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NCERT Solutions for Class 11 Sociology Understanding Society Chapter 1 Social Structure, Stratification and Social Processes in Society (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Sociology Understanding Society Chapter 1 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Sociology Understanding Society Chapter 1 Social Structure, Stratification and Social Processes in Society (Hindi Medium)

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पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न [NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED]

प्र०1. कृषि तथा उद्योग के संदर्भ में सहयोग के विभिन्न कार्यों की आवश्यकता की चर्चा कीजिए।
उत्तर- सहयोग सहचारी सामाजिक प्रक्रिया है। इसमें व्यक्तियों या समूहों के व्यक्तिगत या सामूहिक लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु साथ मिलकर काम करना शामिल है। साथ ही इसमें व्यक्तियों को एकत्रित करने के लिए सहानुभूति, परानुभूति और योग्यता भी सम्मिलित है। यह व्यक्तियों की शारीरिक और मनो-सामाजिक (Psycho-social) आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।
सरल समाजों में जहाँ अतिरिक्त उत्पादन संभव नहीं, वहाँ व्यक्तियों और समूहों के मध्य सहयोग की भावना विद्यमान थी। यद्यपि पूँजीवादी समाजों में सहयोग की भावना विद्यमान तो है तथापि अनेक बार इसे आरोपित किया जाता है। उदाहरण के लिए फैक्ट्री में काम करने वाले मज़दूर अपने प्रतिदिन के कार्य में सहयोग तो करते है, परंतु उनके संबंधों के हित किसी निश्चित संघर्ष से परिभाषित होगा। सहयोग की अवधारणा मनुष्यों के व्यवहारों से संबंधित निश्चित अनुमानों पर आश्रित है। दुर्खाइम के अनुसार, श्रम विभाजन की भूमिका जिसका अर्थ सहयोग है, संक्षिप्त रूप में समाज की निश्चित आवश्यकताओं की पूर्ति है।” कृषि प्रधान समाज में व्यक्ति एक दूसरे पर निर्भर हैं। साझा उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु सदस्य मिलकर कार्य करते हैं। गाँवों में व्यक्तियों का एक समूह जैसे कि लुहार कृषि कार्य के लिए औजार, उपकरणों इत्यादि की व्यवस्था करता है। अन्य समूह दुकानदार की तरह कार्य करते हैं और खाद, बीज और कीटनाशी की व्यवस्था करता है। व्यक्तियों का अन्य समूह खेतों में बीज बोने का कार्य करते हैं, फसल कटाई के अवसर पर फसलों को काटते हैं तथा अन्य क्रिया-कलाप भी करते हैं। कृषक उद्देश्यों की प्राप्ति अकेला नहीं कर सकता है। इसी प्रकार औद्योगिक संचालन के क्षेत्र में विशेषज्ञता की आवश्यकता है। साझा लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु मजदूर और प्रबंधन को एक दूसरे पर आरोपित किया जा सकता है।

प्र० 2. क्या सहयोग हमेशा स्वैच्छिक अथवा बलात् होता है? यदि बलात् है, तो क्या मंजूरी प्राप्त होती है। अथवा मानदंडों की शक्ति के कारण सहयोग करना पड़ता है। उदाहरण सहित चर्चा करें।
उत्तर- सहयोग, प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष के आपसी संबंध अधिकतर जटिल होते हैं तथा ये आसानी से अलग नहीं किए जा सकते। यह समझने के लिए कि सहयोग और संघर्ष किस प्रकार अनुलग्नित हैं, तथा ‘बाह्य’ एवं ‘स्वैच्छिक सहयोग में क्या अंतर है, हमें औरतों के संपत्ति के अधिकार का उदाहरण ले सकते हैं। बेटियों के संपत्ति पर अधिकार के ज्ञान के बावजूद भी, वे जन्म से परिवार में संपत्ति का संपूर्ण या साझा अधिकार का दावा करने से असमर्थ हैं; कारण यह है कि वे डरती थीं कि ऐसा करने से भाइयों के साथ उनके संबंधों में कड़वाहट आ जाएगी। इस प्रकार बेटियों के अपने जन्म से परिवार के सदस्यों के साथ सहयोग स्वैच्छिक नहीं है. यह मौलिक रूप से आरोपित है। यदि बेटियाँ अपने जन्म से परिवार के सदस्यों के साथ सामंजस्यपूर्ण संबंधों को कायम रखना चाहती हैं, तो उनके पास कोई विकल्प नहीं है।
सहयोग को सभी समाजों के सार्वभौमिक अभिलक्षण के रूप में समझा जा सकता है और इसकी व्याख्या समाज में रह रहे और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु क्रियाशील मनुष्यों के मध्य अपरिहार्य अंत:क्रिया के रूप में की जा सकती है। संघर्ष परिप्रेक्ष्य के अनुसार, जहाँ समाज जाति या वर्ग के आधार पर बँटा होता है, वहीं कुछ समूह सुविधावंचित हैं तथा एक-दूसरे के प्रति भेदभावमूलक स्थिति बरतते हैं। प्रभावशाली समूहों में यह स्थिति सांस्कृतिक मानदंडों, ज्यादातर जबरदस्ती या हिंसा द्वारा भी उत्पन्न की जाती है। प्रकार्यवादी परिप्रेक्ष्य में समाज के संदर्भ में सहयोग का समग्र रूप में व्याख्या किया गया है। प्रकार्यवादी का सरोकार मुख्य रूप से समाज में व्यवस्था की आवश्यकता’ से है जिन्हें कुछ प्रकार्यात्मक अभिवादताएँ कहा जाता है। समाजशास्त्रीय अध्ययनों ने यह दिखाया है कि किस प्रकार प्रतिमान, मानदंड तथा समाजीकरण के प्रतिरूप विशिष्ट सामाजिक व्यवस्था को सुनिश्चित करते हैं जो समाज के अस्तित्व के लिए प्रकार्यात्मक अनिवार्यताएँ हैं।

प्र० 3. क्या आप भारतीय समाज से संघर्ष के विभिन्न उदाहरण हूँढ़ सकते हैं? प्रत्येक उदाहरण में वे कौन से कारण थे जिसने संघर्ष को जन्म दिया? चर्चा कीजिए।
उत्तर- संघर्ष में वे सभी प्रक्रियाएँ शामिल हैं जिनमें व्यक्ति दूसरों की इच्छा के विरुद्ध कार्य करता है। अपने लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु यह एक सचेत प्रक्रिया है। संघर्ष एक विघटनकारी समाजिक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति या समूह को ऐसा लगता है कि दूसरों की रुचि, उसके समान है तथा दोनों एक दूसरे का सम्पर्क साधने की कोशिश करते हैं। समूहों के बीच विद्यमान संघर्षों से अनेक सामाजिक तथा संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं को प्रोत्साहन प्राप्त होता है। ये प्रक्रियाएँ दोनों पक्षों को कठोर बनाती है, जिससे अंतः समूहों का केंद्रीकरण होता है। इसका परिणाम समान विचारधारा वाले दलों का गठबंधन है, जिससे दोनों दलों का भय बढ़ जाता है। इसका संबंध जाति, वर्ग, धर्म, क्षेत्र, भाषा और इसी प्रकार अन्य से है। ऐसे संघर्षों की व्याख्या संरचनात्मक समूह तथा व्यक्तिगत स्तर पर की जा सकती है। भारतीय समाज में संरचनात्मक अवस्थित में गरीबी का उच्च दर, आर्थिक तथा सामाजिक स्तरीकरण असमानता, सीमित राजनैतिक और सामाजिक अवसर सम्मिलित है। व्यक्तिगत स्तर पर विचार, पूर्वागृहिक अभिवृत्ति तथा वैयक्तित्व मुख्य निर्धारक हैं। भारत में हाल के वर्षों में जमीन, पहचान, सांप्रदायिक, वर्ग और भाषा विवादों से संबंधित संघर्ष सामान्य बनता जा रहा है।

