Author name: Prasanna

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 16 भोर और बरखा

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 16 भोर और बरखा Questions and Answers are prepared by our highly skilled subject experts.

भोर और बरखा NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 16

Class 7 Hindi Chapter 16 भोर और बरखा Textbook Questions and Answers

कविता से

प्रश्न 1.
‘बंसीवारे ललना’, ‘मोरे प्यारे’, ‘लाल जी’, कहते हुए यशोदा किसे जगाने का प्रयास करती हैं और वे कौन-कौन सी बातें कहती हैं ?
उत्तर:
यशोदा कृष्ण जी से निम्नलिखित बातें कहती हैं। अब रात बीत गई है, सवेरा हो गया है घरों के किवाड़ खुल गए हैं, गोपियाँ दही मथने लगी हैं क्योंकि उनके कंगनों के खनकने की आवाज़ आ रही है।

  • द्वार पर देवता और मनुष्य आकर खड़े हो गए हैं। ग्वाल-बाल कोलाहल कर रहे हैं, वे जय-जयकार कर रहे हैं।
  • उन्होंने माखन रोटी हाथ में ले रखी है।

प्रश्न 2.
नीचे दी गई पंक्ति का आशय अपने शब्दों में लिखिए- ‘माखन-रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे।
उत्तर:
इस पंक्ति का आशय है कि भोर हो गई है और सभी ग्वाले माखन रोटी हाथ में लेकर अपनी गायों को चराने के लिए निकलने लगे हैं। वे अपनी गायों को इकट्ठी करके उनकी रखवाली कर रहे हैं। ऐसा कहकर यशोदा कृष्णा को जगाना चाहती है।

प्रश्न 3.
पढ़े हुए पद के आधार पर ब्रज की भोर का वर्णन कीजिए
उत्तर:
ब्रज की भोर कुछ अलग ही होती है। गोपिकाएँ सवेरा होते ही उठकर दही मथना आरंभ कर देती हैं। ग्वाले अपनी गायों को चराने के लिए जंगल में जाने की तैयारी में लग जाते हैं। वे अपने नाश्ते के लिए माखन रोटी हाथ में ले लेते हैं और अपनी गायों को इकट्टी करके चराने निकल पड़ते हैं। वे कोलाहल करते हैं। एक-दूसरे को आवाज देकर बुलाते हैं तथा जय-जयकार करते हैं।

प्रश्न 4.
मीरा को सावन-मन-भावन क्यों लगने लगा ?
उत्तर:
मीरा को सावन-मन-भावन इसलिए लगने लगा क्योंकि उनको अपने प्रियतम अर्थात् श्रीकृष्ण जी के आने की आहट मिल गई थी। यही कारण है कि वर्षा की रिमझिम ने मीरा के मन को उमंगों से भर दिया।

प्रश्न 5.
पाठ के आधार पर सावन की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
सावन का महीना पूरी तरह से वर्षा का महीना होता है सावन में आकाश काले बादलों से ढका रहता रहता है। सावन में अक्सर झड़ी लग जाती है जिसके कारण निरंतर रिमझिम-रिमझिम नन्हीं-नन्हीं बूंदें पड़ती रहती हैं। हवा शीतल होकर बहने लगती है जो बहुत ही सुखद लगती है। मौसम बहुत ही सुहावना हो जाता है।

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कविता से आगे

प्रश्न 1.
मीरा भक्तिकाल की प्रसिद्ध कवयित्री थीं। इस काल के दूसरे कवियों के नामों की सूची बनाइए तथा उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर:
इस काल के अन्य कवि एवं उनकी रचनाएँ इस प्रकार हैं-
कविरचनाएँ
विद्यापति – पदावली
कबीरदास – साखी
मलिक मुहम्मद जायसी – पद्मावत
सूरदास – सूरसागर
नरोत्तमदास – सुदामा चरित
गोस्वामी तुलसीदास – रामचरित मानस
रसखान – प्रेमवाटिका
रहीम – दोहावली
केशवदास – रामचंद्रिका

प्रश्न 2.
सावन वर्षा ऋतु का महीना है, वर्षा से संबंधित दो अन्य महीनों के नाम लिखिए।
उत्तर:
आषाढ़ एवं भादों भी वर्षा के महीने हैं।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
सुबह जगने के समय आपको क्या अच्छा लगता है ?
उत्तर:
नहा-धोकर पार्क में खेलने के लिए जाना।

प्रश्न 2.
यदि आपको अपने छोटे भाई-बहिन को जगाना पड़े तो कैसे जगाएँगे ?
उत्तर:
मैं अपने छोटे भाई-बहिन को हौले-हौले से उनको हिलाकर जगाऊँगा, उनके सिर के बालों को सहलाऊँगा।

प्रश्न 3.
वर्षा में भीगना और खेलना आपको कैसा लगता है ?
उत्तर:
वर्षा में भीगने और खेलने में मुझे बहुत-आनंद आता है।

प्रश्न 4.
मीराबाई ने सुबह का चित्र खींचा है। अपनी कल्पना और अनुमान से लिखिए कि नीचे दिए गए स्थानों की सुबह कैसी होती है-
(क) गाँव, गली या मुहल्ले में
(ख) रेलवे प्लेटफ़ॉर्म पर
(ग) नदी या समुद्र के किनार
(घ) पहाड़ों पर
उत्तर:
(क) गाँव, गली या मुहल्ले में चहल-पहल शुरू हो जाती है। गाँव में किसान खेत के लिए निकल पड़ते हैं। बच्चे गलियों में खेलने लगते हैं।
(ख) रेलवे प्लेटफ़ॉर्म पर चाय बेचने वालों की आवाजें आने लगती हैं। लोग अपने गंतव्य की ओर जाने के लिए इधर-इधर जाने लगते हैं।
(ग) नदी या समुद्र के किनारे लोग सैर करने के लिए जाते हैं यहाँ का वातावरण एकदम शांत होता है।
(घ) पहाड़ों पर निकलते सूर्य की धूप पड़ने लगती है। चिड़ियों की चहचहाट मंत्रमुग्ध कर देती है।

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भाषा की बात

प्रश्न 1.
कृष्ण को ‘गउवन के रखवारे’ कहा गया है जिसका अर्थ है गौओं का पालन करने वाले। इसके लिए एक शब्द दें।
उत्तर:
ग्वाला

प्रश्न 2.
नीचे दो पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें से पहली पंक्ति में रेखांकित शब्द दो बार आए हैं, और दूसरी पंक्ति में भी दो बार। इन्हें पुनरुक्ति (पुनः उक्ति) कहते हैं। पहली पंक्ति में रेखांकित शब्द विशेषण हैं और दूसरी पंक्ति में संज्ञा।
‘नन्हीं-नन्हीं बूंदन मेहा बरसे’
‘घर-घर खुले किंवारे’
इस प्रकार के दो-दो उदाहरण खोजकर वाक्य में प्रयोग कीजिए और देखिए कि विशेषण तथा संज्ञा की पुनरुक्ति के अर्थ में क्या अंतर है ? जैसे-मीठी-मीठी बातें, फूल-फूल महके।
उत्तर:
छोटे-छोटे बच्चे
हरी-हरी मटर
द्वार-द्वार पर पहरेदार
गाँव-गाँव खुशहाली आई।

कुछ करने को

प्रश्न 1.
कृष्ण को ‘गिरधर’ क्यों कहा जाता है ? इसके पीछे कौन सी कथा है ? पता कीजिए और कक्षा में बताइए।
उत्तर:
गिरधर का अर्थ है गिरि को धारण करने वाला। एक बार इंद्र भगवान कुपित हो गए। निरंतर वर्षा के कारण ब्रज में प्रलय की स्थिति आ गई। ब्रजवासियों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अँगुली पर उठाकर वहाँ के लोगों को इन्द्र के प्रकोप से बचाया था। इस घटना के बाद से कृष्ण जी को गिरधर भी कहने लगे।

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काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

1. जागो बंसीवारे ………………………. आयाँ को तारै॥

शब्दार्थ- ललना-प्रिय बालक; मोरे-मेरे; रजनी-रात; भोर-प्रातःकाल/सुबह; किंवारे-किवाड़, सुनियत-सुन रही है; सुर-नर-देवता और मनुष्य; कुलाहल-कोलाहल/शोर; सबद उचारै-शब्द का उच्चारण कर रहे हैं; गउवन-गाय; सरण-शरण; आयाँ-आए हुए को; तारै-उद्धार करे।

प्रसंग- प्रस्तुत पाठ मीरा द्वारा रचित व ‘बसंत भांग-2’ में संकलित है। कवयित्री ने इस पद में भोर के समय श्रीकृष्ण जी को सोते से जगाने का वर्णन किया है। यशोदा माता तरह-तरह की बातें बताते हुए कृष्ण जी से जाग जाने एवं बिस्तर त्यागने की बात कहती हैं।

व्याख्या- बालक कृष्ण अभी सोए पड़े हैं। माता यशोदा उनको जगाने का तरह-तरह से प्रयत्न कर रही है। यशोदा कृष्ण जी से कहती हैं कि हे मेरे प्यारे पुत्र बंशी वाले तुम जाग जाओ। रात बीत गई है और सवेरा हो गया है अब यह सोने का समय नहीं है। सभी घरों के किवाड़ खुल गए हैं जिससे लगता है कि सभी लोग जाग गए। ग्वालिनों ने उठकर दही मथना (बिलोना) शुरू कर दिया है क्योंकि दही मथने के कारण उनके कंगनों के खनकने की आवाज सुनाई देने लगी है। हे मेरे प्रिय लल्ला सुबह हो गई है। इस समय द्वार पर देवता और मनुष्य दोनों ही आकर खड़े हो गए हैं। सभी ग्वाल-बाल भी जाग गए हैं वे जागकर खेलने लगे हैं इसलिए उनका कोलाहल सुनाई पड़ रहा है। सभी ग्वाले मिलकर जय जयकार का उच्चारण करते हुए तुम्हारी जय बोल रहे हैं। यशोदा माता कहती हैं कि सभी ग्वालों ने माखन रोटी हाथ में ले रखी हैं। वे अपनी गायों की रखवाली कर रहे हैं। मीराबाई अंत में कहती हैं कि श्रीकृष्ण तो गिरधर नागर हैं और मेरे प्रभु हैं वे उन सब का उद्धार करते हैं जो उनकी शरण में आ जाता है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
यशोदा माता कृष्ण को किस-किस संबोधन से पुकार कर जगा रही है ?
उत्तर:
यशोदा माता कृष्ण को बंशीवाले ललना, लालजी और गउवन के रखवाले संबोधन से जगा रही है।

प्रश्न 2.
यशोदा कृष्ण को क्या कहकर विश्वास दिलाती है कि सवेरा हो गया है ?
उत्तर:
यशोदा कहती है कि सभी घरों के किवाड़ खुल चुके हैं। गोपियों ने दही मथना शुरु कर दिया है क्योंकि उनके कंगनों के खनकने की आवाज आ रही है। सभी ग्वाल-बाल कोलाहल कर रहे हैं। इन सभी बातों से यशोदा कृष्ण जी को विश्वास दिला देती हैं कि सुबह हो गई है।

प्रश्न 3.
मीराबाई अंत में क्या कहती हैं ?
उत्तर:
मीराबाई कृष्ण जी को अपना प्रभु बताते हुए कहती हैं कि जो भी कृष्ण जी की शरण में आ जाता है वे उसका उद्धार कर देते हैं।

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2. बरसे बदरिया ………………….. गावन की।।

