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Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 3 Questions and Answers Summary सिंधु घाटी की सभ्यता

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Class 8 Hindi Bharat Ki Khoj Chapter 3 Question Answers Summary सिंधु घाटी की सभ्यता

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 3 Question and Answers

प्रश्न 1.
सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेष कहाँ मिले हैं?
उत्तर:
सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेष सिंध में मोहनजोदड़ो और पश्चिमी पंजाब के हडप्पा में मिले हैं।

प्रश्न 2.
सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में क्या-क्या बातें पता चली हैं?
उत्तर:
सिंधु घाटी की सभ्यता के बारे में निम्न बातें पता चली हैं-

  • सिंधु घाटी सभ्यता अत्यंत विकसित सभ्यता थी।
  • यह सभ्यता नगर-सभ्यता थी।
  • यह सभ्यता सांस्कृतिक युगों की अग्रदूत थी।
  • यह सभ्यता प्रधान रूप से धर्मनिरपेक्ष थी।
  • इस सभ्यता में व्यापारी वर्ग धनाढ्य था।

प्रश्न 3.
सिंधु सभ्यता ने किन सभ्यताओं से संबंध स्थापित किया?
उत्तर:
सिंधु घाटी सभ्यता ने फारस, मेसोपोटामिया और मिस्र की सभ्यताओं से संबंध स्थापित किया और व्यापार किया।

प्रश्न 4.
सिंधु नदी किसके लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर:
सिंधु नदी अपनी भयंकर बाढों के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 5.
इस सभ्यता में मिले मकान कैसे हैं?
उत्तर:
इस सभ्यता में मिले मकान दो या तीन मंजिले हैं।

प्रश्न 6.
ऋग्वेद का रचनाकाल कब माना जाता है?
उत्तर:
अधिकांश विद्वान ऋग्वेद का रचनाकाल ईसा पूर्व 1500 मानते हैं।

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 3 Questions and Answers Summary सिंधु घाटी की सभ्यता

प्रश्न 7.
मैक्समूलर ने ऋग्वेद के बारे में क्या कहा है?
उत्तर:
मैक्समूलर ने इसे आर्य मानव द्वारा कहा गया पहला शब्द कहा है।

प्रश्न 8.
‘वेद’ शब्द की उत्पत्ति किस धातु से हुई है? इसका क्या अर्थ है?
उत्तर:
‘वेद’ शब्द की उत्पत्ति ‘विद्’ धातु से हुई है। इसका अर्थ है-जानना। अत: वेद का सीधा अर्थ है-अपने समय के ज्ञान को जानना।

प्रश्न 9.
भारतीय संस्कृति में कौन-सी प्रवृत्ति आरंभ दिखाई देती है?
उत्तर:
भारतीय संस्कृति में विशिष्टतावाद और छुआछूत की प्रवृत्ति का आरंभ दिखाई देता है।

प्रश्न 10.
उपनिषदों का समय कौन-सा माना जाता है?
उत्तर:
उपनिषदों का समय ई.पू. 800 के आस-पास माना जाता है। ये हमें भारतीय आर्यों के चिंतन में एक कदम और आगे ले जाते हैं।

प्रश्न 11.
आर्यों का प्रवेश कब माना जाता है?
उत्तर:
आर्यों का प्रवेश सिंधु घाटी सभ्यता युग के लगभग एक हजार वर्ष बाद माना जाता है।

प्रश्न 12.
उपनिषदों की प्रमुख विशेषता क्या है?
उत्तर:
उपनिषदों की प्रमुख विशेषता सच्चाई पर बल देना है। इनमें प्रकाश और ज्ञान की कामना की गई है। असत् से सत् की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर तथा मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जाने की प्रार्थना की गई है।

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प्रश्न 13.
उपनिषदों का झुकाव किस ओर था?
उत्तर:
उपनिषदों का झुकाव अद्वैतवाद की ओर था।

प्रश्न 14.
उपनिषदों में किस बात पर जोर दिया गया है?
उत्तर:
उपनिषदों में इस बात पर जोर दिया गया है कि कारगर रूप से प्रगति के लिए शरीर का स्वरूप होना, मन का स्वस्थ होना तथा तन-मन का अनुशासन में होना आवश्यक है। ज्ञानार्जन के लिए संयम, आत्म-पीड़न और आत्म-त्याग जरूरी है।

प्रश्न 15.
व्यक्तिवाद का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर:
व्यक्तिवाद का यह परिणाम हुआ कि मनुष्य ने सामाजिक पक्ष पर समाज के प्रति उसके कर्तव्यों पर कम ध्यान दिया। भौतिकवादियों ने विचार, धर्म और ब्रह्म विज्ञान के अधिकारियों और स्वार्थ से प्रेरित विचारों का विरोध किया।

प्रश्न 16.
अधिकांश पुराकथाएँ कैसी हैं?
उत्तर:
अधिकांश पुराकथाएँ और प्रचलित कहानियाँ वीरगाथात्मक हैं। इनमें सत्य पर अड़े रहने और वचन पालन का उपदेश दिया गया है। चाहे परिणाम कुछ भी हो, इनमें जीवन पर्यन्त और मरणोपरांत भी वफादारी, साहस और लोकहित के लिए सदाचार और बलिदानी शिक्षा दी गई है।

प्रश्न 17.
भौतिकवाद पर लिखा साहित्य किसने नष्ट कर दिया?
उत्तर:
भारत के भौतिकवादी साहित्य को पुरोहितों और धर्म के पुरातनपंथी स्वरूप में विश्वास करने वालों ने नष्ट कर दिया।

प्रश्न 18.
लेखक ने राजतरंगिनी के बारे में क्या लिखा है?
उत्तर:
लेखक ने राजतरंगिनी के बारे में लिखा है कि यह कहूण द्वारा लिखित एकमात्र प्राचीन इतिहास ग्रंथ है।

प्रश्न 19.
महाभारत के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर:
महाभारत का दर्जा विश्व की श्रेष्ठतम रचनाओं में है। यह कृति परंपरा और दंत-कथाओं तथा प्राचीन भारत की राजनीतिक और सामाजिक संस्थाओं का विश्वकोष है।

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प्रश्न 20.
भगवद्गीता में क्या बताया गया है?
उत्तर:
भगवद्गीता में महाभारत का अंश है, परंतु वह अपने आप में एक पूर्ण रचना है। यह 700 श्लोकों का एक छोटा काव्य है जिसकी रचना बौद्धकाल से पहले हुई थी। इसका आकर्षण आज तक बना हुआ है। इस पुस्तक में संकटग्रस्त व्यक्ति को कर्म करने की प्रेरणा दी गई है।

प्रश्न 21.
भगवद्गीता का सारांश क्या है?
उत्तर:
गीता में महाभारत युद्ध में अर्जुन और श्रीकृष्ण का संवाद है। अर्जुन परेशान थे। अपने मित्रों और परिचितों के भावी नर-संहार पर उनकी आत्मा ने विद्रोह कर दिया। अर्जुन इंसान की उस पीड़ित आत्मा का प्रतीक बन जाता है जो युग-युग से कर्तव्यों और नैतिकता के तकाजों से ग्रस्त होता है। गीता में ज्ञान, कर्म और भक्ति के बीच समन्वय करने का प्रयास किया गया है। गीता की दृष्टि सार्वभौमिक है।

प्रश्न 22.
प्राचीन भारत में ग्राम सभाओं का क्या स्वरूप था?
उत्तर:
प्राचीन भारत में ग्राम सभाएँ एक सीमा तक स्वतंत्र थीं। उनकी आमदनी का मुख्य स्रोत लगान था। इसका भुगतान प्रायः गल्ले या पैदावार की शक्ल में किया जाता था।

प्रश्न 23.
भारत में लिखने की प्रथा के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर:
भारत में लिखने की प्रथा, बहुत पुरानी है। पाषाण युग के मिट्टी के पुराने बर्तनों पर ब्राह्मी लिपि के अक्षर मिले हैं। इसी लिपि से भारत की देवनागरी तथा अन्य लिपियों का विकास हुआ है। अशोक के कुछ लेख ब्राह्मी लिपि में हैं। उत्तर-पश्चिम में कुछ लेख खरोष्टी लिपि में हैं।

प्रश्न 24.
पाणिनि ने कब, किस ग्रंथ की रचना की?
उत्तर:
पाणिनि ने ईसा पूर्व छठी या सातवीं शताब्दी में संस्कृत भाषा में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘व्याकरण’ की रचना की। तब तक संस्कृत का रूप स्थिर हो चुका था।

प्रश्न 25.
औषध विज्ञान की कौन-सी पुस्तकों की रचना की गई?
उत्तर:
औषध पर चरक की पुस्तकें हैं और शल्य चिकित्सा पर सुश्रुत ने पुस्तकें लिखी हैं। इसमें अनेक बीमारियों की पहचान तथा इलाज के तरीके बताए गए हैं। सुश्रुत ने अपनी पुस्तक में शल्यक्रिया के औजारों और विधियों का उल्लेख विस्तारपूर्वक किया है।

