Author name: Raju

NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 9 Environment and Sustainable Development (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 9 Environment and Sustainable Development (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 9 Environment and Sustainable Development (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास
(पाठ्यपुस्तक से)

प्र.1. पर्यावरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर : पर्यावरण को समस्त भूमंडलीय विरासत और संसाधनों की समग्रता के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमें वे सभी जैविक और अजैविक तत्व आते हैं, जो एक दूसरे को प्रभावित करते हैं।

प्र.2. जब संसाधन निस्सरण की दर उनके पुनर्जनन की दर से बढ़ जाती है, तो क्या होता है?
उत्तर :
NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 9 (Hindi Medium) 1

प्र.3. निम्न को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें
(क) वृक्ष
(ख) मछली
(ग) पेट्रोलियम
(घ) कोयला
(ङ) लौह अयस्क
(च) जल
उत्तर : नवीकरणीय ससांधन-वृक्ष, मछली गैर-नवीकरणीय ससांधन-पेट्रोलियम, कोयला, लौह-अयरेक जल

प्र.4. आजकल विश्व के सामने “……………………..” और “……………………..” की दो मुख्य पर्यावरणीय समस्याएँ हैं।
उत्तर : वैश्विक ऊष्णता और ओजोन अपक्षय।

प्र.5. निम्न कारक भारत में कैसे पर्यावरण संकट में योगदान करते हैं? सरकार के समक्ष वे कौन-सी समस्याएँ पैदा करते हैं• बढ़ती जनसंख्या

  • वायु-प्रदूषण
  • जल-प्रदूषण
  • संपन्न उपभोग मानक
  • निरक्षरता
  • औद्योगीकरण
  • शहरीकरण
  • वन-क्षेत्र में कमी
  • अवैध वन कटाई
  • वैश्विक ऊष्णता

उत्तर :
(क) बढ़ती जनसंख्या- बढ़ती जनसंख्या से प्राकृतिक संसाधनों की माँग बढ़ जाती है। जबकि प्राकृतिक संसाधनों की पूर्ति स्थिर है। इससे अतिरेक माँग उत्पन्न होती है जो प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डालती है। इन संसाधनों का अत्यधिक उपभोग किया जाता है और उपभोग धारण क्षमता की सीमा से बाहर चला जाता है जिससे पर्यावरणीय हानि होती है। इससे सरकार के समक्ष सर्व की आवश्यकताएँ पूरी करने में असमर्थता की समस्या आती है।

(ख) वायु-प्रदूषण- 
इससे कई प्रकार की बीमारियाँ जैसे दमा, फेफड़ों का कैंसर, क्षय रोग होती हैं। इससे सरकार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक व्यय की समस्या उत्पन्न होती है।

(ग) जल-प्रदूषण- 
इससे हैजा, मलेरिया, अतिसार, दस्त जैसी कई बीमारियाँ होती हैं। इससे भी सरकार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक व्यय की समस्या उत्पन्न होती है।

(घ) संपन्न उपभोग मानक- 
इससे प्राकृतिक संसाधनों की माँगें बढ़ जाती हैं। जबकि प्राकृतिक संसाधनों की पूर्ति स्थिर है। इससे अतिरेक माँग उत्पन्न होती है। जो प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डालती है। इन संसाधनों का अत्यधिक उपभोग किया जाता है और उपभोग धारण क्षमता की सीमा से बाहर चला जाता है। जिससे पर्यावरणीय हानि होती है। इससे समस्या ये उत्पन्न होती है कि अमीर वर्ग तो कुत्तों के खाने, सौंदर्य प्रसाधन और विलासिताओं पर व्यय करते हैं और गरीब वर्ग को अपने बच्चों और परिवार की आधारभूत आवश्यकताओं के लिए भी धन नहीं मिलता।

(ङ) निरक्षरता- 
ज्ञान के अभाव के कारण लोग ऐसे संसाधनों का प्रयोग करते रहते हैं जैसे-उपले, लकड़ी आदि। इससे संसाधनों का दुरुपयोग होता है। यह दुरुपयोग पर्यावरण को हानि पहुँचाता है। सरकार को लोगों के स्वास्थ्य पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।

(च) औद्योगीकरण- 
इसे वायु-प्रदूषण, जल-प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण होता है। इससे काफी बीमारियाँ जैसे: दमा, कैंसर, हैजा, अतिसार, मलेरिया, बहरापन आदि हो सकती हैं। अत: सरकार का स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय बढ़ रहा है जिससे सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ता जा रहा है।

(छ) शहरीकरण- 
इससे प्राकृतिक संसाधनों की माँग बढ़ जाती है जबकि प्राकृतिक संसाधनों की आपूर्ति स्थिर है। इन संसाधनों का अति उपयोग होता है और यह उपयोग धारण क्षमता की सीमा को पार कर देता है जिससे पर्यावरण का अपक्षय होता है। इससे भी आय की असमानताओं के कारण अमीर वर्ग कुत्तों के खाने, सौंदर्य प्रसाधन पर खर्च करता है और गरीब वर्ग परिवार की आधारभूत आवश्यकताओं के लिए भी धन नहीं जुटा पाता।

(ज) वन-क्षेत्र में कमी- 
इससे पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। कार्बन डाइऑक्साइड में वृद्धि से वैश्विक उष्णता हो रही है। अतः सरकार को स्वास्थ्य के साथ-साथ ऐसे तकनीकी अनुसंधान पर भी व्यय करना पड़ रहा है जिससे एक पर्यावरण अनुकूल वैकल्पिक तकनीक की खोज की जा सके।

(झ) अवैध वन कटाई- 
इससे जैविक विविधता प्रभावित हो रही है, मृदा क्षरण, वायु प्रदूषण में वृद्धि हो रही है जिससे खाद्य श्रृंखला पर भी प्रभाव पड़ रहा है।

(ट) वैश्विक ऊष्णता- 
वैश्विक उष्णता के कारण पूरे विश्व में तापमान बढ़ रहा है। यदि समुद्र के जल का तापमान मात्र 2°C से भी बढ़ गया तो संपूर्ण पृथ्वी जलमयी हो जाएगी।

प्र.6. पर्यावरण के क्या कार्य होते हैं?
उत्तर : पर्यावरण के महत्त्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं
(क) यह जीवन के लिए संसाधन प्रदान करता है। नवीकरणीय तथा गैर-नवीकरणीय दोनों पर्यावरण द्वारा ही प्रदान किये जाते हैं।।
(ख) यह अवशेष को समाहित करता है।
(ग) यह जनहित और जैविक विविधता प्रदान करके जीवन का पोषण करता है।
(घ) यह सौंदर्य विलयक सेवाएँ भी प्रदान करता है।

प्र.7. भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी छह कारकों की पहचान करें।
उत्तर : भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी छह कारक इस प्रकार हैं
(क) वन विनाश के फलस्वरूप वनस्पति की हानि;
(ख) अधारणीय जलाऊ लकड़ी और चारे का निष्कर्षण;
(ग) वन भूमि का अतिक्रमण;
(घ) भू-संरक्षण हेतु समुचित उपायों को न अपनाया जाना;
(ङ) कृषि-रसायन का अनुचित प्रयोग जैसे, रासायनिक खाद और कीटनाशक;
(च) सिंचाई व्यवस्था का नियोजन तथा अविवेकपूर्ण प्रबंधन;

प्र.8. समझायें कि नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों की अवसर लागत उच्च क्यों होती है?
उत्तर : नकारात्मक पर्यावरण प्रभाव का सबसे नकारात्मक अवसर लागत पर्यावरण अपक्षय की गुणवत्ता की स्वास्थ्य लागत है। वायु तथा जल गुणवत्ता (भारत में 70% जल स्रोत प्रदूषित हैं) में गिरावट के कारण वायु संक्रामक तथा जल संक्रामक बीमारियाँ बढ़ती जा रही हैं। फलस्वरूप, स्वास्थ्य पर सरकारी व्यय बढ़ता जा रहा है। वैश्विक पर्यावरण मुद्दों जैसे वैश्विक ऊष्णता और ओजोन क्षय ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है, जिसके कारण सरकार को और अधिक धन व्यय करना पड़ा।

प्र.9. भारत में धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए उपयुक्त उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत करें।
उत्तर :
 धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं

(क) ऊर्जा के गैर-पारंपरिक स्रोतों का उपयोग- 
भारत अपनी विद्युत आवश्यकताओं के लिए थर्मल और हाइड्रो पॉवर संयंत्रों पर बहुत अधिक निर्भर है। इन दोनों का पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वायु शक्ति और सौर ऊर्जा गैर-पारंपरिक स्रोतों के अच्छे उदाहरण हैं। तकनीक के अभाव में इनका विस्तृत रूप से अभी तक विकास नहीं हो पाया है।

(ख) अधिक स्वच्छ ईंधनों का उपयोग- 
शहरी क्षेत्रों में ईंधन के रूप में उच्च दाब प्राकृतिक गैस (CNG) के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दिल्ली में जन-परिवहन में उच्च दाब प्राकृतिक गैस के उपयोग से प्रदूषण कम हुआ है और वायु स्वच्छ हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में बायोगैस और गोबर गैस को प्रोत्साहित किया जा रहा है जिससे वायु प्रदूषण कम हुआ है।

(ग) लघु जलीय प्लांटों की स्थापना- 
पहाड़ी इलाकों में लगभग सभी जगह झरने मिलते हैं। इन झरनों पर लघु जलीय प्लांटों की स्थापना हो सकती है। ये पर्यावरण के अनुकूल होते हैं।

(घ) पारंपरिक ज्ञान व व्यवहार- 
पारंपरिक रूप से भारत की कृषि व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधा व्यवस्था, आवास, परिवहन सभी क्रियाकलाप पर्यावरण के लिए हितकर रहे हैं। परंतु आजकल हम अपनी पारंपरिक प्रणालियों से दूर हो गए हैं, जिससे हमारे पर्यावरण और हमारी ग्रामीण विरासत को भारी मात्रा में हानि पहुँची है।

(ङ) जैविक कंपोस्ट खाद- 
कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग ने न केवल भू-क्षय किया है बल्कि जल व्यवस्था विशेषकर भूतल जल प्रणाली भी प्रदूषित हुई है।

(च) अधारणीय उपभोग तथा उत्पादन प्रवृत्तियों में परिवर्तन-
धारणीय विकास प्राप्त करने के लिए हमें उपभोग प्रवृत्ति (संसाधनों के अति उपयोग और दुरुपयोग की अवहेलना) तथा उत्पादन प्रवृति (पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का प्रयोग) में परिवर्तन करने की आवश्यकता है।

प्र.10. भारत में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है-इस कथन के समर्थन में तर्क दें।
उत्तर : क्षेत्र के मामले में भारत विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है जिसका कुल क्षेत्रफल 32,87 263 वर्ग किलोमीटर (32.87 करोड़ वर्ग हेक्टेयर) है। यह विश्व के कुल क्षेत्र का 2.42% हिस्सा है। निरपेक्ष संदर्भ में यह भारत वास्तव में एक बड़ा देश है। हालाँकि भूमि-आदमी अनुपात विशाल जनसंख्या के कारण अनुकूल नहीं है।

दक्षिण के पठार की काली मिट्टी विशिष्ट रूप से कपास की खेती के लिए उपयुक्त है। अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक गंगा मैदान है जो कि विश्व के अत्यधिक उर्वरक क्षेत्रों में से एक है और विश्व में सबसे गहने खेती और जनसंख्या वाला क्षेत्र है।

भारत 4 ईंधन खनिजों, 11 धात्विक, 52 गैर-धात्विक, 22 लघु खनिजों और कुल 89 खनिजों का उत्पादन करता है। भारत में उच्च गुणवत्ता लौह अयस्क बहुतायत मात्रा में है। देश के कुल लौह-अयस्क भंडार में 14,630 मिलियन टन हेमेटाइट और 10,619 मिलियन टन मैगनेटाइट है। हेमेटाइट लौह अयस्क मुख्यतः छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, गोआ और कर्नाटक में पाया जाता है। कोयला सबसे अधिक मात्रा में उपलब्ध खजिन संसाधन है। कोयला उत्पादन के क्षेत्र में भारत का चीन और अमेरिका के बाद विश्व में तीसरा स्थान है।

प्र.11. क्या पर्यावरण संकट एक नवीन परिघटना है? यदि हाँ, तो क्यों?
उत्तर : हाँ, पर्यावरण संकट एक नवीन घटना है। यह पूर्ति-माँग के उत्क्रमण से उत्पन्न हुई है। हाल के वर्षों में जनसंख्या में बहुत वृद्धि हुई है इससे संसाधन की माँग बढ़ गई है जबकि संसाधनों की आपूर्ति स्थिर है। इससे अतिरेक माँग उत्पन्न हुई है। यह प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डाल रही है। इन संसाधनों का उपयोग बढ़ रहा है और यह धारण क्षमता की सीमा से बाहर होता जा रहा है। इसने पर्यावरण संकट को जन्म दिया है।

प्र.12. इनके दो उदाहरण दें
(क)
पर्यावरणीय संसाधनों का अति प्रयोग।
(ख) पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग
उत्तर :
(क) पर्यावरणीय संसाधनों का अति प्रयोग-जब लोग कुत्ते के भोजन, सौंदर्य प्रसाधन, अत्यधिक बिजली उपकरण, परिवार के सदस्यों की संख्या से अधिक संख्या में कारें खरीद रहे हैं तो ये पर्यावरणीय संसाधनों के अति प्रयोग के सूचक हैं।

(ख)
पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग-गोबर और लकड़ी ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, प्राकृतिक खाद के स्थान पर रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया जाना, जैविक कीटनाशकों के स्थान पर रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग, ये पर्यावरणीय संसाधनों के दुरुपयोग के उदाहरण हैं।

