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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 5 कुंती

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 5 कुंती

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 5

प्रश्न 1.
कुंती कौन थी ?
उत्तर:
यदुवंश के प्रसिद्ध राजा शूरसेन कृष्ण के पितामह थे। कुंती शूरसेन की पुत्री थी। इसका नाम पृथा था। पृथा को कुंतिभोज ने गोद लिया था। इसके बाद पृथा कुंती के नाम से प्रसिद्ध हुई। कुंतिभोज शूरसेन के फुफेरे भाई थे। उनके कोई संतान नहीं थी। शूरसेन ने उससे कहा था कि उसकी जो भी पहली संतान होगी, उसे कुंतिभोज को गोद दे देंगे।

प्रश्न 2.
महर्षि दुर्वासा ने कुंती को क्या वरदान दिया था ?
उत्तर:
एक बार महर्षि दुर्वासा कुंतिभोज के यहाँ पधारे। कुंती ने महर्षि दुर्वासा की बड़ी सावधानी व सहनशीलता के साथ उनकी सेवा-सुश्रुषा की। ऋषि ने प्रसन्न होकर कुंती को वरदान दिया कि तुम जिस भी देवता का ध्यान करोगी, वह अपने समान एक तेजस्वी पुत्र तुम्हें प्रदान करेगा।

प्रश्न 3.
कर्ण के जन्म के विषय में लिखिए।
उत्तर:
एक बार कुंती ने सूर्य देव का आह्वान किया। सूर्य के संयोग से कुंती ने सूर्य के समान तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। जन्मजात कवच और कुंडलों से शोभित वह बालक आगे चलकर शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ कर्ण के नाम से विख्यात हुआ। कर्ण का जब जन्म हुआ तब कुंती कुँवारी थी इसलिए लोक निंदा के डर से बच्चे को एक पेटी में बंद करके गंगा में बहा दिया। अधिरथ नाम के सारथी को वह पेटी दिखाई दी। उसने उस पेटी को निकाल लिया। उसने ही फिर कर्ण का पालन-पोषण किया।

प्रश्न 4.
ऋषि-दम्पति ने पांडु को श्राप क्यों दिया ?
उत्तर:
एक बार पांडु जंगल में शिकार खेलने गए। जंगल में हिरण का रूप धारण करके एक ऋषि-दम्पत्ति विहार कर रहे थे। पांडु ने हिरण समझ कर बाण छोड़ा। बाण से ऋषि की मृत्यु हो गई। ऋषि ने पांडु को श्राप दिया कि तुम्हारी मृत्यु भी इसी प्रकार होगी। ऋषि के श्राप से पांडु को बहुत दुःख हुआ।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 5 कुंती

प्रश्न 5.
श्रापग्रस्त पांडु ने क्या किया ? उनकी मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर:
श्रापग्रस्त पांडु ने राज्य विदुर को सौंप दिया और अपनी दोनों रानियों कुंती एवं माद्री के साथ प्रायश्चित करने वन को चले गए। पांडु के कोई संतान नहीं थी। ऋषि के श्राप के कारण वह संतानोत्पत्ति भी नहीं कर सकता था। एक दिन वह अपनी पत्नी माद्री के साथ विहार करने लगा तभी श्राप का प्रभाव हुआ और पांडु की मृत्यु हो गई।

प्रश्न 6.
पांडवों का जन्म कैसे हुआ ?
उत्तर:
कुंती ने एक बार पांडु को दुर्वासा से मिले वरदान के बारे में बताया। उनके अनुरोध से कुंती और माद्री ने देवताओं के अनुग्रह से पाँच पांडवों को जन्म दिया। पाँचों पांडवों का जन्म वन में हुआ। वही वे तपस्वियों के साथ पलने लगे।

प्रश्न 7.
पांडु की मृत्यु का समाचार सुनकर सत्यवती ने क्या किया ?
उत्तर:
सत्यवती को जब पांडु की मृत्यु का समाचार मिला तो वह अपनी दोनों पुत्र वधुओं अंबिका और अंबालिका के साथ वन में चली गई। तीनों वृद्धाएँ तपस्या करते करते स्वर्ग सिधार गईं।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 5 कुंती

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 5

कुंती शूरसेन की पुत्री थी। इसका बचपन का नाम पृथा था। शूरसेन के फुफेरे भाई कुंतिभोज की कोई संतान नहीं थी। कुंतिभोज ने प्रथा को गोद लिया था तभी से उनका नाम कुंती पड़ा। एक बार ऋषि दुर्वासा कुंतिभोज के यहाँ पधारे। कुंती ने बड़ी सावधानी व सहनशीलता से दुर्वासा की सेवा की। दुर्वासा ने प्रसन्न होकर कुंती से कहा कि तुम जिस किसी भी देवता का ध्यान करोगी वह अपने समान तेजस्वी पुत्र तुम्हें प्रदान करेगा। इस प्रकार सूर्य के संयोग से कुंती ने सूर्य के समान तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। यही बालक आगे चलकर कर्ण के नाम से विख्यात हुआ। कुंती ने लोक निंदा के डर से उसको गंगा में बहा दिया था। बहुत आगे जाकर अधिरथ नामक सारथी की नजर उस पर पड़ी। अधिरथ निःसंतान था। उसने ही कर्ण का लालन-पालन किया।

कुंती के विवाह योग्य होने पर उसका स्वयंवर रचा गया। पांडु ने भी इस स्वयंवर में भाग लिया। कुंती ने पांडु को अपना पति चुना। पांडु ने भीष्म के कहने पर मद्रराज की कन्या माद्री से भी विवाह किया। एक दिन पांडु वन में शिकार खेलने गए। हिरण के रूप में एक ऋषि दंपती विहार कर रहे थे। पांडु ने अपने बाण से हिरण का वध कर दिया। ऋषि ने मरते-मरते पांडु को शाप दिया कि तुम्हारी मृत्यु भी इसी प्रकार होगी। पांडु विदुर को राज्य का भार सौंपकर अपनी दोनों पत्नियों के साथ वन में चले गए। वे निःसंतान थे लेकिन ऋषि के शापवश संतानोत्पत्ति नहीं कर सकते थे।

