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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 10 कामचोर

These NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 10 कामचोर Questions and Answers are prepared by our highly skilled subject experts.

कामचोर NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 10

Class 8 Hindi Chapter 10 कामचोर Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
कहानी में मोटे-मोटे किस काम के हैं ? किनके बारे में और क्यों कहा गया ?
उत्तर:
‘कहानी में मोटे-मोटे किस काम के हैं’ घर के बच्चों के बारे में कहा गया है। बच्चे कामचोर थे और खुद उठकर अपने हाथ से लेकर पानी भी नहीं पीते थे।

प्रश्न 2.
बच्चों के ऊधम मचाने के कारण घर की क्या दुर्दशा हुई ?
उत्तर:
सारा घर धूल से अट गया। घड़े-सुराहियाँ इधर-उधर लुढ़क गए। दरी पर पानी छिड़कने से कीचड़ हो गया। झाडू बिखर गया। घर के सारे बर्तन बिखर गए। मुर्गियों ने घर गन्दा कर दिया। भेड़ों ने सारी सब्जी चटकर ली। भैंस ने अलग से ऊधम मचाकर चाचा जी को चारपाई समेत घसीटा। इस प्रकार सारा घर दुर्दशाग्रस्त हो गया।

प्रश्न 3.
“या तो बच्चा राज कायम कर लो या मुझे ही रख लो।” अम्मा ने कब कहा? और इसका परिणाम क्या हुआ?
उत्तर:
अम्मा ने घर की दुर्दशा होने पर यह बात कही। इसका परिणाम यह हुआ कि अब्बा ने कतार में खड़े करके बच्चों को कहा कि अगर किसी बच्चे ने घर की किसी चीज को हाथ लगाया तो बस रात का खाना बन्द हो जाएगा।

प्रश्न 4.
‘कामचोर’ कहानी क्या संदेश देती है ?
उत्तर:
‘कामचोर’ कहानी संदेश देती है कि बिना योजना बनाए कोई भी काम सही नहीं हो सकता। योजना बनाने के लिए भी समझदारी, अनुभव और उचित दिशा-निर्देश की ज़रूरत होती है। बिना सोचे-समझे काम करना मुसीबत और परेशानी का कारण बन जाता है।

प्रश्न 5.
क्या बच्चों ने उचित निर्णय लिया कि अब चाहे कुछ भी हो जाए, हिलकर पानी भी नहीं पिएँगे।
उत्तर:
बच्चों ने यह उचित निर्णय नहीं लिया। वे और अधिक कामचोर हो जाएंगे और उनका आने वाला जीवन और अधिक कठिन हो जाएगा।

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कहानी से आगे

प्रश्न 1.
घर के सामान्य काम हों या अपना निजी काम, प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुरूप उन्हें करना आवश्यक क्यों है ?
उत्तर:
अपनी क्षमता के अनुरूप काम करने से ही काम करने का अनुभव प्राप्त होता है। जो काम न आए, उसे सीखना चाहिए। क्षमता से बाहर काम करना उचित नहीं। इससे काम सुधरने की जगह बिगड़ जाता है और सही अनुभव भी प्राप्त नहीं हो पाता।

प्रश्न 2.
भरा-पूरा परिवार कैसे सुखद बन सकता है और कैसे दुखद ? कामचोर कहानी के आधार पर निर्णय कीजिए।
उत्तर:
भरा-पूरा परिवार यदि अपनी क्षमता के अनुसार योजनाबद्ध ढंग से काम करे और अपने बड़ों से काम करने की जानकारी ले तो वह सुखद बन सकता है। मनमाने ढंग से, बिना किसी अनुभव, योजना और सलाह के काम करना घर के लिए मुसीबत खड़ी करना है। अच्छा काम करने के लिए आपसी सहयोग और समझ का होना ज़रूरी है।

प्रश्न 3.
बड़े होते बच्चे किस प्रकार माता-पिता के सहयोगी हो सकते हैं, और किस प्रकार भार? कामचोर कहानी के आधार पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
बच्चे यदि माता-पिता से सलाह लेकर काम करें तो वे पूरी तरह से सहायक हो सकते हैं। यदि बच्चे माता-पिता की सलाह न लेकर मनमाने ढंग से काम करें तो वे माता-पिता के लिए भार बन सकते हैं। बच्चों को काम अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।

प्रश्न 4.
‘कामचोर’ कहानी एकल परिवार की कहानी है या संयुक्त परिवार की? इन दोनों तरह के परिवारों में क्या-क्या अंतर होते हैं ?
उत्तर:
‘कामचोर’ कहानी संयुक्त परिवार की कहानी है। एकल परिवार में बच्चे और माता-पिता ही होते हैं। वहाँ पर बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। लेकिन यह ध्यान सीमित ही होता है। संयुक्त परिवार में दादा-दादी, चाचा-चाची आदि सभी होते हैं। बच्चे उन्हें देखकर एक साथ मिलकर रहने का ढंग सीख सकते हैं। इस तरह के परिवार से आपसी सहयोग की भावना सीखी जा सकती है जबकि एकल परिवार में आदमी केवल सीमित दायरे में ही सोचता है।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
घरेलू नौकरों को हटाने की बात किन-किन परिस्थितियों में उठ सकती है? विचार कीजिए।
उत्तर:

  • घर के लोग सब काम करने में सक्षम हों। नौकर अधिक हों।
  • नौकर ठीक ढंग से काम न करते हों। धोखेबाज और निकम्मे हों।
  • घर की आर्थिक स्थिति कमज़ोर हो।
  • किसी की बात न सुनते हों। मनमाने ढंग से काम करते हों।

ऐसी परिस्थितियों में नौकरों को हटाया जा सकता है।

प्रश्न 2.
कहानी में एक समृद्ध परिवार के ऊधमी बच्चों का चित्रण है। आपके अनुमान से उनकी आदत क्यों बिगड़ी होगी? उन्हें ठीक ढंग से रहने के लिए आप क्या-क्या सुझाव देना चाहेंगे ?
उत्तर:
इन बच्चों की आदत बिगड़ने के ये सम्भावित कारण हो सकते हैं-

  • सारे काम नौकर कर देते होंगे।
  • माता-पिता भी झूठी शान के कारण बच्चों से कुछ काम नहीं कराते होंगे।
  • वे नौकरी से ही उनके छोटे-मोटे काम भी कराते होंगे।
  • परिवार के सभी लोग सोचते होंगे कि हमारे ही बच्चे क्यों काम करें।
  • घर के बड़े लोग उन्हें काम करने का सलीका नहीं बताते होंगे।

उन्हें ठीक ढंग से रहने के लिए ये सुझाव दिए जा सकते हैं-

  • उन्हें अपना काम खुद करने के लिए कहा जाए और काम करने का तरीका भी बताया जाए।
  • बच्चों के मन में श्रम के प्रति सम्मान का भाव पैदा किया जाए। इसके लिए घर के बड़े अपना उदाहरण पेश करें।

प्रश्न 3.
किसी सफल व्यक्ति की जीवनी से उसके विद्यार्थी जीवन की दिनचर्या के बारे में पढ़ें और सुव्यवस्थित कार्यशैली पर लेख लिखो।
उत्तर:
अपने विद्यार्थी जीवन में लाल बहादुर शास्त्री बहुत कर्मशील थे। वे तैरकर नदी पार करते और स्कूल जाते थे। हमारे भूतपूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अखबार बेचने का काम भी करते थे। गाँधी जी का जीवन भी उनकी अलग कार्यशैली को दर्शाता है।

बच्चे इन महापुरुषों की जीवनी पढ़ें और स्वयं लेख पूरा करें।

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भाषा की बात

“धुली-बेधुली बालटी लेकर आठ हाथ चार थनों पर पिल पड़े।” धुली शब्द से पहले ‘बे’ लगाकर बेधुली बना है। जिसका अर्थ है ‘बिना धुली’ ‘बे’ एक उपसर्ग है। ‘बे’ उपसर्ग से बननेवाले कुछ और शब्द हैं-
बेतुका, बेईमान, बेघर, बेचैन, बेहोश आदि। आप भी नीचे लिखे उपसर्गों से बनने वाले शब्द खोजिए।
1. प्र ……….
2. आ ………
3. भर ………..
4. बद ……….
उत्तर:
1. प्र – प्रसिद्ध, प्रकार, प्रभाव, प्रमोद, प्रमुख, प्रयोग
2. आ – आंजन्म, आजीवन, आलाप, आहरण, आदान, आभार, आकार, आचरण, आमरण, आवरण, आयात, आमंत्रण, आशंका, आपात, आगंतुक।
3. भर – भरपेट, भरसक, भरपूर, भरपाई।
4. बद – बदनसीव, बदनाम, बदतमीज, बदकिस्मत, बददिमाग, बदमाश, बदसूरत, बदरंग, बदबू, वदुआ, बदहवास, बदहाल, बदचलन, बदइंतज़ाम, वदज़बान, बदनीयत, बदनुमा, बदमज़ा, बदशक्ल,बदहज़मी, बदसलूकी।

निम्नलिखित घटनाओं को सही क्रम से लिखिए

  • धुली-बेधुली बालटी लेकर आठ हाथ चार थनों पर पिल पड़े।
  • इतने में भेड़ें सूप को भूलकर तरकारी वाली की टोकरी पर टूट पड़ीं।
  • इधर सारी मुर्गियाँ बेनकेल का ऊँट बनीं चारों तरफ दौड़ रही थीं।
  • हज्जन माँ एक पलंग पर दुपट्टे से मुँह ढंके सो रही थी।

उत्तर:
घटनाओं का सही क्रम इस प्रकार है-

  • इधर सारी मुर्गियाँ बेनकेल का ऊँट बनीं चारों तरफ दौड़ रही थीं।
  • हज्जन माँ एक पलंग पर दुपट्टे से मुँह ढंके सो रही थी।
  • इतने में भेड़ें सूप को भूलकर तरकारी वाली की टोकरी पर टूट पड़ी।
  • धुली-बेधुली बालटी लेकर आठ हाथ चार थनों पर पिल पड़े।

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
तरकारी वाली तोल-तोल कर रसोइए को क्या दे रही थी ?
(क) भिण्डी
(ख) लौकी
(ग) प्याज
(घ) मटर की फलियाँ
उत्तर:
(घ) मटर की फलियाँ

प्रश्न 2.
पेड़ों में पानी देने के लिए निम्नलिखित बर्तन नहीं लिया गया-
(क) तसला
(ख) जग
(ग) भगोना
(घ) लोटा
उत्तर:
(ख) जग

प्रश्न 3.
एक बड़ा-सा मुर्गा कूद पड़ा, कहाँ ?
(क) खीर के प्याले में
(ख) पतीली में
(ग) अम्मा के पानदान में
(घ) तसले में
उत्तर:
(ग) अम्मा के पानदान में

प्रश्न 4.
मैंस का दूध दुहने के लिए कितने बच्चे पिल पड़े ?
(क) तीन
(ख) चार
(ग) दो
(घ) आठ
उत्तर:
(ख) चार

प्रश्न 5.
ये लोग कुमुक में नहीं थे-
(क) बड़े भाई
(ख) मौसियाँ
(ग) बहिनें
(घ) चाचा
उत्तर:
(घ) चाचा

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प्रत्येक शब्द के सामने दो-दो अर्थ दिए गए हैं। सही अर्थ छाँटकर लिखिए।

प्रश्न 1.
शब्द – अर्थ
फरमान – राजाज्ञा, अनुमति
कुमुक – राशन, फौज़ी टुकड़ी
लश्टम-पश्टम – सलीके से, अस्त-व्यस्त
मातम – शोक, प्रसन्नता
उत्तर:
फ़रमान – राजाज्ञा
कुमुक – फौज़ी टुकड़ी
लश्टम-पश्टम – अस्त-व्यस्त
मातम – शोक

बोध-प्रश्न

(क) अब सब लोग नल पर टूट पड़े। यहाँ भी वह घमासान मची कि क्या मजाल जो एक बूंद पानी भी किसी के बर्तन में आ सके। ठूसम-ठास! किसी बालटी पर पतीला और पतीले पर लोटा और भगोने डोंगे। पहले तो धक्के चले। फिर कुहनियाँ और उसके बाद बरतन। फौरन बड़े भाइयों, बहिनों, मामुओं और दमदार मौसियों, फूफियों की कुमुक भेजी गई, फौज मैदान में हथियार फेंककर पीठ दिखा गई।

इस धींगामुश्ती में कुछ बच्चे कीचड़ में लथपथ हो गए जिन्हें नहलाकर कपड़े बदलवाने के लिए नौकरों की वर्तमान संख्या काफी नहीं थी। पास के बंगलों से नौकर आए और चारआना प्रति बच्चा के हिसाब से नहलवाए गए।

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

प्रश्न 1.
नल पर घमासान क्यों मचा था ?
उत्तर:
सब बच्चे अपने-अपने बर्तन में पानी भरने के लिए नल पर टूट पड़े थे, इसलिए वहाँ पर घमासान मचा था।

प्रश्न 2.
पहले तो धक्के चले। फिर कुहनियाँ और उसके बाद बरतन’ इसका आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पहले सब अपने-अपने बर्तन में पानी भरने के लिए एक-दूसरे को धक्का देने लगे, फिर कुहुनियों से धकेलने लगे और उसके बाद बरतनों का इस्तेमाल करके दूसरों को हटाकर खुद आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।

प्रश्न 3.
किसकी कुमुक भेजी गई और क्यों ?
उत्तर:
बच्चों का झगड़ा रोकने के लिए कुमुक भेजी गई। यह बड़े भाइयों, बहिनों, मामुओं और दमदार मौसियों, फूफियों की कुमुक थी।

प्रश्न 4.
कुमुक भेजने का असर क्या हुआ ?
उत्तर:
कुमुक भेजते ही बच्चों की फौज मैदान में हथियार फेंककर भाग गई।

प्रश्न 5.
बच्चे कीचड़ से लथपथ क्यों हो गए थे ?
उत्तर:
आपसी धींगामुश्ती के कारण बच्चे कीचड़ में लथपथ हो गए।

प्रश्न 6.
बच्चों के कपड़े बदलवाने के लिए क्या किया गया ?
उत्तर:
बच्चों के कपड़े बदलवाने के लिए उन्हें नहलवाना भी ज़रूरी था अतः पास के बंगलों से नौकर आए और चार आना प्रति बच्चा के हिसाब से उन्हें नहलवाया गया।

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(ख) इतने में भेड़ें सूप को भूलकर तरकारीवाली टोकरी पर टूट पड़ीं। वह दालान में बैठी मटर की फलियाँ तोल-तोल कर रसोइए को दे रही थी। वह अपनी तरकारी का बचाव करने के लिए सीना तान कर उठ गई। आपने कभी भेड़ों को मारा होगा, तो अच्छी तरह देखा होगा कि बस, ऐसा लगता है जैसे रुई के तकिए को कूट रहे हों। भेड़ को चोट ही नहीं लगती। बिल्कुल यह समझकर कि आप उससे मजाक कर रहे हैं। वह आप ही पर चढ़ बैठेगी। जरा-सी देर में भेड़ों ने तरकारी छिलकों समेत अपने पेट की कड़ाही में झौंक दी।