प्र० 4. संघर्ष को किस प्रकार कम किया जाता है इस विषय पर उदाहरण सहित निबंध लिखिए।
उत्तर- संघर्ष किसी भी समाज का अभिन्न अंग है। यह एक विघटनकारी प्रक्रिया है। चूंकि केंद्रबिंदु पद्धति जो कार्य रखने की है, इसलिए प्रतिस्पर्धा और संघर्ष को ऐसा समझा जाता है कि अधिकतर विवादों में बिना पर्याप्त कष्ट के उनका समाधान ढूंढ़ लिया जाता है। यदि संघर्ष के कारणों की जानकारी हो तो उनका निर्धारण हो सकता है। संघर्ष समाधान के लिए असंख्य सामाजिक प्रक्रियाएँ प्रचलन में हैं; जैसे-व्यवस्थापक, आत्मसात्करण और आरोपित सहयोग की स्थापना।
संघर्ष का चतुराई से भी समाधान किया जा सकता है। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

  • समझौते की बातचीत (Negotiations) – संघर्ष को समझौते की बातचीत और तृतीय हल की मध्यस्थता के माध्यम से समाधान किया जा सकता है।
  • जंगी समूह पारस्परिक स्वीकार योग्य हल ढूंढने की कोशिश कर संघर्ष का समाधान कर सकते हैं।
  • समझौते की बातचीत का सरोकार दोतरफा संप्रेषण से है ताकि संघर्ष की स्थितियों में समझौते तक पहुँचा जा सके।
  • कभी-कभी समझौते की बातचीत के माध्यम से संघर्ष को खत्म करना कठिन होता है। उसे स्थिति में तृतीय पक्ष द्वारा मध्यस्थता और पंच-फैसले की आवश्यकता पड़ती है।
  • मध्यस्थ दोनों पक्षों को प्रासंगिक विवाद पर चर्चा करने और स्वैच्छिक समझौते तक पहुँचने में मदद करता है।
  • पंच-फैसला में दोनों पक्षों को सुनने के बाद तृतीय पक्ष को फैसला सुनाने का अधिकार प्राप्त है।

प्र० 5. ऐसे समाज की कल्पना कीजिए जहाँ कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है, क्या यह संभव है? अगर नहीं तो क्यों?
उत्तर- नहीं, हम ऐसे समाज की कल्पना नहीं कर सकते हैं, जहाँ कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। व्यक्ति विभिन्न संदर्भो में एक दूसरे के साथ अंतः क्रिया करते हैं। प्रायः सभी प्रकार की सामाजिक स्थितियों में सहयोग तथा संघर्ष व्यवहार की विशिष्टताएँ हैं। जब समूह साझा लक्ष्य की प्राप्ति हेतु मिलकर कार्य करते हैं, तो हम इसे सहयोग करते हैं। जब समूह अधिकतम लाभ के लिए कोशिश और स्वार्थ सिद्धि के लिए कार्य करते हैं, तो संघर्ष का घटित होना अनिवार्य है। परंतु सभी प्रकार की सामाजिक अंतः क्रियाओं में सहयोग और प्रतियोगिता शामिल हैं।
प्रतियोगिता लक्ष्य इस प्रकार निर्धारित किया जाता है। कि यदि अन्य अपने लक्ष्य को प्राप्त करने से असफल रहते हैं, तो प्रत्येक व्यक्ति अपने लक्ष्य को ही प्राप्त कर सकता है। कई बार संबंध उत्पादन की पद्धति के अंतर्गत समूहों और व्यक्तियों की अवस्थिति विविध और असमान रहती है। परंतु हमें याद रखना अनिवार्य है कि प्रतियोगिता जो एक विघटनकारी सामाजिक प्रक्रिया है, वह समाजिक संरचना का समग्र भाग भी है। संसार में यह किसी समाज का समग्र और अनिवार्य भाग है। अतः हम ऐसे समाज की कल्पना नहीं कर सकते हैं, जहाँ प्रतियोगिता, प्रतिस्पर्धा नहीं है। समाज का स्वरूप कम प्रतियोगी का उच्च प्रतियोगी से हो सकता है, परंतु प्रतिस्पर्धा के बिना समाज का अस्तित्व असंभव है।

प्र० 6. अपने माता-पिता, बड़े-बुजुर्गों तथा उनके समकालीन व्यक्तियों से चर्चा कीजिए कि क्या आधुनिक समाज सही मायनों में प्रतिस्पर्धा है अथवा पहले की अपेक्षा संघर्षों से भरा है और अगर आपको ऐसा लगता है तो आप समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य में इसे कैसे समझाएँगे?
उत्तर- स्वयं करें।

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NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 6

NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 6 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Practical Work in Geography Chapter 6 Introduction to Aerial Photographs (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) निम्नलिखित में से किन वायव फोटो में क्षितिज तल प्रतीत होता है?
(क) ऊर्ध्वाधर
(ख) लगभग ऊर्ध्वाधर
(ग) अल्प तिर्यक
(घ) अति तिर्यक
उत्तर- (घ) अति तिर्यक

(ii) निम्नलिखित में से किन वायव फोटो में अधोबिंदु एवं प्रधान बिंदु एक-दूसरे से मिल जाते हैं?
(क) ऊर्ध्वाधर
(ख) लगभग ऊध्र्ध्वाधर
(ग) अल्प तिर्यक
(घ) अति तिर्यक
उत्तर- (क) ऊर्ध्वाधर

(iii) वायव फोटो निम्नलिखित प्रक्षेपों में से किसका एक प्रकार है?
(क) समांतर
(ख) लंबकोणीय।
(ग) केंद्रक
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर- (ग) केंद्रक

प्र० 2. लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) वायव फोटो किस प्रकार खींचे जाते हैं?
उत्तर- वायवे फोटो वायुयान या हेलीकॉप्टर में रखे गए कैमर द्वारा लिए जाते हैं। विशेष रूप से वायुयानों में प्रयोग किए जाने वाले परिशुद्ध कैमरे से, जिसे वायु कैमरा कहते हैं। इन फोटो चित्रों द्वारा बहुत ही कम समय में भूतल के विभिन्न तथ्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

(ii) भारत में वायव फोटो का संक्षिप्त में वर्णन करें।
उत्तर- भारत में सबसे पहले 1920 में बड़े पैमाने पर आगरा शहर का वायव फोटो लिया गया था। उसके बाद भारतीय सर्वेक्षण विभाग के वायु सर्वेक्षण के द्वारा इरावदी डेल्टा के वनों का वायु सर्वेक्षण किया गया जो कि 1923-24 के दौरान पूरा हुआ था। इसके बाद इसी प्रकार के अनेक सर्वेक्षण किए गए तथा वायव फोटो से मानचित्र बनाने की उन्नत तकनीक का उपयोग किया गया। आजकल भारत में पूरे देश का वायव फोटो वायु सर्वेक्षण निदेशालय नई दिल्ली की देख-रेख में किया जाता है। तीन उड्डयन एजेंसियों-भारतीय वायु सेना, वायु सर्वेक्षण कंपनी तथा राष्ट्रीय सुदूर संवेदी संस्था को भारत में वायव फोटो लेने के लिए सरकारी तौर पर अधिकृत किया गया है।