एक दिन कुंती ने दुर्वासा से मिले वरदानों का पांडु से जिक्र किया। उनके अनुरोध से कुंती और माद्री ने देवताओं के अनुग्रह से पाँच पांडवों को जन्म दिया। वे वन में ही तपस्वियों के संग पलने लगे। एक दिन पांडु अपनी पत्नी के साथ प्रकृति की सुषमा को निहार रहे थे तभी ऋषि के शाप के कारण पांडु की मृत्यु हो गई। माद्री ने उनकी मृत्यु का स्वयं को कारण माना इसलिए पांडु के साथ माद्री ने भी प्राण त्याग दिए। ऋषि मुनियों ने कुंती एवं उनके पुत्रों को हस्तिनापुर जाकर भीष्म पितामह को सौंप दिया। पांडु की मृत्यु के समाचार से हस्तिनापुर के लोगों के शोक की सीमा नहीं रही। सत्यवती को अपने पोते की मृत्यु से बहुत दुःख हुआ। वह अपनी पुत्र वधुओं अंबिका और अंबालिका को साथ लेकर वन चली गई और कुछ दिन तपस्या करने के बाद स्वर्ग सिधार गईं।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 4 विदुर

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 4 विदुर

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 4

प्रश्न 1.
विदुर कौन थे ? उनका स्वभाव कैसा था ?
उत्तर:
विदुर विचित्रवीर्य की रानी अंबालिका की दासी के पुत्र थे। वे धर्मशास्त्र एवं राजनीति के पंडित थे। वह बड़े निःस्पृह थे। क्रोध उनको छू तक नहीं गया था।

प्रश्न 2.
विदुर ने धृतराष्ट्र द्वारा दुर्योधन को जुआ खेलने की अनुमति दिए जाने पर क्या किया ?
उत्तर:
विदुर ने धृतराष्ट्र से आग्रहपूर्वक निवेदन किया कि जुए के खेल से आपके बेटों में आपस में वैरभाव बढ़ेगा। आप इस खेल को रोक दीजिए।

प्रश्न 3.
धृतराष्ट्र ने दुर्योधन को रास्ते पर लाने के लिए क्या किया ?
उत्तर:
धृतराष्ट्र ने दुर्योधन को समझाते हुए कहा कि विदुर बड़ा बुद्धिमान है. वह हमेशा हमारा भला चाहता है। उसका कहा मानने में हमारी भलाई है। वत्स! जुआ खेलने का विचार छोड़ दो।

प्रश्न 4.
विदुर युधिष्ठिर के पास क्यों गए। युधिष्ठिर ने विदुर की बात को स्वीकार क्यों नहीं किया ?
उत्तर:
विदुर युधिष्ठिर के पास इसलिए गए ताकि जुए के खेल को रुकवाया जा सके। युधिष्ठिर विदुर की बातों से सहमत थे परन्तु वे अपने काका धृतराष्ट्र के प्रस्ताव को भी टाल नहीं सकते थे। उनका कहना था कि युद्ध या खेल के लिए बुलाए जाने पर न जाना क्षत्रिय का धर्म नहीं है। यह कहकर युधिष्ठिर क्षत्रिय कुल की मर्यादा रखने के लिए जुआ खेलने गए।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 4 विदुर

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 4

विचित्रवीर्य की रानी अंबालिका की दासी की कोख से धर्मदेव का जन्म हुआ। वह ही आगे चलकर विदुर के नाम से प्रसिद्ध हुए। धर्मशास्त्र और राजनीति का उनको अथाह ज्ञान था। वे बहुत ही बुद्धिमान व विनम्र थे। उनके विवेक तथा ज्ञान से प्रभावित होकर भीष्मपितामह ने उन्हें धृतराष्ट्र का प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया। जिस समय धृतराष्ट्र ने दुर्योधन को जुआ खेलने की अनुमति दी, विदुर ने धृतराष्ट्र को आग्रहपूर्वक समझाया था कि जुआ खेलने से आपके पुत्रों में वैरभाव बढ़ेगा। धृतराष्ट्र ने विदुर की बात से प्रभावित होकर दुर्योधन को बहुत समझाया परन्तु वह बिल्कुल न माना। जब धृतराष्ट्र पर विदुर का वश नहीं चला तो वे युधिष्ठिर के पास गए और उनको जुआ खेलने से रोकने का प्रयत्न किया। युधिष्ठिर ने विदुर से कहा कि मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ परन्तु जब काका धृतराष्ट्र बुलाएँ तो मैं कैसे इंकार करूँ।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 3 अंबा और भीष्म

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 3 अंबा और भीष्म

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 3

प्रश्न 1.
चित्रांगद कौन था ? उसकी मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर:
चित्रांगद सत्यवती का ज्येष्ठ पुत्र था। वह बहुत ही वीर और स्वार्थी था। एक बार किसी गंधर्व के साथ युद्ध में उसकी मृत्यु हो गई।

प्रश्न 2.
विचित्रवीर्य के विवाह योग्य होने पर भीष्म ने क्या किया ?
उत्तर:
जब विचित्रवीर्य विवाह के योग्य हुए तो भीष्म को उसके विवाह की चिंता हुई। भीष्म को खबर लगी की काशीराज की कन्याओं का स्वयंवर होने वाला है। भीष्म स्वयंवर में पहुंच गए और बलपूर्वक विचित्रवीर्य के लिए काशीराज की तीनों कन्याओं का हरण कर लाए।