प्रश्न 26.
वनों में स्थिर विश्वविद्यालयों के बारे में क्या बताया गया है?
उत्तर:
अक्सर वनों में विश्वविद्यालयों की स्थापना की जाती थी। इनमें शिक्षण- प्रशिक्षण पाने के लिए दूर-दूर से लोग आते थे। यहाँ विद्यार्थियों को संयम और ब्रह्मचर्य का जीवन जीना होता था। यहाँ से प्रशिक्षण प्राप्त करके विद्यार्थी गृहस्थ जीवन में लौट जाते थे।

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प्रश्न 27.
तक्षशिला विश्वविद्यालय के बारे में क्या बताया गया है?
उत्तर:
पेशावर के पास तक्षशिला नामक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय था। यह विश्व- विद्यालय विज्ञान, चिकित्साशास्त्र, कलाओं के लिए मशहूर था। इसमें भारत के दूर-दूर के हिस्सों से लोग शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते थे। तक्षशिला का स्नातक होना सम्मान और विशेष योग्यता की बात समझी जाती थी। बौद्धकाल में यह बौद्धज्ञान का केंद्र बन गया था।

प्रश्न 28.
जैन और बौद्ध धर्म में क्या समानता थी?
उत्तर:

  • दोनों वैदिक धर्म से कटकर अलग हुए थे।
  • दोनों ने वेदों को प्रमाण नहीं माना था।
  • दोनों अहिंसा पर बल देते थे।
  • दोनों ने भिक्षुओं के संघ बनाए।

प्रश्न 29.
बुद्ध में क्या विशेषता थी?
उत्तर:
बुद्ध में लोक-प्रचलित धर्म, अंधविश्वास, कर्मकांड और पुरोहित प्रपंच पर हमला करने का साहस था। उन्होंने चमत्कारों की भी निंदा की।  उनका आग्रह तर्क, विवेक और अनुभव पर था। उनका बल नैतिकता पर था। उनकी पद्धति मनोवैज्ञानिक विश्लेषण की थी। उन्होंने वर्ण-व्यवस्था पर सीधा वार तो नहीं किया, पर अपनी संघ व्यवस्था में इसे कोई स्थान नहीं दिया।

प्रश्न 30.
बुद्ध की प्रमुख शिक्षाएँ क्या थीं?
उत्तर:
महात्मा बुद्ध की प्रमुख शिक्षाएँ निम्न थीं-

  • संसार में घृणा का अंत घृणा से न होकर प्रेम से होता था।
  • मनुष्य को अपने क्रोध पर दया से तथा बुराई पर भलाई से काबू पाना चाहिए।
  • मनुष्य की जाति जन्म से नहीं बल्कि कर्म से तय होती है।
  • सभी देशों में जाओ और बुद्ध धर्म का प्रचार करो।

प्रश्न 31.
सिकंदर के आक्रमण से कौन-से विलक्षण व्यक्ति सामने आए?
उत्तर:
सिकंदर के आक्रमण से चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य जैसे दो विलक्षण व्यक्ति सामने आए।

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प्रश्न 32.
चंद्रगुप्त और चाणक्य ने मिलकर क्या किया?
उत्तर:
चंद्रगुप्त और चाणक्य ने मिलकर राष्ट्रीयता का नारा बुलंद किया। युनानी सेना को खदेड़कर तक्षशिला पर अधिकार कर लिया। सिकंदर की मृत्यु के दो वर्ष बाद पाटलिपुत्र पर अधिकार कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की।

चाणक्य ने ‘अर्थशास्त्र’ लिखा। इसमें राजनीतिशास्त्र की बातें बताई गई हैं।

प्रश्न 33.
चाणक्य कैसा व्यक्ति था?
उत्तर:
चाणक्य चंद्रगुप्त का मंत्री था। वह बहुत तीव्र बुद्धि वाला था। उसी का दूसरा नाम ‘कौटिल्य’ है। वह सम्राट को स्वामी की तरह नहीं बल्कि प्रिय शिष्य की तरह देखता है। वह उद्देश्य को पाने में सफल होता है। चंद्रगुप्त की सफलता चाणक्य के बुद्धि चातुर्य का परिणाम है।

प्रश्न 34.
अर्थशास्त्र में किन विषयों पर प्रकाश डाला गया है?
उत्तर:
अर्थशास्त्र में व्यापार, वाणिज्य, कानून, न्यायालय, नगर-व्यवस्था, सामाजिक रीति-रिवाज, विवाह, तलाक, स्त्रियों के अधिकार, कृषि, लगान, खानों, कारखानों, दस्तकारियों, उद्योग-धंधों, मत्स्य उद्योग, जनगणना, जेल आदि विषयों पर प्रकाश डाला गया है।

प्रश्न 35.
पुस्तक में अशोक के बारे में क्या बताया गया है?
उत्तर:
अशोक 273 ई.पू. मौर्य साम्राज्य का उत्तराधिकारी बना। उसने पूर्वी तट के लिंग प्रदेश पर आक्रमण करके उसे जीत लिया। परंतु इसके भयंकर नरसंहार ने अशोक का हृदय-परिवर्तन कर दिया। उस पर बौद्ध धर्म का प्रभाव पड़ गया। उसने दूर देशों में बौद्ध धर्म का प्रचार किया। वह एक निर्माता भी था। उसने अनेक बड़ी इमारतों का निर्माण भी करवाया। 41 वर्षों तक शासन करने के उपरांत 232 ई.पू. में अशोक की मृत्यु हो गई। उसका नाम आज भी आदर के साथ लिया जाता है।

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 3 Questions and Answers Summary सिंधु घाटी की सभ्यता

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 3 Summary

भारत के अतीत की सबसे पहली तसवीर उस सिंधु घाटी सभ्यता में मिलती है, जिसके अवशेष सिंध में मोहनजोदड़ो और पश्चिमी पंजाब में हड़प्पा में मिले हैं। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा एक-दूसरे से काफी दूरी पर हैं। दोनों स्थानों पर इन खंडहरों की खोज मात्र एक संयोग थी। यह सभ्यता विशेष रूप से उत्तर भारत में दूर-दूर तक फैली थी। यह सभ्यता गंगा की घाटी तक फैली थी। सिंधु घाटी सभ्यता जिस रूप में मिली है, उससे इसके अत्यंत विकसित होने का अनुमान लगाया जा सकता है। इसके इस स्थिति में पहुँचने में हजारों साल लगे होंगे। यह सभ्यता धर्मनिरपेक्ष सभ्यता थी। धार्मिक तत्त्व मौजूद होने पर भी इस पर हावी नहीं थे।

सिंधु घाटी सभ्यता ने फारस मेसोपोटामिया और मिस्र की सभ्यताओं से संबंध स्थापित किया था और व्यापार किया था। यह ऐसी नागर सभ्यता थी जिसमें व्यापारी वर्ग धनाढ्य था। सड़कों पर दुकानों की कतारें थीं। यह सभ्यता हमें चली आती परंपरा और रहन-सहन की लोक-प्रचलित रीति-रिवाज़ों की दस्तकारी की, यहाँ तक कि पोशाकों के फैशन की याद दिलाता है। इस सभ्यता में केवल सुंदर चीजें ही नहीं बनी हैं बल्कि आधुनिक सभ्यता के उपयोगी और ज्यादा ठेठ चिह्नों, अच्छे हमामों और नीतियों के तंत्र का निर्माण भी किया है।

आर्यों का आना- सिंधु घाटी के सभ्यता के लोग कौन थे? कहाँ से आए थे? इनके बारे में ठीक से पता नहीं है। व्यावहारिक दृष्टि से उन्हें भारत का ही माना जा सकता है। सिंधु नदी में भयंकर बाढ़ आने से इस सभ्यता का अंत हो गया होगा। बाढ़ में नगर-गाँव बह गए होंगे। संभव है-मौसम परिवर्तन से जमीन सूखती चली गई हो, खेतों पर रेगिस्तान छा गया हो, बालू तह-पर-तह जमती गई होगी जिससे शहर की जमीन की सतह ऊँची उठ गई होगी। खुदाई में निकले मकान दो या तीन मंजिले जान पड़ते हैं। मौसम के परिवर्तनों का प्रभाव इलाके के निवासियों पर पड़ा होगा। सिंधु सभ्यता के निरंतर टूटने के प्रमाण मिलते हैं। यह संभव है कि आर्यों का प्रवेश सिंधु घाटी युग के लगभग एक हजार वर्ष बाद हुआ हो। सबसे बड़ा सांस्कृतिक समन्वय और मेल-जोल बाहर से आने वाले आर्यों एवं द्रविड़ जाति के लोगों के बीच हुआ। बाद के युगों में बहुत-सी जातियाँ आईं। सबने अपना प्रभाव डाला और फिर यही घुल-मिलकर रह गई।