शब्दार्थ- बदरिया-बदली/बादल; मन-भावन-मन को अच्छा लगने वाला; उमग्यो-आनंदित होना, उमंग में होना; मनवा-मन; भनक-आहट; दामिन-दामिनी/विद्युत; दमके-चमक रही है; झर लावन-झड़ी लगना; मेहा-मेह-बारिश; सुहावन-अच्छा लगना।

प्रसंग- प्रस्तुत पद मीराबाई द्वारा रचित है। इस पद में कवयित्री ने सावन की झड़ी लगने और कृष्ण जी के आगमन की आहट से अपने मन में उत्पन्न सुखद अनुभूति का वर्णन किया है।

व्याख्या- कवयित्री कह रही है कि सावन की बदली बरस रही है। सावन का महीना बहुत ही मन को आनंद प्रदान करने वाला होता है। सावन में कवयित्री के मन में उमंगें उठने लगी हैं क्योंकि सावन में कृष्ण जी के आने की आहट मिल गई है। उनके आगमन का समाचार सुनकर मीराबाई का हृदय आनंदित हो उठा है। उमड़-घुमड़ करता हुआ बादल चारों दिशाओं से उठकर आ गया। बादलों से रह-रहकर बिजली चमक रही है। बादलों के लगातार बरसने से झड़ी लग गई है। नन्हीं-नन्हीं बूंदें पड़ रही हैं। शीतल पवन बहुत ही सुहावनी लग रही है। मीराबाई अंत में कहती हैं कि मेरे प्रभु तो गिरधर नागर हैं। उनके आगमन की खुशी में मंगल गीत गाने के लिए मन मचल रहा है।

अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सावन की बदरिया को बरसते देख मीराबाई का मन क्यों आनंदित हो रहा है ?
उत्तर:
सावन की बदरिया बरसने से झड़ी लगी हुई है। इस झड़ी में कृष्ण जी के आने की आहट मीरा को लग गई है। इस कारण मीरा के मन में उमंगें उठने लगी हैं। उनका मन आनंद से सराबोर हो उठा है।

प्रश्न 2.
मीराबाई ने वर्षा का कैसा वर्णन किया है ?
उत्तर:
मीराबाई ने वर्षा का बहुत ही मनोहारी वर्णन किया है। आकाश में चारों ओर से बादल घिर आया है। बिजली रह-रहकर चमक रही है। झड़ी लग रही है। नन्हीं-नन्हीं बूंदें पड़ रही हैं और शीतल मंद पवन बड़ी सुहावनी लग रही है।

प्रश्न 3.
झड़ी की क्या विशेषता होती है ?
उत्तर:
लगातार वर्षा होने को झड़ी कहते हैं। झड़ी लगने पर छोटी-छोटी बूंदों की फुहार पड़ती रहती है। हवा में शीतलता आ जाती है।

प्रश्न 4.
मीराबाई का मन क्या करने को मचल रहा है और क्यों ?
उत्तर:
मीराबाई का मन मंगल गीत गाने के लिए मचल रहा है क्योंकि उनको कृष्ण जी के आने की आहट मिल चुकी है। उनका मन आनंदित हो रहा है।

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NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion (Hindi Medium)

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 9 Science in Hindi Medium. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Motion.

पाठगत हल प्रश्न (NCERT IN-TEXT QUESTIONS SOLVED)

NCERT पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या – 110)

प्र० 1. एक वस्तु के द्वारा कुछ दूरी तय की गई। क्या इसका विस्थापन शून्य हो सकता है? अगर हाँ, तो अपने उत्तर को उदाहरण के द्वारा समझाएँ।
उत्तर- हाँ, इसका विस्थापन शून्य हो सकता है।
उदाहरण – मान लीजिए, एक वस्तु बिंदु 0 से चलकर बिंदु A पर पहुँचता है तथा वापस बिंदु 0 पर आ जाता है तब प्रारंभिक तथा अंतिम बिंदु के बीच की न्यूनतम दूरी अर्थात विस्थापन = 0 (शून्य) होगा।

प्र० 2. एक किसान 10 m की भुजा वाले एक वर्गाकार खेत की सीमा पर 40 s में चक्कर लगाता है। 2 मिनट (minute) 20 s के बाद किसान के विस्थापन का परिमाण क्या होगा?
उत्तर- वर्गाकार खेत का परिमाप = 4 x एक भुजा
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प्र० 3. विस्थापन के लिए निम्न में कौन सही है?
(a) यह शून्य नहीं हो सकता है।
(b) इसका परिमाण वस्तु के द्वारा तय की गई दूरी से अधिक है।
उत्तर- (a) असत्य
(b) असत्य

NCERT पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या-112)

प्र० 1. चाल एवं वेग में अंतर बताइए।
उत्तर-
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प्र० 2. किस अवस्था में किसी वस्तु के औसत वेग का परिमाण उसकी औसत चाल के बराबर होगा?
उत्तर- औसत वेग का परिमाण औसत चाल के बराबर तब होगा जब वस्तु एक सीधी रेखा में एक ही दिशा में गति कर रही हो।

प्र० 3. एक गाड़ी का ओडोमीटर क्या मापता है?
उत्तर- किसी गाड़ी द्वारा तय की गई दूरी।

प्र० 4. जब वस्तु एकसमान गति में होती है तब इसका मार्ग कैसा दिखाई पड़ता है?
उत्तर- एक सीधी सरल रेखा (Straight line)।

प्र० 5. एक प्रयोग के दौरान, अंतरिक्षयान से एक सिग्नल को पृथ्वी पर पहुँचने में 5 मिनट का समय लगता है। पृथ्वी पर स्थित स्टेशन से उस अंतरिक्षयान की दूरी क्या है?
(सिग्नल की चाल = प्रकाश की चाल = 3 x 108 ms-1)
उत्तर- सिग्नल की चाल = 3 x 108 ms-1
सिग्नल को पृथ्वी तक पहुँचने में लगा समय = 5 मिनट = 5 x 60 = 300 second
पृथ्वी पर स्थित स्टेशन से अंतरिक्षयान की दूरी = चाल x समय = 3 x 108 x 300 = 9 x 1010 मीटर

NCERT पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या-114)

प्र० 1. आप किसी वस्तु के बारे में कब कहेंगे कि,
(i) वह एकसमान त्वरण से गति में है?
(ii) वह असमान त्वरण से गति में है?
उत्तर-
(i) एकसमान त्वरण (Uniform Acceleration): जब कोई वस्तु एक सरल रेखा में चलती है और उसका वेग समान समयांतरालों में समान रूप से बढ़ता है या घटता है, तो वस्तु के त्वरण को एकसमान त्वरण कहा जाता है।

(ii) असमान त्वरण (Non-uniform acceleration): यदि एक वस्तु का वेग समान समयांतराल में असमान रूप से बदलता है, तो कहा जाता है कि वस्तु असमान त्वरण के साथ गतिमान है।
उदाहरण के लिए – सीधी सड़क पर चलती कार जो समान समयांतरण में चाल को असमान रूप से परिवर्तित करती है।

प्र० 2. एक बस की गति 5 s में 80 kmh-1 से घटकर 60 kmh-1 हो जाती है। बस का त्वरण ज्ञात कीजिए।
उत्तर-
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प्र० 3. एक रेलगाड़ी स्टेशन से चलना प्रारंभ करती है और एकसमान त्वरण के साथ चलते हुए 10 मिनट में 40 kmh-1 की चाल प्राप्त करती है। इसका त्वरण ज्ञात कीजिए।
उत्तर-
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NCERT पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या-118)

प्र० 1. किसी वस्तु के एकसमान वे असमान गति के लिए समय-दूरी ग्राफ की प्रकृति क्या होती है?
उत्तर-
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प्र० 2. किसी वस्तु की गति के विषय में आप क्या कह सकते हैं, जिसका दूरी-समय ग्राफ समय अक्ष के समानांतर एक सरल रेखा है?
उत्तर- वस्तु विरामावस्था में है क्योंकि समय बदलने पर भी वस्तु की स्थिति वही रहती है।
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प्र० 3. किसी वस्तु की गति के विषय में आप क्या कह सकते हैं, जिसका चाल-समय ग्राफ समय अक्ष के समानांतर एक सरल रेखा है?
उत्तर- वस्तु एकसमान चाल से गति कर रही है तथा इसका त्वरण शून्य है।
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प्र० 4. वेग-समय ग्राफ के नीचे के क्षेत्र से मापी गई राशि क्या होती है?
उत्तर- तय की गई दूरी (विस्थापन का परिमाण)।

NCERT पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या-121)

प्र० 1. कोई बस विरामावस्था से चलना प्रारंभ करती है तथा
2 मिनट तक 0.1 ms-2 के एकसमान त्वरेण से चलती है। परिकलन कीजिए,
(a) प्राप्त की गई चाल तथा
(b) तय की गई दूरी।
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प्र० 2. कोई रेलगाड़ी 90 kmh-1 की चाल से चल रही है। ब्रेक लगाए जाने पर वह – 0.5 m/s को एकसमान त्वरण उत्पन्न करती है। रेलगाड़ी विरामावस्था में आने के पहले कितनी दूरी तय करेगी?
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प्र० 3. एक ट्रॉली एक आनत तल पर 2 ms-2 के त्वरण से नीचे जा रही है। गति प्रारंभ करने के 3 s के पश्चात् उसका वेग क्या होगा?
उत्तर- a = 2 m/s2
t = 3s
v = ?
u = 0
v = u + at = 0 + 2 x 3
v = 6 m/s

प्र० 4. एक रेसिंग कार का एकसमान त्वरण 4 ms-2 है। गति प्रारंभ करने के 10 s पश्चात् वह कितनी दूरी तय करेगी?
उत्तर- a = 4 m/s²
t = 10 s
s = ?
u = 0
s = ut + \(\frac { 1 }{ 2 }\) at²
= 0 x 10 + \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 4 x (10)²
= 0 + \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 4 x 100
s = 200 m
अतः कार के द्वारा 10s में तय की गई दूरी 200 m.

प्र० 5. किसी पत्थर को ऊध्र्वाधर ऊपर की ओर 5 ms-1 के वेग से फेंका जाता है। यदि गति के दौरान पत्थर का नीचे की ओर दिष्ट त्वरण 10 ms-2 है, तो पत्थर के द्वारा कितनी ऊँचाई प्राप्त की गई तथा उसे वहाँ पहुँचने में कितना समय लगा?
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पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न (NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED)

