Author name: Raju

NCERT Solutions for Class 6 Social Science History Chapter 6 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 6 Social Science History Chapter 6 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 6 Social Science History Chapter 6 Kingdoms, Kings and an Early Republic (Hindi Medium)

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पाठ्यपुस्तक के आंतरिक प्रश्न

1. लोगों ने वर्ण-व्यवस्था का विरोध क्यों किया? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-56)
उत्तर : वर्ण-व्यवस्था के विरोध के निम्नलिखित कारण थे

  1. कुछ लोग जन्म के आधार पर वर्ण-निर्धारण सही नहीं मानते थे।
  2. कुछ राजा खुद को पुरोहित से श्रेष्ठ मानते थे।
  3. कुछ लोग व्यवसाय के आधार पर वर्ण-निर्धारण ठीक नहीं मानते थे।
  4. कुछ लोगों का मानना था कि अनुष्ठान संपन्न करने का अधिकार सबका हो।

2. महाजनपदों के राजा ऋग्वेद में उल्लेखित राजाओं से किस प्रकार भिन्न थे? दो अंतर बताओ। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-58)
उत्तर : महाजनपदों के राजा तथा ऋग्वेद के राजाओं में निम्नलिखित दो अंतर हैं
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3. शिकारी व खाद्य-संग्राहक राजाओं को क्या देते होंगे? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-59)
उत्तर : शिकारी तथा खाद्य-संग्राहक, राजाओं को जड़ी-बूटियाँ, हिरण, बाघ जैसे जानवरों की खालें, हाथी दाँत आदि देते होंगे।

4. वज्जि संघ अन्य महाजनपदों से कैसे भिन्न था? कम से कम तीन अंतर बताओ। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-62)
उत्तर : वज्जि संघ तथा महाजनपदों में अंतर निम्न प्रकार हैं
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अन्यत्र (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-62)

अपने एटलस में यूनान और एथेन्स को ढूँढो।
लगभग 2500 साल पहले एथेन्स के लोगों ने एक शासन-व्यवस्था की स्थापना की, जिसे प्रजातंत्र या गणतंत्र कहते हैं।
यह व्यवस्था लगभग 200 सालों तक चली। इसमें 30 साल से ऊपर के उन सभी पुरुषों को पूर्ण नागरिकता प्राप्त थी, जो दास नहीं थे। वहाँ एक सभा थी जो महत्त्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने के लिए सालभर में कम से कम 40 बार बुलाई जाती थी।
इस सभा में सभी नागरिक भाग ले सकते थे।
शासन के कई पदों पर नियुक्तियाँ लॉटरियों द्वारा की जाती थीं। सभी नागरिकों को सेना और नौसेना में अपनी सेवाएँ देनी होती थी। औरतों को नागरिक का दर्जा नहीं मिलता था।
व्यापारियों तथा शिल्पकारों के रूप में एथेन्स में रहने और काम करने वाले बहुत से विदेशियों को भी नागरिक अधिकार नहीं मिले थे। एथेन्स में खदानों, खेतों, घरों और कार्यशालाओं में काम कर रहे दासों को भी नागरिक अधिकार नहीं मिले थे।

क्या एथेन्स में वास्तव में जनतंत्र था?
उत्तर : एथेन्स में जनतंत्र नहीं था, क्योंकि

  1. औरतों को नागरिक का दर्जा प्राप्त नहीं था।
  2. खदानों, खेतों, घरों और कार्यशालाओं में काम करे रहे दासों को नागरिक अधिकार नहीं मिले थे।

कल्पना करो

वैशाली के उस सभागार में तुम अंदर झाँक रहे हो जहाँ मगध के राजाओं द्वारा आक्रमण का सामना करने के विषयों पर चर्चा की जा रही है। तुमने क्या सुना? 
उत्तर : वैशाली के सभागार में राजा मगध की विशाल सेना के विषय में चर्चा कर रहे थे कि मगध के पास पैदल,
रथ और हाथियों की बहुत बड़ी सेना है और उसका मुकाबला कैसे किया जाए। सभी राजा घबराए हुए थे।

प्रश्न-अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

आओ याद करें

1. सही या गलत बताओ। |
(क) अश्वमेध के घोड़े को अपने राज्य से गुजरने की छूट देने वाले राजाओं को यज्ञ में आमंत्रित किया जाता था।
(ख) राजा के ऊपर सारथी पवित्र जल का छिड़काव करता था।
(ग) पुरातत्त्वविदों को जनपदों की बस्तियों में महल मिले हैं।
(घ) चित्रित-धूसर पात्रों में अनाज रखा जाता था।
(ङ) महाजनपदों में बहुत से नगर क़िलाबंद थे।
उत्तर :
(क) सही
(ख) गलत
(ग) गलत
(घ) गलत
(ङ) सही

2. नीचे दिए गए खानों में निम्नलिखित शब्द भरो।
शिकारी-संग्राहक, कृषक, व्यापारी, शिल्पकार, पशुपालक
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3. समाज के वे कौन-से समूह थे, जो गणों की सभाओं में हिस्सा नहीं ले सकते थे?
उत्तर : स्त्रियाँ, दास तथा कम्मकार गणों की सभाओं में हिस्सा नहीं ले सकते थे।आओ चर्चा करें

4. महाजनपद के राजाओं ने क़िले क्यों बनवाए?
उत्तर :
महाजनपद के राजाओं द्वारा किलों के निर्माण करने के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे.

  1. कुछ राजा बाहरी राजाओं के आक्रमण के भय से अपनी सुरक्षा के लिए किलों का निर्माण करते थे।
  2. कुछ राजा अपनी शक्ति तथा समृद्धि का प्रदर्शन करने के लिए किलों का निर्माण करते थे।

5. आज के शासकों के चुनाव की प्रक्रिया जनपदों के चुनाव से किस तरह भिन्न थी?
उत्तर : आज शासकों का चुनाव आम जनता द्वारा मतदान के माध्यम से किया जाता है, परंतु जनपदों में कुछ लोग बड़े-बड़े यज्ञों को आयोजित कर राजा बन जाते थे। आओ करके देखें

6. तुम्हारी पुस्तक के अंत में दिए गए राजनीतिक मानचित्र में अपना राज्य हूँढ़ो। क्या वहाँ प्राचीन जनपद थे? अगर हाँ, तो उनके नाम लिखो। अगर नहीं, तो अपने राज्य के सबसे नज़दीक पड़ने वाले जनपदों के नाम बताओ।
उत्तर : विद्यार्थी स्वयं करें।

7. प्रश्न 2 के उत्तर में बताए गए समूहों में से कौन-से समूह आज भी कर देते हैं।
उत्तर : आज भी (i) व्यापारी (ii) शिल्पकार (iii) पशुपालक कर देते हैं।

8. प्रश्न 3 के उत्तर में बताए गए समूहों में किन-किन को आज मतदान का अधिकार प्राप्त है?
उत्तर :

  1. स्त्रियाँ
  2. दास
  3. कम्मकार ।

आज इन तीनों समूहों को मतदान का अधिकार प्राप्त है।

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NCERT Solutions for Class 10 Social Science Geography Chapter 4 Hindi

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Geography Chapter 4 Agriculture (कृषि)

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Geography Chapter 4 Agriculture (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास

पाठ्यपुस्तक से

संक्षेप में लिखें

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) निम्नलिखित में से कौन-सा उस कृषि प्रणाली को दर्शाता है जिसमें एक ही फसल लंबे-चौड़े क्षेत्र में उगाई जाती है? |
(क) स्थानांतरी कृषि
(ख) रोपण कृषि
(ग) बागवानी
(घ) गहन कृषि

(ii) इनमें से कौन-सी रबी फसल है?
(क) चावल
(ख) मोटे अनाज
(ग) चना
(घ) कपास

(iii) इसमें से कौन-सी एक फलीदार फसल है?
(क) दालें
(ख) मोटे अनाज
(ग) ज्वार तिल
(घ) तिल

(iv) सरकार निम्नलिखित में से कौन-सी घोषणा फसलों को सहायता देने के लिए करती है?
(क) अधिकतम सहायता मूल्य
(ख) न्यूनतम सहायता मूल्य
(ग) मध्यम सहायता मूल्य
(घ) प्रभावी सहायता मूल्य
उत्तर (i) (ख) (ii) (ग) (iii) (क) (iv) (ख)।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिएः

(i) एक पेय फसल का नाम बताएँ तथा उसको उगाने के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों का विवरण दें।
उत्तर चाय एक महत्त्वपूर्ण पेय पदार्थ की फसल है। चाय का पौधा उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु, ह्युमस और जीवांश युक्त गहरी मिट्टी तथा सुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्रों में उगाया जाता है। चाय की खेती के लिए वर्ष भर कोष्ण, नम और पालारहित जलवायु की आवश्यकता होती है। वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा इसकी कोमल पत्तियों के विकास में सहायक होती है। भारत विश्व का अग्रणी चाय उत्पादक देश है।

(ii) भारत की एक खाद्य फसल का नाम बताएँ और जहाँ यह पैदा की जाती है उन क्षेत्रों का विवरण दें। गेहूँ भारत की एक प्रमुख खाद्य फसल है। यह देश के
उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भागों में पैदा की जाती है। देश में | गेहूँ उगाने वाले दो मुख्य क्षेत्र हैं-उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलुज का मैदान और दक्कन का काली मिट्टी वाला प्रदेश। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ भाग गेहूँ पैदा करने वाले प्रमुख राज्य हैं।

(iii) सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रमों की सूची बनाएँ।
उत्तर सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रम निम्नलिखित हैं

1. जोतों की चकबंदी।
2. जमींदारी प्रथा की समाप्ति।
3. अधिक उपज देने वाले बीजों के द्वारा हरित क्रांति।।
4. पशुओं की नस्ल में सुधार कर दुग्ध उत्पादन में श्वेत क्रांति।
5. बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए फसल बीमा के प्रावधान ।।
6. किसानों को कम दर पर ऋण दिलाने के लिए ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों और बैंकों की स्थापना की गई।
7. किसानों के लाभ के लिए किसान क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना शुरू की गई।
8. आकाशवाणी और दूरदर्शन पर विशेष किसान कार्यक्रम प्रसारित किए गए।
9. किसानों को दलालों के शोषण से बचाने के लिए न्यूनतम सहायता मूल्य की घोषणा सरकार करती है।
10. कुछ महत्त्वपूर्ण फसलों के लाभदायक खरीद मूल्यों की घोषणा भी सरकार करती है।

(iv) दिन-प्रतिदिन कृषि के अंतर्गत भूमि कम हो रही है। क्या आप इसके परिणामों की कल्पना कर सकते हैं?
उत्तर भारत में लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण कृषि भूमि में कमी आई है। भूमि के आवासन इत्यादि गैर कृषि उपयोगों तथा कृषि के बीच बढ़ती भूमि की प्रतिस्पर्धा के कारण कृषि भूमि में कमी आई है। भारत की बढ़ती जनसंख्या के । साथ घटता खाद्य उत्पादन देश की भविष्य की खाद्य सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगाता है। कुछ अर्थशास्त्रियों को मानना है कि बढ़ती जनसंख्या के कारण घटते आकार के जोतों पर यदि खाद्यान्नों की खेती ही होती रही तो भारतीय किसानों का भविष्य अंधकारमय है। भारत में 60 करोड़ लोग लगभग 25 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर निर्भर हैं। इस प्रकार एक व्यक्ति के हिस्से में औसतन आधा हेक्टेयर से भी कम कृषि भूमि आती है। इसलिए जनसंख्या नियंत्रित करने की कोशिश करनी होगी नहीं तो खाद्य संकट उत्पन्न हो जाएगा तथा किसानों की स्थिति दयनीय हो जाएगी।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए
(i) कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपाय सुझाइए। |
उत्तर भारत एक कृषि प्रधान देश है। देश के 60 प्रतिशत से भी अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करने वाली कृषि में कुछ संस्थागत तथा प्रौद्योगिक सुधार किए गए हैं जो निम्नलिखित हैं

