CBSE Class 7

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 28 पहला, दूसरा और तीसरा दिन

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant & Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 28 पहला, दूसरा और तीसरा दिन are prepared by our highly skilled subject experts.

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 28 पहला, दूसरा और तीसरा दिन

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 28

प्रश्न 1.
पहले दिन की लड़ाई का क्या परिणाम निकला ?
उत्तर:
पहले दिन के युद्ध में भीष्म ने पांडव सेना की बड़ी दुर्गति की। युधिष्ठिर के मन में भय छा गया। घबराहट के मारे वे श्रीकृष्ण के पास गए। श्रीकृष्ण ने उनको धीरज बँधाया।

प्रश्न 2.
दूसरे दिन के युद्ध के बारे में लिखिए।
उत्तर:
दूसरे दिन के युद्ध में अर्जुन ने बड़ी कुशलता से युद्ध किया। अर्जुन और भीष्म के बीच भयंकर युद्ध हुआ, परंतु हार जीत का कोई परिणाम नहीं निकला। धृष्टद्युम्न और द्रोण में भी भयंकर युद्ध हुआ। सात्यकि द्वारा छोड़े एक बाण से भीष्म का सारथी मारा गया। भीष्म के रथ के घोड़े बेकाबू होकर दौड़े जिससे सेना में खलबली मच गई। दूसरे दिन के युद्ध का अंत होते-होते कौरव सेना में आतंक छा गया।

प्रश्न 3.
तीसरे दिन के युद्ध में भीमसेन का बाण दुर्योधन को लगने से क्या घटना घटी ?
उत्तर:
तीसरे दिन के युद्ध में भीमसेन का बाण लगने से दुर्योधन घायल होकर रथ में ही गिर पड़ा। सारथी दुर्योधन को युद्ध भूमि से ले जाना चाहता था जिससे सेना को दुर्योधन के घायल होने के बारे में पता न चले। परंतु सारथी ने जो सोचा ठीक उसका उलटा हुआ। अनुशासन के टूटने से सेना में खलबली मच गई। सेना बेकाबू हो गई।

प्रश्न 4.
भीष्म के हमले का पांडव सेना पर क्या असर हुआ ?
उत्तर:
अपनी बिखरी सेना देखकर भीष्म ने पांडव सेना पर जोरदार से आक्रमण किया इस कारण पांडव सेना के पैर उखड़ गए। श्रीकृष्ण, अर्जुन और शिखंडी के प्रयत्नों के बावजूद सेना अनुशासन में नहीं रही।

प्रश्न 5.
श्रीकृष्ण भीष्म पर आक्रमण करने के लिए क्यों दौड़े ?
उत्तर:
भीष्म के बाणों से श्रीकृष्ण भी घायल हो गए। श्रीकृष्ण को क्रोध आया तो वे स्वयं ही भीष्म को मारने उनकी ओर दौड़े। उनके पीछे किसी अनर्थ की आशंका के कारण अर्जुन भी दौड़े वे किसी तरह श्रीकृष्ण को समझा-बुझा कर वापिस ले आए।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 28 पहला, दूसरा और तीसरा दिन

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 28

कौरवों की सेना के अग्रभाग पर प्रायः दुःशासन रहते थे और पांडवों की सेना के आगे भीमसेन। पहले दिन के युद्ध में कौरवों की सेना ने भारी तबाही मचाई। भीष्म के हमले से पांडव सेना थर्रा उठी। पांडव युद्ध समाप्त हो जाने के बाद श्रीकृष्ण के पास गए। श्रीकृष्ण ने सबको धीरज बँधाया। पहले दिन के युद्ध से सबक लेकर पांडव सेना के नायक धृष्टद्युम्न ने बड़ी सतर्कता से व्यूह रचना की। सारी कौरव सेना में केवल भीष्म, द्रोण व कर्ण ही अर्जुन का मुकाबला कर सकते थे। अर्जुन ने कौरव सेना पर बड़ी कुशल रणनीति बनाकर आक्रमण किया। भीष्म और अर्जुन के बीच बड़ा भयंकर युद्ध हुआ परंतु हार-जीत का कोई परिणाम नहीं निकला। उधर जन्मजात बैरी धृष्टद्युम्न और द्रोण में भयंकर युद्ध हुआ। सात्यकि के एक बाण से भीष्म का सारथी मारा गया। भीष्म के रथ के घोड़े बेकाबू होकर दौड़ पड़े। कौरव सेना में भारी तबाही मची। सूर्यास्त के बाद जब युद्ध बंद हुआ तब जाकर कौरव सेना की तबाही रुकी।