प्र.13. पर्यावरण की चार मुख्य क्रियाओं का वर्णन कीजिए। महत्त्वपूर्ण मुद्दों की व्याख्या कीजिए। पर्यावरणीय हानि की भरपाई की अवसर लागतें भी होती हैं। व्याख्या कीजिए।
उत्तर : भारत में पर्यावरण संबंधी महत्त्वपूर्ण मुद्दे निम्नलिखित हैं

(क) जल संक्रमण-
भारत में औद्योगिक अवशिष्ट के कारण पेय जल संक्रामक होता जा रहा है। इससे जल संक्रामक बीमारियाँ फैल रही हैं।

(ख) वायु-प्रदूषण- 
शहरीकरण के कारण, भारतीय सड़कों पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मोटर वाहनों की संख्या 1951 के 3 लाख से बढ़कर 2003 में 67 करोड़ हो गई। भारत विश्व में दसवाँ सर्वाधिक औद्योगिक देश है परंतु यह पर्यावरण पर अनचाहे एवं अप्रत्याशित प्रभावों की अवसर लागत पर हुआ है।

(ग) वनों की कटाई- 
भारत का वन आवरण बढ़ती जनसंख्या के कारण लगातार कम हो रहा है। इससे वायु प्रदूषण तथा उससे जुड़ी समस्याएँ भी बढ़ रही हैं। भारत में प्रतिव्यक्ति वन भूमि 0.08 हेक्टेयर है जबकि आवश्यकता 0.47 हेक्टेयर की है।

(घ) भू-क्षय- 
भू-क्षय वन विनाश के फलस्वरूप वनस्पति की हानि, वन भूमि का अतिक्रमण, वनों में आग और अत्यधिक चराई, भू–संरक्षण हेतु समुचित उपायों को न अपनाया जाना, अनुचित फसल चक्र, कृषि-रसायन का अनुचित प्रयोग, सिंचाई व्यवस्था का नियोजन तथा अविवेकपूर्ण प्रबंधन, संसाधनों की निर्बाध उपलब्धता तथा कृषि पर निर्भर लागतों की दरिद्रता के कारण हो रहा है।

निश्चित रूप से, पर्यावरण हानि की भरपाई की अवसर लागत बिगड़ता स्वास्थ्य, स्वास्थ्य सुविधाओं पर अतिरिक्त व्यय, खराब पर्यावरण में जीवन की खराब गुणवत्ता के रूप में है जिसे ठीक करने के लिए सरकार को अत्यधिक व्यय करना पड़ता है।

प्र.14. पर्यावरणीय संसाधनों की पूर्ति-माँग के उत्क्रमण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
 अर्थ- पर्यावरण अपने कार्य बिना किसी रुकावट या बाधा के तब तक कर सकता है जब तक संसाधनों की माँग उनकी पूर्ति से कम हो। जब माँग, पूर्ति से अधिक हो जाती है तो पर्यावरण अपने कार्य सुरीति करने में असक्षम हो जाता है इससे पर्यावरण संकट जन्म लेता है। इसे पूर्ति-माँग के उत्क्रमण की संज्ञा दी जाती है। दूसरे शब्दों में, जब संसाधनों की उत्पादन तथा उपभोग माँग संसाधनों के पुनर्जनन दर से अधिक हो जाती है तो इससे पर्यावरण की अवशोषी क्षमता पर दुष्प्रभाव पड़ता है, इसे पूर्ति संसाधनों की पूर्ति माँग का उत्क्रमण कहा जाता है। इसके निम्नलिखित कारण हैं
(क) विकासशील देशों की बढ़ती जनसंख्या
(ख) विकसित देशों के संपन्न उपभोग तथा उत्पादन स्तर
(ग) नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की गहन और व्यापक निकासी।

प्र.15. वर्तमान पर्यावरण संकट का वर्णन करें।
उत्तर : भारत के पर्यावरण को दो तरफ से खतरा है। एक तो निर्धनता के कारण पर्यावरण का अपक्षय और दूसरा खतरा साधन संपन्नता और तेजी से बढ़ते हुए औद्योगिक क्षेत्रक के प्रदूषण से है।

भारत की अत्यधिक गंभीर पर्यावरण समस्याओं में वायु प्रदूषण, दूषित जल, मृदा क्षरण, वन्य कटाव और वन्य जीवन की विलुप्ति है।
(क) जल-प्रदूषण- भारत में ताजे जल के सर्वाधिक स्रोत अत्यधिक प्रदूषित होते जा रहे हैं। इनकी सफाई में सरकार को भारी व्यय करना पड़ रहा है। 120 करोड़ की जनसंख्या के लिए स्वच्छ जल का प्रबंधन सरकार के लिए एक बड़ी समस्या है। जल जीवों की विविधता भी विलुप्त होती दिखाई दे रही है।
(ख) भूमि अपक्षय-भारत में भूमि का अपक्षय विभिन्न मात्रा और रूपों में हुआ है, जो कि मुख्य रूप से अस्थिर प्रयोग और अनुपयुक्त (प्रबंधन) कार्य प्रणाली का परिणाम है।

(ग) ठोस अवशिष्ठ प्रबंधन- 
विश्व की 17% जनसंख्या और विश्व पशुधन की 20% जनसंख्या भारत की मात्र 2.5% क्षेत्रफल में रहती है। जनसंख्या और पशुधन का अधिक घनत्व और वानिकी, कृषि, चराई, मानव बस्तियाँ और उद्योगों के प्रतिस्पर्धी उपयोगों से देश के निश्चित भूमि संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है।

(घ) जैविक विविधता की हानि-
प्रदूषण के कारण बहुत से पशु-पक्षियों और पौधों को प्रजातियाँ विलुप्त होती जा रही है। इसका हमारे पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पेड़े रहा है।

(ङ) शहरी क्षेत्रों में वाहन प्रदूषण से उत्पन्न वायु प्रदूषण- 
भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु-प्रदूषण बहुत है, जिसमें वाहनों का सर्वाधिक योगदान है। कुछ अन्य क्षेत्रों में उद्योगों के भारी जमाव और तापीय शक्ति संयंत्रों के कारण वायु-प्रदूषण होता है। वाहन उत्सर्जन चिंता का प्रमुख कारण है क्योंकि यह धरातल पर वायु-प्रदूषण का स्रोत है और आम जनता पर अधिक प्रभाव डालता है।

(च) मृदा क्षरण-
भारत ने एक वर्ष में भूमि का क्षरण 53 बिलियन टन प्रतिशत की दर से हो रहा है। भारत सरकार के अनुसार, प्रत्येक वर्ष मृदा क्षरण से 5.8 मिलियन से 8.4 मिलियन टन पोषक तत्वों की क्षति होती है।

प्र.16. भारत में विकास के दो गंभीर नकारात्मक पर्यावरण प्रभावों को उजागर करें। भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है-एक तो यह निर्धनताजनित है और दूसरे जीवन-स्तर में संपन्नता का कारण भी है। क्या यह सत्य है?
उत्तर : भारत विश्व का दसवाँ सर्वाधिक औद्योगिक देश है परंतु यह पर्यावरण की कीमत पर हुआ है। भारत में विकास के दो गंभीर पर्यावरण प्रभाव वायु प्रदूषण तथा जल संक्रमण है।

यह कहना सही है कि भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है। एक ओर यह निर्धनताजनित है क्योंकि निर्धन क्षेत्र भोजन पकाने के लिए, एल.पी.जी. खरीदने में सक्षम नहीं है। अतः वे गाय के गोबर के उपले और जलाऊ लकड़ी को ईंधन के रूप में प्रयोग करते हैं, यह संसाधनों का दुरुपयोग है। जबकि दूसरी ओर अमीर वर्ग निकटतम स्थान पर जाने के लिए कारों का प्रयोग करते हैं, हर कमरे में वातानुकूलिर का प्रयोग करते हैं, हीटर, माइक्रोवेव और अनेक बिजली उपकरणों का प्रयोग करते हैं जिससे संसाधनों का अति उपयोग हो रहा है तथा परिणामस्वरूप पर्यावरण दूषित हो रहा है।

प्र.17. धारणीय विकास क्या है?
उत्तर : धारणीय विकास की कई परिभाषाएँ दी गई हैं परंतु सर्वाधिक उद्धृत परिभाषा आवर कॉमन फ्यूचर (Our common future) जिसे ब्रुटलैंड रिपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है, ने दी है।
” ऐसी विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता का समझौता किए बिना पूरा करे।
“इसके अंतर्गत दो महत्त्वपूर्ण अवधारणाए हैं ‘आवश्यकता’ और ‘भावी पीढियाँ’।

  • इस परिभाषा में आवश्यकता की अवधारणा का संबंध संसाधनों के वितरण से है। मुख्य रूप से संसाधन विश्व के गरीब वर्ग को भी समान रूप से मिलने चाहिए।
  • भावी पीढ़ियों से तात्पर्य है वर्तमान पीढ़ी को आगामी पीढ़ी द्वारा एवं बेहतर पर्यावरण उत्तराधिकार के रूप में सौंपा जाना चाहिए।

प्र.18. अपने आस-पास के क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए धारणीय विकास की चार रणनीतियाँ सुझाइए।
उत्तर : अपने आस-पास के क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए धारणीय विकास की निम्नलिखित रणनितियाँ हैं

ग्रामीण क्षेत्र के निवासी होने पर

  • ग्रामीण क्षेत्रों में जलाऊ लकड़ी, उपलों या अन्य जैव पदार्थ के स्थान पर रसोई गैस और गोबर गैस का उपयोग
  • जहाँ पर खुला स्थान है उन गाँवों में वायु मिलों की स्थापना की जा सकती है।
  • हमें कृषि, स्वास्थ्य, आवास और परिवहन में ऐसा पारंपरिक ज्ञान और व्यवहार का प्रयोग करना चाहिए जो पर्यावरण के अनुकूल हो।
  • रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर जैविक कीटनाशकों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर हमें जैविक कंपोस्ट खाद का प्रयोग करना चाहिए।शहरी क्षेत्र के निवासी होने पर
  • फोटोवोल्टिक सेल द्वारा सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • वाहनों में पेट्रोल या डीजल की जगह उच्च दाब प्राकृतिक गैस (CNG) का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • हमें अपनी आवश्यकताओं को कम करना चाहिए।

प्र.19. धारणीय विकास की परिभाषा में वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच समता के विचार की व्याख्या करें।
उत्तर : यह बहुत सुंदर कहा गया है कि यह पर्यावरण हमें पूर्वजों से विरासत में नहीं मिला बल्कि इसे हमने भावी पीढ़ियों से उधार
लिया है। जो चीज उधार ली जाती है उसे समान या बेहतर स्थिति में वापिस करना होता है। यहाँ पर वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच समता का विचार महत्त्वपूर्ण हो जाता है। हमें पिछली पीढ़ी को उपलब्ध संसाधनों और भावी पीढ़ी को उपलब्ध संसाधनों के बीच समता बनाने की आवश्यकता है। हम अपनी भावी पीढ़ी के भविष्य को दाव पर लगाकर अपने वर्तमान का आनंद नहीं ले सकते। अतः विकास धारणीय तभी हो सकता है जब हम विकास की ऐसी विधियाँ अपनाएँ जिससे वर्तमान समय में वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन भविष्य आवश्यकताओं की परवाह किए बिना नहीं करती। हमें भावी पीढ़ियों को उतने ही संसाधन विरासत के रूप में सौंपने की जरूरत है जितने हमने अपने पूर्वजों से प्राप्त किए हैं। संसाधनों का रूप अवश्य अलग हो सकता है जैसे हमने पेट्रोलियम पाया और हम उच्च दाब प्राकृतिक गैस दे रहे हैं, अतः शब्द समान नहीं है, समता है।

Hope given Indian Economic Developments Class 11 Solutions Chapter 9 are helpful to complete your homework.

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NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 8

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 8 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 8 Composition and Structure of Atmosphere (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) निम्नलिखित में से कौन-सी गैस वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में मौजूद है?
(क) ऑक्सीजन
(ख) आर्गन
(ग) नाइट्रोजन
(घ) कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर- (ग) नाइट्रोजन

(ii) वह वायुमंडलीय परत जो मानव जीवन के लिए। महत्त्वपूर्ण है
(क) समतापमंडल
(ख) क्षोभमंडल
(ग) मध्यमंडल
(घ) आयनमंडल
उत्तर- (ख) क्षोभमंडल

(iii) समुद्री नमक, पराग, राख, धुएँ की कालिमा, महीन मिट्टी किससे संबंधित हैं?
(क) गैस
(ख) जलवाष्प
(ग) धूलकण
(घ) उल्कापात
उत्तरे- (ग) धूलकण

(iv) निम्नलिखित में से कितनी ऊँचाई पर ऑक्सीजन की मात्रा नगण्य हो जाती है?
(क) 90 कि.मी.
(ख) 100 कि.मी.
(ग) 120 कि.मी.
(घ) 150 कि.मी.
उत्तर- (ग) 120 कि.मी.