  1. जमींदारी प्रथा का उन्मूलन-किसानों के लिए जमींदारी प्रथा एक अभिशाप थी। इसलिए सरकार ने जमींदारी प्रथा को समाप्त करके भूमिहीन काश्तकारों को जमीन का मालिकाना हक दे दिया तथा जोतों की अधिकतम सीमा निश्चित कर दी गई।
  2. खेतों की चकबंदी-पहले किसानों के पास छोटे-छोटे खेत थे जो आर्थिक रूप से गैर-लाभकारी होते थे। इसलिए छोटे खेतों की चकबंदी कर दी गई।
  3. हरित क्रांति-सरकार ने किसानों को अधिक उपज देने वाले बीज उपलब्ध करवाये जिससे कृषि विशेषकर गेहूँ। | की कृषि में क्रांतिकारी परिवर्तन आया। इसे हरित क्रांति का नाम दिया गया।
  4. प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण-किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए कई छोटी-बड़ी सिंचाई परियोजनाएँ शुरू की गईं।
  5. फसल बीमा-फसलें प्रायः सूखा, बाढ़, आग आदि के कारण नष्ट हो जाती थीं। जिससे किसानों को बहुत हानि | उठानी पड़ती थी। इन आपदाओं से बचने के लिए फसल बीमा योजना शुरू की गई। इसके द्वारा फसल नष्ट हो जाने पर किसानों को पूरा मुआवजा मिलने लगा जिससे उसे सुरक्षा प्राप्त हुई।
  6. सरकारी संस्थाएँ-किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों और बैंकों की स्थापना की गई। ये संस्थाएँ किसानों को महाजनों के चुंगल से बचाती हैं। रेडियो तथा दूरदर्शन द्वारा मौसम की जानकारी तथा कृषि संबंधी कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं।
  7. किसानों के लाभ के लिए भारत सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड’ और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना शुरू की है।
  8. किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाने के लिए न्यूनतम सहायता मूल्य और कुछ महत्त्वपूर्ण फसलों के लाभदायक खरीद मूल्यों की सरकार घोषणा करती है।
  9. खेती में आधुनिक उपकरणों के प्रयोग पर बल दिया जाने लगा। इससे उत्पादन में वृद्धि हुई।
  10. भारतीय कृषि में सुधार के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद व कृषि विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई। जिससे कृषि के उत्पादन में वृद्धि हो सके।

(ii) भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर वैश्वीकरण से हमारा तात्पर्य है विश्व के अनेक देशों का आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में एक-दूसरे के निकट आ जाना। वैश्वीकरण के कारण विभिन्न चीजें एक देश से दूसरे देश में आने-जाने लगीं जिससे उच्चकोटि की चीजें ही बाजार में टिक सकी हैं। वैश्वीकरण के कृषि पर कुछ अच्छे प्रभाव पड़े, जो निम्नलिखित हैं

  1. भारत दूसरे देशों को अन्न का निर्यात कर अपनी जरूरत का अन्य सामान खरीदने लगा।
  2. विभिन्न फसलों की माँग बढ़ने से भारत में इन चीजों का अधिक उत्पादन होने लगा।
  3. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में टिकने के लिए भारतीय किसानों ने अपने उत्पादन का गुणवत्ता व स्तर बढ़ाने की | कोशिश की।
  4. वैश्वीकरण के कारण अधिक उत्पादित होने वाली चीजों को दूसरे देशों को बेचकर अच्छे दाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
  5. कृषि वैज्ञानिकों के सहयोग से बहुत-से देशों में नई-नई चीजों की पैदावार होने लगी जो पहले सम्भव नहीं था।

वैश्वीकरण के कृषि पर कुछ बुरे प्रभाव भी पड़े, जो निम्नलिखित हैं

  1. विश्व के धनी देशों ने विभिन्न विकासशील देशों में अपना सस्ता अनाज और अन्य कृषि से प्राप्त वस्तुएँ बड़ी मात्रा में भरनी शुरू कर दीं जिससे विकासशील देशों के किसान उनका मुकाबला न कर सकें तथा कृषि का काम छोड़ने पर मजबूर हो गए।
  2. विश्व के धनी देश निर्धन देशों से सस्ती दरों पर अनाज खरीदने की कोशिश करते हैं।
  3. कृषि के वैश्वीकरण के कारण छोटे किसानों को कृषि कार्य को छोड़ना पड़ा क्योंकि वे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाए।
  4. कृषि के वैश्वीकरण ने व्यापारिक कृषि को बढ़ावा दिया। किसानों ने वही वस्तु पैदा की जिसकी बाजार में माँग थी, न कि जनता की आवश्यकता पूरी करने वाली चीजों का उत्पादन किया।
  5. कृषि के वैश्वीकरण के कारण ही भारत को लंबे समय तक ब्रिटेन का उपनिवेश बनकर कृषि पर अतिरिक्त बोझ को वहन करना पड़ा।

1990 के बाद, वैश्वीकरण के तहत भारतीय किसानों को कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चावल, कपास, रबड़, चाय, कॉफी, जूट, मसालों का मुख्य उत्पादक होने के बावजूद भारतीय कृषि विश्व के विकसित देशों से स्पर्धा करने में असमर्थ है। क्योंकि उन देशों में कृषि को अत्यधिक सब्सिडी दी जाती है। यदि
भारतीय कृषि को सक्षम बनाना है तो छोटे किसानों की स्थिति सुधारनी होगी।

(iii) चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।
उत्तर भारत में अधिकांश लोगों को खाद्यान्न चावल है। हमारा देश चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है। यह एक खरीफ फसल है जिसे उगाने के लिए उच्च तापमान (25° सेल्सियस से ऊपर) और अधिक आर्द्रता (100 से०मी० से अधिक वर्षा) की आवश्यकता होती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे सिंचाई करके उगाया जाता है। चावल उत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों और डेल्टाई प्रदेशों में उगाया जाता है। नदी घाटियों और डेल्टा प्रदेशों में पाई जाने वाली जलोढ़ मिट्टी चावल के लिए आदर्श होती है। नहरों के जाल और नलकूपों की सघनता के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल की फसल उगाना संभव हो पाया है। चावल जून-जुलाई में दक्षिण-पश्चिमी मानसून पवनों के शुरू होने पर उगाया जाता है और पतझड़ की ऋतु में काटा जाता है।

परियोजना कार्य प्रश्न

1. किसानों की साक्षरता विषय पर एक सामूहिक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन करें।
उत्तर निर्देश: विद्यार्थी निम्न बिंदुओं को ध्यान में रखकर उपरोक्त विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित करेंगे

  • भारत में साक्षरता दर
  • किसानों में साक्षरता दर-इसके अंतर्गत विद्यार्थी पुरुषों एवं महिलाओं में साक्षरता दर को अलग-अलग ज्ञात करेंगे।
  • साक्षरता दर में कमी के क्या कारण हो सकते हैं और कृषि पर इसके क्या प्रभाव पड़ रहे हैं? प्रश्न

2. भारत के मानचित्र में गेहूँ उत्पादन क्षेत्र दर्शाइए।
उत्तर
NCERT Solutions for Class 10 Social Science Geography Chapter 4 (Hindi Medium) 1

क्रियाकलाप

ऊपर-नीचे और दायें-बायें चलते हुए वर्ग पहेली को सुलझाएँ और छिपे उत्तर हुँदें।
नोट: पहेली के उत्तर अंग्रेजी के शब्दों में हैं। (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या 52 देखें)
उत्तर

  1. भारत की दो खाद्य फसलें-Rice, wheat
  2. यह भारत की ग्रीष्म फसल ऋतु है-Zaid
  3. अरहर, मूंग, चना, उड़द जैसी दालों से मिलता है-Protein
  4. यह एक मोटा अनाज है-Maize
  5. भारत की दो महत्त्वपूर्ण पेय फसल हैं…-Tea, coffee
  6. काली मिट्टी पर उगाई जाने वाली चार रेशेदार फसलों में से एक-Cotton

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NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 1 Indian Economy on the Eve of Independence (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 1 Indian Economy on the Eve of Independence (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Economics Indian Economic Development Chapter 1 Indian Economy on the Eve of Independence (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

प्र.1. भारत में औपनिवेशिक शासन की आर्थिक नीतियों का केंद्र बिंदु क्या था? उन नीतियों के क्या प्रभाव हुए?
उत्तर : औपनिवेशिक शासकों द्वारा रची गई आर्थिक नीतियों का ध्येय भारत का आर्थिक विकास नहीं था अपितु अपने मूल देश के आर्थिक हितों का संरक्षण और संवर्धन ही था। इन नीतियों ने भारत की अर्थव्यवस्था के स्वरूप के मूलरूप को बदल डाला।
(क) एक तो वे भारत को इंग्लैंड में विकसित हो रहे आधुनिक उद्योगों के लिए कच्चे माल का निर्यातक बनाना चाहते थे।
(ख) वे उन उद्योगों के उत्पादन के लिए भारत को एक विशाल बाजार भी बनाना चाहते थे। इसके परिणामस्वरूप भारत एक खस्ताहालत अर्थव्यवस्था बनकर रह गया। एम. मुखर्जी के अनुसार, “1857-1956 के बीच प्रतिव्यक्ति आय की वार्षिक वृद्धि दर 0.5% प्रति वर्ष जितनी कम थी।” अतः अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था एक खस्ताहालत अर्थव्यवस्थी रही। अंग्रेज़ी शासन समाप्त होने पर वे भारत को एक खोखली और स्थिर अर्थव्यवस्था के रूप में छोड़कर गए।

  1. निरक्षरता, जन्म दर तथा मृत्यु दर बहुत अधिक था। कुल जनसंख्या का केवल 17% हिस्सा ही साक्षर था। इसी तरह जन्म दर तथा मृत्यु दर क्रमशः 45.2 प्रति हज़ार (1931-41 के दौरान) तथा 40 प्रति हज़ार (1911-21 के दौरान) थी।
  2. देश संयंत्र और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक मशीनरी के लिए लगभग पूरी तरह से अन्य देशों पर निर्भर था। वर्तमान जीवन और गतिविधि को बनाए रखने के लिए कई आवश्यक वस्तुओं क़ा आयात करना पड़ता था।
  3. आज़ादी के समय भारत एक कृषि प्रधान देश था। कार्यरत जनसंख्या का 70-75% हिस्सा कृषि में संलग्न था परंतु फिर भी देश खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर नहीं था।
  4. आधारिक संरचना बहुत हद तक अविकसित थी।

प्र.2. औपनिवेशिक काल में भारत की राष्ट्रीय आय का आकलन करने वाले प्रमुख अर्थशास्त्रियों के नाम बताइए।
उत्तर : दादा भाई नौरोजी, बी.के.आर.वी. राव, विलियम डिग्बी, फिडले शिराज, आर.सी. देसाई।

प्र.3. औपनिवेशिक शासनकाल में कृषि की गतिहीनता के मुख्य कारण क्या थे?
उत्तर : औपनिवेशिक शासनकाल में कृषि की गतिहीनता के मुख्य कारण इस प्रकार थे