तीसरे दिन व्यूह रचना होने के बाद दोनों पक्ष फिर से युद्ध में लग गए। भीमसेन द्वारा चलाए गए एक बाण से दुर्योधन मूर्छित होकर रथ में गिर पड़ा। सारथी दुर्योधन का चुपचाप युद्ध भूमि से दूर ले जाना चाहता था जिससे कौरव सेना को पता न चले परंतु जैसा सारथी ने सोचा था ठीक उसका उलटा हुआ। कौरव सेना में खलबली मच गई। सेना अनुशासन में नहीं रही। भीष्म के लिए सेना को संभालना मुश्किल हो गया। तभी भीष्म ने पांडव सेना पर ऐसा हमला किया कि उनके पैर उखड़ गए। श्रीकृष्ण अर्जुन शिखंडी के प्रयत्नों के बाद भी सेना अनुशासन में नहीं रही। भीष्म के कई बाण अर्जुन व श्रीकृष्ण को को भी लगे। श्रीकृष्ण को बहुत क्रोध आया। वे स्वयं ही रथ से उतरकर भीष्म को मारने दौड़े। अर्जुन भी श्रीकृष्ण को रोकने उनके पीछे दौड़े। अर्जुन उत्तेजित होकर कौरव सेना पर वज्र के समान गिरा। हारी थकी कौरव सेना अपने शिविर में लौट गई।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 28 पहला, दूसरा और तीसरा दिन Read More »

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 27 पांडवों और कौरवों के सेनापति

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant & Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 27 पांडवों और कौरवों के सेनापति are prepared by our highly skilled subject experts.

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 27 पांडवों और कौरवों के सेनापति

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 27

प्रश्न 1.
पांडवों की सेना में कौन-कौन प्रमुख वीर थे? उन्होंने किस को अपना सेनापति बनाया ?
उत्तर:
पांडवों की सेना में द्रुपद, विराट, धृष्टद्युम्न, शिखंडी, सात्यकि, चेकितान, भीमसेन जैसे महारथी थे। परंतु अर्जुन की राय से उन्होंने धृष्टद्युम्न को सेनापति नियुक्ति किया।

प्रश्न 2.
कौरव सेना ने अपना सेनापति किसे बनाया। उन्होंने क्या निश्चय किया था ?
उत्तर:
भीष्म को कौरव सेना का सेनापति बनाया गया। भीष्म ने निश्चय किया था कि जानबूझ कर स्वयं आगे आकर मैं पांडु पुत्रों का वध नहीं करूँगा। उनका कहना था कि कर्ण लोगों का बहुत ही प्यारा है। वह सदा से ही मेरी सम्मतियों का विरोध करता आया है।

प्रश्न 3.
कर्ण ने क्या निश्चय किया था ?
उत्तर:
कर्ण ने निश्चय किया था कि जब तक भीष्म जीवित रहेंगे तब तक वह युद्ध भूमि में प्रवेश नहीं करेगा। भीष्म के मारे जाने के बाद ही वह युद्ध में भाग लेगा और केवल अर्जुन को ही मारेगा।

प्रश्न 4.
कौन-कौन से राजाओं ने महाभारत के युद्ध में भाग नहीं लिया था ?
उत्तर:
महाभारत के युद्ध में केवल बलराम व कृष्ण की पत्नी के भाई रुक्मी ने भाग नहीं लिया। ये दोनों ही तटस्थ रहे।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 27 पांडवों और कौरवों के सेनापति

प्रश्न 5.
कौरवों की सेना की व्यूह रचना देखकर युधिष्ठिर ने अर्जुन को क्या आज्ञा दी ?
उत्तर:
युधिष्ठिर ने अर्जुन से कहा कि एक जगह सब वीरों को इकट्ठे रहकर लड़ना होगा। सेना को सूची-मुख व्यूह में सज्जित करो।

प्रश्न 6.
अर्जुन के मन में क्या शंका उत्पन्न हुई ?
उत्तर:
अर्जुन ने जब अपने सम्मुख खड़े वीरों को देखा तो उसने सोचा कि हम यह क्या करने जा रहे हैं। अर्जुन के इस भ्रम को दूर करने के लिए श्रीकृष्ण ने कर्मयोग का उपदेश दिया जिसे हम सभी जानते हैं।

प्रश्न 7.
युधिष्ठिर अचानक ही अपना धनुष बाण उतारकर कौरव सेना की ओर क्यों चल पड़े ?
उत्तर:
युधिष्ठिर बड़ों की आज्ञा लेकर ही युद्ध करना चाहते थे। अतः वह इस प्रकार भीष्म और द्रोण से युद्ध की आज्ञा लेने के लिए कौरव सेना के बीच पहुँच गए।

प्रश्न 8.
कौरव सेना के कौन-कौन सेनापति रहे ?
उत्तर:
भीष्म के नेतृत्व में कौरव-वीरों ने दस दिन युद्ध किया। भीष्म के आहत होने पर द्रोण सेनापति बने। द्रोण के खेत रहने पर कर्ण सेनापति बने। कर्ण भी सत्रहवें दिन के युद्ध में मारे गए। इसके बाद शल्य सेनापति बने और ये सभी अट्ठारह दिनों में समाप्त हो गए।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 27 पांडवों और कौरवों के सेनापति

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 27

श्रीकृष्ण के उपप्लव्य लौट आने पर युधिष्ठिर ने अपने भाइयों को सेना सुसज्जित करने के लिए कहा। अर्जुन की सलाह पर धृष्टद्युम्न को पांडव सेना का सेनापति बनाया गया। कौरव सेना ने भीष्म को अपना नायक बनाया। उनका कहना था कि युद्ध का संचालन कर मैं अपना ऋण चुका दूंगा। मैं जानबूझ कर पांडु पुत्रों का वध नहीं करूँगा। उधर कर्ण ने ठान लिया कि जब तक भीष्म जीवित रहेंगे, तब तक वह युद्ध भूमि में प्रवेश नहीं करेगा।

