CBSE Class 7

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 22 प्रतिज्ञा-पूर्ति

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 22 प्रतिज्ञा-पूर्ति

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 22

प्रश्न 1.
कर्ण अकेले ही क्यों युद्ध करना चाहता था ?
उत्तर:
कर्ण दुर्योधन को यह दिखलाना चाहता था कि मैं अकेला ही अर्जुन को परास्त कर सकता हूँ। ऐसा करके वह दुर्योधन को दिया अपना वचन पूरा करना चाहता था।

प्रश्न 2.
अर्जुन के गांडीव की टंकार सुनकर भीष्म ने क्या अनुमान लगाया ?
उत्तर:
भीष्म की गणना के अनुसार अज्ञातवास की अवधि पूरी हो गई थी। अर्जुन के गांडीव की टंकार से भीष्म को पूरा विश्वास हो गया कि उनकी गणना ठीक है। उनका कहना था कि चंद्र और सूर्य की गति के जानकार मेरे कथन की पुष्टि कर देंगे।

प्रश्न 3.
भीष्म के यह कहने पर कि संधि कर लो, दुर्योधन ने क्या कहा ?
उत्तर:
कर्ण ने कहा- “पूज्य पितामह! मैं संधि नहीं चाहता हूँ। राज्य तो दूर रहा मैं तो एक गाँव तक पांडवों को देने के लिए तैयार नहीं हूँ।

प्रश्न 4.
अर्जुन ने अपने गांडीव पर दो-दो बाण चढ़ाकर क्यों छोड़े ?
उत्तर:
अर्जुन भीष्म व द्रोण का बहुत सम्मान करता था इसलिए अर्जुन ने दो-दो बाण भीष्म व द्रोण के चरणों में छोड़कर उनको प्रणाम किया। दो-दो बाण उनके दोनों हाथों का प्रतीक थे।

प्रश्न 5.
कौरवों की हार होने पर भीष्म ने क्या किया ?
उत्तर:
भीष्म ने सेना को हस्तिनापुर लौटने की सलाह दी क्योंकि अर्जुन के सामने कोई भी कौरव वीर टिक न . सका था।

प्रश्न 6.
अर्जुन ने युद्ध में विजय के बाद उत्तर से क्या कहा ?
उत्तर:
अर्जुन ने उत्तर को नगर की ओर लौट चलने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि इस विजय का यश तुम्हें ही मिलेगा। इसलिए चंदन लगाकर और फूलों की माला पहन कर नगर में प्रवेश करना।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 22 प्रतिज्ञा-पूर्ति

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 22

द्रोण ने कहा-“मालूम होता है, यह तो अर्जुन ही आया है।” दुर्योधन को आचार्य की शंका और घबराहट ठीक नहीं लगी। तभी कर्ण ने जुए के खेल में हारने की शर्त बताई, उनका कहना था कि अभी तक अज्ञातवास पूरा नहीं हुआ। शर्त के अनुसार पांडवों. को फिर से बारह वर्षों के लिए वन जाना होगा। अर्जुन की जगह परशुराम भी हों तो भी हम क्यों डरें आज मैं दुर्योधन को दिया वचन पूरा करके दिखाऊँगा। कृपाचार्य ने कहा कि हम सबको अर्जुन का मिलकर मुकाबला करना चाहिए। कर्ण कहने लगा कि आचार्य सदा अर्जुन की प्रशंसा करते रहते हैं। लगता है इनको अर्जुन से भय है या अत्यधिक प्यार। तभी अश्वत्थामा बोल उठा! कर्ण तुमने किया कुछ नहीं कोरी डींगे मारने में ही समय बिता रहे हो। इनको इस प्रकार झगड़ते हुए देखकर भीष्म बड़े खिन्न हुए। उन्होंने कहा कि अभी सबको मिलकर ही शत्रु का मुकाबला करना होगा। तभी भीष्म ने दुर्योधन को बताया कि प्रतिज्ञा का समय कल ही पूरा हो गया। चंद्र और सूर्य की गति, वर्ष, महीनों और पक्ष विभाग के पारस्परिक संबंध को अच्छी तरह जानने वाले मेरे कथन की पुष्टि करेंगे। अर्जुन के द्वारा गांडीव धनुष की टंकार किए जाने से ही मैं समझ गया था कि प्रतिज्ञा की अवधि पूरी हो गई। अभी पांडवों के साथ संधि करने का समय है। दुर्योधन ने कहा कि मैं पांडवों को राज्य तो दूर एक गाँव भी नहीं दूंगा। यह सुनकर द्रोण की आज्ञानुसार कौरव वीरों ने व्यूह रचना की। अर्जुन ने गांडीव पर चढ़ाकर दो-दो बाण इस प्रकार छोड़े कि वे द्रोण व भीष्म के चरणों में जाकर गिरे। अर्जुन ने दुर्योधन का पीछा किया और बाद में कर्ण पर हमला करके उसे बुरी तरह घायल कर दिया। इसके बाद अर्जुन ने द्रोण की बुरी गत बनाई। यह देखकर अश्वत्थामा आगे बढ़ा और अर्जन पर आक्रमण किया। इसी बीच अर्जुन ने आचार्य द्रोण को चले जाने का मौका दे दिया। इसके बाद अर्जुन ने अश्वत्थामा व कृपाचार्य को भी हरा दिया। कौरव सेना तितर-बितर हो गई। अर्जुन ने दुर्योधन पर भीषण हमला किया वह घायल होकर मैदान छोड़कर भाग गया। भीष्म के कहने पर सारी सेना हस्तिनापुर लौट आई। अर्जुन ने उत्तर से कहा कि रथ को नगर की ओर ले चलो। तुम्हारी गाएं छुड़ा ली गई हैं। इस विजय का यश तुम्हीं को मिलना चाहिए अतः चंदन लगाकर व फूलों का हार पहनकर नगर में प्रवेश करना। अर्जुन ने फिर से वृहन्नला का वेश धारण कर लिया और सारथी के स्थान पर बैठ गया। उन्होंने कुछ लोगों को विराट नगर की ओर इसलिए भेज दिया ताकि वे जाकर उत्तर की विजय की घोषणा कर सकें।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 21 अज्ञातवास