प्रश्न 3.
स्वयंवर में राजकुमारों ने भीष्म की हँसी क्यों उड़ाई थी ?
उत्तर:
सभी जानते थे कि भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की थी। भीष्म को स्वयंवर में देखा राजकुमारों ने सोचा कि ये स्वयंवर में भाग लेने आए हैं। उनको लगा कि इन्होंने जो प्रतिज्ञा की थी वह झूठी है।

प्रश्न 4.
भीष्म और शाल्व के बीच युद्ध क्यों हुआ ?
उत्तर:
शाल्व काशीराज की बड़ी कन्या अंबा से प्रेम करते थे। भीष्म ने अंबा का भी हरण कर लिया था। शाल्व ने भीष्म को रोकने के लिए युद्ध किया परन्तु वह युद्ध में पराजित हो गया। काशीराज की कन्याओं की प्रार्थना पर उसे जीवित छोड़ दिया गया।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 3 अंबा और भीष्म

प्रश्न 5.
जब विवाह मंडप में जाने का समय आया तो काशीराज की बड़ी बेटी अंबा ने भीष्म को एकांत में ले जाकर क्या कहा?
उत्तर:
काशीराज की बेटी अंबा ने भीष्म को एकांत में ले जाकर बोली गांगेय, मैंने अपने मन में सोमदेश के राजा शाल्व को अपना पति मान लिया था। इसी बीच आप बलपूर्वक मुझे यहाँ ले आए। मेरे मन की बात जानने के बाद आप जो उचित समझे, करें।

प्रश्न 6.
अंबा की शाल्व को अपना पति स्वीकार करने की बात सुनकर भीष्म ने क्या किया ?
उत्तर:
भीष्म ने उचित प्रबंध करके अंबा को शाल्व के पास भेज दिया। अंबा ने शाल्व को सारा वृतांत सुनाया। शाल्व ने अंबा को यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि भीष्म ने मुझे युद्ध में पराजित किया है और बलपूर्वक तुम्हारा हरण करके ले गया। ऐसी स्थिति में मैं तुमसे विवाह कैसे कर सकता हूँ।

प्रश्न 7.
भीष्म से बदला लेने के लिए अंबा ने क्या प्रयास किए ?
उत्तर:
भीष्म से बदला लेने के लिए अंबा कई राजाओं के पास गई परन्तु किसी में भी इतना साहस नहीं था कि वे भीष्म के साथ युद्ध कर सकें।

प्रश्न 8.
अंबा परशुराम के पास क्यों गई ?
उत्तर:
भीष्म से अपना प्रतिशोध लेने के लिए वह परशुराम के पास गई क्योंकि परशुराम ही इतना पराक्रमी था जो भीष्म को हराने की शक्ति रखता था। भीष्म और परशुराम में भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध में परशुराम की पराजय हुई।

प्रश्न 9.
अंबा ने भीष्म से किस प्रकार प्रतिशोध लिया ?
उत्तर:
अंबा ने वन में जाकर तपस्या प्रारंभ कर दी। वह अपने तपोबल से स्त्रीरूप छोड़कर पुरुष बन गई। उसने अपना नाम शिखंडी रख लिया। जब कौरव और पांडवों के बीच कुरुक्षेत्र में युद्ध हुआ तो भीष्म के साथ युद्ध लड़ते हुए शिखंडी अर्जुन के रथ के आगे बैठा था। भीष्म को यह बात मालूम थी कि शिखंडी ही अंबा है अतः उन्होंने उस पर बाण चलाना अपनी वीरोचित प्रतिष्ठा के विरुद्ध समझा। शिखंडी को आगे करके अर्जुन ने भीष्म पितामह पर हमला करके विजय प्राप्त की। इस प्रकार अंबा ने अपना प्रतिशोध ले लिया।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 3 अंबा और भीष्म

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 3

सत्यवती के बड़े पुत्र गंधर्वो के साथ युद्ध में मारे जाने पर विचित्रवीर्य गद्दी पर बैठे। उनकी आयु उस समय बहुत छोटी थी अतः राज-काज भी भीष्म को ही संभालना पड़ा। विचित्रवीर्य के विवाह योग्य होने पर भीष्म को उनके विवाह की चिंता हुई। उन्हें खबर लगी कि काशीराज की कन्याओं का स्वयंवर होने वाला है। भीष्म भी स्वयंवर में पहुंच गए। भीष्म को वहाँ देखकर सभी राजाओं में चर्चा होने लगी कि इन्होंने जीवन भर ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की थी। क्या वह झूठी थी, काशीराज की कन्याओं ने भी भीष्म की अवहेलना की। भीष्म इस अवहेलना को सह न सके। वे बलपूर्वक काशीराज की तीनों कन्याओं को रथ में बैठाकर चल पड़े। शाल्व ने भीष्म का पीछा करके उनको रोकने का प्रयत्न किया। भीष्म और शाल्व के बीच भीषण युद्ध हुआ। भीष्म ने शाल्व को हरा दिया परन्तु काशीराज की कन्याओं की प्रार्थना पर उसको जीवित छोड़ दिया। हस्तिनापुर पहुँचकर जब भीष्म विचित्रवीर्य के साथ विवाह के लिए काशीराज की पुत्रियों को विवाह मंडप में लाने लगे तो काशीराज की बड़ी बेटी अंबा ने भीष्म को एकांत में बुलाकर कहा कि मैं राजा शाल्व से प्रेम करती हूँ। मैंने उनको अपना पति मान लिया है। भीष्म ने अंबा को शाल्व के पास भेज दिया परन्तु शाल्व ने यह कह दिया कि भीष्म ने सभी राजाओं के सामने मुझे परास्त करके तुम्हारा हरण किया था, अब मैं तुम्हें कैसे स्वीकार कर सकता हूँ। इसके बाद अंबा हस्तिनापुर लौट आई। विचित्रवीर्य भी अंबा के साथ विवाह को तैयार नहीं हुए। अंबा ने भीष्म से कहा कि अब आप ही मेरे साथ विवाह करें परन्तु भीष्म ने अपनी प्रतिज्ञा के बारे में बताया कि वह किसी के साथ विवाह नहीं कर सकते। अंबा इस प्रकार हस्तिनापुर और सौम्य देश के बीच ठोकरें खाती रही। उसके मन में प्रतिहिंसा की आग जलने लगी। भीष्म से बदला लेने के लिए वह अनेक राजाओं के पास गई परन्तु कोई भी भीष्म के साथ युद्ध करने को तैयार नहीं हुआ। अंबा ने अपनी करुण कहानी परशुराम को सुनाई। परशुराम ने भीष्म के साथ भीषण युद्ध किया परन्तु वह हार गए। इसके बाद अंबा ने वन में जाकर तपस्या शुरू कर दी। तप के प्रभाव से पुरुष बन गई और अपना नाम शिखंडी रखा। वह जब कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध हुआ तो शिखंडी ने अर्जुन का सारथी बनकर भीष्म से अपना प्रतिशोध लिया। भीष्म ने शिखंडी पर बाण चलाना अपनी वीरोचित प्रतिष्ठा के खिलाफ समझा। इसी बीच अर्जुन ने भीष्म पर बाणों से प्रहार करके विजय प्राप्त की।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 2 भीष्म-प्रतिज्ञा