प्रश्न 1.
सूप को भूलकर भेड़ों ने क्या किया ?
उत्तर:
भेड़ें सूप को भूलकर तरकारी की टोकरी पर टूट पड़ीं।

प्रश्न 2.
तरकारी वाली ने तरकारी के बचाव के लिया क्या किया ?
उत्तर:
तरकारी वाली तरकारी के बचाव के लिए सीना तानकर खड़ी हो गई।

प्रश्न 3.
भेड़ों पर मारने का क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर:
तरकारी वाली ने कमी भेड़ों को नहीं मारा था। वह ऐसे मार रही थी जैसे रुई के तकिए कूट रही हो। उसकी मार का भेड़ों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

प्रश्न 4.
ज़रा-सी देर में भेड़ों ने क्या किया ?
उत्तर:
ज़रा-सी देर में भेड़ों ने छिलकों सहित तरकारी अपने पेट की कड़ाही में झोंक दी अर्थात् तरकारी सफाचट कर दी।

(ग) तय हुआ कि भैंस की अगाड़ी-पिछाड़ी बाँध दी जाए और फिर काबू में लाकर दूध दुह लिया जाए। बस, झूले की रस्सी उतारकर भैंस के पैर बाँध दिए गए। पिछले दो पैर चाचा जी की चारपाई के पायों से बाँध, अगले दो पैरों को बाँधने की कोशिश जारी थी कि भैंस चौकन्नी हो गई। छूटकर जो भागी तो पहले चाचा जी समझे कि शायद कोई सपना देख रहे हैं। फिर जब चारपाई पानी के ड्रम से टकाराई और पानी छलककर गिरा तो समझे कि आँधी-तूफान में फंसे हैं। साथ में भूचाल भी आया हुआ है। फिर जल्दी ही उन्हें असली बात का पता चल गया और वह पलंग की दोनों पटियाँ पकड़े, बच्चों को छोड़ देनेवालों को बुरा-भला सुनाने लगे।

प्रश्न 1.
भैंस को काबू में करने के लिए क्या तय किया गया ?
उत्तर:
भैंस को काबू में करने के लिए तय किया गया की भैंस की अगाड़ी-पिछाड़ी बाँध दी जाए।

प्रश्न 2.
इस योजना को पूरा करने के लिए क्या उपाय किया गया ?
उत्तर:
इस योजना को पूरा करने के लिए झूले की रस्सी उतार कर भैंस के पैर बाँध दिए गए। पिछले दो पैर चाचा जी की चारपाई से बाँध दिए।

प्रश्न 3.
चाचा जी ने सबसे पहले क्या समझा ?
उत्तर:
चाचा जी को सबसे पहले भैंस के भागने पर लगा जैसे वे कोई सपना देख रहे हैं।

प्रश्न 4.
बाद में चाचा जी को क्या पता चला ?
उत्तर:
बाद में चारपाई ड्रम से टकराने पर लगा कि वे आँधी-तूफान में फँसे हैं और साथ में भूचाल भी आया हुआ है।

प्रश्न 5.
चाचा जी ने किसको बुरा-भला कहा ?
उत्तर:
चाचा जी बच्चों को छोड़ देने वालों को बुरा-भला सुनाने लगे।

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कामचोर Summary

पाठ का सार

घर में काम करने की आदत नहीं थी। सारा काम नौकरों के भरोसे था। घर के लोग ऊधम मचाने के सिवा कुछ नहीं करते थे। इस निकम्मेपन से छुटकारा पाने के लिए तय हुआ कि सारे नौकरों को निकाल दिया जाए। खुद पानी पीने के चक्कर में मटके और सुराहियाँ इधर-उधर लुढ़कने लगे। तय हुआ, जो काम नहीं करेगा उसे रात का खाना नहीं मिलेगा। काम थे-मैली दरी की सफाई, आँगन में पड़े कूड़े की सफाई, पेड़ों में पानी देना। तनख्वाह भी दी जाएगी। बच्चे काम में जुट गए। बहुत से बच्चों ने लकड़ियों से दरी को पीटना शुरू कर दिया। घर में धूल फैल गई। सब जगह धूल ही धूल । खाँसते-खाँसते बुरा हाल हो गया। आँगन में फौरन झाडू लगाई गई। झाडू एक थी। काम करने वाले अनेक। खींचतान में झाडू के पुर्जे उड़ गए। झाडू मारने से पहले पानी छिड़कना ठीक होगा। यह सोचकर दरी पर पानी छिड़क दिया गया। दरी की धूल कीचड़ बन गई।

आँगन से निकालने पर बच्चे घर की बालटियाँ, लोटे, तसले, भगोने आदि बर्तन लेकर पेड़ों को पानी देने के लिए निकले। नल पर घमासान युद्ध मच गया। किसी के बर्तन में एक बूंद पानी नहीं पहुँचा। घर के बड़े लोग निकले तो बच्चों की फौज भाग गई। इसके बाद बच्चों ने वाँस-छड़ी जो मिला, लेकर मुर्गियों को बाड़े में हाँकने लगे। वे भी इधर-उधर भागने लगीं। कुछ खीर के प्यालों के ऊपर से गुज़रीं । मुर्गा अम्मा के पानदान में कूदा और फिर अम्मा की चादर पर निशान छोड़े। एक मुर्गी दाल की पतीली में छपाक मारकर भागी। कुछ ने भेड़ों को दाना खिलाने की सोची तो भेड़ों ने भी अपनी भेड़चाल से सबको परेशान किया। सोती हुई हज्जन माँ के ऊपर से भेड़ें दौड़ गईं। कुछ सूप छोड़कर तरकारी वाली टोकरी पर टूट पड़ीं। छिलके समेत तरकारी साफ़ हो गई।

कुछ बच्चे धमकी के डर से कुछ काम न मिलने पर बालटी लेकर भैंसों को दुहने चल पड़े। थनों पर हाथ लगते ही भैंसें ‘बिदककर दूर जा खड़ी हुईं। फिर पैर बाँधने का उपाय ढूँढा गया। पिछले पैर चाचा जी की चार पाई से बाँधे। अगले पैर झुले की रस्सी से। भैंस छूटकर भागी और चारपाई को भी-साथ लेकर दौड़ पड़ी। चाचा जी भूचाल समझकर चारपाई से चिपके थे। बछड़ा न खोलने की भूल मालूम हुई। उसे भी खोल दिया गया तो भैंस रुकी। बालटी पहले ही गोबर में गिर चुकी थी।

तूफान जैसा हाल पूरे घर का हो गया था। अम्मा आगरा जाने के लिए सामान बाँधने लगीं। उन्होंने बच्चों के इस राज को चुनौती दी। अब्बा ने सबको कतार में खड़े करके कुछ भी करने से मना कर दिया। ‘किसी चीज़ को हाथ लगाया तो खाना बन्द’ । फिर पहले जैसा हाल हो गया। कोई हिलकर पानी भी नहीं पिएगा।

शब्दार्थ : दबैल-दबाव में आने वाला; फरमान-आदेश, राजाज्ञा; तनख्वाह-वेतन; बुजुर्ग-बूढ़े धींगामुश्ती-जोर-जबरदस्ती; कामदानी-बेल-बूटेदार कपड़ा; लटरम-पटरम-अस्त-व्यस्त; प्रलय-विनाश; बागी-विद्रोही; कतार-पंक्ति; मातम-शोक; हरगिज़-विल्कुल; मिसाल-उदाहरण; हवाला-सन्दर्भ, उल्लेख; कुमुक-फौजी टुकड़ी; कायल-मान लेने वाला; बेनकेल-विना नियंत्रण के; फलांगनी-कूदकर पार करना; चौकन्नी-सावधान; हँकाई गई-आवाज देकर भगाना; कोर्ट मार्शल-फौजी अदालत में सजा सुनाना; किसी करवट-किसी भी-तरह;

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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 9 कबीर की साखियाँ

These NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 9 कबीर की साखियाँ Questions and Answers are prepared by our highly skilled subject experts.

कबीर की साखियाँ NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 9

Class 8 Hindi Chapter 9 कबीर की साखियाँ Textbook Questions and Answers

पाठ से

प्रश्न 1.
‘तलवार का महत्त्व होता है, म्यान का नहीं’-उक्त उदाहरण से कबीर क्या कहना चाहते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘तलवार का महत्त्व होता है, म्यान का नहीं’–इस उदाहरण से कबीर कहना चाहते हैं कि म्यान वैसे ही है जैसे किसी की जाति होती है। यह ऊपरी आवरण है अर्थात् थोपी गई विशेषता है। तलवार से आशय है-ज्ञान। ज्ञान ही किसी व्यक्ति की असली पहचान होता है। व्यक्ति का बाहरी दिखावा भी म्यान की तरह है, जिसे लोग बाहरी पहनावे एवं कर्मकाण्ड से दर्शाते हैं। असली शक्ति तो मन का चिन्तन एवं शुद्ध आचरण है।

प्रश्न 2.
पाठ की तीसरी साखी-जिसकी एक पंक्ति है-“मनुवाँ तो चहुँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं’ के द्वारा कबीर क्या कहना चाहते हैं ?
उत्तर:
इस पंक्ति के द्वारा कबीर कहना चाहते हैं कि चित्त की एकाग्रता ही सच्ची भक्ति है। जिसका मन चंचल है, कभी स्थिर नहीं रहता, किसी एक भाव पर नहीं टिकता, वह ईश्वर की सच्ची भक्ति नहीं कर सकता। जिसका मन इधर-उधर भटकता रहता है, वे पूजा या उपासना करने का ढोंग करते रहते हैं।

प्रश्न 3.
कबीरदास घास की निन्दा करने से क्यों मना करते हैं ? पढ़े हुए दोहे के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘घास’ से कबीर जी का आशय है-छोटे लोग, दबे-कुचले या प्रताड़ित लोग जो किसी भी डाँट-फटकार का विरोध करने की स्थिति में नहीं होते। कबीर ऐसे लोगों की निन्दा करने से मना करते हैं। कबीर ने अपने एक और दोहे ‘दुर्बल को न सताइए’ में भी ऐसी ही बात कही है। यदि आप समर्थ हैं तो असमर्थ लोगों की निन्दा मत करो। ऐसा करने से कोई बड़ा नहीं हो सकता। जिन्हें छोटा समझा जाता है, अगर वे विरोध करेंगे या पलटकर जवाब देंगे तो वह और अधिक दुःख का कारण बनेगा।

प्रश्न 4.
मनुष्य के व्यवहार में ही दूसरों को विरोधी बना लेने वाले दोष होते हैं। यह भावार्थ किस दोहे से व्यक्त होता है ?
उत्तर:
जग में बैरी कोई नहीं, जो मन सीतल होय।
या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय।।

NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 9 कबीर की साखियाँ

पाठ से आगे

प्रश्न 1.
“या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय।”
“ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय।”
इन दोनों पंक्तियों में ‘आपा’ को छोड़ देने या खो देने की बात की गई है।
‘आपा’ किस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है ? क्या ‘आपा’ स्वार्थ के निकट का अर्थ देता है या घमंड का ?
उत्तर:
‘आपा’ का अर्थ अहंकार या घमण्ड है। ‘आपा’ छोड़ने का मतलब है-घमण्ड का परित्याग करना।
‘आपा’ स्वार्थ के निकट का अर्थ नहीं देता है। स्वार्थ उस घमण्ड का एक भाग जरूर है। जहाँ घमण्ड या अहंकार होगा, वहाँ स्वार्थ खुद चला आएगा।

प्रश्न 2.
आपके विचार में आपा और आत्मविश्वास में तथा आपा और उत्साह में क्या कोई अंतर हो सकता है ? स्पष्ट करो।
उत्तर:
‘आपा’ होने पर यह विश्वास मजबूत हो जाता है कि जो कुछ भी हूँ, मैं ही हूँ अर्थात् आत्मविश्वास (भले ही गलत दिशा में हो) के बिना आपा या अहंकार मजबूत नहीं हो सकता।

‘उत्साह’ काम करने में जोश की भावना को कहते हैं। इसका ‘आपा’ अर्थात् घमण्ड से कोई संबंध नहीं है। उत्साह एक सकारात्मक सोच की भावना है। इसके द्वारा व्यक्ति अच्छे काम करने के लिए अग्रसर होता है।

प्रश्न 3.
सभी मनुष्य एक ही प्रकार से देखते-सुनते हैं पर एक समान विचार नहीं रखते। सभी अपनी-अपनी मनोवृत्तियों के अनुसार कार्य करते हैं। पाठ में आई कबीर की किस साखी से उपर्युक्त पंक्तियों के भाव मिलते हैं, एकसमान होने के लिए आवश्यक क्या है ? लिखिए।
उत्तर:
उपर्युक्त भाव वाली साखी-
जग में बैरी कोई नहीं, जो मन सीतल होय।
या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय ॥

एक समान होने के लिए मन शांत और शीतल होना चाहिए। अहंकार को छोड़ देना चाहिए। फिर सभी मनुष्य एक जैसे लगेंगे। कोई भी वैरी नहीं होगा। सब समान आचरण करेंगे।

प्रश्न 4.
कबीर के दोहों को ‘साखी’ क्यों कहा गया है ? ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
कबीर के दोहे ज्ञान के ‘साक्षी’ हैं, गवाह हैं। इनमें जीवन की कोई न कोई सीख या शिक्षा दी गई है। इसलिए इन्हें ‘साखी’ कहा गया है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
बोलचाल की क्षेत्रीय विशेषताओं के कारण शब्दों के उच्चारण में परिवर्तन होता है, जैसे-वाणी शब्द बानी बन जाता है। मन से मनवा, मनुवा आदि हो जाता है। उच्चारण के परिवर्तन से वर्तनी भी बदल जाती है। नीचे कुछ शब्द दिए जा रहे हैं, उनका वह रूप लिखिए जिससे आपका परिचय हो। ग्यान, जीभि, पाऊँ, तलि, आँखि, बैरी।
उत्तर:
ग्यान-ज्ञान; जीभि-जिह्वा, जीभ; पाऊँ-पाँव; तलि-तले; आँखि-आँख; बैरी-वैरी।

सप्रसंग व्याख्या

1. जाति न पूछो साध की, पूछ लीजिए ज्ञान।
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान ॥1॥

प्रसंग- यह दोहा संत कवि कबीरदास जी द्वारा रचित है। कबीर जी ने इस दोहे में ज्ञान का महत्त्व बताया है और जाति आदि के महत्त्व को नकारा है।

व्याख्या- कबीरदास जी कहते हैं कि साधु का महत्त्व केवल ज्ञान से होता है। इसलिए किसी साधु की जाति आदि पूछना बेकार है। अगर पूछना है तो उसका ज्ञान पूछ लीजिए। पता कर लीजिए कि साधु ज्ञानी है या नहीं। अगर मोल करना है तो सिर्फ तलवार का करो। म्यान का मोल करने से क्या लाभ ? सज्जनों का भी ज्ञान ही महत्त्वपूर्ण होता है। जाति बड़ी होने से कोई व्यक्ति बड़ा नहीं हो जाता।

विशेष-

  • ‘तलवार’ ज्ञान का और ‘म्यान’ जाति का प्रतीक है।
  • कबीर जी ने जाति-पांति के दिखावे का विरोध किया है।

NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 9 कबीर की साखियाँ

2. आवत गारी एक है, उलटत होई अनेक।
कह कबीर नहिं उलटिए, वही एक ही एक ॥2॥

प्रसंग- कबीर दास जी ने इस ‘साखी’ में दुर्वचन के बदले दुर्वचन बोलने का विरोध किया है।

व्याख्या- कबीरदास जी कहते हैं कि जब कोई किसी को गाली देता है तो वह एक ही होती है। जब कोई पलटकर गाली के बदले गाली देने लगता है तो वह अनेक हो जाती हैं क्योंकि परस्पर गाली देने का यह सिलसिला आगे बढ़ने लगता है। इस सिलसिले का कोई अंत नहीं है। कबीरदास जी कहते हैं कि यदि गाली को नहीं उलटते हैं अर्थात् अगर पलटकर गाली का जवाब गाली से नहीं देते है तो वह गाली सिर्फ एक ही बनी रहती है और आपसी विचार आगे नहीं बढ़ता है।

विशेष-

  • ‘कह कबीर’ में अनुप्रास अलंकार है।
  • विवादों से दूर रहने की शिक्षा दी गई है।
  • सरल खड़ी बोली का प्रयोग किया है, जिसमें सधुक्कड़ी (साधुओं में प्रयोग की जाने वाली) भाषा का भी समावेश है।

3. माला तो कर में फिरै, जीभि फिरै मुख माँहि।
मनुवाँ तो चहुँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं ॥3॥

प्रसंग- जो लोग माला फेरकर भगवान का नाम लेने का ढोंग करते हैं, कबीर ने उनका विरोध किया है। इस दोहे में कबीर ने एक तरह से मन की एकाग्रता पर बल दिया है।

व्याख्या- कबीरदास जी कहते हैं कि माला तो हाथ में घूमती रहती है। जाप करने वाले उसके एक-एक दाने को घुमाते रहते हैं। जीभ जाप करते समय मुँह में घूमती रहती है। मन एक जगह टिकता नहीं। वह इधर-उधर बेकार की बातों में उलझा रहता है। उसका जाप से कोई तालमेल नहीं होता है। इसे भगवान का स्मरण नहीं कहा जा सकता। यह तो पूरी तरह से ढोंग है। भगवान का ध्यान करने के लिए मन को एकाग्र करना जरूरी है।

विशेष-

  • ‘मुख माँहि’ में अनुप्रास अलंकार है।
  • माला फेरने को कबीरदास जी ने ढोंग बताया है।
  • मन की एकाग्रता ही सच्ची ईश्वर-आराधना है।

4. कबीर घास न नीदिए, जो पाऊँ तलि होई।
उड़ि पड़े जब आँखि मैं, खरी दुहेली होई ॥4॥

प्रसंग- कबीरदास जी ने इस साखी में विनम्र और प्रतिरोध न करने वाले व्यक्ति की निन्दा करने से मना किया है।

व्याख्या- छोटे कहलाने वाले व्यक्तियों को प्रायः कुछ बड़े लोग डाँटते-फटकारते रहते हैं। ऐसा व्यवहार करना उचित नहीं है। अगर पाँव के नीचे दबी हुई हो तो भी हमें घास की अर्थात् छोटे कहलाने वाले लोगों की निन्दा नहीं करनी चाहिए। हमें उनके साथ शालीन एवं सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। उसी घास का एक तुच्छ तिनका अगर उड़कर आँख में गिर जाए तो बहुत पीड़ा होगी अर्थात् वह छोटा व्यक्ति अगर पलटकर जरा-सी भी बात कह देगा तो हमें बहुत तकलीफ होगी।

विशेष-

  • कबीर ने सबके साथ शालीन व्यवहार करने की सलाह दी है।
  • छोटा समझकर कभी किसी का निरादर या उपेक्षा करना ठीक नहीं है।
  • ‘घास’ छोटे या विरोध न करने वाले साधारण व्यक्ति का प्रतीक है।

5. जग में बैरी कोई नहीं, जो मन सीतल होय।
या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय ॥5॥

प्रसंग- इस साखी में कबीरदास जी ने अहंकार को शत्रुता का मुख्य कारण माना है। शीतल मन वाले व्यक्ति के मन में कभी अहंकार की भावना नहीं आ सकती।

व्याख्या- जिस व्यक्ति का मन शांत एवं शीतल है, उसका संसार में कोई भी दुश्मन नहीं हो सकता। मनुष्य का घमण्ड ही उसके शत्रुओं की संख्या बढ़ाता है। यदि कोई व्यक्ति इस अहंकार को पूरी तरह छोड़ दे तो उस पर सब लोग दया करने लगेंगे। उसके प्रति सबके मन में अपनेपन और आदर की भावना उत्पन्न हो जाएगी।

विशेष-

  • कबीर ने अहंकार को शत्रुता का मूल कारण माना है।
  • ‘आपा’ का प्रयोग अहंकार के लिए किया गया है।

NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 9 कबीर की साखियाँ

कबीर की साखियाँ Summary

पाठ का सार

‘साखी’ शब्द मूलतः साक्षी से बना है। कबीर ने साखियाँ ‘दोहा’ छन्द में प्रस्तुत की हैं। इन दोहों में कबीर ने जीवन की विभिन्न ‘सीख’ या ‘शिक्षा’ प्रस्तुत की है।

शब्दार्थ : साध-साधु, सज्जन; तरवार-तलवार; आवत-आते समय; गारी-गाली; उलटत-उलटना, पलटकर कहना; कर-हाथ; माँहि-में, भीतर; मनुवाँ-मन; दहुँ-दस; दिसि- दिशाओं में सुमिरन-स्मरण, याद करना; नाहिं-नहीं; न नीदिए-निंदा मत कीजिए; पाऊँ-पाँव; तलि-तले, नीचे होइ-होगी; उड़ि-उड़कर; खरी-सही, सच्ची; दुहेली-दुःख, कठिन; सीतल-शीतल, शांत; आपा-घमण्ड, अहंकार; डारि-डाल दीजिए, छोड़ दीजिए; सब कोय-सब कोई, हर आदमी।

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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 8 यह सबसे कठिन समय नहीं

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यह सबसे कठिन समय नहीं NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 8

Class 8 Hindi Chapter 8 यह सबसे कठिन समय नहीं Textbook Questions and Answers

कारण बताएँ

प्रश्न 1.
‘यह कठिन समय नहीं है’ बताने के लिए कविता में कौन-कौन से तर्क प्रस्तुत किए हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘यह कठिन समय नहीं है’ बताने के लिए इस कविता में निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत किए गए हैं-

  • चिड़िया की चोंच में अभी भी तिनका दबा है।
  • चिड़िया उड़ने की तैयारी में है।
  • झरती हुई पत्ती को थामने के लिए एक हाथ तत्पर है।
  • स्टेशन पर भीड़ है। रेलगाड़ी गंतव्य तक जा रही है।
  • लोग आने वालों का इन्तजार कर रहे हैं।
  • सूर्यास्त होने पर घर जल्दी आने के लिए कह रहे हैं।
  • बूढ़ी नानी अभी भी कथा का आखिरी हिस्सा सुनाने वाली है। जीवन के प्रति आस्था जगाने के लिए उपर्युक्त तथ्य पर्याप्त हैं।

प्रश्न 2.
चिड़िया चोंच में तिनका दबाकर उड़ने की तैयारी में क्यों है ? वह तिनकों का क्या करती होगी ? लिखिए।
उत्तर:
चिड़िया चोंच में तिनका दबाकर उड़ने की तैयारी इसलिए कर रही है कि उसे नए घोंसले को पूरा करना है। वह एक-एक तिनका जोड़कर अपने घोंसले को पूरा करती होगी।

प्रश्न 3.
कविता में कई बार ‘अभी भी’ का प्रयोग करके बातें रखी गई हैं, अभी भी का प्रयोग करते हुए तीन वाक्य बनाइए और देखिए उनमें लगातार, निरंतर, बिना रुके चलने वाले किसी कार्य का भाव निकल रहा है या नहीं ?
उत्तर:

  • अभी भी तुम यहीं बैठे हो।
  • मैं अभी भी सुबह के समय घूमने जाता हूँ।
  • दीपक अभी भी पुरानी जगह काम कर रहा है।

प्रश्न 4.
‘नहीं’ और ‘अभी भी’ को एक साथ प्रयोग करके तीन वाक्य लिखिए और देखिए ‘नहीं’, ‘अभी भी’ के पीछे कौन-कौन से भाव छिपे हो सकते हैं ?
उत्तर:

  • नहीं, अभी भी उसमें पहले जैसी ताकत है।
  • नहीं, अभी भी उसे तेज बुखार है।
  • नहीं, अभी भी मुझे अपने दोस्त चन्द्रेश पर भरोसा है।

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कविता से आगे

प्रश्न 1.
घर के बड़े-बूढ़ों द्वारा बच्चों को सुनाई जाने वाली किसी ऐसी कथा की जानकारी प्राप्त कीजिए जिसके आखिरी हिस्से में कठिन पस्थितियों में जीतने का संदेश हो।
उत्तर:
मेरी दादी ने एक कथा सुनाई थी-‘सोने की खोज’। वह कथा इस प्रकार है-
एक किसान के दो बेटे थे। दोनों ही बहुत आलसी थे। कुछ काम-धाम नहीं करते थे। किसान चिन्तित था कि इन आलसी बेटों को सही रास्ते पर कैसे लाया जाए। इसी चिन्ता में किसान बीमार पड़ गया। दोनों बेटे खूब सेवा करते, पर किसान स्वस्थ नहीं हो सका। एक दिन किसान ने कहा- “मैंने सामने वाले खेत में सोने के सिक्के दबाए थे, उन्हें खोद कर निकाल लो। तुम्हें पूरा खेत खोदना पड़ेगा।” रुपयों के लालच में दोनों भाइयों ने खेत खोदना शुरू किया, परंतु कुछ नहीं निकला। चार दिन में पूरा खेत खोद डाला पर सोने के सिक्के नहीं मिले।

किसान ने समझाया-“और गहराई तक खुदाई करो।” दोनों भाई दिनभर फावड़ा चलाते । शाम तक बुरी तरह थक जाते। चार दिन और बीत गए, परंतु उन्हें सोने का एक भी सिक्का नहीं मिला। वे बहुत उदास और निराश बैठे थे। किसान ने कहा-“खेत में अंगूर की बेलें लगा दो।” वेटों ने ऐसा ही किया।

समय बीतता गया। अंगूर की बेलें हरी-भरी हो गईं। बेलों पर भरपूर अंगूर लगे। दोनों भाई रोज वाजार जाते और अंगूर बेचकर आते। इस तरह उनके पास ढेर सारा पैसा हो गया। किसान अब स्वस्थ होने लगा था। बेटों का मन भी काम में लगने लगा था। उन्होंने दूसरा खेत भी अंगूरों की खेती के लिए तैयार कर लिया। किसान ने कहा-“तुमने अपनी मेहनत से काफी पैसा कमा लिया है। यही असली सोना है, जिसे तुम खोदकर निकालना चाह रहे थे।”

प्रश्न 2.
आप जब भी घर से स्कूल जाते हैं, कोई आपकी प्रतीक्षा कर रहा होता है। सूरज डूबने का समय भी आपको खेत के मैदान से घर लौट चलने की सूचना देता है कि घर में कोई आपकी प्रतीक्षा कर रहा है-प्रतीक्षा करने वाले व्यक्ति के विषय में आप क्या सोचते हैं ? अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
मुझे स्कूल से घर पहुँचने में जरा-सी भी देर हो जाए तो मेरी माँ दरवाजे पर आकर खड़ी हो जाती है। वह कभी-कभी उस रास्ते पर आकर खड़ी हो जाती है, जहाँ मेरी बस मुझे छोड़ती है। खेल के मैदान से भी मैं सूरज डूबने से पहले चल देता हूँ ताकि समय पर घर पहुँच जाऊँ। मैं सोचता हूँ कि मेरी माँ मेरी बहुत चिन्ता करती है। वह मुझे प्यार भी बहुत करती है, इसीलिए उसे समय पर मेरे घर पहुंचने का इंतजार रहता है।

अनुमान और कल्पना:
अंतरिक्ष के पार की दुनिया से क्या सचमुच कोई बस आती है जिससे खतरों के बाद भी वचे हुए लोगों की खबर मिलती है ? आपकी राय में यह झूठ है या सच ? यदि झूठ है तो कविता में ऐसा क्यों लिखा गया ? अनुमान लगाइए यदि सच लगता है तो किसी अंतरिक्ष संबंधी विज्ञान कथा के आधार पर कल्पना कीजिए वह बस कैसी होगी? वे बचे हुए लोग खतरों से क्यों घिर गए होंगे ? इस संदर्भ को लेकर कोई कथा बना सकें तो बनाइए।

अंतरिक्ष के पार की दुनिया से सचमुच में कोई बस नहीं आती है। अतः किसी की खबर मिलने की बात केवल काल्पनिक है। कविता को रोचक बनाने के लिए इस कल्पना का समावेश किया गया है। अंतरिक्ष पार की बस यदि होगी तो अपने अंतरिक्ष यान की तरह ही होगी।

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर (सी.सी.ई. प्लस)

प्रश्न 1.
नहीं, यह सबसे कठिन समय नहीं है, क्योंकि-
(क) चिड़िया पानी पी रही है।
(ख) पत्तियाँ झड़ने लगी हैं।
(ग) चिड़िया की चोंच में अभी भी तिनका दबा है।
(घ) मजदूर काम कर रहा है।
उत्तर:
(ग) चिड़िया की चोंच में अभी भी तिनका दबा है।

प्रश्न 2.
किसकी प्रतीक्षा नहीं की जा रही है ?
(क) मुसाफिरों की।
(ख) कथा के आखिरी हिस्से की।
(ग) अखबार वाले की।
(घ) किसी के जल्दी आने की।
उत्तर:
(ग) अखबार वाले की।

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सप्रसंग व्याख्या

(क) नहीं, यह सबसे कठिन समय नहीं!
अभी भी दबा है चिड़िया की
चोंच में तिनका
और वह उड़ने की तैयारी में है।
अभी भी झरती हुई पत्ती
थामने को बैठा है हाथ एक
अभी भी भीड़ है स्टेशन पर
अभी भी एक रेलगाड़ी जाती है
गंतव्य तक
जहाँ कोई कर रहा होगा प्रतीक्षा।

प्रसंग- उपर्युक्त पंक्तियाँ जया जादवानी की कविता ‘यह सबसे कठिन समय नहीं’ से ली गई हैं। हर आदमी वर्तमान समय को सबसे कठिन समय बताने लगता है। निराशा के कारण ऐसा होता है। कवयित्री ने आशा को प्रमुखता दी है।