इधर युद्ध की तैयारियाँ हो रही थीं उधर बलराम पांडवों के पास पहुंचे। उनका कहना था कि भीम और दुर्योधन दोनों ही मेरे प्रिय शिष्य हैं। मैं इन दोनों को आपस में लड़ते-मरते नहीं देख सकता। मुझे संसार से विराग हो गया है। अतः मैं जा रहा हूँ। इस युद्ध में समस्त भारतवर्ष से केवल दो राजा ही युद्ध में सम्मिलित नहीं थे। एक बलराम और दूसरे कृष्ण की पत्नी रुक्मणि के भाई रुक्मी। रुक्मी एक अक्षौहिणी सेना लेकर पांडवों के पास गए तो अर्जुन ने हँसकर कहा राजन्! आप बिना शर्त के सहायता करना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। इसके बाद रुक्मी दुर्योधन के पास गया तो दुर्योधन ने भी उसकी सहायता लेने से मना कर दिया।

दोनों पक्षों की सेनाएँ कुरुक्षेत्र के मैदान में पहुँच गईं। अपने वीरों को युधिष्ठिर ने आज्ञा दी कि सेना को सूची-मुख व्यूह में सुसज्जित करो। जब अर्जुन ने अपने सामने अपने ही संगे सबंधियों को देखा तो उनके मन में शंका हुई। कृष्ण ने उपदेश देकर उनकी शंका का निवारण किया। सब लोग युद्ध शुरु होने की राह देख रहे थे कि तभी युधिष्ठिर ने जाकर पहले भीष्म के चरणों में प्रणाम किया और फिर द्रोणाचार्य को प्रणाम करके दोनों से युद्ध की अनुमति मांगी। इसके बाद सभी योद्धा युद्ध के नियमों के अनुसार युद्ध करने लगे। भीष्म ने दस दिनों तक कौरव सेना का नेतृत्व किया। भीष्म के आहत होने पर द्रोणाचार्य ने सेना का नेतृत्व किया। द्रोण के खेत रहने पर कर्ण ने नेतृत्व किया वह सत्रहवें दिन के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुआ। इस प्रकार यह युद्ध अट्ठारह दिन चला।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 27 पांडवों और कौरवों के सेनापति Read More »

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 26 शांतिदूत श्रीकृष्ण

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant & Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 26 शांतिदूत श्रीकृष्ण are prepared by our highly skilled subject experts.

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 26 शांतिदूत श्रीकृष्ण

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 26

प्रश्न 1.
श्रीकृष्ण के हस्तिनापुर आने की खबर सुनकर धृतराष्ट्र ने क्या किया ?
उत्तर:
श्रीकृष्ण के हस्तिनापुर आने की खबर सुनकर धृतराष्ट्र ने पूरे नगर को सजाने का आदेश दिया। कृष्ण के ठहरने के लिए दुःशासन के महल में व्यवस्था की गई।

प्रश्न 2.
विदुर ने श्रीकृष्ण को धृतराष्ट्र की राजसभा में जाने से क्यों मना किया ?
उत्तर:
विदुर का मानना था कि दुर्योधन किसी की बात मानने वाला नहीं। वे लोग कोई न कोई कुचक्र रच कर आपके प्राणों को हानि पहुँचा सकते हैं।

प्रश्न 3.
श्रीकृष्ण ने सभा में जाकर क्या प्रस्ताव रखा ?
उत्तर:
श्रीकृष्ण का कहना था कि पांडव शांति प्रिय हैं परंतु साथ ही यह भी समझ लीजिए कि वे युद्ध के लिए तैयार हैं। पांडव आपको (धृतराष्ट्र को) पिता के समान समझते हैं। कोई ऐसा उपाय करें जिससे आप भाग्यशाली बनें। पांडवों का आधा राज्य लौटा दो। यदि यह बात स्वीकृत हो गई तो वे आपको महाराज और दुर्योधन को युवराज के रूप में स्वीकार कर लेंगे।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 26 शांतिदूत श्रीकृष्ण

प्रश्न 4.
धृतराष्ट्र ने गांधारी को राजसभा में क्यों बुलाया ?
उत्तर:
दुर्योधन के हठ के आगे सभी विफल हो गए थे। धृतराष्ट्र का मत था कि गांधारी बहुत दूर की सोचती है शायद वही दुर्योधन को समझा दे।

प्रश्न 5.
युद्ध अवश्यंभावी है यह जानकर कुंती ने क्या किया ?
उत्तर:
कुंती गंगा किनारे पहुंची जहाँ कर्ण रोज संध्या वंदन किया करता था। कर्ण को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि पांडवों की माता कुंती उसका उत्तरीय सिर पर लिए खड़ी है।

प्रश्न 6.
कुंती ने कर्ण से क्या अनुरोध किया ?
उत्तर:
कुंती ने कर्ण से कहा कि तुम राजकुमारी पृथा (कुंती) की कोख से उत्पन्न हुए हो। तुममें सूर्य का अंश है। दुर्योधन के पक्ष में होकर तुम अपने भाइयों से शत्रुता कर रहे हो। तुम अर्जुन के साथ मिल जाओ और वीरता से लड़कर राज्य प्राप्त करो। वे सभी तुम्हारे अधीन रहेंगे।

