CBSE Class 7

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 16 धृतराष्ट्र की चिंता

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 16 धृतराष्ट्र की चिंता

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 16

प्रश्न 1.
पांडवों के वन जाने के बाद धृतराष्ट्र ने विदुर को क्यों बुलाया ?
उत्तर:
धृतराष्ट्र जानना चाहता था कि पांडव और द्रौपदी वन की ओर किस प्रकार जा रहे हैं। धृतराष्ट्र पांडवों की मनःस्थिति को जानना चाहता था?

प्रश्न 2.
विदुर ने पांडवों के वन की ओर जाने के बारे में धृतराष्ट्र को क्या बताया?
उत्तर:
विदुर ने धृतराष्ट्र से कहा-“कुंती-पुत्र युधिष्ठिर कपड़े से चेहरा ढके जा रहे हैं। भीमसेन अपनी दोनों भुजाओं को निहारता, अर्जुन अपने हाथ में कुछ बालू लिए उसे बिखेरता, नकुल और सहदेव सारे शरीर पर धूल रमाए हुए, क्रमशः युधिष्ठिर के पीछे जा रहे हैं। द्रौपदी ने बिखरे केशों से सारा मुख ढक लिया है और आँसू बहाती हुई, युधिष्ठिर का अनुसरण कर रही है।

प्रश्न 3.
विदुर धृतराष्ट्र से बार-बार क्या आग्रह करते थे? विदुर की बातों से ऊबकर धृतराष्ट्र ने क्या किया ?
उत्तर:
विदुर धृतराष्ट्र से बार-बार कह रहे थे कि पांडवों के साथ संधि कर लो। विदुर की इन बातों से ऊबकर धृतराष्ट्र ने झुंझलाकर कह दिया कि मुझे तुम्हारी सलाह की जरूरत नहीं है। अगर चाहो तो तुम भी पांडवों के पास चले जाओ।

प्रश्न 4.
धृतराष्ट्र ने संजय को वन में क्यों भेजा ?
उत्तर:
विदुर के जाने के बाद धृतराष्ट्र को अपनी भूल का अहसास हुआ उसने संजय को बुलाकर कहा कि वन में जाकर विदुर को समझा-बुझाकर वापस ले आओ।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 16 धृतराष्ट्र की चिंता

प्रश्न 5.
संजय ने विदुर से जाकर क्या कहा ?
उत्तर:
संजय उस आश्रम में पहुँच गया जहाँ पांडव ठहरे हुए थे। संजय ने विनम्रतापूर्वक विदुर से कहा-“धृतराष्ट्र अपनी भूल पर पछता रहे हैं। यदि आप वापस नहीं लौटेंगे तो वह अपने प्राण त्याग देंगे।

प्रश्न 6.
महर्षि मैत्रेय ने दुर्योधन को समझाते हुए क्या कहा ?
उत्तर:
महर्षि मैत्रेय ने दुर्योधन को समझाते हुए कहा कि तुम पांडवों को धोखा देने का विचार छोड़ दो। उनसे वैर मोल न लो। उनके साथ संधि कर लो। इसी में तुम्हारी भलाई है।

प्रश्न 7.
कृष्ण किन-किन को साथ लेकर पांडवों से मिलने वन में गए ?
उत्तर:
श्रीकृष्ण अपने साथ कैकेय, भोज और वृष्टि जाति के नेता चेदिराज, धृष्टकेतु आदि के साथ पांडवों से मिलने गए। इन लोगों के साथ पांडवों का बड़ा स्नेह संबंध था।

प्रश्न 8.
श्रीकृष्ण को देखकर द्रौपदी की कैसी दशा हुई ?
उत्तर:
द्रौपदी ने जब श्रीकृष्ण को देखा तो उसकी आँखों से अविरल अश्रुधारा बह चली। बड़ी मुश्किल से वह बोली कि इस तरह अपमानित होने से मेरा जीना ही बेकार है। मेरा कोई नहीं रहा और आप भी मेरे नहीं रहे।

प्रश्न 9.
श्रीकृष्ण ने समझाते हुए द्रौपदी से क्या कहा ?
उत्तर:
श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा-“बहिन द्रौपदी! जिन्होंने तुम्हारा अपमान किया है, उन सबकी लाशें युद्ध भूमि में खून से लथपथ होकर पड़ेंगी। तुम शोक न करो। मैं वचन देता हूँ कि पांडवों की हर प्रकार से सहायता करूँगा। यह भी निश्चय मानो कि तुम साम्राज्ञी के पद को फिर सुशोभित करोगी।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 16 धृतराष्ट्र की चिंता

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 16

जब द्रौपदी को साथ लेकर पांडव वन की ओर जाने लगे, तो धृतराष्ट्र ने विदुर को बुला भेजा और पूछा-“विदुर पांडु के बेटे और द्रौपदी कैसे जा रहे हैं ? विदुर ने बताया युधिष्ठिर कपड़े से मुंह ढके, भीमसेन अपनी दोनों भुजाओं को निहारता, अर्जुन अपने हाथ में लिए बालू को बिखेरता, नकुल-सहदेव अपने शरीर पर धूल रमाए व द्रौपदी अपने खुले केशों से मुँह ढके जा रही है। विदुर बार-बार धृतराष्ट्र से आग्रह करते थे कि संधि कर लो। धृतराष्ट्र ने विदुर से चिढ़कर एक बार कह दिया कि मुझे तुम्हारी सलाह की जरूरत नहीं यदि चाहो तो तुम भी पांडवों के पास चले जाओ। विदुर वहाँ पहुँच गए जहाँ वन में पांडव ठहरे हुए थे। विदुर के जाने के बाद धृतराष्ट्र को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने ‘संजय’ को विदुर को बुलाने के लिए वन भेजा। संजय ने विदुर से जाकर कहा कि धृतराष्ट्र अपनी भूल पर पछता रहे हैं। आप यदि वापस नहीं लौटेंगे तो वह अपने प्राण त्याग देंगे। विदुर जब धृतराष्ट्र के सामने गए तो उन्होंने बड़े प्रेम से गले से लगाते हुए कहा निर्दोष विदुर मुझे क्षमा कर दो।