(क)
पट्टेदारी प्रणाली-भारत में अंग्रेजों ने एक भू-राजस्व प्रणाली शुरू की जिससे जमींदारी प्रथा कहा गया। इसके अंतर्गत कृषकों, ज़मींदारों तथा सरकार के बीच एक त्रिकोणीय संबंध स्थापित किया गया। जमींदार जमीनों के स्थायी मालिक थे जिन्हें सरकार को एक तय राशि कर के रूप में देनी पड़ती थी। बदले में, वे कृषकों पर किसी भी दर पर कर लगा सकते थे। इस प्रथा ने कृषको की हालत भूमिहीन मज़दूरों जैसी कर दी। ऐसी परिस्थितियों में भी वे कार्यरत रहे क्योंकि अन्य कोई रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं थे।

(ख)
कृषि के व्यावसायिकरण का प्रत्यापन-कृषकों को खाद्यान्न फसलों को छोड़ वाणिज्यिक फसलों पर जाने के लिए मजबूर किया गया। उन्हें ब्रिटेन में विकसित हो रहे कपड़ा उद्योग के लिए नील की आवश्यकता थी। कृषि के व्यावसायिकरण ने भारतीय कृषि को बाजार की अनिश्चिताओं से परीचित कराया। अब उन्हें अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ खरीदने के लिए नकदी की जरूरत थी। परंतु अपनी ऋणग्रस्तता के कारण उनके पास नकदी का सदा अभाव रहता था। इसने उन्हें कृषि से जुड़े रहने के लिए मजबूर कर दिया तथा जमींदारों और साहूकारों की दया पर निर्भर कर दिया।

(ग)
आधारिक संरचना की कमी-ब्रिटिश शासकों ने सिंचाई की सुविधाएँ बढ़ाने या तकनीकी विकास करने पर कोई ध्यान नहीं दिया।

(घ)
भारत का विभाजन- भारत के विभाजन ने भी भारतीय कृषि को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया। कलकत्ता की जूट मिलों तथा बंबई और अहमदाबाद के कपड़ा मिलों में कच्चे माल की कमी हो गई। पंजाब और सिंध जैसे अमीर खाद्यान्न क्षेत्र भी पाकिस्तान में चले जाने से खाद्यान्न संकट उत्पन्न हो गया।

प्र.4. स्वतंत्रता के समय देश में कार्य कर रहे कुछ आधुनिक उद्योगों के नाम बताइए।
उत्तर : टोटा आयरन और स्टील उद्योग (टिस्को) 1907 में शुरू की गई थी, देश में कार्य कर रहे अन्य आधुनिक उद्योगों में चीनी उद्योग, इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग, रसायन उद्योग और कागज़ उद्योग शामिल थे।

प्र.5. स्वतंत्रता पूर्व अंग्रेजों द्वारा भारत के व्यवस्थित वि-औद्योगीकरण का दोहरे ध्येय क्या थे?
उत्तर : भारत के व्यवस्थित वि-औद्योगीकरण का दोहरा ध्येय इस प्रकार था
(क) भारत को इंग्लैंड में विकसित हो रहे आधुनिक उद्योगों के लिए कच्चे माल का निर्यातक बनाना।
(ख) उन उद्योगों के उत्पादन के लिए भारत को एक विशाल बाजार बनाना।

प्र.6. अंग्रेजी शासन के दौरान भारत के परंपरागत हस्तकला उद्योगों का विनाश हुआ। क्या आप इस विचार से सहमत हैं? अपने उत्तर के पक्ष में कारण बताइए।
उत्तर : हाँ, हम इस दृष्टिकोण से पूरी तरह सहमत हैं। ब्रिटिश नीतियाँ सदा से स्वहितों से निदेर्शित रही। ब्रिटेन ने कभी भी यह कष्ट नहीं उठाया कि वे इस तरफ ध्यान दें कि उनकी नीतियों का भारत के लोगों पर बेरोज़गार के रूप में, मानवीय कष्टों या कृषि क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने भारतीय हस्तकला उद्योगों पर भारी दर से कर लगाए ताकि भारतीय वस्त्र ब्रिटेन में बने ऊनी या रेशमी वस्त्रों से अधिक महँगे हो जाए। उन्होंने कच्चे माल के निर्यात को तथा ब्रिटेन से उत्पादित माल के आयात को कर मुक्त रखा। परंतु भारतीय हस्तकला उद्योगों के माल के निर्यात पर भारी कर लगाए। इसके अतिरिक्त भारतीय हस्तशिल्प उद्योग को मशीनों से बने सामान से भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। इसने भारतीय हस्तशिल्प उद्योग की बर्बादी में मुख्य भूमिका निभाई।

प्र.7. भारत में आधारिक संरचना विकास की नीतियों से अंग्रेज़ अपने क्या उद्देश्य पूरा करना चाहते थे?
उत्तर :
औपनिवेशिक शासनकाल में भारत में रेलों, पत्तनों, जल परिवहन व डाक-तार आदि का विकास हुआ परंतु इसका ध्येय जनसामान्य को अधिक सुविधाएँ प्रदान करना नहीं था अपितु इसके पीछे औपनिवेशिक हित साधने का ध्येय था।

(क)
अंग्रेज़ी शासन से पहले बनी सड़कें आधुनिक यातायात साधनों के लिए उपयुक्त नहीं थी। अतः सड़कों का निर्माण इसलिए किया गया ताकि देश के भीतर उनकी सेनाओं के आवागमन की सुविधा हो सके तथा देश के भीतरी भागों से कच्चा माल निकटतम रेलवे स्टेशन या पत्तने तक पहुँचाया जा सके।

(ख)
डाक, तार तथा संचार के साधनों का विकास कुशल प्रशासन के लिए किया गया।

(ग)
एक अन्य उद्देश्य यह भी था कि अंग्रेज़ी धन का भारत में लाभ अर्जित करने के लिए निवेश किया जाये।

प्र.8. ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन द्वारा अपनाई गई औद्योगिक नीतियों की कमियों की आलोचनात्मक विवेचना करें। (HOTS)
उत्तर : भारत औपनिवेशिक शासनकाल में एक शक्तिशाली औद्योगिक ढाँचे का विकास नहीं कर सका। यह निम्न तथ्यों के आधार पर सिद्ध किया जा सकता है

(क)
समान गुणवत्ता के किसी भी विकल्प के बिना हस्तकला उद्योग में गिरावट-ब्रिटेन का एकमात्र उद्देश्य सस्ती से सस्ती कीमतों पर भारत से कच्चा माल प्राप्त करना तथा भारत में ब्रिटेन से आया उत्पादित माल बेचना था। भारतीय हस्तशिल्प वस्तुओं की ब्रिटेन की मशीनों द्वारा बनाई गई वस्तुओं की तुलना में विदेशों में एक बेहतर प्रतिष्ठा थी इसलिए उन्होंने नीतिगत रीति से आयात को शुल्क मुक्त तथा हस्तशिल्प के निर्यात पर उच्च कर लगाकर भारतीय हस्तशिल्प उद्योग को बर्बाद कर दिया। उन्होंने इन नीतियों से बेरोजगारी, मानवीय पीड़ा या आर्थिक वृद्धि की दर पर होने वाले प्रभाव के प्रति कोई विचार नहीं किया।

(ख)
आधुनिक उद्योग का अभाव-भारत में आधुनिक उद्योग उन्नीसवीं सदी के दूसरे छमाही के दौरान विकसित होना शुरू हुआ। परंतु इसकी विकास दर बहुत धीमी और अवरुद्ध पूर्ण थी। औपनिवेशिक काल के अंत तक उद्योग और प्रौद्योगिक का स्तर निम्न रहा। उन्नीसवीं सदी के दौरान औद्योगिक विकास कपास और जूट कपड़ा मिलों तक ही सीमित था। लौह और इस्पात उद्योग 1907 में आया जबकि चीनी, सीमेंट और कागज़ उद्योग 1930 के दशक में विकसित हुए।

(ग)
पूँजीगत उद्योग को अभाव-भारत में मुश्किल से ही कोई पूँजीगत उद्योग थे जो आधुनिकीकरण को आगे बढ़ावा दे। सकें। 70% संयंत्र तथा मशीनरी का आयात किया जा रहा था। भारत अपनी तकनीकी तथा पूँजीगत वस्तुओं की आवश्यकता के लिए आयात पर निर्भर था।

(घ)
व्यावसायिक संरचना-निम्न विकास दर का सूचक: भारतीय अर्थव्यवस्था के अल्प विकसित होने का सबूत इस बात से मिल जाता है कि कार्यशील जनसंख्या का 72% हिस्सा कृषि में संलग्न था और 11.9% औद्योगिक क्षेत्र में संलग्न था। राष्ट्रीय आय में औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा 25.3% था जबकि कृषि का योगदान 57.6% हिस्से का था।

प्र.9. औपनिवेशिक काल में भारतीय संपत्ति के निष्कासन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर : विदेशी शासन के अंतर्गत भारतीय आयात-निर्यात की सबसे बड़ी विशेषता निर्यात अधिशेष का बड़ा आकार रहा। किंतु इस अधिशेष का देश के सोने और चाँदी के प्रवाह पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वास्तव में इसका उपयोग तो निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए किया गया।
(क) अंग्रेज़ों की भारत पर शासन करने के लिए गढ़ी गई व्यवस्था का खर्च उठाना।
(ख) अंग्रेज़ी सरकार के युद्धों पर व्यय तथा अदृश्य मदों के आयात पर व्यय।

प्र.10. जनांकिकीय संक्रमण के प्रथम से द्वितीय सोपान की ओर संक्रमण का विभाजन वर्ष कौन-सा माना जाता है?
उत्तर : 1921.

प्र.11. औपनिवेशिक काल में भारत की जनांकिकीय स्थिति को एक संख्यात्मक चित्रण प्रस्तुत करें। |
उत्तर :
(क) उच्च जन्म दर और मृत्यु दर-भारत जनांकिकीय संक्रमण के दूसरे चरण में था। अत: उच्च जन्म दर और गिरती मृत्यु दर के कारण इसे “जनसंख्या विस्फोट” का सामना करना पड़ रहा था।

(ख)
निम्न स्तरीय गुणात्मक पहलू-जनसंख्या के गुणात्मक पहलू भी कुछ उत्साहजनक नहीं रहे।

  1. उच्च शिशु मृत्यु दर-स्वतंत्रता के समय शिशु मृत्यु दर 218 प्रति हज़ार जितना उच्च था।
  2. व्यापक निरक्षरता-औसतन साक्षरता दर 16.5% से कम थी। केवल 7% महिलाएँ साक्षर थीं।
  3. निम्नस्तरीय जीवन प्रत्याशा-जीवन प्रत्याशा मात्र 32 वर्ष थी, जो नितांते अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं का संकेत है।
  4. व्यापक गरीबी तथा निम्न जीवन स्तर-लोगों को अपनी आय का 80-90% हिस्सा आधारभूत आवश्यकताओं पर
    खर्च करना पड़ रहा था। कुल जनसंख्या का 52% हिस्सा गरीबी रेखा के नीचे था। देश के कुछ हिस्सों में अकाल समान स्थितियों का सामना करना पड़ रहा था।

प्र.12. स्वतंत्रता पूर्व भारत की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना की प्रमुख विशेषताएँ समझाइये।
उत्तर : अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के बीच कार्यबल के वितरण को उस देश की व्यावसायिक संरचना कहा जाता है। स्वतंत्रता पूर्व भारत की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना की प्रमुख विशेषताओं को निम्न तथ्यों से जाना जा सकता है।
(a) कृषि क्षेत्र की प्रधानता-कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था की व्यावसायिक संरचना में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण था। भारत की कार्यशील जनसंख्या का 70-75% हिस्सा कृषि में संलग्न था, 10% हिस्सा औद्योगिक क्षेत्र तथा 15-20% हिस्सा सेवा क्षेत्र में संलग्न था।
(b) बढ़ रही क्षेत्रीय असमानता-व्यावसायिक संरचना में क्षेत्रीय विविधताएँ बढ़ रही थी। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक (जो उस समय मद्रास प्रेसीडेंसी का हिस्सा थे) जैसे राज्यों में कार्यबल की कृषि पर निर्भरता कम हो रही थी जबकि उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान में कृषि पर निर्भर कार्यबल में वृद्धि हो रही थी।