प्राचीनतम अभिलेख, धर्मग्रंथ और पुराण- सिंधु घाटी की सभ्यता की खोज से पहले यह समझा जाता था कि हमारे भारतीय संस्कृति का सबसे पुराना इतिहास वेद है। आजकल अधिकांश विद्वान ऋग्वेद की ऋचाओं का समय ई. पू. 1500 मानते हैं। पर मोहनजोदड़ो की खुदाई के बाद से इन आरंभिक धार्मिक ग्रंथों को और पुराना साबित करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। मैक्समूलर ने इसे ‘आर्य मानव के द्वारा कहा गया पहला शब्द’ कहा है। यह भी कहा गया है कि वेद भारत के अन्य महाकाव्यों की संस्कृत की अपेक्षा अवेस्ता के अधिक निकट हैं। अवेस्ता की रचना ईरान में हुई थी।

वेद- बहुत से हिंदू वेदों को प्रकाशित धर्मग्रंथ मानते हैं। वेद की उत्पत्ति ‘विद्’ धातु से हुई है जिसका अर्थ है-‘जानना’! अत: वेद का सीधा-सादा अर्थ है-‘अपने समय के ज्ञान का संग्रह’। पर उसमें न मूर्तिपूजा है, न देव मंदिर। वैदिक युग के आर्यों में जीवन के प्रति इतनी उमंग थी कि उन्होंने आत्मा पर बहुत कम ध्यान दिया। वेद या ऋग्वेद मानव जाति की पहली पुस्तक है। इसमें मानव-मन के आरंभिक उद्गार मिलते हैं, काव्य-प्रवाह मिलता है।

हमें भारत में विचार की कर्म की दो समान्तर विकसित होती धाराएँ मिलती हैं। जो एक जीवन को स्वीकार करती हैं और दूसरी जो जिंदगी से बचकर निकल जाना चाहती हैं। वैदिक संस्कृति की मूल पृष्ठभूमि परलोकवादी या विश्व को निरर्थक मानने वाली नहीं है। जब भी भारत की सभ्यता में बहार आई, लोगों ने जीने की प्रक्रिया में आनंद लिया। ऐसे ही युगों में कला, साहित्य, संगीत, चित्रकला, रंगमंच आदि का विकास हुआ।

भारतीय संस्कृति की निरंतरता- भारतीय संस्कृति और सभ्यता तमाम परिवर्तनों के बावजूद आज भी बनी हुई है। इसी समय विशिष्टतावाद और छुआछूत का आरंभ दिखाई पड़ता है जो बाद में असह्य हो जाती है। यही प्रवृत्ति आधुनिक युग की जाति-व्यवस्था है। यह व्यवस्था लंबे समय तक बनी रही। इतिहास के लंबे दौर में भारत अलग-थलग नहीं रहा।

उपनिषद- उपनिषदों का समय ई.पू. 800 के आस-पास माना जाता है। वे हमें भारतीय आर्यों के चिंतन में एक कदम और आगे ले जाते हैं। उपनिषदों में जाँच-पड़ताल की चेतना और चीजों के बारे में सत्य की खोज का उत्साह दिखाई पड़ता है। वे किसी किस्म के दृढ़वाद को अपने रास्ते में नहीं आने देते। उनका जोर आत्म-बोध पर है, व्यक्ति में आत्मा-परमात्मा संबंधी ज्ञान पर है। उपनिषदों का सामान्य झुकाव अद्वैतवाद की ओर है। इनमें बिना सच्चे ज्ञान के कर्मकांड और पूजापाठ को व्यर्थ बताया गया है। उपनिषदों की प्रमुख विशेषता सच्चाई पर बल देना है। इसमें कामना की गई है-असत् से मुझे सत् की ओर ले चलो। अंधकार से मुझे प्रकाश की ओर ले चलो। इसमें हर श्लोक का अंत इस टेक से होता है-“चरैवेति चरैवेति” अर्थात् “चलते रहो चलते रहो”।

व्यक्तिवादी दर्शन के लाभ और हानियाँ- उपनिषदों में कहा गया है कि शरीर स्वस्थ हो, मन स्वच्छ हो और दोनों में अनुशासन हो। ज्ञानार्जन के लिए संयम, आत्म-पीडन और आत्म-त्याग जरूरी है। इस प्रकार की तपस्या का विचार भारतीय चिंतन में सहज रूप से निहित है। व्यक्तिवाद का यह परिणाम हुआ कि उन्होंने मनुष्य के सामाजिक पक्ष पर बहुत कम ध्यान दिया। हर व्यक्ति के लिए जीवन बँटा और बँधा हुआ था। उसके मन में समाज की समग्र कल्पना नहीं थी। बाद में भी ऐसा कोई प्रयास नहीं किया गया कि समाज के साथ एकात्मकता महसूस की जाए।

भौतिकवाद- हमारा प्राचीन साहित्य ताड़पत्रों या भोजपत्रों पर लिखा गया था। कागज पर लिखने का प्रचलन बाद में हुआ। जो पुस्तकें खो गईं, उनमें भौतिकवाद पर लिखा पूरा साहित्य है जिसकी रचना आरंभिक उपनिषदों के ठीक बाद में हई। राजनीतिक और आर्थिक संगठन पर ई.पू. चौथी शताब्दी में रचित कौटिल्य की प्रसिद्ध रचना ‘अर्थशास्त्र’ में भारत के प्रमुख दार्शनिक सिद्धांत हैं। भारत में भौतिकवाद के बहुत से साहित्य को पुरोहितों और धर्म के पुरातन-पंथी स्वरूप में विश्वास रखने वाले लोगों ने नष्ट कर दिए। भातिकवादियों ने विचार, धर्म और ब्रह्मज्ञान के अधिकारियों और स्वार्थ से प्रेरित विचारों का विरोध किया। उन्होंने हर तरह के जादू-टोने और अंधविश्वास की घोर निंदा की। उनके अनुसार वास्तविक अस्तित्व केवल विभिन्न रूपों में वर्तमान पदार्थ का और इस संसार का ही माना जाता है। इसके अलावा न कोई संसार है, न स्वर्ग और नरक है, न ही शरीर से अलग कोई आत्मा। नैतिक नियम मनुष्य द्वारा बनाई गई रूढ़ियाँ हैं।

महाकाव्य, इतिहास, परंपरा और मिथक- प्राचीन भारत के दो महाकाव्यों-रामायण और महाभारत को रूप ग्रहण करने में शायद सदियाँ लगी होंगी और उनमें बाद में भी टुकड़े जोड़े जाते रहे। इतने प्राचीन समय में रची जाने के बावजूद भी इनका भारतीय जीवन पर आज भी जीवंत प्रभाव दिखाई पड़ता है। ये दो ग्रंथ भारतीय जीवन के अंग बन गए हैं।

भारतीय पुराकथाएँ महाकाव्यों तक सीमित नहीं हैं। उनका इतिहास वैदिक काल तक जाता है। अधिकांश पुराकथाएँ और प्रचलित कहानियाँ वीरगाथात्मक हैं। इनमें वफादारी, साहस, लोकहित के लिए सदाचार और बलिदान की शिक्षा दी गई है। ये कहानियाँ पूर्णतः काल्पनिक हैं। यूनानियों, चीनियों और अरबवासियों की तरह प्राचीन काल में भारतीय इतिहासकार नहीं थे। अतः कालक्रम का निर्धारण कठिन है। कहूण की ‘राजतरंगिनी’ एकमात्र प्राचीन ग्रंथ है जिसे इतिहास माना जा सकता है। यह कश्मीर का इतिहास है जिसकी रचना ईसा की बारहवीं शताब्दी में की गई थी।

महाभारत- महाकाव्य के रूप में महाभारत एक महान रचना है। महाभारत का दर्जा विश्व की श्रेष्ठतम रचनाओं में है। यह रचना परंपरा और दंतकथाओं का तथा प्राचीन भारत की राजनीतिक और सामाजिक संस्थाओं का विश्वकोष है। परिस्थितियों के अनुसार वैदिक धर्म में संशोधन किए गए जिससे आधुनिक हिंदू धर्म निकला। महाभारत में हिंदुस्तान की बुनियादी एकता पर बल देने की कोशिश की गई है। महाभारत का युद्ध ई.पू. चौदहवीं शताब्दी के आस-पास हुआ होगा। महाभारत में श्रीकृष्ण से संबंधित आख्यान भी है और प्रसिद्ध काव्य भगवद्गीता भी है। गीता के दर्शन के अलावा इस ग्रंथ में शासन कला और सामान्य रूप से जीवन के नैतिक और आचार संबंधी सिद्धांतों पर जोर दिया गया है। महाभारत एक ऐसा समृद्ध भंडार है जिसमें अनेक अनमोल चीजें ढूँढी जा सकती हैं।