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 21 अज्ञातवास

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 21

प्रश्न 1.
विराट राजा के राज्य में पांडवों की नियुक्ति किन-किन कार्यों के लिए हुई ?
उत्तर:
युधिष्ठिर-कंक’ नाम से विराट के दरबारी बन गए और राजा के साथ चौपड़ खेलकर दिन बिताने लगे। भीमसेन, ‘बल्लभ’ के नाम से रसोइयों का मुखिया बनकर रहने लगा। वह कभी-कभी मशहूर पहलवानों से कुश्ती लड़कर या हिंस्र जन्तुओं को वश में करके राजा का दिल बहलाया करता था, अर्जुन, स्त्री के वेश में ‘वृहन्नला’ के नाम से रनवास की स्त्रियों, दासियों को नाच गाना सिखाने लगा।

नकुल ‘ग्रंथिक’ के नाम से घोड़ों को साधने, उनकी बीमारियों का इलाज करने और उनकी देखभाल करके राजा को खुश करने लगा। सहदेव ‘तंतिपाल’ के रूप में गाय-बैलों की देखभाल करता रहा। द्रौपदी ‘सैरंध्री’ के नाम से विराट की रानी सुदेष्णा की सेवा सुश्रुषा करती रही।

प्रश्न 2.
कीचक कौन था ?
उत्तर:
कीचक विराट के राजा की पत्नी सुदेष्णा का भाई था। वह बड़ा ही बलिष्ठ और प्रतापी वीर था। मत्स्य देश की सेना का वही नायक बना हुआ था। मत्स्य देश के राज्य में उसकी शक्ति के कारण गहरी पैठ थी। स्वयं राजा विराट भी कीचक से डरते थे।

प्रश्न 3.
कीचक वध का समाचार सुनकर कौरवों ने क्या अनुमान लगाया ?
उत्तर:
कौरवों का अनुमान था कि हो न हो कीचक का वध भीम ने ही किया है। दुर्योधन ने राज्य सभा में यह बात रखी और विराट नगर पर हमला करने की योजना बनाई।

प्रश्न 4.
दुर्योधन विराट नगर पर हमला क्यों करना चाहता था ?
उत्तर:
दुर्योधन की योजना थी कि यदि पांडव विराट के यहाँ हुए तो वे युद्ध करने अवश्य आयेंगे और हम उन्हें पहचान कर पुनः बारह वर्ष के लिए वनवास भेज देंगे।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 21 अज्ञातवास

प्रश्न 5.
दुर्योधन ने विराट नगर को किस प्रकार घेरने की योजना बनाई ?
उत्तर:
यह निश्चय किया गया कि राजा सुशर्मा दक्षिण की ओर से विराट पर हमला करें और जब विराट अपनी सेना लेकर उसका मुकाबला करने जाए तब उत्तर की ओर से दुर्योधन अपनी सेना लेकर अचानक विराट पर छापा मार दे।

प्रश्न 6.
विराट के बंदी बनाए जाने पर युधिष्ठिर ने उसे छुड़ाने के लिए किसे भेजा ?
उत्तर:
विराट को सुशर्मा द्वारा बंदी बनाए जाने पर युधिष्ठिर ने भीम को भेजा और कहा कि तुम अभी जाओ और साधारण लोगों की भाँति रथ पर बैठकर धनुष-वाण से ही युद्ध करना सदा की, भाँति गर्जना करोगे तो तुम पहचान लिए जाओगे। भीम ने विराट को छुड़ा लिया और सुशर्मा को बंदी बनाकर ले आया।

प्रश्न 7.
राजकुमार उत्तर के डर का क्या कारण था ?
उत्तर:
विराट के राजा तो सुशर्मा से युद्ध करने गए थे तभी सुशर्मा को देखकर राजकुमार उत्तर डर गए। अर्जुन ने वृहन्नला के रूप में ही उत्तर को साथ लेकर तथा उसे सारथि बनाकर युद्ध क्षेत्र की ओर प्रस्थान किया। उत्तरा ने रथ को कौरव सेना के सामने ला खड़ा किया।

प्रश्न 8.
कौरव सेना के सामने पहुँचकर अर्जुन ने क्या किया ?
उत्तर:
अर्जुन ने अपना गांडीव संभाल लिया और उस पर डोरी चढ़ाकर तीन बार जोर से टंकार की। कौरव सेना के सचेत होने से पहले ही अर्जुन ने खड़े होकर शंख की ध्वनि की जिससे कौरव सेना थर्रा उठी। उसमें खलबली मच गई कि पांडव आ गए।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 21 अज्ञातवास