इसी तरह एक बार महर्षि मैत्रेय धृतराष्ट्र के दरबार में पधारे। राजा ने उनका यथोचित सत्कार किया। धृतराष्ट्र ने उनसे पांडवों के बारे में पूछा तो ऋषि मैत्रेय ने बताया कि हस्तिनापुर में जो कुछ हुओं मुझे उनसे सब मालूम पड़ गया। भीष्म और आपके रहते ऐसा नहीं होना चाहिए था। मैत्रेय ने दुर्योधन से भी कहा कि तुम पांडवों को धोखा देने का विचार छोड़ दो। उनके साथ संधि करने में ही तुम्हारी भलाई है। दुर्योधन ने ऋषि की बातों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। दुर्योधन की इस ढिठाई को देखकर महर्षि ने क्रोधित होकर कहा कि अपने इस घमंड का फल तुम अवश्य पाओगे। इसी बीच श्रीकृष्ण को भी हस्तिनापुर में घटित घटनाओं की खबर लगी। श्रीकृष्ण अपने साथ कैकेय, भोज और चेदिराज आदि को साथ लेकर वन में उनसे मिलने गए। इन लोगों के साथ पांडवों का बड़ा स्नेह संबंध था। कृष्ण को देखकर द्रौपदी की आँखों से अश्रधारी बह चली। उसने कहा इस तरह अपमानित होने से मेरा जीना ही बेकार है। कृष्ण ने द्रौपदी से कहा, “बहिन द्रौपदी जिन्होंने तुम्हारा अपमान किया है उन सबकी लाशें युद्ध भूमि में खून से लथपथ होकर पड़ेंगी। मैं पांडवों की हर तरह से सहायता करूँगा और तुम पुनः साम्राज्ञी के पद को प्राप्त करोगी। धृष्टद्युम्न ने भी बहिन को सांत्वना दी। इसके बाद कृष्ण पांडवों से विदा हुए और साथ में अर्जुन की पत्नी सुभद्रा और पुत्र अभिमन्यु का लकर द्वारका चले गए। द्रौपदी के पुत्रों को लेकर धृष्टद्युम्न पांचाल देश चला गया।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 15 चौसर का खेल व द्रौपदी की व्यथा

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 15 चौसर का खेल व द्रौपदी की व्यथा

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 15

प्रश्न 1.
विदुर ने इन्द्रप्रस्थ जाकर युधिष्ठिर से क्या कहा ?
उत्तर:
विदुर ने इन्द्रप्रस्थ जाकर युधिष्ठिर से कहा कि हस्तिानपुर में खेल के लिए एक सभा मंडप बनाया गया है, जो तुम्हारे मंडप के समान ही सुंदर है। राजा धृतराष्ट्र की ओर से उसे देखने चलने के लिए तुम्हें न्यौता देने आया हूँ। उनकी इच्छा है कि तुम सब भाइयों सहित वहाँ आओ, उस मंडप को देखो और दो-दो हाथ चौसर भी खेल जाओ।

प्रश्न 2.
चौसर खेलने के निमंत्रण की बात सुनकर युधिष्ठिर ने विदुर से क्या कहा ?
उत्तर:
युधिष्ठिर ने कहा “काका श्री! चौसर का खेल अच्छा नहीं है। उससे आपस में झगड़े पैदा होते हैं। समझदार लोग उसे पसंद नहीं करते। लेकिन इन मामलों में हम तो आप ही के आदेशानुसार चलने वाले हैं।”

प्रश्न 3.
सारी बातों को जानने के बाद भी युधिष्ठिर ने चौसर खेलना क्यों स्वीकार किया?
उत्तर:
राजवंशों की रीति के अनुसार किसी भी राजा को खेल के लिए बुलावा मिल जाने पर उसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता था। इसके अलावा युधिष्ठिर को डर था कि कहीं खेल में न जाने को ही धृतराष्ट्र अपना अपमान न समझ लें इसलिए युधिष्ठिर ने न्यौता स्वीकार कर लिया।

प्रश्न 4.
चौसर के खेल में युधिष्ठिर को क्या-क्या हारना पड़ा ?
उत्तर:
चौसर के खेल में दुर्योधन की ओर से शकुनि खेल रहे थे। ऐसा लगता था कि मानो पांसे शकुनि के इशारों पर चल रहे हों। युधिष्ठिर अपना सोना, चाँदी, भाइयों के आभूषण, अपने भाइयों को; तथा अपने आपको भी दाँव पर लगाकर हार गया। अंत में उसने शकुनि के उकसाने पर द्रौपदी को भी दाँव पर लगा दिया और हार गया।

प्रश्न 5.
दुर्योधन ने विदुर को क्या आदेश दिया, विदुर ने क्या कहकर दुर्योधन का आदेश नहीं माना ?
उत्तर:
दुर्योधन ने विदुर को आदेश दिया कि वे रनिवास में जाएँ और द्रौपदी को लेकर आएँ। विदुर ने कहा कि मूर्ख! नाहक क्यों मृत्यु को न्यौता देने चला है। अपने को हार चुकने के बाद युधिष्ठिर को कोई अधिकार नहीं था कि वह पांचाल की बेटी को दाँव पर लगाए।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 15 चौसर का खेल व द्रौपदी की व्यथा

प्रश्न 6.
धृतराष्ट्र के पुत्र विकर्ण ने क्या कहकर दुर्योधन का विरोध किया ?
उत्तर:
विकर्ण ने कहा कि चौसर के खेल के लिए युधिष्ठिर को धोखे से बुलाया गया है। स्वयं को हारने के बाद युधिष्ठिर को कोई अधिकार नहीं कि वह द्रौपदी को दाँव पर लगाए। शकुनि ने द्रौपदी की बाजी लगाने के लिए युधिष्ठिर को उकसाया था जो नियम विरुद्ध था।

प्रश्न 7.
दुःशासन द्वारा द्रौपदी का चीर हरण करने पर भीम ने क्या प्रतिज्ञा की ?
उत्तर:
भीम ने प्रतिज्ञा की “उपस्थित सज्जनो! मैं शपथ खाकर कहता हूँ कि जब तक भरत वंश पर बट्टा लगाने वाले इस दुरात्मा दुःशासन की छाती चीर न लूँगा तब तक इस संसार को छोड़कर नहीं जाऊँगा ?