प्रश्न 7.
कर्ण ने कुंती की बातों का क्या उत्तर दिया ?
उत्तर:
कर्ण का कहना था कि यदि इस समय मैं कौरवों का साथ छोड़कर पांडवों की ओर से लडूंगा तो लोग मुझे कायर कहेंगे। मैं आपको एक वचन देता हूँ अर्जुन के अतिरिक्त किसी भी पांडव को प्राणों की हानि नहीं पहुँचाऊँगा। मैं रहूँ या अर्जुन तुम्हारे पाँच पुत्र अवश्य ही जीवित रहेंगे।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 26 शांतिदूत श्रीकृष्ण

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 26

श्रीकृष्ण शांति का प्रस्ताव लेकर हस्तिनापुर गए। उनके साथ सात्यकि भी गये। धृतराष्ट्र ने श्रीकृष्ण के स्वागत के लिए नगर को सजाने की आज्ञा दी। कृष्ण को दुःशासन के महल में ठहराया गया। श्रीकृष्ण पहले धृतराष्ट्र से मिले बाद में वे विदुर के पास गए। कुंती भी विदुर के महल में ही कृष्ण की प्रतीक्षा कर रही थी। विदुर का कहना था कि दुर्योधन किसी की बात नहीं मानेगा और हो सकता है कि आपके प्राणों को हानि पहुँचाने की कोशिश करे।

श्रीकृष्ण सभा भवन में पहुँचे। सभी सभासदों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। उन्होंने पांडवों का पक्ष रखते हुए कहा कि पांडव शांतिप्रिय हैं। आप उनको, उनका आधा राज्य लौटा दें। पांडव आपको महाराज और दुर्योधन को युवराजं मानने के लिए तैयार हैं। भीष्म और द्रोण ने भी दुर्योधन को बहुत समझाया परंतु दुर्योधन अपने हट पर अडिग रहा। तभी धृतराष्ट्र ने विदुर से कहा कि गांधारी को राजसभा में बुलाओ वह बहुत दूरदर्शी है शायद दुर्योधन उसी का कहना मान ले। गांधारी के सभा में आने पर दुर्योधन भी लौट आए, परंतु उसने माँ की बात भी नहीं मानी। दुर्योधन ने षड्यंत्र रचकर श्रीकृष्ण को पकड़ने की चेष्टा की पंरतु श्रीकृष्ण पहले ही सारी स्थिति को भाँप गए थे। श्रीकृष्ण वहाँ से चलकर कुंती के पास गए और सारी बात बताई। कुंती कृष्ण से बोली अब मेरे पुत्रों की रक्षा का भार तुम पर ही है। श्रीकृष्ण रथ पर सवार होकर लौट गए। अब युद्ध अवश्यंभावी हो गया था। कुंती ने कर्ण को समझाते हुए कहा कि तुम दुर्योधन में पक्ष में होकर अपने भाइयों के साथ क्यों शत्रुता कर रहे हो। तुम मेरे पुत्र हो। तुममें सूर्य का अंश है। तुम अर्जुन के साथ मिल जाओ और राज्य प्राप्त करो। कर्ण ने कुंती के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया क्योंकि वह दुर्योधन को ऐसे समय में अकेला नहीं छोड़ सकता था। कर्ण ने कुंती को आश्वासन दिया कि मैं अर्जुन के अतिरिक्त आपके किसी भी पुत्र को प्राण हानि नहीं पहुँचाऊँगा। युद्ध में मैं वीरगति को प्राप्त होऊँ या अर्जुन तुम्हारे पाँच पुत्र अवश्य ही जीवित रहेंगे। कर्ण की ये बातें सुनकर कुंती का मन विचलित हो उठा। उसने कर्ण को गले से लगा लिया। कर्ण को आशीर्वाद देकर वह महल में लौट आई।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 26 शांतिदूत श्रीकृष्ण Read More »

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 25 राजदूत संजय

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant & Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 25 राजदूत संजय are prepared by our highly skilled subject experts.

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 25 राजदूत संजय

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 25

प्रश्न 1.
युधिष्ठिर ने किसे दूत बनाकर हस्तिनापुर भेजा ?
उत्तर:
युधिष्ठिर ने पांचाल नरेश के पुरोहित को दूत बनाकर हस्तिनापुर भेजा। दूत ने जाकर कहा कि पांडव युद्ध नहीं चाहते अतः आप उनको उनका राज्य देने की कृपा करें।

प्रश्न 2.
भीष्म ने कर्ण से क्रोधित होकर क्या कहा ?
उत्तर:
भीष्म ने कर्ण से कहा कि तुम बेकार कर रहे हो यदि हम युधिष्ठिर के दूत के कहे अनुसार संधि नहीं करेंगे, तो निश्चय ही युद्ध छिड़ जाएगा और उसमें हम सबको पराजित होकर मृत्यु के मुँह में जाना पड़ेगा।

प्रश्न 3.
भीष्म की बातें सुनकर धृतराष्ट्र ने क्या निश्चय किया ?
उत्तर:
भीष्म की बातों से सभा में खलबली मच गई। धृतराष्ट्र ने संजय को दूत बनाकर उपप्लव्य नगर भेजने का निश्चय किया।