भगवद्गीता- भगवद्गीता महाभारत का अंश है। यह 700 श्लोकों का एक छोटा-सा महाकाव्य है। इसकी रचना बौद्धकाल से पहले हुई थी। इसकी लोकप्रियता अभी तक कम नहीं हुई है। इसमें दुविधाग्रस्त मानव को मार्गदर्शन मिलता है। गीता की असंख्य व्याख्याएँ व टीकाएँ की गईं। आधुनिक युग के विचार और कर्मक्षेत्र के नेताओं-तिलक, अरविंद घोष और गाँधी ने इसकी अपने ढंग से व्याख्या की है। इस काव्य का आरंभ युद्ध शुरू होने से पहले युद्धक्षेत्र में अर्जुन और कृष्ण के संवाद से होता है। गीता में जीवन के कर्तव्यों के निर्वाह के लिए कर्म का आह्वान किया गया है और अकर्मण्यता की निंदा की गई है। गीता सभी संप्रदायों व वर्गों को मान्य हुई है।

प्राचीन भारत में जीवन और कर्म- बुद्ध के समय से पहले का वृत्तांत हमें जातक कथाओं में मिलता है। जातक कथाओं में उस समय का वर्णन मिलता है जब भारत की दो प्रधान जातियों-द्रविड़ों और आर्यों का अंतिम रूप से मेल हो रहा था। जातक पुरोहित या ब्राह्मण परंपरा तथा क्षत्रिय या शासक परंपरा के विरोध में लोक-परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उस समय आमदनी का एकमात्र जरिया लगान था। लगान उपज का छठा भाग होता था। जातकों के वर्णन में एक खास तरह का विकास उभर कर सामने आता है। विशेष दस्तकारियों से जुड़े लोगों की अलग बस्तियाँ और गाँव थे। एक गाँव बढ़इयों तथा एक गाँव लोहारों का था। पेशेवरों के गाँव शहरों के पास बसे हुए थे। जातकों में सौदागरों की समुद्री यात्राओं का भी हाल है। भारत में लिखने की प्रथा बहुत पुरानी है। पाषाण युग के मिट्टी के पुराने बर्तनों पर ब्राह्मी लिपि के अक्षर मिले हैं। ईसा पूर्व छठी या सातवीं शताब्दी में पाणिनि ने संस्कृत भाषा में अपने प्रसिद्ध व्याकरण की रचना की। उस समय तक संस्कृत का रूप स्थिर हो चुका था। औषध विज्ञान की पाठ्य-पुस्तकें और अस्पताल भी थे। औषधि पर चरक की तथा शल्य चिकित्सा पर सुश्रुत की पुस्तकें मिलती हैं। महाकाव्यों के युग में वनों में एक तरह के विश्वविद्यालयों का जिक्र आया है। कुछ वर्ष तक वहाँ प्रशिक्षण लेकर विद्यार्थी वापस लौटकर गृहस्थ जीवन बिताते थे।

बनारस हमेशा शिक्षा का केंद्र रहा। बुद्ध के समय में भी वह प्राचीन केंद्र माना जाता था। तक्षशिला विश्वविद्यालय विशेष रूप से विज्ञान, चिकित्साशास्त्र और कलाओं के लिए मशहूर था। तक्षशिला का स्नातक होना गर्व की बात थी। पाणिनि ने यहीं से शिक्षा प्राप्त की थी। तथ्यों के आधार पर पता चलता है कि सुदूर अतीत के भारतीय खुले दिल के, आत्म- विश्वासी, परंपरावादी, मर्यादा और मूल्यों को महत्त्व देने वाले जीवन का सहज भाव से आनंद लेने वाले, मौत का लापरवाही से सामना करने वाले लोग थे।

महावीर और बुद्ध : वर्ण व्यवस्था- जैन धर्म और वुद्ध धर्म दोनों वैदिक धर्म से कटकर अलग हुए थे। उन्होंने वेदों को प्रमाण नहीं माना। दोनों अहिंसा पर बल देते थे। वे यथार्थवादी और बुद्धिवादी थे। वे जीवन और विचार में तपस्या के पहलू पर बल देते थे। महावीर और बुद्ध समकालीन थे। बुद्ध में लोक-प्रचलित धर्म, अंधविश्वास, कर्मकांड और पुरोहित प्रपंच पर हमला करने का साहस था। उनका आग्रह तर्क, विवेक और अनुभव पर था।

बुद्ध की शिक्षा- बुद्ध का संदेश उन भारतीयों के लिए नया और मौलिक था, जो ब्रह्मज्ञान की गुत्थियों में डूबे रहते थे। बुद्ध ने अपने शिष्यों से कहा-“सभी देशों में जाओ और इस धर्म का प्रचार करो।” बुद्ध ने विवेक, तर्क और अनुभव का सहारा लिया और उन्होंने लोगों से कहा कि वे अपने मन के भीतर सत्य की खोज करें। बुद्ध की पद्धति मनोवैज्ञानिक विश्लेषण की पद्धति थी। जीवन में चेतना और दुःख पर बौद्ध धर्म में बहुत बल दिया गया है। बुद्ध ने जिन चार आर्य-सत्यों का निरूपण किया है, उनका संबंध दुःख से है। बुद्ध ने मध्यम मार्ग अपनाने की बात की है। यह मध्यम मार्ग अष्टांग मार्ग है।

बुद्ध कथा- बुद्ध की वह संकल्पना जिसे प्यार से भरे अनगिनत हाथों ने पत्थर, संगमरमर और काँसे में ढालकर आकार दिया, भारतीयों के विचारों की समग्र आत्मा की, या कम से कम उसके एक तेजस्वी पक्ष का प्रतीक है। कमल के फूल पर बैठे हुए शांत और धीर, वासनाओं और लालसाओं से परे इस संसार के तूफानों और संघर्षों से दूर वे इतनी दूर, पहुँच से परे मालुम होते हैं। बुद्ध के बारे में सोचते हुए आज भी एक जीती-जागती थरथराहट पैदा करने वाली अनुभूति से गुजरते हैं। उस राष्ट्र और जाति के पास निश्चय ही समझदारी और आंतरिक शक्ति की गहरी संचित निधि होगी जो ऐसे भव्य आदर्श को जन्म दे सकती है।

चंद्रगुप्त और चाणक्य : मौर्य साम्राज्य की स्थापना- भारत में बौद्ध धर्म का प्रचार धीरे-धीरे हुआ। पश्चिमोत्तर प्रदेश पर सिकंदर के आक्रमण से दो विलक्षण व्यक्ति सामने आए-चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य। दोनों का मेल कारगर सिद्ध हुआ। दोनों मगध के शक्तिशाली शासक नंद द्वारा साम्राज्य से निकाल दिए गए थे। चंद्रगुप्त की भेंट सिकंदर से हुई। सिकंदर की मृत्यु के दो ही वर्ष में पाटलिपुत्र पर अधिकार करके चंद्रगुप्त ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना की। चाणक्य अर्थात् कौटिल्य ने ‘अर्थशास्त्र’ की रचना की जो राजनीति का महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है। इस पुस्तक में व्यापार, वाणिज्य, कानून, न्यायालय, नगर व्यवस्था, सामाजिक रीति-रिवाज़, विवाह, तलाक, कृषि-लगान, दस्तकारियों, जनगणना आदि पर चर्चा की गई है।

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Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 4 Questions and Answers Summary युगों का दौर

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Class 8 Hindi Bharat Ki Khoj Chapter 4 Question Answers Summary युगों का दौर

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 4 Question and Answers

प्रश्न 1.
मौर्य साम्राज्य के अवसान पर उसकी जगह किसने ली?
उत्तर:
मौर्य साम्राज्य के अवसान पर उसकी जगह शुंग वंश ने ली।

प्रश्न 2.
मेनांडर किस नाम से प्रसिद्ध हुआ?
उत्तर:
मेनांडर राजा मिलिंद के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

प्रश्न 3.
साँची के निकट कौन-सी लाट थी?
उत्तर:
साँची के निकट बेसनगर में ग्रेनाइट पत्थर की एक लाट है जो हेलिओदो स्तंभ के नाम से प्रसिद्ध है। इस पर संस्कृत का एक लेख खुदा था।

प्रश्न 4.
कुषाणों ने क्या काम किया?
उत्तर:
कुषाणों ने शकों. को पराजित करके दक्षिण की ओर खदेड़ दिया। कुषाणों ने पूरे उत्तर भारत पर और मध्य एशिया के बहुत बड़े भाग पर अपना मजबूत साम्राज्य कायम कर लिया।

प्रश्न 5.
कुषाण काल में बौद्ध धर्म की क्या स्थिति थी?
उत्तर:
कुषाण काल में बौद्ध धर्म दो संप्रदायों में बँट गया था-महायान और हीनयान। दोनों में मतभेद उठ खड़े हए। समस्याओं पर विवाद आयोजित किए जाते थे। महायान के सिद्धांतों का प्रचार चीन में हुआ तथा श्रीलंका और बर्मा के लोग हीनयान को मानते रहे। कुषाणों ने अपना भारतीयकरण कर लिया था।

प्रश्न 6.
गुप्त वंश का शासन कब से कब तक रहा?
उत्तर:
चौथी शताब्दी के आरंभ से लेकर 150 वर्षों तक गुप्त वंश ने उत्तर में एक बड़े एवं शक्तिशाली राज्य पर शासन किया। इसके बाद 150 वर्ष तक उनके उत्तराधिकारी अपने बचाव में लगे रहे और साम्राज्य सिकुड़कर छोटा होता चला गया।

