर हैं। अच्छे मानसून का मतलब है पर्याप्त वर्षा तथा प्रचुर मात्रा में फसलों का उत्पादन।

(ii) भारत के विभिन्न मौसमों के नाम लिखिए।
उत्तर
भारत में चार प्रमुख मौसम होते हैं –

(a) दिसंबर से फरवरी तक ठंडा मौसम (सर्दी)
(b) मार्च से मई तक गर्म मौसम (गर्मी)
(c) जून से सितंबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून का मौसम (वर्षा)
(d) अक्टूबर और नवंबर में मानसून के लौटने का मौसम (शरद)

(iii) प्राकृतिक वनस्पति क्या है?
उत्तर जो घास, झाड़ियाँ तथा पौधे बिना मनुष्य की सहायता के उपजते हैं उन्हें प्राकृतिक वनस्पति कहा जाता है।

(iv) भारत में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों के नाम लिखिए।
उत्तर जलवायु की विभिन्नता के कारण भारत में अलग-अलग पाँच तरह की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं

  • उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन
  • उष्ण कटिबंधीय पतझड़ वन
  • कंटीली झाड़ियाँ
  • पर्वतीय वन
  • मैंग्रोव वन

(v) सदाबहार वने तथा पतझड़ वन में क्या अंतर है?
उत्तर सदाबहार वन तथा पतझड़ वन में अंतर

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Geography Chapter 8 (Hindi Medium) 2

(vi) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों को सदाबहार वन क्यों कहा जाता है?
उत्तर ये वन वर्ष के अलग-अलग समय पर अपनी पत्तियाँ गिराते हैं, जिसके कारण ये हमेशा हरे-भरे दिखाई देते हैं। इसलिए इन वनों को सदाबहार वन कहा जाता है।

2. सही उत्तर चिह्नित (✓) कीजिए।

(i) विश्व में सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र कौन-सा है?

(क) मुंबई
(ख) आसनसोल
(ग) मौसिनराम

(ii) मैंग्रोव वन कहाँ हो सकते हैं?

(क) खारे जल में
(ख) साफ जल में
(ग) प्रदूषित जल में

(iii) महोगनी एवं रोजवुड वृक्ष पाए जाते हैं

(क) मैंग्रोव वन में ।
(ख) उष्ण कटिबंधीय पतझड़ वन में
(ग) उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन में

(iv) जंगली बकरी तथा हिम तेंदुए कहाँ पाए जाते हैं?

(क) हिमालय क्षेत्र में
(ख) प्रायद्वीपीय क्षेत्र में
(ग) गिर वन में

(v) दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय आर्द्र पवनें कहाँ बहती हैं?

(क) स्थल से समुद्र की ओर
(ख) समुद्र से स्थल की ओर
(ग) पठार से मैदान की ओर

उत्तर

  1. (ग) मौसिनराम
  2. (क) खारे जल में
  3. (ग) उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन
  4. (क) हिमालय क्षेत्र में
  5. (ख) समुद्र से स्थल की ओर

3. खाली स्थान भरें।।

  1. गर्मी में दिन के समय शुष्क तथा गर्म पवनें चलती हैं, जिन्हें …………………… कहा जाता है।
  2. आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु में …………………… के मौसम में बहुत अधिक मात्रा में वर्षा होती है।
  3. गुजरात के …………………… वन …………………… का निवास है।
  4. …………………… मैंग्रोव वन की प्रजाति है।
  5. ………………….. को मानसून वन भी कहा जाता है।

उत्तर

  1. लू
  2. लौटते मानसून
  3. गिर, एशियाई शेरो
  4. सुंदरी
  5. उष्ण कटिबंधीय पतझड़ वन

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NCERT Solutions for Class 10 Maths Chapter 13 Surface Areas and Volumes (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 10 Maths Chapter 13 Surface Areas and Volumes (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 10 Maths Chapter 13 Surface Areas and Volumes (Hindi Medium)

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Chapter 13. पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्नावली 13.1

जब तक अन्यथा न कहा जाए,  π = 22/7 लीजिए |

Ex 13.1 Class 10 गणित Q1.दो घनों, जिनमे से प्रत्येक का आयतन 64 cm3 है, के सलंग्न फलकों को मिलाकर एक ठोस बनाया जाता है | इससे प्राप्त घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए |

हल: 

एक घन का आयतन = 64 cm3

एक किनारा = (64)1/3

=  4 cm

NCERT Solutions For Class 10 Maths Surface Areas and Volumes 13.1 1
दो घनों के फलकों को मिलाने पर

l = 4 + 4 = 8 cm

b = 4 cm

h = 4 cm

इसप्रकार इस घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2(lb + bh + lh)

= 2(8×4 + 4×4 + 8×4)

​= 2(32 + 16 + 32)

= 2×80

= 160 cm2

अत: इस घनाभ का प्राप्त पृष्ठीय क्षेत्रफल 160 cm2 है |

Ex 13.1 Class 10 गणित Q2. कोई बर्तन एक खोखले अर्धगोले के आकार का है जिसके ऊपर एक खोखला बेलन अध्यारोपित है | अर्धगोले का व्यास 14 cm है और इस बर्तन (पात्र) की कुल ऊँचाई 13 cm है | इस बर्तन का आंतरिक पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए |

हल :

NCERT Solutions For Class 10 Maths Surface Areas and Volumes PDF 13.1 2

Ex 13.1 Class 10 गणित Q3. एक खिलौना त्रिज्या 3.5 cm वाले एक शंकु के आकार का है, जो उसी त्रिज्या वाले एक अर्ध गोले पर अध्यारोपित है | इस खिलौने की संपूर्ण ऊँचाई 15.5 cm है | इस खिलोने का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए |

NCERT Maths Solutions For Class 10 Surface Areas and Volumes 13.1 3

हल:

अर्धगोलाकार भाग की त्रिज्या r = 3.5 cm

शंक्वाकार भाग की त्रिज्या r = 3.5 cm

शंक्वाकार भाग की ऊँचाई h = 15.5 – 3.5 = 12 cm

Maths NCERT Solutions For Class 10 Surface Areas and Volumes 13.1 4

Ex 13.1 Class 10 गणित Q4. भुजा 7 cm वाले एक घनाकार ब्लाक के ऊपर एक अर्धगोला रखा हुआ है | अर्धगोले का अधिकतम व्यास क्या हो सकता है ? इस प्रकार बने ठोस का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए |

NCERT Solutions For Maths Class 10 Surface Areas and Volumes 13.1 5

हल :

घनाकार ब्लॉक का एक किनारा = 7 cm

अर्धगोले का अधिकतम व्यास d = 7 cm

NCERT Solutions for Class 10 Maths Chapter 13 Surface Areas and Volumes (Hindi Medium) 13.1 6

ठोस का पृष्ठीय क्षेत्रफल = घनाकार ब्लॉक का क्षेत्रफल + अर्धगोले का क्षेत्रफल – अर्धगोले से ढके एक वृत्त का क्षेत्रफल

⇒ ठोस का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6a2 + 2πr2 – πr2

= 6a2 + πr2   [ a = घन का एक किनारा ]

Solutions For NCERT Maths Class 10 Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 7

Ex 13.1 Class 10 गणित Q5 एक घनाकार ब्लाक के एक फलक को अन्दर की ओर से काट कर एक अर्धगोलाकार गड्ढा इस प्रकार बनाया गया है की अर्धगोले का व्यास घन के एक किनारे के बराबर है | शेष बचे ठोस का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए |

हल : 

NCERT Solutions of Maths For Class 10 Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 8
Maths Solutions For Class 10 NCERT Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 9

( चूँकि घन का किनारा अर्धगोले के ब्यास के बराबर है )

शेष बचे ठोस का पृष्ठीय क्षेत्रफल = घनाकार ब्लॉक का क्षेत्रफल + अर्धगोले का क्षेत्रफल – अर्धगोले से ढके एक वृत्त का क्षेत्रफल