प्रश्न 8.
भीम की प्रतिज्ञा को सुनकर धृतराष्ट्र ने क्या निर्णय लिया ?
उत्तर:
परिस्थितियों को संभालने के लिए धृतराष्ट्र ने द्रौपदी को बड़े प्रेम से अपने पास बुलाकर शांत किया और फिर युधिष्ठिर से बोले तुम तो अजातशत्रु हो, उदार हृदय भी हो, दुर्योधन की इस कुचाल को क्षमा कर दो। अपना राज्य, संपत्ति आदि सब ले जाओ और इन्द्रप्रस्थ जाकर सुखपूर्वक रहो। धृतराष्ट्र की इन बातों से पांडवों के दिल शांत हो गए।

प्रश्न 9.
दुर्योधन के पुनः बुलावे पर चौसर के लिए क्या शर्त रखी गई ?
उत्तर:
इस बार खेल के लिए शर्त थी कि हारा हुआ दल अपने भाइयों के साथ बारह वर्ष तक वनवास करेगा तथा उसके उपरांत एक वर्ष अज्ञातवास में रहेगा। यदि अज्ञातवास के एक वर्ष में उनका पता चल गया तो उन सबको बारह वर्ष का वनवास फिर से भोगना पड़ेगा।

प्रश्न 10.
युधिष्ठिर को अपने भाइयों के साथ वन में क्यों जाना पड़ा ?
उत्तर:
युधिष्ठिर फिर से आयोजित किए गए चौसर के खेल में हार गए। शर्त के अनुसार उनको 12 वर्ष के वनवास व एक वर्ष के अज्ञातवास के लिए जाना पड़ा।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 15 चौसर का खेल व द्रौपदी की व्यथा

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 15

धृतराष्ट्र की बात मानकर विदुर पांडवों के पास चौसर खेलने का न्योता लेकर गए। विदुर का वहाँ यथोचित सत्कार किया गया। विदुर ने युधिष्ठिर को हस्तिनापुर के नवनिर्मित मंडप को देखने और चौसर खेलने का निमंत्रण दिया। युधिष्ठिर ने कहा काका श्री चौसर का खेल ठीक नहीं है, परन्तु राजवंश की नीति के अनुसार बुलावे को अस्वीकार करना भी उचित नहीं है। युधिष्ठिर ने चौसर खेलने के न्यौते को स्वीकार कर लिया। युधिष्ठिर अपने भाइयों एवं पत्नी के साथ हस्तिनापुर पहुंच गए। अगले दिन तैयार होकर वे मंडप में जा पहँचे। युधिष्ठिर ने एक बार फिर कहा कि चौसर का खेल उचित नहीं है। इस पर शकुनि ने कहा कि तुम हार से डरते हो इसलिए ऐसा कह रहे हो। जब युधिष्ठिर ने पूछा कि उनके साथ कौन खेलेगा तो दुर्योधन बोले की मेरी ओर से मामा शकुनि खेलेंगे पर धन में दूँगा। युधिष्ठिर ने किसी की ओर से दूसरे के खेलने पर भी आपत्ति की परन्तु शकुनि के यह कहने पर कि तुम बहाना बना रहे हो, युधिष्ठिर ने खेलना स्वीकार कर लिया। खेल शुरू हो गया। ऐसा लगता था कि मानो पांसा उसके इशारों पर चल रहा है। युधिष्ठिर अपनी सारी सम्पत्ति और अपने भाइयों को भी दाँव पर लगाकर एक-एक करके हारता चला गया। अंत में वह स्वयं को भी हार गया। शकुनि के उकसाने पर युधिष्ठिर ने द्रौपदी को भी दाँव पर लगा दिया और उसको भी हार गया। दुर्योधन ने द्रौपदी को लाने के लिए विदुर से कहा कि वे रनिवास में जाएँ और द्रौपदी को लेकर आएँ। विदुर ने इस कार्य को अनीतिपूर्ण बताया। इसके बाद दुर्योधन ने प्रतिकामी को भेजा। द्रौपदी ने कहा कि युधिष्ठिर को स्वयं हारने के बाद उसे दाँव पर लगाने का अधिकार नहीं है। फिर दुर्योधन ने द्रौपदी को लाने के लिए अपने छोटे भाई दुःशासन को भेजा। दुःशासन ने द्रौपदी के बाल बिखेर डाले व गहने तोड़ दिए वह उसे खींचकर सभा मंडप में लाया। धृतराष्ट्र के बेटे विकर्ण ने इसका विरोध किया। कर्ण ने उसे डाँटकर चुप करा दिया। दुःशासन द्रौपदी की साड़ी पकड़कर खींचने लगा पर वस्त्र बढ़ता ही जा रहा था। अखिर में दुःशासन थककर बैठ गया। तभी भीम ने प्रतिज्ञा की-मैं शपथ खाकर कहता हूँ कि जब तक इस दुरात्मा दुःशासन की छाती चीर न लूँगा तब तक इस संसार को छोड़कर नहीं जाऊँगा। यह सुनकर उपस्थित लोग थर्रा उठे। धृतराष्ट्र ने भावी विनाश को समझते हुए द्रौपदी को प्यारपूर्वक अपने पास बुलाया और पांडवों को उनका राज्य वापस कर दिया। पर युधिष्ठिर को दुबारा खेलने का निमंत्रण दिया गया। इस बार शर्त यह रखी गई कि चौसर के खेल में जो भी हारेगा उसे अपने भाइयों के साथ बारह वर्ष का वनवास व एक वर्ष अज्ञातवास में रहना होगा। अज्ञातवास में पहचान लिए जाने पर पुनः वनवास जाना होगा। युधिष्ठिर इस बार भी इस खेल में हार गए।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 14 शकुनि का प्रवेश