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प्रश्न 7.
हूणों को किसने पराजित किया?
उत्तर:
हूणों को कन्नौज के राजा हर्षवर्धन ने पराजित किया। हर्ष ने उत्तर से मध्य भारत तक एक शक्तिशाली राज्य की स्थापना की। हर्षवर्धन कवि और नाटककार थे। उसने अपनी राजधानी उज्जयिनी को सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनाया।

प्रश्न 8.
भारत में जिस सभ्यता का निर्माण किया गया, उसका मूल आधार क्या था?
उत्तर:
भारत में जिस सभ्यता का निर्माण किया गया, उसका मूल आधार स्थिरता और सुरक्षा की भावना थी।

प्रश्न 9.
भारतीय रंगमंच की क्या विशेषता थी?
उत्तर:
भारतीय रंगमंच अपने विचारों में विकास में पूरी तरह स्वतंत्र था। ऋग्वेद की ऋचाओं में रंगमंच का उद्गम खोजा जा सकता है।

प्रश्न 10.
संस्कृत नाटकों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
भास ने 13 नाटक लिखे।

  • अश्वघोष का प्राचीनतम नाटक है।
  • कालिदास ने ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ नाटक लिखा।
  • शूद्रक ने ‘मृच्छकटिक’ नाटक लिखा।
  • विशाखदत्त का ‘मुद्राराक्षस’ नाटक प्रसिद्ध है।

प्रश्न 11.
संस्कृत भाषा के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर:
संस्कृत भाषा एक समृद्ध और अलंकृत भाषा है। इसके व्याकरण का ढाँचा पाणिनि ने तैयार किया। संस्कृत आधुनिक भारतीय भाषाओं की जननी है।

प्रश्न 12.
प्राचीन भारत में कौन-सा उद्योग बहुत विकसित था?
उत्तर:
प्राचीन भारत में जहाज बनाने का उद्योग बहुत विकसित था। उस समय बनाए गए जहाजों का वर्णन ब्यौरेवार मिलता है। भारतीय बंदरगाहों का भी उल्लेख मिलता है।

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प्रश्न 13.
भारतीय कला का प्रभाव विदेशों में किस प्रकार दिखाई देता है?
उत्तर:
जावा और बाली के मशहूर नृत्य भारत से लिए गए हैं। कंबोडिया में वर्णमाला दक्षिण भारत से ली गई है। भारतीय वास्तुकला का प्रभाव अंगकोर और बोरोबुदूर की इमारतों में दिखाई पड़ता है। भारतीय संगीत ने चीन और सुदूर-पूर्व के अलावा एशियाई संगीत को प्रभावित किया। मथुरा के संग्रहालय में बोधिसत्व की विशाल मूर्तियाँ हैं।

प्रश्न 14.
अजंता-एलोरा की गुफाओं के बारे में बताइए।
उत्तर:
गुप्तकाल के दौरान अजंता की गुफाएँ खोदी गईं। उनमें भित्तिचित्र भी बनाए गए। इन चित्रों को बौद्ध भिक्षुओं ने बनाया था। इनमें स्त्रियों के विभिन्न रूपों को दर्शाया गया था। 7वीं-8वीं शताब्दी में ठोस चट्टान को काटकर एलोरा की विशाल गुफाएँ तैयार हुई हैं। एलिफेंटा की गुफाओं में नटराज शिव की एक खंडित मूर्ति नृत्य मुद्रा में है।

प्रश्न 15.
भारत के विदेशी व्यापार के बारे में बताइए।
उत्तर:
भारत का व्यापार दूर-दूर तक फैला था। भारत का कपड़ा उद्योग बहुत विकसित था। यहाँ रेशमी कपड़ा भी बनता था। आरंभिक शताब्दियों में भारत में रसायन शास्त्र का विकास अन्य देशों की तुलना में अधिक हुआ। दूसरे देशों में भारत के फौलाद और लोहे की बहुत कद्र थी।

प्रश्न 16.
प्राचीन भारत में गणित शास्त्र की क्या स्थिति थी?
उत्तर:
आधुनिक अंकगणित और बीजगणित की नींव भारत में पड़ी। भारत में ज्यामिति का भी विकास हुआ। शून्य की विधि भी निकाली गई।

गणित में भास्कर महत्त्वपूर्ण थे। इनका ‘लीलावती’ ग्रंथ प्रसिद्ध है। ब्रह्मपुत्र ने शून्य पर लागू होने वाले नियम निश्चित किए।

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Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 4 Summary

गुप्त शासन में राष्ट्रीयता और साम्राज्यवाद- मौर्य शासन की समाप्ति पर शुंग वंश आया। भारतीय और यूनानी संस्कृतियों के मेल से अफगानिस्तान और सरहदी सूबे के क्षेत्र में गांधार की यूनानी बौद्ध कला का जन्म हुआ। मध्य एशिया में शक आक्सस नदी की घाटी में बस गए थे। ये शक बौद्ध और हिंदू हो गए थे। कुषाणों ने शकों को हराकर दक्षिण की ओर खदेड़ दिया। शक काठियावाड़ और दक्खन की ओर चले गए। कुषाण काल में बौद्ध धर्म दो सम्प्रदायों में बँट गया-महायान और हीनयान। इनमें विवाद होने लगा। एक नाम नागार्जुन उभरा। वह बौद्धशास्त्रों और भारतीय दर्शन के विद्वान थे। उन्हीं के कारण महायान की विजय हुई। चीन में महायान तथा लंका-बर्मा में हीनयान को मानते रहे।

चंद्रगुप्त ने गुप्त साम्राज्य स्थापित किया। 320 ई. में गुप्त युग का आरंभ हुआ। इसमें कई महान शासक हुए। 150 वर्ष तक गुप्त वंश ने उत्तर में एक शक्तिशाली और समृद्ध राज्य स्थापित किया। भारत में हूणों का शासन आधी शताब्दी तक ही रहा। इनका दमन करके कन्नौज के राजा हर्षवर्धन ने उत्तर से लेकर मध्य भारत तक एक शक्तिशाली राज्य की स्थापना की। हर्षवर्धन कवि और नाटककार था। उसकी मृत्यु 648 ई. में हुई थी।

दक्षिण भारत- दक्षिण भारत में मौर्य साम्राज्य के सिमटकर अंत हो जाने से एक हजार साल से भी ज्यादा समय तक बड़े-बड़े राज्य फूले-फले। दक्षिण भारत अपनी बारीक दस्तकारी और समुद्री व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। उत्तर भारत पर बार-बार होने वाले हमलों का सीधा प्रभाव दक्षिण पर नहीं पड़ा। इसका परोक्ष प्रभाव जरूर पड़ा कि बहुत से लोग उत्तर से दक्षिण में जाकर बस गए। इन लोगों में राजगीर, शिल्पी और कारीगर भी शामिल थे।

शांतिपूर्ण विकास और युद्ध के तरीके- मौर्य, कुषाण, गुप्त और दक्षिण भारत में आंध्र. चालुक्य, राष्ट्रकूट के अलावा और भी ऐसे राज्य हैं जहाँ दो-दो, तीन-तीन सौ वर्षों तक शासन रहा। जब कभी दो राज्यों के बीच कोई युद्ध या आंतरिक आंदोलन होता था तो आम जनता की दिनचर्या में बहुत कम हस्तक्षेप किया जाता था। यह धारणा भ्रामक है कि अंग्रेजी राज ने पहली बार भारत में शांति और व्यवस्था कायम की। अंग्रेजों के शासन में देश अवनति की पराकाष्ठा पर था। इस समय राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था टूट चुकी थी।

प्रगति बनाम सुरक्षा- भारत में जिस सभ्यता का निर्माण किया गया, उसका मूल आधार स्थिरता और सुरक्षा की भावना थी। भारतीय दर्शन व्यक्तिवादी है; जबकि भारत का सामाजिक ढाँचा सामुदायिक है। पाबंदी के बावजूद पूरे समुदाय में लचीलापन था। रीति-रिवाज बदले जा सकते थे। यहाँ समन्वय की भावना थी। राजा आते-जाते रहे, पर व्यवस्था नींव की तरह कायम रही। ऐसे हर तत्त्व ने जो बाहर से आया और जिसे भारत में अपने आप में समा लिया। भारत को कुछ दिया और उससे बहुत कुछ लिया।