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 21

सब अपना-अपना वेश बदलकर राजा विराट के यहाँ चाकरी करने लगे। पांडव अपनी-अपनी पसंद के कार्यों में नियुक्त कर दिए गए। युधिष्ठिर ‘कंक’ नाम से विराट के दरबारी बन गए। भीसेन ‘बल्लभ’ नाम से रसोइयों का मुखिया बनकर रहने लगा। अर्जुन स्त्री के वेश में ‘वृहन्नला’ के नाम से रनवास की स्त्रियों खासकर विराट की कन्या उत्तरा और उसकी सहेलियों को नाच गाना सिखाने लगा। नकुल ‘ग्रंथिक’ नाम से घोड़ों को साधने, उनकी बीमारियों का इलाज करने और उनकी देखभाल करने में अपनी चतुरता का परिचय देते हुए राजा को खुश करता रहा। सहदेव ‘तंतिपाल’ के रूप में गाय-बैलों की देखभाल करता रहा। पांचाल राजा की पुत्री द्रौपदी दूसरी रानियों की आज्ञाकारिणी दासी बन गई। वह सैरंध्री के नाम से विराट की पत्नी की सेवा में लग गई।

रानी सुदेष्णा का भाई कीचक बड़ा ही बलिष्ठ और प्रतापी वीर था। अपने कुल के लोगों को साथ लेकर वास्तविक रूप से मत्स्यदेश का शासन वही चला रहा था। विराट कीचक के ही कहे अनुसार कार्य करता था। कौरवों ने अज्ञातवास के दौरान पांडवों की खोज करनी शुरू कर दी। तभी उनको कीचक वध का पता चला। दुर्योधन का अनुमान था कि यह काम भीम ही कर सकता है। राज सभा में दुर्योधन ने अपनी शंका प्रकट की। अंत में विराट नगर पर आक्रमण करने का निश्चय किया। उनका मानना था कि यदि पांडव वहाँ हुए तो विराट नगर की ओर से हमसे लड़ने अवश्य आयेंगे तब उनको पहचान कर बारह वर्ष का और वनवास हो जाएगा। तब यह निश्चय किया गया कि विराट के राज्य पर सुशर्मा दक्षिण की ओर से हमला करे और उत्तर की ओर से दुर्योधन हमला करे ओर विराट नगर पर छापा मार दें। सुशर्मा ने दक्षिण की ओर हमला करके झुंड के झुंड गायों को अपने कब्जे में ले लिया। युधिष्ठिर ने विराट के राजा को सांत्वना देते हुए कहा-‘राजन चिंता न करेंगे। मैं भी अस्त्र विद्या सीखा हुआ हूँ। मैंने सोचा कि आपके रसोइये बल्लभ, अश्वपाल, ग्रंथिक और तंतिपाल भी बड़े कुशल योद्धा हैं। मैं कवच पहनकर रथारूढ़ होकर युद्ध क्षेत्र में जाऊँगा। आप भी उनको आज्ञा दें कि वे भी रथारूढ़ हो मेरे साथ चलें। अर्जुन को छोड़कर चारों वीर सुशर्मा की सेना से लड़ने चल पड़े। राजा सुशर्मा और विराट की सेना में भयंकर युद्ध हुआ। राजा विराट को बंदी बना लिया। युधिष्ठिर ने भीमसेन से कहा कि तुम सामान्य योद्धा की तरह जाओ और अभी सुशर्मा को छुड़ाकर लाओ। भीमसेन ने बाणों की वर्षा करते हुए शीघ्र ही विराट को छुड़ा लिया और सुशर्मा को कैद कर लिया। विराट नगर में विजय उत्सव मनाया गया। तभी उत्तर की ओर से दुर्योधन ने आक्रमण कर भारी तबाही मचा दी। इधर वृहन्नला के रूप में अर्जुन राजकुमार उत्तर को लेकर दुर्योधन से मुकाबला करने के लिए पहुंच गया। अर्जुन ने उत्तर को सारथी के स्थान पर बैठाकर रास उसके हाथ में दे दी। अर्जुन ने कौरव सेना के सामने रथ ला खड़ा किया। उसने अपना गांडीव सँभाल लिया और उस पर डोरी चढ़ाकर तीन बार जोर से टंकार की। कौरव-सेना टंकार-ध्वनि से सचेत हो भी न पाई थी कि अर्जुन ने खड़े होकर शंखनाद कर दिया। कौरव सेना में खलबली मच गई कि पांडव आ गए।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 20 यक्ष-प्रश्न

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 20 यक्ष-प्रश्न

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 20

प्रश्न 1.
अपने मृत पड़े भाइयों को देखकर युधिष्ठिर की कैसी दशा हुई ?
उत्तर:
असह्य शोक के कारण युधिष्ठिर की आँखों से अविरल आँसू बहने लगे। युधिष्ठिर विलाप कर रहे थे कि तभी उसने देखा उसके भाइयों के शरीर पर किसी प्रकार के चोट के निशान नहीं थे। युधिष्ठिर ने सोचा की शायद यह कोई मायाजाल है या दुर्योधन की कोई और चाल।।

प्रश्न 2.
मनुष्य का सबसे बड़ा साथी कौन होता है ?
उत्तर:
भनुष्य का सबसे बड़ा साथी धैर्य होता है क्योंकि धैर्य से काम लेने वाला व्यक्ति बड़ी से बड़ी मुसीबत को भी आसानी से झेल लेता है।