= 6a2 + 2πr2 – πr2 [ a = घन का एक किनारा ]

= 6a2 + πr2

NCERT Solutions of Maths For Class 10 Hindi Medium Surface Areas and Volumes

Ex 13.1 Class 10 गणित Q6. दवा का एक कैप्सूल (capsule) एक बेलन के आकार का है जिसके दोनों सिरों पर एक – एक अर्धगोला लगा हुआ है (देखिए आकृति 13.10) | पुरे कैप्सूल की लंबाई 14 mm है और उसका व्यास 5 mm है इसका पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए |  

हल : 

Maths Solutions For Class 10 NCERT Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 11

यहाँ बेलन का ब्यास, अर्धगोले के ब्यास के बराबर है |

अत: अर्धगोले का ब्यास D = 5 mm

Solutions For Maths NCERT Class 10 Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 12

कैप्सूल का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2 (अर्धगोलों का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल) + बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल

= 2 × 2πr2 + 2πrh

= 2πr(2r + h)

NCERT Books Solutions For Class 10 Maths Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 13

Ex 13.1 Class 10 गणित Q7. कोई तंबू एक बेलन के आकार का है जिस पर एक शंकु  आध्यारोपित है | यदि बेलनाकार भाग की ऊँचाई और क्रमशः 2.1 m और 4 m है तथा शंकु की तिर्यक ऊँचाई 2.8 m है तो इस तंबू को बनाने में प्रयुक्त कैनवस (canvas) का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए | साथ ही, 500 रू प्रति m2 की दर से इसमें प्रयुक्त कैनवस की लागत ज्ञात कीजिए | (ध्यान दीजिए कि तंबू के आधार को कैनवस से नहीं ढका जाता है |)

NCERT Solutions For Class 10 Maths Surface Areas and Volumes PDF 13.1 14

हल :

तम्बू के बेलनाकार भाग का ब्यास = 4 cm

अत: त्रिज्या r = 2 cm

बेलनाकार भाग की ऊँचाई h = 2.1 cm

शंकु की तिर्यक ऊँचाई l = 2.8 cm

ब्यास = 4 cm

और त्रिज्या r = 2 cm

इस तंबू को बनाने में प्रयुक्त कैनवस (canvas) का क्षेत्रफल

= बेलनाकार भाग का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल + शंक्वाकार भाग का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल

= 2πrh + πrl

NCERT Solutions For Class 10 Maths Surface Areas and Volumes PDF 13.1 15

Ex 13.1 Class 10 गणित Q8. ऊँचाई 2.4 cm और व्यास 1.4 cm वाले एक ठोस बेलन में से ऊँचाई और इसी व्यास वाला एक शंक्वाकार खोल (cavity) काट लिया जाता है |शेष बचे ठोस का निकटतम वर्ग सेंटीमीटर तक पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए |

हल :

NCERT Maths Solutions For Class 10 Surface Areas and Volumes 13.1 16

बेलन की ऊँचाई h = 2.4 cm

बेलन का ब्यास = 1.4 cm

अत: बेलन की त्रिज्या r = 0.7 cm

काटे गए शंकु की ऊँचाई h = 2.4 cm

और त्रिज्या r = 0.7 cm

CBSE NCERT Solutions For Class 10 Maths Hindi Medium Areas Related to Circles 13.1 17

शेष बचे ठोस का पृष्ठीय क्षेत्रफल = बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल + शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल + बेलन के पेंदी का क्षेत्रफल

= 2πrh + πrl + πr2

= πr(2h + l + r)

NCERT Solutions For Class 10 Maths Surface Areas and Volumes PDF 13.1 18

Ex 13.1 Class 10 गणित Q9. लकड़ी के ठोस बेलन के प्रत्येक सिरे पर एक अर्धगोला खोदकर निकालते हुए, एक वस्तु बनाई गई है, जैसाकि आकृति 13.11 में दर्शाया गया है | यदि बेलन की ऊँचाई 10 cm है और आधार की त्रिज्या 3.5 cm है तो इस वस्तु का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए |

NCERT Solutions For Class 10 Maths Surface Areas and Volumes PDF 13.1 19

हल : 

बेलन की ऊँचाई = 10 cm

आधार की त्रिज्या = 3.5 cm

अर्धगोले की त्रिज्या = 3.5 cm

वस्तु का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल

= बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल + उपरी अर्धगोले का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल + निचली अर्धगोले का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल

= 2πrh + 2πr2 + 2πr2

= 2πr(h + r + r )

= 2πr(h + 2r )

NCERT Solutions For Class 10 Maths PDF Free Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 20
अत: वस्तु का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल 374 cm2 है |

प्रश्नावली 13.2

(जब तक अन्यथा न कहा जाए, π = 22/7 लीजिए |)

Ex 13.2 Class 10 गणित Q1. एक ठोस एक अर्धगोले पर खड़े एक शंकु के आकार का है जिनकी त्रिज्याएँ 1 cm हैं तथा शंकु की ऊँचाई उसकी त्रिज्या के बराबर है | इस ठोस का आयतन π के पदों में ज्ञात कीजिए |

हल :

NCERT Books For Class 10 Maths Solutions Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 21

Ex 13.2 Class 10 गणित Q2. एक इंजीनियरिंग के विधार्थी रचेल से एक पतली एल्युमिनियम की शीट का प्रयोग करते हुए एक मॉडल बनाने को कहा गया जो एक ऐसे बेलन के आकार का हो जिसके दोनों सिरों पर दो शंकु जुड़े हुए हों | इसा मॉडल का व्यास 3 cm है और इसकी लंबाई 12 cm है | यदि प्रत्येक शंकु की ऊँचाई 2 cm हो तो रचेल द्वारा बनाए गए मॉडल में अंतर्विष्ट हवा का आयतन ज्ञात कीजिए|

(यह मान लीजिए कि मॉडल की आंतरिक और बाहरी विमाएँ लगभग बराबर है |)

NCERT Maths Textbook Solutions For Class 10 Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 22

Ex 13.2 Class 10 गणित Q3. एक गुलाबजामुन में उसके आयतन की लगभग 30% चीनी की चाशनी होती है | 45 गुलाबजामुन एक बेलन के आकार का है, जिसके दोनों सिरे अर्धगोलाकार हैं तथा इसकी लंबाई 5  cm और व्यास 2.8 cm है ( देखिए आकृति 13.15) |

NCERT Books For Class 10 Maths Solutions Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 23

सभी 45 गुलाब जामुनों का आयतन = 45(अर्धगोले का आयतन + बेलन का आयतन + अर्धगोले का आयतन)

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Ex 13.2 Class 10 गणित Q4. एक कमलदान घनाभ के आकार की एक लकड़ी से बना हा जिसमें कलम रखने के लिए चार शंक्वाकार गड्ढे बने हुए हैं | घनाभ की विमाएँ 15 cm x 10 cm x 3.5 cm हैं | प्रत्येक गड्ढे की त्रिज्या 0.5 cm है और गहराई 1.4 cm है | पुरे कमलदान में लकड़ी का आयतन ज्ञात कीजिए (देखिए आकृति 13.16) |

हल :

CBSE NCERT Maths Solutions For Class 10 Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 26

धनाभ की लंबाई l = 15 cm

घनाभ की चौड़ाई b = 10 cm

घनाभ की ऊँचाई h = 3.5 cm

शंक्वाकार भाग की त्रिज्या (r) = 0.5 cm

ऊँचाई (h) = 1.4 cm

पूरे कमलदान की लकड़ी का आयतन = घनाभ का आयतन – चरों शंक्वाकार गढ्ढे का आयतन

NCERT Solutions of Maths For Class 10 Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 27