भारत का प्राचीन रंगमंच- भारतीय रंगमंच अपने मूलरूप में विचारों और विकास में पूरी तरह स्वतंत्र था। इसका उद्गम ऋग्वेद की ऋचाओं में खोजा जा सकता है। रंगमंच की कला पर रचित ‘नाट्यशास्त्र’ ईसा की तीसरी शताब्दी की रचना बताई जाती है। यह माना जाता है कि नियमित रूप से लिखे गए संस्कृत नाटक ई.पू. तीसरी शताब्दी तक प्रतिष्ठित हो चुके थे। भास द्वारा रचित तेरह नाटकों का संग्रह मिला है। संस्कृत नाटकों में प्राचीनतम नाटक अश्वघोष के हैं। उसने ‘बुद्धचरित’ नाम से बुद्ध की जीवनी लिखी। यह ग्रंथ भारत, चीन तिब्बत में बहुत प्रसिद्ध हुआ। 1789 ई. में कालिदास के नाटक ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ का अंग्रेजी अनुवाद सर विलियम जोर ने किया। गेटे पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ा। कालिदास को संस्कृत साहित्य का सबसे बड़ा कवि और नाटककार माना गया है। कालिदास की एक लंबी कविता ‘मेघदूत’ है। शूद्रक का नाटक ‘मृच्छकटिक’ अर्थात् मिट्टी की एक गाड़ी प्रसिद्ध रचना है। विशाखदत्त का नाटक ‘मुद्राराक्षस’ था। इस ऊँचे दर्जे के रंगमंच के अलावा एक लोकमंच भी रहा है। इसका आधार भारतीय पुराकथाएँ तथा महाकाव्यों से ली गई कथाएँ होती थीं। दर्शकों को इन विषयों की अच्छी जानकारी रहती थी। संस्कृत साहित्य के पतन के काल में भाषा ने अपनी कुछ शक्ति और सादगी खो दी थी।

दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय उपनिवेश और संस्कृति- ईसा की पहली शताब्दी से लगभग 900 ई. तक उपनिवेशीकरण की चार प्रमुख लहरें दिखाई पड़ती हैं। इन साहसिक अभियानों की सबसे विशिष्ट बात यह थी कि इनका आयोजन स्पष्टतः राज्य द्वारा किया जाता था। इन बस्तियों का नामकरण पुराने भारतीय नामों के आधार पर किया गया जिसे अब कंबोडिया कहते हैं, उस समय कंबोज़ कहलाया। जावा स्पष्ट रूप यवद्वीप है। साहसिक व्यवसायियों और व्यापारियों के बाद धर्म-प्रचारकों का जाना शुरू हुआ होगा। प्राचीन भारत में जहाज बनाने का उद्योग बहुत विकसित और उन्नति पर था। अजंता के भित्तिचित्रों में लंका-विजय और हाथियों को ले जाते हुए जहाजों के चित्र हैं।

विदेशों पर भारतीय कला का प्रभाव- भारतीय सभ्यता ने विशेष रूप से दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों में अपनी जड़ें जमाईं। चंपा अंगकोर श्री विजय आदि स्थानों पर संस्कृत के बड़े-बड़े अध्ययन केंद्र थे। वहाँ के शासकों के विशुद्ध भारतीय और संस्कृत नाम थे। इंडोनेशिया और बाली आदि लेने अभी तक भारतीय संस्कृति को कायम रखा है। कंबोडिया की वर्णमाला दक्षिण भारत से ली गई है और बहुत से संस्कृत शब्दों को थोड़े हेरफेर से लिया गया है। जावा में बुद्ध के जीवन की कथा पत्थरों पर अंकित है। अंगकोर के विशाल मंदिर के चारों ओर विशाल खंडहरों का विस्तृत क्षेत्र है। कंबोडिया के राजा का नाम जयवर्मन था जो ठेठ भारतीय नाम है।

भारतीय कला का भारतीय दर्शन और धर्म से बहुत गहरा रिश्ता है। भारतीय संगीत जो यूरोपीय संगीत से इतना भिन्न है, अपने ढंग से बहुत विकसित था। मथुरा के संग्रहालय में बोधिसत्व की एक विशाल शक्तिशाली प्रभावशाली पाषाण प्रतिमा है। भारतीय कला अपने आरंभिक काल में प्रकृतिवाद से भरी है। भारतीय कला पर चीनी प्रभाव दिखाई देता है। गुप्त काल को भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है। इसी काल में अजंता की गुफाएँ खोदी गईं तथा उनमें भित्तिचित्र बनाए गए। इन चित्रों को बौद्ध भिक्षुओं ने बनाया था। इनमें सुंदर स्त्रियाँ, राजकुमारियाँ, गायिकाएँ, नर्तकियाँ बैठी हैं।

सातवीं-आठवीं शताब्दी में ठोस चट्टान को काटकर एलोरा की विशाल गुफाएँ तैयार हुईं। एलिफेंटा की गुफाओं में नटराज-शिव की एक खंडित मूर्ति है जिसमें शिव नृत्य की मुद्रा में है। ब्रिटिश संग्रहालय में विश्व का सृजन और नाश करते हुए नटराज शिव की एक मूर्ति है।

भारत का विदेशी व्यापार- ईस्वी सन् के एक हजार वर्षों के दौरान भारत का व्यापार दूर-दूर तक फैल चुका था। भारत में प्राचीन काल से ही कपड़े का उद्योग बहुत विकसित हो चुका था। यहाँ रेशमी कपड़ा भी बनता था। कपड़े रंगने की कला भी उन्नत थी। भारत में रसायन शास्त्र का विकास और देशों की तुलना में अधिक हुआ था। भारतीय लोहे व फौलाद का दूसरे देशों में बहुत महत्त्व था। भारतीयों को बहुत-सी धातुओं की जानकारी थी। औषधियों के लिए धातुओं का मिश्रण तैयार करना भी भारतीय जानते थे।

प्राचीन भारत में गणित शास्त्र- आधुनिक अंकगणित और बीजगणित की नींव भारत में ही पड़ी, ऐसा माना जाता है। बीजगणित का सबसे प्राचीन ग्रंथ आर्यभट्ट का है जिसका जन्म 427 ई. में हुआ था। भारतीय गणित शास्त्र में अगला नाम भास्कर का है। ब्रह्मपुत्र प्रसिद्ध खगोल शास्त्री था जिसने शून्य पर लागू होने वाले नियम निश्चित किए थे। अंकगणित की प्रसिद्ध पुस्तक ‘लीलावती’ है जिसके रचयिता भास्कर हैं।

विकास और ह्रास- चौथी से छठी शताब्दी तक गुप्त साम्राज्य समृद्ध होता रहा। स्वर्ण-युग के समाप्त होते ही ह्रास के लक्षण प्रकट होने लगते हैं। सातवीं शताब्दी में हर्ष के शासनकाल में उज्जयिनी जो गुप्त शासकों की शानदार राजधानी थी, एक अन्य शक्तिशाली साम्राज्य का केंद्र बनती है। आगे के समय में वह भी कमजोर पड़कर खत्म हो जाती है। नौवीं शताब्दी में मिहिरभोज एक संयुक्त राज्य कायम करता है। 11वीं शताब्दी में एक बार दूसरा भोज सामने आता है। भीतरी कमजोरी ने भारत को जकड़ रखा था। छोटे-छोटे राज्यों में बँटे होने पर भी भारत समृद्ध देश था।

साहित्य के क्षेत्र में भवभूति आखिरी बड़ा व्यक्ति था। भारत समय के साथ-साथ क्रमशः अपनी प्रतिभा और जीवन-शक्ति को खोता जा रहा था। यह प्रक्रिया धीमी थी और कई सदियों तक चलती रही। राधाकृष्णन का कहना था कि भारतीय दर्शन ने अपनी शक्ति राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ खो दी है। हर सभ्यता के जीवन में ह्रास और विघटन के दौर आते रहते हैं। भारत ने उन सबसे बचकर नए सिरे से अपना कायाकल्प किया था। भारत के सामाजिक ढाँचे ने भारतीय सभ्यता को अद्भुत दृढ़ता दी थी। हर तरफ ह्रास हुआ- विचारों में, दर्शन में, राजनीति में, युद्ध पद्धति में और बाहरी दुनिया के बारे में जानकारी और संपर्क में।

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Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 1 Questions and Answers Summary अहमदनगर का किला

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Class 8 Hindi Bharat Ki Khoj Chapter 1 Question Answers Summary अहमदनगर का किला

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 1 Question and Answers

प्रश्न 1.
इस पाठ में किसकी कौन-सी यात्रा का वर्णन किया गया है?
उत्तर:
इस पाठ में पं. जवाहरलाल नेहरू की नौवीं जेल-यात्रा का वर्णन किया गया है। यह जेल अहमदनगर जिले की थी।

प्रश्न 2.
इस जेल में आए नेहरू जी को कितना समय हुआ था?
उत्तर:
‘इस जेल में आए नेहरू जी को बीस महीने से भी अधिक का समय हुआ था।

प्रश्न 3.
अहमदनगर के किले का चाँद नेहरू जी को क्या याद दिलाता था?
उत्तर:
अहमदनगर के किले का चाँद नेहरू जी को याद दिलाता था कि उनके जेल का एक महीना और बीत गया है तथा अँधेरे के बाद उजाला होता है।