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 2 भीष्म-प्रतिज्ञा

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 2

प्रश्न 1.
सत्यवती को देखकर शांतनु के मन में क्या विचार आया ? सत्यवती ने शांतनु से क्या कहा ?
उत्तर:
सत्यवती को देखकर शांतनु के मन में उसे अपनी पत्नी बनाने का विचार आया। उन्होंने सत्यवती से प्रेम की याचना की। सत्यवती ने शांतनु से कहा कि मेरे पिताजी मल्लाहों के सरदार हैं। पहले उनकी अनुमति ले लीजिए। फिर मैं आपकी पत्नी बनने को तैयार हूँ।

प्रश्न 2.
केवटराज ने शांतनु के सामने क्या शर्त रखी ?
उत्तर:
केवटराज ने शांतनु से कहा-आपके बाद हस्तिनापुर के राजसिंहासन पर मेरी लड़की का ही पुत्र बैठेगा।

प्रश्न 3.
केवटराज की शर्त का राजा शांतनु पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर:
केवटराज की शर्त शांतनु को नागवार लगी। गंगा पुत्र के अलावा वे किसी और को गद्दी पर बैठाने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। इस घटना के बाद वे बहुत दुःखी रहने लगे।

प्रश्न 4.
देवव्रत केवटराज के पास क्यों गए थे ? केवटराज ने देवव्रत के सामने क्या शर्त रखी ?
उत्तर:
देवव्रत केवटराज के पास यह कहने गए कि वे अपनी पुत्री सत्यवती का विवाह शांतनु के साथ कर दे। केवटराज ने देवव्रत के सामने भी वही शर्त रखी। देवव्रत ने उसकी शर्त को स्वीकार कर लिया कि सत्यवती का पुत्र ही मेरे पिता की मृत्यु के बाद राजा बनेगा।

प्रश्न 5.
देवव्रत के शर्त मान लेने पर भी केवटराज संतुष्ट क्यों नहीं हुए ?
उत्तर:
केवटराज के मन में विचार आया कि जितना पराक्रमी देवव्रत है इनकी संतान भी ऐसी ही पराक्रमी होगी। देवव्रत की संतान मेरे नाती से राज्य छीन सकती है।

प्रश्न 6.
केवटराज के मन की शंका के समाधान के लिए देवव्रत ने क्या किया ? देवव्रत का नाम भीष्म कैसे पड़ा?
उत्तर:
केवटराज को विश्वास दिलाने के लिए देवव्रत ने भीष्म-प्रतिज्ञा की कि मैं जीवनभर विवाह नहीं करूँगा। इस प्रतिज्ञा के कारण ही देवव्रत का नाम भीष्म पड़ा।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 2 भीष्म-प्रतिज्ञा