Ex 13.2 Class 10 गणित Q5. एक बर्तन एक उल्टे शंकु के आकार का है | इसकी ऊँचाई 8 cm है और इसके ऊपरी सिरे (जो खुला हुआ है ) की त्रिज्या 5 cm त्रिज्या है | यह ऊपर तक पानी से भरा हुआ है | जब इस बर्तन में सीसे की कुछ गोलियाँ जिनमे प्रत्येक 0.5 cm त्रिज्या वाला एक गोला है, डाली जाती हैं, तो इसमें से भरे हुए पानी का एक चौथाई भाग बाहर निकल जाता है | बर्तन में डाली गई सीसे की गोलियों की संख्या ज्ञात कीजिए |

हल :

Maths Solutions For Class 10 NCERT Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 28

शंकु की ऊँचाई (h) = 8 cm

शंकु की त्रिज्या (R) = 5 cm

गोली की त्रिज्या (r) = 0.5 cm

माना बर्तन में डाली गई गोलियों की संख्या = n

Maths NCERT Solutions For Class 10 Surface Areas and Volumes 13.1 29

अत: गोलियों की संख्या 100 है |

Ex 13.2 Class 10 गणित Q6. ऊँचाई 220 cm और आधार व्यास 24 cm वाले एक बेलन, जिस पर ऊँचाई 60 cm और त्रिज्या 8 cm वाला एक अन्य बेलन आरोपित है, से लोहे का स्तंभ बना है | इस स्तंभ का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए, जबकि दिया है 1 cmलोहे का द्रव्यमान लगभग 8 g होता है | (π = 3.14 लीजिए |)

हल :

NCERT Solutions For Maths Class 10 Surface Areas and Volumes 13.1 30

मोटे बेलन की ऊँचाई (H) = 220 cm

व्यास (d) = 24 cm

अत: त्रिज्या (R) = 12 cm

पतले बेलन की ऊँचाई (h) = 60 cm

त्रिज्या (r) = 8 cm

Solutions For NCERT Maths Class 10 Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 31

Ex 13.2 Class 10 गणित Q7. एक ठोस में, ऊँचाई 120 cm और त्रिज्या 60 cm वाला एक शंकु सम्मिलित है, जो 60 cm त्रिज्या वाले एक अर्धगोले पर आरोपित है | इस ठोस को पानी से भरे हुए एक लंब वृत्तीय बेलन में इस प्रकार सीधा डाल दिया जाता है कि यह बेलन की तली को स्पर्श करे | यदि बेलन की त्रिज्या 60 cm है और ऊँचाई 180 cm है तो बेलन में शेष बचे पानी का आयतन ज्ञात कीजिए |

हल : 

NCERT Solutions For Maths Class 10 Surface Areas and Volumes 13.1 32

ठोस के शंकु की ऊँचाई (h) = 120 cm

ठोस के शंकु की त्रिज्या (r) = 60 cm

ठोस के अर्धगोले की त्रिज्या (r) = 60 cm

बड़े बेलन की ऊँचाई (H) = 180 cm

बड़े बेलन की की त्रिज्या (r) = 60 cm

शेष बचे पानी का आयतन = बड़े बेलन का आयतन – ठोस का आयतन

Maths NCERT Solutions For Class 10 Surface Areas and Volumes 13.1 33

Ex 13.2 Class 10 गणित Q8. एक गोलाकार काँच के बर्तन की एक बेलन के आकार की गर्दन है जिसकी लंबाई 8 cm है और व्यास 2 cm है जबकि गोलाकार भाग का व्यास 8.5 cm है | इसमें भरे जा सकने वाली पानी की मात्रा माप कर, एक बच्चे ने यह ज्ञात किया कि इस बर्तन का आयतन 345 cm3 है | जाँच कीजिए कि बच्चे का उत्तर सही है या नहीं, यह मानते हुए की उपरोक्त मापन आंतरिक मापन है और π = 3.14 |  

हल :

NCERT Maths Solutions For Class 10 Surface Areas and Volumes 13.1 34
NCERT Solutions For Class 10 Maths Surface Areas and Volumes PDF 13.1 35

इसमें भरे जा सकने वाले पानी का आयतन = गोले का आयतन + बेलन का आयतन

NCERT Maths Solutions For Class 10 Surface Areas and Volumes 13.1 36

प्रश्नावली 13.3

(जब तक अन्यथा न कहा जाए,π = 22/7 लीजिए |)

Ex 13.3 Class 10 गणित Q1. त्रिज्या 4.2 cm वाले धातु के एक गोले को पिघलाकर त्रिज्या 6 cm वाले एक बेलन के रूप में ढाला जाता है | बेलन की ऊँचाई ज्ञात कीजिए |

हल : 

NCERT Solutions For Class 10 Maths Surface Areas and Volumes PDF 13.1 37

धातु के गोले की त्रिज्या (r) = 4.2 cm

बेलन की त्रिज्या (R) = 6 cm और

माना बेलन की ऊँचाई h cm है |

बेलन का आयतन = गोले का आयतन

NCERT Solutions For Class 10 Maths Surface Areas and Volumes 13.1 38

Ex 13.3 Class 10 गणित Q2. क्रमशः 6 cm, 8 cm और 10 cm त्रिज्याओं वाले धातु के ठोस गोलों को पिघलाकर एक बड़ा ठोस गोला बनाया जाता है | इस गोले की त्रिज्या ज्ञात कीजिए |

NCERT Solutions For Class 10 Maths Surface Areas and Volumes PDF 13.1 39

Ex 13.3 Class 10 गणित Q3. व्यास 7 m वाला 20 m गहरा एक कुआँ खोदा जाता है और खोदने से निकली हुई मिट्टी को समान रूप से फैलाकर 22 m x 14 m वाला एक चबूतरा बनाया गया है | इस चबूतरे की ऊँचाई ज्ञात कीजिए |

NCERT Maths Solutions For Class 10 Surface Areas and Volumes 40

Maths NCERT Solutions For Class 10 Surface Areas and Volumes 13.1 41

Ex 13.3 Class 10 गणित Q4. व्यास 3 m वाला 14 m गहरा की गहराई तक खोदा जाता है | इससे निकली हुई मिट्टी को कुँए के चारों ओर 4 m चौड़ी एक वृत्ताकार वलय (ring) बनाते हुए, समान रूप से फैलाकर एक प्रकार का बाँध बनाया जाता है | इस बाँध की ऊँचाई ज्ञात कीजिए |

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Solutions For NCERT Maths Class 10 Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 43

Ex 13.3 Class 10 गणित Q5. व्यास 12 cm और ऊँचाई 15 cm वाले एक लंब वृत्तीय बेलन के आकार का बर्तन आइसक्रीम से पूरा भरा हुआ है | इस आइसक्रीम को ऊँचाई 12 cm और व्यास 6 cm वाले शकुओं में भरा जाना है, जिनका ऊपरी सिरा अर्धगोलाकार होगा | उन शंकुओं की संख्या ज्ञात कीजिए जो इस आइसक्रीम से भरे जा सकते हैं |

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Maths Solutions For Class 10 NCERT Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 45
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Ex 13.3 Class 10 गणित Q6. विमाओं 5.5 cm x 10 cm x 3.5 cm वाला एक घनाभ बनाने के लिए, 1.75 cm व्यास और 2 mm मोटाई वाले कितने चाँदी के सिक्कों को पिघलाना पड़ेगा ?

NCERT Books Solutions For Class 10 Maths Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 47

Ex 13.3 Class 10 गणित Q7. 32 cm ऊँची और आधार त्रिज्या 18 cm वाली एक बेलनाकार बाल्टी रेत से भरी हुई है | इस बाल्टी को भूमि पर खाली किया जाता है और इस रेते की एक शंक्वाकार ढेरी बनाई जाती है | यदि शंक्वाकार ढेरी की ऊँचाई 24 cm है, तो इस ढेरी की त्रिज्या और तिर्यक ऊँचाई ज्ञात कीजिए |

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अत: ढेरी की त्रिज्या = 36 cm  और  तिर्यक ऊँचाई = 12√13 cm है |

Ex 13.3 Class 10 गणित Q8. 6 m चौड़ी और 1.5 m गहरी एक नहर में पानी 10 km /h की चाल से बह रहा है | 30 मिनट में, यह नहर कितने क्षेत्रफल की सिंचाई कर पाएगी, जबकि सिंचाई के ल;इए 8 cm गहरे पानी की आवश्यकता होती है |

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Ex 13.3 Class 10 गणित Q9. एक किसान अपने खेत में बनी 10 m व्यास वाली और 2 m गहरी एक बेलनाकार टंकी को आंतरिक व्यास 20 cm वाले एक पाइप द्वारा एक नहर से जोड़ता है | यदि पाइप में पानी 3 km/h की चाल से बह रहा है, तो कितने समय बाद टंकी पूरी भर जाएगी ?  