प्रश्न 3.
यक्ष ने युधिष्ठिर के उत्तरों से संतुष्ट होकर क्या किया ?
उत्तर:
यक्ष ने युधिष्ठिर के उत्तरों से संतुष्ट होकर उसके एक भाई को जीवित करने की बात कही।

प्रश्न 4.
युधिष्ठिर ने अपने कौन से भाई को जीवित करने के लिए कहा ? और क्यों?
उत्तर:
युधिष्ठिर ने अपने सबसे छोटे भाई नकुल को जीवित करने के लिए यक्ष से कहा। युधिष्ठिर का मानना था कि एक पुत्र माद्री का भी जीवित हो उठे तो कुंती व माद्री का एक-एक पुत्र तो रहेगा।

प्रश्न 5.
यक्ष ने सभी पांडवों को जीवित क्यों किया ?
उत्तर:
यक्ष युधिष्ठिर की न्यायप्रियता से बहुत प्रसन्न हुआ। उसने अपने भाई भीम या अर्जुन की अपेक्षा माद्रीपुत्र नकुल का जीवन दान माँगा।

प्रश्न 6.
वनवास के दौरान पांडवों ने क्या-क्या उपलब्धियाँ प्राप्त की ?
उत्तर:
वनवास के दौरान अर्जुन ने इंद्र से दिव्यास्त्र प्राप्त किए, भीमसेन ने फूलों वाले सरोवर के पास हनुमान से भेंट कर और उनका आलिंगन प्राप्त करके अपनी शक्ति को दस गुना बढ़ा लिया। मायावी सरोवर के पास युधिष्ठिर ने स्वयं धर्मदेव के दर्शन किए।

प्रश्न 7.
अज्ञातवास में पांडवों ने कहाँ जाना उचित समझा और क्यों ?
उत्तर:
अज्ञातवास में पांडवों ने विराट नगर जाना उचित समझा क्योंकि मत्स्याधिराज राजा विराट बड़े शक्ति सम्पन्न थे। वे दुर्योधन की बातों में भी आने वाले नहीं थे।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 20 यक्ष-प्रश्न

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 20

युधिष्ठिर अपने भाइयों को तलाश करते-करते उसी तालाब पर जा पहुँचा जहाँ उसके भाई मृत अवस्था पड़े हुए थे। शोक के कारण उनकी आँखों से आँसू बह निकले। युधिष्ठिर ने अपने भाइयों के शरीर को देखकर सोचा यह तो कोई मायाजाल-सा लगता है क्योंकि आसपास किसी शत्रु के पाँवों के निशान तक नहीं हैं। युधिष्ठिर भी प्यास के कारण तालाब में पानी पीने के लिए उतरने लगा तो वही वाणी उसे भी सुनाई दी। युधिष्ठिर को लगा कि यह कोई यक्ष बोल रहा है। युधिष्ठिर से यक्ष ने कहा कि पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो बाद में जल ग्रहण करना। युधिष्ठिर ने यक्ष से कहा कि आप प्रश्न कर सकते हैं। यक्ष ने पहला प्रश्न किया-

प्रश्न 1.
मनुष्य का साथ कौन देता है ?
उत्तर:
धैर्य ही मनुष्य का साथी होता है।

प्रश्न 2.
कौन-सा शास्त्र (विद्या) है, जिसका अध्ययन करके मनुष्य बुद्धिमान बनता है।
उत्तर:
कोई भी शास्त्र ऐसा नहीं है। महान लोगों की संगति से ही मनुष्य महान बनता है।

प्रश्न 3.
भूमि से भारी क्या चीज है ?
उत्तर:
संतान को कोख में धारण करने वाली माता भूमि से भी भारी होती है।

प्रश्न 4.
आकाश से भी ऊँचा कौन है ?
उत्तर:
पिता।

प्रश्न 5.
हवा से भी तेज चलने वाला कौन है ?
उत्तर:
मन।

प्रश्न 6.
घास से भी तुच्छ कौन-सी चीज होती है ?
उत्तर:
चिंता।

प्रश्न 7.
विदेश जाने वाले का कौन साथी होता है ?
उत्तर:
विद्या।

प्रश्न 8.
घर में ही रहने वाले का कौन साथी होता है ?
उत्तर:
पत्नी।

प्रश्न 9.
मरणासन्न वृद्ध का मित्र कौन होता है ?
उत्तर:
दान, क्योंकि वही मृत्यु के बाद अकेले चलने वाले जीव के साथ-साथ चलता है।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 20 यक्ष-प्रश्न

प्रश्न 10.
बर्तनों में सबसे बड़ा कौन-सा है ?
उत्तर:
बर्तनों में सबसे बड़ा बर्तन भूमि है जिसमें सब कुछ समा जाता है।

प्रश्न 11.
सुख क्या है ?
उत्तर:
सुख व चीज है जो शील और सच्चरित्रता पर स्थित है।

प्रश्न 12.
किसके छूट जाने से मनुष्य सर्वप्रिय बनता है ?
उत्तर:
अहंभाव के छूट जाने पर।

प्रश्न 13.
किस चीज के खो जाने से दुःख नहीं होता है ?
उत्तर:
क्रोध के खो जाने पर।

प्रश्न 14.
किस चीज को गवाँकर मनुष्य धनी बनता है ?
उत्तर:
लालच को।

प्रश्न 15.
संसार में सबसे बड़े आश्चर्य की बात क्या है ?
उत्तर:
प्रतिदिन आँखों के सामने कितने ही प्राणी मृत्यु को प्राप्त होते हैं फिर भी बचे हुए ये सोचते हैं कि वे अमर हैं। यही महान आश्चर्य की बात है।