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 14 शकुनि का प्रवेश

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 14

प्रश्न 1.
युद्ध की आशंको को मिटा देने के लिए युधिष्ठिर ने क्या शपथ ली ?
उत्तर:
युद्ध की आशंका को मिटा देने के लिए युधिष्ठिर ने शपथ ली कि आज से तेरह बरस तक मैं अपने भाइयों या किसी और बंधु को बुरा-भला नहीं कहूँगा। सदा अपने भाई- बंधुओं की इच्छा पर ही चलूँगा। मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा, जिससे आपस में मन-मुटाव होने का डर हो।

प्रश्न 2.
दुर्योधन के मन को क्या चिंता खाए जा रही थी ?
उत्तर:
दुर्योधन के मन को पांडवों की बढ़ती लोकप्रियता बहुत परेशान कर रही थी। कितने ही देशों के राजा राजसूय यज्ञ के बाद पांडवों के परम मित्र बन चुके थे। यह स्मरण आते ही दुर्योधन ईर्ष्या से बेचैन हो रहा था।

प्रश्न 3.
दुर्योधन को चिंतित देख शकुनि ने उसे क्या सलाह दी ?
उत्तर:
शकुनि ने दुर्योधन से कहा कि पांडव तुम्हारे भाई हैं। तुम्हें उनसे कोई चिंता नहीं है। पांडवों को शक्ति से नहीं बल्कि चतुराई से जीता जा सकता है। तुम युधिष्ठिर को चौसर खेलने के लिए बुलवाओ। तुम्हारी ओर से मैं खेलूँगा। इस प्रकार उनका राज्य बिना युद्ध किए ही तुम्हारा हो जाएगा।

प्रश्न 4.
दुर्योधन और शकुनि धृतराष्ट्र के पास क्यों गए ?
उत्तर:
दुर्योधन और शकुनि धृतराष्ट्र के पास इसलिए गए ताकि युधिष्ठिर के पास चौसर खेलने के लिए निमंत्रण भेजा जा सके। निमंत्रण राजा की ओर से ही जा सकता था। धृतराष्ट्र आसानी से मानने वाले नहीं थे। अतः दोनों ने जाकर धृतराष्ट्र को समझाया।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 14 शकुनि का प्रवेश

प्रश्न 5.
धृतराष्ट्र के यह कहने पर कि जुए का खेल वैर-विरोध की जड़ होता है। दुर्योधन ने क्या तर्क दिया ?
उत्तर:
दुर्योधन ने तर्क देते हुए कहा कि चौसर का खेल कोई हमने तो शुरू नहीं किया है। यह तो हमारे पूर्वजों का चलाया हुआ है। दुर्योधन के इस प्रकार के तर्क देने पर धृतराष्ट्र ने घुटने टेक दिए और चौसर खेलने के लिए सभा मंडप बनाने की आज्ञा दे दी।

प्रश्न 6.
विदुर ने धृतराष्ट्र को क्या सलाह दी ?
उत्तर:
विदुर ने धृतराष्ट्र से कहा कि राजन् सारे वंश का इससे नाश हो जाएगा इसके कारण हमारे कुल के लोगों में मनमुटाव और झगड़े-फसाद होंगे। इसकी भारी विपदा हम.पर आएगी।

प्रश्न 7.
धृतराष्ट्र की सबसे बड़ी कमजोरी क्या थी ?
उत्तर:
अपने बेटे पर असीम स्नेह धृतराष्ट्र की सबसे बड़ी कमजोरी थी जिसके कारण धृतराष्ट्र को घुटने टेकने पड़े।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 14 शकुनि का प्रवेश

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 14

राजसूर्य यज्ञ के बाद एक दिन युधिष्ठिर ने शपथ ली कि वे तेरह वर्ष तक अपने भाई बंधुओं को कोई भी ऐसी बात नहीं कहेंगे जिससे उनको बुरा लगे और किसी प्रकार का मन मुटाव पैदा हो। युधिष्ठिर के भाइयों को भी उनकी यह बात ठीक लगी। परन्तु दूसरी ओर दुर्योधन पांडवों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण ईर्ष्या की अग्नि में जल रहा था। एक दिन वह इसी प्रकार खड़ा सोच रहा था कि पांडवों का क्या किया जाए तभी उनके पीछे शकुनि भी आकर खड़े हो गए। दुर्योधन से उन्होंने उसकी चिंता का कारण पूछा। दुर्योधन के बताने पर शकुनि ने समझाते हुए कहा कि पांडव तुम्हारे भाई हैं तुमको उनसे किसी प्रकार का खतरा भी नहीं है। तुम्हारे साथ द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा, भीष्म, जयद्रथ और सोमदत्त जैसे वीर हैं।