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 2

अपने तेजस्वी पुत्र देवव्रत को लेकर राजा शांतनु नगर लौट आए। चार वर्ष बाद राजा एक दिन यमुना-तट पर घूमने के लिए गए तो वहाँ उन्होंने बहुत सुंदर युवती को देखा जिसका नाम सत्यवती था। गंगा के वियोग में दुःखी शांतनु के मन में उस रूपवती को पत्नी बनाने का विचार आया। सत्यवती के कहने पर शांतनु सत्यवती के पिता जो कि एक मल्लाह थे, अनुमति के लिए गए। केवटराज ने शांतनु से एक वचन माँगा कि आपके बाद मेरी पुत्री से उत्पन्न पुत्र ही सिंहासन पर बैठेगा। केवटराज की यह शर्त शांतनु को नागवार लगी क्योंकि वे गंगा पुत्र देवव्रत के अतिरिक्त किसी और को राजगद्दी पर बैठाने की बात सोच भी नहीं सकते थे। वे बहुत दुःखी रहने लगे। देवव्रत ने अपने पिता से उनकी चिंता के बारे में पूछा। देवव्रत ने सारथी से सारी बात का पता कर लिया। देवव्रत केवटराज के पास पहुँचे और कहा कि आप अपनी पुत्री का विवाह राजा शांतनु से कर दें। देवव्रत ने केवटराज की शर्त को स्वीकार कर लिया। केवटराज के यह कहने पर कि तुम नहीं तो तुम्हारी संतान राज्य छीनने का प्रयत्न कर सकती है। केवट की यह बात सुनकर देवव्रत ने प्रतिज्ञा की कि वह आजीवन विवाह नहीं करेगा। देवव्रत की इस भयंकर-प्रतिज्ञा के कारण उनका नाम भीष्म पड़ा। सत्यवती से शांतनु के दो पुत्र हुए चित्रांगद और विचित्रवीर्य। शांतनु के देहावसान पर चित्रांगद हस्तिनापुर के सिंहासन पर बैठे और उनके युद्ध में मारे जाने पर विचित्रवीर्य गद्दी पर बैठा। विचित्रवीर्य की दो रानियाँ थीं-अंबिका और अंबालिका। अंबिका के पुत्र थे धृतराष्ट्र और अंबालिका के पांडु। धृतराष्ट्र के पुत्र कौरव कहलाए और पांडु के पुत्र पांडव। भीष्म शांतनु के बाद से कुरूक्षेत्र युद्ध का अंत होने तक उस विशाल राजवंश के सामान्य कुलनामक और पूज्य बने रहे।
Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 2 भीष्म-प्रतिज्ञा 1

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Bal Ram Katha Class 6 Questions and Answers Summary Chapter 12 राम का राज्याभिषेक

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Class 6 Hindi Bal Ram Katha Chapter 12 Question Answers Summary राम का राज्याभिषेक

Bal Ram Katha Class 6 Question Answers Chapter 12

प्रश्न 1.
विभीषण क्यों चाहते थे कि राम कुछ दिन लंका में ही रुकें?
उत्तर:
विभीषण चाहते थे कि राम कुछ दिन यहाँ रुककर युद्ध की थकान उतार लें और राम के सानिध्य में उसको भी कुछ रीति-नीति सीखने का अवसर मिले।

प्रश्न 2.
राम ने लंका में रुकने का विभीषण का आग्रह स्वीकार क्यों नहीं किया?
उत्तर:
राम को चौदह वर्ष का वनवास मिला था। इस अवधि में उन्हें वन में ही वास करना था। वनवास की अवधि पूरी हो चुकी थी। उनको अयोध्या लौटने की जल्दी थी, क्योंकि भरत ने उनसे वचन लिया था कि यदि वे चौदह वर्ष के बाद भी नहीं आए तो वह अपने प्राण दे देगा।

प्रश्न 3.
पुष्पक विमान में कौन-कौन सवार हुए थे?
उत्तर:
पुष्पक विमान में राम, लक्ष्मण और सीता के अतिरिक्त हनुमान, सुग्रीव और विभीषण भी थे। किष्किंधा से उन्होंने सुग्रीव की पत्नी तारा और रूपा को भी साथ ले लिया।

प्रश्न 4.
राम विमान में सवार होकर सीता को मार्ग में क्या-क्या दिखाते हुए गए?
उत्तर:
राम सीता को प्रमुख स्थानों के बारे में बताते जा रहे थे। जब राम ने सीता को पंचवटी दिखानी चाही तो सीता ने अपनी आँखें बंद कर ली।

प्रश्न 5.
राम ने हनुमान को अयोध्या क्यों भेजा?
उत्तर:
राम सीधे अयोध्या नहीं जाना चाहते थे। उनके मन में एक प्रश्न था कि कहीं चौदह वर्ष की इस अवधि में भरत को सत्ता का मोह तो नहीं हो गया। हनुमान को पहले भेजकर राम भरत के हृदय की थाह लेना चाहते थे। उनका विचार था कि यदि मेरे अयोध्या लौटने की खबर से यदि भरत को प्रसन्नता नहीं हुई तो वे अयोध्या नहीं जायेंगे।

प्रश्न 6.
हनुमान को देखकर भरत की क्या प्रतिक्रिया थी?
उत्तर:
हनुमान ने जब राम के लौटने की बात बताई तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। उनकी आँखों में खुशी के आँसू थे। यह शुभः समाचार उन तक पहुँचाने के लिए वे हनुमान को बार-बार धन्यवाद दे रहे थे। उनके चेहरे पर प्रसन्नता का भाव था।

Bal Ram Katha Class 6 Questions and Answers Summary Chapter 12 राम का राज्याभिषेक

प्रश्न 7.
नंदीग्राम में राम का स्वागत किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
राम का विमान जब नंदीग्राम उतरा तो वहाँ राम का भव्य स्वागत हुआ। आकाश राम के जयघोष से गूंज उठा। राम ने विमान से उतरकर भरत को गले से लगाया, माताओं को प्रणाम किया। भरत भागते हुए आश्रम के भीतर गए और राम की खड़ाऊँ लेकर आए। झुककर अपने हाथों से राम के पैरों में खड़ाऊँ पहनाईं। सबकी आँखें खुशी के आँसुओं से नम थीं।

प्रश्न 8.
राम ने पुष्पक विमान कुबेर को क्यों लौटा दिया?
उत्तर:
यह पुष्पक विमान कुबेर का ही था। रावण ने इस विमान को कुबेर से बलात् छीना था।

प्रश्न 9.
अयोध्या नगरी राम के स्वागत में किस प्रकार सजी थी?
उत्तर:
पूरी अयोध्या नगरी को फूलों से सजाया गया था। नगर घी के दीपों से जगमगा रहा था। वाद्य-यंत्रों की झंकार सुनाई पड़ रही थी। नगरवासी प्रसन्न थे।

प्रश्न 10.
सीता ने अपना बहुमूल्य हार किसको दिया और क्यों?
उत्तर:
सीता ने अपना बहुमूल्य हार हनुमान को दिया। सीता हनुमान की भक्ति और उनके पराक्रम से बहुत खुश थीं।