प्रश्न 4.
किले की जेल में लेखक ने क्या काम शुरू कर दिया?
उत्तर:
नेहरू जी ने अहमदनगर के किले की जेल में दूसरी जेलों की तरह बागवानी का कार्य शुरू कर दिया। वह प्रतिदिन तपती धूप में कई घंटे फूलों की क्यारियाँ बनाते थे।

प्रश्न 5.
यहाँ की मिट्टी कैसी थी?
उत्तर:
अहमदनगर के किले की मिट्टी बहुत खराब थी। यहाँ की मिट्टी पथरीली, पुराने मलबे और अवशेषों से भरी हुई थी।

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 1 Questions and Answers Summary

प्रश्न 6.
अहमदनगर के किले के साथ कौन-सी कहानी जुड़ी हुई है?
उत्तर:
अहमदनगर के किले के साथ चाँदबीवी नामक एक सुंदर महिला के साहस की कहानी जुड़ी हुई है। उसने इस किले की रक्षा के लिए अकबर की शाही सेना के विरुद्ध तलवार उठाकर अपनी सेना का नेतृत्व किया था।

प्रश्न 7.
खुदाई में नेहरू जी को क्या मिला?
उत्तर:
खुदाई के दौरान नेहरू जी को जमीन की सतह के बहुत नीचे दबे हुए प्राचीन दीवारों के हिस्से, कुछ गुंबदों और इमारतों के ऊपरी हिस्से मिले।

प्रश्न 8.
अतीत का दबाव कैसा होता है?
उत्तर:
अतीत का दबाव अच्छा हो या बुरा, दोनों ही रूपों में अभिभूत करता है। कभी-कभी यह दबाव दम-घोंटू भी होता है। खासकर उन लोगों के लिए जिनकी जड़ें बहुत पुरानी सभ्यताओं में होती हैं।

प्रश्न 9.
लेखक किस-किसका वारिस है?
उत्तर:
लेखक उन सबका वारिस है जिसे मानवता ने हजारों सालों में हासिल किया है। वह मानवता की विजयों, पराजयों, साहसिक कार्यों आदि का उत्तराधिकारी है।

प्रश्न 10.
लेखक क्या अनुभव करता है?
उत्तर:
लेखक यह अनुभव करता है कि वह मानवता की विशिष्ट विरासत को लिखना तो चाहता है, पर विषय कीजटिलता और कठिनता उसे भयभीत करती है। उसे लगता है कि वह इस विषय को केवल सतही तौर पर ही छू सकेगा।

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 1 Questions and Answers Summary

Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 1 Summary

यह नेहरू जी की नौवीं जेल-यात्रा थी। यहाँ आए उन्हें बीस मास से अधिक का समय हो चुका था। जब वे यहाँ पहुँचे थे तो अँधेरे आकाश में झिलमिलाते दूज़ के चाँद ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद जब भी चाँद निकलता तो उन्हें जेल में एक मास बीत जाने का अहसास होता था। वे मानते थे कि चाँद उनके जेल-जीवन का स्थायी सहचर रहा है। चाँद उन्हें यह भी याद दिलाता है कि अँधेरे के बाद उजाला आता है।

अतीत का भारत – नेहरू जी ने दूसरी जेलों की तरह अहमदनगर की जेल में भी बागवानी करनी शुरू कर दी थी। वे तेज़ धूप में भी फूलों की क्यारियाँ बनाते थे। वहाँ की मिट्टी पथरीली और पुराने मलबे तथा अवशेषों से भरी हुई है। इस किले की एक घटना उन्हें याद आती थी। चाँदबीवी नाम की एक सुंदर महिला ने इस किले की रक्षा के लिए अकबर की शाही सेना के विरुद्ध तलवार उठाकर सेना का नेतृत्व किया था। लेकिन अंत में उसकी हत्या अपने ही एक आदमी के हाथों हुई। खुदाई के दौरान नेहरू जी को जमीन में दबे हुए प्राचीन दीवारों के हिस्से, कुछ गुंबद तथा इमारतों के ऊपरी हिस्से मिले। नेहरू जी इस कार्य को जारी नहीं रख सके. क्योंकि न तो इसके लिए उन्हें अधिकारियों की मंजरी मिली और न ही इसे आगे बढ़ाने के लिए उनके पास साधन थे। अब उन्होंने कुदाल छोड़कर कलम हाथ में ले ली। उन्हें लिखने की पूरी स्वतंत्रता नहीं थी। वह पहले की ही तरह अपने आज के विचारों और क्रियाकलापों के साथ संबंध स्थापित करके उसके बारे में लिख सकते थे। गेटे ने एक बार कहा था-“इस तरह का इतिहास-लेखन अतीत के भारी बोझ से एक सीमा तक राहत दिलाता है।”

अतीत का दबाव-दबाव कभी-कभी दम-घोंटू होता है। खास तौर पर उन लोगों के लिए जिनकी जड़ें बहुत पुरानी सभ्यताओं में होती हैं। जैसे-भारत और चीन की सभ्यताएँ।

आखिर मेरी विरासत क्या है? मैं किन बातों का उत्तराधिकारी हूँ? क्या उन सबका जिसे मानवता ने दसियों-हजारों सालों के दौरान हासिल किया। उनकी विजयों, पराजयों, मानव के साहसिक कारनामों का वह वारिस है। भारतवासियों की विरासत में एक खास बात है, पर अनौखी नहीं है। यह हम सब लोगों पर विशेष रूप से लागू होती है। इस विशेषता से हमारा वर्तमान स्वरूप बना है और भावी रूप बनेगा। ऐसे विचार लेखक के मन में बसे हुए हैं। वह इसी के बारे में लिखना चाहता है। विषय की कठिनता व जटिलता उसे भयभीत करती है।

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NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 1 How the Camel Got His Hump

NCERT Solutions for Class 8 English

How the Camel Got His Hump NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 1

How the Camel Got His Hump NCERT Text Book Questions and Answers

How the Camel Got His Hump Comprehension check – I

Question 1.
What tasks, do you think, were assigned to the dog and the ox?
Answer:
The dog carried the task of fetching and carrying things, and the ox helped man plough fields.

Question 2.
Why did the camel live in the middle of the desert?
Answer:
The camel lived in the middle of the desert because he did not want to work, and did not want to be disturbed by anyone.”

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 1 How the Camel Got His Hump

Question 3.
What made the dog, the horse and the ox very angry?
Answer:
The camel did not do his share of work. So, the man made the dog, the horse and the ox do double the amount of work they used to do. This made them furious.

Question 4.
How did the Djinn know the horse was complaining against the camel?
Answer:
The Djinn knew that the horse was complaining against the camel because it was his camel. Moreover, the horse was ranting against “a thing in the middle of the Desert with a long neck and long legs”. The Djinn understood that the horse was talking about his camel.

How the Camel Got His Hump Comprehension check – II

Question 1.
The camel was looking at this own reflection in the pool. What does it suggest to you about the camel?
Answer:
It suggests that the camel was narcissistic, who loved himself more than anything else in the world. His love for himself and idleness characterized him.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 1 How the Camel Got His Hump

Question 2.
The camel said, “Humph ” repeatedly. How did it affect him?
Answer:
When the Djinn came to know that the camel says “Humph” all the time, he gave him a real hump on his back.

Question 3.
What, according to the Djinn, was the use of the “humph ’’?
Answer:
The “humph” would help the camel feel full in his stomach for three days so that he can work without food and make up for lost time.

Question 4.
“…he has never yet learnt to behave ”. In the light of this, what is the writer’s opinion about the camel?
Answer:
The writer believes that the camel is a lazy animal, and does not do his fair share of the work. He finds that all the other animals are very hard-working, whereas the camel sits around all day eating thorns and prickles. According to the writer, the camel spends most of his time in idleness.

How the Camel Got His Hump Exercise Questions and Answers

Discuss the following topics in groups.

Encourage the students to discuss the given questions in groups.

Question 1.
Can this story be factually true?
Answer:
No, this story cannot be factually true. The author is making up a story to entertain the readers. In reality, the camel is a hard-working animal that spends his days helping people who live in deserts. He carries heavy loads and makes their life comfortable. He carries them from one place to another.The hump on the camel’s back stores fat so that he can survive in the hot desert environment of the desert where food is scarce and limited.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 1 How the Camel Got His Hump

Question 2.
What, according to you, is the story about?
Answer:
The story is about how animals began to help human beings in doing work such as ploughing fields, carrying things and going from one place to another. It shows how we are dependent on animals and how each living being on this earth is allotted their share of work and contributes to the world in the best way they can. This is why we should all take our work seriously and do our fair share. It would be unjust to be lazy when there is so much work to be done around us.

The story demonstrates this way of thought by saying that the camel got his hump because he was not willing to do his fair share of the work and to help humans. So, the Djinn gave him a hump so that he did not have to eat for three days and do his work easily. The writer uses the sound that camel makes ‘humph’ and relates it to its hump, saying that there is a connection between the two. However, it is not true, and is merely said for the sake of humour.