इस प्रकार यक्ष ने अनेक प्रश्न किए और युधिष्ठिर ने सबके उत्तर देकर यक्ष को संतुष्ट कर दिया। यक्ष बोला कि हे राजन्! मैं तुम्हारे मृत भाइयों में से किसी एक को जीवित कर सकता हूँ। युधिष्ठिर ने कहा कि यदि ऐसा है तो मेरा छोटा भाई नकुल जी उठे। यक्ष ने पूछा युधिष्ठिर दस हजार हाथियों के बल वाले भीम को छोड़कर तुमने नकुल को जीवित करवाना क्यों ठीक समझा। युधिष्ठिर ने कहा कि मैं कुंती पुत्र हूँ और मैं चाहता हूँ कि एक पुत्र माद्री का भी जीवित हो उठे। यक्ष ने प्रसन्न होकर युधिष्ठिर के चारों भाइयों को जीवित कर दिया। यक्ष ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि अब अज्ञातवास में तुम्हें कोई नहीं पहचान सकेगा। तुम्हारा अज्ञातवास सफलतापूर्वक पूरा होगा। इतना कहकर धर्मदेव अंर्तध्यान हो गए।

वनवास के दौरान सभी कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गए। अर्जुन ने इन्द्रदेव से दिव्य अस्त्र प्राप्त कर लिए। हनुमान से भेंट के बाद भीम और अधिक शक्तिशाली हो गया। युधिष्ठिर ने धर्मदेव के दर्शन कर लिए। युधिष्ठिर ने ब्राह्मणों की अनुमति लेकर उनको नगर लौटने को कहकर पांडव एकांत वन में चले गए और आगे के कार्यक्रम पर विचार करने लगे। अज्ञातवास में कहाँ रहा जाए ? इस प्रश्न पर अर्जुन ने अपनी राय दी कि मत्स्य देश में जाकर रहना ठीक रहेगा। इस देश के अधीश राजा विराट हैं। विराट नगर बहुत ही सुंदर व समृद्ध है। युधिष्ठिर ने कहा कि ठीक है वह बहुत शक्तिशाली है और दुर्योधन की बातों में भी आने वाला नहीं है। अतः सबने वहीं जाकर रहने का निर्णय लिया।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 19 मायावी सरोवर

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 19 मायावी सरोवर

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 19

प्रश्न 1.
युधिष्ठिर ने नकुल से क्या कहा ?
उत्तर:
पांडव एक ब्राह्मण की सहायता के लिए वन में बहुत दूर निकल गए थे। वे बहुत थक गए थे। युधिष्ठिर ने नकुल से कहा कि जरा पेड़ पर चढ़कर देखो कि कहीं आसपास जलाशय या नदी दिखाई दे रही है ?

प्रश्न 2.
नकुल जब पानी लेने के लिए गया तो उसके साथ क्या घटना घटी ?
उत्तर:
नकुल जब जलाशय पर पहुँचा तो वहाँ से एक आवाज आई-“माद्रीपुत्र! दुःसाहस न करो। यह जलाशय मेरे अधीन है। पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो। फिर पानी पियो।”

प्रश्न 3.
नकुल के न लौटने पर युधिष्ठिर ने क्या किया ?
उत्तर:
नकुल के न लौटने पर युधिष्ठिर ने सहदेव को भेजा उसके साथ भी वही कुछ घटा जो नकुल के साथ घटा था। उसने भी प्रश्नों का उत्तर दिए बिना जल पी लिया और मूछित हो गया।

प्रश्न 4.
अर्जुन को गुस्सा क्यों आया ?
उत्तर:
अर्जुन को क्रोध इसलिए आया क्योंकि जिधर से आवाज आ रही थी वह उधर ही बाण छोड़ रहा था फिर भी कोई परिणाम नहीं निकल रहा था। अपने बाणों को बेकार जाते देख अर्जुन का क्रोध और बढ़ गया।

प्रश्न 5.
भीम क्या सोचकर जल पीने लगा ?
उत्तर:
भीम ने सोचा कि पहले मैं जल पी लूँ तब देलूँगा कि मुझे यह रोकने वाला कौन है? पानी पीते ही भीम भी अचेत होकर किनारे पर ही गिर पड़े।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 19 मायावी सरोवर