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 125 शब्दों में दें
(i) वायव फोटो के महत्वपूर्ण उपयोग कौन-कौन से हैं?
उत्तर- वायव फोटो का उपयोग स्थलाकृतिक मानचित्रों को खींचने एवं उनका निर्वचन करने के लिए किया जाता है। इन दो विभिन्न उपयोगों के कारण फोटोग्राममिति तथा फोटो/प्रतिबिंब निर्वचन के रूप में दो स्वतंत्र, लेकिन एक-दूसरे से संबंधित विज्ञानों का विकास हुआ। फोटोग्राममिति-यह वायवे फोटो के द्वारा विश्वसनीय मापन का विज्ञान एवं तकनीक है। फोटोग्राममिति के सिद्धांत, इस प्रकार के फोटो की परिशुद्ध लम्बाई, चौड़ाई एवं ऊँचाई की माप प्रदान करते हैं। इसलिए स्थलाकृतिक मानचित्रों को तैयार करने एवं उन्हें अद्यतन बनाने में, ये अत्यधिक उपयोगी सिद्ध होते हैं।

प्रतिबिंब निर्वचन – यह वस्तुओं के स्वरूपों को पहचानने तथा उनके सापेक्षिक महत्व से संबंधित निर्णय लेने की प्रक्रिया है। प्रतिबिंब निर्वचन के सिद्धान्त के प्रयोग से वायव फोटो की गुणात्मक जानकारियाँ ज्ञात की जा सकती हैं, जैसे- भूमि उपयोग, स्थलाकृतियों के प्रकार, मिट्टी के प्रकार इत्यादि। इस प्रकार, एक दक्ष इंटरप्रेटर वायव फोटो का उपयोग करके वातावरणीय प्रक्रम एवं कृषि-भूमि
उपयोगों में परिवर्तन का विश्लेषण करता है।

(ii) मापनी को निर्धारित करने की विभिन्न विधियाँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर- फोटो की मापनी की गणना के लिए तीन विधियाँ प्रयोग में लाई जाती हैं, जो विभिन्न सूचनाओं पर आधारित होती हैं।
प्रथम विधि – फोटो एवं धरातलीय दूरी के बीच संबंध स्थापित करना : यदि वायव फोटो में कोई अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध है, जैसे-धरातल पर दो। पहचानने योग्य बिन्दुओं की दूरी, तो एक ऊर्ध्वाधर फोटो की मापनी सरलतापूर्वक प्राप्त की जा सकती है। यदि वायव फोटो पर मापी गई दूरी Dp के साथ धरातल Dg की संगत दूरी ज्ञात हो, तो वायव फोटो की मापनी को इन दोनों के अनुपात यानी Dp Dg में मापा जाएगा।
द्वितीय विधि – फोटो दूरी एवं मानचित्र दूरी में संबंध स्थापित करना : धरातल पर विभिन्न बिंदुओं के बीच की दूरी हमेशा ज्ञात नहीं होती है। किन्तु अगर एक वायव फोटो पर दिखाए गए क्षेत्र का मानचित्र उपलब्ध हो, तो इसका उपयोग फोटो मापनी को ज्ञात करने में किया जा सकता है।
तृतीय विधि – फोकस दूरी एवं वायुयान की उड़ान ऊँचाई के बीच संबंध स्थापित करना : यदि मानचित्र एवं फोटोग्राफ की सापेक्ष दूरियों की कोई भी अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध नहीं हो, लेकिन कैमरे की फोकस दूरी तथा वायुयान की उड़ान-ऊँचाई के संबंध में जानकारी हो तो फोटो मापनी प्राप्त की जा सकती है। यदि दिया गया वायव फोटो पूर्ण अथवा आंशिक रूप से ऊर्ध्वाधर हो तथा चित्रित भू-भाग समतल हो तो प्राप्त फोटो मापनी की शुद्धता अधिक होगी। अधिकतर उर्ध्वाधर फोटो में कैमरे की फोकस दूरी f तथा वायुयान की उड़ान-ऊँचाई H को सीमांत जानकारी के रूप में लिया जाता है।

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NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 11

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 11 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 11 Geography Fundamentals of Physical Geography Chapter 11 Water in the Atmosphere (Hindi Medium)

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[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) मानव के लिए वायुमंडल का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक निम्नलिखित में से कौन-सा है
(क) जलवाष्प
(ख) धूलकण
(ग) नाइट्रोजन
(घ) ऑक्सीजन
उत्तर- (क) जलवाष्प

(ii) निम्नलिखित में से वह प्रक्रिया कौन-सी है, जिसके द्वारा जल, द्रव से गैस में बदल जाता है
(क) संघनन
(ख) वाष्पीकरण
(ग) वाष्पोत्सर्जन
(घ) अवक्षेपण
उत्तर- (ख) वाष्पीकरण

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा वायु की उस दशा को दर्शाता है, जिसमें नमी उसकी पूरी क्षमता के अनुरूप होती है
(क) सापेक्ष आर्द्रता
(ख) निरपेक्ष आर्द्रता
(ग) विशिष्ट आर्द्रता
(घ) संतृप्त हवा
उत्तर- (घ) संतृप्त हवा

(iv) निम्नलिखित प्रकार के बादलों में से आकाश में सबसे ऊँचा बादल कौन-सा है?
(क) पक्षाभ
(ख) वर्षा मेघ
(ग) स्तरी
(घ) कपासी
उत्तर- (क) पक्षाभ

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) वर्षण के तीन प्रकारों के नाम लिखें।
उत्तर- वर्षण के कई प्रकार होते हैं, जैसे-वर्षा, हिमपात, सहिम वृष्टि तथा करकापाता।
(क) वर्षा – वर्षण जब पानी के रूप में होता है, उसे वर्षा कहा जाता है।
(ख) हिमपात – जब तापमान 0° सेंटीग्रेड से कम होता है तब वर्षण हिमतूलों के रूप में होता है, जिसे हिमपात कहते हैं।
(ग) सहिम वृष्टि – वर्षा की बूंदें जो गर्म हवा से होकर निकलती हैं तथा नीचे की ओर ठंडी हवा से मिलती हैं। इसके परिणामस्वरूप, वे ठोस हो जाती हैं तथा सतह पर वर्षा की बूंदों से भी छोटे आकार में बर्फ के रूप में
गिरती हैं, जिसे सहिम वृष्टि कहा जाता है।
(घ) करकापात – यह वर्षण का एक प्रकार है। तथा यह काफी सीमित मात्रा में होता है। एवं समय तथा क्षेत्र की दृष्टि से यदाकदा ही होता है।

(ii) सापेक्ष आर्द्रता की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- दिए गए तापमान पर अपनी पूरी क्षमता की तुलना में वायुमंडल में मौजूद आर्द्रता के प्रतिशत को सापेक्ष आर्द्रता कहा जाता है। हवा के तापमान के बदलने के साथ ही आर्द्रता ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है तथा सापेक्ष आर्द्रता भी प्रभावित होती है। यह महासागरों के ऊपर सबसे अधिक तथा महाद्वीपों के ऊपर सबसे कम होती है।

(iii) ऊँचाई के साथ जलवाष्प की मात्रा तेजी से क्यों घटती है?
उत्तर- वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा वाष्पीकरण तथा संघनन से क्रमशः घटती-बढ़ती रहती है। हवा में मौजूद जलवाष्प को आर्द्रता कहते हैं। हवा के प्रति इकाई आयतन में विद्यमान जलवाष्प को ग्राम प्रतिघन मीटर के रूप में व्यक्त किया जाता है। हवा द्वारा जलवाष्प ग्रहण करने की क्षमता पूरी तरह से तापमान पर निर्भर होती है। ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ तापमान घटता जाता है अर्थात् 165 मीटर की ऊँचाई पर 1° सेंटीग्रेड तापमान घट जाता है। इसलिए ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ तापमान घटने पर जलवाष्प की मात्रा भी घटती जाती है।