प्र० 1. एक एथलीट वृत्तीय पथ, जिसका व्यास 200m है, का एक चक्कर 40s में लगाती है। 2 min 20s के बाद वह कितनी दूरी तय करेगा और उसका विस्थापन क्या होगा?
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(b) माना कि एथलीट बिंदु P से दौड़ना प्रारंभ करता है। स्पष्टतः 3.5 चक्कर के बाद उसकी स्थिति Q होगी।
विस्थापन = प्रारंभिक बिंदु P तथा अंतिम बिंदु ५ के बीच की न्यूनतम दूरी = वृत्त का व्यास = 200 m
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प्र० 2. 300 m सरल रेखीय पथ विस्थापन पर जोसेफ़ जॉगिंग करता। हुआ 2 min 30 s में एक सिरे A से दूसरे सिरे B पर पहुँचता है और घूमकर 1 min. में 100 m पीछे बिंदु C पर पहुँचती है। जोसेफ की औसत चाल और औसत वेग क्या होंगे?
(a) सिरे A से सिरे B तक तथा
(b) सिरे A से सिरे C तक।
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प्र० 3. अब्दुल गाड़ी से स्कूल जाने के क्रम में औसत चाल को 20 kmh-1 पाता है। उसी रास्ते से लौटने के समय वहाँ भीड़ कम है और औसत चाल 30 kmh-1 है। अब्दुल की इस पूरी यात्रा में उसकी औसत चाल क्या है?
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प्र० 4. कोई मोटरबोट झील में विरामावस्था से सरल रेखीय पथ पर 3.0 m.s-2 के नियत त्वरण से t = 8 s तक चलती है। इस समय अंतराल में मोटरबोट कितनी दूरी तय करती है?
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प्र० 5. किसी गाड़ी का चालक 52 kmh-1 की गति से चल रही कार में ब्रेक लगाता है तथा कार विपरीत दिशा में एकसमान दर से त्वरित होती है। कार 5 s में रुक जाती है। दूसरा चालक 30 kmh-1 की गति से चलती हुई दूसरी कार पर धीमे-धीमे ब्रेक लगाता है तथा 10 s में रुक जाता है। एक ही ग्राफ पेपर पर दोनों कारों के लिए चाल-समय ग्राफ आलेखित करें। ब्रेक लगाने के पश्चात् दोनों में से कौन-सी कार अधिक दूरी तक जाएगी?
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प्र० 6. चित्र में तीन वस्तुओं A, B और C के दूरी-समय ग्राफ प्रदर्शित हैं। ग्राफ का अध्ययन करके निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
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(a) तीनों में से कौन सबसे तीव्र गति से गतिमान है?
(b) क्या ये तीनों किसी भी समय सड़क के एक ही बिंदु पर होंगे?
(c) जिस समय B, A से गुजरती है उस समय तक C कितनी दूरी तय कर लेती है?
(d) जिस समय B, C से गुजरती है उस समय तक यह कितनी दूरी तय कर लेती है?
उत्तर-
(a) B सबसे तीव्र गति से गतिमान है क्योंकि इसकी ढाल (Slope) A तथा C की अपेक्षा अधिक है।
(b) नहीं, क्योंकि तीनों रेखाएँ किसी एक बिंदु पर प्रतिच्छेद नहीं करती हैं।
(c) जिस समय B, A से गुजरती है उस समय तक C लगभग 9 km (9 – 9.14 km) तक तय कर लेती है।
(d) जब B, C से गुजरती है उस समय तक ये लगभग 5.5 km दूरी तय कर लेती है।

प्र० 7. 20 m की ऊँचाई से एक गेंद को गिराया जाता है। यदि उसका वेग 10 m sके एकसमान त्वरण की दर से बढ़ता है तो यह किस वेग से धरातल से टकराएगी? कितने समय पश्चात् वह धरातल से टकराएगी?
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प्र० 8. किसी कार को चाल-समय ग्राफ चित्र में दर्शाया गया है।
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प्र० 9. निम्नलिखित में से कौन-सी अवस्थाएँ संभव हैं तथा प्रत्येक के लिए एक उदाहरण दें:
(a) कोई वस्तु जिसको त्वरण नियत हो परंतु वेग शून्य हो।
(b) कोई वस्तु किसी निश्चित दिशा में गति कर रही हो तथा त्वरण उसके लंबवत् हो।
उत्तर-
(a) हाँ, स्थिति संभव है। उदाहरणः जब किसी वस्तु को ऊपर फेंका जाता है तो अधिकतम ऊँचाई पर इसका वेग शून्य हो जाता है, परंतु त्वरण का मान स्थिर (नियत) 9.8 m/s2 या 10 m/s ही रहता है।
(b) हाँ, यह स्थिति भी संभव है। जब वस्तु किसी वृत्ताकार पथ पर एकसमान चाल से गति करती है तो इसके गति की दिशा स्पर्शरेखा के अनुदिश होती है परंतु उस क्षण त्वरण केंद्र की ओर त्रिज्या के अनुदिश लगता है जो एक-दूसरे के लंबवत् होती है। अर्थात त्रिज्या ⊥r स्पर्श रेखा।

प्र० 10. एक कृत्रिम उपग्रह 42250 km त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में घूम रहा है। यदि वह 24 घंटे में पृथ्वी की परिक्रमा करता है तो उसकी चाले को परिकलन कीजिए।
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Hope given NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 8 are helpful to complete your homework.

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 15 नीलकंठ

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 15 नीलकंठ Questions and Answers are prepared by our highly skilled subject experts.

नीलकंठ NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 15

Class 7 Hindi Chapter 15 नीलकंठ Textbook Questions and Answers

निबंध से

प्रश्न 1.
मोर मोरनी के नाम किस आधार पर रखे गए ?
उत्तर:
मोर की गरदन नीली थी इसलिए उसका नाम नीलकंठ रखा गया। मोरनी सदैव मोर के आस-पास ही रहती थी। वह उसका साथ बिल्कुल भी नहीं छोड़ती थी। वह सदा उनका अनुसरण करती रहती थी। अतः उसका नाम राधा रख दिया।

प्रश्न 2.
जाली के बड़े घर में पहुँचने पर मोर के बच्चों का किस प्रकार स्वागत हुआ ?
उत्तर:
जालीघर में पहुंचने पर दोनों नवागंतुकों ने पहले से रहने वालों में वैसा ही कुतूहल जगाया जैसा नववधू के आगमन पर परिवार में स्वाभाविक है। लक्का कबूतर नाचना छोड़कर दौड़ पड़े और उनके चारों ओर घूम-घूमकर गुटरगूं-गुटरगूं की रागिनी अलापने लगे। बड़े खरगोश सभ्य सभासदों के समान क्रम से बैठकर गंभीर भाव से उनका निरीक्षण करने लगे। ऊन की गेंद जैसे छोटे खरगोश उनके चारों ओर उछलकूद मचाने लगे। तोते मानो भली-भाँति देखने के लिए एक आँख बंद करके उनका परीक्षण करने लगे। उस दिन मेरे चिड़ियाघर में मानो भूचाल आ गया।

प्रश्न 3.
लेखिका को नीलकंठ की कौन-कौन सी चेष्टाएँ बहुत भाती थीं ?
उत्तर:
लेखिका को नीलकंठ की निम्नलिखित चेष्टाएँ भाती थीं-
लेखिका को नीलकंठ का झूले से उतरकर अपने पंखों का सतरंगी छाता तानकर नृत्य भंगिमा में खड़ा होना बहुत अच्छा लगता था।

नीलकंठ द्वारा हथेली से भुने चने खाना बहुत भाता था। मेघों की साँवली छाया में अपने इंद्रधनुष के गुच्छे जैसे पंखों को मंडलाकार बनाकर जब वह नाचता था, तब उस नृत्य में एक सहजात लय-ताल रहता था। आगे-पीछे, दाहिने-बाएँ क्रम से घूमकर वह किसी अलक्ष्य सम पर ठहर-ठहर जाता था।

प्रश्न 4.
‘इस आनंदोत्सव की रागिनी में बेमेल स्वर कैसे बज उठा’-वाक्य किस घटना की ओर संकेत कर रहा है?
उत्तर:
यह वाक्य उस घटना की ओर संकेत कर रहा है जब लेखिका चिड़िया बेचने वाले बड़े मियाँ से एक घायल मोरनी खरीद लाई। उस मोरनी के घर में आने पर नीलकंठ एवं राधा का सारा आनंद समाप्त हो गया। उसने उनके अंडों को भी तोड़ दिया था। वह राधा को नीलकंठ के पास नहीं जाने देती थी। लेखिका ने उस मोरनी का नाम उसके रूप के अनुसार ही कुब्जा रखा था।

प्रश्न 5.
वसंत ऋतु में नीलकंठ के लिए जालीघर में बंद रहना असहनीय क्यों हो जाता था?
उत्तर:
मोर को वसंत ऋतु और वर्षा ऋतु बहुत भाती है। नीलकंठ भी भला इस ऋतु में जालीघर में क्यों बंद रहता, उसका मन नाचने के लिए मचल उठता था। अतः वसंत में जब आम के वृक्ष सुनहली मंजरियों से लद जाते थे, अशोक नए लाल पल्लवों से ढक जाता था, तब जालीघर में वह इतना अस्थिर हो उठता कि उसे बाहर छोड़ देना पड़ता।

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 15 नीलकंठ

प्रश्न 6.
जालीघर में रहने वाले सभी जीव एक-दूसरे के मित्र बन गए थे, पर कुब्जा के साथ ऐसा संभव क्यों नहीं हो पाया?
उत्तर:
जालीघर में रहने वाले सभी जीव जंतु आपस में स्नेह का भाव रखते थे उनको एक दूसरे से ईर्ष्या नहीं थी। कुब्जा मोरनी का स्वभाव ईष्यालु था। वह सभी के साथ बैरभाव रखती थी। राधा को तो वह नीलकंठ के पास फटकने ही नहीं देती थी। उसने चोंच मार-मारकर उसके अंडों को तोड़ दिया था। कुब्जा अपने स्वभाव के कारण किसी की भी मित्र नहीं बन पाई।

प्रश्न 7.
नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को साँप से किस तरह बचाया ? इस घटना के आधार पर नीलकंठ के स्वभाव की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
एक दिन की घटना थी कि एक साँप जाली के भीतर पहुँच गया। सब जीव-जंतु भागकर इधर-उधर छिप गए, केवल एक शिशु खरगोश साँप की पकड़ में आ गया। निगलने के प्रयास में साँप ने उसका आधा पिछला शरीर तो मुँह में दबा रखा था, शेष आधा जो बाहर था, उससे चीं-चीं का स्वर भी इतना तीव्र नहीं निकल पा रहा था कि किसी को स्पष्ट सुनाई दे सके। नीलकंठ दूर ऊपर झूले में सो रहा था। उसी के चौकन्ने कानों ने उस मंद स्वर की व्यथा पहचानी और वह पूँछ-पंख समेटकर सर्र से एक झपट्टे में नीचे आ गया। संभवतः अपनी सहज चेतना से ही उसने समझ लिया होगा कि साँप के फन पर चोंच मारने से खरगोश भी घायल हो सकता है।

उसने साँप के फन को पंजों में दबाया और फिर चोंच से इतने प्रहार किए वह अधमरा हो गया। पकड़ ढीली पड़ते ही खरगोश का बच्चा मुख से निकल आया, इस प्रकार उसके प्राणों की रक्षा हुई। इस घटना से नीलकंठ के स्वभाव की निम्नलिखित विशेषताएँ प्रकट होती हैं।

नीलकंठ साहसी था।
नीलकंठ दूसरों की सहायता के लिए सदा तत्पर रहता था।
उसका स्वभाव दयालु था। वह किसी का दुःख देख नहीं सकता था।

निबंध से आगे

प्रश्न 1.
यह पाठ एक ‘रेखाचित्र’ है। रेखाचित्र की क्या-क्या विशेषताएँ होती हैं ? जानकारी प्राप्त कीजिए और लेखिका के लिखे किसी अन्य रेखाचित्र को पढ़िए।
उत्तर:
शब्दों के द्वारा किसी जीव-जंतु अथवा मनुष्य का ऐसा चित्रण करना कि वह हमारे सामने एकदम जीवंत हो उठे रेखाचित्र कहलाता है। रेखाचित्र पूरी तरह से सत्य घटना पर आधारित होता है। कल्पना के लिए इसमें कोई स्थान नहीं होता। रेखाचित्र हमें यथार्थ का ज्ञान कराता है। महादेवी वर्मा ने विभिन्न पशु-पक्षियों एवं आदमियों से जुड़े रेखाचित्र प्रस्तुत किए हैं। उनके द्वारा रचित ‘पथ के साथी’ एवं ‘अतीत की स्मृतियाँ’ रेखाचित्रों का संकलन है। ये सभी पुस्तकालयों में उपलब्ध रहते हैं।