प्रश्न 11.
राम कैसे राजा थे? उनका राज्य कैसा था?
उत्तर:
राम के राज्य में किसी को कष्ट नहीं था। सब सुखी थे। किसी के साथ किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं था। कोई बीमार नहीं पड़ता था। खेत हरे-भरे थे। पेड़ फलों से लदे रहते थे। राम न्यायप्रिय थे। गुणों के सागर थे। उनका राज्य राम-राज्य था।

Bal Ram Katha Class 6 Questions and Answers Summary Chapter 12 राम का राज्याभिषेक

Bal Ram Katha Class 6 Chapter 12 Summary

विभीषण चाहते थे कि राम कुछ दिन लंका में रुकें जिससे उनके सानिध्य में रहकर उसको भी कुछ रीति-नीति सीखने का अवसर मिले। राम तो चौदह वर्ष के वनवास में थे। उन्होंने लंका में कदम तक भी न रखा था। सीता को संदेश भिजवाने के लिए भी हनुमान को ही भेजा था। राम ने विभीषणं से कहा कि मेरी चौदह वर्ष की वनवास की अवधि समाप्त होने वाली है। यदि मैं तत्काल नहीं लौटा तो भरत प्राण दे देंगे। मैंने भरत को वचन दिया था। विभीषण ने राम के सामने दूसरा प्रस्ताव रखा कि वह भी उनके साथ अयोध्या चलना चाहता है। राम ने विभीषण के इस प्रस्ताव को सहर्ष मान लिया। सुग्रीव और हुनमान को भी राम ने अयोध्या आमंत्रित किया। ये सभी पुष्पक विमान में बैठकर अयोध्या की ओर चल पड़े।

राम सीता के साथ ही विमान में बैठे थे। वे सीता को रास्ते में पड़ने वाले प्रमुख स्थानों को दिखाते जा रहे थे। सीता के आग्रह पर विमान किष्किंधा में उतारा। सीता अपने साथ सुग्रीव की रानियों-तारा और रूपा को भी साथ ले जाना चाहती थीं। रास्ते में पंचवटी आई तो राम ने पंचवटी की ओर इशारा किया तो सीता ने आँखें मूंद लीं। वह अब पंचवटी को देखना नहीं चाहती थीं। गंगा के संगम पर ऋषि भरद्वाज के आश्रम में विमान उतारा गया। वे लोग रात में वहीं रुके। राम ने वहीं से हनुमान को अयोध्या भेजा ताकि भरत को उनके आने की सूचना दी जा सके और भरत की प्रतिक्रिया भी जान सकें कि राम के लौटने पर वह प्रसन्न हैं या नहीं। राम ने सोच रखा था यदि भरत का मन बदल गया होगा तो वे अयोध्या नहीं जायेंगे। जैसे ही, हनुमान ने राम के आने की सूचना दी भरत की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे यह शुभ समाचार देने के लिए हनुमान का बार-बार धन्यवाद कर रहे थे। हनुमान भरत से विदा लेकर राम के पास लौट आए।

अगले दिन विमान प्रयाग से श्रृंगवेरपुर होते हुए सरयू नदी के किनारे पहुँचा। सभी ने अयोध्या को प्रणाम किया। अयोध्या में राज्याभिषेक की तैयारियाँ चल रही थीं। शत्रुघ्न राज्याभिषेक की तैयारियों में लगे थे। महल से तीनों रानियाँ नंदीग्राम के लिए चल पड़ीं, क्योंकि राम को पहले भरत से मिलना था, जो नंदीग्राम में रहते थे। राम का विमान नंदीग्राम में उतरा। वहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया। राम ने भरत को गले से लगा लिया। माताओं को प्रणाम किया। भरत आश्रम के भीतर जाकर राम की खड़ाऊँ उठा लाए। भरत ने झुककर अपने हाथों से राम के पैरों में पहनायीं। राम-लक्ष्मण ने नंदीग्राम में ही अपना तपस्वी बांना उतार दिया और राजसी वस्त्र धारण किए। जन-समूह उनकी जय-जयकार करते हुए अयोध्या की ओर चल दिया। राम ने पुष्पक विमान कुबेर को लौटा दिया। यह विमान रावण ने कुबेर से बलात् छीन लिया था।

सजी-धजी अयोध्या नगरी राम के दर्शन से आह्लादित थी। भरत ने अयोध्या का राज्य राम को नंदीग्राम में ही लौटा दिया था। राम के राज्याभिषेक के लिए पूरा नगर सुसज्जित था और दीपों से जगमगा रहा था। फूलों से सुवासित एवं वाद्य यंत्रों से झंकृत था। अगले दिन मुनि वशिष्ठ ने राम का राजतिलक किया। राम और सीता दोनों रत्न-जटित सिंहासन पर बैठे हुए थे। भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न उनके पास खड़े थे। हनुमान नीचे बैठे थे। राम ने सीता को बहुमूल्य हार दिया। प्रजाजनों ने अनेक वस्तुएँ उपहार में दी। सीता ने अपने गले का हार उतारा। वे दुविधा में थीं कि किसे दें। राम ने सीता से कहा-जिस पर तुम सर्वाधिक प्रसन्न हो, उसे दे दो। सीता ने वह हार हनुमान को भेंट कर दिया। सीता हनुमान की भक्ति और पराक्रम से बहुत खुश थीं। कुछ ही दिनों में सारे अतिथि एक-एक कर चले गए। हनुमान कहीं नहीं गए। वे राम की सेवा के लिए राम-दरबार में ही रहे। राम ने लंबे समय तक अयोध्या पर राज किया। उनके राज्य में सभी सुखी थे। किसी को भी किसी प्रकार का कष्ट नहीं था। उनका राज्य राम-राज्य कहलाया।