(iv) बादल कैसे बनते हैं? बादलों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर- बादल पानी की छोटी बूंदों या बर्फ के छोटे कणों की संहति होते हैं जोकि पर्याप्त ऊँचाई पर स्वतंत्र हवा में जलवाष्प के संघनन के कारण बनते हैं। चूँकि बादलों का निर्माण पृथ्वी की सतह से कुछ ऊँचाई पर होता है, इसलिए ये विभिन्न आकारों के होते हैं। ऊँचाई, विस्तार, घनत्व तथा पारदर्शिता या अपारदर्शिता के आधार पर बादलों को चार रूपों में वर्गीकृत किया जाता है-

  • पक्षाभ मेघ
  • कपासी मेघ
  • स्तरी मेघ
  • वर्षा मेघ।

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) विश्व के वर्षण वितरण के प्रमुख लक्षणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- एक साल में वर्षा की कुल मात्रा के आधार पर विश्व में निम्नलिखित भिन्नता देखने को मिलती है। सामान्य तौर पर जब हम विषुवत रेखा से ध्रुव की ओर जाते हैं, वर्षा की मात्रा धीरे-धीरे घटती जाती है। विश्व के तटीय क्षेत्रों में महाद्वीपों के भीतरी भागों की अपेक्षा अधिक वर्षा होती है। विश्व के स्थलीय भागों की अपेक्षा महासागरों के ऊपर वर्षा अधिक होती है। वार्षिक वर्षण की कुल मात्रा के आधार पर विश्व की मुख्य वर्षण प्रकृति को निम्नलिखित रूपों में पहचाना जाता हैविषुवतीय पट्टी, शीतोष्ण प्रदेशों में पश्चिमी तटीय किनारों के पास के पर्वतों के वायु की ढाल पर तथा मानसून वाले क्षेत्रों के तटीय भागों में वर्षा बहुत अधिक होती है, जो प्रतिवर्ष 200 सेंटीमीटर से ऊपर होती है। महाद्वीपों के आंतरिक भागों में प्रतिवर्ष 100 से 200 सेंटीमीटर वर्षा होती है। महाद्वीपों के तटीय क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा मध्यम होती है। उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र के केंद्रीय भाग तथा शीतोष्ण क्षेत्रों के पूर्वी एवं भीतरी भागों में वर्षा की मात्रा 50 से 100 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष तक होती है। महादीप के भीतरी भाग के वष्टिछाया क्षेत्रों में पड़ने वाले भाग तथा ऊँचे अक्षांशों वाले क्षेत्रों में प्रतिवर्ष 50 सेंटीमीटर से भी कम वर्षा होती है।

(ii) संघनन के कौन-कौन से प्रकार हैं? ओस एवं तुषार के बनने की प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- वायुमंडल में विद्यमान जलवाष्प का जल के रूप में बदलना संघनन कहलाता है। इस क्रिया के उत्पन्न
होने के कई कारण हैं
(क) जब वायु निरन्तर ऊपर उठ कर ठंडी हो जाए।
(ख) जब नमी से भरी वायु किसी पर्वत के सहारे ऊँची उठ कर ठंडी हो जाए।
(ग) जब ठंडी और गर्म वायु आपस में मिल जाए।
संघनन कई रूपों में हमारे सामने आते हैं- ओस, तुषार, कोहरा, कुहासा, बादल आदि।
ओस – जब आर्द्रता धरातल के ऊपर हवा में संघनन केंद्रकों पर संघनित न होकर ठोस वस्तु जैसे पत्थर, घास तथा पौधों की पत्तियों पर पानी की बूंदों के रूप में जमा होता है, तब इसे ओस के नाम से जाना जाता है।
तुषार – यह ठंडी सतहों पर बनता है, जब संघनन तापमान के जमाव बिंदु पर या उससे नीचे चले जाने पर होता है। इसमें अतिरिक्त नमी पानी की बूंदों की बजाय बर्फ के छोटे-छोटे रवों के रूप में जमा होता है। कोहरा एवं कुहासा – जब बहुत अधिक मात्रा में जलवाष्प से भरी हुई वायु संहति अचानक नीचे की ओर गिरती है तब छोटे-छोटे धूल कणों के ऊपर ही संघनन की प्रक्रिया होती है। यह सतह पर या सतह के काफी निकट होती है। कुहासे एवं कोहरे में केवल इतना अंतर होता है कि कुहासे में कोहरे की अपेक्षा नमी अधिक होती है यानि कोहरे कुहासे की अपेक्षा अधिक शुष्क होते हैं।
बादल – बादल पानी की छोटी बूंदों या बर्फ के छोटे रवों की संहति होते हैं जो कि पर्याप्त ऊँचाई पर स्वतंत्र हवा में जल वाष्प के संघनन के कारण बनते हैं।
ओस और तुषार बनने की प्रक्रिया – ओस बनने के लिए सबसे उपर्युक्त अवस्थाएँ साफ आकाश, शांत हवा, उच्च सापेक्ष आर्द्रता तथा ठंडी एवं लंबी रातें हैं। ओस बनने के लिए यह आवश्यक है कि ओसांक जमाव बिंदु से ऊपर हो।।
तुषार ठंडी सतहों पर बनता है जब संघनन तापमान के जमाव बिंदु से नीचे (0° सेंटीग्रेड) चले जाने पर होता है। उजले तुषार के बनने की सबसे उपयुक्त अवस्थाएँ ओस के बनने की अवस्थाओं के समान है, केवल हवा का तापमान जमाव बिंदु पर या उससे नीचे होना चाहिए।

परियोजना कार्य|
(i) 1 जून से 31 दिसंबर तक के समाचार-पत्रों से सूचनाएँ एकत्र कीजिए कि देश के किन भागों में अत्यधिक वर्षा हुई।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।

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NCERT Solutions for Class 7 Social Science Geography Chapter 5 Water (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Geography Chapter 5 Water (Hindi Medium)

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पाठगत प्रश्न

1. जल हमारे लिए क्यों महत्त्वपूर्ण हैं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-33)
उत्तर जल हमारे लिए कई तरह से महत्त्वपूर्ण हैं

  1. जल हमारे पीने के काम आता है।
  2. जल घरेलू कामों में जैसे नहाने, कपड़ा धोने, घर की सफ़ाई करने, खाना बनाने आदि कामों में प्रयोग किया जाता है।
  3. कृषि में फसलों की सिंचाई के लिए महत्त्वपूर्ण होता है।
  4. जल यातायात के साधन के रूप में उपयोगी है।
  5. जल विद्युत तैयार करने में उपयोगी है।
  6. उद्योग धन्धों के लिए उपयोगी।

2. अपने घर एवं स्कूल में जल संरक्षण की कुछ विधियाँ सुझाइए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-33)

(क) अपने घर में
(ख) स्कूल में

उत्तर
(क) जल संरक्षण की विधियाँ (अपने घर में) –

  1. घर में टाँका या टंकी को निर्मित करके जल संरक्षण करना चाहिए।
  2. वर्षा जल को पी.वी.सी. पाइप के माध्यम से हैण्डपम्प या कुएँ में डालना चाहिए।
  3. ईंट और रेत के माध्यम से गंदे पानी को साफ करना।

(ख) जल संरक्षण की विधियाँ (स्कूल में) :