(v) निम्नलिखित में से कौन-सी गैस सौर विकिरण के पारदर्शी है तथा पार्थिव विकिरण के लिए अपारदर्शी?
(क) ऑक्सीजन
(ख) नाइट्रोजन
(ग) हीलियम
(घ) कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर- (घ) कार्बन डाइऑक्साइड

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
(i) वायुमंडल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- वायुमंडल विभिन्न प्रकार की गैसों का भिश्रम है और यह पृथ्वी को सभी ओर से ढंके हुए है। इसमें मनुष्यों एवं जंतुओं के जीवन के लिए आवश्यक गैसें जैसे ऑक्सीजन तथा पौधों के जीवन के लिए कार्बन डाइऑक्साइड पाई जाती है। वायु पृथ्वी के द्रव्यमान का अभिन्न भाग है तथा इसके कुल द्रव्यमान को 99 प्रतिशत पृथ्वी की सतह से 32 कि.मी. की ऊँचाई तक स्थित है। वायु रंगहीन तथा गंधहीन होती है तथा जब यह पवन की तरह बहती है, तभी हम इसे महसूस कर सकते हैं।

(ii) मौसम एवं जलवायु के तत्त्व कौन-कौन से हैं?
उत्तर- मौसम एवं जलवायु के मुख्य तत्त्व निम्न हैं–

  1. तापमान – तापमान मौसम एवं जलवायु के मुख्य तत्त्व हैं।
  2. दाब – वायुमंडल के निचले भाग से वायुदाब ऊँचाई के साथ तीव्रता से घटता है।
  3. हवा – हवा का बहाव भी मौसम और जलवायु को प्रभावित करता है।
  4. आर्द्रता – बादल और वर्षण मौसम एवं जलवायु के मुख्य तत्त्व हैं।

(iii) वायुमंडल की संरचना के बारे में लिखें।
उत्तर- वायुमंडल में कई गैसें पाई जाती हैं, लेकिन गैसों का अनुपात अलग-अलग होता है। वायुमंडल में 78.8 प्रतिशत नाइट्रोजन, 20.94 प्रतिशत ऑक्सीजन तथा 0.93 प्रतिशत आर्गन पाई जाती है। इसके अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड, नीऑन, हिलीयम, ओजोन, हाइड्रोजन, क्रिप्टॉन तथा जेनन गैसें पाई जाती है। लगभग 90 कि.मी. की ऊँचाई तक तीन प्रमुख गैसों नाइट्रोजन, ऑक्सीजन तथा आर्गन में समानता है। ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन मिलकर हेमोस्फेयर या समतापमंडल की स्वच्छ शुष्क हवा के 99 प्रतिशत भाग का निर्माण करती हैं। नीऑन, क्रिप्टॉन एवं जेनन दुर्लभ गैसें हैं, जिन्हें उत्कृष्ट गैसें भी कहते हैं। 90 कि.मी. के ऊपर वायुमंडल का संघटन अधिकाधिक हल्की गैसों की वृद्धि के साथ परिवर्तित होने लगता है। यह परत हेट्रोस्फेयर या विषममंडल कहलाती है।

(iv) वायुमंडल के सभी संस्तरों में क्षोभमंडल सबसे अधिक महत्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर- क्षोभमंडल पृथ्वी के सबसे पास का संस्तर है। इसमें अन्य गैसों के साथ धूलकण तथा जलवाष्प भी पाए जाते हैं। धूलकणों के चारों ओर जलवाष्प के संघनित होने से मेघों का निर्माण होता है तथा जलवाष्प पृथ्वी को अधिक गर्म या अधिक ठंडा होने से बचाते हैं। साथ ही इसी सस्तर में सभी मौसमी परिवर्तन तथा जैविक क्रियाकलाप संपन्न होते हैं। इन्हीं सब कारणों से यह संस्तर अन्य सभी संस्तरों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) वायुमंडल के संघटन की व्याख्या करें।
उत्तर- वायुमंडल गैसों, जलवाष्प एवं धूलकणों से बना है। वायुमंडल की ऊपरी परतों में गैसों का अनुपात इस प्रकार बदलता है जैसे कि 120 कि.मी. की ऊँचाई पर ऑक्सीजन की मात्रा नगण्य हो जाती है। इसी प्रकार कार्बन डाइऑक्साइड एवं जलवाष्प पृथ्वी की सतह से 90 कि.मी. की ऊँचाई तक ही पाए जाते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड मौसम विज्ञान की दृष्टि से बहुत ही महत्त्वपूर्ण गैस है, क्योंकि यह सौर विकिरण के लिए पारदर्शी है, लेकिन पार्थिव विकिरण के लिए अपारदर्शी है। यह सौर विकिरण के एक अंश को सोख लेती है। तथा इसके कुछ भाग को पृथ्वी की सतह की ओर प्रतिबिंबित कर देती है। यह ग्रीन हाउस प्रभाव के लिए पूरी तरह उत्तरदायी है। दूसरी गैसों का आयतन स्थिर है, जबकि पिछले कुछ दशकों में मुख्यतः जीवाश्म ईंधन जलाए जाने के कारण कार्बन डाइऑक्साइड के आयतने में लगातार वृद्धि हो रही है। इसने हवा के ताप को भी बढ़ा दिया है। ओजोन वायुमंडल का दूसरा महत्त्वपूर्ण घटक है जोकि पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किलोमीटर की ऊँचाई के बीच पाया जाता है। यह एक फिल्टर की तरह कार्य करता है तथा सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर उनको पृथ्वी की सतह पर पहुँचने से रोकता है।

(ii) वायुमंडल की संरचना का चित्र खींचें और व्याख्या करें।
उत्तर- रासायनिक संघटन के आधार पर वायुमंडल दो विस्तृत परतों हेमोस्फेयर तथा हेट्रोस्फेयर में विभक्त है। हेमोस्फेयर 90 कि.मी. की ऊँचाई तक स्थित है। यह रासायनिक संघटन में एक समानता की विशेषता रखती है। इसकी तीन तापीय परते हैं
क्षोभमंडल, समतापमंडल तथा मध्यमंडल। हेट्रोस्फेयर का रासायनिक संघटन असमान है। इसमें क्रमश: नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हिलीयम तथा हाइड्रोजन की परतदार संरचनाएँ हैं। तापमान की स्थिति के अनुसार वायुमंडल को पाँच विभिन्न संस्तरों में बाँटा गया है। ये हैं क्षोभमंडल, समतापमंडल, मध्यमंडल, आयनमंडल तथा बाह्यमंडल।
NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 8 (Hindi Medium) 3

  1. क्षोभमंडल – वायुमंडल की इस परत में प्रत्येक 165 मीटर की ऊँचाई पर 1° सेंटीग्रेट तापमान घटता जाता है। मौसम संबंधी सभी तरह के परिवर्तन इसी मंडल में होते हैं।
  2. समतापमंडल – अक्सर जैट वायुयान निम्न समतापमंडल में उड़ते हैं, क्योंकि ये परत उड़ान के लिए अत्यंत सुविधाजनक दशाएँ रखती है। ओजोन परत समतापमंडल में ही स्थित है जो सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणों को रोकती है।
  3. मध्यमंडल – इस परत में ऊँचाई के साथ तापमान कम होने लगता है और 80 से 90 कि.मी. की ऊँचाई पर अर्थात मध्यसीमा पर -110° सेल्सियस तक कम हो जाता है।
  4. आयनमंडल – बाह्यमंडल के निम्न भाग में 80 से 400 कि.मी. के बीच की ऊँचाई पर वायुमंडलीय गैसों का आयनीकरण हो जाता है। इन आयनीकृत कणों का सर्वाधिक संकेंद्रण 250 कि.मी. की ऊँचाई पर है। इसी मंडल में रेडियो तरंगें परावर्तित होती हैं। रेडियो तरंगों के माध्यम से ही दूरदर्शन, रेडियो, मोबाइल फोन, इंटरनेट आदि को देख और सुन सकते हैं।
  5. बाह्यमंडल – यह वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत है तथा इसके बारे में बहुत कम जानकारी है। इस मंडल में हवा का घनत्व नगण्य रह जाता है।

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NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 8 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 8 Challenges to Democracy (लोकतंत्र की चुनौतियाँ)

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 8 Challenges to Democracy (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

संक्षेप में लिखें

1. राजनीतिक सुधार से क्या तात्पर्य है?

(क) राजनीतिक दलों में सुधार को राजनीतिक सुधार कहा जाता है
(ख) लोकतंत्र की विभिन्न चुनौतियों के बारे में सभी सुझाव या प्रस्ताव लोकतांत्रिक सुधार या राजनीतिक सुधार कहे जाते हैं।
(ग) राजनीतिक व्यवस्था में सुधार
(घ) राजनीतिक गतिविधियों में सुधार।

2. लोकतंत्र की परिभाषा या अर्थ बताएँ।

(क) लोकतंत्र शासन का वह स्वरूप है जिसमें लोग अपने शासकों का चुनाव करते हैं।
(ख) लोकतंत्र संसदीय शासन प्रणाली का दूसरा रूप है।
(ग) लोकतंत्र विभिन्न प्रकार चुनौतियों का सामना करता है।
(घ) अफसरशाही के माध्यम से चलाया जाने वाला शासन लोकतंत्र कहलाता है।

3. एक अच्छे लोकतंत्र को किस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है?

(क) एक अच्छे लोकतंत्र में शासक को जनता चुने और जनता की भावनाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप शासक काम करे ।
(ख) अच्छे प्रशासक और अच्छे प्रशासनिक तंत्र अच्छे लोकतंत्र के गुण हैं।
(ग) शासन में जनता की भागीदारी ही अच्छे लोकतंत्र के गुण हैं।
(घ) जनता को अधिक से अधिक अधिकार मिलना ही अच्छे लोकतंत्र की विशेषता है।

4. लोकतांत्रिक सुधारों को किस प्रकार लागू किया जा सकता है?

(क) लोकतांत्रिक सुधारों को कानून और विभिन्न नीतियों या फार्मूलों से लागू किया जा सकता है।
(ख) लोकतांत्रिक सुधारों को प्रशासनिक तंत्र द्वारा लागू किया जा सकता है।
(ग) लोकतांत्रिक सुधारों को योजना आयोग के माध्यम से लागू किया जा सकता है।
(घ) लोकतांत्रिक सुधारों को प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा लागू किया जा सकता है।

5. दुनिया के कितने भागों में लोकतांत्रिक शासन नहीं है?

(क) लगभग आधे भागों में
(ख) लगभग एक तिहाई भागों में
(ग) लगभग एक चौथाई भागों में
(घ) लगभग दो तिहाई भागों में।

6. चुनौती किसे कहते हैं?

(क) विभिन्न प्रकार के संघर्ष
(ख) विभिन्न तरह की मुश्किलें
(ग) लोकतांत्रिक अव्यवस्था
(घ) उपरोक्त सभी

7. विस्तार की चुनौती से आप क्या समझते हैं?

(क) लोकतांत्रिक शासन के बुनियादी सिद्धान्तों को सभी इलाकों, सभी सामाजिक समूहों और विभिन्न संस्थाओं में लागू करना ।
(ख) स्थानीय सरकारों को अधिक अधिकार सम्पन्न बनाना।
(ग) महिलाओं और अल्पसंख्यक समूहों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करना
(घ) उपरोक्त सभी।

8. लोकतंत्र की एक चुनौती का उल्लेख करें।

(क) भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था की चुनौती
(ख) बुनियादी आधार बनाने की चुनौती जैसे सेना का नियंत्रण समाप्त करना
(ग) समस्याओं से छुटकारा पाना
(घ) आर्थिक असमानता को दूर करने की चुनौती।

9. लोकतंत्र के विस्तार की चुनौती का एक उदाहरण है

(क) महिलाओं और अल्पसंख्यकों की भागीदारी सुनिश्चित करना
(ख) स्थानीय निकाय शासन को अधिक शक्ति प्रदान करना
(ग) पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करना
(घ) दलितों और अनुसूचित जनजातियों की भागीदारी सुनिश्चित करना।

10. लोकतंत्र को मजबूत करने की चुनौती का एक उदाहरण दें।

(क) संस्थाओं की कार्यपद्धति को सुधारना
(ख) राजनीतिक दल में सुधार लाना
(ग) सत्ता का विकेंद्रीकरण करना
(घ) उपरोक्त सभी।

11. इसमें मौजूदा गैर-लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को गिराने, सत्ता पर सेना के नियंत्रण को समाप्त करने और एक संप्रभु तथा कारगर शासन व्यवस्था को स्थापित करने की चुनौती है

(क) विस्तार की चुनौती
(ख) लोकतंत्र को मजबूत बनाने की चुनौती
(ग) बुनियादी आधार बनाने की चुनौती
(घ) उपरोक्त सभी।

12. निम्नलिखित में से कौन सी चुनौती हर लोकतंत्र के सामने किसी रूप में हैं?

(क) विस्तार की चुनौती ।
(ख) लोकतंत्र को मजबूत बनाने की चुनौती
(ग) बुनियादी आधार बनाने की चुनौती
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।

उत्तर

  1. (ख)
  2. (क)
  3. (क)
  4. (क)
  5. (ग)
  6. (ख)
  7. (घ)
  8. (ख)
  9. (क)
  10. (क)
  11. (ग)
  12. (ख)

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1. धर्मनिरपेक्षता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर राज्य का अपना कोई धर्म न हो तथा राज्य में रहने वाले व्यक्ति स्वेच्छा से कोई भी धर्म अपना सके तथा राज्य धर्म के आधार पर नागरिकों में भेदभाव न करे तो यह स्थिति धर्म निरपेक्षता कहलाती है।

प्रश्न 2. लोकतांत्रिक व्यवस्था क्या है?
उत्तर यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसके केंद्र में लोग हों अर्थात् लोगों के द्वारा बनाई सरकार, जो लोगों के हितों के लिए काम करेगी तथा लोगों की इच्छा तक ही बनी रहेगी।

प्रश्न 3. निरक्षरता का क्या अर्थ है?
उत्तर वह स्थिति जिसमें लोगों को अक्षरों का ज्ञान न हो अर्थात् वे पढ़े लिखे न हो निरक्षरता कहलाती है।

प्रश्न 4. राजनीतिक सुधार से क्या तात्पर्य है?
उत्तर लोकतंत्र की विभिन्न चुनौतियों के बारे में सभी सुझाव या प्रस्ताव राजनीतिक सुधार कहे जाते हैं।

प्रश्न 5. लोकतांत्रिक सुधारों को किस प्रकार लागू किया जा सकता है?
उत्तर लोकतांत्रिक सुधारों को कानूनों और विभिन्न नीतियों या फार्मूलों से लागू किया जा सकता है।

प्रश्न 6. एक अच्छे लोकतंत्र को किस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है?
उत्तर जनता शासक को चुने और शासक जनता की भावनाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप काम करें।