व्याख्या- जदा जादवानी कहती हैं कि हम वर्तमान समय को सबसे कठिन समय समझ बैठे हैं। वास्तविकता ऐसी नहीं है। चिड़िया अभी भी अपनी चोंच में तिनका दबाए हुए है। उसे उड़कर कहीं जाना है और अपना घोंसला बनाना है। वह निराश नहीं है। जो पत्ती झरने वाली है, उसको संभालने के लिए एक हाथ तैयार है। वह हाथ उसे नीचे नहीं गिरने देगा। स्टेशन पर अभी भी पहले की तरह भीड़ है। रेलगाड़ी अभी भी अपनी मंजिल की ओर जाएगी। वहाँ बहुत से अपने लोग होंगे जो इन्तजार कर रहे होंगे।

विशेष-

  • चिड़िया का चोंच में तिनका लेकर उड़ना जीवन के निर्माण का प्रतीक है।
  • ‘थामने को बैठा है हाथ एक’ में लाक्षणिक प्रयोग है।
  • ‘अभी भी’ में ‘भी’ का प्रयोग करके एक निकटतम समय का बोध कराया गया है।

(ख) अभी भी कहता है कोई किसी को
जल्दी आ जाओ कि अब
सूरज डूबने का वक्त हो गया
अभी कहा जाता है
उस कथा का आखिरी हिस्सा
जो बूढ़ी नानी सुना रही सदियों से
दुनिया के तमाम बच्चों को
अभी आती है एक बस
अंतरिक्ष के पार की दुनिया से
लाएगी बचे हुए लोगों की खबर!
नहीं, यह सबसे कठिन समय नहीं।

प्रसंग- उपर्युक्त काव्यांश ‘यह सबसे कठिन समय नहीं’ कविता से उद्धृत है। इसकी कवयित्री जया जादवानी हैं। इन पंक्तियों में जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।

व्याख्या- कवयित्री कहती हैं कि अभी भी ऐसा कोई है जो व्याकुलता से इन्तजार कर रहा है और जल्दी आने का अनुरोध करता है, क्योंकि सूरज डूबने का समय हो गया है। जीवन के प्रति यह जुड़ाव कोई कम नहीं है। अभी उस कथा का आखिरी हिस्सा कहना बाकी है, जिसे बूढ़ी नानी सदियों से सुनाती आ रही है। पहली पीढ़ियों का यह लगाव कोई कम नहीं है कि दुनिया भर के तमाम बच्चे उन कहानियों को सुनते आ रहे हैं। अभी जीवन के कल्पनालोक को पार करके एक बस आएगी जो बचे । हुए लोगों की खबर लेकर भी लाएगी। इसलिए कहा जा सकता है कि हर तरफ जीवन की रोशनी बिखरी हुई है। आशा की किरणें अभी भी जीवन को खुशनुमा बना रही हैं। अतः यह समय जीवन का सबसे कठिन समय नहीं है।

विशेष-

  • ‘सूरज डूबने’ के साथ प्रिय व्यक्तियों के घर लौटने की बात जुड़ जाती है।
  • बूढ़ी नानी की कहानियों में आज भी पहले जैसा निजी स्पर्श है, जिन्हें सुनकर बच्चे बड़े हो रहे हैं।

पहाड़ से ऊँचा आदमी

तीन सौ साठ फीट लम्बा और तीस फीट चौड़ा पहाड़ काटना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन दशरथ मांझी ने यह असम्भव-सा लगने वाला काम कर डाला। बिहार के गया जिले के गेलौर गाँव में एक मजदूर परिवार में इनका जन्म हुआ 1934 में और अंतिम सांस ली 2007 में दिल्ली में।

वर्ष 1966 में इन्होंने यह काम शुरू कर दिया। उस समय 32 वर्ष के युवक थे-दशरथ मांझी। लोग इन पर हँसते। इनकी पत्नी फागुनी देवी बिना इलाज के मर गई थी। बाईस साल बाद इनकी मेहनत रंग लाई। दशरथ के गाँव से सबसे नजदीकी अस्पताल 90 कि.मी. पड़ता था। वहाँ ले जाते समय ही इनकी पत्नी ने दम तोड़ दिया। पहाड़ से कोई रास्ता होता तो अस्पताल जल्दी पहुँचा जा सकता था। इसी धुन ने दशरथ से इतना बड़ा काम करा लिया। यह दुःख में खुद न टूटकर दुःख को तोड़ने जैसा काम था।

पांच छह साल तक इन्होंने अकेले काम किया। धीरे-धीरे लोग इनसे जुड़ते गए। कुछ अनाज देकर मदद करने लगे। गेलौर से वजीरगंज का यह रास्ता 13 किलोमीटर लम्बा रह गया। यह एक मजदूर के प्यार की निशानी है।

एक पत्रकार को कबीरपंथी की तरह घुमक्कड़ जीवन विताने वाले दशरथ ने समुद्र से अण्डे वापस लेने की टिटिहरी की कहानी सुनाई। वह मेहनत करने में ज्यादा विश्वास करते थे। पूजा-पाठ का दिखावा उन्हें उचित नहीं लगता था। आज दशरथ मांझी ऐसे इंसान के रूप में याद किए जाते हैं जो दानवी शक्तियों से लड़ने का इरादा रखते हैं।

उन्होंने एक पत्रकार से कहा था कि पहाड़ उतना ऊँचा कभी नहीं लगा, जितना लोग बताते ।

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यह सबसे कठिन समय नहीं Summary

पाठ का सार

कवयित्री जया जादवानी का कहना है कि वर्तमान समय सबसे कठिन समय नहीं है। हमें निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि अभी भी चिड़िया की चोंच में तिनका दबा हुआ है। झरकर जो पत्ती गिरने वाली है, उसको थामने के लिए अभी भी एक व्यक्ति सजग होकर बैठा है। स्टेशन पर पहले जैसी भीड़ है। एक रेलगाड़ी अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही है। वहाँ बहुत लोग अपने परिचितों के आने का इंतजार कर रहे होंगे। अभी भी कोई इन्तजार करने वाला अपनों को जल्दी आने के लिए कह रहा है। बूढ़ी नानी जिस कहानी को हमेशा से सुनाती आई है, उसका आखिरी हिस्सा अभी सुनाया जाना है। दूर-दराज रहने वाले लोगों की खबर लाने वाली बस अंतरिक्ष को पार करके आने वाली है। इतना होने पर इस समय को सबसे कठिन समय नहीं कहा जा सकता।

शब्दार्थ : झरती हुई-टूटकर गिरती हुई; गन्तव्य-मंजिल; बैठा है हाथ एक-एक व्यक्ति अपना हाथ आगे बढ़ाकर बैठा है; प्रतीक्षा-इन्तजार।

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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 7 क्या निराश हुआ जाए

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क्या निराश हुआ जाए NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 7

Class 8 Hindi Chapter 7 क्या निराश हुआ जाए Textbook Questions and Answers

आपके विचार से

प्रश्न 1.
लेखक ने स्वीकार किया है कि लोगों ने उन्हें भी धोखा दिया है, फिर भी वह निराश नहीं है। आपके विचार से इस बात का क्या कारण हो सकता है ?
उत्तर:
लेखक निराश इसलिए नहीं है कि लोगों ने धोखा दिया है, फिर भी ऐसी घटनाएँ बहुत हैं जब लोगों ने अकारण सहायता की है। समय पड़ने पर ढाँढ़स भी बँधाया है।

प्रश्न 2.
समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और टेलीविजन पर आपने ऐसी अनेक घटनाएँ देखी-सुनी होंगी जिनमें लोगों ने बिना किसी लालच के दूसरों की सहायता की हो या ईमानदारी से काम किया हो। ऐसे समाचार तथा लेख एकत्रित करें और कम-से-कम दो घटनाओं पर अपनी टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
(i) पास के गाँव में जाने वाला मेहमान एक किसान के पास बैठकर पानी पीने लगा। इसके बाद बहुत देर तक बतियाता रहा। चलते समय उसका एक थैला वहीं घट थैला रुपयों से भरा हुआ था। किसान थैला लेकर उसी गाँव की ओर दौड़ा। गाँव के पास वह मेहमान मिल गया। किसान ने उसका रुपयों से भरा थैला लौटा दिया।

(ii) ट्रेन रात में बैरकपुर पहुँचती थी। मुसाफिर इस शहर के लिए अनजान था। उसकी बर्थ के पास दूसरे मुसाफिर ने उसकी परेशानी जानकर अपने मित्र का पता दे दिया। पहला मुसाफिर जब वहाँ पहुँचा तो उसका मित्र कहीं बाहर गया हुआ था। परिवार वालों ने उसको अपने पास ठहरा लिया और अगले दिन सुबह उसे उसके नए दफ्तर में लेकर गए।

प्रश्न 3.
लेखक ने अपने जीवन की दो घटनाओं में रेलवे टिकट बाबू और बस कंडक्टर की अच्छाई और ईमानदारी की बात बताई है। आप भी अपने या अपने किसी परिचित के साथ हुई किसी घटना के बारे में बताइए जिसमें किसी ने बिना किसी स्वार्थ के भलाई, ईमानदारी और अच्छाई के कार्य किए हों।
उत्तर:
दफ्तर में श्री शिवशंकर शर्मा बहुत लड़ाकू प्रवृत्ति के आदमी थे। इनकी साथियों से बिल्कुल नहीं बनती थी। ये अपने साथियों की फर्जी शिकायतें विभाग के अधिकारियों को भेजते रहते थे। श्री रामकुमार इनके सबसे बड़े विरोधी थे। शर्मा जी इनको हर तरह से बदनाम करने की साजिश रचते रहते थे। अचानक शर्मा जी को दिल का दौरा पड़ गया। इन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना था। शर्मा जी का बेटा दूर केरल में नौकरी करता था। वह तुरंत नहीं आ सकता था। रामकुमार इन्हें तुरंत अस्पताल ले गए। इलाज के लिए बैंक से अपना पैसा निकालकर दवाई के लिए दे दिया। जब उतने पैसे से काम नहीं चला तो अपने मित्रों से उधार लेकर इनके इलाज में खर्च किया। शर्मा जी ने रामकुमार का यह पैसा अपनी सुविधा से लौटाया। रामकुमार को इससे दिक्कत भी हुई, फिर भी वे कहते थे–“उस समय मैंने जो किया, वही करना उचित था।”

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पर्दाफाश

प्रश्न 1.
दोषों का पर्दाफाश करना कब बुरा रूप ले सकता है ?
उत्तर:
दोषों का पर्दाफाश करना तब बुरा रूप ले सकता है जब गलत पक्ष को बताने के लिए उसमें रस लिया जाता है और दोष बताना ही एकमात्र कर्त्तव्य हो जाता है।

प्रश्न 2.
आजकल के बहुत से समाचार-पत्र या समाचार चैनल ‘दोषों का पर्दाफाश कर रहे हैं। इस प्रकार समाचारों और कार्यक्रमों की सार्थकता पर तर्क सहित विचार लिखिए ?
उत्तर:
बहुत से समाचार-पत्र या समाचार चैनल ‘दोषों का पर्दाफाश कर रहे हैं। दोषों के प्रति जन-जागृति के लिए यह जरूरी है। इसका दोषपूर्ण पहलू यह है कि लगातार प्रसारण से दोषियों को ‘नायक’ का रूप मिलने लगता है। महसूस होने लगता है कि पूरा समाज भ्रष्ट हो गया है। असुरक्षा का भाव बढ़ता जा रहा है। समाचार-पत्र और समाचार चैनल अच्छी बातों को जोर-शोर से प्रस्तुत नहीं करते हैं।

कारण बताइए-

प्रश्न 1.
निम्नलिखित के संभावित परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं ? आपस में चर्चा कीजिए, जैसे-“ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है।” परिणाम-भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
1. “सच्चाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है।”
2. “झूठ और फरेब का रोज़गार करने वाले फल-फूल रहे हैं।”
3. “हर आदमी दोषी अधिक दिख रहा है, गुणी कम।”
उत्तर:
(i) परिणाम-झूठ का रास्ता अपनाने वाले लोग फलेंगे-फूलेंगे।
(ii) परिणाम-सही रास्ते पर चलने वाले लोग कमज़ोर होते जाएँगे।
(iii) परिणाम-दोषी लोगों का बहुमत हो जाएगा और सही काम करने वाले लोग अलग-थलग पड़ जाएँगे।

दो लेखक और बस यात्रा

प्रश्न 1.
आपने इस लेख में एक बस की यात्रा के बारे में पढ़ा। इससे पहले भी आप एक बस यात्रा के बारे में पढ़ चुके हैं। यदि दोनों बस यात्राओं के लेखक आपस में मिलते तो एक-दूसरे को कौन-कौन सी सही बातें बताते? अपनी कल्पना से उनकी बातचीत लिखिए।
उत्तर:
पहली बस यात्रा का लेखक-हमारी बस तो बूढ़ी हो चुकी, बेदम हो चुकी, इसलिए रुक गई है; पर आपकी बस तो नई लग रही है, फिर भी बीच सड़क पर रुक गई है।

दूसरी बस यात्रा का लेखक- मुझे लगता है-बस अचानक खराब हो गई है, लेकिन सवारियाँ डरी हुई हैं कि कहीं उन्हें कोई लूट न ले।

पहली बस यात्रा का लेखक- हमारा ड्राइवर तो नली से इंजन को पेट्रोल पिलाकर चला रहा था। यह शीशी से अपने बच्चों को भी इसी तरह दूध पिलाता होगा।

दूसरी बस यात्रा का लेखक- खैर! हमारी बस इतनी गई-बीती तो नहीं है। कंडक्टर डिपो तक गया है। शायद ठीक वाली बस लेता आए। हमारे बच्चों के लिए दूध और पानी भी लाने के लिए कहकर गया है।

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सार्थक शीर्षक

प्रश्न 1.
लेखक ने लेख का शीर्षक ‘क्या निराश हुआ जाए’ क्यों रखा होगा ? क्या आप इससे भी बेहतर शीर्षक सुझा सकते हैं ?
उत्तर:
लेखक ने ‘क्या निराश हुआ जाए’ शीर्षक के प्रश्न के रूप में रखा है। इस प्रश्न का उत्तर यही हो सकता है कि निराश होने से जीवन चलने वाला नहीं। यही सोचकर यह शीर्षक रखा गया है। इसका दूसरा बेहतर शीर्षक हो सकता है-‘नर हो न निराश करो मन को।’

प्रश्न 2.
यदि ‘क्या निराश हुआ जाए’ के बाद कोई विराम चिह्न लगाने के लिए कहा जाए तो आप दिए गए चिह्नों में से कौन-सा चिह्न लगाएँगे ? अपने चुनाव का कारण भी बताइए।
-, ।!, ?, -, …………..
“आदर्शों की बातें करना तो बहुत आसान है, पर उन पर चलना बहुत कठिन है।” क्या आप इस बात से सहमत हैं ? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:
हम प्रश्नवाचक चिह्न (?) लगाएँगे।
लेखक ने प्रश्नवाचक चिह्न वाक्य का प्रयोग सकारात्मक विचार प्रस्तुत करने के लिए लिखा है जिसका वास्तविक अर्थ है कि हमें निराश नहीं होना चाहिए।

हम इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि आदर्शों की बातें करना तो बहुत आसान है, पर उन पर चलना बहुत कठिन है। जो आदर्शों पर चलता है, अधिकतर लोग उसका विरोध करते हैं और उसको नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं। जो केवल आदर्शों की बात करते हैं, दूसरों को उन पर चलने की प्रेरणा देते हैं, वे भी ऐन मौके पर पीछे हट जाते हैं। इन तमाम परेशानियों के बावजूद हमें सही रास्ते पर ही चलना चाहिए।