  1. छत वर्षा जल को पी.वी.सी. पाइप के माध्यम से पानी को टंकी में जमा करना चाहिए।
  2. गंदे पानी को पृथककारी छन्ना के माध्यम से उसे अपने उपयोग के लायक बनाया जा सकता है।
  3. स्कूल में स्थित जल को किसी-न-किसी रूप में ढंककर रखा जाना चाहिए।

प्रश्न-अभ्यास
(पाठ्यपुस्तक से)

1. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए(क) वर्षण क्या है?
उत्तर जलवाष्प संघनित होकर बादलों का रूप लेता है। यहाँ से यह वर्षा, हिम, ओस अथवा सहिम वृष्टि के रूप में धरती या समुद्र पर नीचे गिरता है, वर्षण कहलाता है।

(ख) जल चक्र क्या है?
उत्तरे जिस प्रक्रम में जल लगातार अपने स्वरूप को बदलता रहता है और महासागरों, वायुमंडल एवं धरती के बीच चक्कर लगाता रहता है, उसको जल चक्र कहते हैं।

(ग) लहरों की ऊँचाई प्रभावित करने वाले कारक कौन-से हैं?
उत्तर लहरों को प्रभावित करने वाले कारक निम्न हैं

  1. जल की मात्रा
  2. वायु की गति
  3. सूर्य एवं चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति

(घ) महासागरीय जल की गति को प्रभावित करने वाले कारक कौन-से है?
उत्तर महासागरीय जल की गति को प्रभावित करने वाले कारक

  1. सूर्य और चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति
  2. महासागरीय जल में लवणता की मात्रा
  3. वायु की गति
  4. तापीय अन्तर
  5. पृथ्वी की घूर्णन गति।

(च) ज्वार-भाटा क्या हैं तथा ये कैसे उत्पन्न होते हैं?
उत्तर दिन में दो बार नियम से महासागरीय जल का उठना एवं गिरना ‘ज्वार-भाटा’ कहलाता है। जब सर्वाधिक ऊँचाई तक उठकर जल, तट के बड़े हिस्से को डुबो देता है, तब उसे ज्वार कहते हैं। जब जल अपने निम्नतम स्तर तक आ जाता है एवं तट से पीछे चला जाता है, तो उसे भाटा कहते हैं। सूर्य एवं चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण ज्वार-भाटा उत्पन्न होते हैं।

(छ) महासागरीय धाराएँ क्या हैं?
उत्तर महासागरीय धाराएँ निश्चित दिशा में महासागरीय सतह पर नियमित रूप से बहने वाली धाराएँ होती हैं। महासागरीय धाराएँ गर्म या ठंडी हो सकती हैं।

2. कारण बताइए

(क) समुद्री जल नमकीन होता है।
उत्तर समुद्री जल नमकीन होने के कारण –

  1. महासागरों में अधिकांश नमक सोडियम क्लोराइड या खाने में उपयोग किया जाने वाला नमक होता है।
  2. समुद्र के जल में लवणता की मात्रा अधिक होती है।
  3. समुद्र में जल का नियमित रूप से भारी मात्रा में वाष्पीकरण होता है, किंतु लवणीय पदार्थों का वाष्पीकरण न हो सकने के कारण ये समुद्र में नियमित रूप से बने रहते हैं। इसलिए समुद्री जल में लवणता निरंतर बढ़ती रहती है।

(ख) जल की गुणवत्ता का ह्रास हो रहा है।
उत्तर जल की गुणवत्ता के ह्रास होने के कारण

  1. मनुष्य की क्रियाकलापों से काफी मात्रा में जल प्रदूषित हो रहा है।
  2. उद्योगों से निकलने वाले रसायन युक्त जल के विभिन्न जलाशयों में मिलने से जल की गुणवत्ता का ह्रास हो रहा है।
  3. घरों से निकलने वाले प्रदूषित जल के विभिन्न जलाशयों में मिलने से भी जल की गुणवत्ता का ह्रास हो रहा है।

3. सही (✓) उत्तर चिह्नित कीजिए –

(क) वह प्रक्रम जिस में जल लगातार अपने स्वरूप को बदलता रहता है और महासागर, वायुमंडल एवं स्थल के बीच चक्कर लगाता रहता है?

  1. जल चक्र
  2. ज्वार-भाटा
  3. महासागरीय धाराएँ

उत्तर 1. जल चक्र

(ख) सामान्यतः गर्म महासागरीय धाराएँ उत्पन्न होती हैं :

  1. ध्रुवों के निकट
  2. भूमध्य रेखा के निकट
  3. दोनों में से कोई नहीं

उत्तर 2. भूमध्य रेखा के निकट

(ग) दिन में दो बार नियम से महासागरीय जल का उठना एवं गिरना कहलाता है?

  1. ज्वार-भाटा
  2. महासागरीय धाराएँ
  3. तरंगें

उत्तर 1. ज्वार-भाटा

4. निम्नलिखित स्तंभों को मिलाकर सही जोड़े बनाइए –

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Geography Chapter 5 (Hindi Medium) 1

उत्तर

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Geography Chapter 5 (Hindi Medium) 2

5. आओ खेलें

जासूस बनिए

(क) निम्नलिखित अंग्रेज़ी के प्रत्येक वाक्य में एक नदी का नाम हूँढे।
Examples : Mandira, Vijayalaksmi and Surinder are my best friends.
Answer : Ravi

(a) The snake charmer’s bustee, stables where horses and the piles of wood, all caught fire accidentally. (Hint: Another name for River Brahmputra)
(b) The conference manager put pad, material for reading and a pencil for each participant. (Hint: A distributary on the Ganga-Brahmputra delta)
(c) Either jealousy or anger cause a person’s fall (Hint: Name of a juicy fruit!)
(d) Bhavani germinated the seeds in a pot (Hint: Look for her in West Africa)
(e) “I am a Zonal champion now” declared the excited atheletic. (Hint: The river that has the biggest basin in the world)
(f) The tiffin box rolled down and all the food fell in dusty pot holes. (Hint: Rises in India and journeys through Pakistan)
(g) Malini leaned against the pole when she felt that she was going to faint. (Hint: Her delta in Egypt is famous)
(h) Samantha mesmerised everybody with her magic tricks. (Hint: London is situated on her estuary)
(i) “In this neighbourhood, please don’t yell! Owners of these houses like to have peace.” Warmed my father when moved into our new flat’. (Hint: colour!)
(j) Write the following words, Marc!” “On”, “go”, “in”………….said the teacher to the little boy in KG Class. (Hint: Rhymes with ‘bongo’) Now make some more on your own and ask your classmates to spot the hidden name. You can do this with any name: that of a lake, mountains, trees, fruits, school items etc.