प्रश्न 2.
वर्षा ऋतु में जब आकाश में बादल घिर आते हैं तब मोर पंख फैलाकर धीरे-धीरे मचलने लगता है-यह मोहक दृश्य देखने का प्रयास कीजिए।
पुस्तकालय से ऐसी कहानियों, कविताओं या गीतों को खोजकर पढ़िए जो वर्षा ऋतु और मोर के नाचने से संबंधित हों।
छात्र-कक्षा नवम् ‘अ’ पाठ्यक्रम’ क्षितिज भाग-1 से सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता ‘मेघ आए’ पढ़ें।

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अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
निबंध में आपने ये पंक्तियाँ पढ़ी हैं-‘मैं अपने शाल में लपेटकर उसे संगम ले गई। जब गंगा की बीच धार में उसे प्रवाहित किया गया तब उसके पंखों की चंद्रिकाओं से बिंबित-प्रतिबिंबित होकर गंगा का चौड़ा पाट एक विशाल मयूर के समान तरंगित हो उठा।’-इन पंक्तियों में एक भावचित्र है। इसके आधार पर कल्पना कीजिए और लिखिए कि मोरपंख की चंद्रिका और गंगा की लहरों में क्या-क्या समानताएँ लेखिका ने देखी होंगी जिसके कारण गंगा का चौड़ा पाट एक विशाल मयूर पंख के समान तरंगित हो उठा।
उत्तर:
जिस प्रकार वृत्ताकार मोर के पंख थे उसी प्रकार लेखिका ने जब मोर को गंगा में प्रवाहित किया तो गंगा में वृत्ताकार छोटी-छोटी लहरें चारों ओर फैल गईं।

प्रश्न 2.
नीलकंठ की नृत्य-भंगिमा का शब्द चित्र प्रस्तुत करें।
उत्तर:
नीलकंठ मेघों को गरजते देखकर जालीघर से बाहर आने के लिए बेचैन हो उठता था। वह अपने पंखों को मंडालाकार रूप में करके नृत्य मुद्रा में आ जाता था। मेघों को देखकर उसका केकारव तीव्र होता जाता था। जब वर्षा की रिमझिम शुरू हो जाती थी तो धीरे-धीरे उसका केकारव मंद पड़ने लगता था। वह पूरी तरह से नृत्य में मग्न हो जाता था। उसकी नृत्य भंगिमा बहुत चित्ताकर्षक होती थी।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
‘रूप’ शब्द से कुरूप, स्वरूप, बहुरूप आदि शब्द बनते हैं। इसी प्रकार नीचे लिखे शब्दों से अन्य शब्द बनाओ-
गंध, रंग, फल, ज्ञान।
उत्तर:
गंध – सुगंध, दुर्गंध, गंधयुक्त
रंग – बदरंग, रंगीला, रंगहीन, रंगत, रंगीन
फल – निष्फल, फलित, सुफल, फलदार, फलीभूत
ज्ञान – अज्ञान, विज्ञान, ज्ञानी, अज्ञानी

विस्मयाभिभूत शब्द विस्मय और अभिभूत दो शब्दों के योग से बना है। इसमें विस्मय के य के साथ अभिभूत के अ के मिलने से या हो गया है। अ आदि वर्ण है। ये सभी वर्ण-ध्वनियों में व्याप्त हैं। व्यंजन वर्गों में इसके योग को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जैसे-क् + अ = क इत्यादि। अ की मात्रा के चिह्न (1) से आप परिचित हैं। अ की भाँति किसी शब्द में आ के भी जुड़ने से अकार की मात्रा ही लगती है, जैसे-मंडल + आकार = मंडलाकार। मंडल और आकार की संधि करने पर (जोड़ने पर) मंडलाकार शब्द बनता है और मंडलाकार शब्द का विग्रह करने पर (तोड़ने पर) मंडल और आकार दोनों अलग होते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के संधि-विग्रह कीजिए-
नील + आभ = ………………
सिंहासन = …………..
नव + आगंतुक = …………
मेघाच्छन्न = ……………
संधि
उत्तर:
नील + आभ = नीलाभ
नव + आगंतुक = नवागंतुक

विच्छेद
सिंहासन – सिंह + आसन
मेघाच्छन्न – मेघ + आच्छन्न

कुछ करने को

चयनित व्यक्ति/पशु पक्षी की खास बातों को ध्यान में रखते हुए एक रेखाचित्र बनाइए।

प्रिय नेता – सुभाष चंद्र बोस

मालती के फूल की तरह मनस्वी लोगों की दो प्रमुख स्थितियाँ होती हैं या तो वे संसार के एकांत में पड़े रह जाते हैं या संसार के सिर पर मुकुट की तरह शोभा पाते हैं। ‘जय हिंद’ का मंत्र देने वाले महान् देश-भक्त नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक ऐसे ही मनस्वी थे। इस वीर योद्धा का नाम हमारे स्वाधीनता आंदोलन के सुनहरे पृष्ठों पर लिखा जा चुका है। सुभाष चंद्र बोस की माँ प्रभावती उन्हें ‘सुब्बी’ कहकर पुकारती थी। अपनी माता के बड़े लाडले थे सुभाष । माँ ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनका दुलारा ‘सुब्बी’ एक दिन भारत में ही नहीं वरन् पूरी दुनिया में नेता जी के नाम से लोकप्रिय होगा। नेता जी सुभाष का नाम हर भारतवासी के हृदय में सुगंध की तरह बस गया है।

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गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

1. मोर के सिर ……………….. आँका जा सकता।

प्रश्न 1.
नीलकंठ मोर के सौंदर्य का वर्णन कीजिए। .
उत्तर:
मोर के सिर पर कलगी गहरी चमकीली और ऊँची लगने लगी थी। उसकी चोंच टेढ़ी और पैनी हो गई। उसकी गोल आँखों में मीली चमक दिखाई देने लगी थी। उसकी गरदन पर नीला-गहरा रंग झलकने लगा था। उसके दोनों पंख सफेद एवं सलेटी आलेखन स्पष्ट होने लगे थे।

प्रश्न 2.
इस गद्यांश में मोर के किन-किन अंगों की सुंदरता का वर्णन किया गया है ?
उत्तर:
इस गद्यांश में मोर की कलगी, चोंच, आँखों, गरदन, पंखों, पूँछ और पैरों का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 3.
लेखिका ने यह क्यों कहा कि ‘गति का चित्र नहीं आंका जा सकता’ ?
उत्तर:
मोर बहुत चंचल पक्षी होता है। वह निरंतर तरह-तरह की क्रियाएँ करता रहता है। वह क्षणभर के लिए भी स्थिर नहीं होता इसलिए लेखिका ने ऐसा कहा है।

2. राधा नीलकंठ के …………………. उपाधि दे डाली।

प्रश्न 1.
लेखिका ने राधा की क्या विशेषता बताई है ?
उत्तर:
राधा नीलकंठ की तरह नाच नहीं सकती थी परंतु वह नृत्य मग्न नीलकंठ के कभी दाईं ओर से बाईं ओर कभी बाईं ओर से दाईं ओर चक्कर लगाती रहती थी।

प्रश्न 2.
लेखिका के जालीघर के पास आने पर नीलकंठ किस मुद्रा में आ जाता था ?
उत्तर:
लेखिका के जालीघर के पास आने पर नीलकंठ झूले से उतरकर नीचे आ जाता और अपने पंखों का मंडलाकर छाता बनाकर नृत्य मुद्रा में आ जाता था।

प्रश्न 3.
विदेशी मेहमान नीलकंठ को देखकर विस्मयाभिभूत क्यों हो उठते थे ?
उत्तर:
लेखिका के जालीघर के पास आने पर नीलकंठ जिस मुद्रा में आ जाता था लेखिका के साथ आए मेहमान उसकी उस मुद्रा को अपने प्रति सम्मानपूर्वक समझकर विस्मयाभिभूत हो जाते थे।

प्रश्न 4.
विदेशी महिलाओं ने नीलकंठ को क्या उपाधि दी ?
उत्तर:
विदेशी महिलाओं ने नीलकंठ को ‘परफैक्ट जेंटिलमैन’ की उपाधि दी।

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3. नीलकंठ और राधा की ………………….. भी एक करुण कथा है।

प्रश्न 1.
नीलकंठ और राधा को कौन-सी ऋतु प्रिय थी। वे इस मौसम में किस प्रकार आनंदित होते थे ?
उत्तर:
वर्षा ऋतु नीलकंठ और राधा की प्रिय ऋतु थी। मेघों के गर्जन करते ही वे नृत्य करने लगते थे। मेघों के आने से पहले ही उनको उनकी सजल (जलयुक्त) आहट आने लगती थी।

प्रश्न 2.
मेघों के आने पर उनका केकारव कैसा हो जाता था ?
उत्तर:
मेघों के आने पर नीलकंठ व राधा का मंद केकारव निरंतर तीव्र से तीव्रतर होता चला जाता था। ऐसा लगता था मानो वे आकाश से मेघों की बूंदों को उतारने के लिए सीढ़ी बना रहे हों।

प्रश्न 3.
मेघों के गर्जन, बिजली की चमक और वर्षा की रिमझिमाहट बढ़ने के साथ-साथ नीलकंठ में क्या परिवर्तन आने लगता था ?
उत्तर:
जैसे ही मेघ गरजने लगते, बिजली चमकने लगती और वर्षा की बूंदों की रिमझिम बढ़ने लगती वैसे ही नीलकंठ का केकारव मंद्र से मंद्रतर होने लगता।

4. वास्तव में नीलकंठ ………………… दृष्टि लगाए रहती थी।

प्रश्न 1.
नीलकंठ न तो बीमार था और न घायल ही फिर भी उसकी मृत्यु हुई ऐसा क्यों हुआ होगा ?
उत्तर:
नीलकंठ को कुब्जा के व्यवहार से बहुत ही मानसिक आघात पहुँचा था। कुब्जा ने उसके अंडों को भी तोड़ दिया था। कुब्जा राधा को नीलकंठ के पास नहीं आने देती थी। इस कलह कोलाहल के कारण ही शायद नीलकंठ का अंत हो गया।

प्रश्न 2.
लेखिका ने नीलकंठ का अंतिम संस्कार किस प्रकार किया ?
उत्तर:
लेखिका नीलकंठ के शव को अपने शाल में लपेटकर संगम तट पर ले गई। वहाँ उन्होंने उसे गंगा की धार में प्रवाहित कर दिया।

प्रश्न 3.
नीलकंठ की मृत्यु के बाद राधा की कैसी दशा हुई ?
उत्तर:
नीलकंठ की मृत्यु के बाद राधा निश्चेष्ट-सी घर के एक कोने में बैठी रही। वह अब भी इस इंतजार में कि शायद नीलकंठ लौट आए। क्योंकि नीलकंठ कई बार घर से चले जाने के बाद फिर लौट आता था। इसी भाव से वह द्वार पर दृष्टि लगाए रहती थी।

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नीलकंठ Summary

पाठ का सार

लेखिका महादेवी वर्मा अपने किसी अतिथि को स्टेशन पहुँचाकर लौट रही थी कि उनको चिड़ियाँ और खरगोशों की दुकान का ध्यान आया। उन्होंने अपने ड्राइवर से मियाँ- चिड़िया वाले की दुकान की ओर चलने को कहा। वे दुकान पर पहुंची और मियाँ- चिड़िया वाला बोला कि आपने पिछली बार मोर के बच्चों के लिए पूछा था मैंने एक शिकारी से आपके लिए बच्चे खरीद लिए। बड़े मियाँ की भाषण मेल चलती ही जा रही थी अतः लेखिका पैंतीस रुपये में उन मोर के दोनों बच्चों को खरीद कर घर ले आई। घर पहुँचने पर सबने कहा कि ये मोर नहीं तीतर के बच्चे हैं, आपको ठग लिया है। लेखिका ने उन बच्चों का पिंजरा अपने पढ़ने वाले कमरे में रखकर खोला। वे दोनों इधर-उधर लुका छिपी खेलने लगे। बिल्ली के डर के कारण उनको पिंजरे में ही रखना पड़ता था। इनको देखकर लेखिका के घर में रहने वाले कबूतर, खरगोश, तोते सभी में कुतूहल जागा।