प्रश्न 4.
संजय ने युधिष्ठिर को जाकर धृतराष्ट्र का क्या संदेश दिया ?
उत्तर:
संजय ने जाकर कहा कि धृतराष्ट्र युद्ध नहीं करना चाहते वह तो आपकी मित्रता चाहते हैं। आप सदा से न्याय पर स्थिर हैं अतः आप भी युद्ध की चाह न करें।

प्रश्न 5.
युधिष्ठिर ने संजय से क्या कहा ?
उत्तर:
युधिष्ठिर ने संजय से कहा कि श्रीकृष्ण दोनों पक्षों के लोगों के हितचिंतक हैं। वह जो सलाह देंगे वैसा ही मैं करूँगा। कौरवों की राजसभा में जाकर मेरी ओर से संदेश देना कि हमें केवल पाँच गाँव ही दे दें हम पाँचों भाई इसी में संतोष कर लेंगे।

प्रश्न 6.
पांडवों द्वारा पाँच गाँव मांगे जाने पर दुर्योधन ने क्या कहा ?
उत्तर:
दुर्योधन का कहना था कि पांडव हमारे सैन्य बल को देखकर ही पाँच गाँव की याचना कर रहे हैं। हमारी ग्यारह अक्षौहिणी सेना देखकर पांडवों के मन में भय उत्पन्न हो गया है। अब मैं उन्हें सुई की नोंक के बराबर भी भूमि नहीं देना चाहता।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 25 राजदूत संजय

प्रश्न 7.
युधिष्ठिर कृष्ण को हस्तिनापुर जाने से क्यों मना कर रहे थे ?
उत्तर:
युधिष्ठिर का कहना था कि दुर्योधन का कोई भरोसा नहीं है कि वह कब क्या कर बैठे। मुझे भय है कि वह कहीं आप पर ही प्रहार न कर दे।

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 25

दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी सेना एकत्र करने के बाद शांति के प्रयास प्रारंभ किए। युधिष्ठिर की ओर ने पांचाल के राजपुरोहित राजदूत बनकर हस्तिनापुर गए। उसने जाकर कहा कि युधिष्ठिर का विचार है कि युद्ध से संसार का नाश ही होगा, वे युद्ध नहीं चाहते। यही उचित होगा कि आप उनका राज्य देने की कृपा करें। भीष्म ने राजदूत की बात का समर्थन किया। भीष्म की बात कर्ण को अप्रिय लगी। वह बोला कि पांडवों ने प्रतिज्ञा भंग की है अतः उन्हें बारह बरस के लिए और वनवास जाना होगा। भीष्म ने कहा कि यदि हम संधि नहीं करेंगे तो युद्ध अवश्य छिड़ेगा और सबको पराजय का मुख देखना पड़ेगा। भीष्म की बातों से राजसभा में खलबली मच गई। धृतराष्ट्र ने निश्चय किया कि अपनी तरफ से संजय को दूत बनाकर पांडवों के पास भेजा जाए और युद्ध रोकने का यथासंभव प्रयास किया जाए। संजय उपप्लव्य के लिए रवाना हो गए। वहाँ जाकर उन्होंने कहा कि महाराज धृतराष्ट्र ने आप सभी की कुशल पूछी है और वे चाहते हैं कि युद्ध को टाला जाए। संयज की बातें सुनकर युधिष्ठिर बोले श्रीकृष्ण दोनों पक्षों के लोगों के हितचिंतक हैं जो ये सलाह देंगे मैं मानूँगा। श्रीकृष्ण जी बोले-मैं स्वयं हस्तिनापुर जाऊँगा। मेरी भी यही इच्छा है कि कौरवों के साथ संधि हो सकती है। युधिष्ठिर ने संजय से कहा कि मेरी तरफ से महाराज को संदेश देना कि हम युद्ध नहीं चाहते। हमको पाँच गाँव भी दे दिए जाएं तो हम पाँचों भाई संतोष कर लेंगे। संजय ने युधिष्ठिर का संदेश जाकर महाराज धृतराष्ट्र को सुनाया। भीष्म ने दोबारा फिर दुर्योधन को समझाया परंतु दुर्योधन ने अपने पिता से कहा कि आप कैसे भोले हैं जो यह भी नहीं समझते कि पांडव हमारे सैन्य बल को देखकर डर गए हैं तभी तो वे पाँच गाँवों की याचना कर रहे हैं। धृतराष्ट्र ने कहा कि जब पाँच गाँव देने से ही युद्ध टल सकता है तो अब हट न करो। अपने पिता के उपदेशों से चिढ़कर दुर्योधन ने कहा कि मैं अब सुई की नोक के बराबर भी भूमि नहीं दूंगा। अब फैसला युद्ध भूमि में ही होगा।

उधर संजय के जाने के बाद श्रीकृष्ण ने स्वयं हस्तिनापुर जाकर युद्ध से बचाने की चेष्ठा करने का आश्वासन दिया। हम अपनी ओर से युद्ध न हो इसका हर संभव प्रयास करेंगे। इतना कहकर श्रीकृष्ण हस्तिनापुर के लिए विदा हुए।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 25 राजदूत संजय Read More »

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 24 मंत्रणा

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant & Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 24 मंत्रणा are prepared by our highly skilled subject experts.