जासूसी करते रहिए

(ख) एटलस की सहायता से, 5(i) में खोजी गयी सभी नदियों को विश्व के रूपरेखा मानचित्र में बनाइए।

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NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 5 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 5 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 5 Women Change The World (Hindi Medium)

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पाठगत प्रश्न

1. किस प्रकार के व्यवसायों में स्त्रियों की अपेक्षा पुरुष अधिक हैं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-55)
उत्तर : पुलिस, सेना, ड्राइवर, पेट्रोल पंप के कर्मचारी, रेलवे व वायुयान के पायलट, व्यापार, किसान, वैज्ञानिक, औद्योगिक मजदूर आदि व्यवसायों में स्त्रियों की अपेक्षा पुरुष अधिक हैं।

2. नर्स के काम में महिलाओं की संख्या अधिक क्यों है? । (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-55)
उत्तर : महिलाएँ अच्छी नर्से हो सकती हैं, क्योंकि वे अधिक सहनशील और विनम्र होती हैं। इसे परिवार में स्त्रियों की भूमिका के साथ मिलाकर देखा जाता है। रोगियों को जो रोग से पीड़ित हैं, उन्हें घर जैसा स्नेह मिलना चाहिए, जो कि नर्स के रूप में महिलाओं में मौजूद होता है।

3. महिला किसानों की संख्या पुरुषों की तुलनात्मक रूप से कम है? यदि हैं, तो क्यों? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-55)
उत्तर : किसानों की खेती का काम कठिन होता है; जैसे-हल चलाना, कुदाल चलाना, बोझा ढोना आदि। इन कामों को महिलाओं की अपेक्षा पुरुष आसानी से कर पाते हैं। महिलाओं को इन कामों में मुश्किल होती है, क्योंकि महिलाओं का शरीर पुरुषों की अपेक्षा नाजुक होता है। इसलिए महिला किसानों की संख्या पुरुषों की तुलना में कम है।

4. पुस्तक के वाक्यांशों के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(क) यदि आप जेवियर होते तो कौन-से विषय चुनते? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-58)
(ख) अपने अनुभव के आधार पर बताइए कि लड़कों को ऐसे किन-किन दबावों का सामना करना पड़ता है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-58)
उत्तर :
(क)
यदि हम जेवियर होते तो इतिहास विषय को ही चुनते, क्योंकि कोई भी विषय खराब नहीं होता। अपनी किसी भी विषय के प्रति दिलचस्पी होनी चाहिए। किसी भी विषय को दिलचस्पी से पढ़कर अव्वल । नम्बर लाया जा सकता है और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सकता है।
उत्तर : (ख) लड़कों को निम्न दबावों का सामना करना पड़ता है

  1. माता-पिता के अनुरूप परीक्षा में अंक लाने का दबाव।
  2. कई बार लड़कों को अपने इच्छा के विरुद्ध विषय का चुनाव करने का दबाव।
  3. लड़कों पर एक अच्छी नौकरी हासिल करने का दबाव।

5. माध्यमिक स्तर पर कितने बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-62)
उत्तर : माध्यमिक स्तर पर लगभग 52 प्रतिशत बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं, जिनमें 57 प्रतिशत अनुसूचित जाति के | लड़के, 69 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के लड़के शामिल हैं तथा 62 प्रतिशत अनुसूचित जाति की लड़कियाँ और 71 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की लड़कियाँ स्कूल बीच में ही छोड़ देती हैं।

6. शिक्षा के किस स्तर पर आपको सर्वाधिक बच्चे स्कूल छोड़ते हुए दिखाई देते हैं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-62)
उत्तर : शिक्षा के उच्च माध्यमिक स्तर पर हमको सर्वाधिक बच्चे स्कूल छोड़ते हुए दिखाई देते हैं। उच्च माध्यमिक | स्तर पर लगभग 63 प्रतिशत बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं, जिसमें 71 प्रतिशत अनुसूचित जाति के लड़के, 78 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के लड़के, 76 प्रतिशत अनुसूचित जाति की लड़कियाँ, 81 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की लड़कियाँ स्कूल छोड़ देती हैं।

7. आपके विचार में अन्य सभी वर्गों की तुलना में, आदिवासी लड़के-लड़कियों की विद्यालय छोड़ने की दर अधिक क्यों है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-62)
उत्तर : अन्य सभी वर्गों की तुलना में आदिवासी लड़के-लड़कियों के विद्यालय छोड़ने के कारण

  1. आदिवासी वाले क्षेत्रों जो कि मुख्यत: जंगली क्षेत्र होते हैं, वहाँ पर स्कूलों की संख्या काफी कम है, इसलिए इन क्षेत्रों के आदिवासी लड़के-लड़कियों को पढ़ने के लिए काफी दूर-दूर तक जाना पड़ता है, जिससे इन आदिवासी लड़के-लड़कियों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  2. आदिवासी लोगों में गरीबी काफी अधिक है, इसलिए कुछ बच्चे पढ़ाई छोड़कर ही कमाने लग जाते हैं। कुछ जनजातीय लोग पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पाते, जबकि वर्तमान समय में सरकार ने बच्चों की किताबें मुफ्त, स्कूल ड्रेस के लिए पैसे, मध्याह्न के समय भोजन प्रबंध तक कर दिया है। इसके बावजूद पढ़ाई के छोटे-मोटे खर्चे भी आदिवासी लोग नहीं उठा पाते।

8. प्राथमिक कक्षाओं में स्कूल छोड़ देने वाले बच्चों के आँकड़ों के आधार पर एक दंडारेख बनाएँ। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-63)
NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 5 (Hindi Medium) 1
NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 5 (Hindi Medium) 2

प्रश्न-अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

1. आपके विचार से महिलाओं के बारे में प्रचलित रूढ़िवादी धारणा कि वे क्या कर सकती हैं और क्या नहीं, उनके समानता के अधिकार को कैसे प्रभावित करती है?
उत्तर : हमारे विचार में महिलाओं के बारे में प्रचलित रूढ़िवादी धारणा उनके समानता के अधिकार को निम्न प्रकार से प्रभावित करती हैं

  1. अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लड़कियाँ उतनी ही शिक्षा प्राप्त कर पाती हैं जितनी सुविधा उनके गाँव में उपलब्ध होती है। उन्हें प्रायः आगे की शिक्षा प्राप्त करने दूसरे गाँव अथवा शहर नहीं भेजा जाता है।
  2. अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पूँघट प्रथा, लड़कियों की कम उम्र में शादी करना, लड़कियों को चारदीवारी तक सीमित रखना आदि प्रथा प्रचलित है। अधिकांश परिवारों में लड़कियों के स्कूली शिक्षा पूरी हो जाने के बाद उनकी शादी कर दी जाती है।
  3. अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में या अशिक्षित परिवारों या रूढ़िवादी परिवारों में लड़कियों को पराया धन मानकर परवरिश की जाती है और लड़कों को वंश चलाने वाला माना जाता है, इसलिए उनकी परवरिश लड़कियों से बेहतर की जाती है।
  4. अधिकांश लोग अभी भी यह मानते हैं कि लड़कियों का मुख्य कार्य भावी परिवार के उत्तरदायित्व को निभाना है, जिसके लिए उच्च शिक्षा के स्थान पर अन्य कार्यों; जैसे-पाककला, सिलाई-बुनाई आदि की अधिक आवश्यकता होती है।

2. कोई एक कारण बताइए जिसकी वजह से राससुंदरी देवी, रमाबाई और रुकैया हुसैन के लिए अक्षर ज्ञान इतना महत्त्वपूर्ण था।
उत्तर : राससुंदरी देवी, रमाबाई और रुकैया हुसैन के लिए अक्षर ज्ञान इसलिए महत्त्वपूर्ण था, क्योंकि तीनों पढ़ाई और अक्षर ज्ञान के लिए काफी उत्सुक थीं और ये तीनों धनी परिवार से संबंधित थीं, जिसके कारण उनके लिए। यह सब संभव हो सका|

3. “निर्धन बालिकाएँ पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं, क्योंकि शिक्षा में उनकी रुचि नहीं है।” पृष्ठ 17 पर दिए गए अनुच्छेद को पढ़ कर स्पष्ट कीजिए कि यह कथन सही क्यों नहीं है?
उत्तर : यह कथन सत्य नहीं है, क्योंकि निर्धन बालिकाएँ पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं, इसका कारण उनकी रुचि न होना नहीं है, बल्कि दूसरे अनेक कारण हैं|