शकुनि की बात सुनकर दुर्योधन ने कहा तो फिर हमें इन्द्रप्रस्थ पर चढ़ाई कर देनी चाहिए। शकुनि ने कहा कि ऐसा करना उचित नहीं है। तुम्हें चतुराई से काम लेना चाहिए। मैं तुम्हें एक ऐसा उपाय बताता हूँ जिससे बिना युद्ध के ही तुम उनके राज्य को छीन सकते हो। युधिष्ठिर चौसर खेलने का बहुत शौकीन है, परन्तु उसे चौसर खेलना नहीं आता। तुम युधिष्ठिर को चौसर खेलने का निमंत्रण भेजो। इसके बाद दुर्योधन और शकुनि धृतराष्ट्र के पास गए और कहा कि पांडवों को चौसर खेलने के लिए बुलाया जाए। धृतराष्ट्र चौसर खेल की बुराइयों को जानते थे। उन्होंने बहुत मना किया परन्तु पुत्र स्नेह के कारण उन्हें अपने निर्णय से हटना पड़ा। विदुर ने भी धृतराष्ट्र को समझाते हुए कहा कि राजन! सारे वंश का इससे नाश हो जाएगा। लोगों में आपसी मनमुटाव व झगड़े फसाद बढ़ेंगे। बेटे पर असीम स्नेह धृतराष्ट्र की कमजोरी थी जिसके कारण उन्होंने दुर्योधन की बात मानते हुए विदुर को युधिष्ठिर को बुलाने के लिए इन्द्रप्रस्थ भेज दिया।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 13 जरासंध

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 13 जरासंध

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 13

प्रश्न 1.
युधिष्ठिर के साथियों व भाइयों की क्या इच्छा थी ? इसके लिए उन्होंने किससे सलाह की।
उत्तर:
युधिष्ठिर के साथियों व भाइयों की इच्छा हुई की अब राजसूय यज्ञ करके सम्राट-पद प्राप्त किया जाए। इस बारे में सलाह करने के लिए युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर इन्द्रप्रस्थ बुलाया।

प्रश्न 2.
श्रीकृष्ण ने राजसूय यज्ञ में सबसे बड़ी बाधा किसे बताया ?
उत्तर:
श्रीकृष्ण का कहना था कि मगध देश के राजा जरासंध ने सब राजाओं को जीतकर उन्हें अपने अधीन कर रखा है। सभी राजा उसका लोहा मानते हैं और उसके नाम से डरते हैं। शिशुपाल जैसे शक्तिशाली राजा भी उसकी अधीनता स्वीकार कर चुके हैं। जरासंध के रहते कोई और सम्राट-पद प्राप्त नहीं कर सकता। मैंने भी तीन साल तक उसके साथ युद्ध किया अंत में हारकर मथुरा छोड़कर द्वारका जाकर रहना पड़ा। ऐसे पराक्रमी जरासंध के जीते जी आप राजसूय यज्ञ नहीं कर सकते।

प्रश्न 3.
भीम को युधिष्ठिर की कौन-सी बात अच्छी नहीं लगी ? भीम का राजसूय यज्ञ के.बारे में क्या मत था ?
उत्तर:
भीम को युधिष्ठिर की विनय-शीलता अच्छी नहीं लगी। उनका मत था कि श्रीकृष्ण की नीति-कुशलता, मेरा शारीरिक बल और अर्जुन का शौर्य एक साथ मिल जाने पर कौन-सा ऐसा काम है जो हम नहीं कर सकते। यदि हम तीनों एक साथ चल पढ़ें तो जरासंध की शक्ति को चकनाचूर करके ही लौटेंगे।

प्रश्न 4.
श्रीकृष्ण अर्जुन की किस बात पर मुग्ध हो गए ?
उत्तर:
जब अर्जुन ने अपना मत देते हुए कहा कि यदि यशस्वी भरतवंश की संतान होकर भी कोई साहस का काम न करें तो धिक्कार है हमें और हमारे जीवन को! जिस काम को करने की हममें सामर्थ्य है, भ्राता युधिष्ठिर क्यों समझते हैं कि उसे हम न कर सकेंगे।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 13 जरासंध

प्रश्न 5.
जरासंध के साथ युद्ध का निश्चय होने पर श्रीकृष्ण और पांडवों ने क्या योजना बनाई ?
उत्तर:
श्रीकृष्ण और पांडवों ने ब्राह्मण वेश में मगध जाने का निश्चय किया। एक निश्चित योजना के अनुसार युद्ध करके जरासंध को युद्ध में परास्त कर बंदी राजाओं को छुड़ाने की योजना बनाई गई।

प्रश्न 6.
श्रीकृष्ण और पांडवों ने जरासंध की कैद से राजाओं को किस प्रकार छुड़ाया ?
उत्तर:
जरासंध और भीम के बीच द्वंद्व युद्ध हुआ। जो तेरह दिनों तक चलता रहा अंत में चौदहवें दिन भीम ने जरासंध को पटकनी देकर नीचे गिरा दिया जिससे जरासंध का प्राणांत हो गया। श्रीकृष्ण और पांडवों ने सभी कैद किये हुए राजाओं को मुक्त कर दिया और जरासंध के पुत्र सहदेव को मगध की गद्दी पर बैठा दिया।

प्रश्न 7.
शिशुपाल ने क्या आपत्ति की थी, शिशुपाल का अंत किस प्रकार हुआ ?
उत्तर:
शिशुपाल ने आपत्ति की थी कि श्रीकृष्ण की अग्र-पूजा क्यों की गई। शिशुपाल श्रीकृष्ण को दुरात्मा और कुचक्र रचकर जरासंध को मारने वाला मानते थे। शिशुपाल जब दूसरे राजाओं को साथ लेकर सभा से निकलने लगा और युधिष्ठिर के मनाने पर भी नहीं माना तो कृष्ण और शिशुपाल का द्वंद्व युद्ध हुआ, जिसमें शिशुपाल मारा गया।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 13 जरासंध