प्र.13. स्वतंत्रता के समय भारत के समक्ष उपस्थित प्रमुख आर्थिक चुनौतियों को रेखांकित करें।
उत्तर : शोषक औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को बुरी तरह से बर्बाद कर दिया। अंततः परिणामस्वरूप भारत को स्वतंत्रता के समय विशाल आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। भारतीय अर्थव्यवस्था को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा उनमें से मुख्य इस प्रकार हैं

(क)
कृषि उत्पादकता का निम्न स्तर-औपनिवेशिक शासन के दौरान अंग्रेजों ने भारतीय कृषि को अपने हितों के अनुसार इस्तेमाल किया। परिणामस्वरूप कृषि क्षेत्र को गतिहीनता, निम्न उत्पादकता स्तर निवेश का अभाव, भूमिहीन किसानों की खस्ताहालत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसीलिए भारत के लिए तत्कालिक समस्या यह थी कि वह कृषि क्षेत्र तथा इसकी उत्पादकता का विकास किस प्रकार करे। स्वतंत्रता के समय कुछ तत्कालिक जरूरत इस प्रकार थी-जमींदारी प्रथा का उन्मूलन करना, भूमि सुधार नीतियाँ बनाना, भूमि के स्वामित्व की असमानताओं को कम करना तथा किसानों का उत्थान करना।

(ख)
बाल्यकालीन औद्योगिक क्षेत्र-कृषि की ही भाँति भारत एक सुदृढ़ औद्योगिक आधार का विकास नहीं कर पाया। औद्योगिक क्षेत्र का विकास करने के लिए भारत को विशाल पूँजी, निवेश, आधारिक संरचना मानव कुशलताएँ, तकनीकी ज्ञान तथा आधुनिक तकनीक की आवश्यकता थी। इसके अलावा, ब्रिटिश उद्योगों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय घरेलू उद्योग बने रहने में विफल रहे। इस प्रकार लघु और बड़े उद्योगों को एक साथ अपने औद्योगिक क्षेत्र में विकसित करना भारत के लिए एक मुख्य चिंता का विषय था। इसके अलावा भारत में सकल घरेलू उत्पाद में औद्योगिक क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत थी जो भारत के लिए महत्त्वपूर्ण आर्थिक चुनौतियों में से एक था।

(ग)
आधारिक संरचना में कमी-हालाँकि देश की आधारिक संरचना में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन किया गया। परंतु यह कृषि और औद्योगिक क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार करने के लिए पर्याप्त नहीं था। इसके अतिरिक्त, उस समय के बुनियादी ढाँचे को आधुनिकीकरण की जरूरत थी।

(घ)
गरीबी और असमानता-भारत गरीबी और असमानता के दुष्चक्र में फँस गया था। ब्रिटिश शासन ने भारतीय धन का एक महत्त्वपूर्ण भाग ब्रिटेन की ओर निष्कासित कर दिया। परिणामस्वरूप, भारत की आबादी का एक बहुसंख्यक हिस्सा गरीबी से पीड़ित था। इसके कारण देशभर में आर्थिक असमानताओं को और अधिक बढ़ावा मिला।

प्र.14. भारत में प्रथम सरकारी जनगणना किस वर्ष में हुई थी?
उत्तर : 1881.

प्र.15. स्वतंत्रता के समय भारत के विदेशी व्यापार के परिमाण और दिशा की जानकारी दें।
उत्तर : औपनिवेशिक शासनकाल में, अंग्रेजों ने एक भेदभावपूर्ण कर नीति का पालन किया जिसके अंतर्गत उन्होंने भारत के लिए अंग्रेज़ी उत्पादों का आयात तथा अंग्रेज़ों को कच्चे माल का निर्यात कर मुक्त कर दिया। जबकि भारत के हस्तशिल्प उत्पादों पर भारी शुल्क (निर्यात शुल्क) लगाए गए। इससे भारतीय निर्यात महँगे हो गए और इसकी अंतर्राष्ट्रीय माँग तेज़ी से गिर गई।

औपनिवेशिक शासनकाल में भारत कच्चे उत्पाद जैसे-रेशम, कपास, ऊन, चीनी, नील और पटसन आदि का निर्यातक होकर रह गया। साथ ही यह इंग्लैंड के कारखानों में बनी हल्की मशीनों तथा सूती, रेशमी, ऊनी वस्त्र जैसे अंतिम उपभोक्ता वस्तुओं का आयातक भी हो गया। व्यवहारिक रूप से भारत के आयात-निर्यात पर अंग्रेज़ों का एकाधिकार हो गया। अतः भारत का आधे से अधिक आयात-निर्यात ब्रिटेन के लिए आरक्षित हो गया तथा शेष आयात-निर्यात चीन, फ्रांस, श्रीलंका की ओर निर्देशित कर दिया गया। इसके अतिरिक्त स्वेज नहर के खुलने के बाद तो भारतीय विदेशी व्यापार पर ब्रिटेन का अधिपत्य और भी जम गया। स्वेज नगर से ब्रिटेन और भारत के बीच में माल लाने और ले जाने की लागत में भारी कमी आई। भारत का विदेशी व्यापार अधिशेष उपार्जित करता रहा परंतु इस अधिशेष को भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश नहीं किया गया बल्कि यह प्रशासनिक और युद्ध उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया था। इससे भारतीय धन का ब्रिटेन की ओर पलायन हुआ।

प्र.16. क्या अंग्रेजों ने भारत में कुछ सकारात्मक योगदान भी दिया था? विवेचना करें।
उत्तर : यह कहना अनुचित होगा कि अंग्रेज़ों ने भारत में कुछ सकारात्मक योगदान दिया था अपितु कुछ सकारात्मक प्रभाव उनकी स्वार्थपूर्ण नीतियों के सह उत्पाद के रूप में उपलब्ध हो गये। ये योगदान इच्छापूर्ण तथा नीतिबद्ध नहीं थे बल्कि अंग्रेजों की शोषक औपनिवेशिक नीतियों का सह उत्पाद थे। अतः अंग्रेजों द्वारा भारत में ऐसे कुछ सकारात्मक योगदान इस प्रकार हैं

(क)
रेलवे का आरंभ- अंग्रेज़ी सरकार द्वारा भारत में रेलवे का आरंभ भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी उपलब्धि था। इसने सभी प्रकार की भौगोलिक तथा सांस्कृतिक बाधाओं को दूर किया तथा कृषि के व्यवसायीकरण को संभव किया।

(ख)
कृषि के व्यावसायिकरण का आरंभ- अंग्रेज़ी सरकार द्वारा कृषि का व्यावसायीकरण भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अन्य बड़ी उपलब्धि था। भारत में अंग्रेज़ी शासन आने से पूर्व, भारतीय कृषि स्वपोषी प्रकृति की थी। परंतु कृषि के व्यावसायीकरण के उपरांत कृषि उत्पादन बाजार की जरूरतों के अनुसार हुआ। यही कारण है कि आज भारत खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर होने के लक्ष्य को प्राप्त कर पाया है।

(ग)
आधारिक संरचना का विकास- अंग्रेजों द्वारा विकसित आधारिक ढाँचे ने देश में अकाल के फैलने को रोकने में विशेष योगदान दिया है। टेलीग्राम तथा डाक सेवाओं ने भी भारतीय जनता को सुविधाएँ दी।।

(घ)
शिक्षा का प्रोत्साहन तथा कुछ सामाजिक सुधार- अंग्रेजी भाषा में भारत में पाश्चात्य शिक्षा को प्रोत्साहित किया। अंग्रेजी भाषा भारत के बाहर की दुनिया को जानने के लिए एक खिड़की बनी। इसने भारत को विश्व के अन्य हिस्सों से जोड़ा। अंग्रेजों ने भारत में सती प्रथा भी प्रतिबंधित की और विधवा पुनर्विवाह अधिनियम की भी उद्घोषणा की।

(ङ)
भारत का एकीकरण- अंग्रेज़ी शासन से पूर्व भारत छोटे-छोटे राज्यों तथा सीमाओं में बँटा हुआ था। आज़ादी के युद्ध के नाम पर अंग्रेज़ भारत तथा भारतीयों को एकीकृत करने का एक कारण बन गये।

(च)
एक कुशल तथा शक्तिशाली प्रशासन का उदाहरण- अंग्रेजों ने अपने पीछे एक कुशल और शक्तिशाली प्रशासन का उदाहरण रख छोड़ा जिसका भारतीय नेता अनुसरण कर सकते थे।

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NCERT Solutions for Class 11 Sociology Understanding Society Chapter 2 Social Change and Social Order in Rural and Urban Society (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Sociology Understanding Society Chapter 2 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Sociology Understanding Society Chapter 2 Social Change and Social Order in Rural and Urban Society (Hindi Medium)

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पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न [NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED]

प्र० 1. क्या आप इस बात से सहमत हैं कि तीव्र सामाजिक परिवर्तन मनुष्य के इतिहास में तुलनात्मक रूप से नवीन घटना है? अपने उत्तर के लिए कारण दें।
उत्तर-

  • यह अनुमान लगाया जाता है कि मानव जाति का पृथ्वी पर अस्तित्व तकरीबन 5,00,000 (पाँच लाख) वर्षों से है, परंतु उनकी सभ्यता का अस्तित्व मात्र 6,000 वर्षों से ही माना जाता रहा है।
  • इन सभ्य माने जाने वाले वर्षों में, पिछले मात्र 400 वर्षों से ही हमने लगातार एवं तीव्र परिवर्तन देखें हैं।
  • इन परिवर्तनशील वर्षों में भी, इसके परिवर्तन में तेजी मात्र पिछले 100 वर्षों में आई है। जिस गति से परिवर्तन होता है? वह चूँकि लगातार बहता रहता है, शायद यही सही है कि पिछले सौ वर्षों में, सबसे अधिक परिवर्तन प्रथम पचास वर्षों की तुलना में अंतिम पचास वर्षों में हुए हैं।
  • आखिर पचास वर्षों के अंतर्गत, पहले तीस वर्षों | की तुलना में विश्व में परिवर्तन अंतिम तीस वर्षों में अधिक आया।

प्र० 2. सामाजिक परिवर्तन को अन्य परिवर्तनों से किस प्रकार अलग किया जा सकता है?
उत्तर-

  • सामाजिक परिवर्तन’ एक सामान्य अवधारणा है, जिसका प्रयोग किसी भी परिवर्तन के लिए किया जा सकता है। जो अन्य अवधारणा द्वारा परिभाषित नहीं किया जा सकता; जैसे-आर्थिक अथवा राजनैतिक परिवर्तन।
  • सामाजिक परिवर्तन का सरोकार उन परिवर्तनों से है जो महत्वपूर्ण हैं-अर्थात, परिवर्तन जो किसी वस्तु अथवा परिस्थिति की मूलाधार संरचना को समयावधि में बदल दें।
  • सामाजिक परिवर्तन कुछ अथवा सभी परिवर्तनों को सम्मिलित नहीं करते, मात्र बड़े परिवर्तन जो, वस्तुओं को बुनियादी तौर पर बदल देते हैं। सामाजिक परिवर्तन एक विस्तृत शब्द है। इसे और विशेष बनाने के लिए स्रोतों अथवा कारकों को अधिकतम वर्गीकृत करने की कोशिश की जाती है। प्राकृतिक आधार पर अथवा समाज पर इसके प्रभाव अथवा इसकी गति के आधार पर इसका वर्गीकरण किया जाता है।