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 19

कथासार जब पांडवों के वनवास की अवधि पूरा होने को थी तब एक दिन ब्राह्मण की सहायता करते हुए पाँचों भाई जंगल में काफी दूर निकल गए। वे बहुत थक गए थे, सुस्ताने लगे। युधिष्ठिर ने नकुल से कहा; “भैया जरा उस पेड़ पर चढ़कर देखो तो सही कि कहीं कोई जलाशय या नदी दिखाई दे रही है ? नकुल ने पेड़ पर चढ़कर देखा कुछ ही दूरी पर ऐसे पौधे दिखाई दे रहे हैं। पास ही कुछ बगुले भी बैठे थे। युधिष्ठिर ने नकुल को पानी लाने भेजा। दूर चलने पर नकुल को एक जलाशय दिखाई दिया। उसने सोचा कि पहले मैं प्यास बुझा लूँ फिर तरकश में पानी भरकर भाइयों के लिए ले जाऊँगा। वह अंजुलि भरकर पानी पीना ही चाहता था कि तभी एक आवाज़ आई कि माद्रीपुत्र! यह जलाशय मेरे अधीन है इसलिए पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो तभी जल पीना। नकुल वाणी की परवाह किए बिना जल पी गया। काफी देर तक जब नकुल नहीं पहुँचा तो युधिष्ठिर चिंतित हुए उन्होंने पता लगाने के लिए सहदेव को भेजा। सहदेव के साथ भी वही सब घटित हुआ जो नकुल के साथ हुआ था। युधिष्ठिर नकुल व सहदेव दोनों के ही न आने पर और अधिक चिंतित हुए उन्होंने पता लगाने के लिए अर्जुन को भेजा। अर्जुन ने सरोवर के निकट जाकर अपने दोनों भाइयों को मृत पड़े देखा। उनकी मृत्यु का कारण सोचते हुए अर्जुन भी जलाशय से पानी पीने लगा तो उसको भी वही वाणी सुनाई दी कि मेरे प्रश्नों का उत्तर देने के बाद ही जल पीना अन्यथा तुम्हारी भी वही दशा होगी जो तुम्हारे भाइयों की हुई। अर्जुन जिधर से आवाज़ आ रही थी उधर ही वाण छोड़ने लगा। वाणों को बेकार जाते देख अर्जुन के क्रोध की सीमा न रही। वह प्यास बुझाने के लिए पानी पीने लगा और पानी पीकर किनारे तक आते-आते मूर्छित होकर गिर पड़ा। अब युधिष्ठिर की व्याकुलता और बढ़ गई। उन्होंने भीमसेन को भेजा। भीमसेन ने अपने तीनों भाइयों को सरोवर के किनारे मृत पड़े देखा। वह पानी पीने के लिए जलाशय में उतरा और पानी पीते ही अपने भाइयों की तरह अचेत हो गया। युधिष्ठिर अकेले बैठे घबराने लगे। उनके मन में तरह-तरह के विचार आ रहे थे इसलिए युधिष्ठिर ने सोचा कि मैं ही चलकर देखता हूँ कि कारण क्या है।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 18 द्वेष करने वाले का जी नहीं भरता

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 18 द्वेष करने वाले का जी नहीं भरता

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 18

प्रश्न 1.
दुर्योधन वन में जाकर क्या देखना चाहता था ?
उत्तर:
दुर्योधन वन में जाकर अपनी आँखों से पांडवों को कष्ट उठाते देखना चाहता था।

प्रश्न 2.
कर्ण ने पांडवों के कष्टों को समीप से देखने का क्या हल निकाला?
उत्तर:
कर्ण ने दुर्योधन से कहा-“द्वैतवन में, कई बस्तियाँ हैं। हर साल उन बस्तियों से जाकर चौपायों की गणना करना राजकुमारों का ही काम होता है। बहुत समय से यह प्रथा चली आ रही है। उसके बहाने हम पिता जी की अनुमति आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 3.
दुर्योधन और गंधर्वराज के युद्ध का क्या कारण था? इस युद्ध का क्या परिणाम हुआ ?
उत्तर:
दुर्योधन भी उसी सरोवर के तट पर डेरा डालना चाहता था जिसके तट पर गंधर्वराज सपरिवार पहले ही डेरा डाले हुए था। गंधर्वराज के सेवकों ने दुर्योधन के अनुचरों को ऐसा करने से मना किया। दुर्योधन ने अपनी सेना लेकर गंधर्वराज पर आक्रमण कर दिया। दुर्योधन की सेना की हार हुई तथा गंधर्वराज ने दुर्योधन को बंदी बना लिया।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 18 द्वेष करने वाले का जी नहीं भरता

प्रश्न 4.
युधिष्ठिर ने दुर्योधन की सहायता क्यों की ?
उत्तर:
युधिष्ठिर ने दुर्योधन की सहायता इसलिए कि क्योंकि दुर्योधन उनके ही परिवार का था। इसलिए अर्जुन व भीमसेन ने कौरव सेना को एकत्रकर गंधर्वराज पर हमला करके दुर्योधन को मुक्त करा लिया।

प्रश्न 5.
दुर्योधन की राजसूय यज्ञ करने की इच्छा पूरी क्यों नहीं हो पाई ?
उत्तर:
दुर्योधन ने जब राजसूर्य यज्ञ करने की इच्छा व्यक्त की तो पंडितों ने कहा कि धृतराष्ट्र और युधिष्ठिर के रहते हुए उसे राजसूय यज्ञ करने का अधिकार नहीं है। तब दुर्योधन ने वैष्णव नामक यज्ञ करके ही संतोष कर लिया।

प्रश्न 6.
दुर्योधन ने ऋषि दुर्वासा को युधिष्ठिर का आथित्य ग्रहण करने क्यों भेजा ?
उत्तर:
दुर्वासा बहुत ही क्रोधी स्वभाव के ऋषि थे। दुर्योधन जानता था कि पांडवों के पास इतने लोगों को खिलाने के लिए कुछ भी नहीं है। उनका अक्षयपात्र भी द्रौपदी के भोजन करने के बाद खाली हो जाता था। ऐसा करके दुर्योधन पांडवों का अपमान करना चाहता था व दुर्वासा से उन्हें श्राप दिलाना चाहता था।