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Bal Ram Katha Class 6 Questions and Answers Summary Chapter 11 लंका विजय

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Class 6 Hindi Bal Ram Katha Chapter 11 Question Answers Summary लंका विजय

Bal Ram Katha Class 6 Question Answers Chapter 11

प्रश्न 1.
हनुमान द्वारा लंका जला दिए जाने पर लंकावासी क्या सोच रहे थे?
उत्तर:
लंका में खलबली मची हुई थी। उनके मन में डर बैठ गया था कि जिनका दूत लंका में आग लगा सकता है, उनका स्वामी कितना शक्तिशाली होगा।

प्रश्न 2.
विभीषण ने रावण को क्या सलाह दी?
उत्तर:
विभीषण ने रावण से कहा, “आप सीता को लौटा दें। सबका कल्याण इसी में है।” रावण ने विभीषण की बात अनसुनी कर दी और विभीषण को अपने कक्ष से अपमानित करके निकाल दिया।

प्रश्न 3.
विभीषण लंका से निकलकर कहाँ गए?
उत्तर:
विभीषण लंका से निकलकर राम की शरण में गए। विभीषण ने जाकर कहा कि मैंने रावण को बहुत समझाया, परन्तु उसने मुझे ही लंका से निर्वासित कर दिया। राम ने विभीषण से कहा कि राक्षसों को मार कर लंका का राज्य तुम्हें ही दिया जाएगा।

प्रश्न 4.
समुद्र ने रास्ता किस प्रकार दिया तथा समुद्र पर पुल किसने बनाया?
उत्तर:
राम तीन दिन तक समुद्र से अनुरोध करते रहे, परन्तु समुद्र ने रास्ता नहीं दिया। राम ने क्रोध में आकर समुद्र को सुखाने के लिए धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई तो समुद्र गिड़गिड़ाने लगा। समुद्र ने ही बताया कि आपकी सेना में नल नाम का वानर है जो पुल बना सकता है।

प्रश्न 5.
राम ने अपनी सेना को चार भागों में क्यों बाँटा?
उत्तर:
लंका के चार द्वार थे। राम चाहते थे कि लंका पर चारों ओर से आक्रमण किया जाए।

प्रश्न 6.
राम ने अंगद को लंका क्यों भेजा?
उत्तर:
राम अब भी चाहते थे कि नर-संहार न हो और युद्ध रुक जाए। इसलिए राम ने अंगद को अपना दूत बनाकर लंका भेजा। परन्तु अहंकार में चूर रावण पर राम के संदेश का कोई असर नहीं हुआ। अंगद ने आकर बताया कि अब युद्ध ही एकमात्र विकल्प है।

Bal Ram Katha Class 6 Questions and Answers Summary Chapter 11 लंका विजय

प्रश्न 7.
मेघनाद कैसा योद्धा था? वह किस प्रकार युद्ध करता था?
उत्तर:
मेघनाद बहुत ही पराक्रमी था। उसने इन्द्र को भी पराजित कर दिया था। मेघनाद छिपकर युद्ध करता था। वह मायावी था। वह किसी को दिखाई नहीं पड़ता था।

प्रश्न 8.
अपने बड़े-बड़े योद्धाओं के मारे जाने पर रावण ने क्या किया?
उत्तर:
रावण ने युद्ध की कमान स्वयं संभाली, परन्तु उसे लज्जित होकर युद्ध-भूमि से लौटना पड़ा। राम के बाणों ने उसका मुकुट भी धरती पर गिरा दिया था। रावण को जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो उसने कुंभकर्ण को जगाया। कुंभकर्ण को देखते ही वानर सेना में खलबली मच गई। कुंभकर्ण महाबली था। राम-लक्ष्मण के बाणों से कुंभकर्ण भी मारा गया।

प्रश्न 9.
मेघनाद की मृत्यु के बाद रावण की कैसी दशा हुई?
उत्तर:
मेघनाद की मृत्यु से रावण एकदम टूट गया। वह विलाप करने लगा और कहने लगा-अब लंका अनाथ हो गई है। उसकी दशा पागलों जैसी हो गई। वह क्रोध से बिलबिलाने लगा।

प्रश्न 10.
वानर सेना ने महल में प्रवेश करने पर क्या किया?
उत्तर:
वानरों ने अपने हाथों में जलती मशालें लेकर जहाँ-तहाँ आग लगा दी। अन्न-भंडार फूंक दिए। शस्त्रागार जला दिए। जो भी सामने पड़ा, मारा गया। राक्षस सेना भाग खड़ी हुई।

प्रश्न 11.
विभीषण दुखी क्यों था? राम ने उसे क्या समझाया?
उत्तर:
रावण की मृत्यु के बाद विभीषण उसके मृत शरीर के पास शोकाकुल खड़ा था। राम ने विभीषण को समझाया कि शोक मत करो। रावण महान योद्धा था। उसकी अंत्येष्टि महानता के अनुरूप ही होनी चाहिए। मृत्यु सत्य है। उसे स्वीकार करो।

प्रश्न 12.
राम ने हुनमान को अशोक वाटिका जाने का आदेश क्यों दिया? हुनमान ने आकर राम को क्या बताया?
उत्तर:
राम ने हनुमान से कहा कि तुरंत अशोक वाटिका जाओ और सीता को विजय का संदेश दो और उनका संदेश लेकर शीघ्र लौट आओ। हनुमान ने अशोक वाटिका पहुँचकर संदेश सुनाया। सीता संदेश सुनकर बहुत खुश हुई। वह राम से मिलने के लिए अधीर थी। हनुमान ने सीता का संदेश राम तक पहुँचा दिया।