प्रश्न 7. विस्तार की चुनौती से आप क्या समझते हैं?
उत्तर विस्तार की चुनौती से तात्पर्य लोकतांत्रिक शासन के बुनियादी सिद्धांतों को सभी इलाकों, सभी सामाजिक समूहों और विभिन्न संस्थाओं में लागू करना है।

प्रश्न 8. नए और सावधानी से बनाए गए कानूनों के क्या लाभ होते हैं?
उत्तर नए कानून सारी अवांछित चीजें खत्म कर देंगे यह सोच लेना भले ही सुखद हो लेकिन इस लालच पर लगाम लगाना ही बेहतर है। निश्चित रूप से सुधारों के मामले में कानून की एक महत्त्वपूर्ण भूमिका है। सावधानी से बनाए गए कानून गलत राजनीतिक आचरणों को हतोत्साहित और अच्छे कामकाज को प्रोत्साहित करेंगे।

प्रश्न 9. सबसे बढ़िया कानून किसे माना जा सकता है?
उत्तर सबसे बढ़िया कानून वे हैं जो लोगों को लोकतांत्रिक सुधार करने की ताकत देते हैं। सूचना का अधिकार कानून लोगों को जानकार बनाने और लोकतंत्र के रखवाले के तौर पर सक्रिय करने का अच्छा उदाहरण है। ऐसा कानून भ्रष्टाचार पर रोक लगाने तथा कठोर दंड का प्रावधान करने वाले मौजूदा कानूनों की मदद करता है।

प्रश्न 10. उत्तर प्रदेश सरकार ने एक सर्वेक्षण के उपरांत क्या पाया?
उत्तर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक सर्वेक्षण कराया और पाया कि ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पदस्य अधिकतर डॉक्टर अनुपस्थित थे। वे शहरों में रहते हैं, निजी प्रैक्टिस करते हैं और महीने में सिर्फ एक था दो बार अपनी नियुक्ति वाली जगह पर घूम आते हैं। गाँव वालों को साधारण रोगों के इलाज के लिए भी शहर जाना होता है।

प्रश्न 11. सांप्रदायिकता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर जब किसी एक धर्म के लोग अपने आपको दूसरे धर्मों से ऊपर समझते हैं तथा अपने धर्म के लिए दूसरे धर्मों को नीचा दिखाते हैं तो यह प्रवृति सांप्रदायिकता कहलाती है।

प्रश्न 12. चुनौतियाँ का अर्थ बताएँ।
उत्तर लोकतंत्र के मार्ग में आने वाली ने बाधाएँ जिन्हें दूर किए बिना लोकतंत्र का विकास संभव नहीं होता।

प्रश्न 13. दुनिया के कितने भागों में लोकतांत्रिक शासन नहीं है?
उत्तर दुनिया के लगभग एक चौथाई भागों में लोकतांत्रिक शासन नहीं है।

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1. विस्तार की चुनौती पर सफलता पाने के लिए किन्हीं तीन उपायों की व्याख्या कीजिए। [AI CBSE 2013 (C)]
उत्तर देखें लघु उत्तरीय प्रश्न संख्या 7।

प्रश्न 2. विधिक-संवैधानिक बदलावों को लाने मात्र से ही लोकतंत्र की चुनौतियों का हल नहीं किया जा सकता।” उदाहरण सहित इस कथन की न्याय संगत पुष्टि कीजिए। (AI CBSE 2013)
उत्तर कानून बनाकर राजनीति को सुधारने की बात सोचना बहुत लुभावना लग सकता है। नए कानून सारी अवांछित चीजें खत्म कर देंगे यह सोच लेना भले ही सुखद हो लेकिन इस लालच पर लगाम लगाना ही बेहतर है। निश्चित रूप से सुधारों के मामले में कानून की एक महत्त्वपूर्ण भूमिका है। सावधानी से बनाए गए कानून गलत राजनीतिक आचरणों को हतोत्साहित और अच्छे कामकाज को प्रोत्साहित करेंगे। पर विधिक संवैधानिक बदलावों को ला देने भर से लोकतंत्र की चुनौतियों को हल नहीं किया जा सकता। उदाहरण स्वरूप-क्रिकेट एल.वी.डब्लू. के नियम में बदलाव से बल्लेबाजों द्वारा अपनाए जाने वाले बल्लेबाजी के नकारात्मक दाँव पेंच को कम किया जा सकता है पर यह कोई भी नहीं सोच सकता कि सिर्फ नियमों में बदलाव कर देने भर से क्रिकेट खेल सुधर जाएगा उचित नहीं है।

प्रश्न 3. संसार के कुछ देश ‘लोकतंत्र के विस्तार की चुनौती’ का किस प्रकार सामना कर रहे हैं? (AI CBSE 2012)
उत्तर संसार के कुछ देश लोकतंत्र के विस्तार की चुनौती का सामना कर रहे हैं। कई देशों में एकात्मक शासन व्यवस्था कायम है ऐसी स्थिति में शासन का केंद्र एक स्थान पर होता है। जबकि लोकतंत्र का विस्तार तभी हो सकता है जब स्थानीय सरकारों को अधिक अधिकार संपन्न बनाना, संघ की सभी इकाइयों के लिए संघ के सिद्धांतों को व्यावहारिक स्तर पर लागू करना, महिलाओं और अल्पसंख्यक समूहों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करना आदि ऐसी ही चुनौतियाँ

प्रश्न 4. विश्व में कुछ देश किस प्रकार लोकतंत्र की बुनियादी आधार बनाने की चुनौती का सामना कर रहे हैं? उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए। (CBSE 2012)
उत्तर दुनिया के एक चौथाई हिस्से में अभी भी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था नहीं है। इन इलाकों में लोकतंत्र के लिए बहुत ही मुश्किल चुनौतियाँ हैं। इन देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था की तरफ जाने और लोकतांत्रिक सरकार गठित करने के लिए जरूरी बुनियादी आधार बनाने की चुनौती है। इसमें मौजूदा गैर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को गिराने, सत्ता पर सेना के नियंत्रण को समाप्त करने और एक संप्रभु तथा कारगर शासन व्यवस्था को स्थापित करने की चुनौती है।

प्रश्न 5. लोकतंत्र की पुर्नपरिभाषा में किन-किन तत्वों को जोड़ा गया?
उत्तर पहले लोकतंत्र की परिभाषा दी गई थी-लोकतंत्र शासन का वह स्वरूप है जिसमें लोग अपने शासकों का चुनाव खुद करते हैं। इसके बाद कुछ और चीजें इसमें जोड़ी गईं

  1. लोगों द्वारा चुने गए शासक ही सारे फैसले लें।
  2. चुनाव में लोगों को वर्तमान शासकों को बदलने और अपनी पसंद जाहिर करने का पर्याप्त अवसर और विकल्प मिलना चाहिए। ये विकल्प और अवसर हर किसी को बराबरी से उपलब्ध होने चाहिए।
  3. विकल्प चुनने के इस तरीके से ऐसी सरकार का गठन होना चाहिए जो संविधान के बुनियादी नियमों और नागरिकों के अधिकारों को मानते हुए काम करे।

प्रश्न 6. किस प्रकार के कानून राजनीति में सफल होते हैं?
उत्तर राजनीतिक कार्यकर्ता को अच्छे काम करने के लिए बढ़ावा देनेवाले या लाभ पहुँचानेवाले कानूनों के सफल होने की संभावना ज्यादा होती है। सबसे बढ़िया कानून वे हैं जो लोगों को लोकतांत्रिक सुधार करने की ताकत देते हैं। सूचना का अधिकार-कानून लोगों को जानकार बनाने और लोकतंत्र के रखवाले के तौर पर सक्रिय करने को अच्छा उदाहरण है। ऐसा कानून भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाता है और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने तथा कठोर दंड लागू करने वाले मौजूदा कानूनों की मदद करता है।

प्रश्न 7. भारत में लोकतंत्र के विस्तार की चुनौती का वर्णन करें। [AI CBSE 2013 (C)]
उत्तर अधिकांश लोकतंत्रीय व्यवस्थाओं के सामने अपने विस्तार की चुनौती है। इसमें लोकतांत्रिक शासन के बुनियादी सिद्धांतों को सभी इलाकों, सभी सामाजिक समूहों और विभिन्न संस्थाओं में लागू करना शामिल है। भारत में भी लोकतंत्र के विस्तार की जरूरत है। इसके लिए स्थानीय संस्थाओं को अधिक अधिकार संपन्न बनाना होगा। संघात्मक शासन के सिद्धांतों को व्यावहारिक स्तर पर लागू करना होगा, राज्यों की स्वायत्तता को बढ़ाना होगा, केंद्र का राज्यों पर नियंत्रण कम करना होगा। महिलाओं, अल्पसंख्यकों तथा अन्य समूहों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। लोगों को जागरूक बनाना होगा, तभी लोकतंत्र का विस्तार हो सकेगा।

प्रश्न 8. लोकतंत्र के लिए जरूरी पहलूओं का वर्णन कीजिए। HOTS
उत्तर लोकतंत्र के लिए कुछ जरूरी पहलू निम्नलिखित हैं

  1. लोकतांत्रिक अधिकार लोकतंत्र का प्रमुख पहलू है। यह अधिकार सिर्फ वोट देने, चुनाव लड़ने और राजनीतिक संगठन बनाने भर के लिए नहीं है। इसमें सामाजिक और आर्थिक अधिकारों को शामिल करते हैं, जिन्हें लोकतांत्रिक शासन को अपने नागरिकों को देना ही चाहिए।
  2. सत्ता में हिस्सेदारी को लोकतंत्र की भावना के अनुकूल माना गया है। इस प्रकार सरकारों और सामाजिक समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र के लिए जरूरी है।
  3. लोकतंत्र बहुमत की तानाशाही या क्रूर शासन व्यवस्था नहीं हो सकता और अल्पसंख्यक आवाजों का आदर करना लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है।
  4. समाज में विद्यमान हर प्रकार के भेदभाव को मिटाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्त्वपूर्ण काम है।
  5. लोकतांत्रिक व्यवस्था में हमें कुछ न्यूनतम नतीजों की उम्मीद तो करनी ही चाहिए।

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1. लोकतंत्र के सम्मुख प्रमुख चुनौतियों का वर्णन करें। HOTS
उत्तर अलग-अलग देशों के सामने अलग-अलग तरह की चुनौतियाँ होती हैं। तीन प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं

  1. दुनिया के जिन देशों में अभी भी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था नहीं है इन इलाकों में लोकतांत्रिक व्यवस्था की तरफ़ जाने और लोकतांत्रिक सरकार गठित करने के लिए जरूरी बुनियादी आधार बनाने की चुनौती है। इसमें मौजूदा गैरलोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को गिराने, सत्ता पर सेना के नियंत्रण को समाप्त करने और एक संप्रभु तथा कारगर शासन व्यवस्था को स्थापित करने की चुनौती है।
  2. अधिकांश स्थापित लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने अपने विस्तार की चुनौती है। इसमें लोकतांत्रिक शासन के बुनियादी सिद्धांतों को सभी इलाकों, सभी सामाजिक समूहों और विभिन्न संस्थाओं में लागू करना,शामिल है। स्थानीय अधिकारों को अधिक अधिकार संपन्न बनाना, संघ की सभी इकाइयों के लिए संघ के सिद्धांतों को व्यावहारिक स्तर पर लागू करना, महिलाओं और अल्पसंख्यक समूहों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करना आदि ऐसी ही चुनौतियाँ हैं। इसका यह भी मतलब है कि कम-से-कम चीजें ही लोकतांत्रिक नियंत्रण के बाहर रहनी चाहिए। भारत और | दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्रों में से एक अमेरिका जैसे देशों के सामने भी यह चुनौती है।
  3. तीसरी चुनौती लोकतंत्र को मजबूत करने की है। हर लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने किसी-न-किसी रूप में यह चुनौती रहती ही है। इसमें लोकतांत्रिक संस्थाओं और व्यवहारों को मजबूत बनाना शामिल है। यह काम इस तरह से होना चाहिए कि लोग लोकतंत्र से जुड़ी अपनी उम्मीदों को पूरा कर सकें। लेकिन अलग-अलग समाजों में आम आदमी की लोकतंत्र में अलग-अलग तरह की अपेक्षाएँ होती हैं। इसलिए यह चुनौती दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग अर्थ और अलग स्वरूप ले लेती है। संक्षेप में कहें तो इसका मतलबे संस्थाओं की कार्य-पद्धति को सुधारना और मज़बूत करना होता है, ताकि लोगों की भागीदारी और नियंत्रण में वृद्धि हो। इसके लिए फैसला लेने की प्रक्रिया पर अमीर और प्रभावशाली लोगों के नियंत्रण और प्रभाव को कम करने की जरूरत होती है।

प्रश्न 2. एक अच्छे लोकतंत्र की परिभाषा दीजिए। इसकी प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर लोकतंत्र शासन को वह स्वरूप है जिसमें लोग अपने शासकों का स्वयं चुनाव करते हैं। ये शासक संविधान के बुनियादी नियमों और नागरिकों के अधिकारों को मानते हुए कानून बनाते हैं। चुनाव में लोगों को शासकों को बदलने और अपनी पसंद जाहिर करने का पर्याप्त अवसर और विकल्प मिलता है। ये अवसर सबको समान रूप से मिलते हैं।