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 24 मंत्रणा

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 24

प्रश्न 1.
तेरहवाँ वर्ष पूरा होने पर पांडवों ने क्या किया ?
उत्तर:
तेरहवाँ वर्ष पूरा होने पर पांडव प्रकट रूप में रहने लगे। आगे का कार्यक्रम तय करने के लिए उन्होंने अपने भाई-बंधुओं एवं मित्रों को बुलाने के लिए दूत भेजे।

प्रश्न 2.
विराट की सभा में सभी लोगों ने क्या निर्णय लिया ?
उत्तर:
सभी लोगों ने निर्णय लिया कि सबसे पहले किसी योग्य व्यक्ति को कौरवों के पास दूत बनाकर भेजना चाहिए। जो राज्य युधिष्ठिर से छीना गया वह उसको वापस लौटा दिया जाए।

प्रश्न 3.
सात्यकि ने बलराम के कथन के विरोध में क्या कहा ?
उत्तर:
सात्यकि का कहना था कि बलराम की बातें मुझे जरा भी न्यायोचित नहीं लगतीं। युधिष्ठिर को आग्रह करके जुआ खेलने के लिए विवश किया गया था और कपट करके उन्हें हराया गया था।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 24 मंत्रणा

प्रश्न 4.
श्रीकृष्ण के पास जाने पर अर्जुन और दुर्योधन ने किस तरह की सहायता चाही।
उत्तर:
श्रीकृष्ण ने कह दिया कि एक तरफ मैं रहूँगा दूसरी तरफ मेरी सेना। परंतु मेरे पास पहले अर्जुन आया है अतः अर्जुन को ही चयन करना है कि वे क्या चाहते हैं। अर्जुन ने कहा कि मैं तो आपको ही अपने पक्ष में रखना चाहता हूँ। दुर्योधन अर्जुन के इस फैसले से बड़ा प्रसन्न हुआ क्योंकि उसको अनायास ही श्रीकृष्ण की सेना मिल गयी थी।

प्रश्न 5.
हस्तिनापुर से लौटते समय दुर्योधन का दिल बल्लियों क्यों उछलने लगा ?
उत्तर:
दुर्योधन श्रीकृष्ण की अक्षौहिणी सेना के मिल जाने से बहुत खुश था। वह सोच रहा था कि अर्जुन बड़ा मूर्ख बना। बलराम जी का स्नेह तो पहले ही मुझ पर है अब श्रीकृष्ण भी निःशस्त्र और सेवाविहीन हो गए हैं।

प्रश्न 6.
शल्य कौन थे ? दुर्योधन ने उन्हें किस प्रकार धोखा दिया ?
उत्तर:
शल्य मद्र देश के राजा व नकुल सहदेव के मामा थे। शल्य को जब पता चला कि पांडव उपप्लव्य नगर में युद्ध की तैयारी कर रहे हैं, तो वे भी भारी सेना के साथ पांडवों की सहायता के लिए निकल पड़े। दुर्योधन को जब पता चला तो उसने अपने आदमी भेजकर बीच रास्ते में उनके शिविर पर जाकर उनकी खूब सेवा की। शल्य ने उसकी सेवा से प्रभावित होकर दुर्योधन के पक्ष में युद्ध करने का निर्णय ले लिया।

प्रश्न 7.
उपप्लव्य नगर पहुँचकर शल्य ने युधिष्ठिर को क्या आश्वासन दिया ?
उत्तर:
शल्य ने युधिष्ठिर से कहा कि बेटा युधिष्ठिर मैं धोखे से दुर्योधन को वचन दे बैठा हूँ अब युद्ध तो मैं उनकी ओर से ही लढूँगा परन्तु कर्ण जब मुझे अपना सारथी बनाएगा तो अर्जुन के प्राणों की रक्षा ही होगी।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 24 मंत्रणा

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 24

तेरहवाँ वर्ष पूरा होते ही पांडव विराट की राजधानी छोड़ उसी राज्य के उपप्लव्य नगर में प्रकट रूप से रहने लगे। उन्होंने अपने मित्रों और भाई-बंधुओं को बुलाने के लिए दूत भेजे। भाई बलराम, अर्जुन की पत्नी सुभद्रा, पुत्र अभिमन्यु और कई वीरों को लेकर कृष्ण भी उपप्लव्य जा पहुंचे। उनके कई मित्र राजा अपनी कई अक्षौहिणी सेनाओं के साथ वहाँ पहुँच गए। सबसे पहले अभिमन्यु के साथ उत्तरा का विवाह किया गया। इसके बाद विराट राज्य के सभा भवन में सभी राजा मंत्रणा के लिए एकत्रित हुए। कृष्ण ने खड़े होकर कहा कि हम आज यहाँ इसलिए इकट्ठे हुए हैं कि कुछ ऐसे उपाय सोचें जो न्यायोचित हों और जिससे पांडवों तथा कौरवों दोनों का सुयश बढ़े। दुर्योधन को समझाया जाए जिससे युधिष्ठिर का राज्य वापस मिल सके। किसी को दूत बनाकर हस्तिनापुर भेजा जाए। बलराम का कहना था कि युधिष्ठिर को आग्रह करके बुलाया गया और कपट से हराया गया था। मुझे लगता है दुर्योधन बिना युद्ध के मानेगा नहीं। द्रुपद ने भी सात्यकि का समर्थन किया। शल्य, धृष्टकेतु, जयत्सेन, कैकेय आदि राजाओं के पास अभी से दूत भेज देने चाहिए साथ ही सुलह का प्रयास भी जारी रखना चाहिए। कृष्ण ने कहा कि मुझ पर और बलराम पर कौरवों और पांडवों का समान हक है। हम यहाँ उत्तरा के विवाह में शामिल होने के लिए आए हैं। उन्होंने द्रुपद से कहा कि आप हममें सबसे बड़े हैं अतः आप किसी को दूत बनाकर हस्तिनापुर भेज दें।