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प्रश्नावली 13.4

(जब तक अन्यथा न कहा जाए,π = 22/7 लीजिए |)

Ex 13.4 Class 10 गणित Q1. पानी पीने वाला एक गिलास 14 cm ऊँचाई वाले एक शंकु के छिन्नक के आकार का है | दोनों वृत्ताकार सिरों के व्यास 4 cm और 2 cm हैं | इस गिलास की धारिता ज्ञात कीजिए |

NCERT Maths Textbook For Class 10 Solutions Hindi Medium Surface Areas and Volumes 13.1 51

Ex 13.4 Class 10 गणित Q2. एक शंकु के छिन्नक की तिर्यक ऊँचाई 4 cm है तथा इसके वृत्तीय सिरों के परिमाप (परिधियाँ) 18 cm और 6 cm हैं | इस छिन्नक का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए |

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Ex 13.4 Class 10 गणित Q3. एक तुर्की टोपी शंकु के एक छिन्नक के आकर की है (देखिये आकृति 13.24) | यदि इसके खुले सिरे की त्रिज्या 10 cm है, ऊपरी सिरे की त्रिज्या 4 cm है टोपी की तिर्यक ऊँचाई 15 cm है तो इसके बनाने में प्रयुक्त पदार्थ का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए |

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Ex 13.4 Class 10 गणित Q4. धातु की चादर से बना और ऊपर से खुला एक बर्तन शंकु के छिन्नक के आकार का है, जिसकी ऊँचाई 16 cm है तथा निचले और ऊपरी सिरों की त्रिज्याएँ क्रमशः 8 cm और 20 cm हैं | 20 रू प्रति लीटर की दर से, इस बर्तन को पूरा भर सकने वाले दूध का मूल्य ज्ञात कीजिए | साथ ही, इस बर्तन को बनाने के लिए प्रयुक्त धातु की चादर का मूल्य 8 रू प्रति 100 cmकी दर से ज्ञात कीजिए | ( π = 3.14 लीजिए |) 

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Ex 13.4 Class 10 गणित Q5. 20 cm ऊँचाई और शीर्ष कोण (vertical angle ) 60 एक शंकु को उसकी ऊँचाई के बीचोंबीच से होकर जाते हुए एक ताल से दो भागों में काटा गया है, जबकि ताल शंकु के आधार के समांतर है | यदि इस प्राप्त शंकु के छिन्नक को व्यास 1/16 cm वाले एक तार के रूप में बदल दिया जाता है तो की लंबाई ज्ञात कीजिए | 

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प्रश्नावली 13.5

Ex 13.5 Class 10 गणित Q1. व्यास 3 mm वाले ताँबे के तार को 12 cm लंबे और 10 cm व्यास वाले एक बेलन पर इस प्रकार लपेटा जाता है वह बेलन के वक्र पृष्ठ को पूर्णतया ढक लेता है | तार की लंबाई और द्रव्यमान ज्ञात कीजिए, यह मानते हुए कि ताँबे का घनत्व 8.88 g प्रति cmहै |

Ex 13.5 Class 10 गणित Q2. एक समकोण त्रिभुज, जिसकी भुजाएँ 3 cm और 4 cm हैं (कर्ण के अतिरिक्त ), को उसके कर्ण के परितः घुमाया जाता है | इस प्रकार प्राप्त द्वी -शंकु (double cone) के आयतन और पृष्ठीय  क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए |

Ex 13.5 Class 10 गणित Q3. एक टंकी, जिसके आंतरिक मापन 150 cm x 120 cm x 110 cm हैं, में 129600 cmपानी में कुछ छिद्र वाली ईंटे तब तक डाली जाती हैं, जब तक कि ताकि पूरी ऊपर तक भर न जाए | प्रत्येक ईंट अपने आयतन का   1/17 पानी सोख लेती है | यदि प्रत्येक ईंट की माप 22.5 cm x 7.5 cm x 6.5 cm हैं, तो टंकी में कुल कितनी ईंटे डाली जा सकती हैं, ताकि उसमें से पानी बाहर न बहे ?

Ex 13.5 Class 10 गणित Q4. किसी महीने के 15 दिनों में, एक नदी की घाटी में 10 cm वर्षा हुई | यदि इस घाटी का क्षेत्रफल 97280 kmहै, तो दर्शाइए कि कुल वर्षा लगभग तीन नदियों के सामान्य पानी के योग के समतुल्य थी, जबकि प्रत्येक नदी 1072 km लंबी, 75 m चौड़ी और 3 m गहरी है |

Ex 13.5 Class 10 गणित Q5. टीन की बनी हुई एक तेल की कुप्पी 10 cm लंबे एक बेलन में एक शंकु के छिन्नक को जोड़ने से बनी है | यदि इसकी कुल ऊँचाई 22 cm है, बेलनाकार भाग का व्यास 8 cm है और कुप्पी के ऊपरी सिरे का व्यास 18 cm है, तो इसके बनाने में लगी टीन की चादर का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए (देखिए आकृति 13.25) |

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Ex 13.5 Class 10 गणित Q6. शंकु के एक छिन्नक के लिए, पूर्व स्पष्ट किए संकेतों का प्रयोग करते हुए, वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल और संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल के उन सूत्रों को सिद्ध कीजिए, जो अनुच्छेद 13.5 में दिए गए हैं |

Ex 13.5 Class 10 गणित Q7. शंकु के एक छिन्नक के लिए, पूर्व स्पष्ट किए संकेतों का प्रयोग करते  हुए, आयतन का वह सूत्र कीजिए, जो अनुच्छेद 13.5 में दिया गया है |

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NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 9 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 9 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 9 Urban Livelihoods (Hindi Medium)

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पाठ्यपुस्तक के आंतरिक प्रश्न

 

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 9 (Hindi Medium) 1

1. इस चित्र में आप क्या देख रहे हैं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-88)
उत्तर चित्र में शहर की एक व्यस्त सड़क दिखाई दे रही है। सड़क पर काफी भीड़-भाड़ है। गाड़ियाँ, स्कूटर, बसें, साइकिल तथा पैदल लोग हैं। अलग-अलग तरह की दुकानें, रेहड़ी पर समान बेचने वाले, फुटपाथ पर काम करने, अखबार बेचने वाले तथा विभिन्न काम करने वाले लोग दिखाई दे रहे हैं।

2. आप पहले ही ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के कार्यों के बारे में पढ़ चुके हैं। अब पिछले पाठ में दिए गए ग्रामीण क्षेत्र के कार्यों के चित्र से इस चित्र की तुलना कीजिए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-88)
उत्तर पिछले अध्याय में ग्रामीण क्षेत्र में लोग खेती-बाड़ी का काम करते दिखाए गए हैं। कुछ मछली पकड़ने का काम कर रहे हैं, छोटी-छोटी दुकानें हैं। पिछले अध्याय के चित्र में न तो गाड़ियाँ थीं और न ही भीड़-भाड़ थी। इस चित्र में सड़क पर वाहनों की भीड़भाड़ है तथा फुटपाथ पर विभिन्न प्रकार की सेवा देने वाले तथा समान बेचने वाले लोगों की भीड़ है।