Bal Ram Katha Class 6 Questions and Answers Summary Chapter 11 लंका विजय

Bal Ram Katha Class 6 Chapter 11 Summary

युद्ध की तैयारियाँ पूरे जोरों पर थीं। सुग्रीव ने वानर सेना को संबोधित किया। सेना किष्किंधा से उत्साह में भरी महेन्द्र पर्वत पर पहुँच गई। जामवंत और हनुमान सेना के पीछे चल रहे थे। हनुमान के लंका जला देने के बाद राक्षसों में खलबली मची हुई थी। रावण को समझाने का साहस किसी में भी नहीं था। विभीषण रावण के पास उसे समझाने के लिए गए, परन्तु रावण ने विभीषण की एक न मानी। रावण ने विभीषण का अपमान करके अपने कक्ष से बाहर निकाल दिया। विभीषण ने अपने चार साथियों के साथ लंका त्याग दी। वह वहाँ पहुँचा जहाँ राम की सेना डेरा डाले पड़ी थी। अपनी सेना में राक्षसों को आया देख वानरों में खलबली मच गई। विभीषण को सुग्रीव के सामने लाया गया। उसने रावण के साथ हुई सारी घटना का उल्लेख किया और राम से मिलने की इच्छा व्यक्त की। राम ने विभीषण को शरण दे दी। राम ने उन्हें आश्वासन दिया कि राक्षसों को मारकर लंका का राज्य तुम्हें सौंप दूंगा।

राम की सेना के सामने समुद्र को लाँघना सबसे बड़ी चुनौती थी। राम तीन दिन तक समुद्र से रास्ता माँगते रहे। परन्तु जब समुद्र नहीं माना तो राम ने क्रोध में आकर समुद्र को सुखाने के तीर को धनुष की प्रत्यंचा पर चढ़ा लिया। समुद्र हाथ जोड़कर उपस्थित हो गया और राम से बोला कि आपकी सेना में नल नाम का वानर है। वह पुल बना सकता है। नल ने अगले दिन से ही पुल बनाना आरंभ कर दिया। पुल तैयार होने पर सेना समुद्र के पार पहुंच गई। रावण को जब पता चला तो वह क्रोध से चीख उठा। उसने सेना को तैयार होने की आज्ञा दी और समुद्र-तट पर पहुंच गए।

राम ने अपनी सेना को चार भागों में बाँटा जिससे लंका पर चारों ओर से आक्रमण किया जा सके। राम ने एक शिखर पर चढ़कर लंका का निरीक्षण किया। इसी बीच राम ने अंगद को अपना दूत बनाकर लंका भेजा। रावण ने अंगद की कोई बात नहीं मानी। अंगद ने राम के पास आकर बता दिया कि रावण सुलह के लिए तैयार नहीं है। अब युद्ध के अतिरिक्त और कोई रास्ता नहीं है। युद्ध प्रारंभ हो गया। दोनों ओर के वीर मारे जा रहे थे। राक्षसी सेना के अनेक पराक्रमी राक्षस ढेर हो गए। मेघनाद के नागपाश बाण से घायल होकर राम-लक्ष्मण मूर्छित हो गए। मेघनाद मैदान छोड़कर रावण को संदेश देने महल की ओर गया। विभीषण ने दोनों का उपचार कराया। राम-लक्ष्मण की मूर्छा टूट गई। राक्षसी सेना के वीर धूम्राक्ष, वज्रद्रष्ट, अकंपन प्रहस्त आदि मारे गए। रावण ने स्वयं युद्ध की कमान संभाली। रावण भी पराजित होकर लौट गया। फिर रावण ने कुंभकर्ण को युद्ध के लिए भेजा। कुंभकर्ण ने बहुत भयंकर युद्ध किया। अंत में वह भी मारा गया। इसके बाद मेघनाद युद्ध के लिए आया। मेघनाद की शक्ति लगने से लक्ष्मण मूर्छित हो गए। मूर्छा टूटने पर लक्ष्मण के हाथों मेघनाद भी मारा गया। मेघनाद की मृत्यु से रावण एकदम टूट गया। अब रावण स्वयं युद्ध के लिए आया। उधर वानर सेना महल में प्रवेश कर गई थी। उन्होंने वहाँ अनेक राक्षसों को मार दिया। राक्षस सेना भाग खड़ी हुई। राम और रावण का बहुत ही भयंकर युद्ध हुआ। विभीषण के कहने पर राम ने एक बाण रावण की नाभि में मारा। बाण के लगते ही रावण धराशायी हो गया।

लंका-विजय का अभियान पूरा हुआ। वानर सेना किलकारियाँ मार रही थी। विभीषण अपने भाई के मृत शरीर के पास खड़ा शोक में डूबा हुआ था। राम ने विभीषण को समझाया। राम ने एक-एक वानर का आभार माना और सुग्रीव को गले लगा लिया। विभीषण रावण की अंत्येष्टि के बाद ही राज्याभिषेक चाहते थे। राम ने हनुमान को अशोक वाटिका भेजा ताकि सीता को यह समाचार दिया जा सके।

विभीषण का राज्याभिषेक किया गया। हनुमान ने राम को संदेश दिया कि-“माता सीता लंका-विजय का समाचार सुनकर बहुत प्रसन्न हैं और आपसे मिलने के लिए अधीर हैं। राम ने विभीषण से कहा, “लंकापति सीता अब भी आपकी अशोक वाटिका में है। उसे यहाँ लाने का प्रबंध किया जाए। हनुमान के अतिरिक्त सीता को किसी ने नहीं देखा था। सीता को देखने की सभी वानरों को उत्सुकता थी। सीता आईं तो सबको अपनी कल्पनाओं से अधिक लगीं।

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