प्र० 3. संरचनात्मक परिवर्तन से आप क्या समझते हैं? पुस्तक से अलग उदाहरणों द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-

  • संरचनात्मक परिवर्तन समाज की संरचना में परिवर्तन को दिखाता है, साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं अथवा नियमों के परिवर्तन को दिखाता है जिनसे इन संस्थाओं को चलाया जाता है।
  • उदाहरण के लिए, कागजी रुपये का मुद्रा के रूप में प्रादुर्भाव वित्तीय संस्थाओं तथा लेन-देन में बड़ा भारी परिवर्तन लेकर आया। इस परिवर्तन के पहले, मुख्य रूप से सोने-चाँदी के रूप में मूल्यवान धातुओं का प्रयोग मुद्रा के रूप में होता था।
  • सिक्के की कीमत उसमें पाए जाने वाले सोने अथवा चाँदी से मापी जाती थी।
  • इसके विपरीत, कागजी नोट की कीमत का उस लागत से कोई संबंध नहीं होता था, जिस पर वह छापा जाता था और न ही उसकी छपाई से।
  • कागजी मुद्रा के पीछे यह विचार था कि समान अथवा सुविधाओं के लेने-देन में जिस चीज का प्रयोग हो, उसको कीमती होना जरूरी नहीं। जब तक यह मूल्य को ठीक से दिखाता है अर्थात जब तक यह विश्वास को जगाए रखता है-तकरीबन कोई भी चीज़ पैसे के रूप में काम कर सकती है।
  • मूल्यों तथा मान्यताओं में परिवर्तन भी सामाजिक परिवर्तन ला सकते हैं।
  • उदाहरण के तौर पर, बच्चों तथा बचपन से संबंधित विचारों तथा मान्यताओं में परिवर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण प्रकार के सामाजिक परिवर्तन में सहायक सिद्ध हुआ है। एक समय था जब बच्चों को साधारणतः ‘आवश्यक’ समझा जाता था। बचपन से संबंधित कोई विशिष्ट संकल्पना नहीं थी, जो इससे जुड़ी हो कि बच्चों के लिए क्या सही था अथवा क्या गलत।
  • उदाहरण के लिए, उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में, यह ठीक माना जाने लगा कि बच्चे जितनी जल्दी काम करने के योग्य हो जाएँ, काम पर लग जाएँ, बच्चे अपने परिवारों को काम करने में मदद पाँच अथवा छह वर्ष की आयु से ही प्रारंभ कर देते थे; प्रारंभिक फैक्ट्री व्यवस्था बच्चों के श्रम पर आश्रित थी।
  • यह उन्नीसवीं तथा पूर्व बीसवीं शताब्दियों के दौरान बचपन जीवन की एक विशिष्ट अवस्था है यह संकल्पना प्रभावी हुई है। इस समय छोटे बच्चों का काम करना अविधारणीय हो गया तथा अनेक देशों ने बाल श्रम को कानून द्वारा बंद कर दिया।

प्र० 4. पर्यावरण संबंधित कुछ सामाजिक परिवर्तनों के बारे में बताइए।
उत्तर-

  • प्रकृति, पारिस्थितिकी तथा भौतिक पर्यावरण को समाज की संरचना तथा स्वरूप पर महत्वपूर्ण प्रभाव हमेशा से रहा है।
  • विगत समय के संदर्भ में यह विशेष रूप से सही है। जब मनुष्य प्रकृति के प्रभावों को सोचने अथवा झेलने में अक्षम था। उदाहरण के लिए, मरुस्थलीय वातावरण में रहने वाले लोगों के लिए एक स्थान पर रहकर कृषि करना संभव नहीं था, जैसे, मैदानी भागों अथवा नदियों के किनारे इत्यादि। अतः जिस प्रकार का भोजन वे करते थे अथवा कपड़े पहनते थे, जिस प्रकार आजीविका चलाते थे तथा सामाजिक अन्योन्यक्रिया ये सब काफ़ी हद तक उनके पर्यावरण के भौतिक तथा जलवायु की स्थितियों से निर्धारित होता है।
  • त्वरित तथा विध्वंसकारी घटनाएँ; जैसे-भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, बाढ़ अथवा ज्वारभाटीय तरंगें (जैसा कि दिसंबर 2004 में सुनामी की तरंगों से इंडोनेशिया, श्रीलंका, अंडमान द्वीप, तमिलनाडु के कुछ भाग इसकी चपेट में आए) समाज को पूर्णरूपेण बदलकर रख देते हैं। ये बदलाव अपरिवर्तनीय होते हैं, अर्थात् ये स्थायी होते हैं तथा चीजों को वापस अपनी पूर्वस्थिति में नहीं आने देते।
  • प्राकृतिक विपदाओं के अनेकानेक उदाहरण इतिहास में देखने को मिल जाएँगे, जो समाज को पूर्णरूपेण परिवर्तित कर देते हैं अथवा पूर्णतः नष्ट कर देते हैं। परिवर्तन लाभ के लिए पर्यावरणीय या पारिस्थितिकीय कारकों का न केवल विनाशकारी होना अनिवार्य है, अपितु उसे सृजनात्मक भी होना अनिवार्य है।

प्र० 5. वे कौन से परिवर्तन हैं, जो तकनीक तथा अर्थव्यवस्था द्वारा लाए गए हैं?
उत्तर-

  • विशेषकर आधुनिक काल में तकनीक तथा आर्थिक परिवर्तन के संयोग से समाज में तीव्र परिवर्तन आया है।
  • तकनीक समाज को कई प्रकार से प्रभावित करती है। यह हमारी मदद, प्रकृति को विभिन्न तरीकों से नियंत्रित उसके अनुरूप ढालने में अथवा दोहन करने में करती है। बाजार जैसी शक्तिशाली संस्था से जुड़कर तकनीकी परिवर्तन अपने सामाजिक प्रभाव की तरह ही प्राकृतिक कारकों; जैसे-सुनामी तथा तेल की खोज की तरह प्रभावी हो सकते हैं।
  • वाष्प शक्ति की खोज में उदीयमान विभिन्न प्रकार के बड़े उद्योगों को शक्ति की उस ताकत को जो न केवल पशुओं तथा मनुष्यों के मुकाबले कई गुणा अधिक थी, बल्कि बिना रुकावट के लगातार
    चलने वाली भी थी, से परिचित कराया।
  • यातायात के साधनों; जैसे-वाष्पचलित जहाज तथा रेलगाड़ी ने दुनिया की अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक भूगोल को बदलकर रख दिया।
  • रेल ने उद्योग तथा व्यापार को अमेरिका महाद्वीप तथा पश्चिमी विस्तार को सक्षम किया। भारत में भी, रेल परिवहन ने अर्थव्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, विशेषकर 1853 में भारत में आने से लेकर मुख्यतः प्रथम शताब्दी तक।
  • वाष्पचलित जहाजों ने समुद्री यातायात को अत्यधिक तीव्र तथा भरोसेमंद बनाया तथा इसमें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तथा प्रवास की गति को बदलकर रख दिया। दोनों परिवर्तनों ने विकास की विशाल लहर पैदा की जिसने न केवल अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया अपितु विश्व समय के सामाजिक सांस्कृतिक तथा जनसांख्यिक रूप को बदल दिया।
  • कभी-कभी तकनीक का सामाजिक प्रभाव पूर्वव्यापी भी होता है। तकनीकी आविष्कार अथवा खोज का कभी-कभी तात्कालिक प्रभाव संकुचित होता है, जो देखने पर लगता है, जैसे सुप्तावस्था में हो। बाद में होने वाले परिवर्तन आर्थिक संदर्भ में उसी खोज की सामाजिक महत्ता को एकदम बदल देते हैं तथा उसे ऐतिहासिक घटना के रूप में मान्यता देते हैं। इसका उदाहरण चीन में बारूद तथा कागज की खोज है, जिसका प्रभाव सदियों तक संकुचित रहा, जब तक कि उनका प्रयोग पश्चिमी यूरोप के आधुनिकीकरण के संदर्भ में नहीं हुआ। । उसी बिंदु से दी गई परिस्थितियों का लाभ उठा, बारूद द्वारा युद्ध की तकनीक में परिवर्तन तथा कागज की छपाई की क्रांति ने समाज को हमेशा के लिए परिवर्तित कर दिया।
  • कई बार आर्थिक व्यवस्था में होने वाले परिवर्तन, जो प्रत्यक्ष तकनीकी नहीं होते हैं, भी समाज को बदल सकते हैं। जाना-पहचाना ऐतिहासिक उदाहरण, रोपण कृषि-यहाँ बड़े पैमाने पर नकदी फसलों; जैसे-गन्ना, चाय अथवा कपास की खेती की जाती है, ने श्रम के लिए भारी माँग उत्पन्न की।
  • भारत में असम के चाय बगानों में काम करने वाले अधिकतर लोग पूर्वी भारत के थे (विशेषकर झारखंड तथा छत्तीसगढ़ के आदिवासी भागों से), जिन्हें श्रम के लिए प्रवास करना पड़ा।

प्र० 6. सामाजिक व्यवस्था का क्या अर्थ है तथा इसे कैसे बनाए रखा जा सकता है?
उत्तर-

  • सामाजिक व्यवस्था सुस्थापित समाजिक प्रणालियाँ हैं, जो परिवर्तन को प्रतिरोध तथा उसे विनियमित करती हैं।
  • सामाजिक व्यवस्था सामाजिक परिवर्तन को रोकती है, हतोत्साहित करती है अथवा कम से कम नियंत्रित करती है। अपने आपको एक शक्तिशाली तथा प्रासंगिक सामाजिक व्यवस्था के रूप में सुव्यवस्थित करने के लिए प्रत्येक समाज को अपने आपको समय के साथ पुनरूत्पादित करना तथा उसके स्थायित्व को बनाए रखना पड़ता है। स्थायित्व के लिए आवश्यक हैं कि चीजें कमोबेश वैसी ही बनी रहें जैसी वे हैं-अर्थात व्यक्ति लगातार समाज के नियमों का पालन करता रहे, सामाजिक क्रियाएँ एक ही प्रकार के परिणाम दें और साध रिणत: व्यक्ति तथा संस्थाएँ पूर्वानुमानित रूप में
    आचरण करें।
  • समाज के शासक अथवा प्रभावशाली वर्ग अधिकांशतः सामाजिक परिवर्तन का प्रतिरोध करते हैं, जो उनकी स्थिति को बदल सकते हैं, क्योंकि स्थायित्व में उनका अपना हित होता है। वहीं दूसरी तरफ अधीनस्थ अथवा शोषित वर्गों का हित परिवर्तन में होता है। सामान्य स्थितियाँ अधिकांशतः अमीर तथा शक्तिशाली वर्गों की तर. फदारी करती हैं तथा वे परिवर्तन के प्रतिरोध में सफल होते हैं।
  • सामाजिक व्यवस्था सामाजिक संबंधों की विशिष्ट पद्धति तथा मूल्यों एवं मानदंडों के सक्रिय अनुरक्षण तथा उत्पादन को निर्देशित करती है। विस्तृत रूप में, सामाजिक व्यवस्था इन दो में से किसी एक तरीके से प्राप्त की जा सकती है, जहाँ व्यक्ति नियमों तथा मानदंडों को स्वतः मानते हों अथवा कहाँ मानदंडों को मानने के लिए व्यक्तियों को बाध्य किया जाता हो।
  • सामाजीकरण भिन्न परिस्थितियों में अधिक या न्यूनतः कुशल हो सकता है, परंतु वह कितना ही कुशल क्यों न हो, यह व्यक्ति की दृढ़ता को पूर्ण रूप से समाप्त नहीं कर सकता है।
  • सामाजीकरण, समाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अथक प्रयास करता है, परंतु यह प्रयास भी अपने आप में पूर्ण नहीं होता।
  • अतः अधिकतर आधुनिक सामज कुछ रूपों में संस्थागत तथा सामाजिक मानदंडों को बनाए रखने के लिए शक्ति अथवा दबाव पर निर्भर करते हैं।
  • सत्ता की परिभाषा अधिकांशतः इस रूप में दी जाती है कि सत्ता स्वेच्छानुसार एक व्यक्ति से मनचाहे कार्य को करवाने की क्षमता रखती है। जब सत्ता का संबंध स्थायित्व तथा स्थिरता से होता है तथा दूसरे जुड़े पक्ष अपने सापेक्षिक स्थान के अभ्यस्त हो जाते हैं, तो हमारे सामने प्रभावशाली स्थिति उत्पन्न होती है।
  • यदि सामाजिक तथ्य (व्यक्ति, संस्था अथवा वर्ग) नियमपूर्वक अथवा आदतन सत्ता की स्थिति में होते हैं, तो इसे प्रभावी माना जाता है।
  • साधारण समय में, प्रभावशाली संस्थाएँ, समूह तथा व्यक्ति समाज में निर्णायक प्रभाव रखते हैं। ऐसा नहीं है कि उन्हें चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ता, परंतु यह विपरीत तथा विशिष्ट परिस्थितियों में होता है।