धीरे-धीरे मोर के बच्चे बड़े होने लगे। मोर के सिर पर कलगी सघन और ऊँची तथा चमकीली हो गई। चोंच अधिक बंकिम और पैनी हो गई। लंबी नील-हरित ग्रीवा बहुत सुंदर लगने लगी। लेखिका ने इसका नाम नीलकंठ रखा। मोरनी का विकास मोर जितना चमत्कारिक तो नहीं था परन्तु वह अपनी मंथर गति से मोर की उपयुक्त सहचरी होने का प्रभाव देने लगी। नीलकंठ लेखिका के घर में रहने वाले सभी जीव जंतुओं का सेनापति बन गया। खरगोश के छोटे बच्चों को वह चोंच से उनके कान पकड़कर उठा लेता था। एक दिन वहाँ जाली में एक साँप आ गया। एक शिशु खरगोश साँप की पकड़ में आ गया। वह उसे निगलने का प्रयास कर रहा था कि नीलकंठ ने उसके फन को पंजों से दबाकर चोंच से प्रहार किया इस प्रकार खरगोश मुक्त हो गया और साँप के भी नीलकंठ ने दो खंड कर दिए।

नीलकंठ जब आकाश में बादल होते थे तो वह इंद्र धनुष के गुच्छे जैसे पंखों को मंडलाकार बनाकर नाचता था। राधा नीलकंठ के समान तो नहीं नाच सकती थी परन्तु नीलकंठ की परिक्रमा से एक पूरक ताल का परिचय अवश्य मिलता था। नीलकंठ का नृत्य बहुत अच्छा लगता था। वह भी यह बात जान गया था अतः वह अब प्रतिदिन अपना नृत्य कौशल दिखाने लगा था। कुछ विदेशी मेहमानों ने भी उसका नृत्य देखा उन्होंने उसको ‘परफैक्ट अँटिलमैन’ की उपाधि से विभूषित कर दिया। जैसे ही वर्षा ऋतु की रिमझिम शुरू होती नीलकंठ का नृत्य आरंभ हो जाता।

नीलकंठ की इस सुखद नृत्य कथा का अंत भी एक दिन हुआ। लेखिका बड़े मियाँ के यहाँ से एक घायल मोरनी ले आई। लेखिका ने उसका इलाज करके उसके प्राण बचाए लेखिका ने उसका नाम कुब्जा रखा क्योंकि घायल होने के कारण उसकी चाल-ढाल बदल गई थी। वह नीलकंठ के पास राधा को भी नहीं जाने देती थी। इस घटना से नीलकंठ उदास रहने लगा। कुब्जा ने राधा के अंडों को भी चोंच मारकर गिरा दिया। नीलकंठ बहुत उदास रहने लगा था। कई महीने बीतने के बाद एक दिन वह मरा हुआ मिला। उसकी मृत्यु का कारण तो पता नहीं चला। लेखिका उसे अपने शाल में लपेट कर गंगा में प्रवाहित कर आई। नीलकंठ के न रहने पर राधा भी निष्चेष्ट-सी बैठी रहने लगी। एक दिन अल्सेशियन कुतिया कजली के दाँत लगने से कुब्जा भी घायल हो गई उसे बचाया नहीं जा सका।

अब राधा कभी ऊँचे झूले पर और कभी अशोक की डाल पर अपनी केका को तीव्रतर करके नीलकंठ को बुलाती रहती है।

शब्दार्थ- चिडिमार-चिड़िया को मारने वाला शिकारी; अनुसरण-नकल करना, पीछे चलना; संकीर्ण-सँकरा/छोटा; मुनासिब-उचित; पक्षी-शावक-पक्षी का बच्चा; आश्वस्त-तसल्ली; आविर्भूत-प्रकट होना; नवागंतुक-नया-नया आया हुआ मेहमान; मार्जारी-बिल्ली; असह्य-न सहने योग्य; कायाकल्प-शरीर में बहुत भारी परिवर्तन आना; बंकिम-टेढ़ी; नीलाभ-नीली चमक; उद्दीप्त-चमक उठना; भंगिमा-मुद्रा; सहचारिणी-पत्नी/साथ-साथ चलने वाली, विचरण करने वाली; ग्रीवा-गर्दन; आर्तक्रंदन-दर्द भरे स्वर में रोना; उष्णता-गर्मी; कार्तिकेय-कृतिका नक्षत्र में उत्पन्न शिव के पुत्र, देवताओं के सेनापति; विस्मयाभिभूत-आश्चर्य से आनंदमग्न होना; पुष्पित और पल्लवित-फूलों और पत्रों से लदा हुआ; मंजरिया-आम का बौर या फूल; केका-मोर की ध्वनि (आवाज)।

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 14 खानपान की बदलती तस्वीर

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 14 खानपान की बदलती तस्वीर Questions and Answers are prepared by our highly skilled subject experts.

खानपान की बदलती तस्वीर NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 14

Class 7 Hindi Chapter 14 खानपान की बदलती तस्वीर Textbook Questions and Answers

गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्नोत्तर

1. पिछले दस-पंद्रह वर्षों …………………… अजनबी नहीं रहे।

प्रश्न 1.
दक्षिण भारत के व्यंजन कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
इटली-डोसा-बड़ा-सांभर-रसम दक्षिण भारत के व्यंजन हैं।

प्रश्न 2.
ढाबा संस्कृति क्या है ?
उत्तर:
सड़कों के किनारे छोटे-छोटे रैस्टोरेंटनुमा खाने की दुकानों को ढाबा कहा जाता है। ढाबा अक्सर उत्तर भारत में होते हैं। लोग इन ढाबों पर खाना खाते हैं परन्तु आज ये पूरे भारत में फैल गए हैं।

प्रश्न 3.
फास्ट फूडं क्या है? इनका चलन क्यों बढ़ा है ?
उत्तर:
बहुत शीघ्रता से तैयार होने वाले व्यंजन जैसे बर्गर, नूडल्स आदि फास्टफूड की श्रेणी में आते हैं। आज भागम-भाग जीवन के कारण इन चीजों का चलन बढ़ गया है।

2. मुंबई की पाव-भाजी …………………… सचमुच दुःसाध्य है।

प्रश्न 1.
मुंबई की पाव-भाजी और दिल्ली के छोले कुलचों की दुनिया पहले की तुलना में किस प्रकार बड़ी हुई है?
उत्तर:
मुंबई की पाव-भाजी अब केवल मुंबई तक ही सीमित नहीं है वरन् सम्पूर्ण भारत में लोग पाव-भाजी खाने लगे हैं। इसी प्रकार दिल्ली के छोले कुलचे भी अब हर जगह मिल सकते हैं।

प्रश्न 2.
मथुरा के पेड़ों और आगरा के पेठे में पहले वाली बात क्यों नहीं रही?
उत्तर:
अन्य वस्तुओं का महत्त्व बढ़ जाने के कारण और पहले जैसी शुद्ध चीज न मिलने के कारण इनकी गुणवत्ता में बहुतः . अंतर आ गया है। अब लोग पहले जितनी मेहनत नहीं करना चाहते।

प्रश्न 3.
महिलाओं के लिए अब क्या दुःसाध्य हो गया है?
उत्तर:
महिलाओं के लिए अब ऐसे कार्य दुःसाध्य हो गए हैं जिनमें मेहनत व समय अधिक लगता है और फल कम प्राप्त होता है। खरबूजे के बीज सुखाना और उनको-छीलना ऐसे ही कार्य हैं।

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3. आजादी के बाद ………………………. खानपान-विशेष से जुड़ी हुई है।

प्रश्न 1.
खानपान की चीजें एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में किस प्रकार पहुँची हैं?
उत्तर:
उद्योग-धंधों और नौकरियों में तबादले के कारण एक स्थान का व्यक्ति दूसरे स्थान पर अपनी जीविका के लिए जाता है इस प्रकार उसके साथ उसका खान-पान भी दूसरी जगह पहुँच जाता है।

प्रश्न 2.
खानपान की यह संस्कृति राष्ट्रीय एकता में किस प्रकार सहायक हो सकती है?
उत्तर:
खानपान की यह संस्कृति तरह-तरह के लोगों को नज़दीक लाती है जैसे विद्यालयों में देखते हैं कि वहाँ सभी धर्म-जाति और क्षेत्रों के विद्यार्थी पढ़ते हैं वे सभी खान-पान के समय एक दूसरे के नज़दीक आते हैं। अब वे एक दूसरे को बड़ी नज़दीकी से समझ सकते हैं। भाषा और बोलचाल के द्वारा एक-दूसरे के नजदीक आयेंगे।

खानपान की मिश्रित संस्कृति में हम कई बार चीज़ों का असली और अलग स्वाद नहीं ले पा रहे। अक्सर प्रीतिभोजों और पार्टियों में एक साथ ढेरों चीजें रख दी जाती हैं और उनका स्वाद गड्डमड्ड होता रहता है। खानपान की मिश्रित या विविध संस्कृति हमें कुछ चीजें चुनने का अवसर देती है, हम उसका लाभ प्रायः नहीं उठा रहे हैं। हम अक्सर एक ही प्लेट में कई तरह के और कई बार तो बिलकुल विपरीत प्रकृति वाले व्यंजन परोस लेना चाहते हैं।

प्रश्न 1.
खान-पान की मिश्रित संस्कृति में हम कई बार चीज़ों का असली और अलग स्वाद क्यों नहीं ले पा रहे हैं?
उत्तर:
उत्तर जब हम किसी पार्टी या प्रीतिभोज में जाते हैं तो वहाँ अलग-अलग तरह की चीजें खाने के लिए रखी होती हैं। खाने वाला ठीक प्रकार से खाने की वस्तुओं का चयन ही नहीं कर पाता। सबका स्वाद आपस में गड्डमगड्ड हो जाता है।

प्रश्न 2.
खान-पान की संस्कृति हमें कुछ चीजें चुनने का अवसर देती है परन्तु हम उनका लाभ क्यों नहीं उठा पाते?
उत्तर:
जब हम किसी पार्टी आदि में भोजन करते हैं तो अक्सर एक ही प्लेट में कई तरह के और कई बार तो बिलकुल विपरीत प्रकृति वाले व्यंजन एक साथ परोस लेना चाहते हैं। इस प्रकार हम उन व्यंजनों का लाभ नहीं उठा पाते।

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निबंध से

प्रश्न 1.
खानपान की मिश्रित संस्कृति से लेखक का क्या मतलब है? अपने घर के उदाहरण देकर इसकी व्याख्या करें?
उत्तर:
खानपान की मिश्रित संस्कृति से लेखक का मतलब है एक ही स्थान पर तरह-तरह और अलग-अलग स्थानों के व्यंजनों का होना जैसे किसी परिवार में पाव-भाजी, छोले कुल्चे व चाइनिज फूड आदि का खाया जाना। ये सभी खाद्य पदार्थ अलग-अलग स्थानों एवं राज्यों के व्यंजन हैं। भारत में उत्तरी क्षेत्र में और तरह के व्यंजन होते हैं तथा दक्षिण में और तरह के। गुजरात का ढोकला और खांडवी भी आजकल हर जगह मिलते हैं और बंगाल का रसगुल्ला भी हर जगह मौजूद है।