सपनों का भारत

“हमारे महान मनीषियों के सपनों का भारत है और रहेगा।”

प्रश्न 1.
आपके विचार से हमारे महान विद्वानों ने किस तरह के भारत के सपने देखे थे ? लिखिए।
उत्तर:
हमारे महान विद्वानों ने उस भारत के सपने देखे थे जिसमें सच्चाई, त्याग, धर्म, परहित, संयम आदि गुणों को आचरण बनाने वाले लोग हों। लोग मेहनत करें। किसी का शोषण न करें। ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय न समझें। धर्मभीरु लोग कानून की कमियों का फायदा न उठाएँ। दरिद्रजनों के सारे अभाव दूर हो जाएँ।

प्रश्न 2.
आपके सपनों का भारत कैसा होना चाहिए ? लिखिए।
उत्तर:
मेरे सपनों के भारत में बेईमान, कामचोर, राष्ट्रद्रोही एवं भ्रष्ट लोगों का कोई स्थान नहीं है। गरीबों का खून चूस कर जेबें भरने वालों के लिए, राष्ट्रीय सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के लिए एकमात्र जेल ही ठिकाना होना चाहिए। भ्रष्ट, घूसखोर, अपराधी लोग संसद में न पहुँचें। अधिकारी और नेता केवल जनहित की ही बात सोचेंगे। जिन लोगों ने देश का पैसा विदेशी बैंकों में चोरी छुपे जमा कराया है, उस पैसे को देश में लाकर कल्याण-कार्यों में खर्च किया जाएगा। जाति-बिरादरी और क्षेत्रवाद को बढ़ाने वाले नेताओं को सत्ता में नहीं आने दिया जाएगा।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
दो शब्दों के मिलने से समास बनता है। समास का एक प्रकार है-द्वंद्व समास । इसमें दोनों शब्द प्रधान होते हैं। जब दोनों भाग प्रधान होंगे तो एक-दूसरे में द्वंद्व (स्पर्धा, होड़) की संभावना होती है। कोई किसी से पीछे रहना नहीं चाहता, जैसे-चरम और परम = चरम-परम । भीरु और बेबस = भीरु-बेबस। दिन और रात = दिन-रात।
‘और’ के साथ आए शब्दों के जोड़े को ‘और’ हटाकर (-) योजक चिह्न भी लगाया जाता है। कभी-कभी एक साथ भी लिखा जाता है। द्वंद्व समास के बारह उदाहरण ढूँढकर लिखिए।
उत्तर:
(i) द्वंद्व समास के उदाहरण-
भाग और दौड़ = भाग-दौड़
घर और द्वार = घर-द्वार
ऊँच और नीच = ऊँच-नीच
छोटा और बड़ा = छोटा-बड़ा
भाई और बहिन = भाई-बहिन
नर और नारी = नर-नारी
खरा या खोटा = खरा-खोटा
सुख और दुख = सुख-दुख
भूखा और प्यासा = भूखा-प्यासा
आकाश और पाताल = आकाश-पाताल
देश और दुनिया = देश-दुनिया
पाप और पुण्य = पाप-पुण्य

प्रश्न 2.
पाठ से तीनों प्रकार की संज्ञाओं के उदाहरण खोजकर लिखिए।
उत्तर:
व्यक्तिवाचक संज्ञा- तिलक, गाँधी, मदन मोहन मालवीय, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, भारतवर्ष ।

जातिवाचक संज्ञा- समाचार-पत्र, आदमी, व्यक्ति, श्रमजीवी, मनुष्य, दरिद्रजन, कानून, टिकट, स्टेशन, नोट, डिब्बे, बस, डाकुओं, ड्राइवर, कंडक्टर, पानी, दूध।।

भाववाचक संज्ञा- विश्वासघात, धोखा, ढाँढ़स, हिम्मत, शक्ति, आशा, संभावना, मनुष्यता, माफी, धन्यवाद, दुर्घटना, बुराई, अच्छाई, विनम्रता, गलती, संतोष, गरिमा, ईमानदारी, वंचना, घटनाएँ, लोभ, मोह, काम, क्रोध, संयम, आध्यात्मिकता, आक्रोश, भ्रष्टाचार, मूर्खता, फरेब, आस्था, चिन्ता, चोरी, डकैती, तस्करी, ठगी, संग्रह।

NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 7 क्या निराश हुआ जाए

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दरिद्रजनों की हीन अवस्था को दूर क्यों नहीं किया जा सकता ?
उत्तर:
जिन लोगों को दरिद्रजनों की हीन अवस्था को दूर करने के लिए लगाया गया था, उनका मन हर समय पवित्र नहीं होता। वे लोग अपनी सुख-सुविधा को ज्यादा महत्त्व देते हैं और अपना असली लक्ष्य भूल जाते हैं। इसी कारण से दरिद्रों की दशा में सुधार नहीं हो पाता।

प्रश्न 2.
भीतर-भीतर भारतवर्ष अब भी क्या अनुभव कर रहा है ?
उत्तर:
भीतर-भीतर भारतवर्प अब भी अनुभव कर रहा है कि धर्म कानून से बड़ी चीज है। अब भी सेवा, ईमानदारी और सच्चाई मूल्यों के रूप में मौजूद है।

प्रश्न 3.
हम किन तत्त्वों की प्रतिष्ठा कम करना चाहते हैं ?
उत्तर:
समाज में जो चरम-परम गलत तरीकों से धन या मान पाना चाहते हैं, हम आज भी उनकी प्रतिष्ठा कम करना चाहते हैं।

प्रश्न 4.
अवांछित घटनाएँ होने पर भी लेखक का क्या विश्वास है ?
उत्तर:
अवांछित घटनाएँ होने पर भी लेखक का विश्वास है कि ईमानदारी और सच्चाई लुप्त नहीं हुई है।

प्रश्न 5.
कुछ नौजवानों ने ड्राइवर को पीटने का हिसाब क्यों बनाया था ?
उत्तर:
बस खराब होने पर कंडक्टर उतर गया और एक साइकिल लेकर चलता बना। लोगों को संदेह हो गया कि उन्हें धोखा दिया जा रहा। इसी कारण से कुछ नौजवानों ने ड्राइवर को पीटने का हिसाब बनाया।

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इन्होंने भारतवर्ष का सपना नहीं देखा था-
(क) तिलक
(ख) गाँधी
(ग) मुहम्मद अली जिन्ना
(घ) रवीन्द्रनाथ टैगोर
उत्तर:
(ग) मुहम्मद अली जिन्ना

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में इन्हें जीवन मूल्य नहीं माना जाता-
(क) लोभ
(ख) ईमानदारी
(ग) सेवा
(घ) आध्यात्मिकता
उत्तर:
(क) लोभ

प्रश्न 3.
बस का कंडक्टर लेकर आया-
(क) रोटी
(ख) फल
(ग) दूध
(घ) दाल
उत्तर:
(ग) दूध

प्रश्न 4.
बस गन्तव्य से कितने किलोमीटर पर खराब हो गई?
(क) पाँच
(ख) आठ
(ग) तीन
(घ) दस
उत्तर:
(ख) आठ

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बोध-प्रश्न

निम्नलिखित अवतरणों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(क) मेरा मन कभी-कभी बैठ जाता है। समाचार-पत्रों में ठगी, डकैती, चोरी, तस्करी और भ्रष्टाचार के समाचार भरे रहते हैं। आरोप-प्रत्यारोप का कुछ ऐसा वातावरण बन गया है कि लगता है, देश में कोई ईमानदार आदमी ही नहीं रह गया है। हर व्यक्ति संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है। जो जितने ही ऊँचे पद पर हैं उनमें उतने ही अधिक दोष दिखाए जाते हैं।

प्रश्न 1.
समाचार-पत्रों में किस प्रकार के समाचार ज्यादातर रहते हैं ?
उत्तर:
समाचार-पत्रों में ठगी, डकैती, चौरी, तस्करी और भ्रष्टाचार के समाचार ज्यादातर रहते हैं।

प्रश्न 2.
आरोप-प्रत्यारोप से क्या लगता है ?
उत्तर:
आरोप-प्रत्यारोप से लगता है जैसे इस देश में कोई ईमानदार आदमी नहीं रह गया है।

प्रश्न 3.
क्या ऐसा सोचना ठीक है ?
उत्तर:
नहीं, ऐसा सोचना ठीक नहीं है।

प्रश्न 4.
ऊँचे पद पर बैठे व्यक्तियों के बारे में लोग क्या सोचते हैं ?
उत्तर:
जो व्यक्ति जितने ऊँचे पद पर बैठा है, उसमें उतनी ही ज्यादा कमियाँ नजर आ रही हैं। स्थिति यह है कि हर व्यक्ति को संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।

प्रश्न 5.
क्या हर व्यक्ति को संदेह की दृष्टि से देखा जाना चाहिए ? कारण सहित बताइए।
उत्तर:
नहीं, हर व्यक्ति को संदेह की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। स्थितियाँ इतनी बदतर नहीं हुई हैं कि कोई ईमानदार ही न बचा हो। अभी भी ईमानदारी जिन्दा है।

(ख) यह सही है कि इन दिनों कुछ ऐसा माहौल बना है कि ईमानदारी से मेहनत करके जीविका चलाने वाले निरीह और भोले-भाले श्रमजीवी पिस रहे हैं और झूठ तथा फरेब का रोजगार करने वाले फल-फूल रहे हैं। ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है, सच्चाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है। ऐसी स्थिति में जीवन के महान मूल्यों के बारे में लोगों की आस्था ही हिलने लगी है।

प्रश्न 1.
इन दिनों किस प्रकार का माहौल बन गया है ?
उत्तर:
इन दिनों कुछ ऐसा माहौल बन गया है कि ईमानदारी से रोटी-रोज़ी कमाने वाले भोले-भाले मजदूर पिस रहे हैं। छल-कपट का सहारा लेने वाले फल-फूल रहे हैं।

प्रश्न 2.
मूर्खता का पर्याय किसे मान लिया गया है ?
उत्तर:
ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय मान लिया गया है।

प्रश्न 3.
सच्चाई अब कैसे लोगों के हिस्से में आ गई है ?
उत्तर:
जो लोग डरते हैं, मजबूर हैं, उन्हीं के हिस्से में सच्चाई आ गई।

प्रश्न 4.
जीवन-मूल्यों के प्रति क्या दृष्टिकोण पनपने लगा है ?
उत्तर:
जीवन-मूल्यों के बारे में लोगों की आस्था डगमगाने लगी है।

प्रश्न 5.
ईमानदारी से मेहनत करने वाले क्यों पिस रहे हैं ? अपना विचार लिखिए।
उत्तर:
झूठ और फरेव का रोजगार करने वालों के कारण ईमानदारी से मेहनत करने वाले पिस रहे हैं।

(ग) भारतवर्ष ने कभी भी भौतिक वस्तुओं के संग्रह को बहुत अधिक महत्त्व नहीं दिया है, उसकी दृष्टि से मनुष्य के भीतर जो महान आंतरिक गुण स्थिर भाव से बैठा हुआ है, वही चरम और परम है। लोभ-मोह, काम-क्रोध आदि विचार मनुष्य में स्वाभाविक रूप से विद्यमान रहते हैं, पर उन्हें प्रधान शक्ति मान लेना और अपने मन तथा बुद्धि को उन्हीं के इशारे पर छोड़ देना बहुत बुरा आचरण है। भारतवर्ष ने कभी भी उन्हें उचित नहीं माना, उन्हें सदा संयम के बंधन से बाँधकर रखने का प्रयत्न किया है। परंतु भूख की उपेक्षा नहीं की जा सकती, बीमार के लिए दवा की उपेक्षा नहीं की जा सकती, गुमराह को ठीक रास्ते पर ले जाने के उपायों की उपेक्षा नहीं की जा सकती।

प्रश्न 1.
भारत ने किस प्रकार के संग्रह को अधिक महत्त्व नहीं दिया ?
उत्तर:
भारतवर्ष में भौतिक वस्तुओं के संग्रह को बहुत अधिक महत्त्व नहीं दिया गया है।

प्रश्न 2.
भारत ने चरम और परम किसे माना है ?
उत्तर:
भारत ने मनुष्य के भीतर जो महान गुण स्थिर भाव से मौजूद हैं, उन्हें ही चरम और परम माना है।

प्रश्न 3.
मनुष्य में स्वाभाविक रूप से कौन-कौन से विचार मौजूद रहते हैं ?
उत्तर:
लोभ-मोह, काम-क्रोध आदि विचार मनुष्य में स्वभाव से मौजूद रहते हैं।

प्रश्न 4.
लेखक ने बुरा आचरण किसे कहा है ?
उत्तर:
लोभ-मोह, काम-क्रोध को ही प्रमुख ताकत मान लेना तथा अपने मन और बुद्धि को उन्हीं के इशारे पर काम करने देना बुरा आचरण है।

प्रश्न 5.
स्वाभाविक विचारों को किस रूप में रखा गया ?
उत्तर:
स्वाभाविक विचारों को सदा संयम में बाँधकर रखा गया है।

प्रश्न 6.
समाज में किन-किन बातों की उपेक्षा नहीं की जा सकती ?
उत्तर:
समाज में भूख, बीमारी और गुमराह व्यक्तियों की उपेक्षा नहीं की जा सकती। भूख का उपाय-भोजन, बीमारी का उपाय-दवाई और गुमराह का उपाय-सही रास्ता दिखाना है।

प्रश्न 7.
आपकी दृष्टि से क्या उचित है ?
उत्तर:
हमारे विचार से जीवन में संयम उचित है। संयम के द्वारा ही हम अपनी कमजोरियों पर काबू पा सकते हैं। भूख और बीमारी को दूर करना पड़ेगा। गुमराहों को सही दिशा का ज्ञान भी कराना पड़ेगा।

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(घ) भारतवर्ष सदा कानून को धर्म के रूप में देखता आ रहा है। आज एकाएक कानून और धर्म में अंतर कर दिया गया है। धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता, कानून को दिया जा सकता है। यही कारण है कि लोग धर्मभीरु हैं, वे कानून की त्रुटियों से लाभ उठाने में संकोच नहीं करते।

प्रश्न 1.
भारतवर्ष कानून को किस रूप में देखता आ रहा है ?
उत्तर:
भारतवर्ष सदा से कानून को धर्म के रूप में देखता आ रहा है। कानून का पालन करना धर्म के दायरे में रहा है।

प्रश्न 2.
आज एकाएक कानून और धर्म में क्या अंतर कर दिया गया है ?
उत्तर:
आज एकाएक कानून और धर्म में यह अन्तर कर दिया गया कि धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता। कानून को धोखा दिया जा सकता है।

प्रश्न 3.
धर्मभीरु लोग किस तरह का आचरण करने लगे हैं ?
उत्तर:
धर्मभीरु लोग कानून की कमियों का लाभ उठाने लगे हैं। उन्हें कानूनन गलत काम करने में तनिक भी झिझक नहीं होती।