प्र० 7. सत्ता क्या है तथा यह प्रभुता तथा कानून से कैसे संबंधित है?
उत्तर-

  • मैक्स वेबर के अनुसार सत्ता कानूनी शक्ति है। अर्थात शक्ति न्यायसंगत तथा ठीक समझी जाती है। उदाहरण के लिए, एक पुलिस ऑफिसर एक जज अथवा एक स्कूल शिक्षक, सब अपने कार्य में निहित सत्ता का प्रयोग करते हैं।
  • ये शक्ति उन्हें विशेषकर उनके सरकारी कार्यों की रूपरेखा को देखते हुए प्रदान की गई है-लिखित कागजातों द्वारा सत्ता क्या कर सकती है तथा क्या नहीं, का बोध होता है।
  • कानून सुस्पष्ट संहिताबद्ध मानदंड अथवा नियम होते हैं। यह ज्यादातर लिखे जाते हैं तथा नियम किस प्रकार बनाए अथवा बदले जाने चाहिए, अथवा कोई उनको तोडता है तो क्या करना चाहिए।
  • कानून नियमों के औपचारिक ढाँचे का निर्माण करता है जिसके द्वारा समाज शासित होता है। कानून प्रत्येक नागरिक पर लागू होता है। चाहे एक व्यक्ति के रूप में ‘मैं’ कानून विशेष से सहमत हूँ। या नहीं, यह नागरिक के रूप में ‘मुझे जोड़ने वाली ताकत है, तथा अन्य सभी नागरिकों को उनकी मान्यताओं से हटकर।
  • प्रभाव, शक्ति के तहत कार्य करता है, परंतु इनमें से अधिकांश शक्ति में कानूनी शक्ति अथवा सत्ता होती है, जिसका एक बृहत्तर भाग कानून द्वारा संहितावद्ध होता है।
  • कानूनी संरचना तथा संस्थागत मदद के कारण सहमति तथा सहयोग नियमित रूप से तथा भरोसे के आधार पर लिया जाता है। यह शक्ति के प्रभाव क्षेत्र अथवा प्रभावितों को समाप्त नहीं करता। कई प्रकार की शक्तियाँ हैं, जो समाज में प्रभावी हैं। हालाँकि वे गैरकानूनी हैं, और यदि कानूनी हैं तब कानूनी रूप से संहिताबद्ध नहीं हैं।

प्र० 8. गाँव, कस्बा तथा नगर एक दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर-

  • गाँव ग्रामीण समुदाय की एक इकाई है, जो ग्रामीण जीवन को कायम रखती है और इसके कार्यों से अलग रहती है।
  • यह कृषि आधारित सरल समुदाय है।
  • गाँवों का उद्भव सामाजिक संरचना में आए महत्वपूर्ण परिवर्तनों से हुआ जहाँ खानाबदोशी जीवन पद्धति, शिकार, भोजन संकलन तथा अस्थायी कृषि पर आधारित थी, या संक्रमण स्थायी जीवन में हुआ।
  • सामाजिक परिवर्तन धीमी गति से अनवरत घटित होता है।
  • नगरों में उच्च जनसंख्या, अति जनसंख्या घनत्व और विजातीयता पाई जाती है जो मुख्य रूप से गैर-कृषि धंधों से जुड़े रहते हैं।
  • उनके जीवन जटिल और बहुउद्देशीय होते हैं। ये । सामान्यतया व्यापारिक केंद्र हैं।
  • नगरों में सामाजिक परिवर्तन तीव्र गति से होता है।

प्र० 9. ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक व्यवस्था की कुछ। विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर-

  • गाँवों का आकार छोटा होता है। अतः ये अधिकांशतः व्यक्तिगत संबंधों का अनुमोदन करते हैं। गाँव के लोगों द्वारा तकरीबन गाँव के ही दूसरे लोगों को देखकर पहचान लेना असामान्य नहीं है।
  • गाँव की सामाजिक संरचना परंपरागत तरीकों से चालित होती है। इसलिए सामाजिक संस्थाएँ जैसे-जाति, धर्म तथा सांस्कृतिक एवं परंपरागत सामाजिक प्रथाओं के दूसरे स्वरूप यहाँ अधिक प्रभावशाली हैं।
  • इन कारणों से जब तक कोई विशिष्ट परिस्थितियाँ न हों, गाँवों में परिवर्तन नगरों की अपेक्षा धीमी गति से होता है।
  • समाज के अधीनस्थ समूहों के पास ग्रामीण इलाके में अपने नगरीय भाइयों की तुलना में अभिव्यक्ति के दायरे बहुत कम होते हैं। गाँव में व्यक्ति एक दूसरे से सीधा संबद्ध होता है। इसलिए व्यक्ति विशेष का समुदाय के साथ असहमत होना कठिन होता है और इसका उल्लंघन करने वाले को सबक सिखाया जा सकता है।
  • प्रभावशाली वर्गों की शक्ति सापेक्षिक रूप से कहीं ज्यादा होती है, क्योंकि वे रोज़गार के साधनों तथा अधिकांशतः अन्य संसाधनों को नियंत्रित करते हैं। अतः गरीबों को प्रभावशाली वर्गों पर निर्भर होना पड़ता है, क्योंकि उनके पास रोजगार के अन्य साधन अथवा सहारा नहीं होता।
  • यदि गाँव में पहले से ही मजबूत शक्ति संरचना होती तो उसे उखाड़ फेंकना बहुत कठिन होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में शक्ति संरचना के संदर्भ में होने वाला परिवर्तन और भी धीमा होता है, क्योंकि वहाँ की सामाजिक व्यवस्था अधिक मजबूत और स्थिर होती है।
  • अन्य परिवर्तन आने में भी समय लगता है, क्योंकि गाँव बिखरे होते हैं तथा पूरी दुनिया से एकीकृत नहीं होते जैसे-नगर तथा कस्बे होते हैं।
  • अन्य संचार के साधनों में भी समय के साथ सुधार आया है। इसके कारण मात्र कुछ एक गाँव ‘एकांत’ तथा ‘पिछड़ा’ होने का दावा कर सकते हैं।
  • जनसंख्या का उच्च घनत्व स्थान पर अत्यधिक जोर देता है तथा तार्किक स्तर पर जटिल समस्याएँ खड़ी करता है। कस्बों सामाजिक व्यवस्था की बुनियादी कड़ी है, जो कि नगर की देशिक जीवनक्षमता को
    आश्वस्त करें।
  • इसका अर्थ है कि संगठन तथा प्रबंधन कुछ चीजों को जैसे निवास तथा आवासीय पद्धति; जन यातायात के साधन उपलब्ध कर सकें, ताकि कर्मचारियों की बड़ी संख्या को कार्यस्थल से लाया तथा ले जाया जा सके; आवासीय सरकारी तथा औद्योगिक भूमि उपयोग क्षेत्र के सह-अस्तित्व की व्यवस्था।
  • सभी प्रकार के जनस्वास्थ्य, स्वच्छता, पुलिस सेवा, जनसुरक्षा तथा कस्बे के शासन पर नियंत्रण की आवश्यकता है।
  • इनमें से प्रत्येक कार्य अपने आप में एक वृहत उपक्रम है तथा योजना, क्रियान्विति और रखरखाव को दुर्जय चुनौती देता है।
  • वे कार्य जो समूह, नृजातीयता, धर्म, जाति इत्यादि के विभाजन तथा तनाव से न केवल जुड़े, बल्केि सक्रिय भी होते हैं।
  • गरीब के लिए आवास की समस्या ‘बेघर’ तथा सड़क पर चलने वाले लोग इस प्रक्रिया को जन्म देते हैं जो सड़कों, फुटपाथों, पुलों तथा फ्लाईओवर के नीचे, खाली बिल्डिग तथा अन्य खाली स्थानों पर रहने तथा जीवनयापन करते हैं। यह इन बस्तियों के जन्म का एक महत्वपूर्ण कारण भी है।
  • संपति का अधिकार दूसरे स्थानों की तरह नहीं होता है। अतः बस्तियाँ दादाओं की जन्मभूमि होती हैं, जो उन लोगों पर अपना बलात् अधिकार दिखाते हैं, जो वहाँ रहते हैं।
  • पूरे विश्व में नगरीय आवासीय क्षेत्र प्रायः समूह तथा अधिकतर प्रजाति नृजातीयता, धर्म तथा अन्य कारकों द्वारा विभाजित होते हैं। इन पहचानों के बीच तनाव के प्रमुख परिणाम पृथकीकरण की प्रक्रिया के रूप में भी उजागर होता है। उदाहरण के लिए, भारत में विभिन्न धर्मों के बीच सांप्रदायिक तनाव, विशेषकर हिंदुओं तथा मुसलमानों में देखा जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप मिश्रित प्रतिदेशी एकल-समुदाय में बदल गए। • सांप्रदायिक दंगों को ये एक विशिष्ट देशिक रूप दे देते हैं, जो बस्तीकरण की नवीन प्रक्रिया घैटोआइजेशन को ओर बढ़ाते हैं।
  • पूरे विश्व में व्याप्त ‘गेटेड समुदाय’ जैसी वृद्धि भारतीय शहरों में भी देखी जा सकती है। इसका अर्थ है एक समृद्ध प्रतिवेशी (पडौसी) का निर्माण जो अपने परिवेश से दीवारों तथा प्रवेशद्वारों से अलग होता है वे यहाँ प्रवेश तथा निवास नियंत्रित होता है। अधिकांश ऐसे समुदायों की अपनी सामानांतर नागरिक सुविधाएँ; जैसे-पानी और
    बिजली सप्लाई, पुलिस तथा सुरक्षा भी होती है।

प्र० 10. नगरी क्षेत्रों की सामाजिक व्यवस्था के सामने कौन-सी चुनौतियाँ हैं?
उत्तर- विद्यार्थी स्वयं करें।

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NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 3

NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 3 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 3 Drainage System (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) निम्नलिखित में से कौन-सी नदी ‘बंगाल का शोक’ के नाम से जानी जाती थी?
(क) गंडक
(ख) कोसी
(ग) सोन
(घ) दामोदर
उत्तर- (घ) दामोदर

(ii) निम्नलिखित में से किस नदी की द्रोणी भारत में सबसे बड़ी है?
(क) सिंधु
(ख) ब्रह्मपुत्र
(ग) गंगा
(घ) कृष्णा
उत्तर- (ग) गंगा

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सी नदी पंचनद में शामिल नहीं है?
(क) रावी
(ख) सिंधु
(ग) चेनाब
(घ) झेलम
उत्तर- (ख) सिंधु

(iv) निम्नलिखित में से कौन-सी नदी भ्रंश घाटी में बहती है?
(क) सोन।
(ख) यमुना
(ग) नर्मदा
(घ) लूनी
उत्तर- (ग) नर्मदा

(v) निम्नलिखित में से कौन-सा अलकनंदा व भागीरथी का संगम स्थल है?
(क) विष्णु प्रयाग
(ख) रूद्र प्रयाग
(ग) कर्ण प्रयाग
(घ) देव प्रयाग
उत्तर- (घ) देव प्रयाग

प्र० 2. निम्न में अंतर स्पष्ट करें।
(i) नदी द्रोणी और जल संभर
उत्तर- नदी द्रोणी और जल संभर में अंतर-
NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 3 (Hindi Medium) 2

(ii) वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रतिरूप।
उत्तर- वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रतिरूप में अंतर-
NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 3 (Hindi Medium) 2.1

(iii) अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय अपवाह प्रतिरूप।
उत्तर- अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय अपवाह प्रारूप में अंतर-
NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 3 (Hindi Medium) 2.2

(iv) डेल्टा और ज्वारनदमुख।
उत्तर-
NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 3 (Hindi Medium) 2.3
NCERT Solutions for Class 11 Geography Indian Physical Environment Chapter 3 (Hindi Medium) 2.4

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें:
(i) भारत में नदियों को आपस में जोड़ने के सामाजिक-आर्थिक लाभ क्या हैं?
उत्तर- भारत की नदियाँ दो प्रकार की हैं। एक प्रकार की नदी जिसमें सालों भर पानी रहता है और दूसरे प्रकार की नदी जिसमें सालों भर पानी नहीं रहता है। भारत की नदियाँ प्रतिवर्ष जल की विशाल मात्रा वहन करती हैं लेकिन समय व स्थान की दृष्टि से इसका वितरण समान नहीं है। वर्षा ऋतु में अधिकांश जल बाढ़ में व्यर्थ हो जाता है और समुद्र में बह जाता है। इसी प्रकार जब देश के एक भाग में बाढ़ होती है तो दूसरा भाग सूखाग्रस्त होता है। यदि हम नदियों को आपस में जोड़ दें तो बाढ़ और सूखे की समस्या भी हल हो जाएगी। पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध होने के कारण पीने के पानी की समस्या भी हल हो जाएगी हजारों, करोड़ों रुपयों की बचत होगी और पैदावार में बढ़ोत्तरी होगी तथा किसानों की आर्थिक हालत सुधरेगी।

(ii) प्रायद्वीपीय नदी के तीन लक्षण लिखें।
उत्तर- प्रायद्वीपीय नदी के निम्नलिखित तीन लक्षण हैं
(i) प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ समतल भागों से होकर नहीं बहती हैं, इसलिए इनसे नहरें नहीं निकाली जातीं।
(ii) प्रायद्वीपीय भारत की नदियों में सालों भर पानी नहीं रहता।
(iii) प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ टेढ़ी-मेढ़ी नहीं बहती अर्थात विसर्प नहीं बनातीं।

प्र० 4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 125 शब्दों से अधिक में न दें:
(i) उत्तर भारतीय नदियों की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ क्या हैं? ये प्रायद्वीपीय नदियों से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर- भारत की अधिकांश नदियाँ हिमालय से निकलती हैं। इसलिए अधिकांशतः नदियों में सालों भर पानी रहता है। कुछ नदियाँ पठारी भागों से निकलती हैं जो गर्मी के दिनों में सूख जाती हैं। उत्तर भारत की नदियाँ अधिकांशतः मैदानी भागों में बहती । हैं, जिसके कारण इन नदियों से नहरें निकाली जा सकती हैं। उत्तर भारत की अधिकांशतः नदियाँ गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियाँ हैं। सिंधु नदी अरब सागर में और गंगा तथा ब्रह्मपुत्र बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
दक्षिण भारत की नदियाँ उत्तर भारत की नदियों से भिन्न हैं। दक्षिण भारत की नदियों में सालों भर पानी नहीं रहता और न ही ये नदियाँ समतल भागों में बहती हैं। इसलिए इन नदियों में न नावें चलाई जा सकती हैं, और न ही नहरें निकाली जा सकती हैं। जबकि उत्तर भारत की नदियों की स्थिति ठीक इसके विपरीत है।

(ii) मान लीजिए आप हिमालय के गिरिपद के साथ-साथ हरिद्वार से सिलीगुड़ी तक यात्रा कर रहे हैं, इस मार्ग में आने वाली मुख्य नदियों के नाम बताएँ। इनमें से किसी एक नदी की विशेषताओं का भी वर्णन करें।
उत्तर- हिमालय के गिरिपद के साथ-साथ हरिद्वार से सिलीगुड़ी तक यात्रा करने पर इस मार्ग में आने वाली मुख्य नदियाँ टोंस, गोमती, सरयू, रामगंगा, शारदा, गंडक, बुढ़ी गंडक, कमला, बागमती, कोसी, गंगा आदि प्रमुख हैं। उत्तरांचल के उत्तरकाशी जिले में 3900 मीटर की ऊँचाई पर स्थित गंगोत्री हिमनद गंगा का उद्गम स्रोत है। यहाँ इसे भागीरथी कहते हैं। गंगा ने मध्य हिमालय और लघु हिमालय को काटकर सँकरे महाखड्डू बनाए हैं। देवप्रयाग में भागीरथी, अलकनंदा से मिलती हैं। यहीं से दोनों की संयुक्त धारा का नाम गंगा हो जाता है। हरिद्वार के निकट गंगा मैदान में प्रवेश करती है। यहाँ से पहले यह दक्षिण दिशा में तथा पुनः दक्षिण-पूर्व और पूर्व दिशा में बहती हैं और आगे चलकर भागीरथी और हुगली नाम की दो वितरिकाओं में बँट जाती है। गंगा की कुल लम्बाई 2525 कि.मी. है। उत्तरांचल और उत्तर प्रदेश में 1560 कि.मी., बिहार में 445 कि.मी. तथा पश्चिम बंगाल में 520 कि.मी. की दूरी में गंगा बहती है। गंगा द्रोही केवल भारत में लगभग 8.6 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है।

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NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 2 Diversity and Discrimination (Hindi Medium)

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पाठ्यपुस्तक के आंतरिक प्रश्न

1. शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के बारे में नीचे कुछ कथन दिए गए हैं। जिन कथनों से आप सहमत हैं, उन पर निशान लगाइए :(एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-16)

ग्रामीण लोग

(a) आधे से ज्यादा भारतीय गाँवों में रहते हैं।
(b) ग्रामीण लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क नहीं होते। वे बहुत अंधविश्वासी होते हैं।
(c) गाँव के लोग बहुत पिछड़े हुए और आलसी होते हैं। वे काम करना पसंद नहीं करते।
(d) फसल की बुवाई और कटाई के समय परिवार के लोग खेतों में 12 से 14 घंटों तक काम करते हैं।
(e) गाँव वाले गंदे होते हैं। वे साफ नहीं रहते।

शहरी लोग

(a) शहरी जीवन बड़ा आसान होता है। यहाँ के लोग बिगड़े हुए और आलसी होते हैं।
(b) शहरों में लोग अपने परिवार के सदस्यों के साथ बहुत कम समय बिताते हैं।
(c) शहरी लोग केवल पैसे की चिंता करते हैं, लोगों की नहीं।
(d) शहरी लोगों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, वे चालाक और भ्रष्ट होते हैं।
(e) शहरों में रहना बहुत महँगा पड़ता है। लोगों की कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा किराए और आने-जाने में खर्च हो जाता है।

उत्तर

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium) 1

2. उन कथनों को फिर से देखिए जो आपको ग्रामीण एवं शहरी लोगों के बारे में सही लगे। क्या आपके दिमाग में ग्रामीण या शहरी लोगों को लेकर किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह हैं? क्या दूसरे लोगों के दिमाग में भी ये पूर्वाग्रह हैं? लोगों के दिमाग में ये पूर्वाग्रह क्यों होते हैं?

  • जिन पूर्वाग्रहों को आपने अपने आस-पास महसूस किया है उनकी एक सूची बनाइए। ये पूर्वाग्रह लोगों के व्यवहार को कैसे प्रभावित करते हैं (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-16)

उत्तर
ग्रामीण लोग –

(a) यह पूर्वाग्रह नहीं है, क्योंकि सरकारी आँकड़ों से यह स्पष्ट है कि आधे से ज्यादा भारतीय गाँवों में रहते हैं।
(d) यह पूर्वाग्रह नहीं है, यह कथन सही है कि फसल की बुवाई व कटाई के समय बहुत अधिक काम होता है इसलिए काम को पूरा करने के लिए अधिक समय यानी 12 से 14 घंटे काम करना पड़ता है।
(e) यह पूर्वाग्रह नहीं है, बल्कि सच्चाई यह है कि गाँवों के लोगों को अधिक मेहनत करनी होती है तथा उनका काम धूल-मिट्टी से जुड़ा होता है जिसके कारण उनके कपड़े गंदे रहते हैं तथा शरीर पसीनों से भीगा रहता है।

उत्तर शहरी लोग –

(b) यह पूर्वाग्रह नहीं है, बल्कि सच्चाई है, क्योंकि शहर के लोगों को एक निश्चित अवधि के दौरान तथा निश्चित समय तक काम करना होता है। वे अपने काम करने की अवधि तथा समय अपनी सुविधा के अनुसार नहीं बदल सकते हैं तथा उन्हें काम करने के लिए भी अपने घर से बहुत दूर जाना होता है।
(c) यह पूर्वाग्रह नहीं है, बल्कि शहर के लोगों की कार्य की प्रकृति से संबंधित है, क्योंकि शहर के लोग अपने काम करने का समय तथा अवधि स्वयं निश्चित नहीं कर सकते हैं, इसलिए उनके पास समाज सेवा इत्यादि के लिए समय नहीं होता है।
(e) यह पूर्वाग्रह नहीं है, बल्कि सच्चाई है, क्योंकि शहर में कार्य कर रहे सभी व्यक्तियों के पास अपना घर नहीं होता है उन्हें किराये के मकान में रहना पड़ता है जिसका किराया बहुत अधिक होता है। इसी तरह लोगों को अपने-अपने कार्य स्थल तक पहुँचने के लिए भी लंबी यात्रा करनी पड़ती है जिस कारण यात्रा करने में भी काफी पैसा खर्च होता है छात्र अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।

3. नीचे दिए गए कथनों की सूची में से तालिका को भरिए। अपने उत्तर के कारणों पर चर्चा कीजिए।

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium) 2
NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium) 3
NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium) 4
NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium) 5