प्रश्न 2.
खानपान में बदलाव के कौन से फायदे हैं? फिर लेखक इस बदलाव को लेकर चिंतित क्यों है ?
उत्तर:
खानपान के बदलाव के अनेक फायदे हैं जैसे हम हर तरह एवं हर स्वाद का भोजन कर सकते हैं। एकतरह का भोजन . करने से हमें एक तरह के ही तत्त्वं भोजन से प्राप्त होते हैं। दूसरा फायदा यह है कि जब हम एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं तो आसानी से हम अपने को वहाँ के माहौल में ढाल लेते हैं।

लेखक इस बदलाव से इसलिए चिंतित है क्योंकि हम खाते समय परस्पर विरोधी प्रकृतिवाले व्यंजनों को एक साथ खाने लगते हैं। इस बदलाव के कारण हमारे स्थानीय व्यंजन लुप्त होते जा रहे हैं। साथ ही उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।

प्रश्न 3.
खानपान के मामले में स्थानीयता का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
स्थानीयता का अर्थ उन व्यंजनों से है जो किसी स्थान विशेष के परंपरागत व्यंजन हैं। जैसे दिल्ली के छोले-भटूरे, मथुरा के पेड़े और आगरा का पेठा तथा घरों में बनने वाले व्यंजन जैसे सब्जी-पूड़ी आदि। इन चीजों को विशेष अवसरों पर अवश्य बनाया जाता है परन्तु धीरे-धीरे इनका महत्त्व कम होता जा रहा है। बहुत-सी चीजें अब केवल पाँच सितारा होटलों तक ही सीमित रह गई हैं।

निबंध से आगे

प्रश्न 1.
घर में बातचीत करके पता कीजिए कि आपके घर में क्या चीजें पकती हैं और क्या चीजें बनी-बनाई बाज़ार से आती हैं? इनमें से बाजार से आनेवाली कौन सी चीजें आपके माँ-पिता जी के बचपन में घर में बनती थीं?
उत्तर:
घर में बनने वाली चीजें – दाल, सब्जी रोटी-पूड़ी, खीर, दलिया, खिचड़ी आदि
बाज़र से आने वाली चीजें – मिठाई, समोसे, पकोड़ी, जलेबी, आइसक्रीम आदि।

प्रश्न 2.
यहाँ खाने, पकाने और स्वाद से संबंधित कुछ शब्द दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से देखिए और इनका वर्गीकरण कीजिए-
उबालना, तलना, भूनना, सेंकना, दाल, भात, रोटी, पापड़
आलू, बैंगन, खट्टा, मीठा, तीखा, नमकीन, कसैला
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 14 खानपान की बदलती तस्वीर 1
उत्तर:
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 14 खानपान की बदलती तस्वीर 2

प्रश्न 4.
छौंक चावल कढ़ी
इन शब्दों में क्या अंतर है? समझाइए। इन्हें बनाने के तरीके विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग हैं। पता करें कि आपके प्रांत में इन्हें कैसे बनाया जाता है।
नोट-विद्यार्थी स्वयं करें।

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प्रश्न 5.
पिछली शताब्दी में खानपान की बदलती हुई तस्वीर का खाका खींचें तो इस प्रकार होगा-
सन् साठ का दशक – छोले-भटूरे
सन् सत्तर का दशक – इडली, डोसा
सन् अस्सी का दशक – तिब्बती (चीनी) भोजन
सन् नब्बे का दशक – पीजा, पाव-भाजी
इसी प्रकार आप कुछ कपड़ों या पोशाकों की बदलती तस्वीर का खाका खींचिए।
उत्तर:
सन् साठ का दशक – पतलून, कमीज, सलवार, साड़ी
सन् सत्तर का दशक – बैलबाटम, कुर्ता पाजामा
सन् अस्सी का दशक – पेंट, शर्ट, टाई, सूट, जींस
सन् नब्बे का दशक – जींस, पेंट, टी शर्ट

प्रश्न 6.
मान लीजिए कि आपके घर कोई मेहमान आ रहे हैं जो आपके प्रांत का पारंपरिक भोजन करना चाहते हैं। उन्हें खिलाने के लिए घर के लोगों की मदद से एक व्यंजन-सूची (मेन्यू) बनाइए।
उत्तर:
हलवा, पूड़ी सब्जी
छोले-चावल
गाजर का हलवा
आलू गोभी की सब्जी और रोटी
प्याज, टमाटर, खीरे का सलाद
बूंदी, लौकी या आलू से बना रायता
बूंदी वाली छाछ
आम एवं नींबू का अचार

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
‘फास्ट फूड’ यानी तुरंत भोजन के नफे-नुकसान पर कक्षा में वाद-विवाद करें?
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
हर शहर, कस्बे में कुछ ऐसी जगहें होती हैं जो अपने किसी खास व्यंजन के लिए जानी जाती हैं। आप अपने शहर, कस्बे का नक्शा बनाकर उसमें ऐसी सभी जगहों को दर्शाइए?
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 3.
खानपान के मामले में शुद्धता का मसला काफी पुराना है। आपने अपने अनुभव में इस तरह की मिलावट को देखा है? किसी फिल्म या अखबारी खबर के हवाले से खानपान में होने वाली मिलावट के नुकसानों की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
खानपान में मिलावट अनेक रोगों को जन्म देती है। इस मिलावट के कारण हमारा पाचन तंत्र खराब हो जाता है जिसके कारण पेट की अनेक बीमारियाँ हो जाती हैं। गलत खान पान से नेत्र ज्योति भी कमजोर होती है तथा हृदय से जुड़ी अनेक बीमारियाँ पैदा होती हैं यहाँ तक कि कैंसर और टी.बी. जैसी बीमारियाँ गलत खान-पान के कारण ही होती हैं।

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 14 खानपान की बदलती तस्वीर

भाषा की बात

प्रश्न 1.
खानपान शब्द, खान और पान दो शब्दों को जोड़कर बना है। खानपान शब्द में और छिपा हुआ है। जिन शब्दों के योग में और, अथवा, या जैसे योजक शब्द छिपे हों, उन्हें द्वंद्व समास कहते हैं। नीचे द्वंद्व समास के कुछ उदाहरण दिए गए हैं। इनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए और अर्थ समझिए-
सीना-पिरोना भला-बुरा – चलना-फिरना
लंबा-चौड़ा कहा-सुनी घास-फूस
उत्तर:
सामासिक शब्दों का वाक्य में प्रयोग

  • सीना-पिरोना – पहले लड़की के लिए सीना-पिरोना ही मुख्य काम माना जाता था।
  • भला-बुरा – समझदार व्यक्ति अपना भला-बुरा स्वयं देख लेता है।
  • चलना-फिरना – मरीज ने चलना-फिरना शुरू कर दिया है।
  • लंबा-चौड़ा – हमारे विद्यालय का मैदान लंबा-चौड़ा है।
  • कहा-सुनी – मेरी किसी बात को लेकर मोहन के साथ कहा-सुनी हो गई।
  • घास-फूस – मजदूर घास-फूस के घर बनाकर रहते हैं।

प्रश्न 2.
कई बार शब्द सुनने या पढ़ने पर कोई और शब्द याद आ जाता है। आइए शब्दों की ऐसी कड़ी बनाएँ। नीचे शुरुआत की गई है। उसे आप आगे बढ़ाइए। कक्षा में मौखिक सामूहिक गतिविधि के रूप में भी इसे दिया जा सकता है-
इडली – दक्षिण – केरल – ओणम् – त्योहार – छुट्टी – आराम…
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

कुछ करने को

उन विज्ञापनों को इकट्ठा कीजिए जो हाल ही के ठंडे पेय पदार्थों से जुड़े हैं। उनमें स्वास्थ्य और सफाई पर दिए गए ब्योरों को छाँटकर देखें कि हकीकत क्या है?

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 14 खानपान की बदलती तस्वीर

खानपान की बदलती तस्वीर Summary

पाठ का सार

पिछले दस-पन्द्रह वर्षों में हमारे खानपान में बहुत बदलाव आया है। अब एक क्षेत्र के व्यंजन वहीं तक सीमित न रहकर सब जगह फैल गए हैं। अब दक्षिण के व्यंजन उत्तर में और उत्तर की ढाबा संस्कृति दक्षिण में नज़र आती है। अंग्रेजी राज तक ब्रेड साहबी ठिकानों तक ही सीमित थी। वह आज कस्बों, गाँवों तक पहुँचकर लाखों करोड़ों लोगों के घरों में नाश्ते के रूप में प्रयोग हो रही है। खान-पान के इस बदलाव से नई पीढ़ी सबसे अधिक प्रभावित हुई है। स्थानीय व्यंजन घटकर अब कुछ चीज़ों तक सीमित रह गए हैं। बंबई की पाव भाजी और दिल्ली के छोले कुलचों की दुनिया बढ़ गई है परन्तु आगरे का पेठा और मथुरा के पेड़ों का दायरा घट गया है-क्वालिटी भी पहले वाली नहीं रही है। मौसमी व्यंजनों के बनाने का चलन भी अब उतना नहीं रहा। महिलाएँ भी अब इस प्रकार के व्यंजनों को दुःसाध्य समझने लगी हैं। जहाँ स्थानीय व्यंजनों में कमी आ रही है वहीं देशी-विदेशी व्यंजन अपनाए जा रहे हैं जिनको आसानी से बनाया जा सके। इसका कारण आज जीवन की भागम-भाग है। मँहगाई के कारण भी लोग कई चीजों से वंचित हो गए हैं।

अब खानपान की एक मिश्रित संस्कृति बन गई है। गृहिणियाँ और कामकाजी महिलाएँ जल्दी तैयार होने वाले व्यंजनों को बनाना पंसद करती हैं। नयी-पीढ़ी को देश-विदेश के व्यंजनों को जानने का सुयोग मिला है। आजादी के बाद उद्योग धंधों एवं दूर-दूर नौकरियों के कारण सभी संस्कृतियों के लोग आपस में मिल गए हैं। इनसे उनका खान-पान भी एक दूसरे लोगों ने अपना लिया है। विद्यालयों में हर क्षेत्र के लोगों के बच्चे पढ़ते हैं। उनके टिफिन में तरह-तरह के व्यंजन होते हैं। सभी बच्चे उनसे परिचित हो जाते हैं। स्थानीय व्यंजन धीरे-धीरे गायब होने लगे हैं। पाँच सितारा होटलों में वे कभी-कभार मिलते रहते हैं। जो चीजें उत्तर भारत में गली मुहल्ले में आम हुआ करती थीं वे अब खास दुकानों में ही उपलब्ध हैं। पश्चिम की नकल में हमने कई चीजें ऐसी अपना ली हैं जो स्वास्थ्य और स्वाद के मामले में हमारे अनुकूल नहीं हैं। प्रीतिभोज पार्टियों में इतने व्यंजन होते हैं कि किसी का ठीक से स्वाद भी नहीं ले सकते कभी -कभी तो विपरीत प्रकृति वाले व्यंजन परोस लेते हैं। आज लगता है खानपान की यही मिश्रित संस्कृति अधिक विकसित होने वाली है।

शब्दार्थ : चलन-रिवाज़; विज्ञापित-प्रचारित; गुणवत्ता-क्वालिटी (Quality); दुःसाध्य-जिसको साधना (करना) मुश्किल हो; व्यंजन-पकवान; निखालिस-शुद्ध; बोली-बानी-बोलचाल की भाषा; प्रचारार्थ-प्रचार के लिए; सरसता-रसीला/स्वादिष्ट; प्रीतिभोज-पार्टी आदि; गड्डमगड्-आपस में मिल जाना; मिश्रित-मिली-जुली; पुनरुद्वार-फिर से उद्धार करना, ऊपर उठाना; विनिहित-रखा हुआ।