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 9 (Hindi Medium) 2

3. शहर का एक भाग दूसरे भाग से अलग होता है। आपने ऊपर वाले चित्र में क्या भिन्नताएँ देखीं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-88)
उत्तर शहर के कुछ भागों में ऊँची-ऊँची इमारतें होती हैं तथा वाहनों की काफी भीड़-भाड़ होती है, जबकि कुछ भागों में छोटे-छोटे घर होते हैं तथा काफी भीड़-भाड़ होती है और फुटपाथ पर काम करने वालों तथा अन्य सेवाएँ उपलब्ध कराने वालों की भीड़ होती है।

4. बच्चू माँझी शहर क्यों आया था? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-91)
उत्तर बच्चू माँझी शहर में काम की तलाश में आया है। गाँव में वह मिस्त्री का काम करता था, परंतु उसे नियमित रूप से काम नहीं मिलता था जो कमाई होती थी वह परिवार के लिए पूरी नहीं पड़ती थी।

5. बच्चू अपने परिवार के साथ क्यों नहीं रह सकता? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-91)
उत्तर बच्चू माँझी गाँव से शहर में आया था और उसका परिवार गाँव में ही रहता था, इसलिए वह अपने परिवार के साथ नहीं रह सकता था।

6. किसी सब्ज़ी बेचने वाली या ठेले वाले से बात करिए और पता लगाइए कि वे अपना काम कैसे करते हैं-तैयारी, खरीदना, बेचना इत्यादि। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-91)
उत्तर सब्ज़ी बेचने वाले सुबह-सुबह थोक की मंडी से सब्जी खरीदकर लाते हैं। वे ज्यादा-से-ज्यादा प्रकार की सब्ज़ियाँ प्राप्त करने की कोशिश करते हैं ताकि सभी प्रकार के ग्राहकों की आवश्यकता को पूरा कर सके। – वे गली-गली आवाज लगाकर सब्ज़ियाँ बेचते हैं और शाम तक अपनी सारी सब्ज़ियाँ बेचने का प्रयास करते हैं।

7. बच्चू को एक दिन की छुट्टी लेने से पहले भी सोचना पड़ता है। क्यों? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-91)
उत्तर बच्चू माँझी रिक्शा चलाकर एक दिन में 80 से 100 रुपये कमा लेता है जिस दिन वह छुट्टी करता है तो उस दिन कमाई नहीं हो पाती है जिससे उसे 80 से 100 रुपये का नुकसान हो जाता है। यदि वह छुट्टी करेगा। तो पैसा बचाकर अपने गाँव परिवार के लिए पैसा भी नहीं भेज पाएगा।

8. वंदना और हरप्रीत ने एक बड़ी दुकान क्यों शुरू की? उनको यह दुकान चलाने के लिए क्या-क्या करना पड़ता है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-93)
उत्तर वंदना और हरप्रीत ने एक बड़ी दुकान शुरू की है। इस दुकान पर उन्होंने काम भी बदला है और रेडीमेड कपड़ों की दुकान शुरू की है, क्योंकि आजकल लोग कपड़े सिलवाने की अपेक्षा सिले-सिलाए कपड़े खरीदना पसंद करते हैं। वंदना एक ड्रेस डिजायनर भी है। इस शोरूम को चलाने के लिए उन्हें अलग जगहों पर समान खरीदना पड़ता है। कुछ कपड़े विदेशों से भी मँगवाने पड़ते हैं। शोरूम को सही रूप से चलाने के लिए उन्हें विभिन्न अखबारों में, सिनेमा हॉल में, टेलीविजन और रेडियो चैनल पर विज्ञापन देने पड़ते हैं ताकि लोगों को इसके बारे में पता चले। वे रेडिमेड कपड़ों को आकर्षक रूप से सजाकर रखते हैं।

9. एक बड़ी दुकान के मालिक से बात कीजिए और पता लगाइए कि वे अपने काम की योजना कैसे बनाते हैं? क्या पिछले बीस सालों में उनके काम में कोई बदलाव आया है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-93)
उत्तर एक बड़ी दुकान के मालिक अपने सामान को अलग-अलग स्थानों से खरीदते हैं ताकि सामान में विभिन्नता आ सके। इसके लिए वह योजना बनाते हैं किन-किन स्थानों से सामान खरीदना है ताकि ग्राहकों को विविधता उपलब्ध कराई जा सके। वे अपने सामान के विषय में विभिन्न माध्यमों से विज्ञापन भी देते हैं ताकि अधिक-से-अधिक लोगों को अपनी दुकान के बारे में जानकारी दे सकें। पिछले बीस वर्षों में उनके काम में काफी बदलाव आया है ग्राहकों की संख्या बढ़ी है तथा ग्राहकों की पसंद में बदलाव आया है दुकानों की संख्या बढ़ी है, दुकानों के बीच प्रतियोगिता बढ़ी है।

10. जो बाज़ार में समान बेचते हैं और जो सड़कों पर सामान बेचते हैं, उनमें क्या अंतर है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-93)
उत्तर
बाजार में सामान बेचने वाले –

  1. बाजार में सामान बेचने के लिए छोटी तथा बड़ी दुकानें होती हैं।
  2. बाज़ार में दुकानें पक्की होती है जिनके पास व्यापार करने का लाइसेंस होता है।
  3. बाज़ार में दुकानों पर अलग-अलग चीजें बेची जाती हैं।
  4. ज्यादातर व्यापारी अपनी दुकान खुद सँभालते हैं और कभी-कभी वे कई लोगों को सहायक या मैनेजर के रूप में भी रख लेते हैं।

सड़क पर सामान बेचने वाले –

  1. सड़क पर सामान बेचने वालों की दुकान खंभों पर तिरपाल या प्लास्टिक चढ़ाकर बनाई जाती है। यह अस्थायी दुकान होती है।
  2. ये अपने ठेले या सड़क की पटरी पर प्लास्टिक बिछाकर भी काम चलाते हैं।
  3. सड़कों पर बनी इन अस्थायी दुकानों को पुलिस कभी भी हटाने के लिए कह सकती है।
  4. सड़क पर सामान बेचने वाले स्वयं अपने परिवार के साथ मिलकर सामान बनाते हैं या स्थानीय रूप से ही यह सामान बनाया जाता है।

11. आपको क्या लगता है कि फैक्ट्रियाँ या छोटे कारखाने मजदूरों को अनियमित रूप से काम पर क्यों रखते हैं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-96)
उत्तर फैक्ट्रियाँ या छोटे कारखाने मजदूरों को अनियमित काम पर इसलिए रखते हैं ताकि उन्हें अधिक-से अधिक लाभ हो सके। जब मालिक को बहुत सारा काम मिलता है या फिर किसी विशेष मौसम में काम मिलता है तो उन्हें कारीगरों या मज़दूरों की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में वे उन्हें काम पर रख लेते हैं और जब काम की कमी होती है तो उन्हें हटा दिया जाता है।

12. निर्मला जैसे मजदूरों की काम करने की परिस्थितियों का निम्न के आधार पर विवरण दीजिए, काम के घंटे, कमाई, काम करने की जगह व सुविधाएँ, साल भर में रोजगार के दिनों की संख्या। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-96)
उत्तर निर्मला जैसे मजदूरों की काम करने की परिस्थितियाँ –

  1. काम के घंटे – मजदूरों को सुबह 9 बजे से रात के 10 बजे तक काम करना पड़ता है। उनके कामके घंटे अधिक होते हैं। उन्हें सप्ताह में छः दिन काम करना पड़ता है और यदि काम अधिक है तो रविवार को भी काम करना पड़ता है।
  2. कमाई – रोजना आठ घंटे काम करने के 80 रुपये मिलते हैं और अतिरिक्त 40 रुपये देर तक काम करने का मिलता है।
  3. काम करने की जगह व सुविधाएँ – लोग छोटे से कमरे में मशीनों पर काम करते हैं। उन्हें किसी भी प्रकार की सुविधाएँ नहीं प्राप्त होती हैं। अगर कारीगर परिस्थितियों के बारे में शिकायत करते हैं तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है। अगर कोई बुरा व्यवहार करे तो उनके बचाव के लिए कुछ नहीं होता है।