प्रश्न 7.
पांडवों की लाज किस प्रकार बची ?
उत्तर:
द्रौपदी ने जब परमात्मा का ध्यान किया तो थोड़ी देर बाद ही वहाँ श्रीकृष्ण आ पहुंचे। उन्होंने द्रौपदी से भोजन माँगा। भोजन था नहीं। उन्होंने द्रौपदी से अक्षयपात्र मँगवाया जिसमें एक अन्न का दाना व साग की पत्ती लगी थी। कृष्ण ने उसे लेकर मुँह में डालते हुए कहा कि यह भोजन हो, इससे उनकी भूख मिट जाए। कृष्ण के ऐसा करने से दुर्वासा एवं उनके शिष्यों की भी भूख मिट गई। भीम जब बुलाने गए तो वे आपस में कह रहे थे कि हम व्यर्थ ही युधिष्ठिर से कह आए कि वे भोजन तैयार रखें। दुर्वासा ने असुविधा के लिए युधिष्ठिर से क्षमा माँगी।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 18 द्वेष करने वाले का जी नहीं भरता

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 18

धृतराष्ट्र ने जब यह सुना कि पांडव वन में बड़ी तकलीफें उठा रहे हैं तो उनके मन में चिंता होने लगी। कर्ण और शकुनि दुर्योधन की चापलूसी किया करते थे। दुर्योधन ने कर्ण से कहा कि मैं मुसीबत में पड़े पांडवों को अपनी आँखों से देखना चाहता हूँ। कर्ण ने दुर्योधन से कहा कि द्वैतवन में कुछ बस्तियाँ हैं जो हमारे अधीन हैं। हर साल उन बस्तियों में जाकर चौपायों की गणना का काम राजकुमारों द्वारा ही होता आ रहा है। दुर्योधन अनुमति के लिए धृतराष्ट्र के पास गए। धृतराष्ट्र ने उनको द्वैतवन जाने की अनुमति दे दी। कौरव एक बड़ी सेना लेकर द्वैतवन की ओर चल पड़े। वहाँ पहुँचकर उन्होंने अपने डेरे ऐसे स्थान पर लगाए जहाँ से पांडवों का आश्रम चार कोस की दूरी पर था। गंधर्वराज चित्रसेन भी उसी जलाशय के तट पर सपरिवार डेरा डाले हुए थे। दुर्योधन के अनुचर जब जलाशय पर जाकर तंबु गाड़ने लगे तो गंधर्वराज के सेवकों ने उनको भगा दिया। दुर्योधन सेना लेकर तालाब की ओर आया और गंधर्यों के साथ युद्ध करने लगा कौरवों की सेना तितर-बितर हो गई। गंधर्वराज ने दुर्योधन को बंदी बना लिया। उन्होंने शंखनाद किया। जब युधिष्ठिर ने सुना कि दुर्योधन और उसके साथी अपमानित हुए हैं तो अपने कुटुंब का हवाला देकर भीमसेन और अर्जुन को दुर्योधन को छुड़ाने के लिए भेजा। इन्होंने कौरव सेना को एकत्र कर गंधर्वराज पर आक्रमण किया और दुर्योधन को छुड़ा लिया।

पांडवों के वनवास के समय दुर्योधन की इच्छा राजसूय यज्ञ करने की हुई। पंडितों ने कहा कि धृतराष्ट्र और युधिष्ठिर के रहते उसे राजसूय यज्ञ करने का अधिकार नहीं है। इसी समय की बात है कि एक बार महर्षि दुर्वासा अपने शिष्यों के साथ हस्तिनापुर आए। दुर्योधन ने उनका खूब आदर सत्कार किया। चलते समय प्रसन्न ऋषि ने वर माँगने के लिए कहा। दुर्योधन ने दुर्वासा से वर माँगा कि वे अपने शिष्यों के साथ युधिष्ठिर के अतिथि बनकर जाएं। दुर्वासा दुर्योधन की विनती स्वीकार करते हुए युधिष्ठिर के पास पहुंचे और बोले हम अभी स्नान करके आते हैं तब तक भोजन तैयार रखना। वनवास के प्रारंभ में सूर्य ने युधिष्ठिर को एक अक्षयपात्र दिया था जो उनके भोजन की पूर्ति करता था। द्रौपदी के भोजन करने के बाद इस बर्तन की शक्ति अगले दिन तक के . लिए लुप्त हो जाती थी। जब दुर्वासा पांडवों के आश्रम में पहुंचे थे उस समय द्रोपदी भी भोजन कर चुकी थी। अब ऋषि एवं उनके शिष्यों के लिए भोजन का प्रबंध किस प्रकार किया जाए ? द्रौपदी ने परमात्मा का ध्यान किया तभी कहीं से श्रीकृष्ण जी पधारे वे आकर बोले बहिन द्रौपदी! बहुत भूख लगी है कुछ खाने को दो। द्रौपदी को दुविधा में जानकर श्रीकृष्ण ने उनको अक्षयपात्र लाने को कहा। द्रौपदी हड़बड़ाकर अक्षयपात्र लाई। उसमें अन्न का एक कण व साग की एक पत्ती लगी हुई थी। श्रीकृष्ण ने उसे मुँह में डालते हुए कहा “यह भोजन हो, इससे उनकी भूख मिट जाए।” उधर द्रौपदी अपने को धिक्कार रही थी कि उसने बर्तन भी ठीक प्रकार से नहीं धोया। श्रीकृष्ण ने बाहर आकर भीमसेन से कहा कि जाकर ऋषि दुर्वासा को शिष्यों समेत भोजन के लिए बुला लाओ।” भीमसेन उस स्थान पर गया जहाँ दुर्वासा शिष्यों समेत स्नान कर रहे थे। शिष्य दुर्वासा से कर रहे थे गुरुदेव! हमने युधिष्ठिर को बेकार परेशान किया हमारा पेट भरा हुआ है। इस समय हमारी भोजन की इच्छा बिल्कुल भी नहीं है। यह सुनकर दुर्वासा ने भीमसेन से कहा- “हम सब तो भोजन कर चुके हैं। युधिष्ठिर से जाकर कहना कि इस असुविधा के लिए हमें क्षमा करें।