लोकतांत्रिक शासन की मुख्य विशेषताएँ –

  1. लोकतांत्रिक शासन में अंतिम सत्ता जनता के हाथों में होती है। जनता अपने शासकों का चुनाव करती है और जब चाहे तब उन्हें उनके पद से हटा सकती है।
  2. लोकतांत्रिक शासन में सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है, इसलिए वह संविधान के नियमों तथा जनता के हितों को ध्यान में रखकर कानून बनाती है।
  3. लोकतांत्रिक देशों में लोगों को वोट डालने, चुनाव लड़ने और राजनीतिक संगठन बनाने के अतिरिक्त विभिन्न सामाजिक और आर्थिक अधिकार भी प्राप्त होते हैं।
  4. लोकतांत्रिक शासन समाज में विद्यमान मतभेदों का शांतिपूर्ण तरीके से निपटारा कर सकता है। लोकतंत्र विभिन्न सामाजिक टकरावों को कम करने की कोशिश करता है।
  5. लोकतंत्र में नागरिकों को सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करने का पूरा अधिकार होता है।
  6. लोकतंत्र देश के बहुसंख्यक समुदाय के साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की भी रक्षा करता है।
  7. एक अच्छा लोकतांत्रिक शासन वह होगा जिसमें अधिक-से-अधिक जनता अधिक-से-अधिक भागीदारी दिखाए। सरकारी मसलों पर जनता अपनी राय दे, यदि जनता राजनीतिक रूप से शिक्षित होगी तो वह लोकतंत्र में भागीदारी कर सकेगी, जो एक अच्छे लोकतंत्र की प्रमुख विशेषता है।
  8. अच्छे लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराए जाने चाहिए। जिससे सही प्रतिनिधि चुनकर सरकार में आ सकें।
  9. लोकतांत्रिक देश में जनता को राजनीतिक समानता प्राप्त होती है। कोई भी व्यक्ति सरकार में जा सकता है और राजनीतिक दल का निर्माण कर सकता है।
  10. एक लोकतांत्रिक देश में सरकार विभिन्न प्रकार की असमानताओं को कम करने की कोशिश करती है।

इस प्रकार एक अच्छे लोकतंत्र की कई विशेषताएँ हैं। जहाँ ये सभी विशेषताएँ होती हैं वहाँ लोकतंत्र को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

प्रश्न 3. विभिन्न राजनीतिक सुधारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर लोकतंत्र की विभिन्न चुनौतियों के बारे में सभी सुझाव या प्रस्ताव लोकतांत्रिक सुधार या राजनीतिक सुधार कहे जाते हैं। किसी भी लोकतांत्रिक देश में निम्नलिखित राजनीतिक सुधार किए जा सकते हैं

  1. कानून बनाकर कुछ हद तक राजनीतिक सुधार किए जा सकते हैं। सावधानी से कानून बनाकर गलत राजनीतिक आचरणों को हतोत्साहित और अच्छे कामकाज को प्रोत्साहित करेंगे।
  2. कानूनी परिवर्तनों के कभी-कभी उल्टे परिणाम निकलते हैं। आमतौर पर किसी चीज की मनाही करने वाले कानून राजनीति में ज्यादा सफल नहीं होते। राजनीतिक कार्यकर्ता को अच्छे काम करने के लिए बढ़ावा देने वाले या लाभ पहुँचाने वाले कानूनों के सफल होने की संभावना ज्यादा होती है। सबसे बढ़िया कानून वे हैं जो लोगों को लोकतांत्रिक सुधार करने की ताकत देते हैं। सूचना का अधिकार-कानून लोगों को जानकार बनाने और लोकतंत्र के रखवाले के तौर पर सक्रिय करने का अच्छा उदाहरण है। ऐसा कानून भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाता है और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने तथा कठोर दंड का प्रावधान करने वाले वाले मौजूदा कानूनों की मदद करता है।
  3. लोकतांत्रिक सुधार तो मुख्यत: राजनीतिक दल ही करते हैं। इसलिए राजनीतिक सुधारों का ज़ोर मुख्यत: लोकतांत्रिक कामकाज को ज्यादा मजबूत बनाने पर होना चाहिए। इससे आम नागरिक की राजनीतिक भागीदारी के स्तर और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
  4. राजनीतिक सुधार के किसी भी प्रस्ताव में अच्छे समाधान की चिंता होने के साथ-साथ यह सोच भी होनी चाहिए कि इन्हें कौन और क्यों लागू करेगा? यह मान लेना समझदारी नहीं कि संसद कोई ऐसा कानून बना देगी जो हर राजनीतिक दल और सांसद के हितों के खिलाफ़ हो। पर लोकतांत्रिक आंदोलन, नागरिक संगठन और मीडिया पर भरोसा करने वाले उपायों के सफल होने की संभावना होती है।

प्रश्न 4. लोकतंत्र की नवीन परिभाषा में किन बातों को सम्मिलित किया गया है?
उत्तर

लोकतंत्र की नवीन परिभाषा में ये बातें सम्मिलित की गई हैं –

  1. जनता द्वारा चुने गए शासक ही सारे प्रमुख फैसले लें।
  2. चुनाव में लोगों को वर्तमान शासकों को बदलने और अपनी पसंद जाहिर करने का पर्याप्त अवसर और विकल्प मिलना चाहिए। ये विकल्प और अवसर हर किसी को बराबरी के आधार पर मिले।
  3. विकल्प चुनने के इस तरीके से ऐसी सरकार का गठन होना चाहिए जो संविधान के बुनियादी नियमों और नागरिकों के अधिकारों को मानते हुए काम करें।
  4. लोकतंत्र के उन आदर्शों को इसमें सम्मिलित किया जाना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक और गैर-लोकतांत्रिक सरकारों में अंतर किया जा सके।
  5. लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोकतांत्रिक अधिकार के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक अधिकारों की चर्चा की जानी चाहिए।
  6. लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी हो।
  7. लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की आवाज़ का भी आदर होना चाहिए।
  8. हर प्रकार के भेदभाव को नष्ट करना चाहिए।
  9. लोकतांत्रिक व्यवस्था में हमें कुछ न कुछ परिणाम अवश्य प्राप्त करने के प्रयास करने चाहिए।

स्वयं करें

  1. भारतीय लोकतंत्र के समक्ष आने वाली चुनौतियों का वर्णन करें।
  2. लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक सुधार कैसे किए जा सकते हैं?
  3. कानून बनाकर राजनीतिक सुधार करना कहाँ तक सही है?
  4. लोकतंत्र की परिभाषा दें।
  5. एक अच्छे लोकतंत्र की विशेषता बताइए।
  6. चुनौतियों के उन तीन प्रमुख का उल्लेख करें जिनका सामना विश्व के अधिकांश लोकतंत्र कर रहे हैं।
  7. म्यांमार लोकतांत्रिक व्यवस्था की ओर जाने के लिए बुनियादी आधार बनाने की चुनौती का सामना किस प्रकार कर रहा है? व्याख्या करें।
  8. कुछ दिशा निर्देशों की चर्चा करें जिन्हें भारत में राजनीतिक सुधारों के लिए तरीका और जरिया हूँढते समय अपने ध्यान में रखा जा सकता है।
  9. लोकतांत्रिक सुधारों से क्या तात्पर्य है?

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NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 5

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 5 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 5 Minerals and Rocks (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) निम्न में से कौन ग्रेनाइट के दो प्रमुख घटक हैं?
(क) लौह एवं निकेल
(ख) सिलिका एवं ऐलुमिनियम
(ग) लौह एवं चाँदी
(घ) लौह ऑक्साइड एवं पोटैशियम
उत्तर- (ख) सिलिका एवं ऐलुमिनियम

(ii) निम्न में से कौन-सा कायांतरित शैलों को प्रमुख लक्षण है?
(क) परिवर्तनीय
(ख) क्रिस्टलीय
(ग) शांत
(घ) पत्रण
उत्तर- (क) परिवर्तनीय

(iii) निम्न में से कौन-सा एकमात्र तत्व वाला खनिज नहीं है?
(क) स्वर्ण
(ख) माइका
(ग) चाँदी
(घ) ग्रेफ़ाइट
उत्तर- (ख) माइका।

(iv) निम्न में से कौन-सा कठोरतम खनिज है?
(क) टोपाज़
(ख) क्वार्ट्ज़
(ग) हीरा
(घ) फ़ेल्डस्पर
उत्तर- (ग) हीरा

(v) निम्न में से कौन-सी शैल अवसादी नहीं है?
(क) टायलाइट
(ख) ब्रेशिया
(ग) बोरैक्स
(घ) संगमरमर
उत्तर- (घ) संगमरमर

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
(i) शैल से आप क्या समझते हैं? शैल के तीन प्रमुख वर्गों के नाम बताएँ।
उत्तर- पृथ्वी की पर्पटी चट्टानों से बनी है। चट्टान का निर्माण एक या एक से अधिक खनिजों से मिलकर होता है। चट्टानें कठोर या नरम तथा विभिन्न रंगों की हो सकती हैं। जैसे ग्रेनाइट कठोर तथा सोपस्टोन नरम है। गैब्रो काला तथा क्वार्टज़ाइट दूधिया श्वेत हो सकता है। शैलों में खनिज घटकों का कोई निश्चित संघटक नहीं होता है। शैलों में सामान्यतः पाए जाने वाले खनिज पदार्थ फेल्डस्पर तथा क्वार्ट्ज हैं। शैलों को निर्माण पद्धति के आधार पर तीन समूहों में विभाजित किया गया है-
(i) आग्नेय शैल
(ii) अवसादी शैल
(iii) कायांतरित शैल।

(ii) आग्नेय शैल क्या हैं? आग्नेय शैल के निर्माण की पद्धति एवं लक्षण बताएँ।
उत्तर- आग्नेय शैलों का निर्माण पृथ्वी के आंतरिक भाग के मैग्मा से होता है, अतः इनको प्राथमिक शैल भी कहते हैं। मैग्मा के ठंडे होकर घनीभूत हो जाने पर आग्नेय शैलों का निर्माण होता है। मैग्मा ठंडा होकर ठोस बन जाता है तो यह आग्नेय शैल कहलाता है। इसकी बनावट इसके कणों के आकार एवं व्यवस्था अथवा पदार्थ की भौतिक अवस्था पर निर्भर करती है। यदि पिघले हुए पदार्थ धीरे-धीरे गहराई तक ठंडे होते हैं। तो खनिज के कण पर्याप्त बड़े हो सकते हैं। सतह पर हुई आकस्मिक शीतलता के कारण छोटे एवं चिकने कण बनते हैं। शीतलता की मध्यम परिस्थितियाँ होने पर आग्नेय चट्टान को बनाने वाले कण मध्यम आकार के हो सकते हैं। ग्रेनाइट, बेसाल्ट, वोल्केनिक ब्रेशिया तथा टफ़ आग्नेय शैल के उदाहरण हैं।

(iii) अवसादी शैल का क्या अर्थ है? अवसादी शैल के निर्माण की पद्धति बताएँ।
उत्तर- अवसादी अर्थात् सेडीमेंटरी शब्द की व्युत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द सेडिमेंट्स से हुई है, जिसका अर्थ है-व्यवस्थित होना। पृथ्वी की सतह की शैलें अपक्षयकारी कारकों के प्रति अनावृत होती हैं, जो विभिन्न आकार के विखंडों में विभाजित होती हैं। ऐसे उपखंडों को विभिन्न बहिर्जनित कारकों के द्वारा संवहन एवं निक्षेपण होता है। सघनता के द्वारा ये संचित पदार्थ शैलों में परिणत हो जाते हैं। यह प्रक्रिया शिलीभवन कहलाती है। बहुत-सी अवसादी शैलों में निक्षेपित परतें शिलीभवन के बाद भी अपनी विशेषताएँ बनाए रखती हैं। इसी कारणवश बालुकाश्म, शैल जैसी अवसादी शैलों में विविध सांद्रता वाली अनेक सतहें होती हैं।

(iv) शैली चक्र के अनुसार प्रमुख प्रकार की शैलों के मध्य क्या संबंध होता है?
उत्तर- शैली चक्र एक सतत प्रक्रिया होती है, जिसमें पुरानी चट्टानें परिवर्तित होकर नवीन रूप लेती हैं। आग्नेय चट्टानें तथा अन्य (अवसादी एवं कायांतरित) चट्टानें इन प्राथमिक चट्टानों से निर्मित होती हैं। आग्नेय चट्टानों को कायांतरित चट्टानों में परिवर्तित किया जा सकता है। आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानों से प्राप्त अंशों से अवसादी चट्टानों का निर्माण होता है। अवसादी चट्टानें अपखंडों में परिवर्तित हो सकती हैं तथा ये अपखंड अवसादी चट्टानों के निर्माण का एक स्रोत हो सकते हैं।

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) ‘खनिज’ शब्द को परिभाषित करें एवं प्रमुख प्रकार के खनिजों के नाम लिखें।
उत्तर- खनिज एक ऐसा प्राकृतिक, अकार्बनिक तत्व है, जिसमें एक क्रमबद्ध परमाण्विक संरचना, निश्चित रासायनिक संघटन तथा भौतिक गुणधर्म होते हैं। खनिज का निर्माण दो या दो से अधिक तत्वों से मिलकर होता है। लेकिन कभी-कभी सल्फर, ताँबा, चाँदी, स्वर्ण, ग्रेफाइट जैसे एकतत्वीय खनिज भी पाए जाते हैं। भूपर्पटी पर कम-ये-कम 2000 प्रकार के. खनिजों को पहचाना गया है और उनको नाम दिया गया है। लेकिन इनमें से सामान्यतः उपलब्ध लगभग सभी खनिज तत्व छह प्रमुख खनिज समूहों से संबंधित होते हैं, जिनको चट्टानों के निर्माण करने वाले प्रमुख खनिज माना गया है। कुछ प्रमुख खनिजों के नाम

  1. फ़ेल्डस्पर – सिलिका, ऑक्सीजन, सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, ऐलुमिनियम आदि तत्व इसमें शामिल होते हैं।
  2. क्वार्टज़ – यह रेत एवं ग्रेनाइट का प्रमुख घटक है। इसमें सिलिका होता है। यह एक कठोर खनिज है तथा पानी में सर्वथा अघुलनशील खनिज है।
  3. पाइरॉक्सीन – कैल्शियम, ऐलुमिनियम, मैग्नीशियम, आयरन तथा सिलिका इसमें शामिल हैं।
  4. एम्फ़ीबोल – इसके प्रमुख तत्व ऐलुमिनियम, कैल्शियम, सिलिका, लौह, मैंग्नीशियम हैं।
  5. अंभ्रक – इसमें पोटैशियम, ऐलुमिनियम, मैग्नीशियम, लौह, सिलिका आदि निहित होता है।
  6. धात्विक खनिज – इनको तीन प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है-
    (i) बहुमूल्य धातु
    (ii) लौह धातु
    (iii) अलौह धातु।