(ङ) दोषों का पर्दाफाश करना बुरी बात नहीं है। बुराई यह मालूम होती है कि किसी के आचरण के गलत पक्ष को उद्घाटित करके उसमें रस लिया जाता है और दोषोद्घाटन को एकमात्र कर्त्तव्य मान लिया जाता है। बुराई में रस लेना बुरी बात है, अच्छाई में उतना ही रस लेकर उजागर न करना और भी बुरी बात है। सैकड़ों घटनाएँ ऐसी घटती हैं कि जिन्हें उजागर करने से लोक-चित्त में अच्छाई के प्रति अच्छी भावना जगती है।

प्रश्न 1.
दोषों का पर्दाफाश करना कब बुरी बात बन जाता है ?
उत्तर:
जब पर्दाफाश करना ही एकमात्र काम मान लिया जाता है और गलत पक्ष को प्रकट करके उसमें रस लिया जाता है, तब यह कार्य बुरा बन जाता है।

प्रश्न 2.
अच्छाई के संदर्भ में किस आदत को बुरा कहा गया है ?
उत्तर:
अच्छाई को उजागर न करना, उसमें रस न लेना बुरा है। उजागर न करने से अच्छाई का प्रचार नहीं हो सकेगा, जबकि अच्छाई को उजागर करना लोकचित्त के लिए हितकर है।

प्रश्न 3.
अच्छी बातें क्यों उजागर करनी चाहिए ?
उत्तर:
अच्छाई को उजागर करने से लोगों का ध्यान अच्छी बातों की ओर जाएगा। समाज में अच्छी सोच विकसित होगी।

प्रश्न 4.
अच्छी और बुरी बातों के बारे में आपका क्या सोचना है ? छह वाक्यों में लिखिए।
उत्तर:
बुराई से बचने के लिए ‘बुरा क्या है ?’ इसकी जानकारी होना जरूरी है। लगातार बुराई का प्रचार करना समाज के लिए घातक है। लोग उसे अपनाना शुरू कर देते हैं। संचार माध्यम बुरी घटनाओं को लगातार दिखाकर यह गलती कर रहे हैं। समाज में जो अच्छा है, उसे बार-बार दिखाना चाहिए ताकि लोगों का सकारात्मक दृष्टिकोण बने। लोग अच्छे काम करने के लिए कमर कसकर तैयार हो जाएँ।

(च) ठगा भी गया हूँ, धोखा भी खाया है, परंतु बहुत कम स्थलों पर विश्वासघात नाम की चीज मिलती है। केवल उन्हीं बातों का हिसाब रखो, जिनमें धोखा खाया है तो जीवन कष्टकर हो जाएगा, परंतु ऐसी घटनाएँ भी बहुत कम नहीं हैं जब लोगों ने अकारण सहायता की है, निराश मन को ढाँढ़स दिया है और हिम्मत बँधाई है। कविवर रवींद्रनाथ ठाकुर ने अपने प्रार्थना गीत में भगवान से प्रार्थना की थी कि संसार में केवल नुकसान ही उठाना पड़े, धोखा ही खाना पड़े तो ऐसे अवसरों पर भी हे प्रभो! मुझे ऐसी शक्ति दो कि मैं तुम्हारे ऊपर संदेह न करूँ।

प्रश्न 1.
ठगे जाने और धोखा खाने पर भी क्या बहुत कम मिला है ?
उत्तर:
ठगे जाने और धोखा खाने पर भी बहुत कम स्थलों पर विश्वासघात मिला है।

प्रश्न 2.
जीवन कब कष्टकर हो जाता है ?
उत्तर:
यदि केवल उन्हीं बातों का हिसाब रखा जाए, जिनमें धोखा खाया था तो जीवन कष्टकर हो जाता है।

प्रश्न 3.
किस प्रकार की घटनाएँ पर्याप्त हुई हैं ?
उत्तर:
अकारण सहायता करने की और निराश मन को ढाँढ़स देने की घटनाएँ पर्याप्त हुई हैं।

प्रश्न 4.
कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने अपने प्रार्थना गीत में कैसी शक्ति मांगी है ?
उत्तर:
कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने अपने प्रार्थना-गीत में भगवान के ऊपर संदेह न करने की शक्ति माँगी है।

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(छ) मनुष्य की बनाई विधियाँ गलत नतीजे तक पहुंच रही हैं तो इन्हें बदलना होगा। वस्तुतः आए दिन इन्हें बदला ही जा रहा है, लेकिन अब भी आशा की ज्योति बुझी नहीं है। महान भारतवर्ष को पाने की संभावना बनी हुई है, बनी रहेगी।

प्रश्न 1.
मनुष्य की बनाई विधियों के परिणाम गलत हों तो क्या करना चाहिए ?
उत्तर:
मनुष्य की बनाई विधियाँ गलत हों तो उन्हें बदल देना चाहिए।

प्रश्न 2.
आए दिन क्या किया जा रहा है ?
उत्तर:
आए दिन सफल न होने वाली विधियाँ बदली जा रही हैं।

प्रश्न 3.
अभी भी क्या आशा बनी हुई है ?
उत्तर:
अभी भी आशा बनी हुई है कि हम महान भारतवर्ष को फिर से प्राप्त कर लेंगे। पुराना गौरव लौट आएगा।

क्या निराश हुआ जाए Summary

पाठ का सार

हमारे समाज में बहुत-सी बुराइयाँ आ गई हैं, जिनके कारण चारित्रिक मूल्यों में गिरावट आ गई है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि सब कुछ खत्म हो गया और समाज में अच्छाई नहीं बची है। हर व्यक्ति को सन्देह की दृष्टि से देखा जा रहा है। दोष खोजने वाले दोषों को ही बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने में लगे हैं। इससे लगता है कि गुणी व्यक्ति कम हो गए हैं। यह स्थिति परेशान करने वाली है।

कभी संदेह होता है कि क्या यह वही भारत है, जिसका सपना तिलक और गांधी ने देखा था ? क्या आदर्शों का महासमुद्र भारत सूख गया ? वस्तुतः ऐसा सोचना सही नहीं है। यह सही है कि काम करके गुजारा करने वाला ईमानदार व्यक्ति आज परेशान है। मजदूर पिस रहे हैं। धोखे-बाज फल फूल रहे हैं। ईमानदार को लोग मूर्ख समझने लगे हैं। सच्चाई केवल डरपोक लोगों के हिस्से रह गई है।

भारत में संग्रह को महत्त्व नहीं दिया गया है। आंतरिक गुण को ही उत्तम माना गया है। लोभ-मोह आदि विचार हर आदमी में होते हैं, लेकिन इन्हें प्रधान गुण नहीं मान सकते। भारत में संयम को महत्त्व दिया गया। यह सब होने पर भूख या बीमारी की उपेक्षा नहीं की जा सकती। गुमराह को सही रास्ते पर लाना ही होगा। गरीबों का जीवन सुधारने के लिए जो कानून बनाए गए हैं, उनको लागू करने वाले लोग सच्चे मन से इस काम को नहीं कर रहे हैं। लोग कानून की कमजोरियों का लाभ उठाने में पीछे नहीं रहना चाहते चाहे वे धर्मभीरु ही हों।

ऊपरी वर्ग में चाहे जो हो रहा हो, भीतर-भीतर अब भी धर्म कानून से बड़ी चीज है। सेवा, ईमानदारी, सच्चाई कुछ दब जरूर गए हैं, पर नष्ट नहीं हुए हैं। झूठ-चोरी आज भी गलत माने जाते हैं। अखबारों में भ्रष्टाचार के प्रति आक्रोश का यही कारण है कि हम गलत आचरण को रोकना चाहते हैं। दोषों को सामने लाना अच्छी बात है; परंतु उतना ही जरूरी है अच्छी बातों को भी सामने लाना। अच्छाई को छुपाना और भी बुरा है।

लेखक ने रेलवे स्टेशन पर टिकट लेते हुए दस के बदले सौ का नोट दे दिया, जो टिकट देने वाले ने उनको वापस किया। बस खराब हो जाने पर जब एक बार ड्राइवर को पीटने पर भीड़ उतारु थी, लेखक ने उसे बचाया। तभी बस का कंडक्टर दुसरी ठीक बस लेकर आया, साथ ही लेखक के बच्चों के लिए दूध और पानी भी लेकर आया। इससे पता चलता है कि इंसानियत खत्म नहीं हुई है। धोखा-ठगी का भी सामना करना पड़ता है। पर हम निराश हो जाएं कि अच्छी बातें नहीं बचीं सही नहीं है। जीवन में अच्छा भी बहुत है और वह खत्म नहीं हुआ है।

शब्दार्थ : तस्करी-चोरी से लाया माल; आरोप-लांछन; प्रत्यारोप-आरोप के बदले आरोप; गह्वर-गड्ढा; मनीषी-विद्वान; माहौल-वातावरण; जीविका-रोटी-रोजी; निरीह-इच्छा से रहित, नम्र व शांत; श्रमजीवी-मजदूर; फ़रेब-धोखा; पर्याय–समान अर्थ वाला; भीरु-डरपोक; आंतरिक-भीतरी; विद्यमान-मौजूद; आचरण-चाल-चलन; संयम-नियंत्रण; गुमराह-भटका हुआ; दरिद्रजन-गरीब लोग; धर्मभीरु-अधर्म से डरने वाला; प्रमाण-सुबूत; आध्यात्मिकता-मन से संबंध रखने वाला; व्यक्तिगत-निजी; आक्रोश-विरोध, गुस्सा, चिल्लाहट; प्रतिष्ठा-इज्जत; पर्दाफाश-दोष प्रकट करना; दोषोद्घाटन-दोष प्रकट करना; उजागर-प्रकट करना; लुप्त-गायब; अवांछित-गलत, जिसकी चाह न हो; वंचना-धोखा; निर्जन-सुनसान; कातर-भयभीत, बेचैन; चेहरे पर हवाइयाँ उड़ना;-घबराना विश्वासघात-विश्वास तोड़ना; कष्टकर-कष्ट देने वाला; अकारण-बिना कारण के; गंतव्य-स्थान जहाँ किसी को जाना हो; ढाँढस-धीरज, दिलासा।

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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 6 भगवान के डाकिये

These NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 6 भगवान के डाकिये Questions and Answers are prepared by our highly skilled subject experts.

भगवान के डाकिये NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 6

Class 8 Hindi Chapter 6 भगवान के डाकिये Textbook Questions and Answers

कविता से

प्रश्न 1.
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए क्यों बताया है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कवि ने पक्षी और बादल को डाकिए इसलिए कहा है, क्योंकि ये भगवान का संदेश हमें और पूरी प्रकृति को भेजते हैं।

प्रश्न 2.
पक्षी और बादल द्वारा लाई गई चिट्ठियों को कौन-कौन पढ़ पाते हैं ? सोचकर लिखिए।
उत्तर:
पक्षी और बादल द्वारा लाई गई चिट्ठियों को पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ पढ़ पाते हैं।

प्रश्न 3. किन पंक्तियों का भाव है-
(क) पक्षी और बादल प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश एक देश से दूसरे देश को भेजते हैं।
(ख) प्रकृति देश-देश में भेदभाव नहीं करती। एक देश से उठा बादल दूसरे देश में बरस जाता है।
उत्तर:
(क) पक्षी और बादल
ये भगवान के डाकिए हैं,
जो एक महादेश से
दूसरे महादेश को जाते हैं।

(ख) और एक देश का भाप
दूसरे देश में पानी
बनकर गिराता है।

प्रश्न 4.
पक्षी और बादल की चिट्ठियों में पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ क्या पढ़ पाते हैं ?
उत्तर:
पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ भगवान का भेजा संदेश पक्षी और बादल द्वारा लाई गई चिट्ठियों में पढ़ पाते हैं। इन सबका जुड़ाव पक्षी और बादल के माध्यम से भगवान तक हो जाता है।

प्रश्न 5.
“एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है।” कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
“एक देश का सद्भाव, एक देश की सकारात्मक सोच, प्यार की सुगन्ध, दूसरे देश तक पहुँच जाती है।” यही इस कथन का आशय है।

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पाठ से आगे

प्रश्न 1.
पक्षी और बादल की चिट्ठियों के आदान-प्रदान को आप किस दृष्टि से देख सकते हैं ?
उत्तर:
पक्षी और बादल की चिट्ठियों के आदान-प्रदान को हम आपसी समझ, आत्मीयता एवं भ्रातृत्व-भाव के रूप में देख सकते हैं।

प्रश्न 2.
आज विश्व में कहीं भी संवाद भेजने और पाने का एक बड़ा साधन इंटरनेट है। पक्षी और बादल की चिट्ठियों की तुलना इंटरनेट से करते हुए दस पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर:
पक्षी और बादल की चिट्ठियाँ प्रकृति से जुड़ी हैं। इन चिट्ठियों को सिर्फ पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ ही समझ सकते हैं। ये चिट्ठियाँ आम आदमी की समझ में नहीं आ सकती हैं। इंटरनेट चिट्ठियाँ भेजने का नवीनतम साधन है। इसके द्वारा पलक झपकते ही हमारा संदेश हजारों मील दूर चला जाता है। इस माध्यम से खर्च भी बहुत कम आता है। हमारे चित्र, हमारी आवाज और हमारी गतिविधियाँ, क्रियाकलाप सात समुन्दर पार जा सकते हैं। ये भेजे गए संदेश हमारे पास भी सुरक्षित रहते हैं। हम अपने भेजे गए संदेश को दुबारा देख भी सकते हैं। सैकड़ों पृष्ठों का जरूरी दस्तावेज पलभर में दूर देश को भेजा जा सकता है।

प्रश्न 3.
हमारे जीवन में डाकिए की भूमिका पर दस वाक्य लिखिए।
उत्तर:
हमारे जीवन में डाकिए का सर्वाधिक महत्त्व है। हमारे जरूरी दस्तावेज, पत्रिकाएँ, पार्सल डाकिया ही लेकर आता है। जिन लोगों के परिजन दूर शहरों में नौकरी करते हैं, वे अपने घरों को मनीऑर्डर द्वारा पैसा भेजते हैं; जो उनके लिए बहुत बड़ा सहारा है। इसे बहुत कम वेतन मिलता है। इसे गाँवों, जंगलों और दूर-दराज के पहाड़ी क्षेत्रों में भी जाना पड़ता है। डाकिए के साथ सभी का आपसी जुड़ाव है। शहरों में भी इसकी भागदौड़ कम नहीं है। इसे लोगों की जरूरी डाक कई-कई मंजिल चढ़कर देनी होती है। भयंकर गर्मी, कड़ाके की सर्दी एवं बरसात में भी यह निरंतर अपने काम को पूरा करता रहता है। कम्प्यूटर एवं ई-मेल का युग आने पर भी डाकिए का महत्त्व कम नहीं हुआ है।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
डाकिया, इंटरनेट के वर्ल्ड वाइड वेब (डब्ल्यू. डब्ल्यू. डब्ल्यू. WWW.) तथा पक्षी और बादल-इन तीनों संवादवाहकों के विषय में अपनी कल्पना से एक लेख तैयार कीजिए। “चिट्ठियों की अनूठी दुनिया” पाठ का सहयोग ले सकते हैं।
उत्तर:
इनके विषय में पर्याप्त जानकारी दी जा चुकी है। उसी के समावेश से छात्र लेख तैयार करें।