सालभर में रोजगार के दिनों की संख्या – अधिकतर कारीगर या मज़दूर अनियमित रूप से काम करते हैं। सालभर में करीब 8 महीने उनके पास काम होता है बाकी के करीब 4 महीने उनके पास काम नहीं रहता है।

13. क्या आप यह मानेंगे कि दूसरों के घरों में काम करने वाली महिलाएँ भी अनियमित मज़दूरों की श्रेणी में आती हैं, क्यों? एक ऐसी कामगार महिला के दिनभर के काम का विवरण दीजिए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-96)
उत्तर दूसरों के घरों में काम करने वाली महिलाएँ भी अनियमित मजदूरों की श्रेणी में आती हैं, क्योंकि उन्हें कभी भी हटाया जा सकता है, या बदला जा सकता है। कामगार महिलाएँ लोगों के घरों में काम करने आती हैं। और वे सारा काम सँभालती है; जैसे-घर की सफाई, कपड़े धोना, खाना बनाना, बर्तन धोना आदि। दोपहर में अधिक काम न होने के कारण वे आराम कर सकती हैं। सारा काम लगभग रात 10 बजे खत्म होता है।

प्रश्न-अभ्यास
(पाठ्यपुस्तक से)

1. नीचे लेबर चौक पर आने वाले मजदूरों की जिंदगी का विवरण दिया गया है। इसे पढ़िए और आपस में चर्चा कीजिए कि लेबर चौक पर आने वाले मजदूरों के जीवन की क्या स्थिति है?
लेबर चौक पर जो मज़दूर रहते हैं उनमें से ज्यादातर अपने रहने की स्थायी व्यवस्था नहीं कर पाते और इसलिए वे चौक के पास फुटपाथ पर सोते हैं या फिर पास के रात्रि विश्राम गृह (रैन बसेरा) में रहते हैं। इसे नगरनिगम चलाता है और इसमें छः रुपया एक बिस्तर का प्रतिदिन किराया देना पड़ता है। सामान की सुरक्षा का कोई इंतज़ाम न रहने के कारण वे वहाँ के चाय या पान-बीड़ी वालो की दुकानों को बैंक के रूप में इस्तेमाल करते हैं। उनके पास वे पैसा जमा करते हैं और उनसे उधार भी लेते हैं। वे अपने औज़ारों को रात में उनके पास हिफाजत के लिए छोड़ देते हैं। दुकानदार मजदूरों के सामान की सुरक्षा के साथ ज़रूरत पड़ने पर उन्हें कर्ज भी देते हैं। स्रोत : हिंदू ऑन लाइन, अमन सेठी
उत्तर लेबर चौक पर आने वाले मजदूरों के पास स्थायी काम नहीं होता है। वे दिहाड़ी मज़दूर होते हैं और विभिन्न तरह का काम करते हैं; जैसे-मकान बनाने का काम करने वाले राजमिस्त्री, घरों में रंग पेंट करने वाले मिस्त्री, फनीचर का काम करने वाले मिस्त्री, पलम्बर का काम करने वाले, वजन उठाने या खुदाई का काम करने वाले मजदूर इत्यादि। स्थायी काम न होने के कारण गरीबी में जीवन व्यतीत करते हैं। इनके रहने और खाने की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होती है और जिसे काम नहीं मिलता है उसे पूरा दिन लेबर चौक पर ही बैठे रहना पड़ता है और शाम को खाने के लिए उधार लेना पड़ता है और जब कई दिनों तक लगातार काम नहीं मिलता है तो कभी-कभी भूखे पेट भी सोना पड़ता है। इनके साथ कार्य स्थलों पर अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता है। निश्चित समय से अधिक समय तक काम करवाया जाता है और सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम मज़दूरी दी जाती है। इस प्रकार इनका जीवन काफी कठिन होता है।

2. निम्नलिखित तालिका को पूरा कीजिए और उनका काम किस तरह से अलग है इसका वर्णन कीजिए।

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 9 (Hindi Medium) 3

उत्तर

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 9 (Hindi Medium) 4

3. एक स्थायी और नियमित नौकरी अनियमित काम से किस तरह से अलग है?
उत्तर एक स्थायी और नियमित नौकरी करने वाले की एक निश्चित मासिक आय होती है। स्थायी कर्मचारी होने के कारण विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ भी मिलती हैं; जैसे- भविष्य निधि, छुट्टियाँ, परिवार के लिए चिकित्सा सुविधाएँ, मकान या मकान का किराया इत्यादि। काम करने का निश्चित समय और घंटे निश्चित होते हैं, जबकि अनियमित कर्मचारी की मासिक आय निश्चित नहीं होती है। वह जितने दिन काम करता है उतने दिनों का पैसा मिलता है कोई निश्चित छुट्टी नहीं होती है। किसी भी प्रकार की सुविधाएँ नहीं मिलती हैं। काम समय और घंटे निश्चित नहीं होते हैं। काम की भी सुरक्षा नहीं होती है।

4. सुधा को अपने वेतन के अलावा और कौन-से लाभ मिलते हैं?
उत्तर सुधा को वेतन के अलावा निम्नलिखित लाभ मिलते हैं

  1. रविवार और राष्ट्रीय अवकाश छुट्टियाँ।
  2. वार्षिक छुट्टियाँ।
  3. परिवार के लिए चिकित्सा सुविधाएँ और बीमार होने पर चिकित्सा अवकाश।
  4. भविष्य निधि की सुविधा।

5. नीचे दी गई तालिका में अपने परिचित बाज़ार की दुकानों या दफ्तरों के नाम भरें कि वे किस प्रकार की चीजें या सेवाएँ मुहैया कराते हैं?

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 9 (Hindi Medium) 5

उत्तर

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NCERT Solutions for Class 11 Sociology Introducing Sociology Chapter 2 Terms, Concepts and their Use in Sociology (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Sociology Introducing Sociology Chapter 2 Terms, Concepts and their Use in Sociology (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Sociology Introducing Sociology Chapter 2 Terms, Concepts and their Use in Sociology (Hindi Medium)

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पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न [NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED]

प्र० 1. समाजशास्त्र में हमें विशिष्ट शब्दावली और संकल्पनाओं के प्रयोग की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर- सामान्य ज्ञान के विपरीत किसी अन्य विज्ञान के सदृश समाजशास्त्र की अपनी संकल्पनाएँ (Concepts), सिद्धांत तथा तथ्य-संग्रह की पद्धतियाँ हैं। किसी सामाजिक विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र जिन सामाजिक वास्तविकताओं एवं क्रिया-विधियों/ प्रविधियों, जिनका अध्ययन करता है, का किसी विशेष अर्थ की आवश्यकता नहीं पड़ती है। प्रत्येक विषय को मानक शब्दावली पारिभाषिक शब्दावली, भाषा एवं संकल्पनाओं की आवश्यकता पड़ती है, जिसके द्वारा पेशेवर व्यक्ति इसके विषय के संबंध में विचार-विमर्श करते हैं और इसकी विविध विशिष्टताओं को कायम रखते हैं। सामाजिक शब्दावली (Sociological Terms) पर चर्चा करना और अधिक महत्वपूर्ण बन जाता है, क्योंकि सामान्य उपयोग के दृष्टिकोण से उनका क्या तात्पर्य है, जिनके विविध अर्थ एवं संकेतार्थ हो सकते हैं।