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 13

इंद्रप्रस्थ में प्रतापी पांडव न्यायपूर्वक शासन कर रहे थे। युधिष्ठिर के भाइयों तथा साथियों की इच्छा हुई कि राजसूय यज्ञ करके सम्राट-पद प्राप्त किया जाए। युधिष्ठिर ने इस संबंध में विचार-विमर्श करने के लिए श्रीकृष्ण के पास संदेश भेजा। श्रीकृष्ण इन्द्रप्रस्थ पहुँचे उन्होंने युधिष्ठिर की बात सुनकर कहा कि यज्ञ से पहले जरासंध को हराना आवश्यक है क्योंकि उसके रहते और कोई सम्राट पद प्राप्त नहीं कर सकता। उसके नाम से सभी राजा डरते हैं। उसने अपने बंदीगृह में अनके राजाओं को कैद कर रखा है। मैंने भी तीन वर्षों तक उसके साथ युद्ध किया अंत में हारकर द्वारकापुरी रहना पड़ा। कृष्ण की बात सुनकर युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ का विचार त्यागना चाहा परन्तु भीम को युधिष्ठिर की विनय-शीलता अच्छी नहीं लगी। उन्होंने कहा कि कृष्ण की नीति-कुशलता, मेरा शारीरिक बल और अर्जुन का शौर्य जरासंध की शक्ति को चूर करने के लिए काफी है। अर्जुन ने कहा कि यदि हम यशस्वी भरतवंश की संतान होकर भी कोई साहसिक कार्य न कर सके तो हमें धिक्कार है। श्रीकृष्ण अर्जुन की इन बातों से मुग्ध हो गए।

अब जरासंध से युद्ध करने का निश्चय हो गया। श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीम वल्कल वस्त्र धारण कर और हाथ में कुशा लेकर मगध देश की ओर रवाना हो गए। जरासंध ने अपनी राजधानी में कुलीन अतिथियों की तरह इनका स्वागत किया। श्रीकृष्ण ने उनको बताया कि मेरे दोनों साथियों ने मौन व्रत धारण कर रखा है, आधी रात के बाद व्रत खोलने पर ही किसी से बात करेंगे। जरासंध आधी रात को यज्ञशाला पहुंचे। जरासंध को इन पर कुछ शक हुआ। उसने कड़ककर पूछा कि तुम कौन हो ? इन तीनों ने बता दिया कि हम तुम्हारे शत्रु हैं। तुम्हें हममें से किसी एक के साथ द्वंद्व युद्ध करना होगा। तभी भीम और जरासंध में द्वंद्व युद्ध प्रारंभ हो गया। तेरह दिनों तक द्वंद्व युद्ध चलता रहा अंत में चौदहवें दिन जब जरासंध थक गया तो मौका पाकर भीम ने जरासंध को जमीन पर पटक दिया। इस तरह जरासंध का वध हो गया। उन्होंने सभी राजाओं को बन्दीगृह से मुक्त करा लिया और जरासंध के पुत्र सहदेव को गद्दी सौंप दी।

इन्द्रप्रस्थ पहुँचकर युधिष्ठिर ने राजसूर्य यज्ञ प्रारंभ कर दिया। अनेक राजा आए। पहले किसकी पूजा की जाए यह प्रश्न उठा। पितामह भीष्म ने कहा कि द्वारकाधीश श्रीकृष्ण की पूजा पहले की जाए। वासुदेव को इस प्रकार सम्मानित किया जाना चेदि-नरेश शिशुपाल को अच्छा नहीं लगा। उसका कहना था कि इस दुरात्मा कृष्ण ने कुचक्र चलाकर जरासंध को मरवा डाला उसी की युधिष्ठिर पूजा कर रहा है। इसके बाद हम इसे धर्मात्मा कैसे कह सकते हैं। शिशुपाल अन्य राजाओं को भी अपने साथ लेकर चल दिया। समझाने पर भी वह नहीं माना। अंत में शिशुपाल और कृष्ण का युद्ध प्रारंभ हुआ। इस युद्ध में शिशुपाल मारा गया। राजसूय यज्ञ पूरा होने पर युधिष्ठिर को महाराजाधिराज की पदवी प्राप्त हुई।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 12 इंद्रप्रस्थ

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 12 इंद्रप्रस्थ

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 12

प्रश्न 1.
लाख के घर से बच निकलने की बात सुनकर धृतराष्ट्र और दुर्योधन की प्रतिक्रिया कैसी थी ?
उत्तर:
धृतराष्ट्र को जब यह पता चला कि वे जीवित हैं और राजा द्रुपद की बेटी हमारी बहू बनेगी तो उनको बहुत प्रसन्नता हुई। परन्तु दुर्योधन के मन में ईर्ष्या की अग्नि और प्रबल हो उठी। दबा हुआ बैर फिर से जाग उठा।

प्रश्न 2.
कर्ण ने पांडवों के संबंध में दुर्योधन को क्या राय दी ?
उत्तर:
कर्ण ने दुर्योधन से कहा कि एक साल बाहर रहकर और काफी दुनिया देखकर पांडव बहुत अनुभवी हो गए हैं। एक शक्ति सम्पन्न राजा के यहाँ उन्होंने शरण ली है। अब छल प्रपंच से काम नहीं चलेगा। द्रुपद किसी तरह के प्रलोभन में भी आने वाला नहीं है। एक ही उपाय है कि पांडवों की ताकत बढ़ने से पहले ही उन पर आक्रमण कर दिया जाए।

प्रश्न 3.
भीष्म ने दुर्योधन को क्या सलाह दी और क्यों ?
उत्तर:
भीष्म ने दुर्योधन से कहा कि पांडवों के साथ संधि करके उन्हें आधा राज्य दे देना उचित रहेगा। ऐसा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि ये सभी एक साथ एक जगह नहीं रह सकते थे। एक साथ रहकर बैरभाव और बढ़ता।

प्रश्न 4.
द्रोणाचार्य ने क्रोधित होकर कर्ण से क्या कहा ?
उत्तर:
द्रोणाचार्य ने कर्ण से कहा कि तुम राजा को गलत रास्ता बता रहे हो। यह निश्चित है कि यदि राजा धृतराष्ट्र ने मेरी तथा पितामह भीष्म की सलाह नहीं मानी और तुम जैसों की सलाह पर चले तो कौरवों का नाश अवश्यंभावी है।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 12 इंद्रप्रस्थ