(ii) भूपृष्ठीय शैलों के प्रमुख प्रकार के शैलों की प्रकृति एवं उनकी उत्पत्ति की पद्धति का वर्णन करें। आप उनमें अंतर कैसे स्थापित करेंगे?
उत्तर- पृथ्वी की पर्पटी शैलों से बनी है। शैलों का निर्माण एक या एक से अधिक खनिजों से मिलकर होता है। शैल कठोर या नरम तथा विभिन्न रंगों के हो सकते हैं। जैसे ग्रेनाइट कठोर तथा शैलखड़ी नरम है। चट्टानों में सामान्यतः पाए जाने वाले खनिज पदार्थ फेल्डस्पर तथा क्वार्ट्ज़ हैं। शैलों को उनकी निर्माण-पद्धति के आधार पर तीन भागों में विभाजित किया गया है-
1. आग्नेय शैल
2. अवसादी शैल
3. कायांतरित शैल।

  1. आग्नेय शैल – इस शैल का निर्माण ज्वालामुखी के बाहर फेंके गए लावा अथवा उष्ण मैग्मा के भूपर्पटी के नीचे ठंडा होने से हुआ है। आग्नेय शैलों को रासायनिक संघटन और गठने के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। मैग्मा के रासायनिक विभेदन के आधार पर आग्नेय शैलें दो प्रकार की होती हैं – (क) मैफिक (ख) फेल्सिक। आग्नेय शैल के उदाहरण-ग्रेनाइट, बेसाल्ट आदि हैं।
  2. अवसादी शैल – ये विभिन्न शैलों के अपक्षय तथा अपरदन से प्राप्त अवसादों से निर्मित होती है। पवन, जल तथा हिम शैलों को अपरदित करते हैं और अवसाद को निम्न क्षेत्रों में परिवहित करते हैं। जब इनका निक्षेप समुद्र में होता है, वे संपीड़ित और कठोर होकर शैल परतों की रचना करते हैं। अवसादी शैल का उदाहरण चूना-पत्थर, कोयला, बलुआ पत्थर, मृत्तिका, खड़िया, जिप्सम, खनिज तेल आदि हैं।
  3. कायांतरित शैल – जो शैलें ताप अथवा दाब या फिर दोनों के कारण बनती हैं, वे कायांतरित शैल कहलाती हैं। ताप तथा दाब मूल शैल की विशेषताओं को नए खनिजों का निर्माण करके बदल देते हैं। कायांतरित शैल के प्रमुख उदाहरण स्लेट, संगमरमर, हीरा, शिस्ट आदि हैं।

(iii) कायांतरित शैल क्या हैं? इनके प्रकार एवं निर्माण की पद्धति का वर्णन करें।
उत्तर- कायांतरित का अर्थ है स्वरूप में परिवर्तन। दाब, आयतन एवं तापमान में परिवर्तन की प्रक्रिया के फलस्वरूप इन शैलों का निर्माण होता है। ये शैलें दाब, आयतन तथा तापमान में परिवर्तन के द्वारा निर्मित होते हैं। जब विवर्तनिक प्रक्रिया के कारण शैलें निचले स्तर की ओर बलपूर्वक खिसक आती हैं। या जब भृपृष्ठ से उठता, पिघला हुआ मैग्मा भूपृष्ठीय शैलों के संपर्क में आता है या जब ऊपरी शैलों के कारण निचली शैलों पर अत्यधिक दाब पड़ता है तब कायांतरण होता है। कायांतरण वह प्रक्रिया है, जिसमें समेकित शैलों में पुनः क्रिस्टलीकरण होता है तथा वास्तविक शैलों में पदार्थ पुनः संगठित हो जाते हैं।

बिना किसी विशेष रासायनिक परिवर्तनों के टूटने एवं पिसने के कारण वास्तविक शैलों में यांत्रिकी व्यवधान एवं उनका पुनः संगठित होना गतिशील कायांतरण कहलाता है। ऊष्मीय कायांतरण के कारण शैलों के पदार्थों में रासायनिक परिवर्तन एवं पुनः क्रिस्टलीकरण होता है। ऊष्मीय कायांतरण के दो प्रकार होते हैं-संपर्क कायांतरण एवं प्रादेशिक कायांतरण। संपर्क रूपांतरण में शैलें गर्म, ऊपर आते हुए मैग्मा एवं लावा के संपर्क में आती हैं तथा उच्च तापमान में शैल के पदार्थों का पुन: क्रिस्टलीकरण होता है। अक्सर शैलों में मैग्मा अथवा लावा के योग से नए पदार्थ उत्पन्न होते हैं। प्रादेशिक कायांतरण में उच्च तापमान, दबाव अथवा इन दोनों के कारण शैलों में विवर्तनिक दबाव के कारण विकृतियाँ होती हैं, जिससे शैलों में पुनः क्रिस्टलीकरण होता है। कायांतरित शैलें ताप अथवा दाब या फिर दोनों के कारण बनते हैं। ताप तथा दाब मूल शैल की विशेषताओं को नए खनिजों के निर्माण में बदल देते हैं। कायांतरित शैल के प्रमुख उदाहरण स्लेट,
संगमरमर, हीरा, शिस्ट आदि हैं।

परियोजना कार्य|
प्र० 1. विभिन्न प्रकार की शैलों के नमूने एकत्र करें एवं उनके भौतिक गुण-धर्म के आधार पर उनकों पहचाने एवं उनके प्रकार सुनिश्चित करें।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।

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NCERT Solutions for Class 10 Social Science Geography Chapter 6 Hindi

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Geography Chapter 6 Manufacturing Industries (विनिर्माण उद्योग)

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Geography Chapter 6 Manufacturing Industries (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास

पाठ्यपुस्तक से

संक्षेप में लिखें

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न

(i) निम्न में से कौन-सा उद्योग चूना पत्थर को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करता है?
(क) एल्यूमिनियम
(ख) चीनी
(ग) सीमेंट
(घ) पटसन।

(ii) निम्न में से कौन-सी एजेंसी सार्वजनिक क्षेत्र में स्टील को बाजार में उपलब्ध कराती है?
(क) हेल (HAIL)
(ख) सेल (SAIL)
(ग) टाटा स्टील (TATA STEEL)
(घ) एमएनसीसी (MNCC)

(iii) निम्न में से कौन-सा उद्योग बॉक्साइट को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करता है?
(क) एल्यूमिनियम
(ख) सीमेंट
(ग) पटसन ।
(घ) स्टील।

(iv) निम्न में से कौन-सा उद्योग दूरभाष, कंप्यूटर आदि संयंत्र निर्मित करते हैं?
(क) स्टील
(ख) एल्यूमिनियम
(ग) इलेक्ट्रॉनिक
(घ) सूचना प्रौद्योगिकी।

उत्तर (i) (ग), (ii) (ख), (iii) (क), (iv) (घ)।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) विनिर्माण क्या है?
उत्तर कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को वस्तु निर्माण या विनिर्माण कहते हैं; जैसे-लकड़ी से कागज बनाना, गन्ने से चीनी बनाना तथा लौह अयस्क से लोहा इस्पात संयंत्र लगाना आदि। विनिर्माण उद्योग किसी भी देश के विकास की रीढ़ माने जाते हैं, क्योंकि ये कृषि के आधुनिकीकरण के साथ-साथ अन्य उद्योगों के विकास में भी सहायक होते हैं। |

(ii) उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन भौतिक कारक बताएँ।
उत्तर उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले भौतिक कारक निम्नलिखित हैं

  1. कच्चे माल की उपलब्धता-अधिकांश उद्योग वहीं स्थापित किए जाते हैं जहाँ उनके लिए कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो सके। जैसे-अधिकांश लोहा इस्पात उद्योग प्रायद्वीपीय भारत में ही हैं, क्योंकि वहाँ लोहे की खाने हैं और कच्चा माल आसानी से प्राप्त हो जाता है।
  2. शक्ति के विभिन्न साधन-जहाँ उद्योगों को चलाने के लिए शक्ति के विभिन्न साधन प्राप्त हो जाएँगे वहीं उद्योगों | की स्थापना की जाएगी।
  3. जेल की सुलभता-विभिन्न उद्योगों के लिए जल की आवश्यकता होती है। जिन क्षेत्रों में जल सुलभता से प्राप्त होता है वहाँ उद्योग स्थापित किए जाते हैं। जैसे-प० बंगाल में जूट मीलें इसलिए स्थापित हैं क्योंकि वहाँ हुगली नदी से पानी मिल जाता है।

(iii) औद्योगिक अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन मानवीय कारक बताएँ।
उत्तर औद्योगिक अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन मानवीय कारक निम्नलिखित हैं

  1. सस्ते श्रमिकों की उपलब्धता-जहाँ विभिन्न उद्योगों में काम करने के लिए सस्ते श्रमिक उपलब्ध होते हैं वहाँ । अधिकांश उद्योग स्थापित किए जाते हैं।
  2. संचार एवं परिवहन के साधन-विभिन्न उद्योगों में कच्चा माल पहुँचाने तथा तैयार माल बाजार तक ले जाने के लिए संचार एवं परिवहन के अच्छे साधन जरूरी हैं। जहाँ ये साधन अच्छे होंगे वहाँ अधिकांश उद्योग लगाए जाते हैं।
  3. पूँजी व बैंक की सुविधाएँ-विभिन्न उद्योगों को लगाने के लिए बड़ी पूँजी की आवश्यकता होती है। जिन क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाएँ अच्छी होती हैं वहाँ अधिकांश उद्योग खोले जाते हैं।

(iv) आधारभूत उद्योग क्या है? उदाहरण देकर बताएँ।
उत्तर वे उद्योग जो केवल अपने लिए ही महत्त्वपूर्ण नहीं हैं बल्कि बहुत से उद्योग इन उद्योगों पर निर्भर करते हैं। इसलिए, ये महत्त्वपूर्ण हैं। ऐसे उद्योगों को आधारभूत उद्योग कहते हैं। जैसे-लोही इस्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग है, क्योंकि अन्य सभी भारी, हल्के और मध्यम उद्योग इनसे बनी मशीनरी पर निर्भर हैं। विभिन्न प्रकार के इंजीनियरिंग सामान, निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलीफोन, वैज्ञानिक उपकरण और विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण के लिए इस्पात की आवश्यकता होती है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

(i) संकलित इस्पात उद्योग मिनी इस्पात उद्योगों से कैसे भिन्न है? इस उद्योग की क्या समस्याएँ हैं? किन सुधारों के अंतर्गत इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ी है?  
उत्तर  लोहा तथा इस्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग है। ये दो प्रकार के होते हैं-संकलित उद्योग तथा मिनी इस्पात उद्योग। भारत में 10 मुख्य संकलित उद्योग तथा बहुत से छोटे इस्पात संयंत्र हैं। एक संकलित इस्पात संयंत्र बड़ा संयंत्र होता है जिसमें कच्चे माल को एक स्थान पर एकत्रित करने से लेकर इस्पात बनाने, उसे ढालने और उसे आकार देने तक की प्रत्येक क्रिया की जाती है। मिनी इस्पात उद्योग छोटे संयंत्र हैं जिनमें विद्युत भट्टी, रद्दी इस्पात व स्पंज आयरन का प्रयोग होता है। इनमें रि-रोलर्स होते हैं जिनमें इस्पात सिल्लियों का इस्तेमाल किया जाता है। ये हल्के स्टील या निर्धारित अनुपात के मृदु व मिश्रित इस्पात का उत्पादन करते हैं। लोहा इस्पात उद्योग के सामने कई समस्याएँ रही हैं

  1. उच्च लागत तथा कोकिंग कोयले की सीमित उपलब्धता
  2. कम श्रमिक उत्पादकता
  3. ऊर्जा की अनियमित पूर्ति
  4. अविकसित अवसंरचना

इन समस्याओं को दूर करके उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कुछ सुधार करने की आवश्यकता है। निजी क्षेत्र में उद्यमियों के प्रयत्न से तथा उदारीकरण व प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ने इस उद्योग को प्रोत्साहन दिया है। ईस्पात उद्योग को
अधिक स्पर्धावान बनाने के लिए अनुसंधान और विकास के संसाधनों को नियत करने की आवश्यकता है।

(ii) उद्योग पर्यावरण को कैसे प्रदूषित करते हैं? ।
उत्तर  यद्यपि उद्योगों की भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि व विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। उद्योगों ने बहुत-से लोगों को काम दिया है और राष्ट्रीय आय में वृद्धि की है तथापि इनके द्वारा बढ़ते भूमि, वायु, जल तथा पर्यावरण प्रदूषण को भी नकारा नहीं जा सकता। उद्योग चार प्रकार के प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं-

  1. वायु
  2. जल
  3. भूमि
  4. ध्वनि।

1. वायु प्रदूषण – अधिक अनुपात में अनचाही गैसों की उपस्थिति जैसे-सल्फर डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड वायु प्रदूषण के कारण हैं। रसायन व कागज उद्योग, ईंटों के भट्ट, तेलशोधनशालाएँ, प्रगलन उद्योग, जीवाश्म ईंधन दहन तथा छोटे-बड़े कारखाने प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करते हुए धुंआ निष्कासित करते हैं। इसका बहुत भयानक तथा दूरगामी प्रभाव हो सकता है। वायु प्रदूषण, मानव स्वास्थ्य, पशुओं, पौधों, इमारतों तथा पूरे पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डालते हैं।