श्रीकृष्ण द्वारका लौट आए और विराट व द्रुपद युद्ध की तैयारियों में लग गए। दोनों ही पक्ष अपने-अपने मित्र राजाओं के पास संदेश भेजकर युद्ध की तैयारियों में लग गए। श्रीकृष्ण के पास अर्जुन स्वयं गए। जब दुर्योधन को पता चला कि श्रीकृष्ण द्वारका गए हैं तो वह भी उनके पास पहुंच गया। अर्जुन और दुर्योधन दोनों ने ही एक साथ प्रवेश किया। उस समय श्रीकृष्ण शयन कर रहे थे। दुर्योधन उनके सिरहाने खड़ा हो गया व अर्जुन पैरों की और बैठ गए। श्रीकृष्ण की नींद खुली तो उन्होंने पहले अर्जुन को और फिर दुर्योधन को देखा। दुर्योधन का कहना था कि पहले मैं आया हूँ इसलिए उसका काम पहले हो। श्रीकृष्ण ने कहा कि एक ओर मेरी सेना रहेगी और दूसरी और मैं परंतु मैं हथियार नहीं उठाऊँगा। अर्जुन छोटा है अतः इन दोनों में से अर्जुन को जो अच्छा लगे मांग ले। अर्जुन ने कहा आप शस्त्र उठाएं या न उठाएं , मैं तो आपको ही चाहता हूँ। यह सुनकर दुर्योधन के आनंद की सीमा न रही क्योंकि श्रीकृष्ण की भारी सेना उनको सहजता से ही मिल गई थी। दुर्योधन बलराम के पास गए और सारी बात बताई। बलराम ने कहा कि मैं तटस्थ रहूँगा। मेरे लिए तुम दोनों ही बराबर हो। मद्र देश के राजा को जब पता चला तो वह भी अपनी सेना के साथ उपप्लव्य की ओर रवाना हो गया। परंतु दुर्योधन ने बीच में ही उनकी सेना के पड़ाव में जाकर उनकी इतनी सेवा की कि शल्य अपने भानजों को छोड़कर दुर्योधन के पक्ष में हो गया। शल्य के उपप्लव्य नगर पहुँचने पर जब युधिष्ठिर के साथ युद्ध की चर्चा छिड़ी तो शल्य ने बताया कि किस प्रकार दुर्योधन ने धोखे से उसे अपने पक्ष में कर लिया। युधिष्ठिर ने शल्य से कहा कि मामा जी! अवसर आने पर जब कर्ण आपको अपना सारथी बनाकर अर्जुन का वध करने का प्रयत्न करेगा उस समय आप अर्जुन की मृत्यु का कारण बनोगे। शल्य ने कहा कि मैं धोखे में आकर दुर्योधन को वचन दे बैठा हूँ, पर एक बात बताए देता हूँ कि कर्ण मुझे सारथी बनाएगा तो अर्जुन के प्राणों की रक्षा ही होगी।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 24 मंत्रणा Read More »

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 23 विराट का भ्रम

These NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant & Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 23 विराट का भ्रम are prepared by our highly skilled subject experts.

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 23 विराट का भ्रम

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 23

प्रश्न 1.
विराट को क्या भ्रम हो गया था ?
उत्तर:
विराट को यह भ्रम हो गया था कि उनके पुत्र उत्तर के पराक्रम के कारण ही, कौरव सेना पर विजय पाई गई है।

प्रश्न 2.
विराट ने ‘कंक’ के मुँह पर पासा क्यों मार दिया ?
उत्तर:
‘कंक’ बृहन्नला की बड़ाई कर रहा था उनके पुत्र उत्तर की नहीं। इसलिए विराट ने झंझलाहट में कंक के मुँह पर पासे मार दिये जिसके कारण उनके मुँह से खून निकलने लगा।

प्रश्न 3.
कंक ने द्वारपाल को इशारे से यह क्यों कहा कि राजकुमार को ही अंदर बुलाओ, वृहन्नला को नहीं ?
उत्तर:
कंक को डर था कि वृहन्नला के रूप में अर्जुन जब उनके मुँह से निकलने वाले खून को देखेगा तो क्रोध में आकर वह कुछ गड़बड़ कर सकता है।

प्रश्न 4.
विराट का यह भ्रम किस प्रकार दूर हुआ कि उत्तर ने लड़ाई जीती है।
उत्तर:
जब विराट अपने पुत्र की प्रशंसा कर रहे थे कि बेटा बड़े वीर हो तुम।” पिता की बात सुनकर उत्तर ने कहा-“पिता श्री मैंने कोई सेना नहीं हराई।” मैं तो लड़ा भी नहीं। उत्तर ने सारी बात बताई, राजकुमार की बात सुनकर विराट का भ्रम दूर हो गया।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 23 विराट का भ्रम