प्रश्न 5.
विदुर ने धृतराष्ट्र को क्या सलाह दी ?
उत्तर:
विदुर ने धृतराष्ट्र को बताया कि जो आचार्य द्रोण और पितामह भीष्म कह रहे हैं, वही श्रेयकर है। कर्ण की सलाह किसी काम की नहीं है। अतः पांडवों को आधा राज्य दे देना चाहिए।

प्रश्न 6.
धृतराष्ट्र ने विदुर को पांचाल देश क्यों भेजा ?
उत्तर:
कुंती तथा पाँचों पांडव द्रौपदी स्वयंवर के बाद पांचाल नरेश के यहाँ ठहरे हुए थे। उनको सादर लिवा लाने के लिए ही विदुर को पांचाल देश भेजा।

प्रश्न 7.
हस्तिनापुर में पांडवों का स्वागत किस प्रकार हुआ ?
उत्तर:
हस्तिनापुर में पांडवों का स्वागत बड़ी धूमधाम से हुआ। युधिष्ठिर का राज्याभिषेक किया गया तथा उनको आधा राज्य दे दिया। खांडवप्रस्थ उनकी राजधानी बनी। जो बाद में इंद्रप्रस्थ के नाम से जानी गई।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 12 इंद्रप्रस्थ

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 12

राजा द्रुपद की कन्या को स्वयंवर में अर्जुन द्वारा प्राप्त करने की खबर सुनकर विदुर बहुत प्रसन्न हुए। विदुर ने जब यह खबर धृतराष्ट्र को सुनाई तो वह भी बहुत प्रसन्न हुआ। दुर्योधन को जब इस बात का पता चला तो उसके मन में ईर्ष्या की आग और धधकने लगी। दुर्योधन और दुःशासन ने शकुनि को अपना दुःखड़ा सुनाया। इसके बाद कर्ण और दुर्योधन धृतराष्ट्र के पास गए और कहा कि अब कुछ ऐसा उपाय किया जाए कि पांडव यहाँ आएँ ही नहीं। कर्ण ने दुर्योधन को समझाते हुए कहा कि अब छल प्रपंच से कार्य नहीं चलेगा। पांडव बहुत अनुभवी हो चुके हैं, उन्होंने एक राजा के यहाँ शरण ली है। द्रुपद को आप किसी भी प्रकार से अपने पक्ष में नहीं कर सकते। हमें अब एक ही काम करना चाहिए कि पांडवों की ताकत बढ़ने से पहले ही उन पर आक्रमण कर देना चाहिए। कर्ण तथा अपने बेटों की परस्पर विरोधी बातें सुनकर धृतराष्ट्र कोई निर्णय न ले सके। उन्होंने पितामह भीष्म और आचार्य द्रोण को बुलाकर सलाह की। भीष्म पांडवों के जीवित बचने की खबर से बहुत प्रसन्न हुए। भीष्म ने कहा कि वीर पांडवों के साथ संधि-करके आधा राज्य उन्हें दे देना ही उचित है। कर्ण को आधा राज्य दे देने की बात बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी। द्रोणाचार्य ने भी यही सलाह दी जिसे सुनकर दुर्योधन के क्रोध की सीमा न रही। द्रोणाचार्य ने कहा कि यदि धृतराष्ट्र ने भीष्म तथा मेरी सलाह न मानी तो कौरवों का नाश निश्चित है। धृतराष्ट्र ने विदुर से भी सलाह मांगी तो उन्होंने कहा कि जो सलाह पितामह भीष्म व द्रोण ने दी है, वही श्रेयकर है।

अंत में सबने सोच विचारकर पांडवों को आधा राज्य देकर संधि करने का निश्चय किया। कुंती, द्रौपदी तथा पांडवों को सादर लिवा लाने के लिए विदुर को पांचाल भेजा। विदुर ने पांचाल पहुँचकर अमूल्य उपहारों से पांचाल नरेश का सम्मान किया। उन्होंने धृतराष्ट्र की तरफ से अनुरोध किया कि पांडवों की जैसी इच्छा हो वैसा ही करें। विदुर ने कुंती को निश्चिंत होकर हस्तिनापुर चलने के लिए कहा। अन्त में द्रुपद की अनुमति के बाद पांडव, कुंती और द्रौपदी सहित हस्तिनापुर को रवाना हो गए। हस्तिनापुर पहुंचने पर पांडवों का खूब स्वागत हुआ तथा युधिष्ठिर का विधिवत राज्याभिषेक हुआ। धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर से कहा बेटा युधिष्ठिर! मेरे बेटे बड़े दुरात्मा हैं एक साथ रहने से तुम्हारे बीच बैर बढ़ेगा इसलिए तुम खांडवप्रस्थ को अपनी राजधानी बनाओ। पांडवों ने खांडवप्रस्थ का पुनः निर्माण करके उसे अपनी राजधानी बनाया और उसका नाम इन्द्रप्रस्थ रखा।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 11 द्रौपदी स्वयंवर

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant & Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 11 द्रौपदी स्वयंवर are prepared by our highly skilled subject experts.