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 13 एक तिनका

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एक तिनका NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 13

Class 7 Hindi Chapter 13 एक तिनका Textbook Questions and Answers

कविता से

प्रश्न 1.
नीचे दी गई कविता की पंक्तियों को सामान्य वाक्य में बदलिए।
जैसे-एक तिनका आँख में मेरी पड़ा-मेरी आँख में एक तिनका पड़ा
मूंठ देने लोग कपड़े की लगे-लोग कपड़े की मुंठ देने लगे
(क) एक दिन जब मैं मुंडेरे पर खड़ा था-………………….
(ख) आँख लाल होकर दुखने लगी-……………..
(ग) ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भागी-……………………………..
(घ) जब किसी ढब से निकल तिनका गया-…….
उत्तर:
(क) एक दिन जब में मुंडेर पर खड़ा था।
(ख) आँख लाल होकर दुखने लगी।
(ग) बेचारी ऐंठ दबे पाँवों भगी।
(घ) जब किसी ढब से तिनका निकल गया।

प्रश्न 2.
‘एक तिनका’ कविता में किस घटना की चर्चा की गई है, जिससे घमंड नहीं करने का संदेश मिलता है?
उत्तर:
इस कविता में अहंकार में डूबे कवि की आँख में तिनका गिरने की घटना की चर्चा की गई है क्योंकि इस घटना के बाद कवि का सारा अहंकार जाता रहा।

प्रश्न 3.
आँख में तिनका पड़ने के बाद घमंडी की क्या दशा हुई ?
उत्तर:
आँख में तिनका पड़ने के बाद घमंडी बेचैन हो गया। वह आँख को रगड़ने लगा। इससे उसकी आँख लाल होकर दुखने लगी। घमंडी ने तब सोचा कि तेरी अकड़ निकालने के लिए तो एक तिनका ही काफी है।

प्रश्न 4.
घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए उसके आस-पास के लोगों ने क्या किया ?
उत्तर:
उसके आस-पास खड़े लोगों ने कपड़े की गूंठ बनाई। वे उस मूंठ को मुँह की भाप से गर्म करके घमंडी की आँख को सेंकने लगे। मूंठ की सिकाई से आँख का तिनका निकल गया और आँख की पीड़ा भी कम हो गई।

प्रश्न 5.
‘एक तिनका’ कविता में घमंडी को उसकी ‘समझ’ ने चेतावनी दी-
ऐंठता त किसलिए इतना रहा,
एक तिनका है बहुत तेरे लिए।
इसी प्रकार की चेतावनी कबीर ने भी दी है-
तिनका कबहूँ न निदिए, पाँव तले जो होय।
कबहूँ उड़ि आँखिन परै, पीर घनेरी होय।।
इन दोनों में क्या समानता है और क्या अंतर? लिखिए।
उत्तर:
कबीर के कथन और अयोधसिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ के कथन में यह समानता है कि दोनों ने तिनके को तुच्छ बताया और कहा कि एक छोटा सा तिनका भी आँख में गिरने पर बहुत पीड़ा दे सकता है। इन दोनों की बात में यह अंतर है कि कबीर तिनके के माध्यम से किसी की उपेक्षा न करने की बात कहता है और हरिऔध जी तिनके के माध्यम से अहंकार न करने की चेतावनी देते हैं।

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अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
इस कविता को कवि ने ‘मैं’ से आरंभ किया है- ‘मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ’। कवि का यह ‘मैं’ कविता पढ़नेवाले व्यक्ति से भी जुड़ सकता है और तब अनुभव यह होगा कि कविता पढ़नेवाला व्यक्ति अपनी बात बता रहा है। यदि कविता में ‘मैं’ की जगह ‘वह’ या कोई नाम लिख दिया जाए, तब कविता के वाक्यों में बदलाव आ जाएगा। कविता में ‘मैं’ के स्थान पर ‘वह’ या कोई नाम लिखकर वाक्यों के बदलाव को देखिए और कक्षा में पढ़कर सुनाइए?
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए-
ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी,
तब ‘समझ’ ने यों मुझे ताने दिए।
इन पंक्तियों में ‘ऐंठ’ और ‘समझ’ शब्दों का प्रयोग सजीव प्राणी की भाँति हुआ है। कल्पना कीजिए, यदि ‘ऐंठ’ और ‘समझ’ किसी नाटक में दो पात्र होते तो उनका अभिनय कैसा होता ?
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 3.
नीचे दी गई कबीर की पंक्तियों में तिनका शब्द का प्रयोग एक से अधिक बार किया गया है। इनके अलग-अगल अर्थों की जानकारी प्राप्त करें।
उठा बबूला प्रेम का, तिनका उड़ा अकास।
तिनका-तिनका हो गया, तिनका तिनके पास।।
उत्तर:
पहले तिनके का अर्थ आत्मा, दूसरे तिनके का अर्थ खंड-खंड है।
तीसरे तिनका का अर्थ है – जिनका 2-अर्थात ईश्वर का।
चौथे तिनके का अर्थ है – जिनके अर्थात् ईश्वर के।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
‘किसी ढब से निकलना’ का अर्थ है किसी ढंग से निकलना। ‘ढब से’ जैसे कई वाक्यांशों से आप परिचित होंगे, जैसे धम से वाक्यांश है लेकिन ध्वनियों में समानता होने के बाद भी ढब से और धम से जैसे वाक्यांशों के प्रयोग में अंतर है। ‘धम से’, ‘छप से’ इत्यादि का प्रयोग ध्वनि द्वारा क्रिया को सूचित करने के लिए किया जाता है। नीचे कुछ ध्वनि द्वारा क्रिया को सूचित करने वाले वाक्यांश और कुछ अधूरे वाक्य दिए गए हैं। उचित वाक्यांश चुनकर वाक्यों के खाली स्थान भरिए-
छप से, टप से, थर्र से, फुर्र से, सन् से
(क) मेंढक पानी में …………. कूद गया।
(ख) नल बंद होने के बाद पानी की एक बूंद …………. चू गई।
(ग) शोर होते ही चिड़िया ……… उड़ी।
(घ) ठंडी हवा …………. गुजरी, मैं ठंड में …………. काँप गया।
उत्तर:
(क) मेंढक पानी में छप से कूद गया।
(ख) नल बंद होने के बाद पानी की एक बूंद टप से चू.गई।
(ग) शोर होते ही चिड़िया फुर्र से उड़ गई।
(घ) ठंडी हवा सन् से गुज़री, मैं ठंड में थर्र से काँप गया।

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कविता की सप्रसंग व्याख्या एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

मैं घमंडों ……………………. बहुत तेरे लिए।

शब्दार्थ : ऐंठना-अकड़ दिखाना; मूँठ देना-कपड़े को मोल गाँठ-सी बनाकर मुँह की भाप से उसको गर्म कर आँख सेंकने की एक विधि; ढब-तरीका, उपाय।

प्रसंग- प्रस्तुत कविता ‘एक तिनका’ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘बसंत भाग-2’ में संकलित है। इस कविता में बताया है कि हमें अहंकार नहीं करना चाहिए। एक तुच्छ-सी वस्तु भी हमारे अहंकार को तोड़ने के लिए काफी है।

व्याख्या- कवि बताता है कि एक दिन मैं मन में अहंकार लिए अपने घर की छत पर खड़ा हुआ था। मैं अपने आपको बहुत शक्तिशाली समझता था। तभी अचानक कहीं दूर से एक तिनका उड़ता हुआ आया और मेरी आँख में गिर गया। आँख में तिनका गिरने से मुझे झिझक हुई और मैं बेचैन हो उठा। मेरी आँख लाल हो गई और दुखने लगी। मेरी आँख के दर्द को दूर करने के लिए पास खड़े लोग कपड़े की गांठ को मुँह की भाप से गर्म करके मेरी आँख की सिकाई करने लगे। मेरी सारी ऐंठ निकल गई। पता नहीं कैसे-कैसे करके मेरी आँख से तिनका निकाला गया। मेरी समझ ने मुझको ताने दिए कि तू बहुत अकड़वाला बनता था। तू इतना किसलिए ऐंठता था एक तिनके ने तेरी सारी अकड़ निकाल दी।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि कहाँ खड़ा हुआ था जब उसकी आँख में तिनका गिरा?
उत्तर:
कवि अपने घर की मुंडेर पर खड़ा था जब उसकी आँख में एक तिनका उड़कर गिर गया।

प्रश्न 2.
तिनका आँख में गिरने पर कवि की कैसी दशा हो गई ?
उत्तर:
कवि बेचैन हो उठा। उसकी आँख लाल होकर दुखने लगी। लोग उसकी आँख को कपड़े की पूँठ देकर सिकाई करने लगे।

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प्रश्न 3.
आँख से तिनका किस प्रकार निकाला गया ?
उत्तर:
वहाँ खड़े लोगों ने तरह-तरह के यत्न करके किसी तरह से आँख से तिनका निकाल दिया।

प्रश्न 4.
इस कविता से हमें क्या सीख मिलती है ?
उत्तर:
इस कविता से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अहंकार नहीं करना चाहिए एक तुच्छ-सी वस्तु या छोटा और कमजोर-सा शत्रु भी हमको पीड़ा दे सकता है।

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 12 कंचा

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कंचा NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant Chapter 12

Class 7 Hindi Chapter 12 कंचा Textbook Questions and Answers

कहानी से

प्रश्न 1.
कंचे जब जार से निकलकर अप्पू के मन की कल्पना में समा जाते हैं, तब क्या होता है?
उत्तर:
कंचे जार से निकलकर अप्पू के मन की कल्पना में समा जाते हैं तो उसे लगता है कि मानो जार एकदम बड़ा हो गया है आकाश से भी बड़ा। वह भी उसके भीतर आ गया। जब वह स्कूल पहुँचता है और कक्षा में मास्टर जी रेल के बारे में पढ़ाते हैं तो उस रेलगाड़ी का बॉयलर भी काँच का एक बड़ा जार नजर आने लगता है उसमें हरी लकीर वाले, सफेद गोल कंचे भरे हैं। बड़े आवले जैसे।

प्रश्न 2.
दुकानदार और ड्राइवर के सामने अप्पू की क्या स्थिति है? वे दोनों उसको देखकर पहले परेशान होते हैं, फिर हँसते हैं। कारण बताइए?
उत्तर:
दुकानदार और ड्राइवर दोनों ही अप्पू को देखकर पहले खीज़ उठते हैं। दुकानदार सोचता है यह लड़का इतनी देर से इस जार को देख रहा है। यह नाहक समय बर्बाद कर रहा है। परन्तु दुकानदार उसकी मासूमियत देखकर हँसने लगता है। इसी प्रकार ड्राइवर जब अप्पू को बीच सड़क पर देखता है तो उसे गुस्सा आता है परन्तु जब अप्पू सोचता है कि शायद ड्राइवर को भी कंचे अच्छे लग रहे हैं तो उसने एक कंचा उठाकर उसे दिखाया और कहा-“बहुत अच्छा है न। यह सुनकर ड्राइवर का गुस्सा हवा हो गया। वह भी अप्पू के साथ हँस पड़ा।

प्रश्न 3.
‘मास्टर जी की आवाज़ अब कम ऊँची थी। वे रेलगाड़ी के बारे में बता रहे थे।’ मास्टर जी की आवाज धीमी क्यों हो गई होगी? लिखिए।
उत्तर:
मास्टर जी की आवाज़ अब धीमी इसलिए हो गई थी क्योंकि सभी बच्चे रेलगाड़ी के बारे में पूरी उत्सुकता से सुन रहे थे। कक्षा में पूरी तरह से शांति थी। यदि कक्षा शांत हो तो फिर जोर से बोलने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