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Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 17 भीम और हनुमान

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Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers Summary in Hindi Chapter 17 भीम और हनुमान

Bal Mahabharat Katha Class 7 Questions Answers in Hindi Chapter 17

प्रश्न 1.
द्रौपदी ने भीमसेन को क्या लाने के लिए कहा और क्यों ?
उत्तर:
द्रौपदी जब आश्रम के बाहर खड़ी थी तभी उनके पास एक सुंदर फूल आकर गिरा। ऐसा सुंदर फूल उसने पहले कभी नहीं देखा था। द्रौपदी ने भीमसेन से ऐसे ही कुछ और फूल लाने को कहा।

प्रश्न 2.
फूल की तलाश में निकले भीमसेन कहाँ पहुँचे ? वहाँ उन्होंने क्या देखा ?
उत्तर:
फूल की तलाश में निकले भीमसेन केले के पेड़ों के विशाल बगीचे के पास पहुंचे। उस बगीचे में एक भारी बंदर रास्ता रोके लेटा था।

प्रश्न 3.
भीमसेन के यह कहने पर कि मैं किसी जानवर को नहीं लाँघता, बंदर ने क्या कहा ?
उत्तर:
बंदर ने भीमसेन से कहा कि यदि मुझे लाँघना उचित न लगता हो तो मेरी इस पूँछ को उठाकर एक ओर रख दो।

प्रश्न 4.
भीमसेन को विस्मय क्यों हुआ ?
उत्तर:
भीमसेन जब उस बंदर की पूँछ उठाने लगे तो वह उनसे हिली भी नहीं। उनको इस बात का विस्मय हुआ कि आखिर यह महाबली कौन है?

प्रश्न 5.
भीमसेन के पूछने पर बंदर ने अपने बारे में क्या बताया ?
उत्तर:
बंदर ने बताया कि मैं हनुमान हूँ।

Class 7 Hindi Mahabharat Questions and Answers Summary Chapter 17 भीम और हनुमान

प्रश्न 6.
भीमसेन की श्रद्धा-भक्ति से प्रसन्न होकर हनुमान ने क्या आशीर्वाद दिया?
उत्तर:
हनुमान ने भीमसेन को आशीर्वाद देते हुए कहा-‘भीम युद्ध के समय तुम्हारे भाई अर्जुन के रथ पर फहराने वाली ध्वजा पर मैं ही विद्यमान रहूँगा। विजय तुम्हारी ही होगी।

Bal Mahabharat Katha Class 7 Summary in Hindi Chapter 17

सुहावना मौसम था। द्रौपदी आश्रम के बाहर खड़ी थी। तभी एक सुंदर सा फूल द्रौपदी के पास आकर गिरा। द्रौपदी भीमसेन के पास जाकर बोली क्या तुम जाकर कुछ ऐसे ही फूल ला सकते हो। द्रौपदी की इच्छा पूरी करने के लिए भीमसेन फूल की तलाश में निकल पड़े। वे केलों के पेड़ों वाले बगीचे के पास पहुँचे। बगीचे के बीच एक बहुत भारी बंदर रास्ता रोके बैठा हुआ था। भीमसेन से उस बंदर ने कहा अस्वस्थ होने के कारण मैं लेटा हुआ था तुमने आकर मुझे जगा दिया। भीमसेन को उस बंदर की बातों पर बहुत क्रोध आया। भीमसेन ने अपना परिचय दिया और अपने रास्ते से हट जाने को कहा। बंदर ने कहा कि मैं उठने में असमर्थ हूँ इसलिए तुम मुझे लाँघकर आगे चले जाओ। भीमसेन ने कहा कि मैं किसी जानवर को लाँघना उचित नहीं समझता। बंदर ने कहा भाई मुझे जरा बताना कि वह हनुमान कौन था जो समुद्र को लाँघ गया था। भीमसेन ने कड़ककर कहा “क्या आप वीर हनुमान को नहीं जानते ? बंदर ने कहा-‘शांत हो जाओ यदि मुझे लाँघना अनुचित लगता है तो मेरी पूँछ को उठाकर इधर रख दो और चले जाओ। भीमसेन ने बंदर की पूँछ उठाने का बहुत प्रयत्न किया परन्तु वह उसे हिला भी न सका। भीमसेन की बलिष्ठों के प्रति बहुत श्रद्धा थी। भीमसेन के पूछने पर बंदर ने बताया कि मैं ही हनुमान हूँ। भीमसेन का अहंकार चूर हो गया था। भीमसेन ने वीर हनुमान को दंडवत् प्रणाम किया। हनुमान ने आशीर्वाद देते हुए कहा युद्ध के समय तुम्हारे भाई अर्जुन के रथ पर फहराने वाली ध्वजा पर विद्यमान रहँगा। विजय तुम्हारी ही होगी। इसके बाद हनुमान ने भीमसेन को झरने के पास खिले हुए सुंगधित फूल दिखाए। भीमसेन द्रौपदी के लिए खिले हुए सुंदर फूल लेकर आ गया।

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