ऊपर के चित्रों में जो बच्चे हैं उन्हें पहले ‘विकलांग’ कहा जाता था। इस शब्द को बदलकर आज उनके लिए जो शब्द प्रयोग किए जाते हैं वे हैं-‘खास जरूरतों वाले बच्चे। उनके बारे में लोगों के पूर्वाग्रहों को यहाँ बड़े अक्षरों में दिया गया है। साथ में उनकी अपनी भावनाएँ और विचार भी दिए गए हैं। ये बच्चे अपने से जुड़ी रूढिबद्ध धारणाओं के बारे में क्या कह रहे हैं और क्यों-इस पर चर्चा कीजिए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-18 )
उत्तर
चित्रों में ये बच्चे अपने से जुड़ी रूढिबद्ध धारणओं के बारे में निम्नलिखित बातें कह रहे हैं –

  • चित्र -1 – लोग मेरे विषय में तरह-तरह की बातें करते हैं मैं लँगड़ाता हूँ, मेरी बोली लड़खड़ाती है इसके अलावा और भी बहुत कुछ। इसलिए मैं कभी उदास हो जाता हूँ तो कभी दुःखी हो जाता हूँ। लोग मेरा मजाक भी उड़ाते हैं, लेकिन मेरे लिए यह नई बात नहीं है।
  • चित्र – 2 – लोग मुझे देखकर कहते हैं कि तुम दूसरों से कितनी अलग दिखती हो। ये सब बातें सुनकर मुझे शर्म आती है, क्योंकि मैं भी एक इंसान हूँ और मैं इन घूरती नजरों से छिप जाना चाहती हूँ।
  • चित्र -3 – मेरी टाँगें डगमगाती हैं इसलिए लोगों को शक है कि शायद मेरा दिमाग भी सामान्य नहीं है, जबकि मैं दूसरे बच्चों की तरह पढ़-लिख सकता हूँ।

5. आपकी राय में क्या खास जरूरतों वाले बच्चों को सामन्य स्कूल में पढ़ना चाहिए या उनके लिए अलग स्कूल होने चाहिए? अपने जवाब के पक्ष में तर्क दीजिए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-18 )
उत्तर खास जरूरतों वाले बच्चों के लिए अलग से स्कूल होने चाहिए, क्योंकि सामान्य स्कूलों में उनकी जरूरतों के अनुसार सुविधाएँ नहीं होती है और न ही इस प्रकार के बच्चों को पढ़ाने तथा उनकी भावनाओं को समझने वाले विशेष रूप से प्रशिक्षित अध्यापक होते हैं। इसलिए इस प्रकार के बच्चों को सामान्य स्कूल के बजाय विशेष स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजना चाहिए या फिर सरकार को सामान्य स्कूलों में खास जरूरतों वाले बच्चों के अनुसार सुविधाएँ विकसित करनी चाहिए।

6. ‘वे कोमल एवं मृदु स्वभाव की हैं, वे बहुत ही सुशील हैं’-ऐसे कथनों को लेकर उन पर चर्चा कीजिए कि ये कैसे केवल लड़कियों पर लागू किए जाते हैं। क्या लड़कियों में से गुण जन्म से ही होते हैं या वे ऐसा व्यवहार समाज से सीखती हैं? आपकी उन लड़कियों के बारे में क्या राय है जो कोमल एवं मृदु स्वभाव की नहीं होतीं और शरारती होती हैं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-19)
उत्तर कुछ स्वभाव मनुष्य में जन्म से ही होते हैं तथा कुछ स्वभाव वह समाज से सीखता है। लड़कियों को कोमल तथा मृदु स्वभाव समाज द्वारा सिखाया जाता है, क्योंकि समाज में यह रूढिबद्ध धारणा है कि लड़कियों को कोमल तथा मृदु होना चाहिए, परंतु सभी लड़कियाँ एक जैसी नहीं होती हैं और वे रूढिबद्ध धारणा के अनुसार अपने आपको नहीं बनाती हैं।

7. रूढ़िबद्ध धारणाओं एवं भेदभाव में क्या अंतर है?(एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-22)
उत्तर जब हम सभी लोगों को एक ही छवि में बाँध देते हैं या उनके बारे में पक्की धारणा बना लेते हैं तो उसे रूढिबद्ध धारणा कहते हैं और जब इन रूढिबद्ध धारणाओं के अनुसार लोगों के साथ व्यवहार करने लगते हैं। तो इसे भेदभाव कहते हैं।

8. आपके अनुसार जिस व्यक्ति के साथ भेदभाव होता है उसे कैसा महसूस होता है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-22)
उत्तर जिस व्यक्ति के साथ भेदभाव होता है, उसे दु:ख होता है, उसे अच्छा नहीं लगता है तथा वह अपने आपको अपमानित महसूस करता है। उसका आत्मसम्मान कमजोर हो जाता है, वह दूसरों से अपने आपको छोटा तथा कमजोर समझने लगता है। वह अन्य लोगों के साथ मिल-जुलकर नहीं रह पाता है और अपने आपको दूसरों से अलग समझने लगता है।

9. बच्चे पैसा देने को तैयार थे, फिर भी गाड़ीवानों ने उन्हें ले जाने से मना कर दिया। क्यों? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-24)
उत्तर बच्चे पैसा देने को तैयार थे, फिर भी गाडीवान उन्हें ले जाने का तैयार नहीं था, क्योंकि गाडीवान को पता चल गया था कि बच्चे महार जाति से संबंधित हैं महार जाति को उस समय बंबई प्रांत में अछूत माना जाता था।

10. स्टेशन पर लोगों ने डॉ. अंबेडकर और उनके भाइयों के साथ कैसे भेदभाव किया? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-24)
उत्तर स्टेशन पर जब स्टेशन मास्टर को डॉ. अंबेडकर और उनके भाइयों की जाति के विषय मालूम हुआ तो स्टेशन मास्टर का व्यवहार ही बदल गया तथा गाड़ीवानों ने दुगुना पैसा देने पर भी ले जाने से इंकार कर दिया। इस प्रकार स्टेशन पर उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया।

11. महार होने का पता चलने पर स्टेशन मास्टर की जो प्रतिक्रिया हुई थी, उसे देखकर बचपन में अंबेडकर को कैसा लगा होगा? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-24)
उत्तर अंबेडकर के साथ यह घटना उनके बचपन में घटी थी, इसलिए उस समय इस घटना का कारण उनकी समझ में नहीं आया होगा, परंतु उन्हें बहुत गहरा दु:ख पहुँचा होगा।

12. क्या आपको कभी अपने प्रति लोगों के पूर्वाग्रह का अनुभव हुआ है? या आपने दूसरों के प्रति भेदभाव भरे व्यवहार को देखा है? उससे आपको कैसा महसूस हुआ? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-24)
उत्तर छात्र स्वयं करें।

13. दलित के अलावा कई अन्य समुदाय हैं जिनके साथ भेदभाव किया जाता है। क्या आप भेदभाव के कुछ अन्य उदाहरण सोच सकते हैं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-25)
उत्तर दलित के अलावा कई अन्य समुदाय हैं, जिनके साथ भेदभाव किया जाता है; जैसे

  1. धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव
  2. भाषाई अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव
  3. स्त्रियों के साथ भेदभाव
  4. शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों के साथ भेदभाव
  5. गरीब तथा आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के साथ भेदभाव

14. उन तरीकों पर चर्चा कीजिए जिनके द्वारा ‘खास जरूरतों वाले लोगों के साथ भेदभाव किया जा सकता है। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-25)
उत्तर खास जरूरतों वाले लोगों के साथ भेदभाव कई प्रकार से किया जा सकता है; जैसे

  1. ऐसे व्यक्ति को अपने साथ खाना न खिलाना।
  2. ऐसे व्यक्ति से बात न करना।
  3. ऐसे व्यक्ति को अपने पास न बैठाना।
  4. ऐसे व्यक्ति को परिवार से अलग रखना।
  5. ऐसे व्यक्ति से अपमानजनक भाषा में बात करना।
  6. ऐसे व्यक्ति को उसके अधिकारों से वंचित रखना।

प्रश्न-अभ्यास
(पाठ्यपुस्तक से)

1. निम्नलिखित कथनों का मेल कराइए। रूढिबद्ध धारणाओं को कैसे चुनौती दी जा रही है, इस पर चर्चा कीजिए :

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium) 6
उत्तर

NCERT Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium) 7

2. लड़कियाँ माँ-बाप के लिए बोझ हैं, यह रूढिबद्ध धारणा एक लड़की के जीवन को किस तरह प्रभावित करती है? उसके अलग-अलग पाँच प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर जब रूढिबद्ध लोग यह सोचते हैं कि लड़कियाँ माँ-बाप के लिए बोझ हैं, यह धारणा निम्नलिखित प्रकार से एक लड़की के जीवन को प्रभावित करती है –

  1. लड़की अपने आपको परिवार पर बोझ समझने लगती है जिससे वह हमेशा परेशान रहती है।
  2. लड़की को परिवार में उचित प्यार तथा स्नेह नहीं मिलता है।
  3. लड़की के पालन-पोषण तथा खाने-पीने पर उचित ध्यान नहीं दिया जाता है।
  4. लड़कियों की शिक्षा पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता है।
  5. लड़कियों के बीमार होने पर उचित इलाज नहीं कराया जाता है।

3. भारत का संविधान समानता के बारे में क्या कहता है? आपको यह क्यों लगता है कि सभी लोगों में समानता होना जरूरी है?
उत्तर भारत का संविधान समानता के बारे में कहता है कि प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार और समान अवसर प्राप्त हैं। लोग अपनी पसंद का काम चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। सरकारी नौकरियों में सभी लोगों के लिए समान अवसर उपलब्ध हैं। लोगों को अपने धर्म का पालन करने, अपनी भाषा बोलने, अपने त्योहार मनाने और अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता है। सरकार सभी धर्मों को बराबर महत्त्व तथा सम्मान प्रदान करेगी।

4. कई बार लोग हमारी उपस्थिति में ही पूर्वाग्रह से भरा आचरण करते हैं। ऐसे में अक्सर हमें कोई विरोध करने की स्थिति में नहीं रहते, क्योंकि मुँह पर तुरंत कुछ कहना मुश्किल जान पड़ता है। अपनी कक्षा को दो समूहों में बाँटिए और प्रत्येक समूह इस पर चर्चा करें कि दी गई परिस्थिति में वे क्या करेंगे :

(क) गरीब होने के कारण एक सहपाठी को आपका दोस्त चिढ़ा रहा है।
(ख) आप अपने परिवार के साथ टी.वी. देख रहे हैं और उनमें से कोई सदस्य किसी खास धार्मिक समुदाय पर पूर्वाग्रहग्रस्त टिप्पणी करता है।
(ग) आपकी कक्षा के बच्चे एक लड़की के साथ मिलकर खाना खाने से इनकार कर देते हैं, क्योंकि वे सोचते हैं कि वह गंदी है।
(घ) किसी समुदाय के खास उच्चारण का मजाक उड़ाते हुए कोई आपको चुटकुला सुनाता है।
(ङ) लड़के, लड़कियों पर टिप्पणी कर रहे हैं कि लड़कियाँ उनकी तरह नहीं खेल सकतीं। उपर्युक्त परिस्थितियों में विभिन्न समूहों ने कैसा बर्ताव करने की बात की है, इस पर कक्षा में चर्चा कीजिए, साथ ही इन मुद्दों को उठाते समय कक्षा में कौन-सी समस्याएँ आ सकती हैं, इस पर भी बातचीत कीजिए।

उत्तर उपरोक्त सभी स्थितियों में पूर्वाग्रह है जो समानता के व्यवहार के विरुद्ध है।

छात्र अपने अध्यापक की सहायता से कक्षा को दो समूहों में बाँटें और इन पूर्वाग्रहों पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दें और उन प्रतिक्रियाओं के आधार पर उत्तर लिखें।

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