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 11 द्रौपदी स्वयंवर

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 11

प्रश्न 1.
द्रौपदी किसकी कन्या थी ? पांडव पांचाल किस प्रकार से और क्यों गए ?
उत्तर:
द्रौपदी पांचाल नरेश द्रुपद की कन्या थी। पांडव पांचाल नरेश द्रुपद की कन्या द्रौपदी के स्वयंवर में भाग लेने के लिए ब्राह्मण वेश में एकचक्रा नगरी से जाने वाले ब्राह्मणों के दल के साथ पांचाल पहुंचे।

प्रश्न 2.
द्रौपदी के स्वयंवर के लिए पांचाल ने क्या शर्त रखी थी ?
उत्तर:
पांचाल नरेश द्रुपद की शर्त थी कि वे उसी के साथ अपनी पुत्री का विवाह करेंगे जो वीर पानी में प्रतिबिंब देखकर धनुष से ऊपर खंभे पर घूम रहे चक्र के ऊपर टंगी हुई सोने की मछली की आँख में धनुष से तीर चलाकर निशाना लगाएगा और उसको धनुष के निशाने से नीचे गिराएगा।

प्रश्न 3.
स्वयंवर में कौन-कौन प्रमुख लोग सम्मिलित हुए थे ?
उत्तर:
इस स्वयंवर के लिए दूर-दूर से अनेक वीर आए थे, जिनमें धृतराष्ट्र के सौ पुत्र, अंग नरेश कर्ण, शिशुपाल, जरासंध आदि शामिल थे।

प्रश्न 4.
अर्जुन को ब्राह्मण-वेश में देखकर हलचल क्यों मच गई ?
उत्तर:
अर्जुन को ब्राह्मण वेश में देखकर सभा में हलचल इसलिए मच गई क्योंकि बड़े से बड़ा वीर भी जिस कार्य को नहीं कर पाया उस कार्य को एक ब्राह्मण किस प्रकार करेगा। लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे थे।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 11 द्रौपदी स्वयंवर

प्रश्न 5.
मंडप में पहुँचकर अर्जुन ने क्या किया ?
उत्तर:
मंडप में पहुँचकर अर्जुन ने धनुष हाथ में लिया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाई। अर्जुन ने धनुष पर बाण चढ़ाकर एक के बाद एक पाँच बाण घूमते हुए चक्र में मारे। हजारों लोगों के देखते-देखते निशाना टूटकर नीचे गिर गया। सभा में कोलाहल मच गया।

प्रश्न 6.
अर्जुन द्रौपदी को लेकर कहाँ गया ? धृष्टद्युम्न अर्जुन के पीछे चुपके-चुपके क्यों गया ?
उत्तर:
अर्जुन द्रौपदी को लेकर उस कुम्हार के घर गया जहाँ पांडव ठहरे हुए थे। धृष्टद्युम्न यह जानना चाहता था कि आखिर यह ब्राह्मण वेशधारी कौन है ?

प्रश्न 7.
धृष्टद्युम्न ने ब्राह्मण वेशधारी अर्जुन को देखकर क्या अनुमान लगाया ?
उत्तर:
धृष्टद्युम्न ने ब्राह्मण वेशधारी अर्जुन को देखकर अनुमान लगाया कि हो न हो ये पांडव ही हैं क्योंकि वहाँ उन्होंने देखा कि अग्नि-शिखा की भाँति एक तेजस्वी देवी बैठी हुई थी। उसकी बातें सुनकर उसे विश्वास हो गया कि यह कुंती है और साथ में ये सभी पाँचों पांडव हैं।।

प्रश्न 8.
द्रुपद यह जानकर कि ये पांडव हैं प्रसन्न क्यों हुआ ?
उत्तर:
द्रुपद पहले ही यह चाहता था कि वह अपनी पुत्री का विवाह अर्जुन से करेगा जिससे वह द्रोणाचार्य से अपने अपमान का बदला ले सके। उसे अपनी योजना पूरी होती लग रही थी।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 11 द्रौपदी स्वयंवर

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 11

जिस समय पांडव एकचक्रा नगरी में ब्राह्मणों के वेश में जीवन बिता रहे थे, उन्हीं दिनों पांचाल नरेश द्रुपद की कन्या द्रौपदी के स्वयंवर की तैयारियाँ चल रही थीं। एकचक्रा नगरी से ब्राह्मणों के समूह पांचाल देश के लिए रवाना हुए। माता कुंती के साथ पांडव भी ब्राह्मण-वेश धारण कर पांचाल आ गए। स्वयंवर मंडप में एक वृहदाकार धनुष रखा गया था। राजा द्रुपद ने घोषणा की थी कि जो राजकुमार नीचे पानी में देखकर घूमती हुई मछली की आँख में निशाना लगाएगा उसी के साथ ही वे अपनी पुत्री का विवाह करेंगे।

मंडप में दूर-दूर से अनेक वीर आए हुए थे परन्तु कोई भी निशाना साधने में सफल नहीं हुआ। धृतराष्ट्र के सौ पुत्र भी इस स्वयंवर में आए थे। सबके असफल होने पर ब्राह्मण वेश में अर्जुन मछली की आँख पर निशाना लगाने के लिए खड़ा हुआ और बिना देरी किए पाँच बाण उस मछली की आँख में मारे। सभा में कोलाहल मच गया। द्रौपदी ने आगे बढ़कर अर्जुन के गले में वरमाला डाल दी। माता को यह समाचार सुनाने के लिए युधिष्ठिर, नकुल और सहदेव मंडप से उठकर आ गए परन्तु भीम अर्जुन के साथ ही रहे। सभा में दूर-दूर से आए राजकुमार विप्लव मचा रहे थे। श्रीकृष्ण और बलराम और कुछ राजा उनको समझा रहे थे। अर्जुन द्रौपदी को साथ लेकर कुम्हार की कुटिया की ओर चल पड़े जहाँ वे ठहरे थे। द्रुपद्र का पुत्र धृष्टद्युमन भी चुपके से उनके पीछे चल दिया। कुम्हार की कुटिया में जो उसने देखा, उससे उसके आश्चर्य की सीमा न रही। उसको यकीन हो गया कि हो न तो ये लोग पांडव ही हैं। राजा द्रुपद के बुलावा भेजने पर पाँचों भाई कुंती के साथ राजभवन पहुँचे। राजा यह जानकर कि ये पांडव हैं फूले नहीं समाए क्योंकि महाबली अर्जुन अब उनकी पुत्री के पति थे। अब वे द्रोणाचार्य से अपना बदला ले सकते थे।

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