  1. दलित, आदिवासी और मुस्लिम वर्ग की लड़कियों के स्कूल छोड़ देने के अनेक कारण हैं। देश के अनेक भागों में विशेषकर ग्रामीण और गरीब क्षेत्रों में नियमित रूप से पढ़ाने के लिए न उचित स्कूल हैं न ही शिक्षक। यदि विद्यालय घर के पास नहीं हो और लाने-ले जाने के लिए किसी साधन जैसे बस या वैन आदि की व्यवस्था न हो तो अभिभावक लड़कियों को स्कूल नहीं भेजना चाहते।
  2. कुछ परिवार अत्यंत निर्धन होते हैं और अपने सभी बच्चों को पढ़ाने का खर्चा नहीं उठा पाते हैं। ऐसी स्थिति में लड़कों को प्राथमिकता मिलती है और लड़कियों को नहीं पढ़ाया जाता।
  3. बहुत से बच्चे इसलिए भी स्कूल छोड़ देते हैं, क्योंकि उनके साथ उनके शिक्षक और सहपाठी भेदभाव करते हैं।

4. क्या आप महिला आंदोलन द्वारा व्यवहार में लाए जाने वाले संघर्ष के दो तरीकों के बारे में बता सकते हैं? महिलाएँ क्या कर सकती हैं और क्या नहीं, इस विषय पर आपको रूढ़ियों के विरुद्ध संघर्ष करना पड़े, तो आप पढ़े हुए तरीकों में से कौन-से तरीकों का उपयोग करेंगे? आप इसी विशेष तरीके का उपयोग क्यों करेंगे?
उत्तर : संघर्ष के दो प्रमुख तरीके

  1. औरतों के अधिकारों के संबंधों में समाज में जागरूकता बढ़ाना।
  2. भेदभाव और हिंसा का विरोध करना।

यदि हमें रूढ़ियों के विरुद्ध संघर्ष करना पड़े तो हम प्रयास करेंगे कि समाज में औरतों के अधिकारों के संबंध में जागरूकता फैलाया जाए। लोगों को यह बतलाया जाए कि महिलाएँ भी समाज के अंग हैं और महिलाओं के विकास से ही परिवार और समाज का विकास हो सकता है। समाज को यह बतलाया जाए कि हमारे पूर्वज पढ़े-लिखे नहीं थे, इसलिए उनके अन्दर महिलाओं को लेकर संकीर्ण मानसिकता थी। अब हम संकीर्ण मानसिकता को छोड़कर महिलाओं से होने वाले भेदभाव को त्याग करें और एक आदर्श समाज का निर्माण करें।

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NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 2 Federalism (संघवाद)

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 2 Federalism (Hindi Medium)

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प्रश्न अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

संक्षेप में लिखें
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1. आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके क्या हैं? इनमें से प्रत्येक का एक उदाहरण भी दें।
उत्तर आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के अनेक रूप हो सकते हैं, जो निम्नलिखित हैं –

1. शासन के विभिन्न अंगों के बीच बँटवारा – शासन के विभिन्न अंग, जैसे-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा रहता है। इसमें सरकार के विभिन्न अंग एक ही स्तर पर रहकर अपनी-अपनी शक्ति का उपयोग करते हैं। इसमें कोई भी एक अंग सत्ता का असीमित प्रयोग नहीं करता, हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है। इससे विभिन्न संस्थाओं के बीच सत्ता का संतुलन बना रहता है। इसके सबसे अच्छे उदाहरण अमेरिका व भारत हैं। यहाँ विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका कानून को लागू करती है तथा न्यायपालिका न्याय करती है। भारत में कार्यपालिका संसद के प्रति उत्तरदायी है, न्यायपालिका की नियुक्ति कार्यपालिका करती है, न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के कानूनों की जाँच करके उन पर नियंत्रण रखती है।
2. सरकार के विभिन्न स्तरों में बँटवारा – पूरे देश के लिए एक सरकार होती है जिसे केंद्र सरकार या संघ सरकार कहते हैं। फिर प्रांत या क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग सरकारें बनती हैं, जिन्हें अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। भारत में इन्हें राज्य सरकार कहते हैं। इस सत्ता के बँटवारे वाले देशों में संविधान में इस बात का स्पष्ट उल्लेख होता है कि केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच सत्ता का बँटवारा किस तरह होगा। सत्ता के ऐसे बँटवारे को ऊध्र्वाधर वितरण कहा जाता है। भारत में केंद्र और राज्य स्तर के अतिरिक्त स्थानीय सरकारें भी काम करती हैं। इनके बीच सत्ता के बँटवारे के विषय में संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा गया है जिससे विभिन्न सरकारों के बीच शक्तियों को लेकर कोई तनाव न हो।
3. विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच सत्ता का बँटवारा – कुछ देशों के संविधान में इस बात का प्रावधान है कि सामाजिक रूप से कमजोर समुदाय और महिलाओं को विधायिका और प्रशासन में हिस्सेदारी दी जाए ताकि लोग स्वयं को शासन से अलग न समझने लगे। अल्पसंख्यक समुदायों को भी इसी तरीके से सत्ता में उचित हिस्सेदारी दी जाती है। बेल्जियम में सामुदायिक सरकार इस व्यवस्था का अच्छा उदाहरण है।
4. राजनीतिक दलों व दबाव समूहों द्वारा सत्ता का बँटवारा – लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता बारी-बारी से अलग अलग विचारधारा और सामाजिक समूहों वाली पार्टियों के हाथ आती-जाती रहती है। लोकतंत्र में हम व्यापारी, उद्योगपति, किसान और औद्योगिक मजदूर जैसे कई संगठित हित समूहों को भी सक्रिय देखते हैं। सरकार की विभिन्न समितियों में सीधी भागीदारी करने या नीतियों पर अपने सदस्य वर्ग के लाभ के लिए दबाव बनाकर ये समूह भी सत्ता में भागीदारी करते हैं। अमेरिका इसका अच्छा उदाहरण है। वहाँ दो राजनीतिक दल प्रमुख हैं जो चुनाव लड़कर सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं तथा दबाव समूह चुनावों के समय व चुनाव जीतने के बाद राजनीतिक दलों की आर्थिक मदद करके, सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित करके सत्ता में भागीदारी निभाते हैं।

प्रश्न 2. भारतीय संदर्भ में सत्ता की हिस्सेदारी का एक उदाहरण देते हुए इसका एक युक्तिपरक और एक नैतिक कारण बताएँ।
उत्तर भारत में सत्ता का बँटवारा सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच हुआ है, जैसे-केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकार।

  • युक्तिपरक कारण – भारत एक घनी आबादी वाला देश है। पूरे देश के लिए एक ही सरकार के द्वारा कानून बनाना, शांति तथा व्यवस्था बनाना संभव नहीं है। इसलिए सरकार को विभिन्न स्तरों में बाँट दिया गया है और उनके बीच कार्यों का बँटवारा संविधान में लिखित रूप से कर दिया गया है, जिससे ये सरकारें बिना झगड़े देश के लोगों के हितों को ध्यान में रखकर शासन कर सकें।
  • नैतिक कारण – लोकतंत्रीय देश में सत्ता का बँटवारा जरूरी है। यदि एक ही प्रकार की सरकार होगी तो वह निरंकुश हो जाएगी, ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी शासन में नहीं हो पाएगी जो कि लोकतंत्र के लिए जरूरी है। इसलिए भारत में विभिन्न स्तरों पर सरकारों का वर्गीकरण कर दिया गया है।