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
www का अर्थ है-
(क) वर्ड वाइड वेब
(ख) वर्ल्ड वाइड वेव
(ग) वर्ल्ड वेब वाइड
(घ) वर्ल्ड वाइज वेब
उत्तर:
(ख) वर्ल्ड वाइड वेव

प्रश्न 2.
इन्टरनेट का पर्याय इनमें से कौन-सा शब्द होगा ?
(क) विश्वजाल
(ख) विश्व डाक
(ग) अन्तर्जाल
(घ) विश्वनेत्र
उत्तर:
(ग) अन्तर्जाल

प्रश्न 3.
इनमें से कौन-सा पक्षी और बादल की चिट्ठियाँ नहीं बांचता है ?
(क) पानी
(ख) पहाड़
(ग) पेड़
(घ) ट्रेन
उत्तर:
(घ) ट्रेन।

प्रश्न 4.
पानी बरसने से एकदम पहले उसका रूप होता है-
(क) भाप
(ख) हवा
(ग) आँधी
(घ) धूल
उत्तर:
(क) भाप।

प्रश्न 5.
जिनके पंख होते हैं, उन्हें पक्षी कहा जाता है; क्योंकि पंख शब्द बना है इनसे-
(क) पक्ष
(ख) पर
(ग) उड़ान
(घ) वायु
उत्तर:
पक्ष।

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सप्रसंग व्याख्या

(क) पक्षी और बादल,
ये भगवान के डाकिए हैं,
जो एक महादेश से
दूसरे महादेश को जाते हैं
हम तो समझ नहीं पाते हैं।
मगर उनकी लाई चिट्ठियाँ ।
पेड़, पौधे, पानी और पहाड़ बाँचते हैं।

प्रसंग- उपर्युक्त पद्यांश भगवान के डाकिए’ पाठ से उद्धृत है। इसके रचयिता राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी हैं। ‘ दिनकर जी ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए बताया है।

व्याख्या- कवि कहते हैं कि भगवान भी हमारे पास संदेश भेजते हैं। उस संदेश को भेजने के लिए पक्षी और बादल भगवान के डाकिए का काम करते हैं। भगवान किसी सीमा में नहीं बँधा रहता। इसी प्रकार भगवान के डाकिए पक्षी और बादल भी किसी क्षेत्र की सीमा में नहीं बँधे रहते हैं। ये एक महादेश से बेरोक-टोक दूसरे महादेश को जाते हैं। ये जिन चिट्ठियों को लेकर आते है, उन्हें हम नहीं समझ पाते लेकिन पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ जरूर पढ़ लेते हैं। पेड़-पौधों को बादलों का पानी मिल जाता है। पहाड़, बादलों का रुख मोड़कर बारिश करा देते हैं। पक्षी बादलों के आने की सूचना दे देते हैं। ये सब एक-दूसरे के अधिक निकट हैं।

विशेष-

  1. ‘पेड़-पौधे, पानी’ में अनुप्रास अलंकार है।
  2. कवि ने पक्षी और बादल को संदेशवाहक के रूप में चित्रित दिया है।

(ख) हम तो केवल यह आँकते हैं
कि एक देश की धरती
दूसरे देश को सुगंध भेजती है।
और वह सौरभ हवा में तैरते हुए
पक्षियों की पाँखों पर तिरता है।
और एक देश का भाप
दूसरे देश में पानी
बनकर गिरता है।

प्रसंग- ये काव्य-पंक्तियाँ ‘भगवान के डाकिए’ पाठ से ली गई हैं। इनके कवि श्री रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी हैं। कवि ने इन पंक्तियों में ‘पूरी धरती अपना परिवार है’ का संदेश दिया है। हम खुद विभाजित होते हैं। प्रकृति हमें सदा जोड़कर ही रखती है।

व्याख्या- कवि कहते हैं कि हम यह अनुमान लगाते हैं कि किस प्रकार एक देश की धरती दूसरे देश को चुपचाप खुशबू भेजती है। जो पक्षी आकाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर तैरते हुए जाते हैं; वे अपने पंखों पर एक स्थान की खुशबू को दूसरे स्थान तक तैराकर ले जाते हैं। एक स्थान पर जो पानी भाप बन जाता है, वह उड़कर दूसरे देश में पहुँच जाता है और बादल बनकर बरस पड़ता है। इस प्रकार बादल दो देशों की तुच्छ सीमा में विभाजित नहीं होता। वह इस तुच्छ भेदभाव से ऊपर उठकर जीवन जीता है।

विशेष-

  1. इन पंक्तियों में ‘माता भूमि पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ का उद्घोष सुनाई पड़ता है।
  2. कवि वर्तमान भौगोलिक संकीर्णता को स्वीकार नहीं करता है।

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भगवान के डाकिये Summary

पाठ का सार

राष्ट्रकवि दिनकर जी ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए कहा है। जिस प्रकार डाकिए संदेश पहुँचाने का काम करते हैं, उसी प्रकार पक्षी और बादल भी एक महादेश का संदेश दुसरे महादेश तक पहुँचाते हैं। हम इनके लाए संदेशों को नहीं समझ पाते; परंतु पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ भली-प्रकार समझकर बाँच लेते हैं। एक देश की धरती दूसरे देशों को जो खुशबू का पैगाम भेजती है, वह इनके पंखों पर तैरकर जाता है। जो भाप एक देश में बनती है, वह बिना किसी भेदभाव के दूसरे देश की धरती पर पानी बनकर बादलों से बरसती है।

शब्दार्थ : महादेश-महाद्वीप, विशाल देश; बाँचते हैं-वाचन करते हैं, बोल-बोलकर पढ़ते हैं; आँकते हैं-अंदाज लगाते हैं, अनुमान करते हैं; पाँख-पंख; सौरभ-सुगन्ध ।

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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 5 चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

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चिट्ठियों की अनूठी दुनिया NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 5

Class 8 Hindi Chapter 5 चिट्ठियों की अनूठी दुनिया Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
पत्र जैसा संतोष फोन या एस.एम.एस. का संदेश क्यों नहीं दे सकता ?
उत्तर:
फोन या एस.एम.एस. के द्वारा बात संक्षेप में कही जाती है। इनके द्वारा हृदय की पूरी बात नहीं कही जा सकती। पत्र में मन की गहन भावनाएँ प्रभावशाली ढंग से प्रकट की जा सकती हैं। फोन या एस.एम.एस. की बात सहेजकर रखना कठिन है; जबकि पत्रों को वर्षों तक सहेजकर रखा जा सकता है। यही कारण है कि पत्र जैसा संतोष फोन या एस.एम.एस. नहीं दे सकते।

प्रश्न 2.
पत्र को खत, कागज़, उत्तरम्, जाबू, लेख काडिद, पाती, चिट्ठी इत्यादि कहा जाता है। इन शब्दों से संबंधित भाषा के नाम बताइए।
उत्तर:
शब्द – संबंधित भाषा
कागद – कन्नड़
लेख – तेलुगु
जाबू – तेलुगु
उत्तरम् – तेलुगु
काडिद – तमिल
पाती – हिन्दी
चिट्ठी – हिन्दी
पत्र – संस्कृत
खत – उर्दू

प्रश्न 3.
पत्र-लेखन की कला के विकास के लिए क्या-क्या प्रयास हुए ? लिखिए।
उत्तर:
पत्र-लेखन की कला के विकास के लिए पत्र-लेखन को स्कूली पाठ्यक्रम में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया। 1972 से विश्व डाक संघ ने 16 वर्ष से कम आयुवर्ग के बच्चों के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन किया, जिसमें पत्र-लेखन को शामिल करके महत्त्वपूर्ण कार्य किया। इन प्रयासों से पत्र-लेखन कला के विकास के लिए प्रयास हुआ।

प्रश्न 4.
पत्र धरोहर हो सकते हैं लेकिन एस.एम.एस. क्यों नहीं ? तर्क सहित अपना विचार लिखिए।
उत्तर:
पत्र अपने समय के महत्त्वपूर्ण दस्तावेज का काम करते हैं। कुछ इन्हें सहेजकर रखते हैं। गांधी जी, नेहरू जी, टैगोर आदि के पत्र अपने समय को महत्त्वपूर्ण दस्तावेज हैं। लिखित रूप होने के कारण उस समय के यादगार पलों एवं विचारों को धरोहर की तरह संजोकर रखना कठिन नहीं है। एस.एम.एस. काम-चलाऊ, संदेश भर है। इनमें पत्रों जैसी गम्भीरता एवं गहराई नहीं होती और न ही इन्हें लम्बे समय तक संजोकर रखा जा सकता है। ये क्षणिक होते हैं।

प्रश्न 5.
क्या चिट्ठियों की जगह कभी फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन या मोबाइल ले सकते हैं? कारण सहित बताइए।
उत्तर:
चिट्ठियों की जगह कभी फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन या मोबाइल नहीं ले सकते हैं। कारण, इनसे दैनिक कामकाज निपटाया जा सकता है। इनमें अपनेपन का वह समावेश नहीं हो सकता जो चिट्ठी में मौजूद होता है। चिट्ठियों को लोग संभालकर रखते हैं। फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन और मोबाइल की भूमिका संदेश देने के बाद खत्म हो जाती है। प्रभावशाली पत्रों के संकलन गंभीर साहित्य के रूप में मौजूद हैं।

प्रश्न 6.
किसी के लिए बिना टिकट सादे लिफाफे पर सही पता लिखकर पत्र बैरंग भेजने पर कौन-सी कठिनाई आ सकती है ? पता कीजिए।
उत्तर:
बैरंग पत्र बिना डाक टिकट के लिखे पते पर चला जाएगा, लेकिन पाने वाले को निर्धारित टिकटों के मूल्य का दुगुना भुगतान करना पड़ेगा। उसके मना करने पर भेजने वाले को दण्डस्वरूप निर्धारित राशि का भुगतान करना पड़ेगा। जब भी कोई डाक भेजी जाए, उस पर तय मूल्य के टिकट जरूर लगाए जाएँ।

प्रश्न 7.
पिन कोड भी संख्याओं में लिखा गया एक पता है, कैसे ?
उत्तर:
पिन कोड उस क्षेत्र के डाकघर की स्थिति को सूचित करता है, जहाँ डाक जाएगी। इसे पूरा पता नहीं कह सकते। जैसे 110089 पिनकोड में 11 दिल्ली का संकेत है। 89 रोहिणी सेक्टर-17 का संकेत है। इससे केवल वितरण करने वाले डाकघर तक चिट्ठी की पहुँच हो जाती है। व्यक्ति तक पहुँचने के लिए चिट्ठी पर व्यक्ति के नाम के साथ पूरा पता होना जरूरी है।

प्रश्न 8.
ऐसा क्यों होता था कि महात्मा गांधी को दुनिया भर से पत्र ‘महात्मा गाँधी-इंडिया’ पता लिखकर आते थे?
उत्तर:
महात्मा गांधी बहुत लोकप्रिय व्यक्ति थे। वे जहाँ भी जाते थे, सबको पता रहता था। अतः कोई पत्र कहीं से भी क्यों न आया हो, उन तक जरूर पहुँच जाता था।

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अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता ‘भगवान के डाकिए’ आपकी पाठ्य-पुस्तक में है। उसके आधार पर पक्षी और बादल को डाकिए की भाँति मानकर अपनी कल्पना से लेख लिखिए।
उत्तर:
‘डाकिये’ का काम संदेश ले जाना होता है। पक्षी और बादल दोनों ही संदेश ले जाने का काम करते हैं। दूर-दूर से आए पक्षी मानो कोई संदेश लेकर आए हों। बादल, पेड़-पौधों एवं पूरी प्रकृति के लिए खुशहाली का संदेश लेकर आते हैं। पानी बरसाकर बादल पूरी प्रकृति में हरियाली भर देते हैं।

प्रश्न 2.
संस्कृत साहित्य के महाकवि कालिदास ने बादल को संदेशवाहक बनाकर ‘मेघदूत’ नाम का काव्य लिखा है। ‘मेघदूत’ के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
मेघदूत संस्कृत भाषा के महाकवि कालिदास की महत्त्वपूर्ण काव्य-रचना है। कुबेर ने अलकापुरी से यक्ष को निर्वासित कर दिया था। निर्वासित यक्ष बादल के माध्यम से अपनी प्रेमिका के पास संदेश भेजता है। कवि ने प्रकृति के विभिन्न रूपों का वर्णन करते हुए यक्ष की विरह-वेदना का मार्मिक चित्रण किया है। मेघदूत पर संस्कृत में लगभग 50 टीकाएँ लिखी गईं। इसका संसार की सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

प्रश्न 3.
पक्षी को संदेशवाहक बनाकर अनेक कविताएँ एवं गीत लिखे गए हैं। एक गीत है ‘जा-जा रे कागा विदेशवा, मेरे पिया से कहियो संदेशवा’। इस तरह के तीन गीतों का संग्रह कीजिए। प्रशिक्षित पक्षी के गले में पत्र बाँधकर निर्धारित स्थान तक पत्र भेजने का उल्लेख मिलता है। मान लीजिए आपको एक पक्षी को संदेशवाहक बनाकर पत्र भेजना हो तो आप वह पत्र किसे भेजना चाहेंगे और उसमें क्या लिखना चाहेंगे ?
उत्तर:
एक राजस्थानी लोकगीत की कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं-
उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे
उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे
उड़ उड़ रे म्हारा, काल्ला रे कागला
कद म्हारा पीब्जी घर आवे
कद म्हारा पीजी घर आवे, आवे रे आवे
कद म्हारा पीब्जी घर आवे
उड़ उड़ रे म्हारा काल्ला रे कागला
कद म्हारा पीब्जी घर आवे
खीर खांड रा जीमण जीमाऊँ
सोना री चौंच मंढाऊ कागा
जद म्हारा पीब्जी घर आवे, आवे रे आवे
उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे
म्हारा काल्ला रे कागला
कद म्हारा पीजी घर आवे
पगला में थारे बांधू रे घुघरा
गला में हार कराऊँ कागा
जद महारा पीब्जी घर आवे
उड़ उड़ रे
म्हारा काल्ला रे कागला
कद म्हारा पीजी घर आवे
उड़ उड़ रे म्हारा काला रे कागला
कद म्हारा पीब्जी घर आवे
जो तू उड़ने सुगन बतावे
जनम जनम गुण गाऊँ कागा
जद म्हारा पीब्जी घर आवे, आवे रे आवे
जद म्हारा पीजी घर आवे।

वह पत्र में अपने मित्र हिमेश को भेजना चाहूँगा। मैं उस पत्र में हिमेश के साथ बिताए पाँच वर्षों का जिक्र करूँगा। हम दोनों मित्र किस प्रकार स्कूल में मिल-जुलकर खेलते थे, पढ़ाई करते थे। हमारे माता-पिता भी हमारी मित्रता को खूब सराहते थे। मैं आज भी हिमेश को बहुत याद करता हूँ, क्योंकि उस जैसा सरल हृदय वाला मित्र मिलना इस संसार में कठिन है।