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कहानी से आगे

प्रश्न 1.
कंचे, गिल्ली-डंडा, गेंदतड़ी (पिठ्ठ) जैसे गली-मोहल्लों के कई खेल ऐसे हैं जो बच्चों में बहुत लोकप्रिय हैं। आपके इलाके में ऐसे कौन-कौन से खेल खेले जाते हैं? उनी एक सूची बनाइए?
उत्तर:
हमारे इलाके में बच्चे-फुटबॉल, गल्ली-डंडा, क्रिकेट, खो-खो, छपम-छपाई आदि खेल खेलते हैं।

प्रश्न 2.
किसी एक खेल को खेले जाने की विधि अपने शब्दों में लिखिए? .
उत्तर:
गाँव के लड़के आज भी सबसे ज्यादा गुल्ली-डंडा ही खेलते हैं। इस खेल में किसी प्रकार का खर्चा भी नहीं आता। किसी पेड़ से एक टहनी तोड़कर गुल्ली और डंडा बना लिया जाता है। गुल्ली को ज़मीन पर रखकर डंडे से मारते हैं। गुल्ली दूर जाती है। इस प्रकार खेल शुरू हो जाता है। दूसरा पक्ष गुल्ली को उठाकर डंडे पर मारता है।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
जब मास्टर जी अप्पू से सवाल पूछते हैं तो वह कौन-सी दुनिया में खोया हुआ था? क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी दिन क्लास में रहते हुए भी क्लास से गायब रहे हों? ऐसा क्यों हुआ और आप पर उस दिन क्या गुज़री? अपने अनुभव लिखिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
आप इस कहानी को क्या शीर्षक देना चाहेंगे?
उत्तर:
मैं इस कहानी को ‘बचपन’ शीर्षक देना चाहूँगा।

प्रश्न 3.
गुल्ली-डंडा और क्रिकेट में कुछ समानता है और कुछ अंतर। बताइए, कौन-सी समानताएँ हैं और क्या-क्या अंतर हैं?
उत्तर:
गुल्ली-डंडा और क्रिकेट का बैट एवं विकेट लकड़ी के बने होते हैं। गुल्ली-डंडे के खेल में कुछ खर्चा नहीं आता। इस खेल को दो जने खेल सकते हैं। क्रिकेट का खेल खर्चीला है तथा इसे खेलने के लिए अधिक खिलाड़ियों की आवश्यकता पड़ती है।

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भाषा की बात

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित मुहावरे किन भावों को प्रकट करते हैं? इन भावों से जुड़े दो-दो मुहावरे बताइए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए।

  • माँ ने दाँतों तले अंगुली दबाई
  • सारी कक्षा साँस रोके हुए उसी तरफ़ देख रही है।

उत्तर:
पहला मुहावरा आश्चर्य व्यक्त करने के लिए प्रयोग हुआ है। इस अर्थ के लिए अन्य मुहावरा है ‘आँखें फटी की फटी रह जाना’।
पहलवान की ताकत देखकर सबकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
दूसरा मुहावरा एकाग्रचित होकर किसी चीज को देखने के लिए प्रयोग हुआ है। इसके लिए अन्य मुहावरा ‘दम साधकर बैठना’ है। मुझे झूले पर डर लग रहा था ‘मैं दम साधकर बैठ गया’।

प्रश्न 2.
विशेषण कभी-कभी एक से अधिक शब्दों के भी होते हैं। नीचे लिखे वाक्यों में रेखांकित हिस्से क्रमशः रकम और कंचे के बारे में बताते हैं, इसलिए वे विशेषण हैं।
पहले कभी किसी ने इतनी बड़ी रकम से कंचे नहीं खरीदे।
बढ़िया सफेद गोल कंचे
इसी प्रकार के कुछ विशेषण नीचे दिए गए हैं इनका प्रयोग कर वाक्य बनाएँ-
ठंडी अँधेरी रात, खट्टी-मीठी गोलियाँ
ताज़ा स्वादिष्ट भोजन, स्वच्छ रंगीन कपड़े
उत्तर:
(i) ठंडी अँधेरी रात में अचानक सियार बोल उठे।
(ii) मुझे खट्टी-मीठी गोलियाँ अच्छी लगती हैं।
(iii) ताजा स्वादिष्ट भोजन खाना चाहिए।
(iv) स्वच्छ और रंगीन कपड़े बच्चों को बहुत भाते हैं।

कुछ करने को

मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’ खोजकर पढ़िए। ‘ईदगाह’ कहानी में हामिद चिमटा खरीदता है। और ‘कंचा’ कहानी में अप्पू कंचे। इन दोनों बच्चों में से किसकी पसंद को आप महत्त्व देना चाहेंगे? हो सकता है, आपके कुछ साथी चिमटा खरीदने वाले हामिद को पसंद करें और कुछ अप्पू को। अपनी कक्षा में इस विषय पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए।
छात्र स्वयं करें।

1. वह चलते-चलते ………………… अकेले ही खेलता था।

प्रश्न 1.
यहाँ किसकी बात हो रही है? वह जिस दुकान में पहुँचा उस दुकान में क्या-क्या रखा था?
उत्तर:
यहाँ अप्पू की बात हो रही है। वह जिस दुकान में गया उस दुकान के काउंटर पर कई जार थे जिनमें चॉकलेट, पिपरमेंट और बिस्कुट भरे थे।

प्रश्न 2.
किस चीज ने अप्पू का ध्यान आकृष्ट किया ?
उत्तर:
एक जार ने अप्पू का ध्यान आकृष्ट किया। उस जार में कंचे भरे हुए थे।

प्रश्न 3.
उस जार में कैसे-कैसे कंचे थे ?
उत्तर:
उस जार में हरी लकीरवाले बढ़िया सफेद गोल कंचे थे। वे आकार में बड़े आँवले जैसे थे।

प्रश्न 4.
अप्पू को जार कैसा लगने लगने लगा ?
उत्तर:
अप्पू को जार बड़ा लगने लगा। जार आसमान से भी बड़ा हो गया और वह भी उसमें भीतर आ गया।

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2. लड़कों के बीच ………………….. ध्यान नहीं दे रहा है।

प्रश्न 1. अप्पू को जॉर्ज का ख्याल क्यों आया ?
उत्तर:
लड़को में जॉर्ज ही सबसे अच्छा कंचे का खिलाड़ी है वह किसी भी लड़के को कंचे के खेल में हरा सकता है।

प्रश्न 2.
जॉर्ज जीतने पर क्या करता था ?
उत्तर:
जॉर्ज जीतने पर हारने वाले लड़के की मुट्ठी ज़मीन पर रखवाकर कंचा चलाकर बंद मुट्ठी पर मारता था।

प्रश्न 3.
जॉर्ज उस दिन स्कूल क्यों नहीं आया था ?
उत्तर:
जॉर्ज को बुखार था इसलिए वह स्कूल नहीं आया था।

कंचा Summary

पाठ का सार

अप्पू नीम के पेड़ों की घनी छाँव से होते हुए सियार की कहानी का मजा लेता हुआ आ रहा था। उसके कंधे पर बस्ता झूल रहा था। सियार और कौए की कहानी थी जिसमें सियार कौए को मूर्ख बनाकर उसकी रोटी खा लेता है। अप्पू चलते-चलते एक दुकान के पास पहुँचा। दुकान के कांउटर पर कई जार रखे थे जिनमें चॉकलेट, पिपरमेंट और बिस्कुट थे। तभी उसकी नज़र एक दूसरे जार पर पड़ी जिसमें कंचे भरे हुए थे। लड़के को वे कंचे बहुत अच्छे लगे। तभी दुकानदार ने उससे पूछा कि क्या तुम्हें कंचा चाहिए? दुकानदार ने जार का ढक्कन खोला परन्तु अप्पू ने सिर हिलाकर मना कर दिया। तभी स्कूल की घंटी सुनकर वह बस्ता थामे हुए दौड़ा। उस दिन वह सबके बाद स्कूल पहुँचा।

लड़कों के बीच जॉर्ज सबसे अच्छा कंचों का खिलाड़ी था। अप्पू की निगाह उसको खोज रही थीं। परन्तु वह उस दिन स्कूल नहीं आया था। उसे पता लगा कि जॉर्ज को बुखार है। मास्टर जी कक्षा में पढ़ा रहे थे परन्तु अप्पू का ध्यान पढ़ाई में नहीं था। उसके दिलो-दिमाग में तो बस कंचे छाए हुए थे। मास्टर जी उस दिन रेलगाड़ी के बारे में समझा रहे थे परन्तु अप्पू की निगाहों में तो काँच का बड़ा-सा जार छाया हुआ था तभी उसके चेहरे पर चॉक का टुकड़ा आकर लगा। मास्टर जी ने उससे पूछा कि क्या कर रहा है तू। अप्पू की छबराहट बढ़ गई। तभी चपरासी एक नोटिस लाया कि जो फीस लाए हैं वे ऑफिस में आकर फीस जमा कर दें। अप्पू भी फीस जमा कराने गया परन्तु वहाँ बहुत भीड़ थी। उसकी जेब में फीस के एक रुपया पचास पैसे थे। वह बिना फीस जमा कराए ही आ गया। स्कूल की छुट्टी के बाद वह कंधे पर बस्ता लादकर चल दिया। वह सीधा उस दुकान पर पहुँचा जहाँ कंचों का जार रखा था। दुकानदार ने उससे पूछा कि तुम्हें कितने कंचे चाहिए अप्पू ने अपनी जेब से एक रुपया पचास पैसे निकाल कर सब पैसों के कंचे खरीद लिए। वह एक थैली में कंचे लेकर चल दिया। वह जॉर्ज के अलावा और किसी को कंचों की बात बताना नहीं चाहता था। वह यह देखने के लिए पोटली को खोलकर देखने लगा कि कहीं सभी कंचों में लकीर है कि नहीं। पोटली खुलते ही सारे कंचे बिखर गए। वह कंचे चुनने लगा तभी पीछे से एक कार आई। वह कंचे चुनने में मग्न था। कार वाले ने ब्रेक लगा दी ड्राइवर गुस्से में था। अप्पू को लगा शायद ड्राइवर को भी कंचे अच्छे लग रहे हों इसलिए वह यहीं रुका है। वह ड्राइवर को एक कंचा उठाकर दिखाने लगा कि बहुत अच्छा है न! “यह सुनकर ड्राइवर भी हँस पड़ा।

घर में माँ अप्पू की बाट जोह रही थी। माँ ने पूछा कि तू अब तक कहाँ था? अप्पू ने अपना बस्ता हिलाकर दिखाया। माँ ने पूछा कि इसमें क्या है? उसने कहा कि पहले तुम अपनी आँखें बंद करो। माँ के आँखें बंद करने पर उसने गिना वन, टू-थ्री.. माँ ने आँखें खोलकर देखा बस्ते में कंचे ही कंचे थे। माँ ने पूछा कि ये कंचे तू कहाँ से लाया? वह बोला- ‘मैंने खरीदे हैं पैसों से? पूछने पर वह पिता की तस्वीर की ओर इशारा करते हुए बोला कि दोपहर दिए थे ना। माँ ने दाँतों तले अंगुली दबाते हुए कहा फीस के पैसों से इतने सारे कंचे खरीद लिए। वह अपनी माँ से बोला-देखने में बहुत अच्छे लगते हैं न उसकी बातों पर माँ को भी हँसी आ गई।

शब्दार्थ : आकृष्ट-खींचना; निषेध-मना; नौ दो ग्यारह होना-भाग जाना; चिकोटी-चुटकी; धीरज-धैर्य; सटाए-चिपकाए।

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