प्र० 2. समाज के सदस्य के रूप में आप समूहों में और विभिन्न समूहों के साथ अंतःक्रिया करते होंगे। समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से इन समूहों को आप किस प्रकार देखते हैं?
उत्तर- सामाजिक समूह का सरोकार सदस्यों या व्यक्तियों से है, जो सदस्यता के औपचारिक या अनौपचारिक कसौटी द्वारा परिभाषित किए जाते हैं तथा जो एकता के अनुभव का आदान-प्रदान करते हैं या अंत:क्रिया के अपेक्षाकृत स्थिर प्रतिमानों द्वारा एक-दूसरे से बँधे होते हैं। सामाजिक समूह के सदस्य समान विशेषताओं और उद्देश्यों के आधार पर संबंधों को कायम करते हैं। तथा एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। सामाजिक समूह को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि यह दो या दो से अधिक व्यक्तियों की एक संगठित संरचना है, जिसमें व्यक्ति एक-दूसरे के साथ अंत:क्रिया करते हैं, समान उद्देश्यों का आदान-प्रदान करते हैं, एक-दूसरे पर अन्योन्याश्रित हैं तथा स्वयं को किसी समूह का सदस्य समझते हैं। समूह की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ हैं :
1. एक सामाजिक इकाई, जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति पाए जाते हैं, जो स्वयं को किसी समूह के साथ अपनापन का भाव महसूस करते हैं। समूह की यह विशेषता एक समूह को दूसरे समूह से अंतर करने में मदद करती है तथा समूह को उसकी पहचान प्रदान करती है।
2. व्यक्तियों का एक समुच्चय, जिसके समान प्रयोजन और उद्देश्य होते हैं। समूह या तो किसी दिए गए उद्देश्य के प्रति कार्य करता है या समूह के समक्ष निश्चित आशंकाओं से दूर हटकर कार्य करता है।
3. निरंतर व्यवस्था करने के लिए अटल अंत:क्रिया।
4. अंत:क्रिया का एक स्थिर मानक।
5. समान प्रतिमानों और संरचनाओं की स्वीकृति।
6. व्यक्तियों का एक समुच्चय, जो इस तथ्य पर
अन्योन्याश्रित है कि कोई क्या कर रहा है, इसका प्रभाव दूसरों पर भी पड़ सकता है।
7. यह भूमिका, प्रतिमान, प्रस्थिति और संसक्तिशीलता (Cohensiveness) के समुच्चय के माध्यम से एक संगठित संरचना है। समाजशास्त्री, मानव विज्ञानी (Anthropologists) और समाज मनोवैज्ञानिक (Social Psychologists) ने समूह को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत किया है।
प्राथमिक और द्वितीयक समूह
(i) प्राथमिक समूह पूर्व-स्थित बनावट है, जो व्यक्ति प्रायः प्राप्त करता है, जबकि द्वितीयक समूह वे समूह हैं, जिनसे व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से जुड़ता है। उदाहरण के लिए, परिवार, जाति एवं धर्म प्राथमिक समूह हैं, जबकि किसी राजनीतिक दल की सदस्यता द्वितीयक समूह का उदाहरण है।
(ii) प्राथमिक समूह में आमने-सामने की अंत:क्रिया होती है। सदस्यों में भौतिक निकटता पाई जाती है। वे संवेदनशील बंधनों का आदान-प्रदान करते हैं।
(iii) प्राथमिक समूह व्यक्तिगत कार्य के केंद्रबिंदु हैं और विकास के प्रारंभिक चरण में व्यक्ति के मूल्यों तथा आदर्शों को विकसित करने में अहम् भूमिका निभाते हैं।
(iv) द्वितीयक समूह वे समूह हैं, जहाँ सदस्यों के मध्य संबंधों का स्वरूप अव्यक्तिगत, अप्रत्यक्ष एवं कम तीव्र होता है।
(v) प्राथमिक समूह में सीमाएँ कम पारगम्य होती हैं। इस समूह के सदस्यों के पास सदस्यता चुनने का कोई विकल्प नहीं होता है। जबकि जहाँ द्वितीयक समूह में समूह को छोड़ना तथा अपनाना आसान होता है।
(vi) प्राथमिक समूह में अपनापन का भाव पाया जाता है, जबकि द्वितीयक समूह आकार में अपेक्षाकृत बड़े होते हैं। इसलिए इनमें अपनापन न के बराबर होता है। इसकी विशिष्टता औपचारिक और
अनौपचारिक संबंधों से जानी जाती है। उदाहरण | के लिए विद्यालय, कार्यालय, अस्पताल इत्यादि।
औपचारिक और अनौपचारिक समूह
समूह के कार्य औपचारिक समूहों में स्पष्ट एवं औपचारिक रूप से व्यक्त किया गया है। औपचारिक समूहों की बनावट विशिष्ट सिद्धांतों या नियमों पर आधारित है तथा सदस्य की निश्चित भूमिकाएँ हैं।
औपचारिक समूह संरचना के आधार पर अनौपचारिक समूह से अलग है।
अनौपचारिक समूह अधिक लचीला होता है और सदस्यों के मध्य निकट संबंध पाया जाता है।
अंत:समूह और बाह्य समूह
‘अंत:समूह’ शब्द का अर्थ है-किसी का अपना समूह और ‘बाह्य-समूह’ शब्द का अर्थ है-दूसरों का समूह।
अंत:समूह के सदस्यों के लिए ‘हम’ शब्द का प्रयोग किया जाता है, जबकि बाह्य-समूह के सदस्यों के लिए ‘वे’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। अंत:समूह के व्यक्ति प्रायः समान समझे जाते हैं और सकारात्मक दृष्टि से अवलोकन किए जाते हैं तथा उनके वांछनीय चारित्रिक गुण होते हैं। बाह्य समूह के सदस्य भिन्न रूप से अवलोकन किए जाते हैं और अंत:समूह के सदस्यों की तुलना में नकारात्मक समझे जाते हैं।
समवयस्क समूह
व्यक्तियों का एक समुच्च्य, जो कुछ समान विशेषताओं
का आदान-प्रदान करते हैं, जैसे कि आयु, जातीयता या व्यवसाय, स्वयं को एक विशिष्ट सामाजिक जन-समूह समझते हैं और दूसरों के द्वारा स्वीकार किए जाते हैं। संदर्भ समूह
‘संदर्भ समूह’
शब्द की खोज हर्बर्ट हायमन (Herbert Hyman) द्वारा की गई थी।
हायमन (Hyman) ने सदस्यता समूह, जिसके लोग सदस्य होते हैं और संदर्भ समूह, जिसकी तुलना में प्रयोग किया जाता है, के मध्य अंतर स्थापित किया।
संदर्भ समूह एक सदस्यता समूह हो भी सकता है या नहीं भी हो सकता है। हम सभी के अपने सपने और आकांक्षाएँ हैं।
सामाजिक परिदृश्य में हम सभी सामाजिक दुनिया में निवास करते हैं। हम किसी समूह के प्रति मोहित या
आकर्षित हो जाते हैं, जो लगता है कि किसी अधिक सुखद जीवन की ओर अग्रसर है। जब हम अन्य लोगों या समूहों को देखते हैं, तब हमें उनके समान बनने की गुप्त रूप से अभिलाषा करते हैं। हम उनके साथ अपनी पहचान बनानी आरंभ कर देते हैं। हम उनके गुणों को अंतरंग करते हैं। हम उनके स्वभाविक प्रतिमानों तथा क्रियाविधि का भी अंतरंग करते हैं, ताकि हम उनकी तरह लगें। इस प्रकार हम संदर्भ समूह के सदस्य नहीं होते हैं। हम केवल उनको अपनी पहचान बना लेते हैं।
न्यूकॉम्ब (Newcomb) एक सामाजिक मनोवैज्ञानिक
थे। उन्होंने उदार महिला महाविद्यालय के छात्रों के बदलते मूल्यों और विचारों की व्याख्या में मदद के लिए संदर्भ समूह का प्रयोग किया। अनेक महिलाएँ जिनका संबंध राजनीतिक तौर पर रूढ़िवादी पृष्ठभूमि से था, ने अपने महाविद्यालय जीवनवृत के पाठ्यक्रमों के प्रति उदार विचार शीघ्रता से विकसित की, क्योंकि उनका लगाव महाविद्यालय प्राध्यापक वर्ग से अधिक और अपनी उत्पत्ति के परिवार से कम था। जिन लड़कियों में सर्वाधिक परिवर्तन हुए, अपने उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु सामाजिक संबंधों के संदर्भ में, व्यक्तिगत उपयुक्तता के अर्थ में, उनकी विशिष्टिता उनके माता-पिता से स्वतंत्र थी।
उदाहरण के लिए, अनेक बार विद्यालय और महाविद्यालय में पढ़ने वाली लड़कियाँ तथा लड़के बॉलीवुड (Bollywood) की प्रशंसा करते हैं, उसको महत्व देते हैं एवं उसके साथ अपनी पहचान व्यक्त करते हैं, जैसे-साधना, राजेश खन्ना इत्यादि व गुप्त रूप से, उनकी तरह बनने की अभिलाषा विकसित करते हैं। वे अपनी जीवन शैली, बाल और बातचीत का ढंग, कपड़े इत्यादि उनकी तरह पहनना प्रारंभ कर देते हैं। प्रधानतः उनकी सदस्यता समूह छात्र समूह है, लेकिन वे फिल्म कलाकार समूह (Film Stars Group) के प्रति मोहित हो जाते हैं, जो उनके लिए संदर्भ समूह हैं। सामाजिक दृष्टिकोण से यदि समाज में संदर्भ समूह के अर्थ में राजनीति, धर्म, व्यवसाय इत्यादि से संबंधित आदर्श पात्र हैं, तो युवा पीढ़ी तदानुसार उनसे प्रभावित होती है।