प्रश्न 4.
केवल पढ़ने के लिए दी गई रामदरश मिश्र की कविता ‘चिट्ठियाँ’ को ध्यानपूर्वक पढ़िए और विचार कीजिए कि क्या यह कविता केवल लेटर बॉक्स में पड़ी निर्धारित पते पर जाने के लिए तैयार चिट्ठियों के बारे में है ? या रेल के डिब्बे में बैठी सवारी भी उन्हीं चिट्ठियों की तरह हैं जिनके पास उनके गंतव्य तक का टिकट है। पत्र के पते की तरह और क्या विद्यालय भी एक लेटर बॉक्स की भाँति नहीं है जहाँ से उत्तीर्ण होकर विद्यार्थी अनेक क्षेत्रों में चले जाते हैं ? अपनी कल्पना को पंख लगाइए और मुक्त मन से इस विषय में विचार-विमर्श कीजिए।

चिट्ठियाँ

लेटरबक्स में पड़ी हुई चिट्ठियाँ
अनंत सुख-दुख वाली अनंत चिट्ठियाँ
लेकिन कोई किसी से नहीं बोलती
सभी अकेले-अकेले
अपनी मंजिल पर पहुँचने का इंतजार करती हैं।

कैसा है यह एक साथ होना
दूसरे के साथ हँसना न रोना
क्या हम भी
लेटर बॉक्स की चिट्ठियाँ हो गए हैं।

-रामदरश मिश्र

उत्तर:
रामदरश मिश्र जी की इस कविता में विचार किया गया है कि यदि हम आपस में बातचीत नहीं करते हैं, एक-दूसरे का सुख-दुख नहीं बाँटते हैं तो हमारी हालत भी लेटरबक्स पड़ी चिहियों जैसी ही हो जाएगी विद्यालय भी लेटरबॉक्स की ही भाँति है, जहाँ से विद्यार्थी पढ़कर अनेक क्षेत्रों में चले जाते हैं। फिर सबका मिलना एकदम असंभव जैसा हो जाता है।
शायर निदा फाजली ने कुछ ऐसा ही कहा है-
‘सीधा-सादा डाकिया, जादू करे महान।
एक ही थैले में भरे, आँसू और मुस्कान ॥’

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भाषा की बात

प्रश्न 1.
किसी प्रयोजन विशेष से संबंधित शब्दों के साथ पत्र शब्द जोड़ने से कुछ नए शब्द बनते हैं, जैसे-प्रशस्ति-पत्र, समाचार-पत्र। आप भी पत्र के योग से बनने वाले दस शब्द लिखिए।
उत्तर:
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प्रश्न 2.
‘व्यापारिक’ शब्द व्यापार के साथ ‘इक’ प्रत्यय के योग से बना है। इक प्रत्यय के योग से बनने वाले शब्दों को अपनी पाठ्य-पुस्तक से खोजकर लिखिए।
उत्तर:
प्रासंगिक, आंचलिक, शैक्षिक, स्वाभाविक, सांस्कृतिक, आर्थिक, पारिवारिक, सामाजिक, चारित्रिक, भौतिक, प्रारम्भिक।

प्रश्न 3.
दो स्वरों के मेल से होने वाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं; जैसे-रवीन्द्र = रवि + इन्द्र । इस संधि में इ + इ = ई हुई है। इसे दीर्घ संधि कहते हैं। दीर्घ स्वर संधि के और उदाहरण खोजकर लिखिए। मुख्य रूप से स्वर संधियाँ चार प्रकार की मानी गई हैं-दीर्घ, गुण, वृद्धि और यण।
ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ के बाद ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, आ आए तो ये आपस में मिलकर क्रमशः दीर्घ आ, ई, ऊ हो जाते हैं, इसी कारण इस संधि को दीर्घ संधि कहते हैं; जैसे-संग्रह + आलय = संग्रहालय, महा + आत्मा = महात्मा।
इस प्रकार के कम-से-कम दस उदाहरण खोजकर लिखिए और अपनी शिक्षिका/शिक्षक को दिखाइए।
उत्तर:
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अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए-

प्रश्न 1.
नेहरू जी अपनी पुत्री इंदिरा गाँधी को फोन करते तो क्या होता ?
उत्तर:
नेहरू जी अपनी पुत्री इंदिरा गाँधी को फोन करते तो ‘पिता के पत्र पुत्री के नाम’ जैसी करोड़ों लोगों को प्रेरणा देने वाली पुस्तक न तैयार होती।

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प्रश्न 2.
अंग्रेज अफसरों ने अपने परिवारजनों को जो पत्र लिखे, उनसे क्या साबित होता है ?
उत्तर:
अंग्रेज अफसरों ने जो पत्र अपने परिवारजनों को लिखे, उनसे सिद्ध होता है कि आजादी का संग्राम जमीनी मजबूती लिये हुए था।

प्रश्न 3.
लेखक ने पत्रों का जादू किसे कहा है ?
उत्तर:
कुछ लोग पत्रों को फ्रेम कराकर रखते हैं। पत्रों के आधार पर कई भाषाओं में बहुत-सी किताबें लिखी जा चुकी हैं। लेखक ने इसे पत्रों का जादू कहा है।

प्रश्न 4.
निराला के पत्रों का क्या नाम है ?
उत्तर:
निराला जी के पत्रों का नाम ‘हमको लिख्यो है कहा।’ है।

प्रश्न 5.
महर्षि दयानंद से जुड़ी पत्रों की पुस्तक का क्या नाम है ?
उत्तर:
महर्षि दयानन्द से जुड़ी पत्रों की पुस्तक का नाम है- ‘पत्रों के आईने में दयानन्द सरस्वती।’

प्रश्न 6.
मनीऑर्डर अर्थव्यवस्था का आधार किस प्रकार है ?
उत्तर:
दूर देहात में रहने वाले लोगों के परिचित मनीऑर्डर द्वारा पैसा भेजते हैं तब जाकर चूल्हे जलते हैं। अतः मनीऑर्डर को अर्थव्यवस्था का आधार कहा गया है।

बोध-प्रश्न

निम्नलिखित अवतरणों को पढ़िए और अन्त में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(क) पिछली शताब्दी में पत्र-लेखन ने एक कला का रूप ले लिया। डाक व्यवस्था के सुधार के साथ पत्रों को सही दिशा देने के लिए विशेष प्रयास किए गए। पत्र संस्कृति विकसित करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रमों में पत्र-लेखन का विषय भी शामिल किया गया। भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में ये प्रयास चले और विश्व डाक संघ ने अपनी ओर से भी काफी प्रयास किए। विश्व डाक संघ की ओर से 16 वर्ष से कम आयुवर्ग के बच्चों के लिए पत्र-लेखन प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का सिलसिला सन् 1972 से शुरू किया। यह सही है कि खास तौर पर बड़े शहरों और महानगरों में संचार साधनों के तेज विकास तथा अन्य कारणों से पत्रों की आवाजाही प्रभावित हुई है, पर देहाती दुनिया आज भी चिट्ठियों से ही चल रही है। फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ने चिट्ठियों की तेजी को रोका है, पर व्यापारिक डाक की संख्या लगातार बढ़ रही है।

प्रश्न 1.
पत्र-लेखन ने कला का रूप कब लिया ?
उत्तर:
पत्र-लेखन ने पिछली शताब्दी में कला का रूप लिया।

प्रश्न 2.
पत्र-संस्कृति के प्रोत्साहन के लिए क्या कार्य किया गया ?
उत्तर:
पत्र-संस्कृति के प्रोत्साहन के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में पत्र-लेखन को एक विषय के रूप में शामिल किया गया।

प्रश्न 3.
विश्व डाक संघ ने पत्र-लेखन को कैसे प्रोत्साहित किया ?
उत्तर:
विश्व डाक संघ ने 1972 से पत्र-लेखन प्रतियोगिताओं को आयोजित करना शुरू किया। इससे पत्र-लेखन को प्रोत्साहन मिला। यह प्रतियोगिता 16 वर्ष से कम आयु वर्ग के लिए है।

प्रश्न 4.
चिट्ठियों की तेजी को किन साधनों ने रोका है ?
उत्तर:
चिट्ठियों की तेजी से फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ने रोका है।

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(ख) पत्र-व्यवहार की परंपरा भारत में बहुत पुरानी है। पर इसका असली विकास आजादी के बाद ही हुआ है। तमाम सरकारी विभागों की तुलना में सबसे ज्यादा गुडविल डाक विभाग की ही है। इसकी एक खास वजह यह भी है कि यह लोगों को जोड़ने का काम करता है। घर-घर तक इसकी पहुँच है। संचार के तमाम उन्नत साधनों के बाद भी चिट्ठी-पत्री की हैसियत बरकरार है। शहरी इलाकों में आलीशान हवेलियाँ हों या फिर झोपड़पट्टियों में रह रहे लोग, दुर्गम जंगलों से घिरे गाँव हों या फिर बर्फबारी के बीच जी रहे पहाड़ों के लोग, समुद्र तट पर रह रहे मछुआरे हों या फिर रेगिस्तान की ढाँणियों में रह रहे लोग, आज भी खतों का ही सबसे बेसब्री से इंतजार होता है। एक दो नहीं, करोड़ों लोग खतों और अन्य सेवाओं के लिए रोज भारतीय डाकघरों के दरवाजों तक पहुँचते हैं और इसकी बहुआयामी भूमिका नजर आ रही है। दूर देहात में लाखों गरीब घरों में चूल्हे मनीऑर्डर अर्थव्यवस्था से ही जलते हैं। गाँवों या गरीब बस्तियों में चिट्ठी या मनीऑर्डर लेकर पहुँचने वाला डाकिया देवदूत के रूप में देखा जाता है।

प्रश्न 1.
पत्र-व्यवहार की परंपरा का असली विकास कब हुआ ?
उत्तर:
पत्र-व्यवहार की परंपरा का असली विकास आजादी के बाद हुआ।

प्रश्न 2.
डाक विभाग की सबसे ज्यादा गुडविल क्यों हैं ?
उत्तर:
डाक विभाग की सबसे ज्यादा गुडविल इसलिए है, क्योंकि यह लोगों को जोड़ने का काम करता है। घर-घर तक इसकी पहुँच है। तमाम उन्नत साधनों के बावजूद चिट्ठी की हैसियत बरकरार है।

प्रश्न 3.
आज भी खतों का बेसब्री से इन्तजार कौन-कौन लोग करते हैं ?
उत्तर:
आलीशान हवेलियों, झोपड़पट्टियों, दुर्गम जंगलों से घिरे गाँवों, बर्फबारी के बीच जी रहे पहाड़ी लोग, समद्री तट पर रह रहे मछुआरे, रेगिस्तान के अस्थायी निवास में रहने वाले लोग-सभी खतों का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

प्रश्न 4.
गाँव में डाकिए को देवदूत के रूप में क्यों देखा जाता है ?
उत्तर:
दूर-देहात में लाखों गरीब घरों के चूल्हे मनीऑर्डर की व्यवस्था से ही जलते हैं। इसलिए चिट्ठी और मनीऑर्डर लेकर वहाँ पहुँचने वाले डाकिये को देवदूत के रूप में देखा जाता है।

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चिट्ठियों की अनूठी दुनिया Summary

पाठ का सार

इस पाठ में संवाद माध्यमों के विकास एवं उपयोग को रोचक ढंग से समझाया गया है। पत्र का स्थान कोई और माध्यम नहीं ले सकता। पत्र जैसा संतोष फोन, एस.एम.एस नहीं दे सकते। साहित्य, कला एवं राजनीति की दुनिया में पत्रों का महत्त्व बहुत है। मानव-सभ्यता के विकास में पत्रों की भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता। पत्र को उर्दू में खत, कन्नड़ में कागद, तेलुगु में उत्तरम जाबू और लेख, तमिल में कडिद और संस्कृत में पत्र कहा जाता है। दुनिया में रोज करोड़ों पत्र लिखे जाते हैं। भारत में ही करीब साढ़े चार करोड़।

पिछली शताब्दी में पत्र-लेखन ने कला का रूप ले लिया। स्कूली पाठ्यक्रम में पत्र-लेखन एक अलग विधा के तौर पर शामिल है। विश्व डाक संघ द्वारा 16 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों के लिए पत्र-लेखन प्रतियोगिताएँ शुरू की गईं। देहाती दुनिया तमाम उन्नति के बावजूद आज भी पत्रों पर निर्भर है। फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ने चिट्ठियों की तेजी को रोका है। सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए पत्र सबसे महत्त्वपूर्ण सम्पर्क माध्यम है।

आज देश में पत्रकारों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों, समाजसेवकों द्वारा एक-दूसरे को लिखे गए पत्र महत्त्वपूर्ण साहित्य की श्रेणी में आ गए हैं। पंडित नेहरू के इंदिरा गाँधी को लिखे पत्र, गाँधी जी द्वारा लिखे गए पत्र बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। गाँधी जी पत्रोत्तर तुरंत देते थे, अतः उनके लिखे पत्र गाँव-गाँव में मिल जाते हैं। ये पत्र किसी ऐतिहासिक दस्तावेज से कम नहीं। पंत, निराला और दयानंद सरस्वती के पत्र मिल जाएँगे। प्रेमचन्द युवा लेखकों को प्रेरक पत्र लिखा करते थे। ‘महात्मा और कवि’ नाम से गाँधी जी और टैगोर के बीच हुआ 1915 से 1941 का पत्राचार मौजूद है। इन पत्रों में नए तथ्य उजागर हुए हैं। डाक-विभाग लोगों को जोड़ने का काम करता है। हर वर्ग के लोग पत्रों के माध्यम से जुड़े हैं। दूर-देहात में लाखों गरीब घरों में चूल्हे मनीऑर्डर अर्थव्यवस्था से ही जलते हैं। इन लोगों के लिए डाकिया किसी देवदूत से कम नहीं।

शब्दार्थ : अजीबो-गरीब-अनोखी; संचार-गमन; आधुनिकतम-सबसे आधुनिक; एस.एम.एस.-शॉर्ट मैसेज सर्विस (लघु संदेश सेवा); विवाद-बहस, झगड़ा; अनूठी-अनोखी, विशेष; साबित करती-प्रमाणित करती; अहमियत-महत्त्व संवाद-बातचीत; प्रयास-कोशिश; बेसब्री-बैचेनी, व्याकुलता; परिवहन-माल, यात्रियों आदि को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना; पुरखों-पूर्वजों; विरासत-उत्तराधिकार में मिली वस्तु; उद्यमी-व्यवसाय करने वाले धरोहर-थाती, अमानत; हस्तियों-विशेष व्यक्तियों; साबित-प्रमाणित; दिग्गज-बहुत बड़े जोड़-मुकाबला; प्रशस्ति-पत्र-प्रशंसा-पत्र; प्रेरक-प्रेरणा देने वाले मुस्तैद-नियमित; मनोदशा-मन की स्थिति; तथ्य-सच्चाई; हैसियत-वजूद, अस्तित्त्व; बरकरार-मौजूद; आलीशान-शानदार; दस्तावेज-प्रमाण संबंधी कागजात; ढाणियाँ-अस्थायी निवास; बहुआयामी-अधिक विस्तार वाला; देवदूत-देवता का दूत।

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