2. जल प्रदूषण – उद्योगों द्वारा कार्बनिक तथा अकार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों को नदी में छोड़ने से जल प्रदूषण फैलता है। जल प्रदूषण के मुख्य कारक-कागज, लुग्दी, रसायन, वस्त्र तथा रंगाई उद्योग, तेल शोधनशालाएँ, चमड़ा उद्योग हैं जो रंग, अपमार्जक, अम्ल, लवण तथा भारी धातुएँ; जैसे-सीसा, पारा, उर्वरक, कार्बन तथा रबर सहित कृत्रिम रसायन जल में वाहित करते हैं। इसकी वजह से पानी किसी काम योग्य नहीं रहता तथा उसमें
पनपने वाले जीव भी खतरे में पड़ जाते हैं।

3. भूमि का क्षरण – कारखानों से निकलने वाले विषैले द्रव्य पदार्थ और धातुयुक्त कूड़ा कचरा भूमि और मिट्टी को भी प्रदूषित किए बिना नहीं छोड़ते हैं। जब ऐसा विषैला पानी किसी भी स्थान पर बहुत समय तक खड़ा रहता है तो वह भूमि के क्षरण का एक बड़ा कारण सिद्ध होता है।

4. ध्वनि प्रदूषण – औद्योगिक तथा निर्माण कार्य, कारखानों के उपकरण, जेनरेटर, लकड़ी चीरने के कारखाने, गैस यांत्रिकी तथा विद्युत ड्रिल ध्वनि-प्रदूषण को फैलाते हैं। ध्वनि प्रदूषण से श्रवण असक्षमता, हृदय गति, रक्तचाप आदि बीमारियाँ फैलती हैं।

5. औद्योगिक बस्तियों का पर्यावरण पर प्रभाव – औद्योगिक क्रांति के कारण गंदी औद्योगिक बस्तियों का निर्माण हो जाता है जिससे सारा इलाका एक गंदी बस्ती में बदल जाता है। चारों तरफ प्रदूषण फैल जाता है और कई प्रकार की महामारियाँ फैल जाती हैं।

(iii) उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के लिए उठाए गए विभिन्न उपायों की चर्चा करें।
उत्तर उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए गए हैं

  1. नदियों व तालाबों में गर्म जल तथा अपशिष्ट पदार्थों को प्रवाहित करने से पहले उनका शोधन करना चाहिए
    जिससे जल प्रदूषित न हो।
  2. कोयले, लकड़ी या खनिज तेल से पैदा की गई बिजली जो हवा को प्रदूषित करती है, के स्थान पर जल द्वारा पैदा | की गई बिजली का प्रयोग करना चाहिए। ऐसे में वातावरण शुद्ध रहेगा।
  3. वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कारखानों में ऊँची चिमनियाँ, चिमनियों में एलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपण स्क्रबर उपकरण तथा गैसीय प्रदूषक पदार्थों को जड़त्वीय रूप से पृथक करने के लिए उपकरण होना चाहिए। कारखानों में कोयले की अपेक्षा तेल व गैस के प्रयोग से धुंए के निष्कासन में कमी लायी जा सकती है।
  4. ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए जेनरेटरों में साईलेंसर लगाया जा सकता है। ऐसी मशीनरी का प्रयोग तभी किया जाए जो ऊर्जा सक्षम हों तथा कम ध्वनि प्रदूषण करें। ध्वनि अवशोषित करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल के साथ कानों पर शोर नियंत्रण उपकरण भी पहनने चाहिए।
  5. फैक्ट्रियों से निकले प्रदूषित जल को वहीं इकट्ठा करके रासायनिक प्रक्रिया द्वारा उसे साफ किया जाए और बार बार प्रयोग में लाया जाए। ऐसे में नदियों और आस-पास की भूमि का प्रदूषण काफी हद तक रुक जाएगा।

क्रियाकलाप

उद्योगों के संदर्भ में प्रत्येक के लिए एक शब्द दें ( सांकेतिक अक्षर संख्या कोष्ठक में दी गई है तथा उत्तर अंग्रेजी के शब्दों में हैं ) 

(i) मशीनरी चलाने में प्रयुक्त
(ii) कारखानों में काम करने वाले व्यक्ति
(iii) उत्पाद को जहाँ बेचा जाता है।
(iv) वह व्यक्ति जो सामान बेचता है।
(v) वस्तु उत्पादन
(vi) निर्माण या उत्पादन
(vii) भूमि, जल तथा वायु अवनयन

(5) P…………………..
(6) W…………………
(6) M…………………
(8) R…………………..
(7) P…………………..
(11) M……………….
(9) P…………………..

उत्तर (i) POWER
(ii) WORKER
(iii) MARKET
(iv) RETAILER
(v) PRODUCT
(vi) MANUFACTURE
(vii) POLLUTION

प्रोजेक्ट कार्य

अपने क्षेत्र के एक कृषि आधारित तथा एक खनिज आधारित उद्योग को चुनें।
(i) ये कच्चे माल के रूप में क्या प्रयोग करते हैं?
(ii) विनिर्माण प्रक्रिया में अन्य निवेश क्या हैं जिनसे परिवहन लागत बढ़ती है?
(iii) क्या ये कारखाने पर्यावरण नियमों का पालन करते हैं?
उत्तर
एक कृषि-आधारित उद्योग ।
• चीनी उद्योग
(i) गन्ना
(ii) श्रम, पूंजी, बिजली, जल
(iii) कुछ हदतक ये कारखाने पर्यावरण नियमों का पालन करते हैं।

एक खनिज-आधारित उद्योग
• सीमेंट उद्योग
(i) चूना, पत्थर, सिलिका, एल्यूमिना और जिप्सम
(ii) श्रम, पूंजी, बिजली
(iii) ये कारखाने पर्यावरण नियमों का पालन बिल्कुल नहीं करते हैं।

क्रियाकलाप
निम्न वर्ग पहेली में क्षैतिज अथवा ऊर्ध्वाधर अक्षरों को जोड़ते हुए निम्न प्रश्नों के उत्तर दें।
नोट: पहेली के उत्तर अंग्रेजी के शब्दों में हैं।
NCERT Solutions for Class 10 Social Science Geography Chapter 6 (Hindi Medium) 1
उत्तर
1. AGRO-BASED
2. SUGARCANE
3. JUTE
4. IRON STEEL
5. BHILAI
6. VARANASI

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NCERT Solutions for Class 10 Social Science Economics Chapter 1 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Economics Chapter 1 Development (विकास)

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प्रश्न अभ्यास

पाठ्यपुस्तक से

संक्षेप में लिखें
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए 

प्रश्न 1. सामान्यतः किसी देश का विकास किस आधार पर निर्धारित किया जा सकता है
(क) प्रतिव्यक्ति आय
(ख) औसत साक्षरता स्तर
(ग) लोगों की स्वास्थ्य स्थिति
(घ) उपरोक्त सभी उत्तर
उत्तर
(घ) उपरोक्त सभी। प्रश्न

प्रश्न 2. निम्नलिखित पड़ोसी देशों में से मानव विकास के लिहाज से किस देश की स्थिति भारत से बेहतर है?
(क) बांग्लादेश ।
(ख) श्रीलंका
(ग) नेपाल
(घ) पाकिस्तान
उत्तर
(ख) श्रीलंका।

प्रश्न 3. मान लीजिए कि एक देश में चार परिवार हैं। इन परिवारों की प्रतिव्यक्ति आय 5,000 रुपये हैं। अगर तीन परिवारों की आय क्रमशः 4,000, 7,000 और 3,000 रुपये हैं, तो चौथे परिवार की आय क्या है?
(क) 7,500 रुपये
(ख) 3,000 रुपये
(ग) 2,000 रुपये
(घ) 6,000 रुपये
उत्तर
(घ) 6,000 रुपये।

प्रश्न 4. विश्व बैंक विभिन्न वर्गों का वर्गीकरण करने के लिए किस प्रमुख मापदंड का प्रयोग करता है? इस मापदंड की, अगर कोई है, तो सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर विश्व बैंक विभिन्न वर्गों का वर्गीकरण करने के लिए किसी देश की आय को प्रमुख मापदंड मानता है। जिन देशों की आय ।
अधिक है, उन्हें अधिक विकसित समझा जाता है और कम आय के देशों को कम विकसित । ऐसा माना जाता है कि अधिक आय का अर्थ है-इंसान की जरूरतों की सभी चीजें प्रचुर मात्रा में उपलब्ध की जा सकती हैं। जो भी लोगों को पसंद है और जो उनके पास होना चाहिए, वे उन सभी चीजों को अधिक आय के जरिए प्राप्त कर पाएँगे। इसलिए ज्यादा आय विभिन्न वर्गों का वर्गीकरण करने का प्रमुख मापदंड माना जाता है।

विश्व बैंक की ‘विश्व विकास रिपोर्ट, 2006’ में, देशों का वर्गीकरण करने में इस मापदंड का प्रयोग किया गया है। वे देश जिनकी 2004 में प्रतिव्यक्ति आय 10,066 डॉलर प्रतिवर्ष या उससे अधिक है, समृद्ध देश हैं और वे देश जिनकी प्रतिव्यक्ति आय 825 डॉलर प्रतिवर्ष या उससे कम है, उन्हें निम्न आय देश कहा गया है। भारत निम्न आय देशों के वर्ग में आता है, क्योंकि उसकी प्रतिव्यक्ति आय 2004 में केवल 620 डॉलर प्रतिवर्ष थी।

सीमाएँ- विभिन्न देशों का वर्गीकरण करने के लिए किसी देश की राष्ट्रीय आय को अच्छा मापदंड नहीं माना जा सकता, क्योंकि विभिन्न देशों की जनसंख्या विभिन्न होती है। कुल आय की तुलना करने से हमें यह पता नहीं चलेगा कि औसत व्यक्ति क्या कमा सकता है। इससे हमें विभिन्न देशों के लोगों की परिस्थितियों का भी पता नहीं चल पाता। इसलिए
राष्ट्रीय आय वर्गीकरण का अच्छा मापदंड नहीं है।

प्रश्न 5. विकास मापने का यू०एन०डी०पी० का मापदंड किन पहलूओं में विश्व बैंक के मापदंड से अलग है?
उत्तर विश्व बैंक का मापदंड केवल ‘आय’ पर आधारित है। इस मापदंड की बहुत-सी सीमाएँ हैं। आय के अतिरिक्त भी कई अन्य मापदंड हैं जो विकास मापने के लिए जरूरी हैं, क्योंकि मनुष्य केवल बेहतर आय के बारे में ही नहीं सोचता, बल्कि वह अपनी सुरक्षा, दूसरों से आदर और बराबरी का व्यवहार पाना, आजादी आदि जैसे अन्य लक्ष्यों के बारे में भी सोचता है।

यू०एन०डी०पी० द्वारा प्रकाशित मानव विकास रिपोर्ट में विकास के लिए निम्नलिखित मापदंड अपनाए गए

1. लोगों का स्वास्थ्य- मानव विकास का प्रमुख मापदंड है स्वास्थ्य या दीर्घायु । विभिन्न देशों के लोगों की जीवन
प्रत्याशा जितनी अधिक होगी, वह मानव विकास की दृष्टि से उतना ही अधिक विकसित देश माना जाएगा।
2. शैक्षिक स्तर- मानव विकास का दूसरा प्रमुख मापदंड शैक्षिक स्तर है। किसी देश में साक्षरता की दर जितनी ज्यादा
होगी वह उतना ही विकसित माना जाएगा और यह दर यदि कम होगी तो उस देश को अल्पविकसित कहा जाएगा।
3. प्रतिव्यक्ति आय- मानव विकास का तीसरा मापदंड है प्रतिव्यक्ति आय । जिस देश में प्रतिव्यक्ति आय अधिक होगी उस देश में लोगों का जीवन स्तर भी अच्छा होगा और अच्छा जीवन स्तर विकास की पहचान है। जिन देशों में लोगों की प्रतिव्यक्ति आय कम होगी, लोगों का जीवन स्तर भी अच्छा नहीं होगा। ऐसे देश को विकसित देश नहीं माना जा सकता।

कई वर्षों के अध्ययन के बाद यू०एन०डी०पी० ने विश्व के 173 देशों का मूल्यांकन इन आधारों पर किया-53 देशों को उच्च मानव विकास की श्रेणी में, 84 देशों को मध्यम मानव विकास की श्रेणी में तथा 26 देशों को मानव
विकास के निम्न स्तर पर रखा।

प्रश्न 6. हम औसत का प्रयोग क्यों करते हैं? इनके प्रयोग करने की क्या कोई सीमाएँ हैं? विकास से जुड़े अपने उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर औसत का प्रयोग किसी भी विषय या क्षेत्र का अनुमान विभिन्न स्तरों पर लगाने के लिए किया जाता है। जैसे-किसी देश में सभी लोग अलग-अलग आय प्राप्त करते हैं किंतु देश के विकास स्तर को जानने के लिए प्रतिव्यक्ति आय निकाली जाती है जो औसत के माध्यम से ही निकाली जाती है। इससे हमें एक देश के विकास के स्तर का पता चलता है। किंतु औसत का प्रयोग करने में कई समस्याएँ आती हैं। औसत से किसी भी चीज़ का सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसमें असमानताएँ छिप जाती हैं। उदाहरणतः किसी देश में रहनेवाले चार परिवारों में से तीन परिवार 500-500 रुपये कमाते हैं तथा एक परिवार 48,000 रुपये कमा रहा है जबकि दूसरे देश में सभी परिवार 9,000 और 10,000 के बीच में कमाते हैं। दोनों देशों की औसत आय समान है किंतु एक देश में आर्थिक असमानता बहुत ज्यादा है, जबकि दूसरे देश में सभी नागरिक आर्थिक रूप से समान स्तर के हैं। इस प्रकार ‘औसत’ तुलना के लिए तो उपयोगी है किंतु इससे असमानताएँ
छिप जाती हैं। इससे यह पता नहीं चलता कि यह आय लोगों में किस तरह वितरित है। प्रश्न