प्र०3. अपने समाज में उपस्थित स्तरीकरण की व्यवस्था के बारे में आपका क्या प्रेक्षण है? स्तरीकरण से व्यक्तिगत जीवन किस प्रकार प्रभावित होते हैं?
उत्तर- समाजशास्त्र में ‘स्तरीकरण’ शब्द संरचनातीत सामाजिक असमानताओं के अध्ययन के लिए प्रायः प्रयोग किया जाता है, जैसे कि व्यक्तियों के समूहों के मध्य किसी सुव्यवस्थिति असमानताओं का अध्ययन, जो सामाजिक प्रक्रिया एवं संबंधों के अप्रत्याशित परिणाम के रूप में प्रकट होता है। जब हम पूछते हैं कि गरीबी क्यों है, भारत में दलित और महिलाएँ सामाजिक रूप से अपंग क्यों हैं, तो हम सामाजिक स्तरीकरण के विषय में प्रश्न खड़ा करते हैं। सामाजिक स्तरीकरण सूक्ष्म समाजशास्त्र की सारभाग (Core) समस्या है, जोकि समाज का समग्र अध्ययन है। सामाजिक स्तरीकरण का सरोकार अनेक अर्थों में वर्ग और प्रस्थिति की समस्याओं से है–सामाजिक समाकलन (Integration) के समझ की कुंजी के रूप में समूह गठन, जोकि जिस हद तक सामाजिक संबंध संसक्तिशील (Cohesive) है या विभाजनात्मक (Divisive), वह परिणामतः सामाजिक व्यवस्था को निर्धारित करता है।
मैंने प्रेक्षण किया है कि हमारे समाज में स्तरीकरण व्यवस्था संरचना का अस्तित्व, भारतीय समाज के विविध समूहों के मध्य असमानता इत्यादि का द्योतक है। भारतीय समाज में संस्तरण के स्तर पाए जाते हैं, जोकि समाज के शिखर पर उच्चतम योग्य व्यक्ति और धरातल पर निम्नतम योग्य व्यक्ति। भारतीय समाज में आर्थिक विषमता, जिससे वर्ण व्यवस्था, जाति व्यवस्था इत्यादि का जन्म हुआ, स्तरीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
1. भारतीय जाति स्तरीकरण व्यवस्था में किसी व्यक्ति की प्रस्थिति व्यक्ति की उपलब्धियों एवं उसके योगदान या उसके मनोवैज्ञानिक गुणों से न होकर जन्म से प्रदत्त है।
2. भारतीय समाज के इस स्तरीकरण के विरुद्ध कुछ आशाएँ हैं। आर्थिक विकास, संवैधानिक व्यवस्था, नगरीकरण, औद्योगिकीकरण, शिक्षा, सुगम संचार और प्रबुद्ध माध्यम के कारण हमारा समाज खुशहाली की तरफ धीरे-धीरे परिवर्तनशील है।
3. स्तरीकरण किसी समाज की स्वाभाविक प्रक्रिया है। जैसे हम जानते हैं कि समाज एक समूह है और समूह एक संगठित संरचना है, जिसमें सदस्यों की प्रस्थिति भूमिका होती है।
4. सामाजिक स्तरीकरण इस बात का आश्वासन देता है कि सर्वाधिक महत्वपूर्ण पदों पर योग्य व्यक्तियों को होना चाहिए।
5. भूमिका का सरोकार उम्मीदों से है, जो गतिशील है और प्रस्थिति का व्यवहारिक क्षेत्र है। प्रस्थिति का संदर्भ समाज में प्रत्येक सदस्य द्वारा धारण स्थिति से है। किसी सदस्य की प्रस्थिति की संस्थापित भूमिका है। प्रस्थिति समाज में व्यवस्थित, मानकीकृत एवं औपचारिक हो जाती है।
6. सामाजिक स्तरीकरण सामान्य पूर्वानुमान से प्रारंभ होता है या प्रकार्यवाद के विश्वास पर आधारित है। कि कोई भी समाज वर्गहीन या बिना स्तरीकरण के है। केवल समन्वय, संतुलन, समाकलन तथा सबके विकास की आवश्यकता पड़ती है, जो किसी स्वस्थ समाज का उद्देश्य होना चाहिए।

प्र० 4. सामाजिक नियंत्रण क्या है? क्या आप सोचते हैं कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक नियंत्रण के साधन अलग-अलग होते हैं? चर्चा करें।
उत्तर- ‘सामाजिक नियंत्रण’ शब्द का सरोकार उस सामाजिक प्रक्रिया से है, जिसके द्वारा व्यक्ति या समूह के व्यवहार को नियंत्रित किया जाता है। समाज मानवों का सामंजस्यपूर्ण संघ है, जिनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अपना कार्य तदनुसार करें। अस्तित्व और विकास के लिए समाज को अपने सदस्यों पर निश्चित नियंत्रण रखना पड़ता है। ऐसे नियंत्रणों को सामाजिक नियंत्रण कहा जाता है। परिणामतः सामाजिक नियंत्रण किसी भी समाज को परिष्कृत कर देने वाला लक्षण है। सामाजिक नियंत्रण व्यक्तियों एवं समूहों के अप्रत्याशित व्यवहारों को नियंत्रित करने में सहायता करता है। इसका प्रयोग समाज समग्र रूप से समूह के कल्याण व उन्नति के लिए करता है। सामाजिक नियंत्रण का स्वरूप एक समाज से दूसरे समाज में बदल जाता है, क्योंकि प्रत्येक समाज के अपने नियम एवं प्रतिमान हैं। समाज के विभिन्न प्रकार जैसे व्यक्तिवादी/व्यष्टिवादी समाज या जन सामूहिक समाज अपने सदस्यों से विविध अपेक्षाएँ रखते हैं। भारतीय सांस्कृतिक मूल्य और जीवन के सामान्य मानक/मानदण्ड पश्चिमी व्यक्तिवादी समाज से अलग हैं। तदनुसार उस विशिष्ट समाज में परिवार व्यवस्था, विवाह पद्धति, सकारात्मक एवं नकारात्मक परिपाटियाँ, धर्म तथा शिक्षा व्यवस्था विकसित की गई हैं। उस विशिष्ट समाज के सदस्यों को इन व्यवस्थाओं की आज्ञा का पालन करना चाहिए। समाज किसी खास विशिष्ट समाज के लिए उचित सामाजिक नियंत्रण को विकसित करता है।

प्र० 5. विभिन्न भूमिकाओं और प्रस्थितियों को पहचानें जिन्हें आप निभाते हैं और जिनमें आप स्थित हैं। क्या आप सोचते हैं कि भूमिकाएँ और प्रस्थितियाँ बदलती हैं? चर्चा करें कि ये कब और किस प्रकार बदलती हैं।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।

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