प्रश्न 5.
विराट को किस प्रकार पता चला कि ये सभी पांडव हैं ?
उत्तर:
अर्जुन ने कुमार उत्तर को पहले ही सारी बातें बता दी थीं। अब अवधि भी पूरी हो गई थी इसलिए अर्जुन ने पहले राजा विराट को और बाद में राजसभा में अपना परिचय दे दिया।

प्रश्न 6.
सभा में कोलाहल क्यों मच गया ?
उत्तर:
जब लोगों ने यह जाना कि ये सभी पांडव हैं तो उनके आश्चर्य और आनंद के कारण सभा में कोलाहल मच गया।

प्रश्न 7.
राजा विराट ने अर्जुन के सामने क्या प्रस्ताव रखा, अर्जुन ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार क्यों नहीं किया ?
उत्तर:
विराट ने अर्जुन से कहा कि वह उनकी पुत्र उत्तरा के साथ विवाह कर ले। अर्जुन ने यह कहकर कि मैं उत्तरा का गुरु रहा हूँ मैंने उसे नृत्य-गायन सिखाया अतः वह मेरे लिए पुत्री के समान है।

प्रश्न 8.
दुर्योधन का दूत पांडवों के लिए क्या समाचार लाया ?
उत्तर:
दुर्योधन के दूतों ने युधिष्ठिर से आकर कहा कि अज्ञातवास की अवधि पूरा होने से पहले ही अर्जुन पहचान लिए गए। अतः आपको बारह वर्ष और वनवास भोगना होगा। युधिष्ठिर ने कहा कि पितामह भीष्म आदि जानकारों से यह पता कर लो कि अर्जुन ने अवधि समाप्त होने पर ही गांडीव से टंकार की थी।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 23 विराट का भ्रम

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 23

त्रिगर्त राजा सुशर्मा पर विजय प्राप्त करके जब विराट नगर वापस आए तो नगरवासियों ने उनका धूमधाम से स्वागत किया। जब राजा को यह पता चला कि राजकुमार उत्तर कौरवों से लड़ने गए हैं तो वे एकदम चौंक उठे। राजा को इस प्रकार चिंतित देखकर कंक ने उन्हें दिलासा देते हुए कहा कि वृहन्नला के होते हुए चिंता करने की जरूरत नहीं है। तभी उत्तर के भेजे हुए दूतों ने आकर कहा कि कौरव सेना को तितर-बितर करके गायों को छुड़ा लिया है। विराट को यकीन नहीं हो रहा था। पुत्र की विजय की बात सुनकर विराट फूले नहीं समा रहे थे। वे प्रसन्नता के मारे पागल से हुए जा रहे थे। उन्होंने अंतःपुर में जाकर सैरंध्री से कहा कि चौपड़ की गोटें ले आओ। मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि मैं अपना आनंद कैसे व्यक्त करूँ।

राजा खेलते हुए अपने पुत्र के शौर्य की बातें कर रहे थे। कंक ने कहा कि निःसंदेह आपके पुत्र भाग्यवान हैं जो वृहन्नला उनकी सारथी बनी। वृहन्नला का नाम लेकर कंक जब कुछ और कहना चाह रहे थे तो विराट ने झुंझलाहट में कंक के मुँह पर पांसा दे मारा। चोट के कारण उनके मुँह से खून बहने लगा। तभी द्वार पर राजकुमार उत्तर वृहन्नला के साथ आ पहुंचे। कंक ने द्वारपाल को इशारे से कहा कि राजकुमार को लाओ वृहन्नला को नहीं। राजकुमार उत्तर को अर्जुन ने सभी के बारे में बता दिया था। राजकुमार ने कंक के मुँह से निकलने वाले खून के बारे में पूछा तो विराट ने सब कुछ बता दिया। विराट ने युधिष्ठिर से क्षमा मांगी। विराट ने उत्तर से कहा कि बेटा तुम तो बड़े वीर हो तो उत्तर ने कहा पिता श्री मैं तो लड़ा ही नहीं, न ही मैंने कोई सेना हराई। इसके बाद अर्जुन ने पहले विराट को फिर सारी सभा को सारी बात बता दी। आश्चर्य और आनंद के कारण सभा में कोलाहल मच गया। विराट ने राजकन्या उत्तरा से अर्जुन को विवाह करने के लिए कहा। अर्जुन ने यह कहकर मना कर दिया कि मैं उसका शिक्षक रहा हूँ मेरे लिए वह बेटी के समान है। मेरे पुत्र अभिमन्यु के साथ उसका ब्याह कर दीजिए।” इसके बाद दुर्योधन के दूतों ने आकर कहा कि अज्ञातवास पूरा होने से पहले ही अर्जुन पहचान लिए गए इसलिए तुमको बारह वर्ष और वनवास में बिताने होंगे। युधिष्ठिर ने हँसकर कहा कि दूत जाकर पितामह भीष्म से पूछे। अर्जुन तब प्रकट हुआ जब अज्ञातवास की अवधि समाप्त हो चुकी थी। तेरहवाँ वर्ष पूरा होने के बाद ही अर्जुन ने धनुष की टंकार की थी।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 23 विराट का भ्रम Read More »

error: Content is protected !!