प्रश्न 7. प्रतिव्यक्ति आय कम होने पर भी केरल का मानव विकास क्रमांक पंजाब से ऊँचा है। इसलिए प्रतिव्यक्ति आय एक उपयोगी मापदंड बिल्कुल नहीं है और राज्यों की तुलना के लिए इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। क्या आप सहमत हैं? चर्चा कीजिए।
उत्तर यदि व्यक्तिगत आकांक्षाओं और लक्ष्यों को देखा जाए तो हम पाते हैं कि लोग केवल बेहतर आय के विषय में ही नहीं
सोचते बल्कि वे अपनी सुरक्षा, दूसरों से आदर और बराबरी का व्यवहार पाना, आजादी इत्यादि अन्य लक्ष्यों के बारे में भी सोचते हैं। इसी प्रकार जब हम किसी देश के विकास के बारे में सोचते हैं तो औसत आय के अलावा अन्य लक्षणों को भी देखते हैं।
NCERT Solutions for Class Class 10 Social Science Economics Chapter 1 (Hindi Medium) 1

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इस तालिका में प्रयोग किए गए कुछ शब्दों की व्याख्या
शिशु मृत्यु दर- किसी वर्ष में पैदा हुए 1000 जीवित बच्चों में से एक वर्ष की आयु से पहले मर जाने वाले बच्चों का अनुपात दिखाती है।
साक्षरता दर- 7 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में साक्षर जनसंख्या का अनुपात।
निवल उपस्थिति अनुपात- 6-10 वर्ष की आयु के स्कूल जाने वाले कुल बच्चों का उस आयु वर्ग के कुल बच्चों के साथ प्रतिशत।

तालिका 1.1 में दिए गए आँकड़ों के अनुसार पंजाब की प्रतिव्यक्ति आय केरल और बिहार से ज्यादा है। इस प्रकार, यदि आय को ही विकास का मापदंड माना जाए तो तीनों राज्यों में पंजाब सबसे अधिक और बिहार सबसे कम विकसित राज्य माना जाएगा। किंतु यदि तालिका 1.2 में दिए गए अन्य आँकड़ों को देखें तो पाते हैं कि केरल में शिशु मृत्यु दर पंजाब से बहुत कम है, जबकि पंजाब में प्रतिव्यक्ति आय अधिक है। इसी प्रकार, केरल में साक्षरता दर सबसे अधिक और बिहार में सबसे कम है। इस प्रकार, केवल प्रतिव्यक्ति आय को ही विकास का मापदंड नहीं माना जा सकता। अन्य मापदंडों, जैसे-साक्षरता, स्वास्थ्य आदि को देखें तो केरल की स्थिति पंजाब से बेहतर है।

प्रश्न 8. भारत के लोगों द्वारा ऊर्जा के किन स्रोतों का प्रयोग किया जाता है? ज्ञात कीजिए। अब से 50 वर्ष पश्चात् क्या संभावनाएँ हो सकती हैं?
उत्तर भारत के लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ऊर्जा के वर्तमान स्रोत निम्नलिखित हैं

  1. कोयला- कोयले का प्रयोग ईंधन के रूप में तथा उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। वाष्प इंजन जिसमें
    कोयले का प्रयोग होता है, रेलों और उद्योगों में काम में लाया जाता है।
  2. खनिज तेल- खनिज तेल का प्रयोग सड़क परिवहन, जहाजों, वायुयानों आदि में किया जाता है। तेल को परिष्कृत | करके डीजल, मिट्टी का तेल, पेट्रोल आदि प्राप्त किए जाते हैं।
  3. प्राकृतिक गैस- प्राकृतिक गैस का भी अब शक्ति के साधन के रूप में बहुत प्रयोग किया जाने लगा है। गैस को पाइपों
    के सहारे दूर-दूर के स्थानों पर पहुँचाया जाता है। इससे अनेक औद्योगिक इकाइयाँ चल रही हैं।
  4. जल विद्युत- यह ऊर्जा का नवीकरणीय संसाधन है। अब तक ज्ञात सभी संसाधनों में यह सबसे सस्ता है। इसका
    प्रयोग घरों, दफ्तरों तथा औद्योगिक इकाइयों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
  5. ऊर्जा के अन्य स्रोत- ऊर्जा के कुछ ऐसे स्रोत भी हैं जिनका प्रयोग अभी कुछ समय पूर्व से ही किया जाने लगा है। ये सभी स्रोत नवीकरणीय हैं। जैसे-पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, बायोगैस, भूतापीय ऊर्जा आदि।

ऊर्जा के अधिकांश परंपरागत साधनों का प्रयोग लंबे समय से हो रहा है। ये सभी स्रोत अनवीकरणीय हैं अर्थात् एक बार प्रयोग करने पर समाप्त हो जाते हैं। इनकी पुनः पूर्ति संभव नहीं है। आनेवाले 50 वर्षों में ये संसाधन यदि इसी तरह इस्तेमाल किए जाते रहे, तो समाप्तप्राय हो जाएँगे। यदि हमें इन संसाधनों को बचाना है तो ऊर्जा के नए और नवीकरणीय संसाधनों को खोजकर उनका अधिकाधिक प्रयोग करना होगा।

प्रश्न 9. धारणीयता का विषय विकास के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर धारणीयता से अभिप्राय है सतत पोषणीय विकास अर्थात् ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी तक ही सीमित न रहे बल्कि आगे
आनेवाली पीढ़ी को भी मिले । वैज्ञानिकों का कहना है कि हम संसाधनों का जैसे प्रयोग कर रहे हैं, उससे लगता है कि संसाधन शीघ्र समाप्त हो जाएँगे और आगे आने वाली पीढ़ी के लिए नहीं बचेंगे। यदि हमें विकास को धारणीय बनाना है। अर्थात् निरंतर जारी रखना है, तो हमें संसाधनों का प्रयोग इस तरह से करना होगा जिससे विकास की प्रक्रिया निरंतर जारी रहे और भावी पीढ़ी के लिए संसाधन बचे रहें।

प्रश्न 10. धरती के पास सब लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन एक भी व्यक्ति के लालच को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। यह कथन विकास की चर्चा में कैसे प्रासंगिक है? चर्चा कीजिए।
उत्तर पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के साधन पाए जाते हैं जिनका उपयोग मनुष्य अपनी विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के
लिए करता है। तब ये साधन संसाधन बन जाते हैं। ये संसाधन सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। यदि मनुष्य बुद्धिमत्ता से इन संसाधनों का प्रयोग करे तो वह अपनी सभी जरूरतों को पूरा कर सकता है। यदि संसाधनों का दुरुपयोग न किया जाए तो इनका प्रयोग करके विकास की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखा जा सकता है। किंतु यदि इन संसाधनों का प्रयोग निजी लाभ के लिए किया जाए तो हो सकता है कि ये एक व्यक्ति के लाभ को भी पूरा न कर पाएँ । यदि इन संसाधनों का अंधाधुंध प्रयोग किया गया तो ये समाप्त हो जाएँगे। अनवीकरणीय संसाधन जो सीमित हैं और जिनका एक बार प्रयोग करने पर वे खत्म हो जाते हैं, उनका प्रयोग सोच-समझकर करना होगा। इनका प्रयोग करते समय हमें आगे आनेवाली पीढ़ी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना होगा। इस प्रकार उपरोक्त कथन से हम यह सीख निकालते हैं कि प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग केवल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाए, न कि निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए। इससे ये संसाधन
शीघ्र समाप्त हो जाएँगे और विकास की प्रक्रिया रुक जाएगी।

प्रश्न 11. पर्यावरण में गिरावट के कुछ ऐसे उदाहरणों की सूची बनाइए जो आपने अपने आसपास देखे हों।
उत्तर कूड़े-कचरे और अवांछित गंदगी से जल, वायु और भूमि का दूषित होना ‘पर्यावरण प्रदूषण’ कहलाता है। पर्यावरण में गिरावट के बहुत से उदाहरण हैं जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं

  1. जल प्रदूषण- नदियों, झीलों और समुद्रों में बहाए गए कूड़े-कचरे या औद्योगिक अपशिष्ट जल को प्रदूषित करते हैं। इससे जल में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने से जलीय जीव मर जाते हैं। जहाजों से रिसनेवाले तेल से समुद्री जीवों को हानि होती है।
  2. वायु प्रदूषण- कारखानों के धुएँ तथा मोटर वाहनों के धुएँ वायु को प्रदूषित करते हैं। इससे मानव स्वास्थ्य और वन्य | जीवन दोनों को ही हानि होती है।
  3. भूमि प्रदूषण- भूमि पर कारखानों द्वारा, घरों या अन्य स्रोतों द्वारा कूड़ा-कचरा आदि फेंकने से पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं। कृषि क्षेत्रों में अधिक उर्वरकों का प्रयोग करने से भूमि की उपजाऊ शक्ति खत्म होती है तथा ये उर्वरक भूमि को प्रदूषित करते हैं। ।

बढ़ती हुई जनसंख्या, संसाधनों का दुरुपयोग, अधिक मात्रा में पेड़ों को काटने के कारण पर्यावरण में गिरावट बहुत तेजी से हो रही है और इसके बहुत से उदाहरण हमारे आसपास हैं।

प्रश्न 12. तालिका 1.6 में दी गई प्रत्येक मद के लिए ज्ञात कीजिए कि कौन-सा देश सबसे ऊपर है और कौन-सा सबसे नीचे?
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टिप्पणी

  1. HDI का अर्थ है मानव विकास सूचकांक। ऊपर दी गई तालिका में HDI सूचकांक का क्रमांक कुल 177
    देशों में से है।
  2. जन्म के समय संभावित आयु, जैसा कि नाम से स्पष्ट है, व्यक्ति के जन्म के समय औसत आयु की संभावना
    दर्शाती है।
  3. तीनों स्तरों के लिए सकल नामांकन अनुपात से अर्थ है प्राथमिक स्कूल, माध्यमिक स्कूल और उससे आगे उच्च
    शिक्षा के नामांकन अनुपात का कुल योग।
  4. प्रति व्यक्ति आय की गणना सभी देशों के लिए डॉलर में की जाती है, ताकि उसकी तुलना की जा सके। यह इस तरीके से भी की जाती है कि एक डॉलर किसी भी देश में समान मात्रा में वस्तुएँ और सेवाएँ खरीद सके।

उत्तर तालिका 1.6 विभिन्न मापदंडों के आधार पर दुनिया के विभिन्न देशों को विकास की अलग-अलग श्रेणियों में बाँटती है। इसमें प्रतिव्यक्ति आये, संभावित आयु, साक्षरता दर, सकल नामांकन अनुपात तथा मानव विकास सूचकांक क्रमांक का मापदंड बनाया गया है। प्रतिव्यक्ति आय के आधार पर श्रीलंका सबसे ऊपर तथा म्यांमार सबसे नीचे है। जन्म के समय संभावित आयु (जीवन प्रत्याशा) के आधार पर श्रीलंका सबसे ऊपर तथा म्यांमार सबसे नीचे है। साक्षरता दर के क्षेत्र में भी श्रीलंका सबसे ऊपर तथा बांग्लादेश सबसे नीचे है। सकल नामांकन अनुपात के आधार पर श्रीलंका सबसे ऊपर तथा पाकिस्तान सबसे नीचे है। मानव विकास सूचकांक के क्रमांक में भी श्रीलंका का स्थान विश्व में 93वाँ है जो इस तालिका
में दिए गए सभी देशों से ऊपर है तथा नेपाल 138वाँ स्थान लेकर सबसे नीचे है।

प्रश्न 13. नीचे दी गई तालिका में भारत में अल्प-पोषित वयस्कों का अनुपात दिखाया गया है। यह वर्ष 2001 में देश के विभिन्न राज्यों के एक सर्वेक्षण पर आधारित है। तालिका का अध्ययन करके निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
   तालिका 1.1 चयनित राज्यों की प्रति व्यक्ति आय
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(क) केरल और मध्य प्रदेश के लोगों के पोषण स्तरों की तुलना कीजिए।
(ख) क्या आप अंदाज़ लगा सकते हैं कि देश के लगभग 40 प्रतिशत लोग अल्प-पोषित क्यों हैं, यद्यपि यह तर्क दिया जाता है कि देश में पर्याप्त खाद्य पदार्थ है? अपने शब्दों में विवरण दीजिए।
उत्तर

(क) उपरोक्त आँकड़े केरल और मध्य प्रदेश के लोगों के पोषण स्तर को दर्शाते हैं। इसके अनुसार केरल में 22 प्रतिशत पुरुष और 19 प्रतिशत महिलाएँ अल्प-पोषित हैं, जबकि मध्य प्रदेश में 43 प्रतिशत पुरुष और 42 प्रतिशत महिलाए अल्प-पोषित हैं। इसका अर्थ है कि मध्य प्रदेश में अधिक लोग अल्प-पोषित हैं।
(ख) देश में पर्याप्त अनाज होने के बावजूद देश के 40 प्रतिशत लोग अल्प-पोषित हैं क्योंकि अभी भी लगभग 40 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। ये व्यक्ति इतना भी नहीं कमा पाते कि अपने लिए दो समय का खाना प्राप्त कर सकें। इसलिए देश में अनाज उपलब्ध होने के बावजूद ये उसे खरीद नहीं पाते और अल्प-पोषिते रहते हैं।

अतिरिक्त परियोजना/कार्यकलाप

प्रश्न 1. अपने क्षेत्र के विकास के विषय में चर्चा के लिए तीन भिन्न वक्ताओं को आमंत्रित कीजिए। अपने मस्तिष्क में आने वाले सभी प्रश्नों को उनसे पूछिए। इन विचारों की समूहों में चर्चा कीजिए। प्रत्येक समूह का एक दीवार चार्ट बनाए जिसमें कारण सहित उन विचारों का उल्लेख करें, जिनसे आप सहमत अथवा असहमत हैं।
उत्तर विद्यार्थी इस परियोजना कार्य को स्वयं करें।

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