प्रश्न 3. इस अध्याय को पढ़ने के बाद तीन छात्रों ने अलग-अलग निष्कर्ष निकाले। आप इनमें से किससे सहमत हैं और क्यों? अपना जवाब करीब 50 शब्दों में दें।

  • थम्मन – जिन समाजों में क्षेत्रीय, भाषायी और जातीय आधार पर विभाजन हो सिर्फ वहीं सत्ता की साझेदारी जरूरी है।
  • मथाई – सत्ता की साझेदारी सिर्फ ऐसे देशों के लिए उपयुक्त है जहाँ क्षेत्रीय विभाजन मौजूद होते हैं।
  • औसेफ – हर समाज में सत्ता की साझेदारी की जरूरत होती है। भले ही वह छोटा हो या उसमें सामाजिक विभाजन न हो।

उत्तर हम औसेफ के निष्कर्ष से सहमत हैं कि हर समाज में सत्ता की साझेदारी की जरूरत होती है। भले ही वह छोटा हो या उसमें सामाजिक विभाजन न हो। क्योंकि सत्ता का बँटवारा लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए ठीक है। सत्ता की साझेदारी वास्तव में लोकतंत्र की आत्मा है। लोकतंत्र का मतलब ही होता है कि जो लोग इस शासन व्यवस्था के अंतर्गत हैं उनके बीच सत्ता को बाँटा जाए और ये लोग इसी ढर्रे में रहें। वैध सरकार वही है जिसमें अपनी भागीदारी के माध्यम से सभी समूह शासन व्यवस्था से जुड़ते हैं।

प्रश्न 4. बेल्जियम में ब्रुसेल्स के निकट स्थित शहर मर्चटेम के मेयर ने अपने यहाँ के स्कूलों में फ्रेंच बोलने पर लगी रोक को सही बताया है। उन्होंने कहा कि इससे डच भाषा न बोलने वाले लोगों को इस फ्लेमिश शहर के लोगों से जुड़ने में मदद मिलेगी। क्या आपको लगता है कि यह फैसला बेल्जियम की सत्ता की साझेदारी की व्यवस्था की मूल भावना से मेल खाता है? अपना जवाब करीब 50 शब्दों में लिखें।
उत्तर स्कूलों में फ्रेंच बोलने पर लगी रोक को सही बताना बेल्जियम की सत्ता की साझेदारी की व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ है। बेल्जियम में जो व्यवस्था अपनाई गई उसमें सभी भाषाओं के लोगों को समान अधिकार दिए गए थे। इसलिए स्कूलों में फ्रेंच बोलने पर रोक लगाना सही नहीं है क्योंकि ऐसा करने से फ्रेंच भाषी लोगों की भावनाओं का हनन होता है।

प्रश्न 5. नीचे दिए गए उद्धरण को गौर से पढ़ें और इसमें सत्ता की साझेदारी के जो युक्तिपरक कारण बताए गए हैं उनमें से किसी एक का चुनाव करें।
महात्मा गांधी के सपनों को साकार करने और संविधान निर्माताओं की उम्मीदों को पूरा करने के लिए हमें पंचायतों को अधिकार देने की जरूरत है। पंचायती राज ही वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना करता है। यह सत्ता उन लोगों के हाथों में सौंपता है जिनके हाथों में इसे होना चाहिए। भ्रष्टाचार को कम करने और प्रशासनिक कुशलता को बढ़ाने का एक उपाय पंचायतों को अधिकार देना भी है। जब विकास की योजनाओं को बनाने और लागू करने में लोगों की भागीदारी होगी तो इन योजनाओं पर उनका नियंत्रण बढ़ेगा। इससे भ्रष्ट बिचौलियों को खत्म किया जा सकेगा। इस प्रकार पंचायती राज लोकतंत्र की नींव को मजबूत करेगा।”
उत्तर इस उद्धरण में बताया गया है कि पंचायतों के स्तर पर सत्ता को बँटवारा जरूरी है क्योंकि इससे भ्रष्टाचार कम होगा तथा प्रशासनिक कुशलता बढ़ेगी। पंचायतों के अधीन जब आम लोग स्वयं अपने लिए विकास की योजनाएँ बनाएँगें और उन्हें लागू करेंगे तो भ्रष्ट बिचौलियों को समाप्त किया जा सकता है। जब स्थानीय लोग स्वयं योजनाएँ बनाएँगे तो उनकी समस्याओं का समाधान शीघ्र होगा, क्योंकि किसी स्थान विशेष की समस्याएँ वहाँ के लोग भली-भाँति समझते हैं। इस प्रकार विकास करने के लिए जरूरी है कि पंचायतों को अधिकार सौंपे जाएँ जिससे लोकतंत्र की नींव मजबूत हो।

प्रश्न 6. सत्ता के बँटवारे के पक्ष और विपक्ष में कई तरह के तर्क दिए जाते हैं। इनमें से जो तर्क सत्ता के बँटवारे के पक्ष में हैं उनकी पहचान करें और नीचे दिए गए कोड से अपने उत्तर का चुनाव करें।
सत्ता की साझेदारीः

(क) विभिन्न समुदायों के बीच टकराव को कम करती है।
(ख) पक्षपात का अंदेशा कम करती है।
(ग) निर्णय लेने की प्रक्रिया को अटका देती है।
(घ) विविधताओं को अपने में समेट लेती है।
(ङ) अस्थिरता और आपसी फूट को बढ़ाती है।
(च) सत्ता में लोगों की भागीदारी बढ़ाती है।
(छ) देश की एकता को कमजोर करती है।

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उत्तर (सा) क, ख, घ, च।

प्रश्न 7. बेल्जियम और श्रीलंका की सत्ता में साझीदारी की व्यवस्था के बारे में निम्नलिखित बयानों पर विचार करें :

(क) बेल्जियम में डच भाषी बहुसंख्यकों ने फ्रेंच भाषी अल्पसंख्यकों पर अपना प्रभुत्व जमाने का प्रयास किया।
(ख) सरकार की नीतियों ने सिंहली भाषी बहुसंख्यकों का प्रभुत्व बनाए रखने का प्रयास किया।
(ग) अपनी संस्कृति और भाषा को बचाने तथा शिक्षा तथा रोजगार में समानता के अवसर के लिए श्रीलंका के तमिलों ने सत्ता को संघीय ढाँचे पर बाँटने की माँग की।
(घ) बेल्जियम में एकात्मक सरकार की जगह संघीय शासन व्यवस्था लाकर मुल्क को भाषा के आधार पर टूटने से बचा लिया गया।

ऊपर दिए गए बयानों में से कौन-से सही हैं?
(सा) क, ख, ग और घ (रे) क,ख और घ (गा) ग और घ (मा) ख, ग और घ।
उत्तर (मा) ख, ग, घ।

प्रश्न 8. सूची I ( सत्ता के बँटवारे के स्वरूप ) और सूची II ( शासन के स्वरूप ) में मेल कराएँ और नीचे दिए गए कोड का उपयोग करते हुए सही जवाब दें :\

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NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 1 (Hindi Medium) 3
उत्तर (गा) 1. ख, 2. घ, 3. क, 4. ग।

प्रश्न 9. सत्ता की साझेदारी के बारे में निम्नलिखित दो बयानों पर गौर करें और नीचे दिए गए कोड के आधार पर जवाब दें :

(अ) सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र के लिए लाभकर है।
(ब) इससे सामाजिक समूहों में टकराव का अंदेशा घटता है।

इन बयानों में से कौन सही हैं और कौन गलत?
NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 1 (Hindi Medium) 4
उत्तर (ख) अ और ब दोनों सही हैं।

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