Question 3.
What did you do over the weekend? Were you generally active or idle?
Answer:
I met with all my friends over the weekend to plan a getaway on my upcoming birthday. All of us met at a popular restaurant in the city and then headed for my home. There, we all sat and chatted over fresh lime sodas and cucumber sandwiches. We discussed our school and college days. It was a lot of fun. I wish all my weekends could be spent this way.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 1 How the Camel Got His Hump

Question 4.
There are broadly two categories of workers—those who prefer to do today what they can do tomorrow, and those who prefer to do tomorrow what they can do today. Where do you belong?
Answer:
Unfortunately, I belong to those who prefer to do tomorrow what they can do today. I believe that I do most of my things on the last day, as I tend to procrastinate. I am trying to break this habit, but it is not an easy one to get out of. I often get into a lot of trouble for this. I wish I belonged to the group who do their things beforehand.

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NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 10 The Comet 2

NCERT Solutions for Class 8 English

The Comet 2 NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 10

The Comet 2 NCERT Text Book Questions and Answers

The Comet 2 Comprehension check – I

Question 1.
“For a moment James wondered if he had done his sums right. ” Why was James doubtful about his sums and calculations?
Answer:
James was doubtful about his sums and calculations because if they were correct, it would mean that the Earth was going to be hit by a comet. He could not believe that this was possible, especially when the sky appeared quite peaceful as it did that day.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 10 The Comet 2

Question 2.
What did the scientists at the conference say about James s “sums ”?
Answer:
The scientists checked and rechecked James’ calculations with the latest observations of Comet Dutta. They later agreed that his predictions were absolutely correct.

Question 3.
Immediate action was needed, the scientists decided. Give one example each of ‘defensive ’ and “offensive ” action mentioned in the text.
Answer:
The “defensive” action suggested by the scientists was that all earthlings should go and live in underground bunkers. The “offensive” action that was decided upon was to deflect Comet Dutta from its path by giving it a push. The scientists were going to place the nuclear payload in a spaceship, and send it to intercept the approaching comet. Then they would detonate it by remote control.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 10 The Comet 2

Question 4.
“I am not buying any Christmas presents till December 15. ” What did Sir John mean by that?
Answer:
December 15 was predicted to be the date when Comet Dutta would hit the Earth and destroy it. Sir John was not confident that the Earth and earthlings would survive the collision. So, he did not want to buy Christmas presents before the Earth survived that day.

The Comet 2 Comprehension check – II

Question 1.
What is Duttada expected to do on his return from London?
Answer:
Duttada is expected to perform a yajna on his return from London so that the comet that he has discovered does not cause any ill effects on Earth.

Question 2.
What is his reaction to the proposal?
Answer:
He is full of anger that his family could be so superstitious. He says that it was futile for him to explain anything about comets to them, as they had never even read the elementary books on science.

Question 3.
i. What does “Project Light Brigade” refer to?
Answer:
“Project Light Brigade” refers to the operation of preventing Comet Dutta from colliding with the Earth.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 10 The Comet 2

ii. What does Sir John say about the Project in his letter to Duttada in October?
Answer:
Sir John includes a secret message about the Project in his letter to Duttada in October. He tells him in his secret code that the project had begun.

Question 4.
Did Sir John buy Christmas presents on December 15? How didDuttada get to know about it?
Answer:
Yes, Sir John bought Christmas presents on December 15. Duttada got to know about it through an urgent telex message sent by Sir John and brought to him by a special messenger on a scooter from the British Council. It was Sir John’s message that he was confident about buying Christmas presents on December 15.

Question 5.
Why, according to Indrani Debi, had the comet not been disastrous? Do you agree with her?
Answer:
According to Indrani Debi, the comet had not been disastrous because Duttada’s grandson, Khoka, had performed the yajna on his behalf to avert the side-effects of the comet.

Encourage the students to share their own opinions. No, I do not agree with her. The disaster was averted because of the efforts put in by the scientists, and not because of the yajna.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 10 The Comet 2

Question 6.
Is Duttada’s general outlook
i. rational?
ii. moral?
iii. traditional?

Choose the right word. Say why you think it right.
Duttada’s general outlook is rational because he does not believe that performing the yajna had stopped the disastrous effects of the comet.

The Comet 2 Exercise Question and Answer

Discuss the following topics in small groups. Write your answers afterwards.

Encourage the students to use their creativity to formulate their individual answers.

Question 1.
Should a scientist s findings be suppressed if they seem disturbing? Give reasons for and against the topic.
Answer:
A scientist’s findings should be repressed for the larger good and to protect the larger interests of mankind. For example, if a scientific finding can create panic among the masses, it is best to suppress such a finding. However, if the information safeguards the interests of political parties, lobbyists and only some sections of the society, it is best to bring the issue to light. The findings ought to be published if they serve mankind in any way and pave a better future for us.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 10 The Comet 2

Question 2.
Do you think ours is a traditional society? What are some of the things we do to be called traditional? Do you find these things useless or useful?
Answer:
Yes, India is a traditional society. We worship idols and even the moon. Our forms of worship resonate with an ancient belief system. Yajnas and poojas are still performed to pacify deities. Many people still believe in astrology and think that stars in the sky affect our behaviours and personalities. A majority of these things do not have any logic behind them, and are remnants of a superstitious society that was largely uneducated. So, most of them are highly useless.

Question 3.
Give two or three examples to show how science has been useful to us.
Answer:
Science has given us many gifts and has made our lives easier. The advancement of science and medicine has helped us to find cures to diseases that were thought to be incurable such as jaundice, tuberculosis and even cancer. Science has given us many miracles.

Also, it is science that has made transport and communication easier. Today it is possible to travel large distances in a very short time. We have so many modes of travel today to choose from. For example, superfast trains, metros and aeroplanes are all gifts of science.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 10 The Comet 2

Question 4.
Give one example to show that science has been misused, and as a result been harmful to us.
Answer:
The invention of nuclear bombs is one way that science has proved to be harmful to mankind. It has destroyed whole cities and can be blamed to have taken away countless human lives. The atomic bombing of Hiroshima and Nagasaki during the World War is one example of a negative effect of scientific progress.

Similarly, it has become very easy to make bombs nowadays. For this reason, terrorism is on the rise and has entered the common parlance. It is a curse that has befallen on mankind, and science has made it possible.

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NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 9 The Comet 1

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The Comet 1 NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 9

The Comet 1 NCERT Text Book Questions and Answers

The Comet 1 Comprehension check – I

Question 1.
Why does Indrani Debi dislike Duttada s “hobnobbing ” with Dibya?
Answer:
Indrani Debi dislikes Duttada’s “hobnobbing” with Dibya because she is not happy that her husband spends so much time with his telescope, or in her words, his dibya-chakshu. He spent all his spare hours observing the sky with the telescope.

Question 2.
She is complaining and smiling. Why is she smiling?
Answer:
She is smiling because she knows that her husband was absent-minded about the practical things in life such as wearing a sweater when it’s cold out there.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 9 The Comet 1

Question 3.
i. What was Duttada’s secret ambition?
Answer:
Duttada’s secret ambition was to discover a new comet.

ii. What did he do to achieve it?
Answer:
He got an eight-inch telescope installed at the roof of his home, and used his life savings to do so.

Question 4.
What is the difference between a planet and a comet, as given in the story?
Answer:
Like planets, comets also orbit round the Sun but their orbits are highly eccentric. So once in a while a comet comes close to the Sun; it has a longish tail that is lit brilliantly by the sunlight and then it recedes into darkness not to be seen again for years, or for centuries.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 9 The Comet 1

Question 5.
Why was Duttada hopeful that he would discover a new comet soon?
Answer:
Duttada was hopeful that he would discover a new comet soon because he knew that the professionals with their pre-assigned programmes would be looking at faint stars and nebulous galaxies. They might miss such an insignificant thing as a comet which they were not expecting to see anyway.

Question 6.
Why does Duttada say— “I almost wish I had not discovered this comet. ”?
Answer:
He says so because the discovery of the comet by him brought him unwelcome publicity. He was an introvert, and suddenly, there were numerous receptions and functions to attend.

Question 7.
Why is his wife unhappy about the discovery?
Answer:
His wife is unhappy about the discovery because she believes that comets bring ill-luck, and did not want her husband to be associated with one.

The Comet 1 Comprehension check – II

Question 1.
How did Sir John get hold of James original manuscript?
Answer:
Sir John got hold of James’ original manuscript through his friend Taylor, who is the editor of Nature, the magazine that was going to publish James’ article.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 9 The Comet 1

Question 2.
What is the important point the paper makes?
Answer:
The important point the paper makes is that Comet Dutta will collide with the Earth, barring some rare circumstances.

Question 3.
Why does Sir John say that James ’paper should not be published?
Answer:
Sir John says that James’ paper will create a huge panic among the people of the world.

NCERT Solutions for Class 8 English It So Happened Chapter 9 The Comet 1

Question 4.
What do the two men finally decide to do?
Answer:
The two men finally decide to organize an international conference in secret to discuss and come up with counter-measures to stop Comet Dutta from colliding with the Earth.

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